Wednesday, August 21, 2019

दिव्य समाज का निर्माण



साढ़े आठ बजने को हैं रात्रि के. आज का दिन कुछ भिन्न था. सुबह एक स्वप्न देखकर उठी. एक विशाल मैदान में जहाँ ताज़ी खुदी हुई मिटटी है, हवा और आँधी के साथ उड़कर हजारों छोटे-छोटे बीज बिखर रहे हैं. पता नहीं कहाँ से आ रहे हैं वे बीज. तभी विचार आया, सृष्टि के आरम्भ में सम्भवतः ऐसे ही इतने वृक्ष व वनस्पतियां उगी होंगी. विचार आते ही स्वप्न कहीं खो गया. अद्भुत है यह सृष्टिकर्ता...प्रातः भ्रमण के समय चारों ओर उगे विविध वृक्षों और घास में उगे जंगली पौधों को देखकर एक अपनापन जगा महसूस हो रहा था. दूब घास पर कदम धरते ही भीतर एक अनोखी सिहरन को महसूस किया, यह अनुभव पहले भी कई बार उसे हुआ है, दूब घास अपनी ओर खींचती सी लगती है. उसमें कोई चुम्बकीय तत्व अवश्य है. प्रातःराश के बाद मृणाल ज्योति के कार्यक्रम में बोलने के लिए एक छोटा सा वक्तव्य लिखा. जाने से पहले भोजन बनाया. कार्यक्रम ग्यारह बजे आरम्भ हुआ. 'डाउन सिंड्रोम डे' के साथ 'आपदा प्रबन्धन' की ट्रेनिंग भी दी गयी. विभिन्न गाठें बांधनी सिखाई गयीं, पट्टी बांधना भी और स्ट्रेचर बनाना भी. आग बुझाने का प्रदर्शन भी किया गया. शाम की योग कक्षा में उपस्थिति कम थी. एक ने बताया कमर में दर्द है, दूसरी ने कहा, जुकाम है. मालिन कल नहीं आई थी, आज आई, बताया माली से झगड़ा हुआ था, कितना सह रही है वह दूसरी पत्नी बनकर.

आज 'विश्व जल दिवस' है. कुछ दिन पहले जब नारे लिखे थे, पढ़ा था इसके विषय में. असम में तो जल की कमी नहीं है, पर बंगलूरू में हो सकती है, जहाँ वे अगले वर्ष अक्तूबर में सदा के लिए रहने  जाने वाले हैं. जून को कल सुबह खाली पेट रक्तजाँच करानी है, सो रात्रि भोजन हो चुका है ताकि बारह घंटों का उपवास निश्चित हो सके. अगले महीने वे बंगलूरू जा रहे हैं, उनकी दूसरी आँख का भी कैट्रैक ऑपरेशन होना है. बारह दिन वे वहाँ रहेंगे. एक योग साधिका को वह कक्ष की चाबी देकर जाएगी, जिससे उसकी अनुपस्थिति में भी वे लोग नियमित साधना करती रहें. कुछ देर पूर्व नन्हे से बात हुई, वह आज सुबह ही देहली गया था, अब वापसी की यात्रा में है. ग्यारह बजे रात घर पहुंचेगा. पिछले एक हफ्ते से देर रात तक दफ्तर में काम करता रहा है, इस बार भी सप्ताहांत में भी व्यस्त रहेगा. आज सुबह नर्सरी स्कूल में मीटिंग थी, जिसमें अध्यापिकाओं को स्कूल के नियमों की पुस्तिका दिखाई गयी. प्रेसिडेंट के उसूल बहुत अच्छे हैं, बस थोड़ा ज्यादा बोलती हैं. शाम को फोन पर पता चला बुआ जी घर लौट आई हैं, पर दो-चार शब्द ही बोले गये उनसे. कल दोपहर बाद मृणाल ज्योति में मीटिंग है और शाम को एक मित्र परिवार को भोजन पर बुलाया है, अगले हफ्ते वे लोग सदा के लिए यहाँ से जा रहे हैं. कुछ वर्ष पूर्व भी एक बार उनका तबादला हुआ था, उस समय उनके संबंध पूर्ण सहज नहीं थे. हालात अलग थे तब, अब उस सखी में काफ़ी परिवर्तन आया है और उसे भी सुमति मिली है. उन्होंने अपने संस्कारों को पहचाना है और उनमें परिवर्तन आया है. परमात्मा की कृपा ही इसके पीछे काम कर रही है.

