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Saturday, June 20, 2020

पासीघाट के सन्तरे


आज इतवार था, सुबह के सभी कार्य, प्रातः भ्रमण, योग आदि बड़े इत्मीनान से किये, बिना किसी जल्दबाजी के. नाश्ते में अप्पम बनाये ढेर सारी हरी सब्जियां डालकर. बगिया में हरे प्याज, गाजर, गोभी आदि हो रही हैं. यह अंतिम वर्ष है जब वे सब्जियां उगा रहे हैं, अगले वर्ष से महानगर में सम्भवतः फूल ही उगा पाएंगे या सजाने के लिए गमलों में कुछ हरे पौधे. दोपहर को बच्चों को योग सिखाया साथ ही गणित भी, उन्हें बहुत आनंद आया. एक लड़का बहुत उदास था, अगली कक्षा में उसका दाखिला अभी तक नहीं हुआ है, बच्चों के लिए स्कूल जाना कितना जरूरी है , उससे बात करके लगा. एक बच्चे का पैर सूजा हुआ था, उसे अभी तक इलाज नहीं मिला, माता-पिता को सन्तान के प्रति ज्यादा सजग होना चाहिए पर... शाम को एक बाल फिल्म का एक अंश देखा. एक किशोरी अपनी सखियों के साथ सागर तट पर जाती है पर घर पर बताकर नहीं आयी है, सबके माँ-पिता कुशंकाएँ करने लगते हैं. मन कितनी जल्दी भयभीत हो जाता है, आत्मा अभय है सदा एक सी ! 

अभी वे रात्रि भ्रमण से लौटे, पिटूनिया के फूलों  का लाल रंग हल्के प्रकाश में सुंदर लग रहा था. आज दोपहर छोटी बहन से वीडियो कॉल पर बात हुई. वह मेथी काट रही थी, वीडियो कॉल पर बात करो तो लगता ही नहीं कि हजारों मील की दूरी है, उसका घर जैसे पड़ोस में आ गया हो. बताया, उसकी छोटी बिटिया विदेश पहुँच गयी है. बहनोई विदेश जाने वाले हैं, उनके लिए लिखी कविता का अंतिम भाग समझ में नन्हीं आया, ऐसा बताया. परमात्मा को भीतर या बाहर अनुभव किये बिना समर्पण का गीत गाया नहीं जाता. शाम को भगवद्गीता के एक श्लोक का भावार्थ सुना, आचार्य प्रद्युम्न कितनी अच्छी तरह भक्ति भाव में डूबकर गीता की व्याख्या करते हैं. कर्मयोग, भक्तियोग, ज्ञानयोग को बहुत सरलता से परिभाषित कर देते हैं. उसके पहले प्रेसीडेंट से मिलने गयी, उनका गला खराब है, पर क्लब का काम करने का उनका उत्साह देखते ही बनता है. उनके लिए विदाई कविता लिखनी है. दोपहर को पावर ऑफ़ नाउ का एक और अध्याय पढ़ा.उनके भीतर एक छाया शरीर भी होता है जो पीड़ा से ही पोषित होता है. पुराने नकारात्मक संस्कार तथा घटनाएं जब कभी जागृत हो जाती हैं तब वह शरीर मुखर हो जाता है और वे स्वयं को भूल जाते हैं, अपने स्वरूप से डिग जाते हैं. उसके भीतर भी हीन भावना, ईर्ष्या, अहंकार तथा दम्भ के रूप में पुराने संस्कार हैं, जो अचेत होने पर उभर आते हैं. दुबई से वापसी की यात्रा में कुछ पलों के लिए कैसी विवेकहीनता छा गयी थी, जैसे वह वह नहीं थी, कोई अन्य ही था. चाय के प्रति आसक्ति भी इसी छाया शरीर की मांग पर टिकी है, आत्मा को कोई अभाव नहीं है . उसे किसी सुख के लिए किसी वस्तु, व्यक्ति या परिस्थिति पर निर्भर होने की जरा भी आवश्यकता नहीं है. आज मकर संक्रांति है, कल वे पासीघाट जा रहे हैं, अरुणाचल प्रदेश में स्थित यह स्थान सेंटरों के लिए प्रसिद्ध है. कल से कुम्भ भी आरम्भ हो रहा है. 

