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Wednesday, June 15, 2016

जन्मदिन की कविता


अक्तूबर का अंतिम दिन, श्रीमती गाँधी की पच्चीसवीं पुण्यतिथि ! अभी कुछ देर पहले दीदी से बात की. छोटा भांजा स्वीडन से स्वाइन फ्लू जैसे लक्षण लेकर लौटा है. बड़ी भांजी को सासूजी तथा माँ दोनों ने कहा था कि शुरू के तीन महीनों में ज्यादा घूमना-फिरना ठीक नहीं है पर वे पहले से ही टिकट कटा चुके थे, जो डर था वह सही निकला. दीदी ने पिताजी, छोटे भाई, बहन सभी की बातें बतायीं. पिताजी ने उन्हें मेल भेजा है इस उम्र में वे भी कम्प्यूटर से परिचित हो रहे हैं. उन्होंने उसे भी अवश्य भेजा होगा.
उसकी एक सखी का जन्मदिन इसी महीने है, उसके लिए एक कविता लिखनी है. वह अपने बेटी की चिंता करती है, सास की फ़िक्र करती है. घर की चिंता करती है. सबकी सेहत का ध्यान रखती है, घर की सजावट का ध्यान रखती है. ये सोचते ही उसने लिखना शुरू किया-

धूप गुनगुनी हवा में ठंडक
फूलों वाला आया मौसम,
जन्मदिवस के लिए खुशनुमा
मंजर लेकर आया मौसम !

दिन का चैन रात की नींदें
जिस चिंता में उड़ गयीं अपनी,
उस चिंता को भूल हँसी का
जश्न मनाने आया मौसम !

घंटों लगें रसोईघर में
सेहत सबकी ठीक रहे,
गोभी, मटर, सलाद सभी को
खौलाने का आया मौसम !

रंगों से सज गयीं दीवारें
दरवाजे भी चमक उठे अब
कांच के बर्तन धो-पोंछकर
चमकाने का आया मौसम !

इसकी चिंता, उसकी चिंता
दुनिया भर की सिर पे चिंता
जन्मदिवस का पा तोहफा
मुस्काने का आया मौसम !

नवम्बर का आरम्भ हुए छह दिन हो गये हैं. आज पहली बार डायरी खोली है. परसों मृणाल ज्योति गयी थी, एक अध्यापिका ने कहा बच्चों की पुरानी साइकिलें यदि मिल सकें तो अच्छा है. क्लब के बुलेटिन में लिखने के लिए सेक्रेटरी को संदेश भिजवा दिया है उसने. क्लब के कार्यक्रम में वह उसकी कविता ‘तुम्हारे कारण’ पढ़वाना चाहती हैं. एक कविता उसे पत्रिका में छपने के लिए भी देनी है.


कल छोटी भांजी, चचेरी बहन व एक सखी की बिटिया से बात की तीनों कितनी भिन्न हैं पर तीनों ही एक सूत्र में बंधी हैं, वह सूत्र है सुख-दुःख का सूत्र, देखा जाये तो वे सभी आपस में ऐसे ही बंधे हैं ! छोटी ननद का फोन आया है, वह अस्वस्थ है, घबराहट होती है तथा कमजोरी है. रक्तचाप भी घटता-बढ़ता रहता है, डाक्टर ने थायराइड का टेस्ट बताया है. अपने तन को स्वस्थ रखना कभी-कभी बहुत कठिन हो जाता है. सब कुछ सामान्य होते हुए भी कोई अस्वस्थ हो सकता है. उसकी सखी ने कहा उसके जन्मदिन पर जो कविता उसने लिखी थी, वह सभी रिश्तेदारों को भेज दी थी, सभी ने तारीफ़ की है. लिख रही थी कि जून आ गये, शाम को क्लब में फिल्म है, उसका पोस्टर लाये थे, ‘लाइफ पार्टनर’ वे शाम को गये, पूरी फिल्म नहीं देख पाए, शेष भाग पड़ोसिन को फोन करके पूछा.  उसने अपने बगीचे के (कोल) केले भिजवाये हैं. दो तीन दिन पूर्व उनके यहाँ भी एक गुच्छा तोड़ा गया था, पक जाने पर भिजवायेगी. 

Wednesday, June 17, 2015

श्रावणी पूर्णिमा


बाहर कौए बहुत शोर मचा रहे हैं. घर में सासू माँ कि तबियत ठीक नहीं है. रोज वह नहा-धोकर नाश्ता आदि करके टहलने निकल जाती हैं, आज अस्वस्थ होकर लेटी हैं. एक सखी ने कल रात को खाने पर बुलाया है, एक दूसरी सखी को वह बुलाना चाहती थी. तीसरी सखी ने शाम को सत्संग पर बुलाया है, पर अब सम्भवतः कुछ भी सम्भव नहीं हो पायेगा. ससुराल से फोन आया तो उन्होंने पिताजी को नहीं बताया, शरीर है तो सुख-दुःख लगा ही रहता है. उन्हें यहाँ आये पूरा एक वर्ष हो गया है. नन्हे को गये एक महीने से ऊपर, समय अपनी रफ्तार से चलता रहता है.

आज बहुत दिनों के बाद खुली आँखों से उसे दर्शन हुए. क्रिया के वक्त भी आज अतिरिक्त उत्साह था. जीवन जैसे एक मधुर स्वप्न के समान बीत रहा है. ईश्वर प्रेम स्वरूप है, सद्गुरु का यह वचन कितना सच्चा प्रतीत होता है. यह जगत अब बंधन रूप नहीं लगता. आज पूर्णिमा है, श्रावण की पूर्णिमा अर्थात रक्षाबन्धन का पावन दिवस ! उसने कान्हा को राखी बाधी, वही उसका रक्षक है और जगत के सभी प्राणियों का भी.

उसके दाहिने कान से मधुर ध्वनि सुनाई पड़ रही है, ऐसी ध्वनि जो भीतर से उपजती है, अनहद नाद. बहुत पहले, जब वह साधना नहीं करती थी, उसने एक लेख में लिखा था कि योगियों को अनहद नाद सुनाई देता है, शायद वह उसका पूर्वाभास था. सद्गुरु की क्रिया से ऐसे-ऐसे अनुभव हुए हैं जिन्हें शब्दों में बताना अत्यंत कठिन है. ऐसे परमात्मा, जो सुख स्वरूप है, को छोड़कर वे व्यर्थ ही अपना सुख संसार में खोजते हैं. आज उसने सुंदर ज्ञान सुना- वे पांच इन्द्रियों के गुलाम हैं, खाना, देखना, सुनना, सूँघना और स्पर्श करना इन कृत्यों को करते हुए वे मूलाधार चक्र में ही रहते हैं. अहम् का जब विकास होता है, तो परिवार आदि का पोषण करते हैं स्वाधिष्ठान चक्र में. स्वयं को मन का राजा मानकर मणिपुर में, अनहत तक आते-आते अहंकार बढ़ जाता है. विशुद्धि में देहाभिमान कुछ कम होता है, आज्ञा चक्र में वह पूरी तरह चला जाता है. सभी के साथ एकात्मकता का अनुभव होता है. तब जीवन में सच्चे प्रेम का उदय होता है, ऐसा प्रेम जो सभी का हित चाहता है, बिना शर्त है.      

Friday, February 27, 2015

श्यामा तुलसी


कल शाम को जून नन्हे से नाराज थे, नूना ने कहा प्यार से समझाना चाहिए पर जो प्यार की भाषा ही न समझे उसे समझाने का कोई दूसरा तरीका खोजना ही पड़ेगा. अभी भोजन नहीं बनाया है और किचन में गैस लीक को ठीक करने कारीगर आ गये हैं. उसे एक सखी के यहाँ जाना था, जून भी आज फ़ील्ड गये हैं, पर अब सम्भव नहीं लगता.