आज सुबह वे उठे तो वर्षा के आसार थे, रात को हो चुकी थी. टहल कर जैसे ही घर के निकट आ गये, बूँदें पड़नी शुरू हुईं. जून को आज भी रक्त जाँच के लिए जाना था, सो नाश्ते की जल्दी नहीं थी. आराम से साधना की. शाम के भोजन की तैयारी में न ध्यान हुआ न लेखन का कोई कार्य. दोपहर को तीन बजे तक सब तैयारी करके मीटिंग के लिए गयी. बारिश  में लडकों के छात्रावास का जो कमरा नष्ट हो गया था, उसे बनवाने का निर्णय हुआ, एक अन्य कमरे का फर्श भी ठीक करवाना है. उसे उन महिला को पत्र लिखना है, जिन्होंने स्कूल के लिए सहायता राशि देने की बात कही है. वापसी में एक टीचर ने स्कूल में उगे 'सब्जी वाले केले' दिए. योग कक्षा में एक बार फिर प्राणायाम का महत्व उसने बताया और सही तरीका भी. एक सप्ताह बाद 'दिव्य समाज का निर्माण' नामक आर्ट ऑफ़ लिविंग का एक कोर्स होने वाला है. कितना सही समय है, जून उसी दिन गोहाटी जा रहे हैं, उनकी कार भी खाली रहेगी और समय भी अपने हाथ में रहेगा. परमात्मा ने ही यह सुयोग रचा है. वह अकारण दयालु है. वह आज ही ऑन लाइन रजिस्ट्रेशन के लिए जून से कहेगी. पिछली बार यह कोर्स करने गोहाटी गयी थी पर प्रतिभागियों की संख्या कम होने के कारण कोर्स हुआ ही नहीं. कोर्स से एक दिन पहले महिला क्लब की मीटिंग है, तीन महिलाओं का विदाई समारोह, उनके लिए कविताएँ लिखी हैं उसने. मित्र परिवार के साथ रात्रि भोज ठीक रहा, उनका सामान पैक हो रहा है.  

Friday, August 9, 2019

प्रकाश और पतंगे



आज बहुत दिनों बाद 'कल्याण' के 'जीवनचर्या अंक' में वेदों के सुंदर मन्त्र पढ़े, अद्भुत प्रार्थनाएं की गयी हैं उनमें. इन्हें स्कूलों में पढ़ाना चाहिए. लोपामुद्रा और अगस्त्य मुनि का जीवनचरित पढ़ा. सूर्य उपासना के बारे में एक अध्याय है, बाद में पढ़ेगी. जून का बुखार उतर गया है पर स्वास्थ्य अभी भी पूरी तरह ठीक नहीं हुआ है, पर उनमें गजब की जीवट शक्ति है, दफ्तर गये हैं. कल दोपहर पदोन्नति के लिए उनका साक्षात्कार है. सौ में दस अंक ही हैं इसके. पचास एपीआर, बीस इडीसी और अन्य बीस भी किसी अन्य परीक्षा के जो पहले ही हो चुकी है. परिणाम अप्रैल में आएगा. वर्षा दोपहर को रुक गयी थी पर शाम होते-होते बादल फिर से जुट गये और वर्षा आरंभ हो गयी तेज हवा के साथ. शाम को ही अचानक सैकड़ों पतंगे बरामदे के बल्ब पर मंडराने लगे, कुछ ही घंटों में उनकी जीवनलीला समाप्त हो गयी और सब जमीन पर गिर गये. पर्वत भी मानवों को देखकर सोचते होंगे, कितना क्षणिक है इनका जीवन.

सुबह टहलने गयी तो कल रात की वर्षा के कारण सड़क पर पानी जमा था, जिसमें पेड़ों की छायाएं बेहद सुंदर लग रही थीं, तस्वीरें उतारीं. शाम को गुरु माँ का एक प्रवचन सुना जो वह बच्चों को दे रही थीं. एक नई कविता लिखी. काव्यालय की संपादिका ने उसके कमेन्ट को पसंद किया है. सुबह  महीनों बाद रामदेव बाबा का सीडी लगाकर प्राणायाम किया, कपालभाति के कितने ही लाभ उन्होंने उसमें गिनाये हैं.  

टीवी पर भारत-बांग्लादेश क्रिकेट मैच का फाइनल मैच आ रहा है, भारत शायद विजयी हो जायेगा. आज उसने अरसे बाद गाजर का हलवा बनाया है, भूल ही गयी थी कैसे बनता है. जून इसमें दक्ष हैं. फुफेरे भाई से बात की, बुआ जी आज डाक्टर्स को डांट रही थीं, अपने दामाद को पहचान नहीं पायीं, अभी आईसीयू में ही हैं. दोपहर को बच्चों ने योग किया, भजन गाये और खेल खेले, कितने मस्त होते हैं बच्चे, भोले-भाले. सुबह सामान्य थी, रविवार का दक्षिण भारतीय नाश्ता और फिल्टर काफ़ी. दीदी ने बहुत दिनों बाद ब्लॉग पर पोस्ट किया है. अच्छा लगा पढ़कर. पिताजी 'लाओत्से' पर किताब पढ़ा रहे हैं, लाओत्से पर ओशो के प्रवचन की किताब. उन्हें अपनी कमजोरी अच्छी नहीं लगती, शायद वृद्धावस्था में सभी को इस अनुभूति से गुजरना पड़ता है.

