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Tuesday, April 7, 2026

अनंत से टक्कर - माइकल फ़िशमैन की किताब

  अनंत से टक्कर - माइकल फ़िशमैन की किताब 


आज मृणालज्योति में शिक्षक दिवस मनाया गया। एक शिक्षिका ने उनकी तरफ़ से उपहार ख़रीद कर बाँटे, तस्वीरें भेजी और शाम को एक अन्य शिक्षिका ने फ़ोन पर बात की।नूना के मन में  कितनी ही स्मृतियाँ सजीव हो उठीं। सुबह रामचंद शुक्ल का “कविता क्या है” निबंध सुना, कविता के बारे में कल रात को भी यू ट्यूब पर सुना था। सारे विचार और भाव गुनते-गुनते मन काव्यमय हो चुका था। दोपहर को एक लेख लिखा, काव्यालय में भेजा है, आगे हरि इच्छा! शाम को पापा जी से बात की, आत्मज्ञान पाने का ख़्याल वह संतों, महात्माओं के लिए छोड़ देना चाहते हैं, पर नूना को लगता है, ध्यान और समाधि का अभ्यास करना उनका काम है, शेष परमात्मा की कृपा! 


सुबह वे टहलने गये तो भीतर एक स्थिर तत्व की धारणा की। शरीर चल रहा था, पर भीतर कोई स्थिर था। बाद में प्राणायाम के बाद बाहर शोर था, भीतर मौन था। शाम को ध्यान के लिए बैठी तो मंत्रजाप के साथ अर्थ भी भासित हो रहा था। शाम को पापाजी को बताया, चेतना चारों ओर है, मन को उसकी ओर ट्यून करना है, अर्थात मन का सुर उसके साथ मिलाना है। दो दिन बाद यहाँ गणेश उत्सव आरम्भ हो रहा है, सुंदर पंडाल पहले ही लग गया है। एक दिन नैनी ने एक फ़ार्म हाउस में स्थापित गणपति को देखने को भी बुलाया है।


आज का दिन गणपति के नाम था, सुबह फार्म हाउस, दोपहर को पड़ोसी के यहाँ और शाम को सोसाइटी की सार्वजनिक पूजा में वे सम्मिलित हुए।ललिता सहस्रनाम का पाठ भी हुआ, कल दोपहर विष्णु सहस्रनाम का जाप है, पीत रंग के वस्त्र पहनकर जाना है, परसों हरे। 


आज ग्यारह सितम्बर की घटना को हुए बीस वर्ष हो गये, नूना को आर्ट ऑफ़ लिविंग कोर्स किए भी। गुरुजी ने आज मुरुगन मंजुल वाटिका का उद्घाटन किया।


आज गणेश पूजा का विसर्जन हो गया। उन्होंने शयन कक्ष के बाहर बने बड़े से छज्जे पर बैठकर एक ट्रैक्टर पर गणपति की सजी-धजी विशाल प्रतिमा को ले जाते हुए देखा।कुछ लोग नाच रहे थे, कुछ एक-दूसरे पर रंग लगा रहे थे, ढोल आदि बज रहे थे। 


आज छोटी ननद से एक परिचिता के बारे में बात हुई। इसी महीने कोर्ट में केस की अंतिम तारीख़ है, शायद तलाक़ का फ़ैसला हो जाये। परसों नूना से उसके पति ने बात की थी, कह रहा था, रिश्ते निभाना इतना सरल भी नहीं होता।पत्नी के ख़िलाफ़ तलाक़ का केस उसी ने दाखिल किया है और अब चाह रहा है, समझौता हो जाये, पर इसके लिए पहल भी ख़ुद नहीं करना चाहता। कोई और उसकी बात पत्नी को जाकर बताये और वह सब कुछ भुलाकर उसे माफ़ कर दे।कितना विचित्र है मानव का मन ! अपनी गलती देखना ही नहीं चाहता। अक्सर पति-पत्नी एक दूसरे से सदा परेशान रहते हैं। अब हर समय कोई किसी की जी-हजूरी तो नहीं कर सकता, हर आत्मा स्वतंत्र है। जीवन सभी को एक सा मिला है, ताली दोनों हाथ से बजती है। 

 

आज हिन्दी दिवस पर हिंदी भाषा पर पापाजी से चर्चा हुई, ध्यान के बारे में भी।सजगता ही ध्यान है, सजगता ही ज्ञान है, वही शांति है और वही प्रेम है। जब वह सजग होती है, भीतर एक शक्ति का अनुभव होता है। कल रात साढ़े ग्यारह बजे घर की सारी बत्तियाँ अपने आप जल गयीं, नींद खुल गई, फिर देर तक नहीं आयी। ऑटोमेशन में ही शायद कुछ गड़बड़ी हुई।


आज दोपहर वे कब्बन पार्क घूमने गये। यह पार्क १८७० में बनाया गया था, ३०० एकड़ में फैला है। वहाँ के राज्य पुस्तकालय के हिन्दी विभाग में कई किताबें देखीं। तेलगू कवि सी एन रेड्डी की किताब ‘कविता मेरी सांस’ की एक सुंदर कविता पढ़ी। डिजिटल फॉर्म में उसे यह पूरी किताब मिल गई है। 

आज मोदी जी का जन्मदिन है।नूना ने उनके लिए एक कविता लिखी। उन्होंने शंघाई में अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के सत्ता ग्रहण करने को मान्यता नहीं दी, बल्कि इसे ग़लत बताया है।उनके अनुसार यह समावेशी सरकार नहीं है। इंसानियत के नाते भारत फिर भी उनकी सहायता करना चाहता है। भांजी और भतीजी का जन्मदिन भी एक दिन पड़ता है, उनके लिए भी उसने कविताएँ लिखीं। आज सुबह नींद खुली तो एक स्वप्न में ड्राइवर एक गाड़ी को गोल-गोल घुमा रहा था, जैसे मन कल्पना के घोड़े दौड़ाता है, पर कहीं नहीं पहुँचता। वास्तव में आत्मा को कहीं पहुँचना ही नहीं है, थमकर ख़ुद को देखना भर है!  


कल सुबह वे एक पुराने मित्र के यहाँ गये थे, एक दिन व एक रात बिताकर आज लौट आये। कितनी ही पुरानी बातें की, उनका नया घर देखा और सोसाइटी में टहलते रहे। बातों-बातों में सखी ने कहा, वे लोग एक कमरे में सामान रखकर, घर किराए पर देकर असम चले जाएँगे, ऐसा विचार कर रहे हैं। 


सलारपुरिया सिलेस्टा का 

फ़्लैट नंबर चार सौ चार 

रहता है जहाँ दशकों पुराना 

एक मित्र परिवार 

घर जैसा मिला वहाँ आदर सत्कार 

अपनापन और सहज प्रेम प्यार 

झील किनारे बैठ कर 

गुजारी शाम 

लौटते पक्षियों को निहार 


आज नूना ने अमेजन से मँगवायी माइकल फ़िशमैन की पुस्तक ‘स्टमबलिंग इनटू इनफिनिटी’ पढ़नी आरम्भ की है। लेखक वर्षों से आर्ट ऑफ़ लिविंग से जुड़े रहे हैं ।उनकी आध्यात्मिक यात्रा व जीवन के संघर्ष के बारे में यह पुस्तक है। अवश्य ही उसे अच्छी लगेगी। पापा जी ने आज “एक ओंकार सतनाम…” का अर्थ बताया। शाम को आश्रम में स्वामी अलेक्ज़ेंडर मिले, वह “श्री श्री योग भाग-२”  सिखा रहे हैं। वर्षों पूर्व असम में वह उन्हें मिले थे और उनके साथ बेसिक कोर्स भी किया था।जून आज असोसिएशन की पहली मीटिंग में भी गये थे।


गुरुजी ने कुछ दिन पूर्व ‘मृत्यु’ पर कुछ प्रश्नों के उत्तर दिये थे, नूना को उन्हीं को आधार बनाकर एक लेख लिखना है। उसने सोचा, कल जून गाड़ी की सर्विसिंग के लिए जाएँगे, उस समय लिखेगी।रात को एक विचित्र स्वप्न देखा, कोई सामान ठीक कर रही है कि अचानक हाथ के ऊपर से छोटे-छोटे हाथी गुजरने लगते हैं, हल्के बैंगनी रंग के हाथी हैं, इतने स्पष्ट और सुंदर दिख रहे थे, उनके पैर व सूंड, सभी कुछ सुडौल थे, पर शीघ्र ही आँख खुल गई और जाना कि यह स्वप्न ही था। माइकल फ़िशमैन की किताब में कितने ही चमत्कारों का ज़िक्र है, गुरुजी के साथ जो भी जुड़ा है, उसके जीवन में चमत्कार होते ही रहते हैं। आज असोसिएशन की सभा उनके घर पर थी। 


आज पूरा दिन बहुत ही अलग बीता। कल रात स्वप्न में गुरुजी को देखा था, सुबह तो उसका असर था ही, शाम तक मन इतना हल्का हो गया, जैसे कोई पुराना बोझ उतर गया हो। यह बोझ भीतर था, इसका भी बोध नहीं था, यह जैसे अस्तित्त्व का भाग ही बन गया था, ह्रदय पर जैसे कोई चट्टान पड़ी थी, जो पहले हटी तो थी पर थोड़ा सा भाग वहीं रह गया था, उसे संभाल कर रखा हुआ था। भय, सहानुभूति पाने की आकांक्षा, स्वयं को पीड़ित समझने की भावना, और स्वयं के प्रति हुए अन्याय को सहेज कर रखने का प्रयास, अपने रोष को उचित ठहराने के तर्क ! इतना क्रोध तो स्वाभाविक है, आख़िर अपना भी तो कोई स्वाभिमान है, अपने को श्रेष्ठ मानने की भावना, ये सारे पत्थर ही थे, जो उस चट्टान को वहाँ रखे हुए थे। अच्छा है कि घर जाने से पहले यह बोध घटा है। मन हल्का है भीतर तक। स्वयं को पूरी तरह स्वीकार करने के बाद ही कोई इस जगत को पूरा स्वीकार कर पाता है। यह जगत परमात्मा की लीला है। हर पल यहाँ कितना कुछ घट रहा है। वह अनंत चैतन्य सब जानता है, क्योंकि जानने वाला वही है। मन सीमित है, बुद्धि एक पोखर के समान है, पर सागर विशाल है। उस विशाल के प्रति पूर्ण समर्पण ही मुक्त करता है। उसे अपने लिए कुछ नहीं करना है, उसी ने जन्म दिया है, वही कुशलक्षेम की रक्षा करेगा। आज की रात कितनी भिन्न होगी और स्वप्न कितने अनोखे ! आज वह भी असोसिएशन की मीटिंग में गई थी, जून को अध्यक्ष चुना गया है।     


  


