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Wednesday, April 7, 2021

वृक्ष और हवा

 

आज से दो वर्ष पूर्व बड़ी भतीजी का ब्याह हुआ था, पर उसने उसे ‘प्रथम वर्षगांठ पर बधाई’ का संदेश लिख दिया। मन अपने आप में नहीं रहता है जब, तब ऐसी गलतियाँ होती हैं। जिस मन में कोई उलझन न हो, लोभ न हो, चाह न हो, वह मन  ही स्थिर रह सकता है। आज सुबह वे बारी-बारी से घूमने गए क्योंकि उठने में देर हुई. नैनी समय पर  आ गयी, कल उसने छुट्टी ली है, विधान सभा का उपचुनाव है, कह  रही थी बीजेपी को वोट देगी। देश आर्थिक संकट से जूझ रहा है, सरकार प्रयास कर रही है पर हालात सुधर नहीं रहे हैं। आजकल समाचार सुनने का ज्यादा समय नहीं मिलता। वे टीवी कम ही खोलते हैं। दोपहर को थोड़ी देर एक फिल्म देखी ‘जोया फैक्टर’ अच्छी लगी। जून ज्यादातर समय मोबाइल पर कुछ देखते हैं। शाम को योग सत्र में टीचर ने हास्य आसन कराया, गरुड़ व वृक्ष आसन भी। एक घंटे के अभ्यास के बाद शरीर काफी हल्का हो जाता  है, और लचीला भी हो रहा है. कभी कभी वे बेल्ट, लकड़ी की ईंट और बड़ी सी गेंद का उपयोग करके कठिन आसन भी करते हैं। आज एक पूर्व परिचिता से बात की, उसने बहुत कोशिश करके अपना तबादला अपने गृह शहर में करवाया है। कह रही थी जिम जाने लगी है, वर्तमान पीढ़ी को योग की बजाय जिम अधिक रास आता है। आज भी छत पर सोलर पैनल लगाने का काम आगे बढ़ा. पूरा होने में लगभग दो महीने लगेंगे। 

जगत से सुख और प्रेम की आशा करना पानी को मथकर मक्खन निकालने जैसा ही है। यहाँ हृदय की बात सुनने का किसी के पास न ही धैर्य है न ही समय। स्वकेंद्रित मानव अपनी इच्छाओं की पूर्ति चाहता है और यदि कोई उसमें बाधक बनता है तो वह उस पर क्रोधित होता है। क्रोध का प्रभाव खुद पर ही होने वाला है वह यह भूल ही जाता है। आज सुबह टहलते समय भीतर कविता फूट रही थी। सारा अस्तित्व जैसे उसके भीतर सिमट आया हो। फेफड़ों के भीतर ताजी हवा वही तो थी जो चारों ओर बह रही थी।  सिर के ऊपर विस्तीर्ण आकाश था, अभी आकाश में चाँद था और तारे भी, भीतर का आकाश उसके साथ एक हो गया था। सुबह का समय कितना पावन होता है, मन भी खाली स्लेट की तरह, जिस पर जो चाहे लिखा जा सकता है। उसका प्रिय द्वादश मंत्र सुबह-सुबह हर श्वास-प्रश्वास में  स्वत: ही चलता है।  छत पर चल रहे काम के कारण काफी शोर था दोपहर को, गुरुनानक की कथा सुनते-सुनते सोयी। एक विचित्र स्वप्न देखा, एक बड़ा सा आदमी छोटा हो जाता है, कीट जितना छोटा। छोटे भाई के विवाह की वर्षगांठ है आज, बधाई दी। ननद से बात हुई, बिटिया के विवाह की बात चल रही है, पर वे लोग शाकाहारी नहीं हैं, और चाहते हैं, विवाह से पूर्व लड़की सब कुछ खाना व बनाना सीख जाए। भांजी ‘हाँ’ कहने से डर रही है। एक ब्लॉगर  की पुस्तक आयी है, उसने जून से कहा है अमेजन से खरीदने के लिए। कई दिनों से दीदी से बात नहीं हुई है, उसने व्हाट्सएप पर संदेश भेजा और  भगवान से दुआ मांगी, एक न एक दिन सब पूर्ववत हो ही जाएगा। 


रात्रि के नौ बजने वाले हैं। सोने से पूर्व का उसका डायरी लेखन का कार्य अब नियमित होता जा रहा है। कुछ देर पहले वे टहल कर आए, रात की रानी के पौधों की खुशबू अभी नासिका में भरी ही हुई थी कि मोड़ पर एक मीठी सी जानी-पहचानी खुशबू आयी, चम्पा की सुवास, और वाकई वहाँ तीन-चार पेड़ थे। चम्पा के फूल अभी ज्यादा नहीं थे, पर एक खिला फूल तोड़ा जो शायद कल  झरने ही वाला था, उसके सामने पड़ा है, श्वेत पंखुड़ियों वाला सुंदर पुष्प ! शाम को मृणाल ज्योति के डायरेक्टर का फोन आया, जो स्कूल की तरक्की की बातें बता रहे थे, अच्छा लगा सुनकर। अगले हफ्ते वे महाराष्ट्र की एक छोटी सी यात्रा के लिए जाने वाले हैं, दोपहर को पैकिंग की. आज सुबह गांव की तरफ टहलने गए थे वे, मन्दिर के पास वाला इमली का पेड़ फलों से भरा हुआ है, पर उन्हें तोड़ना नहीं आता. एलोवेरा का एक स्वस्थ पौधा रास्ते के किनारे पड़ा था, शायद किसी ने गमले से निकाल कर उसी समय वहां रखा था, वे उसे उठाकर लाये और घर के पीछे वाली क्यारी में लगा दिया है. आज छोटे भाई ने बताया शायद वह क्रिसमस पर यहाँ आये. 


उस कालेज की डायरी में एक कविता उसे दिखी, शायद हवा के बारे में किसी अंग्रेजी कविता को पढ़कर लिखी थीं ये पंक्तियाँ -


क्यों चाहे वह मुझ संग होना 

मेरे संग मेरे कमरे में 

उसके लिये संसार उपस्थित 

कितनी गलियां कितने गाँव 

लेकिन वह फिर-फिर आ जाये 

खोल के मेरी खिड़की के पट 

संग ले आये कुछ बौछारें 

मेरा दरवाजा खटकाये

बंद देख एक पल चुप हो 

क्षण बीते न फिर आ जाये 

पट खड़काये

नंगे पैर फर्श है ठंडा 

मैं घबरा कर द्वार खोलती 

वह तेजी से अंदर आये 

इक पल ठहरे फिर मुड़ जाये 

खुश हो जब दीपक बुझ जाये !


‘एक वृक्ष -एक गवाही नाम से’ अगले पन्ने पर लिखा था 


मैं गवाह हूँ 

मैं गवाह…

उस क्षण से लेकर आज तक 

जब प्रथम बार मेरे पत्तों ने आँखें खोली थीं 

और फिर जब मेरी डालियाँ भर गयी थीं फूलों से 

हर वर्ष, वर्षा, तूफान, भीषण शीत को सहते 

मेरे तन पर कुल्हाड़ी की धार सहते क्षण का भी 

परन्तु हर बार बसन्त की प्रतीक्षा में 

मेरे अंदर का साहस मृत नहीं हुआ.. 


Wednesday, February 27, 2019

हवा में गंध



आज आकाश में बादल हैं, शायद शाम तक वर्षा हो, हवा में एक अजीब तरह की गंध है, यहाँ के अस्सी प्रतिशत लोग खेती से जुड़े कार्यों में रत हैं. साधन न होने के कारण खेती के लिए उपलब्ध जमीन के मात्र छह प्रतिशत पर ही खेती की जा रही है. कल रात को किसी पशु के रोने की आवाज आ रही थी, जिसे सुनकर बचपन में मेहतरों के मोहल्ले से आती करूण पुकार स्मरण हो आयी. काश इन्हें भी शाकाहारी भोजन व्यवस्था के बारे में जानकारी देने वाला कोई संत मिले. चर्च में इनकी आस्था है पर वहाँ न नशे के खिलाफ कुछ कहा जाता है न मांसाहार के ही. डेढ़ वर्ष पहले तक यह शुष्क राज्य था, पर अब सरकारी दुकानें हैं तथा हर व्यक्ति को कार्ड के आधार पर नियत मात्रा में मादक पेय दिया जाता है.