अप्रैल का अंतिम दिन, सुबह वे वक्त से उठे, ‘क्रिया’ की. जून दफ्तर जा रहे थे कि खुले जाली वाले गेट से पूसी अंदर आ गयी, उन्हें बुरा लगा होगा क्योंकि दफ्तर जाकर उन्होंने फोन पर कहा. पिछले दिनों नन्हे के जवाब देने के कारण और फोन पर देर-देर तक बात करने के कारण वह परेशान थे ही. परिवार में आपसी सद्भाव, प्रेम व सौहार्द के साथ-साथ अनुशासन भी बहुत जरूरी है, अन्यथा सभी सदस्य अपनी मनमानी करके अपनी-अपनी राह चलने लगते हैं. रही पूसी व उसके तीन बच्चों की बात तो उन्हें कुछ सोचना होगा. उनका फोन खराब है सो छोटी ननद से बात नहीं हो पायी, उसे art of living कोर्स किये दो दिन हो गये हैं, यकीनन खुश होगी. पार्लियामेंट में आज गुजरात मुद्दे पर १८४ के अंतर्गत बहस जरी है, सरकार तो बच ही जाएगी लेकिन गुजरात कब बचेगा इसकी किसी को चिंता नहीं है. जब तक वहाँ के निवासियों को सद्बुद्धि नहीं आएगी हिंसा का दौर चलता ही रहेगा. कल शाम वे क्लब एक फिल्म देखने गये अभिनेत्री के आते ही उठ गये बहुत ही भद्दे वस्त्र पहने थी और आवाज भी भद्दी निकाल रही थी. आज क्लब में अशोका फिल्म है शायद ठीक लगे. सुबह गुरुमाँ को सुना स्वयं को खोजना ही अध्यात्म है. ध्यान में भी एक विचार गहरे विचरता है कि ध्यान चल रहा है, पर कर्ताभाव से मुक्त हुए बिना ‘उसकी’ झलक नहीं मिलती. कल रात लेकिन देह का ठोसपना गायब होता लगा, तरंगों का अनुभव हुआ.   

मई महीने का आरम्भ हो चका है. कल दिन भर वर्षा होती रही पर अज धूप निकली है. स्टोर की सफाई (मासिक) करवायी और बाएं तरफ की पड़ोसिन के यहाँ से लाकर काली तुलसी का एक पौधा लगाया. नन्हा वहाँ पूसी के बच्चों को छोड़ने गया था, पर वह उनमें से दो को वापस ले आयी है, तीसरे का पता नहीं. जून ने कहा है अब पूसी वहाँ नहीं रह सकती.

आज उसका मन अद्भुत शांति से परिपूर्ण है, बाबाजी ने ध्यान की विधि इतने सरल शब्दों में बताई जो दिल को छू गयी. वह उनके सच्चे हितैषी हैं जो उत्थान की बात करते हैं, किस तरह वे अपने मन को ईश्वर की ओर लगायें, सुख और शांति उनके सहज मित्र हो जाएँ, ज्ञान, प्रेम और आनंद स्वरूप अपने मूल को वे खोज सकें और उसमें स्थित रह सकें. उन्नत विचार, उन्नत भाव मानव को सहज बनाते हैं. आदर्शों को सामने रखते हुए, मन, वचन, काया से सद्कर्म करने हैं, तभी वे सुखी होंगे.



Tuesday, September 23, 2014

भागवद पुराण का श्लोक


आज उनके महिला क्लब की मीटिंग है, उस दिन अंध विद्यालय में जाने के बाद से क्लब के प्रति उसका सम्मान बढ़ गया है, सो आज वह जा रही है. सुबह भाई-भाभी से बात की. आज जून उसकी किताब भेज रहे हैं. अभी-अभी असमिया सखी का फोन आया, उसने दूरदर्शन पर एक नीति वचन सुना था, बताया, यह भी कहा कि उसकी किताब देखकर उसे बेहद ख़ुशी हुई है. उम्र के साथ-साथ उनकी मित्रता भी परिपक्व हो रही है. बाबाजी ने आज एक श्लोक का अर्थ बताया जो भागवद पुराण से लिया गया था, “कल का अजीर्ण आज के उपवास से दूर किया जा सकता है और कल का प्रारब्ध आज के पुरुषार्थ से”. मानव अपने भाग्य का विधाता स्वयं है. वास्तव में यदि वे प्रयत्न करें और सच्चे हृदय से ईश्वर के मार्ग पर चलें, ईश्वर का मार्ग यानि सच का मार्ग, तो उनके कार्य सफल होने लगते हैं. खोट भीतर नहीं होनी चाहिए, ईमानदारी का सौदा है यह. आज नैनी ने कहा उसके पास एक धार्मिक पुस्तक है जिसमें उर्दू और असमिया दोनों भाषाओँ में लिखा है. एक सूरा ऐसी है जिसको पढ़ पाने से शैतान कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता. अन्धविश्वास में डूबा है आज भी मुस्लिम धर्म. वह उस किताब को पढ़ना चाहती है क्यों कि उसे कुरान को छूने की इजाजत नहीं है. कल रात वर्षा हुई और कहीं पास ही बिजली भी गिरी. बादलों की गड़गड़ाहट की जोरदार आवाज हुई उसकी नींद खुल गयी और उस कविता का स्मरण हो आया जिसमें दिल धड़कने का जिक्र है. संसद में अवकाश है सो पता नहीं चल पाता दोनों पार्टियाँ कितना विरोध कर रही हैं, धीरे-धीरे तहलका का ज्वर उतरने लगा है. लोग एक दूसरे से क्षमायाचना कर रहे हैं. भविष्य में वे लोग सचेत रहेंगे इतना तो फायदा इस प्रकरण से होगा ही. उसे आज दोपहर को वह अधूरी गजल पूरी करनी है.  

कल की मीटिंग अच्छी रही. एरिया टेन ने एक रीमिक्स कोरस गया और एक समूह नृत्य भी पेश किया. एक महिला कुछ कास्मेटिक प्रोडक्ट्स लेकर आई थी और कुकिंग प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया था. वह पड़ोसिन सखी के साथ गयी थी. उसने ‘ध्यान’ करने का प्रयास किया पर सफल नहीं हुई, नैनी का बेटा तेज संगीत बजा रहा था, सडक पर वाहनों की आवाजें थीं और वर्षा की रिमझिम भी, जो कल रात से हो रही है. उसने आँखें बंद कीं तो तंद्रा घेरने लगी, कभी-कभी ऐसा होता है जब मन शांत नहीं हो पाता. आज का दिन सामने पड़ा है कोरे कागज की तरह, जो चाहे लिख दे. दोपहर का कार्य नियत है. शाम कुछ भिन्न हो सकती है. कल लाइब्रेरी से अमितव घोष की एक पुस्तक लायी है कल शाम ही थोड़ी सी पढ़ी. अभी robert फ्रॉस्ट की कविताएँ भी पढ़नी हैं. ढेर सारी पत्रिकाएँ भी अनपढ़ी पड़ी हैं. रोज का अख़बार पढ़ने में भी समय जाता है. इन्सान का छोटा सा दिमाग (ब्रह्मांड से भी विशाल है वास्तव में ) कितना कुछ समेटना चाहता है. कल GLSV का प्रक्षेपण किसी खराबी के कारण टाल देना पड़ा, शुरू होने से पहले उसका दिल धड़क रहा था, लग रहा था, सब कुछ ठीक नहीं होगा. खैर, अगली बार जरूर वैज्ञानिकों को सफलता मिलेगी. कल भारत मैच भी हार गया. नैनी ने असमिया में वह पुस्तक लाकर दी है जिसमें से उसे ऐसी सूरा चाहिए जिसे पढ़कर शैतान भी कुछ नहीं बिगाड़ सकता.

कल की शाम एक सखी और उसके बेटे के नाम थी. वे शाम को साढ़े चार बजे ही आ गये थे, जून को हाउसिंग सोसाइटी की मीटिंग में जाना था. साढ़े आठ पर वे वापस आये तब तक नन्हा और उसका मित्र खाना खा चुके थे. वह सखी के साथ पहले टहलने गयी फिर चाय पी और बाद में डिनर की तैयारी. उसका साथ सहज लगता है, कितनी बातें बतायीं उसने अपने परिचितों की और इधर-उधर की. कुछ देर उन्होंने क्रॉस वर्ड्स हल किया. समाचार नहीं सुन पायी कल रात. आज सुबह सुना पश्चिम बंगाल में कांग्रेस व तृणमूल कांग्रेस एक साथ चुनाव लड़ रही हैं. राजनीति में कोई भी स्थायी मित्र अथवा विरोधी नहीं होता. आज जागरण में एक सन्त का भावपूर्ण प्रवचन सुना, कह रहे थे रोना, हँसने से ज्यादा बेहतर है बशर्ते आँसूं पश्चाताप के हों यहाँ तो कोई गलत है यह तक स्वीकारने को तैयार नहीं होता तो पछतावा क्यों करेंगे, हर कोई अपने को सही साबित करने पर तुला है. आज सुबह ससुराल से फोन आया, कल वे लोग नये घर में रहने चले गये हैं, गृह प्रवेश में बड़ी ननद भी आई है, काफी चहल-पहल रहती होगी. दिन भर किचन में भी हलचल रहती होगी. आजकल ‘ध्यान’ में वह पांच-दस मिनट से ज्यादा नहीं बैठ पाती है सम्भवतः आस-पास होती हलचल इसका कारण हो, उसे दूसरा समय चुनना होगा जब कोई बाधा न हो. यह भी सही है कि जे कृष्णामूर्ति की पुस्तक पढ़े काफी समय बीत गया है और प्रतिपल सजग रहने का जो अभ्यास उन दिनों हो गया था आजकल छूट गया है. एक बेखुदी सी छायी रहती है जैसे वह किसी spell के अंदर है. जमीन पर आ जाना ही बेहतर होगा,. वास्तविकता की ठोस जमीन पर, जहाँ अपनी कमियां भी बखूबी नजर आती रहें. एक परिचिता से मिलने का वादा किया था जो आज ही पूरा करना होगा.




