Friday, November 16, 2018

फूलों की पौध



शाम के साढ़े पांच बजे हैं. वह ध्यान कक्ष में बैठी है. हल्की सी गंध आ रही है. अब पता नहीं यह गंध कहाँ से आती है, क्यों आती है ? यह कोई रोग है या अस्तित्त्व का प्रसाद...जैसे जो धुन सुनाई देती है वह कोई..सब कुछ एक रहस्य में डूबा हुआ है. आज गैराज से लेकर पीछे के गेट तक का रास्ता बन गया है, काफी टूट-फूट गया था. शायद कल माली कमल कुंड को ठीक करेगा, जिसमें आजकल पानी ठहरता नहीं है, शायद किनारे की दीवार में कोई दरार आ गयी है. नन्हे का फोन जो माह के प्रथम दिन खो गया था, आज मिल गया है. कल उसकी मित्र से बात की. उसने अपने घर में बता दिया है पर वहाँ से कोई जवाब नहीं आया है. आजकल वह नया जॉब भी खोज रही है. जून आज स्टार्टअप इंडिया की मीटिंग में भाग लेने गये हैं, वह कितने सरे कार्यों से जुड़े हुए हैं. उनको इस तरह काम करते देखकर बहुत अच्छा लगता है. आज बहुत दिनों बाद ‘श्रद्धा-सुमन’ ब्लॉग में पोस्ट प्रकाशित की. ‘सिया के राम’ में राम का महाप्रस्थान आज होने वाला है.! सुबह टहलने गयी, ज्ञान, भक्ति तथा कर्मयोग पर चिन्तन करते हुए प्रातः भ्रमण किया. परमात्मा उन्हें कितना प्रेम करता है. उसकी कृपा का अनुभव हर पल होता है ! एक सखी से बात की, छोले-भटूरे बना रही है, दही-बड़े भी जन्मदिन पर !

आज मृणाल ज्योति गयी. महीनों पहले जो स्वप्न देखा था, उसे साकार करने अर्थात टीचर्स के लिए एक वर्कशॉप करने का स्वप्न अंततः सम्पन्न हो गया. जिसका बीज उस दिन पड़ा था जब एक अध्यापक अपनी समस्या लेकर आया था. सभी ने उत्साह से भाग लिया. सुबह पौने नौ बजे वह गयी थी और दोपहर बाद चार बजे लौटी. वापसी में नर्सरी से फूलों की पौध भी ली. कैलेंडुला, कॉसमॉस, डहेलिया, स्टॉक और वरबीना के फूलों से उनका बगीचा अवश्य सुंदर लगेगा. माली कल सुबह लगाएगा. नन्हे से बात हुई, वह अगले हफ्ते जोधपुर व जयपुर जा रहा है, एक मित्र के विवाह में. अगले वर्ष वह भी विवाह बंधन में बंध जायेगा अगर अल्लाह ने चाहा तो..जो भी होगा अच्छा ही होगा. बाल दिवस पर दिगबोई जाना है, विश्व विकलांग दिवस के लिए कुछ स्कूलों में बैज बांटने है. जब वे समाज के लिए कुछ काम करते हैं तो भीतर जिस शांति का अनुभव होता है, वह अनोखी है.

जून का आज शाम को लगभग चार बजे गोहाटी में छोटा सा एक्सीडेंट हो गया. जहाँ पुल समाप्त होता है, वह सड़क पार करने वाले थे, सामने आ रही बस काफी दूर थी, तभी पीछे से एक मोटरसाईकिल आ गयी और वह टकरा कर गिर गये. उनका चश्मा व फोन दोनों टूट गये. कान के पास चोट लगी, एक टांका लगा है तथा पैर में भी चोट आई है घुटने के नीचे. फ्रैक्चर नहीं है, वह किन्हीं अज्ञात लोगों की सहायता से एक क्लीनिक में पहुंचे, जहाँ प्राथमिक चिकित्सा दी गयी, फिर अस्पताल आये. याद नहीं पड़ता पहले कभी उन्हें इस तरह अस्पताल में रहना पड़ा हो. नन्हे से उनकी बात हुई है, वह कल गोहाटी आ रहा है. मना करने कर भी उसका मन नहीं मान रहा. अभी-अभी जून से बात हुई. डाक्टर साहब देखने आये हैं. उनके दो मित्र वहीं बैठे हैं जो रात को वहीं रहने वाले हैं. जीवन में जो भी परेशानी आती है वह कुछ न कुछ सिखाने के लिए ही आती है. उस दिन ग्रे रंग से बात शुरू हुई और उन्होंने ने गोहाटी में उसी रंग की पेंट सिलने दे दी. उसी को लेने गये थे जब यह दुर्घटना हुई. वैसे वह आवाज से ठीक लग रहे हैं. परसों घर आ जायेंगे. कुछ दिन आराम करेंगे तो ठीक हो जायेंगे, चश्मा नया बनवाना पड़ेगा.

