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Wednesday, December 4, 2024

दूज का चाँद

दूज का चाँद 


आज शाम को भी वे कोरोना प्रोटोकॉल का ध्यान रखते हुए टहलने नहीं गये। अब तो लॉक डाउन की अवधि भी बढ़ा दी गई है। एक ही शहर में रहने के बावजूद नन्हे को घर आये एक महीना होने वाला है। अब शायद वे लोग  माह के अंत में उसके जन्मदिन पर ही आयेंगे। लोगों ने पूजास्थलों पर जाना बंद कर दिया है, त्योहारों पर मेहमानों को बुलाना भी। कोरोना ने सबको सीमाओं में बंधना सिखा दिया है। ननदोई जी से बात हुई, उन्होंने बताया, परिवार के चार लोग अपने-अपने कमरों में बैठकर अपने-अपने मोबाइल से एक साथ लूडो खेलते हैं। उनके एक मित्र के परिवार में गाँव में ब्याह हुआ था, सौ लोग एकत्र हुए थे, कई लोगों को संक्रमण हो गया। कई देशों ने भारत को सहायता सामग्री भेजनी आरम्भ की है।देश में पहली बार एक दिन में चार लाख केस मिले हैं। 


प्रातः भ्रमण के समय शिव के मस्तक पर सजे चंद्रमा सा सुंदर चाँदी का सा चाँद गगन में चमक रहा था। शाम को पापा जी से बात हुई, वह सदा की तरह उत्साह से भरे थे।ज्ञान से भरी बातों के अलावा उन्होंने और भी कुछ बातें बतायीं। कह रहे थे, विविध भारती के कार्यक्रम विविधा पर रवींद्र नाथ टैगोर की कहानी ‘मँझली बहू’ सुनी। उनकी गली में गैस का चूल्हा ठीक करने वाला आदमी आवाज़ लगा रहा था, उसे बुलाया और अपना ३९ वर्ष पुराना गैस का चूल्हा ठीक करवाया। कारीगर ने कहा चार-पाँच वर्ष पहले भी आपने ठीक करवाया था। उसने पाइप बदल दी और नोजल्स भी। उसे याद है, जब वह कॉलेज में थी तब यह चूल्हा घर में आया था, एशियाड गेम्स हुए थे उस साल। उनका नया कलर टीवी भी तब आया था।दस दिन के बाद आज से नैनी ने काम पर आना शुरू कर दिया है। बच्चों ने ‘मातृ दिवस’ पर उसके लिए पाँच किताबों का एक सेट भेजा है। कल है मदर’स डे ।आज एक लेखिका मनोरमा कल्पना को पहली बार पढ़ा, बहुत अच्छा लिखती हैं। प्रकृति से उन्हें बहुत प्रेम है। 


कुछ देर पहले बच्चों से बात हुई, अब वे दोनों ठीक हैं। नन्हे के एक पुराने सहकर्मी के पिता का कोरोना से देहांत हो गया। शुरू में पाँच-सात दिन वह घर पर ही थे, फिर मुश्किल से अस्पताल में बेड मिला।पर घर आकर दुबारा स्वस्थ जीवन जीना उनके भाग्य में नहीं था, हृदयाघात हो गया। यह आपदा प्रकृति द्वारा आयी है या मानवों द्वारा लायी गई है, यह कोई नहीं जानता।पापाजी ने आज राजदीपसर देसाई के एक वीडियो के बारे में बताया, वह मोदी जी की आलोचना कर रहे थे। लोकतंत्र में सबको अपनी बात कहने का अधिकार है। आज एक दुखद समाचार और मिला, उनकी सोसाइटी के फ़ैसिलिटी मैनेजर का देहांत हो गया, कुछ दिन पहले ही वह कोरोना से संक्रमित हुए थे। उनकी बेटी अभी एक वर्ष की है, पत्नी और माता-पिता भी उन पर आश्रित थे। भीतर तक हिला गया यह समाचार, तब समझ में आया जिनके प्रियजन जा रहे हैं, उन्हें कैसा लगता होगा। काफ़ी देर तक मन में पीड़ा बनी रही। स्कूटर पर आते-जाते सोसाइटी के सभी लोगों ने अक्सर उनको देखा था, अपने काम के प्रति बहुत समर्पित थे, सभी के साथ उनका अच्छा संबंध था। 


श्रद्धा और सबूरी का छोटा सा मंत्र साईं ने बरसों पूर्व बल्कि सौ वर्ष पूर्व दिया था। इस छोटे से मंत्र में कितना बड़ा ज्ञान छिपा है। धैर्य के साथ यदि कोई चले तो जीवन की कोई भी परिस्थिति उसे विचलित नहीं कर सकती, और श्रद्धावान को ही ज्ञान मिलता है, यह तो भगवद् गीता में भी कहा गया है। आज सुबह की साधना के बाद उसे भीतर चट्टान जैसी स्थिरता का अनुभव हो रहा है और एक शांति का भी। अब साधना सहज हो गई है, जैसे स्वभाव का ही एक अंग, और लेखन भी ऐसे ही है। लिखने के लिए भी कोई विशेष प्रयास नहीं करना पड़ता, कोई जैसे लिखवा लेता हो। वैसे जब यह सारी सृष्टि ही किसी व्यवस्था के द्वारा चलायी जा रही है तो चेतना भी पहले से ही मौजूद रही होगी। पाँच तत्व भी रहे होंगे। परमात्मा हर जीव के भीतर विद्यमान है। शिव कहते हैं, जब तक देह में प्राण हैं, वह जीव के साथ हैं, अर्थात उनमें हैं, और जब प्राण नहीं रहते तब जीव शिव में ही रहते हैं। एक शक्ति है जो देह व मन के माध्यम से व्यक्त हो रही है। जब वह स्वयं में टिक जाती है तो वही आत्मा है, और जब वह मन, बुद्धि के माध्यम से व्यक्त होती है, जीव कहलाती है। शाम को पापाजी से बात हुई, उन्होंने बताया, कोरोना के कारण सरकार पर आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी।सरकार ने उसका क्या जवाब दिया, यह भी बताया। जून ने कोरोना काल में ईवी की देखभाल पर एक वेबिनार में भाग लिया।जिसमें एक सुझाव यह भी दिया गया,  बीच-बीच में कार के इंजन को चलाना है, नहीं तो बैटरी ख़राब हो जाएगी।   


Tuesday, November 12, 2024

सफ़ाई वाला रोबॉट


 सफ़ाई वाला रोबॉट

आज देर शाम को मूसलाधार वर्षा हुई, वैसी ही जैसी असम में होती थी, अप्रैल के महीने में। बाहर नहीं जा सके, बालकनी में टहलते हुए प्रकृति के इस आनंद उत्सव का आनंद लिया।नन्हे का वीडियो कॉल आया, उनका घर अब पर्याप्त व्यवस्थित हो गया है। घर की सफ़ाई के लिए एक रोबोट डीबॉट लिया है, वह अपने आप ही एआई के द्वारा घर का नक़्शा बना लेता है और स्वयं को चार्ज भी कर लेता है। सफ़ाई में झाड़ू के साथ पोछा भी लगा लेता है। साथ ही उसने यह भी कहा, उसकी कंपनी द्वारा टेली मेडिसिन का उपयोग करने के लिए एक दिन में ग्यारह हज़ार लोगों ने डॉक्टर से सलाह लेने के लिए फ़ोन किया। डेढ़ हज़ार लोगों को उन्हें मना करना पड़ा, क्योकि इतने डॉक्टर्स ही नहीं हैं। पिछले वर्ष कोरोना की लहर आने पर छह हज़ार लोग एक दिन में फ़ोन करते थे, इस वर्ष सारे रिकॉर्ड टूट गये हैं। कल से दस मई तक लॉक डाउन घोषित कर दिया गया है।पिछले वर्ष भी इस समय देश में कोरोना बंद था। परमात्मा ही अब मददगार हो सकता है, हो ही रहा है। उसके सिवा कौन है जो दुनिया को इस आपदा से सुरक्षित निकाल कर ले जाये।कल साढ़े ग्यारह बजे उन्हें वैक्सीन की दूसरी डोज के लिए श्री श्री आयुर्वैदिक अस्पताल जाना है।आज शाम को पार्क संख्या दो से लाल-लाल पकी हुई जमैका चेरी तोड़ीं।


सुबह-सुबह प्राणायाम का महत्व बढ़ गया है, क्योंकि प्राण ही औषधि है, आजकल यह बात सत्य सिद्ध हो रही है। आज अस्पताल आने-जाने में डेढ़ घंटा लगा।एक महिला मिली जो निकट की ही एक सोसाइटी में रहती हैं, कहने लगीं, आपको आश्रम में देखा है। ‘विपरीत मूल्य एकदूसरे के पूरक होते हैं’, कहकर उन्होंने ग्लोब अस्पताल में हुए अपनी पहली वैक्सीन के अनुभव को बताया। शाम को फिर तेज वर्षा हुई, पर रुकने के बाद सूर्यास्त का सुंदर दृश्य दिखाई दिया। पापाजी से बात हुई। यह अब उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया है, वह नित्य फ़ेसबुक पर उसकी पोस्ट भी पढ़ते हैं। लॉक डाउन के कारण रविवार के बावजूद बच्चे नहीं आ पाये, वैसे भी सोनू का आक्सीजन लेवल अभी भी ९५ है,  छोटी बहन (डाक्टर) ने कुछ दवाएँ लिख दी हैं और कुछ टेस्ट भी, पर आजकल अस्पताल जाना तो मुश्किल है। आज ‘सायना नेहवाल’ पर बनी एक फ़िल्म देखी, अच्छी है।


आज सुबह भ्रमण के समय पंछियों की आवाज़ें पूरे वातावरण को गुंजा रही थीं। कोयल, बगुले, टिटहरी और छोटी काली-सफ़ेद चिड़ियाँ देखीं।बाद में लौटते हुए समाचार सुने, कोरोना के अलावा कोई और समाचार नहीं होता आजकल। पूरे देश में या कहें दुनिया में अफ़रा-तफ़री का माहौल बना हुआ है। लोगों के संक्रमित होने की संख्या बढ़ती ही जा रही है। कितनी जानें भी जा रही हैं, और ये हालात कब सुधरेंगे, कोई नहीं जानता।सोनू की रिपोर्ट पॉज़िटिव आयी है पर सीटी वैल्यू के अनुसार संक्रमण कम है। नन्हे व सोनू ने सीटी स्कैन करवाया है चेस्ट का, कल रिपोर्ट आएगी। ननद का फ़ोन आया, ननदोई व भांजे को भी कोरोना हो गया है। समाचारों में असम में आये भूकंप के बारे में सुना। 


कल रात को नींद गहरी नहीं थी, फ़िटबिट में गहरी नींद का स्कोर केवल ग्यारह मिनट ही दिख रहा है।शायद इसलिए दिन में थकान सी बनी रही। सुबह जल्दी उठकर टहलने गये, आकाश पर गोल चंद्रमा खिला हुआ अपनी सुषमा बिखेर रहा था। चाँदनी पर न जाने कितनी कविताएँ लिखी गई हैं और सोम से झरते हुए रस से खीर में आने वाली मिठास की कल्पना की गई है। सागर की लहरें भी तो पूर्ण चंद्रमा से मिलने के लिए आकाश में छलांग लगा देती हैं। शाम को जून के एक पूर्व सहकर्मी के कोरोना से हुए देहांत की खबर मिली, वैसे वह कई वर्षों से उन्हें किडनी का रोग था।बच्चों की रिपोर्ट में माइल्ड संक्रमण है चेस्ट में। पापा जी ने विविधभारती के एक कार्यक्रम ‘विविधा’ के बारे में बताया, शुक्रवार को आता है। इसमें संगीतकार नौशाद का इंटरव्यू सुना उन्होंने, और भी देश-दुनिया की बातें कीं।


