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Friday, April 11, 2014

अंकल चिप्स कहाँ हैं


कल नन्हा स्कूल से आया तो प्रसन्न था. वे बहुत दिनों बाद शाम को घर से निकले. एक मित्र के यहाँ भी जाना था, उनके बेटे की जीभ घर में खेलते वक्त गिर जाने से कट गयी थी. रात की तेज वर्षा के कारण मौसम आज ठंडा है, उसने खिड़की से देखा, माली सिल्विया और गुलदाउदी के पौधों के लिए क्यारी बना रहा है. कल्पना में उसने खिलते हुए फूलों को देखा और एक मुस्कान अंतर को भर गयी. कल दोपहर उसकी पड़ोसिन आई थी, आज सम्भवतः फिर आयेगी, उसका मिठाई तोड़ना, गिलास में हाथ डालकर धोना, बिना बात ही हँसना और...उसकी ग्रामीण बैक ग्राउंड का परिचायक लगा, खैर...अपना-अपना स्वभाव है. कल रात जून ने अपनी बचत का रिकार्ड उससे डायरी में लिखवाया, उसके पूर्व शाम को बाहर जाते समय साड़ी पहनने पर (एक पुरानी सिंथेटिक साड़ी) जून और नन्हे ने उसे जब टोका तो उसने व्यक्ति की आजादी पर छोटा सा भाषण सुना दिया फिर रात को जब नन्हे को जून ने अपने कमरे में जाने को कहा तो वह चुप हो गया और सोने जाने तक कोई बात नहीं की, नूना को अच्छा नहीं लगा और फिर बाल मनोविज्ञान पर कुछ बातें उसने जून को बतायीं, वह चुपचाप सुनते रहे, नन्हे का उदास हो जाना उन्हें भी खलता है सुबह उसके स्कूल जाने तक वह बहुत प्यार से उससे बातें करते रहे, प्यार करना ज्यादा आसन है बजाय गुस्सा करने के क्योंकि गुस्सा करने वाला खुद ज्यादा परेशान होता है.

पिछले दो दिन कुछ नहीं लिख सकी, शनि की सुबह कपड़ों की सिलाई (पुराने कपड़ों की) में व्यस्त रही, इतवार का दिन तो कई और कामों में कैसे गुजर जाता है पता ही नहीं चलता. कल रात बेहद गर्मी थी, उसके सर में हल्का दर्द हुआ अभी भी हल्का-हल्का सा भारी है सर. ptv की एंकर ने अपना ख्याल रखने व मुस्कुराते रहने की हिदायत के साथ अपना कार्यक्रम समाप्त किया है. वहाँ शरीयत का कानून लागू होने से ptv के कार्यक्रमों पर अभी तक तो कोई असर नहीं पड़ा है. उसने शाम को मीटिंग में साथ जाने के लिए पड़ोसिन से बात की, मोज़े बन गये हैं यह भी उस सखी को बताया. कल वे बाजार गये, नैनी के लिए साड़ी खरीदी वायलेट रंग की फिर कादम्बिनी ली, प्रवेश में अपनी कुछ कविताएँ भेजना चाहती है.

Today is first day of Sept ! Jun went to Moran this morning to come back at 6 in the evening. She is feeling a sense of freedom to do any thing at any time till Nanha comes from school. There are so many things to do- music, letter writing, TV, stitching,  exercise and cooking, also she can do some new things like painting if time permits. she  learned two beautiful lessons from the two books which she reads these days after bath. One is – Don’t expect gratitude, it is rare like rose and ingratitude is like weed, it is everywhere. Second is – Do whatever you like with whole heart otherwise not do it. Yesterday’s meeting was successful . Dance drama cultivated by DR Sharma  was very good and she liked the tea also. Today she talked to ma-papa, they are going to sister’s place this month. She will be meeting them in year end.


आज सुबह अलार्म बजते ही जून रोज की तरह फौरन उठ गये और बहुत पहले जैसे वह करते थे फिर पांच मिनट लेटे रहकर उठे. वह खुद भी उठकर बिस्तर के पैताने पर बैठ गयी यूँ ही, रात को देखे सपनों का जायजा लेने, फिर उठी तो ब्रश करने के बजाय बाथरूम में ही दिमाग में आई इधर-उधर की बातों को सोचती रही. सुबह सोकर उठो तो दिमाग एकदम खाली होना चाहिए, साफ-स्वच्छ, पर नहीं, बीती रात की कोई बात पता नहीं क्यों किसी छेद से घुसकर कुरेदती रहेगी फिर एक बार जो ब्रश किया तो सुबह के कामों में व्यस्त हो गयी, बस सुबह के वे ५-७ मिनट यूँ ही गंवा दिए. कल से इस बात का ध्यान रखेगी, फिर जून ने जब कहा कि कल वह ऑफिस की चाबी ले जाना भूल गये तो बजाय उस बात को सुन लेने के उन्हें नसीहत देने लगी जबकि इसकी कोई जरूरत नहीं थी, नन्हे के स्कूल चले जाने के बाद जून जब तक कार की प्रतीक्षा कर रहे थे वह वहीं बैठी रही अपना कर्त्तव्य समझकर, तभी उसमें स्नेह नहीं था, सो उन्हें कह भी दिया कि उसका काम छूट रहा है. togetherness की फीलिंग नहीं थी जिसमें मात्र साथ रहना ही भला लगता है, ड्यूटी समझ के कोई किसी का ख्याल रखे तो उसे विवशता ही कहा जायेगा न, सो अभी सुबह के मात्र पौने नौ ही हुए हैं और दिल है कि इतनी सारी खताएं कर चुका है या वह करवा चुकी है. आज शाम को एक सखी आ रही है उसकी माँ भी, जो उसी की तरह दुबली-पतली ही होंगी गोरी और नाजुक या...? नन्हा आजकल स्वस्थ व खुश है इतवार की शाम वह फिर रूठ गया था क्योंकि अंकल चिप्स नहीं लाकर दिए थे ! 

