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Saturday, September 21, 2019

नंदी हिल पर एक सुबह



आज बैसाखी है. बाहर तेज धूप है. कुछ देर में वे आश्रम जायेंगे, उससे पूर्व बाजार, जहाँ जून को थोड़ा काम है. घर का सामान खरीदने की जिम्मेदारी उन्हीं की है, उन्होंने संभाली हुई है. आज सुबह देर से उठे वे, कारण कल रात देर से सोये. कल शाम डेंटिस्ट के यहाँ पहुँचे तो क्लिनिक पर कोई नहीं था. आठ बजे तक का समय सामने की दुकान पर काफ़ी पीकर व स्नैप सीड पर फोटो ठीक करके बिताया. कल दोपहर को दोनों मित्र परिवार आये थे. उन्हें पुलाव खिलाया, पुरानी यादें ताजा कीं, भविष्य के लिए योजनायें बनायीं और दो घंटे का समय कैसे बीत गया, पता ही नहीं चला. असमिया सखी तीन दिन बाद अपने पुत्र के यहाँ जा रही है, जिसके यहाँ सन्तान का जन्म होने वाला है. आज सुबह व कल शाम को ओशो पर बनी एक डॉक्युमेंट्री देखी. उनके आश्रम में क्या चल रहा था, वह उससे अनभिज्ञ तो नहीं रहे होंगे. जीवन विरोधाभासों से भरा है. इंसान जब अपने भीतर के पशु को पूरी तरह से देख लेगा, तभी उसके भीतर नये मानव का जन्म होगा, शायद इसीलिए ऐसा करते रहें हों वे लोग.

आज सुबह वे चार बजे से भी पहले उठे. कल शाम को ही नंदी हिल जाने का कार्यक्रम नन्हे ने बनाया था. नहा-धोकर वे तैयार हुए और पांच बजे उसके मित्र की कार लेकर निकल पड़े. रास्ते में ही लालिमा दिखाई दी, अर्थात सूर्योदय तो हो चुका था. लगभग डेढ़-पौने दो घंटे की यात्रा के बाद सुंदर पर्वत आरंभ हो गये. घुमावदार चढ़ाई पर कार के टायर घिसने लगे और एक गंध हवा में भर गयी. सैकड़ों लोग वहाँ पहुँच चुके थे. मौसम ठंडा था. बादल, धुंध और कोहरे के कारण कुछ दिखाई नहीं दे रहा था. पेड़ों से गिरती पानी की बूंदों ने सडकों को गीला कर दिया था. हवा ठंडी थी. उन्होंने जैकेट पहन लिए थे और सिर भी ढक लिए थे. ऊपर कई रेस्तरां थे. एक जगह बैठकर चाय पी और एक प्लेट सांबर बड़ा में से सबने आधा-आधा बड़ा खाया, जिसका स्वाद अच्छा था, क्योंकि यह सुबह का पहला भोजन था. जगह-जगह वाचिंग टावर बने थे. जिसपर चढ़कर सूर्योदय तथा नीचे की घाटी का दृश्य देखा जा सकता था. थोड़ी देर बाद वहाँ बन्दर आने लगे, जो आदमियों को देखकर जरा भी नहीं डर रहे थे. कुछ समय बिताकर वे वापस आये तो पता चला कि गाड़ी का एक टायर पंक्चर हो गया है. रास्ते में पंक्चर ठीक कराया, बीस मिनट लगे, वापसी में परांठे की एक प्रसिद्ध दुकान पर नाश्ता किया, आलू, मूली, गोभी और पिज़ा परांठे का नाश्ता !