Thursday, August 14, 2014

मन के मंजीरे -शुभा मुद्गल


कुछ देर पूर्व छोटी बहन का फोन आया, जब वे बच्चों और पिताजी के साथ पहाड़ों पर सुबह की सैर से वापस लौटी. भांजी से बात नहीं हो पाई है अभी तक. आज शाम को जून अपने एक विभाग में आये अतिथि को चाय पर बुला रहे हैं. उसने सोचा है वह पाव-भाजी बनाएगी, वे बंगाली हैं तो बाजार से जून रसगुल्ले भी लेते आएंगे. नन्हे के लिए वे कोलकाता से अभी से ISC physics books लाये हैं दसवीं व बारहवीं की. जून लंच पर आये तो उसने उन्हें उड़िया सखी के फोन की बात बताई, वह उससे पूछ रही थी कि क्या वह English classes में जाएगी जो एक परिचिता अपने घर पर लेने वाली हैं. जून का जवाब ‘न’ होगा यह सोचकर उसने मना कर दिया था, पर अब वह कहते हैं कि वह जा सकती है सो उसने सोचा है इस हफ्ते वह तीन दिन घर पर ही दूसरे कमरे में बैठकर पढ़ेगी, यदि जून और नन्हे को कोई असुविधा नहीं हुई तो अगले हफ्ते से ज्वाइन कर लेगी. उस दिन जो किताब लाइब्रेरी से लायी थी उसमें से एक कहानी पढ़ी, कुछ ऐसा ही उसके साथ हुआ था जब वह स्कूल जाती थी. इसलिए उनकी राय जाने बिना ही मना कर बैठी. लेकिन इसका कोई अफ़सोस नहीं है उसे, न ही यह समझौता है बल्कि इससे त्याग के महत्व का पता चला है. अपनी आवश्यकताएं सीमित रखना, तन की ही नहीं मन की भी. अपनी ख़ुशी अपने अंदर तलाशना, हर हाल में संतुष्ट रहना और परिवार के प्रति अपने कर्त्तव्य को समझना. नन्हे और जून की जगह पर खुद को रखकर उनकी अपेक्षाओं को जानने का प्रयत्न, सबसे बड़ी बात उनके इस छोटे से घर का वातावरण सदा प्रफ्फुलित रखना !

“तप जीवन में आवश्यक है, अन्तर्मुखी होकर, राग-द्वेष मुक्त होकर, आसक्ति को मिटाकर तप किया जा सकता है. मन को संस्कारों से मुक्त करना ही तप है. मन के दर्पण को ऊपर की ओर स्थित करने से उसमें पड़ने वाली छाया ऊपर ही चली जाएगी”. आज भी बाबा जी ने ज्ञान की शिक्षा दी. सुबह वे जल्दी उठे, आज भी भाई के यहाँ फोन किया पर लाइन नहीं मिली, सम्भवतः टेलीफोन कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से. कल जो मेहमान आये थे उन्हें भी घर फोन करना था, पर नहीं मिला. जून को पाव-भाजी अच्छी लगी. उड़िया सखी को सुबह-सुबह फोन करके पपीते के पौधों की जानकारी दी. जब ध्यान में थी, फोन बजा पर उठने का प्रयास नहीं किया. मन को केन्द्रित करना वैसे ही कितना कठिन है, शीशे पर धूप पडती है और उसे हिलाते हैं तो चमक भी हिलती है. ऐसे ही मन रूपी दर्पण पर बाहरी आघात पड़ता है तो मन चंचल हो उठता है. नन्हे ने क्लब की पत्रिका के लिए एक लेख लिखा है, आज शाम वे उसे देने जायेंगे. उसके स्कूल में ड्रामा रिहर्सल भी शुरू हो गयी है, कुछ ही दिनों में उसका प्लास्टर भी खुल जायेगा और वह पहले की तरह रिटेन टेस्ट दे सकेगा.

It is I o’clock and she is with her diary. Few minutes ago she heard again that song, “meri chuunar ur ur jaye… it is a sweet melodious song, every time when she listens it, it attracts, another songs which she likes on Zee music are “piya basnti aa..and “man ke manjire …sung by Shubha Mudgal. All these songs are melodious and soft., they touch one’s heart. Today she talked to two friends, one was worried due to early/voluntary retirement scheme and other due to her son’s exams but she is not worried at all. Last evening they went to jun’s office and did net surfing. They have copied some wall papers from life positive site, while coming back jun purchased one copy of same magazine for her. This magazine touches one in every way. She liked it from its first issue when they saw it in library. Today weather is changing its mood frequently, earlier it was drizzling but now sun has come again. Nanha was smiling in the morning when jun and she helped him like they used to do when he was a small kid. He is slow these days, cause can use only his left hand. But during all these weeks he complained only once. They all three are one strong unit as a family and have many things common, ie why they love so much.





Sunday, July 27, 2014

मिठाई की अमिठास


सुबह वे उठे तो धूप बहुत तेज थी, कल शाम को बादल आसमान पर छाये पर हवा के साथ उड़ गये. उनके कमरे का एसी भी काम नहीं कर रहा था, नन्हे ने अपने कमरे में उनका बेड लगा दिया, पर इस वक्त धूप चली गयी है, बादलों से कुछ ठंडक सी हो गयी है. आज उसने एक पड़ोसिन और एक सखी को फोन किया, दोनों के पेरेंटस् आये हैं, पड़ोसिन से उनसे मिलने जाने का समय लिया, सखी को निमन्त्रण दिया पर उसने कोई वक्त तय नहीं दिया है. आज विपासना के टीचर गोयनका जी फिर आये थे, बाबाजी भी आए. दोनों के विचारों में कितनी भिन्नता है दोनों को यदि एक-दूसरे के सामने बैठा कर  विवाद करने दिया जाये तो बहुत दिलचस्प होगा, एक स्वयं सब कुछ करने पर जोर देता है तो दूसरा ईश्वर के सहारे, लेकिन गहराई से देखें तो दोनों एक ही बात कहते हैं. राग और द्वेष से मुक्ति पानी है दोनों का लक्ष्य एक ही है, साधना अलग-अलग है.आज उसे संगीत की क्लास में जाना हिया, जून अभी-अभी अपने साथ एसी मकैनिक को लाये हैं.

आज उसने सुना मनुष्य के जीवन में तीन चीजें होती हैं, इच्छा, प्रीति और जिज्ञासा, यदि इनका सदुपयोग करें तो चित्त शांत होता है. इच्छा यदि सत्वगुण से प्रेरित होगी तभी जीवन से द्वंद्व मिटेगा. प्रीति यदि अच्छाई से होगी और जिज्ञासा जीवित रहेगी तो एक न एक दिन लक्ष्य मिलेगा अथवा तो इसकी सम्भावना रहेगी, लेकिन यदि खोजने की इच्छा नहीं है, जानने की उत्सुकता नहीं है और कोई अपने एहिक कार्यों में ही जीवन बिता देता है, अपने छोटे-छोटे सुखों-दुखों से ऊपर उठने की उसके पास न तो सामर्थ्य है न ही आवश्यकता, तो उसका जीवन भी तुच्छ ही रह जायेगा. आजकल उसका जीवन भी उच्च भावनाओं से प्रेरित नहीं है, तभी जून के प्रति उसका व्यवहार असहिष्णुता से भरा था, वह जो मिठाई डिब्रूगढ़ से लाये थे उसे पसंद नहीं पर हो सकता है उन्हें पसंद हो. एक सखी के यहाँ पूजा है उसने प्रसाद के लिए बुलाया है, थोड़ी देर के लिए हो सकता है जाये, यानि अभी तय नहीं किया है, यह अनिश्चतता की स्थिति दुर्बल मन की निशानी ही तो है. अगले हफ्ते नन्हे का जन्मदिन है.