Tuesday, April 8, 2014

गैराज की सफाई


कल दोपहर पेड़ काटने वाला आदमी काम बीच में ही छोडकर चला गया था, बिना खाए-पिए लगातार छह घंटे वह काम करता रहा. यही तो है भारत का आम आदमी, मजदूर और किसान, इनके विकास के लिए सरकार करोड़ों रूपये खर्च करती है पर इनकी हालत वही रहती है. कल शाम को लाइब्रेरी में ‘२१सवीं सदी में प्रवेश’ पर एक किताब देखी, दुनिया में ऐसे लोग भी हैं जो सारी सुख-सुविधाओं के बीच रहकर भी ग्लोब के दूसरे सिरे पर रहने वाले एक गरीब किसान की पीड़ा का अनुभव कर सकते हैं, यह दुनिया ऐसे ही व्यक्तियों के कारण तो चल रही है और यह ख़ुशी की बात है कि ऐसे लोगों की संख्या ज्यादा होती जा रही है. कल घर से माँ का पत्र आया है, लिखा है छोटी बहन उन्हें बुला रही है पर वह अभी जा नहीं सकतीं. काश ! वह स्वयं कुछ दिनों के लिए उसके पास रह पाती पर यहाँ  नन्हे और जून का काम उसके बिना नहीं चलने वाला है.

नौ बजने को हैं, सुबह सुहानी थी, शीतल हवा और आकाश पर बादलों के बिखरे रंग उसे मोहक बना रहे थे. इस समय वह पहले पहर के मध्य में पहुंच चुकी है. आज गैराज साफ करवाया और ड्राइव वे भी. कल जून ने अपनी कार बेच दी यानि उनकी मारुति ८०० किन्हीं ठेकेदार महोदय को. अब उन्हें नई कार के लिए १५-२० दिन तक इंतजार करना है हो सकता है एक महीना भी. स्कूल से लौटकर जब नन्हे ने यह समाचार सुना तो वह बहुत नाराज हो गया था, उसे लगा आधे घंटे में सामान्य हो गया है. लेकिन बाद में जब उसे गृहकार्य करने को कहा तो उसने उनकी बात पर कोई ध्यान नहीं दिया, शाम को एक मित्र परिवार आया तो जून ने उसे डांट कर पढ़ने बैठने को कहा, उसे लगा न चाहते हुए भी उसे अनुशासन सिखाने के लिए उन्हें ऐसा करना ही पड़ा. Today she read the second lesson of ‘Stop worrying and start living by Dale Carnegie. writer advises to accept the worst and then to think clearly instead of worrying when one faces any problem. कल रात स्वप्न में एक कहानी का प्लाट मिला. नायिका अपने छोटे भाई के साथ उसके कालेज जा रही है. रस्ते में पांच-छह असामाजिक तत्व उनके पीछे हो लेते हैं. एक जगह किसी वजह से उन्हें रुकना पड़ता है. बहुत bold होने का अभिनय करती हुई वह झूठमूठ में नशा करती है और उन्हें अपनी बातों में फंसा लेती है. किसी नशीले द्रव्य के अपने पास होने का भ्रम उन्हें दिलाती है अब सभी उसकी रक्षा का उपाय सोचने लगते हैं साथ चल पड़ते हैं, पर वह अभी भी खतरे से बाहर नहीं है, आगे का स्वप्न कुछ याद नहीं है. कल दोपहर जो कहानी उसने लिखी उसका अंत अभी तक स्पष्ट नहीं हुआ है. नीतेश ने अपने गुम होने की खबर स्वयं ही दी थी जब उसे मामा पर शक हुआ कि उसके पिता को धमकी भरे पत्र वह भेज रहे हैं. मामा सिर्फ अपना मान रखने के लिए रिपोर्ट लिखने व विज्ञापन देने की बात स्वीकारते हैं. लिखना उसे बीच में रोकना पड़ा, दरवाजे की घंटी बजी थी.



Sunday, November 17, 2013

नेता जी की जन्म शताब्दी


रात्रि के आठ बजने वाले हैं, आज सुबह से ही व्यस्तता ने घेरा हुआ है, इस वक्त थोड़ा सा रुक कर सुस्ताने का मन हो रहा है. सुबह से ग्यारह बजे तक रोजमर्रा के कामों में व्यस्त रही. आज जून की पसंद की भरवां टमाटर की सब्जी बनाई थी. दोपहर को कुछ देर ‘संडे’ पत्रिका पढ़ी, फिर गुलाबी कपड़े के तीन रुमाल काटे और नन्हे के आने के बाद कल की पिकनिक के लिए पनीर  मसाला बनाने की शुरुआत की. जिसमें डेढ़ घंटा लगा. शाम को टहलने गये और वह गैस से कुकर  उतर कर रखना भूल गयी आग बहुत धीमी थी फिर भी लौकी-वड़ी की सब्जी पानी सूखने से बुरी तरह जल गयी. जून ने अपना स्पेशल बूंदी का रायता बनाया है और चखने के लिए पनीर मसाला तो है ही.

