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Saturday, April 4, 2020

डॉ राधाकृष्णन का जन्मदिन


परसों दोपहर अचानक एओल के एक स्वामी जी का फोन आया. नेट पर सेवा देने को कह रहे थे. उसे बहुत ख़ुशी हुई. वर्षों पूर्व जब वह असम आये थे उनसे मिले थे. उन्होंने एक फार्म भेजा जिसका कंटेंट एक दूसरे फार्म में भरना था, उसने भर दिया. उन्होंने कहा, अगले दिन यानि कल सुबह वह पुनः अन्य फार्म भी भेजेंगे. पर अभी तक कोई संदेश नहीं आया है, खैर.. परसों और कल सुबह तक मन कितना  प्रसन्न था, गुरूजी के काम में कुछ मदद करने का मौका मिल रहा है , यह विचार मन को उच्च भावों में ले जा रहा था. कल दोपहर एक अन्य बात हुई, लगभग चालीस-पचास मिनट के लिए मन बिलकुल खो गया, गहन सुषुप्ति या समाधि... शाम तक उसका असर रहा. बेवजह ही मन एक गहन प्रसन्नता का अनुभव कर पा रहा था. कल शाम को भजन का कार्यक्रम भी अच्छा रहा. जून ने लड्डू बनाये, उसने उनकी सहायता की, रात्रि भौजन बनाया, सब करते हुए भी कुछ करने का अहसास नहीं हो रहा था, पर रात को नींद वैसी नहीं थी. एक दुःस्वप्न भी देखा. अपने पूर्व संस्कार को पुनः जागृत होते हुए देखा, लगता था मन अब उससे पूर्ण मुक्त हो गया है. प्रेम जब एकाधिकार चाहता है तब विकृत हो जाता है, और इसके मूल में है अहंकार यानि देह को अपना स्वरूप मानना। आत्मा कुछ भी नहीं है तो वह किसी पर क्या अधिकार करेगी, फिर उसके सिवा कुछ अन्य है भी तो नहीं, जब तक मूल ग्रन्थि नहीं कटेगी कोई न कोई विकार जगता ही रहेगा. स्वप्न में भी उस पीड़ा महसूस किया. आज की रात्रि ध्यान में गुजरेगी ऐसा प्रयत्न रहेगा, आगे आने वाली चार रात्रियाँ भी. 

सितम्बर का प्रथम दिन ! यानि आषाढ़ का प्रथम दिन ! सुबह से मूसलाधार वर्षा हो रही है. सफाई कर्मचारी ने फोन किया, बारिश रुकने पर ही आएगा. व्हाट्सअप भी नहीं चल  रहा है और फोन भी आधा चार्ज है, बिजली छह बजे से ही नदारद है, बिजली न होने से घर में अभी भी रात्रि जैसा ही प्रतीत हो रहा था सो वह बाहर बरामदे में आ गयी है. सामने लॉन में पेड़-पौधे, हरी घास सभी भीग कर प्रसन्न हो रहे हैं. कल रात्रि कुछ देर समाचार देखे, जून बाहर गए हैं, उनके रहने पर तो टीवी नौ बजे बन्द हो जाता है. कश्मीर में आतंकवादी पुलिसवालों के परिवार जनों को अगवा करने पर उतर आये हैं. माओवादी प्रधानमंत्री को हटाने की योजनाएं बना रहे हैं. देश में रहकर देश के विरुद्ध कार्य करने वाले जयचंदों की कमी नहीं है. सरकार सभी वर्गों के लिए कितना कार्य कर रही है यह उन्हें नजर नहीं आता. प्रधानमंत्री के लिए कितना कठिन होता होगा हर दिन, उनके लिए तो सभी देशवासियों को शुभकामनायें भेजनी चाहिये. सुबह पौने पांच बजे नींद खुली, उस समय वर्षा रुकी थी, सो टहलने गयी, बाहर ही बैठकर प्राणायाम किया, घर आते ही बिजली चली गयी थी. नाश्ते में मूसली खायी, जून के न रहने पर रोज सुबह यही नाश्ता होता है या कॉर्न फ्लेक्स. अब वर्षा कुछ कम हुई है, नैनी झाड़-पोंछ कर रही है, साप्ताहिक सफाई के लिए स्वीपर भी आ गया है. कुछ देर पहले प्रेसीडेंट का फोन आया, वह कल शाम मेडिकल चेकअप कराकर लौट आयी हैं. दो बार बायोप्सी हुई, काफी तकलीफदेह रहा उनका अनुभव. अभी भी पूरी तरह से सामान्य नहीं हैं. रिपोर्ट दो दिन बाद आएगी. उम्मीद है सब ठीक होगा. नौ बजे उनके घर जाना है, उसके पूर्व बुखार से पीड़ित योग साधिका के यहां जाया जा सकता है. 

पिछले दो दिन कुछ नहीं लिखा, आज कुछ लिखने की इच्छा जगी है क्योंकि कल शिक्षक दिवस है. मृणाल ज्योति जाना है, जहाँ कुछ बोलने के लिए भी कहा जायेगा.,  शिक्षक दिवस डॉ राधाकृष्णन,  जो शिक्षाविद तथा दार्शनिक थे, की याद में 1962 से मनाया जाता है. उनका जन्म पांच सितम्बर अठारह सौ अठ्ठासी को हुआ था. वह दो बार भारत के  उप राष्ट्रपति रहे, फिर राष्ट्रपति बने. वह पूरी दुनिया को विद्यालय मानते थे, कहते थे कहीं से भी सीखने को मिले तो उसे अपने जीवन में उतार लेना चाहिए. एक बार उनके कुछ विद्यार्थी उनका जन्मदिन मनाने के लिए अनुमति लेने गए तो उन्होंने कहा इसे केवल मेरे लिए नहीं सभी शिक्षकों के सम्मान में मनाओ. गूगल से मिली इतनी जानकारी तो बहुत है, शेष दिल में जो विचार उस समय आएंगे, बोल दिए जायेंगे. उसने मन ही मन सोचा, शिक्षक विद्यार्थी का मित्र भी होता है और मार्गदर्शक भी. वह उसे केवल किताबी ज्ञान ही नहीं देता, अपने जीवन से भी बहुत कुछ सिखाता है. वह कभी कठोर भी हो सकता है पर उसका उद्देश्य केवल छात्रों की उन्नति करना और उन्हें बेहतर इंसान बनाना ही होता है. शिक्षक समाज का निर्माण करता है. दस बज गए हैं, अब सोने की तैयारी करनी चाहिए.आज नैनी की छोटी बेटी का जन्मदिन था, उसे एक गमछा दिया व एक बिस्किट का पैकेट. शाम को योग कक्षा में एक साधिका जन्माष्टमी का प्रसाद लायी, धनिये की पंजीरी जिसमें गोंद भी थी, उसने पहली बार खायी. दोपहर को सबने मिलकर गिफ्ट्स पैक किये. आज राधा-कृष्ण के असीम प्रेम व विरह वाला कृष्ण का अंक देखा, कितना गहरा था उनका प्रेम ! प्रेम ही इस जगत का आधार है, यदि प्रेम न हो तो इस जगत में क्या आकर्षण रह जायेगा, प्रेम ही तो ईश्वर है ! कल जून आ रहे हैं, कल इस समय तक तो वे सो चुके होंगे. 

