Thursday, July 9, 2020

भोर का आकाश


कल शाम बच्चों के स्कूल में अध्यापिकाओं का साक्षात्कार था। उसे भी बुलाया गया था, इंटरव्यू लेने का पहला और एक बिलकुल नया अनुभव था और स्वयं को परखने का एक स्थल भी. मेज के इस तरफ बैठी है, यह भाव आया तो भीतर के सूक्ष्म अहंकार का बोध हुआ. प्रश्न पूछते समय खुद को ही लगा, वाणी में अभी भी मधुरता नहीं आयी है. एक क्षण के लिए भीतर हलचल भी हुई, जो बाद में व्यर्थ ही प्रतीत हुई. परमात्मा उन्हें उनसे बेहतर जानते हैं. वह उन-उन परिस्थितियों में भेजते हैं जहाँ से वे चाहें तो सीखकर आगे बढ़ सकते हैं. यह सृष्टि उसी परमात्मा का विस्तार है, वह सर्वज्ञ है और यदि कोई आत्मा उसकी ओर कदम बढ़ाती है तो वह उसे स्वीकार करता है. जैसे धूल से सन हुआ शिशु माँ की तरफ हाथ बढ़ाता है तो माँ उसे झट गोद में उठा लेती है, वह अपने वस्त्रों की परवाह नहीं करती. शिशु को साफ-सुथरा करती है, वैसे ही परमात्मा उन्हें निखारता है. वह प्रेरणाएं भेजता है  जिन्हें वे सुनी-अनसुनी कर देते हैं, पर वह असीम धैर्यशील है. वह बार-बार अपनी ओर खींचता है, क्योंकि उनकी अभीप्सा उसने भांप ली है. संस्कारों के कारण या पूर्व कर्मफल के कारण वे उस पथ से विमुख हो जाते हैं ,पर उसका हाथ उन्हें कभी नहीं छोड़ता. कल एक स्वप्न में स्वयं को कहते सुना कि  जून के जीवन में सच्चाई बढ़ रही है. वह भोजन के प्रति भी पहले के जैसे आग्रही नहीं रहे. परमात्मा उनके हृदय पर भी अपना अधिकार कर रहा है. आज दोपहर मृणाल ज्योति जाना है, सेवाभाव से बच्चों को पढ़ाना है. संध्या को श्लोक उच्चारण का अभ्यास करना है. शेष समय में लिखना-पढ़ना. व्यर्थ अपने आप छूट जाता है जब वे सार्थक  को पकड़ लेते हैं. 

घर के बायीं तरफ वाले मैदान में बीहू नृत्य की शूटिंग चल रही है. कभी संगीत की आवाज आती है कभी ‘कट’ की और सब थम जाता है. छोटी लड़कियाँ भी हैं और बड़ी भी. अप्रैल में तो यहाँ चारों ओर ढोल की थापें सुनाई देती हैं, इस बार मार्च से ही बीहू आरंभ हो गया है. जून दो दिन के लिए आज टूर पर गए हैं. दोपहर को क्लब गयी थी,  शाम के आयोजन की तैयारी चल रही थी, एक अन्य सदस्या भी आयी थी, जो पहले बहुत बीमार रहा करती थी, एक वर्ष पूर्व योग करना आरंभ किया और अब पूर्ण स्वस्थ है. उसने ज्ञान के पथ पर कदम रख दिया है और तेजी से आगे बढ़ रही है.  नैनी भी ढेर सारे फूल लेकर वहाँ आयी और चार गुलदान सजा दिए, वह इस कार्य में दक्ष हो गयी है. घर पर भी शाम के लिए उसने कुछ व्यंजन बनाये हैं.अगले हफ्ते महिला क्लब की तरफ से कम्पनी की एक महिला उच्च अधिकारी का विदाई समारोह है. वह उनसे वर्षों पहले एक बार विदेश में मिली थी. उसके बाद दो-तीन बार क्लब की मीटिंग में. नई प्रेसीडेंट ने कहा, उनके लिए कुछ लिखना है. 

और अब उस पुरानी डायरी का एक पन्ना - रात्रि के ग्यारह बजने वाले हैं. सुचना और प्रसारण मंत्रालय के ‘नाटक व गीत विभाग’ के ‘दुर्गे कला केंद्र’ के कलाकारों का नृत्य-गीत देखकर बहुत अच्छा लगा. सचमुच नृत्य और संगीत में जादू है, लोक नृत्य का तो कहना ही क्या, उसके पाँव थिरकने लगते हैं धुन सुनते ही, अफ़सोस कि उसने कक्षा सात के बाद कभी नृत्य नहीं किया. कल उसे दादाजी के घर जाना है. किताबें और एक ड्रेस लेकर जाएगी. फिर उसके कमरे में छोटी बहन रहेगी. परीक्षाएं इतनी नजदीक हैं और उसकी पढ़ाई अभी तक गति नहीं पकड़ पायी है. खैर ! अब वह क्या कर सकती है, ऐन वक्त पर उसका पागल मन धोखा दे जाता है. उसे तो केवल नीला आसमान, फूल, नदी, छोटे बच्चों की मुस्कान... देखकर ही ख़ुशी मिलती है. 