Last evening she went to library and got issued three books which she already has read, which once inspired her a lot and these days she is lacking that inspiration, that sweet joy of heart, that burning spirit of creativity. She hoped these books will help her to get out of despair. Yesterday  jun and she made a b’day card for Nanha. He appeared for his computer exam( c-language) yesterday so was out for one and half hour, they took the opportunity and it is a very very beautiful card, just now Assamese friend called, her little daughter also talks every time and she could not talk in right Assamese, she should revise her lessons . अभी-अभी बाबा जी ने बहुत अच्छी बात कही, मन को शुद्ध रखने के लिए अनावश्यक इच्छाओं का पोषण नहीं करना चाहिए. जून ने सुबह सीख दी तो फौरन प्रतिकार करने की इच्छा हुई, जो अनावश्यक थी, चुप रह जाने की इच्छा बोलने की इच्छा से ज्यादा श्रेष्ठ है.

शनिवार की शाम अक्सर मित्रों के साथ व्यतीत होती है पर आज वे सांध्य भ्रमण के बाद घर पर हैं. जून आउटलुक पढ़ रहे हैं, सोमवार को नन्हे का टेस्ट है, वह पढ़ाई में व्यस्त है. उसी दिन उसका जन्मदिन भी है पर उसके टेस्ट के कारण वे मंगल को मनाएंगे. दोपहर को टीवी पर एक पुरानी फिल्म देखी, “बाजार” स्मिता पाटिल और सुप्रिया पाठक दोनों का अभिनय लाजवाब है, दोनों बहुत सुंदर लग रही थीं. उसने अपनी अन्य कविताओं को कम्प्यूटर पर टाइप करना शुरू कर दिया है.


Saturday, May 31, 2014

अच्छी किताबें


आज सुबह से दो बार असमिया सखी का फोन आ चुका है, अच्छा लगा, मित्रता की बेल मुरझा भले ही जाये पर सूखती नहीं, कभी-कभी खिल उठती है और अब तो उसके मन में सिर्फ उसके लिए ही नहीं सभी के लिए असीम स्नेह और शुभकामनायें हैं, जहाँ आनंद है, प्रेम है वहाँ दुःख और द्वेष रह ही कहाँ सकते हैं. भगवान बुद्ध भी कहते हैं, मन में उठे विकार को यदि कोई ग्रहण करे तभी उसका भागी होगा. यदि साक्षी भाव में रहे तो वह खुदबखुद समुद्र में उठी लहर की तरह नष्ट हो जायेगा. न दुःख के प्रति द्वेष न सुख के प्रति आसक्ति, मध्यम मार्ग का अनुसरण ही किसी को हर पल हल्का रख सकता है. कल बहुत दिनों बाद माँ-पिता का पत्र मिला, पिता ने लिखा है, अच्छी किताबें पढ़ने से मन का विस्तार होता है और विस्तृत मन में सभी कुछ समा सकता है. संकीर्ण मनोवृत्ति और अहम् की तुष्टि ही सारे विकारों की जड़ है. संसार में जहाँ भी दुःख है, अहम् के कारण है और जहाँ भी सुख है वह निस्वार्थ भावना के पोषित होने पर है. जब मानव मन समग्रता को सत्य माने, टुकड़ों में बंटे नहीं, सम्पूर्ण जीवन को और मृत्यु को भी एक अनंत की यात्रा समझे तो कहीं विछोह नहीं, कहीं पीड़ा नहीं, दुःख नहीं, सभी एक ही मंजिल के यात्री हैं. उसने प्रार्थना की यह सद्शिक्षा उसके जीवन को सदा प्रफ्फुलित रखे.

उसने पढ़ा, “हम लोग आत्मसुख रूपी विशाल सागर से निकल कर इन्द्रिय सुख रूपी छोटी-छोटी नदियों में आ जाने वाली मछलियाँ हैं, सागर में हम ज्यादा सुखी व संतुष्ट थीं पर मूढ़तावश उथले-गंदले पानी वाली इन नालियों में तड़प रही हैं, जीवन में प्रत्येक क्षण हमारे पास चुनाव का अवसर आता है, चुनना हमारे हाथ में है पर हर बार हम सागर को छोड़ उथला पानी ही चुनते हैं”. उसे याद आया, बचपन में उसने अध्यापिका की डांट से बचने के लिए अपनी भूगोल की कापी में उनके हस्ताक्षर स्वयं कर दिए थे, जिसका अफ़सोस उसे आज तक है और अभी तक वह स्वयं को क्षमा नहीं कर पायी है. इसके अलावा एक बार किसी का खत पढ़ा था, पर तब वह बड़ी थी सो उसका दुःख ज्यादा नहीं है. सम्भवतः बच्चा जब बड़ा होता है, अपने इर्दगिर्द होते झूठ, बेईमानी और असत्य के कार्य-कलाप को दखकर उसका मन भी उसे ही ठीक मानने लगता है और अबोध अवस्था में वह कोई गलत कार्य कर देता है जिस पर बड़ा होने पर उसे पछतावा होता है.

It is raining cats and dog since last night, every plant, leaf and each flower is quenching her thirst of water. It was so hot yesterday, they all were dry and needed water and lo.. God gave them enough ! similarly God fulfills their wishes all big and small. He takes care of his creation. She is grateful to Him, for giving her shelter, food and clothes, for immense love, for understanding, for desire to know Him, for the search of TRUTH, sky like nature of mind, for the inner sense, for attractions in the world which deviate her from path of truth, but He helps her on keeping on the right path. The one and only aim of life is to attain Him, after knowing the true nature of mind. Ahankar is illusion and to pamper it, is great hindrance on the way of truth. Let going is freedom, freedom from habits of many life and deaths. Freedom from anxious mind, worries and tension. When GOD is always with one in the heart of his heart then who cares about trivialities of life.

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Tuesday, May 6, 2014

एक रोमांचक फिल्म- एयर फ़ोर्स


Roof repairing work is going on since morning and creating loud noises. There telephone is still ie out of order. Weather is sunny and she has done most of the morning jobs. Got up early in the morning, first thing was jun‘s lovely good morning and then she saw a pitch black bird perhaps koel in their backyard, she was sitting on the cloth line, she flew after few moments, beautiful it was ! today she heard Mirza Galib CD but due to Nanha’s screen saver could not continue till end. Yesterday evening she again spoke harshly with jun and nanha but after that felt her mistake, today she will be aware every moment what, whom and why she is speaking. Now she has some time to solve the crossword in English magazine.

Today is Assam bandh for 24 hours called by All Assam Student Union, it means they have to sit at home whole time, of course they can go for a walk in the evening. Jun said, he will make sindhi curry today. Nanha is bit upset because he could not see “Disney Hour”

उनकी वापसी की टिकट भी रिजर्व हो गयी है. कल जून ने घर फोन करके पता किया. उसने सोचा, अब वहाँ सभी को उनके आने का इंतजार होगा. एक महीना दस दिन बाद उनकी उड़ीसा यात्रा का शुभारम्भ होगा. कल शाम एक मित्र परिवार डिनर के लिए आया, उन्होंने नये सोफे की तारीफ बहुत संयत तरीके से की. अगले बुधवार को उसकी एक सखी का जन्मदिन है, जिसे अब स्कूल में परेशानी नहीं होती, उसका आत्मविश्वास देखकर उसे भी काम करने का मन होता है, एक थोड़ी सी झिझक ही तो उसे रोक रही है. उसे नये साल में निर्णय ले लेना चाहिए नई जिन्दगी का. अभी भी बहुत से काम करने शेष हैं. हिंदी का कार्य अधूरा रह गया है, उसे भी पूरा करना है. नई कविताएँ लिखनी हैं और एक सतत प्रयास भी स्वयं को एक सार्थक जिन्दगी देने का !