पौने दो बजे हैं दोपहर के. आज ओशो की फिल्म का अंतिम भाग भी देख लिया. उन जैसे व्यक्ति दुनिया में हलचल मचाने के लिए ही आते हैं. वे सोये हुए लोगों के भीतर क्रांति के जागरण का बीज बोते हैं. कल उन्हें वापस जाना है, पैकिंग लगभग हो गयी है. आज बीहू है, यहाँ हर दिन ही उत्सव है. नन्हा ढेर सारा भोजन ऑन लाइन मंगवा लेता है. सोनू ने केक बनाया है. जून ने आम काटे और कल नंदी हिल से वापसी की यात्रा में लिए काले अंगूर धोकर खिलाये. शाम को नन्हे के एक परिचित के यहाँ जाना है. बनारस के रहने वाले हैं. सुबह उसका एक सहकर्मी परिवार सहित आया था. नीचे बच्चों के तैरने की आवाजें आ रही हैं. सोसाइटी के तरणताल पर दिन भर रौनक लगी रहती है.

आज वे घर वापस लौट आये हैं. सुबह चार बजे से थोड़ा पूर्व ही उठे. साढ़े पांच बजे एयरपोर्ट के लिए रवाना हुए और साढ़े छह बजे पहुँच गये. कल शाम नन्हा और सोनू ढेर सारा सामान ले आये साथ ले जाने के लिए. अंजीर की बर्फी के रोल स्वादिष्ट थे और रिबन पकौड़ा भी. साढ़े ग्यारह बजे कोलकाता पहुँचे अगली फ्लाईट के लिए. हिन्दू, टाइम्स ऑफ़ इंडिया पढ़ते हुए समय बीत गया. साढ़े तीन बजे वे घर पहुँच गये. ढेर सारे फूल खिले हैं बगीचे में. सामने वाला गुलाबी फूलों वाला पेड़ फूलों से पूरा भर गया है. घर आकर सफाई आदि करते-कराते सात बज गये. नैनी अपनी देवरानी को ले आई, माली की दोनों पत्नियों को भी बुला लिया, चारों ने मिलकर सफाई की व कपड़े धोये.     

Sunday, November 6, 2016

आंधी-पानी और आंवले


नन्हा उठा और उससे पूछने लगा, क्या सुबह उसने उन्हें बहुत परेशान किया ? उसके जीवन में उनका क्या स्थान है, यह तो वही जानता है, पर उनके जीवन की वह आशा है, जब उसने बुद्धा की कहानी भेजी तब वे समझे थे कि वह भी सत्य की खोज में लगा है, सजगता इसके लिए पहली आवश्यकता है पर मादक द्रव्य तो चेतन मन को ही अचेत कर देता है, कुंद कर देता है, सोचने-समझने की शक्ति को ही नष्ट कर देता है. इस समय वह काम कर रहा है, अभी भोजन भी नहीं किया है, रात को जो फोटो खींचे उन्हें देखकर उसे लगता है, क्यों आतुर है आज की पीढ़ी इस जहर को अपने भीतर उतारने के लिए. बड़े शहरों का असर है, काम का तनाव है या पता नहीं क्या है. वे समझने में असमर्थ हैं, पर उनके पास एक सम्पत्ति है, विश्वास की सम्पत्ति, परमात्मा पर अखंड विश्वास. वह परमात्मा नन्हे के साथ भी है, वही उसे सन्मार्ग पर ले जाएगा !   

उस दिन जो स्वप्न देखा था वह आज की घटना की ओर इंगित कर रहा था. अब भी कितना स्पष्ट है, नन्हा दौड़ता हुआ आ रहा है, साथ ही एक भद्दा सा पशु बड़े आकार का, वह उसे कहती है बचो, बचो.. पर वे दोनों भिड़ जाते हैं, नन्हा भाग रहा है रेलिंग पर आ गया है, आगे कुआँ पीछे खाई वाली स्थिति है. नीचे पानी से भरा एक ड्रम है वह कूद जाता है. वह ऊपर से चिल्ला रही है, नन्हा, नन्हा..आखिरी आवाज तक जून भी आ जाते हैं, वे दोनों ऊपर से देखते हैं, नन्हा पानी में है. तभी नींद खुल जाती है. आज उसने कहा कि माता-पिता होने के नाते उन्होंने उसे कुछ नहीं बताया जीवन के बारे में. कैसे लोग अच्छे होते हैं, कैसे बुरे होते हैं. वह जिस संगति में है या कालेज में था..उसी का परिणाम है कि..बच्चों को माँ-पिता से शिकायतें होती ही हैं और आज के माहौल में, इस उम्र में यह सब करना भी स्वाभाविक है. आज वातावरण ही ऐसा दूषित हो गया है. लेकिन उन्हें उस पर भरोसा था, उसकी बुद्धिमता पर, उसके दिल पर, उसके विचारों पर, उसमें अवश्य ठेस लगी है, पर हर व्यक्ति अपना भाग्य अपने साथ लेकर आता है. गुण ही गुणों में बरत रहे हैं.