Thursday, October 17, 2024

भोर का तारा

भोर का तारा


आज इतवार है, सुबह साढ़े नौ बजे बच्चे आ गये थे। दोपहर को नन्हे ने यू ट्यूब से देखकर काले चने की स्वादिष्ट सब्ज़ी बनायी। उन्होंने बच्चों को “साइकिल” फ़िल्म के बारे में बताया, पिछले हफ़्ते देखी बहुत अच्छी मलयालम फ़िल्म है। शाम को अचानक तेज हवा चलने लगी, छोटी-मोटी आँधी ही थी। वे छत पर टहल रहे थे, पड़ोसी परिवार भी अपनी छत पर था।पापाजी से बात हुई, उन्हें कोरोना का पता चले एक हफ़्ता हो गया है। उन्होंने कहा, भाई ज़्यादा बात नहीं करता, चुपचुप रहता है। उसे अस्वस्थ हुए ग्यारह दिन हो गये हैं, ऐसे में कोई भी इंसान परेशान हो जाएगा। उसने ईश्वर से प्रार्थना की, विश्व में सभी लोग कोरोना से मुक्त हो जायें। कल 'विश्व स्वास्थ्य दिवस' पर वेबिनार होने जा रहा है, उसे गुरुजी के प्रारंभिक उद्बोधन को ट्रांस्क्राइब करना है। प्रधानमंत्री की ‘परीक्षा पर चर्चा’ सुनी। उन्होंने छात्रों के प्रश्नों के उत्तर बहुत समझदारी और स्पष्टता के साथ दिये। प्रधानमंत्री होते हुए युवाओं व बच्चों से उनका संबंध बहुत अनूठा है। 


आश्रम के एक स्वयंसेवक से ज्ञात हुआ, गुरुजी का गला भी ख़राब है, वह एकांतवास में हैं, वेबिनार में उनका संदेश पढ़कर सुनाया गया। पापाजी को उनके भेजे बिस्किट आज मिल गये, उन्हें अच्छा लगा। अभी भी पूर्ण स्वास्थ्य नहीं मिला है। भाई को भी ठंड लग रही थी।परिवार के तीनों डाक्टर्स के संपर्क में है वह। तीनों से उसे कुछ न कछ सहायता मिल रही है। हेल्थ ऐप तो है ही सहयोग देने के लिए।सुबह अस्तित्त्व ने एक कविता लिखवायी। मौसम अपेक्षाकृत गर्म था। द्वादशी का चंद्रमा बेहद मोहक लग रहा था और  कुछ दूरी पर भोर का तारा भी चमचमा रहा था। लौटकर सूर्योदय को कैमरे में उतारा। पाचन तंत्र कुछ शिकायत कर रहा था, सो आज आयुर्वेद का एक नुस्ख़ा लिया है, रात्रि को दूध के साथ। घर पर बात हुई, दोनों मरीज़ अब बेहतर हैं। सुबह उनके लिए शुभकामनाएँ भेजी थीं और मानसिक उपचार का भाव भी किया था।दुआओं में बहुत असर होता है यदि वे दिल से निकली हों।पापाजी से की बातचीत उन्होंने रिकॉर्ड कर ली है। उन्हें फ़ोन पर बात करना अच्छा लगता है। कल रात देखे अपने दो स्वप्न उन्होंने बताये, एक में एक व्यक्ति उनसे पूछता है, कितने साल से पेंशन  ले रहे हो, और कब तक लेने का इरादा है। दूसरे स्वप्न में वे भाई के साथ पेंशन लेने जाते हैं, पर वहाँ बहुत देर हो जाती है। फिर वे निकाले हुए पैसे भाई को दे देते हैं, और वह उन्हें छोड़कर बस में बैठकर चला जाता है ।मन में छिपे हुए भय ही स्वप्नों में प्रकट हो जाते हैं।


आज वे रात्रि भ्रमण  के लिए निकले तो सड़क बिल्कुल सुनसान थी। पार्क नंबर नौ यानी फ़ौवरे वाले पार्क से होते हुए आम के बगीचे की बायीं ओर ढलान वाली सड़क से होते हुए लौटे। पार्क छह के बाहर एक माँ दो बच्चों को अपने दोनों ओर बिठाए एक किताब पढ़कर सुना रही थी। एक बच्चा बहुत खुश लग रहा था। थोड़ा आगे एक चौकीदार मिला जो सदा ही सलाम करता है। सभी ने मास्क पहने हुए थे। एक वर्ष पूर्व जैसा भय का माहौल था, कुछ वैसा ही फिर से बन रहा है। उन्होंने शाम को बाहर निकलना ही छोड़ दिया है। ‘देवों के देव’ में रामायण की कहानी चल रही है, महादेव की बहुत बड़ी भूमिका है रामायण में, उनके एक अंश का ही अवतार हैं हनुमान! पापा जी का स्वास्थ्य सुधर रहा है, उन्होंने फ़ेसबुक देखना आरंभ कर दिया है। सुबह क्रिया के बाद बहुत सुंदर अनुभव हुआ, आज्ञा चक्र पर सफ़ेद मोती दिखे ढेर सारे ! परमात्मा को महसूस करना हो तो वर्तमान के क्षण में ही किया जा सकता है, अभी और यहीं। वह इस वक्त है यहीं, उनके पास, उनसे स्वयं को पहचनवाता हुआ, वे उसे जान सकें यह वह चाहता है। वह उनके माध्यम से व्यक्त होना चाहता है, एक तरह से हो ही रहा है, पर अनजाने ही, उनके जाने बिना ही, जब वे जान लेते हैं तो उसके आनंद में भागीदार बन जाते हैं ! 



   


Wednesday, June 19, 2024

इलेक्ट्रिकल फ़ॉल्ट

रात्रि के नौ बजने वाले हैं, कमरे में शीतल सुगंधित पवन बहकर आ रहा है।प्रातः सूर्योदय के सुंदर दृश्य भी देखे थे, कुदरत मानव को लुभाने के कितने अवसर जुटाती है पर वह है कि अधिकतर समय कमरों में बंद ही रहता है; न हो तो कुदरत के सौंदर्य को बिगाड़ने के फेर में लगा रहता है। सड़क चौड़ी करने के नाम पर कितने पुराने पेड़ काट दिये गये, जिन्हें बड़ा होने में वर्षों लगे थे, उन्हें एक दिन में ही धूल धुसरित कर दिया गया। नाश्ते में सहजन के पत्तों के पराँठे बनाये, जो घर आते सड़क किनारे के एक पेड़ से उसे आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने तोड़े थे। सहजन का वृक्ष भी प्रकृति का एक और वरदान है, इसके पत्ते, फूल और फल सभी गुणों से भरे हैं । दोपहर को एओएल का अनुवाद कार्य भेजा, समन्वयक ने कहा उसकी एक तस्वीर भी चाहिए, टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने माँगी है। नन्हे की दी ‘माइकल ए सिंगर’ की पुस्तक ‘सरेंडर एक्सपेरिमेंट’ आगे पढ़ी, बहुत अच्छी है। नन्हे को इस तरह की पुस्तकों में रुचि है, पिछली बार उसने ‘कुंडलिनी’ नाम की एक पुस्तक दी थी; वर्षों पहले उसने इस्कॉन की पुस्तकें पढ़ना शुरू किया था, पर बाद में कॉलेज की पढ़ाई और मित्रों के साथ से सब छूट गया; पर उसे यक़ीन है एक दिन वह भी आत्मा की खोज में अवश्य जाएगा, हरेक को जाना ही पड़ता है। 


सोनू ने नये कुशन कवर भेजे हैं, जिस पर सुंदर गुलाबी फूल बने हैं। उनका फ्रिज भी आज ठीक हो गया। पहली बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया में उसके फ़ोटो के साथ आयुर्वेद पर लेख छपा है। कल से उन्होंने रात्रि भोजन का समय बदल दिया है, रात्रि भोजन और सोने के मध्य कम से कम दो घंटे का अंतर होना चाहिए, ऐसा कितनी ही बार स्वास्थ्य विशेषज्ञों से सुना है। गहरी नींद लाने के लिए सोने से पहले योग निद्रा करना भी अच्छा है। शाम को गुरु जी का सत्संग सुना। उन्होंने कहा, व्यक्ति को चिंता नहीं चिन्तन करना चाहिए, अपने मन की गहराई में बसे ईश्वरीय प्रेम पर सदा भरोसा करना चाहिए। छोटे भांजे के लिये एक कविता लिखी, परसों उसका जन्मदिन है। आज एक पुरानी डायरी को विदा दे दी, इसी तरह एक-एक करके पुरानी वस्तुओं को विदा देनी है, ताकि अंतिम यात्रा तक बिलकुल ख़ाली हो जाये मन ! 


आज का दिन विचित्र अफ़रातफ़री में बीता। जिसकी शुरुआत कल रात साढ़े ग्यारह बजे से ही हो गई थी; जब अचानक उनकी नींद कुछ आवाज़ें सुनकर खुली। पहले लगा जैसे कुछ समान कहीं गिरा हो, पर जब रुक-रुक कर आवाज़ें आने लगीं तो समझ में आया कहीं इलेक्ट्रिकल फ़ॉल्ट है, एक-एक करके फ्यूज उड़ रहे हैं। जून नीचे गये तो पता चला, सॉकेट बॉक्स में चिंगारी निकल रही है, उन्होंने मेन स्विच बंद कर दिया। नीचे से आवाज़ें आनी बंद हुईं तो ऊपर भी आवाज़ें आयीं, फिर कुछ देर में सब शांत हो गया। कुछ भी समझ नहीं आया तो वे सो गये। पर सुबह साढ़े तीन बजे पुन: आवाज़ें आने लगीं, इस बार ऊपर का बोर्ड भी जलने लगा था। उन्हें पहले ही सारे घर का मेन  स्विच बंद कर देना चाहिए था। पर कहते हैं न ‘विनाश काले विपरीत बुद्धि’ ! ख़ैर, सुबह वे अपने निर्धारित समय पर उठे, छह बजे इलेक्ट्रीशियन आया। दो-तीन घंटे लग गये पुन: बिजली बहाल होने में। इस बीच काफ़ी कुछ ख़राब हो गया। किचन की चिमनी, गूगल होम, होम ऑटोमेशन, मॉडेम, मेश आदि ख़राब हुए हैं। इसका कारण मेन न्यूट्रल में कुछ ख़राबी थी, जिसका ख़ामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा। दिन भर कई लोग आते रहे, अभी चिमनी वाला कल आएगा। आज एक और समस्या हुई, लैप टॉप का चार्जर भी ख़राब हो गया है, अब डेस्क टॉप पर काम करना है।


