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Thursday, April 21, 2022

ध्रुव के प्रश्न


आज दोपहर पूरे दो महीने और तीन दिनों के बाद नन्हा और सोनू घर आए, अभी कुछ देर पहले  वापस गए हैं। शाम को वे उन्हें पार्क में ले गये पर वर्षा होने लगी, जल्दी ही लौटना पड़ा। नन्हे  ने एक बात कही कि उन्हें किसी के साथ घटी किसी भी घटना के लिए किसी के प्रति निर्णायक नहीं बनना चाहिए। उसे लगा, बच्चे उनसे कितने आगे होते हैं बौद्धिक रूप से, कार्य-कारण सिद्धांत के ऊपर उन्हें जाना है, चीजें अपने आप होती हैं, जब होनी होती हैं, हर घटना के पीछे क्यों ?ढूँढने जाने की ज़रूरत नहीं है। जीवन में जो भी घटता है उसके पीछे कोई न कोई कारण होता है, पर कौन सा कारण किस घटना कि पीछे है, कौन बता सकता है ? वैसे भी उन्हें व्यक्तियों के बारे में कोई राय बनाने का क्या अधिकार है, जो जैसा है वैसा है ! आर्ट  ऑफ़ लिविंग का पहला ज्ञान सूत्र भी तो यही है, ‘लोगों को जैसे वे हैं वैसे ही स्वीकारें’ उन्हें किसी व्यक्ति के बारे में कुछ भी कहने से पूर्व दस बार सोचना चाहिए। किसी की निंदा करना तो ग़लत है ही किसी के निर्णायक बनना और भी ग़लत है। अनजाने में ही वे अपने संस्कार वश ऐसा करते हैं और अपनी ऊर्जा भी गँवाते हैं। बाहर तेज हवा के साथ वर्षा हो रही है, बच्चे अब तक घर पहुँच गए होंगे। 


एक विशिष्ट महिला ब्लॉगर ने अपने स्पष्ट और सरल शब्दों में कोरोना वायरस के ख़तरे को लेकर भारतवासियों द्वारा लापरवाही भरा रवैया अपनाने पर एक ध्वनि संदेश में खेद व्यक्त किया है। उनकी वाणी में शिकायत भी है और सलाह भी, ख़तरा बढ़ गया है पर लोग बड़े आराम से सड़कों पर निकल रहे हैं जैसे लॉक डाउन हटते ही सब सामान्य हो गया  हो। आज सुबह बाहर वर्षा का भ्रम  हुआ पर आवाज़ बिजली की तारों से आ रही थी। हवा ठंडी थी, कहीं कहीं सड़कें भीगी थीं। सूर्योदय या सूर्यास्त आज दोनों नहीं दिखे, भ्रमण के दोनों समय उन्हें देखना व चित्र लेना उसका प्रिय काम होता है। आज चक्रों के बार में व्याख्यान सुना। विशुद्धि चक्र से ऊपर अद्वैत की यात्रा आरम्भ हो जाती है। आज्ञा चक्र पर असीम स्वरूप का अनुभव होता है पर अंतिम चक्र पर जब ‘स्वयं’ भी मिट जाता है तब परमात्मा की प्राप्ति होती है। अहंकार मिट गया पर अस्मिता अभी शेष है, उसे भी जाना होगा। समाचारों में सुना उड़ीसा में एक तूफ़ान आने वाला है। 


रात्रि के साढ़े आठ बजे हैं। सोने से पूर्व का अंतिम कार्य है दिन भर का लेखा-जोखा लिखना, बरसों पुरानी आदत है सो डायरी और कलम जैसे अपने आप ही हाथ में आ जाते हैं। कर्नाटक में लॉक डाउन हटा लिया गया है पर शाम सात बजे से सुबह सात बजे तक आवागमन रुका रहेगा। एक ही दिन में आज डेढ़ सौ संक्रमित व्यक्ति मिले हैं। आज विष्णु पुराण में दिखाया गया कि ध्रुव को भगवान के दर्शन हो गए। छह वर्ष की आयु में इतना बड़ा संकल्प ! वह विष्णु भगवान से पूछता है, जीवन क्या है ? संसार क्या है ? परिवार क्या है ? आदि आदि। भगवान कहते हैं, जीवन एक वरदान है, एक उपहार, एक सौभाग्य भी ! संसार परमात्मा का साकार रूप है ! परिवार में वे लोग आते हैं जिनके प्रति हमारा मन आत्मीयता महसूस करे।  इस तरह तो सारा संसार  ही  उनका परिवार है।कम से कम एक भक्त के लिए तो ऐसा ही होना चाहिए।  जून को एओएल से नया काम मिला है, कल उनकी मीटिंग है।    


