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Thursday, April 16, 2026

ज्ञानेश्वरी

ज्ञानेश्वरी 

नन्हे ने समारोह की सुंदर तस्वीरें भेजी हैं। जून का स्वास्थ्य पहले से बेहतर है। सुबह नूना उठी तो वह पहले ही उठ चुके थे। घर का काम बिना नैनी के ठीक-ठाक चल रहा है। आज वसंत पंचमी पर कविता प्रकाशित की। छोटा भाई सिक्किम में काफ़ी स्थान देख रहा है, उसमें जोश और उत्साह बहुत है। छोटी बहन परीक्षा की तैयारी में लगी है। 


अभी कुछ देर पूर्व एक विचित्र स्वप्न देखकर नूना की आँख खुली। वह और माँ एक कमरे में सोये हैं। थोड़ी दूर पर दूसरा कमरा है, जहाँ छोटी बहन सोयी है, उसका बिस्तर इस कमरे से दिखायी पड़ता है। माँ कहती हैं, बिटिया क्या हुआ, मैं आ जाऊँ ? नूना उसकी तरफ़ देखती है तो तकिये के ऊपर टहनियों की भाँति हाथ हिल रहे हैं, जैसे कोई डूबता हुआ व्यक्ति जल के ऊपर हाथ निकालता है। कुछ देर देखने के बाद नूना उसके पास जाती है, अब वह टहनियाँ कहीं ग़ायब हो गयीं। किसी के बोलने की आवाज़ आ रही है।वह उसे हिलाती है, उसका चेहरा नीले रंग से रंगा है, माथे पर सफ़ेद रंग है और गले पर भी हरा या कोई अन्य रंग। नूना उसे आवाज़ देती है, पर वह गहन निद्रा में है। वह माँ को आवाज़ देती है, वह आती हैं पर उसकी यह हालत देखकर भयभीत नहीं होतीं, बल्कि हँसने लगती हैं, ज़ोर से नहीं, पर हल्की सी मुस्कान छा जाती है उनके मुख पर, तभी नींद खुल जाती है। क्या अर्थ हो सकता है इस स्वप्न का? उसके पहले गुरुजी के आश्रम के दो व्यक्तियों को उनके काम के सिलसिले में आये तथा काम करते हुए देखा था। गुरुजी की चर्चा भी हुई।   


आज सुबह स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर पंच तत्वों में विलीन हो गयीं। दो दिन का राष्ट्रीय शोक मनाया जा रहा है और राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार मुंबई के शिवाजी पार्क में किया गया है। नन्हा व सोनू भी बैंगलुरु पहुँचने वाले हैं। आज लता जी पर एक पोस्ट प्रकाशित की, उनको चाहने वाले करोड़ों की संख्या में हैं। ईश्वर भी उन्हें अपने पास बुलाकर आनंदित हो रहे होंगे। नूना ने आज रामकृष्ण परमहंस के बारे में पढ़ा और सुना।अद्भुत संत थे वह, ईश्वर के साक्षात रूप उन्हें दिखते थे, उनकी साधना अतुलनीय थी। उन्होंने ध्यान का महत्व बताया, वह स्वयं भी घंटों ध्यान में लीन रहते थे। 


आज जून ने कहा, कल से सुबह टहलने जाएँगे।लेकिन दो दिन बाद ही एकांत वास से बाहर आयेंगे। सभी से फ़ोन पर बात कर लेते हैं।आज अमर संत ज्ञानदेव द्वारा लिखी ‘ज्ञानेश्वरी’ पहली बार सुनी। जिसने भी उसे रिकॉर्ड किया है, धन्य है वह ! बहुत ही रोचक ढंग से लिखी गई है। जिसे सुनते-सुनते ही समाधि का अनुभव होने लगता है।भारत में अनोखे योगी व संत हुए हैं, जिनके लिए कुछ भी असंभव नहीं है। वह कहीं भी प्रकट हो सकते हैं। परमात्मा की शक्तियाँ अनंत हैं, जो उनसे जुड़ जाता है, वह उन शक्तियों कि स्वामी बन जाता है। एक ही चेतना से यह सारा जगत बना है, उसी में स्थित है, उसी से भरा हुआ है। मानव जन्म का एकमात्र उद्देश्य है, अपने सत्य स्वरूप को जानकर स्वयं को परमात्मा के प्रति समर्पित कर देना। यदि आत्मा का अनुभव होने के बाद भी कोई संसार की कमाना करे तो उससे बड़ा अभागा कौन होगा ? 


जून आज आठ दिन बाद असोसिएशन के दफ़्तर गये। कल से ऊपर के कमरे में शिफ्ट हो जाएँगे। कोरोना का अनुभव अंततः उन्होंने भी कर लिया।सुबह आकाश में चंद्रमा को ढूँढा, नहीं दिखा, रात्रि भ्रमण के समय दिखा। चंद्रमा भी तो धरती के घूमने के कारण प्रतिदिन पूर्व से उगता है और पश्चिम में अस्त होता है। जो हर दिन लगभग 50 मिनट की देरी से होता है। पूर्णिमा के दिन चाँद सूर्यास्त के समय पूर्व दिशा में उगता है और सूर्योदय के समय पश्चिम में अस्त होता है।अमावस के दिन यह सूर्योदय के साथ उदय होता है और सूर्यास्त के समय अस्त होता है। रात की रानी में भी कलियाँ आयी हैं। पापा जी ने आज ‘आरती संग्रह’ की बात बतायी, वह भी धर्म व अध्यात्म में पूरी तरह डूब गये हैं। 


आज सुबह जून किन्हीं लक्ष्मी नायक जी से दोसा-इडली ले आये थे। वह अपनी आज़ादी का उत्सव मना रहे थे। उसके बाद बाज़ार गये, वापसी में थलगतपुरा झील देखने गये, जहाँ जाकर बहुत निराशा हुई। झील का अधिकांश पानी सूख गया है, कुछ पौधों और काई ने शेष पानी को ढक लिया है। रास्ते में एक अन्य झील देखने के लिए रुके, वहाँ भी आधी से अधिक झील शैवाल से ढकी थी। वे घर लौटे तो नैनी प्रतीक्षा कर रही थी, उसे बच्चों के स्कूल जाना था, सो जल्दी आयी थी। शाम को पुन: ज्ञानेश्वरी सुनी। इस समय जून कॉलेज के दिनों को याद कर रहे हैं।जो बीत गया वह सपना ही तो है। 


आज बहुत दिनों बाद वे आश्रम गये। गुरुजी हैदराबाद गये हैं, उनकी अनुपस्थिति में भी आश्रम में एक शांति और आनंद की छाया फैली हुई थी।फूल खिले थे, कोयल की कूक सुनायी दे रही थी और मंद पवन बह रही थी।उन्होंने विशालाक्षी मंडप में ध्यान किया, पंचामृत में अल्पाहार लिया और सुंदर रास्तों पर भ्रमण करते रहे। सूर्यास्त के बाद वे घर लौट आये। एक कुर्ती भी ख़रीदी जो नूना को परसों किताबों की दुकान में पहन कर जानी है। 




Friday, April 3, 2026

बोटेनिका में फूलों के पेड़

बोटेनिका में फूलों के पेड़


परसों शाम वे नन्हे के घर गये, छोटे भाई की छोटी बिटिया से मिलने, जो दोपहर को आयी और उसी रात की बस से अपनी एक मित्र से मिलने चिकमगलूर जा रही है।कल जून का जन्मदिन था, नूना ने उनके लिए एक कविता लिखी।आज पंद्रह अगस्त के अवसर पर स्वतंत्रता दिवस का उत्सव सोल्लास मनाया, वहाँ भी एक कविता उसने पढ़ी। उसके बाद सभी मिलकर पहली बार मेद्दूर के लिए रवाना हुए, पहली बार मेदु वड़ा खाया। 


सुबह नींद खुलने से पूर्व स्वयं को देखा, अचानक एक चेहरा सम्मुख आया, और उसके भीतर किसी ने कहा, अरे, यह तो वह ख़ुद है ! गुरुजी कहते हैं, परमात्मा की भक्ति पहले अन्य पुरुष फिर मध्यम पुरुष तथा अंत में उत्तम पुरुष पर समाप्त होती है। ‘वह’ से ‘तुम’ और ‘तुम’ से ‘मैं’ पर, जब तक ऐसा न हो, दूरी बनी ही रहती है। भीतर जाना अब सहज हो गया है, जैसे कोई बाहर से घर के भीतर आये। प्रातः भ्रमण से आकर प्राणायाम किया और सूर्य नमस्कार के छह चक्र। नाश्ते में जून ने उत्तपम बनाया। दिन में नूना अनुवाद कार्य करती रही, जब जून पूरे घर में लकड़ी का फ़र्श लगवाने की बात करने शहर गये थे। दिवाली से पहले घर का रूप काफ़ी बदल जाएगा। इस इतवार को नन्हा घर में होम ऑटोमेशन लगाने वाला है। वर्टिकल गार्डन के लिए आटोमेटिक इरीगेशन सिस्टम भी लग जायेगा। लिए पापाजी ने फ़ोन पर ओशो की किताब में पढ़े एक प्रश्न और उसके उत्तर का ज़िक्र किया,जो उन्हें अच्छा लगा। बड़े भाई का फ़ोन आया, वह बिटिया का सामान ‘गति’ से मँगवाने की बात कह रहे थे, जो महीनों से यहाँ स्टोर में पड़ा है। 


अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की हुकूमत क़ायम हो गई है। दुनिया के लगभग सभी मुल्क चिंता कर रहे हैं कि वहाँ मानव अधिकारों का हनन होगा। कल बड़े भांजे का जन्मदिन है, अगले हफ़्ते छोटे भाई का, जो मेहसाना के ओशो आश्रम में रहा दो दिनों के लिए, वह दोनों के लिए कुछ पंक्तियाँ लिखेगी।जून खाद व मिट्टी के लेकर आज नन्हे के यहाँ गये हैं, वहाँ माली गमलों की मिट्टी बदलने वाला है। आज पूरे दक्षिण भारत में देवी लक्ष्मी को समर्पित ‘वरलक्ष्मी’ का विशेष उत्सव मनाया जा रहा है।नन्हा-सोनू और उसके माँ-पापा आये थे, उन्होंने पापा जी से भी बात की, उनके लिए असम की चाय भेजी है। सोनू अगले हफ़्ते गोहाटी जा रही है, ननिहाल का पुश्तैनी घर किराए पर चढ़ाना है।  


आज सुबह उन्होंने रक्षा बंधन का उत्सव सोल्लास मनाया, सभी बहनों-भाइयों से भी बात हो गयी। सुबह पहली बार वे बोटेनिका में टहलने गये। वहाँ हरे-भरे खेतों व मैदानों की हरियाली देखते ही बनती है, ख़ाली सड़कें और उनके किनारों पर लगे गुड़हल, कंचन के फूलों के वृक्ष, नीला आसमान, दूर से पहाड़ भी नीले लगते हैं, सभी कुछ शोभायमान व सुंदर था। जून की पीठ में हल्का दर्द है, वे थोड़ी देर में ही लौट आये। घर में वुडेन फ़्लोरिंग का काम समाप्त होने वाला है। नन्हे ने डीजेआई ओस्मो मोबाइल सेल्फ़ी स्टिक लाकर दी है, जिसमें तस्वीरें ले सकते हैं और वीडियो बना सकते हैं।पापाजी से बात हुई, छोटी भाभी, छोटी बिटिया का घर सेट करने जा रही है। 


आज नैनी नहीं आयी, उसके दामाद की भतीजी की मृत्यु हो गयी है, पाँच दिन पहले जिसने संतान को जन्म दिया था। मृत्यु किसी भी क्षण, किसी भी रूप में आ सकती है। पिछले कई दिनों से अफ़ग़ानिस्तान में लोग जान पर खेल रहे हैं। कल के बम ब्लास्ट में अमेरिकी सैनिक मारे गये। अतीत में की गई भूलों का फल आज की पीढ़ी को भोगना पड़ रहा है। आज सुबह यू ट्यूब पर गरुड़ पुराण का कुछ अंश सुना था, मृत्यु के बाद कुछ हफ़्तों तक आत्मा विचरती है। मृत्यु से पहले आवाज़ चली जाती है, फिर मानव को दिव्य दृष्टि मिलती है, वह अपने पूरे जीवन को एक साथ देख पाता है, फिर उसे ले ज़ाया जाता है, तथा दो दिन बाद वापस लाया जाता है, तब वह अपने शरीर की अंतिम क्रियाएँ होते हुए देखती है। तेहरवीं के बाद वह आगे की यात्रा पर जाती है और कर्मों के अनुसार सुख या दुख का अनुभव करती है। कल इतवार है, जून नाश्ते में पोहे की एक मीठी डिश बनाने वाले हैं, जो वर्षों पूर्व सिंगापुर में खायी थी। दोपहर को सब लोग आश्रम जाएँगे। 