उसने फिर उस वर्षों पूर्व की डायरी का अगला पन्ना खोला, कुछ कविताएं कालेज की पत्रिका में छपने के लिए दीं थीं उसी दिन. एक कविता तो अवश्य छपेगी उनमें से ऐसा भी लिखा था.  अगले पन्नों पर वे कविताएं थी जो रेडियो पर सुने कवि सम्मेलन से लिखी थीं, 

जिंदगी जैसे शिकन रुमाल की 
एक नन्हीं सी लहर है ताल की 
जिंदगी है एक चिड़िया डाल की  
देखते ही देखते उड़ जाएगी 

बादलों में छिप गयी वह धूप है 
घूँघटों में कैद गोरा रूप है 
एक गिरते फूल का मकरन्द है 
एक झूठे प्यार की सौगन्ध है 
आंसुओं के नीर में बस जाएगी 
कुंवर बेचैन 

जीना  हो तो मरना सीखो गूँज उठे यह नारा
हर आँधी का उत्तर हो तुम, तुमने नहीं विचारा 
.............

सोचो तुमने इतने दिन में कितनी बार हुंकारा 

बाल कवि बैरागी  

है महानगर में शोर शोर में महानगर 
नागरिक नहीं रहती है भीड़ यहाँ, 

ये पंक्तियाँ किसकी हैं, नहीं लिखा है. 


Tuesday, June 9, 2020

अतीत और वर्तमान


वर्तमान के इस छोटे से क्षण में अनंत छिपा है, जिसने इस राज को जान लिया, वह मुक्त है. मन सदा अतीत में ले जाता है, या भविष्य की कल्पना में, वर्तमान में आते ही वह मिट जाता है. उसे टिकने के लिए कोई आधार चाहिए, वर्तमान का क्षण इतना छोटा है कि उसमें कोई शब्द नहीं ठहर सकता, मन शब्द के सहारे ही जीवित रहता है. उस पुरानी डायरी में पढ़ा, वह फिर कड़वा बोली, कितनी बार कहा है खुद को, अपने तुर्श मिजाज को बदले, उसे पछताना पड़ेगा. जितना कम बोलेगी उतना सही बोलेगी, जितना ज्यादा बोलेगी उतना गलत बोलेगी. जहाँ जानकारी न हो या कोई मतलब न हो वहाँ रहकर चल रहे वार्तालाप में भाग लेने की क्या जरूरत है, अन्य की बातों में दखल देने में क्या तुक है ? कालेज में जब एक खाली पीरियड था, वह कुछ लिख रही थी, उसके हाथों और आँखों की गतिविधियों को देखकर एक छात्रा ने अनुमान लगा लिया कि वह उनके बारे में कुछ लिख रही है. उसने कालेज के कार्यक्रम में कविता पाठ किया है सो इतना तो वे जानती हैं कि उसे लिखने का शौक है. वह उसके निकट आकर वही सब कहने लगी जो पहले भी दो छात्राएं कह चुकी हैं, फिर यह कि मैथमैटिशियन हैं, दिमाग चढ़ा हुआ है. वह चुपचाप सुनती रही. मन में एक नाम कौंध गया, उसका नाम लेते ही उसकी सारी परेशानियाँ दूर हो जाती हैं, क्या जादू है उसके नाम में या उसके नाम के प्रति उसकी आस्था में. आस्था सिर्फ नाम में है उसमें नहीं पर यह कौन मानेगा ? वह कविता उसने एक छात्रा को दे दी, पता नहीं उसे कैसी लगेगी. अपनी एक प्रिय सखी को देती तो प्रतिक्रिया उसके अनुकूल होती, वह तो मिली नहीं जिसके लिए लिखी थी. कोई एक ऐसा वाक्य लिखने का मन होता है जिसमें उसकी सारी भावनाएं समा जाएँ और वह वाक्य सुकून भी दे - तुम्हारी आँखें हर वक्त मुस्कुराती क्यों हैं ? 