बिलकुल वही अनुभूति, बल्कि उससे भी अच्छी ! इस समय वह दादी जी के घर पर है. आस पड़ोस की छोटी-छोटी बच्चियाँ मिलने आयीं, ये सब बहुत अच्छी हैं, भोली.. मगर दुनिया इन्हें ऐसा रहने कहाँ देगी. वह सबसे छोटी रेणु उसने कैसा चुटकुला सुनाया.. एक ने कहा, आप क्यों आजकल हर वक्त सपने बुनती हैं ! ...और दादाजी ने भी एक चुटुकुला सुनाया, कहा, वे वैष्णव हैं सो एक अंडा खाएंगे और फूफा जी यदि आएं तो उन्हें दो खिला देना. कल सम्भवतः बुआ जी आएं. शाम को उसकी घड़ी खो गयी, सारा कमरा ढूंढ लिया तो मिली बड़े सन्दूक के पीछे. चचेरे भाई ने कहा, एक दिन पता चल जाये कि सुबह पांच बजे आकाश में तारों की स्थिति या प्रकाश कितना है तो रोज समय पर उठने में आसानी होगी. उसने सोचा, वह भी कल जल्दी उठेगी और आकाश दर्शन करेगी. 

Tuesday, July 7, 2020

समाधि पाद


दोपहर के तीन बजे हैं. टीवी पर नारी शक्ति पर कार्यक्रम आ रहा है. कैप्टन क्षमता वाजपेयी तीस वर्ष से जहाज उड़ा रही हैं. एक अन्य महिला विश्व की सात ऊंची चोटियों में से छह चोटियाँ फतह कर चुकी हैं. कल महिला दिवस था. ब्लॉग्स पर नारी शक्ति पर लिखा, कुछ पढ़ा भी. वाकई नारी हर क्षेत्र में बढ़ रही है. एक महिला उत्तर-पूर्व से आयी  हैं जिन्होंने वहां की महिलाओं के लिए सहायता केंद्र बनाया है. एक जन-प्रतिनिधि हैं, एक अन्य दिव्यांग हैं. वह अन्य दिव्यांग लोगों की मदद भी करती हैं. कल सुबह एक रिजॉर्ट जाना है, जहां भूत पूर्व अध्यक्षा के लिए पिकनिक कम लंच है. ज्यादा दूर नहीं है, बीस-बाइस महिलाएं आने वाली हैं. प्रकृति के सान्निध्य में भोजन और गीत-संगीत का कार्यक्रम होगा. 

आज दिन भर व्यस्तता बनी रही. सुबह चार बजे वे उठे थे और सीधे रात को नौ बजे ही विश्राम का समय मिला. सुबह नौ बजे ही रिजॉर्ट पहुँचना था. दोपहर बाद लौटे. कार्यक्रम अच्छा रहा. सन्डे योग कक्षा के बच्चे प्रतीक्षारत थे. शाम को एक महिला मृणाल ज्योति के लिए कुछ सामान लेकर आ गयी. उनका तबादला हो गया है. लोग जब घर बदलते हैं तो काफी सामान छोड़ना ही पड़ता है. उसने भी अभी से हर हफ्ते कुछ न कुछ देने का क्रम आरंभ कर दिया है. पुराणी वाशिंग मशीन और छोटा टीवी लेकर जाने वाली है. वर्षों पहले जब विवाह के बाद नया घर बसाया था तो हर माह वे कुछ न कुछ सामान खरीदते थे, अब फिर एक बार नया घर बसाना होगा, नन्हे का कहना है कि उस घर में सब कुछ नया ही हो, इतने वर्षों तक जो सामान इस्तेमाल करते आये हैं पुराना हो ही गया है, काफी कुछ छोड़ा जा सकता है. 

