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Tuesday, August 27, 2024

ड्रोन की उड़ान


ड्रोन की उड़ान 

आज रविवार था, सामान्य दिनों से काफ़ी अलग रहा। सुबह वे जल्दी उठकर टहलने गए, सब तरफ़ सन्नाटा था, हवा ठंडी थी और आकाश में नारंगी रंग का चाँद चमक रहा था।अनादि काल से  चंद्रमा मानव को आकर्षित करता आया है, इसे मन का देवता भी कहा गया है। वैज्ञानिक यह भी मानते हैं कि सोम के रूप में यह वनस्पति जगत को रस प्रदान करता है, जो उनके विकास के लिए अति आवश्यक है।घर आकर प्राणायाम और कुछ आसन किए, ये भी तो मानव को हज़ारों वर्ष पूर्व ऋषि मुनियों ने प्रदान किए थे, समय के साथ मानव ने उसमें कुछ परिवर्तन किए हैं पर मूल स्रोत तो प्राचीन ग्रंथ हैं। नूना ने नाश्ते में मेथी के पराँठे बनाये और जून ने सोनू के प्रमोशन की ख़ुशी में खीर बनायी।दोनों ही बच्चों को पसंद आयी। नन्हा ड्रोन उड़ाने के लिए जाने वाला था, सभी को साथ ले गया, सब ठीक चल रहा था कि उसका एक पंख टूटकर गिर गया और बहुत खोजने पर भी नहीं मिला। उसके अधरों पर मुस्कान तैर गई, लगभग हर बार ड्रोन उड़ाने पर कुछ न कुछ खो जाता है, और फिर काफ़ी समय उसे ढूँढने में लगता है।एक बार तो पूरा ड्रोन ही किसी की बगिया में और दूसरी बार किसी की छत पर जाकर गिर गया था। बगिया वाला महीनों बाद उन्हें मिला और छत के लिए सीढ़ी मँगवानी पड़ी थी। मकान मालिक शहर से बाहर गये हुए थे। वापस आये तो देखा, सोसाइटी के क्लब हाउस में बाटा के जूतों की सेल लगी थी। कुछ ख़रीदारी की, नन्हे ने अपने पैर की स्कैनिंग करवायी, फ़्लैट फ़ीट का पता चला, अब वह जूते में लगाने के लिए एक डिवाइस ख़रीद सकता है, जिससे पैर को आराम मिलेगा।उसने एड़ी के लिए एक सपोर्ट लिया। इन सब की पहले उन्हें जरा भी जानकारी नहीं थी।


आज से घर में सिविल का काम शुरू हुआ है, नन्हे ने बताया उनके यहाँ भी कुछ काम होना है। मज़दूर सुबह ग्यारह बजे आये और शाम को गये।अगले दो हफ़्ते ऐसे ही चलेगा। लीकेज की समस्या से बचने के लिए छत व उसकी दीवारों पर एक जलरोधी पेपर चिपका कर उस पर पेंट भी करवाना है। आज बायीं तरफ़ के पड़ोसी परिवार सहित उनकी छत से अपने घर की छत की ढुलाई देखने आये थे।इसके पहले उन्होंने न जाने  कितने ही घर बनते हुए देखे होंगे पर अपने घर की हर बात अनोखी लगती है।आज से कोरोना वैक्सीन लगनी शुरू हो गई हैं। दिल्ली में बड़े भाई ने लगवा ली है ।


रात्रि के नौ बजने को हैं, जून बिस्तर पर लेट चुके हैं। दिन भर घर में चल रहे काम की निगरानी रखते-रखते भी थोड़ी थकान स्वाभाविक है। आज शाम को टहलते समय फूलों की सुंदर तस्वीरें उतारीं। आजकल बोगेनविलिया अपने पूरे शबाब पर है। सुबह एक ऐप के ज़रिए सूर्योदय का वीडियो बनाया था। कल संभव हुआ तो सूर्यास्त का वीडियो बनाएगी।शाम को असमिया सखी का फ़ोन आया, वे लोग कल आ रहे हैं, बेटी की परीक्षा है, परसों चले जाएँगे। जून मेहमानों के लिए बेकरी शॉप से  दो केक और एक गार्लिक ब्रेड लाए हैं।


कल रात एक अनोखा स्वप्न देखा। गुरुजी आश्रम में भ्रमण कर रहे हैं। असम की एक पुरानी मराठी सखी भी वहाँ है जून और वह दूर से देखते हैं। सखी उसे बुलाती है और गुरुजी से परिचय कराती है। वह उनके चरणों का स्पर्श करने के लिए झुकती है, पहले अपने हाथों से उनके दोनों पैरों का, फिर मस्तक से बारी-बारी पहले बायें फिर दायें पैर का। फिर वह उस उठने को कहते हैं। उस क्षण में जैसे मन बहुत हल्का हो गया था और समर्पण के बाद की एक निश्चिंतता का अनुभव हुआ।वर्षों पहले गुरुजी से मिलकर केवल हाथ जोड़कर नमस्कार ही किया था, कभी पैरों को स्पर्श करने का भाव ही नहीं जगा, अहंकार तब मिटा ही नहीं था, अब लगता है वह घड़ी निकट आ गई है। 


आज शाम को आश्रम से प्रसारित हो रहा सत्संग देखा-सुना। दिन में एओएल से आया एक अनुवाद कार्य किया, आलेख का शीर्षक था ‘शिव तत्व’। इस आलेख में गुरु जी ने एक जगह कहा है , शिव अविनाशी शून्य तत्व है, वह ऐसा अंधकार है जो अपने भीतर सृजन की क्षमता छिपाए है, हर मन की गहराई में वही सो रहा है, साधना के द्वारा उसको  जगाना है।शिव ही बाहर सदगुरु बन कर आता है, जिसके आने से जीवन में नया मोड़ आता है, वह सदा नयी राह दिखाता है। शिव ही ज्योति पुंज सम आत्म तत्व है जो अंधकार को भेद कर प्रकटना चाहता है। अभी कुछ देर पहले ‘देवों के देव-महादेव' धारावहिक में देखा, शिव तांडव स्रोत की रचना रावण ने किस घटना के कारण की थी। सचमुच रावण कितना बड़ा विद्वान था और कवि भी, लेकिन उसके अहंकार ने उसे कहीं का नहीं छोड़ा।  वैक्सीन लगने के बाद वे भी आश्रम जाना शुरू करेंगे। 


आज शाम को वृद्ध अंकल ने, जो उन्हें अक्सर संध्या भ्रमण के समय मिल जाते हैं,  अपनी गाड़ी में लिफ्ट दी, वह उनके घर भी आना चाहते थे, पर ड्राइवर ने उनके बेटे का हवाला देकर मना कर दिया। अंकल की आँखों की विवशता देखकर अच्छा नहीं लग रहा था पर कुछ भी किया नहीं जा सकता था। ड्राइवर की बात वे कैसे टालते, जो रोज़ शाम को उन्हें गाड़ी में बिठाकर बगीचे के पास उतार देता है और जब छड़ी के सहारे वे टहलते हैं तो उनके साथ-साथ चलता है।मेहमान नहीं आ पाये, सखी के पतिदेव की पीठ में दर्द हो गया था। अब गार्लिक ब्रेड के सैंडविच उन्हें अकेले ही खाने होंगे।मौसम आजकल दिन में गर्म रहता है पर सुबह ठंडी रहती है अभी भी। अभी-अभी एक दुखद समाचार सुना, असम की एक परिचिता का, जो उसके पास एक बार योग सीखने भी आयी थी, हृदय की सर्जरी के बाद देहांत हो गया।जीवन क्षण भंगुर है, वह बार-बार याद दिलाता है, पर वे रोज़ की आपा-धापी में इसे भूले रहते हैं। 



Thursday, May 2, 2024

गट्टे की सब्ज़ी

गट्टे की सब्ज़ी 


आज सुबह टहलने गये तो तापमान १६ डिग्री था, जैकेट पहनने का दिन, कभी-कभी २० या इक्कीस रहता है तो वे नहीं पहनते। समाचारों में सुना, दिल्ली का तापमान १ डिग्री हो गया है, यहाँ उसकी कल्पना करना भी कठिन है। इतनी ठंड में उन लोगों का क्या होता हिगा, जिनके पास पक्के घर नहीं है या घर ही नहीं हैं। आश्रम में अगले महीने एक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए छोटी बहन ने फ़ेसबुक पर संदेश पोस्ट किया है। वहाँ प्रतिदिन सत्संग हो रहा है। गुरुजी ने विश्व में लाखों लोगों को योग के पथ से जोड़ा है, ऐसा कार्य ईश्वरीय कृपा  के बिना नहीं हो सकता। अभी-अभी जे कृष्णामूर्ति द्वारा ध्यान की सुंदर परिभाषा सुनते-सुनते ही मन ध्यानस्थ होने लगा। ‘देवों के देव’ में आज दधीचि मुनि के त्याग की गाथा सुनी। उसे लगता है, वे लोग समाज के लिए कुछ विशेष नहीं कर पा रहे हैं। परमात्मा ही उन्हें राह दिखाएगा, अर्थात उनका शुद्ध ‘मैं’, यानि वे ‘स्वयं’ ! हर किसी को अपना मार्ग स्वयं ही तो चुनना होता है। परमात्मा हर किसी के द्वारा स्वयं को ही अभिव्यक्त कर रहा है ! कोई कितना उसे प्रकट होने देगा, उतना ही उसका जीवन सुंदर होगा !! 


आज सुबह मौसम सुहावना था। अपने निर्धारित स्थान पर चौकीदार को छोड़ कर पूरे रास्ते भर कोई नहीं मिला। रात की रानी की सुगंध दूर से ही आने लगी थी, सम्पूर्ण क्यारी  छोटे-छोटे श्वेत फूलों से भर गई है।जो बल्ब के प्रकाश में दिखायी दे रही थी। सड़क पर अंधेरा था। नैनी आज जल्दी आ गई, कन्नड़ सिखाने में उसे आनंद आता है, वह धीरे-धीरे कुछ शब्द सीख रही है।नाश्ते के बाद वे सब्ज़ी ख़रीदने गये, बेबी कॉर्न, कुंदरू, अरबी, आँवले आदि कुछ नयी सब्ज़ियाँ मिलीं, जो पास की दुकान में नहीं मिलतीं। जून को अब ईवी चलाने में दिक्क्त नहीं होती। इतवार को ईवी कार रैली है, नन्हा उसमें जाने को कह रहा है। यह भी बताया, उसका पैथोलॉजिस्ट मित्र असम जाने वाला है, उसे मेडिकल कॉलेज में जॉब मिला गया है, वहाँ वह आगे पढ़ाई भी कर सकता है।ऐसे ही लोग अपने शोध कार्य और श्रम के द्वारा समाज के लिए नयी खोज कर पाते हैं, उनके परिश्रम का लाभ मानवता को मिलता है। असम की एक हिन्दी लेखिका पूनम पांडेय की किताब में कुछ कहानियाँ पढ़ी, जो असम के लोक जीवन पर आधारित हैं।कल किसानों से एक बार फिर सरकार की बात होने वाली है, शायद कुछ हल निकल आये। 


आज मॉर्निंग ग्लोरी का पहला फूल खिला रानी कलर का सुंदर फूल ! धीरे-धीरे सभी गमलों में फूल आयेंगे, और जब बेलें ऊपर चढ़ जायेंगी तब और भी सुंदर लगेंगे। भीतर कैसी गुनगुन सुनायी दे रही है। जब मन शांत हो तभी यह अखंड गूंज सुनायी देती है। छोटी ननद का फ़ोन आया, वह गट्टे की सब्ज़ी बना रही थी। ख़ुद उसे बनाये हुए बरसों हो गये हैं। बचपन में माँ के हाथों की बनी पकौड़े की सब्ज़ी भी खायी थी। उसके बाद कभी मौक़ा नहीं मिला, सोचती है, क्यों न एक दिन उसी तरह बनाकर बच्चों को खिलाए। शाम को गुरुजी को सुना, वह प्रश्नों के उत्तर दे रहे थे, कितने सटीक और प्रभावशाली ढंग से वह प्रश्नों के उत्तर देते हैं। आज वे उन्हीं वृद्ध व्यक्ति से मिले, कह रहे थे, अगले हफ़्ते घर भी आयेंगे।सौ बरस के हो गये हैं, कहने लगे, “आदमी थक जाता है एक उम्र में, जीवन और मृत्यु अपने हाथ में तो है नहीं।” पता नहीं कुछ लोग लंबा क्यों जीते हैं और कुछ अल्पायु में ही कालग्रसित हो जाते हैं। सुबह छोटे भाई से बात हुई, कह रहा था, मृत्यु के रहस्य को छोड़कर जगत में कुछ जानने को नहीं रह गया है। वह ध्यान में गहरा उतरने लगा है। बहुत मस्त रहता है। दीदी ने उसके लिखे एक भजन के बारे में कहा है, वह अवश्य प्रसिद्ध होगा। उसकी एक सखी ने अपनी मधुर आवाज़ में उसे गाया था, जो व्हाट्सेप पर पोस्ट कर दिया था; सब को अच्छा लगा, भाई ने कहा है उसे अपनी आवाज़ में रिकॉर्ड करे।    


