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Thursday, February 20, 2014

धूप के कतरे


क्लब की प्रेसीडेंट का फोन आया, उन्होंने कार्यक्रम की थीम के लिए कुछ नाम पूछे, वह फोन पर बहुत विनम्रता से, मधुर आवाज में बात कर रही थी. उसने कुछ शब्द बताये, आड़ोलन, आह्वान, आह्लाद, स्फुरण, स्पंदन, समन्वय, तारतम्य, अनुराग, शुचिता, अनुरक्ति, मकरंद, पराग, किसलय आदि, पर कोई भी शब्द उनके दिल को स्पर्श नहीं कर सका. आज नन्हे ने सुबह उठने में फिर नखरे किये, ठंड में बिस्तर से निकलने का उसका मन ही नहीं था. उन्होंने टीवी पर एक साथ बैठकर क्रिकेट मैच देखा, भारत ने पाकिस्तान को हरा कर बांग्लादेश का independence cup  जीत लिया.

रात्रि के पौने दस बजे हैं, सुबह से लिखने का समय अब मिला है, वह भी उसने चुराया है, जून तो सो जाने को ही कह रहे हैं. आज दिन अच्छा था, सुनहरी धूप से भरा हुआ. एक दिन की धूप से ही ठंड कम हो गयी है. संगीत की कक्षा ठीक रही पर उसे लगता है जितना सहज होकर वह  अभ्यास करती है वहाँ वह सहजता खो जाती है. अगले हफ्ते उनका हारमोनियम भी आ जायेगा. सुबह माँ ने कपड़े प्रेस कर दिए थे. उसने नाश्ते में पोहा बनाया था, उन्हें पसंद आया, माँ-पापा को भी यहाँ रहना अच्छा लग रहा है, और उनका जीवन भी पहले से कहीं ज्यादा भरा हुआ हो गया है. उसने ध्यान दिया है कि आजकल मन एक अलग तरह से शांत रहता है. बैकडोर नेबर के यहाँ गयी, जिसने घर में ही ब्यूटी पार्लर खोला है, पर वहाँ वह ‘मिस इंडिया’ की माँ का फेशियल करने में व्यस्त थी, उनके गर्व भरे शब्दों व उनकी बेटी की बातें उनके मुंह से सुनीं, TOI में उसका फोटो भी देखा. पहली बार असम की कोई सुन्दरी प्रतियोगिता में विजयी हुई है. शाम को उनकी मीटिंग सामान्य रही, इतने से काम के लिए सभी area coordinators को बुलाना व दो घंटे बिठाए रखना सार्थक नहीं लगा, खैर ! अभी तक भी थीम के लिए सही शब्द नहीं चुना जा सका है, महिलाओं से सम्बन्धित ऐसा शब्द उन्हें चाहिए जो उनके बारे में सब कुछ कहता हो !

जून अभी-अभी गये हैं छाता लेकर, सुबह से जो बादल झींसी के रूप में बरस रहे थे अब तेज हो गये हैं. आज भी पार्लर का अनुभव कुछ अलग ही रहा, एक तो समय बहुत लगाया, दूसरे घरों में काम करने वाली चार-पांच लडकियाँ भी आ गयीं, उस छोटे से कमरे में इतने लोग, क्यों न हों, आखिर वे उसकी क्लाइंट थीं. माँ सुबह से जून के स्वेटर में डिजाइन डालने का प्रयास कर रही थीं, काम चाहे कठिन हो अगर उन्हें विश्वास हो कि कर सकेंगी तो वह उसे छोडती ही नहीं हैं और अगर थोड़ा सा गलत हो जाये तो पूरा खोलने में जरा भी हिचकिचाती नहीं हैं. दोपहर को टीवी पर दूर दर्शन के धारावाहिक देखती हैं, औरत, अपराजिता और वक्त की रफ्तार....आदि. पिता दिन भर कुछ न कुछ पढ़ते रहते हैं, लाइब्रेरी से वे किताबें लाये थे, एक लता मंगेशकर पर लिखी किताब दूसरी सरदार पटेल के जीवन पर. शाम को जून उन्हें सांध्य भ्रमण पर ले जाते हैं. उसने सोचा, जून हैरान होते होंगे यह देखकर कि आजकल नूना दोपहर के भोजन से पहले फल और बाद में कोई स्वीट डिश वह कितने आराम से खा लेती है, इन्सान का बचपन साये की तरह सदा उसके साथ लगा रहता है.