आज सुबह उठी तो एक ख़ुशनुमा स्वप्न देख रही थी। स्वप्न में क्या था, यह तो जरा भी याद नहीं, पर मन बहुत आनंद से भरा था, उठकर ऐसा लगा। दोपहर का लंच आश्रम के रेस्तराँ में खाया। आश्रम से दो किताबें भी ख़रीदीं, जो सोनू की मॉम ने उसे उपहार में दीं।आश्रम जाना सदा ही अच्छा लगता है, वहाँ की हवा में गुरुजी की उपस्थिति है।शाम को निकट स्थित मुनिरत्ना नर्सरी से वे मधु मालती का एक पौधा लाये हैं, कल सुबह माली लगा देगा, उस स्थान पर, जहाँ पैशन फ़्रूट लगा हुआ था।नैनी ने पपीते के पेड़ से दो पपीते तोड़कर दिये।कच्चे पपीते के पराँठे की बात सोचते ही उसे माँ की स्मृति हो आती है।  

   

आज कृष्ण जन्माष्टमी है, नूना ने कृष्ण पर लिखी पुरानी कविताओं को पढ़ा और कुछ सुधार किया।सुबह उठी तो मन रात को देखे विचित्र स्वप्न की याद से भरा था।जून साइकिल लेकर फूल ख़रीदने गये, एक बड़ी सी माला भी लाए, जो उन्होंने कृष्ण की तस्वीर पर लगायी है। मंदिर बहुत सुंदर लग रहा है। दिन भर फलाहार किया। दोपहर को कुछ कविताएँ टाइप कीं, जो डायरी में इक्कठी हो गई थीं। 


अफ़ग़ानिस्तान से बाहर जाने वालों के लिए आज अंतिम दिन है, कल से तालिबान का शासन चलेगा। कल रात कोई स्वप्न नहीं देखा, आज सुबह आत्मा का बोध दृढ़ हुआ। अब अचेतन, चेतन, अवचेतन मन जैसे कोई भी हिस्से अनजाने नहीं रह गये हैं, अतीत की कोई स्मृति, कोई भी कृत्य, कोई भी बात न ही दबाने लायक़ है, न ही छिपाने लायक़। अतीत आत्मा के अंतर में झलक भी जाता है तो कोई अंतर नहीं पड़ता। जैसे दर्पण में आग झलक जाये तो दर्पण नहीं जलता। आत्मा को कुछ भी छू नहीं सकता। होश में किए कृत्य अपने साथ फल नहीं लाते पर बेहोशी में किए कृत्यों का फल तो भोगना ही पड़ता है। 


आज नाश्ते  में पहली बार ज्वार का दोसा खाया। शाम को टहलने गये तो पार्क-सात के पास एक बड़ा सा सारस पक्षी देखा, जो शायद भटक कर आ गया था, या आहत था। छोटी बहन का फ़ोन आया, बहनोई की आँख में धुँधलापन आ गया है, जो कैट्रेक के बाद हो जाता है, जून उनकी रिपोर्ट लेकर शेखर नेत्रालय जाएँगे। कल नन्हे के साथ जून के एक पुराने अधिकारी के यहाँ नाश्ते पर जाना है। काव्यालय पर ‘भाषा उत्सव’ के लिए हिन्दी का एक लेख लिखना है।

 

Thursday, October 17, 2024

भोर का तारा

भोर का तारा


आज इतवार है, सुबह साढ़े नौ बजे बच्चे आ गये थे। दोपहर को नन्हे ने यू ट्यूब से देखकर काले चने की स्वादिष्ट सब्ज़ी बनायी। उन्होंने बच्चों को “साइकिल” फ़िल्म के बारे में बताया, पिछले हफ़्ते देखी बहुत अच्छी मलयालम फ़िल्म है। शाम को अचानक तेज हवा चलने लगी, छोटी-मोटी आँधी ही थी। वे छत पर टहल रहे थे, पड़ोसी परिवार भी अपनी छत पर था।पापाजी से बात हुई, उन्हें कोरोना का पता चले एक हफ़्ता हो गया है। उन्होंने कहा, भाई ज़्यादा बात नहीं करता, चुपचुप रहता है। उसे अस्वस्थ हुए ग्यारह दिन हो गये हैं, ऐसे में कोई भी इंसान परेशान हो जाएगा। उसने ईश्वर से प्रार्थना की, विश्व में सभी लोग कोरोना से मुक्त हो जायें। कल 'विश्व स्वास्थ्य दिवस' पर वेबिनार होने जा रहा है, उसे गुरुजी के प्रारंभिक उद्बोधन को ट्रांस्क्राइब करना है। प्रधानमंत्री की ‘परीक्षा पर चर्चा’ सुनी। उन्होंने छात्रों के प्रश्नों के उत्तर बहुत समझदारी और स्पष्टता के साथ दिये। प्रधानमंत्री होते हुए युवाओं व बच्चों से उनका संबंध बहुत अनूठा है। 


आश्रम के एक स्वयंसेवक से ज्ञात हुआ, गुरुजी का गला भी ख़राब है, वह एकांतवास में हैं, वेबिनार में उनका संदेश पढ़कर सुनाया गया। पापाजी को उनके भेजे बिस्किट आज मिल गये, उन्हें अच्छा लगा। अभी भी पूर्ण स्वास्थ्य नहीं मिला है। भाई को भी ठंड लग रही थी।परिवार के तीनों डाक्टर्स के संपर्क में है वह। तीनों से उसे कुछ न कछ सहायता मिल रही है। हेल्थ ऐप तो है ही सहयोग देने के लिए।सुबह अस्तित्त्व ने एक कविता लिखवायी। मौसम अपेक्षाकृत गर्म था। द्वादशी का चंद्रमा बेहद मोहक लग रहा था और  कुछ दूरी पर भोर का तारा भी चमचमा रहा था। लौटकर सूर्योदय को कैमरे में उतारा। पाचन तंत्र कुछ शिकायत कर रहा था, सो आज आयुर्वेद का एक नुस्ख़ा लिया है, रात्रि को दूध के साथ। घर पर बात हुई, दोनों मरीज़ अब बेहतर हैं। सुबह उनके लिए शुभकामनाएँ भेजी थीं और मानसिक उपचार का भाव भी किया था।दुआओं में बहुत असर होता है यदि वे दिल से निकली हों।पापाजी से की बातचीत उन्होंने रिकॉर्ड कर ली है। उन्हें फ़ोन पर बात करना अच्छा लगता है। कल रात देखे अपने दो स्वप्न उन्होंने बताये, एक में एक व्यक्ति उनसे पूछता है, कितने साल से पेंशन  ले रहे हो, और कब तक लेने का इरादा है। दूसरे स्वप्न में वे भाई के साथ पेंशन लेने जाते हैं, पर वहाँ बहुत देर हो जाती है। फिर वे निकाले हुए पैसे भाई को दे देते हैं, और वह उन्हें छोड़कर बस में बैठकर चला जाता है ।मन में छिपे हुए भय ही स्वप्नों में प्रकट हो जाते हैं।


आज वे रात्रि भ्रमण  के लिए निकले तो सड़क बिल्कुल सुनसान थी। पार्क नंबर नौ यानी फ़ौवरे वाले पार्क से होते हुए आम के बगीचे की बायीं ओर ढलान वाली सड़क से होते हुए लौटे। पार्क छह के बाहर एक माँ दो बच्चों को अपने दोनों ओर बिठाए एक किताब पढ़कर सुना रही थी। एक बच्चा बहुत खुश लग रहा था। थोड़ा आगे एक चौकीदार मिला जो सदा ही सलाम करता है। सभी ने मास्क पहने हुए थे। एक वर्ष पूर्व जैसा भय का माहौल था, कुछ वैसा ही फिर से बन रहा है। उन्होंने शाम को बाहर निकलना ही छोड़ दिया है। ‘देवों के देव’ में रामायण की कहानी चल रही है, महादेव की बहुत बड़ी भूमिका है रामायण में, उनके एक अंश का ही अवतार हैं हनुमान! पापा जी का स्वास्थ्य सुधर रहा है, उन्होंने फ़ेसबुक देखना आरंभ कर दिया है। सुबह क्रिया के बाद बहुत सुंदर अनुभव हुआ, आज्ञा चक्र पर सफ़ेद मोती दिखे ढेर सारे ! परमात्मा को महसूस करना हो तो वर्तमान के क्षण में ही किया जा सकता है, अभी और यहीं। वह इस वक्त है यहीं, उनके पास, उनसे स्वयं को पहचनवाता हुआ, वे उसे जान सकें यह वह चाहता है। वह उनके माध्यम से व्यक्त होना चाहता है, एक तरह से हो ही रहा है, पर अनजाने ही, उनके जाने बिना ही, जब वे जान लेते हैं तो उसके आनंद में भागीदार बन जाते हैं ! 



   


Friday, July 19, 2024

‘द अनटेथर्ड सोल’

द अनटेथर्ड सोल


खिड़की से आती हुई ठंडी हवा के झोंके यहाँ पलंग तक आ रहे हैं, जहाँ बैठकर वह लिख रही है। आज भी वर्षा की भविष्यवाणी थी, पर हुई नहीं। एक और रविवार परिवार के साथ मिलकर मनाया। सुबह माली से आश्रम से लाए तुलसी और पोंसेतिया के पौधे लगवाए। माइकल की दूसरी किताब ‘द अनटेथर्ड सोल’ आ गई है, कुछ पन्ने पढ़े। उसमें भी यही कहा है, अपनी वास्तविक पहचान का विस्मरण नहीं करना है। स्वयं को आत्मस्थ रखना है, भूलना नहीं है कि वे कौन हैं ? वे बाहरी दृश्यों में स्वयं को इस तरह खो देते हैं कि अपने आपको ही भूल जाते हैं। विचारों और भावनाओं से स्वयं को तुष्ट करना चाहते हैं पर वे उनसे भी परे हैं। सुबह टहलते समय पुस्तक में ह्रदय चक्र के बारे में पढ़ी बातों पर ध्यान लगा रहा। 

आज संस्कारों के बारे में पढ़ा, किस तरह कोई वर्षों पुराना संस्कार जागृत होकर ह्रदय की धड़कन को बढ़ा सकता है। साधक को साक्षी भाव में रहकर उसे देखना है, प्रभावित नहीं होना है। संस्कार ऐसे ही छूटते जाते हैं और एक दिन भीतर शुद्ध चेतना ही रह जाती है। भय का संस्कार भी ऐसे ही निकल सकता है।आत्मस्थ रहने का प्रयास ही साधना है, वही पुण्य है और वही समाधि है। मौन से बहुत से काम आसानी से हो जाते हैं।आज मौसम ज़्यादा गर्म है, फागुन आने ही वाला है, अर्थात होली की रुत ! बचपन में कितने पापड- चिप्स बनते थे इन दिनों। शाम को पापाजी से बात हुई, उन्होंने कहा, उसे अपनी रचनाएँ अख़बार में छपने के लिए भेजनी चाहिए। वे मोदी जी की बहुत तारीफ़ कर रहे थे। बड़े भाई ने एक पुस्तक का लिंक भेजा है, ‘लिविंग ऑन द एज’, इस पुस्तक की समाप्ति पर उसी को पढ़ना शुरू करेगी। 


‘देवों के देव’ में जालंधर का आज अंत हो गया। शिव व पार्वती का पुनर्मिलन हुआ। प्रकृति और पुरुष का मिलन, जैसे मन और आत्मा का मिलन। मन प्रकृति का अंश है और आत्मा पुरुष का।सुबह टहलने गये तो जून ने कहा, उम्र के कारण उन्हें थकान का अनुभव हो रहा है। फिर उन्होंने दीपक चोपड़ा की पुस्तक ‘एजलेस बॉडी टाइमलेस माइंड’ के कुछ अंश उन्हीं की वाणी में सुने। वह कहते हैं, शरीर ठोस नहीं है, बल्कि तरंगों से बना है तथा प्रतिपल बदल रहा है। उसमें बदलाव लाता है मन, यदि मन सकारात्मक है तो शरीर में अच्छे रसायन उत्पन्न होंगे तथा रोग नहीं होंगे। यदि तनाव बना रहा तो हानिकारक रसायन उत्पन्न होंगे जो बुढ़ापे के लक्षण जल्दी ला सकते हैं। क्वांटम फ़िज़िक्स के अनुसार सभी पदार्थ ऊर्जा से ही बने हैं, अंततः वे ऊर्जा हैं, मन भी ऊर्जा है, जो देह पर हर क्षण प्रभाव डालती है।