कल रात सोने से पूर्व उसने पतंजलि का ‘समाधि पाद’  सुना. मन समाहित हो गया था. सुबह उठने से पूर्व अनुभव हुआ जैसे परमात्मा कुछ संदेश दे रहा है. स्वप्न में वह छिपा हुआ नहीं रहता, वर्षों पूर्व उसने ही नूना की कलम से लिखवाया था. वह हजार हाथों वाला है और हजार नेत्रों वाला भी. उससे कुछ भी छिपा नहीं है. एक जगह देखा उसके भोजन में एक बाल है जो लाख निकालने पर भी नहीं निकल रहा है. यह उस व्यसन की ओर इशारा है जो उसके आहार को दूषित कर रहा है. एक स्वप्न में दाँत में दर्द होते हुए देखा, सम्भवतः यह भविष्य के लिए चेतावनी थी. एक जगह माइक लगाकर  (एओएल में) लोगों को भाषण देते हुए सुना पर लोग अपनी ही बातों में लगे थे. एक परिचिता को भी देखा एक स्वप्न में, वह दूर से मिलने आती है और गले लगकर रोने लगती है. एक साधक को सुख का प्रलोभन आत्मा के पद से नीचे उतार देता है. जो स्वयं से जुड़ना चाहता है उसे संसार से सुख की कामना का त्याग करना होगा, इसके परिणाम में दुःख ही मिलता है. हर सुख एक आभास मात्र ही है, जो अपने पीछे दुःख की एक लम्बी श्रृंखला छिपाये है. परमात्मा ने उन्हें अकेला नहीं छोड़ा है. वह हर जीव को, हर आत्मा को अनेक उपायों से संदेश भेजता है. तितलियों, कीट-पतंगों के माध्यम से, पालतू पशुओं के माध्यम से बादल व फूलों और स्वप्नों के माध्यम से वह न जाने कितने संदेश उसे भेज चुका है. वह उसे स्वाधीन और सुखी  देखना चाहता है. वह उनसे प्रेम करता है. उसके सिवाय इस जग में आत्मा का सुहृद कौन हो सकता है ? उसकी वाणी को अनसुना नहीं किया जा सकता, वह स्पष्ट वाणी बोलता है. 

उस डायरी में पढ़ा, एक निकट संबन्धी के बारे में लिखा था- वह स्वस्थ नहीं है. इसके कुछ  कारण जो ऊपर से दिखाई पड़ते हैं, उसे भी ज्ञात होंगे पर उन्हें दूर करने का उसने सही रूप में कोई प्रयत्न नहीं किया. इसमें उसकी भूल है. वह प्रसन्नचित्त रहकर अपने आपको चुस्तदुरुस्त व स्वच्छ रखकर अपने को यकीन दिलाये कि वह स्वस्थ है, उसे कुछ नहीं हुआ तो बात बन सकती है, पर इसके बजाय वह सुबह सात बजे बिस्तर छोड़ता है, घूमने नहीं जाता. जल्दी से नहाकर चाय-नाश्ता करता है फिर कमरे में बैठ जाता है, किताबें पढ़ता है, बातें करता है, रेडियो सुनता है. वह हर समय तैयार नहीं रहता, कोई काम कहे तो उसे कुछ देर लगती है उठने में. उसे अपना व्यवहार, अपनी रुचियाँ कुछ बदलनी होंगी. जासूसी नॉवल पढ़ने छोड़ने होंगे. साथ ही उपदेशात्मक पुस्तकें भी छोड़ देनी चाहिए. उसे सिर्फ पत्रिकाएँ पढ़नी चाहियें हल्की-फुलकी मगर स्तरीय. उसे बड़ों का विश्वास जीतना होगा, जिसे वह खो चुका है. वे जो कहें उसे करना होगा तभी वह उनका प्रिय बन सकता है. उसे अपने को खुश रखना सीखना  होगा. 

ये सारी बातें उससे कभी नहीं कहीं, पर विचार सिर्फ बोलकर ही तो प्रेषित नहीं किये जाते ! 

Monday, July 6, 2020

ठंड से सिकुड़े फूल


शाम के सवा चार बजे हैं, बगीचे में झूले पर बैठकर मन्द हवा के झोंको और चिड़ियों की चहकार के मध्य लिखने का अवसर कभी-कभी ही मिलता है. जून अभी तक आये नहीं हैं, उनका रात्रि भोजन भी बाहर ही होने वाला है सो किचन में भी कोई काम नहीं है. दोपहर को मोदी जी को सुना जब वह मजदूरों के लिए पेंशन स्कीम की योजना का वर्णन दे रहे थे. उनके दिल में वंचितों के लिए बहुत दर्द है. देश के हर व्यक्ति को वह अपने परिवार का एक अंग ही मानते हैं. वह उस राजा की तरह हैं जो अपनी प्रजा से बहुत प्रेम करता है. अगले चुनावों में बीजेपी ही जीतने वाली है. इसमें किसी को कोई शक नहीं रहना चाहिए. जन औषधि के कारण देश में सस्ती दवाएं मिलने लगी हैं. नए एम्स भी बन रहे हैं. प्रधानमंत्री रोज ही नई-नई योजनाएं आरंभ कर रहे हैं. सस्ती स्वास्थ्य सुविधाएँ देश में मिल रही हैं. पुलवामा में हुए आतंकी हमले पर भी विपक्ष संदेह करने से बाज नहीं आ रहा है. पाकिस्तान में हुई एयर स्ट्राइक पर तो सवाल उठ ही रहे थे. पिछले दिनों काफी विचारकों को सुना. भारत-पाकिस्तान के बिगड़ते हुए संबंधों का कारण इस्लामिक कट्टरवाद ही है. यह किसी भी मुल्क को आगे बढ़ने से रोकता है. महीने के तीसरे सप्ताह में प्रेसिडेंट का फेयरवेल है, जिसमें  योग साधिकाओं को श्लोक पाठ प्रस्तुत करना है आज से वे रिहर्सल करेंगी. 

