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Thursday, April 12, 2012

अदरक की चटनी


आज सुबह कुछ देर के लिये और फिर शाम को उसे घबराहट हो रही थी, पर कुल मिलाकर दिन ठीकठाक ही रहा. सुबह वह इसी कारण देर से उठी, जून पहले ही उठकर चला गया था. दोपहर को फिर सो गयी एक स्वप्न भी देखा, उठकर शाम के नाश्ते के लिये बेसन का हलवा बनाया जो स्वप्न के कारण ही बनाया था. शाम को वे बाजार गए, उसे आजकल बाइक पर बैठना भी रास नहीं आता या हो सकता है यह उसका वहम हो, उसने सोचा. वे कई दुकानों पर गए, उसने ऊन खरीदी और अ पने लिये एक आधी बाँह का स्वेटर बनाना भी शुरू कर दिया है. कल उसी बंगाली मित्र की शादी की पहली सालगिरह थी, उन्होंने उसे एक छोटा सा उपहार भी दिया, वह जरूर खुश होगी. जून ने उसे समझा ही दिया है कि उसका यहाँ अकेला रहना ठीक नहीं है, बल्कि उसे ससुराल या मायके में रहना चाहिए जब वह मोरान में रहेगा, जैसे ही उसका काम खत्म होगा वह उसे लेने आ जायेगा. वह उसका बहुत ख्याल रखता है. नूना ने अदरक, टमाटर और प्याज की चटनी नुमा सब्जी बनायी उसे अच्छी नहीं लगी फिर भी उसने पूरा खाना उसी से खाया.

Tuesday, February 7, 2012

यात्रा तीन दिन की


आज सुबह खबरों में सुना कि संत लोंगोवाल की मृत्यु हो गयी. किस तरह एक नेता जिसके पीछे हजारों लोग होते हैं एक हत्यारे की गोलियों का शिकार होकर दम तोड़ देता है. गाँधी हर युग में होते हैं और हर बार उन्हें जान देनी पड़ती है. आज सुबह से बार-बार वही खबरें आ रही हैं. जून आज पुनः अस्पताल गया था, विशेषज्ञ के पास. आज उसने अपनी बाइक भी साफ की, उसे बहनों की भेजी राखियाँ मिल गयीं. कितने दिन बाद आज शाम बादल छा गए और झमाझम वर्षा होने लगी. वे घर पर ही रहे.
अगले हफ्ते जून को तीन दिनों के लिये बाहर जाना है, नूना भी उसके साथ जायेगी. वे नया घर भी देख आये, अच्छा है पर इस घर से आत्मीयता सी हो गयी है, छोड़ते समय दुःख तो होगा ही. कितना परिचित लगता है इसका हर कोना, फिर उनके जीवन का यह पहला पडाव है जिसमें उन्होंने अपने जीवन की शुरुआत की है.