Thursday, November 15, 2018

सरदार पटेल की जयंती




आज धनतेरस है, कोऑपरेटिव जाकर नैनी के लिए कुकर खरीदना है तीन लिटर का, आज के दिन  दिन बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है. अपने पास अब इतना सामान है कि लगता है, जितना जीवन बचा है आराम से गुजर जायेगा. सुबह सवा चार बजे आँख खुली, अब दिन देर से निकलने लगा है. प्रातः भ्रमण के लिए निकले तो बाहर हल्का कोहरा था. रात्रि को भीतर आग की लपट दिखी. अध्यात्म के साथ-साथ कहीं इसका संबंध स्वास्थ्य से तो नहीं है. दाहिने कान में एक रुनझुन सी ध्वनि  सुनाई दे रही है, कितने आश्चर्यों से भरा है जीवन..आज ही वे घर को कल के लिए सजा रहे हैं, वैसे भी आज से पांच दिनों का उत्सव आरम्भ हो गया है. दोपहर बाद मृणाल ज्योति जाना है. कल शाम योग कक्षा में कितना अनोखा अनुभव था, देह जैसे महसूस ही नहीं हो रही थी. कल दोपहर उस सखी से मिलने गयी जो पति के न रहने पर सदा के लिए अपने गृह स्थान को जा रही है.

आज सरदार पटेल की जयंती है और इंदिरा गांधीजी की पुण्य तिथि ! टीवी पर सुबह से विशेष कार्यक्रमों का प्रसारण हो रहा है. सरदार पटेल ने देश की एकता बनाये रखने के लिए महान योगदान दिया है. महापुरुषों के जीवन को नई पीढ़ी के सामने रखना चाहिए. १९३० में उन्होंने महिलाओं के आरक्षण की बात कही थी. गाँधी जी ने उनके बारे में कहा है कि अहमदाबाद म्युनिसिपल कारपोरेशन में कौन बैठा है यह इस बात से पता चलता है कि विक्टोरिया गार्डन में किसका राज है, जहाँ तिलक की मूर्ति उन्होंने लगाई थी. मोदी जी की वक्तृत्व क्षमता अद्भुत है. सरदार साहब के जीवन के अनोखे प्रसंग वे सुना रहे हैं. वह कह रहे हैं, हर भारतीय को अपना विस्तार करना चाहिए, यह सारा देश उनका है. उन्हें हर प्रदेश की भाषा सीखनी चाहिए, एक-दूसरे से और भी बहुत कुछ सीखना चाहिए. सुबह उठी तो कान फिर बंद था, अस्पताल गयी, मोम जम गया है, इसी वजह से भारी था. कम्प्यूटर भी खराब था जो जून इस समय मकैनिक के साथ बैठ कर ठीक करवा रहे हैं.

वर्ष का ग्याहरवाँ महीना, मौसम अभी भी गर्म है. दो हफ्ते बाद ही ठंड शुरू होगी. सुबह वे समय पर उठे, प्रातः भ्रमण के लिए गये, आकाश पर तारे चमक रहे थे. लोगों के घरों में अभी भी प्रकाश की झालरें लगी थीं. सभी को भाईदूज के संदेश भेजे. मृणाल ज्योति ले जाने के लिए उपहार एकत्र किये. कैलेंडर बदले, शरीर का वजन लिया और इस महीने आने वाले मित्र-संबंधियों के जन्मदिन व विवाह की वर्षगांठ के दिनों का पता लगाया. इस महीने दो सखियों का जन्मदिन है और एक भांजी का, ननद के विवाह की वर्षगांठ भी है. जून परसों गोहाटी जा रहे हैं, उन्हें एक मीटिंग में भाग लेना है. उसे शनिवार को मृणाल ज्योति में प्रोजेक्टर आदि स्वयं ही मैनेज करना होगा. आज कम्प्यूटर भी ठीक हो जायेगा. भाई दूज पर भेजे टीके सम्भवतः अभी नहीं मिले, छोटे भाई ने कहा, उसे भेजने की जरूरत नहीं है, पर दिल है कि मानता नहीं. दोपहर को नर्सरी जाना है, चार तरह की गोभी की पौध लानी है, हरेक के लिए दो क्यारियां हैं. शिमला मिर्च की पौध, आलू व लहसुन के बीज भी लाने को माली ने कहा है.  

