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Saturday, October 14, 2023

मॉर्निंग ग्लोरी के फूल


अभी-अभी वे रात्रि भ्रमण से लौटे हैं। हवा ठंडी थी और सुकून देने वाली, पत्तों की सरसराहट सुनायी दे रही थी। आज छोटे भाई-भाभी के विवाह की सालगिरह है, उनके लिए एक कविता लिखी, उन्हें पसंद आयी, फ़ेसबुक पर पोस्ट करने को कहा है, ताकि और लोग भी पढ़ सकें। रचना की पूर्णता तो पाठकों के पढ़ने पर ही होती है।नन्हा घर  लौटने वाला होगा, वह असम से पिटुनिया और डहलिये के पौधे ला रहा है। सोनू अभी दो महीने वहीं रहेगी, ऐसा उसने कहा है, पर उसे लगता है, वह जल्दी ही लौट आएगी। बंगलूरू के मौसम में रहने के बाद कोई और कहीं क्यों रहना चाहेगा। उससे फ़ोन पर बात की तो बहुत मासूम और छोटी लग रही थी, माँ के पास जाकर शायद सभी बच्चे बन जाते हैं। 


आज सुबह नन्हा माली को लेकर आया। साथ में दस बड़े गमले, चार बोरी मिट्टी, खाद वह पौध भी लाया। उन्होंने कल ही कोकोपीट भिगो दिया था। दोपहर तक सारा काम हो गया। अब कुछ ही महीनों में उनका बगीचा फूलों से भर जाएगा। बड़े भाई से बात हुई, पापा जी कुछ दिनों के लिए उनके घर आये हैं। वे बहुत खुश हैं, पोती भी उनका बहुत ध्यान रख रही है। रात्रि भोजन के बाद जब निकले तो वर्षा होने लगी थी। छाते लेकर गये, हवा थी पर ठंड जरा भी नहीं थी। यही बात बैंगलोर के मौसम को अच्छा बनाती है, दिसम्बर में भी स्वेटर की ज़रूरत नहीं है। यहाँ टेक्निकल सुविधाएँ भी बहुत हैं। उनकी ईवी की सर्विसिंग होनी है, टाटा मोटर्स वाला आदमी कल ख़ुद ही आकर ले जाएगा, फिर परसों छोड़ जाएगा। 


कल दोपहर बारह बजे बड़ी ननद व ननदोई आ गये थे । कितनी बातें की उन्हींने, पुराने दिनों की और वर्तमान की भी। समय कैसे बीत गया पता ही नहीं चला। शाम को उन्हें नापा में घुमाया, हरियाली और साफ़-सफ़ाई देखकर बहुत खुश थे, जगह-जगह तस्वीरें खिंचवाईं। वर्षों बाद कभी देखेंगे तो उन्हें यह दिन याद आ जाएगा। सुबह भी उन्हें भ्रमण के लिए ले गये।नाश्ते के बाद कार में दूर तक झील और जंगल दिखाने ले गये। दोपहर के भोजन के बाद वे अपनी बहन के यहाँ चले गये। समाचारों में सुना, सरकार और किसानों में आज जो समझौता वार्ता होनी थी, नहीं होगी। अभी तक किसान आंदोलन पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ है।शायद अब सरकार को कठोरता अपनानी होगी। अनिश्चित काल तक तो यह आंदोलन नहीं चल सकता।


मॉर्निंग ग्लोरी के जो बीज उसने बोए थे उनमें अंकुर निकल आये हैं। असमिया सखी से बात हुई, उसकी बिटिया वापस आ गई हैं, अब आगे की पढ़ाई यहीं से करेगी। दीदी ने कहा, नार्वे में उनकी पोती का स्कूल खुला था, पर बंद करना पड़ा। पहले एक बच्चे को फिर टीचर को कोरोना हो गया। अमेरिका में भी कोरोना थमने का नाम नहीं ले रहा है। भारत में केस घट गये हैं। आज छोटे भांजे का जन्मदिन है, कॉलेज का एक छात्र जो पिछले दस महीनों से घर पर रहकर पढ़ाई करने पर विवश है।कैसे होंगे उसके मन के भाव, वह अपनी आज़ादी को मिस तो करता होगा। देवों के देव में दिखाया गया कि जब लक्ष्मी जी को अहंकार हो जाता है, तब उसका दुष्परिणाम उन्हें भी भुगतना पड़ता हैं। आज नैनी काम पर नहीं आयी, दूसरी पहले से ही एक सप्ताह के लिए गाँव गई है। जून कुछ कामों के न हो पाने के कारण परेशान हो गये। जब उसने कहा, उसे तो भीतर वाले की फ़िक्र है, तो उन्होंने भी चिंता छोड़ दी तथा दिन भर हल्के मूड में ही बने रहे। संग का असर होने लगा है। 


