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Thursday, July 20, 2017

लिट्टी-चोखा


कल ईद थी. शाम को एक मित्र परिवार मिलने आया. वे लोग यहाँ से जा रहे हैं, अपने घर से पौधे ले जाने को कहा था, उन्होंने लिट्टी-चोखा खाने का निमन्त्रण भी दिया है. जून ने गाड़ी भेजी है, अभी माली आएगा, उसे साथ लेकर जाना है. उनके लिए एक कटहल भी लिया है. इस समय भी धूप भी काफी तेज है, शाम के पांच बजने को हैं. कल छोटी बहन का जन्मदिन है, उसके लिए कविता लिखी है. उसने एक कविता की पैरोडी बना दी, खुदा की बात इतनी आसानी से समझ में आती कहाँ है. उसे भी नहीं आती थी, अब भी आई है ऐसा नहीं लगता. खुदा उन्हें खाली कर देता है, बिलकुल ‘हॉलो एंड एम्प्टी’ ! सितम्बर में छोटा भाई परिवार सहित यहाँ आ रहा है, यकीनन वे दिन बहुत अच्छे होंगे ! परसों एक जन्मदिन पार्टी में जाना है, अभी उसे एक कविता ( यदि उसे कविता कहें तो) लिखनी है, मन हल्का है, खाली-खाली सा..सो परमात्मा का सत्य उसमें से वैसे ही बहेगा जैसे खाली बांसुरी से हवा !  

अगस्त का आरम्भ हो चुका है, आज सारे कैलेंडर बदलने हैं. दूधवाले, धोबी, माली, नैनी सभी का हिसाब चुकतू करना है, जन्मदिन के कैलेंडर में इस माह पड़ने वाले विशेष दिनों को भी देखना है, शरीर का भार लेने का एक कार्य और करते हैं वे हर माह के पहले दिन. सुबह वे आज समय पर उठे, पिछले कुछ दिनों से उसका पाचन कुछ ठीक नहीं था. इतने वर्षों उस पर जो जुल्म ढाए हैं, उनकी भरपाई करने का वक्त आ गया है. इन्सान अपने छोटे-से छोटे कृत्य से भी बच नहीं सकता. जितनी नकारात्मकता इस मन के द्वारा उपजी है, उसका भुगतान उन्हें हर हाल में करना होगा. अब समय आ गया है कि पूर्ण सकारात्मकता को अपनाया जाये, उससे कम रत्ती भर नहीं, हर रत्ती का जवाब देना होगा जो सदा बढ़कर ही मिलता है. नन्हे ने बताया, कल कर्नाटक बंद था.

फिर कुछ दिनों का अन्तराल, कल कमेटी की पहली मीटिंग थी, एक सदस्या के साथ मिलकर उसने सभी के लिए स्नैक्स व रात्रि भोजन का इंतजाम किया. सब कुछ ठीक से हो गया. आज सुबह मृणाल ज्योति गयी, बच्चों को राखियाँ बांधी. जीवन एक धारावाहिक की तरह है, उसकी कहानी भी ऐसी ही है. कभी कुछ घटता है जो परेशान कर जाता है पर अपने स्वभाव में टिकते ही सब कुछ पूर्ववत् हो जाता है, बाहर न भी हो पर भीतर तो अवश्य. जो कुछ भी उन्हें निर्बल बनाता है वह त्याज्य है. सकारात्मकता में टिके रहने से हर क्षण नयेपन का अनुभव भी होता है. अभी-अभी नैनी की बच्चियां आई थीं, ईश्वर के प्रेम से परिपूर्ण, कितनी प्यारी मुस्कान है इन दोनों की ! उनके साथ जाकर फुहार में ही फूल चुने और तुलसी के चौरे पर सजाये. बहुत सी बातें वे बिन कहे ही समझ जाती हैं. प्रेम भी प्रेमी हृदय ही महसूस कर सकते हैं, संत या बच्चे ! सामने का दृश्य हरियाली का एक समुन्दर जैसा ही तो है, मौन है पर सब कुछ कहता और सब कुछ सुनता हुआ ! जीवन कितना सुंदर है और कितना अनोखा ! परमात्मा और जीवन एक ही तो हैं ! 

Monday, March 2, 2015

मधुमक्खी सा मन





 रात्रि के दस बज गये हैं, जून अभी तक वापस नहीं आए हैं, जहाँ कोपरेटिव की वार्षिक मीटिंग + डिनर चल रहा है. उसने अभी-अभी शुरू से डायरी के पन्नों पर नजर डाली, कृष्ण को समर्पित मन के उद्गारों से भरे थे वे पन्ने, और इस क्षण भी वह अपने भीतर उसी का उजाला महसूस कर रही है, सिर में कोई नाद धम-धम सुनाई दे रहा है, मन शांत है. शाम को संकल्प किया था कि सुबह जल्दी उठना है और स्नान करके ही ध्यान के लिए बैठना है, पर आज सोने में देर हो रही है. छोटे भाई का पत्र आया है, पिताजी ने उसके पत्र का उत्तर उसी में लिखवा दिया, वे स्वयं अभी नहीं लिख पा रहे हैं, आँखों का इलाज चल रहा है. कल छोटी भांजी को कार्ड भेजा, दीदी को पत्र लिखा आज टीवी पर तूफान की चेतावनी दी गयी, रात को तेज वर्षा होने की सम्भावना है. नन्हा आज बहुत दिनों बाद क्रिकेट खेलने गया, लगता है जून आ गये हैं.

जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता है स्वयं से पहचान..  ‘किसी को उससे भय न हो और किसी से उसे भय न हो’, ऐसा तभी सम्भव है जब स्वयं की दिव्यता का आभास हो जाये, अन्यथा हृदय के विकार दग्ध करते ही रहेंगे. किसी के व्यक्तित्व के निर्माण में भक्ति का बहुत महत्व है, परमेश्वर से बढकर परम मित्र कौन है जो हृदय को मुक्त करने की कला सिखाता है. कल रात उसने बाबाजी को स्वप्न में देखा, वे उनके आश्रम में हैं. उसने उन्हें प्रणाम किया और बताया कि उन्हीं के एक स्कूल में पढ़ाने का कार्य शुरू किया है. नन्हे को भी प्रणाम करने को कहा. स्वप्न में भी उनसे एक सवाल वह पूछ रही थी कि आप जो कहते हैं वह दिल से आता है या सामने लिखा हुआ रखा रहता है, अजीब सा प्रश्न है पर उनका उत्तर था कि सामने लिखा भी रहता है. आज उन्होंने सिन्धी भाषा में प्रवचन किया. झूलेलाल का उत्सव चेट्टी चाँद मनाया जा रहा था. जून वापस आ गये हैं. हड़ताल के कारण उन्हें व किसी को भी दफ्तर में प्रवेश करने नहीं दिया गया. कल भी हड़ताल हुई थी पर उनका विभाग खुला था. आज धूप तेज है, अभी  सुबह के आठ बजे ही गर्मी का अहसास हो रहा है. देश के बाकी हिस्सों में एक महीने से लोग गर्मी का अहसास कर रहे हैं, वे यहाँ के मौसम की शालीनता के कारण उससे बचे थे. कल एक सखी आयी थी परिवार सहित. नूना भी आलोचना करने से रह नहीं पाई. आत्मा पर कोई न कोई दाग रोज बल्कि हर क्षण लगता ही रहता है, फिर ईश्वर के दर्शन क्योंकर हो सकते हैं. विषपान से भी हानिप्रद विषयों का चिन्तन है, सांसारिक विषयों का चिन्तन ही पथ से विचलित करता है, और वे जितना उस जाल में उलझते जाते हैं, स्वयं को बेबस पाते हैं. आशाओं रूपी नदी, जिसकी लहरें मन की वृत्तियाँ है, को पार करना है. पवित्रता, अभय, धैर्य और क्षमा आदि की पतवार के सहारे ही वे इस नदी को पार सकते हैं ! दूसरों के अंदर दोष देखना आसुरी स्वभाव है. अन्यों के गुणों को देखकर मधुमक्खी की तरह उन्हें स्वयं में भरना चाहिए.

कल से नन्हे को सुबह जल्दी उठकर फिजिक्स पढ़ने जाना है, उन्हें उसे चार बजे ही उठाना होगा. शनिवार को तिनसुकिया से वह बालकृष्ण का एक सुंदर चित्र लायी थी, उसे देखते ही मन प्रसन्न हो उठता है. कृष्ण की मुस्कान मन मोहिनी है. वह उन्हें सदा खिले रहने को प्रोत्साहित करती है !