Tuesday, April 12, 2022

सपनों की दुनिया

आज देश के नाम प्रधानमंत्री का सम्बोधन था, कहा, चौथा लॉक डाउन होगा पर नए नियमों के साथ। उन्होंने देश को आत्म निर्भर बनाने की बात भी कही। सुबह उठी तो भीतर मौन था, एक शांति भरा मौन ! गुरूजी के लिए दोपहर को एक कविता लिखी, कल उनका जन्मदिन है, एओएल के हिंदी विभाग में काम करने वाले एक साधक ने उसे सजा दिया है। उसे भविष्य में अन्य कविताएँ भी भेजेगी। चाहे तो फ़ेसबुक पर एक पेज बना सकती है, जहाँ उनके लिए लिखी कविताएँ पोस्ट कर सके। जून छोटी भांजी के लिए लिखी कविता को सुंदर बना रहे हैं, जो अपना जन्मदिन गुरूजी के जन्मदिन के साथ साझा करती है। आज महाभारत में दुर्योधन भी मारा गया। अश्वत्थामा की मणि छिन गयी और उसे उसी पीड़ा के साथ अमर रहने का शाप मिल गया, इतना कठोर दंड ! 


शाम को टहलने गए तो मास्क लगाया था, जून को कठिनाई होती है; पर अभी कोरोना का डर गया नहीं है, न ही कोई दवा आयी है इसके इलाज के लिए। आज काव्यालय के संस्थापक कवि का मेल आया, उनकी एक पुस्तक आयी है, उनकी कविताओं को पढ़कर वह कुछ पंक्तियाँ उन्हें नियमित भेज रही है, उन्हें अच्छा लगा। वाक़ई उनकी हर कविता में एक नया अन्दाज़ है। आज शाम से पूर्व उन्होंने आधा घंटा योग व पुस्तकालय कक्ष में बैठकर पढ़ने के लिए और रात्रि में सोने से पूर्व कुछ समय बालकनी में  बैठने के लिए निकाला है , ताकि उनके घर का हर कोना आबाद रहे। कहीं सुना था कि घर के वे कोने जहाँ कोई नहीं जाता, नकारात्मक ऊर्जा से भर जाते हैं। आज सुबह नींद खुली उससे पूर्व एक स्वप्न में मृणाल ज्योति में खुद को पाया, उसका फ़ोन कहीं छूट गया है, जून से कहा फ़ोन करें, तब विचार आया यह स्वप्न है और नींद खुल गयी। दो दिन पहले एक विचित्र स्वप्न देखा था, जिसमें बहुत सारे हाथी हैं, जीवित भी और चारों तरफ़ आलमारी में उनके छोटे-बड़े चित्र भी। एक हाथी उसे कुचलने के लिए बढ़ता है पर ज़रा भी भय नहीं लग रहा, वह उसके पैरों के नीचे है पर कोई दर्द नहीं हो रहा फिर एक बच्चे के साथ उड़ जाती है, उड़ते समय देह में नहीं है पर साथ में जो बच्चा है उसका गोरा चेहरा और काले बाल स्पष्ट दिखे।


सुबह उपनिषद गंगा में ‘सत्यकाम’ की कहानी देखी, शाम को विष्णु पुराण में ‘ध्रुव’ की। दोपहर को जून ने ‘रजनीगंधा; लगायी यू ट्यूब पर, अमोल पालेकर की फ़िल्म। शिव सूत्र सुना, पढ़ा भी। शाम से मन की समता हटी नहीं है, पहले जून की थोड़ी सी नाराज़गी से मन कैसा व्याकुल हो जाता था, अब वह पुरानी बात हो गयी है। हर कोई अपने सुख-दुःख का निर्माता है, यदि वे नहीं चाहते कि दुखी हों तो संसार की कोई भी बात उन्हें दुखी नहीं कर सकती और यदि उन्होंने तय ही कर लिया है कि उन्हें दुखी रहना है तो छोटी से बात को भी कारण बना सकते हैं। मई आधा बीत गया है, कोरोना संकट कम नहीं हो रहा है। 


