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Thursday, November 5, 2020

चोर और चोरी


आज जून वापस आ गए हैं, हैदराबाद के प्रसिद्ध बिस्किट का एक डिब्बा लाए हैं। तेनाली राम में राज्य के क्रोध ने सब मर्यादाएं तोड़ दी हैं। कहा भी जाता है, क्रोध क्षणिक पागलपन ही होता है, जो व्यक्ति को उसकी स्मृति ही भुला देता है, उसे याद ही नहीं रहता वह कौन है, कहाँ है, किससे बात कर रहा है ? आज योग दिवस के लिए उसने एक इ-कार्ड बनवाया है जून ने बना दिया है।इसी के लिए एक बैनर बनाने का काम सेक्रेटरी कर रही है । योग कक्ष में एक साधिका मिल्क मेड से बना केक लायी। उसने बताया, कुछ दिन पूर्व  घर में चोरी हो गई थी, वे लोग क्लब गए थे, रात को बारह बजे लौटे तो आलमारी खुली थी, लगभग छह -सात हजार रुपये गायब थे, पर सोना, वस्त्र आदि सब वैसे ही रखे थे। चोर पिछले दरवाजे से आया, जाली काटकर हाथ डालकर उसने दरवाजा खोल लिया, उस पर ताल नहीं था, आगे कुछ भी बंद ही नहीं था, वह आराम से कमरे में जाकर ,अलमारी भी खोल पाया क्योंकि चाबी भी उसी में लगी हुई थी। चोरी नहीं होगी यह मानकर वे कितने लापरवाह हो जाते हैं। एक तरह से यह चोर उन्हें सुरक्षा का पाठ भी पढ़ा गया। वे भी जीवन में इसी तरह जीते चले जाते हैं मानो कभी कुछ गलत उनके साथ हो ही नहीं सकता और मनमाना जीवन जीते हैं। मन पर सजगता का ताला न लगा हो तो जीवन एक बिना पतवार की नाव की तरह इधर-उधर डोलता रहता है। दो धाराओं को जो एक-दूसरे के विपरीत चलना चाहती हैं, उन्हें बांधकर एक ही तरफ ले जाना है, उनका लक्ष्य सम्मुख हो तो जागरूकता बनी रहेगी, बीच-बीच में आने वाली विपदाएं उन्हें और सजग बनायेंगी।


आज का पूरा दिन महिला क्लब के नाम था। शाम को साढ़े पाँच बजे क्लब जाना था और रात को आने में दस बज गए। कार्यक्रम अच्छा रहा, फैशन परेड भी। कविताएं भी सभी को अच्छी लगीं, जो तीन सदस्याओं की विदाई के अवसर पर दोपहर को लिखी थीं। नैनी दो  हफ्ते के लिए परिवार सहित गाँव गई है, कामरूप से कोलकाता, वहाँ से आंध्र प्रदेश, चार दिन में पहुंचेंगे वे लोग। उसकी जगह मालिन काम करने आएगी। धोबी ने, जो उनके यहाँ पिछले तीन दशक से काम कर रहा है, बताया, उसके पिता को सन अठहत्तर में कंपनी से धोबी घाट पर काम करने की मंजूरी मिली थी , तभी से वे कागज उसने संभाल कर रखे हैं, अब वह वृद्ध हो गया है, सब काम अपने पुत्र को सौंप कर अपना कर्त्तव्य पूरा करेगा। 


आज ‘योग दिवस’ है, सुबह वे सामूहिक योग कार्यक्रम में भाग लेने गए। बाद में वह मृणाल ज्योति गई। अगले महीने दो दिन की टीचर्स वर्कशॉप है, उसे भी योगदान देना है।  सुबह ‘क्रिया’ के बाद ऐप में  गुरुजी का संदेश पढ़ा, उनके भीतर एक गीत है, जिसे उन्हें ही गाना है, और उसे गाने के बाद ही उन्हें चैन  मिलेगा। शायद उसी का असर था, स्नान करते समय स्वत: ही भीतर पंक्तियाँ उभरीं और उन्हें पहले ही प्रयास में बिना लिखे वीडियो बनाया, व्हाट्सएप पर डाला। एक साधिका ने फ़ेसबुक पर डाल दिया है। शाम के कार्यक्रम की तैयारी हो चुकी है। एओल की एक योग शिक्षिका भी आने वाली हैं। 


पौने नौ बजे हैं रात्रि के, अभी अभी नन्हे से बात हुई, वे लोग उनके भविष्य के घर से लौट रहे थे, वहाँ अभी भी कुछ कार्य शेष है। शाम को एक सखी के यहां गई, अगले महीने वे सब कहीं घूमने जाएं ऐसा कार्यक्रम बनाया। उसके वृद्ध  पिताजी काफी अस्वस्थ हैं, एक रात से ज्यादा वे लोग उन्हें  छोड़कर रह नहीं सकते। सुबह बंगाली सखी के यहाँ गई थी, उसने अच्छी तरह स्वागत किया बिल्कुल पहले की तरह। बगीचे से एक अनानास मिला, एक तो गिलहरी ने काट लिया, आधा ही शेष था। आज मूसलाधार वर्षा हुई, इतनी तेज कि  सामने वाला पूरा बरामदा भी पानी से भर गया। मानसून देश के कई राज्यों तक पहुँच चुका है। एक ब्लॉग के वार्षिक उत्सव में उसकी रचना को चुना गया है, कई लोगों ने पढ़ी। एक सीनियर ब्लॉगर उसकी तस्वीरें भी पसंद करती हैं फ़ेसबुक पर। लेखक के लिए एक सुहृद पाठक से मिलना सुखद होता है। लाइब्रेरी से दो किताबें लीं, एक रॉबिन शर्मा की दूसरी नेल्सन मंडेला की आत्मकथा, जो बहुत  रोचक है;  उनका बचपन  अफ्रीका के एक गाँव में बीता था बिल्कुल प्रकृति के निकट।  