आज बैसाखी है. कल रात ही उसने ब्लॉग पर कल दोपहर लिखी छोटी सी कविता पोस्ट की थी. मौसम खुशगवार है, ठंडी हवा और गगन पर बादल..वह बाहर झूले पर बैठी है. रात को आंधी-पानी के कारण ढेरों आंवले जमीन पर गिर गये थे, जिन्हें पिताजी ने उठाकर इकट्ठा कर लिया है और अब अख़बार पढ़ रहे हैं. जून बाजार जाने के लिए तैयार हैं. नन्हा अपना काम कर रहा है, माँ अपनी कुर्सी रोज की तरह बैठी हैं. नैनी आज देर से आयी, अभी तक काम कर रही है. कल वह हायर सेकेंडरी स्कल गयी, मृणाल ज्योति के बच्चों ने वहाँ बीहू नृत्य प्रस्तुत किया. दो दिन बाद वे उनके यहाँ आयेंगे. नन्हे को उसने बताया कि उन सबके भीतर ऊर्जा का स्रोत है, जो कभी समाप्त नहीं होता जो..  


Friday, March 14, 2014

हनुमान मन्दिर


उसने सोचा, वक्त आ गया है कि कुछ पल बैठकर मन का लेखा-जोखा किया जाये, मन जो इस वक्त शांत है. कल रात को जीजीएम के संदेश का अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद करते समय आने वाली दिक्कतों से थोड़ा परेशान हो गया था, पर वक्त पर पूरा करके दे सकी इसका श्रेय भी इसी मन को है. जून होते तो रात साढ़े दस बजे तक बैठकर उसे काम नहीं करने देते शायद तब इतनी देर भी नहीं लगती, उसने दो-तीन तकनीकी शब्दों का हिंदी अनुवाद एक मित्र के यहाँ फोन करके पूछा, बाद में पता चला वे लोग पहले पैकिंग करने के कारण देर से भोजन कर रहे थे और उन्हें उठकर फोन रिसीव करना पड़ा. उसे लगा, उन्हें अपने परिचितों को taken for granted नहीं लेना चाहिए. खैर जो हुआ सो हुआ ! कल दोपहर उड़िया पड़ोसिन के साथ भोजन अच्छा लगा, उस सखी की तरह इसने भी उत्तर भारतीय खाना बनाया था, राजमा वाली काली दाल, मिश्रित सब्जी और पनीर दो प्याजा तथा कढ़ी. नन्हा जिस तरह पांच-साथ मिनट में कपड़े बदल कर वहाँ आ गया, देखकर अच्छा लगा. नये स्कूल में पढ़ने जाने से वह होशियार हो गया है स्मार्ट भी. उसने समय देखा, मात्र दो घंटे बचे हैं, समय का नियोजन यदि करे तो आधा घंटा अभ्यास कर सकती है. कल घर से भी फोन आया, उन्होंने भी उनके अकेलेपन को दूर करने के लिए फोन किया, लोगों को उनकी परवाह है, जानकर ख़ुशी होती है.