गेस्टहाउस के कर्मचारियों ने जो वहाँ पिछले कुछ वर्षों से रह रहे हैं कुछ रोचक बातें बतायीं. मिजोरम में संयुक्त परिवार होते हैं. परिवार के बड़े पुत्र को जायदाद नहीं मिलती, बल्कि सबसे छोटे पुत्र को परिवार का उत्तराधिकारी बनाया जाता है. विवाह और तलाक के मामलों में भी चर्च का कानून ही चलता है. माता-पिता के न रहने पर अथवा असमर्थ होने पर बच्चों की देखभाल का जिम्मा भी चर्च का होता है. क्रिसमस के अलावा छरपार कुट मनाया जाता है, उत्सव के लिए मिजो शब्द कुट है. यहाँ कोई पिक्चर हॉल नहीं है. हिंदी फ़िल्में यहाँ नहीं दिखाई जातीं. टीवी पर आने वाले धारावाहिक वे मिजो भाषा में डब करके देखते हैं. यहाँ की साक्षरता दर केरल के बाद दूसरे नम्बर पर है. मिजो भाषा की कोई लिपि नहीं है, रोमन भाषा को ही इन्होंने अपनाया है. यहाँ की यात्रा के लिए इनर लाइन परमिट की आवश्यकता होती है. यह छात्रों का एक संगठन YMA बहुत शक्तिशाली है. यह समाज हित के कार्य भी करता है तथा दुर्घटना आदि होने पर आपसी सुलह भी कराता है. यहाँ किसी के घर में प्रवेश करने पर सबसे पहले रसोईघर में प्रवेश होता है, यहीं मेहमानों को बैठाया जाता है. पीने का पानी यहाँ खरीदना पड़ता है. अन्य कामों के लिए ये लोग वर्षा ऋतु में पानी का संग्रह कर लेते हैं, हर घर के नीचे पानी का टैंक होता है. इसी तरह सोलर पावर का भी लगभग सभी लोग इस्तेमाल करते हैं.

सुबह ग्यारह बजे ही उन्होंने वापसी की यात्रा आरम्भ की, एक दिन कोलकाता में रुकना पड़ा क्योंकि डिब्रूगढ़ में अभी तक रात के समय फ्लाईट उतरने की सुविधा नहीं है. अगले दिन सुबह की उड़ान से वे मिजोरम की मधुर स्मृतियों को मन में संजोये हुए वापस घर आ गये.  

Monday, April 17, 2017

पितरों का लोक


कल शाम उलझन भरी थी, परमात्मा ही उस रूप में आया था. “जब जैसा तब वैसा रे”. अंदर की ताकत पैदा करनी है, बाहर कर्म करना है. उन्हें अपने पात्र को बड़ा बनाना है. कृपा की वर्षा प्रतिपल हो रही है, वे धन्यभागी हैं, कृपा हासिल करने का कोई अंत नहीं है. आज सुबह पौने चार बजे नींद खुल गयी, ‘यजुर्वेद’ का स्वाध्याय चल रहा है आजकल ‘ज्ञान प्रवाह’ में. परमात्मा की स्तुति सुनते-सुनते प्रातःकालीन कर्म करते हुए टहलने गयी तो मन में वही चिन्तन चल रहा था. लौटकर सूर्य देवता के सम्मुख ध्यान किया. अद्भुत दृश्य था, देखते-देखते बादलों के पीछे से नारंगी सूरज ऊपर उठने लगा और अचानक हवा चलने लगी. पेड़ झूमने लगे, सारा दृश्य स्वर्गिक प्रतीत हो रहा था. प्रकृति इतनी  सुंदर है, आज से पूर्व कहाँ ज्ञात था. परमात्मा चुपचाप अपना काम किये जाता है. मिट्टी से खुशबुएँ उगाता है, रंग बिखेरता है आकाश से. परमात्मा की महिमा सोचने लगो तो बुद्धि चकराने लगती है, उसमें तो बस डूबा जा सकता है, उसे तो बस महसूस किया जा सकता है. वह तो अपने भीतर जगाया जा सकता है, बल्कि यह भी वही करवाता है. आज सुबह टीवी पर ‘महादेव’ धारावाहिक देखा, फिर टिकट सेल करने निकली, दो बिके, शाम को फिर जाना है, इस तरह एक बुक खत्म करनी है, बल्कि हो ही गयी है. सभी महिलाओं ने कितने प्यार से बात की, सभी के दिल एक ही तो हैं, एक के यहाँ सुंदर पक्षी देखे, एक के यहाँ दरवाजे पर लगाने के लिए करटेन रोप का तरीका देखा. लोगों से उसे मिलना-जुलना है इसलिए ही परमात्मा ने उसे मुक्त किया है, अब समय है उसके पास !

उसने आज सुना सद्गुरु कह रहे थे, ‘श्रद्धा से किया जाने वाला कृत्य ही श्राद्ध है. शरीर जो सगुण है जब अनंत चेतना में समा जाता है तो सूक्ष्म शरीर या कारण शरीर में वासना रह जाती है. ब्रह्मांड में रहते हैं तो पिंड की आशा रहती है पिंड में रहते हैं तो ब्रहमांड की. शरीर की वासना को पूर्ण करने के लिए ही पिंडदान किया जाता है. इसका अर्थ है उन्हें पुनः देह मिल जाये. मृतक को यदि लगे कि वह जल रहा है तो उसे दस दिन तक जल व तिल अर्पित करते हैं. उनकी पसंद की वस्तुएं भी देते हैं, बिना नमक के देते हैं, आत्मा को सुगंध मिलती है तो वह तृप्त हो जाती है. तृप्त करना ही तर्पण है. भाव यदि शुद्ध हो तभी लाभ होता है. पितरों से प्रार्थना करके सूक्ष्म जगत से उनसे संपदा व स्वास्थ्य भी मांगते हैं. उस लोक में पितरों का मार्ग सुगम हो इसकी प्रार्थना भी करते हैं और उनके द्वारा तृप्ति मिले इसकी कामना भी. जिन्हें देह नहीं मिली ऐसे पितृ भी होंगे, जिन्हें देह नहीं चाहिए ऐसे भी, दोनों के लिए प्रार्थना करनी है. कुछ ऐसे होंगे जिन्हें देह मिल गयी होगी उनके नये जीवन के लिए प्रार्थना करनी है.’ कितनी अनोखी है भारतीय संस्कृति ! उसने मन ही मन सद्गुरू को इस सुंदर ज्ञान के लिए प्रणाम किया और पितरों से प्रार्थना भी की.


आज दीपावली है, सुबह जल्दी उठे वे, रोज के सभी कार्य निपटा कर नर्सरी से फूलों के पौधे लाये, अब हरसिंगार के नीचे बैठे हैं, हवा बह रही है. कौन है जो इस शीतल पवन को डुला रहा है, कौन सी शक्ति है ? वृक्ष के नीचे कितना सुकून मिलता है इसका आभास आजकल होने लगा है. कल बाल दिवस है, वे मृणाल ज्योति स्कूल जायेंगे. बच्चों के लिए ढेर सारे उपहार लेकर.