.. बरसों पुरानी डायरी के के पन्ने पर पढ़ा -


किसी सूनी शाम को 

हथेलियों पर ठोड़ी टिकाये 

लिखने वाली मेज पर बैठे 

कोई बात फड़फड़ायी होगी तुम्हारे मन में 

लिखो फिर काट दो 

तकते रहो  निरुद्देश्य दीवार को 

अपनी आवाज को 

सुनने का प्रयत्न करो 


Wednesday, November 1, 2017

पंछियों के गीत


बगीचे में पत्ते बिखरे हैं. कल आंधी-बारिश आई थी, उसके बाद से सफाई नहीं हुई है. माली की पत्नी को बुलवाया था पर शायद वह व्यस्त है. उसकी दूसरी पत्नी का बच्चा छोटा है. कुल मिलाकर घर में पांच बच्चे हैं, व्यस्तता तो रहेगी ही, शायद थक कर सो रही हो. इस समय भी बदली छाने को है, शाम को पुनः वर्षा होगी, मौसम विभाग का भी यही कहना है, लो, बूँदें पड़नी शुरू भी हो गयी हैं, जबकि कहीं-कहीं नीला आकाश झांक रहा है. शाम को शोकाकुल परिवार में जाना है, आज उनका दामाद आ रहा है. मालिन आ गयी है, सोचा, उसके साथ कुछ देर बगीचे में ही रहेगी. कल शाम क्लब में मीटिंग थी, एक गायिका ने ऊंची आवाज में गीत गाये, संगीत बहुत तेज था. एक ने नृत्य किया, छह ढोलकिये थे साथ में, उसे जरा नहीं भाया. कार्यक्रम का स्तर बढ़ने की बजाय घटने लगे तो दर्शकों की संख्या घटना स्वाभाविक है. नन्हे का फोन आया था, वह चेन्नई के रास्ते में होगा इस समय. वह स्वतंत्र है और इसका आनन्द ले रहा है.

रात्रि के सवा आठ बजे हैं. आज बुजुर्ग आंटी का श्राद्ध था, वे सुबह से ही व्यस्त थे. कल मई दिवस के कारण जून का दफ्तर बंद था, सुबह सब कार्य धीमी गति से हुआ, फिर अस्पताल गये. माली के पिता को साईकिल से गिरने के कारण चोट लग गयी है.

आज यूँ ही ख्याल आया, कितने दिनों से किसी से फोन पर लम्बी बात नहीं की है. इतना ही लिखा- चलो कुछ बातें करें
फोन पर ही सही मुलाकातें करें
कहें सुख-दुःख अपने सुनें कुछ औरों से
पकड़ रखे हैं व्यर्थ ही जो जोरों से
चलो बहा दें हर आंसू जो छिपा रखा है
किसी बहाने तो सही घातें प्रतिघातें करें

सवा तीन बजे हैं दोपहर के, कैसी प्यारी पवन बह रही है. सामने खड़ा युक्लिप्टस का वृक्ष मस्ती में झूमे जा रहा है. मई का आगमन हो चुका है पर गर्मी का नामोनिशान नहीं, सुबह घनघोर वृष्टि हुई. प्रातः भ्रमण पर भी नहीं जा सके. जून आज शिवसागर गये हैं, एक कनिष्ठ सहकर्मी के विवाह भोज में सम्मिलित होने. शाम तक लौट आयेंगे. लॉन में बैठकर लिखने का सुयोग बहुत दिनों बाद बना है. एक पक्षी लगातार कूक रहा है, दूर से दूसरा पक्षी भी उसके साथ युगलबंदी पर उतर आया है. आज बुद्ध पूर्णिमा है. भगवान बुद्ध की संसार को कितनी बड़ी देन है विपश्यना, यानि विशेष तरह से देखना, देह और चित्त की सच्चाई को अनुभव के स्तर पर जानकर सारे विकारों से मुक्त होने की कला. आज सुबह जून को तमस में घिरे देखकर वह उससे भी ज्यादा तमस में घिर गयी जब उनके कृत्य की निन्दा की. तत्क्षण हृदय पर कैसा भार लगने लगा था, विपश्यना के द्वारा ही इससे मुक्त हुई. वे सदा ही दूसरों के निर्णायक बन जाते हैं यह सोचे बिना कि इससे स्वयं की कितनी हानि होती है. बड़ी भांजी से बात की, उसके ससुर को दुर्घटना में चोट लग गयी है, आपरेशन कुछ दिनों बाद होगा. असजगता का परिणाम कितना दुखद होता है, किन्तु नेपाल में जो हजारों पीड़ित हैं, वे कहां असजग थे? इस देह में आना ही असजगता की निशानी है. उनका अस्तित्त्व देह के बिना भी रहता है शुद्ध रूप में, तृष्णा ही उन्हें बांधती है, सत्व गुण भी बांधता है,, मात्र तमो या रजो गुण ही नहीं बांधता !  