आज सुबह भी देखा तो पूसी बरामदे में रखी रॉकिंग चेयर पर सोयी थी, रात को किसी वक्त जब जाली से कूद कर आई होगी तो अपने पंजों के दबाव से एक गमला भी उल्टा किया होगा, उसे देखकर क्रोध आया और उसे डांट के भगा दिया पर मन में यह ख्याल भी बना हुआ है कि मूक जानवर भला क्या जाने कि उसके किस काम से कोई खफा है. नन्हे के पैर में कल रात अचानक cramp हो गया, घुटने के पास से दांया पैर मुड़ ही नहीं रहा था, दर्द था, फिर बाद में कुछ राहत मिली तो सो गया पर सुबह तैयार होकर जब स्कूल के लिए निकला तो दर्द फिर आ गया, मना करने पर भी स्कूल तो गया है क्योंकि अगले पांच दिन स्कूल बंद है सो आज जाना ठीक ही था, कल उसने debate के लिए कुछ points लिखवाये पर कापी ले जाना भूल गया. कल रात स्वप्न में जून को देखा, अब यूँ भी अकेले रहना खलने लगा है.

आज जून आने वाले हैं, सो नन्हा और वह उनकी प्रतीक्षा कर रहे हैं, इतवार का सारा कार्य हो गया है. आज सुबह से वर्षा हो रही है, अलार्म भी सुनायी नहीं दिया, कल एक मित्र परिवार के साथ वे हनुमान मन्दिर गये, उनके कारण कभी-कभी मन्दिरों के दर्शन हो जाते हैं, उसे ध्यान के सिवा सब बचकाना लग रहा था पर घर पर अकेले रहने से बेहतर था. ‘हनुमान जयंती’ के उपलक्ष में एक जगह हनुमान पूजा भी देखी.

कल दोपहर दो बजे जून आ गये, साथ-साथ भोजन किया, घर जैसे भर गया. उनके लाये ढेर सारे सामानों से और उनकी बातचीत से. फिर शाम को बाजार गये. नन्हे की कुछ किताबें लेने जब उसका एक मित्र आया तो उसने कुछ नानुकुर की पर नन्हे ने समझाया कि उसे इन किताबों की कोई जरूरत नहीं है, बच्चे कभी-कभी बड़ों को राह पर ले आते हैं. उसका मन संवेदनशील नहीं है, पूसी को भगाया फिर कभी-कभी बेवजह पत्ते भी तोड़ देती है. यूँ ही झुझला जाती है पर जानती है कि यह सब वह कर रही है और ऐसा करना उचित नहीं है लेकिन क्यों कि ऐसा करने से कोई विशेष दुःख उसे नहीं उठाना पड़ता सो इससे परहेज नहीं करती. आज ध्यान में वह अपने विचारों को देख पाई कभी धीरे-धीरे कभी एक के बाद एक आते जा रहे विचार, मन एक पल भी खाली नहीं बैठता, आज जून शायद देर से आयेंगे straight शिफ्ट है. आज बैसाखी है पर सुबह से उत्सव जैसी कोई बात नहीं हुई. यदि मन स्थिरता से युक्त न हो तब उत्सव भी अर्थहीन हो जाता है.



Tuesday, April 9, 2013

बैसाखी और बीहू



आज बैसाखी है, बचपन में इस दिन दादीजी सूखे मेवों, मखानों, व पतासों के हार पहनातीं थीं सभी बच्चों को. सुबह टीवी पर बैसाखी का अच्छा सा रंगारंग कार्यक्रम देखा. जून को परसों शाम से हल्का ज्वर हो गया है, कल सुबह उतर गया था पर दोपहर को फिर हो गया. आज अभी तक वह दफ्तर से आए नहीं हैं, कल से बीहू का अवकाश है, आज सम्भव है स्ट्रेट शिफ्ट हो, यानि बिना लंच ब्रेक के. घर जाने में मात्र दस दिन रह गए हैं, अभी काफी काम है सिलाई का और घर भी पिछले दिनों नन्हे की परीक्षा के कारण पूरी तरह से साफ नहीं हो पा रहा था. कल उन्हें दोपहर का खाना बाहर खाना है, ‘बीहू भोज’, उसे बस घर से राजमा बनाकर ले जाने हैं. मिलजुल कर रहना, त्योहार मनाना कितना अच्छा लगता है, उसकी पुरानी पड़ोसिन का फोन भी आया था, शाम को वे लोग आएंगे. नन्हा पड़ोस के दोस्त के यहाँ गया है, आजकल छुट्टियाँ हैं वह बेहद खुश रहता है. आज मौसम भी मेहरबान है, लगता है आस-पास ही कहीं वर्षा हुई है, हवा में ठंडक है. उसे जून की याद आ रही है, ऐसा क्यों है, पर ऐसा है कि उनकी तबियत ढीली होने पर उनका ध्यान बना रहता है, उनकी देखभाल करने का मन होता है. उनका उतरा हुआ और उदास चेहरा उसे सबसे ज्यादा उदास करने वाली चीजों में से है.