Monday, June 15, 2015

ह्यूस्टन का वनस्पति उद्यान



आज वे लोग एक विस्तृत वन देखने गये, वनस्पति उद्यान..जहाँ ऊंचे-ऊंचे वृक्ष थे, हरियाली थी, जंगल भी था और बगीचा भी. कितने ही लोग वहाँ साइकिलों पर घूम रहे थे. जून के एक अमेरिकन सहयोगी उन्हें वहाँ ले गये. डील-डौल में काफी बड़े थे. अमेरिका के अधिकतर निवासी कद-काठी में काफी बड़े होते हैं, और चेहरे लाल-गुलाबी. यहाँ सब कुछ बड़ा है, देश तो बड़ा है ही, हवाई अड्डे इतने बड़े हैं कि भारत के कई गाँव समा जाएँ. उस दिन जब पहली बार वे यहाँ के जार्ज बुश हवाई अड्डे पर उतरे थे तो सामान रखने के लिए ढूँढने पर कोई ट्राली नहीं मिली, इधर-उधर पता लगाकर बाहर सड़क से उन्हें एक ट्राली मिली. सड़कें चौड़ी-चौड़ी हैं. इमारतें विशाल हैं. कारें भी उसी अनुपात में लंबी-चौड़ी हैं. वे खाने-पीने का सामान खरीदने गये थे तो आलू-प्याज, गाजर भी दुगने आकार के मिले. यहाँ के फल भी बड़े हैं और स्वाद भी थोड़ा अलग है. पानी में क्लोरीन कि गंध आ रही है. टमाटर कच्चा खाने की कोशिश की तो उसमें भी क्लोरीन जैसी गंध आयी. चावल भी पार बॉयल्ड मिले हैं साइज में बड़े और मोटे. दूध का कैन पांच लीटर का, दाल का पैकेट दो किलो का. चाय की तो इतनी वैरायटी उन्हें दिखी कि अचरज से भर गये. स्ट्राबेरी चाय उसने पहली बार पी, वैसे यहाँ का राष्ट्रीय चाय है ‘आइस्ड टी’, और वनीला फ्लेवर राष्ट्रीय फ्लेवर है आइसक्रीम का. वे सभी कुछ बड़े साइज का इस्तेमाल करते हैं, उनका दिल भी जरूर विशाल होगा तभी दुनिया भर के लोग अमेरिका को अपना देश बनाकर रह पाते हैं. भारतीयों की संख्या काफी है. यहाँ घूमने आने वालों के लिए कई आकर्षण हैं. शहर में कई झीले हैं, छोटी-बड़ी धाराएँ हैं जिनके किनारे पर सुंदर बगीचे हैं. कई स्टेडियम हैं, एस्त्रोडोम जिसे विश्व का आठंवा आश्चर्य कहा जाता है, विश्व का पहला वातानुकूलित स्टेडियम है.  

आज भी सुबह से वर्षा जोरदार हो रही है, सड़कों पर भरा पानी देखकर उसे असम की याद आ रही है. चैनल २ पर मौसम का हाल बताया जा रहा है. कुछ घरों के आगे भी १-२ फीट से अधिक पानी भर गया है. शुगर लैंड में लोग आहत भी हुए हैं. टीवी पर बार-बार दिखा रहे हैं, एक नीली गाडी में पेड़ की बड़ी शाखा घुसी हुई है. कहीं कहीं १३-१४ फीट तक पानी भर गया है. जून की आज की ट्रेनिंग भी हो गयी है, उनका फोन आया था, वे लोग आने के लिए टैक्सी खोज रहे हैं. ट्रेनिंग सेंटर के बाहर भी पानी है.  होटल के इस कमरे में बैठकर उसे तूफान की विभीषका का पता नहीं चला. केटी फ्री वे का रास्ता भी पूरी तरह पानी से भर गया है.

अभी कुछ देर पहले भारत बात की, वहाँ अभी सवेरा हुआ है, नन्हा उठ चुका था, यह कार्ड पांच  डालर का था जिससे सिर्फ एक बार बात कर सकते हैं. नन्हे ने मेल भी पढ़ लिए थे. जून ने आकर बताया कि टैक्सी ड्राइवर अच्छा था, अच्छे मूड में था, उसने अपना कार्ड दिया भविष्य में उसे बुलाने के लिए. यहाँ लोग बिजनेस करना जानते हैं, वैसे वे प्रैक्टिकल हैं भारतीयों की तरह जरा भी इमोशनल नहीं. लोग पहली बार मिलने पर अभिवादन करते हैं फिर अपने काम से काम रखते हैं.  टीवी पर लोग मुस्कुराते हुए विस्तार से समाचार देते हैं पर अक्सर उसे लगता है कि उनकी मुस्कान वास्तविक नहीं है.