उसका कान खुल गया है पर अभी भी पूरी तरह से आवाज सुनाई नहीं देती. दीवाली पर खायी मिठाई और नमकीन का असर है या मन्दाग्नि का, भीतर कफ सूख गया है, कुछ दिन लगातार नेति करने से ठीक हो जायेगा. कम्प्यूटर ठीक हो गया है, पीपीटी भी बन गया है, जून ने वीडियोज के लिंक भी उसमें डाल दिए हैं. आज शाम को एक बार अभ्यास करना ठीक रहेगा. माली वह पौध लगा रहा है जो वह कल लायी थी.

आज बृहस्पतिवार है, साढ़े तीन बजे हैं दोपहर के, जून आज गोहाटी गये हैं, सोमवार को लौटेंगे. तब तक उसे अपने समय व ऊर्जा का भरपूर उपयोग करना है. कुछ देर में बाजार जाना है, शायद ड्राइवर आ गया हो. नन्हे ने लिखा है, उसका फोन कार में छूट गया था, आज मिल जायेगा.


Monday, October 29, 2018

माजुली का सौन्दर्य




सुबह के चार बजे हैं. दो दिन पहले वे काजीरंगा आये थे, एक रिजॉर्ट में ठहरे हैं. जून को कम्पनी की तरफ से ‘तनाव प्रबंधन’ के किसी कार्यक्रम में भाग लेना है, कोर्स में जितने सदस्य भाग लेने वाले थे, उनमें से एक किसी कारणवश नहीं आ पाया, सो भाग्यवश उसे भी स्थान मिल गया है. उसने सोचा, निकट भविष्य में मृणाल ज्योति के कार्यक्रम के आयोजन में उसे इस कोर्स से कुछ सहायता मिल सकती है. आज के वातावरण में कौन तनाव से ग्रस्त नहीं है. आज कार्यक्रम का अंतिम दिन है. अभी कुछ ही देर में वे हाथी पर बैठ कर एक सींग वाला गैंडा देखने जायेंगे. कल उन्होंने स्मृति चिह्न के रूप में लकड़ी का एक बड़ा सा गैंडा खरीदा. तीन वर्षों के बाद जब असम से उन्हें विदा लेनी होगी तब नये घर में यह उन्हें यहाँ बिताये अद्भुत वर्षों की याद दिलाएगा.

काजीरंगा से लौटते हुए कल नाव के द्वारा ब्रह्मपुत्र को पार करके वे ‘माजुली’ गये थे. यह नदी से बना विश्व का सबसे बड़ा द्वीप है. और असम में शंकर देव द्वारा चलाये गये वैष्णव धर्म का केंद्र भी है. तीन सत्र देखे, पहले सत्र में जाकर असीम शांति का अनुभव हुआ. वातावरण में पवित्रता जैसे झर रही थी. एक जगह मुखौटे बनानेवाले कलाकारों से भेंट हुई, उन्होंने अभिनय भी दिखाया. काजीरंगा में किये डेढ़ दिन के कोर्स में भी कई बातें सीखीं. अब उन्हें सिलसिलेवार लिखकर जीवन में उपयोग के लिए तैयार करना है. जून और उसने एक सुंदर समरसता का अनुभव किया इस कार्यक्रम के दौरान. दोपहर के दो बजने को हैं. अभी कुछ देर पूर्व वह बाजार व पोस्ट ऑफिस से आयी है. यहाँ पहली बार रजिस्ट्री करवाई, भाईदूज का टीका भेजा है सभी भाइयों को. पत्र लिखने का अभ्यास छूटता ही जा रहा है, क्या लिखे, कुछ समझ नहीं आ रहा था, जल्दी में पत्र लिखे, समय से पहुंच जायेंगे ऐसी उम्मीद रखनी चाहिए. सुबह उठी तो हृदय शांत था. भीतर चाँद, तारे, आकश, सूर्य सभी के दर्शन हो रहे थे, कितना अद्भुत है भीतर का संसार और परमात्मा ! नहाकर बाहर गयी तो दो छोटी काली तितलियाँ बरामदे तक आकर छूकर चली गयीं, परमात्मा की कृपा असीम है. सुबह लिखा हुआ भी देखा भीतर ‘स्वधर्म’, आत्मा में निवास करना ही उसका स्वधर्म है. योग में स्थित हुआ ही अपने धर्म में स्थित रह सकता है. चार दिन बाद दीपावली का त्यौहार आने वाला है, ढेर सारी तैयारियां करनी हैं.
आज सुबह योग कक्षा के लिए स्कूल गयी, एक नन्ही बालिका ने एक पुष्प दिया, उसका मुखड़ा चमक रहा था और आँखों में कैसा अनोखा भाव था. कक्षा एक का एक छात्र बहुत अच्छी तरह ध्यान करता है. परमात्मा किस रूप में किसको अपनी तरफ खींच लेता है, कोई नहीं जानता. कल स्कूल में विज्ञान प्रदर्शनी है, उसे बुलाया है. आज दीपावली के लिए ढेर सारी खरीदारी की. दो दिन बाद ही घर में भोज है. कल छोटी बहन व उसके शेफ पतिदेव से बात की, उन्होंने दो-तीन नये पकवान बनाने की विधि बताई. सिया के राम के दो एपिसोड देखे, जो यात्रा के दौरान नहीं देख पायी थी. अंतिम विदाई से पूर्व सीता ने लव-कुश तथा राम को भी भोजन कराया ताकि उस भोज की स्मृति उन्हें उसके वियोग के दुःख के समय सांत्वना दे. आज के अंक में वह धरती में समा जाने वाली है. वह अपने पिता से भी मिलकर आती है तथा रानी के वस्त्र पहने भूमि में समाने वाली है. रामकथा की तरह सीता की कथा में भी लेखक अपनी कल्पना से नये रंग भरते रहते हैं. कौन जाने वास्तव में क्या हुआ था ? उसे ब्लॉग पर कुछ प्रकाशित किये कितने दिन हो गये हैं. अभी-अभी आकाश के चित्र फेसबुक पर प्रकाशित किये.
  