आज का दिन भी समाप्ति की ओर है. उनका रात्रि भोजन और भोजन के बाद का रात्रि भ्रमण भी हो चुका है. जून अख़बार पढ़ रहे हैं.  रात के लिए एक निमन्त्रण था पर वे नहीं गये. कम्पनी के सभी उच्च अधिकारी यहाँ हैं, उन्हीं के सम्मान में विशेष भोज का आयोजन किया गया है. आज ही कम्पनी की साठवीं वर्षगांठ भी है. इसी उपलक्ष में ग्रामीण किसानों को ट्रैक्टर बांटे गये, मुख्य मंत्री तथा एमपी भी आये थे. यह पूरा वर्ष ही हीरक जयंती वर्ष है, अंत में भी कुछ कार्यक्रम होंगे. उनमें से एक है निबन्ध प्रतियोगिता. जून को इसकी जिम्मेदारी मिली है. कल दोपहर को मीटिंग बुलाई है उन्होंने. निबन्ध के लिए विषय क्या दिए जाएँ इसका निर्णय होगा. शाम को बगीचे में टहलते समय उन्होंने इस बारे में चर्चा की. विषय ऊर्जा से जुड़ा होना चाहिए. पूरे भारत से नवीं से बारहवीं कक्षा तक पहला ग्रुप तथा स्नातक व स्नातकोत्तर कालेज के छात्रों का दूसरा ग्रुप भी इस प्रतियोगिता में ऑनलाइन भाग ले सकता है. आज नैनी के छोटे पुत्र का जन्मदिन है, जिसके लिए वह उन दिनों इतनी चिंतित हुई थी. शाम की योग कक्षा में उसने स्वाध्याय के लिए सुझाव दिया. बुआजी से फोन पर बात हुई, वह कह रही थीं, मेरठ में हैं, जबकि अपने घर पर ही हैं. उन्हें मतिभ्रम हो गया है. परमात्मा की कृपा है कि व्यक्ति सब कुछ भूल जाता है, अपने दुःख-दर्द भी भूल ही जाता होगा अंत समय में. नवरात्र पर नेट पर पढ़ा और देवी भागवद् में भी एक अध्याय पढ़ा, स्कूल में बच्चों को नवरात्र के बारे में बताया. देवी को अपने भीतर जागृत करना है, यह भी बताया. छोटी बहन से बात हुई, विदेश में रहकर भी वह नवरात्र के नौ दिनों तक रोज भजन में सम्मिलित हो पा रही है.  आज अशोक के फूलों की तस्वीरें भी उतारीं. उन प्रसिद्ध महिला ब्लॉगर ने कंचन के तने से निकली कलिका को देखकर कहा, यह है आध्यात्मिक सौन्दर्य, उनके रूप में उसे एक सुहृदय पाठिका मिल गयी हैं. आज मृणाल ज्योति की एक अध्यापिका का फोन आया, एक अन्य अध्यापिका के पिता जी का देहांत हो गया है. तीन दिन बाद उनका श्राद्ध है. उनका घर यहाँ से दो सौ किमी दूर है. उसका जाना तो सम्भव नहीं होगा. कल वहाँ डाउन सिंड्रोम डे मनाया जायेगा.

काले खट्टे शहतूत



रात्रि के पौने नौ बजे हैं. अभी-अभी जून से बात हुई. वह एयरपोर्ट से सीधे लाजपतनगर गये, सूखे मेवों की दुकान पर, जहाँ से वह पिछले अनेक वर्षों से खरीदारी करते हैं. बात चल रही थी कि कुछ गिरने की आवाज आई, पर सब तरफ देखा, कहीं भी कुछ दिखा नहीं, बाद में बाहर जाकर भी देखा, सब कुछ अपनी जगह व्यवस्थित था. जीवन एक रहस्य है, यह बात मन में कौंध गयी. पिता जी से भी बात हुई, दोपहर को पता चला था, उन्हें ज्वर है, इस समय ठीक थे. आज ही बड़ी बुआ जी से भी बात की, अस्वस्थ हैं, दर्द में थीं. अंत समय में कितना कष्ट होता है किसी-किसी को, और कोई सहज ही देह का त्याग कर देता है. आज दोपहर ब्लॉग पर मृत्यु के बारे में ही लिखा. एक न एक दिन तो देह की मृत्यु होनी ही है. कल सुबह मृणाल ज्योति के किसी काम से अकेले डिब्रूगढ़ जाना है. बहुत पहले सासु माँ जब अस्पताल में थी, कई बार जाया करती थी. दोपहर को बच्चों की संडे क्लास चल रही थी, उड़िया सखी का वीडियो कॉल आया, जो पहले हर इतवार को उसकी मदद किया करती थी, उसने बच्चों से कुछ सवाल पूछे. सभी को बहुत आनंद आया. आज भी पिछले कुछ दिनों की तरह 'मान्डूक्य उपनिषद' की व्याख्या सुनी. जागृत, स्वप्न और सुषुप्ति से भी परे है तुरीया और इन सबमें  है एक ही आत्मा या ब्रह्म, ऊँ इन चारों का प्रतीक है. वैश्वानर, तैजस और प्राज्ञ इन तीन अवस्थाओं के प्रेरक हैं तथा इनका प्रेरक ब्रह्म ही है.  