Thursday, December 14, 2023

लैवेंडर के बीज

आज ‘विजय दिवस’ मनाया जा रहा है। सन ७१ में आज ही के दिन बांग्ला देश का जन्म हुआ था। पाकिस्तानी सेना ने आत्म समर्पण कर दिया था। प्रधानमंत्री ने विजय चौक पर मशाल जलायी। उन्होंने ‘१९७१’ फ़िल्म देखी, भारत के कुछ सिपाही जो पाकिस्तान में रह जाते हैं, उनके दुखद प्रवास की कहानी। किसान आंदोलन अभी भी जारी है। आज कन्नड़ भाषा के कुछ और शब्द सीखे, बट्टा- वस्त्र, आदिगे- रसोई, चिक्का-छोटा।नये माली से कन्नड़ में बात की, एक वाक्य ही सही, इतवार से काम पर आएगा। नन्हे ने कुछ और गमले मँगवाये हैं, उनके टैरेस गार्डन के लिए।एक मून लाइट लैंप भी भेजा है, उसे चार्ज किया। रंग बदलती है उसकी सतह, बहुत सुंदर लगता है। 


आज पूरे नौ महीने बाद एक घंटे के लिए वे आश्रम गये, जो कोरोना के कारण इतने महीनों से बंद था। लोग बहुत कम थे। गुरुजी का सत्संग अभी एक महीने बाद ही आरम्भ होगा। ब्रिटेन में कोरोना का नया वेरियेंट मिला है, जो तेज़ी से फैलता है। वहाँ फिर से लॉक डाउन लग गया है। भतीजी को उसके जन्मदिन पर छोटी सी कविता भेजी, उसने छोटा सा थैंक्यू लिख कर जवाब दिया। कविता की कद्र कम को ही होती है शायद, कविता कोई क्यों लिखता है, शायद जब कोई खुश होता है तो ख़ुशी बाँटना चाहता है। नाश्ते में आज मूँगदाल के चीले बनाये। उसने सोचा है, शनिवार के दिन कोई न कोई चित्र बनाएगी। इतवार बच्चों के नाम रहता है। सोम से शुक्र हर दिन एक ब्लॉग को समर्पित रहेगा। इस तरह सभी पर बात धीरे-धीरे ही सही आगे बढ़ेगी। सुबह वे दोनों ननदों को याद कर रही थी, कि एक-एक करके उनके फ़ोन आ गये, टेलीपैथी इसी को कहते हैं शायद। सुबह नैनी आयी तो बहुत उदास थी। शायद घर में झगड़ा हुआ था। पीकर आये पति ने उसे चोट पहुँचायी थी। न जाने कितनी महिलाएँ इस तरह अत्याचार सहती हैं, जबकि वह कमाती है, छह घरों में काम करती है। बहुत खुश रहती है और मन लगाकर काम करती है।  


अभी नन्हे से बात हुई, कल इतवार है, वह दोपहर को पास्ता बनाने को कह रहा है। सोनू कुछ हफ़्तों के लिए माँ के घर गई है। आज सुबह सोलर पैनल की सफ़ाई की। नैनी आज पूर्ववत थी, उसे देखकर अच्छा लगा। बातों-बातों में जून ने कहा, वे बोर हो गये हैं। उसने सोचा, जो जगत से बोर हो जाएगा, वह यदि भीतर नहीं मुड़ा तो उसके जीवन में रस नहीं रहेगा। कोरोना ने न जाने कितने लोगों को बोर और उदास कर दिया है। 


नन्हा आया तो उनके भावी नये पड़ोसी बैठे थे। उन्होंने अपने घर के बारे में कई रोचक बातें बतायीं। उनका घर दुमंज़िला होगा, जिसमें स्वीमिंग पूल होगा और छत पर एक से अधिक बगीचे। होम थियेटर तथा एक बड़ा सा मंदिर। उनके सपनों का घर जब तक बन कर तैयार नहीं जाता, उन्हें शोर तथा अन्य असुविधाएं झेलनी पड़ेंगी, इसके लिए वह शुरू से ही क्षमा माँगने आये थे। 


सुबह सवा चार बजे नींद खुली। समय की धारा बहती जा रही है। वह नींद और सपनों में वक्त गुज़ार देते हैं अथवा तो इधर-उधर के कामों में। सुबह टहलते समय भ्रमण-ध्यान किया। शीतल पवन चेहरे को सहला रही थी, आकाश में तारे चमक रहे थे और वातावरण पूर्णतया शांत था। ऐसे में मन स्वतःही एकाग्र हो जाता है। आज उसने लैवेंडर के बीज बोए हैं। शायद एक हफ़्ते में पौध निकल आयें। नन्हे के भेजे हुए गमले आ गये हैं, इतवार को वह मिट्टी लेते हुए आएगा। जून ने कोकोपीट व खाद भी मँगवा दी है।नाश्ते के बाद वे वोटर कार्ड बनवाने पंचायत के दफ्तर गये, पर संबंधित महिला कर्मचारी नहीं मिली। शाम को पिताजी से बात हुई, वे तीन हफ़्तों बाद दिल्ली से घर लौट आये हैं। रास्ते का विवरण बताया, कैसे ढाबे पर रुके, पेट्रोल भरवाया, सब्ज़ियाँ ख़रीदीं। उन्हें मिले उपहारों के बारे में बताया। घर आकर वह बहुत खुश हैं। किसान आंदोलन ख़त्म होने का  नाम ही नहीं ले रहा है। पश्चिम बंगाल में बीजेपी अगले चुनावों की तैयारी में अभी से लग गई है।       


Wednesday, August 2, 2023

देव दिवाली की चमक

आज एक दिन और गुजर गया। जीवन कैसे पल-पल बीत रहा है। उन्हें यहाँ आये हुए एक वर्ष हो गया है। एक भविष्यवाणी के अनुसार उसके हाथ में साढ़े पंद्रह वर्षों का समय है। कितना कुछ करना है, करना था पर इधर दिन निकलता है उधर रात हो जाती है। सुबह-सुबह टहलते समय कितने सारे सुंदर विचार मन में उग रहे थे, पर अब एक भी याद नहीं है। उसी समय आकर लिख लेना ही उचित होगा। कल एक निकट संबंधी ने जून से ज़मीन ख़रीदने के लिए आर्थिक सहायता माँगी थी, पर दिन भर विचार करने के बाद शाम को उन्होंने अपनी असमर्थता जता दी। ज़मीन-मकान में पैसे लगाना अक़्लमंदी नहीं है। पहले ही दो जगह उन्होंने पैसे लगाये हुए हैं, जिसका जरा भी लाभ नहीं मिल रहा, यह वह जन स्वयं ही बता चुके थे। 


इस समय रात्रि के नौ बजे हैं। आज पहली बार उसने ज्वार के आटे का चीला बनाया, दीदी से बात हुई तो उन्होंने कहा, वह सिंघाड़े तथा कोटू के आटे का चीला भी बनाती हैं। पापा जी ने कहा, उन्होंने ‘कारवाँ’ पर दूसरी बार सारे गीत सुन लिए हैं। उनसे बात की तो अध्यात्म पर चर्चा हुई। उसने कुछ प्रश्न पूछे, जिसके उत्तर रिकॉर्ड कर लिए हैं, उन्होंने कुछ शेर भी सुनाये। उनके जन्मदिन पर यह बातचीत लिखकर एक तोहफ़े के रूप में उन्हें प्रस्तुत करेगी।सड़क पार सामने वाले घर में गृह प्रवेश की पूजा हो रही है। हरी -नीली-लाल बत्तियों से घर को और गेंदे के फूलों से द्वार को सजाया है।यह पूजा यहाँ रात भर चलती है शायद। आज तुलसी विवाह भी है। देव उठावनी एकादशी है। कितनी अद्भुत है भारत की संस्कृति; जहां  भगवान का विवाह एक पौधे से करते हैं, इसी के माध्यम से तुलसी की महत्ता बतायी गई है, उसके गुणों से परिचय कराया है। आज ‘महादेव’ में देवी ने अपने मन की पीड़ा बतायी तो शंकर भगवान एक बालक के रूप में आकर रोने लगे, वह अपनी पीड़ा किससे कहें ! अद्भुत गाथा है शिव-पार्वती की।


आज सुबह से ही यहाँ घने बादल छाये हैं, हवा भी तेज है। सुबह वे टहलकर आये तो बूँदे गिरने लगीं।चेन्नई में आये ‘निवार’ तूफ़ान का असर यहाँ पर भी हुआ है। बंगाल की खाड़ी से उठे इस तूफ़ान के कारण पुदुचेरी व आंध्र प्रदेश में भी भीषण वर्षा हो रही है। पापाजी से जो वार्तालाप उन्होंने किया था, उसे आज टाइप किया, एक साक्षात्कार के फ़ॉर्मेट में। लिखते समय रिकॉर्ड की हुई अपनी ही आवाज़ सुनी, जो स्वयं को ही पसंद नहीं आयी। अन्यों के कानों को कितना कष्ट देती होगी। उसे अपनी वाणी पर बहुत ध्यान देना चाहिए। इसी प्रकार अपनी लिखावट पर भी। दोनों ही मन की स्थिति को दर्शाते हैं। जून को जो वह लंबे लंबे भाषण देती है, वह उनके कानों को कितने अप्रिय लगते होंगे। उन्हें अपने बारे में कितनी ख़ुशफ़हमियाँ अथवा तो ग़लतफ़हमियाँ होती हैं, यही एक शब्द है जिसका विलोम भी वही अर्थ देता है। हर ख़ुशफ़हमी एक ग़लतफ़हमी ही तो होती है।  नन्हा व सोनू असम गये हैं, हवाई अड्डे पर कोविड के लिए उनकी जाँच हुई,  फ़्लाइट में भी काफ़ी सावधानी बरती गई। दोपहर को आर्ट ऑफ़ लिविंग का एक छोटा अनुवाद कार्य किया। गुरु जी पत्रकारों को संबोधित करने वाले हैं। वे बतायेंगे कि कोविड से बचने के लिए आयुर्वैदिक दवाओं तथा अन्य उपायों के द्वारा रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम होने से कैसे रोका जा सकता है। पिछले कुछ दिनों की तरह आज भी उसने कुछ कन्नड़ शब्द सीखे, प्रतिदिन कुछ शब्द सीखते-सीखते उन्हें भाषा समझ में आने लगेगी।  