नौ बजने वाले हैं, जून ठीक नौ बजे बत्ती बंद करने को कहेंगे। उसके पूर्व ही आज का लेखा-जोखा लिख लेना है। सुबह आकाश पर बदली थी। आर्ट ऑफ़ लिविंग के फिटनेस चैलेंज का अंतिम दिन था। जून ने मॉर्निंग ग्लोरी के फूलों की तस्वीरें उतारीं। बाद में वे ढेर सारे फल लाए। काव्यालय की संस्थापिका ने एक अंग्रेज़ी कविता का अनुवाद पोस्ट किया, उसे अखरा तो उसने भी एक अनुवाद किया और उन्हें भेजा। जिसे उन्होंने फ़ेसबुक पर पोस्ट कर दिया। एक चित्र बनाना आरम्भ किया है। ‘ध्यान’ पर एक पुस्तक का  अध्ययन भी शुरू किया है। जीवन एक लय में आगे बढ़ रहा है, जैसे सुबह और शाम, वसंत और पतझड़ आते-जाते हैं, वैसे ही उनके दिन और रात कुछ नये-नये अनुभव देकर बीत जाते हैं।  इसी मधुर भाव में जीने का नाम जीवन है शायद !  


Saturday, October 14, 2023

मॉर्निंग ग्लोरी के फूल


अभी-अभी वे रात्रि भ्रमण से लौटे हैं। हवा ठंडी थी और सुकून देने वाली, पत्तों की सरसराहट सुनायी दे रही थी। आज छोटे भाई-भाभी के विवाह की सालगिरह है, उनके लिए एक कविता लिखी, उन्हें पसंद आयी, फ़ेसबुक पर पोस्ट करने को कहा है, ताकि और लोग भी पढ़ सकें। रचना की पूर्णता तो पाठकों के पढ़ने पर ही होती है।नन्हा घर  लौटने वाला होगा, वह असम से पिटुनिया और डहलिये के पौधे ला रहा है। सोनू अभी दो महीने वहीं रहेगी, ऐसा उसने कहा है, पर उसे लगता है, वह जल्दी ही लौट आएगी। बंगलूरू के मौसम में रहने के बाद कोई और कहीं क्यों रहना चाहेगा। उससे फ़ोन पर बात की तो बहुत मासूम और छोटी लग रही थी, माँ के पास जाकर शायद सभी बच्चे बन जाते हैं। 


आज सुबह नन्हा माली को लेकर आया। साथ में दस बड़े गमले, चार बोरी मिट्टी, खाद वह पौध भी लाया। उन्होंने कल ही कोकोपीट भिगो दिया था। दोपहर तक सारा काम हो गया। अब कुछ ही महीनों में उनका बगीचा फूलों से भर जाएगा। बड़े भाई से बात हुई, पापा जी कुछ दिनों के लिए उनके घर आये हैं। वे बहुत खुश हैं, पोती भी उनका बहुत ध्यान रख रही है। रात्रि भोजन के बाद जब निकले तो वर्षा होने लगी थी। छाते लेकर गये, हवा थी पर ठंड जरा भी नहीं थी। यही बात बैंगलोर के मौसम को अच्छा बनाती है, दिसम्बर में भी स्वेटर की ज़रूरत नहीं है। यहाँ टेक्निकल सुविधाएँ भी बहुत हैं। उनकी ईवी की सर्विसिंग होनी है, टाटा मोटर्स वाला आदमी कल ख़ुद ही आकर ले जाएगा, फिर परसों छोड़ जाएगा। 


कल दोपहर बारह बजे बड़ी ननद व ननदोई आ गये थे । कितनी बातें की उन्हींने, पुराने दिनों की और वर्तमान की भी। समय कैसे बीत गया पता ही नहीं चला। शाम को उन्हें नापा में घुमाया, हरियाली और साफ़-सफ़ाई देखकर बहुत खुश थे, जगह-जगह तस्वीरें खिंचवाईं। वर्षों बाद कभी देखेंगे तो उन्हें यह दिन याद आ जाएगा। सुबह भी उन्हें भ्रमण के लिए ले गये।नाश्ते के बाद कार में दूर तक झील और जंगल दिखाने ले गये। दोपहर के भोजन के बाद वे अपनी बहन के यहाँ चले गये। समाचारों में सुना, सरकार और किसानों में आज जो समझौता वार्ता होनी थी, नहीं होगी। अभी तक किसान आंदोलन पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ है।शायद अब सरकार को कठोरता अपनानी होगी। अनिश्चित काल तक तो यह आंदोलन नहीं चल सकता।


मॉर्निंग ग्लोरी के जो बीज उसने बोए थे उनमें अंकुर निकल आये हैं। असमिया सखी से बात हुई, उसकी बिटिया वापस आ गई हैं, अब आगे की पढ़ाई यहीं से करेगी। दीदी ने कहा, नार्वे में उनकी पोती का स्कूल खुला था, पर बंद करना पड़ा। पहले एक बच्चे को फिर टीचर को कोरोना हो गया। अमेरिका में भी कोरोना थमने का नाम नहीं ले रहा है। भारत में केस घट गये हैं। आज छोटे भांजे का जन्मदिन है, कॉलेज का एक छात्र जो पिछले दस महीनों से घर पर रहकर पढ़ाई करने पर विवश है।कैसे होंगे उसके मन के भाव, वह अपनी आज़ादी को मिस तो करता होगा। देवों के देव में दिखाया गया कि जब लक्ष्मी जी को अहंकार हो जाता है, तब उसका दुष्परिणाम उन्हें भी भुगतना पड़ता हैं। आज नैनी काम पर नहीं आयी, दूसरी पहले से ही एक सप्ताह के लिए गाँव गई है। जून कुछ कामों के न हो पाने के कारण परेशान हो गये। जब उसने कहा, उसे तो भीतर वाले की फ़िक्र है, तो उन्होंने भी चिंता छोड़ दी तथा दिन भर हल्के मूड में ही बने रहे। संग का असर होने लगा है। 


Friday, September 8, 2023

झील के तट पर


रोज़ की तरह वे प्रात: भ्रमण के लिए गये और विशेष बात यह हुई कि वापस आकर कुछ देर साइकिल भी चलायी। नाश्ते के बाद सोसाइटी के पीछे वाली सड़क पर जून दूर तक कार चलाकर ले गये तो एक जगह गुलदाउदी के फूलों का खेत देखा। खिली हुई धूप में फूलों का रंग बहुत शोख़ लग रहा था, ढेर सारी तस्वीरें खींचीं। आज गुरुजी की ज़ूम मीटिंग थी, आयुष तंत्र की दवाओं पर शोध तथा उनके प्रचार के लिए। उसे ट्रांस्क्रिप्शन का काम करना था, फिर हिन्दी में अनुवाद भी। पापाजी को वह वार्तालाप अच्छा लगा, जो उसने उनके साथ की बातचीत पर लिखा था। कल बड़े भाई का जन्मदिन है, उसने उनके लिए भी एक कविता लिखी है। छोटे भाई की नातिन नयी मेहमान अभी अस्पताल से घर नहीं आयी है। पापाजी अभी कुछ दिन वहीं रहेंगे। छोटी भाभी ने अपनी माँ के साथ बिटिया और उसकी बिटिया की तस्वीर भेजी है, चार पीढ़ियों की एक साथ फ़ोटो बहुत सुंदर लग रही है। 


वर्ष के अंतिम माह का प्रथम दिन ! आज सुबह के सभी काम हो जाने के बाद वे निकट स्थित एक झील पर गये, कुछ जल पक्षी तैर रहे थे  और किनारे पर बैंगनी रंग के जंगली फूल शोभित हो रहे थे। तट पर लगे वृक्षों का सुंदर प्रतिबिंब झील के पानी में पड़ रहा था। दोपहर को छोटी बहन से बात हुई, उसे आज सुबह एक स्वप्न आया, गुरुजी ने अपने मस्तक का तिलक उसके मस्तक से स्पर्श कराया है, उसके माथे में सनसनी हो रही थी । वाक़ई यह बहुत सुंदर अनुभव है, इसे अनमोल मानना चाहिए। गुरु से किसी का संबंध अपनी आत्मा से संबंध जैसा होता है। 


रात्रि का समय है। कुछ देर पूर्व सोनू से बात हुई, कल वे लोग ब्रह्मपुत्र में क्रूज़ पर जा रहे हैं, ‘उमानंद’ द्वीप भी जाएँगे। उसे याद आया, पिछले वर्ष वे भी गये थे। अगले दिन वे डैफ़ोडिल नर्सरी भी जाने वाले हैं, जहां से उनके लटकाने वाले गमलों के लिये पिटुनिया के पौधे लेंगे। आज नापा स्थित एक किसान से जून ताजी पालक ख़रीद कर लाये। समाचारों में सुना, केरल और तमिलनाडु में एक और तूफ़ान आने की चेतावनी दे दी गई है। 


केरल में आये चक्रवात बुरेवी का असर बैंगलुरु में भी पड़ा है। आज सुबह से ही बादल बने हुए हैं। कुछ देर वर्षा भी हुई, इस मौसम में पहली बार स्वेटर निकाला। शाम को गुरुजी का लाइव सत्संग था, असम में सोचा करती थी, आश्रम जाकर सत्संग में भाग लेगी, पर एक वर्ष होने को है, अभी तक आश्रम सबके लिए खुला नहीं है। उनके बताये ध्यान वे रोज़ ही करते हैं। आज विश्व विकलांग दिवस है, मृणाल ज्योति में अच्छी तरह मनाया गया, उसने तस्वीरें देखीं, एक अध्यापक ने फ़ेसबुक पर वीडियो भी पोस्ट किया था। उस वे कई दिवस याद आ रहे थे, जब वह महिला क्लब की अन्य महिलाओं के साथ बच्चों के लिए उपहार लेकर जाती थी। कल रात्रि अजीब सा स्वप्न देखा। मन को यह बोध हुआ कि नाम-रूप दोनों भ्रम हैं। दोनों क्षणिक हैं, उनके प्रति आसक्ति दुख को उत्पन्न करने वाली है। इस जगत में कुछ भी स्थायी और स्वतंत्र नहीं है, सभी कुछ आपस में एक-दूसरे पर आश्रित है। 


आज नेवी डे है। मौसम आज भी ठंडा रहा दिन भर, हल्की वर्षा भी हुई।अगले हफ़्ते एक दिन के लिए  बड़ी ननद  और ननदोई आ  रहे हैं। उसी दिन शाम को नौ बजे आश्रम के स्वामी प्रणवानंद जी का ऑन लाइन कार्यक्रम है। शाम को एक पुराने परिचित की बिटिया का फ़ोन आया, एम डी की उसकी परीक्षा अब मार्च या अप्रैल में होग, कोविड के कारण ही यह देरी है। जबकि उसका छोटा भाई एक वर्ष की पढ़ाई कर चुका है। आज बौद्ध धर्म पर एक दो व्याख्यान सुने। शून्यता की परिभाषा समझ में आयी। वेदान्त का ब्रह्म ही बौद्धों का शून्य है। सुबह के भ्रमण में मन को शून्य पर टिकाने का अभ्यास सहज ही होता है। हल्का अंधकार होता है हर तरफ़ सन्नाटा, कुछ भी नहीं होता जो ध्यान खींचे। योग साधना के समय आजकल शंख प्रक्षालन के आसनों के कारण देह हल्की रहती है।