Sunday, December 6, 2015

मित्रता की सुगंध


आज सुना..'भक्ति का आरम्भ वहाँ है जहाँ ईश्वर में जगत दिखता है और चरम वह है जहाँ जगत में ईश्वर दिखता है. पहले-पहल दिव्यता के दर्शन अपने भीतर होते हैं फिर सबके भीतर !’ वर्षा की झड़ी लगी है, भीतर का आसमान भी धुल गया हो जैसे ! सद्गुरू ने कहा, साधक उनका काम करें और वे उनका काम कर देंगे. सारी चिंता, दुःख, परेशानी उन्हें समर्पित कर दें और स्वयं साधना, सेवा तथा सत्संग में लग जाएँ. अपनी नजर को विशाल बनाएं, कोई पराया नजर ही नहीं आएगा, कोई बुरा भी नहीं दिखेगा. ठीक ही तो है, हर ऐसा व्यक्ति जो न करने योग्य कार्य करता है, स्वयं भी अज्ञान का दुःख भोग ही रहा है, उसे बुरा कहकर वे न तो उसका भला कर सकते हैं न अपना ही. जब उन्हें दोषी न मानकर शोषित मानते हैं जो अपने ही द्वारा शोषित हो रहा है, तो उसे दुःख से निकाल सकते हैं तथा स्वयं को भी धर्म ध्यान में रख सकते हैं, कर्म बाँधने से बच सकते हैं. संसार में सबके साथ रहना भी सीखते हैं. संगठन का गुण जगत में बड़े काम करने में सहायक है. राम कहते हैं, जो स्वयं अमानी रहकर दूसरों को मान देते हैं, वही कुछ करके जगत का कल्याण कर सकते हैं.

जो नश्वर को जानता है वह शाश्वत होता है, स्थायी होता है. वही वह है ! उसने अपने तन में होती संवेदनाओं को देखा, जो देखते-देखते नष्ट हो गयीं, क्योंकि वे नश्वर थीं. उनके मन में उठने वाली प्रत्येक भावना, कल्पना, विचार नश्वर है, वे जो उसके साक्षी हैं, शाश्वत हैं. वे व्यर्थ ही मन की कल्पनाओं को सत्य मानकर स्वयं को सुखी-दुखी करते रहते हैं. उन्हें तो इन्हें ये जब जैसी हैं वैसी मानकर आगे बढ़ जाना चाहिए.  

इस वक्त वह लॉन में झूले पर बैठी है, ठंडी हवा बह रही है. घास में, हरी घास में अद्भुत सुन्दरता है जो वे देख नहीं पाते पर ईश्वर उन्हें दिखाते हैं. वर्षा हो चुकी है सो सभी कुछ धुला-धुला सा है, हरा, निर्मल और शीतल..उसका हृदय भी ईश्वर के प्रेम से हरा-भरा है, निर्मल है और शांत है. सारी सृष्टि इस क्षण इतनी सुंदर लग रही है. पेड़ों की शाखाएँ व पत्ते हवा में सरसराहट उत्पन्न कर रहे हैं. रह रहकर कोई बूंद टप से गिरती है, दूर से घंटे की आवाज आई और फिर किसी पंछी की. उसकी किताब ‘इन्द्रधनुष’ छप कर आ गयी है. आज एक सखी की बेटी ने sms भेजकर कहा कि भगवद्गीता के लिए धन्यवाद तथा उसकी दोस्त भी पढ़ना चाहती है अंग्रेजी भाषा में. अच्छा लगा जानकर कि आज की पीढ़ी में भी ऐसे लोग हैं. नन्हे का मित्र आज चला गया, बेहद शांत व सभ्य विद्यार्थी, उस पर एक कविता लिखेगी. सबसे पहले उसने एक बुजुर्ग परिचिता को खबर दी किताब आने की, किताब में उसका फोटो ठीक नहीं आया है, उनका चुनाव ठीक नहीं था. आज दीदी व छोटी बहन दोनों से बात हुई, छोटे भाई की तबियत ठीक नहीं थी, उसके मन की पीड़ा ही उसे मजबूत बनाएगी. फुफेरी बहन से भी वह मिली, इतनी तकलीफ में भी हँस रही थी. ईश्वर उनमें से हरेक के साथ है, वही तो है, उनके दुःख उनके पथ के कांटे नहीं फूल बन जाते हैं, जब वे उन्हें उसी के द्वारा भेजा मानते हैं !

आज नन्हा वापस चला गया. कल शाम को जब सामान पैक करने का समय आया, जिसे वह जहाँ तक सम्भव हो टालता रहता है, तो वह उदास लग रहा था. नूना ने जब पैकिंग में सहायता करने की बात की तो पहले सदा की तरह मना किया पर बाद में मान गया. वह अपनी भावनाएं व्यक्त नहीं करता, मन में ही छुपा कर रखता है. मित्रों के साथ बहुत उन्मुक्त व्यवहार करता है. अच्छा लगता है कि उसके इतने मित्र हैं और सभी के साथ एक सा प्रेम. इस बार जाते समय तथा सामान सहेजते समय नूना की आँखें भर आयीं, ये मोह के नहीं प्रेम के अश्रु थे, जिन्हें सद्गुरू बहुमूल्य बताते हैं. इस समय वह कोलकाता पहुँच चका है, कल बंगलूरू वहाँ से परसों कालेज चला जायेगा. उसका मित्र भी उन्हें सदा याद रहेगा, पहले स्कूल का एक मित्र फिर कोचिंग का और अब कालेज का, ये तीनों घर में आकर भाइयों की तरह रहे. भाई तो आपस में झगड़ते हैं पर इनमें कभी मनमुटाव होते नहीं देखा, मित्रता का रिश्ता निभना नन्हा खूब जानता है. वर्षा पुनः तेज हो गयी है, माली जो बाहर काम कर रहा था, गैराज में चला गया है. उसे घर में कल से सफाई का काम शुरू करना है और आज से पत्र लिखने का भी !


Monday, May 19, 2014

द स्टुपिडस - एक मजेदार फिल्म


नये वर्ष का शुभारम्भ उनकी देर रात तक चलने वाली पार्टी से हुआ, वे सभी मित्र के यहाँ थे जब घड़ी ने बारह बजाए एक और वर्ष शुरू हुआ. घर लौटते-लौटते पौने एक बज गये थे, सुबह देर से आरम्भ हुई, नाश्ते के बाद चाय बागान में घूमने गये, ठंडी हवा बह रही थी. दोपहर बाद लॉन में बैठकर एक मित्र परिवार के साथ कैरम खेला, थोड़ी देर एक फिल्म देखी. जून के स्वेटर की शुरुआत की. हारमोनियम पर गला साफ किया, शाम होते होते जब ठंड बढ़ गयी थी, मफलर लपेट कर टहलने भी गये. यानि कुल मिला कर नये साल का पहला दिन विभिन्न गतिविधियों से भरपूर रहा.

आज ठंड बहुत बढ़ गयी है, नौ बजने को हैं पर अभी तक कमरे से बाहर निकलने का मन नहीं हो रहा. नन्हे ने star movies पर एक हास्य फिल्म देखी - The Stupids. उसे मगन होकर हँसते हुए देखना अच्छा लगा. परसों से उसका स्कूल भी खुल रहा है. अगले महीने उसकी परीक्षाएं हैं, नूना को उसे ज्यादा समय देना होगा. उसने क्लब की पत्रिका के लिए कविताएँ भेज दी हैं. कल लाइब्रेरी से वह चार नयी किताबें लायी, एक mills and boons भी, जून के दिल्ली जाने के बाद समय थोड़ा ज्यादा मिलेगा, तो किताबें साथ देंगी. उस दिन एक सखी को उनके घर से जाने के बाद सर्दी-जुकाम हो गया तो उसने फोन करके पूछा, एलर्जी वाली कोई वस्तु तो उन्होंने स्प्रे नहीं की थी, उसे अच्छा नहीं लगा, खैर, अस्वस्थ होने वाले को सब माफ़ है.