Tuesday, September 4, 2018

बगिया या जंगल



पौने दस बजे हैं रात्रि के. जून कल आ रहे हैं. अभी कुछ देर पहले उसने नन्हे से बात की. उसके एक मित्र की पत्नी को स्लिप डिस्क की समस्या हो गयी है. डाक्टर ने बताया, छींक को कभी रोकना नहीं चाहिए, उसके कारण भी स्लिप डिस्क हो सकती है. बहुत दिनों बाद शहनाज हुसैन की किताब का कुछ अंश पढ़ा जो कई वर्ष पहले पुस्तक मेले से खरीदी थी. शाम को कार्यक्रम के लिए योगाभ्यास किया. क्लब की दो सदस्याओं का विदाई समारोह भी उसी दिन होगा, उनसे कल कुछ जानकारी उसने ली, दोनों के लिए कविताएँ लिखेगी. कल रात घर आने में दस बज गये, और सोते-सोते काफी देर हो गयी. एक स्वप्न भी देखा, जिसमें वह नृत्य कर रही है, पता नहीं, किसी जन्म में वह नृत्यांगना भी रही हो. कितना अजीब सा स्वप्न था. जून के जिस सहकर्मी की बेटी के पहले जन्मदिन की पार्टी में गयी थी, उसकी माँ को भी एक अन्य स्वप्न में देखा. वह ऊपर से छलांग लगाती है, उसने नई-नई जॉब शुरू की है, सुबह भाग-दौड़ कर स्कूल जाती है, शायद यही सब सुनने से ऐसा स्वप्न आया हो. हो सकता है उसके नृत्य वाले स्वप्न का भी ऐसा ही अर्थ हो. कुछ दिनों बाद जून को एक महीने के लिये बाहर जाना है, उसे काफी दिन अकेले रहना होगा. वे कुछ दिनों के लिए बड़े भाई को यहाँ आने के लिए कहेंगे.

चार दिनों का अन्तराल, शुक्र को जून आये, शनि को मृणाल ज्योति की वार्षिक सभा थी. इतवार को वैसे भी दिन भर व्यस्तता बनी रहती है. आज शाम को क्लब में परसों के कार्यक्रम के लिए रिहर्सल है. शनिवार को सुबह स्वप्न में देखा, एक लम्बे श्वेत दाढ़ी वाले बाबा ने कहा, दही खाना बंद करो. जून के घुटने में दर्द है, शायद दही खाना उन्हें नुकसान कर रहा है. उन्हें कुछ भी खट्टा नहीं खाना है. आज अस्पताल में चेकअप कराया है. उसने भी आँख दिखाई, टीयर ड्रॉप्स दी हैं, दिन में तीन-चार बार डालनी हैं. उम्र के साथ-साथ शरीर में कुछ टूट-फूट होना स्वाभाविक है. वर्षा लगातार हो रही है. धूप निकले जैसे कई दिन हो गये हैं, ऐसा लग रहा है. ग्यारह बज गये हैं, जून आने वाले होंगे. कल भाई को सितम्बर में यहाँ आने का निमन्त्रण दिया, संभवतः वे मान जायेंगे.

वर्षा ने आज सुबह सारे रिकार्ड तोड़ दिए, सारा लॉन जल से आप्लावित हो गया. इस समय धूप झाँकने लगी है, अजब है प्रकृति की लीला ! बरसात का वीडियो फेसबुक पर डाला है. दोपहर भर कितने पंछी बगीचे में गाते रहते हैं, बिलकुल जंगल का सा आभास होता है. जून के घुटनों का दर्द पहले से कम हुआ है. वे बहुत सारी सावधानियां बरत रहे हैं. सुबह योग साधना करते हैं. प्रातः भ्रमण में जो समय जाता था, अब प्राणायाम में जाता है. प्रकृति उन्हें किसी न किसी तरह मार्ग पर लाकर खड़ा कर ही देती है. भाई से अभी बात की, वह बिल्डिंग की सोसाइटी के दफ्तर में थे, उनके आने की टिकट बुक हो गयी है. स्वयं को व्यस्त रखना ही सबसे जरूरी है. कर्म ही आत्मा को शुद्ध करता है. विकर्म उसे शुद्ध करता है और अकर्म उसे आता नहीं. अकर्म का विज्ञान जिसने सीख लिया हो, उसके लिए कर्म भी आवश्यक नहीं रह जाता. सहज ही कर्म होते हैं तब. कल का कार्यक्रम अच्छा हो गया, उसने सुझाव दिया, पूरे समूह को एक साथ मिलकर एक दिन उत्सव मनाना चाहिए.