Monday, October 15, 2018

लहर और बादल



आठ बजने को हैं. आज भी मौसम ठंडा ही रहा. बदली बनी रही. वे अभी-अभी बाहर टहल कर आये हैं. आकश पर सफेद बादलों के मध्य पूर्णिमा से एक दिन पूर्व का सुंदर चाँद चमक रहा था. कल यहाँ लक्ष्मी पूजा का उत्सव है, उत्तर भारत में दीपावली के दिन यह उत्सव होता है. यहाँ उस दिन काली की पूजा होती है. सुबह वह मृणाल ज्योति गयी, चाइल्ड प्रोटेक्शन कमेटी की मीटिंग थी. बच्चों द्वारा रंगे कुछ सुंदर दीए खरीदे. कम्प्यूटर ठीक हो गया है, ब्लॉग पर नई पोस्ट प्रकाशित की. कल सुबह डिब्रूगढ़ डाक्टर के पास जाना है, जून के घुटने में दर्द है.
शनिवार व इतवार कैसे बीत गये पता ही नहीं चला. इस समय शाम के चार बजे हैं. जून एक दिन के लिए आज देहली गये हैं, देर शाम तक पहुंचेंगे, परसों लौटेंगे. परसों शाम उन्होंने यूरोप के सभी चित्र टीवी की बड़ी स्क्रीन पर दिखाए, भव्य इमारतें और सुंदर बगीचे. कल शाम को वह थोड़ा परेशान हो गये थे जब उसने कहा कि काजीरंगा जाने का समय वह केवल अपने लिए तय कर सकते हैं, अन्यों के लिए नहीं. बाद में उसे समझ में आ गया कि अपने-अपने संस्कारों के वशीभूत होकर वे क्रिया-प्रतिक्रिया करते हैं. उसके बाद उनके मध्य पुनः सकारात्मक ऊर्जा बहने लगी. ऊर्जा का आदान-प्रदान सहज होता रहे, यही तो साधना है. सुबह वे घर में ही कुछ देर टहले, डाक्टर ने उन्हें दो दिन आराम करने को कहा है, आज वह अपना घुटना आराम से मोड़ पा रहे थे. उनकी कम्पनी और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान कितना सहायक सिद्ध हुआ है, उसका मन कृतज्ञता से भर गया. कुछ देर पहले मृणाल ज्योति से ईमेल आया, टीचर्स की जानकारी थी. अब वे उनके लिए भली-प्रकार योजना बना सकते हैं. वे इस समय जहाँ खड़े हैं, वहाँ से उन्हें आगे लेकर जाना है. उसने क्लब की एक परिचित सदस्या को, जो असमिया लेखिका भी है, प्रेरणात्मक वक्तृता के लिए कहा है.
आज सुबह वह उठी तो आँखें खुलना ही नहीं चाहती थीं, कुछ देर के लिए ऐसे ही बैठ गयी, बाद में सुदर्शन क्रिया करते समय भी अनोखा अनुभव हुआ. शांति की अनुभूति इतनी स्पष्ट पहले कभी नहीं हुई थी. वह इस देह के भीतर प्रकाश रूप से रहने वाली एक ऊर्जा है जिसके पास तीन शक्तियाँ हैं, मन रूप से इच्छा शक्ति, बुद्धि रूप से ज्ञान शक्ति तथा संस्कार रूप से कर्म करने की शक्ति. यदि ज्ञान शुद्ध होगा, तो इच्छा भी शुद्ध जगेगी, और उसके अनुरूप कर्म भी पवित्र होंगे. उनके पूर्व के संस्कार जब जगते हैं और बुद्धि को ढक लेते हैं तब मन उनके अनुसार ही इच्छा करने लगता है. हर संस्कार भीतर एक संवेदना को जगाता है, उस संवेदना के आधार पर उनका मन विचार करता है. यदि संवेदना सुखद है तो वह उस वस्तु की मांग करने लगता है, यदि दुखद है तो द्वेष भाव जगाकर विपरीत विचार करता है. अपने संस्कारों के प्रति सजग होना होगा तथा नये संस्कार बनाते समय भी जागरूक होना होगा. वे स्वयं ही अपने भाग्य के निर्माता हैं. वह ऊर्जा ही इस देह पुरी का शासन करने वाली देवी है, उसे स्वयं में संतुष्ट रहकर इस जगत में परमात्मा की दिव्य शक्ति को लुटाना है.
आज स्कूल जाने के लिए तैयार हुई पर ‘बंद’ के कारण नहीं जा सकी, बच्चे शायद उसकी प्रतीक्षा करते होंगे, सोचकर एक पल के लिए मन कैसा तो हो गया पर ज्ञान की एक पंक्ति पढ़ते ही स्मृति आ गयी और शांति का अनुभव हुआ. वे स्वयं को ही भूल जाते हैं और व्यर्थ के जंजाल में पड़ जाते हैं. जीवन उनके चारों और बिखरा है और वे उसे शब्दों में ढूँढ़ते हैं. करने को कितना कुछ है, दीपावली का उत्सव आने वाला है, एक सुंदर सी कविता लिखनी है.