जून ने एक मोटा सा अख़बार लिया होटल के गेट पर लगी वेंडिंग मशीन में सिक्का डालकर, उसे पढ़कर कितनी ही जानकारी उसे मिली है. ह्यूस्टन अमेरिका के टेक्सास प्रदेश का दक्षिणी शहर है. यहाँ ९० से अधिक भाषा भाषी लोग रहते हैं. यहाँ सड़क पर कोई पैदल चलता हुआ नजर नहीं आता. कई लोग मोटापे के मामले में गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड में नाम लिखाने को तैयार बैठे हैं. लोगों के खाने-पीने का कोई समय नहीं है. ड्राइव करते समय स्कूल के रस्ते में, ऑफिस में जहाँ कहीं भी लोग हों कुछ न कुछ खाते-पीते रहना उनकी आदत है. कॉफ़ी के मग होते हैं कप नहीं.  

Tuesday, October 21, 2014

अमराई की छाँव



आज असम बंद है, आसू की मांग है कि भारत-बांग्लादेश सीमा पर सीमा सुरक्षा बल की जगह सेना की नियुक्ति की जाये. जून साइकिल से ऑफिस गये पर थोड़ी ही देर में वापस लौट आये. इस वक्त टीवी पर एक पुरानी फिल्म देख रहे हैं. सुबह-सुबह समाचारों में सुना कि डिब्रूगढ़ से बीजेपी के प्रत्याशी तथा कुछ अन्य राजनितिक कार्यकर्ताओं की उल्फा ने गोली मारकर हत्या कर दी है. वे लोग राज्य में शांति के पक्षधर नहीं लगते, चुनाव का बहिष्कार करने का कितना भयंकर मार्ग उन्होंने अपनाया है. नन्हा आज पहली बार एक आंटी से विज्ञान विषय पढने गया है, वह काफी उत्साहित है. आज लंच में वह दक्षिण भारतीय भोजन बना रही है. शाम के टिफिन के लिए जून तरबूज लाये हैं. इस समय नौ बजे हैं, धूप बहुत तेज है जैसे हजारों वाट के बल्ब लगा दिए गये हों. ऐसा ही ज्ञान का प्रकाश उनके दिलों में उदित हो ऐसी ईश्वर से उसकी प्रार्थना है.

धर्म को जीवन में उतारना होगा तभी क्रोध, मोह, अहंकार और लोभ से स्वयं को मुक्त किया जा सकता है. अपने कर्त्तव्य का पालन करते हुए सदा अपने आप में स्थित रहना होगा. जीवन की कहानी का पटाक्षेप हो जब वे एक मुट्ठी राख में बदल जायें इसके पूर्व ही स्वयं को जानना होगा. यदि पुकार भीतर से फूटी हो तो कभी खाली नहीं जाती. आज भी बंद के कारण नन्हे का स्कूल बंद है. मौसम कल की तरह है. जून भी एक बार वापस आकर दुबारा दफ्तर चले गये हैं. कल शाम दो मित्र परिवार आये, दिन भर बंद के कारण शाम को बाहर निकलना चाहते थे. उसने बाद में अनुभव किया वह भी दिन भर चुपचाप अपना काम करते रहने के कारण शाम को कुछ ज्यादा मुखर हो गयी थी. आज आकाश में बादल हैं. संगीताभ्यास की जगह नन्हे को आज नरोत्तमदास की एक कविता पढ़ाई. कुछ नया लिखा भी नहीं, उसके लिए भी एक खास मूड की जरूरत होती है जो नितांत एकांत चाहता है. कहीं से कोई व्यवधान न हो मन कल्पना तथा विचारों के धरातल पर विचरने के लिए मुक्त हो, तभी कुछ सृजन सम्भव है. कल रात छोटी बहन का फोन फिर आया, अब वह ठीक है. इतना तो स्पष्ट है कि वे उसकी समस्या को हल करने के विषय में कुछ भी नहीं कर सकते. हर कोई अपना जीवन जीने के लिए स्वतंत्र है और इस बात के लिए भी कि कोई अन्य उस उस पर कितना और किस तरह का प्रभाव डाल रहा है.

‘बड़ा होने की दौड़ में ही लोग अपने जीवन में द्वंद्व पैदा करते हैं. भौतिक उपलब्धियों को अपनी उपलब्धि मानकर उसके सहारे बड़ा होने का प्रयास कितना बचकाना है. मनों के बीच दीवारें तब खिंचती चली जाती हैं जब सभी स्वयं को एक दूसरे से आगे दिखाना चाहते हैं.’ आज जागरण में उपरोक्त विचार सुने. नन्हा अंततः आज स्कूल जा सका. मौसम कल की अपेक्षा ठंडा है. कल शाम माली ने नींबू का एक पेड़ बगीचे में लगाया. जीनिया की पौध भी लगा दी है. कल पेड़ से गिरी अम्बियाँ भी लायी, छोटी-छोटी अम्बियाँ देखकर बचपन के दिनों की याद हो आयी. अल्फ़ा की हिंसा का शिकार कुछ और लोग भी हुए हैं, उन लोगों के घरों में भी शोक का माहौल होगा. मृत्यु किस रूप में और कब मिलेगी कोई नहीं जानता पर असम के राजनीतिज्ञों को चुनाव से पहले बंदूक की गोली से मिलेगी इतना तो कोई भी कह सकता है.



Sunday, August 31, 2014

डाक विभाग की हड़ताल


‘कर्म कामना प्रधान न हो बल्कि भावना प्रधान हो तो कर्म बंधन नहीं होता’. आज सुबह जल्दी उठी तो उपरोक्त वचन सुनने का सौभाग्य मिला. पिछले कुछ दिनों से ‘जागरण’ ठीक से सुन नहीं पायी, घर-गृहस्थी के कार्यों में व्यस्त रही. कुछ दिन तो स्वेटर बिनने में ही गुजरे, जल्दी पूरा करना था. कल सुबह मन अस्त-व्यस्त हो गया जिसका कारण नैनी की कठोर भाषा थी, वह अपने बेटे को बुरी तरह से डांट रही थी. इतने वर्षों उनके घर काम करने के बाद भी वह मीठा बोलना नहीं सीख पायी है, आदत को बदलना असम्भव कार्य है.  