Saturday, July 16, 2016

गीत का जन्म


आज ध्यान में किसी ने पूछा कि वह ईश्वर को क्यों पाना चाहती है, क्या इसके पीछे यश की कामना है ? ईश्वर को क्या यश का साधन बनाया जा सकता है ? संतों का यश भी तो चारों दिशाओं में फैलता है, पर वे तो परमात्मा ही हो जाते हैं. उसका मन कामनाओं से मुक्त नहीं हुआ है. जो कुछ भी उन्हें इस जीवन में प्राप्त होता है, सब कर्मफल है, फिर उसका उपयोग वे जिस तरह करें वे नये कर्म उनके भविष्य की दिशा निर्देशित करते हैं. आत्मा में रहकर परमात्मा की निकटता का अनुभव करके भी यदि कोई संसार ही पाना चाहता है तो उसे सीधे रास्ते से ही जाना चाहिए. सद्गुरु क्या आये उसका कल्याण कर गये. पल भर के उस हाथ के स्पर्श में पता नहीं क्या था कि उसकी साधना जो बैलगाड़ी की गति से चल रही थी, जेट की गति में आ गयी है. भीतर कितना बदलाव आ गया है. मन अब नन्हे शिशु की तरह निरीह तकता है. बुद्धि अपनी मनमानी नहीं कर पाती. सद्गुरु को कल उलेमा को सम्बोधित करते सुना वे इराक़ गये थे, शिया और सुन्नी में मेल कराने, कल वह सीडी भी देखे, जिनमें यहाँ के उनके कार्यक्रम की रिकार्डिंग है. ‘मेरी दिल्ली मेरी यमुना’ के बारे में नेट पर पढ़ा सुना था, कल उनके मुख से सुना, कैसे एक व्यक्ति आत्मा की शक्ति को जागृत करके परमात्मा के समकक्ष पहुँच सकता है. परमात्मा की तरह प्रेम का सागर बन सकता है. परमात्मा की तरह समता व द्रष्टा भाव में रह सकता है. सत+चित+आनंद की मूर्ति उसके सद्गुरु को कोटि-कोटि प्रणाम !


कल दोपहर कुछ देर के लिए वर्षा थमी थी, शाम होते-होते बादल फिर घिर आये और इस समय घना घटाकाश छाया है. कल रात एक स्वप्न देखा. पहाड़ी कच्चे रस्ते से किसी के साथ जा रही थी कि पैर फिसलता है और वह नीचे गहरी खाई में जा गिरती है पर भूमि स्पर्श से पूर्व ही जैसे कोई शक्ति उठा लेती है और हवा में तैराते हुए ऊपर ले जाती है. गिरते समय भार की कमी महसूस हो रही थी और गुरुत्व का स्पष्ट अनुभव हुआ था, ऐसे ही चढ़ते समय भी...कितना स्पष्ट अनुभव था. भगवद्गीता में कृष्ण ने कहा है उनके भक्त का पतन नहीं होता. पता नहीं वह भक्त है या नहीं लेकिन वह उनसे प्रेम करती है. आज स्नान के बाद मन नृत्य कर रहा था, भीतर शब्द फूट रहे थे, फिर कदम भी थिरकने लगे, कुछ ऐसी पंक्तियाँ थीं- सद्गुरु का हाथ हो, झुका हुआ माथ हो तो क्या कहने..सद्गुरु का ज्ञान हो, अंतर का ध्यान हो..सद्गुरु का संग हो, उतरे न रंग हो..सद्गुरु की वाणी हो, गा गा के सुनानी हो..सद्गुरु सा मीत हो, उसके ही गीत हों..वह अपना सा लगे, जग सपना सा लगे..इस भजन या गीत की धुन अपने आप ही भीतर से फूट रही थी, जीवन में यदि परमात्मा का प्रेम हो तो जीवन उत्सव बन जाता है, वरना दुःख, चिंता, ईर्ष्या, द्वेष, बेचैनी तथा उलझनों में फंसे ही रहते हैं..एक को पा लें तो सब मिल जाता है. एक खो जाये तो सब कुछ होते हुए भी इन्सान खाली ही रह जाता है, परम ही वह अनमोल खजाना है जिसे हर कोई ढूँढ़ता फिरता है, उससे कम में उसे तृप्ति मिल भी कैसे सकती है..मिलनी भी नहीं चाहिए..

Thursday, July 17, 2014

मुकेश के गीत


आज बाबाजी ने भारत के मनीषियों के मनोविज्ञान की चर्चा करते हुए कहा, मन की यह विशेषता है कि वह एक साथ दो स्थितियों में नहीं रह सकता, जिस क्षण वह संतुष्ट है, दुखी नहीं है और जिस क्षण वह तृप्ति का अनुभव नहीं कर रहा, सुखी नहीं है. इस विशेषता का लाभ उठाते हुए यदि कोई दुःख में एक क्षण के लिए भी मुस्कुरा दे तो सुख बरस जायेगा, और मुस्कुराना बेवजह मुस्कुराना उसकी आदत में शामिल हो गया है. आज सुबह ऐसा लगा कि उसकी वाणी में रुक्षता आ गयी है पर सचेत थी सो संभल गयी. जून भी कल रात को थोड़ा सा उद्ग्विन दिखे, यात्रा से आने के बाद पहली बार, शायद गर्मी के कारण या नन्हे के देर तक क्लब में रह जाने के कारण. आज सुबह नन्हे के पेट में दर्द था, वह ठीक से नाश्ता भी खाकर नहीं गया, लेकिन वह जानती थी, बहादुर लड़का है, इस बात से छुट्टी नहीं लेगा. जून के साथ कल माँ के लिए साड़ी और कुछ अन्य उपहार खरीदे.