आज वेलेंटाइन डे है, पुरानी लिखी एक कविता पोस्ट की, सोचा, अगले साल अवश्य ही नयी लिखेगी। सुबह कुछ पंक्तियाँ लिखीं थीं, पर टाइप नहीं कर सकी। दो दिन से नेट काम नहीं कर रहा। आज नन्हे ने नया राउटर लगा कर दिया है, पर डेस्क टॉप में नहीं आ रहा है।हॉट स्पॉट से लेना होगा। रात का देखा एक स्वप्न याद रह गया, जिसमें एक पुराने परिचित परिवार के एक सदस्य काफ़ी अस्वस्थ हैं, उन्हें बुलाया है।बच्चों के लिए सुबह नाश्ते में अप्पम बनाये। लंच में घर में उगायी पालक की सिंधी सब्ज़ी, यानी साई भाजी । शाम को वे चले गये, आज उन्हें एक महीने के लिए एक मित्र के घर में शिफ्ट होना है, उनके अपने घर में सिविल का काम होना है। मित्र अपने काम के सिलसिले में बाहर गया हुआ है। प्रकृति हर समस्या का हल पहले से ही निकाल देती है।     




Thursday, May 2, 2024

गट्टे की सब्ज़ी

गट्टे की सब्ज़ी 


आज सुबह टहलने गये तो तापमान १६ डिग्री था, जैकेट पहनने का दिन, कभी-कभी २० या इक्कीस रहता है तो वे नहीं पहनते। समाचारों में सुना, दिल्ली का तापमान १ डिग्री हो गया है, यहाँ उसकी कल्पना करना भी कठिन है। इतनी ठंड में उन लोगों का क्या होता हिगा, जिनके पास पक्के घर नहीं है या घर ही नहीं हैं। आश्रम में अगले महीने एक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए छोटी बहन ने फ़ेसबुक पर संदेश पोस्ट किया है। वहाँ प्रतिदिन सत्संग हो रहा है। गुरुजी ने विश्व में लाखों लोगों को योग के पथ से जोड़ा है, ऐसा कार्य ईश्वरीय कृपा  के बिना नहीं हो सकता। अभी-अभी जे कृष्णामूर्ति द्वारा ध्यान की सुंदर परिभाषा सुनते-सुनते ही मन ध्यानस्थ होने लगा। ‘देवों के देव’ में आज दधीचि मुनि के त्याग की गाथा सुनी। उसे लगता है, वे लोग समाज के लिए कुछ विशेष नहीं कर पा रहे हैं। परमात्मा ही उन्हें राह दिखाएगा, अर्थात उनका शुद्ध ‘मैं’, यानि वे ‘स्वयं’ ! हर किसी को अपना मार्ग स्वयं ही तो चुनना होता है। परमात्मा हर किसी के द्वारा स्वयं को ही अभिव्यक्त कर रहा है ! कोई कितना उसे प्रकट होने देगा, उतना ही उसका जीवन सुंदर होगा !! 


आज सुबह मौसम सुहावना था। अपने निर्धारित स्थान पर चौकीदार को छोड़ कर पूरे रास्ते भर कोई नहीं मिला। रात की रानी की सुगंध दूर से ही आने लगी थी, सम्पूर्ण क्यारी  छोटे-छोटे श्वेत फूलों से भर गई है।जो बल्ब के प्रकाश में दिखायी दे रही थी। सड़क पर अंधेरा था। नैनी आज जल्दी आ गई, कन्नड़ सिखाने में उसे आनंद आता है, वह धीरे-धीरे कुछ शब्द सीख रही है।नाश्ते के बाद वे सब्ज़ी ख़रीदने गये, बेबी कॉर्न, कुंदरू, अरबी, आँवले आदि कुछ नयी सब्ज़ियाँ मिलीं, जो पास की दुकान में नहीं मिलतीं। जून को अब ईवी चलाने में दिक्क्त नहीं होती। इतवार को ईवी कार रैली है, नन्हा उसमें जाने को कह रहा है। यह भी बताया, उसका पैथोलॉजिस्ट मित्र असम जाने वाला है, उसे मेडिकल कॉलेज में जॉब मिला गया है, वहाँ वह आगे पढ़ाई भी कर सकता है।ऐसे ही लोग अपने शोध कार्य और श्रम के द्वारा समाज के लिए नयी खोज कर पाते हैं, उनके परिश्रम का लाभ मानवता को मिलता है। असम की एक हिन्दी लेखिका पूनम पांडेय की किताब में कुछ कहानियाँ पढ़ी, जो असम के लोक जीवन पर आधारित हैं।कल किसानों से एक बार फिर सरकार की बात होने वाली है, शायद कुछ हल निकल आये। 


आज मॉर्निंग ग्लोरी का पहला फूल खिला रानी कलर का सुंदर फूल ! धीरे-धीरे सभी गमलों में फूल आयेंगे, और जब बेलें ऊपर चढ़ जायेंगी तब और भी सुंदर लगेंगे। भीतर कैसी गुनगुन सुनायी दे रही है। जब मन शांत हो तभी यह अखंड गूंज सुनायी देती है। छोटी ननद का फ़ोन आया, वह गट्टे की सब्ज़ी बना रही थी। ख़ुद उसे बनाये हुए बरसों हो गये हैं। बचपन में माँ के हाथों की बनी पकौड़े की सब्ज़ी भी खायी थी। उसके बाद कभी मौक़ा नहीं मिला, सोचती है, क्यों न एक दिन उसी तरह बनाकर बच्चों को खिलाए। शाम को गुरुजी को सुना, वह प्रश्नों के उत्तर दे रहे थे, कितने सटीक और प्रभावशाली ढंग से वह प्रश्नों के उत्तर देते हैं। आज वे उन्हीं वृद्ध व्यक्ति से मिले, कह रहे थे, अगले हफ़्ते घर भी आयेंगे।सौ बरस के हो गये हैं, कहने लगे, “आदमी थक जाता है एक उम्र में, जीवन और मृत्यु अपने हाथ में तो है नहीं।” पता नहीं कुछ लोग लंबा क्यों जीते हैं और कुछ अल्पायु में ही कालग्रसित हो जाते हैं। सुबह छोटे भाई से बात हुई, कह रहा था, मृत्यु के रहस्य को छोड़कर जगत में कुछ जानने को नहीं रह गया है। वह ध्यान में गहरा उतरने लगा है। बहुत मस्त रहता है। दीदी ने उसके लिखे एक भजन के बारे में कहा है, वह अवश्य प्रसिद्ध होगा। उसकी एक सखी ने अपनी मधुर आवाज़ में उसे गाया था, जो व्हाट्सेप पर पोस्ट कर दिया था; सब को अच्छा लगा, भाई ने कहा है उसे अपनी आवाज़ में रिकॉर्ड करे।    


नौ बजने वाले हैं, जून ठीक नौ बजे बत्ती बंद करने को कहेंगे। उसके पूर्व ही आज का लेखा-जोखा लिख लेना है। सुबह आकाश पर बदली थी। आर्ट ऑफ़ लिविंग के फिटनेस चैलेंज का अंतिम दिन था। जून ने मॉर्निंग ग्लोरी के फूलों की तस्वीरें उतारीं। बाद में वे ढेर सारे फल लाए। काव्यालय की संस्थापिका ने एक अंग्रेज़ी कविता का अनुवाद पोस्ट किया, उसे अखरा तो उसने भी एक अनुवाद किया और उन्हें भेजा। जिसे उन्होंने फ़ेसबुक पर पोस्ट कर दिया। एक चित्र बनाना आरम्भ किया है। ‘ध्यान’ पर एक पुस्तक का  अध्ययन भी शुरू किया है। जीवन एक लय में आगे बढ़ रहा है, जैसे सुबह और शाम, वसंत और पतझड़ आते-जाते हैं, वैसे ही उनके दिन और रात कुछ नये-नये अनुभव देकर बीत जाते हैं।  इसी मधुर भाव में जीने का नाम जीवन है शायद !  


Tuesday, March 5, 2024

सरसों का साग

सरसों का साग 


आज प्रातः भ्रमण करते समय कुछ देर ‘वॉकिंग मैडिटेशन’ किया। इसमें हर कदम को सजग होकर उठाना है और दोनों हाथ देह से सटाकर रखने हैं, उन्हें हिलाते हुए नहीं चलना है। ऐसा करने से विचार रुक जाते हैं और भीतर मन ठहर जाता है। मैडिकेशन या मैडिटेशन दोनों से एक का चुनाव हर व्यक्ति को करना ही पड़ेगा। शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक रूप से स्वयं को स्वस्थ रखना हो तो ध्यान सर्वोत्तम उपाय है। गुरुजी के बताये कितने ही ध्यान मन को ऊर्जा से भर देते हैं। मन तब मनमानी करने से आनंदित नहीं होता बल्कि अपने लिए स्वयं काम तय करता है। जैसा सुबह तय किया था, उसने दोपहर को एक चित्र बनाया, एक कविता लिखी और एक पोस्ट ब्लॉग पर प्रकाशित की।कितना सही कहा है किसी ने परमात्मा भी उनकी सहायता करते हैं जो अपनी सहायता आप करता है।शाम को वर्षा के कारण बाहर जाना नहीं हुआ।रात को भी हल्की रिमझिम थी, जून को ऐसे मौसम में घर पर रहना ही भाता है, उन्हें लगता है चप्पल भीग जाएगी, कपड़ों पर छींटे पड़ेंगे सो अलग, पर उसके लिए बारिश एक उपहार है और उसके साथ जुड़ी हर बात भी।इसलिए दस-पंद्रह मिनट की छोटी सी वॉक के लिए वह छाता लेकर अकेले ही निकल गई। रात्रि नौ बजे आर्ट ऑफ़ लिविंग की दिव्य कांचीभोटला जी  का इंस्टाग्राम पर कार्यक्रम है। वह ‘ग्लोबल एन्सिएंट नॉलेज सिस्टम’ पर बोलने वाली हैं। उसे ट्रांस्क्राइब करना है। पूरा शब्द ब शब्द नहीं, केवल मुख्य बिंदु लिखने हैं। नौ बजे से आरम्भ होगा।बाद में उसका हिन्दी अनुवाद करना है।दिव्या जी एओएल की रिसर्च विंग श्री श्री इंस्टीट्यूट फॉर एडवांस्ड रिसर्च की डायरेक्टर हैं। जून ने भी पहले कुछ महीनों तक यहाँ कुछ काम शुरू किया था। यहाँ पर ध्यान, योग, आयुर्वेद और विश्व की अन्य ज्ञान प्रणालियों पर अनुसंधान होता है। सुदर्शन क्रिया के लाभों पर अनुसंधान भी हो रहा है। इस सेवा कार्य  से उसकी ख़ुद की जानकारी भी कितनी बढ़ रही है। उसने मन ही मन गुरुजी का धन्यवाद किया। 


आज सुबह आकाश स्वच्छ था, नीला धुला-धुला सा, कुछ तस्वीरें उतारीं, जो नेट पर प्रकाशित करेगी। नीले शुभ्र आकाश को देखकर किसी को भी अपने अनंत स्वरूप का स्मरण आ सकता है। कल उनके विवाह की वर्षगाँठ है। एक बार उसने एक नाटक सुना था, जिसका सार था, अनेक वर्षों साथ रहने पर भी कोई भी दो व्यक्ति पूरी तरह से एक-दूसरे को कहाँ जान पाते हैं; क्योंकि चेतना अनेक रूप बदल सकती है। एक ही व्यक्ति के भीतर अनेक व्यक्ति रहते हैं। एक वैज्ञानिक और संगीतकार एक साथ रह सकते हैं। गुरुदेव रवींद्र नाथ टैगोर कितने ही विषयों में सिद्ध थे।जून आजकल ज़्यादा बात नहीं करते। सेवा निवृत्त हुए अभी उन्हें डेढ़ वर्ष हुआ है, कभी-कभी लगता है, वह अभी से बोर हो गये हैं।कोरोना के कारण भी वह बंधन महसूस करते हैं। जबकि उसके मन की उड़ान को देश-काल का कोई बंधन नहीं है। नन्हे ने फ़ोन करके जून के वस्त्रों का  साइज पूछा, शायद उपहार ख़रीदा रहा होगा। उसे इन सब बातों का बहुत ध्यान रहता है। 


आज का विशेष दिन भला-भला बीता।सुबह सभी मित्रों व संबंधियों के शुभकामना फ़ोन आ गये। वे हॉर्लिक्स पी रहे थे कि नन्हा और सोनू भी आ गये। वे केक और उपहार लाए थे। उन दोनों के लिए घड़ी और जून के लिए वस्त्र। अपने साथ रसोइये से विशेष रूप से मँगवाया सरसों का साग भी लाए जो यहाँ नहीं मिलता है और जून को बहुत पसंद है। दोपहर को मक्की की रोटी के साथ बनाया। नाश्ते में मोरिंगा के पराँठे बने, जो मोदी जी की पसंद हैं। सहजन के पत्तों से बनाये जाते हैं, यू ट्यूब पर  विधि देखकर बनाये। आज नया कुछ नहीं लिखा, गूगल की मेहरबानी से एक पुरानी कविता के साथ कुछ पुरानी तस्वीरों को जोड़कर एक वीडियो बनाया। शाम को वे आश्रम गये थे । विशाला कैफ़े में सागर नाम के एक युवक ने उनकी तस्वीर खींच दी। पहले वह जून की तस्वीर उतार रही थी। युवक तथा उसकी मित्र यह देख रहे होंगे। उसकी मित्र ने ही प्रेरित किया होगा संभवत:, तस्वीर अच्छी आयी है, उनकी एक और तस्वीर साथ-साथ ! 