जून से बात हुई, उन्हें गले में खराश व हरारत महसूस हो रही थी. ईश्वर से प्रार्थना है कि वह शीघ्र स्वस्थ हो जाएँ. परमात्मा उन्हें शक्ति प्रदान करेंगे. वह सफर में हैं और घर का आराम उन्हें नहीं मिल पायेगा, अभी दो दिन और उन्हें बाहर रहना है. कल रात दो बजे उठना होगा, सुबह की फ्लाईट के लिए. दिन भर गोहाटी में भी व्यस्त रहना होगा. घर आकर ही उन्हें पूरा आराम मिलेगा. इतवार को उनका इंटरव्यू भी है. परमात्मा सदा उसके साथ है. वैश्वानर, तैजस और प्राज्ञ के रूप में वह हर घड़ी सबके साथ है. अभी-अभी टीवी पर समाचार देखे. अमिताभ बच्चन को भारी पोशाक की वजह से शरीर में दर्द हो गया था, डाक्टरों की टीम उन्हें देखने गयी. फुफेरे भाई से बात हुई, बुआ जी अस्पताल में हैं, उनेक पैर का आपरेशन हुआ है. दोपहर को उनकी कितनी बातें याद आ रही थीं. आज काश्मीर में गुरूजी के कार्यक्रम के बारे में वीडियो देखे. कोई-कोई मडिया कितनी गलतबयानी करता है. आज वह पूना में है. वह अपने आराम की परवाह किये बिना जगह-जगह घूमकर लोगों में प्रेम व शांति का संदेश दे रहे हैं. सुबह पाकिस्तान में योग के प्रति बढ़ते आकर्षण पर भी वीडियो देखा, गुरूजी को मानने वाले वह भी हैं. आज भागवद् में कृष्ण का ऊद्ध्व को दिया गया उपदेश भी पढ़ा जिसे बहुत सुंदर ढंग से लिखा गया है. टीवी पर रामदेव जी पर जो कार्यक्रम आ रहा है, उसमें रामकिशन का अभिनय करने वाला बालक बहुत अच्छा काम कर रहा है. बचपन से ही कितना संघर्ष किया है उन्होंने. गुरूकुल में रहकर पढ़ाई की, अपने आदर्शों पर डटे रहे. उनके गुरूजी का भी बहुत बड़ा योगदान है उनके जीवन को गढ़ने में. बालकृष्ण भी बहुत अच्छी तरह बात करता है. आज उम्मीद पर एक कविता लिखी, शायद ब्लॉग समूह पर पहुँच गयी हो.

आज योग कक्षा के बाद 'जल नेति' करना सिखाया, पर शायद ही किसी को इसे करने का उत्साह जगे, क्योंकि जब उसने जलनेति पात्र मंगाने के लिए कहा, तो किसी ने भी हामी नहीं भरी. आज गुरूजी के पुराने वीडियो देखे. नारद भक्ति सूत्र पर वे बोल रहे थे. उनके जीवन पर भी फिल्म बन सकती है. दोपहर को लेखन कार्य किया.

जून दोपहर को एक बजे के थोड़ा बाद ही आ गये थे. भोजन करके दो बजे पुनः चले गये, शाम को लौटे तो हल्की हरारत थी. शाम से ही उपचार आरम्भ कर दिया है. जल्दी ही वह ठीक हो जायेंगे. आज सत्संग पूरा होते ही वर्षा होने लगी, उन पांच साधिकाओं ने मिलकर परमात्मा के नाम का कीर्तन जो किया था. बगीचे में शहतूत लगे हैं आजकल. दिन में कई बार बच्चों की टोली उन्हें तोड़ने जाती है. अभी काफ़ी खट्टे हैं काले रंग के शहतूत. आज एक ब्लागर ने टोन-टोटके आदि के बारे में विचार पूछा. कल वाणी कजी का मेल आया था, ईबुक के बारे में. आज एक कविता लिखी जो ध्यान के अनोखे अनुभव के बाद हुई मस्ती से उत्पन्न हुई थी, कितना अनोखा था आज का अनुभव..अनूठा. ध्यान पर जितना कहा जाये कम है, ध्यान की महिमा अपार है. दीदी ने बड़े पुत्र तथा परिवार से वीडियो चैट करवाई, पता चला बुआ जी अब पहले से बेहतर हैं.