सुबह पांच बजे उठ कर बाहर आयी तो पूसी अकेली दिखी, उसने बच्चों को शायद कहीं शिफ्ट कर दिया है. आज भी विद्वान् वक्ता ने अच्छी बातें कहीं, वह भाषाएँ भी कई जानते हैं. क्लब में children meet होने वाली है, उसकी संगीत अध्यापिका बच्चों के साथ व्यस्त हैं. सो आज क्लास नहीं होगी. अस्पताल जाने के लिए उसने जून को फोन किया, कई दिनों से ऊपरी अधर के पास छोटा सा दाना उभर आया है, जो कितने उपाय करने से भी ठीक नहीं हुआ, अब डाक्टर की राय लेना ही ठीक रहेगा. संभल-संभल के चलना है, व्यर्थ ही कल्पनाओं में भ्रमित रहेंगे तो वर्तमान को कटु बना लेंगे. बीमारी का आगमन तभी होता है जब स्वास्थ्य के नियमों का पालन नहीं करते.

आज सुबह नन्हा उठ नहीं रहा था पर क्रोध नहीं आया, अच्छा लगा कि सहज शब्दों में उसे समझा सकी. जून का हृदय भी उसके प्रति स्नेह से भरा है, उसकी हर छोटी-बड़ी आवश्यकता का ध्यान रखते हैं, ऐसे ही ईश्वर भी उनकी हर तरह से सहायता करता है, उन्हें इतना कुछ दिया है, उसकी हर छोटी-बड़ी मुश्किल में साथ देता है. और तब भी कृतज्ञता स्वरूप वह उसे अपना एकनिष्ठ प्रेम नहीं दे पाती.

आज बाबाजी ने फटकार लगायी, बारह साल कोल्हू के बैल की तरह एक ही जगह चक्कर लगाते रहें ऐसे भक्त उन्हें नहीं चाहिए, जो सातत्य भक्ति कर सकें, यात्रा पूरी करने का सामर्थ्य रखते हों वही इस क्षेत्र में आयें. कल रात को वह बेचैन थी, मन को एकाग्र रखने का प्रयास व्यर्थ हुआ, शायद उसमें श्रद्धा की कमी है, या वह कई मार्गों पर एक साथ चलने का प्रयास करती है तभी भटक जाती है. आज से वह निश्चित कर लेती है, ‘भगवद् गीता’ उसका इष्ट ग्रन्थ है, इसके अतिरिक्त वह किसी ग्रन्थ का अध्ययन फ़िलहाल अभी नहीं करेगी. कृष्ण ही उसके प्रेम का केंद्र होंगे. रास्ता एक हो उसका ज्ञान हो तो मंजिल शीघ्र मिल सकती है. गीता में भगवान ने स्वयं कहा है, एकनिष्ठ व संशय रहित होकर जो उन्हें भजता है उनके कुशल क्षेम का ध्यान वह स्वयं रखते हैं. प्रभु  जिसके राखनहार हों उसे अन्य किसी से प्रयोजन भी क्या हो सकता है. कल क्लब में छोटे-छोटे बच्चों को इतनी मधुरता से गाते देखकर अच्छा लगा, संगीत में जादू है और फिर संगीत से कोई आराधना भी कर सकता है. कल अध्यापिका ने ‘तीसरी कसम’ फिल्म का एक गीत सिखाया. सजन रे झूठ मत बोलो...मुकेश का गाया यह गीत उसने बचपन में कई बार सुना था.

आज ‘भारत बंद’ के कारण नन्हे का स्कूल बंद है, नूना ने उसे गृह कार्य करने को कहा, पर वह दूसरे-दूसरे कार्यों में व्यस्त है. कभी कभी बच्चे माता-पिता के धैर्य की परीक्षा लेने के लिए ही जैसे उनका कहा नहीं सुनते.




Thursday, February 20, 2014

एड़ी का घाव


पता नहीं कैसे उसे कल या परसों याद नहीं आया कि मीटिंग की तैयारी के लिए दो जनों को फोन करने हैं. आज सुबह नाश्ता करते समय अचानक मन में खटका हुआ और नतीजा यह कि पहले ने शिकायत की, एक दिन पहले बोल देने से उसे सुविधा होती है. शिकायत कैसे सुन लेता मन, झट प्रतिक्रिया की कल भी फोन किया था. बाद में स्मरण आया अपनी आत्मा पर एक धब्बा और लगा लिया जिसे छुड़ाने के लिए न जाने कितने जन्म और लेने पड़ेंगे. सेक्रेटरी हर बार एक से अधिक बार फोन करके याद दिलाती हैं इस बार उन्होंने भी याद नहीं दिलाया. अभी कुछ देर पहले ही वह क्लब से आ रही है, हॉल बिलकुल गंदा पड़ा था, पर उस व्यक्ति ने बताया शाम तक हो जायेगा. वह साइकिल से गयी थी, खोलते समय उसका लाक टूट गया, अनाड़ी है वह जिन्दगी के खेल में अभी.

आज शाम से skit की रिहर्सल शुरू होनी है, कल की मीटिंग अच्छी रही, पर व्यर्थ में ही बहुत समय लग गया. डॉ बरुआ ने महिला स्वास्थ्य पर एक लेक्चर दिया, HRT के बारे में बताया यहाँ के अस्पताल में भी इसकी सुविधा है उसे जानकर आश्चर्य हुआ. वह लौटी तो जून का चेहरा उतरा हुआ था, उसने सोचा यदि रोज-रोज जाना पड़े तो क्या होगा..खैर..जो होना है वह होगा ही. नन्हे की पढ़ाई आजकल जोर-शोर से चल रही है. उसे ‘ऊर्जा संरक्षण’ पर आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में भाग लेना है.