पिकनिक से वापस आकर रात के खाने की तैयारी करके और नहा धोकर आराम से बैठने के बाद अच्छा लग रहा है, नन्हा अपना बचा हुआ होमवर्क पूरा कर रहा है. विशेष थकान भी नहीं है, सुबह ७.२० पर वे घर से चले थे, कुल मिलाकर पिकनिक अच्छी रही, कुछ फोटो भी खींचे. नदी का पानी ठंडा था और उसमें देर तक बैठे रहने से ठंडक का अहसास भीतर तक हो रहा था, किनारे पर बिछी थी स्वच्छ रेत.. सभी खुश थे.

Today something is somewhere wrong ! Jun is losing his temper on small things. She does’nt know why, but she is feeling it and… आज सुबह वे वक्त पर उठे थे पर उनके दफ्तर जाने से पूर्व उसने पत्रिकाओं के बारे में कुछ कहा था, शायद उसी बात का असर हो. शाम को खेल में भी उनका मन नहीं था, खैर, कभी-कभी ऐसा सबके साथ होता है. नन्हे के कल से टेस्ट हैं, वह पढ़ रहा है.

दो-तीन दिनों तक तेज धूप निकलने के बाद आज मौसम फिर सर्द है, बादल हैं, एक दो बार सूरज उनकी ओट से झाँका भी तो धूप में गर्माहट नहीं थी. अभी-अभी नैनी का छोटा बेटा अंग्रेजी पढकर गया है, उसे अल्फाबेट आ गया है और कुछ शब्द लिखने भी आ गये हैं, लेकिन उसके पास क्लास १ की कोई पुस्तक नहीं है जिससे सिलसिलेवार पढ़ाई की जा सके, आज उसे छोटे-छोटे   वाक्य लिखने को दिए हैं. दोपहर खाने पर आये तो जून का मन ठीक था, वह खुश थे, सम्भवतः कल उन्हें फील्ड भी जाना पड़े. नन्हे के आज दो टेस्ट हैं, उसकी टीचर के कहने पर तेल लगाना भी सीख गया है. आजकल रामायण में हनुमान जी द्वारा सीता का पता लगा कर आने की कथा चल रही है, कल से ‘युद्ध कांड’ आरम्भ होगा, और रामायण समाप्त होने पर वह फिर से ‘भगवद् गीता’ पढ़ेगी जो जीने की कला सिखाने में पूर्णतया सक्षम है.

जून आज ‘हाफजान’ गये हैं, शाम को आएंगे, बहुत दिनों बाद उसे लंच अकेले ही खाना है, सो जब पेट में चूहे कूदने लगेंगे तभी खाएगी, जो भायेगा वही और जितना भायेगा उतना. कल शाम को वे एक मित्र परिवार के यहाँ गये, वहन एक और परिवार मिला, MR थोड़े शर्मीले स्वभाव के लगे बड़े भाई की तरह बच्चों से तुतलाकर बात करने वाले, MRS काफी एक्टिव थीं, डेढ़ साल की बच्ची की माँ को शायद ऐसा ही होना पड़ता है. नन्हे ने सब बच्चों को टाफी दीं, जो कई दिनों से इकट्ठी कर रहा था. शाम को बैडमिंटन भी खेला, अब उसकी रूचि इसमें बढ़ गयी है.


पिछले दो दिन जून और नन्हे दोनों की छुट्टी थी, परसों नेता जी के जन्मदिवस की, उनकी जन्म शताब्दी मनाई जा रही है इस बरस. उसने सोचा तो लगा नेता जी के विषय में वे कितना कम जानते हैं. उस दिन उन्होंने स्टोर की सफाई की और ‘माचिस’ देखी. उसे बहुत अच्छी नहीं लगी यह फिल्म. शाम को नन्हा एक मित्र के जन्मदिन में गया और वे अपने मित्र के यहाँ. कल दिन भर बूंदा-बांदी होती रही, मौसम बेहद ठंडा था, लंच में डोसा बनाया उसने. पड़ोसिन ने अपने बगीचे से ब्रोकोली भेजी, जो शाम को बनाई. जून ने अपनी पसंद की दो मिठाइयाँ बनायीं, गुलाब जामुन और बेसन के लड्डू. लेकिन उसे मिठाई खाना ज्यादा पसंद नहीं है पर जून चाहते हैं, उनकी तरह वह भी मिठाई बहुत शौक से खाए, कभी-कभी उसे लगता है वह भूल ही गये हैं इन्सान जीने के लिए खाता है न कि खाने के लिए जीता है. बरसों से चलती आ रही, शायद आगे भी चलती रहेगी, उनकी नोक-झोंक का विषय अक्सर भोजन ही होता है. आज भी मौसम बेहद ठंडा है, सुबह-सुबह छोटी बहन को फोन किया, उसकी विवाह की सालगिरह है आज. नन्हा बहुत सोचने के बाद आखिर स्कूल चला गया है, बहादुर लड़का है, इतने दिन मना करने के बाद आज आखिर टोपी और दस्ताने भी पहने. 