Thursday, August 1, 2019

रसगुल्ले और समोसे



आज 'विश्व महिला दिवस' है, अभी कुछ ही देर में वे इसे मनाने भी वाले हैं. आस-पास की नैनी क्वाटर्स की महिलाओं को बुलाया है उसने एक कप चाय के लिए और कुछ बातें करने के लिए, पर उनके पास उसके लिए भी समय कहाँ है ? परिवार व बच्चे उनकी पहली प्राथमिकता हैं, अपने लिए वक्त बचाना उन्होंने कभी जाना ही नहीं. तीन बजे बुलाया था पर सवा तीन होने वाले हैं, अभी तो कोई नहीं आई हैं. जून के भेजे समोसे ठंडे हो रहे हैं, उन्होंने रसगुल्ले भी भेजे हैं. सुबह उन्होंने व्हाट्स एप पर सौ संदेश भेजे 'महिला दिवस' पर, उनका हृदय विस्तृत हो रहा है, समाज और राष्ट्र की सभी इकाइयां उसमें शामिल हो रही हैं. जीवन को सहजता से जीना है, उसको सम्पूर्णता के साथ अपनाना है. जीवन को स्नेह भरी दृष्टि से देखें तो विष भी अमृत हो जाता है ! वह लिख ही रही थी कि वे सब आ गयीं, उन्होंने कुछ देर भजन गाये फिर कुछ बातचीत की, नैनी ने सबके लिए चाय बना दी फिर हँसते-हँसते वे सब खाने लगीं. बाद में उसने पूछा, आज कौन सा दिन है, उन्हें महिला दिवस के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. लेकिन एक ने जब बताया उसका पति नशा करके आता है और वह डर जाती है, तो बाकी सब उसे समझाने लगीं. डरने की जगह उसे हिम्मत से काम लेना चाहिए. उसने कहा यदि वे नियमित रूप से कुछ देर योग-प्राणायाम करें तो भीतर की शक्ति जगा सकती हैं. पर वह जानती है ऐसा कर पाना उनके लिए सम्भव नहीं है. हफ्ते में दो बार उन्हें वह बुलाती है पर नियम से तो एक या दो ही आती हैं.

रात्रि के साढ़े आठ बजे हैं. टीवी पर हास्य धारावाहिक आ रहा है. अभी कुछ देर पहले वे अस्पताल से आये. उस सखी की बिटिया को इंजेक्शन लगना था, उसे थोड़ा सा आश्चर्य भी हुआ दस-बारह वर्ष की बालिका को इंजेक्शन लगवाने से इतना डर लगता है कि तीन लोग उसे संभालने के लिए चाहिये. बच्चों के प्रति ज्यादा मोह से माता-पिता ही उन्हें कमजोर बना देते हैं. ऐसी सोच जगी ही थी कि स्मरण आ गया उसे दोष दृष्टि रखने के अपने पुराने संस्कार का एक और बार अनुभव हुआ, इसका अर्थ हुआ यदि कोई सचेत न रहे तो मन किसी भी क्षण पुराने रंग-ढंग अपना लेता है.

आज सुबह नींद काफी पहले खुल गयी थी पर योग निद्रा करने लगी और फिर स्वप्न कब आरंभ हो गया पता ही नहीं चला. उठने से पूर्व स्वप्न में अज्ञेय की कोई किताब पढ़ रही थी. सफेद पृष्ठ पर काले अक्षर बिलकुल स्पष्ट थे और किसी-किसी वाक्य को दोहराया भी, ताकि बाद में भी याद रहे, यानि उस समय भी यह अनुभव था कि यह स्वप्न जैसा कुछ है, पर अब कुछ भी याद नहीं है. परमात्मा कितने-कितने ढंग से अपनी उपस्थिति का समाचार देता है. कल रात्रि मन कुछ क्षणों के लिए पुरानी व्यवस्था में लौट गया था, पर आज मन स्वच्छ है. वर्षा के बाद धुले आकश सा निर्मल ! भीतर जो चट्टान जैसी स्थिरता है उसके रहते हुए भी ऐसा होता है, इस पर आश्चर्य ही करना होगा. इसका कारण यही है कि उस क्षण वह परमात्मा को भुला देती है, पर वह इतना कृपालु है और सुहृदयी है कि बिना कोई दोष देखे संदेशे भेजता ही रहता है. वे सर्व शक्तिमान परमात्मा की सन्तान हैं, उनके भीतर ज्ञान, बल और प्रेम का अभाव हो ही कैसे सकता है ? सुख के लिए वे जगत पर निर्भर रहे तो उनमें और देहाभिमानियों में क्या अंतर रहा? उसे उस परम की ध्रुवा स्मृति बनाये रखनी है, सुख व आंनद का स्रोत वह परमात्मा उनका अपना है, वह अनंत है, प्रेम व शांति का सागर है ! वह सहज ही प्राप्य है, उसे अपने संस्कारों पर विजय पानी ही होगी, यह केवल कपोल कल्पना बन कर न रह जाये, हर बार की तरह उसका संकल्प टूट न जाये इसका पूरा ख्याल रखना  है.

Tuesday, July 30, 2019

बरसाती मौसम



पिछले तीन दिनों से लगातार वर्षा हो रही है. दिन और रात दोनों समय. कल सुबह टहलने निकले थे पर बारिश तेज हो गयी, छाता भी काम नहीं आया, सो घर लौट आये. आज सुबह कुछ समय के लिए थमी थी, पर इस समय मूसलाधार पानी बरस रहा है. असम में सर्दियों के बाद सीधे ही बरसात का मौसम आ जाता है, बसंत और गर्मियों को आने ही नहीं देता. वे बीच-बीच में अपना काम करते हैं जब वर्षा कुछ समय के लिए विश्राम लेती है. शाम को वे घर में ड्राइव वे पर कुछ देर टहलते रहे, आकाश घने बादलों से ढका था. पेड़-पौधे फूल सभी पानी में तृप्त नजर आ रहे थे, पूरी तरह से तर ! सुबह जून ने नाश्ते में अप्पम बनाये, फिर फोन पर उसकी रेसिपी भी बताई, उन्हें दक्षिण भारतीय व्यंजन बहुत पसंद हैं.