कल से ही उसके मन में कई प्रश्न उठ रहे थे कि आत्मा यदि अजर, अमर और शक्तिमय है तो मानव को इतने दुःख क्यों उठाने पड़ते हैं..यदि परमात्मा ने अपना अंश स्वरूप उन्हें बनाया है तो इतनी पीड़ा इतनी बेचैनी क्यों...दिल में जैसे एक टीस सी उठती है, इन बन्धनों से मुक्त होने की तीव्र आकांक्षा ! जवाब भी मिल जाता है...राग, द्वेष आदि जीव सृष्टि में ही सम्भव हैं, ईश्वर की सृष्टि में ऐसा कुछ भी नहीं है. अपनी प्रकृति और स्वभाव के अनुसार सब प्रेरित हो रहे हैं, तुच्छ स्वभाव को दिव्य स्वभाव में बदलना है. मन को अकारण ही कल्पना करने आदत को भी छोड़ना है, व्यर्थ के चिन्तन अथवा विलाप से बचना है.






Tuesday, September 23, 2014

भागवद पुराण का श्लोक


आज उनके महिला क्लब की मीटिंग है, उस दिन अंध विद्यालय में जाने के बाद से क्लब के प्रति उसका सम्मान बढ़ गया है, सो आज वह जा रही है. सुबह भाई-भाभी से बात की. आज जून उसकी किताब भेज रहे हैं. अभी-अभी असमिया सखी का फोन आया, उसने दूरदर्शन पर एक नीति वचन सुना था, बताया, यह भी कहा कि उसकी किताब देखकर उसे बेहद ख़ुशी हुई है. उम्र के साथ-साथ उनकी मित्रता भी परिपक्व हो रही है. बाबाजी ने आज एक श्लोक का अर्थ बताया जो भागवद पुराण से लिया गया था, “कल का अजीर्ण आज के उपवास से दूर किया जा सकता है और कल का प्रारब्ध आज के पुरुषार्थ से”. मानव अपने भाग्य का विधाता स्वयं है. वास्तव में यदि वे प्रयत्न करें और सच्चे हृदय से ईश्वर के मार्ग पर चलें, ईश्वर का मार्ग यानि सच का मार्ग, तो उनके कार्य सफल होने लगते हैं. खोट भीतर नहीं होनी चाहिए, ईमानदारी का सौदा है यह. आज नैनी ने कहा उसके पास एक धार्मिक पुस्तक है जिसमें उर्दू और असमिया दोनों भाषाओँ में लिखा है. एक सूरा ऐसी है जिसको पढ़ पाने से शैतान कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता. अन्धविश्वास में डूबा है आज भी मुस्लिम धर्म. वह उस किताब को पढ़ना चाहती है क्यों कि उसे कुरान को छूने की इजाजत नहीं है. कल रात वर्षा हुई और कहीं पास ही बिजली भी गिरी. बादलों की गड़गड़ाहट की जोरदार आवाज हुई उसकी नींद खुल गयी और उस कविता का स्मरण हो आया जिसमें दिल धड़कने का जिक्र है. संसद में अवकाश है सो पता नहीं चल पाता दोनों पार्टियाँ कितना विरोध कर रही हैं, धीरे-धीरे तहलका का ज्वर उतरने लगा है. लोग एक दूसरे से क्षमायाचना कर रहे हैं. भविष्य में वे लोग सचेत रहेंगे इतना तो फायदा इस प्रकरण से होगा ही. उसे आज दोपहर को वह अधूरी गजल पूरी करनी है.  

कल की मीटिंग अच्छी रही. एरिया टेन ने एक रीमिक्स कोरस गया और एक समूह नृत्य भी पेश किया. एक महिला कुछ कास्मेटिक प्रोडक्ट्स लेकर आई थी और कुकिंग प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया था. वह पड़ोसिन सखी के साथ गयी थी. उसने ‘ध्यान’ करने का प्रयास किया पर सफल नहीं हुई, नैनी का बेटा तेज संगीत बजा रहा था, सडक पर वाहनों की आवाजें थीं और वर्षा की रिमझिम भी, जो कल रात से हो रही है. उसने आँखें बंद कीं तो तंद्रा घेरने लगी, कभी-कभी ऐसा होता है जब मन शांत नहीं हो पाता. आज का दिन सामने पड़ा है कोरे कागज की तरह, जो चाहे लिख दे. दोपहर का कार्य नियत है. शाम कुछ भिन्न हो सकती है. कल लाइब्रेरी से अमितव घोष की एक पुस्तक लायी है कल शाम ही थोड़ी सी पढ़ी. अभी robert फ्रॉस्ट की कविताएँ भी पढ़नी हैं. ढेर सारी पत्रिकाएँ भी अनपढ़ी पड़ी हैं. रोज का अख़बार पढ़ने में भी समय जाता है. इन्सान का छोटा सा दिमाग (ब्रह्मांड से भी विशाल है वास्तव में ) कितना कुछ समेटना चाहता है. कल GLSV का प्रक्षेपण किसी खराबी के कारण टाल देना पड़ा, शुरू होने से पहले उसका दिल धड़क रहा था, लग रहा था, सब कुछ ठीक नहीं होगा. खैर, अगली बार जरूर वैज्ञानिकों को सफलता मिलेगी. कल भारत मैच भी हार गया. नैनी ने असमिया में वह पुस्तक लाकर दी है जिसमें से उसे ऐसी सूरा चाहिए जिसे पढ़कर शैतान भी कुछ नहीं बिगाड़ सकता.

कल की शाम एक सखी और उसके बेटे के नाम थी. वे शाम को साढ़े चार बजे ही आ गये थे, जून को हाउसिंग सोसाइटी की मीटिंग में जाना था. साढ़े आठ पर वे वापस आये तब तक नन्हा और उसका मित्र खाना खा चुके थे. वह सखी के साथ पहले टहलने गयी फिर चाय पी और बाद में डिनर की तैयारी. उसका साथ सहज लगता है, कितनी बातें बतायीं उसने अपने परिचितों की और इधर-उधर की. कुछ देर उन्होंने क्रॉस वर्ड्स हल किया. समाचार नहीं सुन पायी कल रात. आज सुबह सुना पश्चिम बंगाल में कांग्रेस व तृणमूल कांग्रेस एक साथ चुनाव लड़ रही हैं. राजनीति में कोई भी स्थायी मित्र अथवा विरोधी नहीं होता. आज जागरण में एक सन्त का भावपूर्ण प्रवचन सुना, कह रहे थे रोना, हँसने से ज्यादा बेहतर है बशर्ते आँसूं पश्चाताप के हों यहाँ तो कोई गलत है यह तक स्वीकारने को तैयार नहीं होता तो पछतावा क्यों करेंगे, हर कोई अपने को सही साबित करने पर तुला है. आज सुबह ससुराल से फोन आया, कल वे लोग नये घर में रहने चले गये हैं, गृह प्रवेश में बड़ी ननद भी आई है, काफी चहल-पहल रहती होगी. दिन भर किचन में भी हलचल रहती होगी. आजकल ‘ध्यान’ में वह पांच-दस मिनट से ज्यादा नहीं बैठ पाती है सम्भवतः आस-पास होती हलचल इसका कारण हो, उसे दूसरा समय चुनना होगा जब कोई बाधा न हो. यह भी सही है कि जे कृष्णामूर्ति की पुस्तक पढ़े काफी समय बीत गया है और प्रतिपल सजग रहने का जो अभ्यास उन दिनों हो गया था आजकल छूट गया है. एक बेखुदी सी छायी रहती है जैसे वह किसी spell के अंदर है. जमीन पर आ जाना ही बेहतर होगा,. वास्तविकता की ठोस जमीन पर, जहाँ अपनी कमियां भी बखूबी नजर आती रहें. एक परिचिता से मिलने का वादा किया था जो आज ही पूरा करना होगा.




Monday, June 23, 2014

भीग गये कपड़े


नये महीने का पहला दिन ! आज उसने कक्षा दो के बच्चों को एक कहानी सुनाई, बड़े ध्यान से सुन रहे थे वे. सुबह जून ने उसे उठाया, यूँ वह पहले उठ चुकी थी, आँख बंद करके स्वप्नों को याद कर रही थी. मौसम स्वच्छ था, पर स्कूल में एक वक्त ऐसा आया जब पानी बहुत तेज बरसा. जून जब घर आये तो कपड़े आँगन में भीग रहे थे, उन्हें अकेले रहना व भोजन करना पसंद नहीं है, पर इतना तो त्याग करना ही होगा उन दोनों को, यदि वह चाहते हैं कि नूना अपनी योग्यता का उपयोग कर सके. उसके भी कई प्रिय कार्य छूट जाते  हैं पर बच्चों का साथ और पढ़ाना उसे पसंद है. छोटे बच्चों को पढ़ाना लेकिन टेढ़ी खीर है. कल उसे एक ही कक्षा में दो पीरियड एक साथ लेने हैं, वे बहुत शोर करते हैं, खैर.. नन्हे की फरमाइश पर आज वह नूडल्स बना रही है. कई दिनों से कोई कविता नहीं लिखी, शायद कल ही कोई ख्याल मन को भा जाये. एक सखी से बात हुई उसके पिता के नाम पर उसके शहर की अदालत में एक चेम्बर बनने वाला है.