आज आश्रम में हुए सत्संग में गुरुजी को सुना। उन्होंने कई प्रश्नों के उत्तर दिये। एक प्रश्न के उत्तर में बताया, सब कुछ ब्रह्म है, ब्रह्म ही सत्य है, शेष सब मिथ्या है, सब स्वप्न है अथवा तो शून्य है। इतना श्रेष्ठ ज्ञान इतने सारे लोगों को एक साथ वह दे देते हैं क्योंकि वह स्वयं उसमें स्थित हैं। जैसे कृष्ण ने आरंभ में ही अर्जुन को आत्मा का श्रेष्ठ ज्ञान दिया, पर वह समझ नहीं पाया। धीरे-धीरे कर्मयोग व भक्ति योग की बात करते हुए पुन: गुह्यतम ज्ञान दिया।सुबह योग साधना करते समय ‘वृद्धावस्था में वजन क्यों कम हो जाता है’, इसकी जानकारी एक वीडियो से ली, ताकि दीदी को कुछ सुझाव दे सके। 


जून के एक पुराने सहकर्मी के यहाँ गये आज सुबह, उन्होंने नींबू, इलायची और गुड़ का शरबत पिलाया। बातचीत के दौरान वह कहने लगे, कोरोना विष्णु का ग्यारहवाँ अवतार है, जो दुनिया में असमानता को दूर करने के लिए आया है। अमीर-ग़रीब हर देश को इसका क़हर झेलना पड़ा है। उन्हें साथ लेकर एक अन्य सहकर्मी के श्राद्ध में जाना था। वहाँ कई पुराने परिचितों से भेंट हुई। पता चला, जाने वाले को दर्द रहित बहुत आसान मृत्यु मिली, वह स्वयं गाड़ी चलाकर डाक्टर के पास सीने में हो रही घबराहट का इलाज कराने गये थे, जहाँ से लौट नहीं पाये। दो पुत्रों व पत्नी को छोड़ गये हैं, परिवार धीरे-धीरे संभल ही जाएगा। केले के पत्ते पर परोसा गया श्राद्ध का दक्षिण भारतीय भोज सोलह व्यंजनों से बना था।जीवन इसी आवागमन का नाम है।    

   


Wednesday, May 15, 2024

फूलों का तालाब

आज नेता जी की जयंती है। बंगाली सखी की बिटिया का जन्मदिन भी, उसे एक पुरानी तस्वीर भेजी, जिसमें सभी लोग हैं, पर उसने कुछ नहीं कहा तस्वीर देखकर, अवश्य उसे कुछ तो याद आया होगा। नन्हा व सोनू यहाँ आ गये हैं। कल सुबह छह बजे सभी को कार रैली में जाना है। आज दोपहर को लिखने के स्थान पर कल वाला चित्र पूरा किया, कोई चित्रकार भी रंगों के माध्यम से शायद अपने दिल की बात लिख रहा होता है। सुबह छोटे भाई का फ़ोन आया, वह अजीब सी कैफ़ियत में डूबा रहता है। प्रकृति का सान्निधय उसे अच्छा लगता है। अपने को देह द्वारा व्यक्त होते देखकर उसे अचरज भी होता है। हल्का-हल्का सा लगता है तन-मन दोनों ही। वह जहाँ भी जाता है अपने मधुर स्वभाव से मित्र बना लेता है तथा सबकी सहायता के लिए तत्पर रहता है। उसका जीवन गुरु के आशीर्वाद से एक वरदान बन गया है।जीवन कितना सिंपल है, ऐसा वह कह रहा था, और दूसरी तरफ़ उसका मन है जो अब भी कोई न कोई व्यर्थ बात सोच लेता है क्षण भर के लिए ही सही, तन भी भारी हो रहा है, क्यूँकि भोजन गरिष्ठ भी है और अधिक भी। परमात्मा का अनुभव कितना अनुपम है यह सब जानते-बूझते हुए भी मोह-माया कहाँ छूटती है ! आश्चर्य भी हो रहा है और हँसी भी आ रही है, यह लिखते हुए, जीवन तो उसका भी सिंपल है और सुन्दर भी !


आज सुबह वे चार बजे उठे और पाँच बजे तक नहा-धो कर तैयार थे। बच्चे पाँच बजे उठे और छह बजे के कुछ पल बाद टाटा नेक्सन के शोरूम के लिए निकल पड़े। आठ बजे रैली आरंभ हुई। एक कार यू ट्यूब का वीडियो बनाने के लिए और एक आयोजकों की अपनी कार भी साथ चल रही थी। दो घंटे बाद सभी कारें रामनगर स्थित एक कैफ़े में जाकर रुकीं। जहां स्वादिष्ट नाश्ता कराया गया। बाद में विजेता और उप विजेता के नामों की घोषणा हुई। वहाँ आये एक वृद्ध दंपति से परिचय हुआ। नन्हे ने और भी कई लोगों से बातचीत की। कुल मिलकर ईवी कार रैली का अनुभव अच्छा रहा। वापसी में वे एक गाँव के रास्ते से होकर लौटे तो फूलों की खेती देखने को मिली और कमल के फूलों से भरा एक तालाब भी। पिछले कुछ दिनों से पल्स रेट बढ़ा हुआ लग रहा था, उसने सोचा है,  सुबह अलार्म की आवाज़ से नहीं उठेगी। नींद जब पूरी हो जाएगी तो अपने आप ही खुल जाएगी। स्वस्थ रहने के लिए अच्छी नींद उतनी ही ज़रूरी है जितना भोजन और व्यायाम। स्वस्थ तन में ही स्वस्थ मन का वास होता है। कल इस बात को एक बार फिर अनुभव किया। रात को देखे स्वप्न इसकी गवाही देते हैं। एक सपने में कपड़ों का एक ढेर है जो सँभाले नहीं संभल रहा है।एक में एक विचित्र से बालक को देखा। 


सुबह सवा चार बजे नींद खुल गई। तापमान सत्रह डिग्री था, पर दिन अभी से गर्म होने लगे हैं, जबकि अभी जनवरी समाप्त नहीं हुआ है। छोटी बहन को विवाह की वर्षगाँठ पर कविता में शुभकामनाएँ भेजीं। गणतंत्र दिवस पर  एक रचना भी पोस्ट की है। किसान आंदोलन के बारे में एक वीडियो देखा। वहाँ कुछ अराजक तत्व भी हैं, लेकिन इतने बड़े देश में कुछ न कुछ विरोध तो स्वाभाविक है। ट्रैक्टर रैली भी दिल्ली में होकर ही रहेगी, ऐसा लग रहा है। दोपहर को ‘द व्हाइट टाइगर’ फ़िल्म का कुछ अंश देखा, भाषा बहुत अभद्र है। एक गाँव का व्यक्ति कैसा अपनी इच्छा शक्ति के बल पर शहर पहुँच जाता है और आगे क्या होता है, अभी देखना शेष है। शाम को वे पड़ोसी के यहाँ गये। उनके समधी साहब  को चोट लग गयी है, वह स्कूटर चला रहे थे कि किसी ने आगे के पहिये पर अपने स्कूटर से ही टक्कर मार दी। उनकी बाईं कलाई में फ़्रैक्चर हो गया है। उनका पुत्र कनाडा में रहता है, एक हफ़्ता बेटी के पास रहने आये हैं। पड़ोसन ने एकदम कड़क असम की चाय पिलायी। लगभग साल भर बाद उनके यहाँ चाय पी, कोरोना काल में जाने का सवाल ही नहीं था। अफ़्रीका में कोरोना के वायरस का नया स्ट्रेन मिला है; जबकि भारत में कोरोना केस काफ़ी घट गये हैं।    


आज की सुबह जितनी शानदार थी, दोपहर व शाम उतनी ही उदास करने वाली। सुबह मल्टी पर्पस कोर्ट में सोसाइटी के कुछ लोगों के साथ गणतंत्र दिवस के अवसर  पर होने वाली ‘योग साधना’ में भाग लिया। आठ बजे ध्वजारोहण हुआ, मुख्य अतिथि ने प्रेरणादायक भाषण दिया। उसे कविता पाठ करने का अवसर भी मिला। घर आकर नाश्ते के बाद टीवी पर परेड देखी। झांकियाँ, नृत्य सभी कुछ अतुलनीय था। राफ़ेल का प्रदर्शन भी शानदार था। दोपहर बाद जब समाचार देखने के लिए टीवी चलाया तो परेशान करने वाली खबरें आ रही थीं। लाल क़िले पर कुछ सिख तलवारें चला रहे थे, अपना झंडा लगा रहे थे। पुलिस की प्रदर्शनकारियों के साथ झड़प हो रही थी। इतने दिनों तक शांतिपूर्वक चलने वाली ट्रैक्टर रैली अब हिंसक हो चुकी थी। शाम तक यही चलता रहा। इस समय रात्रि के साढ़े आठ बजे हैं। पता नहीं दिल्ली के हालात कैसे हैं । कितने पुलिस वाले घायल हुए, कितने किसान भी। गणतंत्र दिवस के दिन ऐसा होना देश की अस्मिता के लिए कितना अपमानजनक है।       


Friday, September 8, 2023

झील के तट पर


रोज़ की तरह वे प्रात: भ्रमण के लिए गये और विशेष बात यह हुई कि वापस आकर कुछ देर साइकिल भी चलायी। नाश्ते के बाद सोसाइटी के पीछे वाली सड़क पर जून दूर तक कार चलाकर ले गये तो एक जगह गुलदाउदी के फूलों का खेत देखा। खिली हुई धूप में फूलों का रंग बहुत शोख़ लग रहा था, ढेर सारी तस्वीरें खींचीं। आज गुरुजी की ज़ूम मीटिंग थी, आयुष तंत्र की दवाओं पर शोध तथा उनके प्रचार के लिए। उसे ट्रांस्क्रिप्शन का काम करना था, फिर हिन्दी में अनुवाद भी। पापाजी को वह वार्तालाप अच्छा लगा, जो उसने उनके साथ की बातचीत पर लिखा था। कल बड़े भाई का जन्मदिन है, उसने उनके लिए भी एक कविता लिखी है। छोटे भाई की नातिन नयी मेहमान अभी अस्पताल से घर नहीं आयी है। पापाजी अभी कुछ दिन वहीं रहेंगे। छोटी भाभी ने अपनी माँ के साथ बिटिया और उसकी बिटिया की तस्वीर भेजी है, चार पीढ़ियों की एक साथ फ़ोटो बहुत सुंदर लग रही है। 


वर्ष के अंतिम माह का प्रथम दिन ! आज सुबह के सभी काम हो जाने के बाद वे निकट स्थित एक झील पर गये, कुछ जल पक्षी तैर रहे थे  और किनारे पर बैंगनी रंग के जंगली फूल शोभित हो रहे थे। तट पर लगे वृक्षों का सुंदर प्रतिबिंब झील के पानी में पड़ रहा था। दोपहर को छोटी बहन से बात हुई, उसे आज सुबह एक स्वप्न आया, गुरुजी ने अपने मस्तक का तिलक उसके मस्तक से स्पर्श कराया है, उसके माथे में सनसनी हो रही थी । वाक़ई यह बहुत सुंदर अनुभव है, इसे अनमोल मानना चाहिए। गुरु से किसी का संबंध अपनी आत्मा से संबंध जैसा होता है। 


रात्रि का समय है। कुछ देर पूर्व सोनू से बात हुई, कल वे लोग ब्रह्मपुत्र में क्रूज़ पर जा रहे हैं, ‘उमानंद’ द्वीप भी जाएँगे। उसे याद आया, पिछले वर्ष वे भी गये थे। अगले दिन वे डैफ़ोडिल नर्सरी भी जाने वाले हैं, जहां से उनके लटकाने वाले गमलों के लिये पिटुनिया के पौधे लेंगे। आज नापा स्थित एक किसान से जून ताजी पालक ख़रीद कर लाये। समाचारों में सुना, केरल और तमिलनाडु में एक और तूफ़ान आने की चेतावनी दे दी गई है। 