रात्रि के साढ़े आठ बजे हैं, वह सिट आउट में बैठकर लिख रही है। हवा बंद है, कुछ देर पूर्व हल्की बूँदा-बाँदी हुई पर गर्मी कम नहीं हुई। कुछ देर पूर्व रात्रि भोजन के बाद वह टहलने गये तो एक घर से गुरूजी की आवाज़ में निर्देशित ध्यान की आवाज़ आ रही थी; कदम वहीं थम गए। एक घर से बाँसुरी की आवाज़ रोज़ आती है, कोई रात को अभ्यास करता है । सभी लोग घर में हैं तो ध्यान, संगीत आदि में समय बिता रहे हैं; इतना तो शुभ हुआ है लॉक डाउन के कारण। कल रात उसने जून से कहा, उसकी बातों को गंभीरता से न लें, आगे आने वाले सोलह वर्षों में ( उसे लगता है इतना ही जीवन शेष है) उसकी किसी भी बात को उन्हें सत्य मानने की ज़रूरत नहीं है, क्यंकि सत्य क्या है यह जिसको पता चल जाता है उसके लिए शेष सब असत्य हो जाता है। ‘ब्रह्म सत्यं जगत मिथ्या’ उक्ति तब हक़ीक़त नज़र आती है।  


Tuesday, June 15, 2021

पुलवामा का दर्द


उस दिन “शांति धाम” से लौटकर भी वहाँ की स्मृति दिन भर मन में बनी रही. वहाँ की मैनेजर एक महिला थीं, उनके पति को मधुमेह की बीमारी है, शरीर पर पूरा नियंत्रण नहीं है फिर भी काम में उनकी सहायता करते हैं. उन्होंने ही आश्रम दिखाया. एकमात्र पुत्र दुर्घटना में चल बसा, अभी कुछ समय पहले ही वे ये लोग यहाँ आये हैं, और काम समझ रहे हैं, ऐसा कहा. पुत्र होते हुए भी कुछ लोग अकेले रहने को विवश हैं शायद यही सोचकर वे अपने मन को समझा लेते होंगे। दोपहर को मोदीजी का कोकराझार में दिया भाषण सुना, जिसको सुनने के लिए चार लाख लोग आए थे, सभी बोडो भारत सरकार के साथ हुए समझौते से प्रसन्न थे. पूरे शहर में मानो उत्सव का माहौल बना हुआ था. बीती रात असम के इस शहर में लाखों दीये भी जलाए गये. मोदीजी ने कहा कि सरकार ने बोडो की समस्याओं को समझा और उनका हल निकाला. बोडो आतंकवादी संगठनों ने भी शांति का मार्ग अपना लिया है. उन्होंने कहा, सभी को बैर छोड़ना होगा, हिंसा से कभी कुछ हासिल नहीं हुआ है. उसे असम में निवास के समय बोडो आंदोलन के कारण हुई हिंसा और आए दिन के असम बंद के दिन याद हो आए। कोकराझार का नाम ही तब हिंसा का पर्याय बन गया था। आज उसका मन भी उन लोगों की ख़ुशी में शामिल था। कल दिल्ली में चुनाव है, संभवतः इस बार बीजेपी जीतेगी। कल वे आर्ट ऑफ़ लिविंग के अनुसंधान विभाग में गये, जून को बुलाया था सेवा काम के सिलसिले में। रास्ते में श्री श्री स्कूल भी देखा। बहुत सुंदर स्थान है। परसों इस सोसाइटी में स्थित एक नया पार्क देखा, वह मुख्य सड़क से काफ़ी अलग है। आज घर के सामने की सड़क बनना आरम्भ हुई है।आज आश्रम में स्थित एम्पिथिएटेर में सत्संग हुआ। गुरूजी ने पहले ध्यान कराया फिर प्रश्नों के उत्तर दिए। उन्होंने कन्नड़ में भी बोला, अब काफ़ी समझ में आने लगा है, संस्कृत के कई शब्द इसमें भी हैं। भीड़ बहुत थी। एक व्यक्ति जो मैक्सिको से आया था उसकी श्रद्धा अपार थी, उसने थैंक्स कहा और उसकी आवाज़ डबडबा गयी हो जैसे आंसुओं में। एक लड़की ने मधुर गीत गाया। छोटी बहन ने उसके और अपने एक पुराने फ़ोटो को देखकर एक पेंटिंग बना दी है, वे दिगबोई के गोल्फ़ के मैदान में थे, जब यह चित्र लिया गया था। यूएई में उसके घर को एओएल का एक सेंटर बना दिया है। वह बहुत खुश थी, सेवा से जो ख़ुशी और शक्ति मिलती है उसकी तुलना किसी अन्य ख़ुशी से नहीं की जा सकती।