फिर एक अन्तराल, ऐसी लापरवाही अच्छी तो नहीं कि इन्सान खुद से दूर चला जाये, उस ऊपर वाले से जो नीचे भी है और अपने दिल में ही है मिलने की फुर्सत भी नहीं थी. कल शाम को ‘बॉम्बे’ देखी, मनीषा कोइराला ने अच्छा अभिनय किया है. इस समय पौने नौ बजे हैं, आज उसे स्कूल देर से जाना है पेरेंट-टीचर मीटिंग है. घर पर रहो तो इतने सारे काम निकल आते हैं, कभी कोई आ रहा है कभी फोन की घंटी. मौसम आज भी अच्छा है, ठंडा-ठंडा सा.. मौसम हमेशा उसके बचाव के लिए आ ही जाता है जब कुछ सूझ न रहा हो. 

बच्चों के माता-पिता से मिलकर अच्छा लगा, उनकी शिकायतें बिलकुल सही थीं. They were right that she should see it, each and every child writes all the classwork from black board. In future she will be more cautious and also more careful in copy checking. This parent-teacher meeting is an eyeopener for her. Head mistress did not say a single word to her, perhaps she was hesitating.  But she will not mind if she says something. She has to learn many things. She has to concentrate more on children than on presentation. Now onward she will give them class one children only two or three sentences to write from the black board.

Today is holiday in their school. It is quarter to eight in the morning, full day ahead of them and so many jobs to do. Today Nanha is having  his science examination and tomorrow will be last ie Hindi. One teacher of their school is going to join college. She will give her a farewell card,  even though theirs was a brief encounter. First day when she heard her talking against Gandhi and Nehru, she thought not much of her but once she talked about absolute and Vedanta then she took notice of her. She is an intelligent girl, gold medalist in BA and MA, her subject is education.

It is 10 minutes to 7, she is feeling good, they went to library, took evening walk, cooked dinner and now she is here with love in her heart and warm feelings in thoughts. So are the ways of life, yesterday that teacher left the school, and all forgot her, they even did not give her a proper farewell.  she felt her absence today, she was very lively and talkative of course. She wished her all the best. Today school was good, she learned that  children should not use colors in bio or science diagrams.




Monday, May 26, 2014

मसाला दोसे का डिनर


सुबह के आवश्यक कार्य समाप्त कर उसने लिखना शुरू किया है, नन्हा कल की परीक्षा की तयारी कर रहा है. कल शाम पड़ोसिन ने क्लब की मीटिंग में गए जाने वाले गीत के अभ्यास के लिए चलने को कहा तो उसने मना कर दिया. उसके बाद जून और उसके बीच उसके घर से बाहर जाने को लेकर फिर चर्चा हुई हर साल की तरह. उन्हें अपनी बात समझाने में वह सफल हो भी पायी या नहीं पता नहीं, क्योंकि वह समझना ही नहीं चाहते. शनिवार को माँ-पिता आ रहे है और उसके बाद उसे घर से निकलना ही नहीं है सिवाय मीटिंग वाले दिन के यह उनका कहना है पर उसे लगता है शायद ही ऐसा हो. कल रात फिर स्वप्न में सभी को देखा, लडकियाँ बड़ी हो चुकी हैं, यह शुभ संकेत है. अभी कुछ देर पहले किन्हीं महिला का फोन आया, उनका पुत्र दसवीं में जायेगा तो उसके लिए DPS के बारे में जानकारी हासिल कर रही थीं जो बीच-बीच में जाहिर करती जा रही थीं.

पिछले दो दिन वह कुछ नहीं लिख सकी, कल किचन में सफेदी और रंग हुआ परसों कुछ अन्य व्यस्तता रही होगी. इस वक्त आकाश से महीन झींसी झर रही है. चेहरे पर इसकी हल्की छुअन सिहरन उत्पन्न कर रही है. आज नन्हे की संस्कृत की परीक्षा है. इसके बाद दो ही शेष हैं कल शाम किचन व्यवस्थित न होने के कारण खाना घर पर न बनाकर क्लब से लाना पड़ा, खूब मिर्च-मसाले वाला दोसा खाकर पहले से ही नासाज उसके उदर ने जलकर शिकायत दर्ज की है. नन्हा भी सुबह दूध पीकर नहीं गया, जरुर कल रात के भोजन का योगदान रहा होगा इसमें. उसने मीटिंग में पढने के लिए कविताओं का चयन कर लिया है, जून को भी वे पसंद आयीं.

शनि की सुबह छह बजे जून उन्हें लेकर आ गये, वह सुबह पौने चार बजे ही उन्हें लेने चले गये थे. ४८ घंटे की यात्रा के बाद माँ-पापा यहाँ आये हैं, वे तीनों ही प्रयास करेंगे कि उनका यहाँ का निवास सुखद हो. इस समय जून उन्हें लेकर अस्पताल गये हैं. शनि की दोपहर को ही वाजपेयी जी की बस यात्रा का विवरण टीवी पर देखा, कितनी पुरानी स्मृतियाँ सजीव हो उठीं, फिर गाने की रिहर्सल के लिए भी गयी. इतवार की शाम एक पार्टी में जाना था, सोमवार को जून का स्वेटर बनाया और आज मंगल है, उसके मन में आजकल मिली-जुली भावनाएं रहती हैं, दिल खोल के स्वागत-सत्कार करे ऐसा हो नहीं पाता, एक झिझक सी रहती ही है, खैर सम्मानजनक दूरी बनाये रखना ही ठीक है. कल सुबह माँ ने वर्षों पूर्व घटी घटना को याद करके आँसू बहाये, इसी कारण वह अति निकटता नहीं चाहती. वह इतने सालों बाद भी वैसी ही हैं, कुछ लोग शायद ऐसे ही होते हैं, ताउम्र बच्चे ही बने रहते हैं. उसके कल के व्यवहार से जून को तकलीफ जरूर हुई होगी पर उसका मन्तव्य वह भली भांति समझ गये होंगे. अपने घर में अपनी आजादी खोना किसी को नहीं भाता.  

जून कल लंच पर नहीं आए, उन्हें फील्ड जाना था, वहाँ भी काफी देर से उन्हें भोजन मिला, फोन पर जब यह उसे पता चला तो उसका हृदय द्रवित हो उठा. उसे रात की बात याद हो आई, क्लब में उसकी कविताओं की तारीफ हुई थी, सेक्रेटरी ने जब यह पूछा, क्या ये उसने स्वयं लिखी हैं, तो उसे भी यकीन हो गया उन्हें वे अच्छी लगी हैं. वापस आई तो सब भोजन के लिए प्रतीक्षा कर रहे थे. छोटी बहन का पत्र आया है, उसकी तरह नूना अपनी बातें सभी से कह नहीं पाती, पर देखा जाये तो कहने को कुछ है भी नहीं, सारी समस्याएं तो औरों के लिए हैं. वह किसी भी स्तर पर स्वयं को जुड़ा हुआ नहीं पाती इसी लिए शायद अपनी समस्या बताकर सहानुभूति हासिल करना नहीं आता. वह अस्वस्थता को अपना हथियार बनाना नहीं चाहती.

After many days she is sitting in the lawn on the green grass beside rose bushes, feeling the touch of grass blades on sole / soul. They have just taken breakfast, Nanha is still eating and watching tv. He went second day for jogging and will go for tennis in the afternoon. It is good for him to play and run in the holidays, when school reopens he will have to remain closed in the house and school most of the time. She is feeling his joy of freedom. She also did exercise and is planning to riyaz also for one hour while ma-papa will watch TV. Last night she told jun about her fears and aspirations he solved her all problems by saying that it depends on person to person. He has gone to field today also. Today in the afternoon he has organized a meeting of all DPS going children’s fathers.