केरल में आये चक्रवात बुरेवी का असर बैंगलुरु में भी पड़ा है। आज सुबह से ही बादल बने हुए हैं। कुछ देर वर्षा भी हुई, इस मौसम में पहली बार स्वेटर निकाला। शाम को गुरुजी का लाइव सत्संग था, असम में सोचा करती थी, आश्रम जाकर सत्संग में भाग लेगी, पर एक वर्ष होने को है, अभी तक आश्रम सबके लिए खुला नहीं है। उनके बताये ध्यान वे रोज़ ही करते हैं। आज विश्व विकलांग दिवस है, मृणाल ज्योति में अच्छी तरह मनाया गया, उसने तस्वीरें देखीं, एक अध्यापक ने फ़ेसबुक पर वीडियो भी पोस्ट किया था। उस वे कई दिवस याद आ रहे थे, जब वह महिला क्लब की अन्य महिलाओं के साथ बच्चों के लिए उपहार लेकर जाती थी। कल रात्रि अजीब सा स्वप्न देखा। मन को यह बोध हुआ कि नाम-रूप दोनों भ्रम हैं। दोनों क्षणिक हैं, उनके प्रति आसक्ति दुख को उत्पन्न करने वाली है। इस जगत में कुछ भी स्थायी और स्वतंत्र नहीं है, सभी कुछ आपस में एक-दूसरे पर आश्रित है। 


आज नेवी डे है। मौसम आज भी ठंडा रहा दिन भर, हल्की वर्षा भी हुई।अगले हफ़्ते एक दिन के लिए  बड़ी ननद  और ननदोई आ  रहे हैं। उसी दिन शाम को नौ बजे आश्रम के स्वामी प्रणवानंद जी का ऑन लाइन कार्यक्रम है। शाम को एक पुराने परिचित की बिटिया का फ़ोन आया, एम डी की उसकी परीक्षा अब मार्च या अप्रैल में होग, कोविड के कारण ही यह देरी है। जबकि उसका छोटा भाई एक वर्ष की पढ़ाई कर चुका है। आज बौद्ध धर्म पर एक दो व्याख्यान सुने। शून्यता की परिभाषा समझ में आयी। वेदान्त का ब्रह्म ही बौद्धों का शून्य है। सुबह के भ्रमण में मन को शून्य पर टिकाने का अभ्यास सहज ही होता है। हल्का अंधकार होता है हर तरफ़ सन्नाटा, कुछ भी नहीं होता जो ध्यान खींचे। योग साधना के समय आजकल शंख प्रक्षालन के आसनों के कारण देह हल्की रहती है।


Tuesday, June 27, 2023

रंग और ब्रश




रात्रि के नौ बजने वाले हैं। आज मौसम अपेक्षाकृत गर्म है। कहीं से एक बच्चे के रोने की आवाज़ आ रही है, जो सदा ही उसे विचलित कर देती है। शायद वह गिर गया हो, या उसे किसी बात पर डांट पड़ी हो। असम में कितनी बार बाहर जाकर रोते हुए बच्चों को हंसाने की कोशिश करती थी, वहाँ आसपास कई बच्चे थे। यहाँ तो घरों में बहुत ध्यान रखा जाता है पर बच्चे तो आख़िर बच्चे हैं ! अचानक इस समय कैसी हवा चलने लगी है, वातावरण का कितना अधिक प्रभाव मानव के मन पर पड़ता है। सुबह उठे तो बारिश के कारण देर से टहलने जा पाये, ऐसे में सारी दिनचर्या उलट-पलट जाती है। परसों उन्हें रक्त की सामान्य जाँच कराने जाना है। जून को बढ़ती हुई उम्र में होने वाली परेशानियों का भय सताने लगा है, जबकि नूना के मन में तो उम्र का ख़्याल भी नहीं आता।समय भी तो एक भ्रम ही है, जब सब कुछ माया ही है तो फिर डर किस बात का ! शाम को वह छत पर थी, नीचे कामवाली  जा रही थी, उसने बुलाकर कल सुबह जल्दी आने के लिए कहा, पर वह हिन्दी नहीं जानती, पता नहीं क्या समझा होगा। उसी समय सब्ज़ी वाला ट्रक आया था, जून लेने गये, पर कोई भी सब्ज़ी ताज़ी नहीं थी। सुबह वह वर्षों बाद बालों में लगाने वाले दो क्लिप लायी, कोरोना की मेहरबानी से बाल लंबे हो गये हैं। शाम को पिताजी से बात हुई, मंझला भाई मिलने आया था, नया सोफा और नया मैट्रेस मँगवाया है। उनका स्वास्थ्य पूरी तरह ठीक नहीं है फिर भी वह बहुत खुश थे। जून ने पेंटिंग के लिए नये फ़्लैट ब्रश माँगा कर दिये हैं। वह उसका बहुत ध्यान रखते हैं। दोपहर को एक चित्र बनाया, रंगों को कागज पर उड़ेलने में कितना आनंद आता है, इसका पता ही नहीं था। कला कोई भी हो ह्रदय को आनंदित करती है। देवों के देव में लेखा दूसरी पार्वती बनाकर आयी है। कथा अति रोचक हो गई है।  


आज शाम वे नन्हे के घर आ गये हैं, कल  सुबह यहाँ से जाँच के लिए रक्त का नमूना ले जाने के लिए लैब से कोई व्यक्ति आएगा। रात्रि भोजन जल्दी कर लिया ताकि बारह घंटों से कुछ अधिक का उपवास हो जाये। सोनू अपनी एक सखी के लिए केक बना रही है। शाम को छोटी बहन से बात हुई, वे लोग नवरात्रि की पूजा की तैयारी के लिए बाज़ार जाने वाले थे। विदेश में रहकर भी वे सभी उत्सव बहुत विधि से मनाते हैं। सुबह उठे तो आज भी वर्षा हो रही थी, समाचारों में सुना हैदराबाद में अति भीषण वर्षा हुई है, सामान्य जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। 

सुबह एक विचित्र स्वप्न देखा, जो बहुत कुछ सिखा रहा है। घर का पिछवाड़ा देखा, वहाँ एक माली भी काम कर रहा है। दीदी को देखा, उन्हें सचेत किया, पीछे गंदगी है। जिसमें सड़ी और कटी हुई सब्ज़ियाँ हैं, जिन्हें पानी से भरे एक टब में डाल दिया, पता नहीं क्या अर्थ था इस स्वप्न का, फिर गूगल पर स्वप्न फल में पढ़ा तो पता चला कि अपने किसी कृत्य को स्वीकारा, जिस पर पछतावा था। मन कुछ हल्का हुआ, उसके पूर्व मन आत्मग्लानि से भर गया था। सपने तो सपने ही हैं पर वे प्रतीकों के रूप में कितना  कुछ कह देते हैं। सुबह उठी तो नन्हे ने पूछा, आप योग अभ्यास करेंगी, उसके टीचर ने बहुत अच्छी तरह आसन कराये, एक घंटा कैसे बीत गया, पता ही नहीं चला। उसके बाद पैथोलॉजिकल लैब के एक कर्मचारी ने आकर रक्त लिया। उसके बाद नाश्ता किया, नन्हे ने लंच भी पैक करवा दिया था। वापस घर आकर सफ़ाई करवायी, स्नान, पूजा, ध्यान  के बाद भोजन किया, अच्छा बना था। 


उनकी जाँच की रिपोर्ट आ गई है, सब कुछ सामान्य है। आज अष्टमी तिथि है, सुबह सरस्वती देवी को समर्पित कुछ पंक्तियाँ लिखीं। भीतर भाव उमड़ रहे थे सो दो कविताएँ और लिखीं। यदि अतीत मार्ग में न आये और भविष्य की कोई कल्पना मन न कर रहा हो  तो वर्तमान के गर्भ से ही कर्म का जन्म स्वतः होता है। जब मन पूरी तरह से जगा हो, तभी कला का जन्म हो सकता है। जे कृष्णामूर्ति को कहते हुए सुना था, मृत्यु के क्षण में सारे अतीत की मृत्यु हो जाती है, और ध्यान भी वही है। हर पल यदि ध्यान में रहना है तो अतीत की स्मृति नहीं रहनी चाहिए, जो वर्तमान में बाधा बने। वर्तमान से आँख मिलानी हो तो अतीत का पर्दा आँख पर नहीं रहना चाहिए।  मँझली भांजी ने दिवाली के लिए तोरण और कलात्मक  दिये भेजे हैं, वह ऐसी कई वस्तुएँ बनाती है।  


Friday, April 21, 2023

वृद्धा योग शिक्षिका


कुछ देर पूर्व वे रात्रि भ्रमण से लौटे हैं, हवा ठंडी थी, शाम भर वर्षा होती रही थी। जाने कहाँ से बादल इतना जल लेकर आते हैं और अचानक किसी स्थान पर धरा को भिगो कर चले जाते हैं। प्रकृति की लीला को कौन समझ सका है। भगवद गीता में कृष्ण कहते हैं, वही पंच भूतों के स्रोत हैं। देवों के देव में देखा, पार्वती की तपस्या अपने अंतिम चरण में पहुँच गयी है। उन्होंने वनस्पति का आधार भी छोड़ दिया है और केवल वायु के आश्रय रहकर तप कर रही हैं। जब कि वे कुछ घंटे भी भोजन के बिना नहीं रह पाते। बहुत सामान्य है उनका जीवन, पर उस विराट से मिलने की आस रखते हैं। दुर्गाष्टमी आने वाली है। गुरु जी ने बहुत सुंदर व्याख्या की है दुर्गा के नौ रूपों की। उनके एक व्याख्यान का हिंदी में ट्रांस्क्रिप्शन किया।  वह कहते हैं, शैल पुत्री किसी अनुभव की पराकाष्ठा से उत्पन्न हुई ऊर्जा है। ब्रह्मचारिणी अनंत में व्याप्त ऊर्जा है। चंद्र घंटा सौंदर्य का अनुभव करने वाली शक्ति का प्रतीक है। कुषमाँडा ऊर्जा से परिपूर्ण होने की अवस्था है। स्कंद माता मातृ शक्ति है। कात्यायनी ज्ञान की देवी है। कालरात्रि रात्रि के समान विश्राम देने वाली, सिद्धीदात्री सिद्धियों को देने वाली तथा महागौरी सक्षम बनाने वाली तथा मुक्ति प्रदायिनी है। 


परसों बड़ी भांजी का जन्मदिन है। सीए होते हुए वह अंग्रेज़ी में तीन छोटे उपन्यास लिख चुकी है, चौथा लिख रही है। वेब साइट खोल ली है। जो ऑन लाइन पुस्तक छपवाना चाहते हैं, उनकी मदद करना चाहती है। उसका दाँया और बाँया दोनों मस्तिष्क सजग हैं, गणित और अर्थशास्त्र जैसे रूखे-सूखे विषय में पारंगत है और लेखन जैसे सरस विषय में भी। बेटी, भांजी, एक समर्पित पत्नी, फ़रमाबरदार बहू, एक बिटिया की वात्सल्यमयी माँ, बहन, मौसी, बुआ सब है। उसके अगले दिन सोनू का जन्मदिन है, वह समझदार और सबका ध्यान रखने वाली है। प्राणी, पौधा, अपना या पराया, किसी में कोई भेद नहीं करती। सहेलियों से बनाकर रखती है और रिश्तेदारों का हालचाल लेती रहती है। अपना ऑफिस का काम भी मन  लगाकर करती है। घर व वस्त्रों को सलीके से रखती है। कितना कुछ है उनके जन्मदिन पर कविता लिखने के लिए। 

 

नैनी गाँव से अपने खेत की एक लौकी और मूँगफली लायी है, जिसे उन्होंने एयर फ्रायर में भून कर खाया।आज गुरुजी के लेख का अनुवाद किया, जिसमें रामायण के प्रतीकात्मक गूढ़ अर्थ को समझाया था। अभी-अभी उनका लाइव सत्संग सुना, कह रहे थे, पर्व इसलिए आते हैं कि रोज़मर्रा के जीवन में उलझा हुआ मानव कुछ समय देवाराधना के लिए निकाल सके। आज सुबह चार बजे एक स्वप्न देखा, पापा जी कह रहे हैं, उन्हें ठंड लग रही है। शाम को उनसे बात हुई तो पता चला, उस समय उन्हें वाक़ई ठंड लग रही थी। उन्हें हल्का बुख़ार हो गया था, दवा ले ली थी, अब ठीक हैं। उन्होंने दीपक चोपड़ा के एक वीडियो के बारे में बात की, जिसमें नब्बे साल की एक वृद्ध महिला योग सिखा रही हैं। शाम को वे टहलने गए तो अक्सर मिलने वाले एक नब्बे वर्षीय एक वृद्ध से बात हुई, अपने रंगून प्रवास के बारे में बता रहे थे, वे वहाँ पाँच साल रहे थे और रोज़ झील के चक्कर लगाते थे। यहाँ रोज़ शाम को उनका नौकर उन्हें कार में घुमाता है, फिर एक जगह कार रोककर वे प्रकृति के नजारों को देखते हैं और कभी-कभी कुछ देर छड़ी लेकर कुछ कदम चलते हैं। वृद्धावस्था में देह साथ नहीं देती, वे गर्मी में भी मोज़े पहने रहते हैं; पर बातों में उत्साह से भरे होते हैं। चेतना कभी वृद्ध नहीं होती, इसलिए कभी-कभी बूढ़े बिलकुल बच्चों जैसे हो जाते हैं। 


Wednesday, July 15, 2020

ट्रैफिक कंट्रोल



आज तीसरे दिन भी चार पोस्ट्स प्रकाशित कीं. योग कक्षा में एक साधिका अपनी बिटिया को लायी थी जो गोहाटी यूनिवर्सिटी में इलेक्ट्रॉनिक्स में शोध कर रही है. उसने भी एओल का कोर्स किया हुआ है, सबके साथ सुदर्शन क्रिया की. आज महीनों बाद लौकी के कोफ्ते बनाये, इस मौसम की पहली लौकी जो बगीचे से मिली थी. कल पीएम के जीवन पर चेतन भगत द्वारा निर्मित एक फिल्म देखी, बचपन में चाय बेचते थे और बड़े होने पर भी अपने चचेरे भाई के साथ एक कैंटीन में काम करते थे. संघ के प्रचारक बने. पहले सन्यासी बनना चाहते थे. अद्भुत है उनके जीवन की गाथा ! उनमें दृढ संकल्प शक्ति बचपन से ही थी. 