कल देव दिवाली है। गुरुनानक देव का जन्मदिन भी।  उसे कुछ वर्ष पूर्व बनारस के घाटों पर देखी देव दिवाली स्मरण हो आयी। जब नौका में बैठकर उन्होंने सभी घाटों पर जलाये गये लाखों दीपकों का दर्शन किया था। शाम से ही सांस्कृतिक कार्यक्रम भी चल रहे थे और भव्य गंगा आरती भी देखी थी। सुबह उठते ही एक सुखद समाचार मिला, छोटा भाई नाना बन गया है। पापा जी भी भाई-भाभी के साथ पोती के घर गये हैं।जून का स्वास्थ्य ठीक नहीं है, शारीरिक से अधिक मानसिक, वे अपने काम के दिनों की व्यस्तता में कितना खुश रहते थे। सेवा निवृत्ति के बाद संभवतः यह उदासी स्वाभाविक है उस व्यक्ति के लिए जो दिन-रात अपने कार्य के प्रति समर्पित रहा हो, जिसने और कुछ करने के बारे में सोचा ही न हो। उसने उन्हें कुछ सुझाव दिये पर जब तक कोई बात ख़ुद के दिल से न निकली हो उस पर अमल करना आसान नहीं है।    


रात्रि के नौ बजे हैं। आज का दिन काफ़ी जीवंत रहा। सुबह के भ्रमण व साइकिल चलाने के बाद वे जंगल की तरफ़ कार द्वारा लंबी ड्राइव पर गये। पहली बार गुलदाउदी के फूलों का विशाल बगीचा देखा। धूप में फूलों का रंग बहुत शोख़ लग रहा था। आकाश में कार्तिक पूर्णिका का चंद्रमा अपनी पूरी दमक के साथ सुशोभित है। टीवी पर देव दीपावली का आँखों देखा हाल देखा। मोदी जी का भाषण भी सुना। घाटों पर ग्यारह लाख से अधिक दीपक जलाये गये हैं। वाराणसी में काफ़ी बदलाव आ रहा है। गंगा का पानी स्वच्छ हो गया है।सारनाथ में भी लेजर शो दिखाया जाए


Wednesday, July 19, 2023

ध्वनि की ऊर्जा

आज शाम से ही वर्षा हो रही है। कुछ देर पहले नन्हे से बात हुई, उसने बताया दिवाली का उत्सव वे अभी तक मना रहे हैं। आज सुबह एक मित्र परिवार ने उन्हें नाश्ते पर बुलाया था, दोपहर को उन्होंने पड़ोसियों को लंच पर आमंत्रित किया, शाम को पुन: उन दोनों को एक सहकर्मी के यहाँ दिवाली की चाय पर जाना था। रात को नौ बजे से उनका नृत्य अभ्यास है, जो एक मित्र के विवाह के अवसर पर उन्हें करना है। आज दीदी ने वर्ष भर पूर्व  उनके साथ की गई हिमाचल की यात्रा का विवरण भेजा, पढ़कर वे सारे दृश्य आँखों के सम्मुख आ गये। उसने सोचा, वह भी डायरी में लिखे यात्रा विवरण को टाइप करके उन्हें भेजेगी । बड़ी ननद के विवाह की वर्षगाँठ पर उसने एक कविता लिखी ।कल एक सखी के माँ-पापा के लिए श्रद्धांजलि स्वरूप एक छोटा सा आलेख लिखा था, उसने अपने परिवार जनों की प्रतिक्रियाएँ भेजी हैं, अब तक बीस आ चुकी हैं। उनका परिवार बहुत बड़ा है। उसे महसूस हुआ, शब्दों में कितनी ताक़त होती है। 


सुबह वे टहलने निकले तो भोर का तारा गाढ़े नीले आकाश पर दमक रहा था। हवा शीतल थी। रात की रानी की सुगंध दूर से ही आ रही थी। मुख्य सड़क के मध्य में एक लंबी क़तार में इनके पौधे लगे हैं। योगासन के अभ्यास के दौरान छत से दिखा सूर्योदय का दृश्य अनुपम था। उसी दौरान पुन: गायत्री परिवार के लाल बिहारी जी का मनोमय कोष की साधना पर दिया व्याख्यान सुना। उनकी वाणी में कितनी प्रखरता है, बहुत गहरी साधनाएँ उन्होंने की हैं। बाद में एक परिचित, जो इसी सोसाइटी के  निवासी हैं, मिलने आये थे, तमिलनाडु के हैं। हर सुबह दौड़ लगाते हुए मिलते हैं। वे सात बार विपासना का कोर्स कर चुके हैं। उनसे बात करते हुए उसे अपने विपासना अनुभव याद आ रहे थे, उसके लिए एक बार ही यह अनुभव करना पर्याप्त है।  


बाहर से कुछ आवाज़ें आ रही हैं। उनकी बैठक की दीवारों में पानी के रिसाव के निशान दिख रहे थे, इस समस्या से छुटकारे के लिए बाहर दीवारों के पास खुदाई का काम चल रहा है, एक बार फिर से जलनिरोधी प्लासतर करना होगा। आज दिन में दो बार ‘सावधानी हटी और दुर्घटना घटी’ । एक प्याला टूटा और खाने की मेज़ पर पानी से भरा गिलास उलट गया। दोनों बार दाहिने हाथ से, अर्थात हाथ पर मन का नियंत्रण नहीं था और मन पर ख़ुद का। नन्हा और सोनू विवाह में पहुँच गये हैं, उसके मित्र ने लिंक भेजा है, चाहे तो वे भी यहाँ से सम्मिलित हो सकते हैं।’देवों के देव’ में कार्तिकेय और गणेश के मध्य प्रतिस्पर्धा होने वाली है। गणेश ही विजयी होंगे, कार्तिकेय के मन में एक गहरा घाव है जो इंद्र ने उसे दिया है अथवा उसके जन्म की घटनाओं के कारण उसे मिला है। वह कई बार कैलाश छोड़कर जा चुके हैं, कोई न कोई उन्हें मनाकर वापस लाता है। 


सुबह वे जल्दी उठे। उठने से पूर्व उसे लगा जैसे किसी ने कहा हो, ध्वनि एक ऊर्जा है। प्रात: भ्रमण के दौरान इसी बात पर मनन करते हुए मंत्र जाप किया। हर शब्द  की तरंगों का शरीर पर असर होता है।ओम के उच्चारण का अति प्रभाव होता है, इसीलिए इस पर इतने शोध हो रहे हैं। हज़ारों वर्षों से ऋषि यह कहते आये हैं। शरीर तरंगों से बना है, तो ध्वनि की तरंगें उसे प्रभावित करें इसमें आश्चर्य भी क्या है ? भीतर निरंतर एक गुंजन चल रही है, उसे सुनें या ना सुनें, वह हो ही रही है। वह ध्वनि कहाँ से आ रही है, क्या वह प्राण ऊर्जा की गति के कारण है, जैसे बिजली की तारों से एक ध्वनि आती है। इस देह में न जाने कितने रहस्य छिपे हैं। गुरुजी के भगवद्गीता पर दिये प्रवचन का एक अंश सुना। वे गूढ़ विषयों को भी सरल भाषा में समझा देते हैं। शाम को एक निर्देशित ध्यान किया था, मन कितना हल्का हो गया था उसके बाद। जून को भी अच्छा लगा। अब वह पुन: कर रहे हैं। उन्हें अपने आप ध्यान के लिए बैठे देखकर अच्छा लगा। उन्हें ध्यान के महत्व का ज्ञान हो रहा है।  


आज साप्ताहिक सफ़ाई का दिन था। सुबह सर्दियों की ठंड के साथ शुरू हुई। तापमान चौदह डिग्री था, वे जैकेट आदि से मुस्तैद होकर निकले। दोपहर को धूप निकल आयी थी। फूलों के चित्र उतारे, जो धूप में और भी शोख़ लग रहे थे। शाम को सूर्यास्त के चित्र  फ़ेसबुक पर प्रकाशित किए। आर्ट ऑफ़ लिविंग के अनुवाद कार्य के बाद  दोपहर को ब्लॉग पर लेखन  व पठन कार्य, लिखा कम, पढ़ा अधिक। हिमाचल की यात्रा का वृतांत पिताजी व दीदी दोनों को अच्छा लगा। नन्हे के मित्र ने विवाह के बाद एक उपहार भेजा है, बहुत बड़ा सा पैकेट है। उन्होंने अनुमान लगाया, उसमें क्या हो सकता है। 

   


Monday, December 19, 2022

प्रकृति के सुकुमार कवि

मौसम आज भी बादलों भरा है. सुबह उठने पर पता चला बिजली ग़ायब है, तब से डीज़ल जेनरेटर से ही बिजली आ रही है। जून ने फ़ोन किया तो पता चला, कल शाम पाँच बजे तक विद्युत विभाग से बिजली बहाल होगी। मेट्रो का काम चल रहा है, शायद इस कारण कुछ समस्या हुई है। सुबह उठने से पूर्व एक स्वपन में कई परिजनों के साथ स्वादिष्ट व्यंजन का स्वाद लिया, आत्मा में सभी इंद्रियों की शक्ति समाहित है। स्वपन में तभी बिना आँखों के सुंदर दृश्यों का अवकोलन कर लेते हैं, बिना कानों के संगीत सुन  लेते हैं । काव्यालय में भाषा उत्सव होने वाला है, उसने सोचा है प्रकृति के सुकुमार कवि सुमित्रानंदन पंत के जीवन व काव्य के बारे में लिखेगी। नन्हे ने फ़ोटो भेजा है, अपनी बिल्लियों को हुड पहनाए हैं। उनके खेलने, पानी पीने, ऊपर चढ़ने, सोने आदि के लिए ढेर सारे उपकरण व खिलौने वह मँगवाता रहता है। बड़े भाग्यवान हैं दोनों। नन्हे ने उन दोनों के लिए एक नया गेम भी भेजा है, कल सीखेगी। बगीचे के लिए सोलर लाइट भी भिजवायी है। 


आज पापा जी से बात की, वह ठीक हैं, उत्साह से भरे हुए। नब्बे से एक वर्ष कम की उम्र  में भी वह उसकी कविताओं को फ़ेसबुक पर पढ़ते हैं। आज दोपहर बाद पंत का एक साक्षात्कार सुना। वह १९०० में जन्मे और १९७७ में उनकी मृत्यु हुई। २५ किताबें उन्होंने लिखीं। उनका व्यक्तित्तव अनोखा था, कोमलता का भाव भरे,  उनके केश लम्बे व घुंघराले थे।  आज दोपहर बाद वर्षा थम गयी, शाम को सूर्यास्त के चित्र उतारे। हर शाम अपने आप में बिलकुल नयी लगती है। विष्णु पुराण में दशरथ के मित्र जटायु की कथा सुनी, कितनी अद्भुत कथाएँ हैं ये, जिनमें मानव, देवता और प्राणी सबमें एक मैत्री का भाव है। अनेक वृक्षों व पौधों को भी पुराणों में कितना सम्मान मिला है। भारत की इसी संस्कृति से आकर्षित होकर तो युगों से अनेक लोग यहाँ आते रहे हैं। जून दोपहर को ‘लखनऊ सेंट्रल’ देख रहे थे।  जेल में कुछ संगीत प्रेमियों द्वारा एक बैंड बनाने पर आधारित है यह फ़िल्म। 