It is a pleasant morning, she has taken bath, washed her hair and feeling good, has prepared lunch also, jun is going today, he will have early lunch. Nanha is busy with his ever going home work. Last evening they played badminton after many weeks, nanha and she have decided to play it regularly. They went for a walk and then to a friend’s house, she is still having some cold. Read some lines from the book, “ The meaning of culture” it is a difficult book but she likes difficult books, they attract her even though she can not understand them.


Yesterday only jun gave her this new dairy, so she decided to fill the empty pages with new poems which she will write from time to time. She got her Bengali friend’s letter after a long gap, who is in London and when one is far from country he remembers it more. Today is Idul-Juha, she will make some sevian as they cooked  in Good Morning India. Got up  at  5 with jun, did exercise had healthy breakfast of grapes(black one which he brought from Delhi with cheeku) and oats. Read few mind stimulating pages from, “The Learning of Culture” written by John Cowper Powys. It tells one should keep some time for intellectual thinking and not always be busy in worldly matters as she was in last few days, even she did not get time for her favorite magazines and news papers. Now onward she will try to make balance in physical,mental, spiritual and intellectual aspects of life. Yesterday evening she got the prize for ‘walkathon’ that was a great walk, she wanted to win and win only. 

Wednesday, March 26, 2014

आणविक परीक्षण


एक और नये सप्ताह का शुभारम्भ ! मई महीने का अंतिम सप्ताह, आज मौसम फिर साफ है, धूप निकल आयी है, जो एक सखी के अनुसार दो दिनों की वर्षा की बाद भली लग रही है, पर उसे तो वही काले-कजरारे बादलों से घिरा आकाश और ठंडी हवा पसंद है. आज उसे क्लब जाना है शाम की मीटिंग की तैयारी करने. दफ्तर से लौटते समय जून के साथ वापस आएगी.

आज आकाश पर बादल चहलकदमी कर रहे हैं. कल दूसरा पेपर हल करने का प्रयास किया, एक कहानी लिखनी थी, वह तीन सौ शब्दों से ज्यादा नहीं लिख सकी, उन्हें एक हजार शब्दों  की कहानी चाहिए, उसे और श्रम करना होगा और समय देना होगा. सितम्बर से पहले उसे जवाब भेजना है. पिछले दिनों स्वास्थ्य ठीक न होने के कारण विशेष काम नहीं हो सका, अब से दोपहर को दो घंटे नियमित उसे बैठना होगा. अख़बार और पत्रिकाएँ शाम तक इंतजार कर सकती हैं. घर की सफाई का काम भी एकत्र हो गया है, शनिवार को घर में मेहमान आयेंगे, इसलिए घर बिलकुल साफ-सुथरा होना चाहिए. नन्हे की परीक्षाएं भी अगले महीने शुरू हो रही हैं, शाम को उसे भी वक्त देना जरूरी है. फिर कम्प्यूटर.. और सभी के जन्मदिन भी आ रहे हैं, कार्ड्स भेजने हैं. जीवन कितना व्यस्त रखता है.

कल छोटी बहन का पत्र आया, वह वहाँ खुश है, आर्मी की ड्रेस पहन कर जरुर स्मार्ट दिखती होगी उसे जल्दी ही पत्र लिखेगी. आज हिंदी पढ़ाते समय ‘सर्वेश्वर दयाल सक्सेना’ का एक लेख और ‘बच्चन’ की कविता पढ़ाई, बच्चन मधुशाला का प्रयोग करना नहीं चूकते प्रतीक रूप में. कल शाम मीटिंग में एक सदस्या को विदाई दी गयी, उनका भाषण अच्छा था और उनके गीत भी, उनकी तारीफ़ में कही गयी बातें सुनकर कभी-कभी थोड़ी उलझन हुई, पर तारीफ़ को भी खुले मन से स्वीकार करना सीखना पड़ता है हर इन्सान को. आज नन्हे का संगीत का इम्तहान है, वह गाने ठीक से गा पा रहा है, सिखाया जाये तो बच्चे बड़ों की अपेक्षा जल्दी धुन पकड़ लेते हैं. कल जून आशिकी का vcd लाये थे, पड़ोसी की मदद से कम्प्यूटर पर चल सका, पहले भी एक दो बार वह  मदद कर चुके हैं. कल क्लब में वह भी पड़ोसिन के साथ बैठी थी, वह शांत है और मृदुभाषी भी, उसने सोचा उन्हें चाय पर बुलाना चाहिए.

आज फिर एक चमकदार दिन है, पर अभी तक गर्मी असहनीय नहीं है, देश के कुछ भागों में तापमान ४० डिग्री से ऊपर हो गया है, समाचारों में सुना २४८ लोग गर्मी से मर गये हैं. कल शाम वे एक मित्र के वृद्ध माता-पिता से मिलने गये, वृद्ध दंपति बहुत हंसमुख था, खासतौर पर आंटी बहुत बातें कर रही थीं, वह उनसे पहले भी मिल चुकी है और हर बार उनसे मिलना उसे अच्छा लगता है. टीवी पर ‘जी साहेब’ आ रहा है बहुत रोचक कार्यक्रम है, All four character are very cute, smart, witty and humorous!  कल शाम जून देर से आये, कारण पूछा तो बोले, उसके ही काम से देर हुई. उसका फोटो कम्प्यूटर के स्क्रीन पर लाना चाहते थे, जिसे पहले छोटा करके स्कैन किया फिर फ्लॉपी में सेव किया और घर आकर कम्प्यूटर की हार्ड डिस्क में कॉपी किया. स्क्रीन पर जब नई ड्रेस में उसका फोटो आया तो वाकई अच्छा लगा और खुद पर गरूर भी हो आया कि जून उसे इतना चाहते हैं.

काश्मीर मे हालात बदल रहे हैं, कुछ दिन पहले वहाँ एक फिल्म की शूटिंग भी हुई और टूरिस्ट भी जाने लगे हैं. कल पाकिस्तान में भी पांच एटमी तजुर्बात किये गये और बाद में वहाँ आपात स्थिति लागू कर दी गयी. भारत के आणविक परीक्षणों के जवाब में किये गये इन परीक्षणों का क्या असर होगा यह तो समय ही बतायेगा, लेकिन बीजेपी की सरकार ने लोगों के मन में एक चेतना का विकास तो किया है चाहे उनका साधन या माध्यम हिंसा पर ही क्यों न आधारित हो, गाँधी के देश में लोग जब एटम बम बनाने से खुश हो सकते हैं तो यह मानकर भी चलना चाहिए कि वे कभी भी इसके उपयोग का खतरा मोल नहीं लेंगे, क्योंकि उसका परिणाम उन्हें स्वयं ही भुगतना पड़ेगा. आज उसे बाजार जाना है, कल के जन्मदिन के लिए.. जन्मदिन के दिन एक विशेष उत्साह रहता ही है, उसका लाभ उठाते हुए.. घर की विशेष सफाई कल होगी. कल उसने दोनों बहनों को पत्र भेज दिए, ऐसा क्यों होता है कि लडकियाँ या बहनें विवाह के बाद भी अपने पुराने संबंधों को कायम रख पाती हैं, माता-पिता से भाई-बहनों से जुड़ाव को महसूस करती हैं पर भाई ऐसा नहीं कर पाते, शायद बचपन से ही उन्हें अपनी भावनाओं को व्यक्त करना नहीं सिखाया जाता या वे इतने भावुक नहीं होते, कुछ भी हो वे तीनों आज भी एक-दूसरे की बात समझ पाती हैं, कुछ ऐसा है जो तीनों के दिलों में एक सा धड़कता है, साझा है वह तीनों का. काश ! भाइयों में भी ऐसा होता, हो सकता है वे तीनों भी अपने अंदर ऐसा ही महसूस करते हों !