Wednesday, March 23, 2022

प्लूमेरिया के फूल



आज रामायण का अंतिम अंक प्रसारित होगा, कल से उत्तर रामायण शुरू होगी। आज सुबह मोबाइल पर एक सखी के भेजे सुबह के संदेश की घंटी सुनकर नींद खुली, जो परमात्मा की याद दिला गयी। दोपहर बाद नन्हे से बात हुई, उनकी कम्पनी ने अगले छह महीनों के लिए कर्मचारियों का वेतन कम करने का निश्चय किया है। सीनियर्स का वेतन पचास प्रतिशत, उसके नीचे क्रम से तीस, बीस प्रतिशत तक कम करते जाएँगे। जिनका वेतन पहले ही  कम है उनका  नहीं कटेगा। कोरोना का असर अगले छह महीनों तक तो रहने ही वाला है, इसके भी आगे जाएगा, शायद आने वाले कई वर्षों तक। वैसे भारत में लॉक डाउन का अच्छा प्रभाव देखने को मिल रहा है। मोदी जी के प्रयास की प्रशंसा हो रही है। उनके लिए कुछ पंक्तियाँ लिखीं। कोरोना के मामले पर अमेरिका और चीन का आमना-सामना हो रहा है। अमेरिका में हालात बिगड़ते जा रहे हैं। कुछ लोग कह रहे हैं जैविक हथियार की तरह इसका इस्तेमाल किया है चीन ने उसके ख़िलाफ़। एक न एक दिन चीन को इसका जवाब तो देना ही पड़ेगा। 


रात्रि  के नौ बजने वाले हैं। भ्रमण के लिए निकले तो रात की रानी के फूलों की गंध लिए ठंडी हवा बह रही थी। आजकल ढेर सारे फूल खिल रहे हैं  वसंत का मौसम है न, गुड़हल के पाँच रंग के फूल, लिली के दो ग्लोब के आकार के फूल और पारिजात तो रोज़ सुबह पूजा के लिए  मिल जाते हैं। शाम को आकाश में नारंगी सूर्यास्त देखा, प्लूमेरिया के फूलों से वृक्ष भरे हुए थे। सुबह पीछे वाले गेट से बाहर निकल कर खेतों की तरफ़ गये, तोरई के खेत देखे। वहाँ एक नई कालोनी भी बन रही है, धीरे-धीरे खेतों की ज़मीनें मकान बनाने के लिए बिकती जा रही हैं। वापस लौटते समय प्याज़ का एक खेत देखा। अचानक एक चील पक्षी ने सिर पर तेज़ी से प्रहार किया, पर न तो चोंच से न ही पंजे से, केवल पंखों से दबाव डाला और उड़ गया, फिर जाकर सामने  पेड़ पर बैठ गया। इतना सब होने में मात्र कुछ पल ही लगे होंगे। दूर से उसकी तस्वीर भी ली। संभवतः खेत के निकट ही उसका घोंसला रहा होगा, वह अपने बच्चों के लिए भयभीत हुआ होगा। सुबह उत्तर रामायण में कौशल्या और राम का अद्भुत संवाद सुना। 


आज शाम को नापा से सटे हुए खेत से तोरई, चीकू और नारियल ख़रीद कर लाए। माली ने उसी समय तोड़ कर दिए। आम के बगीचे से कच्चे आम भी कल मिले थे, उनका अचार बनाया है। आज पृथ्वी दिवस है, धरती माता ने अनगिनत उपहार मानव को दिए हैं। छोटी ननद से बात हुई, उसने बताया, बैंक खुलते हैं पर ग्राहक नहीं आते, लोग घरों से निकल कर संक्रमण का शिकार होना नहीं चाहते। जून ने पहली बार घर पर ही केश काटे। 

आज बहुत दिनों के बाद वर्षा हो रही है,  शाम से ही  बादल छाने लगे थे। उत्तर रामायण में  राम सीता का त्याग करके बहुत दुखी हैं, जनक उनसे मिलने आए हैं। लक्ष्मण भी भाई के दुःख से दुखी हैं। महाभारत में युद्ध का आरम्भ होने ही वाला है। आज दोपहर को गुरूजी द्वारा कराया ध्यान किया, जब से तालाबंदी हुई है, वह दोपहर व शाम दोनों वक्त ध्यान कराते हैं। आज से नैनी काम पर आने लगी है, घर काफ़ी साफ़ हो गया है और उनका काम कुछ आसान हुआ है। काफ़ी समय मिला तो कई मित्रों व सम्बन्धियों से देर तक फ़ोन पर बात की।  पिताजी ने उसकी कविताओं को फ़ेसबुक पर पढ़ा।  


Wednesday, March 10, 2021

मूंगफली मेला

 मूंगफली  मेला 

रात्रि के पौने दस बजे हैं। आज सुबह भी वे प्रतिदिन की तरह अंधेरे में ही टहलने गए। सुबह सोसाइटी की तरफ से बगीचे व गमलों में खाद डाली गई। ग्लैडियोली के बल्ब फूटने लगे हैं। जून को पिटुनिया लगाने का मन है। जिनके लिए  यहीं स्थित सुपर मार्केट में रेलिंग में लगाये जाने वाले दस गमलों का ऑर्डर दिया है, बालकनी में लगाएंगे।  नैनी सुबह सफाई करके नहीं गई, दोपहर को बेटी को साथ लाएगी, ऐसा कहकर। दोपहर को दोनों ने मिलकर सभी खिड़कियों के शीशे साफ किए।अब भाषा के कारण कोई समस्या नहीं होती, वह इशारों से सब समझ व समझा लेती है। 


शाम को वे एओल आश्रम जाने से पहले मैसूर रोड पर स्थित बालाजी नर्सरी गए, पर वहाँ फूलों की पौध नहीं मिली। आश्रम की नर्सरी से  फूल के दो पौधे लिए। वहाँ भीड़ बहुत थी। गुरूजी लगभग साढ़े छह बजे आए, उसके पहले भजन गाए जा रहे थे। आज गुरूजी ने डाक्टर्स तथा वैज्ञानिकों के प्रश्नों के सदा की तरह आनंदित करने वाले जवाब दिए। कुछ पुलिस अधिकारी भी उनसे मिलने आए थे।  जापान से आए एक व्यक्ति ने जल को शुद्ध करने का एक सस्ता व सरल तरीका बताया। उन्हें कुछ सर्दी भी लगी हुई थी, एक-दो बार छींक आयी। वहाँ से आकर मन कितना हल्का लग रहा है।आश्रम के कैफे में ही दोसा खाया।


रात्रि के नौ बजे हैं। नवंबर का महीना है,  कमरे में गर्मी का अहसास हो रहा है। यहाँ सर्दी का मौसम मात्र दिसंबर-जनवरी में ही होता है। दोपहर को टेलर से कपड़े ले आए, ठीक सिले हैं. लक्ष्मी नर्सरी से गुलदाउदी के पौधे लिए तथा एक स्नेक प्लांट, जो कमरे में रखा जा सकता है। आज लेखन का कोई कार्य नहीं हुआ, एक कविता पर एक प्रतिक्रिया लिखी। बड़े भाई ने पिताजी के लिए एक वीडियो बनाया है जिसमें उनकी अकेले तथा सबके साथ तस्वीरें हैं। आज मार्केट में पहली बार ‘रिलाइन्स ट्रेंड्स’ गए वे, घर ले जाने के लिए कुछ उपहार खरीदे, उनके साथ एक चादर मुफ़्त मिली, तथा कुछ कूपन भी, उन्हें आश्चर्य हुआ जितने का समान था उतना ही गिफ्ट, यह कैसा व्यापार है ! 


आज राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गये ऐतिहासिक फैसले का दिन था। सरकार ने बहुत सावधानी बरती और सबको बार-बार कहा कि फैसला किसी के भी पक्ष में हो, हिंसा नहीं होनी चाहिए; और ऐसा ही हुआ है। कई मुस्लिम संस्थाओं ने भी इस फैसले का स्वागत किया है। पिताजी से बात हुई, उन्हें भी इस फैसले से खुशी हुई है। छोटा भाई आज छोटी ननद के घर गया है, वह बैंक के काम से पूरे भारत में घूमता है। शाम को एक सखी का फोन आया, अब वह उनके असम वाले कंपनी के घर में रहने वाली है। अच्छा है कि वह पुरानी नैनी को सर्वेन्ट रूम में रहने देगी। आज एओल के एक ऐप से योग साधना में सहायता ली। शाम को गुरूजी का एक सुंदर प्रवचन सुना, “फीलिंग द प्रजेन्स”, कितने सरल शब्दों में कितनी गहरी बात उन्होंने बता दी। 


आज वे मूंगफली मेला देखने गए, जिसे यहाँ पर ‘कंदले काई फरशे’ कहते हैं। बसवन गुड़ी में कार्तिक माह के अंतिम सोमवार को आयोजित होने वाला यह मेला चार सौ वर्ष पुराना है। लगभग दो किमी सड़क पर मूंगफली बेचने वाले किसान व व्यापारी अपने दुकानें लगाते हैं। मेले में अन्य दुकानें व झूले आदि भी होते  हैं। सात दिनों तक चलने वाले इस मेले में लगभग बारह से पंद्रह टन मूंगफली बेची जाएगी। ज्यादा भीड़ होने के कारण वे बीच से ही लौट आए, नन्हे का एक मित्र भी साथ था, पहले वे उसी के घर गए थे, जो उसी इलाके में रहता है। उसने बताया कि बचपन के बाद इतने वर्षों में वह आज पहली बार ही मेले देखने आया है। कभी बाद में देखेंगे यह सोचकर अपने ही शहर के दर्शनीय स्थल देखने लोग नहीं जा पाते हैं।  


उसने कालेज के दिनों की डायरी में पढ़ा, विनोबा के विचार उसने लिखे थे। ‘अध्यात्म-ज्ञान से बगावत की हिम्मत आएगी’ 


“हम देह से अलग अविनाशी, आत्मरूप हैं, परमेश्वर अंदर विराजमान है, इसी जन्म में उसका दर्शन सुलभ है, सारे जीव हमारे रूप हैं” इस अध्यात्म विचार में प्रवीण होना चाहिए। 

शिक्षण में सत्यनिष्ठा और जीवन में तपस्या की सख्त आवश्यकता है जिससे मौजूद समाज के खिलाफ बगावत करने की हिम्मत आए। जिसके अंदर अध्यात्म विद्या है उसे सारी दुनिया भी दबाना चाहे तो दबा नहीं सकती। मेरा विश्वास है कि अध्यात्म विद्या से हम जबरदस्त क्रांति कर सकते हैं। पुस्तकों से मदद अवश्य मिलती है, परंतु अगर मूल विचार मिलता है तब ही आगे की बात हो सकती है । आत्मजज्ञान ही सही ज्ञान है जिसकी सबको जरूरत है। मुख्य रूप से तीन प्रकार का ज्ञान हरेक को होना चाहिए - आरोग्य ज्ञान, नीति ज्ञान, आत्मज्ञान ! 


Wednesday, March 3, 2021

एस्टोनिया के फूल

 इस समय वे पहली मंजिल पर बैठक में बैठे हैं। राजस्थान पत्रिका में पढ़ा, दिल्ली में प्रदूषण के कारण स्कूल पाँच तारीख तक बंद कर दिए गए हैं। एक सप्ताह बाद उन्हें भी यात्रा पर निकलना है, तीसरे सप्ताह में दिल्ली पहुंचेंगे। तब तक संभवत: हालात सुधर जाएं। शाम को जून साइकिल से गैस सिलिन्डर की बुकिंग के लिए गए और उसने यहाँ आने का बाद पहली बार ध्यान किया, मन कितना शांत लग रहा है। सुबह सूर्योदय की तस्वीरें उतारीं, मोबाइल से प्राकृतिक दृश्यों की तस्वीरें उतारना कितना सहज है और अब तो यह  उसके जीवन का एक भाग ही बन गया है। आजकल सुबह-शाम दोनों समय टहलते समय फूलों की गंध आती है, एस्टोनिया के फूलों की गंध ! कल शाम नन्हा व सोनू आ गए थे, सुबह उनके साथ पहले डेन्टिस्ट के पास गए फिर कपड़े सिलने देने के लिए दर्जी के पास। मार्च तक उन्हें तीन शादियों में सम्मिलित होना है। 


तुलसी का पौधा लगाने के लिए पत्थर का एक विशेष गमला कल खरीदा था, कल उसमें पौधा लगाना है।  आज सुबह बुरादा, खाद मिलकर मिट्टी तैयार की। तुलसी व अजवाइन के पौधे लगाए, शेष गमलों में खाद डाली। ग्लेडियोली के बल्ब से पौधे निकलने लगे हैं। जून को बालकनी में पिटूनिया लगाने का मन है।  वे निकट स्थित एक नर्सरी में गए, पर वहाँ पौधे नहीं मिले, आश्रम की नर्सरी से दो फूल के पौधे लिए। आज मौसम अपेक्षाकृत गरम है, यहाँ ठंड का मौसम आता ही नहीं शायद। पिताजी को फोन किया तो उन्हें यहाँ आने का निमंत्रण दिया।आज टाटा स्काई लगाने के लिए लोग आए थे, शायद कल से वे कुछ देर टीवी भी देख सकें।


मन दर्पण है, परमात्मा बिम्ब है, जीव प्रतिबिंब है, यदि दर्पण साफ नहीं हो तो उसमें प्रतिबिंब स्पष्ट नहीं पड़ेगा। संसार भी तब तक निर्दोष नहीं दिखेगा जब तक मन निर्मल नहीं होगा। हम अपने मन के मैल को जगत पर आरोपित कर देते हैं और व्यर्थ ही जगत को दोषी मानते हैं। जब कभी हमने किसी को दोषी माना, उस पर अपना ही मत थोपा है। हर कोई जैसा है वैसा है। आत्मा सभी के भीतर बीज रूप में विद्यमान है। उसमें फूल खिलाना जिसने सीख लिया, सुगंध उसे ही मिलती है, उसे वृक्ष बनाना जिसने सीख लिया, छाया उसे ही मिलती है। उसे जाने बिना जो रह गया, उसके लिए आत्मा का होना या न होना क्या अर्थ रखता होगा ? 