आज राजीव गांधी का जन्मदिन है, वह ज़िंदा होते तो ७६ वर्षों के होते। गणेश पूजा के उपलक्ष में उनकी सोसाईटी नापा में ‘पेंटालून’ का एक स्टाल लगा है, एक दिन बाद पूजा का पंडाल भी लग जाएगा। मोदक प्रतियोगिता भी होगी। असम में दुलियाजान में भी कोरोना के केस बढ़ गए हैं।पूरे भारत में ७०,००० केस मिले आज, जो एक दिन में दुनिया में सबसे ज़्यादा हैं; पर रिकवरी रेट यहाँ काफ़ी अच्छा है।


Friday, November 11, 2022

कुंगफू पांडा

 
पिछले कई दिनों से आकाश में तारे नहीं दिखे, सदा बादल ही बने रहते हैं, पर बरसते नहीं  पर आज शाम को वे टहलने निकले थे कि रास्ते में तेज हवा के साथ वर्षा होने लगी. छाता भी उड़ने लगा, एक बार तो वह उल्टा ही हो गया. वे जल्दी ही घर लौट आये. कुछ देर ‘कुंगफू पांडा’ फिल्म देखी, मार्शल आर्ट पर बनी अच्छी एनिमेशन  फिल्म है. एओएल के एक साधक ने गुरु जी की गाय के बछड़ों को सहलाते हुए दो तस्वीरें भेजी हैं. वह कई दिनों से आश्रम में रह रहा है, वहाँ कई कोरोना संक्रमित लोग भी हैं. छोटा भाई नैनीताल में घूम रहा है, पहाड़ों पर गाड़ी चलाना भी उसने सीख लिया है. कोरोना काल में भी उसका टूर जारी है. अख़बार में पढ़ा, अमिताभ बच्चन कोरोना से स्वस्थ होकर आ गए हैं, पर घर पर भी कुछ दिन अकेले रहना होगा, जो उन्हें खल रहा है. महामारी का कहर लंबे समय तक रहने वाला है. भारत में बीस लाख लोग संक्रमित हैं. कई देशों में मृत्यु दर दिल दहला देने वाली है. किन्तु अब इसका भय काम हो गया है, वे सुबह-शाम  भ्रमण के लिए जाते समय मास्क पहन कर नहीं जाते. लोग भी सामान्य दिनों की तरह ही सड़क पर दिखाई देते हैं. जबकि एक दिन में पचास हजार से अधिक संक्रमित लोग मिलते हैं. अब तक सैंतालीस हजार लोग अपनी जान भी गँवा चुके हैं. आज ब्लॉग पर एक पोस्ट लिखी, मुख्य पृष्ठ का लुक बदल गया है, पहले ज्यादा अच्छा था, खैर, हर बदलाव शुरू में अखरता है, फिर उसी का अभ्यास हो जाता है. 

जून का जन्मदिन आने वाला है, उन्हें दक्षिण भारतीय भोजन पसंद है इसलिए नन्हा और सोनू उनके लिए ढेर सारे गिफ्ट्स लाये हैं. बड़ा दोसा तवा, उत्तपम पैन, पुत्तू बनाने का बर्तन और पनियप्पम बनाने की छोटी सी कड़ाही, मिठाई, कुछ एग्जॉटिक फल  और कॉफी की एक बोतल भी. पिछले हफ्ते वे एक टेलीस्कोप भी लाये थे. यह बात अलग है तब से चाँद के दर्शन ही नहीं हुए. जून ने इस अवसर पर शांति धाम में कुछ सामान भिजवाया है और स्वतंत्रता दिवस पर सोसाइटी के कर्मचारियों के लिए मिठाई मंगवाई है. 


आज जन्माष्टमी के अवसर पर गुरूजी का सुंदर उद्बोधन सुना. शाम को उन्होंने ‘सत्यं शिवं सुंदरं’ ध्यान कराया. बंगलूरू में एक एमएलए के घर पर भीड़ ने हमला कर दिया, हिंसा को फैलने में देर नहीं लगती. फेसबुक की एक पोस्ट के खिलाफ यह प्रतिक्रिया हुई थी. एक भारतीय होने के नाते उन्हें समाज में हिंसा के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए. जाति के नाम पर हिन्दू समाज में काफी भेदभाव रहा है, ऐसे समाज में जहाँ एकता न हो बाहरी आक्रमण का सामना करना कठिन हो जाता है. वैसे भी हिन्दू स्वभाव से शांति प्रिय है, वह झगड़ा न हो इस भय के कारण अत्याचार सह लेता है. 


आज स्वतंत्रता दिवस है. एक नयी फिल्म देखी, ‘गुंजन सक्सेना- द कारगिल गर्ल’, जाह्नवी कपूर ने अच्छा अभिनय किया है. आज से नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन आरम्भ हो रहा है. सभी भारतियों को एक हेल्थ आईडी दी जाएगी, जिसके कारण उनकी स्वास्थ्य संबन्धी सभी समस्याओं को निपटारा समय से हो पायेगा. सुबह  झंडा आरोहण के लिए गए. लन्च में पनिअप्पम बनाए. नन्हे ने चेट्टीनाड आलू बनाये, जो वे अपने मित्र के लिए भी ले गए. सोनू ने केक बनाया. आज दोपहर को माली ने सूरजमुखी के बीज गमले और जमीन में बोये, एक हफ्ते में अंकुर निकल आएंगे. 


Tuesday, July 19, 2022

जापानी फिल्म -‘माई नेबर टोटोरो’,

 
आज शाम सोसइटी के अड्डा एप पर नोटिस आया कि पास वाले गाँव में  में भी कोरोना का एक मरीज़ मिला, जिसकी मृत्यु के बाद पता चला उसे यह रोग था। पंचायत ने वह इलाक़ा बंद कर दिया है, पिछला गेट भी बंद हो गया है, कल से नैनी का आना भी बंद हो जाएगा, सुबह का टहलना भी सीमित दायरे में होगा। बड़े ननदोई कल कोविड टेस्ट कराएँगे, उन्हें कई दिन से बुख़ार था। आइसोलेशन में ठीक हो जाने का इंतज़ार कर रहे थे। नन्हे से बात हुई, उसने कहा किसी भी वैक्सीन को आने में कई वर्षों का समय लगता है। कोविड की वैक्सीन जल्दी भी आयी तो एक-डेढ़ वर्ष का समय तो लगेगा। आज सुबह टहलने गये तो चाँद बादलों के पीछे से झांक रहा था। रात को हुई बारिश से सड़कें धुली-धुली थीं, पेड़-पौधे और वृक्ष भीगे हुए, हवा ठंडी थी. दूर पहाड़ियों पर रुकी हुई बदलियां एक मोहक दृश्य उत्पन्न कर रही थीं. सूर्योदय कई दिनों से नहीं दिखा। छोटी बहन के सुझाव पर दोपहर को एक अच्छी सी जापानी फ़िल्म देखी, ‘माई नेबर टोटोरो’, बहुत सुंदर है।जापानी लोग आत्माओं के अस्तित्त्व में बहुत यक़ीन रखते हैं। जादू-टोना, भूत-प्रेत और नदी, जंगल की आत्मा में भी। शाम को वर्षा हो रही थी सो टहलने नहीं  जा पाए।नन्हे  के लिए जन्मदिन की कविता लिखी। अभी कुछ देर पूर्व रात्रि भ्रमण से घर लौटे ही थे कि बूँदें बरसने लगीं। शाम को अनुपम खेर के साथ गुरूजी की बातचीत सुनी। बादलों की तस्वीरें उतारीं। 

कल नन्हे का जन्मदिन था, शाम को छह बजे के बाद वे लोग आ गए। दोपहर को बना मलाई कोफ्ता व मिठाई लाए थे, शाही टुकड़ा व हलवा भी जो उनकी मित्र ने भेजा था। आज यहीं से काम किया। अगले हफ़्ते फिर से लॉक डाउन लगने वाला है। यहाँ नापा में भी एक मरीज़ मिला है। सुबह टहलने गये तो आसमान में तारे थे तथा अष्टमी का चाँद चमक रहा था। ‘विष्णु पुराण’ में देखा, राजा दशरथ, कैकय के राजा की सहायता करने जाते हैं, जब रावण उन पर आक्रमण कर देता है। कैकेयी इस युद्ध में राजा की सारथी बनती है। कहते हैं रावण सीता के स्वयंवर में भी आया था। राजस्थान में सचिन पायलट ने विद्रोह कर दिया है, उन्हें मुख्यमंत्री बनाना चाहिए था पर एक वरिष्ठ नेता को बना दिया गया था। 


आज बहुत दिनों बाद दिन भर में एक बार भी वर्षा नहीं हुई। दोपहर को गुरूजी ने ‘ऊर्जा स्तम्भ’ का ध्यान कराया, अंत में अग्नि जलती हुई दिखाई दी। बहुत दिनों बाद ब्रह्म सूत्र पर एक प्रवचन सुना, कितना स्पष्ट और सरल तरीक़ा है वक्ता का वेदांत समझाने का। ‘श्री कृष्णा’ में एक अद्भुत कथा सुनी, बलराम का विवाह रेवती से होना है, जिसका जन्म सतयुग में हुआ था, उसके पिता ब्रह्मलोक में गए तो ब्रह्मा जी ने कहा, पृथ्वी पर अब द्वापर युग का अंत है, बलराम से अपनी पुत्री का विवाह कर दीजिए। जब वे दोनों धरती पर आते हैं तो उनके शरीर अति विशाल हैं, सतयुग में आदमी बड़े क़द के होते थे। बलराम उन्हें अपने हल के सिरे से दबाते हैं और वह छोटी हो जाती हैं। संग्रहालय में  राणा प्रताप आदि के वस्त्र भी देखते हैं तो कितने विशाल नज़र आते हैं, लोगों के क़द अब घट गये हैं। 


आज लॉक डाउन का पहला दिन है। नन्हे ने बताया, मेड व कुक दोनों नहीं आए, योग कक्षा भी ऑन लाइन होगी । शाम को एक मलयालम फ़िल्म देखनी शुरू की, ‘सुजातयम सूफ़ियम’ ऐसा ही कुछ नाम है। केरल के सुंदर दृश्य हैं उसमें। सूफ़ी कल्चर का भी पता चला। फिल्म की भाषा नहीं समझ पाए पर अभिनय इतना सशक्त था कि सब समझ में आ गया. नायिका मूक है पर उसके पैरों में नृत्य समाया है, उसके हाथों में भी मुद्राएं सहज ही बनती हैं. 