शाम हो गयी है, पिता कैसेट सुन रहे हैं, माँ किताब पढ़ रही हैं. वह एक क्षण भी खाली नहीं बैठ सकतीं. उसके और जून के लिए स्वेटर बना दिए हैं, उनके जाने में केवल दस दिन शेष रह गये हैं. उसने सोचा अब तक तो उन सभी को एक-दूसरे के साथ रहने का अभ्यास हो गया है. कितना कुछ मिल रहा है उनके साथ से, और वे उन्हें क्या दे रहे हैं बस थोड़ा सा स्नेह और सम्मान ! उसने सोचा वह भी स्वेटर के कुछ डिजाइन सीखेगी. आज सुबह राग आसावरी पर आधारित एक गीत का अभ्यास किया, अभ्यास ठीक ही रहा पर अभी तक सुर सधे नहीं हैं. पता नहीं वे लोग कैसे होंगे जो पूरी तरह अपने कार्य से संतुष्ट होने का सुख अनुभव कर पाते होंगे, उसके जीवन में एक पल तो ऐसा आये जब अपने कार्यों से पूरी तरह संतुष्ट हो पाए.

हवाई जहाज का तेज शोर ! आज बहुत दिनों बाद घर के ऊपर से उडकर कोई प्लेन गया है. कल से बसंत का मौसम शुरू हो गया है. जून के एक मित्र ने माँ-पापा को भोजन पर बुलाया है, पर पिता का कहना है कि वे लोग तो चले जायेंगे फिर ये लोग कहाँ मिलेंगे और उनके खिलाये अन्न का ऋण लेकर वह जाना नहीं चाहते, उनका ऋण कोई और चुका देगा इसका उन्हें विश्वास नहीं है, न ही वे इतनी निकटता किसी के साथ महसूस करते हैं. जल में रहकर जैसे कमल उसमें लिप्त नहीं होता उसी तरह अपने परिवार से भी वह लिप्त नहीं हैं. यही उनकी शांति का सबसे बड़ा कारण है.

आज सुबह नैनी के बेटे को एक कुत्ते ने बुरी तरह से काट लिया. इतनी बुरी तरह से किसी जानवर का काट खाना उसने पहली बार देखा है, खून से लथपथ एड़ी और घाव के गहरे निशान, वह बुरी तरह से चिल्लाया, सोच कर भी कंपकंपी होती है कि...ईश्वर ने साथ दिया जून फोन पर मिल गये और समय पर अस्पताल ले जा सके. उसका मन देर तक सामान्य नहीं हो पाया, भूख भी जैसा गायब हो गयी. और नैनी पर क्या बीत रही होगी, वह अंदाजा लगा सकती है, हँसता-खेलता बच्चा घर में बंद होकर रह गया है.







Monday, September 23, 2013

काले चने की सूखी सब्जी



थोड़ा सा वक्त था, सोचा कल दोपहर से जो बातें मन में उमड़ रही हैं उनको अपनी डायरी से साझा कर ले, “ख़ामोशी” जैसी फिल्म सदियों में एक बार बनती है, पूरी फिल्म एक कविता सी  लगती है, मन को गहरे तक छू जाने वाली कविता. नन्हा और जून दोनों मन के और करीब हो गये, मन में गहराई तक सिर्फ प्यार भर गया, सारी दुनिया के लिए, ऐसी अच्छे भाव जगाने वाली फिल्म को अच्छा न कहे तो क्या कहे. रात को मिली का कुछ भाग देखा, वह भी अच्छी फिल्म है पर इतने विज्ञापनों की वजह से वे पूरी नहीं देख पाए. आज भी नन्हे का स्कूल बंद है, कल ‘असम बंद’ के कारण जून का दफ्तर भी बंद रहा, शाम को वे एक मित्र के यहाँ गये, जहाँ उसके कम्प्यूटर शिक्षा प्राप्त करने की बात हुई, जून NIIT के बारे में विस्तार से जानकारी पता करके आएंगे.

पीटीवी पर पुराने वक्तों के फ़िल्मी गाने आ रहे हैं, शायद तब के जब दोनों मुल्कों का फिल्म  संगीत एक था, कितने अपने से जाने-पहचाने लगते हैं ये गीत. नूरजहाँ और के.एल. सहगल के जमाने के. हिंदी के कितने शब्द वहाँ भी हैं, जैसे उर्दू के यहाँ, आखिर स्रोत तो दोनों का एक ही है. पता नहीं कब उसका यह ख्वाब पूरा होगा.. या नहीं कि दोनों मुल्क दोस्ती की राह पर चलेंगे. परसों यानि सोमवार को उसने एक सखी को लंच पर बुलाया था, वह अपने पुत्र के साथ आई जो नन्हे का मित्र भी है. शाम तक वे सब साथ रहे. कुछ मन की बातें कहीं-सुनीं, उसने अपनी एक दो कविताएं भी सुनायीं. कल ‘विश्वकर्मा पूजा’ थी, जून के दफ्तर में पूजा के बाद भोजन का भी प्रबंध था. कल से उसने चश्मा लगाना शुरू किया है, जून ने कहा उसके सर दर्द का कारण चश्मा न लगाना भी हो सकता है. आश्चर्य की बात तो यह कि दर्द ठीक भी हो गया.