Tuesday, March 28, 2017

जल, जंगल और जमीन


टीवी पर हिरोशिमा में बापू की कथा का प्रसारण हो रहा है. हवा की तरह हल्का, फूल की तरह महकता हुआ और पानी की तरह बहता हुआ मन कथा सुनकर ही होता है, लेकिन कथा के पूर्व ही कोई वक्ता बोल रहे हैं, जो रुकने का नाम ही नहीं ले रहे. बोलने का भी एक आकर्षण होता है. सत्य का रथ, प्रेम के पथ पर, करुणा के मनोरथ के साथ चलता रहे यही तो बापू चाहते हैं. जून अहमदाबाद में हैं, सुबह उनका फोन आया था. नन्हा इतवार को तमिलनाडु गया था, फुफेरी बहन व जीजाजी से मिलने. बाइक पर यात्रा करना उसे मेडिटेशन जैसा लगता है, पूरे होश में रहना पड़ता है, नितांत अकेले अपने साथ ! साढ़े दस बजे हैं, आज वे भोजन देर से करेंगे, वह एक घंटा कम्प्यूटर पर बैठकर आज की पोस्ट लिखेगी.

जी-टीवी पर दिल्ली के रामलीला मैदान से बाबा रामदेव का काला धन लाने के लिए दिया गया भाषण प्रसारित हो रहा है. देश में कितना तेल, कितना कोयला आदि प्राकृतिक संपदा के रूप में पड़ा है, जल, जंगल, जमीन की जो लूट मची है, उस पर बोल रहे हैं. काला धन कितना है, इसका तो पता नहीं, पर लाखों करोड़ों में है. जनता को सजग करना ही उनका उद्देश्य है.

अज जून का जन्मदिन है, उसका मन भी खिला है. कल दिन भर एक अजीब सा भाव छाया था. छोटी बहन की सासुमाँ ने देह त्याग दी. रामदेव जी का आन्दोलन अपनी चरम सीमा पर था. कल दोपहर भर टीवी पर वही देखती रही. आज बहुत दिनों बाद एक परिचिता का फोन आया, उनके पुत्र का विवाह किसी कारण से टूट गया है, उस अनुभव से उबर रही थीं, अब मन कुछ ठहरा है. क्लब की प्रेसिडेंट के बारे में उनसे कुछ बातें पूछीं. उनके लिए कविता लिखनी है. वह एक अच्छी अध्यक्षा साबित हुई हैं. मिलनसार हैं, अच्छी लीडर हैं, मैनेजर हैं और सुलभ हैं. सब कोई उनसे बात कर सकते हैं. अहंकार नहीं है. सामाजिक कार्यों के प्रति उत्साह है, समाज सेवा का जज्बा है. दादी, नानी बन चुकी हैं. सास की अच्छी बहू हैं, अच्छी माँ हैं, स्वास्थ्य व सौन्दर्य के प्रति सजग हैं, इस उम्र में भी युवा दिखती हैं. ऊँचा कद है, वस्त्र शालीन हैं और एक गरिमा है उनमें. इतना सब तो काफी है उनके बारे में लिखने के लिए. आज मौसम सुहाना है, कल दिन भर बेहद गर्मी थी. कल बंगाली सखी की बिटिया को अचानक देखकर बहुत ख़ुशी हुई, वह पहले से ज्यादा मुखर हो गयी है और थोड़ी मोटी भी. नौकरी करने लगी है.

बाबा रामदेव के सहयोगी बालकृष्ण जी को जमानत मिल गयी है. उनके आन्दोलन से पूर्व ही उन्हें फर्जी डिग्री व फर्जी पासपोर्ट के कारण जेल में रखा गया था. बाबा पूरी निर्भयता की साथ प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति को शासन की कमियों की तरफ आकर्षित कर रहे हैं. देश के हालात इस समय नाजुक बने हुए हैं. सारे विश्व में ही मंदी के कारण परेशानी है फिर भी युद्द्धों पर व्यर्थ पैसे खर्च किये जा रहे हैं. इन्सान अपने स्वार्थ के कारण दुःख पा रहा है.   

तुम मेरे साथ होते हो, कोई दूसरा नहीं होता ! बापू की कथा आ रही है राजस्थान के नाथद्वारा से. विरह ही प्रेम है. किसी के जाने के बाद जो सन्नाटा हो जाता है, उसमें कितनी पीड़ा है, जो इस सन्नाटे को सहता है, वही प्रेम को अनुभव कर ही सकता है. एक शून्य प्रकट होता है जीवन में तभी प्रेम प्रकटता है. उनका कोई क्रियाकलाप ऐसा न हो जो प्रेमास्पद के प्रतिकूल हो. 