कल सुबह सवा नौ बजे वे घर से निकले और रात को नौ बजे वापस आए। जून का स्वास्थ्य परीक्षण हो गया, सब सामान्य है। वह लाओत्से की पुस्तक पढ़ती रही, कुछ देर एक फ़िल्म देखती रही मोबाइल पर प्रियंका चोपड़ा की। नन्हा व सोनू एक मित्र के विवाह के संगीत में गये हैं, उन्हें वहाँ छोड़ते हुए वे घर आए। आज सुबह वे गाँव के पोस्ट ऑफ़िस गये जो किसी के घर में है, एक कमरे का डाक खाना, जिसकी ब्रांच पोस्ट मास्टर एक महिला हैं, वह अपने पति को काम सिखा रही थीं, ताकि ज़रूरत पड़ने पर वह भी कुछ कर सकें।
सुबह से बड़ी भाभी का स्मरण हो रहा है। पाँच वर्ष हो गये उन्हें जग से विदा लिए हुए, उससे एक या दो वर्ष ही बड़ी रही होंगी उमर में। बेहद ख़ुशदिल और जीवंत स्वभाव वाली पर उन्हें हृदय का रोग था। भाई ने उनकी तस्वीरों से एक सुंदर वीडियो बनाया है। उसे एओएल के कोर्सेस के लिए बनी वेब साइट्स का हिंदी अनुवाद करना था, तब पता चला कितने सारे कोर्स होते हैं आश्रम में। गुरूजी कितना काम करते हैं, शायद सत्रह-अठारह घंटे तो करते ही होंगे। कल संभवतः वे ‘शिकारा’ देखने जाएँ, अगले हफ़्ते एक मित्र के पुत्र के विवाह में सम्मिलित होने जाना है। ‘आप’ को दिल्ली में बासठ सीटें मिली हैं और बीजेपी को मात्र आठ। केजरीवाल ने काफ़ी काम किया है दिल्ली में और बिजली पानी मुफ़्त, महिलाओं के लिए बस व मेट्रो में टिकट भी नहीं लगती।जनता तो तत्काल लाभ देखती है।


आज पुलवामा हमले को पूरा एक वर्ष हो गया। पिछले वर्ष आज ही के दिन जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर सी आर पी एफ के क़ाफ़िले पर विस्फोटक सामग्री से भरे वाहन से टकराकर आत्मघाती हमला किया गया। इस हमले की ज़िम्मेदारी पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन जैशे मोहम्मद ने ली थी।उसे याद है टीवी पर सैनिकों के शव की पंक्तियाँ थीं, सारा देश आक्रोश से भर गया था। आज भी एक कविता लिखी, दोपहर को रिकार्ड की फिर पोस्ट भी की। शाम को आश्रम में गुरूजी का एक रिकॉर्डेड साक्षात्कार देखा, बच्चों ने सुंदर गीत गाए। आश्रम में अंतर्राष्ट्रीय महिला सम्मेलन आरंभ हो गया है। दोपहर को मृदुला सिंह जी को सुना, अन्य कई वक्ता भी थीं। पैशन, डिस्पैशन व कम्पैशन पर उन्हें बोलना था।