  परसों उन्हें जाना है, अभी तक पैकिंग शुरू नहीं की है, पिछले दिनों दो बार जून और उसके बीच गलतफहमी हो गयी, लेकिन उसके बाद बादल छंट गए और प्यार का सूरज पहले से ज्यादा चमकदार होकर निकल आया है. जून को परेशान करना ...उसकी यह कभी मंशा नहीं हो सकती पर हालात ही ऐसे बनते चले जाते हैं कि .. उस दिन जून को उसका लेडीज क्लब में टीटी खेलना पसंद नहीं आया, उसने नाम दे दिया था सो जाना जरूरी था, पर ऐसे उदास मन से खेलने से वह हार गयी, उसकी पार्टनर जरूर नूना से नाराज होगी, उसे अच्छा न लगा हो शायद उसके साथ खेलना. कल शाम को उसकी पुरानी पड़ोसिन आई थी, बल्कि वे उसे ले आये थे, उसकी बातें सुनकर लगता है अभी बचपना गया नहीं है, कहीं न कहीं इंसान बूढ़ा होने तक बच्चा बना रहता है.
 आज मौसम फिर ठंडा है, कल रात वर्षा हुई, चारों ओर हरियाली ही हरियाली दिखाई देती है घर से बाहर निकलते ही. कल सुबह से ही उसकी गर्दन में दायीं तरफ हल्का खिंचाव व दर्द महसूस हो रहा है, अभी-अभी जून का फोन आया है, वह सवा दस बजे ले जायेंगे उसे अस्पताल. कल सफर करना है इसलिए कुछ विशेष चिंता हो रही है. ईश्वर उसके साथ है..हर छोटी-बड़ी विपत्ति में ईश्वर ही हमेशा मदद करता है सदा सर्वदा... सुबह उसकी असमिया सखी का फोन आया, फिर तेलगु सखी का और फिर पुरानी पड़ोसिन का, जिसने शाम को नाश्ते पर बुलाया है. उसने मना किया पर ज्यादा मना करते हुए भी अच्छा नहीं लगता, वक्त-वक्त की बात है...इसलिए तो विद्वानों ने कहा है – सुखेदुखे समेकृत्वा..परिस्थिति कैसी भी हो मन का संयम, दृढ़ता, धीरता व आस्था नहीं खोनी चाहिए.

Saturday, September 15, 2012

उपलों का धुआँ



सुबह के साढ़े छह बजे हैं, कुछ देर पहले वह नन्हे को उठाकर ऊपर ले आयी है, नीचे का कमरा इतना गर्म था कि उसे वहाँ छोड़ने का उसका मन नहीं हुआ. उसकी बुआ को भी उठाकर आयी थी, पर वह अभी तक सोयी है. कल जून के दो पत्र मिले, उसने जवाब भी दे दिये. हँसेगा वह पढ़कर शायद दो पल के लिए उदास भी हो जायेगा. पर उसकी कुछ बातें उसे अच्छी नहीं लगीं, एक तो कुक के बनाये खाने की तारीफ करना और दूसरा यह कहना कि वह उसे सबसे अधिक नहीं, सबके समान ही चाहता है. वैसे उसे इन बातों पर ध्यान देने की आवश्यकता नहीं थी, उनके सम्बन्ध को अब तक इतना परिपक्व तो हो जाना चाहिए कि... या उसे भी अपने को इतना बड़ा तो समझना चाहिए. संभवतः विवाह सम्बन्ध एक कभी न पुराना होने वाला रिश्ता है, नित नूतन. आज भी उसका किसी और की तारीफ करना उसे उतना ही दंश देता है जितना विवाह के तुरंत बाद. उसके पत्र से यह भी पता नहीं चला कि वह उसकी कमी महसूस करता है या यह लिखकर वह अपने को कमजोर नहीं कहना चाहता. उसे आश्चर्य हुआ, एक और तो वह उसे इतना प्यार करने का दम भरती है, दूसरी और उसके ही विरुद्ध सोचती है, उससे नाराज होती है, क्या यह भी प्यार है या यह है उसका अहम्,  प्यार तो देने का नाम है, मांगने का नहीं, लेने का भी नहीं. वह खुश रहे, स्वस्थ रहे, बस यही उसका अभीष्ट होना चाहिए, उसके स्नेह की धूप उसे चारों और से घेरे रहे, उसका प्यार पहले इतना सबल तो हो कि जरूरत पड़ने पर वह उसका आश्रय ले सके. कहीं उसकी इस नुक्ताचीनी से धीरे-धीरे उससे दूर न हो जाये, जैसे कि अब उसे लगता है.

