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Friday, February 3, 2017

शाम और खामोश पेड़


कल शाम एक सखी की बिटिया से उसके अनुभव सुनकर आनंद आया, उसने सोचा एक कविता लिखकर उसे देगी. रात को मोबाईल पास रखकर नहीं सोयी थी, जून ने फोन किया, वह अधीर हो गये फिर दूसरे फोन पर किया. पिताजी और माँ के बीच नोक-झोंक बढ़ती जा रही है, उसे लगता है यह मोह की पराकाष्ठा है. ऐसे ही लड़ते-झगड़ते सारा जीवन चला जाता है. नवरात्रि का तीसरा दिन है आज, ध्यान में मन लगता है, सद्गुरू कहते हैं, इन दिनों में की गयी साधना का विशेष प्रभाव होता है. एक अन्य सखी के दिए हुए कपड़े व स्वेटर आस-पडोस के बच्चों को बाँट दिए. कुछ कपड़े वे मृणाल ज्योति भी ले जायेंगे. ईश्वर उसके हाथों यह शुभ काम करवा रहे हैं. वह भजन याद आ रहा था, करते हो तुम कन्हैया..मेरा नाम हो रहा है..सचमुच सभी कुछ वही कराता है. आज सुबह स्वप्न था या तंद्रा थी या ध्यान था, उसे अपने भीतर लिखे हुए कुछ वाक्य दिखे. शास्त्रों में कहा गया है कि ऋषियों ने मन्त्र देखे, तभी वे द्रष्टा कहलाये. वे जो भी बुद्धि से लिखते हैं वह उतना प्रभावशाली नहीं होता जितना जो सहज प्रकटता है वह होता है.

माँ को आज अस्पताल जाना पड़ा. उनके पैर में घाव हो गया है. एक सखी ने कहा उनके कपड़े अलग से धोये जाएँ तथा डेटोल में रिंज किये जाएँ. स्नानघर में सीट तथा दरवाजे का हैंडल व नल भी डेटल से पोंछें. उसने पिताजी को भी सजग रहने को कहा कि कहीं उन्हें भी छूत न लग जाये पर वे कुछ और ही अर्थ लगाकर परेशान हो गये. इन्सान अपने सुख-दुःख का निर्माता स्वयं ही है. माँ की मानसिक स्थिति भी ठीक नहीं है. इस समय लेटी हुई हैं. उनके प्रति उसके मन में कोई भाव नहीं जगता, वह कुछ भी समझने की स्थिति में नहीं हैं ऐसा लगता है. उनके भीतर भी उसी परमात्मा की ज्योति है वही जो उसके भीतर है. अपने प्रति भी तो कोई कठोर हो ही सकता है. अस्तित्त्व में जो भी घटता है, वे उससे जुड़े ही हुए हैं. उनके भीतर परम चैतन्य सोया रहता है और वे सारा जीवन दुःख में ही गुजार देते हैं. उसे जगा दें तो भीतर उत्सव छा जाये, जगाना भी क्या कि मन के सारे आग्रह, सारी वासनाएं शांत करके खाली हो जाना है. वह शेष काम स्वयं ही कर लेगा. कल लक्ष्मी पूजा का अवकाश था, शरद पूर्णिमा भी थी. उसके पूर्व पूजा का अवकाश था, समय भाग रहा है.

फिर वही झूला, वही ढलती हुई शाम है.
कई दिनों बाद मिली इस दिल को फुर्सत, आया आराम है
आसमां चुप है सलेटी चादर ओढ़े
पेड़ खामोश है, हवा बंद, नहीं कोई धुन छेड़े
एक खलिश सी है भीतर कोई अपना बीमार है
दुआ के सिवा दे न सकें कुछ ये हाथ लाचार हैं
लो देखो एक कार की रफ्तार से पत्तों में हरकत आयी
हिल-हिल के जैसे भेज रहे उसे दवाई
जीवन है तभी तक तो दिल धड़कते हैं
रोते हैं, हँसते हैं साथ-साथ बड़े होते हैं
दो हैं कहाँ जो कोई असर हो दिल पे किसी बात का
दो हैं कहाँ जो दूजा लगे, अपना सा दर्द है जज्बात का
दुःख कहने से जो भीतर कसक उठती है वह अहम् है..



Tuesday, August 2, 2016

आइसलैंड का ज्वाला मुखी




 पंछियों को देखती है तो उसे लगता है कितने आनंद में हैं वे, बस उड़ना और गाना दो ही तो काम हैं उन्हें, न कुछ खोने का डर न कुछ पाने की ललक..और तितलियाँ, वे भी तो बस फूलों पर मंडराती हैं और छोटे-छोटे कीट, जो घास में छिपे रहते हैं, उनका तो बस होना ही काफी है. इधर मानव को देखें तो उसके भीतर कितना संघर्ष चल रहा है, रोते हैं लोग और कुढ़ते भी हैं..आदेश चलाते हैं, बिना यह समझे कि क्या कर रहे हैं.

पिछले कई दिनों से डायरी नहीं खोली. बीहू का अवकाश था. आज जून का ऑफिस खुला है. योग शिक्षिका को जवाब दिया, उसका SMS एक सखी को पढ़कर सुनाया तो उसके भी रोयें खड़े हो गये ! उसके दिल में भी प्रभु प्रेम की ज्योति जली है ! कल सुना कि आइसलैंड में ग्लेशियर के नीचे से ज्वालामुखी फटने से आकाश में धुँए के काले बादल छा गये हैं. हजारों उड़ानें रद्द हो गयी हैं. आकाश में कांच के टुकड़े हैं जो जहाजों को नुकसान पहुंचा सकते हैं. प्रलय की तैयारी ही लगती है यह. प्रकृति की विनाशलीला का एक अध्याय ! नीचे जल ऊपर आग का प्रकोप, मानव को उसके कृत्यों का दोष तो भुगतना ही पड़ेगा. सुबह बाथरूम में एक कीट को पानी में से बचने की कोशिश पर उसने उसे हिम्मत बंधायी पर वह दम तोड़ गया. नन्ही सी जान, उसके लिए तो वह जल प्रलय का रूप धर कर ही आया था. सोमवार को मृणाल ज्योति खुला है, जाना है. लेडीज क्लब की दो सदस्याओं के साथ, योग सिखाने के साथ –साथ कुछ बातचीत भी करनी है. वापस आकर सेक्रेटरी को बताना भी है, एक छोटा सा काम भी कितना महत्वपूर्ण हो जाता है, जब कोई उस काम को कभी-कभी करता हो. उसका यह काम भी अस्तित्त्व को समर्पित है. कर्म न बांधें साधक को इसका ध्यान हर क्षण रखना चाहिए ! उसका फोन पुराना हो गया है, बार-बार चार्ज करना होता है, बैटरी पुरानी हो गयी है, लेकिन जब तक यह काम दे रही है, काम चलाना होगा, बस सारे फोन नम्बर कहीं लिख कर रख लेने चाहिए.

कल इतवार था, दोपहर को ‘अंकुर संस्कार केंद्र’ के बच्चों की कक्षा थी. उन्होंने बहुत शोर मचाया, वह नियन्त्रण नहीं रख पायी, कोशिश ही नहीं की, लेकिन बाद में मन उदास था. उदासी की परवाह नहीं थी पर इसकी कि अभी तक मन बचा है. जो अभी तक भी मन बचा है तो इतने दिनों की साधना क्या यूँ ही गयी, सद्गुरु से पूछे तो कहेंगे कि पहले उदासी देर तक टिकती थी अब थोड़ी देर को ही और यह उदासी तो एक सबक सिखाने आई है कि कैसे बच्चों को और अच्छा सिखाया जाये ! कल बच्चों के लिए फाइलें लेकर गयी थी ताकि वे उसमें अपनी बनाई ड्राइंग रख सकें. कल की धूप-छाँव के बाद आज पुनः बादल छाये हैं, सावन से पूर्व ही यहाँ सावन आ जाता है. नौ बजे गाड़ी उन्हें मृणाल ज्योति ले जाने आएगी. पेट में कुछ गड़बड़ है उसी का परिणाम है गले की खराश, आजकल जून को अपनी सेहत की फ़िक्र हो रही है सो वे कुछ ज्यादा खाने लगे हैं, देखें कब तक ऐसा चलता है.