संध्या पूर्व का समय है, अभी अभी वे लॉन में टहलकर आये हैं. मौसम आज खुला है, लाल डूबता सूरज पेड़ों के पीछे से झाँक रहा था कुछ समय पूर्व. घास भीगी थी. एजेलिया का पौधा मेजेंटा फूलों से भर गया है जो अपनी ओर खींचता है. आज सुबह नैनी का पति अपने पिता को स्थानीय अस्पताल ले गया. पता चला, गले में कैंसर के कारण डिब्रूगढ़ मेडिकल कालेज ले जाना होगा. उसने ईश्वर से उनके लिए प्रार्थना की. दोपहर को मृणाल ज्योति गयी, एक अध्यापिका का विदाई भोज था, वह बहुत रो रही थी. इंसान का दिल बहुत कोमल होता है वह नफरत को सह लेगा पर प्रेम में पिघल जाता है. क्लब के एक सिलाई-कढ़ाई प्रोजेक्ट में एक सदस्या से मिली, वह बहुत ऊर्जावान है. उसने एक लकड़ी के शोकेस में प्रोजेक्ट का मोटिफ व अन्य नमूने लगाए हैं. आज सुबह उठने से पूर्व मन में एक मंथन चल रहा था, आत्मिक शक्ति को बढ़ाने के लिए क्या करना चाहिए. अपने सुख को किसी वस्तु, व्यक्ति या परिस्थिति पर आश्रित नहीं रखना चाहिए, सबसे पहले तो यही संदेश मिला. साधक को हर पल सजग रहने की आवश्यकता है. परमात्मा सदा उसके साथ है, वह उसे स्वयं से दूर जाने नहीं देता. वह अकारण दयालु है, सखा है, सुहृद है. राजनीति के चक्करों से भी साधक को दूर ही रहना चाहिए. देश में चुनाव होने वाले हैं, बहुत तरह के संदेश दिए जा रहे हैं. जो भी होगा, भला होगा, इस विश्वास के साथ अपने सहज कर्मों को करते जाना है. परसों महिला दिवस है. महिलाएं आज किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं. सेना हो या सिविल दोनों में ही महिलाएं आगे बढ़ रही हैं. नए घर में पेटिंग का काम आरंभ हो गया है. 

उस पुरानी डायरी में पढ़ा, दादाजी ने अपनी बहन के बारे में बताया, अभी तक वह उनसे नाराज हैं. किस तरह उन्होंने अपने पति के मरने पर उन्होंने दूसरा विवाह किया तो लोगों ने इन्हें कहा, गोली चला दो; पर उनके पिता जी ने कहा कि नहीं, जान लेने से कोई फायदा नहीं, ऐसी घटनाएं और भी हो रही हैं. पिता समझदार निकले. सात भाइयों में से एक को फाँसी भी हो जाती तो भाइयों को दुःख न होता. दादाजी ने एक और मजेदार बात बताई, दादी जी को देखने के लिए नाइन को एक रुपया दिया था उस जमाने में. 

आगे लिखा था, तुम्हें जिसके प्रति आस्था हो उसके प्रति ईमानदार रहो, पर अपनी भूलों पर... उनके लिए दुखी होने की आवश्यकता नहीं है, वे अतीत की वस्तुएं हैं, मृत हैं, वर्तमान में तुम क्या हो, महत्व इस बात का है और इस बात का भी कि भविष्य में तुम क्या होगी ! यदि कोई तुम्हें उन बातों का स्मरण भी दिलाये तो चुपचाप सुन लो... न प्रतिवाद न पश्चाताप, वे उन दिनों के फूल थे और ये आज के फूल हैं, फिर इससे क्या अंतर पड़ता है कि फूल किस रंग के हैं. सर्दी के कारण सारे गेंदे के फूल अपनी आकृति खो बैठे हैं तो क्या वे फूल नहीं हैं ? सो यह बिलकुल व्यर्थ की बात है कि पिछले वर्ष तुमने खिचड़ी खायी थी या पुलाव ! 

अवश्य कुछ हुआ होगा पर उसके बारे में कुछ नहीं लिखा है. 