नेता जी का जन्मदिन, आज धूप सुबह से ही भरपूर निकली है, जमीन का कतरा-कतरा धूप से भर गया है. दोपहर उन्होंने लॉन में गुजारी, घास पर फूलों के बीच, मगर सूरज की तरफ पीठ करके. नन्हा आज सर्दी खांसी के कारण स्कूल नहीं गया था. जून का फोन आया है, वह उसे डॉ के पास ले जाने आ रहे हैं. एक परिचिता अस्पताल में है, उसने सोचा वह भी उसे देखने चली जाएगी.

पिछले दो-तीन दिन डायरी नहीं खोली, इतवार को वे तिनसुकिया गये थे, माँ-पापा ने केन का कुछ सामान खरीदा और कुछ तांत की साड़ियाँ भी. उसका चिर-प्रतीक्षित हारमोनियम खरीदने का स्वप्न भी पूरा हो गया, पर अभी उँगलियाँ अभ्यस्त नहीं हो पा रही हैं, संकोच वश पूरी आवाज से गा भी नहीं सकी, सभी लोग घर में थे. कल छब्बीस जनवरी का अवकाश था, टीवी पर ‘सरदार बेगम’ देखी, श्याम बेनेगल की एक फिल्म. आज सुबह उसने बहुत दिनों बाद statistics पढ़ाई. हिंदी का कोर्स समाप्त हो गया है. उस दिन बहुत दिनों बाद असमिया सखी आई, पहले की तरह कुछ नुक्ताचीं और कुछ प्रशंसा के भाव से भरी...कल शाम वे एक मित्र के यहाँ गये, वे यहाँ के जीवन से अन्तुष्ट हैं, कहीं भी और जाना चाहते हैं, पर उसे यह स्थान पसंद है, यहाँ की हवा, मिटटी, सुगंध सभी कुछ ! उसकी खुशियाँ उसके विचारों और कार्यों पर आधारित हैं न कि किसी बाहरी वस्तु पर.








Sunday, November 17, 2013

नेता जी की जन्म शताब्दी


रात्रि के आठ बजने वाले हैं, आज सुबह से ही व्यस्तता ने घेरा हुआ है, इस वक्त थोड़ा सा रुक कर सुस्ताने का मन हो रहा है. सुबह से ग्यारह बजे तक रोजमर्रा के कामों में व्यस्त रही. आज जून की पसंद की भरवां टमाटर की सब्जी बनाई थी. दोपहर को कुछ देर ‘संडे’ पत्रिका पढ़ी, फिर गुलाबी कपड़े के तीन रुमाल काटे और नन्हे के आने के बाद कल की पिकनिक के लिए पनीर  मसाला बनाने की शुरुआत की. जिसमें डेढ़ घंटा लगा. शाम को टहलने गये और वह गैस से कुकर  उतर कर रखना भूल गयी आग बहुत धीमी थी फिर भी लौकी-वड़ी की सब्जी पानी सूखने से बुरी तरह जल गयी. जून ने अपना स्पेशल बूंदी का रायता बनाया है और चखने के लिए पनीर मसाला तो है ही.

पिकनिक से वापस आकर रात के खाने की तैयारी करके और नहा धोकर आराम से बैठने के बाद अच्छा लग रहा है, नन्हा अपना बचा हुआ होमवर्क पूरा कर रहा है. विशेष थकान भी नहीं है, सुबह ७.२० पर वे घर से चले थे, कुल मिलाकर पिकनिक अच्छी रही, कुछ फोटो भी खींचे. नदी का पानी ठंडा था और उसमें देर तक बैठे रहने से ठंडक का अहसास भीतर तक हो रहा था, किनारे पर बिछी थी स्वच्छ रेत.. सभी खुश थे.