Thursday, July 13, 2023

दिवाली के दीपक

दिवाली के दीपक 

रात्रि के पौने नौ बजे हैं। आज मौसम ठंडा है। सुबह वे टहलने गये तो तापमान सत्रह डिग्री था, जैकेट पहनकर नहीं गये थे, शुरू में ठंड लगी फिर तेज चलने से गर्माहट आ गई; साइकिल चलाने से तो ठंड भाग ही गई।आज विज्ञानमय कोष के बारे में सुना। अथाह ज्ञान है शास्त्रों में। मानव शरीर में कितना बल, ज्ञान और शक्ति का भंडार छुपा  है। इसी देह में जन्म लेकर कोई मानव देवता बन जाता है। अवतारी पुरुष, संत, साध्वी स्त्रियाँ सभी के पास तो वही मानव देह तथा मन, बुद्धि है, जिसे साधकर कोई भी चाहे तो अपने जीवन को उन्नत कर सकता है। दोपहर को कपूर तथा सिट्रेनेला की सुवास डालकर पहली बार मोमबत्तियाँ बनायीं। दिवाली पर जलकर वे प्रकाश तथा सुगंध  फैलायेंगी। उत्सव को तीन-चार दिन ही रह गये हैं। उनके पड़ोसी हुसूर जाकर ढेर सारे पटाखे लाए हैं, उन्हें लाने की ज़रूरत ही नहीं है, देख-सुन कर ही काम चल जाएगा। कुछ पिछले वर्ष के बचे हुए हैं। बहुत दिनों बाद छोटी बहन से बात हुई, कुछ उदास थी, पर हर दुख उन्हें आगे ले जाता है। गुरू माँ से ‘गुरु गीता; का पहला भाग सुना। कह रही थीं, यदि रात को स्वप्न आते हैं तो मन अभी भी विचारों से मुक्त नहीं है। उसे स्वप्न तो आते हैं पर कुछ न कुछ सिखाने के लिए, किसी न किसी समाधान के लिए। छोटी भांजी के जन्मदिन पर एक कविता लिखी।


आज धन तेरस है। सुनील इलेक्ट्रीशियन ने छत पर व गैराज में बिजली की झालरें लगा दी हैं। दिवाली के विशेष भोज सूची भी बनाकर वे दिवाली की ख़रीदारी करने गये और इसी एरिया में स्थित वृद्धाश्रम में मिठाई देने भी। फ़ेसबुक पर उसकी कविता की पापा जी ने सुंदर शब्दों में तारीफ़ की है। महादेव में गणेश को गज का सिर लगा दिया गया है, कितनी विचित्र गाथा है गणपति के जन्म की और शिव से उनके प्रथम मिलन की।वैसे शिव से मिलने के लिए सभी को अपना सिर कटवाना ही पड़ता है। 


आज नरक चतुर्दशी है यानि छोटी दिवाली, कल के लिए बैठक में विशेष सजावट की है। विशेष भोज की भी थोड़ी बहुत तैयारी कर ली है।बच्चे सुबह-सुबह आ जाएँगे। अभी फ़ोन किया तो पता चला वे घर से बाहर दिये जला रहे थे। छोटी बहन से बात की, वे लोग भी घर में लाइट लगवा रहे थे। आज वह प्रसन्न थी, इंसान का मन कितना नाज़ुक होता है। आत्मा दृढ़ होती है, जिसे कुछ भी छू नहीं पाता।


सुबह समय पर उठे, वातावरण में जैसे उत्साह फैला हुआ था। नन्हा व सोनू आये तो उन्हें रवा इडली का नाश्ता करवाया। दोपहर को पंजाबी छोले-चावल व आलू-परवल की लटपटी सब्ज़ी। शाम को विधिवत दिवाली की पूजा की, बाहर दीपक जलाये। एक-दूसरे को उपहार दिये। जून के लिए लाल सिल्क का कुर्ता लाए हैं वे और उसके लिए भी सिल्क की एक ड्रेस। वर्षों से इसी तरह उत्सव मानते आ रहे हैं, पर हर बार एसबी कुछ जैसे नया-नया सा लगता है। दीपकों के प्रकाश में सबके चेहरे कैसे किसी अनजानी ख़ुशी से दमकने लगते हैं। रात के भोज में नन्हे के कुछ मित्र आये। वे अपने साथ पटाखे लाये थे, सभी मिलकर बाहर जलाते रहे। उसने पनीर मसाला, सूरन के कोफ़्ते, ग्वारफली व आलू की सब्ज़ी, रायता और पुलाव बनाया, मिठाइयों की पूरी एक क़तार थी, पर सभी की ज़्यादा रुचि आतिशबाजी में थी।कुल मिलकर यादगार दिवाली रही। 


आज गोवर्धन पूजा है, अर्थात गायों की वृद्धि के लिए कामना करने का दिन, प्राचीन  काल में पशु धन से ही किसी की सपन्नता का भान होता था। आज साइकिल के गियर आये, एक्स बॉक्स पर कार रेस का गेम खेला। दोपहर को बच्चे वापस चले गये। शाम को तेज वर्षा हुई थी पर रात होते-होते रुक गई। इस समय पड़ोसी के यहाँ से बम फूटने की आवाज़ें आ रही हैं।संभवत: दिवाली के पटाखे अभी तक समाप्त नहीं हुए हैं और न ही उनका जोश ! 


Wednesday, July 5, 2023

पीले रंग की साइकिल


पीले रंग की साइकिल 


जीवन एक शांत नदी की धारा की तरह सुचारू रूप से चल रहा है। आज दोपहर को उसने गणेश जी की पाँच छोटी मूर्तियों पर रंग भरना आरंभ किया। महादेव में समुद्र मंथन हो गया है, किंतु अमृत का बँटवारा अभी शेष है। गायत्री के संस्थापक आचार्य राम शर्मा जी की पुस्तक “चेतन, अचेतन व सुपर चेतन” एक बार फिर पढ़नी आरंभ की है, जो वर्षों पूर्व महिला क्लब की एक एक वरिष्ठ महिला ने भेंट में दी थी। वह कहते हैं, विचार प्राणशक्ति की स्फुरणा है, यदि प्राणशक्ति प्रबल है तो विचार भी सुदृढ़ होंगे। 


आज शाम को आकाश पर बादलों के सुंदर रूप-रंग देखने को मिले। सारा आसमान जैसे रंगों से सराबोर हो गया था।वे टहलने गये थे तथा कुछ फल भी ख़रीदने थे, जून जब दुकान में गये, तो उसने तस्वीरें उतारीं। सुबह-सुबह मन ने यह निर्णय लिया था कि प्रकृति के सौंदर्य के चित्र खींचना और उन्हें प्रकाशित करना यदि इस भाव से हो कि इससे वातावरण में सात्विकता का प्रसारण होगा तो यह भी पूजा का एक कृत्य है। उनके सभी कार्य ईश्वर के लिए हों तो वे यज्ञ स्वरूप हैं। शाम को नन्हे का फ़ोन आया, वे लोग रात को आयेंगे। ठीक आठ बजे वे पहुँच गये। उसके लिए एक पीले रंग की सुंदर लेडीज़ साइकिल लाए हैं। सुबह या शाम वह सुविधानुसार उसमें अभ्यास कर सकती है। साइकिल पर बैठकर हवा को चेहरे पर महसूस करना उसे बचपन में बहुत भाता था। कक्षा सात में थी जब पहली बार पिताजी की बड़ी साइकिल पर सीखना शुरू किया था। अब वर्षों से नहीं चलायी है पर एक बार कोई सीख ले तो भूल नहीं  सकता। जून के पास भी नन्हे की गियर वाली साइकिल है। सोनू उसके लिए लाल छोटे फूलों वाला गाउन भी लायी है। उन्हें एक मित्र के विवाह में सम्मिलित होने कुर्ग जाना है। उसके लिए नृत्य का अभ्यास कर रहे हैं। कोई महिला कोरियोग्राफ़र हैं जो ऑन लाइन अभ्यास कराती हैं। आज सुबह उठी तो दिल में एक हल्की सी ख़लिश थी एक कामना की, जब भी वे आत्मा से नीचे उतर कर अनात्मा के साथ अपनी पहचान बना लेते हैं, तभी भीतर असंतोष उभरता है। बाद में चिंतन-मनन के द्वारा भीतर ही समाधान मिल गया। कर्ता भाव से ही मन बंधन में बंधता है। यही दुख का कारण है। स्वयं को परमात्मा का एक अंश मानकर कर्म होते देना है, पर फल की इच्छा नहीं रखनी। स्वयं को वह परदा मानना है जिस पर दृश्य आ रहे हैं और जा रहे हैं। देह के भीतर उत्पन्न होने वाले स्फुरण को उत्पन्न होते व अस्त होते हुए देखना ही आत्मा की तरफ़ कदम बढ़ाना है; जिसे कोई व्याकुलता नहीं होती, चाहे कितने ही स्फुरण उत्पन्न होकर नष्ट हो जायें, वह सदा पूर्ववत ही रहती है। सुबह साइकिल भी चलायी, बहुत हल्की चलती है। नाश्ते में मकई की रोटी खाकर बच्चे चले गये , उन्हें अपने तीन मित्रों के यहाँ जाना था। शाम को नन्हे का भेजा मोमबत्ती बनाने वाला बॉक्स खोला, जिसमें पूरी विधि लिखी है तथा शीशे की बोतलें भी दी गई हैं, जिसमें वे मोम को पिघलाकर डालने वाले हैं। पापा जी से बात की, अब वे स्वस्थ हैं। उन्होंने ट्रम्प व बाईडेन की बातें भी की। टहलने गये तो वही वृद्ध व्यक्ति मिले, उनका ड्राइवर उनकी बहुत शिकायत कर रहा था। उसे पता ही नहीं है, उनकी शिकायत करके वह अपना ही नुक़सान कर रहा है। 