Wednesday, August 19, 2015

नोकिया का फोन


मई महीने का आरम्भ कितनी तेज धूप और गर्मी से हुआ है. दोपहर के एक बजने वाले हैं, आज जून ने उसे नोकिया का सेल फोन लाकर दिया, जो दिल्ली से एक मित्र द्वारा मंगवाया है. उसका गला अब काफी ठीक है.  पिछले दिनों जून ने उसका उसका बहुत ध्यान रखा, वह उसका हितैषी है. उनके प्रेम में कामना है वह स्वयं को जानते नहीं और अभी जो वे जानते हैं उसी को सत्य मानते हैं. कामना वैराग्य को दृढ़ होने नहीं देती. उसे गर्मी ने सताया तो एसी की आवश्यकता महसूस हुई. इसी तरह हर क्षण इस शरीर, मन को संतुष्ट करने के लिए कितने ही साधनों की आवश्यकता होती है. अपनी क्षमता के अनुसार हर कोई उसकी पूर्ति भी करता है. बस इसी में सारा जीवन चला जाता है. परमात्मा की ओर बढ़ते कदम वहीं थम जाते हैं और जगत की चकाचौंध में खो जाते हैं. सुख की तलाश में वे सुख के स्रोत को ही भूल जाते हैं. उसका जीवन एक शांत धारा की तरह अनवरत बह रहा है, इसकी मंजिल प्रभु है, इसका जल आत्मज्ञान है. उसके भीतर की शांति अखंड है, सभी कामनाओं से परे !  

उसका मोबाइल फोन काम करने लगा है, अभी उसे बहुत कुछ सीखना है, sms करना, game खेलना उसमें प्रमुख है. जून आज दिल्ली चले गये, उन्हें मलेशिया जाना है अगले हफ्ते. नन्हे के आने तक उसे अकेले रहना है. उसके जीवन के सबसे महत्वपूर्ण दो व्यक्ति. यह सही है कि माँ-पिता के बिना तो भौतिक अस्त्तित्व इस देह में होना कठिन है, माँ जाने कहाँ होंगी, जहाँ भी होंगी, अवश्य ही प्रसन्न होंगी. पिताजी से परसों ही बात हुई, उन्हें ख़ुशी है कि वे शीघ्र ही उनसे मिलने जायेंगे. जून को उसने जानबूझ कर कभी भी दुखी करना नहीं चाहा, पर अनजाने में वह उसके कारण बहुत दुखी हुए हैं. वह दिल से पश्चाताप करती है और उनके प्रेम का आदर भी. जून के मन में उसके लिए बहुत प्रेम है, वह शरीर, मन, बुद्धि से परे जा नहीं पाये हैं सो नूना की बातें उनकी समझ में नहीं आतीं, पर वह उनके प्रति कृतज्ञता अनुभव करती है. उनके कारण ही उसकी साधना तीव्रतर हुई है. जो भी अनुभव उसे हुए हैं, उसमें उनका बहुत योगदान है. उसने प्रार्थना की कि उसके अंतर की शुभकामना उस तक पहुंचे. नन्हे को भी उसने मूर्खतावश दंडित किया होगा, पर उसके पीछे ममता रही होगी. उसे भी उसके जीवन में आकर मातृत्व प्रदान करने के लिए बहुत-बहुत प्रेम.. और कोटि-कोटि प्रणाम उसके सद्गुरु को जिन्होंने उसे दूसरा जन्म दिलवाया !


आज से नन्हे की परीक्षाएं आरम्भ हो रही हैं, आज गणित की परीक्षा है जो उसे कठिन लगने लगा है. जून ने वीसा के लिए अप्लाई कर दिया है. योग वसिष्ठ में सत्य ही कहा गया है कि इस जगत में कुछ भी बिना पुरुषार्थ के नहीं मिलता और ऐसा कुछ नहीं जो पुरुषार्थ से न मिले. प्रमोद महाजन यह मानते थे कि जगत में कुछ भी पहले से तय नहीं किया गया है अर्थात वे स्वयं ही अपने भाग्य के निर्माता हैं. उनकी मृत्यु आज बाहरवें दिन हो गयी, एक भाई के हाथों अपने भाई की नृशंस हत्या का यह मामला कितने सवाल उठाता है. ऊंचाई पर जाकर भी अपने परिवार को उपेक्षित नहीं करना चाहिए, पहले अपने इर्द-गिर्द के लोगों के चेहरे पर मुस्कान आए फिर दुनिया और समाज की चिंता कोई करे. लेकिन जो भी आगे बढ़ता है वह अपने पीछे कितनों को रुलाता ही है. हर वस्तु की कीमत चुकानी पड़ती है. यदि व्यक्ति हर समय सजग रहे तो वह सभी को साथ लेकर चल सकता है. आज क्लब में दो टॉक सुनने को मिलीं. प्लास्टिक का बढ़ता हुआ प्रकोप तथा अपनी सेहत के प्रति लापरवाही. एक डांस  का प्रोग्राम बेहद आकर्षक था तथा गीत भी. कल की तरह आज भी सोते समय कमरे के दरवाजों को अंदर से बंद करना उसके मन के भय को दर्शाता है. जहाँ भय है वहाँ प्रेम हो ही नहीं सकता और जहाँ प्रेम नहीं है वहाँ परमात्मा कैसे आ सकते हैं ! परमात्मा तो प्रेम से ही प्रकट होते हैं, तभी उसका मन सूना-सूना सा रहता है, आँखें मुस्कुराती नहीं, होंठ गाते नहीं, कदम थिरकते नहीं ! जैसे कुछ खो गया है, आज पता चला कि जो खो गया है वह और कहीं नहीं उसके ही मन में छुपा है, उस डर के पीछे, उस डर को निकाल दे तो वह उजागर हो जायेगा ! 

Monday, September 15, 2014

दुःख का अस्तित्त्व


कल शाम दीदी व छोटी बहन का फोन आया, वे दोनों टहलने निकलीं थीं तो पीसीओ से फोन कर लिया, जबकि घर पर दो फोन हैं. कल तेहरवीं है, जिस पर उसे जाना चाहिए था पर परिस्थिति वश नहीं जा पा रही है. उसका अपने परिवार के प्रति कर्त्तव्य आड़े आ गया. घटनाएँ कब क्या मोड़ लेंगी कोई कुछ नहीं कह सकता. अब माँ को याद करके उसे दुःख नहीं होता बल्कि शांति का अनुभव होता है. वह अब मुक्त हैं तथा हर समय उसके पास हैं. उनके बचपन से लेकर अपने बचपन तक फिर अपने बचपन से उनकी वृद्धावस्था तक के सारे चित्र सजीव हो उठते हैं. जून आज भी हमेशा की तरह पहले उठे वह एक स्वप्न देख रही थी जिसमें वह अपना मान तथा धन दोनों बचाने में सफल हो जाती है. एक लुटेरा उसके पीछे था पर वह स्वयं अपमानित होता है.

उसने सुना, अहंकार का त्याग और समर्पण की भावना का विकास ही शांति प्रदान करता है. अहंकार और स्वाभिमान में अंतर है, स्वाभिमान की आहुति देने के बाद तो पास में कुछ भी नहीं रह जाता. एक सखी ने पूछा वे घर जा रहे हैं या नहीं, यह उनके लिए एक अबूझ प्रश्न बन गया है जिसका उत्तर समय ही बतायेगा. सुबह-सुबह एक अन्य का फोन आया. कल सुबह दो परिचित महिलाएं मिलने आई थीं. दुःख इन्सान को इन्सान से जोड़ता है. इस समय सुबह के नौ बजे हैं, आज धूप तेज है, पिछले दिनों दोपहर तक कोहरा रहता था फिर मद्धिम सी धूप के दर्शन होते थे. अभी उसे भोजन तैयार करना है फिर रियाज और दोपहर से कविताएँ टाइप करने का काम. कल का दिन तो गंवा दिया पर अब और नहीं, कहीं उसके इस आलस्य के कारण उसका सपना अधूरा न रह जाये और जिन्दगी की शाम आ जाये. मृत्यु हर मोड़ पर बाट जोहती खड़ी रहती है. जीवन इतना अल्प, इतना कीमती है कि हर पल का सदुपयोग होना ही चाहिए.