Friday, April 11, 2014

अंकल चिप्स कहाँ हैं


कल नन्हा स्कूल से आया तो प्रसन्न था. वे बहुत दिनों बाद शाम को घर से निकले. एक मित्र के यहाँ भी जाना था, उनके बेटे की जीभ घर में खेलते वक्त गिर जाने से कट गयी थी. रात की तेज वर्षा के कारण मौसम आज ठंडा है, उसने खिड़की से देखा, माली सिल्विया और गुलदाउदी के पौधों के लिए क्यारी बना रहा है. कल्पना में उसने खिलते हुए फूलों को देखा और एक मुस्कान अंतर को भर गयी. कल दोपहर उसकी पड़ोसिन आई थी, आज सम्भवतः फिर आयेगी, उसका मिठाई तोड़ना, गिलास में हाथ डालकर धोना, बिना बात ही हँसना और...उसकी ग्रामीण बैक ग्राउंड का परिचायक लगा, खैर...अपना-अपना स्वभाव है. कल रात जून ने अपनी बचत का रिकार्ड उससे डायरी में लिखवाया, उसके पूर्व शाम को बाहर जाते समय साड़ी पहनने पर (एक पुरानी सिंथेटिक साड़ी) जून और नन्हे ने उसे जब टोका तो उसने व्यक्ति की आजादी पर छोटा सा भाषण सुना दिया फिर रात को जब नन्हे को जून ने अपने कमरे में जाने को कहा तो वह चुप हो गया और सोने जाने तक कोई बात नहीं की, नूना को अच्छा नहीं लगा और फिर बाल मनोविज्ञान पर कुछ बातें उसने जून को बतायीं, वह चुपचाप सुनते रहे, नन्हे का उदास हो जाना उन्हें भी खलता है सुबह उसके स्कूल जाने तक वह बहुत प्यार से उससे बातें करते रहे, प्यार करना ज्यादा आसन है बजाय गुस्सा करने के क्योंकि गुस्सा करने वाला खुद ज्यादा परेशान होता है.

पिछले दो दिन कुछ नहीं लिख सकी, शनि की सुबह कपड़ों की सिलाई (पुराने कपड़ों की) में व्यस्त रही, इतवार का दिन तो कई और कामों में कैसे गुजर जाता है पता ही नहीं चलता. कल रात बेहद गर्मी थी, उसके सर में हल्का दर्द हुआ अभी भी हल्का-हल्का सा भारी है सर. ptv की एंकर ने अपना ख्याल रखने व मुस्कुराते रहने की हिदायत के साथ अपना कार्यक्रम समाप्त किया है. वहाँ शरीयत का कानून लागू होने से ptv के कार्यक्रमों पर अभी तक तो कोई असर नहीं पड़ा है. उसने शाम को मीटिंग में साथ जाने के लिए पड़ोसिन से बात की, मोज़े बन गये हैं यह भी उस सखी को बताया. कल वे बाजार गये, नैनी के लिए साड़ी खरीदी वायलेट रंग की फिर कादम्बिनी ली, प्रवेश में अपनी कुछ कविताएँ भेजना चाहती है.

Today is first day of Sept ! Jun went to Moran this morning to come back at 6 in the evening. She is feeling a sense of freedom to do any thing at any time till Nanha comes from school. There are so many things to do- music, letter writing, TV, stitching,  exercise and cooking, also she can do some new things like painting if time permits. she  learned two beautiful lessons from the two books which she reads these days after bath. One is – Don’t expect gratitude, it is rare like rose and ingratitude is like weed, it is everywhere. Second is – Do whatever you like with whole heart otherwise not do it. Yesterday’s meeting was successful . Dance drama cultivated by DR Sharma  was very good and she liked the tea also. Today she talked to ma-papa, they are going to sister’s place this month. She will be meeting them in year end.


आज सुबह अलार्म बजते ही जून रोज की तरह फौरन उठ गये और बहुत पहले जैसे वह करते थे फिर पांच मिनट लेटे रहकर उठे. वह खुद भी उठकर बिस्तर के पैताने पर बैठ गयी यूँ ही, रात को देखे सपनों का जायजा लेने, फिर उठी तो ब्रश करने के बजाय बाथरूम में ही दिमाग में आई इधर-उधर की बातों को सोचती रही. सुबह सोकर उठो तो दिमाग एकदम खाली होना चाहिए, साफ-स्वच्छ, पर नहीं, बीती रात की कोई बात पता नहीं क्यों किसी छेद से घुसकर कुरेदती रहेगी फिर एक बार जो ब्रश किया तो सुबह के कामों में व्यस्त हो गयी, बस सुबह के वे ५-७ मिनट यूँ ही गंवा दिए. कल से इस बात का ध्यान रखेगी, फिर जून ने जब कहा कि कल वह ऑफिस की चाबी ले जाना भूल गये तो बजाय उस बात को सुन लेने के उन्हें नसीहत देने लगी जबकि इसकी कोई जरूरत नहीं थी, नन्हे के स्कूल चले जाने के बाद जून जब तक कार की प्रतीक्षा कर रहे थे वह वहीं बैठी रही अपना कर्त्तव्य समझकर, तभी उसमें स्नेह नहीं था, सो उन्हें कह भी दिया कि उसका काम छूट रहा है. togetherness की फीलिंग नहीं थी जिसमें मात्र साथ रहना ही भला लगता है, ड्यूटी समझ के कोई किसी का ख्याल रखे तो उसे विवशता ही कहा जायेगा न, सो अभी सुबह के मात्र पौने नौ ही हुए हैं और दिल है कि इतनी सारी खताएं कर चुका है या वह करवा चुकी है. आज शाम को एक सखी आ रही है उसकी माँ भी, जो उसी की तरह दुबली-पतली ही होंगी गोरी और नाजुक या...? नन्हा आजकल स्वस्थ व खुश है इतवार की शाम वह फिर रूठ गया था क्योंकि अंकल चिप्स नहीं लाकर दिए थे ! 

Tuesday, March 25, 2014

लीची का शरबत


कल उन्हें पता चला कि एक मित्र को vertigo हो गया है, उसने पहली बार यह शब्द सुना था, शायद कान से जुड़ा कोई रोग है. वे लोग देखने गये तो पीने के लिए कोल्डड्रिंक दिया गया, जुकाम होने के बावजूद शिष्टाचार वश उससे मना नहीं किया गया, वैसे ज्यादा ठंडा नहीं था, पर उसके कारण नुकसान तो हुआ ही होगा. गले में दोनों ओर सूजन  हो गयी है और छूने से एक ग्लैंड में हल्का दर्द भी होता है, धीरे-धीरे खुद ही ठीक हो जायेगा, जून उसकी बीमारी से घबरा जाते हैं.

आज भी वह स्वस्थ नहीं है, बांया गाल फूल गया है, ब्रश करते समय व खाते समय दर्द होता है. आज डॉ को दिखा ही लेना होगा, जून ने परसों भी फोन किया था, पर उसके मना करने पर वे मान गये, उसे यकीन था कि एक-दो दिनों में ठीक हो जाएगी, पर उसके अस्वस्थ रहने से घर का माहौल ही अस्त-व्यस्त हो जाता है. कल शाम एक मित्र परिवार मिलने आया, उन्होंने पहली बार लीची का शरबत बनाया, खुद उसे पसंद नहीं आया, उसकी सखी जान ही नहीं पाई कि वह  अस्वस्थ है, शायद जैमिनी अपनी बीमारी छिपाने में माहिर होते हैं, खास-तौर से उसे तो अपने रोग के बारे में बात करना बहुत खराब लगता है, अस्वस्थ होना एक गुनाह लगता है, मानसिक उदासी हो या शारीरिक परेशानी स्वयं तक ही सीमित रखना ठीक है, जब तक कि ऐसा किया जा सकता हो. जून को लेकिन वह सब कह देती है, उनसे छिपाना मुमकिन भी नहीं है जो चेहरे के एक-एक भाव को पढ़ लेते हैं.

आज शाम लेडीज क्लब की कमेटी मीटिंग है, जो अब मात्र तीन और रह गयी हैं, इसके बाद नई कमेटी बनेगी और उसकी व्यस्तता कम हो जाएगी. जिस वक्त फोन आया, वह बहुत परेशान थी, कुछ देर पहले ही नन्हे पर झुंझलाई थी, अपनी अस्वस्थता से तंग आ चुकी थी, कल अस्पताल से ढेर सारी दवाइयाँ लेकर आई थी, चार-पांच दिन की अस्वस्थता ने ही जब इतना बेचैन कर दिया है तो उनकी मनोस्थिति कैसी होती होगी, जिन्हें मालूम होता होगा कि सारी उम्र उन्हें इसी के साथ जीना है. साढ़े नौ हो गये हैं, उसने पूरा एक घंटा फोन पर बात की होगी, एक-एक करके तीन सखियों से, इधर-उधर की बातें करना यूँ ही बिना किसी वजह के, शायद वह स्वयं को यकीन दिलाना चाहती है कि वह ठीक हो गयी है. शाम को जाना भी है, नई साड़ी में कल शाम फाल लगाई और आज पीको करवाने के लिए दी है. पिछले एक घंटे में कुछ देर पीटीवी पर एक धारावाहिक ‘सियाह सुफेद’ देखा, जिसका मुख्य चरित्र एक काला मन लिए है, उसका बेटा जिसे हीरो भी कह सकते हैं, काला है न सफेद बल्कि सलेटी है पर एक न एक दिन उसे अपना रास्ता चुनना ही पड़ेगा, आदमी या तो अच्छाई के रास्ते पर पूरी तरह चल सकता है या नहीं चल सकता. आज भी धूप उतनी ही तेज है, आज उसे पत्र भी लिखने हैं, सारी दोपहर सामने है और मन में उत्साह भी कि वह स्वस्थ हो रही है.