बाबाजी कहते हैं “जिसे भवसागर से तरना है, उसे छोड़ खुदी, खुद मरना है”, भवसागर से तरने की कीमत बहुत ज्यादा है. हर क्षण सचेत रहकर प्रेय और श्रेय का ध्यान रखकर चुनना होता है. मन यदि कामना से मुक्त नहीं कर सकते तो भक्ति का ढोंग रचने से कोई लाभ नहीं होगा. एक ओर तो वह संसार के सारे सुख चाहती है और दूसरी ओर ईश्वर का प्रेम भी पाना चाहती है. परमात्मा से प्रेम का संबंध इतनी आसानी से नहीं बनता और जब बन जाता है तो उसे तोड़ना भी उतना ही मुश्किल है. मन का स्वाभाविक संबंध संसार से है आत्मा का स्वाभाविक संबंध परमात्मा से है. यदि अपने भीतर के सच्चे स्वरूप की स्मृति हो तो सुख की चाह में संसार की गुलामी नहीं करनी पड़ेगी.

आज नन्हे को स्कूल में वाद-विवाद प्रतियोगिता में भाग लेना है, उसने अभ्यास भी किया है. अगले हफ्ते उन्हें घर जाना है लेकिन दो दिन ‘असम बंद’ और एक दिन ‘पश्चिम बंगाल बंद’ के कारण उनकी यात्रा लंबी खिंच सकती है. पिछले दिनों यहाँ का माहौल भी तनावग्रस्त था, कई स्थानों पर हिंदी भाषी लोगों की नृशंस हत्या हुई. संसद में कल एक हफ्ते बाद कार्य शुरू हुआ. डाक विभाग की हड़ताल को भी एक हफ्ता हो चुका है. अयोध्या में राम मन्दिर बने इस पर बयान देकर वाजपेयी जी ने खुद के लिए परेशानी मोल ले ली है. अमेरिका के नये राष्ट्रपति जार्ज बुश होंगे अंततः यह निर्णय ले लिए गया है.

‘ईश्वर से मानव का संबंध सनातन है, वे उसी के अंश हैं, उसका प्रेम ही उनके हृदयों में छलकता है. अज्ञानवश वे इस बात को भूल जाते हैं और स्वार्थपूर्ण संबंधों में प्रेम पाने का प्रयास करते हैं, तभी दुःख को प्राप्त होते हैं’. उपरोक्त वचन सुबह सुने और लिख लिए, सचमुच संबंध जब तक स्वार्थहीन नहीं होंगे तब तक बंधन बना ही रहेगा. स्वार्थ की भावना कामना की पूर्ति हेतु है, कामना अभाव की पूर्ति के लिए है और अभाव का कारण अज्ञान है, अभाव मानव का स्वभाव नहीं है क्यों कि वह वास्तव में पूर्ण है, अपूर्णता ऊपर से ओढ़ी हुई है और चाहे कितनी भी कामना पूर्ति क्यों न हो जाये यह अपूर्णता इन संबंधों से, वस्तुओं से भरने वाली नहीं क्यों कि पूर्ण तो मात्र ईश्वर है वही इसे भर सकता है. इसी तरह, वे मुक्त होना चाहते हैं जबकि मुक्त तो वे हैं ही, बंधंन खुद के बनाये हुए हैं, प्रतीत मात्र होते हैं. जब किसी कामना पूर्ति की अपेक्षा नहीं रहेगी चाह नहीं रहेगी तो मुक्तता स्वयं ही अनुभव में आ जाएगी. उसे लिखते-लिखते ही मुक्तता की अनुभूति हुई.


आज उन्हें बनारस जाना है. कल रात्रि स्वप्न में सभी संबंधियों को देखती रही. मंझले भाई को देखा, उसे बुखार है, फोन किया तो पता चला वास्तव में उसे ज्वर है. कुछ बातें समझ से परे होती हैं.  

Wednesday, August 6, 2014

लालकिले की शान


आज नन्हा स्कूल नहीं गया, कल शाम से उसे ज्वर है, जून अभी कुछ देर पूर्व ही दवा देकर गये हैं. उन्हें एलोपैथी से ज्यादा होमियोपैथी पर भरोसा है. नन्हे ने गर्म पानी से नहा भी लिया है. बचपन में जब उसे ज्वर होता था उसे कहीं जाने नहीं देता था पर अब वह बड़ा हो रहा है, समझ रहा है यह ज्वर तो चला ही जायेगा. कल स्कूल में होने वाली क्विज प्रतियोगिता में भाग ले पायेगा या नहीं इसकी उसे जरूर चिंता है. कल रात से ही वर्षा लगातार हो रही है, असम में कई स्थानों पर बाढ़ पहले से ही आई हुई है. कुछ दिन पहले ही हिमाचल प्रदेश में भी अचानक  बाढ़ आ गयी. कल काश्मीर के श्रीनगर में दो बम विस्फोट हुए, मरने वालों में हिंदुस्तान टाइम्स के फोटोग्राफर प्रदीप भाटिया भी थे. हिजबुल ने विस्फोट का जिम्मा लिया है. कश्मीर को भारत से अलग कर देने की पाकिस्तान की कोशिशें भद्दा रूप लेती जा रही हैं, हजारों की हत्या हो चुकी हा, कितने घायल पड़े हैं, कितने परिवार अनाथ हुए हैं और कितना धन सेना पर खर्च हो रहा है, आखिर इस सब का अंत क्या होगा और कब होगा. आज सुबह जागरण में सुना, साधक की पहली जरूरत है अभिमान मुक्त होना. अभिमानी व्यक्ति छिद्रान्वेषी होता है, वह स्वयं को जानकार व दूसरों को अपने से कम समझता है. ईश्वर की खोज में जाना है तो पहले अहम् का त्याग करना होगा, पूर्ण समर्पण करना होगा.