मन ही वह राक्षस है जिसका दमन करके पुरुष  अवतारी कहलाये, मन ही वह मार है जिसका सामना बुद्ध ने किया. मन के अनुसार नहीं चलना है, उसको उसका सही स्थान दिखाना है. एक साधक यदि मनमुख होकर जीता है और अपने विवेक का अनादर करता है तो उसे साधक कहलाने का अधिकार नहीं है. मन को मारना आत्मा को जगाना है. कल रात्रि पुनः वही स्वप्न देखा, ‘वह कौन है’ इसका उत्तर जिसमें मिला. स्वप्न शुरू होता है तो वह एक पार्टी में है, जून की कोई ऑफिशियल पार्टी है. साथ में बड़ा भांजा भी है. उसके पास एक बैज है जिसे वह लगाना चाहती है, पर वह जून का है और वह लगाना नहीं चाहते. फिर अचानक वर्षा होने लगती है. वह उठ जाती है. और बाहर निकल आती है. कुछ दूरी पर ही कुछ महिलाएं बैठी हैं, जहाँ जाना है पर रास्ता कच्चा है और ढलान है. वह उतरती है तो कुछ पत्थर भी गिरने लगते हैं, पर सुरक्षित पहुँच जाती है. वर्ष संभवतः रुक गयी है, आगे चल पड़ती है, आगे रास्ता चौड़ा है और सुनसान है. काफी दूर निकल जाने के बाद लौटने का मन होता है तो सड़क पर आते वाहन दिखते हैं, बड़े-बड़े वाहन गुजर जाते हैं फिर एक बड़े से रथ पर कृष्ण और अर्जुन की मूर्ति दिखाई देती है. एक दूसरे विशाल रथ में केवल कृष्ण की. फिर आवाज आती है, माँ, माँ, माँ, माँ  और नींद खुल जाती है. माँ की ध्वनि इतनी तीव्र और स्पष्ट थी, मधुर थी. वह किस  की आवाज थी, वर्षों पहले भी किसी ने माँ कहकर उसे जगाया था. यशोदा का अर्थ है दूसरों को यश देना, जो उसे अच्छा लगता है. 

कालेज से लौटने पर पहला काम जो उसने किया वह था पुनः जून के उस पत्र को पढ़ना, जो बहुत प्रतीक्षा के बाद मिला था. हर बार पढ़ने पर नया लगता, उसने कहा है, फालतू बातें मत सोचा करे ! मन लगाकर पढ़े, यही तो उससे होता नहीं. प्रयत्न करेगी.  स्टीवेन्सन की उस कहानी के पात्र की तरह वह किन्हीं अदृश्य हाथों द्वारा संचालित होती है. डायरी में पेज के ऊपर लिखा आज का वाक्य है ‘निष्क्रियता मनुष्य के लिए अभिशाप है’ अभी नजर गयी उस पर, वह भी उसे समझा रहा है. आज सुबह कालेज जाते समय दो छोटे बच्चों की बातें कानों में पड़ गयीं, आपकी नाक कितनी लम्बी है, आपके बाल कितने घुंघराले हैं ! और वह बच्चियां .. आओ दीदी, झूल लो, फिर वह छोटी लड़की... यह लड़की हँसती जा रही है. बस में भिखारी बच्चा उसके घुटने को छूकर पैसे मांगने लगा ... यह सब बच्चे उसे कभी -कभी बहुत उदास कभी बहुत खुश नजर आते हैं. उसे बच्चों को देखकर लगता है, अभी स्पंदन है, धरती जीवित है... जीवन है ... सारिका का स्मृति विशेषांक मिला, पूरा तो नहीं पढ़ा है पर जितना पढ़ा बहुत अच्छा लगा. काफी दिनों बाद सारिका का साहित्यिक, आध्यात्मिक तथा सांस्कृतिक रूप देखने को मिला. 