आज फिर उसे अपनी अस्वस्थता का अहसास हो रहा है, सुबह सेक्रेटरी आई थीं, लेडीज क्लब के बुलेटिन की कॉपी लेने जो उसने कम्प्यूटर पर टाइप किया था. मशहूर संगीतकार मदन मोहन को श्रद्धांजलि स्वरूप समर्पित किया गया एक सीडी सुना.

आज स्वस्थ है, बिलकुल ठीक होना कैसा होता है, वह तो भूल ही गयी है, पर अपेक्षाकृत काफी ठीक है, दस बजे संगीत कक्षा में जाना है. आज भी गर्मी पहले सी है, कल शाम बंगाल की खाड़ी में आये तूफान की वजह से ठंडी हवा बहने लगी थी पर बादल भी उसी के साथ हवा हो गये. सवा नौ हुए हैं, थोड़ी देर पहले ही स्वीपर को ढंग से काम न करने पर फटकारा है, कल भी उसने एक बाथरूम बिना धोये ही छोड़ दिया था, शायद बीमारी के कारण, अस्वस्थता हर इन्सान को एक सा दुख देती है, ठीक ही कहा है, अस्वस्थता से बढकर कोई अभिशाप नहीं, कोई गरीबी नहीं, कोई गुनाह नहीं.

And today she could do exercise also. It rained in the night, every thing is clean, cold and wet outside but inside is still stuffy. ‘Teacher’ is being shown on zee tv, one of the good serial. Yesterday could not write, went to see the doctor for pain in arm, then to hindi class and evening was with shahrukh khan and juhi chawla. Secretary  picked her up for going to give fare well bouquet to one lady, (singer and radio artist) she is leaving this place  for ever. In the morning talked to mother who is with younger sister. Sister is happy, she is now captain. Got her letter also, she is very very sensitive and sensible girl. Nuna is proud of her !








Saturday, March 1, 2014

इतवार की इडली


आज की मीटिंग अच्छी रही पर लौटने में देर हो गयी, पौने नौ बजे थे, नन्हा घर पर अकेला था, उसके खाने का वक्त भी निकल चुका था, पर वह काफी समझदार है, नैनी को बुलाकर रोटी बनवा रहा था जब वह घर पहुँची. जून का फोन भी आया, वह कल शाम को वापस आ जायेंगे तो जिन्दगी में फिर क्रम आ जायेगा. सुबह छह बजे उनका फोन आया तो उनकी आवाज काफी बदली-बदली सी लगी, फिर कुछ देर बाद उनका फोन आया तो राहत मिली. सुबह-सुबह ही नैनी स्वेटर का डिजाइन पूछने आ गयी, काम में देरी हुई पर उसे भी कोई जल्दी नहीं थी. दोपहर को बहुत दिनों बाद पार्लर गयी, बालों में मेहँदी लगवाने, फिर पड़ोसिन के यहाँ, वह पिछले कई दिनों से अकेली है. दोपहर को अकेले भोजन के लिए बैठी तो पता नहीं क्यों भूख महसूस नहीं हो रही थी, समय हो गया है भोजन कर लेना चाहिए, इसलिए खा लिया.

कल रात्रि बहुत तेज वर्षा हुई, वे खिड़की खोल कर सोये थे, पानी अंदर आ गया, शुरू में वैसे ही उसे नींद नहीं आ रही थी, बाद में वर्षा की तेज आवाजों से खुल गयी, उठकर खिड़की, दरवाजा बंद किया और फिर न जाने कब नींद आ गयी. स्वप्न में एक बहुत बड़ा आयोजन देखा. कल मीटिंग में ‘हसबैंड नाइट’ का जिक्र हो रहा था, शायद इसी लिए प्रेसीडेंट ने सभी को धन्यवाद दिया और कहा कि प्रोग्राम अच्छा रहा, कमियों की तरफ किसी ने ध्यान नहीं दिलाया, भारतीयों की यही खासियत है कि कमियों को, गलतियों को याद भी नहीं करना चाहते कि किसी के सेंटीमेंट्स को बात लग न जाये क्यों कि समूह में काम करना आता नहीं है, हरेक अपना व्यक्तिगत लक्ष्य लेकर चलता है, खैर, आज सुबह जून के फोन से ही नींद खुली, वह आज आने वाले हैं, नन्हे और नूना का जीवन दो दिनों में थोड़ा अस्त-व्यस्त हो गया है पर रोचकता बनी हुई है, अपने मन मुताबिक सोना, जगना...पर यह जीवन क्रम यदि ज्यादा दिन चला तो अस्वस्थता को निमन्त्रण देने जैसा होगा. रात को सोचकर सोयी थी कि सुबह संगीत का अभ्यास करेगी पर इधर-उधर के कामों में ही समय हाथ से निकला जा रहा है. रात के वादे ऐसे ही होते हैं. दूध वाले से शिकायत करनी थी, एक सखी से बात करनी थी, नन्हे की आलमारी की सफाई का प्रोजेक्ट भी अधूरा है. जून के बिना जीवन भी तो अधूरा है.

पिछले तीन दिनों से डायरी नहीं खोल पाई, अभी-अभी महसूस हुआ, जायजा लिया जाये, पिछले दिनों क्या-क्या हुआ, शुक्र की शाम को जून आये, वे तीनों साथ-साथ रह कर खुश हो गये थे. शनि की सुबह जून को अदरक वाली चाय बनाकर दी, उनके गले में खराश लग रही थी, शाम वे एक मित्र के यहाँ गये, इतवार की सुबह इडली बनाई, शाम टहलने व नन्हे को पढ़ाने में बीती. जून ने कार की सफाई की, क्योंकि नैनी का बेटा ‘आता हूँ’ कहकर गायब हो गया. कल सुबह माँ से बात की, अभी तक उन्होंने अपने दाँतों का व पिता ने अपनी आँखों का इलाज करवाना शुरू नहीं किया है. टीवी पर लगातार चुनाव परिणाम प्रसारित हो रहे हैं, बीजेपी आगे है पर इतना तो तय है कि पूर्ण बहुमत से काफी पीछे है. वह Amitav Ghosh की एक किताब पढ़ रही है आजकल. बहुत सी पत्रिकाएँ भी हैं पर समय नहीं है, नन्हे के इम्तहान छह मार्च से हैं, यानि सिर्फ तीन दिनों के बाद. आज संगीत कक्षा में वह सरगम सुना सकी, अध्यापिका ने राग काफी सिखाना शुरू किया.

सुबह-सुबह सेक्रेटरी का फोन आया, आज शाम को सारे कमेटी मेम्बर्स को गेस्ट हाउस जाना है. उसे फोन करके सभी को बताना था, एक महिला को फोन किया तो पहले वे बगीचे में थीं, फिर रियाज करने बैठ गयीं, उनके पतिदेव ने संदेश ले लिया, फोन पर तो वे बेहद संजीदा caring लगे, अगर वह कभी उन्हें यह बात कहे तो वह हँसेंगी. नन्हा आज भी स्कूल नहीं गया, पर सुबह से बिना नहाये बैठा था, उसने नहाने के लिए कहा तो मुँह बना लिया. बच्चे कोई भी बंधन नहीं चाहते किसी भी तरह का नियम-कानून तो वे जानते ही नहीं, जब जिस बात का मन होगा वही करेंगे, उसे लगा यह नई पीढ़ी बिलकुल निरंकुश होती जा रही है. स्कूल में अध्यापक की बात का कोई महत्व नहीं और घर पर माँ-पिता की बात की कोई अहमियत नहीं. आज भी मौसम भला सा है, सुबह समाचार सुने, बीजेपी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला है, उधर UF और कांग्रेस जो एक-दूसरे के खिलाफ थे फिर एक होकर सरकार बनाने की बात कर रहे हैं, यह राजनीति का खेल आम  जनता की समझ से बाहर है. 