आज दोपहर जून के परिचित दक्षिण भारतीय एक पुराने सहकर्मी मिलने आए, पूरे तेईस वर्षों के बाद वे मिले। उनके लिए भोजन बनाने में नन्हे और सोनू ने बहुत मदद की, वे लोग कल आ गये थे, शाम को जून सभी को अपने बड़े भांजे के यहाँ ले गये, काफ़ी दूर है उसका घर, दो घंटे की ड्राइव के बाद वहाँ पहुँचे, इतने समय में तो कोई दूसरे शहर ही जा सकता है,। उसे लेकर सब ‘उटा’ गये विशुद्ध स्थानीय भोजन के लिए प्रसिद्ध है यह जगह। उटा का अर्थ कन्नड़ भाषा में भोजन होता है। पिताजी से पता चला, छोटा भाई परिवार के साथ यूरोप जा रहा है अगले महीने, उस दौरान बड़े भाई उनके पास आकर रहेंगे।

Wednesday, June 9, 2021

वीर सावरकर पर फिल्म

 


आज श्री रामसुखदास जी की लिखी भगवद् गीता के अठारहवें अध्याय की व्याख्या पढ़ी। एक श्लोक में कृष्ण अर्जुन से कहते हैं, जिस ज्ञान से मनुष्य पृथक-पृथक सब भूतों  में एक अविनाशी परमात्मा भाव को विभाग रहित समभाव से स्थित देखता है, उसी ज्ञान को तुझे सात्त्विक जानना चाहिए. ऐसे ही सात्विक ज्ञान को प्राप्त करना हर साधक के एकमात्र लक्ष्य होता है. जेन ऑस्टिन की पुस्तक “सेंस एंड सेंसिबिलिटी” पर बनी फ़िल्म का कुछ भाग देखा, वर्षों पहले यह पुस्तक पढ़ी थी। दोपहर को लेखन, शाम को योग, दिन इधर शुरू होता है उधर बीत जाता है। कल छोटी बहन के विवाह की वर्षगाँठ है, कुछ पंक्तियाँ लिखेगी उनके लिए। जून ने छत पर बने शेड के लिए चाइम मँगवाया है, कुछ देर में आने वाला है। 


आज छोटी बहन से बात की, कल शाम उसके यहाँ शानदार पाँच कोर्स पार्टी हुई। कुल बाइस लोग थे। दो दशक से दो वर्ष अधिक हो गये विवाह को। आज गणतंत्र दिवस पर एक कविता प्रकाशित की ब्लॉग पर। सुबह असम से एक सखी का फ़ोन आया, पुत्र का विवाह तय हो गया है, अक्तूबर में होगा। मार्च में ‘रोका’ है। परसों माँ की पुण्यतिथि है, उनके लिए भी मन में कुछ पंक्तियाँ उमड़ रही हैं।


यहाँ उनका पहला  गणतन्त्र दिवस बहुत अच्छा बीता। सुबह जल्दी उठे, आठ बजे ध्वजारोहण था। वे तैयार होकर समय से पूर्व ही पहुँच गये। सुबह ही एक छोटी सी कविता लिखी थी, उसे रिकार्ड करके व्हाट्सएप पर भेजा। पहली बार यहाँ के निवासियों से मिलना हुआ। उन्होंने अपना परिचय कराया। उसने एक कविता पढ़ी, जून को ध्वजारोहण करने का सौभाग्य मिला, उन्होंने सूट पहना था और तिरंगे का एक ब्रोच भी लगाया था कोट पर। कई लोग तो घर के वस्त्रों में ही उठकर आ गये थे। वहाँ मैसूर पाक भी बाँटा गया। लौटकर परेड देखने बैठे, पूरे मनोयोग से एक साथ पूरी परेड शायद वर्षों बाद देखी, झांकियाँ, नृत्य के कार्यक्रम, सेनानी, तथा सेना के उपकरण ! प्रधानमंत्री ने लोगों का स्वागत किया। दोपहर को नन्हा और सोनू आ गए, वे दोनों डाइटिंग कर रहे हैं, एक महीने का कोर्स है, दोनों का वजन घटा है. सबने मिलकर छत पर असम से लाया लकड़ी और बेंत का झूला लगवाया. फैमिली ट्री के लिए फोटो चुने. जून जिन्हें घर पर ही प्रिंट कर देंगे और फिर वे उन्हें फ्रेम में लगा देगें. शाम की चाय नन्हे ने बनाई, फिर सब  रॉक गार्डन में टहलने गए, घर में चल रहा सिविल का काम अगले दो हफ्ते और चलेगा. इसके बाद वे वर्टिकल गार्डन का शुभारम्भ करेंगे. कल गेस्टरूम में एसी लग रहा है, परसों बेड भी आ जायेगा, मेहमान आएं, उसके पूर्व ही उनका कमरा तैयार होना चाहिए. घर में वाटर सॉफ्टनर भी लग गया है, यहां का पानी खारा होने के कारण स्टील के नलों पर सफेद निशान बन जाते हैं. बहते हुए पानी वाली बुद्धा की जो मूर्ति पिछले हफ्ते नन्हे ने भिजवाई थी, बहुत आकर्षक है पर उसमें से पानी छलक जाता है और कमरे के फर्श भीग जाता है, उसे वापस भिजवाना पड़ेगा. 