आज भी नन्हा घर पर है, सुबह के साढ़े आठ हुए हैं, अगस्त की एक भीगी सुबह, चिड़ियों की मिली-जुली आवाजें आ रही हैं, सुबह से वह ज्यादातर नन्हे के साथ व्यस्त रही, उसका ज्वर काफी कम हो गया है. कल दोपहर बढ़ गया था. जून और उसकी देखभाल, दवा और परहेज, गरारे आदि सभी का असर हो रहा है. उसने जून के सामने निश्चय किया है कि वे अपनी बातचीत में किसी पर भी कभी व्यक्तिगत आक्षेप नहीं करेंगे, उन्हें कोई हक नहीं है और ऐसा करके वे अपनी ही नजरों में गिर जाते है और उन्हें पता तक नहीं चलता, न ही कभी समूह में इसमें साथ देंगे. चन्दन तस्कर वीरप्पन ने राजकुमार की रिहाई के लिए नई मांगें रख दी हैं.

शाम के सात बजे हैं. अभी कुछ देर पूर्व ही वे सांध्य भ्रमण करके आये हैं, शाम को कुछ देर तेज वर्षा हुई, सडकों पर पानी भरा था पर हवा में शीतलता और ताजगी थी. तन-मन दोनों तरोताजा हो गये. नन्हे का बुखार अभी तक नहीं उतरा है पर वह दोपहर को कुछ देर सोने के अलावा बिस्तर पर रहना ही नहीं चाहता.

Today is jun’s birthday. He was looking so fresh and good today in the morning. Nanha is doing his home work, is feeling well. He has a made a card also for papa. It is half past ten and she has to go to kitchen, could not write earlier because she was writing a poem for jun in that birthday card which she made on computer. Today in the morning father called to wish jun. today she has made jun’s favorite dishes.

कल उन्होंने ‘स्वतन्त्रता दिवस’ मनाया. कल के आयोजन की तयारी वे पहले ही कर चुके थे. सभी कुछ यथासोच हो गया. मौसम ने भी साथ दिया. सुबह ही भैया-भाभी को फोन किया फिर दीदी का फोन आया, सभी के समाचार मिले. परसों शाम राष्ट्रपति जी का व कल सुबह प्रधानमन्त्री जी का भषण लालकिले से सुना. मन आश्वस्त हुआ, देश की बागडोर अनुभवी हाथों में है, वे असुरक्षित नहीं हैं. पन्द्रह अगस्त को जिस मन से वर्षों पूर्व मनाते रहे थे वही जज्बा आज भी कायम है. नन्हे व जून ने मिलकर झंडा व भारत का नक्शा कम्प्यूटर पर बनाया, प्रिंट लिया और वे उनके बैठक की शोभा बढ़ा रहे हैं. सुबह घर से फोन आया, जो सखी परिचय पत्र लेकर मिलने गयी थीं, उनके लिए माँ-पिता का संदेश व कुछ सामान ला रही हैं.  

 





Sunday, January 5, 2014

राखी का त्योहार


मुझसे काफ़िर को तेरे इश्क ने यूँ शरमाया
तुझको देख के दिल धड़का तो खुदा याद आया

टीवी पर संगीत का सुरीला कार्यक्रम ‘सारेगामा’ आ रहा है. आज दोपहर भी वह गयी थी, राग यमन सिखाया, बहुत कठिन था, सुर पकड़ में नहीं आ रहे हैं. अभ्यास करने से शायद वह किसी हद तक गा पायेगी. संगीत के जादू ने अपने बस में किया है तो वही आवाज में असर भी लायेगा. कभी ये शब्द कितने अनजाने थे पर अब अपने से लगते हैं. आज सुबह उसकी स्टूडेंट नहीं आई तो कुछ पंक्तियाँ लिखीं उस वक्त,

लालकिले की प्राचीर से तिरंगा
जब फर फर लहराता है

कोटि कोटि हृदयों की आशाओं के साथ
कोटि कोटि दिलों में हिलोरें जगाता है

अस्तित्व का प्रतीक गौरव अस्मिता का  
पहचान हमारी सारे जग से कराता है

अख़बार पढ़े तो आजकल हर पेज पर हिंसक वारदातें ही पढने को मिलती हैं. इन्सान कहाँ जा रहा है, इस अंधी दौड़ का कोई तो अंत होगा. रक्षा बंधन के कारण आज नन्हे का स्कूल बंद था, ‘जागरण’ में भारत के पुराने रीति-रिवाजों के बारे में डॉ पंडया के भाषण के कारण उसने नन्हे और जून दोनों को राखी बाँधने को कहा, जून लेकिन दफ्तर जाने से पूर्व उतार गये, देखा-देखी नन्हे ने भी वही किया. ‘जागरण’ में भारत के गौरवपूर्ण अतीत और सुनहरे भविष्य की बात सुनकर विश्वास करने को जी नहीं चाहता. जहाँ हिंसा इतनी गहरे पैठ चुकी हो और भ्रष्टाचार जीवन का अंग बन चुका हो, होकर भी वहाँ सद्गुण अर्थहीन हो जाते हैं. असम में फिर वही तनाव और अराजकता का वातावरण है, जो कुछ वर्ष पहले था जब राष्ट्रपति शासन की घोषणा करनी पड़ी थी. अभी कुछ देर पूर्व भगवद गीता में पढ़ा कि जो कुछ भी हो रहा है वह इस सम्पूर्ण ब्रह्मांड के विशाल क्रियाकलाप का एक अंश मात्र है और इसको न हम रोक सकते हैं न कम कर सकते हैं. आज सुबह उसने oat porridge बनाई, जून को बहुत पसंद है पर उसे उतनी नहीं.

कल से उनके कोरस की रिहर्सल भी शरू हो गयी है, ‘साज’ फिल्म का गीत है, जो १५ अगस्त को ही फिल्म में गाया गया था. शाम को छह बजे क्लब गयी, वापस आते-आते आठ बज गये, ये कुछ दिन कैसे बीत जायेंगे, सम्भवतः एक मोहक याद बनकर साथ रह जायेंगे. रात होने पर गीत का मन ही मन अभ्यास करते हुए नींद कब आँखों में भर आती है पता ही नहीं चलता. नन्हा और जून को थोड़ा और करीब आने का मौका मिल रहा होगा. जून उनकी शाम की चाय के लिए नाश्ते का इंतजाम करते हैं और उस दिन की चाय के लिए भी सारा सामान लायेंगे, उन्हें यह काम बोझ नहीं बल्कि अच्छा लग रहा है उसकी तरह. आज भी मौसम कल की तरह मेहरबान है, पिछले कई दिनों से कोई पत्र आदि नहीं आया है, रेलवेज बंद है, आये दिन आंतकवादियों के बम विस्फोटों के कारण ट्रेनें रोक दी गयी हैं. आज हिंदी में व्याकरण पढ़ाया, उसे लगा सिखाते हुए वह खुद भी काफी कुछ सीख रही है.