Wednesday, March 19, 2014

सफलता के सात सुनहरे सूत्र


ठंडी हवा शीतलता दे रही है और हरीतिमा आँखों को सुकून. आज श्री अरविंद पर एक कार्यक्रम देखा, विलक्षण प्रतिभा के धनी श्री अरविंद महान चिंतक थे, भारत के प्रति प्रेम से परिपूर्ण, इस देश की यात्रा को आगे ले जाने वाले एक मनीषी ! कल शाम लाइब्रेरी से दो पुस्तकें लायी, तसलीमा नसरीन की ‘लज्जा’ और दीपक चोपड़ा की ‘Seven golden laws for success’. कल शाम ही पहला अध्याय पढ़ा, ध्यान, मौन और दूसरों का आकलन न करने का प्रण, तीन बातों पर जोर दिया है. घटनाओं, मनुष्यों, परिस्थितियों को आंकते चले जाने की आदत ही दुखी रखती है. कल दोपहर अखबर में ‘हरिवंश राय बच्चन’ का एक इंटरव्यू पढ़ा, काट कर फ़ाइल में रखने योग्य है. कल जून नन्हे के स्कूल गये थे, सभी टीचर्स से मिले, सभी ने उसकी तारीफ की तथा उपयोगी सुझाव दिए. हिंदी लेखन के कोर्स में एक प्रश्न प्रेमचन्द की कहानी ‘कफन’ पर है, जून ने कहा है कि वह हिंदी पुस्तकालय से उनकी पुस्तक ला देंगे. जून हमेशा सहायता करने को तैयार रहते हैं. आज वह उसे ‘सैकिया प्रिंटर्स’ भी ले जायेंगे, लेडीज क्लब के बुलेटिन लाने के लिए. आज महादेवी वर्मा की एक कविता पढ़ी, ‘जो तुम आ जाते एक बार’, अज्ञात प्रेमी के लिए उनकी तड़प स्पष्ट शब्दों में व्यक्त है. वह रहस्यमय व्यक्ति या शक्ति, अथवा ईश्वर कोई भी रहा हो, रचने की प्रेरणा उसी ने दी. किसी की प्रतीक्षा, प्रतीक्षा के लिए..जैसे कला कला के लिए.

शमशेर की कविता ‘उषा’ पढ़ाई, कविता अच्छी है, पर सीधी सपाट नहीं, नील जल में झिलमिल गौर देह... का क्या तात्पर्य है, सूरज या सफेद बादल.. सम्भवतः बादल ही. आज सुबह अलार्म सुनते ही उठ बैठे वे. रात को नूना दीपक चोपड़ा की किताब पढकर सोयी थी, सपनों को व्यवस्थित करती रही, वह कहते हैं, हर दिन मिलने वाले हर व्यक्ति को कुछ न कुछ देना चाहिए, चाहे वह एक फूल हो, एक शुभकामना हो अथवा कम्प्लिमेंट ही क्यों न हो ! कुछ देर पूर्व पड़ोसिन से बात हुई, उसकी तबियत फिर खराब है, अस्वस्थ होने को लोग इतना सामान्य क्यों मानते हैं, स्वस्थ रहना, चुस्त रहना तो हर एक का कर्त्तव्य है और जीवन का सबसे बड़ा सुख भी. इस वक्त, इस क्षण में वह स्वयं को बहुत स्पष्ट देख पा रही है, मानसिक स्तर पर कोई उहापोह नहीं है, जीवन से कोई शिकायत नहीं, कोई उलाहना नहीं देना. जो हो रहा है वही होना चाहिए था, इस सृष्टि में हर घटना के पीछे एक कारण है, भविष्य में जो होगा वह इस बात पर भी निर्भर करेगा कि वर्तमान में कोई क्या कर रहा है. यदि वर्तमान संतुष्टि प्रदान करता है, उसे अपने लाभ के लिए साधा जा सकता है. अपने लाभ में अपने परिवेश का, अपने परिचितों का, समाज का सबका लाभ है.

जो क्रम उसने सुबह निर्धारित किया था, अभी तक तो उसके अनुसार चल रही है, आधा घंटा ध्यान, आधा घंटा व्यायाम, आधा घंटा लेखन..इसी बीच दो फोन भी कर लिए. एक सखी से बात की तो लगा...नहीं उसे किसी का मुल्यांकन नहीं करना है, वह जैसी है, वैसी है, और जैसा सोचती है उसे वैसा सोचने का हक है. अंततः आज उनका कम्प्यूटर इंस्टाल हो गया, जून और नन्हा दोनों उसमें व्यस्त हैं, उसे भी बुलाया तो हाथ जोड़कर उसने माउस पर हाथ रखा, हल्के से छूने पर भी स्क्रीन पर चित्र बदल जाते हैं, उसमें वे गीत सुन सकते हैं, चित्र बना सकते हैं, लिख सकते हैं, फिल्म देख सकते हैं, जितने CD उनके पास हैं अभी सारे नहीं देखे हैं. एक नई दुनिया के द्वार उनके लिए खुल गये हैं.

जून को कुछ देर पहले फोन किया, लगा, जैसे कोई उनके पास बैठा था, सो, ‘ठीक है’, ‘हाँ’ के अलावा कोई उत्तर नहीं दे रहे थे. आज एक सखी के विवाह की सालगिरह है, उसके लिए एक कविता लिखने का प्रयास किया. कल सुबह नहाते समय उसकी आंख में रीठे-आंवले का पानी चला गया था, अभी तक हल्का दर्द है. अभी ग्यारह भी नहीं बजे हैं पर धूप इतनी तेज है कि लगता है दोपहर बाद का वक्त हो. आज से खिड़कियाँ खोलकर रखने के दिनों की शुरुआत हो गयी है और  हल्के रंगों के ढीले-ढाले सूती वस्त्र पहनने के दिन भी, जो सर्दियों की शुरुआत में सहेज कर रख दिए गये थे. उसे अचानक महसूस हुआ आज कहीं कुछ छूटा हुआ सा लग रहा है, जैसे कोई बहुत जरूरी बात कहीं रह गयी हो. वर्तमान में रहने के सुनहरे नियम के अनुसार उसे फ़िलहाल तो किचन में जाना चाहिए. खिड़की से गन्धराज के फूलों की और कमरे में रखे गुलाब की बासी मीठी महक हवा में भर गयी है.  