सागर की गहराई में शांति है,
अचल स्थिरता है, हलचल नहीं..
लहरें जो निरंतर टकराती हैं तटों से,
उपजी हैं उसी शांति से..
भीतर उतरना होगा मन सागर के
आकाश की नीलिमा में भी बादल गरजते है,
टकराते हैं, उमड़ते-घुमड़ते आते हैं और खो जाते हैं !
आकाश बना रहता है अलिप्त.
पहचानना है लहर और बादल की तरह मन के द्वन्द्वों को
जो जीवन का पाठ पढ़ाते हैं.
लहर और बादल को मिटने का दर्द भी सहना होगा
अवसर में बदलना होगा चुनौतियों को
और पाना होगा लक्ष्य-शाश्वत सत्य !   

Saturday, September 29, 2018

अंतर्दीप का प्रकाश



पिछले दो-तीन दिनों से कम्प्यूटर में कुछ दिक्कत आ रही थी. आज तो कोई भी फाइल खुल नहीं रही है. उसे यदि कम्प्यूटर पर काम करना है तो जून के आने की प्रतीक्षा करनी होगी. कुछ वर्ष पहले यदि ऐसा हुआ होता तो उसकी प्रतिक्रिया होती, भगवान ने ऐसा जानबूझ कर कराया है, ताकि वह अपने समय का और अच्छा उपयोग करने का तरीका सोच सके, किन्तु अब यह ज्ञात है कि भगवान कुछ नहीं कराते, वे ही प्रतिपल अपने भाग्य की रचना करते हैं. भगवान तो हर परिस्थिति का सामना करने की शक्ति देते हैं, ज्ञान देते हैं, वह प्रेम भी देते हैं. कभी आज हल्की बदली छायी है. स्कूल बंद है, अब पूजा के बाद खुलेगा. मृणाल ज्योति में टीचर्स ट्रेनिंग का कार्यक्रम होना वाला है. सम्भवतः तीसरे हफ्ते में होगा. आज एक सखी से इस बारे में बात की. उसे भी एक दिन की वर्कशॉप का आयोजन करना है. अच्छी तरह तैयारी करनी होगी. सबसे आवश्यक है उन सबके मध्य सहयोग की भावना को पैदा करना, वे अपनी कितनी ऊर्जा एक-दूसरे की कमियां बताने में ही खर्च कर देते हैं. अपने विचारों को बदलने से ही उनका जीवन बदल सकता है. सबके भीतर अंधकार व प्रकाश दोनों हैं, कभी-कभी गुणों का प्रकाश अहंकार के अंधकार से ढक जाता है, वे जिनसे भी मिलें उनके गुणों पर दृष्टि रहेगी तो उनका जीवन भी गुणों से भरता जायेगा ! उन्हें यह मानकर चलना होगा कि वे सभी एक ही धरती के वासी हैं, एक ही देश के, एक ही राज्य के, एक ही शहर के वासी हैं. उनकी एक ही पार्टी है, वे विरोधी पक्ष के नहीं हैं, जहाँ एक-दूसरे को बिना किसी कारण के ही गलत सिद्ध करना होता है. उनका एक ही लक्ष्य है, एक ही लक्ष्य के कारण एक-दूसरे के सहयोगी हैं. कल वे देवी दर्शन के लिए जायेंगे, आज शाम को प्राण प्रतिष्ठा होगी. आश्रम में भी नवरात्रि का कार्यक्रम हो रहा है, आज वह यू ट्यूब पर देख सकती है.