Sunday, July 5, 2020

समर स्मारक

पिछले तीन दिन पता नहीं कैसी व्यस्तता बनी रही. देश में तनाव का वातावरण है. कल सुबह भारतीय मिराज विमानों ने पाकिस्तान में घुसकर आतंकवादी ठिकानों पर बम बरसाए. आज सुबह उनका जहाज भारत में घुस आया. युद्ध जैसे हालात हो गए हैं. पता नहीं कल का सूरज क्या लेकर आएगा. प्रधानमंत्री की रात कैसे बीत रही होगी, पता नहीं. देशवासियों की शुभकामनायें उनके साथ हैं. जून कल गोहाटी गए हैं, आज एक सहकर्मी के पुत्र के विवाह में जायेंगे. अभी कुछ देर पूर्व नन्हे से बात हुई, देश के हालात ही चर्चा का मुख्य विषय थे. उसने बताया, कल या परसों से नए घर में पेंटिंग का कार्य आरंभ हो जायेगा. वे अप्रैल या मई में वहाँ जायेंगे. आज सुबह पिताजी से बात हुई, मुख्यतः वही बात थी.  ईश्वर सभी को सदबुद्धि दे और युद्ध टले.  
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विंग कमांडर अभिनंदन पाकिस्तान में फंस गए हैं. 
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विंग कमांडर अभिनंदन आज पाकिस्तान से लौट रहे हैं. 
भारत पाकिस्तान सीमा पर गोली-बारी जारी है. कल विंग कमांडर के वापस आने पर पूरे भारत में जश्न का माहौल था. लोग शहीदों की मृत्यु का दुःख कुछ भुला पाए हैं. आज नयी प्रेसीडेंट की अध्यक्षता में महिला क्लब की पहली मीटिंग हुई. एक वर्ष के अंदर वह और नई प्रेसीडेंट भी चली जायेंगी, फिर कोई और कमान संभालेगा। पिताजी से बात हुई, वह घर पर अकेले थे, भाई परिवार सहित घूमने गया है, उसके दामाद का जन्मदिन है. 

टीवी पर दिल्ली में बने समर स्मारक को दिखाया जा रहा है. जहाँ आजादी के बाद से अब तक शहीद हुए 26000 सैनिकों के नाम लिखे हैं. पाकिस्तान से भारत का अनेक बार युद्ध हो चुका है, वह कश्मीर को लेना चाहता है और भारत कश्मीर को अपना अटूट अंग मानता है. संभव है आने वाली पीढ़ियाँ इस बात को समझें और एक दिन वहाँ शांति हो जाये. 

जियें तो सदा उसी के लिए यही अभिमान रहे यह हर्ष 
निछावर कर दें हम सर्वस्व हमारा प्यारा भारतवर्ष 

आज वर्षों के बाद ‘हम लोग’ देखा. दोपहर को बच्चों को शिव का चित्र बनाना सिखाया, कल शिवरात्रि है वे आर्ट ऑफ़ लिविंग सेंटर जायेंगे. 

उस डायरी में उस दिन की सूक्ति थी - संघर्षों से भागना ही कायरता है. जब पढ़ा तो लगा जैसे सारा माहौल ही बदल गया हो. दिन भर वह खुश रही पर एक हल्की सी कसक रही इस बात की, कि इस ख़ुशी के पीछे क्या बात है ! कल अंतिम बार कालेज जाना है, फिर तो फीस जमा करने या प्रवेश पत्र लेने ही जाना होगा उसके बाद परीक्षा देने. कल दादाजी से मिलने भी जाना है, चचेरी बहन प्रतीक्षा करती होगी. सुबह जल्दी उठी, घूमने भी गयी, सबसे अच्छे पल होते हैं वे सुबह की उजली-उजली हवा में सूरज के आगमन की प्रतीक्षा करना और फूलों से गुफ्तगू करना. न कोई चिंता न फ़िक्र. हर रोज सुबह आती है उसे मालूम कहाँ था ! 

Friday, July 3, 2020

भीगी काली सड़कें



आज सुबह भी वर्षा हो रही थी, वे छाता लेकर टहलने गए और घर के आसपास ही रहे. वर्षा और अँधेरे के कारण सड़क एकदम चमकदार व काली दिख रही थी. पांच बजे ही खम्भों पर लगी बत्तियां बुझा दी जाती हैं. सुबह का भ्रमण दिन को एक सुंदर आभा से भर जाता है. एक परिचित का फोन आया, वह मृणाल ज्योति के बच्चों के लिए एक गीत लिख रही है, अगले सप्ताह सिखाएगी. आज दोपहर वह गयी थी वहाँ, आते आते शाम हो गयी; पहले हिंदी कक्षा, फिर मीटिंग और अंत में वहाँ भी प्रेसीडेंट व उनके पतिदेव की विदाई का कार्यक्रम. सभी कुछ ठीकठाक हो गया. वापस आकर रात के लिए भोजन बनाया और फिर क्लब में मीटिंग थी, वर्किंग प्रेजिडेंट को कार्यभार सौंपा गया. वापस आयी तो जून ने कहा, कल तो कहीं नहीं जाना है ? पिछले तीन दिन से शाम को कुछ न कुछ कार्यक्रम था. कल शाम भी एक पार्टी है थैंक्सगिविंग पार्टी पर वह नहीं जाएगी. 

अभी-अभी स्कूल से आयी है, बोलने व सुनने में असमर्थ इन बच्चों को भाषा ज्ञान देना अपने आप में एक नवीन अनुभव है. उन्हें अक्षर ज्ञान हो गया है पर शब्दों का निर्माण कैसे होता है और उनका अर्थ क्या है , यही समझाना है. जब वे एक शब्द गढ़ लेते हैं तो बहुत खुश होते हैं. आज सुबह ब्लॉग पर लिखने बैठी तो स्वयं ही भीतर से विचार आते गए, परमात्मा की कृपा असीम है, वह अनंत है और उसका सान्निध्य भी अनंत है, वे ही हैं जो उससे पीठ कर लेते हैं. 