Monday, August 31, 2015

कृष्ण का जादू


आज पूरा एक महीना हो जायेगा बच्चों को आये हुए, कल ननद-ननदोई जी यानि उनके माँ-पापा आ रहे हैं, घर में गहमा-गहमी और बढ़ जाएगी. एक हफ्ता वे रहेंगे. दोपहर को किचन साफ करवाना है. कल व परसों जून ने भी घर की सफाई पर विशेष ध्यान दिया. मौसम अपेक्षाकृत गर्म है, नये कमरे की छत परसों डाल दी गयी, वर्ष के अंत तक सम्भवतः कमरा तैयार हो जायेगा. टीवी पर गुरूजी बता रहे हैं, ज्ञान, भक्ति और कर्म तीनों साथ-साथ चलते हैं. वह यह भी कह रहे हैं कि think globally and buy locally.
फिर एक अन्तराल.. आज सभी वापस चले गये, सासु माँ यहीं हैं. उसे लगा था कि उन सबके जाने पर एक क्षण के लिए भी उसे कोई दुःख नहीं होगा, पर एक पल को मन भारी हो गया, बस एक पल को ही. पिछले एक-सवा महीने से घर में चहल-पहल थी, अब फिर पहले की सी शांति है. वह साक्षी है मन की इस दुर्बलता की, इसका अर्थ हुआ कि वह उनके होने से सुख पा रही थी, तो भीतर का अनंत सुख कहाँ चला गया ? लेकिन विरह का दुःख तो कृष्ण को भी सताता था. प्रेम में विरह स्वाभाविक है ही, सम्भवतः यह विशुद्ध प्रेम है जो हल्की सी कसक बन कर उसे सता रहा है, पर उसे पता है यह क्षणिक है. अभी कुछ देर में वह टहलने जाएगी तथा लौटकर अलमीरा सहेजनी है. टीवी पर एक वक्ता ओजस्वी प्रवचन दे रही है.. ओज और तेज के पुंज बनकर उन्हें समाज में क्रांति लानी है, संबंधों में गर्मी को पैदा करना है. पिछले महीने वह सेवा कार्य में जा सकी, एक दिन ईर्ष्या ने ग्रसित किया तथा एक दिन क्रोध की हल्की अग्नि ने भी, पर इस वक्त जो भीतर घट रहा है वह इस सबसे अलग है, वह है हल्की सी पीड़ा..उसके भीतर यह भी एक दोष है कि दूसरों की गलतियाँ बहुत देखती है. छोटों की तो दूर, बड़ों की भी. मुस्कान पर भी पहरे लगा दिए हैं. गुरूजी कहते हैं, ‘हँसों और हँसाओ’ उनकी बात पर चलना तो उसका फर्ज है, तब जीवन कितना सरल हो जायेगा. चार दिनों का यह जीवन उन्हें इसलिए तो नहीं मिला है कि दूसरों की पुलिस बनें तथा अपने सिर पर कर्जा चढ़ाएं, बल्कि मुस्कुराते-मुस्कुराते जीवन के पथ पर आगे बढ़ने के लिए मिला है. गाना, नाचना, मुस्काना और कविता करना..ध्यान तो इन सबकी परिणति होगा तब ! कल शाम नन्हा भी दो-तीन दिनों के लिए बाहर जा रहा है. 
टीवी पर भजन आ रहा है. तिरछी चितवन, बांकी मुस्कन मेरे नन्द गोपाल, संग में राधा रानी सोहें शोभा बड़ी कमाल ! कान्हा को याद न करना पड़े वह अपने आप ही याद आता रहे तब जो रस आता है..उसकी कोई तुलना नहीं..पर कृष्ण को याद करना पड़े या वह याद आए लाभ तो दोनों ही स्थितियों में है. फिर उसे याद करे, यह प्रेरणा भी तो भीतर से वही देता है न..भगवान भी भक्त से दूर नहीं रह सकता, जब उसे याद न करो तो उसे भी ही उतना ही खलता है. दरअसल वह एक बार जिसे अपना बना लेता है या मान लेता है तो वह अनंत जीवन तक उसका साथ नहीं छोड़ता. तभी तो जब उसका मन संसार में उलझ जाता है तो वह मनमोहन भीतर से कोहनी मारता है, चुटकी काटता है. परमात्मा से प्रेम करो तो वह सौ गुना लौटाता है. वह होगा अनंत ब्रह्मांडों का नियंता..पर भक्त के लिए तो वह उसका अपना है, जिसके गीत गाते-गाते वह थकता नहीं है. जो प्रीत की साकार प्रतिमा है, ऐसा कान्हा उसका मीत है..