Monday, March 4, 2013

कक्षा दो का टाइम टेबिल



आज अभी सुबह ही है, शनिवार है, दोपहर को जून घर पर होंगे. कल शाम को उनसे नोक-झोंक हो गयी, वही पुरानी खाने-खिलाने की बात पर. रात को कहने लगे दोपहर को यह सब क्यों बनाती हो, मैगज़ीनस् क्यों नहीं पढ़ती ? अब उन्हें कैसे समझ में आयेगा कि आजकल पत्रिकाओं से उसका मोहभंग हो गया है, उसे कहानियों में भी अब उतना रस नहीं आता, और राजनितिक दांवपेंच में तो बिल्कुल नहीं. आजकल उसे वह हर चीज पढ़नी अच्छी लगती है जो मन को कहीं गहरे छू जाये, कुछ सिखाए या फिर...बस. आज भी मौसम ने बादलों की पोशाक पहनी है. नन्हा स्कूल गया है, डेविस कप के मैच के कारण शायद आज व कल टीवी फिल्म जल्दी दिखाई जायेगी, कल क्लब में ‘जीने दो’ फिल्म थी यूँ ही सी थी, हाँ, जीने का हक सबको है, आजादी से जीने का. वहीं नन्हे की क्लास टीचर मिलीं, उन्हें बता दिया उसने स्कूल न जाने का कारण, मगर रात देर तक सोचती रही, क्यों कहा, कुछ और कह देती. कभी-कभी सच बोलकर भी बेचैनी होती है, झूठ बोलकर भी, ऐसे में चुप रहना भी सम्भव न हो तो ? आज वर्षों बाद बेसन की सब्जी बनायी.

आज फिर चार दिनों बाद डायरी खोली है, इतवार को नन्हे को हल्का जुकाम था, स्कूल नहीं भेजा, उसका भी स्वास्थ्य उन दिनों की वजह से कुछ ठीक नहीं था, स्कूल के दिनों में एक बार कापी में ऐसा ही कुछ लिखा था, उसकी सहेलियों ने पढ़ा तो बहुत हँसीं थीं. कल सभी भाइयों को राखी भेज भी दी. कल दोपहर टीवी पर कछुए पर टाइम टेबिल बनाना देखा, नन्हे के लिए बना रही है. जून कल ज्यादा चुप नही थे, उसके पहले के दो दिनों की तरह, जीवन को पल-पल जीया जाये तो इसमें उदासी के लिए कोई जगह ही नहीं है. स्वामी विवेकानंद की पुस्तक पढ़े काफी दिन हो गए हैं, एक फितरत होती है हर काम को करने की, अभी उसका मन उसे स्वीकारने को तैयार नहीं है, तो वह वह कार्य नहीं कर सकती, लेकिन यह तो मन की गुलामी हुई, वही प्रेरणा का इंतजार करने वाली बात, जो उसे नहीं करना है.

मौसम आज बुद्ध के मध्यम मार्ग का अनुसरण कर रहा है. कल रात भी अच्छी नींद आई, पिछले तीन-चार दिनों से बहुत गहरी नींद आती है, पहले की तरह भेड़ें नहीं गिननी पड़तीं. जून भी कल स्वस्थ लग रहे थे, खुश थे, उनके साथ कभी-कभी बेवजह वह तल्ख लहजे में बात कर देती है, वह ध्यान नहीं देते, शायद समझ गए हैं कि यह उसकी आदत है. लेकिन उन दिनों जब राजयोग पढ़ रही थी ऐसा बहुत कम होता था. उसे लगता है कि दिनोदिन वह  अपने मस्तिष्क का इस्तेमाल करना कम करती जा रही है. उसे नन्हे के लिए छुट्टी का प्रार्थना पत्र लिखने में दो पेज लगे, पहला ठीक नहीं लगा, जब भी उसे कुछ नया लिखना होता है, कलम रुक जाती है, नन्हे से उसने वायदा किया है कि जब वह स्कूल में होगा, उसके लिए एक कहानी लिखेगी.

फिर तीन दिन यूँ ही गुजर गए, शनि को असम बंद था, नन्हा घर पर ही था पर जून ऑफिस गए थे, किसी ने भी रास्ते में नहीं रोका, कितने सच्चे-झूठे डर इंसान ने पाल लिये हैं, आजतक जितने भी बंद होते थे, लोग घरों से नहीं निकलते थे, पर अब कार लेकर जाते हैं. रविवार को वह असमिया सखी के यहाँ गयी, उसने फ्लोरा मशीन खरीद ली है, उसे सिलाई-कढ़ाई का शौक भी है, उस दिन एक तेलगु परिवार में गयी थी, वहाँ भी आजकल बहुत सी चीजें बना रही हैं गृहणी, वाल हैंगिंग, टीवी कवर, पेंटिंग और भी बहुत कुछ, बंगाली सखी को बागवानी का बहुत शौक है, एक उसे ही कोई खास शौक नहीं है किसी एक चीज का, हाँ, थोडा बहुत सभी का है. कल फोन पर पुरानी पड़ोसिन से बात की, बाद में लगा कि वह थोडा और विनम्र हो सकती थी, लेकिन यह रूखापन आया कहाँ से...उसकी कोई बात उसे चुभी और...इसका अर्थ हुआ कि अब भी वह वहीं की वहीं है, आदिम आदतों से पीछा छुड़ाना इतना आसान तो नहीं. कल दोपहर खतों के नाम थी. कल क्लब में मीटिंग है उसे इंतजार है, लगता है इतने वर्षों तक क्यों नहीं गयी, खैर, हर चीज का एक वक्त होता है. कल व परसों रात को दो कहानियाँ बुनीं थीं, देखेगी, कहाँ तक उतरती हैं पन्नों पर. जून ‘कक्षा दो’ के लिए, एक सुंदर सा टाइम टेबिल बना कर लाए हैं, नन्हे की क्लास टीचर बहुत खुश होंगी.