मौसम आज भी मेहरबान है. कल रात की वर्षा के बाद सब कुछ हरा-भरा और धुला–धुला लग रहा है. बाहर झांकने पर, कल शाम उन्होंने दूब घास की कटिंग भी की. इस वक्त मन में (जैसे कोई संकरी गली का रास्ता बंद कर दे) एक ठहराव या घुटन सी महसूस हो रही है, कारण कोई एक नहीं है. सुबह देर से उठी और रात्रि को बिना शुभरात्रि किये ही सो गयी थी., कल खतों के जवाब भी दिए पर मन खोल कर रख दें ऐसे नहीं. कुछ देर पूर्व एक ड्रामा देखा उससे पहले एक पुराना गीत EL पर देखा, ‘महलों का राजा मिला, तुम्हारी बेटी राज करेगी...’, अच्छा लगा यह गीत, जाहिरा जो इसे गा रही थी कितनी उदास थी, शायद वही उदासी मन में कहीं से घुस गयी है.. नन्हा आज रोज से जल्दी उठा और फरमाइश की, कि काले चने की सूखी सब्जी ले जायेगा टिफिन में, रात को बिना भिगोये चने आखिर उसके स्कूल जाने तक तीन बार उबालने पर तैयार हुए. आज उसका टेस्ट है, पर वह निश्चिन्त था, टेस्ट में ग्रेड मिलने वाला है मार्क्स नहीं.

सुबह से कई बार लिखने की बात सोच चुकी है वह, पर हर बार किसी न किसी काम में उलझ कर रह गयी. पर मन में हर वक्त यह विचार रहा कि कुछ लिखना है. आँखों की चुभन या कहें चुनचुनाहट अभी भी बरकरार है. ऐसा लग रहा है कि सुबह से कुछ किया ही नहीं, जून आज दिगबोई गये थे, लंच उसने अकेले ही खाया. सुबह दो सखियों से फोन पर भी बात की, पर न जाने क्यों एक अकेलेपन का अहसास( शायद आँख की तकलीफ की वजह से) है. स्वामी रामतीर्थ की पुस्तक में पढ़ा कि, काम करना, बस काम करने के लिए काम करना, सच्चे वेदांती की निशानी है. तो उसे मुक्ति काम में ही मिल सकती है आराम में नहीं, दूसरी बात थी उसमें, त्याग की और आत्म निरीक्षण की, सो त्याग करना होगा अकर्मण्यता का और निरीक्षण करना होगा अपनी कमियों का. कल शाम क्लब में टीटी खेलते वक्त कैसे सब कुछ भूलकर बस टीटी खेल रही थी, इसी तरह किसी काम में इस कदर लीन हो जाना कि स्वयं को भुला देना पड़े वेदांती का लक्षण है. भुलाना मात्र ईगो को है, कि वह यह करने वाली है, she is the doer ! सुबह से वर्षा तो नहीं हुई है पर बादल बने हुए हैं, वे भी अपने बने रहने का काम कर रहे हैं.  







Tuesday, July 16, 2013

रसभरे गुलाबजामुन


चुप-चुप रहना कुछ नहीं कहना  
अपनी धुन में खोये रहना...

पीटीवी पर यह सुंदर गीत अभी-अभी सुना, जाने क्यों पाकिस्तानी संगीत उसे अंदर तक छू जाता है, राहत देता है. Soothing to nerves

देखो हरसूं फूल खिले हैं
साजन बरसों बाद मिले हैं
उनको हमसे बहुत गिले हैं
कितनी कलियाँ महक रही हैं
जब से उनके होंठ हिले हैं...

आज सुबह फोन की घंटी सुनकर बेड से उठी, आँख पहले ही खुल गयी थी. जून का संदेश था उनके सहकर्मी के द्वारा, वे लोग आज शाम की जगह कल सुबह  आ रहे हैं. माँपापा की ट्रेन २० घंटे लेट है. कल रात को देर तक नींद नहीं आ रही थी, बाद में स्वप्न में असमिया सखी से मिली, और दीदी से भी, वह भी डॉक्टर है, वह अपनी स्वास्थ्य समस्या के बारे में उन्हें बता रही है. रात से ही कभी-कभी हल्का दर्द होता है, उसने सोचा, क्या एक बार फिर उसे उस सब से गुजरना होगा. ईश्वर उसकी परीक्षा ले रहे हैं ! लेकिन इस बार दर्द सहना आसान होगा. पर हो सकता है दवा लेने से ही ठीक हो जाये, उसे कल या परसों डॉक्टर को दिखा लेना चाहिए, उसे विटामिन सी, जिंक और प्रोटीन की जरूरत है, क्योंकि उसका जख्म देर से भर रहा है. आज से नियम से चार आंवले खाने शुरू करेगी, हर रोज दो सुबह, दो शाम को.

परसों माँ पापा आये और घर जैसे फिर से स्पंदन युक्त हो गया है. इतने सालों तक अकेले-अकेले रहने के बाद उन तीनों को सभी के साथ रहना अच्छा लग रहा है. इस वक्त वे दोनों आँख टेस्ट करने अस्पताल गये हैं. उसका मन शांत है और आँखों में मुस्कुराहट की कलियाँ चटख रही हैं. जून भी बहुत खुश हैं और नन्हा भी, पर कभी-कभी वह शांत हो जाता है. दीवाली को मात्र चार दिन रह गये हैं. कल पटाखे और दीए भी आ गये हैं. गुलाब जामुन के लिए गिट्स का पैकेट भी. जून उसके लिए एक बहुत सुंदर ड्रेस लाये हैं, अभी तक पहन कर नहीं देखी है, इतनी सुंदर है कि पहनने से डर लगता है. उसने अपनी एक सखी को फोन पर बताया, उसे अच्छा लगा होगा पर कुछ लोग ख़ुशी जाहिर करने में भी कंजूसी करते हैं. माँपापा भी उन तीनों के लिए कपड़े लाये हैं. उन दोनों को पसंद आए पर नन्हे के कपड़े खरीदना उन्हें उतनी अच्छी तरह से नहीं आता. कल लेडीज क्लब की एक महिला सदस्या ने अपना लेख भेज दिया एक ने आज शाम तक भेजने को कहा है. कल तक टाईप भी हो जायेंगे और शाम तक वह भिजवा देगी. आज दोपहर को हिंदी कक्षा के लिए भी जाना है.