Wednesday, May 4, 2022

रैटटौइल




आज ईद है, कल ब्लॉग में ईद पर एक कविता प्रकाशित की थी। जून आज एओएल सेंटर गये, सेंटर सामान्य जनता के लिए अक्तूबर से पहले नहीं खुलेगा। उन्होंने उसके जन्मदिन पर सफ़ाई कर्मचारियों को बाँटने के लिए फ़ूड पैकेट्स का ऑर्डर दे दिया है। कल शाम के आँधी-तूफ़ान के बाद आज भी यहाँ वर्षा हो रही है। असम की तरह यहाँ भी देखते-देखते बादल छा जाते हैं, और बूंदा बांदी शुरू हो जाती है। तापमान तीस डिग्री से कम ही रहता है, हवा बहती रहती है. दिल्ली व उत्तर भारत में गर्मी बहुत अधिक है। चुरूँ में तापमान पचास डिग्री पहुँच गया, कोरोना वायरस को इतनी गर्मी में समाप्त हो जाना चाहिए, पर वह अपने पैर पसारता ही जा रहा है। श्रमिकों की समस्या भी विकराल रूप ले रही है, वे सभी अपने गाँव-घर जाना चाहते हैं। आज अख़बार में पढ़ा कोरोना की वैक्सीन आने से भी ज्यादा लाभ होने वाला नहीं है, इसका खतरा किसी न किसी रूप में बना ही रहेगा. वैसे अब सुबह शाम पार्कों में लोग मास्क लगाकर टहलते हुए मिलने लगे हैं. सुबह आम के बगीचे से ढेर सारे गिरे हुए आम मिले। जून ने आम की मीठी चटनी बनायी है। अगले हफ़्ते वे गोंद के लड्डू भी बनाने वाले हैं। अगले महीने की पहली तारीख़ से गुरूजी का ‘नारद भक्ति सूत्र’ पर व्याख्यान आरंभ हो रहा है। जीवन की नींव कितने वर्षों पहले रख दी जाती है और बाद में उस पर इमारत बनती है। वर्षों पूर्व उसने डायरी में लिखा था, मन की गहराई में अथाह, असीम प्रेम है ! भक्ति सूत्रों में गुरूजी उसी का वर्णन करने वाले हैं। आज का दिन बहुत ख़ास रहा, सुबह वे टहलने गए तो मोबाइल हाथ में था, सूर्योदय से पूर्व आकाश गुलाबी हो गया था, आकाश पर बादलों में अनोखे रंग बिखर रहे थे, सुंदर तस्वीरें उतारीं। यहाँ स्थिर छोटे से मंदिर गये, प्रसाद के लिए लड्डू थे, मंदिर से बाहर निकलते ही एक वृद्ध महिला दिखीं, जो प्रसाद पाकर अति प्रसन्न हुईं। परमात्मा ही मानो उन्हें उस क्षण उन्हें वहाँ ले आया था। नौ बजे तक नन्हा व सोनू भी आ गये। ज़ूम पर सभी परिवार जनों से बात हुई, दीदी व अन्य सभी ने जन्मदिन पर शुभकामनाएँ दीं। दोपहर को ‘रैटटौइल’ फ़िल्म देखी, जिसमें एक चूहा अपने शेफ़ बनने के सपने को पूरा करता है, बहुत ही अनोखी और मज़ेदार फ़िल्म है यह। शाम को सोनू ने केक को सजाकर प्रस्तुत किया। आज एओएल के दिनेश गोखले द्वारा बनाया गया ‘नारद भक्ति सूत्र’ का परिचयात्मक वीडियो देखा। अगले पंद्रह दिन अवश्य ही काफ़ी भरे-पूरे होंगे, परमात्मा की भक्ति से भरपूर ! आज दोपहर वाली नैनी काम पर नहीं आयी, हर हफ़्ते वह किसी न किसी बहाने से छुट्टी ले लेती है। सुबह वाली ऐसा नहीं करती, आज उसके बेटे का फ़ोन आ गया, दोनों बहुत खुश थे। रात्रि के साढ़े आठ बजे हैं, अभी-अभी फ़ेसबुक पर देखा, दीदी अपने जन्मदिन का केक काट रही हैं, जिसके मध्य से एक रोशनी निकल रही है। उन्होंने गुलाबी साड़ी पहनी है और चेहरे पर सदा की तरह ख़ुशी झलक रही है। सुबह ज़ूम पर सबके साथ उनसे बात हुई थी। दोपहर को भक्ति सूत्रों पर गुरूजी की सुंदर व्याख्या सुनी. विष्णु पुराण में विष्णु को महादेवी को समझाते हुए सुनना बहुत अच्छा लगता है। वह किसी भी बात से प्रभावित नहीं होते। हिरण्यकश्यपु उन्हें अपना शत्रु मानता है पर वह जानते हैं कि वह उनका द्वारपाल है. श्रीकृष्णा में अक्रूर जी को कृष्ण के भगवान होने का प्रमाण मिलने वाला प्रसंग दर्शनीय होगा. अमेरिका में एक अश्वेत के प्रति पुलिस की बर्बरता के खिलाफ हिंसा बढ़ती जा रही है. श्वेत भी इसका विरोध कर रहे हैं, पर इसके लिए वे गाड़ियों में आग क्यों लगते हैं, यह समझ से बाहर है. केरल में एक हथिनी की दर्दनाक मृत्यु की खबर सुनी, लोग कितने हृदयहीन हो सकते हैं. कल एक और तूफान निसर्ग महाराष्ट्र में आया पर ज्यादा नुकसान नहीं हुआ इसके कारण. यहाँ का मौसम अवश्य बादलों भरा हो गया है.

Wednesday, March 23, 2022

प्लूमेरिया के फूल



आज रामायण का अंतिम अंक प्रसारित होगा, कल से उत्तर रामायण शुरू होगी। आज सुबह मोबाइल पर एक सखी के भेजे सुबह के संदेश की घंटी सुनकर नींद खुली, जो परमात्मा की याद दिला गयी। दोपहर बाद नन्हे से बात हुई, उनकी कम्पनी ने अगले छह महीनों के लिए कर्मचारियों का वेतन कम करने का निश्चय किया है। सीनियर्स का वेतन पचास प्रतिशत, उसके नीचे क्रम से तीस, बीस प्रतिशत तक कम करते जाएँगे। जिनका वेतन पहले ही  कम है उनका  नहीं कटेगा। कोरोना का असर अगले छह महीनों तक तो रहने ही वाला है, इसके भी आगे जाएगा, शायद आने वाले कई वर्षों तक। वैसे भारत में लॉक डाउन का अच्छा प्रभाव देखने को मिल रहा है। मोदी जी के प्रयास की प्रशंसा हो रही है। उनके लिए कुछ पंक्तियाँ लिखीं। कोरोना के मामले पर अमेरिका और चीन का आमना-सामना हो रहा है। अमेरिका में हालात बिगड़ते जा रहे हैं। कुछ लोग कह रहे हैं जैविक हथियार की तरह इसका इस्तेमाल किया है चीन ने उसके ख़िलाफ़। एक न एक दिन चीन को इसका जवाब तो देना ही पड़ेगा। 


रात्रि  के नौ बजने वाले हैं। भ्रमण के लिए निकले तो रात की रानी के फूलों की गंध लिए ठंडी हवा बह रही थी। आजकल ढेर सारे फूल खिल रहे हैं  वसंत का मौसम है न, गुड़हल के पाँच रंग के फूल, लिली के दो ग्लोब के आकार के फूल और पारिजात तो रोज़ सुबह पूजा के लिए  मिल जाते हैं। शाम को आकाश में नारंगी सूर्यास्त देखा, प्लूमेरिया के फूलों से वृक्ष भरे हुए थे। सुबह पीछे वाले गेट से बाहर निकल कर खेतों की तरफ़ गये, तोरई के खेत देखे। वहाँ एक नई कालोनी भी बन रही है, धीरे-धीरे खेतों की ज़मीनें मकान बनाने के लिए बिकती जा रही हैं। वापस लौटते समय प्याज़ का एक खेत देखा। अचानक एक चील पक्षी ने सिर पर तेज़ी से प्रहार किया, पर न तो चोंच से न ही पंजे से, केवल पंखों से दबाव डाला और उड़ गया, फिर जाकर सामने  पेड़ पर बैठ गया। इतना सब होने में मात्र कुछ पल ही लगे होंगे। दूर से उसकी तस्वीर भी ली। संभवतः खेत के निकट ही उसका घोंसला रहा होगा, वह अपने बच्चों के लिए भयभीत हुआ होगा। सुबह उत्तर रामायण में कौशल्या और राम का अद्भुत संवाद सुना। 


आज शाम को नापा से सटे हुए खेत से तोरई, चीकू और नारियल ख़रीद कर लाए। माली ने उसी समय तोड़ कर दिए। आम के बगीचे से कच्चे आम भी कल मिले थे, उनका अचार बनाया है। आज पृथ्वी दिवस है, धरती माता ने अनगिनत उपहार मानव को दिए हैं। छोटी ननद से बात हुई, उसने बताया, बैंक खुलते हैं पर ग्राहक नहीं आते, लोग घरों से निकल कर संक्रमण का शिकार होना नहीं चाहते। जून ने पहली बार घर पर ही केश काटे। 

आज बहुत दिनों के बाद वर्षा हो रही है,  शाम से ही  बादल छाने लगे थे। उत्तर रामायण में  राम सीता का त्याग करके बहुत दुखी हैं, जनक उनसे मिलने आए हैं। लक्ष्मण भी भाई के दुःख से दुखी हैं। महाभारत में युद्ध का आरम्भ होने ही वाला है। आज दोपहर को गुरूजी द्वारा कराया ध्यान किया, जब से तालाबंदी हुई है, वह दोपहर व शाम दोनों वक्त ध्यान कराते हैं। आज से नैनी काम पर आने लगी है, घर काफ़ी साफ़ हो गया है और उनका काम कुछ आसान हुआ है। काफ़ी समय मिला तो कई मित्रों व सम्बन्धियों से देर तक फ़ोन पर बात की।  पिताजी ने उसकी कविताओं को फ़ेसबुक पर पढ़ा।  


Thursday, October 7, 2021

तुंगभद्रा के किनारे

तुंगभद्रा के किनारे 


रात्रि के नौ बजे हैं, रात्रि भोजन के बाद टहलते समय पिताजी से बात की। वह आज व कल अकेले रहेंगे, नवासी वर्ष की उमर में भी वह अकेले रह सकते हैं, यह क़ाबिलेतारीफ़ है। उन्होंने बताया, एक नयी किताब पढ़ी, ‘गॉड डेल्यूजन’, जो छोटी पोती ने दी है। उसे भी आध्यात्मिक किताबें पढ़ने का शौक़ है, पर नूना ने इस किताब के बारे में पढ़ा तो आश्चर्य हुआ, इसमें ईश्वर के अस्तित्त्व को नकारा गया है। लेखक नास्तिक है और उसे धर्म की कोई आवश्यकता नज़र नहीं आती। शायद आस्तिक होने के लिए नास्तिकता के पुल को पार करके ही आना होता है। शाम को वे निकट स्थित एक नर्सरी में माली ढूँढने गये, कल एक माली छत देखने आएगा, जहाँ टैरेस गार्डन उगाना है, शायद अगले वर्ष तक उनके सपनों का बगीचा तैयार हो जाए।आज लॉन में नयी घास भी लगवायी। जून ने बताया सोलर पैनल के द्वारा आज बिजली का अधिकतम उत्पादन हुआ, सुबह ठंड थी पर दिन में तापमान बत्तीस डिग्री था। आज अचानक शयनकक्ष के स्नानघर में पानी रिसने लगा, शायद दीवार में कोई पाइप ब्लॉक हो गयी है।