समय हो गया है, जून अभी तक लंच के लिए नहीं आये हैं, फ्राइडे मीटिंग में अक्सर देर हो जाती है. आज भी बदली छायी है, फरवरी में एक बार फिर ठंड लौट आयी है. कल रात देर तक नींद नहीं आयी, आयी भी तो कोई स्वप्न चल रहा था. सुबह उठकर भगवान को प्रणाम करने गयी तो मुख पर सहज प्रसन्नता नहीं थी, दोनों हाथों ने चेहरे को ढक लिया, यह सब जैसे घट रहा था और कोई इसे देख रहा था. पानी पीते समय बाबा रामदेव का एक वाक्य सुना और सहजता लौट आयी, वह अपने शुद्ध स्वरूप में टिकने की बात कह रहे थे. आज महीनों बाद कॉन्ट्रैक्टर उस कागज पर हस्ताक्षर करवाने आया जिस पर लिखा था घर में रंग-रोगन हुआ था. इतने दिनों तक क्या उसका पेमेंट नहीं हुआ होगा, इसीलिए ये लोग भी मजदूरों को दिहाड़ी देने में देर करते हैं. आज ध्यान में उसकी चेतना ने गुरूजी की आवाज में संदेश  दिया, जिसे अपने ही मन का खेल जानकर उसने हँसी में उड़ा दिया. मन की ताकत का अंदाज कोई नहीं लगा सकता. इस मन के पार जाकर टिके रहना वीरों का काम है. यदि चाहे तो एक दिन मन के पार जाकर उसमें टिके  रहना उसके लिए भी सहज होगा ... चाहे तो इसी क्षण भी !  

आज जून का लंच दफ्तर में है, एक कर्मचारी की विदाई पार्टी है. कुछ देर पूर्व मोदी जी को सुना. उनके बारे में पाकिस्तानी मीडिया पर भी कुछ बातें सुनीं. उनके आत्मविश्वास और देशप्रेम के जज्बे को सभी सलाम करते हैं, कभी उन्हें कट्टरवादी माना जाता था पर वे ‘सबका साथ-सबका विकास’ चाहते हैं उनका कोई और हेतु नहीं है. वह हृदय से भारत की सेवा करना चाहते हैं, क्योंकि उन्होंने जीवन का मर्म समझ लिया है. हर ज्ञानी अपने जीवन को लोकसंग्रह में लगाना चाहता है क्योंकि इसके सिवा वह कुछ और कर भी तो नहीं सकता. गुलाब खिलेगा तो सुगन्ध फैलाएगा, आत्मा जगेगी तो प्रेम फैलाएगी ! 

उस पुरानी डायरी में समय पर पत्र न आने पर उदासी भरा एक प्रलाप पढ़ा, और किसी कवि की कुछ पंक्तियाँ भी, आज उसे हँसी आ रही है, कितना ड्रामा करता रहा होगा  मन उन दिनों...हर पन्ने पर ऊपर एक सूक्ति छपी थी, उस दिन की सूक्ति थी - निष्क्रियता मनुष्य के लिए अभिशाप है - गाँधी जी. उसने लिखा  

निष्क्रिय तो उसकी कलम हो गयी है 
मन भी तो ! 
कुंद पड़ गयी मन की धार 
संवेदनाएं चूक गयीं हृदय की 
मृत हुए स्वप्न टूट गए मोती 
बिखरे पानी पानी आंसूं 
नियति यही कि मृत्यु बने अब 
जीवन अपना अपना जीवन ! 

हम भला बुरा सब भूल चुके, नतमस्तक हो मुँह मोड़ चले 
अभिशाप उठाकर होठों पर, वरदान दृगों से छोड़ चले 
अब अपना और पराया  क्या ? आबाद रहें रुकने वाले 
हम स्वयं बंधे थे और स्वयं हम अपने बन्धन छोड़ चले 

Thursday, July 2, 2020

शहीदों का वसंत

आज वसन्त पंचमी है. पूजा कक्ष में माँ सरस्वती की तस्वीर भव्य तरीके सजायी है. दोपहर को कुछ महिलाओं और बच्चों के साथ पूजा की. अभी कुछ देर पहले टीवी पर कुम्भ के दृश्य अनोखे हैं. करोड़ों लोग कुम्भ में आते हैं. सब एक ही लक्ष्य को लेकर, एक ही भाव के साथ. 