रात्रि भ्रमण हो चुका है। वापस आकर मोबाइल हाथ में लिया तो समय का पता ही  नहीं चला। इधर-उधर करते-करते बहुत समय ले लेता है, जब कि उस समय का कुछ और उपयोग भी किया जा सकता है। आज सुबह तन्मात्रा पर जानकारी ली, पाँच तत्वों की जो सूक्ष्म शक्तियाँ हैं, इनकी इंद्रियजनित अनुभूति को तन्मात्रा कहते हैं। अभी भी पूर्ण रूप से स्पष्ट नहीं हुआ है। शब्द, स्पर्श आदि का सूक्ष्म रूप है या स्थूल रूप यह तन्मात्रा। जब वे कोई शब्द सुनते हैं तो मन में जो भाव उत्पन्न होता है वह है तन्मात्रा या वह शब्द है। कोई विशेष गंध न होकर शायद गंध मात्र को ही तन्मात्रा कहते हैं।इंद्रियों और तन्मात्राओं के मिश्रण से जो अनुभूति होती है, उसे ही पाने के लिए मनुष्य के विविध विचार और कार्य होते हैं। वह आजकल ‘मन’ के बारे में पुस्तक पढ़ा रही है, अंततः मन की साधना ही तन्मात्रा की साधना है।  


Friday, February 10, 2023

बिजली की कार


सुबह अभी अंधेरा ही था जब वे प्रातः भ्रमण से लौट आए। योग साधना के बाद दीपक चोपड़ा का ‘चेतना’ के बारे में एक बहुत अच्छा वीडियो सुना।मुख्य विषय था कि यह जगत किस पदार्थ से बना है और चेतना क्या है ? कह रहे थे, उनके पाँच वर्ष के पोते ने उन्हें एक बार यूनिवर्स के बारे में बताया था कि वह दूसरे आयाम से बना है। आगे जे कृष्णामूर्ति का ज़िक्र किया और आइंस्टीन व टैगोर के मध्य हुए एक वार्तालाप का ज़िक्र भी किया, जब १९३० में वे दोनों मिले थे; जिसमें टैगोर कहते हैं, मनुष्य का व्यक्तित्व अनंत ब्रह्मांड को समाहित करता है। ऐसा कुछ भी नहीं हो सकता है जो मानव व्यक्तित्व द्वारा समाहित नहीं किया जा सकता है, और यह साबित करता है कि ब्रह्मांड का सत्य मानव का सत्य है। नाश्ता करते समय महादेव का अगला अंक देखा, कथा अत्यंत रोचक होती जा रही है। सती ने उन्हें स्वीकार कर लिया है पर महादेव ने अभी तक सती को नहीं स्वीकारा है. 

कल रात ओशो की किताब पढ़ी थी, सुबह तक उसकी सुवास शेष थी, जो एक कविता की शक्ल में प्रकट हुई.  ‘माँ’ पर  लिखी एक कविता भी आज पोस्ट की। मंझली भांजी का जन्मदिन है, कुछ पंक्तियाँ उसके लिए भी लिखीं. किसान आंदोलन पर दो वीडियो देखे, एक पक्ष में दूसरा विपक्ष में. हरियाणा व पंजाब की सरकारों को मंडी से बहुत आमदनी होती है, इसलिए वे इस बिल का विरोध कर रहे हैं, अन्य कोई राज्य यह विरोध नहीं कर रहा है. आज ‘कोना’कार वाले टेस्ट ड्राइव के लिए आये थे, सब ठीक था पर दो-तीन जगह हंप पर गाडी नीचे से टकराई. यह गाड़ी कोरिया की है, अभी वे तय नहीं कर पाए हैं कि कौन सी कार खरीदें. आज नंन्हा एक नया बोर्ड गेम लाया, ‘युद्धभूमि’, बहुत सरल है, बच्चों का कोई खेल हो जैसे. वह कई पार्ट्स जोड़कर  एक प्लेन बना रहा है, उस पर पेंट करने के लिए रंग और ब्रश मंगवाए हैं. दोपहर को वह ममेरी बहन का सामान लेकर आया, उसे स्टोर में रखवा दिया है. कोरोना के कारण कई बच्चे घर से काम करने के कारण अपने-अपने घरों को वापस जा रहे हैं. अब सम्भवतः वह अगले वर्ष के प्रारम्भ में लौटेगी. चार बजे वह बाइक से वापस गया तो रास्ते में बारिश आ गयी. कार होती तो भीगने से बच गया होता. 

रात्रि भ्रमण के लिए निकले तो देखा खेल के मैदान में बड़ा सा स्क्रीन लगाकर आई पी एल मैच दिखाया जा रहा था. कुछ लोग कृत्रिम घास पर नीचे बैठे थे, कुछ खड़े थे. उनके वृद्ध पड़ोसी भी बहुत रूचि से हर मैच देखते हैं, चाहे वह दिन या रात में किसी भी वक्त हो, क्रिकेट, फुटबॉल या टेनिस किसी का भी हो. आज सुबह से सिर में हल्का दर्द था, पर उसके कारण न तो दिनचर्या में कोई खलल पड़ा, न ही दवा लेनी पड़ी. देह से पृथकता का अनुभव होना शायद इसे ही कहते हैं. नन्हे ने उसकी सुविधा के लिए कम्प्यूटर के लिए नया मॉनिटर भेजा है. माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस सॉफ्टवेयर भी खरीद लिया है. पिता जी को कविताओं की इ- बुक ‘शब्द’ भेजी,  कहने लगे, संसार में भी थोड़ा  ध्यान लगाए. कोविड के कारण पार्लियामेंट का सेशन आठ दिन पहले ही समाप्त हो गया है. किसानों का आंदोलन जारी है. उनके सुधार के बिल तो पास हो गए हैं. श्रमिकों के लिए भी कई कानूनों में सुधार किया गया है. 

सुबह वेदांत पर चर्चा सुनी, स्वामी सर्वप्रियानंद कितनी अच्छी तरह माया, जीव व ब्रह्म के बारे में बता रहे थे. ब्रह्म ही माया के कारण जगत प्रतीत होता है; जैसे आकाश वास्तव में शून्य है पर नीला प्रतीत होता है. ध्यान की गहराई में जब ज्ञाता, ज्ञान और ज्ञेय तीनों एक हो जाते हैं. तब जो अनुभूति होती है, वह ब्रह्म है. जब जानने वाला तो हो पर जानने को कुछ न हो, तब जो जानना होगा, वह ब्रह्म है. जो कुछ जाना जा सकता है और जो कुछ जाना नहीं जा सकता, उन दोनों के पार है वह ! आज सुबह टाटा मोटर्स का आदमी आकर चेक ले गया ई वी के लिए. पिताजी को बताया तो उन्होंने कहा भविष्य में बिजली की गाड़ियाँ ही चलेंगी, उन्होंने भविष्य को देखकर कार का चुनाव करने के लिए नन्हे व जून को  बधाई दी. 

Friday, July 29, 2022

पैशन फ़्रूट के पौधे


रात्रि भ्रमण के वक्त हवा के साथ हल्की फुहार बरस रही थी, चेहरे को उसका शीतल स्पर्श भला लग रहा था। आज एक बाल फ़िल्म देखी, “मैं कलाम हूँ" राजस्थान के एक गाँव में फ़िल्मायी गयी है। एक बालक के संघर्ष की कहानी, अब्दुल कलाम आज़ाद से प्रेरित होकर अपना नाम जिसने कलाम रख लिया था। आज उन्होंने शयन कक्ष के बाहर जो बरामदा है, उसमें दो बड़े गमलों में पैशन फ़्रूट के दो पौधे लगाए। उसकी बेल रेलिंग से होती हुई वर्टिकल गार्डेन के फ़्रेम में चढ़ जाएगी।एक पौधा नीचे भूमि में लगाना है। इसी सोसाइटी में रहने वाले दो व्यक्तियों ने ये पौधे उन्हें दिए हैं। आज आम के बगीचे में ‘एटूबी’ ने फ़ूड स्टाल लगाया था, पर कोरोना के कारण कम लोग गए होंगे। कल पूरी दुनिया में ढाई लाख से अधिक कोरोना के केस मिले। बड़ा भांजा व उसके चचेरा भाई कल अपने-अपने घर जा रहे हैं। चार महीनों से वे अनेक युवाओं की तरह घर से ही काम कर रहे थे, आगे भी लगभग चार महीने तो और घर पर रहना होगा। इस आपदा ने यह तो अच्छा किया है कि बिछुड़े हुए परिवारों को मिला दिया है। आज सुबह अच्छी नींद लाने के उपायों पर चर्चा सुनी। कुछ उपाय उन्होंने अपनाए भी हैं। कमरे में पूर्ण अंधकार होना चाहिए। सोने से दो घंटे पूर्व ही  पानी पी लें व भोजन कर लें। टीवी या मोबाइल एक घंटा पहले से न देखें। सोने से पूर्व स्नान करें या पैरों को धो लें। तलवों की मालिश करें। कोई पुस्तक पढ़ें या भ्रामरी प्राणायाम कर लें। योग निद्रा भी कर सकते हैं। जून ने अगले हफ़्ते तीन दिनों के आर्त ऑफ़ लिविंग के एक कोर्स के लिए ऑन लाइन फ़ॉर्म भर दिया है। गुरूजी कार्तिकेय भगवान पर बोलेंगे व ध्यान भी कराएँगे। वह कहते हैं मानव जीवन का सबसे बड़ा उपहार है ध्यान ! सुबह छोटे भाई से बात हुई, वह बहुत खुश है, परमात्मा से जिसकी लगन लग जाए वह सदा ही प्रसन्न है। 


कल की तरह आज वर्षा नहीं हुई, बादल बने और बिखर गए।  आज सूर्योदय व सूर्यास्त दोनों बादलों के अनूठे रंगों के कारण अति सुंदर थे। नींद के लिए कल जो उपाय किए थे, काम आए।कल से कर्नाटक में लॉक डाउन खुल रहा है। आज विष्णु पुराण में दिखाया गया कि रावण ने सत्ता के लिए अपनी बहन के पति को भी मार दिया था। कैसी मनोवृत्ति है रावण की, पता नहीं लोग उसे क्यों विद्वान कहते हैं; कभी रहा भी होगा तो उसने अपने ज्ञान का उपयोग तो नहीं किया। एक जापानी एनिमेशन फ़िल्म ‘इन दिस पार्ट ऑफ़ द वर्ल्ड’ का कुछ भाग देखा, द्वितीय विश्वयुद्ध की कहानी है। नायिका चित्रकला में निपुण है और विवाह के बाद ससुराल में घुलमिल जाती है। असम में जिस तेल कुँए में आग लगी थी, अभी तक बुझ नहीं पायी है। तीन विदेशी विशेषज्ञ बुझाते हुए थोड़ा सा जल भी गये। 


आज शाम को टहलते समय उन्हीं वृद्ध व्यक्ति से पुनः मुलाक़ात हुई, बगीचे में बैठे थे, कह रहे थे, उन्हें कोई चिंता नहीं है। उनका ड्राइवर चिंतित लग रहा था।उसका परिवार बिहार में है, यहाँ अकेला रहता है। वृद्ध ने बताया, दिल्ली में उनके यहाँ गुरू जी आए थे, मोहल्ले के पाँच सौ लोग पंक्ति बनकर खड़े हो गए थे, उनके दर्शन के लिए। रात के ग्यारह बज गये, खाना कब खाते। उनके पुत्र आर्ट ऑफ़ लिविंग के पूर्ण कालिक शिक्षक हैं। 