आज शाम ‘वीर सावरकर’ पर बनी एक पुरानी फिल्म का पहला भाग देखा. देश को आजाद कराने के लिए क्रांतिकारियों ने कितने कष्ट सहे हैं. आज मोदी जी व अमित शाह को कितने लोगों के अपशब्द सुनने पड़ते हैं, देश को चलाने का काम करना काँटों का ताज पहनना है. दिल्ली के चुनावों में कुछ ही समय शेष रह गया है. इस बार चुनावी मुद्दा सीएए ही है, यदि मोदी जी जीतते हैं तो उनकी साख बढ़ेगी अन्यथा भी उनका प्रभाव घट तो नहीं सकता है. भारत को उनके जैसा दृढ इच्छाशक्ति वाला प्रधानमंत्री चाहिए. योग शिक्षिका ऋषिकेश से वापस नहीं आयी है. उन्हें घर पर ही साधना का क्रम जारी रखना होगा. वह मंगल व गुरुवार को ललितासहस्रनाम व विष्णु सहस्रनाम के पाठ में वह जा सकती है, यहां महिलाओं का एक समूह उसे आयोजित करता  है. 


आज शाम को आश्रम से एक स्वयंसेवक का फोन आया और बाद में संपादक के नाम एक पत्र, जिसका हिंदी में अनुवाद करना था, शाम तक करके भेज दिया. अनुवाद का पहला सेवा कार्य करके उसे ख़ुशी हुई. अभी-अभी नन्हे का भेजा कुछ सामान आया, ऐसा सामान जिसका नाम भी नहीं सुना था, कोल्ड प्रेस जूस आदि. सावरकर की फिल्म का दूसरा भाग भी देख लिया, उनकी भविष्यवाणी सही सिद्ध हो रही है. 


आज शहर जाकर एक नई फिल्म देखी, पंगा, आजकल की लड़कियों के जीवन से जुड़ी हुई फिल्म. गुरुजी के एक ज्ञान पत्र का हिंदी अनुवाद किया.  शाम को आश्रम गए. वहीं स्थित एक भोजनालय में कल रात हुए किसी कार्यक्रम के बाद फूल बिखरे हुए थे. सजावट घर के लोग अपना सामान समेट रहे थे पर बासी फूलों की उनके लिए क्या कीमत होगी, गुलदाउदी व गेंदे के सैकड़ों फूल और मालाएं वहां बिखरी हुई थीं. गुरूजी को अष्टावक्र गीता पर बोलते हुए सुना. कितना अनोखा ज्ञान  है उनके पास, जीवन को धन्य करने वाले शब्द, ब्रह्म की सुंदर व्याख्या और उस तक पहुंचने के कितने सुंदर मार्ग ! अध्यात्म ही जीवन का सार है और परमात्मा ही जगत का सार ! 


पिछले दो दिन कुछ नहीं लिखा, कल बच्चे आये थे, देर रात वापस गए, परसों की बात याद नहीं है, और वे पिछले जन्मों को याद करने का प्रयत्न करते हैं. आज वे सोसाइटी में स्थित एक घर से अक्की रोटी लाये, अक्की रोटी यानि चावल के आटे की रोटी ! जून कल सामान्य जाँच कराने अस्पताल जाने वाले हैं, दिन भर लग जायेगा. आज पहली बार श्लोक पाठ में सम्मिलित हुई. कई बार मन में यह विचार आया है कि सही उच्चारण करके श्लोक पाठ करना सीखे, ईश्वर ने यह इच्छा पूरी करने का सुअवसर भी दे दिया है. गुरूजी भी कहते हैं, संस्कृत के श्लोक, मन्त्र आदि का उच्चारण मात्र ही ऊर्जा को ऊपर उठा देता है. आज सासु माँ की सातवीं पुण्यतिथि है, वे ‘शांति धाम’ गए जो यहां से निकट ही स्थित एक वृद्धाश्रम है. जहां तीस महिलाएं और दस पुरुष आश्रमवासी हैं. वहां का वातावरण अच्छा था. हरियाली और साफ-सफाई थी, पर ऐसी जगहों पर एक अजीब सी उदासी भी रहती है. वह भी झाँक रही थी. न जाने किन परिस्थितियों में उन्हें घर से बाहर आश्रम में आना पड़ा हो. आश्रम के लिए कुछ सामग्री देकर व कुछ समय बिताकर वे लौट आये. 