Thursday, March 13, 2014

पीपल का पेड़



कल शाम को जून का फोन आया, वह होटल जाने से पूर्व ही छोटी बहन के यहाँ उतर गये, अच्छी बात है अपनों के प्रति स्नेह और सम्मान प्रकट करना और मन में होना. कल रात भी स्वप्न देखे, अजीब से स्वप्न. नन्हा भी सुबह एक बार उठा, उसे हल्का जुकाम हो गया है, आज गणित का टेस्ट नहीं दे पायेगा. मौसम फिर ठंडा हो गया है. कल शाम जब वह उसे पढ़ा रही थी, एक मित्र परिवार आया, वे नन्हे के लिए किताबें लाये थे, इस साल उसके पास कई किताबें हो गयी हैं, पढने के लिए उचित माहौल घर में बन रहा है. स्कूल में भी है. कल शाम वह अकेले टहलने गयी, शाम ठंडी थी और सडकें लगभग खाली, घर से निकलते ही पीपल की सूनी टहनियों पर उगे नये कोमल पत्ते दिखे, एक पंक्ति मन में कौंधी जो अब याद नहीं है. हवा चेहरे को सहलाती हुई बह रही थी और आँखें जैसे हरियाली को पी लेना चाहती थीं. क्लब के सामने से गुजरते हुए महसूस हुआ कि पेड़ भी विद्यार्थियों की तरह हैं, कुछ ने नयी ड्रेस पहन ली है और तैयार हैं, कुछ ने अभी तक कपड़े नहीं बदले हैं, असम में पतझर नहीं होता इस बात का प्रत्यक्ष उदाहरण दिखा. आज सुबह ‘कन्हैया लाल प्रभाकर’ का निबंध पढ़ा, पढ़ाया, देश प्रेम की भावना से युक्त लेख मन पर असर करता है. अब से तीन बजे तक पांच घंटे उसके पास हैं, जिनमें एक भरपूर जीवन जीना है.

आज आखिर सफाई करने का मुहूर्त निकल ही आया और उसने नन्हे के स्कूल जाते ही काम शुरू कर दिया. साढ़े दस बजे तक तीनों कमरे स्वच्छ हो गये. घर आज बेहद अच्छा लग रहा है. उसके बाद भोजन, पत्रों के जवाब, विश्राम और दिन कैसे बीत गया पता ही नहीं चला. एक सखी का फोन आया, उसने कल नन्हे और उसे लंच पर बुलाया है, कहने लगी, जून के न रहने से उन्हें अकेलापन लगता होगा, पर सच तो यह है कि उन्होंने अकेलेपन को स्वयं पर हावी नहीं होने दिया है, स्वयं को काम में व्यस्त रखकर और सामान्य दिनचर्या अपनाकर ही ऐसा सम्भव हुआ है. उनका कम्प्यूटर गोहाटी से रवाना हो चुका है शायद एक-दो दिनों में पहुंच जाये. कल स्कूल से आकर जब नन्हे ने किसी बच्चे से सुनी, डीपीएस में दाखिले के लिए किसी के एक लाख रूपये डोनेशन देने की बात कही तो कुछ देर के लिए तो वह सन्न रह गयी, पर फिर मन अपने रस्ते पर आ गया कि इस बात में कितनी सच्चाई है कहना कठिन है. जून के लिए एक पार्सल भी कोरियर से आया है, उन्हें फोन पर सारी खबरें देनी हैं, पर जब फोन आता है वह अन्य सब भूल जाती है.

They are ready to go to friends house, she and Nanha. Day is warm today, full of sun shine. Woke up at 6 am and taught till 8. Washed some clothes, linen etc, their Dhobi is away since last one and half month, washing machine is doing his job efficiently. Last night jun called and told about his presentation. His voice was nice to hear, clear and full of love, he is happy there, change of place and journey makes one happy generally. They are also fine, there is so much to do. They do not have a single moment to worry about , of course his presence is needed but he has made them strong enough. Just now phone rang but before Nanha had picked it up, it stopped. Who wants to talk to them… to two persons ?, who are going to share food with friends on this pleasant April noon !