Thursday, February 20, 2014

एड़ी का घाव


पता नहीं कैसे उसे कल या परसों याद नहीं आया कि मीटिंग की तैयारी के लिए दो जनों को फोन करने हैं. आज सुबह नाश्ता करते समय अचानक मन में खटका हुआ और नतीजा यह कि पहले ने शिकायत की, एक दिन पहले बोल देने से उसे सुविधा होती है. शिकायत कैसे सुन लेता मन, झट प्रतिक्रिया की कल भी फोन किया था. बाद में स्मरण आया अपनी आत्मा पर एक धब्बा और लगा लिया जिसे छुड़ाने के लिए न जाने कितने जन्म और लेने पड़ेंगे. सेक्रेटरी हर बार एक से अधिक बार फोन करके याद दिलाती हैं इस बार उन्होंने भी याद नहीं दिलाया. अभी कुछ देर पहले ही वह क्लब से आ रही है, हॉल बिलकुल गंदा पड़ा था, पर उस व्यक्ति ने बताया शाम तक हो जायेगा. वह साइकिल से गयी थी, खोलते समय उसका लाक टूट गया, अनाड़ी है वह जिन्दगी के खेल में अभी.

आज शाम से skit की रिहर्सल शुरू होनी है, कल की मीटिंग अच्छी रही, पर व्यर्थ में ही बहुत समय लग गया. डॉ बरुआ ने महिला स्वास्थ्य पर एक लेक्चर दिया, HRT के बारे में बताया यहाँ के अस्पताल में भी इसकी सुविधा है उसे जानकर आश्चर्य हुआ. वह लौटी तो जून का चेहरा उतरा हुआ था, उसने सोचा यदि रोज-रोज जाना पड़े तो क्या होगा..खैर..जो होना है वह होगा ही. नन्हे की पढ़ाई आजकल जोर-शोर से चल रही है. उसे ‘ऊर्जा संरक्षण’ पर आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में भाग लेना है.

शाम हो गयी है, पिता कैसेट सुन रहे हैं, माँ किताब पढ़ रही हैं. वह एक क्षण भी खाली नहीं बैठ सकतीं. उसके और जून के लिए स्वेटर बना दिए हैं, उनके जाने में केवल दस दिन शेष रह गये हैं. उसने सोचा अब तक तो उन सभी को एक-दूसरे के साथ रहने का अभ्यास हो गया है. कितना कुछ मिल रहा है उनके साथ से, और वे उन्हें क्या दे रहे हैं बस थोड़ा सा स्नेह और सम्मान ! उसने सोचा वह भी स्वेटर के कुछ डिजाइन सीखेगी. आज सुबह राग आसावरी पर आधारित एक गीत का अभ्यास किया, अभ्यास ठीक ही रहा पर अभी तक सुर सधे नहीं हैं. पता नहीं वे लोग कैसे होंगे जो पूरी तरह अपने कार्य से संतुष्ट होने का सुख अनुभव कर पाते होंगे, उसके जीवन में एक पल तो ऐसा आये जब अपने कार्यों से पूरी तरह संतुष्ट हो पाए.

हवाई जहाज का तेज शोर ! आज बहुत दिनों बाद घर के ऊपर से उडकर कोई प्लेन गया है. कल से बसंत का मौसम शुरू हो गया है. जून के एक मित्र ने माँ-पापा को भोजन पर बुलाया है, पर पिता का कहना है कि वे लोग तो चले जायेंगे फिर ये लोग कहाँ मिलेंगे और उनके खिलाये अन्न का ऋण लेकर वह जाना नहीं चाहते, उनका ऋण कोई और चुका देगा इसका उन्हें विश्वास नहीं है, न ही वे इतनी निकटता किसी के साथ महसूस करते हैं. जल में रहकर जैसे कमल उसमें लिप्त नहीं होता उसी तरह अपने परिवार से भी वह लिप्त नहीं हैं. यही उनकी शांति का सबसे बड़ा कारण है.

आज सुबह नैनी के बेटे को एक कुत्ते ने बुरी तरह से काट लिया. इतनी बुरी तरह से किसी जानवर का काट खाना उसने पहली बार देखा है, खून से लथपथ एड़ी और घाव के गहरे निशान, वह बुरी तरह से चिल्लाया, सोच कर भी कंपकंपी होती है कि...ईश्वर ने साथ दिया जून फोन पर मिल गये और समय पर अस्पताल ले जा सके. उसका मन देर तक सामान्य नहीं हो पाया, भूख भी जैसा गायब हो गयी. और नैनी पर क्या बीत रही होगी, वह अंदाजा लगा सकती है, हँसता-खेलता बच्चा घर में बंद होकर रह गया है.







Thursday, February 13, 2014

कैरम की प्रतियोगिता


अभी-अभी सद्वचन पढ़ा पर अभी-अभी मन में नकारात्मक भाव आया. आज सुबह बिस्तर छोड़ने में ५-७ मिनट लगाये और उन क्षणों में मन में इधर-उधर के विचार आ रहे थे, उसकी आध्यात्मिक प्रगति एक कदम आगे बढ़ती है और दो कदम पीछे लौट आती है. ईश्वर की अनुकम्पा अभी उस पर नहीं हुई है. कल डायरी नहीं लिख सकी, लेडीज क्लब की कमेटी की उन सदस्या के घर गयी थी जिनके यहाँ से कल शाम मीटिंग से उसे जल्दी लौट आना पड़ा था, कुछ खाकर नहीं आई थी. घर में मेहमान आये थे और जून ने फोन करके उसे बुला लिया था. वह  गाना अच्छा गाती हैं, बताने लगीं, उनके सिखाये हए विद्यार्थी को सर्वोत्तम गायक का पुरस्कार मिला. उन्होंने उसे स्वादिष्ट नाश्ता खिलाया. आज आसू ने बंद की घोषणा की है, सो जून आधे रास्ते तक जाकर ही लौट आये हैं, उन्हें खाली समय बिताना भारी पड़ रहा है. किसी महिला को इस स्थिति से गुजरना नहीं पड़ सकता, They know and They know !

स्वामी योगानन्द जी कहते हैं ध्यान के द्वारा वे महाचेतना के स्तर तक पहुंच सकते हैं और उसके बाद ईश्वर निकट होता है. उसी ईश्वर ने आज सुबह उसे पांच बजे से ठीक पहले उठाकर बचा लिया वरना उसकी छात्रा को वापस लौटना पड़ता. आज मौसम बेहद ठंडा है, घने बादलों के कारण सूरज का कोई बस नहीं चल रहा, पूरे देश में हो वर्षा हो रही है. अभी-अभी कल होने वाली मीटिंग के सिलसिले में दो-तीन जगह बात की, जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं, यहाँ लोगों से जान-पहचान बढ़ रही है, और जैसे-जैसे उम्र बढ़ रही है, स्वयं में जो वरिष्ठता या गरिमा का अहसास होना चाहिए था कम हो रहा है. दिल से वही छोटी ही बने रहना चाहती है छोटी बहन की तरह, अब तो उसने भी स्वयं को बदल लिया है, दूसरी बेटी की माँ बनने के बाद. ईश्वर अभी भी उतना ही दूर है, शायद यही एक प्यास है जो मानव को इधर-उधर भटकती है, मानव को ईश्वर ने बनाया फिर छिप गया. मानव अपने निर्माता को खोजता है, ढूँढ़ता-फिरता है पर वह कहीं नजर नहीं आता, ध्यान करने बैठती है तो सिवाय ईश्वर के इधर-उधर के सारे विचार गड्ड-मड्ड होने लगते हैं, फिर लगता है जो वस्तु है ही नहीं उसके पीछे भागना... यानि श्रद्धा डोलने बढ़ती है, घड़ी-घड़ी मन डांवाडोल क्यों होता है ? ऊर्जा संरक्षण पर कविता लिखनी है सो जून के आने तक के समय में ही पूरी कर लेनी चाहिए. आज नन्हा सुबह कोचिंग में नहीं जा सका, वह उसे नहीं उठा पायी, कुछ देर नाराज था फिर स्वयं ही ठीक हो गया पर उसे बहुत बुरा लगा, जो काम अन्यों के लिए इतने सरल हैं वह उसके लिए कितने मुश्किल हैं.