जान कहके जो बुलाया तो बुरा मान गये
और न जो उनको बिठाया तो बुरा मान गये
आईना उनको दिखाया तो बुरा मान गये
वह थे बेहोश मुझे होश में लाने के लिए
और जब होश में आया तो बुरा मान गये  


Wednesday, January 23, 2013

सत्यजीत रे की गण शत्रु



पंजाबी दीदी अगले हफ्ते बुधवार को यहाँ से सदा के लिए जा रही हैं, मंगल को वे लोग उनके यहाँ आएंगे और एक रात रहेंगे, अगले दिने वे उन्हें छोड़ने भी जायेंगे. कल रात यह सुनकर वह उदास हो गयी, जून के प्रश्न का उत्तर भी ठीक से नहीं दिया, पर उसने कितने धैर्य का परिचय दिया. पता नहीं उसे क्या हो गया है, क्यों झुंझलाहट होती है, वह किससे नाराज है ? उसे खुद भी समझ नहीं आता. नन्हा फिर उसे कैसे समझाता है. पर वह इतना जानती है बादलों के पीछे से सूरज फिर से निकलेगा..फिर से वह मुस्कुराएगी और अपने आप से शर्मिंदा नहीं होना पड़ेगा.

कल शाम को कोलकाता के नर्सिंगहोम में महान फ़िल्मकार सत्यजीत रे का देहांत हो गया. टीवी पर उनकी फिल्म “गणशत्रु” दिखाई जा रही है.

गीत वह जो प्राण भर दे
सदियों से सुप्त उर में
भीषण हुंकार भर दे !

दस दिशाएं गूंज उठें
भीरु कातर इस नगर में
शक्ति का संचार कर दे !

आज फिर संयोग हुआ है अपने करीब आने का, कल एक मित्र के यहाँ गयी थी, अच्छा लगा उससे बातें करके. यह क्या..अपने करीब आने का मौका भी दूसरों के पास जाने में गंवा देना चाहती है...इंसानी मन ही ऐसा है, यह नहीं सोचता कि वह स्वयं क्या है ? क्या सोचता है ? बल्कि ज्यादा यह कि दूसरे क्या सोचते हैं ? जबकि इन दूसरों का जरा भी दखल नहीं होता उनकी जिंदगी में. उस दिन पंजाबी दीदी की प्यारी सी चिट्ठी मिली, आज वह भी उन्हें लिखेगी. एक किताब पढ़ रही है, रोमांचक तो है थोड़ी खतरनाक भी है, क्या लेखिका हैं! उसने पिछले कई दिनों से एक पंक्ति भी नहीं लिखी, समय न मालूम कैसे गुजर जाता है, कुछ हाथ का काम भी नहीं किया. सेंट्रल स्कूल में कक्षा एक में पढ़ने के लिए कल नन्हे का एडमिशन टेस्ट हो गया, तीन दिन बाद रिजल्ट आएगा. इस समय वह भी डायरी लिख रहा है. बचपन में कितनी तुकबन्दियाँ की थीं उसने, कभी किसी ने पढ़ी नहीं, वक्त ही कहाँ था, माँ-पिता के लिए इतने बड़े परिवार को चलाना क्या आसान था ? लेकिन नन्हे को वह पूरा वक्त दे सकती है, उसे पढ़ा सकती है.

आज मौसम बहुत अच्छा है, ठंडा-ठंडा शांत सा..रोजमर्रा का काम तो हो गया है पर सोचा था फ्रिज साफ करना है, वह नहीं हो पाया, घर-गृहस्थी के कामों का कोई अंत ही नहीं है, स्टोर  की सफाई फिर ड्यू हो गयी है और किताबों वाला रैक भी आवाज दे रहा है, पर थोड़े से पल शांत बैठकर अपने आप से बातें करना भी शायद उतना ही जरूरी है, पर बीच में यह ‘शायद’ क्यों? कल जून तिनसुकिया गए थे उनकी कार में कुछ खराबी आ गयी थी, लौटे तो बहुत थके थे, झुंझला गए. पर रात को जब उन्होंने अपने-अपने मन को टटोल कर देखा तो वहाँ एक दूसरे के सिवा कुछ था ही नहीं.

आज जून किसी मेहमान को लंच पर साथ लाने वाले हैं, उसकी सुबह किचन में ही बीती, साढ़े दस बज गए हैं अभी मेज सजाना शेष है और सलाद आदि भी. लेकिन ऐसी व्यस्तता उसे भली लगती है. लगता है कि वह है, जीवित है, स्पंदन है. उसे ही फोन करना पड़ा अपनी मित्र को जब पता चला कि उसकी तबियत ठीक नहीं है तो रहा नहीं गया, पर जिस स्तर पर वह चाहती है उस स्तर पर सम्बन्ध बन नहीं पाते, निस्वार्थ..अपनेपन से भरे..यह मृगमरीचिका ही रहेगी उसके लिए.