कल शाम एक पुराने परिचित के पुत्र के विवाह समारोह में सम्मिलित हुए, जहाँ कई पुराने परिचित  मिले। पुराने मित्रों से मिलना कितना सुखद अनुभव होता है। आज दिन में एओएल का ट्रांसक्रिप्शन का कार्य पहली बार किया। शाम को शिवरात्रि उत्सव के कार्यक्रम में आश्रम गये। हज़ारों की भीड़ थी। ‘मैं’ को पीछे रखकर किया गया कार्य ही सेवा है, गुरूजी ने अपने प्रवचन में कहा। सुबह जून के एक मित्र परिवार सहित आए थे,  उनकी डाक्टरी पास पुत्री अगले पाँच दिन यहीं रहेगी। वह सहयोगी प्रवृत्ति रखने वाली बहुत शांत स्वभाव की है और समझदार भी। मृदुभाषी है, सहज और धीरे बोलती है। उसे एमडी की परीक्षा की तैयारी करनी है।  अगले हफ़्ते दोनों परिवारों को मिलकर हम्पी और हौस्पेट की यात्रा पर जाना है।  बहुत दिनों बाद रेलयात्रा का आनंद मिलेगा। 


सुबह-शाम बगीचों में भ्रमण करते, सूर्योदय व सूर्यास्त की तस्वीरें उतारते दिन बीत रहे हैं। शाम को बैडमिंटन खेला। नन्हे ने बगीचे के लिए सौर ऊर्जा से जलने वाली दो मशालें भेजी हैं, दिन भर में ऊर्जित हो जाती हैं, रात भर जलती हैं, उनकी रोशनी दूर से ही दिखती है। कल छोटी डाक्टर अपने घर चली जाएगी। 


आज सुबह सात बजे वे एक मित्र परिवार के साथ हौस्पेट पहुँच गये थे। समाचारों में सुना, कोलकाता में गृह मंत्री ने बयान दिया है कि सीएए का व्यर्थ ही विरोध किया जा रहा है। आस्था पर संत संचित, क्रियमाण व प्रारब्ध कर्म के बारे में बता रहे हैं। यह यात्रा क्रियमाण कर्म है, इसमें होने वाले अनुभव प्रारब्ध कहे जा सकते हैं। संचित कर्म में से कुछ कर्मों के कारण ही वे इस दुनिया में आए हैं। आज तुंगभद्रा नदी पर बना बांध देखने जाना है। कर्नाटक में कई सुंदर प्राकृतिक स्थल हैं तथा मानव की अपरिमित क्षमता से बनाए गए कई दर्शनीय स्थान भी। यहाँ लोहे का बड़ा भंडार है जिस कारण स्टील की कई फ़ैक्टरियाँ भी हैं। ज्वर,

कल सुबह यात्रा का आरंभ एक ऐसे स्थान से किया जहाँ बच्चों और युवाओं के लिए रोमांचक खेल थे, वहाँ कुछ झूले, रस्सी के पुल आदि बने थे। उन्होंने उस स्थान का भरपूर लाभ उठाया और अपनी क्षमता को पहचाना। दोपहर को एक सहकारी बैंक में गए। जिसकी स्थापना मित्र के पिता जी ने की है। शाम तक तुंगभद्रा के किनारे पहुँचे। सूर्यास्त का अनुपम दृश्य देखने बहुत सारे दर्शक आए थे। पार्क में संगीतमय फ़ौवारे लगे थे। पूरा वातावरण एक मोहक स्वप्नलोक की रचना कर रहा था। उसके बाद मित्र अपने चचेरे भाई के यहाँ ले गये। जहाँ ज्वार की रोटी के साथ मूली-टमाटर का रायता, मूँगफली व लाल मिर्च की चटनी, मेथी-पालक वाली दाल तथा अंकुरित सलाद था, सभी व्यंजन स्थानीय थे और अति स्वादिष्ट भी।मित्र की चाचीजी से  ज्वार की रोटी बनाना भी सीखा। लगभग उबलते हुए पानी में इसका आटा गूँथा जाता है। घर में दो बच्चे भी थे जो काफ़ी समय तक मोबाइल पर ही खेल रहे थे।एक ही दिन में कितने सारे अनुभव हो गये, यात्रा कितना कुछ नया सिखाती भी है। कल उन्हें बादामी गुफ़ाएँ देखने जाना है। 


Wednesday, May 26, 2021

पिरामिड वैली

 

नव वर्ष का नौवां दिन भी बीत गया। अभी तक  लेखन कार्य आरंभ नहीं हुआ है। भगवान बुद्ध की पुस्तक पढ़ने में ही सारा समय चला जाता है। वह ध्यान पर बहुत जोर देते हैं और शील के पालन पर भी। सत्य, अहिंसा, अस्तेय, अलोभ और अक्रोध पर, साथ ही प्रज्ञा पर भी। अनुभव करके स्वयं जानने को कहते हैं न कि किसी की बात पर भरोसा करके ! जगत परिवर्तनशील है, सब कुछ नश्वर है, वस्तुओं के पीछे भागना व्यर्थ है और संबंधों के पीछे भी, भीतर की शांति और आनंद को यदि स्थिर रखना है तो अपने भीतर ही उसका अथाह स्रोत खोजना होगा। शांति और आनंद से मन को भरकर ही करुणा के पुष्प खिलाए जा सकते हैं ! किसीके पास यदि स्वयं ही प्रेम नहीं है तो वे किसी अन्य को दे कैसे सकते हैं ! पहले मन को सभी इच्छाओं, कामनाओं, लालसाओं से ऊपर ले जाकर खाली करना होगा। यशेषणा, वित्तेषणा, पुत्रेष्णा और जीवेषणा से ऊपर उठकर भीतर के आनंद को पहले स्वयं अनुभव करना होगा फिर उसे बाहर वितरित करना होगा। जगत में कितना दुख है, दुख का कारण अज्ञान है, अज्ञान को दूर करने का उपाय ध्यान है, ध्यान से ही दुख और शोक के पार जाया जा सकता है। अहंकार को मिटाकर ही कोई इस पथ का यात्री बनता है । धरती, पवन, अनल और जल की तरह धैर्यवान, सहनशील, परोपकारी और पावन बनकर ही बुद्ध ने अपने जीवनकाल में हजारों लोगों के जीवन को सुख की राह पर ला दिया था। उसे भी उसी पथ का राही बनना है। 


आज शाम आश्रम में गुरूजी को सुना, उन्होंने पहले कन्नड़ में बोला फिर अंग्रेजी व हिंदी में। उनके जवाब कितने सटीक होते हैंऔर कितने मजेदार भी, सभी को संतुष्ट करने वाले ! खुले प्रांगण में था कार्यक्रम, हजारों लोग रहे होंगे, जिन्हें गुरुजी के सान्निध्य ने आनंदित किया। । पहले भजनों का दौर चला फिर प्रश्नोत्तर का। अष्टावक्र गीता का एक श्लोक पढ़ा गया, जिसकी व्याख्या की गुरुजी ने। उन्होंने कहा, जब तक अहंकार है तब तक ही झिझक होती है, जब अहंकार नहीं रहता साधक बालवत बन जाता है। आराम बहुत हो गया, उसे अब ब्लॉग पर लिखना आरंभ करना ही होगा, भीतर से कोई बार-बार कह रहा है। नाश्ते के बाद का समय इसी काम के लिए रखा जा सकता है और दोपहर को भोजन के बाद के विश्राम के बाद का समय भी।  यदि जरूरत पड़ी तो समय और भी निकाला जा सकता है। जीवन जैसे दौड़ता ही जा रहा है, समय जो बीत गया वापस नहीं आता ! दोपहर को निकट स्थित खेत से वे सब्जी लाए व चीकू भी जिसे यहाँ सपोटा कहते हैं और बहुतायत में होता है। कल नन्हा व सोनू आए थे, व भांजा भी, वे सब पिरामिड वैली गए थे, जो बहुत सुंदर स्थान है। हरियाली और छोटी पहाड़ियों से घिरा यह विशाल स्थान सुकून से भर देने वाला है।यहाँ  दुनिया का सबसे बड़ा और दस मंजिल इमारत जितना ऊँचा पिरामिड नुमा ध्यान कक्ष है। जब वे कक्ष में पहुँचे तो कुछ लोग वहाँ पहले से ही बैठे थे, पर इतनी गहन शांति थी कि आपनी श्वास की आवाज भी सुनाई दे रही थी। कुछ देर सब उसी मौन में रहे फिर बाहर आकर फूलों के सुंदर बगीचों में।  यहाँ पर दूर-दूर से आकर लोग रहते हैं व ध्यान शिविरों में भाग लेते हैं। कल बहुत दिनों बाद ब्लॉग पर एक कविता लिखी। 