Friday, December 27, 2013

रहीम के दोहे


कल शाम को उसे एक फोन कॉल आया, उसे क्लब की अगली कमेटी में जॉइंट सेक्रेटरी का पद  भार सम्भालना है. ख़ुशी हुई, उसने सेक्रेटरी को धन्यवाद दिया जिसने उसका नाम सुझाया था. उसे बाद में लगा वह ठीक से अपनी बात कह भी पाई या नहीं पर अगले ही पल मन ने कहा, भावना देखी जाती है शब्द नहीं. उसे एक और बात याद आई, God gives in the evening if takes in the morning. उसने सोचा वह पूरी निष्ठा से उस काम को करेगी जो उसे सौंपा जायेगा. तीन वर्ष पूर्व वह इस क्लब की सदस्या बनी थी.

आज आसू ने असम बंद की घोषणा की है. नन्हा और जून घर पर हैं. आज धूप बहुत तेज है और गर्मी भी उतनी ही ज्यादा. कल शाम कक्षा चार के एक बच्चे की हिंदी ट्यूशन के लिए एक फोन आया पर जून के अनुसार उसे छोटी कक्षाओं को नहीं पढ़ाना चाहिए, छोटे बच्चों को सम्भालना व पढ़ाना ज्यादा कठिन है बनिस्बत बड़े बच्चों को. उसकी छात्रा जैसी किसी गम्भीर बालिका को पढ़ाना सरल है. कल घर से फोन पर एक उल्लास भरा समाचार आया अक्तूबर में वे सब यहाँ आएंगे.

आज फिर असम बंद है, गर्मी आज हद से ज्यादा है, वे तीनों एसी कमरों में बैठे हैं और ठंडक का आनन्द ले रहे हैं. नन्हा पढ़ रहा है, जून गाँधी जी की एक किताब जो स्वास्थ्य से सम्बन्धित है, पढ़ रहे हैं, उसने कुछ देर क्रोशिए से काम किया और अब लिखना शुरू किया है. Few minutes ago she was hearing news on TV and was not able to concentrate wandering mind for two consecutive news items. Mind always wanders here and there, it demands attention for every second otherwise it slips away like sand through the palms. Today they vacuumed clean their house, took lunch at 11.30 rested for a while and since then doing all above said work. Life at present is sailing smoothly in cool breeze coming from their new AC in Nanhs’s room. Yesterday by mistake she wrote down on next  page and adjoin g empty page was attracting her to pen some thing new and refreshing like Dohas of Rahim, she read some time before.

जीवन एक पहेली है जो बूझे सो ज्ञानी
सपनों सा संसार है आँख खुले तो फानी

हवा, धूप, माटी, गगन और अनल की मूरत
अंतर में जो झांक ले दिखे उसी की सूरत

चिंता, लालच, डाह, प्रमाद, मन के ये व्यापार
तज कर उस की शरण ले उतरे सागर पार

बीता जो वह न रहा भावी से अनजान
जो पल अपने सामने उसकी कीमत जान

यह जग एक सराय है पक्का नहीं मुकाम
आना-जाना अटल है रहने का नहीं काम

सूरज, धरती से मिला अनगिन कर फैलाये
वसुधा कातर प्रेम से फूल अश्रु बरसाए

After so many days clouds have shown their grace and it rained in the morning. At this moment weather is cool, garden is green after a shower. She got up early, perhaps 6 and ½ hours  sleep was not enough, eyes are yearning/paining to be closed but there are so many works and miles to go before she sleeps. Today she has to go music class also. Nanha went to school in a crowded bus today could not get seat also. After two days of ‘BAND all buses have not come today.
  



Wednesday, July 31, 2013

अभी मत जाओ भैया..


आज पूरे चार दिनों के बाद नन्हे का स्कूल खुला था और जून का दफ्तर भी, सो सुबह व्यस्त थी. कल दोपहर का भोज अच्छा रहा, उसकी सखी का घर कुछ बिखरा-बिखरा सा है और इसी तरह उसका मिजाज भी, शायद स्वास्थ्य के कारण, पर सदा ही वह अपने इर्द-गिर्द बुने एक दायरे में ही रहती है. इसके विपरीत एक दूसरी सखी अन्यों की बात सुनती है. तीन दिनों के बाद जून को फिर से जाना है, सो इस साथ को अधिक से अधिक खुशगवार बनाना है. मौसम ने अपना रुख वही रखा है, दिल्ली तथा उत्तर भारत में शीत लहर, कश्मीर में हिमपात और असम में बादल हैं. उनके बगीचे में कैलेंडुला खिल गये हैं, बहुत सुंदर लगते हैं और दो गुलाब भी, उस पौधे में जो मार्केट से लाकर उन्होंने पिछले साल लगाया था.