आज सुबह एक स्वप्न देखा जिसमें वह अकेले विदेश यात्रा पर जा रही है. माँ को भी देखा. जून ने उठकर विश किया और दफ्तर जाने से पूर्व उसने उन्हें फिर उस फोन की याद दिलाकर नाराज कर दिया. ससुराल से फोन आया था, पिता को भी यही उम्मीद थी कि जून अवश्य तेहरवीं में शामिल होने गये होंगे. कल छोटी बहन का फोन आया उसने किन्हीं मामीजी से उसकी बात करवाई, वह पहचान नहीं पायी. सभी रिश्तेदार वहाँ आये हुए हैं. छोटी बुआ व ममेरी बहन भी आए हैं, उसे एक बार फिर न जा पाने का दुःख हुआ, शायद जीवन भर यह अपराध बोध उसे सालता रहेगा. बाबाजी कहते हैं, सुख-दुःख मिथ्या हैं सिर्फ मानने से होता है न मानें तो इसका कोई अस्तित्व  ही नहीं है. यदि वह जाती तो यहाँ जून और नन्हा परेशान रहते किसी को सुखी करके किसी को दुखी होना ही पड़ता, फिर जो नितांत उसके अपने हैं उन्हें दुखी करने का उसे क्या हक है ? कल स्वप्न में बहुत दिनों बाद कॉलेज भी देखा, गणित के अध्यापक को भी. जैसे सुबह नींद खुलने पर स्वप्न टूट जाता है वैसे ही ये स्मृतियाँ भी कुछ वर्षों बाद भुला दी जाएँगी. जीवन फिर भी चलता रहेगा. नन्हा आज फिर देर से उठने के कारण हाथ-मुंह धोकर ही स्कूल गया है, उनके समझाने का उस पर कोई असर नहीं होता, कभी-कभी जिन्दगी इतनी मुश्किल हो जाती है कि.. कल शाम फिर दो मित्र परिवार मिलने आये थे, वे भी उनके घर जाने के बारे में पूछ रहे थे. भविष्य के गर्भ में ही छिपा है इसका उत्तर, कौन जाने तब तक असम में भी भूचाल आ जाये, उन्हें इसका जवाब अपने आप ही मिल जायेगा.
कल रात पहले छोटी बहन का फोन आया, फिर मंझले व बड़े भाइयों का, उन्हें कल उसका वह पत्र मिला जिसमें “हमारी माँ - एक सम्पूर्ण व्यक्त्तित्व” में माँ के बचपन से लेकर जैसा उन्हें देखा, समझा लिखा था. इतने दिनों से संबंधों में जो बर्फ जम गयी थी पिघली. सुबह उठते ही पिता को फोन किया, वह चाय बना रहे थे. माँ के बिना रहने की आदत उन्हें धीरे-धीरे पड़ती जा रही है. आज फिर बदली छाई है, नन्हे की आज संगीत की लिखित परीक्षा है. सोमवार से मुख्य विषयों की परीक्षाएं शुरू हो रही हैं.   


  

Thursday, September 4, 2014

जीवन और मृत्यु


कल दिन भर एक अजीब सी पशोपेश में गुजरा, जून के फोन भी कई बार आए. पहले वह मान गये कि नन्हा और मुझे वहाँ पहुंच जाना चाहिए पर रात को अस्पताल पहुंचकर उन्होंने न आने के लिए कहा. वह उसे व नन्हे को परेशानी से बचाना चाहते हैं. सभी लोग तो वहाँ हैं ही, दीदी, छोटी बहन, सभी भाई, पिता और जून. माँ की हालत में थोड़ा सुधार तो हुआ है पर अभी भी ऑक्सीजन दी जा रही है और वेंटिलेटर पर भी रखना पड़ेगा, जिसके लिए बड़े हॉस्पिटल में शिफ्ट करने की जरूरत थी. अब तक शायद यह कार्य हो चुका होगा. जून का फोन आने पर ही पता चलेगा. उसके मन में विचारों का एक प्रवाह चल रहा है. देह का संबंध तो एक न एक दिन छूट ही जाना है, मृत्यु के पाश से कोई नहीं बच सकता पर आत्मा का संबंध अमर है, उसका संदेश अवश्य माँ तक पहुंच रहा होगा. वह इस समय अस्पताल में जीवन और मृत्यु की लड़ाई लड़ रही हैं, किसकी जीत होगी कहा नहीं जा सकता. वह किसी भी फैसले के लिए तैयार है. उनका दुःख कम होगा. पिछले कई महीनों से जो परेशानी वह झेल रही थीं, उससे मुक्त हो जाएँगी. अपने जीवन के सारे कर्त्तव्य पूरे कर चुकी हैं. कोई ऐसी बात नहीं जो उन्हें मोहयुक्त कर सके, सत्संग व शास्त्रों का ज्ञान उन्हें है. मोहमाया के जाल को समझ कर काट चुकी हैं. अंतिम यात्रा पर निकलना तो एक दिन सभी को है. यदि ईश्वर ने उन्हें कुछ और मोहलत दी तो परिवार को उसका कृतज्ञ होना चाहिए, नहीं तो उनकी अंतिम यात्रा को स्वीकार कर भावपूर्ण श्रद्धांजलि देनी चाहिए. ईश्वर पर भरोसा रखते हुए उनकी यात्रा को सुखद बनाने का प्रयत्न करना चाहिए.

इस समय उसे जून के फोन का इंतजार है, कल रात फिर उन्होंने आज भी न चलने के लिए कहा, उसे उनकी बात माननी चाहिए पर अपने मन का क्या करे ? दीदी से बात की तो लगा उसे वहाँ पहुंच जाना चाहिए. माँ बहुत बेचैन हैं उसके बारे में पूछ रही थीं. रात भर सो नहीं पायीं, भाई ने बताया. उनकी तबियत काफी खराब है यह तो स्पष्ट ही है, इसके बिना कोई ICU में नहीं रहता. वह यह लिख ही रही थी कि जून का फोन आया , कल वह स्वयं ही आ रहे हैं, रात को फिर फोन करेंगे. उनसे बात करके मन हल्का हो गया, उनकी आवाज में कोई जादू है जो उसे अपने वश में कर लेती है. उनसे बात करने के बाद ही नित्य के कार्य-कलाप में व्यस्त हो पायी. ध्यान में ईश्वर से सलाह मांगी, वह भी जून की तरफ हैं.

सुबह से दो बार फोन आ चुका है. उनकी फ्लाइट लेट है. सुबह छोटी भाभी से बात हुई, माँ की तबियत जो सुधर रही थी, फिर खराब हो गयी है. अभी-अभी फोन की घंटी बजी तो दिल धक से रह गया, कहीं वही खबर न हो जिसका डर हमेशा बना रहता है. कल रात को सोये कुछ ही देर हुई थी कि किसी के फुसफुसाने की आवाज आई, दिल जोरों से धड़कने लगा. रात को स्वप्न में देखा, माँ नहाने गयी हैं, कपड़े धोने की आवाज आ रही है, पिता ने उसे उन्हें बुला लाने को कहा. उसने कपड़े धोने को मना किया तो बोलीं, हाँ, सिर में दर्द भी है. आवाज कमजोर थी. दूर होने की वजह से वह उनसे मिल नहीं पा रही है जबकि उसका मन हमेशा वहीं रहता है. नन्हा आज सुबह समय पर उठ गया, सभी काम समय पर किये फिर थोड़ा पहले ही बस स्टैंड चला गया. वह घर में रहता था तो चहल-पहल सी रहती थी पर अब न जाने क्यों मन रुआँसा सा हो रहा है. अभी-अभी फोन फिर से आया है. उनकी फ्लाइट कैंसिल हो सकती है. आज उन्हें  दिल्ली में ही रहना पड़ सकता है.

जून आज सुबह आ गये. कल उनकी फ्लाइट गोहाटी में ही टर्मिनेट हो गयी. आगे की यात्रा रात्रि बस से करनी पड़ी. आज उसे जाना है, पर फ्लाइट का कोई भरोसा नहीं है, देर से चलेगी. बड़े भाई दिल्ली में उसे लेने आयेंगे. आज ही उन्हें एक विवाह में भी जाना है. यही है जीवन की निस्सारता, दुनियादारी तो निभानी ही पड़ेगी. जून सुबह-सुबह ही ऑफिस चले गये. इतने दिनों की यात्रा के बाद भी वह अपनी आंतरिक शक्ति के बल पर ठीकठाक हैं. उसे भी इस बल की बहुत आवश्यकता पड़ने वाली है. पहली बार हवाई जहाज से अकेले सफर करना है. सुबह नन्हे से बात भी नहीं कर पायी.