Today something is somewhere wrong ! Jun is losing his temper on small things. She does’nt know why, but she is feeling it and… आज सुबह वे वक्त पर उठे थे पर उनके दफ्तर जाने से पूर्व उसने पत्रिकाओं के बारे में कुछ कहा था, शायद उसी बात का असर हो. शाम को खेल में भी उनका मन नहीं था, खैर, कभी-कभी ऐसा सबके साथ होता है. नन्हे के कल से टेस्ट हैं, वह पढ़ रहा है.

दो-तीन दिनों तक तेज धूप निकलने के बाद आज मौसम फिर सर्द है, बादल हैं, एक दो बार सूरज उनकी ओट से झाँका भी तो धूप में गर्माहट नहीं थी. अभी-अभी नैनी का छोटा बेटा अंग्रेजी पढकर गया है, उसे अल्फाबेट आ गया है और कुछ शब्द लिखने भी आ गये हैं, लेकिन उसके पास क्लास १ की कोई पुस्तक नहीं है जिससे सिलसिलेवार पढ़ाई की जा सके, आज उसे छोटे-छोटे   वाक्य लिखने को दिए हैं. दोपहर खाने पर आये तो जून का मन ठीक था, वह खुश थे, सम्भवतः कल उन्हें फील्ड भी जाना पड़े. नन्हे के आज दो टेस्ट हैं, उसकी टीचर के कहने पर तेल लगाना भी सीख गया है. आजकल रामायण में हनुमान जी द्वारा सीता का पता लगा कर आने की कथा चल रही है, कल से ‘युद्ध कांड’ आरम्भ होगा, और रामायण समाप्त होने पर वह फिर से ‘भगवद् गीता’ पढ़ेगी जो जीने की कला सिखाने में पूर्णतया सक्षम है.

जून आज ‘हाफजान’ गये हैं, शाम को आएंगे, बहुत दिनों बाद उसे लंच अकेले ही खाना है, सो जब पेट में चूहे कूदने लगेंगे तभी खाएगी, जो भायेगा वही और जितना भायेगा उतना. कल शाम को वे एक मित्र परिवार के यहाँ गये, वहन एक और परिवार मिला, MR थोड़े शर्मीले स्वभाव के लगे बड़े भाई की तरह बच्चों से तुतलाकर बात करने वाले, MRS काफी एक्टिव थीं, डेढ़ साल की बच्ची की माँ को शायद ऐसा ही होना पड़ता है. नन्हे ने सब बच्चों को टाफी दीं, जो कई दिनों से इकट्ठी कर रहा था. शाम को बैडमिंटन भी खेला, अब उसकी रूचि इसमें बढ़ गयी है.


पिछले दो दिन जून और नन्हे दोनों की छुट्टी थी, परसों नेता जी के जन्मदिवस की, उनकी जन्म शताब्दी मनाई जा रही है इस बरस. उसने सोचा तो लगा नेता जी के विषय में वे कितना कम जानते हैं. उस दिन उन्होंने स्टोर की सफाई की और ‘माचिस’ देखी. उसे बहुत अच्छी नहीं लगी यह फिल्म. शाम को नन्हा एक मित्र के जन्मदिन में गया और वे अपने मित्र के यहाँ. कल दिन भर बूंदा-बांदी होती रही, मौसम बेहद ठंडा था, लंच में डोसा बनाया उसने. पड़ोसिन ने अपने बगीचे से ब्रोकोली भेजी, जो शाम को बनाई. जून ने अपनी पसंद की दो मिठाइयाँ बनायीं, गुलाब जामुन और बेसन के लड्डू. लेकिन उसे मिठाई खाना ज्यादा पसंद नहीं है पर जून चाहते हैं, उनकी तरह वह भी मिठाई बहुत शौक से खाए, कभी-कभी उसे लगता है वह भूल ही गये हैं इन्सान जीने के लिए खाता है न कि खाने के लिए जीता है. बरसों से चलती आ रही, शायद आगे भी चलती रहेगी, उनकी नोक-झोंक का विषय अक्सर भोजन ही होता है. आज भी मौसम बेहद ठंडा है, सुबह-सुबह छोटी बहन को फोन किया, उसकी विवाह की सालगिरह है आज. नन्हा बहुत सोचने के बाद आखिर स्कूल चला गया है, बहादुर लड़का है, इतने दिन मना करने के बाद आज आखिर टोपी और दस्ताने भी पहने.