सुबह किसी छोटी सी लडकी ने फोन पर उसे happy birth day कहा और फोन कट गया, आज न तो उसका जन्मदिन है और न ही पहले किसी नन्ही लडकी ने उसे विश ही किया है, जरूर वह फोन किसी और के लिए होगा पर उस वक्त तो उसके होठों पर मुस्कराहट दे ही गया. नन्हे को सुबह जब देर हो रही थी तो स्वयं ही कहने लगा कल से जल्दी उठेगा. कल उसको कुछ बातें जिन्दगी के बारे में समझायीं, जो उसके बचपन में किसी ने कहीं हों उसे याद नहीं पड़ता. कहकर गया है उसके स्कूल में फिजिक्स प्रोजेक्ट वर्क कराया जा सकता है शायद वह देर से आये. बरामदे में रखी रॉकिंग चेयर पर बैठकर लिखना अच्छा अनुभव है, हवा ताजी मिलती है और हरियाली आँखों को सुकूं देती है, कानों में न जाने कितने पंछियों की आवाजें सुनाई देती हैं, फूलों की सुगंध भी नासापुटों को..उसे याद आया पॉट प्लांट्स को वार्षिक खुराक देने के लिए माली से कहना है. कल वह गुलाबी स्वेटर पूरा हो गया जो वह ननद के होने वाले बच्चे के लिए बना रही थी.

पिछले दो दिन कुछ नहीं लिखा, शनिवार को जून के एक मित्र दोपहर के भोजन पर आने वाले थे, सारी सुबह उसी की तैयारी में बीती, दोपहर को टीवी पर क्रिकेट मैच और शाम को क्लब में ‘असमिया’ फिल्म Adajaya, आजकल क्लब में साल में एक बार होने वाला ‘फिल्म समारोह’ चल रहा है. इतवार की शाम भी मेहमान आये, सुबह तो साप्ताहिक सफाई में निकल जाती है. गोभी के पौधों के लिए कागज की टोपियाँ भी बनायीं.

कल शाम क्लब में AIR FORCE देखी, it was a fantastic फिल्म. आज वहाँ ‘चाची चार सौ बीस’ दिखाई जाएगी. आज सुबह भी जून के ‘शुभ प्रभात’ ने उसे उठाया, नन्हे को भी वही उठाते हैं और आजकल दोनों कमरों की नेट उतारना, रजाई रखना भी उन्होंने अपने जिम्मे ले लिया है. उसे नन्हे के लिए टिफिन और सबके लिए नाश्ता बनाने के अलावा कोई काम नहीं होता, यहाँ तक कि सुबह की चाय भी अक्सर वही बना लेते हैं.

कल गुरुनानक जयंती के उपलक्ष में अवकाश था, जून के दफ्तर में भी और नन्हे के स्कूल में भी. दोपहर को वे दोनों कम्प्यूटर की reformatting करवाने में व्यस्त थे, उसने वह टोपी व मोजा पूरा किया, आज नया set शुरू करना है, उस दिन पिता ने फोन पर बताया  कि सासुमा के लिए भी हाफ स्वेटर बनाना है, जिसके लिए ऊन उन्हें तिनसुकिया से मंगवानी होगी. शाम को एक जन्मदिन में गये, एक सखी की बातों से उसका एक नया ही पक्ष देखने को मिला, she is rather bold but..इस तरह की बातें अपने तक ही रखना ठीक है. खैर, आज नैनी के हाथ में चोट के कारण डस्टिंग व सब्जी काटने के काम भी उसके जिम्मे आ गये, काम निपटाकर उसे कुछ भूख का अहसास हुआ तो ख्याल आया, ओवन में मूंगफली भूननी है, नहीं तो जैसा यहाँ का मौसम है कुछ ही दिनों में खराब हो जाएगी. सुबह वे उठे तो काफी ठंड थी, जून ने सभी के लिए स्वेटर निकाल दिए, लगता है सर्दियों के कपड़े निकालने का वक्त आ ही गया है. पिछले हफ्ते कोई पत्र नहीं आया, उसे ख्याल आया,  उनके घर जाने की बात सुनकर किसी ने पत्र द्वारा कुछ नहीं कहा, फिर सोचा, कि दुनिया में सब, सब कुछ अपने ही लिए तो करते हैं न, याज्ञवल्क्य ने मैत्रेयी को हजारों साल पूर्व ही यह बता दिया था, वे भी तो अपनी ख़ुशी से जा रहे हैं न !




Wednesday, March 19, 2014

नर्मदा की पावनता - RIVER SUTRA


आज सुबह से उसे असमिया सखी का ख्याल आ रहा है, एक बार फिर वे उसके घर गये और लगा कि वह अपने आप में इस कदर व्यस्त थी कि उन्हें महसूस होने लगा, उनका स्वागत मन से नहीं किया जा रहा है. जीवन में ऐसे क्षण तो आते ही रहते हैं. कभी न कभी अमैत्री का दुःख सभी को उठाना पड़ता है जिसने भी मित्रता का सुख लिया है. उसने कुछ देर पूर्व DCH के पेपर पढ़े, सितम्बर से पूर्व उसे प्रश्नपत्र हल करके भेजना है तथा परियोजना कार्य की रिपोर्ट भी भेजनी है. कल शाम को फोन आया कि सुबह कम्प्यूटर लेने बस स्टैंड जाना है पर जब जून और नन्हा तैयार होकर गये तो पता चला ‘डॉलफिन कोरियर सर्विस’ के दफ्तर में सिर्फ दो ही बॉक्स आये थे, तीसरा बॉक्स जिसमें मुख्य हिस्सा था कम्प्यूटर का, वह लोड करना ही भूल गये थे या किसी और कारण से वह नहीं पहुंचा. यानी एक दिन का और इंतजार.

कल शाम when they came back after evening walk. Nanha told about the phone call, jun confirmed the arrival of computer. They went to fetch it and till 9.30 in the evening installation was not completed. Today again enginer will come  and do the remaining job. She told her friends they said that they will come come to see it. It’s 8 am her student came and they read a poem“प्रेम”  written by  माखन लाल चतुर्वेदी. टीवी पर अटल जी का १६ अप्रैल को असम में ‘नर  नारायण सेतु’ के उद्घाटन के समय दिया गया भाषण आ रहा है. प्राकृतिक सौन्दर्य में तो असम अद्वितीय है ही यहाँ के बीहू नृत्य की बात भी निराली है. अल्फ़ा के कारण फैले आतंकवाद का जिक्र भी उन्होंने किया. कल गीता मेहता की पुस्तक  A River Sutra में संगीत के शास्त्रीय रूप का वर्णन पढकर सारेगामापाधानीसा का वास्तविक अर्थ समझ में आया. सा से नी तक की ध्वनियाँ प्राकृतिक स्वरों से ली गयी हैं. हरेक के लिए एक रंग भी निर्धारित किया गया है. संगीत की साधना और रागों को उनके सही रूप में पकड़ना एक तपस्या ही तो है, एक भी राग यदि सही अर्थों में समझ में आ जाये और उसके रूप का भाव हो तभी संगीत का ज्ञान हो सकता है. Peacock sa - black
calf calling its mother re – twang
Bleating of goat ga – gold
Cry of the Heron ma – white
Song of Nightingale pa – yellow
The neighing of a horse dha – indigo
Elephant's trumpet ni – green

कल कम्प्यूटर इंजीनियर उनका कम्प्यूटर अपने घर ले गये, इन्स्टालेशन में कुछ दिक्कतें आ रही थीं, जिन्हें वह दूर नहीं कर पा रहे थे, अब ३-४ दिन और लगेंगे. उसके बाद ही सही मायनों में उसका आना माना जायेगा. कल स्कूल से आकर नन्हे ने सभी पीरियड्स के बारे में बताया तो उसकी बातों से लग रहा था वह वहाँ की पढ़ाई से संतुष्ट है. अध्यापक कोर्स के अलावा बहुत कुछ बताते हैं. कल हेयर कट के बारे में कहा था, पर क्लब में बारबर नहीं था. सुबह माँ-पापा से बात हुई, उन्हें लगा जून दिल्ली से वहाँ भी जायेंगे, मामी जी भी आई हुई थीं. कल उसने  A river sutra पूरी पढ़ ली, अच्छी किताब है. नर्मदा नदी को इतना पवित्र मानते हैं, उसे मालूम ही नहीं था, गंगा-यमुना के अलावा अन्य नदियों के बारे में वे बहुत कम ही जानते हैं. उसने ध्यान दिया कि जब वह कोई पुस्तक पढ़ती है तो उसे सतही तौर पर ही याद रख पाती है, पुस्तक खत्म करने की जल्दी होती है, आगे क्या हुआ उसे जानने की उत्सुकता. इसलिए बहुत गहरे नहीं उतर पाती. पुस्तक की सुन्दरता को, भावों को तो पकड़ पाती है पर शिल्प पर उतना ध्यान नहीं जाता.  