कल का सा समय है, आज सोनू अपने आप ही ऊपर आ गया है, उसे भी उसकी तरह गर्मी व घुटन के कारण नीचे नींद नहीं आ रही थी. कल बैसाखी थी, समाचार सुनने से ज्ञात हुआ, जून का दफ्तर भी बंद होगा, कल उसका पत्र नहीं आया, बड़ी भाभी व ननद के पत्र आये. आजकल वे लोग सुबह भोजन जल्दी कर लेते हैं, इससे दिन में पढ़ने का कुछ समय मिल जाता है. आज रामनवमी है. बचपन में इन त्योहारों का विशेष अर्थ होता था, अब तो समाचार की लाइन बन कर रह गए हैं. कल रात रोज की तरह ग्यारह बजे सोये और दस मिनट बाद ही बिजली गुल हो गयी, और पडोस के घर से उपलों का धुआँ नाक में भरने लगा. पंखे के बिना एक तो यूँ ही कमरे में इतनी घुटन रहती है दूसरे धुएँ ने एकदम परेशान कर दिया. सोनू को लेकर ऊपर कमरे में आ गयी, गर्मी तो यहाँ भी उतनी ही थी पर धुआँ नहीं था, कुछ देर बाद ननद भी आ गयी. कहने लगी गर्मियों में रात-रात भर लाइट गायब रहना यहाँ आम बात है. कैसे बीतेंगे ये महीने..यूँ और तो कोई परेशानी नहीं है. पिता व ननद सभी बहुत अच्छे हैं, स्नेह से भरे, हमेशा दूसरों के काम आने वाले.  नन्हे को भी बहुत प्यार मिलता है. जून की कमी लगती है, अगर उसका खत नियमित आता रहे तो वह भी न लगे. इस हफ्ते उसका सिर्फ एक खत आया है.

उसका मन अशांत है, कारण उसका पत्र नहीं आया है. वह जानता है कि उसे कितनी प्रतीक्षा रहती है उसके पत्रों की. कौन जाने क्या हुआ है, कुछ भी हो यह तो स्पष्ट है कि उसके मन की शान्ति, सुख सभी चले गए हैं. यूँ उसे मालूम है कि मन के सुख के लिए दूसरों पर अवलम्बित होना अपनी कमजोरी है, पर जून दूसरा कहाँ है. अपने ही परायों से ज्यादा दुःख देते हैं क्योंकि वही तो सुख देते हैं. सोनू अस्वस्थ है, कल डॉ साहब आये  थे, दवा बता कर गए हैं, कितना दुबला हो गया है.

एक और इतवार ! पिछली रात देवर का एक मित्र माँ-पिताजी से मिलने आया. कल दोपहर के भोजन के समय नन्हें ने निर्दोष भाव से पूछा, चाचा कहाँ हैं, उसकी बात सुनकर अचानक वे सभी चुप हो गए. इसका अर्थ हुआ कि छोटू भी उसे याद करता है. वह दादा-दादी को व्यस्त रखता है, लेकिन कभी-कभी उसे बहुत परेशान करता है.