आज शाम को वे एक मित्र के यहाँ गये, एक शंख तथा ‘की रिंग’ लेकर, पहले किसी भी उपहार को देखकर उसकी सखी ने इतनी ख़ुशी जाहिर की हो, याद नहीं पड़ता, आज का उसका उत्साह देखते ही बनता था, उसे भी अंदर तक छू गया और आज की शाम अच्छी बीती, उसने मन लगाकर चाय बनाई और अपने आध्यात्मिक अनुभवों के बारे में बताया, आजकल वह स्वामी योगानन्द जी की किताब पढ़ रही है, पहली बार जब यह पुस्तक नूना ने पढ़ी थी अद्भुत असर हुआ था, उन दिनों जून अस्वस्थ थे, छोटी बहन की परेशानी भरी चिट्ठी आई थी और उसका मन शांत था, एक अपूर्व शक्ति का अनुभव होता था, ईश्वर पर विश्वास प्रगाढ़ हो गया था और प्रतिक्षण उसे उसकी निकटता का अनुभव होता था. आज भी यह पुस्तक पढ़ना उसे अच्छा लगता है. परमहंस योगानन्द जी जैसे साधकों के कारण ही भारत का स्थान विश्व में अनुपम है. यह एक ऐसा ज्ञान है जिसे हर व्यक्ति को चाहे वह वैज्ञानिक हो या सिपाही व्यापारी हो या विद्वान् सभी को आवश्यकता है. अपने आप को जानने का प्रयास और फिर अपनी कमियों को दूर करने का प्रयास सभी को आगे ही ले जायेगा. प्रारब्ध में आये सभी कर्मों को निस्वार्थ भाव से किन्तु पूरे मनोयोग से करते जाना ही ज्ञानी का लक्षण है. सुख-दुःख, हानि-लाभ में सम भाव रखते हुए जीवन के मार्ग पर चले जाना उस ईश्वर के प्रति कृतज्ञता का ज्ञापन है.

...और आज जून जाने वाले हैं, शाम चार बजे नाईट सुपर से, फिर कुछ दिन उसे ऐसे मिलेंगे जब अपने आप का साथ देना होगा, खुद से बातें करनी होंगी, थोड़ा अपने को बेहतर जानने का मौका मिलेगा और दूर रहकर जून को भी ठीक से देख पायेगी, मन की आँखों से, उनकी याद आएगी, ठीक है पर उदासी नहीं होगी, इसका उसे यकीन है. वह उन दिनों को भी उनकी खूबसूरती के साथ जियेगी. शाम को नन्हे के साथ घूमने जाना फिर उसकी बातें और उसके साथ पढ़ना-खेलना, बीच- बीच में यह कहते जाना, पापा यह कर रहे होंगे ! आज उसने सभी पत्रों के जवाब दे दिए. बुआ जी के यहाँ पोता हुआ है. उन्हें बधाई का पत्र भेजना है. कल शाम वे एक मित्र परिवार में गये, उनका छोटा सा बेटा नन्हे को छोड़ने के लिए तैयार ही नहीं था, बड़ी मुश्किल से वे वापस लौटे.



Monday, March 4, 2013

कक्षा दो का टाइम टेबिल



आज अभी सुबह ही है, शनिवार है, दोपहर को जून घर पर होंगे. कल शाम को उनसे नोक-झोंक हो गयी, वही पुरानी खाने-खिलाने की बात पर. रात को कहने लगे दोपहर को यह सब क्यों बनाती हो, मैगज़ीनस् क्यों नहीं पढ़ती ? अब उन्हें कैसे समझ में आयेगा कि आजकल पत्रिकाओं से उसका मोहभंग हो गया है, उसे कहानियों में भी अब उतना रस नहीं आता, और राजनितिक दांवपेंच में तो बिल्कुल नहीं. आजकल उसे वह हर चीज पढ़नी अच्छी लगती है जो मन को कहीं गहरे छू जाये, कुछ सिखाए या फिर...बस. आज भी मौसम ने बादलों की पोशाक पहनी है. नन्हा स्कूल गया है, डेविस कप के मैच के कारण शायद आज व कल टीवी फिल्म जल्दी दिखाई जायेगी, कल क्लब में ‘जीने दो’ फिल्म थी यूँ ही सी थी, हाँ, जीने का हक सबको है, आजादी से जीने का. वहीं नन्हे की क्लास टीचर मिलीं, उन्हें बता दिया उसने स्कूल न जाने का कारण, मगर रात देर तक सोचती रही, क्यों कहा, कुछ और कह देती. कभी-कभी सच बोलकर भी बेचैनी होती है, झूठ बोलकर भी, ऐसे में चुप रहना भी सम्भव न हो तो ? आज वर्षों बाद बेसन की सब्जी बनायी.

आज फिर चार दिनों बाद डायरी खोली है, इतवार को नन्हे को हल्का जुकाम था, स्कूल नहीं भेजा, उसका भी स्वास्थ्य उन दिनों की वजह से कुछ ठीक नहीं था, स्कूल के दिनों में एक बार कापी में ऐसा ही कुछ लिखा था, उसकी सहेलियों ने पढ़ा तो बहुत हँसीं थीं. कल सभी भाइयों को राखी भेज भी दी. कल दोपहर टीवी पर कछुए पर टाइम टेबिल बनाना देखा, नन्हे के लिए बना रही है. जून कल ज्यादा चुप नही थे, उसके पहले के दो दिनों की तरह, जीवन को पल-पल जीया जाये तो इसमें उदासी के लिए कोई जगह ही नहीं है. स्वामी विवेकानंद की पुस्तक पढ़े काफी दिन हो गए हैं, एक फितरत होती है हर काम को करने की, अभी उसका मन उसे स्वीकारने को तैयार नहीं है, तो वह वह कार्य नहीं कर सकती, लेकिन यह तो मन की गुलामी हुई, वही प्रेरणा का इंतजार करने वाली बात, जो उसे नहीं करना है.

मौसम आज बुद्ध के मध्यम मार्ग का अनुसरण कर रहा है. कल रात भी अच्छी नींद आई, पिछले तीन-चार दिनों से बहुत गहरी नींद आती है, पहले की तरह भेड़ें नहीं गिननी पड़तीं. जून भी कल स्वस्थ लग रहे थे, खुश थे, उनके साथ कभी-कभी बेवजह वह तल्ख लहजे में बात कर देती है, वह ध्यान नहीं देते, शायद समझ गए हैं कि यह उसकी आदत है. लेकिन उन दिनों जब राजयोग पढ़ रही थी ऐसा बहुत कम होता था. उसे लगता है कि दिनोदिन वह  अपने मस्तिष्क का इस्तेमाल करना कम करती जा रही है. उसे नन्हे के लिए छुट्टी का प्रार्थना पत्र लिखने में दो पेज लगे, पहला ठीक नहीं लगा, जब भी उसे कुछ नया लिखना होता है, कलम रुक जाती है, नन्हे से उसने वायदा किया है कि जब वह स्कूल में होगा, उसके लिए एक कहानी लिखेगी.