Tuesday, March 11, 2014

कागजी अखरोट


टीवी पर काश्मीर से सम्बन्धित एक धारावाहिक ने बाँध लिया है, काश्मीर में जब यूरोपियन और अमेरिकी पर्यटकों को बंधक बनाया गया था, उसी घटना का कथात्मक चित्रण किया गया है, लोगों की परेशानी, आर्मी व पुलिस की कार्यवाही, पत्रकारों और टीवी चैनल की नई कहानी पाने की इच्छा, सभी का वर्णन अच्छा है. अपह्रत व्यापारी की पत्नी का दुःख, ड्यूटी पर जाते हुए पुलिस अधिकारी की पत्नी का उससे कागजी अखरोट और केसर लाने की फरमाइश करना. असमिया समाचारों ने बचा लिया वरना उसका सारा कार्य वहीं का वहीं रह जाता और टीवी के सामने से हटने का मन नहीं करता. कल शाम वे टहल कर लौटे तो दो मित्र परिवार मिलने आये, तब महसूस हुआ, आजकल घर की साज-सज्जा पर उसका ध्यान थोड़ा कम है, अब जून के बाहर जाने के बाद पूरी सफाई करेगी. सुबह-सुबह बड़े भाई से बात हुई, माँ-पापा अभी तक डॉक्टर के पास नहीं गये हैं, ईश्वर की मर्जी मानकर वे अपनी अपनी समस्या को ख़ुशी ख़ुशी सह रहे हैं. इन्सान का मन कितने भुलावों की रचना कर लेता है. स्वयं को सुरक्षित रखने के लिए आसपास कितनी ही दीवारों की रचना कर लेता है. शायद वृद्धावस्था में वह भी ऐसी ही हठी हो जाये. आज सुबह Frankenstein दुबारा पढ़नी शुरू की, बहुत रोचक पुस्तक है.
कल शाम नन्हा थका हुआ लग रहा था, आज सुबह उठा तो उसे उसका बदन गर्म लगा पर शायद यह उसका वहम हो क्योंकि वह ठीक महसूस कर रहा था. आज से उसे एक घंटा खेलने के लिए जाने को कहा है, पिछले चार-पांच दिनों से मित्रों से बिलकुल दूर हो गया है. आज  मौसम गर्म है, पंखा सुहावना लग रहा है. उसने भरवां आलू-बैगन बनाये हैं, जो माँ ने बचपन की एक गर्मी की शुरुआती शाम को बनाये थे. जब गर्मियां शुरू होती थीं तो उनकी रसोई बाहर आ जाती थी. वे भी क्या दिन थे ! कल शाम जून और वह दूर तक घूमने गये, अगले आठ दिन उसे अकेले ही टहलना होगा शाम को अपने ही घर में.  सुबह उसने सोचा जून के तैयार होने तक घर पर फोन कर लेगी, पर पता नहीं ध्यान कहाँ था, शायद अपने को गर्व के पर्दे के पीछे छिपा लिया था, लोकल फोन पर एसटीडी नम्बर मिला रही थी. सारा घमंड पानी-पानी हो गया जब जून ने उसे ऐसा करने से रोका. हर पल स्वयं पर नजर रखनी बेहद जरूरी है नहीं तो उसे भटकने में देर नहीं लगती. कल रात उनके बेडरूम के रोशनदान में एक साथ सैकड़ों काले चींटे आ गये, जून ने पहले एक चींटे को मारा  तो नूना ने उसे मना किया पर कुछ ही देर में उन्हें उन सभी को मारना या बेहोश करना पड़ा. अभी भी इक्का-दुक्का कमरे में घूम रहे हैं, उनके लिये तो कयामत का दिन कल ही था.
अभी आठ ही बजे हैं पर सूरज आकाश में ऊंचा चढ़ आया है. आज सुबह जून ने उसे कालिमा में उगता हुआ लाल सूरज दिखाया, अनुपम था वह दृश्य ! उसे लगा जैसे नेहरू की काली अचकन पर  लाल गुलाब सा उषा का सूर्य और गाँधी के मौनव्रत सी शांत सुबह ! वे दोनों चले गये, उसने घर संभाला और भगवद् गीता का एक अध्याय पढ़ा, कुछ देर ध्यान किया और अब लिखने बैठी है. ध्यान करने बैठी थी तो मन में उपन्यास के पात्र घूमने लगे, कभी भोजन में क्या बनाना है आदि पर इस समय मन एकदम खाली है. जून शाम को दिल्ली पहुंचकर फोन करेंगे. नन्हा खेलने गया है, उसे गणित पढ़ाते समय बहुत अच्छा लगा, जल्दी समझ जाता है, उसने मन ही मन अपने अध्यापकों को धन्यवाद किया जिन्होंने उसे पढ़ाया था. अरुंधती राय की वह किताब आज समाप्त हो गयी, उसकी भाषा कितनी अलग है, आज वह उसे लाइब्रेरी में जाकर वापस कर देगी ताकि कोई और पढ़ सके. जून जाते-जाते भी उनके लिए सब्जियां और काजू देकर गये, कितना ध्यान है उन्हें परिवार का और कितना स्नेह !  





Friday, December 27, 2013

रहीम के दोहे


कल शाम को उसे एक फोन कॉल आया, उसे क्लब की अगली कमेटी में जॉइंट सेक्रेटरी का पद  भार सम्भालना है. ख़ुशी हुई, उसने सेक्रेटरी को धन्यवाद दिया जिसने उसका नाम सुझाया था. उसे बाद में लगा वह ठीक से अपनी बात कह भी पाई या नहीं पर अगले ही पल मन ने कहा, भावना देखी जाती है शब्द नहीं. उसे एक और बात याद आई, God gives in the evening if takes in the morning. उसने सोचा वह पूरी निष्ठा से उस काम को करेगी जो उसे सौंपा जायेगा. तीन वर्ष पूर्व वह इस क्लब की सदस्या बनी थी.

आज आसू ने असम बंद की घोषणा की है. नन्हा और जून घर पर हैं. आज धूप बहुत तेज है और गर्मी भी उतनी ही ज्यादा. कल शाम कक्षा चार के एक बच्चे की हिंदी ट्यूशन के लिए एक फोन आया पर जून के अनुसार उसे छोटी कक्षाओं को नहीं पढ़ाना चाहिए, छोटे बच्चों को सम्भालना व पढ़ाना ज्यादा कठिन है बनिस्बत बड़े बच्चों को. उसकी छात्रा जैसी किसी गम्भीर बालिका को पढ़ाना सरल है. कल घर से फोन पर एक उल्लास भरा समाचार आया अक्तूबर में वे सब यहाँ आएंगे.

आज फिर असम बंद है, गर्मी आज हद से ज्यादा है, वे तीनों एसी कमरों में बैठे हैं और ठंडक का आनन्द ले रहे हैं. नन्हा पढ़ रहा है, जून गाँधी जी की एक किताब जो स्वास्थ्य से सम्बन्धित है, पढ़ रहे हैं, उसने कुछ देर क्रोशिए से काम किया और अब लिखना शुरू किया है. Few minutes ago she was hearing news on TV and was not able to concentrate wandering mind for two consecutive news items. Mind always wanders here and there, it demands attention for every second otherwise it slips away like sand through the palms. Today they vacuumed clean their house, took lunch at 11.30 rested for a while and since then doing all above said work. Life at present is sailing smoothly in cool breeze coming from their new AC in Nanhs’s room. Yesterday by mistake she wrote down on next  page and adjoin g empty page was attracting her to pen some thing new and refreshing like Dohas of Rahim, she read some time before.

जीवन एक पहेली है जो बूझे सो ज्ञानी
सपनों सा संसार है आँख खुले तो फानी

हवा, धूप, माटी, गगन और अनल की मूरत
अंतर में जो झांक ले दिखे उसी की सूरत

चिंता, लालच, डाह, प्रमाद, मन के ये व्यापार
तज कर उस की शरण ले उतरे सागर पार

बीता जो वह न रहा भावी से अनजान
जो पल अपने सामने उसकी कीमत जान

यह जग एक सराय है पक्का नहीं मुकाम
आना-जाना अटल है रहने का नहीं काम

सूरज, धरती से मिला अनगिन कर फैलाये
वसुधा कातर प्रेम से फूल अश्रु बरसाए

After so many days clouds have shown their grace and it rained in the morning. At this moment weather is cool, garden is green after a shower. She got up early, perhaps 6 and ½ hours  sleep was not enough, eyes are yearning/paining to be closed but there are so many works and miles to go before she sleeps. Today she has to go music class also. Nanha went to school in a crowded bus today could not get seat also. After two days of ‘BAND all buses have not come today.
  



Wednesday, September 11, 2013

अमरूद का पेड़


आज सुबह वह एक नई परिचिता से मिलने गयी, अच्छा लगा उसका घर, बातें कुछ ज्यादा ही करती है, इतनी सी देर में अपने घर-परिवार के बारे में कई बातें बता गयी. वाणी पर संयम तो वह खुद भी नहीं रख पाती है, जून को कितनी बातें कह दीं, आत्मसंतोष में डूबा हुआ मन हवा के एक झोंके से बिखर गया, शायद यह उसका संस्कार है, innate quality, जून के शब्दों में. पिता का पत्र आया है, उन्होंने उन प्रश्नों एक उत्तर या कहें उन शब्दों के अर्थ लिख भेजे हैं जो उसने पूछे थे. कल से हक्सले की किताब भी पढ़ेगी, संसार में इतना ज्ञान है कि सौ जन्म भी लेने पड़ें तो पूरा ज्ञान प्राप्त नहीं किया जा सकता, किन्तु आत्मज्ञान से बढकर कोई ज्ञान नहीं, उसकी जैसे स्थिति है उसमें तो यह बहुत आवश्यक है कि मन को सदा सजग रख पाए, विकारों से दूर, शांत और पवित्र, कहीं कोई उहापोह नहीं, कोई विक्षोभ नहीं, हर स्थिति में गम्भीर, एकाग्र, उस एक में जो अनेक रूपों में दिखाई देता है. वह जो अंदर कहीं सोया हुआ है.