उनकी कल की शाम हर रोज से अलग थी. जून ऑफिस से आए तो नन्हे ने टीचर का आर्डर बताया You need a hair cut उसे भी होमियो पैथिक डाक्टर के यहाँ जाना था, सो सभी निकल पड़े, एक तो डॉ के यहाँ काफी भीड़ थी दूसरे मंगलवार होने के कारण नाई की एक भी दुकान नहीं खुली थी. नन्हा निराश होकर बैठा था जब वे डॉ के यहाँ से आये, पर अब गाड़ी स्टार्ट ही नहीं हो रही थी. उसका एक फ्यूज उड़ गया था, फोन करके एक मित्र को बुलवाया, वे मकैनिक लेकर आए और गाड़ी ठीक हुई, लौटने में काफी देर हो गयी. आज सुबह ससुराल से फोन आया, पिता अपने किसी परिचित के लिए MBA के बाद होने वाली summer training के बारे में पूछ रहे थे. उनकी आवाज हमेशा उत्साह से भरी रहती है सुनकर अपने में भी ख़ुशी स्वयमेव पैदा हो जाती है. जबकि कभी किसी से बात करने के बाद एक उदासी की लहर छा जाती है.





Friday, March 14, 2014

हनुमान मन्दिर


उसने सोचा, वक्त आ गया है कि कुछ पल बैठकर मन का लेखा-जोखा किया जाये, मन जो इस वक्त शांत है. कल रात को जीजीएम के संदेश का अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद करते समय आने वाली दिक्कतों से थोड़ा परेशान हो गया था, पर वक्त पर पूरा करके दे सकी इसका श्रेय भी इसी मन को है. जून होते तो रात साढ़े दस बजे तक बैठकर उसे काम नहीं करने देते शायद तब इतनी देर भी नहीं लगती, उसने दो-तीन तकनीकी शब्दों का हिंदी अनुवाद एक मित्र के यहाँ फोन करके पूछा, बाद में पता चला वे लोग पहले पैकिंग करने के कारण देर से भोजन कर रहे थे और उन्हें उठकर फोन रिसीव करना पड़ा. उसे लगा, उन्हें अपने परिचितों को taken for granted नहीं लेना चाहिए. खैर जो हुआ सो हुआ ! कल दोपहर उड़िया पड़ोसिन के साथ भोजन अच्छा लगा, उस सखी की तरह इसने भी उत्तर भारतीय खाना बनाया था, राजमा वाली काली दाल, मिश्रित सब्जी और पनीर दो प्याजा तथा कढ़ी. नन्हा जिस तरह पांच-साथ मिनट में कपड़े बदल कर वहाँ आ गया, देखकर अच्छा लगा. नये स्कूल में पढ़ने जाने से वह होशियार हो गया है स्मार्ट भी. उसने समय देखा, मात्र दो घंटे बचे हैं, समय का नियोजन यदि करे तो आधा घंटा अभ्यास कर सकती है. कल घर से भी फोन आया, उन्होंने भी उनके अकेलेपन को दूर करने के लिए फोन किया, लोगों को उनकी परवाह है, जानकर ख़ुशी होती है.

आज सुबह भी देखा तो पूसी बरामदे में रखी रॉकिंग चेयर पर सोयी थी, रात को किसी वक्त जब जाली से कूद कर आई होगी तो अपने पंजों के दबाव से एक गमला भी उल्टा किया होगा, उसे देखकर क्रोध आया और उसे डांट के भगा दिया पर मन में यह ख्याल भी बना हुआ है कि मूक जानवर भला क्या जाने कि उसके किस काम से कोई खफा है. नन्हे के पैर में कल रात अचानक cramp हो गया, घुटने के पास से दांया पैर मुड़ ही नहीं रहा था, दर्द था, फिर बाद में कुछ राहत मिली तो सो गया पर सुबह तैयार होकर जब स्कूल के लिए निकला तो दर्द फिर आ गया, मना करने पर भी स्कूल तो गया है क्योंकि अगले पांच दिन स्कूल बंद है सो आज जाना ठीक ही था, कल उसने debate के लिए कुछ points लिखवाये पर कापी ले जाना भूल गया. कल रात स्वप्न में जून को देखा, अब यूँ भी अकेले रहना खलने लगा है.

आज जून आने वाले हैं, सो नन्हा और वह उनकी प्रतीक्षा कर रहे हैं, इतवार का सारा कार्य हो गया है. आज सुबह से वर्षा हो रही है, अलार्म भी सुनायी नहीं दिया, कल एक मित्र परिवार के साथ वे हनुमान मन्दिर गये, उनके कारण कभी-कभी मन्दिरों के दर्शन हो जाते हैं, उसे ध्यान के सिवा सब बचकाना लग रहा था पर घर पर अकेले रहने से बेहतर था. ‘हनुमान जयंती’ के उपलक्ष में एक जगह हनुमान पूजा भी देखी.

कल दोपहर दो बजे जून आ गये, साथ-साथ भोजन किया, घर जैसे भर गया. उनके लाये ढेर सारे सामानों से और उनकी बातचीत से. फिर शाम को बाजार गये. नन्हे की कुछ किताबें लेने जब उसका एक मित्र आया तो उसने कुछ नानुकुर की पर नन्हे ने समझाया कि उसे इन किताबों की कोई जरूरत नहीं है, बच्चे कभी-कभी बड़ों को राह पर ले आते हैं. उसका मन संवेदनशील नहीं है, पूसी को भगाया फिर कभी-कभी बेवजह पत्ते भी तोड़ देती है. यूँ ही झुझला जाती है पर जानती है कि यह सब वह कर रही है और ऐसा करना उचित नहीं है लेकिन क्यों कि ऐसा करने से कोई विशेष दुःख उसे नहीं उठाना पड़ता सो इससे परहेज नहीं करती. आज ध्यान में वह अपने विचारों को देख पाई कभी धीरे-धीरे कभी एक के बाद एक आते जा रहे विचार, मन एक पल भी खाली नहीं बैठता, आज जून शायद देर से आयेंगे straight शिफ्ट है. आज बैसाखी है पर सुबह से उत्सव जैसी कोई बात नहीं हुई. यदि मन स्थिरता से युक्त न हो तब उत्सव भी अर्थहीन हो जाता है.



Monday, January 20, 2014

मदर टेरेसा-ममता की मूर्ति


No more collections of concepts ! from today onward only factual life ! Today in the morning her student did not show up, she read J Krishnamurti ‘s dialogue with some unknown persons, they were not able to appreciate those things, he was trying to…oh no..saying but she thinks she has understood them well and that is why no more books, that take one in imaginary world, why to escape from day to day problems and enjoyments. Life is like that and they have to live it, can not escape it. If child is not studying much for his exam then being angry or annoyed is wasting the mental energy in something which is not going to help a bit.
She, read -
‘Most of persons realize, when they  dare look at it, that they are terribly lonely, isolated human beings. The self preoccupation which operates in daily life and relationship does bring this iso lation. If they understand that relationship between two human beings is the same as relationship with the rest of the world, then isolation, loneliness has quite a different meaning’.
She thought -
Their relationship is based on images, for many years she has built images about herself and about others, she has isolated herself through her activities, through her beliefs and so on. Images are formed when the mind is not attentive, and most of the time it is inattentive.

उसकी एक सखी जा रही है, वे लोग दिल्ली जा रहे हैं, पहली बार जब उसने यह बात सुनी थी तो दुःख हुआ था पर अब नहीं, उन्हें वे अक्सर याद तो किया करेंगे पर धीरे धीरे..वे यादें भी धुंधली पपड़ जाएँगी और जीवन यूँ ही चलता चला जायेगा. अभी-अभी उसने फोन किया, कितनी सुबहों को उन्होंने यहाँ वहाँ की हजारों बातें की हैं, कितनी शामें साथ बितायी हैं, एक मधुर सम्बन्ध जो दोनों परिवारों के मध्य पिछले कुछ वर्षों में बन गया था उसको दूरी सम्भवतः हल्का कर देगी, शायद न भी करे और दूर रहकर भी वे अच्छे मित्र बने रहें. कल रात बहुत जोरों की आँधी आयी, बिजली भी गायब है, कल शाम वे टहलने गये, मौसम थोड़ा ठीक ही हो गया था, आकाश में चाँद-तारे बहुत सुंदर लग रहे थे. जून के सिर में हल्का दर्द था उन्हें भी अपने मित्र के जाने का दुःख तो होगा ही. मदर टेरेसा के जीवन के बारे में नन्हे ने अपनी जीके की कॉपी में अख़बार से उतारा. उनकी अंत्येष्टि अगले शनिवार को होगी.  