Sunday, September 16, 2012

छत पर बंदर



कल जून को पत्र लिखा, कहीं वह नाराज न हो गए हों कि उसने उन्हें मेस ज्वाइन करने को कहा, अब यह तो उनका पत्र आने पर ही मालूम होगा. उसे पूरी आशा है आज उसका पत्र भी आयेगा. सुबह पांच बजे से पहले ही उसकी नींद खुल गयी उमस और गर्मी के कारण. उसने सोचा आज रात से यहीं छत पर सोयेगी जब सुबह छत पर टहलने गयी, हवा बहुत ठंडी थी, तन-मन को सहलाने वाली. उसे कालेज के जमाने में घर के सामने वाले बगीचे में गुलाबों की झाड़ी से निकलने वाली खुशबू और सुबह की शीतल पवन याद आ गयी. अगले महीने पिता रिटायर हो रहे हैं अब वह कभी उस मकान में नहीं रह सकेगी. कल देवर के मित्र अपने एक मित्र की पत्नी को लेकर आए, उसकी बातें और स्टाइल देखकर उसे भाभी व उनकी बहन की याद आ रही थी. पर उसकी कुछ बातें सुनने में कानों को चुभने वाली थीं, सो वह उठकर चली गयी.

कल उसका पेन फिर कहीं खो गया, सो सुबह डायरी नहीं लिख पायी थी. इस समय सुबह के साढ़े छह बजे हैं पर कमरे में गर्मी बहुत है. कल रात वे सभी छत पर सोये. कितने वर्षों बाद उसे छत पर सोने का मौका मिला है, खुले आसमान के नीचे. बचपन में वे सभी किस्से कहानी कहते हुए छत पर सोया करते थे गर्मियों में. आरम्भ में इतने लोगों के कारण नींद ही नहीं आ रही थी, पर बाद में, कब सो गयी पता ही नहीं चला. सुबह पौने पांच बजे के लगभग नींद खुली, कानों में मंदिर से आती मंत्र ध्वनि व स्तुति सुनाई दी जो प्रातःकालीन मंद शीतल हवा में भली लग रही थी तो बनारस की सुबह के प्रसिद्ध होने का अर्थ समझ में आया. नन्हा अभी तक सोया है. छत पर से आकर यहाँ इस कमरे में. सुबह-सुबह मकानों की छतों पर यहाँ कितने बंदर भी घूमते दिखाई देते हैं. कल महावीर जयंती का अवकाश था सो पोस्टमैन नहीं आया. जून को खत भेजने का दिन आज है, पर वह उसका पत्र आने पर ही लिखेगी.
कल जून का पत्र मिला एक नहीं दो पत्र एक साथ. वह भी उसकी तरह परेशान था पत्र न मिलने से. विवाह से पूर्व जिस तरह लम्बे पत्र लिखता था वैसा ही स्नेह भरा पत्र पाकर उसकी ऑंखें भर आयीं, ऐसा तो उसे उसका पत्र पाकर कितनी ही बार हुआ है पर इसको सामान्य ढंग से न लेकर माँ-पिताजी यह सोचने और फिर कहने लगे कि यहाँ उसका मन नहीं लगता. एक महीना हो गया है उसे यहाँ रहते याद नहीं कि कभी ऐसा उन्हें महसूस होने दिया हो. नन्हा अस्वस्थ होने के कारण या उसका पूरा ध्यान न मिलने के कारण परेशान कर रहा था, उसका मन पहले से ही भरा था. उसने तय किया है आज से सोनू का पूरा ध्यान रखेगी, चाहे पढ़ाई हो या न हो. घड़ी देखी, साढ़े पांच बजने को थे वह दिन का कार्य आरम्भ करने के लिए उठी.

 










   

Wednesday, July 25, 2012

रोना, कभी नहीं रोना



आज सुबह अलार्म सुनाई दिया था पर आलस्यवश दस मिनट और लेटी रही, सुबह की नींद भी तो कुछ अलग होती है ठंड में कम्बल में सिकुड़े रहो बस. आज कोहरा छाया है, दूर के पेड़ दिखाई ही नहीं दे रहे. सर्दियों में तो कभी-कभी सामने वाला घर भी दिखाई न दे ऐसा कोहरा होता है यहाँ. सर्दियाँ बस आने ही वाली हैं. कल माँ का पत्र आया है उन्हें जून के वहाँ न जाने से कितनी निराशा  होगी, कल ही छोटी ननद और मंझले भाई का पत्र भी आया है. कल शाम नन्हा बहुत जिद कर रहा था, जून को उस पर गुस्सा आया. आज से वे उसे बारी-बारी से खिलाएंगे अर्थात ध्यान रखेंगे. उसकी बचपन की दो सखियों की कल शादी थी, एक का पता उसने खो दिया चाह कर भी पत्र नहीं लिख सकी. बड़ी बहन की शादी की वर्षगाँठ भी थी. इस बार घर जाने पर वह ‘शाक तथा पुष्प वाटिका’ से सम्बधित कोई किताब अवश्य लाएगी ऐसा उसने तय किया.