सुबह उठने से पूर्व एक अद्भुत स्वप्न देखा. परमात्मा की ओर से आया एक और संदेश जो उसे गुलामी से छुड़ाने के लिए है. वह एक परिवार में गयी है, साथ में दो अन्य जन भी हैं. वे पड़ोस के परिवार में चले जाते हैं. वे सब बात कर रहे हैं, फिर नूना किसी पत्थर पर कोई संदेश लिखती है, जब अपना नाम लिखने की बारी आती है तो उस खुरदुरे पत्थर पर कुछ भी लिखा नहीं जाता. नाम का पहला अक्षर नहीं लिखा है, तभी पिताजी कहते हैं, यह कैसा नाम है ? वह पुनः प्रयास करती है पर उस स्थान पर कोई भी रंग या चाक काम नहीं करता. वह उसे छोड़कर एक अन्य काले पत्थर पर लिखकर देखती है. श्वेत अक्षरों में ॐ ॐ लिखती है तो झट से पूरा स्थान भर जाता है, फिर अंत में छोटे अक्षरों में अपना नाम भी लिखती है अंग्रेजी में. तभी भीतर से आवाज आती है, स्वयं के नाम को मिटाना होगा, हाथ से मिटाने का प्रयत्न किया पर मिटा नहीं, यह यशेषणा का प्रतीक है. अगले स्वप्न में एक छोटा सा बच्चा है जो सम्भवतः उसी परिवार का है जिससे मिलने गयी थी, वह रात भर उनके घर पर ही रहा है, सुबह उसे छोड़ने जाना है. दृश्य बदलता है, जून फोन  करके उसके परिवार को कहते हैं कि उसे ले जाएँ. वह चाय बनाती है, पतीले में चाय उबल रही है तभी भीतर से आवाज आती है, इसे गिरा दो, दो सफेद कप भी दिखते हैं, उन्हें भी तोड़ देने का ख्याल आता है. यह आसक्ति है. जब तक भीतर जरा सा भी राग शेष है परमात्मा दूर ही रहता है. वह खाली मन में प्रवेश करता है. मन में कोई भी कामना शेष हो तो मिलन होगा भी कैसे ? 

रात्रि के आठ बजे हैं. वर्षा आरंभ  हो गयी है. कुछ देर पूर्व वे बाहर टहल रहे थे तब बरामदे के बल्ब पर पतंगों की वर्षा हो रही थी, सैकड़ों पतंगों ने गिरकर अपनी जान दे दी. क्या रहस्य है इन पतंगों के जन्म और मृत्यु का, कोई नहीं जानता. कल शाम व आज सुबह शिवानी को सुना, कितने सुंदर व सरल शब्दों में वह जीवन के सूत्र बता देती हैं. कहा, यदि हर घंटे एक मिनट के लिए वे जो भी काम कर रहे हों, उसे रोककर  अपने मन को देखें, ध्यान करें व अपने स्वरूप में स्थित हों तो अगले पूरे घंटे मन नियंत्रण में रहेगा, वह इसे ट्रैफिक कंट्रोल कहती हैं. सुबह बच्चों के स्कूल गयी, भूतपूर्व अध्यक्षा से अंतिम मुलाकात हुई, उन्होंने उस पार्क का उद्घाटन किया जो अभी बनना आरंभ नहीं हुआ है, एक दिन तो बन ही जायेगा. शायद वही ‘नाम’ की अभिलाषा... महीनों बाद आज बंगाली सखी से बात हुई, उसकी इकलौती पुत्री और दामाद कनाडा जा रहे हैं सदा के लिए. 

उसने पढ़ा, कालेज में थी तो स्कूल के दिनों को याद करती थी.... कभी-कभी उसे इंटर के वे दिन याद आते हैं जब राजकीय  इंटर कालेज में छुट्टी होने पर वह गेट पर भीड़ होने के कारण आगे जाने की जल्दी न करते हुए सबसे पीछे खड़े रहकर कबूतरों को देखा करती थी. उस स्कूल में कितने कबूतर थे. उसकी उस मनोस्थिति को या चेहरे के भाव को देखकर कुछेक छात्राएं आश्चर्य में आपस में कुछ कहा करती थीं. वे दिन भी क्या दिन थे, जब कोई चिंता न थी. उस लगा इंसान जहाँ और जब होता है वहाँ सुखी रहना नहीं जानता इसलिए अतीत के गुण गाया करता है. 

अगले दिन वह घर आ गयी थी, अपने कमरे में अपनी मेज पर. चचेरी बहन उसके बारे में कोई बात कह रही होगी, वह कितनी नादान है कितनी भोली मगर आज्ञाकारी बिलकुल नहीं. वह उसके लिये कभी कुछ कर सकी तो कितना अच्छा होगा. कालेज जाना था फ़ीस जमा करने और लाइब्रेरी से किताबें लेने. सबसे मिलने का भी आखिरी दिन था, परीक्षाओं के दौरान किसी को फुर्सत नहीं होती और यह अंतिम वर्ष है कालेज का सो... एक छात्रा ने पढ़ाई के बारे में पूछा तो उससे मिथ्याभाषण किया, वह उसका अहम ही तो था. सच बात कहने की उसमें हिम्मत नहीं. सच बात तो यह थी कि पिछले पांच दिन वह उस तरह बिल्कुल नहीं पढ़ पायी पर कहा, टाइमटेबल के अनुसार पढ़ी थी. इससे धोखा उसे दिया या स्वयं को. एक अन्य सखी मिली कालेज में जो आगे पढ़ना चाहती है पर घर वाले उसका रिश्ता तय कर रहे हैं, वह भी झुक जाएगी अपने मम्मी डैडी और भैया के विचारों से जो शहर के बड़े व्यापारी हैं. एक अन्य सखी मिली जो उसे बहकती हुई सी लगती है, बेवजह के शब्द उगलती. एक ने कहा, ‘आषाढ़ का एक दिन’ बकवास है. एक ने उसकी किताब नहीं लौटाई न ही पैसे दिए हैं जबकि वह उस दिन कह रही थी... और पुस्तकालय से जो पुस्तकें उसने ली हैं उसे देखकर लगता है किसी काम में आने वाली नहीं ...

Thursday, June 18, 2020

पावर ऑफ़ नाउ


आज ठंड अपेक्षाकृत अधिक है. सुबह वे उठे तो कोहरा बहुत घना था. प्रातः भ्रमण के लिए देर से निकले पर उतनी ठंड में भी एक व्यक्ति को सामान्य कमीज पहने दौड़ लगाते देखा. मानव की सर्दी-गर्मी सहने की क्षमता व्यक्ति सापेक्ष है. नेहरू मैदान में तेज बत्तियां जल रही थीं, दिन-रात वाले फुटबॉल मैच चल रहे हैं वहाँ तीन दिनों के लिये. एक युवा संस्था करवा रही है कम्पनी की सहायता से. आज भी किसी ‘बंद’ की बात थी पर कम्पनी खुली है. एनआरसी और सिटीजनशिप बिल को लेकर उत्तर-पूर्व में वातावरण काफी अस्थिर बना हुआ है. इस समय कमरे में धूप आ रही है और धूप की गर्माहट भली लग रही है. कल दोपहर मृणाल ज्योति गयी, उसकी संस्थापिका कह रही थीं भविष्य में उनके न रहने पर उनकी दिव्यांग पुत्री अकेली न रह जाये इसलिए वह कुछ वर्षों बाद अपने रिश्तेदारों के पास रहेंगी. माँ का दिल कितनी दूर की सोच रखता है. उनके बाद स्कूल कौन सम्भालेगा इसकी भी चिंता उन्हें होती होगी. कल शाम भजन से पूर्व गले में खराश हुई और ॐ का उच्चारण नहीं कर सकी, देह एक मशीन की तरह ही है, कहीं कुछ फंस गया और मशीन ठप ! एक छोटा सा खाकी रंग का कुत्ते का बच्चा बरामदे में आकर बैठा था कल, उसे कुछ खाने को दिया तो दूर तक छोड़ आने के बावजूद थोड़ी ही देर में वापस आ जाता था, उसका दिशा बोध कितना प्रबल रहा होगा. वे उसे घर में नहीं आने दे रहे थे, शायद रोग का भय था, उसे कोई टीका भी नहीं लगा होगा. परमात्मा ही उसकी रक्षा करते रहे हैं आजतक, आगे भी करेंगे. बाहर मैदान से बच्चों के खेलने की आवाजें आ रही हैं, ये बिना थके शाम तक खेलते रह सकते हैं. 

टीवी पर प्रधानमंत्री का भाषण आ रहा है जो वह बीजेपी के राष्ट्रीय अधिवेशन में दे रहे हैं. महिला सशक्तिकरण की बात की, फिर किसानों की समस्याओं की ओर ध्यान दिलाया. उनकी आवाज में बल है और भारत को आगे ले जाने का दृढ संकल्प भी. ‘पावर ऑफ़ नाउ’ वर्षों पहले पढ़ी थी, कल से दुबारा पढ़ रही है, पढ़ते-पढ़ते ही अनुभव घटने लगता है. वर्तमान में रहने का जो मन्त्र ज्ञानी देते आए हैं उसका सर्वोत्तम चित्रण इस पुस्तक में हुआ है. अगले सप्ताह वे अरुणाचल प्रदेश जा रहे हैं एक रात के लिए. शाम को क्लब में एक विज्ञान फिल्म दिखाई जाएगी, रजनीकान्त की हिंदी में डब की गयी फिल्म.  

उस दिन यानि वर्षों पूर्व सुबह साढ़े छह बजे पिताजी द्वारा आवाज लगाने पर नींद खुली तो एक स्वप्न टूट गया. स्वप्न, जो काफी देर से चल रहा था. स्वप्न जो सुंदर था... सुखद था. पता नहीं किस खेत में काम कर रहे थे वे लोग, साथ-साथ बातें भी. फिर घर आये. सबको पता चल गया. मिटटी से सने हाथ, हल चलाते हुए लगी होगी या .. कुछ याद नहीं. फिर स्वप्न में ही एक पत्र मिला और ‘मेरे संसार; ऋषियों की बातों से भरी किताब, श्लोकों और आख्यानों को उसमें देख वह चकित थी फिर दक्षिण भारत का भ्रमण  और सुंदर दृश्य... बस सब बातों की एक बात कि स्वप्न अच्छा था. कालेज में ‘फिलॉसफी ऑफ़ हार्डी’ पर एक सेमिनार था, मध्य में एक गजल की प्रस्तुति... मुक्कमल जहाँ नहीं मिलता.. ऐसी ही कुछ. कल भारत बन्द का आयोजन है विपक्षी दलों द्वारा. बस में एक वृद्ध ने पेन्सिल खरीदी,  लिखने के लिए सिगरेट की डिब्बी का ढक्कन, उसने उसे एक कागज अपनी कापी का दिया, वह खुश हुआ होगा पर उसने ऐसा जाहिर नहीं किया. बस ड्राइवर ने बस गेट से काफी आगे रोकी, वह क्रोध में भी था.अब से वह सबसे आगे वाली सीट पर बैठेगी, या फिर खड़े होना भी ठीक है ताकि उसे पहले से बता सके. 