रात्रि के नौ बजे हैं. सरस्वती पूजा के किसी पंडाल से आवाजें आ रही हैं. कल भी देर तक आती रहीं. दिन में तेज आवाज में संगीत बजाते हुए और शोर मचाते हुए लड़कों का एक हुजूम देवी की मूर्ति को विसर्जित करने के लिए ले जा रहा था. शाम को नदी से लौटते समय एक सुंदर मूर्ति को सड़क के किनारे पड़े हुए देखा. पूजा के नाम पर लोग कितना कुछ करते हैं पर वास्तविक पूजा से दूर ही रहते हैं. जून से बात हुई आज उन्होंने प्रधानमंत्री का भाषण सुना बड़े से स्क्रीन पर. लन्च पर एक मित्र परिवार आया जो वर्षों पहले दूसरी जगह चले गए थे. शाम को उन्हें नदी पर ले गयी. चाय बागान भी ले गयी पर तब तक अँधेरा हो गया था. 

हरमन हेस की किताब ‘सिद्धार्थ’ पढ़ रही थी आज, वर्षों पहले पढ़ी थी, पर जरा भी याद नहीं थी. बदली के गरजने की आवाज है या जेट की, रात के सन्नाटे में गूँज रही है. आज बड़े भाई से बात हुई, उनके विवाह की  चालीसवीं वर्षगाँठ होती यदि भाभी होतीं, सुंदर तस्वीरों से एक वीडियो उन्होंने बनाया, वह खुश लग रहे थे. उन्होंने नन्हे के साथ उनकी एक पुरानी तस्वीर भेजी है, शायद उनके घर पर खींची गयी होगी. फेसबुक पर पोस्ट की. आज नैनी ने अपनी सास के बारे में मजेदार बातें बतायीं, वह कभी-कभी सुबह बहुत जल्दी उठ जाती है और अपने आप से बातें करती है. कभी बच्चों की तरह उछलती हैं और खुश रहती हैं. उसके ससुर (जिसको गले का कैंसर है,) का गला अब पहले से ठीक है, तम्बाकू छोड़ नहीं सकता सो वह बीड़ी की जगह सिगरेट पीने लगा है. कितना स्वाधीन है मानव और कितना पराधीन, यह कभी-कभी ज्ञात हो पाता है किसी को जब उसके साथ कुछ ऐसा घटा हो. सामान्य जन के  लिए यह समझना भी कठिन है कि वह इतना परतन्त्र है. 

आज कश्मीर में जो हुआ वह भीषण है, भयानक है और निंदा करने के लायक है. कल तक प्रधानमंत्री कह रहे थे कि कश्मीर में हालात सुधर रहे हैं पर आज दोपहर साढ़े तीन बजे विस्फोटक से भरी एक कार को जवानों से भरी गाड़ी से टकरा दिया, भयानक विस्फोट हुआ और उनतालीस जवान मारे गये. सारा देश स्तब्ध है और सभी के मन में क्रोध और दुःख है. शाम को क्लब में मीटिंग थी शायद वहाँ किसी को इस खबर की जानकारी नहीं थे, वे सामान्य ही रहे. प्रधानमंत्री ने पालम हवाई अड्डे पर श्रद्धांजलि अर्पित की उन शहीदों को, जो पुलवामा में मारे गए हैं. 

आज कम्पनी की हीरक जयंती का समापन समारोह है. जून अभी-अभी घर लौटे हैं. सुबह से वर्षा हो रही है, तापमान गिर गया है. पुलवामा हमले की साजिश रचने वाला कामरान आज मारा गया, चार सैनिकों को और शहादत देनी पड़ी. देश भर में आतंकवाद के खिलाफ क्रोध बढ़ता ही जा रहा है. देश में सभी दल एकमत होकर कार्यवाही करने को कह रहे हैं. चुनावी भाषा की जगह देश के प्रति अपना कर्त्तव्य निभाने की भाषा नेता बोल रहे हैं.  

Wednesday, July 1, 2020

ट्रांसिडेंटल मैडिटेशन


जगत के प्रति राग-द्वेष जब कम हो जाता है तो उसकी स्मृति मन में नहीं आती. वह जैसे विलुप्त हो जाता है. ‘नई दृष्टि नई राह’ में अद्भुत ज्ञान सूत्र मिलते हैं. वे जितना-जितना समता में रहते हैं, आत्मा की शक्ति बढ़ती जाती है. शाम के पांच बजने वाले हैं. आज भजन का दिन है. सुबह गुरूजी को औरंगाबाद में कहते सुना, जीवन में गान, ध्यान और ज्ञान तीनों होने चाहिए. जून ने आज से मन्त्र जप शुरू किया है, ध्यान भी करेंगे और ज्ञान भी सुनेंगे. कुछ देर पूर्व वे लॉन में टहल रहे थे. ग्लैडियोली के फूल खिले हैं, डायन्थस, पॉपी आदि तो हैं. जरबेरा, गेंदा भी खूब खिल रहे हैं. सुबह सुबह को-ऑपरेटिव गयी, सभी ‘ज़ी न्यूज़’ पर मोदी का भाषण सुनने में तल्लीन थे. अभी टीवी पर सुना, मोदीजी कांग्रेस के खिलाफ बोल रहे हैं. चुनाव का वर्ष है, एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगने व लगाने स्वाभाविक हैं. 