पूजा का उत्सव सोल्लास सम्पन्न हो गया. आज जून पुनः दिगबोई गये हैं. तीन दिन पूर्व वे एक रात्रि के लिए वहाँ गये थे, गेस्ट हॉउस में रुके. जिस दिन पहुंचे शाम को एक-एक कर सारे पूजा पंडाल देखे. अगले दिन नाश्ता करके वापस. मौसम आज भी बादलों भरा है. उसका गला परसों से थोड़ा सा खराब है, इतवार तक पूरी तरह ठीक हो जायेगा. अगले हफ्ते काजीरंगा जाना है. स्ट्रेस मैनेजमेंट पर किसी कार्यक्रम में जून को भाग लेना है. अगले माह होने वाली टीचर्स वर्कशॉप में उसे कुछ क्रियाएं करानी हैं, जिससे टीचर्स एक दूसरे को अच्छी तरह जानें, स्वयं को जानें. वे खुद को भी कहाँ जानते हैं. उनकी कमियां और खूबियाँ, दोनों से ही अपरिचित रह जाते हैं. उसने सोचा वह दो अध्यापकों को आमने–सामने बैठकर अपनी पांच-पांच कमियां और खूबियाँ बताने को कहेगी. सभी की पीठ पर एक पेपर पिन से लगा दिया जायेगा, सभी को उसकी खूबियाँ उस पर लिखनी हैं. कार्यक्रम आरम्भ होने पर सबसे पहले वह उन्हें एक कोरा कागज देगी जिस पर उन्हें कुछ भी अंकन करना है, एक चित्र कार्यक्रम की समाप्ति पर भी.  

दीवाली आने वाली है, साल भर वे इस उत्सव की प्रतीक्षा करते हैं. दशहरा आते ही दिन गिनने लगते हैं. घर की साफ-सफाई में जुट जाते हैं. पर्दे धुलवाए जाते हैं, पुराने सामान निकले जाते हैं. घर के कोने-कोने को चमकाया जाता है. दीवाली का उत्सव कितने संदेश अपने साथ लेकर आता है.  अहंकार रूपी रावण के मरने पर ही भक्ति रूपी सीता आत्मा रूपी राम को मिलती है, वैराग्य रूपी लक्ष्मण इसमें साथ देता है और प्राणायाम रूपी हनुमान परम सहायक होता है. भक्ति को लेकर आत्मा जब लौटती है तो भीतर प्रकाश ही प्रकाश भर जाता है.