आज पड़ोसिन ने दोपहर के खाने पर बुलाया है, नन्हा भी स्कूल से आकर वहीं खायेगा, सो आज का दिन भी व्यस्त रहेगा, आज संगीत की कक्षा भी है. उसने कल शाम और आज सुबह भी कुछ देर अभ्यास किया. फिर सोचा, देखें, उनकी कसौटी पर कितना खरा उतरता है उसका अभ्यास, शांत मन से बिना विचलित हुए अपना कार्य नियमानुसार करना, अपने आस-पास होती घटनाओं तथा प्राकृतिक सुन्दरता/बदलाव के प्रति सजग रहना ही एक सचेतन मन की निशानी है, जे कृष्णमूर्ति ने इस पुस्तक में बच्चों के लिए कई ज्ञानवर्धक उपयोगी बातें कही हैं लेकिन साथ-साथ वह यह भी कहते हैं कि बच्चों की उत्सुकता को, उनकी प्रश्न पूछते रहने की प्रवृत्ति को न दबाएँ, उन्हें खिलने, आगे बढने के लिए पूरा स्पेस दें, उन्हें अच्छी आदतें सिखाएं जरूर पर उन पर लादें नहीं बल्कि उन्हें इस योग्य बनाएं कि वह स्वयं अपना अच्छा-बुरा समझें, हर वक्त एक आज्ञा की छड़ी लिए उनके पीछे-पीछे फिरना उन्हें कुंठित करता है, वे एक स्वतंत्र व्यक्तित्त्व हैं और उन्हें हमारे स्नेह और सम्मान की जरूरत है न कि डांट-फटकार की, जून का फोन आज आयेगा, और दो दिन बाद वे लौट आएंगे, सम्भव है, बड़ा भांजा और छोटी भांजी भी उनके साथ आयें.  





Wednesday, August 14, 2013

आखिर किसे दें वोट


वे यात्रा से कुछ दिन पहले वापस लौट आये, अप्रैल के भी दस दिन बीत गये हैं, परसों बैसाखी है, आज बहुत दिनों बाद कुछ लिख रही है वह, हर दिन सुबह  कोई न कोई काम आ जाता था और दोपहर को याद ही नहीं आया...लेकिन कलम हाथ से खिसका जा रहा है, अर्थात लिखाई बिगड़ी जा रही है, लगता है शुभ मुहूर्त अभी नहीं आया है.

१९ अप्रैल. आज नन्हे ने पहली बार उसके सामने जानबूझ कर झूठ बोला, पता नहीं उसने ऐसा क्यों किया, उसकी आदतें कुछ बदलती जा रही हैं. रोज सुबह  की घबराहट और सुबह का मूड, शायद वह बड़ा हो रहा है, किशोरावस्था की शुरुआत है यह, धीरे-धीरे दुनियादारी सीखता जायेगा या फिर बच्चे भी उतने निर्दोष और भोले नहीं होते जितना लोग उन्हें समझते हैं, उसके अपने बचपन की कुछ घटनाएँ जो आज तक उसे याद हैं, इसका प्रमाण हैं. लेकिन वह नन्हे को ऐसा कुछ नहीं करने देगी कि बड़ा होकर वह भी उन बातों को याद करके पश्चाताप करे. आज सुबह ‘जागरण’ में बापू ने ईश्वर के अवतारों के बारे में बताया. ईश्वर बार-बार हंमारी सहायता करते हैं, प्रेरणा देते हैं मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं लेकिन हम कृतघ्न होकर उन्हें धन्यवाद देना तो दूर याद भी नहीं करते.