Tuesday, April 2, 2013

फूलों का कोना




 १४ फरवरी यानि ‘वेलेंटाइन डे’ और जून आज उससे दूर हैं, शाम को पांच-छह बजे तक आएंगे, आज सुबह ही वह मोरानहाट गए हैं, दोपहर को उसकी एक सखी के आने की सम्भावना है, सो ज्यादा भूख न होने पर भी उसने सर्वोत्तम पढ़ते-पढ़ते भोजन कर लिया और अब डायरी खोली है. कल रात फिर देर तक सो नहीं पायी, जबकि दोपहर को एक अच्छी सी कन्नड़ फिल्म देखी थी. रात को देर तक जगना कोई अच्छी बात तो नहीं, ईश्वर को भुला दिया है, मन एकाग्र होता ही नहीं तो नींद कैसे आएगी. स्थिरता, एकाग्रता, निर्लिप्तता, भीड़ में रहकर भी उससे अलग..कीचड़ में कमल की तरह..तभी तो बाहरी प्रभाव मन पर हावी नहीं हो सकेंगे. अब मन में अपना निज का कोई भाव तो है नहीं, जो है सो बाहर से थोपा हुआ, नहीं तो छोटी-छोटी बातों का इतना असर लेना क्या ठीक है. इंसान को ऐसा होना चाहिए जैसे कछुआ होता है, बाहरी प्रभावों से अभेध्य, अपना सबसे अच्छा मित्र. अचानक उसे लगा, कितना सन्नाटा है चारों ओर..लेकिन इस सन्नाटे की भी एक आवाज है जो कानों को सुनाई देती है...ऊं....सभी इस समय अपने-अपने घरों में लंच करके आराम कर रहे होंगे.

  सवा नौ बजे हैं सुबह के, आज तो सभी कुछ उसके अनुकूल हो रहा है, सुबह सवेरे ही सफाई हो जयी, और शीशे की गोल मेज पर, जिसके नीचे टी बुश का आधार है, गेंदे और  कॉर्न फ्लावर के फूलों से बैठक का वह कोना जैसे खिल उठा है. आज दोपहर को टमाटर की चटनी बनानी है, जून कल डिब्रूगढ़ से ढेर से लाए हैं.

  किसी ने सच ही कहा है, सोना आग में तपकर ही कुंदन बनता है और इंसान गलतियों से ही सुधरता है. कल से उसका मस्तिष्क अपनी उलझन का हल ढूँढने में व्यस्त था जो धीरे-धीरे स्पष्ट होता जा रहा है..बेवजह ही लोग अपनी जिंदगी को जटिल बना लेते हैं, फिर गायब होती है रातों की नींद और सुबह देर से उठना, फिर सभी काम जल्दी-जल्दी निपटने में आयी झुंझलाहट.. नन्हे की बस आज छूट भी सकती थी. इस डायरी में हर पेज के नीचे एक सूक्ति है अंग्रेजी में, आज की नसीहत मनोनुकूल है-

If you are in right, you can afford to keep your temper and when you are in the wrong you can’t afford to lose it.

  कल शाम बहुत दिनों के बाद तेलुगु मित्र परिवार आया, अच्छा लगा और फिर रात को फोन पर हिंदी शब्दों का अर्थ बताना....जून एक क्षण के लिए परेशान हो गए थे, शायद जेलस, वह उसे बहुत चाहते जो हैं. कल उसने माँ-पिता को पत्र लिखा, उनका मकान बनने में अभी दो-तीन माह और लगेंगे. उसे लगा पौने ग्यारह हो चुके होंगे, अभी उसने स्नान भी नहीं किया है, थोड़ी खांसी थी, अदरक वाली चाय पी है अभी कुछ मिनट पहले ही. आज जून ने दो बार फोन करके पूछा, लेकिन स्वीपर जिस तरह अपनी बात का विश्वास दिला रहा है उसकी शिकायत करना ठीक नहीं लगता, हो सकता है वह उसे धोखा भी दे रहा हो, वह बहुत जल्दी लोगों की बातों पर विश्वास कर लेती है, इस बात का फायदा कई बार कई लोग उठा चुके हैं यह वह अब जानने लगी है लेकिन विश्वास करने की इस प्रवृत्ति को छोड़ना इतना आसान तो नहीं. माली की पत्नी भाग गयी है आज चम्पा ने यह बात बताई..बेचारा साधुराम...कितना दुखी होगा.

  पिछले तीन-चार दिनों से ठंड बढ़ गयी है, आज मौसम ने अपना शीत रूप दिखाया है, बदल. धुंध और कंपा देने वाली ठंड, नन्हे का टेस्ट था जाना जरूरी था, उसके सभी यूनिट टेस्ट अच्छे हुए हैं. इस वक्त उसके मन में जो विचार चल रहे हैं उनमें से एक है, उसे कुछ सार्थक लिखना चाहिए, यूँ रोजमर्रा की बातों से पन्ने भरते चले जाना क्या उचित है ? उचित और अनुचित का फैसला करना इतना आसान नहीं है. क्या यह उचित होगा कि शब्दों को इधर-उधर करके कुछ भाव पिरोकर वह लिखेगी, हाँ यह कह सकते हैं, उससे ज्यादा संतुष्टि मिलेगी. अपनी संतुष्टि तक ही सीमित है क्या मानव मन का संसार, अपने से इतर कुछ भी देख नहीं पाता, सच तो यही है चाहे कितना ही कड़वा क्यों न हो. अपने आप से जब हटता है तो परिवार वालों पर लगता है, जून की और नन्हे की देखभाल वह तब कहाँ कर पाती है जब स्वयं संतुष्ट नहीं होती. आज का नीचे लिखा विचार भी उसकी कल्पना को ही प्राथमिकता दे रहा है.
Resigned acceptance of an apparent impasse can lead to failure or defeat, while an imaginative and venturesome task can lead to success.





Friday, December 21, 2012

हर्बी गोज बनाना



कल रविवार था, दिन में उसकी दो सखियाँ आयीं, दोपहर बाद गयीं, शाम भी फिर सारे काम निपटाते जल्दी से बीत गयी. पर सोमवार की शाम बिताए नहीं बीतती, उन्होंने कैरम खेला, डांस किया, नन्हे ने होमवर्क किया, कुछ देर राइम्स की किताब पढता रहा, उसकी लिखाई भी अब सुधरती जा रही है, टेस्ट में भी अच्छे मार्क्स आए हैं. और फिर वे जल्दी ही सोने आ गए, जून के होने पर वह इस समय खाना बनाने जाती है.

आज सुबह उसने अपनी पड़ोसिन को दिन में आने के लिए निमंत्रित किया था, दोपहर भर वे साथ रहे. शाम को मालूम हुआ कि उसे बुखार हो गया है, नूना को बहुत खराब लगा. शायद वह उसमें अपनी छोटी बहन को देखती है तभी उसका दुःख अपना दुःख लगता है. सुबह से जून का फोन नहीं आया था, पर उसकी बंगाली सखी आई उनका समाचार लेकर, उसके पति ने खबर दी थी जो जून के साथ ही काम कर रहे हैं. उन्होंने ड्राइवर के हाथ फल भिजवाए थे और दो कैसेट भी, एक हिंदी फिल्म “हम” दूसरा “हर्बी गोज बनाना” जो बहुत अच्छी कॉमेडी फिल्म है.

सप्ताहांत पर वे वापस आए हैं, उन्हें एक जगह सत्यनारायण की कथा में जाना था. वहाँ से लौटे तो पड़ोसियों के यहाँ गए, दरवाजा खुलने में थोड़ी देर लगी, बाद में उसे लगता रहा व्यर्थ  ही गए वहाँ. कल वे लोग तिनसुकिया जा रहे हैं और बाद में आर्मी कैंटीन भी, उसने सोचा  पहले कितना सोच-समझ कर वे पैसे खर्च करते थे और अब मन में ख्याल आते ही उस सामान को मूर्त देखना चाहते हैं. गर्मियों में माँ-पिता आ रहे हैं, कुछ सामान उसी की तैयारी है. हो सकता है तब तक वे बड़े घर में शिफ्ट हो जाएँ.