Thursday, August 14, 2014

मन के मंजीरे -शुभा मुद्गल


कुछ देर पूर्व छोटी बहन का फोन आया, जब वे बच्चों और पिताजी के साथ पहाड़ों पर सुबह की सैर से वापस लौटी. भांजी से बात नहीं हो पाई है अभी तक. आज शाम को जून अपने एक विभाग में आये अतिथि को चाय पर बुला रहे हैं. उसने सोचा है वह पाव-भाजी बनाएगी, वे बंगाली हैं तो बाजार से जून रसगुल्ले भी लेते आएंगे. नन्हे के लिए वे कोलकाता से अभी से ISC physics books लाये हैं दसवीं व बारहवीं की. जून लंच पर आये तो उसने उन्हें उड़िया सखी के फोन की बात बताई, वह उससे पूछ रही थी कि क्या वह English classes में जाएगी जो एक परिचिता अपने घर पर लेने वाली हैं. जून का जवाब ‘न’ होगा यह सोचकर उसने मना कर दिया था, पर अब वह कहते हैं कि वह जा सकती है सो उसने सोचा है इस हफ्ते वह तीन दिन घर पर ही दूसरे कमरे में बैठकर पढ़ेगी, यदि जून और नन्हे को कोई असुविधा नहीं हुई तो अगले हफ्ते से ज्वाइन कर लेगी. उस दिन जो किताब लाइब्रेरी से लायी थी उसमें से एक कहानी पढ़ी, कुछ ऐसा ही उसके साथ हुआ था जब वह स्कूल जाती थी. इसलिए उनकी राय जाने बिना ही मना कर बैठी. लेकिन इसका कोई अफ़सोस नहीं है उसे, न ही यह समझौता है बल्कि इससे त्याग के महत्व का पता चला है. अपनी आवश्यकताएं सीमित रखना, तन की ही नहीं मन की भी. अपनी ख़ुशी अपने अंदर तलाशना, हर हाल में संतुष्ट रहना और परिवार के प्रति अपने कर्त्तव्य को समझना. नन्हे और जून की जगह पर खुद को रखकर उनकी अपेक्षाओं को जानने का प्रयत्न, सबसे बड़ी बात उनके इस छोटे से घर का वातावरण सदा प्रफ्फुलित रखना !

“तप जीवन में आवश्यक है, अन्तर्मुखी होकर, राग-द्वेष मुक्त होकर, आसक्ति को मिटाकर तप किया जा सकता है. मन को संस्कारों से मुक्त करना ही तप है. मन के दर्पण को ऊपर की ओर स्थित करने से उसमें पड़ने वाली छाया ऊपर ही चली जाएगी”. आज भी बाबा जी ने ज्ञान की शिक्षा दी. सुबह वे जल्दी उठे, आज भी भाई के यहाँ फोन किया पर लाइन नहीं मिली, सम्भवतः टेलीफोन कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से. कल जो मेहमान आये थे उन्हें भी घर फोन करना था, पर नहीं मिला. जून को पाव-भाजी अच्छी लगी. उड़िया सखी को सुबह-सुबह फोन करके पपीते के पौधों की जानकारी दी. जब ध्यान में थी, फोन बजा पर उठने का प्रयास नहीं किया. मन को केन्द्रित करना वैसे ही कितना कठिन है, शीशे पर धूप पडती है और उसे हिलाते हैं तो चमक भी हिलती है. ऐसे ही मन रूपी दर्पण पर बाहरी आघात पड़ता है तो मन चंचल हो उठता है. नन्हे ने क्लब की पत्रिका के लिए एक लेख लिखा है, आज शाम वे उसे देने जायेंगे. उसके स्कूल में ड्रामा रिहर्सल भी शुरू हो गयी है, कुछ ही दिनों में उसका प्लास्टर भी खुल जायेगा और वह पहले की तरह रिटेन टेस्ट दे सकेगा.

It is I o’clock and she is with her diary. Few minutes ago she heard again that song, “meri chuunar ur ur jaye… it is a sweet melodious song, every time when she listens it, it attracts, another songs which she likes on Zee music are “piya basnti aa..and “man ke manjire …sung by Shubha Mudgal. All these songs are melodious and soft., they touch one’s heart. Today she talked to two friends, one was worried due to early/voluntary retirement scheme and other due to her son’s exams but she is not worried at all. Last evening they went to jun’s office and did net surfing. They have copied some wall papers from life positive site, while coming back jun purchased one copy of same magazine for her. This magazine touches one in every way. She liked it from its first issue when they saw it in library. Today weather is changing its mood frequently, earlier it was drizzling but now sun has come again. Nanha was smiling in the morning when jun and she helped him like they used to do when he was a small kid. He is slow these days, cause can use only his left hand. But during all these weeks he complained only once. They all three are one strong unit as a family and have many things common, ie why they love so much.





Friday, July 25, 2014

सेवेन हैबिट्स ऑफ हाइली इफेक्टिव पीपुल- स्टीफन रिचड्र्स कोवे



Today again she has to go for second sitting of rct but now she is prepared to ask the doctor for putting less medicine. Today again it is raining like yesterday and  day before yesterday. Nanha is reading a novel “Frankenstein” these days and she is reading “seven habits” they are accounts of the turmoil and struggle of ordinary people against themselves, society and illness. They give an insight to hearts of those persons. She thinks , she should also  write her mission statement and should live more meaningfully on this earth, in their small family.

Today is the fourth sitting of rct now she does not mind that horrible taste of medicine which dentist puts in her tooth cavity. It is dry today so weather is somewhat hot and humid. Talked to father in the morning, mother is doing well. Babaji said,  “each one of us can get the ultimate truth if we  do sadhna, but ultimate truth can be understood by self not by body or mind, self is the seer, if we pay our whole attention to body and mental whims and not to our self, we can not reach there” didi called in the morning, she liked her letter. All others also must have received them also. Nanha went to school today after summer vacations.

जून ने अभी तक फोन नहीं किया, शायद वह अब तक नाराज हैं. उसने फोन किया तो मिले नहीं. इस वक्त सुबह की घटना पर विचार करें तो आश्चर्य होता है, कितनी छोटी सी बात कितना बड़ा रूप ले लेती है. उन्होंने guided meditation किया सात बजने ही वाले थे पर जून ने पिता को फोन करने को कहा, उसने उन्हें मना भी किया पर उसे फोन पकड़ा कर वह पीछे कमरे में ही टहलने लगे उसकी हर एक बात व हरकत पर नजर रखते हुए, अब जैसा कि उसके साथ होता है फोन पर बात करते वक्त उसका सारा ध्यान उधर ही होता है अपने आस-पास तक की खबर नहीं रहती, जब उसने माँ से कहा अच्छा रखते हैं तो उनके फोन रखने का इंतजार करने लगी जब उन्होंने रखा, ऐसा उसे लगा तो उसने भी फोन रख दिया लेकिन तब तक भी उसका सारा ध्यान उनके साथ हुई बातचीत पर ही केन्द्रित था तभी बीच में जून की क्रोध से भरी छि सुनाई दी तो वह वास्तविकता में आयी, सचेत हुई उन्होंने पूछने पर बताया कि ‘फोन रखते हैं’ कहने और रखने के मध्य आधा मिनट लगा, सो पहले ही फोन काट देना चाहिए था, पर उस वक्त जो वह महसूस कर रही थी, जो सोच रही थी उसमें इन दुनियावी छोटी-छोटी बातों के लिए जगह ही कहाँ थी. हाथ अपना काम कर रहे थे पर मन अब भी वहीं था. कई बातें आँखों से देखने की नहीं होतीं मन से महसूस करने की होती हैं.

आजकल उसकी मनोस्थिति उतनी शांत नहीं है जैसे घर जाने से पूर्व थी. शायद अस्पताल के चक्कर लगाने के कारण, आज सुबह उठी तो neck भी stiff थी. मन में कई संकल्प-विकल्प उठ रहे हैं. बगीचे में भी काम पेंडिंग हो गया है, माली रेगुलर नहीं आ रहा है और नैनी से कार्य करवाने में उसने ही आलस्य दिखाया, घर की सफाई भी जो आने के बाद ८० प्रतिशत हुई थी उतनी ही है. गुलदाउदी के गमले तैयार करने हैं. कल जून लंच पर आये तो सामान्य थे जैसे कुछ हुआ ही न हो, वह व्यर्थ ही सोचती रही. कल life में कई अच्छे लेख पढ़े मन की डगमगाती नाव को कुछ ठौर मिला. सुबह दायें तरफ की पड़ोसिन को बाएं तरफ की पड़ोसिन से किसी दिन मिलने जाने के लिए बात की.  

Thursday, March 13, 2014

पीपल का पेड़



कल शाम को जून का फोन आया, वह होटल जाने से पूर्व ही छोटी बहन के यहाँ उतर गये, अच्छी बात है अपनों के प्रति स्नेह और सम्मान प्रकट करना और मन में होना. कल रात भी स्वप्न देखे, अजीब से स्वप्न. नन्हा भी सुबह एक बार उठा, उसे हल्का जुकाम हो गया है, आज गणित का टेस्ट नहीं दे पायेगा. मौसम फिर ठंडा हो गया है. कल शाम जब वह उसे पढ़ा रही थी, एक मित्र परिवार आया, वे नन्हे के लिए किताबें लाये थे, इस साल उसके पास कई किताबें हो गयी हैं, पढने के लिए उचित माहौल घर में बन रहा है. स्कूल में भी है. कल शाम वह अकेले टहलने गयी, शाम ठंडी थी और सडकें लगभग खाली, घर से निकलते ही पीपल की सूनी टहनियों पर उगे नये कोमल पत्ते दिखे, एक पंक्ति मन में कौंधी जो अब याद नहीं है. हवा चेहरे को सहलाती हुई बह रही थी और आँखें जैसे हरियाली को पी लेना चाहती थीं. क्लब के सामने से गुजरते हुए महसूस हुआ कि पेड़ भी विद्यार्थियों की तरह हैं, कुछ ने नयी ड्रेस पहन ली है और तैयार हैं, कुछ ने अभी तक कपड़े नहीं बदले हैं, असम में पतझर नहीं होता इस बात का प्रत्यक्ष उदाहरण दिखा. आज सुबह ‘कन्हैया लाल प्रभाकर’ का निबंध पढ़ा, पढ़ाया, देश प्रेम की भावना से युक्त लेख मन पर असर करता है. अब से तीन बजे तक पांच घंटे उसके पास हैं, जिनमें एक भरपूर जीवन जीना है.