आज वह टूटा हुआ दांत निकलवाया, तोड़कर निकालना पड़ा, दो इंजेक्शन दे दिए थे डेंटिस्ट ने सो दर्द नहीं हुआ. इस समय एक अनोखी ध्वनि सिर के ऊपरी भाग में उसे सुनाई दे रही है. दर्दनाशक दवा डाक्टर ने दे दी है, जो दर्द न होने के बावजूद वह ले चुकी है, यह सोचकर कि उस दवा का अवश्य ही कुछ और लाभ भी होता होगा. परमात्मा की कृपा अपार है.

आज सुबह उठे तो तेज वर्षा और आंधी से सामना हुआ. बिजली भी चली गयी, पर बारिश फिर रुक गयी. अँधेरे में तैयार होकर वे टहलने निकले, वापस आये तो बिजली आ गयी थी. कल शाम फ्रिज को डीफ्रॉस्टिंग के लिए बंद किया था, सारा सामान बाहर निकाल दिया था, सहेजा. तब तक जून के एक सहकर्मी व उनकी पत्नी आ गये, उनके साथ आधार कार्ड के लिए बैंक जाना था. बैंक मैनेजर छोटे भाई के परिचित हैं, उनकी ही मदद से आधार कार्ड बनने में कुछ आसानी हो रही है. लौटते-लौटते लंच का समय हो गया, जल्दी-जल्दी भोजन बनाया. दोपहर को मृणाल ज्योति गयी. वहाँ से लौटी तो एक सखी का फोन आया, उसकी बिटिया को पिछले चार-पांच दिन से बुखार है, उसे अस्पताल ले जाना है, एक घंटा लग गया. लौट कर आयी तो योगाभ्यास के लिए महिलाएं आ चुकी थीं. दिन कैसे बीत गया पता ही नहीं चला.

तीन बजे हैं दोपहर के, आज मौसम अच्छा है, धूप खिली है. कल 'विश्व महिला दिवस' है, कुछ पंक्तियाँ लिखी हैं, अभी कुछ सुधार करना शेष है. महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक अधिकारों के प्रति सजग कराने के लिए मनाया जाता है यह दिवस, उनके प्रति सम्मान दिखाने के भी एक अवसर है यह दिन ! आज सुबह उठे तो आकाश में बादल थे, पर चाँद भी झलक रहा था. सुबह नाश्ते करने के बाद अस्पताल गयी. वापस आई तो दस बजे थे, बिटिया अब ठीक है. सखी को उसके परीक्षा न दे पाने की कोई फ़िक्र नहीं है, पता नहीं यह ठीक है या नहीं, पर इतना ज्यादा लाड़-प्यार बच्चे को कमजोर ही बनाता है. आज शाम क्लब में मीटिंग है. सेक्रेटरी आज ही बाहर से लौट रही है. नैनी ने बताया उसका बेटा स्कूल जाने लगा है, समय कितनी तेजी से बीत रहा है. पिताजी का फोन आया, उन्हें भी सबकी याद आती है, आज वह अकेले हैं, शाम को जून उनसे पुनः बात करेंगे.

Sunday, July 28, 2019

होली की गुजिया



कल दिन भर में केवल एक कविता की आठ पंक्तियाँ लिखीं, अब आगे की पंक्तियाँ कब बनेंगी, बनेंगी भी या नहीं, कौन जानता है. आज शनिवार है, साप्ताहिक सफाई का दिन और कल सुबह वे घूमने जाने वाले हैं, सो कल की जगह आज ही इतवार का विशेष स्नान भी. सुबह टहलने गये तो कोहरा भी था, जैकेट में भी ठंड महसूस हो रही थी. नन्हे से बात की, सोनू का गला ठीक नहीं है. नये घर के लिए उसने कुछ लोगों से बात की, कुछ घरों में किचन का काम भी देखा, काफ़ी जानकारी है उसे और समय भी दे रहा है, उनका घर बहुत सुंदर बनने वाला है. कल जून दोपहर को घर आ गये, मौसम दिन भर ठंडा ही रहा, एक योग साधिका के लिए कविता लिखी, जो वह बहुत दिनों से फरमाइश कर रही थी. एक सदस्या ने कहा, उन्होंने भी उसके लिए एक कविता लिखी है, जो अभी पूरी नहीं हुई है. आज दोपहर जून की एक सहकर्मी की बिटिया के पहले जन्मदिन की पार्टी में उन्हें जाना है.