Tuesday, March 29, 2022

उलूक शावक



आज सुबह तेज वर्षा हुई। दोपहर को मॉडेम बदलने मकैनिक आया, लगभग एक महीने बाद इंटर्नेट काम करने लगा है। जून ने नन्हे से घर के वाई फ़ाई सिस्टम के बारे में बात की, मॉडेम ख़राब होने के कारण घर की बत्तियाँ और फ़ैन आदि गूगल होम से नहीं चल रहे थे।इस  गूगल होम ने भी कितना आरम्पसंद बना दिया है लोगों को। आज दोपहर को नीतू सिंह के बचपन की ‘दो कलियाँ’ फ़िल्म देखी, वर्षों पूर्व  इसके बारे में सुना था, पर कभी देखने का मौक़ा नहीं मिला। उत्तर रामायण में दिखाया गया कि लव-कुश का जन्म हो चुका है और राम भी राज-काज में रुचि दिखा रहे हैं। शाम को वर्षा थमी तो टहलने गये, सड़कें  धुलीं हुई थीं और पेड़ कुछ ज़्यादा हरे लग रहे थे। प्रकृति का कुछ पलों का संग-साथ मन को सुकून से भर देता है, परमात्मा की पहली झलक साधक को कुदरत में ही मिलती है। 


आज सुबह समाचार मिला कि ऋषिकपूर का  देहांत हो गया है। उनके लिए श्रद्धांजलि  स्वरूप कुछ लिखा। दो वर्ष पूर्व हुए मस्तिष्क के एक असामान्य रोग के कारण प्रसिद्ध फ़िल्म अभिनेता इरफ़ान का भी कल ही देहांत हुआ था। दोनों कलाकारों को चाहने वाले लाखों  की संख्या में होंगे, सभी उदास हैं।जीवन के साथ मरण भी जुड़ा है और हर किसी को एक न दिन विदा होना है, हर मृत्यु उसे इस बात को और गहराई से याद दिला जाती है।  विश्व भर में कोरोना के मरीज़ भी बत्तीस लाख हो गए हैं। दो लाख से अधिक लोग अपनी जान गँवा बैठे हैं। मरने वालों में अधिकतर या तो वृद्ध हैं या रोगी। पूरे विश्व में करोड़ों लोग ऐसे हैं जो अनेक कष्टों का सामना करते हुए जीवन को किसी तरह बचा भर पा रहे हैं; जिनकी रोज़ी-रोटी छिन गयी है। यह प्रलय से कम विषम स्थिति नहीं है। आधुनिक काल की प्रलयंकारी स्थिति शायद वायरस ही ला सकते हैं। आज दो पुराने मित्र परिवारों से वीडियो कॉल पर देर तक बात हुई। ज़ाहिर है कोरोना की भी बातें हुईं, एक ने कहा बाहर से आने वाले किसी भी सामान के साथ वायरस घर में आ सकता है।अभी तक तो उनकी सोसाइटी में कोई केस नहीं आया है। 


आज मज़दूर दिवस पर एक रचना ब्लॉग पर प्रकाशित की। टीवी पर ‘सारा आकाश’ देखी, इसके बारे में भी काफ़ी सुना था दशकों पूर्व।सरकार ने लॉक डाउन की अवधि बढ़ा दी है। अमेरिका में मरने वालों की संख्या बढ़ रही है। भारत में कुल अड़तीस हज़ार मरीज़ हैं। अब मरीज़ों की संख्या में वृद्धि शीघ्रता से हो रही है। जून ने नन्हे से कहा कि शाम को वह उसके यहाँ जाने वाले थे, तो वह चुप ही रहा। कोरोना का भय इतना ज़्यादा है कि वह नहीं चाहता वे कहीं बाहर निकलें, सभी लोग न कहीं आना चाहते हैं न किसी को बुलाना ही चाहते हैं। आज प्रातः काल भ्रमण के समय छोटा सा उलूक शावक दिखा, कल उसकी माँ या पिता  यानि  एक बड़ा उलूक देखा था। ढेर सारे बगुले भी देखे, आदमी सड़कों पर नहीं निकल रहे हैं तो पक्षी निर्भीक होकर घूम रहे हैं। आज महाभारत में कृष्ण का अर्जुन को गीता उपदेश आरम्भ हो गया है और रामायण में लव-कुश राम को अपना परिचय दे देते हैं। कल रामायण का अंतिम एपिसोड आएगा। उसके बाद श्रीकृष्ण धारावाहिक प्रसारित किया जाएगा। राम और कृष्ण जैसे भारत के कण-कण  में बसे हैं, उन्हें याद किए बिना कोई दिन पूरा नहीं होता।  


जून को भी आर्ट ऑफ़  लिविंग में एक सेवा का काम मिल गया है। वह कम्प्यूटर पर ज़ूम इंस्टाल कर रहे हैं। विभिन्न परियोजनाओं के लिए फ़ंडिंग करने वाले संयोजकों को ढूँढना है। उसके पहले प्रोजेक्ट योजना बनानी हैं, उन्होंने काम शुरू कर दिया है। उसका अनुवाद कार्य भी चल रहा है, सेवा का छोटा सा कार्य भी संतुष्टि की भावना को दृढ़ करता है। आज सुबह गाँव से नैनी ढेर सारे आँवले लेकर आयी, हरे, ताजे, बड़े आकार के, कुछ का अचार बनाया है। कल भुट्टे व कुम्हड़ा लायी थी, गाँव के निकट रहने से ताजी सब्ज़ियाँ मिल जाती हैं। आज इसी सोसाइटी में उगे तीन नारियल भी ख़रीदे।   


रात्रि के नौ बजे हैं, आज शाम वे लगभग दो महीने बाद मुख्य  गेट से बाहर निकले। दायीं ओर कुछ दूरी पर सब्ज़ी की दो नयी दुकानें देखीं। लोग सामान्य दिनों की तरह आ-जा रहे थे। सड़कों पर चहल-पहल थी, पर पता नहीं इसका परिणाम पता नहीं क्या होगा। दिल्ली में भी दुकानें खुल गयी हैं , कुछ विशेष दुकानों के आगे लोगों को लम्बी-लम्बी क़तारें लगी हैं। आज सुबह गाड़ी धोने वाले के साथ एक माली आया, गमलों में निराई कराके सूखा गोबर डलवाया, बड़ी ख़ुशी-ख़ुशी कह रहा था आज से दुकानें खुल गयी हैं। शायद वह भी वहीं जाएगा, लोग पैसा देकर विष ख़रीदते हैं, आदत ही तो है। आज शाम से थोड़ा पहले भुवन शोम फ़िल्म देखी कुछ देर, बहुत अच्छी लगी, प्रिंट पुराना है पर अभिनय अनोखा। आज से दूरदर्शन पर ‘उपनिषद गंगा’ भी दिखाया जा रहा है।


Friday, March 18, 2022

पीली मूँग



आज शाम साढ़े  पाँच बजे ही वर्षा आरंभ हो गयी। घर के दायीं तरफ़ बने गोदाम की टिन की छत पर बूँदों की बहुत तेज आवाज़ होती है, जैसे ओले गिर रहे हों। वर्षा रुकी तो वे जैकेट पहनकर टहलने गए, तेज हवा बह रही थी, हवा में ठंडक भी थी। बायीं तरफ़ की पड़ोसिन वर्षा में ही छाता लेकर टहलने निकल पड़ी थीं, उनका कहना है कि शाम को एक तय समय ही उन्हें मिलता है, यदि वह बीत गया तो बाद में व्यस्तता के कारण टहलना छूट जाता है। कल उसने ब्लॉग पर व फ़ेसबुक पर नींद पर एक कविता लिखी थी, कइयों को भायी है, शायद नींद ना आना सबकी समस्या है।संभवतः अवचेतन मन में कोरोना का भय परेशान कर रहा हो। आज जून ने सिंधी दाल बनायी पीली मूँग की, बनाते समय कितनी बार माँ को याद किया, बचपन सदा किसी न किसी रूप में हरेक के साथ चलता है। शायद सरकार लॉक डाउन की अवधि को बढ़ाने वाली है, कई राज्यों ने पहले ही ऐसा कर दिया है। सरकारें काफ़ी सहायता भी प्रदान कर रही हैं, ताकि काम न होने पर भी निर्धन, मज़दूर आदि अपना जीवन ठीक से चला सकें। कितने लोगों का व्यापार ठप्प हो गया है । टैक्सी ड्राइवर, होटल सभी जगह किसी की कमाई नहीं हो रही। सभी स्कूल शायद सितम्बर तक बंद रहेंगे। अमेरिका को भारत क्लोरोकविन भेज रहा है, इस समय सभी को सभी की मदद करनी है। 


आज हफ़्तों बाद वे रात्रि के भोजन के बाद बाहर टहलने निकले। चौकीदार के अलावा कोई नहीं था, जबकि शाम को इक्का-दुक्का लोग थे। यदि यह महामारी न हुई होती तो आजकल वे गुजरात में होते।इंडिगो ने कहा है कि अगले वर्ष तक वे कभी भी टिकट का इस्तेमाल कर सकते हैं। सुबह घर की साप्ताहिक सफ़ाई की, तीनों बरामदे, सभी कमरे, किचन, गैराज, सभी स्नानघर, पूरे तीन घंटे लग गए। बर्तन और कपड़े तो मशीन से धुल जाते हैं। महामारी ने एक काम तो अच्छा किया है, सभी को घर का काम करना सिखा दिया है। खाना बनाने से कपड़े धोना, झाड़ू-पोछा तक सब कुछ।सभी आत्मनिर्भर बनें यह तो अच्छा ही है। नाश्ते में कुछ देर हो गयी पर अब जून भी जल्दी नहीं मचाते, आराम से अख़बार पढ़ते रहते हैं। सभी जगह तालाबंदी है, सभी एक सी समस्या का सामना कर रहे हैं, इसलिए जैसे दुनिया एक अदृश्य सूत्र में बंधकर  कुछ निकट आ गयी है। मोदी जी ने अपने सम्बोधन में कहा, तीन मई तक तालाबंदी बढ़ा दी गयी है। ज़्यादातर राज्यों ने इसका स्वागत किया है। अभी भारत में कोरोना के ग्यारह हज़ार मरीज़ हैं। छोटी बहन से बात हुई, उनके अस्पताल को विशेष कोरोना अस्पताल में बदल दिया गया है, कल उसका कोरोना टेस्ट भी हुआ। 


शाम को एक दुखद घटना सुनने को मिली, इसी सोसाइटी में एक युवक की मृत्यु हो गयी, कहा गया कि उसने  आत्महत्या कर ली, पिता दुबई में रहते हैं, माँ से उसका किसी बात पर झगड़ा हुआ था, वह ऊपर के फ़्लोर पर रहता था और माँ नीचे।  कितना अजीब लगता है सुनकर कि इस आपद काल में भी लोग इतने नादान हो सकते हैं। शायद वह बीमार रहा हो, पता नहीं उसे दवा भी मिली हो या नहीं। नन्हे और सोनू से नियमित फ़ोन पर बात होती है, एक ही शहर में रहने के बावजूद पिछले एक महीने से मिलना नहीं हुआ है। आज सुबह नींद खुलने से पहले एक मधुर घंटी की ध्वनि सुनायी दी, कौन था जो इतने प्रेम से जगा रहा था। दो तीन दिन पहले भी एक आवाज़ सुनकर नींद खुली थी जिसका स्रोत नज़र नहीं आया। परमात्मा के पास हज़ार साधन हैं, वह कुछ भी कर सकता है ! रामायण में राम-रावण युद्ध आरम्भ हो गया है। आज दीदी ने फ़ोन किया उनके यहाँ महरी ने आना शुरू कर दिया है, अख़बार भी आने लगा है। 