आज आखिर सफाई करने का मुहूर्त निकल ही आया और उसने नन्हे के स्कूल जाते ही काम शुरू कर दिया. साढ़े दस बजे तक तीनों कमरे स्वच्छ हो गये. घर आज बेहद अच्छा लग रहा है. उसके बाद भोजन, पत्रों के जवाब, विश्राम और दिन कैसे बीत गया पता ही नहीं चला. एक सखी का फोन आया, उसने कल नन्हे और उसे लंच पर बुलाया है, कहने लगी, जून के न रहने से उन्हें अकेलापन लगता होगा, पर सच तो यह है कि उन्होंने अकेलेपन को स्वयं पर हावी नहीं होने दिया है, स्वयं को काम में व्यस्त रखकर और सामान्य दिनचर्या अपनाकर ही ऐसा सम्भव हुआ है. उनका कम्प्यूटर गोहाटी से रवाना हो चुका है शायद एक-दो दिनों में पहुंच जाये. कल स्कूल से आकर जब नन्हे ने किसी बच्चे से सुनी, डीपीएस में दाखिले के लिए किसी के एक लाख रूपये डोनेशन देने की बात कही तो कुछ देर के लिए तो वह सन्न रह गयी, पर फिर मन अपने रस्ते पर आ गया कि इस बात में कितनी सच्चाई है कहना कठिन है. जून के लिए एक पार्सल भी कोरियर से आया है, उन्हें फोन पर सारी खबरें देनी हैं, पर जब फोन आता है वह अन्य सब भूल जाती है.

They are ready to go to friends house, she and Nanha. Day is warm today, full of sun shine. Woke up at 6 am and taught till 8. Washed some clothes, linen etc, their Dhobi is away since last one and half month, washing machine is doing his job efficiently. Last night jun called and told about his presentation. His voice was nice to hear, clear and full of love, he is happy there, change of place and journey makes one happy generally. They are also fine, there is so much to do. They do not have a single moment to worry about , of course his presence is needed but he has made them strong enough. Just now phone rang but before Nanha had picked it up, it stopped. Who wants to talk to them… to two persons ?, who are going to share food with friends on this pleasant April noon !

आज पड़ोसिन ने दोपहर के खाने पर बुलाया है, नन्हा भी स्कूल से आकर वहीं खायेगा, सो आज का दिन भी व्यस्त रहेगा, आज संगीत की कक्षा भी है. उसने कल शाम और आज सुबह भी कुछ देर अभ्यास किया. फिर सोचा, देखें, उनकी कसौटी पर कितना खरा उतरता है उसका अभ्यास, शांत मन से बिना विचलित हुए अपना कार्य नियमानुसार करना, अपने आस-पास होती घटनाओं तथा प्राकृतिक सुन्दरता/बदलाव के प्रति सजग रहना ही एक सचेतन मन की निशानी है, जे कृष्णमूर्ति ने इस पुस्तक में बच्चों के लिए कई ज्ञानवर्धक उपयोगी बातें कही हैं लेकिन साथ-साथ वह यह भी कहते हैं कि बच्चों की उत्सुकता को, उनकी प्रश्न पूछते रहने की प्रवृत्ति को न दबाएँ, उन्हें खिलने, आगे बढने के लिए पूरा स्पेस दें, उन्हें अच्छी आदतें सिखाएं जरूर पर उन पर लादें नहीं बल्कि उन्हें इस योग्य बनाएं कि वह स्वयं अपना अच्छा-बुरा समझें, हर वक्त एक आज्ञा की छड़ी लिए उनके पीछे-पीछे फिरना उन्हें कुंठित करता है, वे एक स्वतंत्र व्यक्तित्त्व हैं और उन्हें हमारे स्नेह और सम्मान की जरूरत है न कि डांट-फटकार की, जून का फोन आज आयेगा, और दो दिन बाद वे लौट आएंगे, सम्भव है, बड़ा भांजा और छोटी भांजी भी उनके साथ आयें.  





Saturday, March 1, 2014

इतवार की इडली


आज की मीटिंग अच्छी रही पर लौटने में देर हो गयी, पौने नौ बजे थे, नन्हा घर पर अकेला था, उसके खाने का वक्त भी निकल चुका था, पर वह काफी समझदार है, नैनी को बुलाकर रोटी बनवा रहा था जब वह घर पहुँची. जून का फोन भी आया, वह कल शाम को वापस आ जायेंगे तो जिन्दगी में फिर क्रम आ जायेगा. सुबह छह बजे उनका फोन आया तो उनकी आवाज काफी बदली-बदली सी लगी, फिर कुछ देर बाद उनका फोन आया तो राहत मिली. सुबह-सुबह ही नैनी स्वेटर का डिजाइन पूछने आ गयी, काम में देरी हुई पर उसे भी कोई जल्दी नहीं थी. दोपहर को बहुत दिनों बाद पार्लर गयी, बालों में मेहँदी लगवाने, फिर पड़ोसिन के यहाँ, वह पिछले कई दिनों से अकेली है. दोपहर को अकेले भोजन के लिए बैठी तो पता नहीं क्यों भूख महसूस नहीं हो रही थी, समय हो गया है भोजन कर लेना चाहिए, इसलिए खा लिया.

कल रात्रि बहुत तेज वर्षा हुई, वे खिड़की खोल कर सोये थे, पानी अंदर आ गया, शुरू में वैसे ही उसे नींद नहीं आ रही थी, बाद में वर्षा की तेज आवाजों से खुल गयी, उठकर खिड़की, दरवाजा बंद किया और फिर न जाने कब नींद आ गयी. स्वप्न में एक बहुत बड़ा आयोजन देखा. कल मीटिंग में ‘हसबैंड नाइट’ का जिक्र हो रहा था, शायद इसी लिए प्रेसीडेंट ने सभी को धन्यवाद दिया और कहा कि प्रोग्राम अच्छा रहा, कमियों की तरफ किसी ने ध्यान नहीं दिलाया, भारतीयों की यही खासियत है कि कमियों को, गलतियों को याद भी नहीं करना चाहते कि किसी के सेंटीमेंट्स को बात लग न जाये क्यों कि समूह में काम करना आता नहीं है, हरेक अपना व्यक्तिगत लक्ष्य लेकर चलता है, खैर, आज सुबह जून के फोन से ही नींद खुली, वह आज आने वाले हैं, नन्हे और नूना का जीवन दो दिनों में थोड़ा अस्त-व्यस्त हो गया है पर रोचकता बनी हुई है, अपने मन मुताबिक सोना, जगना...पर यह जीवन क्रम यदि ज्यादा दिन चला तो अस्वस्थता को निमन्त्रण देने जैसा होगा. रात को सोचकर सोयी थी कि सुबह संगीत का अभ्यास करेगी पर इधर-उधर के कामों में ही समय हाथ से निकला जा रहा है. रात के वादे ऐसे ही होते हैं. दूध वाले से शिकायत करनी थी, एक सखी से बात करनी थी, नन्हे की आलमारी की सफाई का प्रोजेक्ट भी अधूरा है. जून के बिना जीवन भी तो अधूरा है.

पिछले तीन दिनों से डायरी नहीं खोल पाई, अभी-अभी महसूस हुआ, जायजा लिया जाये, पिछले दिनों क्या-क्या हुआ, शुक्र की शाम को जून आये, वे तीनों साथ-साथ रह कर खुश हो गये थे. शनि की सुबह जून को अदरक वाली चाय बनाकर दी, उनके गले में खराश लग रही थी, शाम वे एक मित्र के यहाँ गये, इतवार की सुबह इडली बनाई, शाम टहलने व नन्हे को पढ़ाने में बीती. जून ने कार की सफाई की, क्योंकि नैनी का बेटा ‘आता हूँ’ कहकर गायब हो गया. कल सुबह माँ से बात की, अभी तक उन्होंने अपने दाँतों का व पिता ने अपनी आँखों का इलाज करवाना शुरू नहीं किया है. टीवी पर लगातार चुनाव परिणाम प्रसारित हो रहे हैं, बीजेपी आगे है पर इतना तो तय है कि पूर्ण बहुमत से काफी पीछे है. वह Amitav Ghosh की एक किताब पढ़ रही है आजकल. बहुत सी पत्रिकाएँ भी हैं पर समय नहीं है, नन्हे के इम्तहान छह मार्च से हैं, यानि सिर्फ तीन दिनों के बाद. आज संगीत कक्षा में वह सरगम सुना सकी, अध्यापिका ने राग काफी सिखाना शुरू किया.