फिर तीन दिन यूँ ही गुजर गए, शनि को असम बंद था, नन्हा घर पर ही था पर जून ऑफिस गए थे, किसी ने भी रास्ते में नहीं रोका, कितने सच्चे-झूठे डर इंसान ने पाल लिये हैं, आजतक जितने भी बंद होते थे, लोग घरों से नहीं निकलते थे, पर अब कार लेकर जाते हैं. रविवार को वह असमिया सखी के यहाँ गयी, उसने फ्लोरा मशीन खरीद ली है, उसे सिलाई-कढ़ाई का शौक भी है, उस दिन एक तेलगु परिवार में गयी थी, वहाँ भी आजकल बहुत सी चीजें बना रही हैं गृहणी, वाल हैंगिंग, टीवी कवर, पेंटिंग और भी बहुत कुछ, बंगाली सखी को बागवानी का बहुत शौक है, एक उसे ही कोई खास शौक नहीं है किसी एक चीज का, हाँ, थोडा बहुत सभी का है. कल फोन पर पुरानी पड़ोसिन से बात की, बाद में लगा कि वह थोडा और विनम्र हो सकती थी, लेकिन यह रूखापन आया कहाँ से...उसकी कोई बात उसे चुभी और...इसका अर्थ हुआ कि अब भी वह वहीं की वहीं है, आदिम आदतों से पीछा छुड़ाना इतना आसान तो नहीं. कल दोपहर खतों के नाम थी. कल क्लब में मीटिंग है उसे इंतजार है, लगता है इतने वर्षों तक क्यों नहीं गयी, खैर, हर चीज का एक वक्त होता है. कल व परसों रात को दो कहानियाँ बुनीं थीं, देखेगी, कहाँ तक उतरती हैं पन्नों पर. जून ‘कक्षा दो’ के लिए, एक सुंदर सा टाइम टेबिल बना कर लाए हैं, नन्हे की क्लास टीचर बहुत खुश होंगी.







Thursday, September 20, 2012

बढता हुआ शोर...



प्रातः के साढ़े छह बजे हैं. घर में इतनी आवाजें हैं कि मन को एकाग्र कर पाना मुश्किल लगता है. नीचे बाबूजी के कमरे में उच्च स्वर में बजता ट्रांजिस्टर, साथ वाले घर में झाड़ू और बाल्टी की उठापटक की आवाजें, उस घर की महिला शायद घर धो रही हैं. ऊपर से ननद और पड़ोसी के बच्चे की जोर-जोर से बातें करने की आवाज. गनीमत है नन्हा अभी सोया है, नहीं तो यह जो इतना एकांत मिला है, वह भी नहीं मिलता. अब उसके उठने पर या टीवी समाचारों के बाद ही वह ऊपर जायेगी दोनों में से जो भी पहले हुआ. जून को कल शाम को एक और पत्र लिखा, जब कुछ और नहीं सूझता तो पत्र ही लिखती है और दस-पन्द्रह मिनट में पत्र का एक-एक कोना भर जाता है पता नहीं कैसे. उसको लिख दिया है भूल से कि एक ही पत्र मिला जबकि पिछले हफ्ते दो पत्र मिले थे. उसने सोचा है कि माँ-पिता के लिए एक शब्द-चित्र लिख कर भेजेगी इकतीस मई के लिए जब पिताजी रिटायर हो रहे हैं. शोर बढता ही जा रहा है, वहाँ असम के घर में कितनी शांति रहती थी सुबह-सुबह...जल्दी से ये दिन बीत जाएँ और वह जून के पास वापस.. अखबार वाले ने दो दिन बाद आज फिर पेपर दिया है.

सुबह के पाँच बज कर दस मिनट. उसने सोचा है एक घंटा पढ़ाई कर छह दस से कार्य आरम्भ करेगी. देखे कहाँ तक सफल होती है अर्थात शोर शुरू हो गया तो...अभी तक तो सब कुछ शांत है. कहीं से लाउडस्पीकर की आवाज भी नहीं आ रही है. अब उसे लगता है कि नीचे ही बैठना चाहिए. नन्हे को छत पर से उठाकर ला रही थी तो वह रोने लगा कि छत पर ही सोना है, पर उसे अकेले छोड़ा नहीं जा सकता था. मना कर लायी, ये छोटे-छोटे बच्चे भी भी...बस, अब कैसे चुपचाप सोया है.

मई का प्रथम दिन..मई का महीना यानि उसके जन्मदिन का महीना..इस वर्ष वह एक कम तीस की हो जायेगी. उसे खुद नहीं लगता कि उम्र इतनी हो गयी है न तन से न मन से. तभी उसे ख्याल आया देखें, जून उसके जन्मदिन पर क्या देंगे. ३१ को पिताजी रिटायर हो रहे हैं, यानि उनकी उम्र ५८ की हो गयी है. उससे दुगनी. दीदी तेतीस की हो गयी. आजकल में सभी के पत्रों के जवाब देने हैं. सुबह के सवा छह बजे हैं बनिस्बत आज शोर कम है वह ऊपर के कमरे कम किचन में बैठी है, नन्हा पास ही सोया है. कल देखी हुई फिल्म आयी थी पर बोर नहीं लगी, कहीं पढ़ा था कि देखे हुए टीवी कार्यक्रम या फिल्म मस्तिष्क को ऊर्जा से भर देते हैं. आज उसका मन शांत है, मई आरम्भ हुआ है शायद उसी का असर है, शांत पानी पर तिरती नाव का सा शांत. वह शब्द चित्र जिसके लिखने की बात उसने तय की थी आज से ही आरम्भ करेगी. इसी डायरी के खाली पन्नों पर. जून तो ऑफिस जाने की तयारी में लगे होंगे शायद स्नान कर रहे हों, या तैयार होकर उसे पत्र ही लिख रहे हों उसने मन ही मन उसे शुभ प्रभात कहा.