Tuesday, March 8, 2022

बदलियों के रंग

 

आज नौ बजे उन्होंने ग्यारह दीपक जलाए। आज के रामायण के अंक में राम का हनुमान से प्रथम मिलन दर्शाया गया है। रामायण और महाभारत देखने से दिन काफी भरा-भरा लगता है. मन में राम और कृष्ण का स्मरण बना रहता है. शाम को मास्क पाहन कर टहलने गयी तो शुरू में थोड़ी दिक़्क़त हुई पर बाद में अभ्यास हो गय। अभी आगे कई महीनों तक ऐसे ही चलेगी ज़िंदगी। कोरोना के ख़िलाफ़ इस युद्ध में हर भारतीय को अपना योगदान देना है। अमेरिका ने भारत से कोरोना के लिए दवा की मांग की है, जो भारत अवश्य ही भेज देगा. लगता है सरकार को लॉक डाउन की अवधि बढ़ानी पड़ेगी. आज जून ने भी एओएल को कुछ आर्थिक सहयोग दिया, वे लोग दिहाड़ी मज़दूरों को भोजन आदि बांट रहे हैं। 

 


इस समय यहाँ मूसलाधार वर्षा हो रही है, गर्जन-तर्जन के साथ, रह-रह कर बिजली चमकती है और बादलों की तेज गड़गड़ाहट सुनायी देती है। बंगलूरू में इस नए घर में यह उनकी पहली बारिश है, लगभग एक घंटा पहले आरंभ हुई। एक-एक करके सारी खिड़कियाँ बंद कीं। छत पर लकड़ी के झूले को बचाने के लिए जो शेड बनाया है, वह भी तेज बौछार से उसकी रक्षा  नहीं कर सका। दोपहर बाद ‘इंगलिश मीडियम’ देखी, सिनेमा हाल बंद हैं सो हॉट स्पॉट पर इसे रिलीज़ कर दिया गया है। शाम को पार्क में फूलों के सूखते हुए पौधों को देखा था, इंद्र देवता ने इतना पानी बरसा दिया कि धरती-पौधे सब तृप्त हो गये हैं। 


आज सुबह गैराज में एक कौए ने कबूतर पर हमला कर दिया। घर के अंदर से देखा तो उसे भगाया। कबूतर घायल था, कौए  ने उसके पंख नोच दिए थे। वह एक कोने में छिपने गया, उड़ नहीं पा रहा था, रास्ते में रक्त की बूँदें गिरती जा रही थीं, उसे पानी दिया पर पी नहीं सका। एक चौकीदार के द्वारा उसे डिस्पेंसरी भेजा। पता नहीं उसका क्या हुआ होगा. 


वर्षा के कारण बालकनी पर बनी शीशे की छत और सोलर पैनल अपने आप धुल गए हैं.  मौसम भी ठंडा हो गया है.आज शाम टहलने गए तो आकाश पर गुलाबी बादल थे, बिलकुल मसूर की दाल के रंग के बादल, जो नीले पृष्ठभूमि में बहुत आकर्षक लग रहे थे. रंगों का यह खेल प्रकृति के हर क्षेत्र में खेला जा रहा है. अनगिनत रंगों की तितलियाँ, मछलियां, पंछी, फूल और कीट, सर्प यहाँ तक कि जड़ पत्थरों को भी अनोखे रंगों से सजाया है प्रकृति ने, मानव इनकी ओर देखे तो सारा कष्ट भूल जाये पर उसके पास चाँद -तारों को निहारने का समय नहीं है, कुछ लोग बन्द कमरों में टीवी पर हिंसा और नफरत के खेल देखने में ही व्यस्त हैं. आज सुबह हरसिंगार के ढेर सारे फूल उठाये.  


रात्रि के नौ बजे हैं. हनुमान जी को जाम्बवान उनकी भूली हुई शक्तियों को याद दिला रहे हैं, बचपन में एक ऋषि ने उन्हें शाप दे दिया था, जिससे वे उन्हें भूल ही गए हैं. बाल्यावस्था में उन्हीं ने एक बार सूर्य का भक्षण किया था, यह भी उन्हें याद नहीं है. वे भी पूर्वकाल में कितनी ही बाधाओं को पार करके आएये हैं पर कोई नयी विपत्ति आने पर यह भूल जाते हैं. आज भी छिटपुट वर्षा हुई, शाम को आकाश सलेटी-काले बादलों से भरा था. हनुमान जी को अपना बल याद आ गया है और वे सागर पर जाने के लिए तैयार हो गए हैं. उन्हें राह में मैनाक पर्वत मिलता है, जिसे समुद्र देव ने कुछ देर विश्राम के लिए भेजा है. सागर भी राम के कुल का ऋणी है और मैनाक की रक्षा हनुमान के पिता ने  की थी. पहले लोग अपने प्रति की गयी भलाई को कितना याद रखते थे. 



Wednesday, March 2, 2022

दीया -बाती

आज इतवार है। वे प्रातः भ्रमण के लिए गए तो हवा में ठंडक थी, तापमान १८ डिग्री रहा होगा। सुबह का टहलना अभी तक तो चल रहा है लेकिन कब रोकना पड़े, कह नहीं सकते, टहलते समय बार-बार ऐसा लग रहा था जैसे क़ानून का उल्लंघन कर रहे हैं। कल शाम ही एक नोटिस आया था कि टहलना आवश्यक कार्यों में नहीं आता, छह महीने की सजा हो सकती है। भगवान ही जानता है स्थिति कब सामान्य होगी। अभी लॉक डाउन ख़त्म होने में दो हफ़्ते शेष हैं। इसके बाद भी क्या होने वाला है यह भविष्य के गर्भ में छिपा है। आज एक पुरानी सखी से महीनों बाद बात हुई, सभी भाई-बहनों से भी फ़ोन पर बात हुई। आजकल सभी लोग घर में हैं और सभी के पास समय है। फुफेरे भाई ने पुरानी तस्वीरें भेजीं, चाची के परिवार में सबसे बात हो गयी। विपदा में सब जैसे किसी एक तल पर बहुत क़रीब आ गये हैं। वापस आकर समाचार सुने, कोरोना पीड़ितों की संख्या  भारत में एक हज़ार हो गयी है। नौ बजे रामायण का तीसरा अंक देखा, अनेक बार देखने पर भी रामायण की कहानी नई जैसी लगती है। मोदी जी की “मन की बात’ सुनी। धीरे-धीरे दिल्ली में दिहाड़ी मज़दूरों व अशक्त लोगों के लिए जग-जगह रहने व खाने के इंतज़ाम हो रहे हैं। पहले वे लोग अपने-अपने गावों में जा रहे थे। पर वहाँ भी उनके लिए कौन स्वागत में बैठा होगा ? किसी भी तरह की विपदा हो उसका सबसे ज़्यादा और सबसे पहला असर मज़दूरों पर ही पड़ता है। जून ने पीएम केयर्स फंड में पैसे भेजे हैं। उन्होंने ग्रामीण लोगों की सहायता के लिए भी कुछ मदद की, दुकान तक भी गए। आर एसएस के कुछ लोग राशन ख़रीद कर निर्धन लोगों में बांट रहे हैं। इस समय सभी को सहायता के लिए आगे आना होगा। समाज के हर वर्ग को देश के लिए कुछ करने का अवसर मिला है। नन्हे से बात हुई, उसने कहा अभी काफ़ी समय लग जाएगा दुनिया को कोरोना से मुक्त होने में। न्यूयार्क में तीन से चार हज़ार लोग महामारी से पीड़ित हैं। 


रात्रि के नौ बजे हैं। कुछ देर पूर्व छत पर टहलने गये तो अष्टमी का सुनहला पीला  चाँद चमकीले सितारों के मध्य जगमगा रहा था। जैसे उसे कोई खबर ही नहीं है कि जिस धरती के वह चक्कर काट रहा है, उसे क्या हो रहा है? अर्थात उस पर रहने वाले मानव नाम के जीव पर क्या बीत रही है ?  शाम को सूर्यास्त भी देखा था। प्रकृति अपने कर्म में कभी नहीं चूकती, न जाने कितने युगों से रोज़ यह क्रम चल रहा है। आज दोपहर को अचानक तेज अंधड़ चला, मुश्किल से दो-तीन मिनट के लिए, पर ढेर सारे सूखे पत्ते छत पर, लॉन में और गैराज में फैल गए। शाम को झाड़ू लगाया। आजकल सफ़ाई कर्मचारी भी नहीं आ रहे हैं। 


आज रामनवमी है, गुरूजी ने राम ध्यान करवाया। सुबह क्रिया के दौरान सोहम का अर्थ स्पष्ट हुआ, अद्भुत थे वे क्षण ! प्रधान मंत्री ने अगले इतवार को देशवासियों को रात्रि नौ बजे नौ मिनट के  लिए दीपक, टार्च या मोमबत्ती जलाकर घर के द्वार या बालकनी में खड़े होने को कहा है। घर की बत्तियाँ बंद कर देनी हैं ताकि दीपकों का प्रकाश ज़्यादा प्रज्ज्वलित हो सके। कोरोना के ख़िलाफ़ युद्ध के लिए सभी भारतवासियों को एकजुटता की शक्ति को महसूस करना है। सभी की चेतना जब एक होकर इस विपत्ति का सामना करने का निश्चय करेगी तभी उन्हें सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। 


Tuesday, February 1, 2022

बादामी गुफ़ाएँ

बादामी गुफ़ाएँ

रात्रि के दस बजकर दस मिनट हुए हैं। सुबह छह बजे वे उत्तरी कर्नाटक स्थित बादामी गुफ़ाओं की यात्रा के लिए रवाना हुए। छठी  शताब्दी में बने ये गुफा मंदिर देखने वाले को चकित कर देते हैं। तत्पश्चात बनशंकरी मंदिर में नींबू की माला पहने हुए देवी की भव्य मूर्ति के दर्शन किए। अगला पड़ाव था पट्टकदलु, जहाँ मंदिर के अवशेष मात्र ही थे। कुडल संगम, आईहोले, बसवा तीर्थ (बसवन्ना ) अनुभव मंटप तथा संग्रहालय के प्रांगण में स्थित सुंदर मूर्तियाँ भी देखीं।बसन्ना भगवान की जीवन कथा सुनी, उनके वचनों की पुस्तक मंगायी है। बारहवीं शताब्दी का यह संत अपने समय से बहुत आगे था। उनके मन में किसी भी प्रकार का  कोई भेदभाव नहीं था।  लौटे तब अँधेरा हो गया था । कल हम्पी जाना है, जहाँ विजयनगर साम्राज्य के अवशेष आज भी हज़ारों दर्शकों के आकर्षण के केंद्र बने हैं।   