दिन खरामा-खरामा बीत रहे हैं, किसी नदी की शांत धारा की तरह। मौसम आज भी गरम है। सुबह ठंडी थी, उन्हें जैकेट पहनकर निकलना पड़ा। फूलों से लदे वृक्षों की तस्वीरें उतारीं। कुछ देर प्राणायाम किया पर आसन नहीं किए, जून के अनुसार ‘समय नहीं था’ उन्हें हर काम को जल्दी करने की आदत है। कल शाम उन्होंने पिताजी की पुरानी तस्वीरें खोजीं, जिन्हें स्कैन करके एक वीडियो बनाना है। उनके जन्मदिन पर यह उपहार होगा उस कविता के साथ जो उनके लिए उसने लिखी है।  बर्तन डिशवाशर में लगाकर वे ऊपर शयन कक्ष में आ गए हैं। आज इतने दिनों बाद टीवी पर तेनालीरामा देखा, कहानी जैसे आगे बढ़ी ही नहीं है। दोपहर को वे फोर्टिस अस्पताल गए, उसके हाथ के नाखूनों में सफेदी आ रही थी और जून को भी त्वचा विशेषज्ञ को दिखाना था। डाक्टर ने खाने व लगाने  की दवा दी है। दोपहर को सीढ़ी चढ़ने में दाहिने घुटने में कुछ दिक्कत महसूस हुई, बर्फ का सेक करने का सुझाव दिया है नेट पर, जून ने तिल के तेल से मालिश करने को कहा। दिन में कई बार सीढ़ियाँ चढ़नी व उतरनी पड़ती हैं, नया-नया अभ्यास है अभी। अभी छोटे भाई से बात हुई, वह नन्हे की ससुराल गया था, वहाँ बहुत खातिरदारी हुई उसकी। नन्हे ने  शाम को बिग बास्केट से कुछ नए प्रकार के फल भेजे, उनमें एक ड्रैगन फ्रूट भी है। 


आज उन्हें असम छोड़े हुए तीन सप्ताह हो गए हैं। यहाँ घर  की दिनचर्या लगभग निश्चित हो गई है।  सुबह वे साढ़े चार बजे उठते हैं, टहलने जाते हैं जब हल्का अंधेरा होता है। वापस आकर योग साधना। हॉर्लिक्स पीने के बाद बगीचे में कुछ देर काम और हरसिंगार के फूल चुनना। उसके बाद स्नान और नाश्ता बनाना। जिसमें सब्जी काटने से आरंभ करना होता है। उसके बाद अखबार पढ़ना, व्हाट्सएप व फ़ेसबुक पर पोस्ट डालना।  जून ने दीवाली की लाइट उतारने के लिए इलेक्ट्रिशियन को बुलाया है। कल की सेवा के बाद दायाँ घुटना ठीक है, अब बाएं में कुछ दर्द हो रहा है, उसकी भी सेवा-सुश्रुषा हो जाएगी। एक सब्जी वाली घर बैठे पालक व पुदीना दे गई है, निकट ही एक गाँव है, वहीं से आयी होगी। शाम को वे टहलने गए तो काफी रौनक दिखी, एक पार्क में महिलाओं की थ्रो बॉल प्रैक्टिस चल रही थी। एक जगह बच्चे स्केटिंग कर रहे थे।  


वर्षों पुरानी उस पुरानी डायरी में पढ़ा - 


सत्य यही है कि संसार में दो नियम हैं जन्म और मृत्यु ! 

नाश का ज्ञान रखने वाला क्या कभी पाप करेगा ? वह तो जितने दिन रहेगा, स्नेह और समता से ही इस संसार में रहेगा। आदमी जब तृष्णा, अहंकार और ईर्ष्या से शीघ्र ही कुछ प्राप्त कर लेने के लिए काम करता है, तब वह अपने भीतर ही असहिष्णु हो जाता है। अहंकार उसकी नींवों को ठोस भूमि पर खड़ा नहीं रहने देता। 


सबकी आत्मा की शक्ति समान है कुछ की शक्ति प्रकट हो गई, कुछ की प्रकट होनी बाकी है, बस इतना ही अंतर है ! 


बापू की एक सूक्ति भी उसने लिखी थी - क्षण भर भी काम के बिना रहना ईश्वर की चोरी समझो। काम के सिवा भीतरी और बाहरी आनंद का और कोई रास्ता मैं नहीं जानता। 


Friday, October 2, 2020

वृक्षारोपण

 

रात्रि के नौ बजने को हैं. जून होते तो कहते, अब दिन को विदा करो, लेट्स कॉल इट आ डे. वह पोर्ट ब्लेयर में हैं, रॉस आईलैंड देख लिया, सेलुलर जेल भी. कल कोलकाता आ जायेंगे और परसों घर. शाम को वह पुस्तकालय गयी और दो किताबें लायी, एक मध्यकालीन इतिहास पर और दूसरी जीन(डीएनए) पर. दोनों का कुछ अंश पढ़ा. वापसी में गुलाबी फूलों वाले पेड़ की तस्वीर खींची. जिसके यहाँ चम्पा का पेड़ है उस सखी के यहाँ भी गयी, उसने बताया, यहाँ जो सफाई करने आता है, उसे भूलने की बीमारी है, उसे अपना नाम भी याद नहीं है. चीजें रखकर भूल जाता है, एक ही काम को दोबारा करने लगता है, पर वे लोग उसकी शिकायत करने को तैयार नहीं हैं, करुणावश ही सम्भवतः। सखी ने बताया उसके ससुर जी को भी यही बीमारी थी और पिता को भी है. जीवन में कब क्या होगा, कौन जानता है ? सुबह मृणाल ज्योति के लिए कुछ सामान ख़रीदा और एक शिक्षिका को देने गयी, कई महीनों से जिसका गला खराब चल रहा था, आज कुछ ठीक था. उसकी बिटिया का जन्मदिन आने वाला है, उसकी तैयारी में व्यस्त थी, बेहद ऊर्जावान,  रचनात्मक कार्यों में लगी रहती है. घर लौटी तो नैनी अपने बेटे को डांट रही थी, पता चला उसके बेटे ने गेट पर लगाने वाला ताला गैरेज पाइप में डाल दिया है जिसे निकालने का कोई उपाय नहीं है.


जब वे अपने मन के अंधकार में भटकते हैं तो स्वयं की अनुभूति रूपी प्रकाश की किरण आते ही सारा अंधकार खो जाता है. आज सुबह टहलने गयी तो गुलमोहर, अमलतास और अज़ार के फूलों से लड़े वृक्ष पुनः देखे. हजारों फूल जाने कहाँ से आते हैं अपने मौसम में अपने आप ही, कोई अज्ञात ऊर्जा जैसे उनके रूप में प्रकट हो रही हो. दोपहर को बच्चे आये थे आज, पर्यावरण दिवस पर उन्होंने सुंदर चित्र भी बनाये. अंडमान की सुंदरता को निहार कर जून कोलकाता आ गए हैं. माली ने बगीचे में कई जगह फूलों की पौध लगाई, लॉन में मशीन से घास भी एक समान की. क्लब की वर्तमान प्रेसिडेंट से बात की उसने बताया भूतपूर्व प्रेसिडेंट अभी तक उसे फोन करके क्लब की बातों के बारे में पूछती रहती हैं. उसे लगा जीवन कल्पनाओं के जाल में व्यर्थ ही उलझ रहता है. जब तक उनका मन दर्पण तुल्य हो, वे कोई प्रतिक्रिया न करें , ऐसा मन यदि नहीं है तो वे व्यर्थ ही जगत में फंस जाते हैं. 


जून वापस आ गए हैं, विभाग में उनकी पदोन्नति हो गयी है. सभी की बधाइयाँ और फोन आ रहे हैं. शाम को वह क्लब की दो सदस्याओं के साथ वृक्ष लगाने के लिए उचित स्थान देखने गयी. एक जगह एक ऐसा पार्क मिला जिसे बनाना तो आरम्भ किया गया था पर बीच में ही छोड़ दिया गया. वहीं रहने वाले एक व्यक्ति ने बताया, ठेकेदार बीच में ही भाग गया था.  विश्व पर्यावरण दिवस पर क्लब की तरफ से वृक्षारोपण कार्यक्रम के अंतर्गत कल सुबह नौ बजे जाकर गड्ढे खुदवाने हैं और शाम को पेड़ लगाने हैं. दोपहर को मृणाल ज्योति के काम से एक बैंक जाना था, गर्मी बहुत थी और लोगों की भीड़ लगी थी. सुबह एक अनोखा अनुभव हुआ, एक कविता लिखी उसी भाव दशा में ! 


पर्यावरण दिवस पर सुबह से शाम तक वह व्यस्त रही. तीन माली लगाकर पार्क का गेट व सामने का थोड़ा सा भाग उन्होंने साफ करवाया. दस-पन्द्रह गड्ढे खुदवाये. जब तक यह काम चलता रहा क्लब की एक सदस्या के साथ विभिन्न विषयों पर सार्थक वार्तालाप हुआ वह समाज के लिए कुछ करना चाहती है. शाम को उसमें  फूलों और शरीफे के वृक्षों की पौध लगाई. पार्क के अंदर बोगेन्विलिया के  कुछ पौधे भी लगाए. उसके पूर्व वे बच्चों के स्कूल में भी वृक्षारोपण कर के आये थे, पीले व नारंगी रंग के गुड़हल के पौधे वहां लगाए. कुछ वर्षों में जब ये पौधे वृक्ष बन जायेंगे तो वातावरण को प्रफ्फुलित करेंगे. शाम को घर लौटी तो योग कक्षा चल रही थी, अब साधिकाएं इतनी सक्षम हो गयी हैं कि अपने आप ही सभी अभ्यास कर लेती हैं. जून ने रात के भोजन की तैयारी भी कर दी थी. 


वर्षों पूर्व डायरी में उस दिन के पन्ने पर ऊपर लिखी सूक्ति कन्फ्यूशियस की थी - ‘चिंतन के बिना अध्ययन मेहनत खोना है’. उसे लगा इसका अर्थ हुआ अब तक का उसका जो भी अध्ययन है वह व्यर्थ है, अर्थात उसका कालेज का अध्ययन यानि गणित, क्योंकि वह केवल परीक्षा देने के लिए पढ़ती है। उसके बाद कोई उपयोग उसके सम्मुख नहीं रह जाता कि उसका चिंतन भी करे. कैसा विरोधाभास है, यही विरोधाभास तो हर पल उसके जीवन में दिखाई पड़ता है और अब तो उसे इससे स्नेह भी हो गया है. यह भी एक तरह का विरोधाभास ही हुआ. एक पत्र पाकर उसे लगा जैसे कोई भार उतर गया हो. उसका खोया चैन उसे वापस मिल गया. जैसे अस्तित्त्व उसे एक नए रूप में मिला हो, पहले से ज्यादा प्रसन्न, ज्यादा उत्साह से भरा और उसके प्रति अनूठी भावनाएं लिए ! वह जो निष्क्रिय हो गयी थी फिर भर गयी हो प्राण से, स्पंदन से, जीवन से ! उसकी चिर ऋणी वह उसे ही चाहती है. उस अनन्त आभामय सुबह के स्वर्णिम काल का अभिनन्दन करते हुए  उसने कृतज्ञता पूर्वक प्रणाम किया.   