आज कई दिनों बाद लिख रही है, धूप में बैठकर तो शायद महीनों बाद लिख रही है, अभी सुबह के साढ़े आठ हुए हैं, धूप फिर भी तेज लग रही है. स्वच्छ वातावरण के कारण असम में धूप तेज होती है. पिछले दिनों बहुत कुछ घटा, उसने कैरम की प्रतियोगिता में भाग लिया, कई घंटे उसमें दिए पर फाइनल में नहीं पहुँची. नन्हा और जून उसकी वजह से परेशान भी हुए होंगे. इस वर्ष क्लब मीट पहले से ज्यादा उत्साह व धूमधाम से मनायी जा रही है. यहाँ National Tennis Championship भी खेली जा रही है. कल वे तिनसुकिया गये, माँ-पापा के आने से पहले घर को और सुंदर बनाना चाहती है इसी सिलसिले में कुछ खरीदारी की. नन्हे का स्कूल आजकल बंद है, वह अपने समय का सही उपयोग करना सीखे, अच्छी आदतें डाले यह ख्याल हर वक्त बना रहता है, जून भी अक्सर उसे समझाते हैं कई बार वह मानता है पर कई बार नहीं भी, यह उम्र ही ऐसी है बाद में पता चलता है कि जिन्दगी के कई कीमती वर्ष व्यर्थ ही गंवा दिए. आज उसका फलाहार है, पर सब्जी कटवाते वक्त याद नहीं रहा, अब एक सब्जी उसके रात्रि के विशेष भोजन की शोभा बढ़ाएगी. कल जून कार्ड्स लाये, पत्रों के जवाब का कार्य भी हो गया है, अब उसके सम्मुख नये साल से पहले नन्हे का स्वेटर पूरा करने का उद्देश्य है.



Thursday, January 2, 2014

स्विमिंग गाला में मस्ती


 आज उसे पहली बार कमेटी की मीटिंग में जाना है, कुछ देर पूर्व जून ने फोन पर जो कुछ कहा उस पसंद नहीं आया और उसे उनसे नाराज होने का पूरा हक है क्योंकि कई बार वह कह चुकी है कि अस्वस्थ होना और उसके बहाने अपने कर्त्तव्यों से पीछे हटना उसे जरा भी पसंद नहीं, न ही उसका प्रचार करना, शायद इसलिए कि उसे किसी की सहानुभूति नहीं चाहिए, शायद इसलिए कि उसका स्वाभिमान इतना बड़ा है कि अस्वस्थता में भी झुकना नहीं चाहता, या शायद इसलिए कि  बीमार होने को वह अपना दोष मानती है, फिर अपना दोष अन्यों के सामने स्वीकार कर लेना क्या इतना आसान है, जून इस बात को नहीं समझ पाते हैं, उन्हें अपनी अस्वस्थता को भी बढ़ा-चढ़ा कर बताना पसंद है तो...खैर !  नन्हे को बस में बैठाने के बाद कुछ देर पड़ोसिन से बात करती रही, उसने स्कूल के अध्यापकों के बारे में कुछ बातें कहीं, लेकिन बच्चों को अपने घरों से भी तो अच्छे संस्कार मिलना जरूरी है. आज सुबह कपड़े भी इस्तरी किये और शेष सारे कार्य भी. कल RD में Martha की कहानी पढकर इतना भी नहीं कर सकती तो कुछ नहीं कर सकती. अभी कुछ देर पूर्व सेक्रेटरी का फोन आया, उन्होंने पहला कार्य सौंपा है. जून ने फोन करके सॉरी कहा है, अब उसे कोई शिकायत नहीं है.

It was a marvelous experience. There she was among the talented ladies of town.  They were so able and dedicated to this club, and tea was also very high ! she liked every thing there. Earlier she had spent  almost one hour in calling all the winner and Runner up of all the sports, then told the details to secretary. She thinks Jun and Nanha ara also enjoying her new job. She was not  nervous and even suggested Tri colour sandwiches for the meeting. Job of arrangement of mike and all other things in monthly meeting is given to her and she thinks she should be able to do it nicely. Now her  health is fine and mind is also fresh. Jun takes good care.

Sunday afternoon, jun is sleeping, Nanha is studying and after putting Vaseline on hands and polish on  nails she picked this diary. While applying nail polish she thought of future, after say 15 years…then also she will take care of herself like these days. One should always do . yesterday they went to see the swimming gala in club,  Nanha participated in two events. In the evening Nanha went to see the children movie, “Jingles all the way” with their neighbor, they went to friend’s place,they gave them cold  coffee to drink  but it  was too heavy for her delicate stomach, jun also could not sleep nicely. On Friday they saw ‘One fine day’, it was a nice movie based on the events of a day in the life of two one parent family. The kids were charming so was the smile of young lady. Last evening she read few pages of some shrilankan writer, he is against all kind of beliefs and even meditation. Bible is the most dangerous book for children in his view.

कल दिन भर वर्षा होती रही थी, शायद रात को भी हुई हो, इस वक्त पंखे की भी जरूरत नहीं हो रही है. आज सुबह दीदी का फोन आया, वह चंडीगढ़ से बोल रही थीं, बड़ी भांजी का दाखिला हो गया है, वह पेइंग गेस्ट की तरह एक परिवार में रहेगी, उसे सी ए की कोचिंग की सुविधा भी वहाँ मिलेगी. दीदी खुश थीं और भांजी भी यकीनन होगी. भविष्य की ओर पहला कदम बढ़ाया है अपने बलबूते पर उसने. Really she is brave girl. कल रात स्वप्न में माँ-पिता को देखा, वे यहाँ आये हैं. कल दिन में ही वे उन्हें याद कर रहे थे. सुबह बगीचे से लगभग एक किलो भिन्डियाँ तोड़ी, जिस रफ्तार से वे तोड़ नहीं पाते उससे दुगनी रफ्तार से उग रही हैं, कुछ तो आकार में एक फिट से कुछ ही कम होंगी. अमरुद भी बहुत लगे हैं पर वे जून ही आकर तोड़ेंगे.




  

Monday, September 2, 2013

पड़ोस की बिल्ली


आज नन्हा पानी की बोतल ले जाना भूल गया, जबकि वह उसके बैग के निकट ही रख देती है. बस में चढ़ने के बाद उसने इशारा  किया, पर जब तक वह घर जाकर बोतल लेकर आती बस को चले ही जाना था, उसने सोचा यही ठीक है कि आज वह पानी के बिना ही रहे, तभी भविष्य में ऐसी भूल नहीं करेगा. परसों शाम को लेडीज क्लब की मीटिंग है, फोन करके सबको बताना है, कल तैयारी भी करनी होगी. आज सुबह से पड़ोस के बच्चे की सूसी नाम की एक बिल्ली उनके स्टोर में आकर सोयी है, शायद उसे यह घर भी अपना घर लग रहा है. उसे आवाज सुनाई दी, धोबी आ गया था, वैसे भी आज इधर-उधर की बातें लिख कर वह पेज भर रही थी, सही मायनों में जिसे आत्मशोध कहते हैं या आत्मज्ञान उसके करीब जाने का प्रयास नहीं था. आज ध्यान में अपेक्षाकृत सफलता मिली. मन को जब चाहे तब संयमित कर पाने की विद्या कुछ-कुछ सध रही है. पर कल दोपहर को उसे नैनी पर क्रोध करना पड़ा, क्या वह असंयम नहीं था, शायद नहीं, क्योंकि वह सोच-समझ कर उठाया गया कदम था. क्या इसका अर्थ यह नहीं कि यदि कोई गलत कार्य करे और उसे उचित ठहरने के लिए तर्क का सहारा ले तो कार्य सही हो जाता है. उसे तो लगता है क्रोध एक प्रभाव में आकर किया जाता है सम्मोहन की अवस्था में और वह मन का ही एक रूप है.

आज सुबह नन्हे को उठाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी, उसकी एक आँख तो चिपकी होने के कारण खुल ही नहीं रही थी. आज न तो जागरण पर ही ध्यान टिका पायी और न ही बाद में ध्यान के लिए बैठी. मीटिंग के लिए फोन करते-करते ही सारी सुबह निकल गयी. दोपहर पढ़ने-पढ़ाने में, शाम भ्रमण व बागवानी में. कल रात सैलाब में शिवानी को इतना बेबस देखा की उसके दुःख में शामिल हो गयी.

जून के आने में अभी काफी वक्त है और उसका सुबह का काम लगभग समाप्त हो गया है. जागरण में आज दादा का संदेश सुना- what is silence is turning to God बाहर का शोर यदि न भी हो तो हमारे भीतर जो आवाजों का शोर है उसे खत्म करके ही सच्चा मौन पाया जा सकता है. There are voices of desires, of anger, of so many feelings, so many useless thoughts then one can not turn to God even for a single minute. ईश्वर को पाना इतना कठिन क्यों है ? दूरदर्शन पर ‘मजहब नहीं सिखाता’ में हिन्दू-मुस्लिम एकता पर एक भाव प्रवण दृश्य देखा, बच्चों का जन्मदिन मनाने जो नाराज मुसलमान पड़ोसी हिन्दू के घर नहीं आते वे रात को उसकी चीख सुनकर आ जाते हैं. जब तक लोगों में एक-दूसरे के मजहब के प्रति नफरत है तब तक लोग मजहब का असली रूप पहचान ही नहीं सकते. दादा कहते हैं, Make a relationship with God ! पर यह उसके लिए पहले कभी सम्भव था जब वह बरबस यह वाक्य बोला करती थी, God is with her always because he is her friend. लेकिन अब इतनी निकटता अनुभव नहीं कर पाती, भावना पर बुद्धि हावी हो जाती है और कभी-कभी लगता है कि ईश्वर की आवश्यकता ही नहीं है. पर वह जानती है, किसी भी विपत्ति के आने पर उतनी ही श्रद्धा से फिर उसे पुकारेगी. ईश्वर उसका मददगार है क्योंकि उसमें यह चाह है.