कल रात वे अलार्म देना ही भूल गए, सुबह चिड़ियों ने उठा दिया या फिर उस स्वप्न ने जिसमें जून के साथ उसकी बहस हो रही है, क्योंकि वे दोनों तो कभी बात को बढ़ाते नहीं, ज्यादातर पांच मिनट से ज्यादा नहीं चलती उनकी बात, और होती भी है तो नन्हें की देखभाल को लेकर. उसका रोना जून को जरा पसंद नहीं, वह बहुत जल्दी घबरा जाता है, खुद भी झुंझला जाता है. पर बच्चे उतना रोते भी हैं जितना हँसते हैं, यह नूना को पता है. वह कभी-कभी उसे जी भर कर रोने देना चाहती है. आकाश पर रुई के फाहों के से बादल बिछे हैं, कोहरे का कोई नामोनिशान नहीं. उसे याद आया नन्हें के कुछ वस्त्रों की सिलाई खुल गयी है, आज सबसे पहले वही ठीक करेगी.

कल उसने ‘सर्वोत्तम’ में एक लेख पढ़ा, भीतर के अलार्म से कैसे उठें, अमल भी किया, प्रभावशाली रहा. सुबह सवा पांच बजे वह उठ गयी, नन्हा कल दिन भर मस्त रहा, पर शाम होते ही छोटी सी बात पर रोने लगा, उन्हें कुछ और उपाय सोचना होगा, उनमें से एक को सदा उसके साथ रहना होगा उसके हर कार्य में. वह दिन भर उसका पूरा ध्यान पाता है शाम को उसके दूसरे कामों में व्यस्त होने पर या जब वे आपस में बात करने में व्यस्त हो जाते हैं तो वह किसी न किसी बात पर जिद करने लगता है. आज ही के दिन दीवाली है अगले सप्ताह, वे कुछ लोगों को बुलाएँगे. कल का मैच भारत ने जीत ही लिया.   

Sunday, June 17, 2012

हँसता शिशु


सुबह के साढ़े सात बजे हैं, नन्हे को अभी कुछ देर पूर्व ही सुलाया था पर दादी ने उसे उठा दिया है. बस अब दो ही दिन तो रह गए हैं उन्हें वापस जाने में, चाहते हैं कि वह अधिक से अधिक जगता रहे.  रात से ही वर्षा हो रही है. कल रात सोने से पूर्व उसने जून से कहा था कि रात को वह न जगा करे, शिशु के उठने पर वह खुद ही सम्भाल लेगी, उसकी नींद पूरी नहीं हो पाती, वह तो दिन में किसी भी समय सो जाती है. कल बड़ी बुआ का एक अच्छा सा पत्र मिला. यह पेन जिससे वह लिख रही है जून ने उसे उपहार में दिया था उनके विवाह के अवसर पर, कुछ दिन खराब रहकर यह पुनः लिखने लगा है अपने आप.
कल सुबह से ही उसकी मनःस्थिति ठीक नहीं थी जिसका असर शायद अब तक है, अक्तूबर से ही उन्होंने पैसे इकठ्ठे करने आरम्भ किये थे, वह चाहती थी कि उसके खुद के नाम से एक पासबुक हो, माना कि वह अभी तक सब आवश्यक वस्तुएं ले आया है पर उसे स्वयं के आत्मनिर्भर न होने का दंश तो चुभ ही रहा है. पिछले कई महीनों से वह जून को नए कपड़े लेने के लिये कह रही है पर वह उसे टाल जाता है. उसे आश्चर्य भी होता है कि धन के बारे में उसके विचार ऐसे थे उसे खुद भी पता नहीं था.
सब लोग चले गए हैं, घर पर वे तीनों रह गए हैं. नन्हें को ठंड लग गयी लगती है, उसके गले से खर-खर आवाज आ रही थी, और उसके पेट से भी आवाज आ रही थी, छोटा सा तो है वह और इतनी सारी मुसीबतें. हँसता है तो बहुत प्यारा लगता है. अगस्त के दूसरे हफ्ते में जून के इम्तहान  हैं, ऑफिस से आकर उसका ज्यादातर समय बच्चे के साथ ही बीतता है. आज से उसे पढ़ाई में ज्यादा समय देना है, वह तो सम्भाल ही सकती है उनके बेटे को.