Tuesday, September 15, 2020

पीली चमेली

 

आज सुबह वे निकट की सोसायटी में टहलने गए, शायद अंतिम बार, अगली बार यहाँ आने पर उनका ठिकाना नए घर में होगा. नाश्ते के बाद ही यहाँ आ गए. बैठक में बैठे-बैठे ही बाहर की हलचल पता चलती रही है. इक्का-दुक्का कारें ही जाती हैं, क्योंकि उनका घर मुख्य सड़क पर है. दायीं ओर एक गोदाम है जो कुछ वर्षों बाद तोड़ दिया जायेगा. क्लब हॉउस में काम चल रहा है, शायद कुछ वर्ष लगें. आजकल जीवन की नदी एक सपाट, समतल भूमि पर बहती प्रतीत हो रही है. शहर से दूर इस शांत इलाके में रहना, जो आश्रम के नजदीक है, भला लग रहा है. अब  शाम के पौने चार बजे हैं, रात्रि वे यहीं बिताने वाले हैं. मौसम सुहावना हो गया है. आकाश में बादल गरज रहे हैं, यानि वर्षा किसी भी क्षण हो सकती है. आज भी दिन भर कोई न कोई आता ही रहा. दोपहर के भोजन के पश्चात आधा घन्टा विश्राम करने गए पर लेटते ही घण्टी बजी. नन्हे ने तेल की बॉटल रखने के लिए सफेद पत्थर की एक ट्रे मंगवाई थी.  किचन के श्वेत स्लैब पर रखी हुई अच्छी लग रही है. जून फोन पर उस अधिकारी से बात कर रहे हैं जो दफ्तर में उनका काम देख रहे हैं. कविता के ग्रुप में इस बार का शब्द है ‘गति’, पिछले कई दिनों से कोई कविता नहीं लिखी है. 


आज गृह प्रवेश की पूजा है और दोपहर को प्रीति भोज. पहली बार नए घर में सोने पर नींद तो आयी, पर स्वप्न भी आते रहे. कल दिन भर अकारण ही मन दुविधा में था, शायद कोई कर्म उदित हुआ है. सासु माँ का स्मरण हो आया, जाने-अनजाने उन्हें उनके कारण कभी जो भी दुःख हुआ होगा, उसका भी स्मरण हो आया. सुबह साढ़े तीन बजे एक स्वप्न देखकर एक बार नींद खुली,  किसी उत्सव का दृश्य देखा, कुक परांठे बना रहा है, बुआजी कहती हैं, उन्हें सौंफ का पराठाँ खाना है. दीदी व माँ भी हैं जो सभी मेहमानों की देखभाल कर रही हैं. मन दिन में भी स्वप्न रचता है और रात्रि में भी. करवट बदल कर पुनः सो गयी. एक घन्टे बाद उठकर देखा, आकाश गुलाबी था, कमरे से बाहर निकलते ही सूर्योदय की तस्वीर उतारी. बाद में निकट गांव में स्थित मन्दिर तक टहलने गए. फूलों की मालाएं खरीदीं. घर के द्वार पर सुगन्धित फूल लगाए, सारा घर बेल की सुवास से भर गया है. मौसम अभी तक तो ठीक है, दिन में तेज गर्मी होने वाली है. नन्हा और सोनू अभी तक नहीं आये हैं. उन्होंने इस घर की साज-सज्जा में बहुत श्रम किया है. पूरे घर में आटोमेशन से बिजली व पंखे चलते हैं. संगीत भी ओके गूगल कहकर बजा सकते हैं, जगह-जगह स्पीकर लगा दिए हैं. कहीं भी काम करते रहें तो संगीत या कुछ भी सुन सकते हैं. कुछ देर पूर्व क्लब की भूतपूर्व प्रेजिडेंट का स्मरण हुआ, तत्क्षण उनका फोन भी आ गया. उन्हें भी घर की तस्वीरें भेजी हैं. अपने घर मन रहने का अनुभव कैसा होता है, अब कुछ-कुछ अहसास हो रहा है. आज से एक्ज़िट पोल शुरू हो गए हैं, बीजेपी जीत रही है. 


उसने अतीत के झरोखे से झाँका, उस दिन डायरी के पन्ने की सूक्ति थी - झूठ इंसान को जलील कर देता है - महात्मा गाँधी . पढ़कर लगा, उसके उस झूठ के क्या परिणाम होंगे, कौन से झूठ के, यह नहीं लिखा, बचपन से उस दिन तक एक ही झूठ तो नहीं बोला होगा. छोटे थे वे लोग तो गाते थे, ‘झूठ बोलना पाप् है, नदी किनारे सांप है’.  फूल लायी थी  उस दिन चमेली के पीले सुवासित फूल, जिनकी माला बनाकर वह गले में पहन लेती थी, भीनी-भीनी सी खुशबू देर तक साथ रहती थी. बाहर से रेडियो की आवाज आ रही थी, दरवाजा ठीक से बन्द किया तो कम हो गयी. कल ‘विचार बिंदु’ में बापू के विचार सुने. कितने अच्छे थे बापू और वह ? उन्होंने कहा था, हँसी मन की गिरह खोल देती है, अपने ही नहीं दूसरों के मन की भी. हँसी उसकी सहेली है, यह उसने कहा था. पर उस वक्त उसे क्या हो जाता है, काश उस वक्त वह आइना देख पाती, पत्थर भी उससे सजीव लगता होगा. और फिर उसे याद आयी वह बात जो बरसों से भूली हुई थी, यानि परसों उसका इम्तहान है ! 


सोच एक दायरे में घूमती है बस और वह चक्कर लगाने लगती है गोल गोल ... न उधर न इधर कहीं कोई उत्थान नहीं, कभी कोई बात चुभ जाये या कोई बात न भी हो आँसूं पता नहीं कहाँ से आते हैं, आते चले जाते हैं ! फिर उसने सोचा,  पिताजी का बिछौना लगा दे. 


Monday, July 6, 2020

ठंड से सिकुड़े फूल


शाम के सवा चार बजे हैं, बगीचे में झूले पर बैठकर मन्द हवा के झोंको और चिड़ियों की चहकार के मध्य लिखने का अवसर कभी-कभी ही मिलता है. जून अभी तक आये नहीं हैं, उनका रात्रि भोजन भी बाहर ही होने वाला है सो किचन में भी कोई काम नहीं है. दोपहर को मोदी जी को सुना जब वह मजदूरों के लिए पेंशन स्कीम की योजना का वर्णन दे रहे थे. उनके दिल में वंचितों के लिए बहुत दर्द है. देश के हर व्यक्ति को वह अपने परिवार का एक अंग ही मानते हैं. वह उस राजा की तरह हैं जो अपनी प्रजा से बहुत प्रेम करता है. अगले चुनावों में बीजेपी ही जीतने वाली है. इसमें किसी को कोई शक नहीं रहना चाहिए. जन औषधि के कारण देश में सस्ती दवाएं मिलने लगी हैं. नए एम्स भी बन रहे हैं. प्रधानमंत्री रोज ही नई-नई योजनाएं आरंभ कर रहे हैं. सस्ती स्वास्थ्य सुविधाएँ देश में मिल रही हैं. पुलवामा में हुए आतंकी हमले पर भी विपक्ष संदेह करने से बाज नहीं आ रहा है. पाकिस्तान में हुई एयर स्ट्राइक पर तो सवाल उठ ही रहे थे. पिछले दिनों काफी विचारकों को सुना. भारत-पाकिस्तान के बिगड़ते हुए संबंधों का कारण इस्लामिक कट्टरवाद ही है. यह किसी भी मुल्क को आगे बढ़ने से रोकता है. महीने के तीसरे सप्ताह में प्रेसिडेंट का फेयरवेल है, जिसमें  योग साधिकाओं को श्लोक पाठ प्रस्तुत करना है आज से वे रिहर्सल करेंगी. 

संध्या पूर्व का समय है, अभी अभी वे लॉन में टहलकर आये हैं. मौसम आज खुला है, लाल डूबता सूरज पेड़ों के पीछे से झाँक रहा था कुछ समय पूर्व. घास भीगी थी. एजेलिया का पौधा मेजेंटा फूलों से भर गया है जो अपनी ओर खींचता है. आज सुबह नैनी का पति अपने पिता को स्थानीय अस्पताल ले गया. पता चला, गले में कैंसर के कारण डिब्रूगढ़ मेडिकल कालेज ले जाना होगा. उसने ईश्वर से उनके लिए प्रार्थना की. दोपहर को मृणाल ज्योति गयी, एक अध्यापिका का विदाई भोज था, वह बहुत रो रही थी. इंसान का दिल बहुत कोमल होता है वह नफरत को सह लेगा पर प्रेम में पिघल जाता है. क्लब के एक सिलाई-कढ़ाई प्रोजेक्ट में एक सदस्या से मिली, वह बहुत ऊर्जावान है. उसने एक लकड़ी के शोकेस में प्रोजेक्ट का मोटिफ व अन्य नमूने लगाए हैं. आज सुबह उठने से पूर्व मन में एक मंथन चल रहा था, आत्मिक शक्ति को बढ़ाने के लिए क्या करना चाहिए. अपने सुख को किसी वस्तु, व्यक्ति या परिस्थिति पर आश्रित नहीं रखना चाहिए, सबसे पहले तो यही संदेश मिला. साधक को हर पल सजग रहने की आवश्यकता है. परमात्मा सदा उसके साथ है, वह उसे स्वयं से दूर जाने नहीं देता. वह अकारण दयालु है, सखा है, सुहृद है. राजनीति के चक्करों से भी साधक को दूर ही रहना चाहिए. देश में चुनाव होने वाले हैं, बहुत तरह के संदेश दिए जा रहे हैं. जो भी होगा, भला होगा, इस विश्वास के साथ अपने सहज कर्मों को करते जाना है. परसों महिला दिवस है. महिलाएं आज किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं. सेना हो या सिविल दोनों में ही महिलाएं आगे बढ़ रही हैं. नए घर में पेटिंग का काम आरंभ हो गया है. 

उस पुरानी डायरी में पढ़ा, दादाजी ने अपनी बहन के बारे में बताया, अभी तक वह उनसे नाराज हैं. किस तरह उन्होंने अपने पति के मरने पर उन्होंने दूसरा विवाह किया तो लोगों ने इन्हें कहा, गोली चला दो; पर उनके पिता जी ने कहा कि नहीं, जान लेने से कोई फायदा नहीं, ऐसी घटनाएं और भी हो रही हैं. पिता समझदार निकले. सात भाइयों में से एक को फाँसी भी हो जाती तो भाइयों को दुःख न होता. दादाजी ने एक और मजेदार बात बताई, दादी जी को देखने के लिए नाइन को एक रुपया दिया था उस जमाने में. 

आगे लिखा था, तुम्हें जिसके प्रति आस्था हो उसके प्रति ईमानदार रहो, पर अपनी भूलों पर... उनके लिए दुखी होने की आवश्यकता नहीं है, वे अतीत की वस्तुएं हैं, मृत हैं, वर्तमान में तुम क्या हो, महत्व इस बात का है और इस बात का भी कि भविष्य में तुम क्या होगी ! यदि कोई तुम्हें उन बातों का स्मरण भी दिलाये तो चुपचाप सुन लो... न प्रतिवाद न पश्चाताप, वे उन दिनों के फूल थे और ये आज के फूल हैं, फिर इससे क्या अंतर पड़ता है कि फूल किस रंग के हैं. सर्दी के कारण सारे गेंदे के फूल अपनी आकृति खो बैठे हैं तो क्या वे फूल नहीं हैं ? सो यह बिलकुल व्यर्थ की बात है कि पिछले वर्ष तुमने खिचड़ी खायी थी या पुलाव ! 

अवश्य कुछ हुआ होगा पर उसके बारे में कुछ नहीं लिखा है. 

