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Monday, July 6, 2020

ठंड से सिकुड़े फूल


शाम के सवा चार बजे हैं, बगीचे में झूले पर बैठकर मन्द हवा के झोंको और चिड़ियों की चहकार के मध्य लिखने का अवसर कभी-कभी ही मिलता है. जून अभी तक आये नहीं हैं, उनका रात्रि भोजन भी बाहर ही होने वाला है सो किचन में भी कोई काम नहीं है. दोपहर को मोदी जी को सुना जब वह मजदूरों के लिए पेंशन स्कीम की योजना का वर्णन दे रहे थे. उनके दिल में वंचितों के लिए बहुत दर्द है. देश के हर व्यक्ति को वह अपने परिवार का एक अंग ही मानते हैं. वह उस राजा की तरह हैं जो अपनी प्रजा से बहुत प्रेम करता है. अगले चुनावों में बीजेपी ही जीतने वाली है. इसमें किसी को कोई शक नहीं रहना चाहिए. जन औषधि के कारण देश में सस्ती दवाएं मिलने लगी हैं. नए एम्स भी बन रहे हैं. प्रधानमंत्री रोज ही नई-नई योजनाएं आरंभ कर रहे हैं. सस्ती स्वास्थ्य सुविधाएँ देश में मिल रही हैं. पुलवामा में हुए आतंकी हमले पर भी विपक्ष संदेह करने से बाज नहीं आ रहा है. पाकिस्तान में हुई एयर स्ट्राइक पर तो सवाल उठ ही रहे थे. पिछले दिनों काफी विचारकों को सुना. भारत-पाकिस्तान के बिगड़ते हुए संबंधों का कारण इस्लामिक कट्टरवाद ही है. यह किसी भी मुल्क को आगे बढ़ने से रोकता है. महीने के तीसरे सप्ताह में प्रेसिडेंट का फेयरवेल है, जिसमें  योग साधिकाओं को श्लोक पाठ प्रस्तुत करना है आज से वे रिहर्सल करेंगी. 

संध्या पूर्व का समय है, अभी अभी वे लॉन में टहलकर आये हैं. मौसम आज खुला है, लाल डूबता सूरज पेड़ों के पीछे से झाँक रहा था कुछ समय पूर्व. घास भीगी थी. एजेलिया का पौधा मेजेंटा फूलों से भर गया है जो अपनी ओर खींचता है. आज सुबह नैनी का पति अपने पिता को स्थानीय अस्पताल ले गया. पता चला, गले में कैंसर के कारण डिब्रूगढ़ मेडिकल कालेज ले जाना होगा. उसने ईश्वर से उनके लिए प्रार्थना की. दोपहर को मृणाल ज्योति गयी, एक अध्यापिका का विदाई भोज था, वह बहुत रो रही थी. इंसान का दिल बहुत कोमल होता है वह नफरत को सह लेगा पर प्रेम में पिघल जाता है. क्लब के एक सिलाई-कढ़ाई प्रोजेक्ट में एक सदस्या से मिली, वह बहुत ऊर्जावान है. उसने एक लकड़ी के शोकेस में प्रोजेक्ट का मोटिफ व अन्य नमूने लगाए हैं. आज सुबह उठने से पूर्व मन में एक मंथन चल रहा था, आत्मिक शक्ति को बढ़ाने के लिए क्या करना चाहिए. अपने सुख को किसी वस्तु, व्यक्ति या परिस्थिति पर आश्रित नहीं रखना चाहिए, सबसे पहले तो यही संदेश मिला. साधक को हर पल सजग रहने की आवश्यकता है. परमात्मा सदा उसके साथ है, वह उसे स्वयं से दूर जाने नहीं देता. वह अकारण दयालु है, सखा है, सुहृद है. राजनीति के चक्करों से भी साधक को दूर ही रहना चाहिए. देश में चुनाव होने वाले हैं, बहुत तरह के संदेश दिए जा रहे हैं. जो भी होगा, भला होगा, इस विश्वास के साथ अपने सहज कर्मों को करते जाना है. परसों महिला दिवस है. महिलाएं आज किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं. सेना हो या सिविल दोनों में ही महिलाएं आगे बढ़ रही हैं. नए घर में पेटिंग का काम आरंभ हो गया है. 

उस पुरानी डायरी में पढ़ा, दादाजी ने अपनी बहन के बारे में बताया, अभी तक वह उनसे नाराज हैं. किस तरह उन्होंने अपने पति के मरने पर उन्होंने दूसरा विवाह किया तो लोगों ने इन्हें कहा, गोली चला दो; पर उनके पिता जी ने कहा कि नहीं, जान लेने से कोई फायदा नहीं, ऐसी घटनाएं और भी हो रही हैं. पिता समझदार निकले. सात भाइयों में से एक को फाँसी भी हो जाती तो भाइयों को दुःख न होता. दादाजी ने एक और मजेदार बात बताई, दादी जी को देखने के लिए नाइन को एक रुपया दिया था उस जमाने में. 

आगे लिखा था, तुम्हें जिसके प्रति आस्था हो उसके प्रति ईमानदार रहो, पर अपनी भूलों पर... उनके लिए दुखी होने की आवश्यकता नहीं है, वे अतीत की वस्तुएं हैं, मृत हैं, वर्तमान में तुम क्या हो, महत्व इस बात का है और इस बात का भी कि भविष्य में तुम क्या होगी ! यदि कोई तुम्हें उन बातों का स्मरण भी दिलाये तो चुपचाप सुन लो... न प्रतिवाद न पश्चाताप, वे उन दिनों के फूल थे और ये आज के फूल हैं, फिर इससे क्या अंतर पड़ता है कि फूल किस रंग के हैं. सर्दी के कारण सारे गेंदे के फूल अपनी आकृति खो बैठे हैं तो क्या वे फूल नहीं हैं ? सो यह बिलकुल व्यर्थ की बात है कि पिछले वर्ष तुमने खिचड़ी खायी थी या पुलाव ! 

अवश्य कुछ हुआ होगा पर उसके बारे में कुछ नहीं लिखा है.