सुबह-सुबह सेक्रेटरी का फोन आया, आज शाम को सारे कमेटी मेम्बर्स को गेस्ट हाउस जाना है. उसे फोन करके सभी को बताना था, एक महिला को फोन किया तो पहले वे बगीचे में थीं, फिर रियाज करने बैठ गयीं, उनके पतिदेव ने संदेश ले लिया, फोन पर तो वे बेहद संजीदा caring लगे, अगर वह कभी उन्हें यह बात कहे तो वह हँसेंगी. नन्हा आज भी स्कूल नहीं गया, पर सुबह से बिना नहाये बैठा था, उसने नहाने के लिए कहा तो मुँह बना लिया. बच्चे कोई भी बंधन नहीं चाहते किसी भी तरह का नियम-कानून तो वे जानते ही नहीं, जब जिस बात का मन होगा वही करेंगे, उसे लगा यह नई पीढ़ी बिलकुल निरंकुश होती जा रही है. स्कूल में अध्यापक की बात का कोई महत्व नहीं और घर पर माँ-पिता की बात की कोई अहमियत नहीं. आज भी मौसम भला सा है, सुबह समाचार सुने, बीजेपी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला है, उधर UF और कांग्रेस जो एक-दूसरे के खिलाफ थे फिर एक होकर सरकार बनाने की बात कर रहे हैं, यह राजनीति का खेल आम  जनता की समझ से बाहर है. 





Friday, December 27, 2013

रहीम के दोहे


कल शाम को उसे एक फोन कॉल आया, उसे क्लब की अगली कमेटी में जॉइंट सेक्रेटरी का पद  भार सम्भालना है. ख़ुशी हुई, उसने सेक्रेटरी को धन्यवाद दिया जिसने उसका नाम सुझाया था. उसे बाद में लगा वह ठीक से अपनी बात कह भी पाई या नहीं पर अगले ही पल मन ने कहा, भावना देखी जाती है शब्द नहीं. उसे एक और बात याद आई, God gives in the evening if takes in the morning. उसने सोचा वह पूरी निष्ठा से उस काम को करेगी जो उसे सौंपा जायेगा. तीन वर्ष पूर्व वह इस क्लब की सदस्या बनी थी.

आज आसू ने असम बंद की घोषणा की है. नन्हा और जून घर पर हैं. आज धूप बहुत तेज है और गर्मी भी उतनी ही ज्यादा. कल शाम कक्षा चार के एक बच्चे की हिंदी ट्यूशन के लिए एक फोन आया पर जून के अनुसार उसे छोटी कक्षाओं को नहीं पढ़ाना चाहिए, छोटे बच्चों को सम्भालना व पढ़ाना ज्यादा कठिन है बनिस्बत बड़े बच्चों को. उसकी छात्रा जैसी किसी गम्भीर बालिका को पढ़ाना सरल है. कल घर से फोन पर एक उल्लास भरा समाचार आया अक्तूबर में वे सब यहाँ आएंगे.

आज फिर असम बंद है, गर्मी आज हद से ज्यादा है, वे तीनों एसी कमरों में बैठे हैं और ठंडक का आनन्द ले रहे हैं. नन्हा पढ़ रहा है, जून गाँधी जी की एक किताब जो स्वास्थ्य से सम्बन्धित है, पढ़ रहे हैं, उसने कुछ देर क्रोशिए से काम किया और अब लिखना शुरू किया है. Few minutes ago she was hearing news on TV and was not able to concentrate wandering mind for two consecutive news items. Mind always wanders here and there, it demands attention for every second otherwise it slips away like sand through the palms. Today they vacuumed clean their house, took lunch at 11.30 rested for a while and since then doing all above said work. Life at present is sailing smoothly in cool breeze coming from their new AC in Nanhs’s room. Yesterday by mistake she wrote down on next  page and adjoin g empty page was attracting her to pen some thing new and refreshing like Dohas of Rahim, she read some time before.

जीवन एक पहेली है जो बूझे सो ज्ञानी
सपनों सा संसार है आँख खुले तो फानी

हवा, धूप, माटी, गगन और अनल की मूरत
अंतर में जो झांक ले दिखे उसी की सूरत

चिंता, लालच, डाह, प्रमाद, मन के ये व्यापार
तज कर उस की शरण ले उतरे सागर पार

बीता जो वह न रहा भावी से अनजान
जो पल अपने सामने उसकी कीमत जान

यह जग एक सराय है पक्का नहीं मुकाम
आना-जाना अटल है रहने का नहीं काम

सूरज, धरती से मिला अनगिन कर फैलाये
वसुधा कातर प्रेम से फूल अश्रु बरसाए

After so many days clouds have shown their grace and it rained in the morning. At this moment weather is cool, garden is green after a shower. She got up early, perhaps 6 and ½ hours  sleep was not enough, eyes are yearning/paining to be closed but there are so many works and miles to go before she sleeps. Today she has to go music class also. Nanha went to school in a crowded bus today could not get seat also. After two days of ‘BAND all buses have not come today.
  



Sunday, December 22, 2013

कड़क चाय और भुट्टे का सूप


Today is D-Day ie her birth day ! since morning she has received so many B’day wishes that she is full of gratitude towards all of them and Almighty ! He is always with her. सुबह-सुबह वे बेड में ही थे कि पिता का फोन आया, कल उन्हें उसका पत्र मिला, पत्र से उन्हें व जून के मित्र जो कल वहीं थे, दोनों को ख़ुशी हुई, छोटे भाई ने भी फोन पर पत्र मिलने की बात कही. पत्रों की महत्ता उसे एक बार फिर महसूस हुई. दीदी का फोन आया, माँ उनके पास गयी हैं, भारत के बाहर से जीजाजी का फोन आया. छोटी भाभी के पिता ने भी फोन किया. यहाँ भी सखियों ने विश किया, उसे यह गीत भी याद आया जो पाकिस्तानी रेडियो पर बचपन में सुना था, मेरी सालगिरह है बोलो.. बोलो..बोलो न हैप्पी बर्थडे टू मी..

कुछ दिन पहले तक बल्कि कल तक ही उसे लग रहा था  कि जन्मदिन पर ख़ुशी के साथ-साथ उदासी भी होगी. एक साल और गुजर जाने की, पर ऐसा नहीं है...केवल ख़ुशी का ही अहसास है जो तन और मन के पोर-पोर में छाया है. जून और नन्हा भी इसमें शामिल हैं.

आज सुबह की खुली धूप के बाद ही अचानक बादल आ गये और लगातार बरस रहे हैं. मन भीगा-भीगा सा उनके साथ एकात्मकता महसूस कर रहा है, असम का यह भी एक अनोखा अनुभव है. आज बहुत दिनों के बाद इत्मीनान से उसने फोन पर दो सखियों से बात की, एक ने कहा, आजकल ब्लाउज में छोटी बांह रखने का फैशन है, पर उसने कहा वह फैशन के अनुसार नहीं अपनी सुविधा के अनुसार कपड़े पहनती है. पड़ोसी कुछ दिन बाहर घूमने के बाद आए हैं, उनका बेटा जो नन्हे का मित्र है, तब से इधर ही है, नन्हा उसके साथ बहुत खुश है, वह इतनी बातें कर सकता है, आमतौर पर उसे देखने पर अहसास नहीं होता.