आज वे घर लौट आए हैं। कल रात नौ बजे चली हम्पी एक्सप्रेस सुबह समय से पूर्व ही आ गयी थी । कल दिन भर कड़ी धूप में छाता व टोपी लगाकर मीलों पैदल चलते हुए वास्तुकला के सुंदर नमूने देखे, जो भारत के गौरवशाली अतीत की कहानी कहते हैं। सुबह का नाश्ता नन्हे के घर पर किया। बड़ी ननद का फ़ोन आया। वे लोग बिटिया का रिश्ता टूटने से, बल्कि तोड़ने से खुश हैं। समाज बदल रहा है। लड़कियों को अपना सम्मान करना आ रहा है। वे विवाह करके ग़ुलामी का जीवन नहीं बिता सकतीं। उनका आत्मसम्मान उन्हें औरों के आगे बेवजह निरीह बनकर रहने  नहीं देगा। जितना अधिकार अपनी बात कहने का किसी लड़के या पुरुष को है, उतना ही अधिकार स्त्री या बालिका को भी है। हर आत्मा की पहली पुकार है स्वाधीनता। साथ-साथ रहते हुए भी एक-दूसरे का सम्मान करते हुए उन्हें विकसित होने देना किसी भी रिश्ते को गहराई प्रदान करता है। आज महिला क्रिकेट टीम फ़ाइनल में पहुँच गयी है। एक वक्त ऐसा भी था जब महिला क्रिकेट को सम्मान नहीं मिलता था। अब महिला खिलाड़ियों के नाम भी लोगों को याद होने लगे हैं। महिलाएँ वे सभी कार्य कर रही हैं, जो कभी पुरुषों के एकाधिकार में थे। 


रात्रि के आठ बजे हैं, गुरूजी श्री श्री यूनिवर्सिटी से ध्यान साधना करवा रहे हैं। उन्होंने कहा, जो आंदोलन देश में चल रहा है, वह सीएए के ख़िलाफ़ नहीं है, क्योंकि ऐसे क़ानून अन्य देशों में भी हैं। कुछ ऐसे लोग जो खुद को कटा हुआ मानते हैं, इसमें शामिल हैं, और कुछ राजनीतिक पार्टियाँ भी इसका लाभ उठा रही हैं। सरकार भी झुकने को तैयार नहीं है। गुरूजी ने यह भी कहा, वकीलों को काले कोट की जगह कोई और रंग पहनना चाहिए। उनके सत्संग में एक अन्य साधक प्रसानी जी भी आए हैं, जिन्हें उड़िया में कविता सुनाने को कहा है।  उन्होंने गुरूजी के नाम की श्रेष्ठता बतायी। नाम सुमिरन से ज्ञान की वृद्धि होती है और चेतना की शुद्धता से शांति का प्रसरण होता है।परमात्मा के सिवा आत्मा का कौन निकटस्थ है। 


आजकल हर जगह एक नयी बीमारी कोरोना का भय है इसलिए होली खेलने का उत्सव इस बार नहीं मनाया जाएगा, ऐसा प्रधानमंत्री ने भी कहा। कोरोना के कारण छोटे भाई की विदेश यात्रा भी स्थगित हो गयी है। नन्हा और सोनू एक मित्र के विवाह में कोचीन गये हैं, सुबह मोबाइल पर उन्होंने अपना कमरा दिखाया, नदी के किनारे स्थित है उनका होटल। मौसम गर्म हो गया है।  





Wednesday, April 28, 2021

ऐनी विद एन इ

 रात्रि के नौ बजकर पांच मिनट हुए हैं. अभी-अभी जून ने दो किताबों का आर्डर दिया है, नए वर्ष के लिए सुंदर उपहार ! कल छोटा भाई यहां आ रहा है, उसने सोचा, शाम को वे उसे आम व अंगूर के बगीचे में ले जायेंगे, हो सका तो गाँव के खेत में भी. आज दोपहर बारह बजे वे असमिया सखी के यहां से लौटे, पूरे चौबीस घण्टे बाद. उन्होंने बहुत गर्मजोशी से स्वागत किया, कल दिन में तथा रात्रि का भोजन व आज सुबह का नाश्ता प्रेम से खिलाया. तस्वीरें खींची, चाइनीस चेकर खेला , पुराने दिनों की बातें कीं, उन दिनों की तस्वीरें देखीं. आज मृणाल ज्योति से एक अध्यापिका का फोन आया, पूछ रही थी वह वहाँ कब आएगी. जून ने कहा है शायद दो वर्ष बाद वे वहाँ दुबारा जा सकें. मैक्स टीवी पर क्वीन का आठवां भाग देखा, शक्ति अब पुन: फिल्मों में काम करने के लिए तैयार है. मौसम आज सुहावन है, कल सखी की सोसाइटी में क्रिसमस पार्टी थी और आज उनके पड़ोसी के यहां क्रिसमस केक की सेल थी. असम में हर वर्ष वे क्रिसमस ट्री सजाते थे और बच्चों को केक खिलाते थे। 


अभी-अभी भाई का फोन आया, वह दोपहर ढाई बजे पुट्टपर्थी पहुंच गया था. वहां के स्टेट बैंक में पूरे आठ दिन उसे ऑडिटिंग करनी है, उसका भाग्य उसे तीर्थ स्थानों के दर्शन करा रहा है. तमिलनाडु व आंध्र के कितने ही मंदिर भी देख चुका है. कल सुबह विजयवाड़ा से बारह बजे तक घर आ गया था, बड़े भाई भी आधे घण्टे बाद पहुंच गए. कल शाम वे उसे एओल आश्रम ले गए थे, विशालाक्षी मंडप रौशनी में बहुत भव्य लग रहा था. सप्ताहांत में चार दिनों के लिए उन्हें काबिनी जाना है. घूमना और लिखना-पढ़ना यही काम होंगे वहां. उनके गैराज में किनारे की पट्टी पर मार्बल लगवा लिया है, जून कह रहे हैं सामने की दीवार पर टाइल्स लगवा लेते हैं, बरसों वे लोग सरकारी घरों में रहते आये हैं जिसमें कभी कोई काम नहीं करवाया, पर अब अपने घर को संवारने का कोई अंत ही नहीं है. सोनू ने उसे दो बंदनवार व दो मोबाइल बैग्स दिए, नन्हा आजकल ज्यादा बात नहीं करता है, अपने काम में ज्यादा व्यस्त रहने लगा है. 


आज बहुत दिनों बाद रेडियो पर रात्रि समाचार सुने. बचपन में हर रात को सोने से पूर्व घर में रेडियो पर समाचार सुने जाते थे. राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर बनाने की प्रक्रिया को मंजूरी दे दी गयी है. सरकार लोगों तक सीएए की जानकारी पहुंचाने की कोशिश कर रही है. शरणार्थियों ने दिल्ली में एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री व गृहमंत्री को धन्यवाद दिया है. पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री व राज्यपाल के मध्य तनाव कम नहीं हो रहा है. सुबह-सुबह कुछ लिखने का प्रयास कर रही है नूना पिछले कुछ दिनों से, दिन भर लिखने का समय नहीं मिल पाता। छत पर काम चल रहा है, दिन भर कोई न कोई आता रहता है. सुबह मन कितना स्पष्ट रहता है खाली और निर्मल .. विचार अपने आप ही आते हैं । आज सुबह जून नए खुले रेस्त्रां से पुट्टू लाये,  साथ में काले चने की सब्जी. नए वर्ष के लिए कुछ संकल्प लेने का समय आ गया है. अगले वर्ष वे  ध्यान, लेखन, सेवा कार्य, पुस्तकें पढ़ना तथा बागवानी नियमित करेंगे. नया वर्ष आने में मात्र सात दिन रह गए हैं. कल क्रिसमस का त्योहार है, देश में शांति बढ़े, विकास हो, आर्थिक प्रगति हो और आपसी मेलजोल बढ़े. यह कामना उन्हें नए वर्ष के लिए करनी चाहिए. जून की पीठ में दर्द हो गया है, योग कक्षा में उन्हें विशेष आसन करने को कहा शिक्षिका ने. अगले महीने वह घर जाने वाली है, ऋषिकेश से यहाँ आयी है, किराये का घर लेकर अकेले ही रहती है। उसने सोचा  है, एक दिन उसे घर बुलाएगी।  


कल रात एक स्वप्न देखा, एक बड़ा हवाई जहाज है, जिसमें नन्हे और जून को कहीं जाना है, एक परिचित व्यक्ति और भी है, वह उन्हें छोड़ने भर आयी है, पता नहीं कैसे जहाज में पहुंच जाती है. तभी वह उड़ने लगता है, उन्हें लगता है, जहाज अभी रुकेगा और वह उतर जाएगी, पर ऐसा नहीं होता. उसके पास टिकट भी नहीं है. अंततः वह अपने लक्ष्य पर उतर जाता है, वे बाहर आते हैं, उनसे आगे तीन जन को निकलने देते हैं चौथे को रोक लेते हैं, वह सुनती है, वह कह रहा है, उसके पास टिकट नहीं है और गलती से वह बैठ गया था, पर उसकी बात वे सुन ही नहीं रहे. तभी नींद खुल जाती है, कितना स्पष्ट अर्थ है इस स्वप्न का, उसे जहाँ जाना नहीं है, जिसकी टिकट यानि क्षमता भी उसके पास नहीं है, वहीं वह जा रही है। सचेत हो जाना चाहिए अब तो ! उसके जीवन का लक्ष्य क्या है यदि वह खुद ही भूल गई तो आस-पास के लोग उसे कैसे याद रख सकते हैं। 

आज फिर दाहिने हाथ की मध्यमा में नख के निकट सूजन दिख रही है। कुछ हफ्ते पहले डॉक्टर को दिखाया था, ठीक भी हो गई थी पर पुन: किसी कारणवश संक्रमण हो गया है। यू ट्यूब पर घरेलू उपाय देखे, पानी में सेब का सिरका मिलाकर  लगाने से यह ठीक हो जाएगा, ऐसा सुना। नेटफलिक्स पर ऐनी विद एन इ धारावाहिक का पहला भाग देखा। उसमें एक तेरह वर्षीय कल्पनाशील बालिका की कहानी है।  आज क्रिसमस है उसके एक ब्लॉग का जिक्र एक वरिष्ठ ब्लॉग  लेखिका ने सम्मान पूर्वक किया है, क्रिसमस का उपहार ! दोपहर को छोटी ननद का फोन आया, पुत्र की बात बता रही थी, सुबह चार बजे सोता है और एक बजे उठता है, मित्रों के साथ ज्यादा समय बिताता है। आज की युवा पीढ़ी अपनी सेहत का भी ध्यान नहीं रखती। 


और अब उस पुरानी डायरी का एक पन्ना - 


मुक्त ! वे एक क्षण तो स्वयं अपने मन पर शासन नहीं कर सकते, यही नहीं, किसी विषय पर उसे स्थिर नहीं कर सकते और अन्य सबसे हटाकर किसी एक बिन्दु पर उसे केंद्रित नहीं कर सकते ! फिर भी वे अपने को मुक्त कहते हैं ! 


यदि वह अपने मन की सारी पीड़ा समेट कर एक वाक्य में कहे और अपने मन की सारी खुशी समेट कर एक वाक्य में कहे तो दोनों बार एक ही वाक्य उसके अधरों से निकलेगा- उसकी कविताओं में झलकता उसके मन का भ्रम  कितना सुंदर है ! लगता है सुख -दुख की चरम स्थिति में मनुष्य समभाव हो जाता है, यह बिल्कुल सही है। 


कई बार लगा है पानी में प्रतिबिंब देखते हुए, अपने अधूरेपन को देख, अपनी आवाज में टूटन देख, बिखरे हुए विचारों को देखकर कि  दुनिया में कोई ऐसी मिट्टी नहीं जो इतनी पक्की हो कि उसे जोड़ सके, कुछ मिट्टियाँ किन्हीं विशेष स्थानों पर ही मिलती हैं और उसके मन के मेल की मिट्टी कहाँ मिलेगी, यह नहीं मालूम !