  

Monday, March 4, 2013

कक्षा दो का टाइम टेबिल



आज अभी सुबह ही है, शनिवार है, दोपहर को जून घर पर होंगे. कल शाम को उनसे नोक-झोंक हो गयी, वही पुरानी खाने-खिलाने की बात पर. रात को कहने लगे दोपहर को यह सब क्यों बनाती हो, मैगज़ीनस् क्यों नहीं पढ़ती ? अब उन्हें कैसे समझ में आयेगा कि आजकल पत्रिकाओं से उसका मोहभंग हो गया है, उसे कहानियों में भी अब उतना रस नहीं आता, और राजनितिक दांवपेंच में तो बिल्कुल नहीं. आजकल उसे वह हर चीज पढ़नी अच्छी लगती है जो मन को कहीं गहरे छू जाये, कुछ सिखाए या फिर...बस. आज भी मौसम ने बादलों की पोशाक पहनी है. नन्हा स्कूल गया है, डेविस कप के मैच के कारण शायद आज व कल टीवी फिल्म जल्दी दिखाई जायेगी, कल क्लब में ‘जीने दो’ फिल्म थी यूँ ही सी थी, हाँ, जीने का हक सबको है, आजादी से जीने का. वहीं नन्हे की क्लास टीचर मिलीं, उन्हें बता दिया उसने स्कूल न जाने का कारण, मगर रात देर तक सोचती रही, क्यों कहा, कुछ और कह देती. कभी-कभी सच बोलकर भी बेचैनी होती है, झूठ बोलकर भी, ऐसे में चुप रहना भी सम्भव न हो तो ? आज वर्षों बाद बेसन की सब्जी बनायी.

आज फिर चार दिनों बाद डायरी खोली है, इतवार को नन्हे को हल्का जुकाम था, स्कूल नहीं भेजा, उसका भी स्वास्थ्य उन दिनों की वजह से कुछ ठीक नहीं था, स्कूल के दिनों में एक बार कापी में ऐसा ही कुछ लिखा था, उसकी सहेलियों ने पढ़ा तो बहुत हँसीं थीं. कल सभी भाइयों को राखी भेज भी दी. कल दोपहर टीवी पर कछुए पर टाइम टेबिल बनाना देखा, नन्हे के लिए बना रही है. जून कल ज्यादा चुप नही थे, उसके पहले के दो दिनों की तरह, जीवन को पल-पल जीया जाये तो इसमें उदासी के लिए कोई जगह ही नहीं है. स्वामी विवेकानंद की पुस्तक पढ़े काफी दिन हो गए हैं, एक फितरत होती है हर काम को करने की, अभी उसका मन उसे स्वीकारने को तैयार नहीं है, तो वह वह कार्य नहीं कर सकती, लेकिन यह तो मन की गुलामी हुई, वही प्रेरणा का इंतजार करने वाली बात, जो उसे नहीं करना है.

मौसम आज बुद्ध के मध्यम मार्ग का अनुसरण कर रहा है. कल रात भी अच्छी नींद आई, पिछले तीन-चार दिनों से बहुत गहरी नींद आती है, पहले की तरह भेड़ें नहीं गिननी पड़तीं. जून भी कल स्वस्थ लग रहे थे, खुश थे, उनके साथ कभी-कभी बेवजह वह तल्ख लहजे में बात कर देती है, वह ध्यान नहीं देते, शायद समझ गए हैं कि यह उसकी आदत है. लेकिन उन दिनों जब राजयोग पढ़ रही थी ऐसा बहुत कम होता था. उसे लगता है कि दिनोदिन वह  अपने मस्तिष्क का इस्तेमाल करना कम करती जा रही है. उसे नन्हे के लिए छुट्टी का प्रार्थना पत्र लिखने में दो पेज लगे, पहला ठीक नहीं लगा, जब भी उसे कुछ नया लिखना होता है, कलम रुक जाती है, नन्हे से उसने वायदा किया है कि जब वह स्कूल में होगा, उसके लिए एक कहानी लिखेगी.

फिर तीन दिन यूँ ही गुजर गए, शनि को असम बंद था, नन्हा घर पर ही था पर जून ऑफिस गए थे, किसी ने भी रास्ते में नहीं रोका, कितने सच्चे-झूठे डर इंसान ने पाल लिये हैं, आजतक जितने भी बंद होते थे, लोग घरों से नहीं निकलते थे, पर अब कार लेकर जाते हैं. रविवार को वह असमिया सखी के यहाँ गयी, उसने फ्लोरा मशीन खरीद ली है, उसे सिलाई-कढ़ाई का शौक भी है, उस दिन एक तेलगु परिवार में गयी थी, वहाँ भी आजकल बहुत सी चीजें बना रही हैं गृहणी, वाल हैंगिंग, टीवी कवर, पेंटिंग और भी बहुत कुछ, बंगाली सखी को बागवानी का बहुत शौक है, एक उसे ही कोई खास शौक नहीं है किसी एक चीज का, हाँ, थोडा बहुत सभी का है. कल फोन पर पुरानी पड़ोसिन से बात की, बाद में लगा कि वह थोडा और विनम्र हो सकती थी, लेकिन यह रूखापन आया कहाँ से...उसकी कोई बात उसे चुभी और...इसका अर्थ हुआ कि अब भी वह वहीं की वहीं है, आदिम आदतों से पीछा छुड़ाना इतना आसान तो नहीं. कल दोपहर खतों के नाम थी. कल क्लब में मीटिंग है उसे इंतजार है, लगता है इतने वर्षों तक क्यों नहीं गयी, खैर, हर चीज का एक वक्त होता है. कल व परसों रात को दो कहानियाँ बुनीं थीं, देखेगी, कहाँ तक उतरती हैं पन्नों पर. जून ‘कक्षा दो’ के लिए, एक सुंदर सा टाइम टेबिल बना कर लाए हैं, नन्हे की क्लास टीचर बहुत खुश होंगी.







Monday, July 23, 2012

गणपति बप्पा मोरया


कल बड़ी भाभी व माँ का पत्र आया, पता चला कि उसके सूट का माप खो देने के कारण दर्जी ने सूट सिले ही नहीं थे. अब माप फिर से दिया है सो सिलने पर वे भेज देंगी. उसके बाएं हाथ पर घमौरी हो गयी है, देखने में तो भद्दी लगती ही है, जलन भी होती है, उसे याद आया बचपन में सारे बदन पर बहुत घमौरियाँ निकलती थीं, बारिश में खूब नहाते थे तब, या बर्फ रगड़ते थे सब बच्चे.

नन्हे के माथे व बाँहों पर भी पहले लाल घमौरी निकल आयी थी अब ठीक हो गयी है. अब वह सहारे से चलने भी लगा है और सब बातें समझता है, एक मिनट भी स्थिर होकर बैठना नहीं चाहता अब. बस अभी बोल नहीं पाता. एक घंटा आया के साथ खेल कर वह थक गया होगा सो, सो गया, उसका सारा काम भी तब तक आराम से हो गया. अगले महीने वे शिलांग जायेंगे, तीन दिनों के लिये गेस्टहाउस में एक कमरा बुक करने को जून ने कल फोन पर कहा.

वही कल का समय है, अभी-अभी धोबी आकर कह गया है कि पूजा पर बख्शीश के लिये धोती लेगा, पांच रूपये दे देंगे उसे, उसने सोचा. माली ने वह पौधा गमले में लगा दिया है और खार भी सभी क्यारियों में डाल दी है. कल जून के दफ्तर में एक मीटिंग थी किसी अशोभनीय बात को लेकर, इतने बड़े पदों पर होते हुए लोग कैसे छोटे काम कर जाते हैं. आजकल वह एक रोचक किताब पढ़ रही है “The Festival Death”

कल गणेश चतुर्थी का अवकाश था जून के ऑफिस में. पड़ोस वाले घर में उड़िया समाज एकत्र हुआ था पूजा व भोज के लिये, कितना एका है यहाँ कुछ प्रदेशों के लोगों में, जैसे उड़िया, तेलेगु, तमिल आदि. कितनी जल्दी बीत गया यह सप्ताह, पता ही नहीं चला, कल फिर इतवार है, प्रथम प्रतिश्रुति का दिन.