कल सुबह-सुबह जून को एयर पोर्ट जाना है. फ्लाइट दोपहर ढाई बजे है पर बंद( ताई अहोम द्वार) के कारण सुबह तीन बजे ही निकल जाना होगा. कल मोदी जी गोहाटी आ रहे हैं उनका विरोध करने के लिए ही इस बन्द का आयोजन किया गया है. जब कि वह एम्स की नींव रखेंगे, नुमालीगढ़ में बायो रिफाइनरी का शिलान्यास और ब्रह्मपुत्र पर एक सड़क पुल का भी. वह त्रिपुरा भी जा रहे हैं. वर्षों बाद भारत को ऐसा प्रधानमंत्री मिला है जो देश के विकास के लिए दिन-रात एक कर रहा है. आज शाम को गुरूजी की किताब से कुछ वाक्य पढ़े तो सभी साधिकाओं के भीतर कोई न कोई विचार जाग उठा. वह ठीक कहते हैं , प्रेम जगत को गतिशील करता है. 

जून रात को दो बजे ही उठ गए, तीन बजे निकल गए. अभी भी एयरपोर्ट पर ही होंगे. प्रधानमंत्री कल पेट्रोटेक का उद्घाटन करेंगे, उस कार्यक्रम में भी शायद वह शामिल हो पाएं. इस समय चांगसारी में पीएम की रैली हो रही है. भीड़ बहुत ज्यादा है. उन्होंने कहा, कल गोहाटी से निकलने वाले अख़बारों में इसकी कोई खबर नहीं होगी, एक क्षण के लिए उनके स्वर में उदासी दिखी. पर अव वह असम के महापुरुषों को याद कर रहे हैं. उगते हुए सूरज की भूमि अरुणाचल में आज उनकी यात्रा हो रही है. हर राज्य की तरह यहाँ भी कई योजनाओं की घोषणा हुई. बीजेपी देश की संस्कृति को बढ़ावा देती है.. एक नए टीवी चैनल की भी शुरुआत हुई. ‘बच्चों की पढ़ाई, युवा को कमाई, वृद्धों को दवाई, किसान को सिंचाई, जन-जन की सुनवाई’ इस पंच धारा विकास को बढ़ावा देती है यह सरकार. कल सरस्वती पूजा है, नैनी ने आज सरस्वती माँ की तस्वीर को ढक कर रख दिया है. कल वह मृणाल ज्योति में पूजा के बाद दोपहर को खिचड़ी आदि का प्रसाद बनाकर घर पर भी पूजा करेगी. नन्हे से बात हुई, कल वे लोग नए घर जायेंगे.  

उस डायरी में पढ़ा, जाग्रत, स्वप्न और सुष्पति, तीन अवस्थाओं से ऊपर चौथी अवस्था में पहुँचना ध्यान है. मन को केंद्रित नहीं करना है न कोई प्रयत्न करना है, केवल मन्त्र को दोहराना है और शांत हो जाना है. उसे आश्चर्य हुआ,  कालेज में भी भावातीत ध्यान यानि ट्रांसिडेंटल मेडिटेशन की बात सुनी थी, पर तब इसका अर्थ जरा भी समझ नहीं आया होगा. अवश्य ही इसने अनजाने में नई दिशा और नई आशा प्रदान की होगी, इस पर चलने का समय अभी बहुत आगे था. 

उसे एक पत्र की प्रतीक्षा थी पर नहीं आया, सारी गड़बड़ डाक विभाग की है, है न ! वह सोचती है नम्रता बड़ी चीज है पर उसका स्वभाव ही ऐसा नहीं है. शायद अब पता नहीं क्यों मन पर एक किलो का बोझ लादा हुआ है, समाधान उपेक्षा से नहीं होगा, उतारना ही होगा, पर किस तरह यह स्पष्ट नहीं. (उस समय गुरु जो नहीं मिले थे) धर्मयुग में देश की वास्तविक आर्थिक स्थित पर लेख पढ़ा था दोपहर को, पढ़ती चली गयी. हे भगवान ! कितने कितने हथकंडे अपनाते हैं व्यापारी और सरकार का प्रोत्साहन ही उन्हें मिलता है. कंट्रोल का लाभ व्यापारियों को, नुकसान तो जनता को ही है. दिनमान भी पढ़नी है अभी. कालेज में एक सखी दिखी, एमजीआर उसने अनदेखा कर दिया, शायद जानबूझ कर, शायद वह समझती है उसके अनुत्तीर्ण हो जाने पर अब वह उसकी सखी नहीं है. एक अन्य सखी मिली बेहद खुश... नवविवाहिता का श्रृंगार नहीं पर स्वाभाविक प्रसन्नता जरूर दिखाई दी उसके चेहरे पर. अर अब यह की स्मृतियाँ मन में ही रहें, वहीं सुरक्षित हैं, कागज के पन्ने पर स्मृतियाँ नहीं रखी जा सकतीं.