Thursday, April 16, 2020

चश्मे की कमानी


बागवानी का सब साजो-सामान तो आ गया है पर इंद्रदेव ज्यादा ही कृपालु हो रहे हैं आजकल, मौसम जब साफ होगा तभी क्यारियाँ बनेंगी. आज दोपहर एक सखी के यहाँ तीज की पूजा में गयी, प्रसाद बहुत स्वादिष्ट था. उसने बताया वे तीन परिवार भूटान की यात्रा पर जा रहे हैं. आज योग कक्षा में गुरूजी की पुस्तक से उनका सन्देश पढ़ा, “यदि तुम ध्यान नहीं कर सकते तो बेवकूफ हो जाओ “ सुनकर सभी साधिकाएँ हँसने लगीं. क्या इससे गुरूजी का तात्पर्य  है कि इस जगत में दो ही सुखी हैं, एक ध्यानी और दूसरा निपट गंवार. जो बुद्धिमान हैं उन्हें दुःख का अनुभव होगा ही. आज बहुत दिनों बाद छोटी बहन से बात हुई, उसने एक सुंदर गीत गाया व्हाट्सएप पर, सुबह नूना ने नृत्य किया, भीतर प्रसन्नता हो तो किसी न किसी तरह बाहर व्यक्त हो ही जाती है. भीतर स्थिरता का साम्राज्य दृढ हो रहा है, गुरु जी कहते हैं, मौन से ही उत्सव का जन्म होता है ! 

कल दिन भर कुछ नहीं लिखा. अभी सुबह के सवा आठ बजे हैं, जून से फोन पर बात हुई, वह टूर पर हैं. चश्मा टूट जाने की बात उन्हें बतायी। उन्होंने बिलकुल सही कहा, वह चश्मे को सावधानीपूर्वक नहीं रखती है. वह बहुत वस्तुओं का महत्व नहीं समझती है, उन्हें ‘टेकेन फॉर ग्रांटेड’ लेती है, पता नहीं हिंदी में इसे क्या कहेंगे. यह स्वभाव इतना ज्यादा बढ़ गया है कि वह सत्य को, परमात्मा को भी अपना सहज स्वभाव ही मानने लगी है. भीतर जाकर जिस मौन से मुलाकात होती है, आनंद व शांति का अनुभव होता है वह सत्वगुणजनित भी तो सकती है. परमात्मा तो अनंत है, वह इस छोटे से मन में कैसे समायेगा. जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्ति व तुरीय, इन चारों को देखने वाला जो आत्मा है, द्रष्टा है, उसमें टिकना है. वह इस समय हाथ से लिख रही है, आँख से देख रही है, यह जाग्रत अवस्था है. यदि लिखते-लिखते कोई भूत या भविष्य का कोई विचार आ जाये और वह उसी में खो जाये तो यह जाग्रत स्वप्न होगा. यदि यह कर्म भी न हो, चिंतन भी न हो तब जाग्रत सुषुप्ति भी घट सकती है और मन बिलकुल खाली हो तब चौथी अवस्था. स्वप्न में मन कैसे-कैसे दृश्य दिखाता है, कल रात्रि वह ध्यान करके सोई थी, एक स्वप्न में मछलियाँ व किसी के कटे हाथ देखे. एक दिन मछली का वीडियो देखा था, और उस दिन स्कूल में पढाते समय एक छात्रा के हाथ देखे जिसमें तीन उँगलियाँ जुड़ी थीं, शायद उसी का प्रभाव हो. सुबह टहलकर लौटी तो माली को बगीचे में सफाई करने को कहा, उसने फूलों वाले पेड़ की छंटाई कर दी, उसे डांटा. उस दिन एक सखी को जब अपने घर के भीतर और बाहर पेड़ कटने की बात से दुःख हो रहा था तो वह उसे समझा  रही थी कि चिंता न करे, पुनः डालियाँ हरी हो जाएँगी. ‘पर उपदेश कुशल बहुतेरे’. कुछ देर पूर्व ही चश्मे की कमानी उसकी असावधानी से टूट गयी थी, वह पीड़ा शायद  क्रोध भरे शब्दों में व्यक्त हुई हो, ऊर्जा तो एक ही है उससे कोई भी काम लेना उनके हाथ में है. यदि वे जाग्रत हैं तब, स्वप्न में उन्हें अपनी ऊर्जा पर नियंत्रण नहीं रहता. सुषुप्ति में तो खुद का भी भान नहीं रहता. तुरीय में ऊर्जा अपने आप में ही विश्राम करती है. स्वयं को जानती है. 

कल रात सोने से पूर्व नाईट क्वीन फूल की तस्वीरें उतारी थीं, जिन्हें अभी फेसबुक पर पोस्ट किया. लोग इन तस्वीरों को देखकर प्रफ्फुलित हों इतना ही उद्देश्य है इन्हें प्रकाशित करने के पीछे. इसी तरह ब्लॉग्स पर पोस्ट लिखने के पीछे भी. लोगों को योग सिखाने के पीछे भी यही उद्देश्य है कि उनके जीवन में बदलाव आये, वे सकारात्मक बनें. अपनी भूलों को स्वीकारने की क्षमता उन्हें प्रभु दे तो वे भूलें उनके पथ का दीपक बन जाएँगी, वरना बार-बार वे उन्हीं भूलों को दोहराते रहेंगे. इसी लिए सन्त कहते हैं, भूलें तो करो पर नई-नई, पुरानी को ही न दोहराते रहो. कल शाम एओएल सेंटर गयी, अच्छा लगा, गणेश पूजा का उत्सव था, भजन गाये. दोपहर को घर पर उत्सव मनाया था. नैनी ने गणपति की मूर्ति का बहुत सुंदर श्रृंगार किया. बच्चे बहुत खुश थे, उन्हें प्रसन्न देखकर  उसे जो प्रसन्नता हुई, क्या उसके पीछे अहंकार था, नहीं, केवल परमात्मा का आनन्द था ! सुबह स्थानीय पूजा मण्डप में गयी, विशाल मूर्ति लगाई है वहाँ, बड़े-बड़े मोदक भी थे, सारा वातावरण उल्लासमय था, वहीं से उड़िया समाज की पूजा देखने गयी, पण्डित जी मन्त्र जाप कर रहे थे, जिन्हें सुनने वाला कोई नहीं था. कुछ देर बैठकर वह घर आ गयी. आज दस बजे बाजार जाना है, चश्मा बनवाने. आज हिंदी दिवस है. 

Tuesday, April 14, 2020

फिटबिट का लक्ष्य


आज भारत बंद  के कारण जून दफ्तर नहीं जा पाए और वह स्कूल. दफ्तर का मुख्य द्वार बंद है. स्कूल भी बंद  है. पिछले एक घण्टे से वर्षा हो रही है, माली ने बगीचे में कार्य आरंभ किया ही था कि तेज बूंदें पड़ने लगीं. सुबह चार बजे से कुछ पहले नींद खुली, उसके पहले स्वप्न जैसा कुछ चल रहा था, फिर तारे दिखे और मन में विचार आया, वहीं पहुँच गए जहाँ से चले थे. साधना के आरंभ में ऐसा दृश्य दिखता था तो मन कैसा प्रसन्न होता था पर अब सदा एकरस रहता है. कल दीदी से बात हुई, एक दिन उन्हें सप्तर्षि दिखा बिल्कुल स्पष्ट ! सुदर्शन क्रिया के बाद उन्हें बांसुरी की धुन सुनाई दी थी. उन्होंने कहा कि सम्भवतः उनका यह अंतिम जन्म हो अथवा एकाध जन्म और लेना पड़े. वह देवदूत की बात भी कर रही थीं कि उन्हें सदा कोई अदृश्य सहायता मिलती है, और सम्भवतः वह भी भविष्य में ऐसा ही करें. कल छोटे भाई से भी बात हुई, वह किसी पुस्तक के बारे  में बात कर रहा था. ‘सीक्रेट ऑफ़ द सीक्रेट्स’ उसे घर पर मिल नहीं रही है, शायद किसी ने पढ़ने के लिए ली थी. बहुत दिन पहले वह उसकी एक किताब लायी थी जो इस बार वापस ले जाएगी. अभी-अभी फोन पर जून ने अपने एक सहकर्मी  को कार की दुर्घटना की बात बतायी, एक अन्य मित्र को वह गाड़ी के गैराज में रहने की बात बता रहे थे. उसने उन्हें मना किया, कारण स्वयं के अपमान का नहीं है, बल्कि लोगों को व्यर्थ ही परेशान न करने की भावना है. उसके भीतर की समरसता को अब बाहर की स्थिति, व्यक्ति या वस्तु अब प्रभावित नहीं करते पर औरों के मन की बात वह जान सकती है. उन्हें अच्छा तो नहीं ही लगेगा. डायरी के इस पेज के नीचे लिखी सूक्ति भी इसी बात की गवाही देती है. जो कहती है ‘अपनी चोटों को रेत पर लिखो और अपने लाभों को पत्थर पर’ जून कुछ देर पहले कह रहे थे कि पुलिस यदि साथ दे तो भारत बंद सफल नहीं हो सकता, वही हुआ, उनके एक सहकर्मी का फोन आया  है, उसने कहा, पुलिस आयी है, गेट खुल गया है, वह उन्हें ले जाने आ रहे हैं. 

आज का दिन उसे सदा स्मरण रहेगा. आज पहली बार उनके घर में ध्यान कक्ष में सुदर्शन क्रिया हुई, गुरुजी की आवाज में रिकार्डेड कैसेट जब बज रहा था एक अनोखी प्रसन्नता का अनुभव हो रहा था. शाम को एओएल एक एक टीचर ठीक साढ़े चार बजे पहुँच गए थे, साढ़े छह बजे फॉलोअप समाप्त हो गया. आज छोटे भाई ने एक समाचार भेजा, एक बयासी वर्षीय महिला टीवी पर साक्षात्कार देते हुए मृत्यु को प्राप्त हो गयी, कितनी सहज थी उनकी मृत्यु. परसों गणेश पूजा है, सुबह उड़िया समाज की पूजा में निमन्त्रण है, दोपहर को उनके यहां महिलाएं व बच्चे आएंगे. शाम को हो सका तो सेंटर जाना है, वहां सत्संग है. दोपहर को नैनी ने बताया घर में झगड़ा हुआ है, देवरानी से बोलचाल बंद है. 

आज भी दिन भर झड़ी लगी रही. रात्रि भोजन बाद भ्रमण के लिए बाहर निकले , पांच मिनट  के लिए वर्षा रुकी थी, फिर आरंभ हो गयी. पन्द्रह हजार कदम का फिटबिट का लक्ष्य अधूरा ही रह गया. अब कमरे में ही टहलकर पूरा तो करना है. आज तीसरे दिन बगीचे में उगी तोरई की सब्जी बनाई, बिना किसी रासायनिक खाद के उगी ऑर्गेनिक सब्जी. सर्दियों की फसल के लिए तैयारी शुरू कर दी है. गोबर, चूना, कम्पोस्ट खाद व बांस आदि सभी आ गए हैं और बीज भी. 

Sunday, March 29, 2020

राखी का उत्सव


आज मृणाल ज्योति में बच्चों के साथ दो दिन पहले ही राखी का उत्सव मनाया, बड़ा सा नीला कार्पेट ले गयी थी, जिसपे दो पंक्तियों में उन्हें बैठाया, जो इस समय धूप में सूख रहा है. वह खीर बनाकर ले गई और एक सखी आलू बोंडा, उन्होंने टीचर्स को भी राखियाँ बाँधी, तस्वीरें उतारीं. बड़ी ननद की राखी आज मिल गयी, उसकी भेजी राखियां भी सभी भाइयों को मिल चुकी हैं. कल सुबह ड्राइविंग टेस्ट देने जाना है. आज सुबह क्लब की प्रेसीडेंट के यहां अकेले कार लेकर गयी, वह तो उनका हाल-चाल पूछने गयी थी, पर उन्होंने क्लब का रजिस्टर, चेकबुक आदि सब सौंप दिया, टीचर्स डे के लिए भी चेक दिया, वे मृणाल ज्योति के टीचर्स के लिए अच्छा सा उपहार खरीद सकते हैं. परसों वह चेकअप के लिए बाहर जा रही हैं, एक हफ्ता लग जायेगा. इसी महीने मीटिंग है, कविता पाठ की प्रतियोगिता कराने में उसे सहायता करनी है. 