रिमझिम गान सुनाती बरखा
मन-प्राण हर्षाती बरखा
हौले हौले से बादल के
उर से नेह लुटाती बरखा
स्वप्न सुन्दरी सी अम्बर से
उतर रही लहराती बरखा
मोती सी उज्ज्वल बूंदों का
झिलमिल हार बनाती बरखा

आज इस वक्त सुबह के दस बजने में दस मिनट पर जब छत पर चलता पंखा अचानक बिजली चली जाने से थम गया है, बाहर से छत से टपकती इक्का-दुक्का बूंदों की ध्वनि के सिवा कुछ पंछियों की आवाजें सुनायी दे रही हैं, कोई महीन कोई तीखी आवाज.  बाहर हॉट वाटर सिस्टम में गर्म पानी भाप के साथ उछल-उछल कर थम गया है. वह अपने आप के सम्मुख बैठी है, सुबह ध्यान में २५ मिनट कैसे बीत गये पता ही नहीं चला, गीता पढ़ने बैठी तो –पता नहीं क्यों बार-बार पढ़े शब्द जैसे टकरा कर लौट आये, मन के भीतर तक नहीं गये. एक सखी से बात की, उसका फोन खराब था अन्यथा उसी ने कर लेना था, पर वह उसके साथ हिसाब-किताब वाली मित्रता नहीं रखना चाहती. वह अलेप, निर्लेप या कोई ऐसा ही शब्द जिसका अर्थ हो मुक्त, निर्बाध...किसी भी तरह के मानसिक उहापोह से आजाद रहना चाहती है. जून का गला खराब है, कल शाम वे उसे कमजोर दिखे, शायद उनकी अस्वस्थता का अनुमान वह नहीं लगा पा रही है, उनकी देखभाल ठीक से नहीं कर पा रही है, उन्हें आराम की जरूरत है. उसे अस्वस्थता के नाम से ही चिढ़ है, सम्भवतः स्वस्थ मनुष्य यह भूल ही जाता है कि अस्वस्थ होने पर कैसा लगता है.

कल शाम उसने ‘कॉर्न सूप’ बनाया, घर में उगे ताजे मकई का सूप बहुत स्वादिष्ट बनता है. कल रात सोने से पहले वे किसी बात पर बहुत हँसे और उसने हँसने पर चार पंक्तियाँ भी गढ़ लीं पर रात को सपने में रोना पड़ा, जून को (पर स्वप्न में वह बदले से लग रहे थे) वाशिंग मशीन से करेंट लग जाता है. दादी जी की बात याद आ गयी जब वे कहती थीं, ‘हासे दा विनासा होसी’ ! आउटलुक में मंटों की कुछ दिल-दहलाने वाली कहानियाँ पढ़ीं, १९४७ की याद दिलाना आज की पीढ़ी के लिए आवश्यक है.

अपने आप से बातें करना अच्छा लगता है,
हम भी पागल हो जायेंगे ऐसा लगता है

आज कुछ ऐसी ही कैफियत हो रही है उसके मन की. कल रात को वह बहुत गुस्से में थी, जे कृष्णामूर्ति के अनुसार वह गुस्सा ही थी उस पल, उनका माली ठीक से बगीचे की देखभाल नहीं करता इस बात पर. उपाय यही है कि आज से नियमित एक घंटा वह स्वयं काम करे. आज सुबह  उठी तो लगा जैसे कल रात की बात भूल गयी है, ध्यान के समय भी ज्यादा याद नहीं आई पर बाहर जाकर देखा तो नैनी के बेटे को बुलाये बिना नहीं रह सकी, माली के साथ वह भी सहायता करेगा. कल शाम को एक मित्र परिवार आया उसने चाय कुछ कड़क बना दी, इतने वर्षों से चाय बना रही है पर सही अनुपात का ज्ञान अभी तक नहीं हुआ है. नन्हे को आज क्लास के बाद एक चित्रकला प्रतियोगिता में भी जाना है, जो Assam Science Association की तरफ से विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष में हो रही है. पेड़ों के नाम एक कविता और बगीचे में काम करना पर्यावरण के प्रति उसका उपहार होंगे.

Tuesday, December 17, 2013

ईरान में भूकम्प


कल सुबह जब जून और नन्हा सो रहे थे, बाहर भी कोई शोर नहीं था, वह ध्यान में बैठी, आधा घंटा कैसे बीत गया पता ही नहीं चला, आज भी वही हुआ, इस पुस्तक ने वाकई उसकी बड़ी सहायता की है. मौसम आज भी ठंडा है, वर्षा पिछले शनिवार को जो शुरू हुई है तो आज तक नहीं थमी है. २३ मई को उसे ‘हिंदी कविता पाठ’  के लिए जाना है, पढ़ने के लिए नहीं सिर्फ सुनने के लिए, और विजेताओं का फैसला करने में सहायता के लिए भी. उस दिन जालोनी क्लब की ओर से एक सदस्य आये और कविताएँ चुनने के लिए कहा, जो कक्षा १ से १२ तक के छात्र-छात्राएं पढ़ेंगे. कल शाम छोटी बहन का फोन आया, उसने आर्मी में डाक्टर की नौकरी के लिए योग्यता प्राप्त कर ली है, छह महीनों बाद ज्वाइन करेगी, उसे कैप्टन का रैंक मिला है. कल शाम को जून ने घर पर फोन किया, छोटा भाई स्टेशन पर नहीं  आ पाया था, सबकी अपनी-अपनी मजबूरियां हैं, इसलिए ऐसा मौका ही नहीं आने देना चाहिए कि किसी से सहायता लेनी पड़े.

आज छोटी भांजी का जन्मदिन है, सुबह दीदी को फोन किया, हर बार की तरह समझ में नहीं आया और क्या कहे, सभी की कुशलता पूछने व शुभकामनायें देने के बाद ही फोन रख देना चाहिए था पर इतने दिनों बाद किसी अपने की आवाज देर तक सुनने का मन करता है. रात को ठंड बढ़ गयी थी और वे कम्बल लेकर नहीं सोये थे,. नन्हा आजकल देर से उठता है सो सुबह-सुबह ही उसे डांट पड़ जाती है, फिर उसका मन भी ठीक नहीं रहता, कल से उसे जल्दी उठने की आदत डालनी है, थोड़ा अनुशासन ही उसे अच्छी आदतें सिखाएगा.. आज सुबह भी ध्यान किया, अनोखे अनुभव होते हैं, कब कौन सा पुराना विचार उभर कर सतह पर आएगा पता ही नहीं चलता. आज पिता के नामों को बिगड़ कर बोलने की बात याद आई, जो उसे कभी पसंद नहीं थी. आज स्वीपर जल्दी आ गया है, सो स्नान भी नहीं हो पाया है अभी तक, थोड़ी सी परेशान है पर जानती है एक क्षण में ही खुद को संयत कैसे किया जा सकता है. जून ने कल नये एसी के लिए ड्राफ्ट बनवा लिया, आज जमा करने जा रहे हैं. तिनसुकिया से वह मेज भी लायेंगे जो उन्हें कम्प्यूटर के लिए चाहिए. घर में सामान बढ़ता ही जा रहा है, वे विकास की ओर अग्रसर हैं या..

नन्हा स्वीमिंग पूल जाने के लिए तैयार बैठा है, जून के आने में भी चंद मिनट हैं, आज धूप तेज है, मौसम गर्म हो गया है, पहले नन्हे को गृह कार्य में सहायता की फिर कुछ कपड़े ठीकठाक किये. आज सुबह ध्यान सफल नहीं हो पाया, शायद कल की घटना का असर अब भी मन पर है, कुछ तो ऐसे होंगे जिनपर यह असर बरसों बरस रहेगा, शायद जीवन भर ही. सुबह असमिया सखी का फोन आया, वह ‘सपने’ देख रही है, कुछ देर पहले टीवी पर इसका रिव्यू देखा, शायद अगले हफ्ते जब जून की छुट्टी होगी, वे भी देखें, शाम को क्लब जायेंगे, जीवन तो चलता ही रहेगा. सब कुछ पूर्ववत नहीं रहेगा फिर भी, जो नुकसान होना था वह तो हो गया जो बचा है उसी के साथ जीवन, यह धरती, यह आकाश सब अपना-अपना काम करते रहेंगे, ईरान में भूकम्प में हजारों मर गये, रोज ही मरते हैं, मगर यह दुनिया ज्यो की त्यों है.






Friday, August 16, 2013

बुद्ध पूर्णिमा


आज उनके यहाँ फोन लग गया, पीएंडटी फोन. अब जब चाहें जिससे चाहे बातें कर सकते हैं. कल शाम उसकी एक परिचिता ने फोन करके पूछा, क्या वह उनके स्कूल में एक महीने के लिए हिंदी पढ़ाने के लिए तैयार है, वह खुद एक महीने के लिए घर जा रही हैं और कोई टीचर नहीं है उनकी कक्षा लेने के लिए. पर उसे सम्भव नहीं लगता, सुबह सात बजे से दोपहर एक बजे तक उसे घर से बाहर रहना होगा, जून के लिए खाना सुबह से बना कर रख जाना होगा, फिर घर की सफाई और सारे काम... वह कभी राजी नहीं होंगे.