Saturday, June 20, 2020

पासीघाट के सन्तरे


आज इतवार था, सुबह के सभी कार्य, प्रातः भ्रमण, योग आदि बड़े इत्मीनान से किये, बिना किसी जल्दबाजी के. नाश्ते में अप्पम बनाये ढेर सारी हरी सब्जियां डालकर. बगिया में हरे प्याज, गाजर, गोभी आदि हो रही हैं. यह अंतिम वर्ष है जब वे सब्जियां उगा रहे हैं, अगले वर्ष से महानगर में सम्भवतः फूल ही उगा पाएंगे या सजाने के लिए गमलों में कुछ हरे पौधे. दोपहर को बच्चों को योग सिखाया साथ ही गणित भी, उन्हें बहुत आनंद आया. एक लड़का बहुत उदास था, अगली कक्षा में उसका दाखिला अभी तक नहीं हुआ है, बच्चों के लिए स्कूल जाना कितना जरूरी है , उससे बात करके लगा. एक बच्चे का पैर सूजा हुआ था, उसे अभी तक इलाज नहीं मिला, माता-पिता को सन्तान के प्रति ज्यादा सजग होना चाहिए पर... शाम को एक बाल फिल्म का एक अंश देखा. एक किशोरी अपनी सखियों के साथ सागर तट पर जाती है पर घर पर बताकर नहीं आयी है, सबके माँ-पिता कुशंकाएँ करने लगते हैं. मन कितनी जल्दी भयभीत हो जाता है, आत्मा अभय है सदा एक सी ! 

अभी वे रात्रि भ्रमण से लौटे, पिटूनिया के फूलों  का लाल रंग हल्के प्रकाश में सुंदर लग रहा था. आज दोपहर छोटी बहन से वीडियो कॉल पर बात हुई. वह मेथी काट रही थी, वीडियो कॉल पर बात करो तो लगता ही नहीं कि हजारों मील की दूरी है, उसका घर जैसे पड़ोस में आ गया हो. बताया, उसकी छोटी बिटिया विदेश पहुँच गयी है. बहनोई विदेश जाने वाले हैं, उनके लिए लिखी कविता का अंतिम भाग समझ में नन्हीं आया, ऐसा बताया. परमात्मा को भीतर या बाहर अनुभव किये बिना समर्पण का गीत गाया नहीं जाता. शाम को भगवद्गीता के एक श्लोक का भावार्थ सुना, आचार्य प्रद्युम्न कितनी अच्छी तरह भक्ति भाव में डूबकर गीता की व्याख्या करते हैं. कर्मयोग, भक्तियोग, ज्ञानयोग को बहुत सरलता से परिभाषित कर देते हैं. उसके पहले प्रेसीडेंट से मिलने गयी, उनका गला खराब है, पर क्लब का काम करने का उनका उत्साह देखते ही बनता है. उनके लिए विदाई कविता लिखनी है. दोपहर को पावर ऑफ़ नाउ का एक और अध्याय पढ़ा.उनके भीतर एक छाया शरीर भी होता है जो पीड़ा से ही पोषित होता है. पुराने नकारात्मक संस्कार तथा घटनाएं जब कभी जागृत हो जाती हैं तब वह शरीर मुखर हो जाता है और वे स्वयं को भूल जाते हैं, अपने स्वरूप से डिग जाते हैं. उसके भीतर भी हीन भावना, ईर्ष्या, अहंकार तथा दम्भ के रूप में पुराने संस्कार हैं, जो अचेत होने पर उभर आते हैं. दुबई से वापसी की यात्रा में कुछ पलों के लिए कैसी विवेकहीनता छा गयी थी, जैसे वह वह नहीं थी, कोई अन्य ही था. चाय के प्रति आसक्ति भी इसी छाया शरीर की मांग पर टिकी है, आत्मा को कोई अभाव नहीं है . उसे किसी सुख के लिए किसी वस्तु, व्यक्ति या परिस्थिति पर निर्भर होने की जरा भी आवश्यकता नहीं है. आज मकर संक्रांति है, कल वे पासीघाट जा रहे हैं, अरुणाचल प्रदेश में स्थित यह स्थान सेंटरों के लिए प्रसिद्ध है. कल से कुम्भ भी आरम्भ हो रहा है. 

उसने फिर उस वर्षों पूर्व की डायरी का अगला पन्ना खोला, कुछ कविताएं कालेज की पत्रिका में छपने के लिए दीं थीं उसी दिन. एक कविता तो अवश्य छपेगी उनमें से ऐसा भी लिखा था.  अगले पन्नों पर वे कविताएं थी जो रेडियो पर सुने कवि सम्मेलन से लिखी थीं, 

जिंदगी जैसे शिकन रुमाल की 
एक नन्हीं सी लहर है ताल की 
जिंदगी है एक चिड़िया डाल की  
देखते ही देखते उड़ जाएगी 

बादलों में छिप गयी वह धूप है 
घूँघटों में कैद गोरा रूप है 
एक गिरते फूल का मकरन्द है 
एक झूठे प्यार की सौगन्ध है 
आंसुओं के नीर में बस जाएगी 
कुंवर बेचैन 

जीना  हो तो मरना सीखो गूँज उठे यह नारा
हर आँधी का उत्तर हो तुम, तुमने नहीं विचारा 
.............

सोचो तुमने इतने दिन में कितनी बार हुंकारा 

बाल कवि बैरागी  

है महानगर में शोर शोर में महानगर 
नागरिक नहीं रहती है भीड़ यहाँ, 

ये पंक्तियाँ किसकी हैं, नहीं लिखा है. 


Tuesday, May 19, 2020

फूलों की रंगोली


आज नवम्बर का प्रथम दिन है, उन्हें यहाँ से जाने में  मात्र दस महीने रह गए हैं. आज उसने चार नए फूल झाड़ू मंगवा लिए हैं, जबकि एक झाड़ू चार महीने तो चल ही जाता होगा, अब कुछ भी मंगाने से पहले सोचना होगा. शाम के साढ़े सात बजने को हैं. आज भजन में कम ही महिलाएं थीं, पर अच्छा लगा. गुरूजी कहते हैं मस्त होकर भजन गाना चाहिए. किसी को यह समझने में पल भर की देर नहीं लगती कि कौन केवल अधरों से गा रहा है और कौन दिल से ! उससे पूर्व बगीचे में मालिन से काम करवाया. माली आज काम पर नहीं आया, उसके हाथ में चोट लगी है, वह डॉक्टर के पास नहीं जा रहा है, रोग बढ़ता जा रहा है. बढ़ई काम कर रहा है, खिड़कियों की जाली कई जगह टूट-फूट गयी है, उसे ही ठीक कर रहे हैं. एक मिस्त्री ने नालियों को ठीक-ठाक किया, लगातार तंबाकू खाता रहा, उसकी क्षमता कम हो गयी है, चीजों को ठीक से नहीं कर पा रहा था. बढ़ई भी बहुत दुबला-पतला है. मजदूरों को इतना श्रम करना होता है पर उन्हें पूरी खुराक नहीं मिलती. 

दोपहर को महिलाओं को योग नहीं करवा पायी, बरामदे में पेंटिग का काम तभी खत्म हुआ था, अब दीवाली के बाद ही  अगला सत्र होगा. ब्लॉग्स पर लिखने बैठी तो ज्यादा नहीं लिख पायी, अब पहले की तरह घँटों कम्प्यूटर पर बैठना नहीं भाता, परिवर्तन स्वाभाविक है. नैनी ने कहा, उसे रंगोली के लिए रंग चाहिए, वह अपने पति से कहकर मंगवा सकती है, उसे पैसे देकर कहा, क्योंकि आज तक कभी भी उसने रंगोली के रंग नहीं खरीदे. वह फूलों से ही रंगोली बनाती है सदा. आज सुबह क्लब की एक सदस्या का फोन आया, वह बहुत प्यार से बात करती है, किसी की वाणी में इतनी मधुरता पता नहीं कहाँ से आ जाती है. किसी के भाव मधुर होते हैं यानि दिल का अच्छा होता है पर वाणी कठोर होती है. किसी के कर्म अच्छे होते हैं. जिसमें सभी कुछ अच्छे हों यानि भाव, वाणी और कर्म ऐसे तो कोई सद्गुरु जैसे बिरले ही होते हैं.  कल की प्रतियोगिता में उस मृदुभाषी महिला ने बहुत सुंदर रंगोली बनाई थी. सुबह छोटी बहन से बात हुई, वह दिसम्बर में उनके आने पर स्वागत की तैयारी कर रही है. 

शाम के साढ़े छह बजे हैं. कल सुबह नन्हा व सोनू आ रहे हैं. उन्हें आज ही आना था पर आज सुबह जब एयरपोर्ट के लिए निकलने से पूर्व वेब चेकिंग करते समय पता चला कि टिकट तो कल की है. कुछ पल के लिए तो निराशा हुई, क्योंकि कितने दिनों से इंतजार था इस दिन का, पर बाद में वे सब खूब हँसे। कल इस समय वे यहाँ होंगे. बाहर बरामदे में रंगोली बन गयी है और दीवाली की लाइट्स भी लग गयी हैं. आज दोपहर मृणाल ज्योति में मीटिंग थी, स्कुल में बाड़ लगानी है. स्कूल की दो शाखाओं में भी काम कैसे आगे बढ़े, इस पर चर्चा हुई. विकलांग दिवस की तैयारियां भी चल रही हैं. परसों उन्होंने चार स्कूलों में जाकर उस दिन पहनने के लिए बच्चों को बैज वितरित किये. अगले हफ्ते दीवाली के बाद कुछ अन्य स्कूलों में जाना होगा. 

बाहर वर्षा हो रही है, दीवाली दो दिन बाद है और मौसम यकायक बदल गया है. पिछले दिनों धूप खिली रही, ऐसे ही मन का मौसम भी बदलता रहता है. संशय के बादल छा जाते हैं तो ज्ञान का सूर्य ढक जाता है. कर्मों का बंधन आगे बढ़ने ही नहीं देता, वे चार कदम आगे बढ़ते हैं फिर छह कदम पीछे लौट आते हैं. जून कोऑपरेटिव गए हैं, वहां से दफ्तर जायेंगे, फिर तिनसुकिया होते हुए डिब्रूगढ़ पहुंच जायेंगे, नन्हा व सोनू दो बजे हवाई अड्डे उतरेंगे, उन्हें लेकर आना है. सुबह नींद खुली उसके पूर्व स्वप्न चल रहे थे, कितने जन्मों के कितने स्वप्न.. मन की गहराई को कोई नाप नहीं सकता. देहाभिमान या देहाध्यास छूटता नहीं या वे छोड़ना ही नहीं चाहते. ध्यान के पलों में लगता है अब सब मिल गया पर जगत में जाते ही सब बिखर जाता है. यह बिखरना भी एक स्वप्न मात्र ही है, यह भाव आ तो जाता है पर मन, बुद्धि पर उतनी देर में जो संस्कार पड़ जाता है, वह भविष्य में पुनः फल देगा, एक दुष्चक्र इस तरह चलता रहता है. सजगता और सजगता इसके शिव कोई साधना नहीं अथवा तो पूर्ण समर्पण .. जो भी हो सब उसी परमात्मा का प्रसाद समझकर स्वीकार करना होगा. मन को खाली रखना होगा