आज भी वे आश्रम गए थे,आश्रम का वातावरण बहुत आनंददायक होता है। सफलता की परिभाषा बताते हुए गुरुजी ने कहा, जो व्यक्ति हर स्थिति में अपने मन की समता को बनाए रख सकता है वही सफल है।उन्होंने आज ध्यान भी कराया। कर्ताभाव जब खो जाता है तब ही ध्यान घटता है, ऐसा ध्यान जो अप्रयास घटता है। जब भीतर कोई इच्छा नहीं रहती तब ध्यान घटता है, ऐसा ध्यान जो सहज अवस्था का अनुभव कराए। जब न राग रहे न द्वेष, न कोई अपना न पराया, न भूत का पश्चाताप न भविष्य की आकांक्षा, तब ध्यान घटता है, ऐसा ध्यान जो मुक्ति का स्वाद देता है, जो शांति प्रदाता है। आर्जव, क्षमा, दया, संतोष और सत्य जब जीवन में घुलमिल जाते हैं तब ध्यान घटता है।  मुक्ति की चाह ही व्यक्ति को परमात्मा से मिलने की चाह की ओर ले जाती है। बंधन मन को दुख के सिवाय कुछ नहीं देता, आदतों का बंधन, कर्म का बंधन, अहंकार का बंधन, इच्छाओं का बंधन, अहंकार का बंधन, घृणा, क्रोध, ईर्ष्या, संदेह तथा दंभ जैसे विकारों का बंधन ! मानव के मन को कितनी बेड़ियों ने जकड़ रखा है, जो उसे दुख देती हैं पर सुख का भुलावा भी देती हैं। उसके पास आत्मा का अनंत सुख तो है नहीं, सो उसी छोटे से सुख से काम चलाना चाहता है, यह भुलाकर कि बड़ा सा दुख भी पीछे खड़ा है। स्वर्ग के लोभ में लोग नरक को चुन लेते हैं। फूलों के साथ काँटे भी मिल जाते हैं, मित्र ही शत्रु बन जाते हैं एक दिन और देह माटी बन जाती है। मृत्यु के द्वार से कोई नहीं बचता, एक दिन तो सभी को यहाँ से चले ही जाना है ! जहाँ जाना है वहाँ रहना जो सीख लेता है वह ध्यान में ही है ! आज आश्रम में रहने वाले  हाथी को भी देखा, सजा -सजाया हाथी बहुत अच्छा लग रहा था। मस्तक पर तिलक था, गले में घुंघरू थे और माला भी। कई बार गुरूजी उसे अपने हाथों से उसका आहार खिलाते हैं। वे आश्रम के मानव संसाधन विभाग की अध्यक्ष से भी मिले, अपनी रुचि बताते हुए एक ईमेल लिखने को कहा है। आश्रम के कैफे में पुस्तकों के रैक  को साफ करके किताबें ठीक से लगाईं, ऐसा ही लगा जैसे अपने घर को ही सहेज रहे हैं। आश्रम उनके घर जैसा ही है और आगे बनने भी वाला है, जब वे यहाँ नियमित काम करना शुरू कर देंगे। आज असमिया सखी का फोन आया वे लोग इसी माह आएंगे।


Wednesday, May 5, 2021

अंजीर का पेड़

सुबह पाँच बजे के कुछ देर बाद उठे वे। अंगुली में दर्द अब नहीं है। आज सिरके व पानी का इलाज किया, तीन बार, काफी असरकारक है। सूजन अभी भी है, दवा साथ में रखनी होगी जब परसों वे ‘काबिनी वन्‍य-जीव अभयारण्य’ के लिए रवाना होंगे। आज एनी का दूसरा भाग देखा, वह कविता सुनाकर अपनी टिकट के पैसे एकत्र करती है, मारिला उसकी कीमत जानती है तभी उसे वापस बुला लेती है। गाँव के दृश्य भी बहुत सुंदर हैं पर लोगों के दिल कितने कठोर हैं, कैसे अपशब्द वे उसके लिए बोलते हैं। दलितों ने न जाने सदियों तक ऐसे ही कटु वाक्य अपने लिए सुने होंगे भारत  में भी, आज भी उन्हें नीच जाति का कहकर अपमानित किया जाता है, उसे आश्चर्य होता है, ब्राह्मण स्वयं को वेदों का ज्ञाता मानते हुए भी इतना भेदभाव कैसे सहन करते रहे, जबकि वेदों में लिखा है, सभी में एक ही चेतन सत्ता है। आज सुडोकू  शीघ्र हल कर पाई, अभ्यास से कौन सा काम नहीं हो पाता ? परमात्मा की स्मृति जीवन को कैसी सुवास से भर देती है, आश्चर्य होता है कि जिन्हें इसकी खबर नहीं वे कैसे रहते होंगे ! 


आज नैनी ने गमले से कोई स्थानीय साग तोड़ कर दिया, जिसके बीज उसने पालक के बीजों के साथ ही डाले थे. पालक के पत्ते भी अगले हफ्ते तक तोड़ने लायक हो जायेंगे. जून कमरे में तथा सीढ़ियों पर रखे गमलों को बाहर गैरेज में रख रहे हैं, अगले चार दिन वे घर से बाहर रहेंगे तो बंद घर में उन्हें धूप-हवा-पानी नहीं मिल पायेगा. पिटूनिया के नन्हे पौधे भी निकल आये हैं, नैनी को दिन में एक बार आकर पानी डालने को को कहा  है. एनी का तीसरा भाग देखा, स्कूल में उसे कितनी दिक्कत होती है, अब वह पेड़ों-फूलों के साथ समय बिताती है, किताबें पढ़ती है, पर एक दिन उसका झूठ पकड़ा जायेगा. आज दो किताबें आयीं, ओल्ड पाथ विथ क्लाउड्स और द विज़डम ऑफ़ लाओत्से, दोनों ही यात्रा पर साथ ले जाएगी. बुद्ध के जीवन पर आधारित पहली पुस्तक अवश्य ही बहुत अच्छी होगी. लाओत्से का ज्ञान तो अनुपम है ही. आज मंझले भाई-भाभी से बात की, कल वे लोग पिताजी के पास जा रहे हैं, उनका दामाद भी साथ जा रहा है, उनसे मिल लेगा. आज सुबह पुराने हिंदी गीत सुने और शाम को शिव भजन, संगीत अंतर्मन को कितना सुकून देता है, यह जानते हुए भी वह केवल संगीत सुनने के लिए समय बहुत कम ही निकालती है. 


आज सुबह लगभग नौ बजे वे घर से चले थे, दोपहर एक बजे ‘रेड अर्थ रिजॉर्ट’ पहुँच गए. रास्ता बहुत अच्छा था, हरियाली, जंगल, खेत, झीलें और कर्नाटक के गावों से गुजरते हुए, गीत सुनते हुए आराम से कट गया. आते ही स्वादिष्ट भोजन मिल गया. उनकी कॉटेज की छत झोंपड़ी जैसी है भीतर से चटाई, बाहर से पुआल की.बाहर छोटा सा लॉन है तथा एक जाकुजि भी। कमरे में सभी आधुनिक सुविधाएँ हैं. लकड़ी का पुराने ढंग का फर्नीचर है, पीछे बालकनी है, जिसमें दो चमड़े की कुर्सियां रखी हुई हैं. सामने जंगल नुमा फलों का बगीचा है और कुछ ही दूरी पर कपिला नदी है, जिसे काबिनी नदी भी कहते हैं। एक बड़ा सा अंजीर का पेड़ भी है जिसपर सैकड़ों अंजीर के फल लगे हैं। उन्होंने एक घंटा विश्राम किया फिर नदी तक गए। तट पर हरी घास थी, जो दूर तक फैला है।  नन्हा व जून दो साइकिलें लेकर आए, बारी-बारी से सभी ने साइकिल चलायी। नदी की लहरों को देखते रहे जो सागर का सा आभास दे रही थीं। कुछ ही दूर पर बाँध बनाया गया है, इसलिए पानी काफी है और लहरें भी। नदी किनारे एक रेस्तरां है जिसके सामने पेड़ों से लटके कई झूले लगे हैं जिन्हें हेमॉक कहते हैं शायद। शाम की चाय उन्होंने वहीं बैठकर पी। कई तरह के पक्षी भी नदी के जल में मछलियाँ पकड़ने आए थे। हवा ठंडी थी, सो अंधेरा होते ही वे कमरे में आ गए। रात्रि आठ बजे सांस्कृतिक कार्यक्रम है, बोन फायर भी है। 


आज सुबह वे इस सुंदर स्थान में बसने वाले पक्षियों को देखने तथा प्राकृतिक भ्रमण के लिए पूरे समूह के साथ गए। पथ प्रदर्शक को स्थानीय पक्षियों के बारे में जो भी जानकारी थी, सभी के साथ बाँट रहा था। नन्हे ने अपने कैमरे से कई सुंदर पक्षियों की तस्वीरें उतारीं। रंग-बिरंगे पंछियों और नदी के स्वच्छ जल में  सूर्योदय के सुंदर दृश्य का प्रतिबिंब देखकर सभी प्रसन्न थे। वापस आकर नाश्ता किया फिर वहाँ से एक घंटे की दूरी पर स्थित प्राचीन शिव मंदिर देखने गए। पुजारी राघवन एक किसान है और मंदिर में पूजा का काम भी करता है। उसने सबका नाम पूछा, राशि भी, और पूरे भाव से पूजा करवायी। मंदिर का इतिहास बताया। ढाई हजार साल पुराना शिवलिंग है यहाँ, नंदी भी सुंदर काले पत्थर का है। वापस आकर नन्हा व सोनू वापस चले गए, आठ बजे तक घर पहुँच जाएंगे। दो दिन बाद उन्हें लेने आएंगे। शाम को वे पुन नदी के तट पर गए, हवा ठंडी थी और आकाश पर बादल थे। एक घंटा टहल कर वे वापस लौट आए। आज के सांस्कृतिक कार्यक्रम में आदिवासी लोकनृत्य था। श्वेत वस्त्र पहने कई युवा व प्रौढ़ कलाकार बड़ी दक्षता के साथ विभिन्न स्वर निकालते हुए नृत्य कर रहे थे। दो व्यक्ति ढोल बजा रहे थे। नया साल आने में दो दिन शेष हैं, जिसमने उन्हें कर्नाटक के वन्य जीवन को निकट से देखने का अवसर मिलेगा। 

 

Wednesday, April 7, 2021

वृक्ष और हवा

 

आज से दो वर्ष पूर्व बड़ी भतीजी का ब्याह हुआ था, पर उसने उसे ‘प्रथम वर्षगांठ पर बधाई’ का संदेश लिख दिया। मन अपने आप में नहीं रहता है जब, तब ऐसी गलतियाँ होती हैं। जिस मन में कोई उलझन न हो, लोभ न हो, चाह न हो, वह मन  ही स्थिर रह सकता है। आज सुबह वे बारी-बारी से घूमने गए क्योंकि उठने में देर हुई. नैनी समय पर  आ गयी, कल उसने छुट्टी ली है, विधान सभा का उपचुनाव है, कह  रही थी बीजेपी को वोट देगी। देश आर्थिक संकट से जूझ रहा है, सरकार प्रयास कर रही है पर हालात सुधर नहीं रहे हैं। आजकल समाचार सुनने का ज्यादा समय नहीं मिलता। वे टीवी कम ही खोलते हैं। दोपहर को थोड़ी देर एक फिल्म देखी ‘जोया फैक्टर’ अच्छी लगी। जून ज्यादातर समय मोबाइल पर कुछ देखते हैं। शाम को योग सत्र में टीचर ने हास्य आसन कराया, गरुड़ व वृक्ष आसन भी। एक घंटे के अभ्यास के बाद शरीर काफी हल्का हो जाता  है, और लचीला भी हो रहा है. कभी कभी वे बेल्ट, लकड़ी की ईंट और बड़ी सी गेंद का उपयोग करके कठिन आसन भी करते हैं। आज एक पूर्व परिचिता से बात की, उसने बहुत कोशिश करके अपना तबादला अपने गृह शहर में करवाया है। कह रही थी जिम जाने लगी है, वर्तमान पीढ़ी को योग की बजाय जिम अधिक रास आता है। आज भी छत पर सोलर पैनल लगाने का काम आगे बढ़ा. पूरा होने में लगभग दो महीने लगेंगे। 

