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Monday, May 26, 2014

मसाला दोसे का डिनर


सुबह के आवश्यक कार्य समाप्त कर उसने लिखना शुरू किया है, नन्हा कल की परीक्षा की तयारी कर रहा है. कल शाम पड़ोसिन ने क्लब की मीटिंग में गए जाने वाले गीत के अभ्यास के लिए चलने को कहा तो उसने मना कर दिया. उसके बाद जून और उसके बीच उसके घर से बाहर जाने को लेकर फिर चर्चा हुई हर साल की तरह. उन्हें अपनी बात समझाने में वह सफल हो भी पायी या नहीं पता नहीं, क्योंकि वह समझना ही नहीं चाहते. शनिवार को माँ-पिता आ रहे है और उसके बाद उसे घर से निकलना ही नहीं है सिवाय मीटिंग वाले दिन के यह उनका कहना है पर उसे लगता है शायद ही ऐसा हो. कल रात फिर स्वप्न में सभी को देखा, लडकियाँ बड़ी हो चुकी हैं, यह शुभ संकेत है. अभी कुछ देर पहले किन्हीं महिला का फोन आया, उनका पुत्र दसवीं में जायेगा तो उसके लिए DPS के बारे में जानकारी हासिल कर रही थीं जो बीच-बीच में जाहिर करती जा रही थीं.

पिछले दो दिन वह कुछ नहीं लिख सकी, कल किचन में सफेदी और रंग हुआ परसों कुछ अन्य व्यस्तता रही होगी. इस वक्त आकाश से महीन झींसी झर रही है. चेहरे पर इसकी हल्की छुअन सिहरन उत्पन्न कर रही है. आज नन्हे की संस्कृत की परीक्षा है. इसके बाद दो ही शेष हैं कल शाम किचन व्यवस्थित न होने के कारण खाना घर पर न बनाकर क्लब से लाना पड़ा, खूब मिर्च-मसाले वाला दोसा खाकर पहले से ही नासाज उसके उदर ने जलकर शिकायत दर्ज की है. नन्हा भी सुबह दूध पीकर नहीं गया, जरुर कल रात के भोजन का योगदान रहा होगा इसमें. उसने मीटिंग में पढने के लिए कविताओं का चयन कर लिया है, जून को भी वे पसंद आयीं.

शनि की सुबह छह बजे जून उन्हें लेकर आ गये, वह सुबह पौने चार बजे ही उन्हें लेने चले गये थे. ४८ घंटे की यात्रा के बाद माँ-पापा यहाँ आये हैं, वे तीनों ही प्रयास करेंगे कि उनका यहाँ का निवास सुखद हो. इस समय जून उन्हें लेकर अस्पताल गये हैं. शनि की दोपहर को ही वाजपेयी जी की बस यात्रा का विवरण टीवी पर देखा, कितनी पुरानी स्मृतियाँ सजीव हो उठीं, फिर गाने की रिहर्सल के लिए भी गयी. इतवार की शाम एक पार्टी में जाना था, सोमवार को जून का स्वेटर बनाया और आज मंगल है, उसके मन में आजकल मिली-जुली भावनाएं रहती हैं, दिल खोल के स्वागत-सत्कार करे ऐसा हो नहीं पाता, एक झिझक सी रहती ही है, खैर सम्मानजनक दूरी बनाये रखना ही ठीक है. कल सुबह माँ ने वर्षों पूर्व घटी घटना को याद करके आँसू बहाये, इसी कारण वह अति निकटता नहीं चाहती. वह इतने सालों बाद भी वैसी ही हैं, कुछ लोग शायद ऐसे ही होते हैं, ताउम्र बच्चे ही बने रहते हैं. उसके कल के व्यवहार से जून को तकलीफ जरूर हुई होगी पर उसका मन्तव्य वह भली भांति समझ गये होंगे. अपने घर में अपनी आजादी खोना किसी को नहीं भाता.  

जून कल लंच पर नहीं आए, उन्हें फील्ड जाना था, वहाँ भी काफी देर से उन्हें भोजन मिला, फोन पर जब यह उसे पता चला तो उसका हृदय द्रवित हो उठा. उसे रात की बात याद हो आई, क्लब में उसकी कविताओं की तारीफ हुई थी, सेक्रेटरी ने जब यह पूछा, क्या ये उसने स्वयं लिखी हैं, तो उसे भी यकीन हो गया उन्हें वे अच्छी लगी हैं. वापस आई तो सब भोजन के लिए प्रतीक्षा कर रहे थे. छोटी बहन का पत्र आया है, उसकी तरह नूना अपनी बातें सभी से कह नहीं पाती, पर देखा जाये तो कहने को कुछ है भी नहीं, सारी समस्याएं तो औरों के लिए हैं. वह किसी भी स्तर पर स्वयं को जुड़ा हुआ नहीं पाती इसी लिए शायद अपनी समस्या बताकर सहानुभूति हासिल करना नहीं आता. वह अस्वस्थता को अपना हथियार बनाना नहीं चाहती.

After many days she is sitting in the lawn on the green grass beside rose bushes, feeling the touch of grass blades on sole / soul. They have just taken breakfast, Nanha is still eating and watching tv. He went second day for jogging and will go for tennis in the afternoon. It is good for him to play and run in the holidays, when school reopens he will have to remain closed in the house and school most of the time. She is feeling his joy of freedom. She also did exercise and is planning to riyaz also for one hour while ma-papa will watch TV. Last night she told jun about her fears and aspirations he solved her all problems by saying that it depends on person to person. He has gone to field today also. Today in the afternoon he has organized a meeting of all DPS going children’s fathers.