आज दिन भर बदली बनी रही. मौसम कल और ठंडा होने वाला है, होली पर भी वर्षा का अनुमान है. आज सुबह एक आश्चर्यचकित कर देने वाली घटना हुई. स्कूल से लौटी तो नैनी ने स्वर्ण का कान का बुंदा दिया, जो रसोईघर में गिरा हुआ उसे मिला था, पर पीछे की ठीपी नहीं मिली, उसका हाथ कान पर गया, ठीपी वहीं थी. खराब रास्तों पर कार से दो बार की यात्रा में, बच्चों को व्यायाम और आसन कराने में किसी भी समय वह गिर सकती थी पर जाने किस शक्ति से वह गुरुत्वाकर्षण के सारे नियमों को तोडती हुई अपने स्थान पर बनी रही, जैसे किसी ने अदृश्य हाथ लगाकर थामे रखा हो. एक और बात हुई भोजन करते समय दायीं तरफ का ऊपरवाला एक दांत टूट गया, बाद में देखा तो वह दांत पर लगी कैप थी, जो कई वर्ष पहले लगवायी थी. कल डेंटिस्ट के पास जाना है. कल ही दोपहर को गुजिया भी बनानी है और शाम को एक सखी की विदाई पार्टी में जाना है. कल दो योग कक्षाएं भी लेनी हैं. ईश्वर ही इन सब कार्यों को करने की शक्ति प्रदान करेंगे. आज स्कूल में जो भी बच्चों को कराया और बताया, जैसे कोई और ही भीतर से प्रेषित कर रहा था. स्कूल जाते समय ष अध्यापिका ने अपने चाचा के देहांत का समाचार बताया, जिन्होंने नब्बे वर्ष के अपने बड़े भाई को अपना उत्तराधिकारी बना दिया है. उन्हें कुछ समय पूर्व ही अस्पताल से लाये थे, वह ठीक हो रहे थे. श्रीदेवी की मृत्यु के कारणों पर भी अटकलें बढ़ती जा रही हैं, उसकी मृत्यु पानी में डूबने से हुई. जीवन छोटा हो या बड़ा, अर्थपूर्ण होना चाहिए, उसने अपने जीवन में जो हासिल किया, कम ही लोग कर पाते हैं. समय और लहर किसी का इंतजार नहीं करते, यह वाक्य इस डायरी के पन्ने पर नीचे लिखा है, कितना सटीक है यह वाक्य. समय गुजरता ही जाता है अपनी गति से. कुछ देर पहले सोनू से बात की, उसका बुखार अभी उतरा नहीं है.

सुबह टहलने गये तो कोहरा घना था, धुंधला-धुंधला सा सब कुछ.. जैसे किसी स्वप्नलोक का दृश्य हो. वापस आकर साधना की. कल जो दांत निकल गया था, उसके कारण दायीं तरफ से कुछ भी खाने में दिक्कत हो रही है. आज पूरा दिन व्यस्तता में बीतने वाला है.
दो दिनों का अन्तराल ! आज सुबह से ही वर्षा हो रही है. अच्छा ही हुआ कि होली का उत्सव उन्होंने कल ही मना लिया. सुबह जून दफ्तर जा रहे थे कि मंझले भाई का फोन आया, उसने जून के एक पुराने सहकर्मी से बिटिया के पीजी में रहने की बात की है. दूधवाला, सफाई कर्मचारी, धोबी, नैनी, माली-मालिन, ड्राइवर सभी को गुजियाँ दे दी हैं, शाम को योग साधिकाओं को भी खिलानी हैं. कल शाम को एक परिवार को बुलाया था, होली का विशेष भोज अच्छा रहा. सभी के साथ संबंध अब सहज और प्रेमपूर्ण हो गये हैं, अब कोई पुराना संस्कार नहीं रहा, परमात्मा की कृपा से मन खाली है और कल दोपहर जून भी अपनी नाराजगी ज्यादा देर तक नहीं रख सके. उसकी सकारात्मकता ने  अवश्य उन्हें छुआ होगा. उनके भीतर माँ का दिल है. उसे भूख लगी है यह सुनते ही कितनी सारी वस्तुएं ले आये. सुबह उन्होंने मिलकर दही-बड़े बनाये, बहुत ही अच्छे बने हैं. उन्हें भी शाम के विशेष भोज में परोसेंगे. कल दोपहर बाद मृणाल ज्योति में मीटिंग है. वहाँ ले जाने के लिए भी मिठाई का डिब्बा पड़ा है, जो सोनू के पिताजी लाये थे. देने की इच्छा हो तो सब सामान उपस्थित हो जाता है.