Tuesday, December 3, 2019

हरसिंगार के फूल


दोपहर के तीन बजे हैं. आज का दिन भी वर्षा से आरम्भ हुआ, प्रातः भ्रमण के बाद जैसे ही घर पहुँची, बूँदें पड़ने लगीं, पर दिन चढ़ते-चढ़ते धूप निकल आयी. आज धारावाहिक का अंतिम भाग भी देख लिया. बुद्ध के अनोखे जीवन की गाथा पढ़ -सुनकर कौन प्रभावित नहीं होगा. वे अपार आशावादी थे जबकि कुछ लोग उन्हें दुखवादी कहते हैं. वह मानव को उसके मूल स्वरूप का अनुभव करना चाहते थे. वह उन्हें मानसिक रोगों के चक्र से बाहर निकलना चाहते थे. बुद्ध कहते हैं हर दिन को कृतज्ञ होकर जिन चाहिए. कोई न कोई सत्कर्म करना चाहिए. परमात्मा ने जो ज्ञान, प्रेम और शक्ति मानव को दी है, उसका वितरण करना चाहिए. भीतर के आनंद को जो स्वयं में पा लेता है, वह अन्यों को भी उसे पाने का मार्ग बता सकता है. बुद्ध होने की क्षमता हरेक के भीतर है. सदमार्ग पर चलना ही धर्म का पालन करना है, जिसके द्वारा वह बुद्धत्व को प्राप्त कर सकता है. मन की बिखरी हुई शक्तियों को एक्टर करना ही संघ की शरण में जाना है. वे जब अपने केंद्र में स्थित होते हैं तो सारी शक्ति एक पुंज के रूप में प्राप्त होती है, जो किसी कार्य को सजगता पूर्वक करने के लिए अनिवार्य है. आज भी सदगुरू को सुना, कर्म व पुनर्जन्म पर उनकी व्याख्या अत्यंत मनोरम व सरल है. जग की प्रत्येक वस्तु में चार बातें होती हैं, धर्म, प्रेम, कर्म तथा ज्ञान. उनमें भी ये चार बातें हैं, प्रेम से वे घिरे हैं, वह उन्हें चारों ओर से स्पर्श कर रहा है, इसी प्रकार ज्ञान वह अविनाशी सत्ता है जो जानने की क्षमता है. जानना है. हर वस्तु अपने नियत धर्म के अनुसार कर्म करती है, जैसे अग्नि का धर्म है जलाना  और प्रकाश देना. उनके पूर्व कर्मों का फल उन्हें अब मिल रहा है और वर्तमान के कर्मों का फल भविष्य में मिलेगा. जून कल शाम को अपने गन्तव्य पर पहुँच गए. सोनू का फोन आया, बैंगलोर में एक स्टार्टअप कम्पनी छोटे-छोटे प्लॉट लोगों को सब्जी उगने के लिए दे रहे हैं, जिसमें हर महीने दो हजार रूपये देकर ऑर्गैनिक सब्ज़ियाँ उगाई जा सकती हैं. उनके माली ही काम करेंगे, बस अपनी पसंद बतानी है और यदि मन हो तो बीच-बीच में जाकर देख सकते हैं कुछ काम भी कर सकते हैं.  महिला क्लब की साहित्यिक प्रतियोगिता होने वाली है, पर सलाहकार होने के नाते क्या उसे उसमें भाग लेना चाहिए, शायद नहीं, शेष लोगों को भी मौका मिलना चाहिए. हिंदी में बेहद कम प्रतियोगी होते हैं, इसलिए हर बार उसे कहा ही जाता है.

सामने हरा-भरा बगीचा है. बोगेनविलिया के फूल शाखाओं पर शीतल हवा में झूम रहे हैं. कुछ देर पहले हवा चलने लगी थी जैसे आंधी आने वाली हो. उत्तर भारत में पिछले दिनों अंधी-तूफान में कारण कितनी हानि हुई. बुद्ध ऐसी आंधी-तूफान में छह वर्षों तक तप करते रहे. अद्भुत थी उनकी आत्मशक्ति ! राजा के पुत्र होकर सन्यासी की भांति बेघर होकर रहना और भिक्षा मांगकर गुजारा करना कितना कठिन रहा होगा. उनके आकर्षण से खिंचे कितने ही युवा उस कल में सन्यासी बन गए. हिंसा का जीवन त्याग दिया. भारत में सैनिकों के प्रति श्रद्धा घट गयी और कालांतर में इसका परिणाम हुआ विदेशी राजाओं का आक्रमण, लेकिन बुद्ध के काल में जो हिंसा व्यर्थ ही होती थी, वह रुक गयी. आज बहुत दिनों बाद ब्लॉग पर पोस्ट प्रकाशित की. बुद्ध पूर्णिमा के दिन अंतिम पोस्ट की थी. उनके प्रति श्रद्धा तो थी पर वे इतने महान हैं, इसका अनुभव नहीं किया था. अद्भुत थी उनकी करुणा, उसका हजारवां अंश भी यदि उसमें आ जाये तो जीवन सफल हो जायेगा. ऐसा लगता है जैसे वह कुछ भी नहीं जानती. जीवन और यह सृष्टि अनंत रहस्यों से भरी है, इसे जाना नहीं जा सकता, कोई बुद्ध होकर ही, इसके साथ एक होकर ही इसको थोड़ा-बहुत जान सकता है. सामने गमले में लाल सुर्ख एक गुलाब खिला है, जिस पर उसका ध्यान बरबस चला जाता है. बुद्ध के निर्वाण के समय उन पर फूलों की वर्षा आरम्भ हो गयी थी, जिस वृक्ष के नीचे वे लेटे थे, उसके फूलों का मौसम भी नहीं था तब. वनस्पति में भी जीवन है, चेतना है, ज्ञान है. जिस वर्ष वे इस घर में रहने आये थे, उस पुराने घर में हरसिंगार ने असमय फूल उगाये थे. प्रातःकाल भ्रमण के लिए जाते समय निकलते ही एक काली तितली सम्मुख आ गयी थी. कल सुबह उसे आर्ट ऑफ़ लिविंग सेंटर जाना है, वहां से किसी स्कूल में, गुरूजी के जन्मदिन पर सेवा कार्य के लिए. आज उनके लिए एक कविता लिखी. एक कविता आस्ट्रेलिया निवासी छोटी भांजी के लिए भी जिसका जन्मदिन भी इसी दिन पड़ता है. उसने बताया वहाँ ठंड पड़नी शुरू हो गयी है, जब भारत में ठिठुरती सर्दियां होती हैं, वहां तेज गर्मी होती है. जून ने उस स्थान की तस्वीरें भेजी हैं, जहाँ वह ठहरे हैं, बहुत सुंदर स्थान है. उन्होंने सुंदर फूलों के चित्र और एक मोर का चित्र भी भेजा है. अगली बार वह अवश्य जाना चाहेगी, पता नहीं भविष्य में क्या लिखा है ! पिताजी से बात करे ऐसा मन हो रहा है, इस वर्ष उनसे मिलना होगा या नहीं, पता नहीं !

आज सुबह हल्की फुहार पड़ रही थी, वातावरण शांत था. सदगुरू को सुना,  चेतना में अपार शक्ति है. देह को स्वस्थ करने का सामर्थ्य भी है. यदि मन टिक हो तो चेतना अपना काम कर सकती है, वरना विचारों का विक्षेप उसे अभिव्यक्त होने से रोकता है. ध्यान मन को स्थिर रखने का, निर्मल रखने का उपाय ही तो है. सुबह वह आर्ट ऑफ़ लिविंग के अन्य सदस्यों के साथ एक स्कूल में गयी, बच्चों से बातें किन, उन्हें योग कराया, कुछ सामान वितरित किया, दो घण्टे वहां बिताकर वे वापस लौटे. जैन धर्म के बारे में कुछ जानकारी हासिल करने के लिए महावीर स्वामी पर एक फिल्म देखी. इस समय रात्रि के सवा नौ बजे हैं मन आज किसी अनोखे लोक में भ्रमण कर रहा है. अस्तित्त्व की उपस्थिति का अहसास इतना सघन है कि लगता है उसे हाथ बढ़ाकर छुआ जा सकता है. भीतर एक मधुर सी झंकार जैसी आवाज सुनाई दे रही है, किसी पंछी की आवाज या चिड़िया की, जाने कहाँ से. शाम को एक घंटा ध्यान किया शायद उसी का परिणाम है, वैसे परम् कार्य-कारण से परे है, अकारण दयालु है ! शाम को नन्हे और जून से बात हुई, वे लोग इस स्थान पर गए थे, जहाँ नन्हे ने बारह क्यारियां किराए पर ली हैं, जहाँ से उन्हें ताज़ी सब्जियां मिला करेंगी. 

Saturday, September 21, 2019

नंदी हिल पर एक सुबह



आज बैसाखी है. बाहर तेज धूप है. कुछ देर में वे आश्रम जायेंगे, उससे पूर्व बाजार, जहाँ जून को थोड़ा काम है. घर का सामान खरीदने की जिम्मेदारी उन्हीं की है, उन्होंने संभाली हुई है. आज सुबह देर से उठे वे, कारण कल रात देर से सोये. कल शाम डेंटिस्ट के यहाँ पहुँचे तो क्लिनिक पर कोई नहीं था. आठ बजे तक का समय सामने की दुकान पर काफ़ी पीकर व स्नैप सीड पर फोटो ठीक करके बिताया. कल दोपहर को दोनों मित्र परिवार आये थे. उन्हें पुलाव खिलाया, पुरानी यादें ताजा कीं, भविष्य के लिए योजनायें बनायीं और दो घंटे का समय कैसे बीत गया, पता ही नहीं चला. असमिया सखी तीन दिन बाद अपने पुत्र के यहाँ जा रही है, जिसके यहाँ सन्तान का जन्म होने वाला है. आज सुबह व कल शाम को ओशो पर बनी एक डॉक्युमेंट्री देखी. उनके आश्रम में क्या चल रहा था, वह उससे अनभिज्ञ तो नहीं रहे होंगे. जीवन विरोधाभासों से भरा है. इंसान जब अपने भीतर के पशु को पूरी तरह से देख लेगा, तभी उसके भीतर नये मानव का जन्म होगा, शायद इसीलिए ऐसा करते रहें हों वे लोग.

आज सुबह वे चार बजे से भी पहले उठे. कल शाम को ही नंदी हिल जाने का कार्यक्रम नन्हे ने बनाया था. नहा-धोकर वे तैयार हुए और पांच बजे उसके मित्र की कार लेकर निकल पड़े. रास्ते में ही लालिमा दिखाई दी, अर्थात सूर्योदय तो हो चुका था. लगभग डेढ़-पौने दो घंटे की यात्रा के बाद सुंदर पर्वत आरंभ हो गये. घुमावदार चढ़ाई पर कार के टायर घिसने लगे और एक गंध हवा में भर गयी. सैकड़ों लोग वहाँ पहुँच चुके थे. मौसम ठंडा था. बादल, धुंध और कोहरे के कारण कुछ दिखाई नहीं दे रहा था. पेड़ों से गिरती पानी की बूंदों ने सडकों को गीला कर दिया था. हवा ठंडी थी. उन्होंने जैकेट पहन लिए थे और सिर भी ढक लिए थे. ऊपर कई रेस्तरां थे. एक जगह बैठकर चाय पी और एक प्लेट सांबर बड़ा में से सबने आधा-आधा बड़ा खाया, जिसका स्वाद अच्छा था, क्योंकि यह सुबह का पहला भोजन था. जगह-जगह वाचिंग टावर बने थे. जिसपर चढ़कर सूर्योदय तथा नीचे की घाटी का दृश्य देखा जा सकता था. थोड़ी देर बाद वहाँ बन्दर आने लगे, जो आदमियों को देखकर जरा भी नहीं डर रहे थे. कुछ समय बिताकर वे वापस आये तो पता चला कि गाड़ी का एक टायर पंक्चर हो गया है. रास्ते में पंक्चर ठीक कराया, बीस मिनट लगे, वापसी में परांठे की एक प्रसिद्ध दुकान पर नाश्ता किया, आलू, मूली, गोभी और पिज़ा परांठे का नाश्ता !

पौने दो बजे हैं दोपहर के. आज ओशो की फिल्म का अंतिम भाग भी देख लिया. उन जैसे व्यक्ति दुनिया में हलचल मचाने के लिए ही आते हैं. वे सोये हुए लोगों के भीतर क्रांति के जागरण का बीज बोते हैं. कल उन्हें वापस जाना है, पैकिंग लगभग हो गयी है. आज बीहू है, यहाँ हर दिन ही उत्सव है. नन्हा ढेर सारा भोजन ऑन लाइन मंगवा लेता है. सोनू ने केक बनाया है. जून ने आम काटे और कल नंदी हिल से वापसी की यात्रा में लिए काले अंगूर धोकर खिलाये. शाम को नन्हे के एक परिचित के यहाँ जाना है. बनारस के रहने वाले हैं. सुबह उसका एक सहकर्मी परिवार सहित आया था. नीचे बच्चों के तैरने की आवाजें आ रही हैं. सोसाइटी के तरणताल पर दिन भर रौनक लगी रहती है.