कल दोपहर बाद वह कुछ परेशान थी, उसकी एक सखी ने शाम को आने के लिए कहा था, उसने सारी तैयारी कर ली थी पर अचानक उसका फोन आया वे नहीं आ पायेंगे, तो उसके सब्र का बांध टूट गया और वह जानती है यह सिर्फ उसी घटना के कारण नहीं था बल्कि पिछले दिनों का मन में एकत्र गुबार था. उसे यह अहसास हो रहा था कि वह कुछ भी ऐसा नहीं कर पा रही है जो उसकी दृष्टि में सार्थक हो. एक अजीब से खालीपन का अहसास और एक ऐसी भावना जो तब उत्पन्न होती है जब अपने कुछ भी न होने का अहसास होता है. उस दिन उसकी इतनी इच्छा होते हुए भी जून उसके साथ वोट डालने नहीं गये, उनका नाम थो था ही, पर कहने पर नाराज हो गये. उसे लगता है उनके बीच एक रिश्ता भय का है जो और सारे रिश्तों पर हावी हो जाता है. वह उसे कभी उदास या कमजोर नहीं देख पाते, उनके सामने उसे सदा ही खुश और बहादुर नजर आना है. उन्हें किसी को परेशान देखकर सांत्वना देना या समझाना नहीं आता, बल्कि खुद भी परेशान हो जाते हैं, शायद यही फर्क है स्त्री और पुरुष में, लेकिन वह उसे और नन्हे को बहुत चाहते हैं, जैसे वे दोनों उन्हें.

आज सुबह दादा वासवानी ने बहुत विनम्रता पूर्वक बहुत सुंदर ज्ञान दिया. उनकी मुस्कान अप्रतिम है और शब्द उनके मुख से ऐसे झरते हैं जैसे बहुमूल्य मोती. उन्होंने कहा, अगर कोई स्वस्थ और प्रसन्न रहना चाहता है तो उसे अपना दृष्टिकोण सकारात्मक रखना होगा, नकारात्मक भावनाएं जीवन को अभिशाप बना देती हैं. उस दिन जून ने भले ही उसे नाराज होकर समझाया पर उसे उस भाव दशा से बाहर निकल लाये, उसने मन ही मन उन्हें धन्यवाद दिया. इस बार की यात्रा से वापस आते समय पिता ने उसे कुछ कापियां तथा नोटबुक्स दी थीं, उनमें से एक उसने आज पढ़ी, उसमें विचारों और सुझावों का एक खजाना है. विभिन्न विषयों पर छोटे-छोटे अनुच्छेद लिखे हैं. मनुष्य विचारों का एक पुतला ही तो है, जैसा कोई सोचता है वैसा ही वह हो जाता है. स्वस्थ रहने के लिये स्वस्थ विचार होने चाहिए. यह शत-प्रतिशत सही है क जिस दिन उसके मन में द्वेष के विचार पनपते हैं तो मन उखड़ा-उखड़ा सा रहता है और जब कभी प्रकृति की सुन्दरता को देखकर कोई अच्छा सा विचार, चाहे एक क्षण के लिए ही क्यों न हो, आता है, तो मन कैसे खिल जाता है

आज बुद्ध पूर्णिमा है, नन्हा अभी तक सो रहा है, जून टीवी पर गुड मोर्निंग इंडिया दख रहे हैं, विनोद दुआ ने यह कार्यक्रम शुरू किया है कुछ दिनों से. सुबह जागरण में ‘गिरी महाराज’ से सुना, जीवन में संयम होना चाहिए. पूरे वक्त उसे अपनी वाचालता का स्मरण होता रहा, पता नहीं क्यों उसे लगता है जब वे किसी के यहाँ गये हों या कोई उनके यहाँ आया हो तो चुप बैठना अच्छा नहीं है, और वह माहौल को खुशनुमा बनाने के लिए अपनी तरफ से किसी विषय या व्यक्ति  पर बातचीत शुरू कर देती है. पर हर बार पछतावा होता है, किसी व्यक्ति के पीछे उसके बारे में बात नहीं करनी चाहिए या फिर अपनी निजी बातें भी हरेक को बताने की क्या आवश्यकता है. सिर्फ बोलने के लिए बोलना तो असंयमित होना ही कहा जायेगा. वह वादे क्योंकि निभाती नहीं इसलिए वादा नहीं करेगी पर यह प्रयास अवश्य करेगी कि भविष्य में सोच-समझ कर ही बोले.



Tuesday, August 6, 2013

आर्मी कैंटीन


अभी कुछ देर पहले ही एक सखी का फोन आया, कल दोपहर को उसने ‘मौन व्रत’ रखा था, सो फोन नहीं उठाया. उसने सोचा गाँधी जी की आत्मकथा में उपवास और मौन के बारे में पढ़ेगी. आज धूप तेज है जो उनके नये लगाये भिंडी और मकई के बीजों के लिए अच्छी है. इस समय उसका मन कैसे एक बात से दूसरी बात पर जा रहा है. आज पीटीवी पर एक मजाहिया ड्रामा भी देखा कुछ देर, कैसे दोनों पति-पत्नी एक दूसरे की मौत का इंतजार करते-करते एक दूसरे की फ़िक्र करने लग जाते हैं. अचानक उसे ख्याल आया बरसों बाद जब जून और वह रिटायरमेंट के बाद जीवन बिता रहे होंगे तो यह सब पढकर हँसेंगे, पर कुछ भी हो, कुछ तो मिलता ही है...घास की नोक पर ओस की बूंद सा सुख का अहसास या सुकून !

कल घर से पत्र आया, माँ ने लिखा है, शायद उसने अपनी पत्र लिखने की आदत छोड़ दी है, लो..और इधर वह उनका पत्र न मिलने से परेशान थी. यानि उन्हें भी पत्र समय पर नहीं मिल रहे हैं. आज बहुत दिनों बाद शाम से ही बादल घिर आये हैं, सुबह ही उसने उड़द दाल की बड़ी बनाई थी, हर साल की तरह किचन में ही सुखानी पड़ेगी. जून अभी क्लब से नहीं आए हैं, नन्हा पढ़ाई में व्यस्त है और वह अभी अभी पीटीवी पर यह सुनकर आ रही है कि इन्सान जिस तरह झाड़ियों से अपना दामन बचाकर निकलता है, वैसे ही संसार में रहते हुए संसार के गुनाहों से बचकर निकल जाना चाहिए. बुराइयाँ बुराई का रूप धरकर नहीं आतीं, वह रूप बदल कर आकर्षित करती हुई आती हैं, और लोग उनके वश में हो जाते हैं, उनसे बचना तभी सम्भव है जब हर वक्त  अल्लाह की मौजूदगी का अहसास होता रहे. अध्यात्मिक उन्नति करने के लिये पहले नैतिक बनना होगा. हर क्षण इस तरह बिताना कि पवित्रता का अहसास हो न कि अपराध बोध का. उसे महसूस हुआ की सारे धर्म एक ही बात कहते हैं.

आज सुबह वह नहाकर ‘एक योगी की आत्मकथा’ पढ़ने बैठी ही थी, फोन की घंटी बजी, अभिमान जगा और मन ने कहा उसी सखी का फोन होगा जिसने उसका फोन नहीं उठाया था, वह भी तो पाठ कर रही है, पर पांच मिनट बाद फिर घंटी बजी, उसी का था, अपने साथ आर्मी कैंटीन ले जाना चाहती थी, वे गये और उसने ढेर सारा सामान खरीदा, उसे भी ख़ुशी का इजहार करते हुए एकाध सामान खरीदना पड़ा और समय तो गया ही, इसी कारण घर में सफाई नहीं हो पायी. एक सखी के कहने पर उसने ढेर सारे मटर छिलवा कर फ्रिज में रखवाए हैं. इस उम्मीद में कि अब उन्हें गर्मी के मौसम में भी मटर-पुलाव व मटर-पनीर खाने को मिल सकेगा. इन्सान जन्मजात संग्रही होता है, अगले क्षण का भरोसा नहीं पर अगले महीनों, सालों के लिए जुगाड़ कर लेता है. मानसिक शांति व स्थिरता भंग करने वाले कारणों में एक यह संचयी प्रवृत्ति भी है.

हवा चलेगी तो मेरी खुशबू बहेगी
पाकिस्तान की शायरा से गुफ्तगू उसे पसंद आई और यह है उनकी गजल-

छुपा हुआ मेरा घर इस्तराब रहने दो
कि कर चुके हो बहुत अभी बात रहने दो

सफर का साथ है यह मंजिलों का साथ नहीं
गुजर ही जायेंगे लम्हे हिसाब रहने दो

शिकस्ता करके इन्हें फासले बढ़ा दोगे
सजे हुए मेरे हाथों में ख्वाब रहने दो

और इसके आगे चंद अश्यार उसके खुद के कुछ इस तरह हैं-

इकतरफा ही सही सिलसिला जारी रहे
जगह दो दिल में खत का जवाब रहने दो

सूखे हुए पत्तों को धीमे से रख वर्कों में
 घर के किसी कोने में किताब रहने दो

बरसों से उजड़े इस वीरान चमन से

 काट दो जंगल जंगली गुलाब रहने दो