Thursday, September 27, 2018

महालया अमावस्या


आज महालया है. नवरात्रि का समय संधिकाल है, संधि बेला है. ग्रीष्म खत्म होने को है सर्दियां शुरू होने को हैं. गुरूजी कह रहे हैं, इन दिनों में यदि कोई श्रद्धा से उपासना करेगा, तो गहन तृप्ति के रूप में उसका लाभ उसे अवश्य मिलेगा. इष्ट के प्रति एकनिष्ठ होकर यदि कोई नवरात्रि का अनुष्ठान करता है, भोजन को प्रसाद मानकर ग्रहण करता है, तब सहज आनंद के रूप में उसे पूजन का लाभ मिलेगा. मानव की देह मिली है तो उसका पूर्णलाभ लेना होगा. भावना और श्रद्धापूर्वक किया गया नवरात्रि पूजन उन्हें तृप्त कर देता है. साधक को ज्ञान प्राप्त करना है फिर सब कुछ छोड़कर शरण में आ जाना है.
आज प्रथम नवरात्र है. मन में एक विचित्र शांति का अनुभव हो रहा है. मन जैसे पिघलना चाहता है. अस्तित्त्व के चरणों में बह जाना चाहता है. परमात्मा इतना उदार है और अपार है उसकी कृपा..उसके प्रति प्रेम की हल्की सी किरण भी सूरज की खबर ले आती है एक न एक दिन.
आज मौसम गर्म है. नैनी घर की सफाई में लगी है, अभी यह हफ्ता लगेगा पूरा घर साफ होने में. आज तीसरा नवरात्र है. दोपहर को अयोध्या काण्ड में आगे लिखना आरम्भ किया पर पूरा नहीं किया. कुछ देर पतंजलि योग सूत्र पर एक सखी से कल लाई किताब पढ़ी. जून की यूरोप से लायी काफी पी.
जीवन को सुंदर बनाने के लिए दो वस्तुओं की आवश्यकता होती है. ज्ञान तथा ऊर्जा, इसीलिए वे शिव और शक्ति दोनों की आराधना करते हैं. दुर्गापूजा के नौ दिनों में प्रथम तीन दिनों में काली की पूजा होती है, जो तमोगुण का प्रतीक है, फिर अगले तीन दिन लक्ष्मी की तथा अंत में सरस्वती की, जो रज तथा सत गुण की प्रतीक हैं. उनके भीतर की ऊर्जा तीनों गुणों से प्रभावित होती है ! कभी वे तमोगुण के शिकार हो जाते हैं, तो कभी सतो या रजोगुण से. ज्ञान की देवी सरस्वती की कृपा तभी होगी जब तमोगुण से मुक्त होकर वे क्रियाशील बनते हैं, सौन्दर्य का सृजन करते हैं. अस्तित्त्व प्रतिपल अपना सौन्दर्य लुटा रहा है, वही सृजन उसका ज्ञान है, ज्ञान से ही प्रकटा है और ज्ञान इसके बाद भी अक्ष्क्षुण है. जड़ता को हटाकर क्रियाशील होने के बाद जो विश्रांति का अनुभव होता है, वही तृप्त करने वाला है !
आज स्कूल जाना है. ग्रैंड पेरेंट्स डे पर कुछ बातें जो उस दिन लिखी थीं, उनके साथ बांटने के लिए. बातें जो वे सब जानते हैं पर समय आने पर याद नहीं रहतीं. दादा-दादी के महत्व को कौन नकार सकता है एक बच्चे के जीवन में, पर यह बात माता-पिता को समझ में नहीं आती. उन्हें लगता है बच्चे पर पूर्ण रूप से उनका ही अधिकार है और उसकी परवरिश से जुड़ा हर फैसला केवल वे ही ले सकते हैं. जब समझ आती है तब बहुत देर हो चुकी होती है. जिसकी बुद्धि खुल गयी है, जो सभी को अपना अंश मानता है, वह तो प्रेम के किसी भी रूप का सम्मान करेगा. प्रेम बाँटने और और प्रेम स्वीकारने में कंजूसी करते हैं जो, वे उस महान प्रेम को महसूस नहीं कर पाएंगे. माता-पिता के प्रति कृतज्ञता जब तक भीतर महसूस नहीं होगी, तब तक उनके स्नेह की धारा में वे भीग नहीं सकते. जीवन उन्हें चारों और से पोषित करना चाहता है. उनके पूर्वजों का रक्त उनके भीतर बह रहा है. वे बहुत संकुचित दृष्टिकोण रखते हैं और तात्कालिक हानि-लाभ को देखते हैं, अपने अतीत और भविष्य की तरफ जिसकी नजर होगी, वह पूर्वजों का सम्मान करेगा. आज की उसकी वक्तृता यकीनन दिल से ही बोली जाएगी. कागज पर लिखा वहीं का वहीं रह जायेगा.