आज वे घर वापस लौट आये हैं. सुबह चार बजे से थोड़ा पूर्व ही उठे. साढ़े पांच बजे एयरपोर्ट के लिए रवाना हुए और साढ़े छह बजे पहुँच गये. कल शाम नन्हा और सोनू ढेर सारा सामान ले आये साथ ले जाने के लिए. अंजीर की बर्फी के रोल स्वादिष्ट थे और रिबन पकौड़ा भी. साढ़े ग्यारह बजे कोलकाता पहुँचे अगली फ्लाईट के लिए. हिन्दू, टाइम्स ऑफ़ इंडिया पढ़ते हुए समय बीत गया. साढ़े तीन बजे वे घर पहुँच गये. ढेर सारे फूल खिले हैं बगीचे में. सामने वाला गुलाबी फूलों वाला पेड़ फूलों से पूरा भर गया है. घर आकर सफाई आदि करते-कराते सात बज गये. नैनी अपनी देवरानी को ले आई, माली की दोनों पत्नियों को भी बुला लिया, चारों ने मिलकर सफाई की व कपड़े धोये.     

Tuesday, June 11, 2019

पिटुनिया के फूल



आज बड़े भाई से बात हुई, बुआ व मामी जी से भी. सबको विवाह के लिए निमन्त्रण दिया. फुफेरे भाई ने कहा, वह कार्यक्रम बनाकर बतायेगा. मंझली भाभी से बात की, वह बेटी को लेकर परेशान हैं. आज से मात्र एक महीना शेष है विवाह के दिन में. आज भी वे कार्ड्स बांटने जायेंगे. परसों मुख्य अधिकारी के यहाँ से शुरुआत की. उसके बाद छह घरों में गये. पटवारी, पॉल, फूकन, बनर्जी, एक तमिल परिवार, और शर्मा परिवार में. कल भी पांच मित्रों के यहाँ गये, मराठी, बंगाली, मारवाड़ी, दो असमिया, व ब्राह्मण परिवार में, एक तरह से यहाँ पूरा भारत बसता है. हर प्रदेश के लोग यहाँ रहते हैं. सभी ने दीवाली की मिठाई खिलाई. एक परिवार में उनकी बेटी से मिले जिसने कानून में पढ़ाई पूरी कर ली है और अब एक लॉ कालेज में पढ़ाने जा रही है. सभी के घर सुसज्जित थे. सबसे सुंदर थे दो बंगाली सखियों के घर. उनके घरों की सज्जा देखने लायक थी. सुंदर फर्नीचर तथा सुंदर बगीचे रहने वालों के कलात्मक मिजाज की खबर दे रहे थे. अगले वर्ष उनमें से एक के पति रिटायर हो रहे हैं, तथा दो अन्य के इसी वर्ष. उनके लिए विवाह से लौटने के बाद कुछ लिखेगी.

दस बजने को हैं, आज भोजन पहले ही बना लिया है ताकि आराम से एक घंटा बैठकर लेखन कार्य किया जा सके. कल शाम भी वे कालोनी के दस परिवारों के यहाँ कार्ड्स देने गये. एक का घर बंद था. आज शाम को भी जाना है.

आज बड़े भांजे का जन्मदिन है, इस बार बंगलूरू में उसके साथ रहने का अवसर मिला. मिलनसार है, काम में हाथ बंटता है. सीधा-सरल स्वभाव है उसका. भगवान उसे शक्ति और ज्ञान का वरदान दे ! जून का स्वास्थ्य ठीक नहीं है पर अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति के कारण वह किसी समस्या को खुद पर हावी नहीं होने देते हैं. आज शाम को अपने दफ्तर में काम करने वाली एक कर्मचारी को बुलाया है. जो कुछ परेशान है, घर से दूर अकेले रहती है, अपने शहर में तबादला करवाना चाहती है. उसे समझना और समझाना है. कल शाम भी वे कुछ मित्रों के घरों में कार्ड्स देने गये, अच्छा लग रहा है. एकाध दिन और जाना होगा. शाम को बहुत दिनों बाद बेक्ड सब्जी बनाने वाली है. आज से एलोवेरा जूस बनाना भी आरंभ करना है. इस वर्ष आंवले काफी हुए हैं बगीचे में. कुछ महीने चलेंगे.

कल कुछ नहीं लिखा और आज इस समय शाम के पांच बजे हैं, जून गोहाटी गये हैं, परसों लौटेंगे. आजकल उसे न ही फोटोग्राफी का शौक रहा है, न ही व्हाट्स एप पर संदेश भेजने का, न ही लोगों से बात करने का. वैराग्य बढ़ रहा है, सब कुछ व्यर्थ प्रतीत होता है. आज सुबह जून की बात का जवाब भी ठीक से नहीं दिया. माली को भी उसकी गलती के लिए सुनाया. हर बार वह वही गलती करता है. कल रात भी नींद ठीक नहीं आई, परसों भी. शायद देर तक जगने के कारण ही, समय से सो जाना ही उचित है. नींद पूरी न होने पर ऐसे लक्षण होने स्वाभाविक हैं. आज दोपहर को बारह-तेरह बच्चे ही आये. कल स्कूल जाना है और नर्सरी भी, जहाँ से फूलों की पौध लानी है. 

तीन बजने को हैं, यानि योग कक्षा का समय. अभी-अभी वर्षा शुरू हो गयी है. महिलाओं की संख्या कम हो सकती है. आज नर्सरी गयी थी. छह गमले खरीदे और कैलेंडुला, पिटुनिया, डहेलिया, सिल्विया और इंका की पौध. सर्दियों में फूलों से भर जायेगा बगीचा..अभी तक तो बरसात का मौसम ही चल रहा है. मृणाल ज्योति से फोन आया, बौद्धिक अक्षमता पर योग, संगीत या व्यायाम का कितना और क्या असर पड़ता है, इस पर कुछ लिखने को कहा है. उसने इसके बारे में नेट पर पढ़ा. दुनिया में बहुत जगह लोग ऐसे व्यक्तियों और बच्चों को योग सिखा रहे हैं. कल शाम को 'सीता' पुस्तक से प्रेरित होकर नन्हे और सोनू के लिए कविता लिखनी आरंभ की है. आज उसे आगे बढ़ाना है.  


Friday, August 10, 2018

कपालभाति के फायदे




दो दिन फिर निकल गये, आजकल दिन कैसे बीत जाते हैं, पता ही नहीं चलता.शाम हो गयी है, जून अभी तक आये नहीं हैं. परसों विदेश से छोटी भांजी अपनी एक ब्रिटिश मित्र के साथ यहाँ कुछ दिनों के लिये आई है. वह उन्हें लेने एअरपोर्ट गयी थी. कालेज जाने से पहले वे लोग भारत में कुछ दिन  बिताना चाहती हैं. घर में जैसे रौनक आ गयी है. पूसी भी उनके साथ बहुत खेलती है, उन्होंने उसे मैंगो नाम दिया है, अपने नाम भी जान गयी है. भांजी ने ‘यूनिवर्स’ में उसका प्रोफाइल अपडेट किया, पिछली बार जब वह यहाँ आई थी, उसी ने यह नोट्स सबस्क्राइब किये थे. दोपहर को वह उन्हें लेकर मृणाल ज्योति गयी, उसे एक मीटिंग में भाग लेना था, दोनों लडकियाँ इधर-उधर घूमकर स्कूल देखती रहीं, फिर अपने साथ लायी किताबें पढने लगीं.
सुबह के ग्यारह बज गये हैं. जून अभी आने वाले होंगे. दोनों सखियाँ अपने कमरे में हैं. छोटी बहन से स्काईप पर बात हुई. लंच में राजमा बनाए और दम आलू तथा कुम्हड़े की दही वाली सब्जी, दोनों आराम से सभी सब्जियां खा लेती हैं. विशेष पसंद पूछने पर, ‘सब पसंद है’ कहकर मुस्कुरा देती हैं. लगता है वर्षा होगी, बादल गरज रहे हैं. स्कूल में बच्चों को मंगल प्रार्थना सिखाई आज. गर्मी बहुत थी, कुछ बच्चे बहुत शोर कर रहे थे. सुबह वे टहलने गये तो पीले फूलों को सड़क पर बिछे देखा था, स्कूल से लौटते वक्त तस्वीरें उतारीं.
आज वर्षों बाद उस तरह ध्यान किया जैसे पहले-पहल करती थी. अस्तित्त्व से वार्तालाप, वह सचमुच उनसे बातें करता है. उसने उसके प्रति अपने प्रेम के बारे में बताया, और उसे कैसा होना चाहिए, यह भी. डिस्प्रिन का एक पत्ता भी दिखा ध्यान में, अब उसकी जरूरत नहीं पड़ती. उसने ‘लाल रंग’ के बारे में भी कुछ कहा. हो सकता है यह सब उसका ही मन उसे दिखा रहा हो, पर यह उसका विशाल मन था जो परमात्मा से जुड़ना चाहता है. आज एक अच्छा सा वीडियो भी देखा. सृजन करने की क्षमता को उन्हें विकसित करते जाना है, वे यहाँ परमात्मा का काम करने के लिए भेजे गये हैं, उन्हें स्वयं के द्वारा उसे प्रकट करना है. भांजी सो रही है, उसकी मित्र पढ़ रही है, ‘हैरी पॉटर’ की किताब. दोनों ज्यादातर समय अपने आप में ही व्यस्त रहती हैं. सुबह कभी कभी तैरने जाती हैं, दिन में दो या तीन बार टहलने भी. आज सुबह वर्षा के कारण टहलना नहीं हुआ, दोपहर को वह उनके साथ जा सकती है, उस समय ज्यादातर लोग अपने घरों में सोये रहते हैं. विश्व योग दिवस के लिए एओएल की तरफ से योग का प्रोटोकाल आया है, जून उसे प्रिंट करके ला देंगे. अज मौसम सुहावना है. नैनी की बच्चियों ने कहा, वे नाचना चाहती हैं. नृत्य और संगीत सम्भवतः आत्मा से आते हैं ! और सारी कलाएं भी..
कल वे पाइप ब्रिज देखने गये थे, नदी में पानी बहुत था, पुल पर खड़े होकर तस्वीरें उतारीं, पहले दोनों को भय लगा फिर उसे आराम से चलते देखकर वे भी निर्भय होकर चलने लगीं. इतवार को वे बच्चों की कक्षा में भी जाएँगी और उन्हें अंग्रेजी में एक गीत सिखाएंगी. मौसम आज अच्छा है, सुबह से ही झींसी पड़ रही है. आज एक पुरानी सखी का जन्मदिन है, वे लोग कुछ वर्ष पहले यहाँ से चले गये थे, और अब पुनः आने वाले हैं. अभी-अभी उससे बात की, पर बात उसी पुराने लहजे में हुई, वक्त बदल जाता है पर इन्सान नहीं बदलते. उसने अभी-अभी व्हाट्सएप पर एक संदेश भेजा है. इस बार जब वे आयेंगे तो उम्मीद है उनके संबंध अच्छे होंगे.
टीवी पर बाबा रामदेव योग और कपालभाति के अनेक लाभ बता रहे हैं. आसन करने से जोड़ों का दर्द नहीं होगा, हड्डियों की समस्या नहीं होगी. महिलाओं को हारमोनल असंतुलन नहीं होगा. लिवर, किडनी, हृदय सभी स्वस्थ रहेंगे, कोशिकाओं तक में परिवर्तन आता है. शरीर के सारे तन्त्र ठीक रहते हैं. बुढ़ापा दूर रहेगा. कैल्शियम की कमी नहीं होगी. चेहरे पर तेज रहेगा. वह कह रहे हैं, जो योग की अग्नि में स्वयं को तपा लेता है, उसको न रोग होता है, न जरा, न मृत्यु का भय उसे सताता है. योग करने वाले सकारात्मक सोच रखते हैं, क्रोध नहीं करते. जो सदा ताजगी से भरे रहते हैं समझ लेना चाहिए योग करते हैं. उनकी स्मृति शक्ति भी बढ़ जाती है.
जून टूर पर गये हैं, सो रात्रि के साढ़े दस बजे भी वह जाग रही है. भांजी और उसकी मित्र भी सोयी नहीं होंगी. उन्हें बस एक सप्ताह और यहाँ रहना है. दिन जैसे उड़ रहे हैं, पता ही नहीं चला दस दिन बीत भी गये. पूसी बहुत नटखट हो गयी है, आज दोपहर को गोदी में आकर बैठ गयी थी. जानबूझ कर उछल कर दिखाती है, फिर छिप जाती है, जैसे छोटे बच्चे करते हैं. उसके भीतर भी मन है, वह कुछ कहना चाहती है, दोनों आँखें ऊपर करके देखती है तो जैसे उसकी आत्मा झलकती है. क्लब में बच्चों का वार्षिक उत्सव आरम्भ हो गया है. कल एकल नृत्य की प्रतियोगिता है.