आज प्रातः भ्रमण से लौटते समय शब्द भीतर गूँज रहे थे, कविता के शब्द ! जैसे कोई जलप्रपात बह रहा हो ! सुबह-सुबह एक स्वप्न देखा, वह गाड़ी चला रही है( आजकल गाड़ी चलाने के स्वप्न अक्सर आते हैं) ड्राइवर साथ वाली सीट पर है, यानि अभी तक अकेले चलाना शुरू नहीं किया है. पीछे दो सखियाँ बैठी हैं. मंजिल आ गयी तो रुककर  वह उतर जाती है. पीछे गली में स्कूल ड्रेस पहने चार लड़कियाँ हैं जो आपस में लड़ रही हैं, वह उन्हें समझाती है, धमकाती है तो क्या देखा वे सभी एकजुट होकर उसे ही चोट पहुँचाने के इरादे से आने लगती हैं, तभी भीतर ख्याल आता है, इन्हें उसने ही तो रचा है.  वह खुद ही कार थी, स्वयं ही ड्राइवर, स्वयं ही यात्री और स्वयं ही लड़ाकू लड़कियाँ ! अपनी ही कृति से डरने की क्या जरूरत है, उठने के बाद भी यह भाव दृढ होता गया. परमात्मा स्वयं ही सब कुछ बना है, यानि आत्मा ही सब कुछ बनी है. वह ही वह सब ओर दिखाई देने लगी. जून ने जब कहा, उन्होंने जब अपने पुराने सहकर्मी श्री और श्रीमती पी को देखा, काफी ऊंची इमारत से कूदने का अभ्यास करते हुए तो उन्हें कहा, यह मन की ही रचना है, उनका मन उन दोनों को खतरा मोल लेने वाले साहसी  व्यक्तियों की तरह देखता है. कविता के शब्द अब याद नहीं हैं, वे तो अस्तित्त्व में विलीन हो गए लेकिन भाव भीतर हैं तो वे नए शब्दों को ढूंढ ही लेंगे स्वयं को व्यक्त करने के लिए. 

आज राखी है, सभी भाइयों से बात हुई, पिताजी व चाची जी से भी, दोनों ननदों से भी. व्हाट्सएप पर बहुत लोगों को संदेश भेजे, फेसबुक पर राखी की कविता पोस्ट की. सुबह वर्षा में भीगे, जून ने भी वर्षा का आनंद लिया, बगीचे में पानी भर गया था, अभी भी बाहर काफी पानी भरा है, वर्षा जो सुबह से लगातार हो रही थी, इस समय रुक गयी है. टीवी पर मूक और बधिर  व्यक्तियों के लिए समाचार आ रहे हैं. साइन लैंगुएज में उद्घोषिका को समाचार दिखाते हुए देखना मन में विपरीत भावों को एक साथ जगा गया. अच्छा भी लगा उसे इस कुशलता से पढ़ते हुए देखकर, साथ ही दुःख भी कि जो लोग सुन नहीं सकते, कितनी बड़ी संपदा से वंचित रह जाते होंगे. टीवी पर ‘मन की बात' शुरू हो गयी है. प्रधानमंत्री राखी व जन्माष्टमी की शुभकामनायें दे रहे हैं. आज संस्कृत दिवस भी है, भारत इस बात का गर्व करता है कि तमिल पुरातन भाषा है और संस्कृत वेदों से लेकर आज तक ज्ञान का प्रसार करती आ रही है. केरल में आपदा आयी है, पर सेना के जवान पूरी मुस्तैदी से जुटे हैं. प्रधानमंत्री अटलजी के कार्यों के बारे में बता रहे हैं. उन्होंने संसद में तथा देश में कई सुधारों के द्वारा परिवर्तन किया. तिरंगा फहराने का अधिकार सामान्य लोगों को दिया. इसी महीने राष्ट्रीय खेल दिवस है, जकार्ता में एशियन गेम्स चल रहे हैं, अब भारतीय खिलाड़ियों को कई पदक मिलते हैं, देश का माहौल बदल रहा है. 

Tuesday, March 24, 2020

पंद्रह अगस्त



बहुत दिनों के बाद फाउंटेनपेन से लिखना कुछ विचित्र लग रहा है, जून के जन्मदिन पर उन्हें यह उपहार में मिला है, पर वह एक दिन भी इससे लिख नहीं पाए, सो उसके पास आ गया है. स्टाइल की बॉडी और सुनहरे निब वाला यह पेन काफी एहतियात मांगता है, इसमें स्याही नहीं भरनी पड़ेगी, बल्कि कार्टिलेज लगेगी. पन्द्रह अगस्त का उत्सव उन्होंने सोल्लास मनाया, सुबह टहलने गए तो आकाश पर इंद्रधनुष का छोटा सा टुकड़ा दिखा, मानो तिरंगा वहां भी फहर रहा हो. बच्चों के स्कूल गयी तो प्रेसीडेंट ने कुछ बोलने को कहा, तिरंगे के महत्व के बारे में कुछ शब्द कहे जो यकीनन पुरे हृदय से कहे गए थे. उसके बाद क्लब की महिलाओं के साथ वे अस्पताल गए, मरीजों को मिठाई के डिब्बे वितरित किये गए, जो उनके परिजन ही खाने वाले हैं. घर आकर आस-पास के बच्चों और महिला-पुरुषों के साथ लॉन में झंडा फहराया, लड्डू बांटे. दोपहर के भोजन में जून ने बहुत सहायता की, उन्होंने दो घंटों में  लगभग सभी कुछ बना लिए, बाद में नैनी ने रोटी और चावल बनाये. एक बजे से मेहमान आने लगे. जून के दफ्तर की दो सहकर्मियों ने मदद की, एक सखी सदा ही सहायता के लिए सदा ही तैयार रहती है. टीवी पर अटलबिहारी बाजपेयी की नाजुक हालत के बारे में बताया जा रहा है, उनके राजनितिक जीवन के बारे में चर्चा हो रही है, भारत की राजनीति में उनका बहुत योगदान है. उनकी खूबी थी सबको सुन्ना, सबको साथ लेकर निर्णय लेते थे , उनके विरोधी भी उनका सम्मान करते हैं. पोखरण का बम विस्फोट उनके कार्यकाल में हुआ था. उनका कोई भाषण सुने ऐसा मन होता है. 

आज दोपहर वे मृणाल ज्योति गए, वहां पीने के पानी की समस्या का जायजा लिया. जून उनकी सहायता करना चाहते हैं, वः कम्पनी को एक प्रस्ताव भेजेंगे. उस पानी में लौहतत्व बहुत ज्यादा है, जो वे लोग ट्यूबवेल से निकालते हैं. उसने सोचा, काश उनकी यह समस्या वर्तमान उच्चाधिकारी के रहते रहते हल हो जाये. आज सुबह ड्राइविंग स्कूल गयी, लाइसेंस के लिए अगले हफ्ते फार्म भरना है, फिर जाना होगा. आज सुबह उठने से पूर्व एक स्वप्न चल रहा था, फिर उसी जन्म का स्वप्न, जिसके कारण बचपन से ही वैसी परिस्थितियां जीवन में आयीं. किसी एक जन्म में जो भक्त होता है, दूसरे में डाकू भी हो सकता है. उनके भीतर हर तरह के संस्कार मौजूद हैं, वे किसे प्रश्रय देते हैं यह उनके ऊपर है. आत्मा दोनों की साक्षी है. इस समय मौसम ठंडा हुआ है, दोपहर को बहुत गर्मी थी. कल दिन भर अटलजी के बारे में समाचार सुने, उनकी अंतिम यात्रा टीवी पर देखी. उनकी भाषण देने की कला अद्वितीय थी, सोच अद्धभुत थी. उन्हीं से सीखकर नरेंद्र मोदी देश का नेतृत्व कर रहे हैं. विपक्ष में रहकर भी उन्होंने बहुत योगदान दिया. कल तिनसुकिया जाते व आते समय उनके जीवन पर आधारित कार्यक्रम  देखा. सुबह उनके बारे में लिखा. उसे लगता है अगले चुनाव में बीजेपी पुनः जीतकर आएगी और उसमें अटलजी का भी हाथ होगा, लोग उन्हें भूल नहीं सकते ! कल इतवार है, वे राखियाँ बनाएंगे. 

दोपहर बाद का समय है, तापमान सैंतीस डिग्री पहुँच गया है, जून को इतनी धूप में फील्ड जाना था, वह पूरे उत्साह से गए. सुबह स्कूल में भी तेज धूप के कारण योग का अभ्यास कम समय के लिए करवाया. आज फेसबुक पर राखी बनाते हुए व झंडा लिए बच्चों के चित्र पोस्ट किये, अच्छा काम , अच्छा लगता है सभी को ! 

Sunday, January 19, 2020

विश्व योग दिवस



आज का दिन काफी व्यस्त रहा और काफी अलग भी. प्रातः भ्रमण के समय फूलों से लदे वृक्षों की तस्वीरें उतारीं, बाकी दिन घर आने की जल्दी होती है सो वे कैमरा लेकर नहीं जाते. बड़े भाई से बात हुई वे एक प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र में नौ दिन रहकर आये हैं, उन्हें काफी हल्कापन महसूस हो रहा है. देह में जहाँ कहीं भी दर्द आदि थे, चले गए हैं. दोपहर को सन्डे योगा क्लास के बच्चों के साथ स्वच्छता अभियान चलाया, घर के सामने तथा बायीं ओर की सड़कों से कई थैले भरकर कूड़ा उठाया, कुछ दिन ये सड़कें साफ रहेंगी फिर आते जाते लोग इन्हें बेहोशी में गन्दा कर देंगे. बच्चे बेहद खुश थे, जब वे वापस आये तो उन्हें पंक्ति में खड़ा कर हाथ धुलवाए, नैनी ने नाश्ता तैयार कर दिया था. श्रमदान के बाद भोजन का अलग ही स्वाद आता है. जून काफी दिन पहले अमूल लस्सी का क्रेट लाये थे, उन्होंने भी बांटने में सहयोग किया. सुबह वह दो सखियों के साथ को ऑपरेटिव से विश्व योग दिवस के लिए आवश्यक सामान लेने गयी, महिला क्लब में भी वे इस दिवस पर कार्यक्रम कर रहे हैं. कल से वे योग प्रोटोकाल के अनुसार अभ्यास भी आरंभ करने वाली हैं. उस दिन सुबह भी बीहू ताली में सामूहिक योग किया जायेगा. क्लब की एक सदस्या से फोन पर बात करके परिचय लिया, उनकी विदाई कविता लिखने के लिए. 

सुबह नींद खुलने से पूर्व स्वप्न में पशुओं की खाल की बात हो रही थी, कल शाम की मीटिंग में कुछ महिलाओं को भोजन का मीनू बनाते समय जो शब्द सुने थे, शायद उन्हीं का परिणाम था यह स्वप्न, या किसी पूर्व जन्म की स्मृति से उपजा था, कौन जाने !  सुबह की दिनचर्या अभी समाप्त हुई ही थी कि ड्राइवर आ गया, ड्राइविंग का अभ्यास किया, अब कुछ-कुछ समझ में आने लगा है. कल विश्व योग दिवस है. उसे चार कार्यक्रमों में भाग लेने का अवसर मिल रहा है. परमात्मा की कृपा है. 

आज इतवार है. जून थोड़ी देर के लिए दफ्तर गए हैं. लन्च में विशेष कुछ बनाना नहीं है, सलाद व फल. शाम को उनके पूर्व वरिष्ठ अधिकारी को बुलाया है. वे लोग इसी महीने के अंत में सदा के लिए गोहाटी जा रहे हैं. आज सुबह एक्वा गार्ड का मकैनिक आया, कुछ दिन खराब रहने के बाद आज से मशीन ठीक हो गयी है. यहां पानी में आयरन ज्यादा है. परसों सुबह उन्हें उड़ीसा की यात्रा पर निकलना है. बगीचे में माली काम कर रहा है, उसका पूरा परिवार ही कुछ न कुछ सहयोग कर रहा है. दो दिन पहले नशा करके उसने बहुत उत्पात मचाया, जून ने तो उसे जाने को कह दिया था, पर वे लोग यहां रहना चाहते हैं. सुधरने का वादा पहले भी कई बार कर चूका है पर मन को जब किसी वस्तु की आदत पड़ जाती है, तो वह बिना सोचे-समझे उस कार्य को करना आरम्भ कर देता है, चाहे वह कार्य उसके या देह के लिए हानिकारक हो. मन जब स्वयं को बदलना आरम्भ करता  है तो पुराने संस्कार उसे रोकते हैं. वह छूटना चाहते हुए भी आदत का गुलाम होकर उसी कार्य को दोहराने लगता है. सजगता यदि एक क्षण के लिए भी न रहे तो मन दुर्बल हो जाता है. तमस की अधिकता के कारण भी मन सजग नहीं रह पाता। सजग मन ही सात्विक कर्मों में लगाता है. उसने सोचा, ये सब बातें उसे इस जन्म में कौन बताएगा, जिन्हें ज्ञात हैं वे भी मन को कहाँ साध पाते हैं ?