  

Monday, June 11, 2012

जीवन इक स्वप्न



जुलाई का पहला दिन...इस महीने की कितनी प्रतीक्षा किया करते थे वे लोग बचपन में. नयी कक्षा, नयी किताबें और कभी नया स्कूल भी. छोटी बहन का जन्मदिन भी तो जुलाई में पड़ता है और अब उस नवांगतुक का भी इसी माह में आने वाला है, डॉक्टर के अनुसार पांच दिन रह गए हैं, क्या जाने कोई लेकिन कब ? कल से बेहद गर्मी है, ऊपर से बिजली चली गयी, दोपहर ढाई बजे आयी, पर शाम को मौसम अच्छा था, वर्षा हुई और उसके बाद का धुला-धुला आकाश और धुला हुआ वातावरण.
आज उसकी बेचैनी बढ़ गयी है, पता नहीं और कितना इंतजार करना पड़ेगा, अभी तो कुछ भी परिवर्तन महसूस नहीं होता. उसने जून से कहा तो वह उसे समझाने लगा, स्नेह लुटाने लगा, उसे खुश करके ही माना. कितना सम्बल देता है उसका साथ. सच ही तो कहता है वह, कभी भी  निराशावादी नहीं होना चाहिए, जो भी सामने आये उसे खुशी-खुशी ग्रहण करना ही होगा. आशंका, चिंता को जन्म देती है. उसने निश्चय किया कि अब वह भी खुले-खुले मन से उस घड़ी का इंतजार करेगी न कि यह सोचते हुए कि जाने क्या होगा. शाम को जून ने लॉन में फिर कुछ देर काम किया, रोज आधा घंटा करने से कुछ ही दिनों में सफाई हो जायेगी. आज सुबह उठी तो एक स्वप्न देख रही थी, उसे अंग्रेजी की परीक्षा देने जाना है पर पेन नहीं मिल रहा है, बॉल पेन तो है पर काला पेन जो उसके छोटे भाई ने दिया था वही खोज रही है, शेष सभी परिवार जनों को भी देखा.
एक और नए दिन का शुभारम्भ ! अत्यंत सुंदर सुबह है आज की, शीतल, स्वच्छ, मधुर. जून को छाता लेकर जाना पड़ा, उस समय वर्षा हो रही थी, शायद रात भर बादल बरसते रहे. कल बहुत दिनों बाद चाची जी का खत आया, भाभी का भी दो दिन पहले आया था. जून घर समय पर आ गया था, वह चाहता तो है, पर आजकल बिल्कुल पढ़ाई नहीं कर पाता, यदि वह पक्का निश्चय करले तो कम से कम एक घंटा तो पढ़ ही सकता है, उसने सोचा, आज से वह बैठेगी उसके साथ पूरा एक घंटा.
  

Monday, May 7, 2012

अप्रैल फूल


उस दिन अप्रैल की पहली सुबह थी. उन दोनों ने एक दूसरे को अप्रैल फूल बनाया और खूब हँसे. पिछली शाम आंधी आयी थी और हल्की बूंदाबांदी भी हुई, लेकिन सुबह वैसे ही गर्म थी. रात वह अजीब-अजीब स्वप्न देखती रही, बीच बीच में नींद टूट जाती थी, उमस भी थी कमरे में, उठकर जून ने पंखा चलाया पर उसके बाद भी असुविधा में थे तन-मन दोनों. संभव है दिन में सो लेने के कारण ऐसा हुआ हो, या जैसे-जैसे दिन नजदीक आ रहे हैं, दिक्कतें कुछ तो आयेंगी ही. वह पिछले कई दिनों से एक नॉवल पढ़ रही थी. कितनी सूक्ष्मता से दो जोड़ों के चरित्र का चित्रण लेखक ने किया है. कल शाम उन्होंने आपने विवाह की एल्बम देखी और एक पुराना खत पढ़ा, बहुत हँसे अपनी उन दिनों की दीवानगी पर. जून आजकल हर वक्त उसका ध्यान रखने का प्रयत्न करता है, वह खुश है और स्वस्थ भी. उसे घर का काम करने का भी शौक है, इतवार को कपड़े धोने में उसे मजा आता है. दोसे बनाने हों तो तैयारी में सिवाय दाल-चावल भिगोने के उसे और कुछ नहीं करना पड़ता. उसे पीसने के लिये व चटनी बनाने के लिये वे अपने दक्षिण भारतीय मित्र के यहाँ जाते हैं, व बनाने के लिये वह तैयार रहता है.

Friday, March 2, 2012

पुराने खत


आजकल सुबह शाम ठंड बढ़ जाती है और दोपहर को गर्मी रहती है. अक्टूबर शुरू हो गया है. कल वे टहलते हुए क्लब गए, धर्मयुग का नया अंक पढ़ा नूना ने और जून ने स्वामी विवेकानंद की एक किताब के कुछ पन्ने. लाइब्रेरी में ही एक परिचिता मिलीं, पुरानी पड़ोसिन, कहने लगीं, उनके पति शाम को देर से घर आते हैं सो वे लोग इतने दिनों से मिलने नहीं आ सके.
कल जब जून घर आया तो नूना पुराने खत पढ़ रही थी. कितनी स्मृतियाँ सजीव हो उठीं. उसने कहा कि वह बस यही चाहता है, वह खुश रहे, जब तक वह साथ रहता है, नूना खुश रहती है, उसके जाने के बाद उसकी बातें याद करके. रेडियो पर हिंदी फ़िल्मी गीत की धुन पर आधारित एक असमिया गीत बज रहा है. वह कढ़ाई का काम लेकर बैठी है.
सात अक्तूबर ! आज पूरे नौ महीने हो गए उन्हें साथ-साथ रहते हुए. यह तिथि कितनी यादों को समेट लाती है. विवाह पूर्व के वे वर्ष, महीने और दिन इसी तारीख पर आकर सिमटे थे और विवाह के बाद का यह अनुराग पूर्ण जीवन इसी तिथि से प्रारम्भ हुआ था. उस दिन आधी रात्रि को जून उसे उसके परिवार से बाहर एक नए घर में लाया था. आश्वासन था उसके स्पर्श में, एक पल को लगा था उसकी आँखें देखकर कि वह उदास है या कहीं मन में घबराया हुआ है कि क्या होगा आगे, पर दूसरे ही पल उसका साथ उसे बहुत पुराना लगने लगा था. जैसे वे तो पहले से ही साथ-साथ थे. जैसे उन्हें तो सब मालूम था कि आगे क्या होने वाला था. उसने इतना स्नेह दिया है कि पहले के जीवन में जिसकी झलक कहीं-कहीं ही दिखाई पड़ती थी. कल उसे मोरान जाना है कुछ दिनों के लिये, नूना को अकेले रहना होगा, रहना ही होगा उसके लिये, उनके लिये.