नन्हा साईकिल चलाना चाहता है, उसकी पढ़ाई आजकल बिलकुल नहीं हो पाती है. नए स्कूल में उसका दाखिला हो गया है. वे लोग घूमने गए, जून ने उसे जन्मदिन का उपहार ले दिया, दो सूट के कपड़े - नीले कपड़े पर सफेद फूल और काले कपड़े पर सफेद फूल.. नन्हे को भी उसकी पसंद का एक गिफ्ट, उसके अच्छे रिजल्ट के लिए. उस दिन मंदिर में उसने भगवान से शांति की प्रार्थना की थी, वह सुन ली गयी है...ईश्वर अब भी उसकी बात सुनते हैं. बहुत दिनों बाद ढेरों फूल खिले हैं मन में और एक सफेद व बैंगनी रंग का एक नया फूल उनके बगीचे में भी खिला है पहली बार..




Friday, May 4, 2012

कहो न आस निरास भई


आज उसे डॉक्टर के पास जाना था. सामान्य जाँच के लिये. हो सकता है अब हर दो हफ्ते बाद जाना पड़े. सुबह किचन की सफाई भी की. कल बाकी घर की सफाई की थी, हमेशा की तरह जून ने दीवारों, छत के कोनों की और उसने फर्श की. कमरे की सजावट में थोड़ा फेरबदल भी किया. आज बरामदे में हैंगिग फ्लावर पॉट लगाने के लिये हुक लगाने कुछ लोग आये थे. उसने कल्पना में उनमें लटकते फूल देखे और फिर कल लाइब्रेरी से लाई किताब पढ़ने लगी.
होली आयी और चली भी गयी. हर वर्ष की तरह यादें छोड़ गयी, कुछ खट्टी कुछ मीठी. आज गुड फ्राइडे है, इसी दिन ईसा को सूली पर चढ़ना पड़ा था. दो हजार से अधिक वर्ष हो गए इस घटना को पर आज भी व्यथित होते हैं लोग इसे याद करके.
सहगल का गीत, ‘कहो न आस निरास भई’ सुनते हुए उसने अधूरी चादर पुनः काढ़नी शुरू की है. अच्छा लगता है उसे फूल काढ़ना और सहगल के पुराने गीत सुनना भी. अभी कुछ देर पूर्व जून आया था, उसके स्नान के लिये गर्म पानी रख कर जाना भूल गया था, इसीलिए आया था. कितना ध्यान है उसे नूना का.

Wednesday, April 18, 2012

राष्ट्रीय युवा दिवस


भारत के भूतपूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री की बीसवीं पुण्य तिथि. दोपहर को नूना ने टीवी पर एक फिल्म में उनकी आवाज सुनी. अमोल पालेकर का एक कार्यक्रम देखा “आ बैल मुझे मार”, शाम को देखा एक नाटक, ‘काठ की गाड़ी’ जो बहुत ही मार्मिक था, उदासी भरा एक गीत हो जैसे. अपने सामने किसी ऐसे रोगी को देखकर क्या वह सामान्य रह पायेगी उसने सोचा. कौन जाने ? फिर भी कई भ्रम तो टूटते हैं ऐसे नाटक देखकर. आज जून ने भी टीवी देखा होगा, वह जरूर उस वक्त उसे याद कर रहा होगा, वह कैसे दिन बिताता होगा, वह उसे एक बार देखना चाहती थी पर कैसे? उसने आज खत लिखा होगा जो अगले हफ्ते किसी दिन मिलेगा. दवा लेनी आज भी शुरू नहीं की, अब कल से अवश्य लेनी है. कल घर में दोसा बनेगा, शकुंतला से दाल-चावल पिसवाये हैं आज. पिता भी आज घर पर थे, नवनीत का दीवाली विशेषांक उन्हें अच्छा लगा.
रविवार को वे दिन भर साथ रहा करते थे, उसने सुबह उठते ही सोचा, दोसे ठीक वैसे ही बनाये जैसे वह सीखकर आयी थी दक्षिण भारतीय मित्र से. सुबह हल्की वर्षा हुई, काफ़ी ठंड थी, वह होता तो कहता शाल लेकर बैठो. आज उसे वापस जाना है. आज राष्ट्रीय युवा दिवस है विवेकानंद का जन्म दिवस...
  

Friday, June 24, 2011

भरवां टमाटर


ज यह गीत याद आ रहा है, यह जिंदगी चमन है, सुख-दुःख फूल और काँटे, क्यों न हम तुम मिलकर इनको बांटें...आज दोपहर को नूना ने उसे खुशी-खुशी विदा नहीं किया था, बाद में वह सोचती रही कि क्या वह भी अब तक इस बारे में सोचता होगा या काम में व्यस्त होकर भूल गया होगा, अब वह आने ही वाला है, कल उसने एक अच्छी बात कही थी कि जहाँ अपनत्व होता है कोई अपने मन की बात झट कह देता है, और मजा तब है जब दूसरा उसको अन्यथा न ले. पर उसे अपनी ही बात याद नहीं रही. आजकल वह टैटिंग सीख रही है. शाम को वे पहले टेबल टेनिस खेलते हैं फिर लाइब्रेरी जाते हैं. आज उसने वही नीली कमीज पहनी है, जो पहन कर घर आया था मंगनी के वक्त, कितने फोटो हैं उसके इन कपड़ों में. कल साप्ताहिक हिंदुस्तान से पढ़कर भरवां टमाटर बनाये थे उसे बहुत पसंद आये.