जगत से सुख और प्रेम की आशा करना पानी को मथकर मक्खन निकालने जैसा ही है। यहाँ हृदय की बात सुनने का किसी के पास न ही धैर्य है न ही समय। स्वकेंद्रित मानव अपनी इच्छाओं की पूर्ति चाहता है और यदि कोई उसमें बाधक बनता है तो वह उस पर क्रोधित होता है। क्रोध का प्रभाव खुद पर ही होने वाला है वह यह भूल ही जाता है। आज सुबह टहलते समय भीतर कविता फूट रही थी। सारा अस्तित्व जैसे उसके भीतर सिमट आया हो। फेफड़ों के भीतर ताजी हवा वही तो थी जो चारों ओर बह रही थी।  सिर के ऊपर विस्तीर्ण आकाश था, अभी आकाश में चाँद था और तारे भी, भीतर का आकाश उसके साथ एक हो गया था। सुबह का समय कितना पावन होता है, मन भी खाली स्लेट की तरह, जिस पर जो चाहे लिखा जा सकता है। उसका प्रिय द्वादश मंत्र सुबह-सुबह हर श्वास-प्रश्वास में  स्वत: ही चलता है।  छत पर चल रहे काम के कारण काफी शोर था दोपहर को, गुरुनानक की कथा सुनते-सुनते सोयी। एक विचित्र स्वप्न देखा, एक बड़ा सा आदमी छोटा हो जाता है, कीट जितना छोटा। छोटे भाई के विवाह की वर्षगांठ है आज, बधाई दी। ननद से बात हुई, बिटिया के विवाह की बात चल रही है, पर वे लोग शाकाहारी नहीं हैं, और चाहते हैं, विवाह से पूर्व लड़की सब कुछ खाना व बनाना सीख जाए। भांजी ‘हाँ’ कहने से डर रही है। एक ब्लॉगर  की पुस्तक आयी है, उसने जून से कहा है अमेजन से खरीदने के लिए। कई दिनों से दीदी से बात नहीं हुई है, उसने व्हाट्सएप पर संदेश भेजा और  भगवान से दुआ मांगी, एक न एक दिन सब पूर्ववत हो ही जाएगा। 


रात्रि के नौ बजने वाले हैं। सोने से पूर्व का उसका डायरी लेखन का कार्य अब नियमित होता जा रहा है। कुछ देर पहले वे टहल कर आए, रात की रानी के पौधों की खुशबू अभी नासिका में भरी ही हुई थी कि मोड़ पर एक मीठी सी जानी-पहचानी खुशबू आयी, चम्पा की सुवास, और वाकई वहाँ तीन-चार पेड़ थे। चम्पा के फूल अभी ज्यादा नहीं थे, पर एक खिला फूल तोड़ा जो शायद कल  झरने ही वाला था, उसके सामने पड़ा है, श्वेत पंखुड़ियों वाला सुंदर पुष्प ! शाम को मृणाल ज्योति के डायरेक्टर का फोन आया, जो स्कूल की तरक्की की बातें बता रहे थे, अच्छा लगा सुनकर। अगले हफ्ते वे महाराष्ट्र की एक छोटी सी यात्रा के लिए जाने वाले हैं, दोपहर को पैकिंग की. आज सुबह गांव की तरफ टहलने गए थे वे, मन्दिर के पास वाला इमली का पेड़ फलों से भरा हुआ है, पर उन्हें तोड़ना नहीं आता. एलोवेरा का एक स्वस्थ पौधा रास्ते के किनारे पड़ा था, शायद किसी ने गमले से निकाल कर उसी समय वहां रखा था, वे उसे उठाकर लाये और घर के पीछे वाली क्यारी में लगा दिया है. आज छोटे भाई ने बताया शायद वह क्रिसमस पर यहाँ आये. 


उस कालेज की डायरी में एक कविता उसे दिखी, शायद हवा के बारे में किसी अंग्रेजी कविता को पढ़कर लिखी थीं ये पंक्तियाँ -


क्यों चाहे वह मुझ संग होना 

मेरे संग मेरे कमरे में 

उसके लिये संसार उपस्थित 

कितनी गलियां कितने गाँव 

लेकिन वह फिर-फिर आ जाये 

खोल के मेरी खिड़की के पट 

संग ले आये कुछ बौछारें 

मेरा दरवाजा खटकाये

बंद देख एक पल चुप हो 

क्षण बीते न फिर आ जाये 

पट खड़काये

नंगे पैर फर्श है ठंडा 

मैं घबरा कर द्वार खोलती 

वह तेजी से अंदर आये 

इक पल ठहरे फिर मुड़ जाये 

खुश हो जब दीपक बुझ जाये !


‘एक वृक्ष -एक गवाही नाम से’ अगले पन्ने पर लिखा था 


मैं गवाह हूँ 

मैं गवाह…

उस क्षण से लेकर आज तक 

जब प्रथम बार मेरे पत्तों ने आँखें खोली थीं 

और फिर जब मेरी डालियाँ भर गयी थीं फूलों से 

हर वर्ष, वर्षा, तूफान, भीषण शीत को सहते 

मेरे तन पर कुल्हाड़ी की धार सहते क्षण का भी 

परन्तु हर बार बसन्त की प्रतीक्षा में 

मेरे अंदर का साहस मृत नहीं हुआ.. 


Wednesday, February 24, 2021

पराशक्ति


कल दीपावली का उत्सव सोल्लास सम्पन्न हो गया। नन्हे ने सदा की तरह दिल खोलकर कर उत्सव व विशेष भोज का आयोजन किया। लगभग बाईस लोग आए थे। सभी ने घर की तारीफ की। दोपहर को वह उन्हें गो-कार्ट ले गया। ड्राइविंग सीखी हुई थी सो ज्यादा परेशानी नहीं हुई। वैसे भी वह गाड़ी उलटती नहीं है। रात को सोने में देर हुई. नन्हा व सोनू भी अपने मेहमानों को लेकर बारह बजे घर पहुँचे थे । आज दोपहर वे दोनों फिर आ गए थे। घर से ही काम किया। कल भाईदूज है, उम्मीद है भाइयों को टीका मिल गया होगा। इस समय रात्रि के साढ़े नौ बजे हैं, बाहर से लगातार पटाखों की आवाजें आ  रही हैं। 


आज यहाँ  आने के बाद पहली बार वे आश्रम गए, जहाँ जाने मात्र से ही भीतर एक अनोखा सुकून मिलता है। विशालाक्षी मंडप में बैठकर कितनी ही पुरानी सुखद स्मृतियाँ भी सजीव हो उठीं। गुरूजी वहाँ नहीं थे पर उनकी मोहक तस्वीर भी उनकी उपस्थिति का अहसास करा रही थी। उनकी आँखें अपनी ओर खींचती हुई सी लग रही थीं। आश्रम के सुंदर वातावरण की कई तस्वीरें भी उन्होंने उतारीं। कुछ देर भजन में भाग लिया और कुछ खरीदारी की। गुरुजी की बहन भानु दीदी की लिखी एक पुस्तक ‘पराशक्ति’ ली, जिसमें पुराणों में वर्णित देवियों के बारे में जानकारी है, अवश्य ही पठनीय होगी।  कल एक मित्र परिवार आ रहा है, उन्हें लेकर कल फिर वे यहाँ आएंगे। कुछ देर पहले पड़ोस से पटाखे फोड़ने की आवाजें आ रही थीं, सड़क पर कागजों का ढेर लग गया है, इतना वायु प्रदूषण होता है सो अलग। यहाँ आने के बाद पहली बार ब्लॉग पर एक पोस्ट प्रकाशित की। बाहर वर्षा आरंभ हो गई है। इस कमरे के बाहर खुला बरामदा है। काफी खुला-खुला घर है यह, आकाश भी कमरे से दिखाई देता है और इस मौसम में सुबह की धूप सीधी कमरे में आती है। जीवन फिर से पटरी पर आता दीख रहा है। घर काफी व्यवस्थित हो गया है। कार्पेट अभी तक बिछाए नहीं हैं, उसके बाद यकीनन और अच्छा लगेगा। किचन में बर्तन धोने की मशीन काफी उपयोगी सिद्ध हो रही है, कपड़े धोने की मशीन भी। 


कल दोपहर मित्र परिवार आया, पति-पत्नी और कालेज में पढ़ने वाली बिटिया।  आज सुबह नाश्ते के बाद वे लोग चले गए। समय कैसे बीत गया पता ही नहीं चला। शाम को आश्रम गए। संध्या के समय भजन का कार्यक्रम चल रहा था, वे सब भी कुछ देर के लिए वहाँ बैठ गए और सम्मिलित हुए। बिटिया ने माँ से धीरे से पूछा, वे यहाँ क्यों बैठे हैं ? उसने सुन लिया, और मुस्कुरा दी। मंदिर में बैठना या भजन गाना सबके बस की बात नहीं है और युवाओं के लिए यह बहुत मुश्किल है, जिन्हें कभी बचपन से इससे परिचित न कराया गया हो। पाँच मिनट और बैठकर वे उठ गए और आश्रम के सुंदर प्रांगण में घूमते रहे।  वापसी में खाद खरीदी, जो कल सभी गमलों में डालनी है। मौसम आज सुहावना है, दोपहर बाद वर्षा की भी भविष्यवाणी है। आज सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती है। आज से  लद्दाख व जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया है। कश्मीर में हिंसा की घटनाएं बंद नहीं हो रही हैं।  भारत में आज से अठ्ठाइस राज्य व नौ केंद्र शासित प्रदेश हैं। 


आज सुबह वे इस सोसाइटी में अंगूर की खेती देखने गए फिर पिछले गेट से गाँव की तरफ निकल गए। अंगूर के बगीचे के पास तीन फ़ौवारे हैं, पानी में पड़ती हुई रोशनी के कारण सूर्यास्त का दृश्य अनुपम लग रहा था।  एक किंगफिशर देखा तथा एक अन्य लाल व काला बड़ा सा पक्षी। आज से शाम को एक घंटे की योग साधना भी आरंभ की है. उसके बाद जब संध्या भ्रमण के लिए निकले तो बच्चों की एक बड़ी सी टोली देखी, उन्होंने हालोइन की ड्रेसेज पहनी हुई थीं। वे इधर से उधर दौड़ रहे थे। 


उस पुरानी डायरी में कुछ सुंदर सूक्तियाँ उसने लिखी थीं, उस समय तो उनका क्या अर्थ समझा होगा उसे ज्ञात नहीं पर आज वे उस आश्चर्य से भर देती हैं -


स्वयं के ब्रहमत्व की अस्वीकृति अज्ञान है। 


स्वयं कभी स्वयं से अलग नहीं, किन्तु पर में दृष्टि रहने के कारण स्वयं में ध्यान नहीं रहता। 


मन में जब विकार और विचार भरे हैं, तब निराकार नहीं।