Wednesday, December 18, 2019

पीला अमलतास



जून आ गए हैं, दोपहर को योग अभ्यास करने के बाद बच्चे चित्र बना रहे थे, तभी वह आये. हमेशा की तरह फल व मेवे लाये हैं. कल शाम को जे कृष्णामूर्ति को सुना, उनके भीतर मन नाम की कोई स्थायी सत्ता नहीं है.  मन यानि सोचना, सोचना एक विचार है और सोचने वाला भी एक विचार है. वे शुद्ध, बुद्ध, मुक्त आत्मा हैं जिसे कुछ भी छू नहीं सकता. भीतर स्थिरता बढ़ गयी है. उन्होंने एक और बात भी कही. वे इमेज बनाते हैं अपनी भी और सामने वाले की भी. उस इमेज के कारण ही वे सुखी-दुखी होते रहे हैं. ध्यान से चीजों को जैसी वे हैं वैसी ही देखने की क्षमता भी उन्हें मिलती है. ध्यान के क्षण पूरे जीवन पर फ़ैल जाएँ तभी उसकी सार्थकता है. आज सुबह अमलतास के फोटो उतारे। ध्यान में अनोखा अनुभव हुआ, फूलों से लदा पीला वृक्ष और सुंदर पक्षी दिखे, चलते हुए जीवन्त ! सेंटर में फॉलोअप है पर वह नहीं जा रही है, इतवार को एक सौ आठ बार सूर्य नमस्कार का आयोजन हो रहा है. उसे नहीं लगता उसमें वह भाग ले सकती है. कल शाम क्लब में बच्चों के हिंदी कविता पाठ में निर्णायक के रूप में उसे निमन्त्रित किया है, कल की शाम वहीं बीतेगी, नई कॉटन साड़ी पहनने का अवसर और बच्चों के मुख से हिंदी की कविताएं सुनने का ! बाहर कहने को कितना कम है, वैसे ही भीतर भी यदि कोई सजग रहे तो कितना कम है. कल रात स्वप्न में सासु माँ के पैर छुए और मस्तक से हाथ लगाया, दो बार किया यह और तत्क्षण यह स्मरण भी हो आया कि यह स्वप्न है, पुराने हिसाब-किताब को चुकतू करने के लिए. आज दोपहर एक साधु और उसका एक शिष्य आये, कहने लगे नादिया से आये हैं, मन्दिर के लिए धन एकत्र कर रहे थे. भजन गा गाकर लोगों को सुनाते हैं, उनका भजन सुना, अच्छा लगा, श्रद्धा पूर्वक दक्षिणा दी. आज से पूर्व कितने साधुओं को कुछ दिया, कभी नहीं दिया, उन सभी से क्षमा स्वरूप यह आज का कृत्य था, परमात्मा भीतर एक व्यवस्था को जन्म दे रहे हैं. 

कल दिन भर व्यस्तता बनी रही. सुबह उठी तो गले में दर्द था, जीभ के अंत में दाहिनी तरफ एक उभार था. भ्रमण का पथ छोटा किया, नेति, गरारे आदि किये. स्कूल जाना था. वापसी में बंगाली सखी से मिलने गयी. उसने पिछले महीने हार्निया का ऑपरेशन करवाया है. पेट पर बेल्ट बाँधी हुई थी, तीन महीने इसी तरह रहना होगा. रोग इंसान को किस तरह विवश कर देता है. वहां से को ऑपरेटिव गयी, कुछ सामान बदलवाना था, उसके बाद अस्पताल जाना था, एक परिचिता की बेटी को देखने , जो बुखार के कारण वहाँ दो-तीन दिन से रह रही थी. शाम को क्लब में कविता प्रतियोगिता थी. आज नॉट आउट 102 है. दीदी से बात हुई, इस बार योग दिवस पर प्रधान मंत्री देहरादून जा रहे हैं. बिजली चली गयी तो वह बाहर बरामदे में आडवाणी जी की पुस्तक पढ़ने लगी, अटल जी का प्रसंग चल रहा है, आज सुना उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं है. 

आज सुबह आचार्य प्रद्युम्न जी को सुना. विवेक चूड़ामणि सुनते-सुनते ही ध्यान लग गया. वे देह नहीं हैं, मन व बुद्धि भी नहीं हैं, भाव भी नहीं हैं, वे साक्षी चैतन्य हैं. जब यह अनुभव ध्रुव हो जाता है, यह स्मृति सदा ही बनी रहती है. जीवन में सुख-दुःख तो आने ही वाले हैं, क्योंकि देह की अपनी सीमा है, मन व् बुद्धि पूर्व संस्कारों के कारण अथवा पूर्व कर्मों के उदित होने पर सुख-दुःख का अनुभव करेंगे ही, किन्तु सदा ही जो ब्रह्मा भाव में रहता है, वह इनसे अछूता रह जाता है.  उनके भीतर अग्नि ही वाणी रूप से विद्यमान है. जून ने ड्राइविंग स्कूल में बात की है, आज दोपहर को जाना है. कल से सम्भवतः कक्षा होगी. पिछले वर्ष तैरना सीखा था, इस वर्ष ड्राइविंग सीखना अच्छा ही है. 

सुबह उठे तो वर्षा हो रही थी. साढ़े आठ बजे ड्राइविंग के पहले दिन के अभ्यास के लिए गयी, जरा भी डर नहीं लगा. धीरे-धीरे क्लच से पैर उठाते हुए गाड़ी बढ़ाना अच्छा लग रहा था. वे पांच किमी की गति से चल रहे थे. लगभग दो किमी तक होकर आये. ड्राइवर के पास भी गाड़ी का कंट्रोल है, एक अन्य छात्रा भी थी जो पीछे बैठ गयी थी. एक महीने के अभ्यास के बाद वह उनकी अपनी कार पर अभ्यास कर सकती है. कल सुबह साढ़े छह बजे जाना है, थ्योरी की पहली क्लास है. दोपहर को आर्ट ऑफ़ लिविंग के विश्व सांस्कृतिक उत्सव पर ब्लॉग पर एक पोस्ट प्रकाशित की. बड़े भाई ने उन दिनों बहुत ख्याल रखा था. इस समय शाम के पांच बजे हैं, जून अभी आये नहीं हैं, शाम को उनकी एक सहकर्मी कुछ चर्चा के लिए आ रही है, रात्रि भोजन  भी उनके साथ करेगी. भोजन लगभग बन गया है. कुछ देर पहले एक बुजुर्ग परिचिता से फोन पर बात की, उन्होंने रोजा रखा है. कल ईद है, नन्हा सोनू के साथ उसके घर गया है. उसने ईद पर लिखी एक पुरानी कविता भी फेसबुक पर पोस्ट की है. 

Wednesday, August 21, 2019

दिव्य समाज का निर्माण



साढ़े आठ बजने को हैं रात्रि के. आज का दिन कुछ भिन्न था. सुबह एक स्वप्न देखकर उठी. एक विशाल मैदान में जहाँ ताज़ी खुदी हुई मिटटी है, हवा और आँधी के साथ उड़कर हजारों छोटे-छोटे बीज बिखर रहे हैं. पता नहीं कहाँ से आ रहे हैं वे बीज. तभी विचार आया, सृष्टि के आरम्भ में सम्भवतः ऐसे ही इतने वृक्ष व वनस्पतियां उगी होंगी. विचार आते ही स्वप्न कहीं खो गया. अद्भुत है यह सृष्टिकर्ता...प्रातः भ्रमण के समय चारों ओर उगे विविध वृक्षों और घास में उगे जंगली पौधों को देखकर एक अपनापन जगा महसूस हो रहा था. दूब घास पर कदम धरते ही भीतर एक अनोखी सिहरन को महसूस किया, यह अनुभव पहले भी कई बार उसे हुआ है, दूब घास अपनी ओर खींचती सी लगती है. उसमें कोई चुम्बकीय तत्व अवश्य है. प्रातःराश के बाद मृणाल ज्योति के कार्यक्रम में बोलने के लिए एक छोटा सा वक्तव्य लिखा. जाने से पहले भोजन बनाया. कार्यक्रम ग्यारह बजे आरम्भ हुआ. 'डाउन सिंड्रोम डे' के साथ 'आपदा प्रबन्धन' की ट्रेनिंग भी दी गयी. विभिन्न गाठें बांधनी सिखाई गयीं, पट्टी बांधना भी और स्ट्रेचर बनाना भी. आग बुझाने का प्रदर्शन भी किया गया. शाम की योग कक्षा में उपस्थिति कम थी. एक ने बताया कमर में दर्द है, दूसरी ने कहा, जुकाम है. मालिन कल नहीं आई थी, आज आई, बताया माली से झगड़ा हुआ था, कितना सह रही है वह दूसरी पत्नी बनकर.

आज 'विश्व जल दिवस' है. कुछ दिन पहले जब नारे लिखे थे, पढ़ा था इसके विषय में. असम में तो जल की कमी नहीं है, पर बंगलूरू में हो सकती है, जहाँ वे अगले वर्ष अक्तूबर में सदा के लिए रहने  जाने वाले हैं. जून को कल सुबह खाली पेट रक्तजाँच करानी है, सो रात्रि भोजन हो चुका है ताकि बारह घंटों का उपवास निश्चित हो सके. अगले महीने वे बंगलूरू जा रहे हैं, उनकी दूसरी आँख का भी कैट्रैक ऑपरेशन होना है. बारह दिन वे वहाँ रहेंगे. एक योग साधिका को वह कक्ष की चाबी देकर जाएगी, जिससे उसकी अनुपस्थिति में भी वे लोग नियमित साधना करती रहें. कुछ देर पूर्व नन्हे से बात हुई, वह आज सुबह ही देहली गया था, अब वापसी की यात्रा में है. ग्यारह बजे रात घर पहुंचेगा. पिछले एक हफ्ते से देर रात तक दफ्तर में काम करता रहा है, इस बार भी सप्ताहांत में भी व्यस्त रहेगा. आज सुबह नर्सरी स्कूल में मीटिंग थी, जिसमें अध्यापिकाओं को स्कूल के नियमों की पुस्तिका दिखाई गयी. प्रेसिडेंट के उसूल बहुत अच्छे हैं, बस थोड़ा ज्यादा बोलती हैं. शाम को फोन पर पता चला बुआ जी घर लौट आई हैं, पर दो-चार शब्द ही बोले गये उनसे. कल दोपहर बाद मृणाल ज्योति में मीटिंग है और शाम को एक मित्र परिवार को भोजन पर बुलाया है, अगले हफ्ते वे लोग सदा के लिए यहाँ से जा रहे हैं. कुछ वर्ष पूर्व भी एक बार उनका तबादला हुआ था, उस समय उनके संबंध पूर्ण सहज नहीं थे. हालात अलग थे तब, अब उस सखी में काफ़ी परिवर्तन आया है और उसे भी सुमति मिली है. उन्होंने अपने संस्कारों को पहचाना है और उनमें परिवर्तन आया है. परमात्मा की कृपा ही इसके पीछे काम कर रही है.

आज सुबह वे उठे तो वर्षा के आसार थे, रात को हो चुकी थी. टहल कर जैसे ही घर के निकट आ गये, बूँदें पड़नी शुरू हुईं. जून को आज भी रक्त जाँच के लिए जाना था, सो नाश्ते की जल्दी नहीं थी. आराम से साधना की. शाम के भोजन की तैयारी में न ध्यान हुआ न लेखन का कोई कार्य. दोपहर को तीन बजे तक सब तैयारी करके मीटिंग के लिए गयी. बारिश  में लडकों के छात्रावास का जो कमरा नष्ट हो गया था, उसे बनवाने का निर्णय हुआ, एक अन्य कमरे का फर्श भी ठीक करवाना है. उसे उन महिला को पत्र लिखना है, जिन्होंने स्कूल के लिए सहायता राशि देने की बात कही है. वापसी में एक टीचर ने स्कूल में उगे 'सब्जी वाले केले' दिए. योग कक्षा में एक बार फिर प्राणायाम का महत्व उसने बताया और सही तरीका भी. एक सप्ताह बाद 'दिव्य समाज का निर्माण' नामक आर्ट ऑफ़ लिविंग का एक कोर्स होने वाला है. कितना सही समय है, जून उसी दिन गोहाटी जा रहे हैं, उनकी कार भी खाली रहेगी और समय भी अपने हाथ में रहेगा. परमात्मा ने ही यह सुयोग रचा है. वह अकारण दयालु है. वह आज ही ऑन लाइन रजिस्ट्रेशन के लिए जून से कहेगी. पिछली बार यह कोर्स करने गोहाटी गयी थी पर प्रतिभागियों की संख्या कम होने के कारण कोर्स हुआ ही नहीं. कोर्स से एक दिन पहले महिला क्लब की मीटिंग है, तीन महिलाओं का विदाई समारोह, उनके लिए कविताएँ लिखी हैं उसने. मित्र परिवार के साथ रात्रि भोज ठीक रहा, उनका सामान पैक हो रहा है.