Friday, November 18, 2016

घना घना सा जंगल


आज सुबह फिर किसी ने कहा, अब अलार्म बजेगा और तत्क्षण बजा, कौन है वह जो सुबह-सुबह उसे चेता जाता है. रात को स्वप्न में जंगल देखा, भीगा घना जंगल, उन्हें उसमें रेंग कर जाना पड़ रहा  था. कितना अद्भुत है स्वप्न लोक और यह जागृत अवस्था का लोक भी ज्ञानियों के लिए स्वप्न से बढ़कर नहीं.  उस दिन भी एक अजीब सा स्वप्न देखा था, अपने ही तन के एक अंग को कटोरा बनाकर उसमें भोजन करते हुए और फिर एक सखी का दरवाजे से झांक कर छि छि कहते तथा स्वयं को तो क्या हुआ कहते हुए, फिर नन्हे का आना..उनका अचेतन मन एक अजीब गोरखधन्धा है. भीतर न जाने कितने जन्मों की कितनी गांठें पड़ी हैं, आत्मज्ञान इन्हीं गांठों को खोलने का काम करता है. दरअसल साधना का आरम्भ होता है आत्मज्ञान के पश्चात !

कल उसे प्रेरणा हुई है कि जीवन यात्रा लिखे डायरी के पन्नों के माध्यम से तथा एक नया ब्लॉग भी आरम्भ करे आध्यात्मिक यात्रा पर, जिसमें प्रेरणादायक विचार लिखेगी. आज ही दोनों का आरम्भ करेगी, आज शुभ दिन है, अब लेखन ही उसके जीवन का केंद्र होगा. वही उसकी साधना होगी और वही मोक्ष भी लायेगा. योग आदि तो रहेंगे ही. हर चीज का एक वक्त होता है. जीवन ने उसे जो दिया है, उसे जाने से पहले लौटा दे यही इस लेखन का अभिप्राय है. अहम का विसर्जन हो और सेवा का कुछ कार्य भी हो. परमात्मा की बात है तो परमात्मा के लिए ही है, वही उसके मार्गदर्शक हैं, सद्गुरू और परमात्मा एक ही हैं और उसकी अंतरात्मा भी. जून भी आजकल उसकी कविताओं में रूचि लेने लगे हैं. प्रकृति का सौन्दर्य उन्हें भी लुभाने लगा है. हरी घास पर लेटने में उन्हें कोई डर नहीं लगता..यह भी तो चमत्कार है !


चर्चामंच पर उसकी दो कविताएँ आयी हैं. दो नये ब्लॉग पढ़े आज, इस दुनिया में परमात्मा के भक्तों की कमी नहीं है, जो भी इस रास्ते पर चलता है उसे अनंत प्रेम मिल जाता है. जून आज बैंगलोर गये हैं. अब तक तो नन्हे से भेंट हो गयी होगी. वह वहाँ फ़्लैट लेने की सोच रहे हैं. आदमी जीवन भर जो कमाता है, ईंट-पत्थरों के मकान में लगा देता है. उनके भविष्य में यह काम आयेगा, रिटायर्मेंट के बाद वे बैंगलोर में ही रहने वाले हैं. भविष्य ही बतायेगा क्या होने वाला है, इन्सान तो योजनायें ही बनता है. टीवी पर थाईलैंड में हो रही मुरारी बापू की कथा का सीधा प्रसारण आ रहा है. कल रात को फिर एक अनोखा स्वप्न देखा. जैसे किसी ने उसे देह के बाहर कर दिया हो, आवेशित कर दिया हो या पीछे से पकड़ लिया हो और हवा में उड़ने का अनुभव करा रहा हो. उसे लग रहा था कि देह मृत है या हो जाएगी और वह पृथक है, पर कोई भय नहीं महसूस हो रहा था. बाद में नींद खुल गयी पर तब भी कुछ प्रतिबिम्ब नेत्रों के सामने आते रहे. जागते हुए भी वे स्वप्न देखते रहते हैं, वास्तव में वे कभी जगे ही नहीं, एक गहरी नींद में सोये हैं, वे एक सम्मोहन का अनुभव कर रहे हैं और उसी कारण इतने दुःख हैं. जो जैसा है वैसा न देखकर वे अपने मन को ही आरोपित कर देते  हैं, मन जो अभिमान और दुःख का पोषक है. इस मोह को तोडना ही साधक का उद्देश्य है.