Tuesday, May 18, 2021

ओल्ड पाथ व्हाइट क्लाउड्स

नए वर्ष में पहली बार डायरी खोली है। मन में एक गहरी शांति है और कुछ भी लिखने जैसा नहीं लग रहा है। ‘कविता’ भी कई दिनों से नहीं लिखी। बुद्ध के बारे में दोपहर को पढ़ा, बहुत अच्छा लगा। ‘ओल्ड पाथ व्हाइट क्लाउड्स’ में गौतम बुद्ध के जीवन और शिक्षाओं को कितनी खूबसूरती से प्रस्तुत किया गया है. इसमें बुद्धि के जीवन के अस्सी वर्षों को गांव के एक भैंस चराने वाले लड़के स्वस्ति, जो बाद में उनका शिष्य बन जाता है, के माध्यम से और आंशिक रूप से स्वयं बुद्ध के माध्यम से दर्शाया गया है. जीवन के कितने गहरे सत्यों का अनुभव बुद्ध ने किया था, बच्चे उनके प्रथम शिष्य थे। बच्चों को सत्य आसानी से अनुभव में आता है, क्योंकि उनके पास अहंकार की कोई बाधा नहीं होती, न ही वे हर बात को बुद्धि से तोलते हैं, वे सीधे आत्मा से ही अनुभव करते हैं। बुद्ध कहते हैं, जीवन में सभी कुछ परस्पर निर्भर है और नश्वर है; चीजें निरंतर बदल रही हैं। ध्यान की गहराई में जब तन, मन, भावना और विचार सब कुछ स्पष्ट दिखाई देते हैं तब उनके द्वारा प्रभावित होने का डर नहीं रहता। सत्य कभी बदलता नहीं और जगत एक सा रहता नहीं। इस बात को जब भीतर अनुभव कर लिया जाता है तो जीवन सरल हो जाता है। प्रेममय हो जाता है और सारा विषाद खो जाता है। वर्तमान में टिकना ही जागरण है, वर्तमान के क्षण में ही जीवन से मुलाकात हो सकती है। जैसे ही मन अतीत या भविष्य में जाता है, सत्य से नाता टूट जाता है। अतीत जा चुका वह मिथ्या है, भविष्य अभी आया नहीं, केवल यही क्षण सत्य है, इसमें पूरे होश के साथ जीना ही साधक का कर्तव्य है। ऊर्जा का संरक्षण तब ही संभव है।  


सम्यक वाणी साधक के लिए अति आवश्यक है, उतनी ही जितना सम्यक कर्म, सम्यक विचार और सम्यक ध्यान। भोजन भी साधक को समुचित मात्रा में लेना चाहिए, ऐसा भोजन जो सुपाच्य हो और हल्का हो। आज सुबह का ध्यान अत्यंत प्रभावशाली था, चीजें कितनी स्पष्ट दिखाई दे रही थीं। समझ जैसे  भीतर से स्वत: ही बह रही थी। मानव के भीतर कितनी समझ है और कितनी शांति, एक स्थिरता भरा अनंत आकाश है भीतर ! इसमें टिके रहना ही तो ध्यान है। 