सत्यार्थ प्रकाश



आज मौसम सुहावना है, हल्की सी धूप है और हल्की सी बदली ! आज एक प्रसिद्ध महिला ब्लॉगर ने उसकी एक पुरानी कविता, 'हरसिंगार के फूल झरे' पुनः प्रकाशित की है. कल होली पर एक कविता लिखनी आरम्भ की थी. जून आज गोहाटी जा रहे हैं. कल सुबह वह उन दोनों महिलाओं से उनके घर जाकर अथवा फोन पर बात करेगी जिनके लिए विदाई कविताएँ लिखनी हैं. टीवी पर दीपक भाई 'नई दृष्टि - नई राह' में आ चुके हैं. कहते हैं, वे सभी शुद्धात्मायें हैं, यदि किसी में दोष देखा तो प्रतिक्रमण करना है. किसी को दुःख न हो इसका ध्यान रखना है. आत्मा में रहने पर कर्म नहीं बंधता और जन्म-मरण का चक्र छूटता है. प्रारब्ध कर्म प्रकट होता है, फिर फल देता है और खत्म हो जाता है. जगत किसी को नहीं बांधता, मन के राग-द्वेष ही जगत से उन्हें बांधते हैं. जगत निर्दोष है, वे व्यर्थ ही उसके प्रति अपने भाव बिगाड़ लेते हैं. उनके भाव शुद्ध हों तो मन हल्का रहता है. आत्मा के प्रकाश में जगत जैसा है वैसा ही दिखता है, उन्हें आत्मा में स्थित रहना है. यदि किसी के प्रति राग-द्वेष आदि है तो हिसाब चुकता नहीं हुआ और पुनः उनका सामना होगा. इसीलिए इसी जन्म में सभी आसक्तियों को त्याग कर मुक्तभाव से जीना है.

पौने दस बजे हैं रात्रि के, जून कल आ रहे हैं. आज गोहाटी में उनका कार्यक्रम अच्छा रहा, तस्वीरें बहुत अच्छी आई हैं. कम्पनी ने 'स्टार्ट अप इंडिया' के लिए काफ़ी बजट रखा है. आज 'जीत चैनल' पर स्वामी रामदेव पर आधारित कार्यक्रम देखा. वह बालक जिसे इतने अत्याचार सहने पड़े, पर जो असीम शक्ति का मालिक है, उसे सत्यार्थ प्रकाश पढने को मिली आज. वर्षों पहले उसने भी पढ़ी थी एक बार, पूरी नहीं पढ़ पायी, बहुत कठिन लगी थी. शायद वह एमएससी कर चकी थी, एक विद्यार्थी ने दी थी या फिर पुस्तकालय से ली थी, याद नहीं है. उस विद्यार्थी ने कहा था कि जैसे कोई जन उपन्यास पढ़कर आनंद का अनुभव करता है वैसी ही ख़ुशी उसे यह पुस्तक पढ़कर होती है. कमरे में न जाने कहाँ से एक छोटा सा पतंगा आ गया है, शायद कोई संदेश लाया हो परमात्मा का..नासिकाग्र पर मनमोहक गंध आ रही है, कभी मीठी कभी किसी पकवान की गंध..पता नहीं कहाँ से आती है ये गंधे, और कैसे ? अस्तित्त्व के लिए मन अपार प्रेम का अनुभव करता है, उसकी उपस्थिति अब एक क्षण के लिए भी नहीं हटती. उस अदृश्य से मुलाकात करनी हो तो ध्यान ही माध्यम है. आज शाम को पिताजी से बात की. छोटी बहन का वीडियो कॉल भी आया, वह बाल बांधकर बहुत प्यारी लग रही थी, काले रंग की सुंदर वेस्टर्न ड्रेस पहनी थी. उसे पार्टी में जाना था दुबई, वह समय के साथ-साथ और युवा दिखने लगी है, मोह-माया से छूटकर मुक्त आत्मा... शाम की योग कक्षा में एक सदस्या ने बताया, उनका तबादला हो गया है, दिल्ली जाना होगा, उसने एक मैथिली गीत सुनाया, जिसे नूना ने रिकार्ड कर लिया, उसकी स्मृति उन सबके साथ रहेगी. उसने बताया, छोटा पुत्र आ रहा है, उसे कम उम्र में कई रोग लग गये हैं. उससे कहा, एक दिन उसे लेकर आये, प्राणायाम या योग का महत्व बताकर शायद उसे प्रेरित कर सके. उन्होंने एक भजन पर नृत्य किया, एक अन्य सदस्या ने रिकार्ड कर लिया. डिनर में 'पत्ता गोभी और पालक' बनाया, दीदी ने यह रेसिपी बतायी थी. आज ब्लॉग पर कोई पोस्ट नहीं डाली. आलमारी ठीक की, ड्रेसिंग टेबल की दराजें भी सहेजीं. 'मातृत्व' पर स्वामी अनुभवानंद जी के सुंदर व्याख्यान सुने, संत के भीतर माँ का हृदय होता है. कितना सुंदर गीत भी सुना अभी वात्सल्य पर आधारित जो व्हाट्स एप पर आया है. सुबह गुरूजी का सुंदर प्रवचन सुना, शुद्ध चेतना में अपार क्षमताएं हैं, वह देह को स्वस्थ कर सकती है यदि कोई उससे जुड़ा रहे. नन्हा और सोनू उनके नये घर के लिए इंटीरियर डेकोरेटर ढूँढ़ रहे हैं.