आज वह बगीचे से तोड़ी शिमला मिर्च की सब्जी बना रही है, किचन से उसकी खुशबू यहाँ तक आ रही है नन्हे का स्कूल बंद है. परसों शाम वे क्लब से आ रहे थे कि असम के मुख्यमंत्री श्री सैकिया जी के देहांत का समाचार मिला, आज उनका अंतिम संस्कार नाजीरा में किया जायेगा, सभी को उनकी असामायिक मृत्यु का दुःख है. तीन दिन बाद चुनाव शुरू हो रहे हैं, पर उसका नाम वोटर लिस्ट में नहीं है सो वोट देने नहीं जा पायेगी हालाँकि उसका मन बहुत है. पर अभी तक यह तय नहीं कर पायी है अगर जाती तो किसे वोट देती, कांग्रेस या बीजेपी, शायद उस वक्त जो मन में आता वही करती. कल शाम वे एक मित्र के साथ यहाँ से कुछ दूर स्थित एक मन्दिर में गये, मौसम बहुत अच्छा था, ठंडी हवा चेहरे को सहलाती जा रही थी और खेतों में फैली हरीतिमा मन को. मन्दिर जाना और आना अच्छा लगा पर वहाँ पूजा करना उसके बस की बात नहीं है, यह इतना निजी मामला है उसके लिए कि सबके सामने करना कुछ अच्छा नहीं लगता. इस वक्त नन्हा सामने बैठकर ‘साइंस वर्कबुक’ में अभ्यास कर रहा है पर कितने-कितने प्रश्न पूछता है,, हर दूसरे मिनट में एक प्रश्न उसे भी तभी अच्छा लगता है जब वह खुशदिल रहता है, थोड़ी देर भी चुप हो जाये या गम्भीर तो लगता है पता नहीं क्या कारण है. उसका स्कूल अब कुछ ही दिन और खुलेगा  फिर ग्रीष्मावकाश के लिए बंद हो जायेगा, उन दिनों उसे व्यस्त रखने के लिए उसे कुछ रोचक कामों के बारे में सोचना होगा.

Today again after so many days at 10 am she is with herself alone. Almost all the work is done and all is silent around her. Dada Vasvani told about life after death, He says that there is a thin curtain between living and dead, and he gave an example of a dead mother, who was helping her son. I may be true but till today she has seen dead persons only in dreams. One day when she will be dead she may find the truthfulness of this, and then she will also help others. किन्तु ये बातें अभी यही रहने दें क्योकि अभी कई साल उसे और जीना है, एक जीवित व्यक्ति को मृत्यु कितनी दूर की चीज लगती है. परसों यहाँ चुनाव के कारण छुट्टी है, फिर इतवार है और सोमवार को कोई मुस्लिम त्योहार  है, शायद इस बार ईदुलजुहा है. परसों ही उनके एक मित्र के यहाँ विवाह की वर्षगाँठ में जाना है, उसने सोचा उसके लिए अगर वह एक कविता लिखे तो क्या उसे पसंद आएगी. हफ्तों हो गये कोई अछूता सा अहसास मन को हुए, जैसे.. गन्धराज के फूलों से खुशबू उड़कर हवा को नशीली बना दे, या बादलों के घरौंदों में कोई उड़ता पंछी कैद हो जाये, वह उड़ता पंछी चाँद भी हो सकता है और सूरज भी ! आज दोपहर को कल शाम की तरह उसे लेडीज क्लब के काम के सिलसिले में एक सदस्या के यहाँ जाना है, और वापसी में पैदल आयेगी, ठंडी हवा और हरियाली के  साथ. उसने सोचा, जून अगर उसकी बातें पढ़ लें तो हंसेंगे या फिर वह कुछ समझेंगे ही नहीं, महीनों बीत जाते हैं उन्हें कभी डायरी उठाते, जबकि शुरू-शुरू में वह हर शब्द पर ध्यान देते थे, तब उसे जानने की इच्छा थी पर अब वह उससे जान-पहचान कर चुके हैं, बहुत अच्छी तरह से.