Tuesday, September 25, 2018

जय हनुमान ज्ञान गुणसागर



शाम के पांच बजे हैं. सुबह सवा ग्यारह बजे नींद छाने लगी, कुछ देर सोयी. दोपहर बाद बैठे-बैठे कमर में दर्द सा महसूस हुआ. मकर आसन में लेटकर एक सखी से फोन पर कुछ देर बातचीत की और दर्द गायब, प्रकृति सारे उत्तर अपने भीतर ही छिपाए है. सखी ने बताया, उसकी बाहरवीं में पढ़ने वाली बेटी को वह अगले वर्ष हॉस्टेल में रखकर पढ़ाना चाहते हैं वे लोग, पर वह घर पर रहकर पढ़ना चाहती है. कल छोटी भांजी का जन्मदिन है, कविता लिख कर भेजी है उसके लिए. जून का फोन आया, उसके लिए नया सूटकेस खरीदा है, पुराना निकाल देना चाहिए. दीवाली की सफाई भी शुरू करनी है परसों से. सुबह भ्रमण के लिए गयी तो भीतर वाले की बात सुनी. अब कुछ भी याद नहीं है. परमात्मा बहुत धीरे बोलता है, उन्हें चुप होकर उसे सुनना है. उसका साथ शक्ति से भर देता है, उससे योग लगाकर वे प्रेम, शांति और आनन्द का अनुभव करते हैं. उस शक्ति और ज्ञान का उपयोग फिर जगत में करना है, जो भी मिले उसे शुभ भावनाएं देकर.. उसके प्रति शुभकामना हृदय में भरकर ! यदि कोई आत्मस्थ रहे तो सहज ही उससे शुभ तरंगें निकलेंगी. उनके हाथों से से निरंतर ऊर्जा प्रवाहित हो तरही है, यदि मन शांत होगा स्थिर होगा तो प्रेम की तरंगें प्रवाहित होंगी वरना..
आज सुबह कितनी अनोखी थी, ठीक चार बजे थे, एक आवाज आई जो किट से मिलती-जुलती थी, फिर भीतर शब्द कौंधा, हनुमान या अनंत..या ऐसा ही कुछ, हनुमान तो स्पष्ट था. एक अद्भुत भावना से तन-मन स्पन्दित हो गया. हनुमान रामभक्त हैं तथा राम के भक्तों की सहायता करते हैं, एक सखी का स्मरण हो आया, उसने कहा था, वह हनुमान को मानती है और हनुमान चालीसा का पाठ करती है, उस समय उसे कहा था, भगवद गीता भी पढ़ा करो, हनुमान चालीसा तो ठीक है. मुरारी बापू का भी स्मरण हो आया, वह अपनी कथा के आयोजन में हनुमान का विशाल चित्र लगते हैं, राम का नहीं. परमात्मा कितने-कितने उपायों से उन्हें जगाने आता है, वह उन्हें प्रेम करता है. आज स्कूल में हनुमान आसन कराया बाद में ध्यान भी. वापस आकर दो नई पोस्ट लिखीं. भीतर कोई प्रेरणा दे रहा था जैसे. जून लौट आये हैं, उनका स्वास्थ्य अभी भी पूर्ण रूप से ठीक नहीं हुआ है, काम बढ़ गया है, अपने लिए बिलकुल समय नहीं निकाल पाते. शाम को महिला क्लब की मीटिंग है. अभी एक घंटा ध्यान करना है और स्वयं को ऊर्जा से भरना है.

आज सुबह उठने से पूर्व आज्ञा चक्र पर ज्योति दिखाई दी, जलती हुई लौ, परमात्मा हर रोज कोई न कोई उपहार देकर उठाता है. वह उनके सच्चा सुहृद है, सच्चा मीत है. आज आयल के अस्पताल की तरफ से आयोजित वाकाथन में गयी. हर समय कोई न कोई सुगंध साथ रहती है, कभी जाने-पहचानी कभी नामालूम सी सी कोई खुशबू...परमात्मा एक रहस्य है और जो उसे प्रेम करे, उसे भी एक रहस्य बना देता है. आज ओशो का विज्ञान भैरव से लिया एक ध्यान किया. किसी वस्तु को प्रेम से देखो और उस वस्तु में ही सत्य की झलक मिलती है. वे कहने को तो स्वयं से प्रेम करते हैं पर अपनी देह के साथ कितनी नाइंसाफी करते हैं. न खाने योग्य पदार्थ खाकर वे उसे सताते हैं. देह की हर कोशिका एक प्रेम भरी दृष्टि की प्रतीक्षा में है. उनका मन भी विश्राम चाहता है, पर वे किसी न किस उधेड़बुन में उसे लगाये रखते हैं. चौबीस घंटे धडकता हुआ उनका हृदय भी सुकून ही तो चाहता है. पेट की मांग है, शीतलता, वह मिर्च-मसालों से जल रहा है. प्रेम की धार यदि निरंतर बहनी हो तो चाह के पत्थर मार्ग से हटाने होंगे.