वे फिर चले गए हैं, नन्हा झूला पार्क गया है, उसने कुछ देर बगीचे में सफाई की, कुछ देर अखबार पढा, पर मन नहीं लगा. कढ़ाई का काम भी अधूरा पड़ा है. तिनसुकिया से सारिका भी लायी थी, अभी तक एक कहानी ही पढ़ी है, वह भी रास्ते में ही पढ़ ली थी कार में. किसी को दुखी देखकर, परेशान देखकर दिल में कैसी गांठ सी पड़ जाती है, आँखों में आँसू आ जाते हैं, जाने कहाँ से, क्या इसी का नाम सहानुभूति है, भाईचारा है, प्यार है, मानवता है..उनकी महरी के मन में भी ऐसी ही गांठ पड़ जाती है, उसका दिल भी ममता से भरा है, दुनिया में कितने ही लोग ऐसे होंगे.

पिछले कुछ दिनों से डायरी लिखने का अभ्यास या कहें क्रम कुछ बिखर सा गया है. आज फिर एक बार यह सीखने के बाद कि..अपने घर सा सुख कहीं नहीं..मन अपने अंदर की ओर झाँकने को कह रहा है. उसने सोचा, वे हमेशा बाहर ही देखते हैं, बाहर ही सब कुछ खोजते हैं, किसी से कुछ न कुछ कहने को, सुनने को लालायित रहते हैं. पर कितना समय वे अपने आप को देते हैं..अपने मन से बातें करते हैं, अपनी आवाज को पहचानते हैं. उसने सोचा उसे तो कम से कम इधर-उधर भटकने के बजाय अपनी प्रिय डायरी के पास होना चाहिए जो उसकी सारी बातों को सुनती है, जवाब भी देती है, उसे अकेलेपन से मुक्त करने के बजाय उससे जुड़ने का सुख देती है. जून का प्रेम असीम है यह बात वह पहले भी कई बार महसूस कर चुकी है और लिख भी चुकी है पर बार-बार कहने का मन होता है. उसका प्रेम इतना विशाल है कि उसकी कड़वी बातें भी उसकी मिठास में घुल जाती हैं, और उसे भी उसके सान्निध्य में अवश्य ही सुख मिलता होगा तभी तो..और कभी थोड़ी बहुत नोक-झोंक होने पर नन्हा बड़ी जल्दी सुलह करा देता है.

कल माँ-पिता का पत्र मिला, हमेशा की तरह चंद पंक्तियाँ पिता की अंग्रेजी में लिखी हुईं फिर लम्बा सा पत्र माँ का. सुबह से ही वह सोच रही थी कि उन्हीं रिश्तेदार को फोन करके घर आने के लिए कहेगी पर..साढ़े नौ बजे के लगभग उनकी नौकरानी ने बताया कि वे लोग घर गए हैं, उनके बड़े भाई की मृत्यु हो गयी है. सुनकर कैसा तो लगा, वह तो रो ही पडती शायद कि जून आ गए..उन्हें फिर दो दिनों के लिए तलप जाना था सो सामान लेने आए थे. दोपहर को उसकी असमिया सखी आई, शाम को सामने वाले घर की छोटी बालिका के साथ कैरम खेला, वे लोग भी आज नए घर में शिफ्ट कर रहे हैं. पुराने लोगों में इस लेन में वे ही रह गए हैं, एक दिन उन्हें भी जाना होगा, शाम के पांच बजे हैं नन्हा सोया है, वह बाहर बैठ कर  लिख रही है, पूरी लेन खाली है.

Tuesday, November 6, 2012

खिलौनेवाला कमरा



कल शाम को उनकी ही लेन के एक बंगाली महोदय एक विद्यार्थी को लाए, बारहवीं का है, गणित पढ़ना चाहता है. आज से वह यहाँ घर पर पढ़ाने का कार्य आरम्भ कर रही है, अच्छा लग रहा है सोचकर कि वह भी कुछ ऐसा करने जा रही है जो किसी की सहायता के लिए है. उसने सोचा वह पूरे मन से पढ़ाएगी, आज मैट्रिक्स पढ़ाना है. नन्हा अपने मित्र के साथ गेस्ट रूम में खेल रहा है, वह कमरा उसके खिलौनों से भर गया है, चाहे जैसे खेले, रखे, सजाये उसे उस कमरे में पूरी छूट है. कल ननद का पत्र आया है, वे लोग नन्हे को बहुत याद करते हैं, यह तो ठीक है, लेकिन शाम को पांच बजे दोपहर का भोजन तो कुछ ठीक नहीं लगता न. आज लगतार चौथा दिन है गर्मी का, बादलों का नाम भी नहीं है. अभी सवा दस हुए हैं, उसने सोचा आधा घंटा वह पढ़ेगी फिर फुल्के बनाएगी.

कल व परसों उसने गणित पढाया, अनुभव ठीक ही रहा. आज शनिवार है, डिब्रूगढ़ से समाचार समीक्षा का कार्यक्रम आ रहा है. आज भी दिन गर्म है, परसों रात को भयानक गर्जन-तर्जन के साथ वर्षा हुई थी उसका कुछ असर बाकी है सो धूप तेज नहीं है. नन्हा लिख रहा है, एक से बीस तक लिखने में उसे आधा घंटा लगता है, कभी-कभी जानबूझ कर देर लगाता है. उसका मित्र खेलने आ गया है, अब वह जल्दी से लिख लेगा. आज पत्र भी लिखने हैं, दीदी का पत्र भी आया था, पता नहीं वह अभी यहीं हैं या आबूधाबी चली गयी हैं. आज वह अपनी अध्यापिका को भी पत्र लिखेगी. जून ने कहा था, घर में रंग-रोगन करवाने के लिए अर्जी देंगे.

साढ़े दस हो चुके हैं. आज फिर कुछ दिनों बाद डायरी खोली है, पर दायीं हथेली में बुरी तरह जलन हो रही है, आज एक हरी मिर्च काटी थोड़ा महीन, बस उसी का असर है, बाएं हाथ पर भी थोडा असर है मगर दायीं हथेली तो.. फिर ऐसे में क्या लिखा जायेगा. जून आकर कुछ तो उपाय करेंगे, पर अभी उनके आने में बहुत देर है. कल उन्हें गोहाटी जाना है उनकी पहली, नई, मारुति कार लाने,

आज शुक्रवार है, जून संभवतः कल आएंगे, कल रात या परसों सुबह. कल रात वह देर तक नहीं सो सकी फिर नींद भी आयी तो सपनों भरी. उसकी असमिया सखी ने खाने पर बुलाया है आज शाम को, कल तिनसुकिया जाने को भी कहा है. नन्हे के लिए सैंडिल लेना है, दलिया, चाय, फल, साड़ी पिन और एक कॉटन साड़ी. जून को कैसा लगेगा- शायद बहुत अच्छा या कुछ कम अच्छा. वैसे उसे साड़ी की जरूरत तो नहीं है फ़िलहाल- हाँ कॉटन सूट की है.

आज उन्हें जाना था था पर मौसम ऐसा बिगड़ा है कि... सुबह से मूसलाधार वर्षा हो रही है, घटाटोप बादल छाये हैं, ऐसे में उन्हें जून की याद ज्यादा आने लगी, नन्हा बार-बार पापा के बारे में पूछने लगा. घर में बंद रहो तो कितना खाली-खाली लगता है, वैसे चाहे दिन भर घर में रहें, पर जब मजबूरी हो तो खलता है. उसने सोचा, एक तरह से ठीक ही हुआ, जून के बिना तिनसुकिया में वे करते भी क्या..?

नन्हा आज एक वर्ष बाद फिर से स्कूल गया है. पता नहीं वह क्या कर रहा होगा, आज जब उसे छोड़कर आयी तो वह थोड़ा उदास था, जून उसे लेकर आएंगे. उनके आने से पहले वह  भोजन पूरी तरह तैयार रखेगी, उसे लगा कि अब उन्हें भोजन डाइनिंग टेबिल पर बैठकर खाना चाहिए. नन्हे को सीखना भी तो है अपने आप खाना. उसने बड़े जतन से टेबिल सजाई.