Thursday, March 27, 2014

गोलगप्पों वाली चाट


रात को बिजली की कड़क और बादलों की गरज से जब नींद खुली तो पाया, मन अगले दिन के बारे में सोच रहा है, जन्मदिन के बारे में. सुबह-सुबह नन्हे ने चॉकलेट और जून ने सुंदर सा ग्रीटिंग कार्ड देकर शुभकामना की. फिर सखियों के फोन आए और दीदी का भी. मौसम सुहावना हो गया है. शाम को गोलगप्पे और मैंगो शेक के साथ चने और आलू की चाट यकीनन अच्छी रहेगी. आज वह बहुत अच्छा महसूस कर रही है, फूल सा हल्का और रुई के फाहों सा नर्म ! इस दिन में कोई बात होती जरूर है आम दिनों से काफी अलग, ख़ुशी जैसे छलकी जाती है. आज कोई भी बात उसे उदास नहीं कर पायेगी, टकराकर वापस लौट जाएगी यदि प्रतिकूल हुई तो और अनुकूल हुई तो उस आवरण को और घना कर देगी जो प्रियजनों ने उसके चारों ओर बना लिया है.

पड़ोसिन ने अपनी बहनों के लिए खरीदी असम सिल्क की साड़ियाँ दिखने के लिए बुलाया है. वह  भी पड़ोसिन से एक उड़िया सांबलपुरी साड़ी मंगा रही है बरसात फिर शुरू हो गयी है, पर वह छाता लेकर जा सकती है. सुबह बड़ी भाभी से बात करने का मन था फोन देखा तो खराब था. इस बार किसी भी भाई से जन्मदिन  पर बात नहीं हो सकी.

टीवी पर वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा बजट प्रस्तुत कर रहे हैं. Only 37% of our land is under direct irrigation. Water, houses, agriculture, roads, foreign investment, provident fund, small scale industries, education all have already been mentioned in his speech. 50% increase is done in education budget. It is a taxpayer friendly and gives proper attention to agriculture. Prices of some articles have increased but price of some have been reduced.

आज बड़ी बहन का जन्मदिन है, उनके साथ-साथ भाई भाभी से भी बात हुई, उस दिन की पार्टी भी अच्छी रही थी, सखी ने गोलगप्पों की तारीफ की, उसे लगा बात सिर्फ भावना की है, जहाँ अपनेपन की शुद्ध प्रेममयी भावना होगी तो वहीं सहजता व सरलता संबंधों में आएगी. कल जून और उसने साथ साथ बजट सुना, कुल मिलाकर बजट अच्छा रहा है. जून उसे मौका ही नहीं देते कि वस्तुओं के दामों में अंतर जान सके, सामान खत्म हो उसके पहले ही ले आते हैं, जैसा उन्होंने अपने घर में पिता को बचपन से करते देखा है. वैसे अब किसी भी परिस्थिति में वे एक-दूसरे के साथ हैं, भरोसा कर सकती है वह पूरी तरह उन पर और अब वह पहले की तरह चुप्पा भी नहीं रहते, उसकी बातें भी सुनते हैं और कभी कोई बात चर्चा के लायक हो चर्चा भी करते हैं, स्वस्थ चर्चा. नन्हा आजकल थका-थका सा रहता है, शायद कम्प्यूटर के सामने देर तक बैठने के कारण ऐसा हो रहा हो, पर उसे समझाना आसान नहीं लगता क्योंकि कम्प्यूटर के सामने बैठना, उस पर खेल खेलना उसे बहुत पसंद है.

दोपहर को DCH का तीसरा पेपर हल करने बैठी तो नहीं कर पायी, थोड़ी सी थकान, कुछ उलझन सी महसूस हो रही थी. उसे लगा, पहले की तरह शामों को या जब भी मन व दिमाग दोनों चुस्त-दुरस्त हों लिखना चाहिए बाद में फेयर कॉपी के लिए दोपहर का समय ठीक है. कल शाम उसने पुरानी कविताएँ छांटनी शुरू की जो लेखन परियोजना के लिए चाहिए, कुछ कविताएँ जो उस वक्त अच्छी लगती थीं काफी बचकानी सी लगीं पर कुछ ऐसी थीं जिन्हें तराशा जा सकता है. कविता की पहली पहचान है भाषा में विसंगति, जहाँ शब्दों के वे अर्थ न निकलते हों जो सामान्यतः होते हैं नहीं तो कविता के गद्य बनने में देर नहीं लगेगी. इस बार जो पुस्तकें लाइब्रेरी से लायी है वे ऐसी नहीं हैं जो Jane Austen की सेंस एंड सेंसिबिलिटी की तरह मन को बाँध कर रख सकें, एक तरह से ठीक ही है, वह ज्यादा समय DCH को दे पायेगी.

आज सुबह ही उसने लॉन की तरफ गहरी नजर से देखा और उन कामों की सूची बनाई जो अगले एक हफ्ते में करने हैं, माली ने आज से ही शुरू कर दिए हैं. बालसम के पौधे फूलों से भर गये हैं. पूसी उन्ही के पास बैठी है पर उसके मुंह से लार टपक रही है, शायद वह अस्वस्थ है. आज बहुत दिनों बाद असमिया सखी से बात हुई, उसने अपने यहाँ आने के लिए कहा और वह पिछले सारे अनुभव भूलकर उसकी छोटी सी बेटी को देखने की इच्छा से भर उठी.