आँखें नींद से बोझिल थीं और मन जैसे पूरी तरह सजग नहीं था, प्रमादवश सुस्ता रहा था और उसके हाथों की किताब The perennial philosophy by Aldous Huxley कब गिर गयी पता ही नहीं चला. दोपहर से जून के जाने के बाद से यह पुस्तक पढ़ने का प्रयत्न कर रही थी पर विषय इतना गम्भीर है और वैसे भी लंच में दही-चावल खाया था, शायद इसी कारण नींद ने धर दबोचा. कई दिनों से अलमारियां ठीक करने की सोच रही थी पर लगता है आज नहीं होंगी. नन्हे के आने का वक्त हो चला है. बहुत दिनों के बाद टीवी खोला है, ‘शांति’ इतना आगे बढ़ गया है की कुछ समझ में नहीं आ रहा, वैसे भी अब इसमें मन नहीं लगता.

शाम के पांच बजने को हैं, जून दफ्तर से आकर आराम कर रहे हैं, नन्हा टीवी देखते हुए ड्राइंग बना रहा है, उसे बगीचे में गुलाब के पौधों की देख रेख के लिए जाना है, पर धूप अभी भी तेज है. सुबह दादा की बातें सुनीं, उनसे प्रेरित होकर उसने मृत्यु पर एक कविता लिखी, आज एक सुंदर वाक्य उन्होंने कहा-
In other living creatures ignorance of self is nature; in man it is vice.

आज शाम वे एक मित्र के यहाँ गये और अपने पेड़ के अमरूद भी दिए, यानि उस पेड़ के जो खुशकिस्मती से उनके बगीचे में लगा है लेकिन न ही उन्होंने इसे लगाया है और न ही जब वे यह घर छोडकर जायेंगे तो उनके साथ जायेगा यानि अपना तो नहीं हुआ न, पर लोकाचार की भाषा में ऐसा ही कहते हैं, पर जब मन सजग रहे और भाषा व वाणी पर नजर रखे तो अपना पेड़ कहना खटकता जरुर है.

कल इतवार था, बहुत दिनों के बाद जून ने सिन्धी कढ़ी बनाई, उसने सारे खतों के जवाब दिए, मंझले भाई को भी राखी भेज दी, आजकल वह नियमित और अच्छे खत लिखता है. आजकल सुबह नन्हे को जबरदस्ती उठाने में फिर मेहनत करनी पडती है, पर जब क्लब से टाईकांडू सीखकर आता है तो बहुत खुश होता है. सुबह-सुबह डांटना उसे अच्छा तो नहीं लगता पर सोचती है सीखने का उसे शौक है तो कुछ तो त्याग करना ही पड़ेगा. उसे लगा घंटी बजी, पर बाहर जाकर देखा तो कोई नहीं था, लगा, कहानियाँ सोचती है तो कहानियाँ गढती भी है.

शाम के सवा छह बजे हैं, जून अभी तक दफ्तर से नहीं आए हैं, ईश्वर से प्रार्थना है उनका वह उपकरण ठीक हो जाये जिस ठीक करने कोई इंजीनियर आए हैं, और जिसकी वजह से कल भी वह सात बजे आए. नन्हा आज सुबह क्लब गया तो नौ बजे वापस आया जबकि रोज साढ़े छह बजे आ जाता है, पर वह परेशान नहीं हुई, जून की कही बात याद थी, कभी भी नकारात्मक नहीं सोचना चाहिए. आज कई दिनों से चल रही स्वीपर्स की हड़ताल भी खत्म हो गयी.

होठों पे हँसी आँखों में ख़ुशी सी क्यों है
महकी-महकी सी हवा धूप गुनगुनी क्यों है

पा चुके क्या उसका पता ओ मुसाफिर
जमीं थी कदमों तले आसमा क्यों है

दिल ही दिल में बुने ख्वाब उल्फत के
मौसमों को फिर इनकी खबर क्यों है




Wednesday, July 24, 2013

बैड नहीं गुड मिन्टन

अभी-अभी बैडमिन्टन का एक थकाने वाला गेम खेलकर प्रसन्नचित वह घर वापस आई है, जून सवा छह तक आएंगे, घर कितना शांत है, केवल घड़ी की टिक-टिक सुनाई दे रही है. नन्हा पढ़ाई में व्यस्त है सो लिखने का यह सर्वोत्तम समय है कम से कम उसके लिए, वरना लिखने वाले तो ट्रेन में भी लिख लेते हैं. दरवाजा खोलते समय नन्हे ने कहा, नैनी की बेटी आयी थी, जरुर कोई छोटी-मोटी वस्तु मांगने आई होगी, वह कुछ देर बाद पूछेगी, अभी तो साँस तेज चल रही है, आते वक्त सड़क खाली थी तो कुछ दूर तक दौड़ कर आयी, उसे अच्छा लगता है ठंडी हवा को चेहरे पर महसूस करते हुए हल्के धुंधलके में अकेले चल कर आना, पीपल की पत्तियों से झांकता चाँद (पूर्णिमा का लगता है) देखकर मन में एक कविता जग उठी. अभी पौने छह बजे हैं, बाद में वे सब एक मित्र परिवार से मिलने जायेंगे. यहाँ बैठक के इस कोने में मच्छर मोजों के ऊपर से पैरों में काट रहे हैं, उसे आश्चर्य हुआ, इतनी ठंड में भी मच्छर सही-सलामत हैं.
अभी-अभी वह घर लौटी है. सुबह के व्यायाम के बाद उसे जैसा अच्छा महसूस होता है, वैसा ही खेल कर भी. जून ने आज उसे एक गाइड दी है ‘अक्षर’, जो कम्प्यूटर पर हिंदी में काम करने में सहायक है, आज से वह इसे पढ़ेगी और शनि व रविवार को अभ्यास करेगी. जहाँ चाह वहाँ राह..कितनी बार और कितने तरीकों से ईश्वर उसकी सहायता करते हैं, वह उनकी आभारी है.
आज शनिवार है, सुबह नींद अपने आप ही जल्दी खुल गयी, नन्हे का अवकाश है. आंवले का मुरब्बा बनाने का दूसरा चरण शुरू हुआ. शाम को जून के दफ्तर गये, कम्प्यूटर पर हिंदी में कुछ पंक्तियाँ लिखीं और एक गेम खेला. बाजार से गाजर-पालक के बीज और फ्लौस्क के बीज लिए, जो कल सुबह लगा देंगे. कल शाम पंजाबी दीदी के पति उनका एक खत और कुछ पकवान लेकर आये, उन्होंने रिटायर्मेंट के बाद एक कम्पनी ज्वाइन कर ली है, उसी के सिलसिले में आए थे.

अभी कुछ देर पूर्व ही वे सांध्य भ्रमण से वापस आए हैं और उसे रास्ते भर यह अहसास होता रहा, रोज वह वास्तव में अकेली होती थी आज साथ होते हुए भी अकेली है, जून चुपचाप रहे सारे रास्ते, शायद किसी चिंतन में व्यस्त, और संवाद हीनता की यह स्थिति भी शायद वही महसूस कर रही है, अन्यथा वह इसे दूर करने का प्रयास तो करते ही. किसी ने सच कहा है डायरी भी एक मित्र के समान है यदि किसी के पास कोई ऐसा नहीं जिससे वह दिल की बात कह सके तो इसके पन्नों को ही हाले-दिल सुना दे, सब कुछ सुनकर वे दिल का भार तो हल्का कर ही देगें. 