Tuesday, February 7, 2012

यात्रा तीन दिन की


आज सुबह खबरों में सुना कि संत लोंगोवाल की मृत्यु हो गयी. किस तरह एक नेता जिसके पीछे हजारों लोग होते हैं एक हत्यारे की गोलियों का शिकार होकर दम तोड़ देता है. गाँधी हर युग में होते हैं और हर बार उन्हें जान देनी पड़ती है. आज सुबह से बार-बार वही खबरें आ रही हैं. जून आज पुनः अस्पताल गया था, विशेषज्ञ के पास. आज उसने अपनी बाइक भी साफ की, उसे बहनों की भेजी राखियाँ मिल गयीं. कितने दिन बाद आज शाम बादल छा गए और झमाझम वर्षा होने लगी. वे घर पर ही रहे.
अगले हफ्ते जून को तीन दिनों के लिये बाहर जाना है, नूना भी उसके साथ जायेगी. वे नया घर भी देख आये, अच्छा है पर इस घर से आत्मीयता सी हो गयी है, छोड़ते समय दुःख तो होगा ही. कितना परिचित लगता है इसका हर कोना, फिर उनके जीवन का यह पहला पडाव है जिसमें उन्होंने अपने जीवन की शुरुआत की है.

Friday, January 13, 2012

बिजली का जाना


सुबह के साढ़े नौ बजे हैं, अभी-अभी रेडियो श्रीलंका से 'हफ्ते के श्रोता' कार्यक्रम समाप्त हुआ है. परमार जी अच्छी तरह प्रस्तुत करते हैं, यूँ तो सभी एनाउंसर अच्छे हैं. कितनी गर्मी हो गयी है. नूना कपड़े प्रेस कर रही थी कि बिजली चली गयी, ऐसा यहाँ कभी कभार ही होता है, शायद दूसरी या तीसरी बार ही हुआ है. कल शाम एक दक्षिण भारतीय जोड़ा आया, कुछ सप्ताह पूर्व ही उनकी शादी हुई है. उनके साथ नाश्ता किया सो रात को सिर्फ दलिया ही बनाया. पिछले दो तीन दिन से रोज रात को स्वप्न में सभी परिवार जनों को देखती है नूना. 

वर्षा की झड़ी लगी हुई है, रिमझिम बरसता पानी नूना को बहुत बाता है और जून को भी. आज शनिवार है. अगर दिन भर यूँ ही पानी बरसता रहा तो कितना अच्छा होगा. कल वे एक हिंदी फिल्म देखने गए तब भी वर्षा हो रही थी, नूना थोड़ा सा भीग भी गयी, फिल्म उदासी भरी थी, शोषण का घृणित रूप दिखाया गया था फिल्म में. कल घर से पत्र भी आया, कितना सुख देते हैं पत्र पढ़ने वाले को. जून की बांह में पिछले दो-तीन दिनों से दर्द था, वह आज भी डॉक्टर के पास नहीं जा पाया होगा. नूना ने सोचा वह उसका ज्यादा ख्याल रखेगी. उसे सूप पीना पसंद है, सो वह आलू-परवल-टमाटर  का सूप बनाएगी.  

Tuesday, June 21, 2011

गुलाब का पौधा


नूना स्नानघर में थी कि दरवाजे पर खटखटाहट हुई, कल भी ऐसा हुआ था. बहुत कोफ़्त होती है ऐसे में. अभी सवा सात ही हुए थे, दूधवाला आज जल्दी आ गया था. आज सुबह वह साथ-साथ ही उठ गये  थे. बाहर लॉन में गए, सुबह का समय उसे सदा से सर्वप्रिय लगता है, उस वक्त वह सबसे अच्छी मनःस्थिति में होती है. याद आती हैं वे सुबहें जब प्रातः भ्रमण के समय गुलाब की झाड़ियों के साथ साथ चलती थी दूर तक अकेले पर हमेशा उसके बारे में सोचते हुए..... फूफाजी का पत्र आया है दादाजी की तबियत ठीक नहीं है, बुआजी घर गयी हैं. अब दूसरा पत्र आने तक उन्हें उनके स्वास्थ्य के बारे में पता भी नहीं चलेगा. आज रात्रिभोज पर जाना है, उसकी पसंद की पीली साड़ी पहनने वाली है नूना, कल रात को सपने में खूब होली खेली, बचपन की सहेली संतोष को देखा. उसकी मकान मालकिन व उनकी बेटियों को भी. उन गमलों का पता नहीं क्या हाल होगा, छोटी बहन ने एक बार भी तो नहीं लिखा, वह गुलाब का पौधा अब बड़ा हो गया होगा.