Saturday, October 20, 2012

बच्चे मन के सच्चे



पिछली बार उसने शिकायत की थी सो इस बार जून पहले से उसके लिए नए वर्ष की कत्थई डायरी रखकर गए हैं, पहले पन्ने पर शुभकामना भी लिख दी है. उसकी यह पंक्ति पढकर मन कुछ स्थिर हुआ है वरना नए वर्ष का पहले दिन इतना उलझन भरा है कि बस.. सब कुछ गड्डमड्ड हो रहा है सुबह से. ऊपर से लाइट भी गायब है. बिजली है मगर उनके यहाँ तार हिल जाने से नहीं आ रही. एक तो इतनी देर से आँख खुली, सारी परेशानी तभी से शुरू हुई, सर में हल्का दर्द भी है, शायद घर से बाहर निकलने पर खुली हवा में ठीक हो जाये. चुपचाप आंख बंद करके बैठी रहे ऐसा ही मन हो रहा है इस समय, पर नन्हे ने ठीक से नाश्ता नहीं किया है, उसने सोचा उसके न रहने पर भी तो ऐसे ही करता होगा. उठो लेट तो सभी काम लेट हो जाते हैं, ग्यारह बजे हैं, बारह बजे वह स्कूल जायेगी, तैयार होने में उसे विशेष देर नहीं लगती. कल रात जून को स्वप्न में देखा, क्लब में है, वह नन्हे को लेकर पैदल ही क्लब जा रही है. वहाँ नए साल का कार्यक्रम है. कल रात नव वर्ष की पूर्व संध्या पर टीवी पर उन्होंने दो अच्छे कार्यक्रम देखे, शायद इसी का परिणाम था यह स्वप्न.

कल दिन की शुरुआत जितनी उलझन भरी थी अंत उतना खराब नहीं था. जून को पत्र लिखते लिखते ही मन हल्का हो गया. उसके प्यार ने हर बार उसे डूबने से बचा लिया है. उसके स्नेह की कोई सीमा नहीं, भले ही उसने वादे न किये हों पर...आज उसका भी पत्र आयेगा. कल गोपिराधा में आठवीं में बहुत दिनों बाद गणित पढ़ाया, ठीक था मगर आज कल से भी अच्छी तरह पढ़ाना होगा, ज्यादा बड़ी प्रमेय है आज. ननद का जन्मदिन है आज, वह शाम को उसे उपहार दिलाने ले जायेगी. कल बड़ी बुआजी का पत्र आया बहुत दिनों के बाद. फुफेरी बहन को चौथा बच्चा हुआ, बेटी, लेकिन उसकी मृत्यु हो गयी, यह पढ़कर उसे दुख नहीं हुआ, बहन भी अजीब स्थितियों का शिकार हो गयी है. कितनी बार दर्द सहेगी, बुआजी भी उसे समझाती नहीं हैं.  
कल जून के चार पत्र आए और विवाह की वर्षगाँठ के लिए एक कार्ड भी. वह तिनसुकिया गए उस कार्ड को लेने. आज गुरु गोविन्द सिंह की जयंती के उपलक्ष में अवकाश है. सुबह से ठंड काफी है, दोपहर को धूप निकली. कल शाम से सोनू की तबियत कुछ ठीक नहीं है, इस समय सोया है, माथा गर्म है, पर उसके पास क्रोसिन भी तो नहीं है.

आज पढ़ने या लिखने के नाम पर शून्य है, यहाँ तक कि न पत्र लिखा न पढा. आज एक कार्ड आया छोटे भाई के फादर इन ला का, इसका हिंदी अनुवाद ठीक सा नहीं लगता. सुबह नाश्ता बना रही थी कि पता चला सात तारीख तक स्कूल-कालेज सब बंद है. उसे अपनी पढ़ाई सलीके से शुरू कर देनी चाहिए, टीचर्स के सहारे रहकर तो कोर्स पूरा हो नहीं सकेगा. आए दिन स्कूल-कालेज बंद रहते है आजकल, या फिर इसी वर्ष ऐसा हो रहा है. शुरू से ही छुट्टियाँ ही छुट्टियाँ, एक तरह से अच्छा ही है नन्हे के लिए और उसके लिए भी, ज्यादा दिन उसे छोड़कर नहीं जाना पड़ा है. पर यह भी लगता है कि इस कारण परीक्षाएं देर से न हों. दोपहर को सोनू को सुलाया, लाइट नहीं थी सो ऊपर छत पर चली गयी किताब लेकर, आधा घंटा भी नहीं हुआ होगा की लाइट आने पर नीचे आयी, नन्हा जगकर रो रहा था, वह उसे ढूँढ रहा था, उसकी तबियत ठीक न होने के कारण ही शायद देर तक सो नहीं पाता. इस समय रात्रि के नौ बजने वाले है, नन्हा खेल रहा है, बच्चे थोड़ी सी उर्जा भी बचा कर रखना नहीं चाहते.