Friday, July 12, 2013

घर की सफाई


आज मन शांत है, स्थिर और उदासी का नामनिशान भी नहीं, दर्द है, बेचैनी है मगर उसे सहने की ताकत भी है, परेशानी तभी बढ़ती है जब कोई पीड़ा से भागना चाहता है. ईश्वर की बनाई हुई इस दुनिया में, प्रकृति में जो जैसा है उसे वैसे ही स्वीकारना होगा. अंत में सब ठीक हो ही जाने वाला है, दोपहर को फिर से डाक्टर के पास जाना है, वह एक बजे तक आ जायेंगे, वह अर्थात जून. सोमवार को भी जाना है, यानि दो दिन बाद, सो खतों का जवाब इन दो दिनों में ही दे देना होगा. कौन जाने, भविष्य में क्या छिपा है ? पिछले दो-तीन दिन से जो ख्याल मन में छाया हुआ था, एक दूसरी दुनिया का ख्याल, अपने आप पीछे छूट गया है. अपने आप को खोल कर रख देने से ही शायद यह सम्भव हुआ है. अन्तर्मुखी होना हर वक्त अच्छा नहीं होता...स्वास्थ्य के लिए, कल यही कहा था उसकी सखी ने, वह आत्मविश्वास से भरी थी, प्रसन्न और बातूनी.. आज उन्होंने छोटी बहन से बात की वे लोग अक्तूबर में आ रहे हैं. उसके पहले घर की सफाई करनी होगी, उसने सोचा, तबियत ठीक होते ही लगना होगा. कितना सारा काम है, अलमारी की सफाई, सारी क्राकरी भी धो-पोंछ कर रखनी होगी. और सारी दराजें भी साफ करनी हैं, पूरा एक हफ्ता लगेगा.
मौसम आज भी अच्छा है, बादल हैं, सो धूप तेज नहीं है, हवा चल रही है सो अमलतास की डालियाँ रह-रह कर हिल उठती हैं. दर्द कम है कभी बिलकुल भी नहीं सो वह अपने सभी कार्य व्यायाम को छोडकर कर पा रही है. अभी अभी पी टीवी पर एक मजाहिया खेल देखा, सीधीसादी सी भाषा और पात्र भी भोले भाले, महमूद साहब हमारे जहीर साहब से कितने मिलते-जुलते हैं और जहाँआरा की भाषा पश्चिमी उत्तर प्रदेश की भाषा जैसी ही है. उसका गला अभी भी ठीक नहीं हुआ है, कुछ देर पहले तुलसी की चाय पी. उसकी सखी ने आज सुबह-सुबह फोन किया, वह उसके प्रति कृतज्ञता से भर गयी. वह लिख रही थी, तभी घंटी बजी, गोबर वाला था, उसने एक ठेला लिया, गुलदाउदी के पौधे लगाने के लिए. बाद में माली गोबर, मिटटी व बालू को मिलाकर गमलों में भरेगा. उसने सोचा बहन के आने के पूर्व उसे गमले तैयार कर लेने हैं.

Today she is restless. Mind is wondering and she is not able to concentrate it at one place. Tomorrow is the D day, they were waiting for it since last 20 days.

She wrote her favorite lines-
The woods are lovely dark and deep
But I have promises to keep
And miles to go before I sleep
And miles to go before I sleep

She read in a book-

In every thing that happens there is a hidden meaning of mercy ie there is a hidden blessing.

So whatever comes greet that experience? Everything happens at right time. Rejoice at everything that happens to you. It has come to you as gift of God.

Everyday we should practice some silence.

Have child like trust in Him. The day on which you have not helped other is a useless day.

It is your birth right to live in the divine presence of God.




Monday, July 1, 2013

बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत


आज आखिर असमिया का गृहकार्य पूरा हो गया, मैडम ने पत्र लेखन का कार्य दिया था, जो उसके लिए कुछ कठिन था. जून को भी अभी तक समय नहीं मिल पाया है, आज वह  लंच पर भी नहीं आ रहे हैं, सुबह टिफिन साथ लेकर गये हैं, उसने सोचा है जब जोरों की भूख लगेगी तब अपने लिए फुल्के सेंकेगी. वह स्नानघर में थी तब एक फोन बजा, पता नहीं किसका हो, शायद जून का ही हो. आज भी मौसम बादलों भरा है, लगता है इस बार गर्मियां पड़ने वाली ही नहीं हैं. कल रात कुछेक मधुर स्वप्न देखे, एक में जूही चावला को भी देखा, सुंदर कपड़ों के ढेर में.

उस दिन सिलचर से आते वक्त मन में कितने प्रण किये थे, स्वयं से कितने वायदे किये थे, किन्तु किसी ने सही कहा है, मैन प्रपोज़ेज गॉड डिस्पोज़ेज, ईश्वर की यही इच्छा है कि वह अपना जीवन जून और नन्हे की देखभाल करते हुए घर का माहौल शांत व सुखद रखते हुए बिताये, घर से बाहर जाकर काम करना अथवा घर में रहकर भी ऐसा काम जिसमें आर्थिक लाभ हो उसके वश में नहीं है. यूँ देखा जाये तो उन्हें इसकी जरूरत भी नहीं है. नन्हा उनके साथ रहकर ही अच्छी तरह पढ़ सकता है, उसे हॉस्टल भेजने का ख्याल दिल से निकाल देना ही बेहतर होगा. जिन्दगी जैसी है उसे वैसी ही जी जाये तो इसमें तनाव कम है. कल जून पौने चार बजे आ गये थे, थके हुए थे पर उसके कहने पर असमिया कक्षा के लिए मान ही  गये. पत्र में ज्यादा गलतियाँ नहीं थीं, पर मैडम के पढ़ाने का तरीका कुछ अनोखा ही है, वह  उनसे पूछ कर उन्हें पढ़ाती हैं. खैर, उन्हें पढ़ना अच्छा लगता है. कल शाम उन्होंने नन्हे का नया बोर्ड गेम खेला जो उसके जन्मदिन पर लाये थे, अत्यंत रोचक खेल है.

आज भी मूसलाधार वर्षा हो रही है, नौ बजे नन्हे को बस में बैठाकर जब घर में दाखिल हुई तो मन कृतज्ञता से भर गया. कितनी भाग्यशाली है वह कि एक सुंदर सा घर दिया है ईश्वर ने. वर्षा, धूप, गर्मी और दुनिया भर की आपदाओं से मुक्त एक छत, जिसके नीचे वे सुरक्षित हैं. कैसे रहते होंगे वे लोग जिनके पास कोई घर नहीं होता. नन्हा अवश्य ही स्कूल बस से उतरकर कक्षा में जाते वक्त भीग गया होगा. अभी कुछ देर पूर्व उनकी बैक डोर पड़ोसिन का फोन आया, बाढ़ पीड़ितों के लिए पुराने कपड़े चाहियें, शाम को ही जून से कहकर सूटकेस उतरवाएगी, कुछेक कपड़े निकल ही आएंगे. कल का नन्हे के नाम पत्र व जन्मदिन का कार्ड आया, दीदी से छोटी बहन हर बार मिल पाती है, वह खुद कब मिल पायेगी ईश्वर ही जानता है.
उसने भी नन्हे के लिए जन्मदिन का गीत लिखा..


हवा, पानी और इस संसार की जितनी भी अच्छी चीजें हैं
इस जन्मदिन पर उन्हें ईश्वर का उपहार मानकर देखो
प्यार जो नसों में खून के साथ बहता है
हँसी जो शिराओं में हर उस वक्त खुली रहती है, जब मन साफ-शफ्फाफ होता है
प्यार, हँसी और इस संसार की जितनी अच्छी खुशबुएँ हैं
इस साल उन्हें उपहार मानकर देखो !