आज भी ब्लॉग पर कुछ नहीं लिखा। कल से प्रारंभ करना है। आर्ट ऑफ लिविंग के एप में गुरुजी की लिखी कई किताबें हैं, वीडियो भी हैं, एक पूरा खजाना है। कल वे आश्रम जाएंगे। गुरुजी एक सप्ताह के लिए आश्रम में रहेंगे। वे स्वयं सेवक का कोर्स भी करने वाले हैं। आज भी दोपहर बाद बुद्ध की पुस्तक पढ़ी, कितनी अच्छी किताब है यह, उल्हास नगर की यात्रा के दौरान मासी के यहाँ यह किताब देखी थी, फिर यहाँ आकर मँगवाई। उसे उनका कृतज्ञ होना चाहिए। बुद्ध कहते हैं सभी कुछ आपस में जुड़ा है और नश्वर है। चीजें जैसी हैं वैसी ही उन्हें देखना आ जाए तो कहीं कोई तनाव, क्रोध, ईर्ष्या, घृणा, नकारात्मकता नहीं टिक सकती। स्वयं में टिककर ही वे आत्मा की शांति और आनंद का अनुभव कर सकते हैं। जो मुक्ति का वरण करता है उसे संसार का आकर्षण नहीं लुभाता। वह तट पर बैठे व्यक्ति की भांति लहरों का आना जाना देखता रहता है और स्वयं में तृप्त रहता है. 


आज गुरूजी को देखा, सुना. वर्षों पहले उन्हें टीवी में नियम से सुनती थी. कैसा सौभाग्य है कि उनके आश्रम में उनको सुनने का अवसर मिल रहा है. वह सरल शब्दों में सभी प्रश्नों के कितने सुंदर उत्तर देते हैं. सत्य में प्रतिष्ठित व्यक्ति कैसा होता है और सिद्ध कौन होता है, आत्म अनुभव कैसा होता है, ऐसे और इसी तरह के प्रश्नों के उत्तर कितनी सहजता से वह दे रहे थे. हिंदी व अंग्रेजी दोनों ही भाषाओँ पर उनकी गहरी पकड़ है और परमात्मा से अभिन्न हैं वह ! आज बुद्ध की किताब आगे पढ़ी, मैत्री और करुणा का कितना सुंदर वर्णन किया है और प्रेम का भी, हृदय कितनी गहरी विश्रांति का अनुभव कर रहा है. संसार के हर जीव के प्रति प्रेम का भाव मन में उदित हो रहा है, सभी तो अपने ही हैं, एक ही हैं, शाम को एक पुरानी सखी का फोन आया, कितना आश्चर्य है कि दोपहर को उसका स्मरण हो आया था और अंतर में प्रेम था. जून के प्रति भी भीतर कितना स्नेह प्रकटा था, उनका स्वभाव बहुत अच्छा है, शाम से उनका व्यवहार भी कितना प्रेमिल लग रहा है. गुरूजी की बात अक्षरशः सत्य सिद्ध हो रही है कि सभी एक ही चेतना से बने हैं ! कल विवाह की सालगिरह है , उससे भी पूर्व से वे एक-दूसरे से परिचित हैं, यानि साथ पुराना है.  


भगवान बुद्ध ने बच्चों को भी ध्यान सिखाया था. उनकी शिक्षा और समझ कितनी लाभप्रद है और कितनी गहरी. वे जीवन और मृत्यु के रहस्य को समझाते हैं, जीवन की नश्वरता और जगत के मिथ्या होने को भी, जैसे गुरूजी कहते हैं, अब तक का उनका जीवन एक स्वप्न से ज्यादा क्या है ? इतने वर्ष बीत गए कुछ वर्ष और हैं, यह देह एक दिन नष्ट हो जाएगी, उनके पहले कितने लोग चले गए, अब उनकी कोई खबर नहीं, वे भी एक दिन हवा हो जायेंगे तो क्यों न इसी क्षण स्वयं के कुछ न होने को स्वीकार कर लें. जीवन एक खेल से ज्यादा क्या है, कृष्ण की लीला या राम की लीला ... आज वे आश्रम गए थे. एच आर विभाग आज भी बन्द था, परसों भी देर हो जाने से कोई नहीं मिला था. कल जून के एक पुराने मित्र परिवार सहित आये, अपने साथ सुंदर सफेद बेला और लाल गुलाब के फूलों की मालाएं लेकर आये थे, एक-दूसरे को पहनने को कहा, तस्वीरें भी खींचीं. शाम को नन्हा व सोनू आये, गुलदाउदी के फूलों का एक गुलदस्ता, खजूर व मिठाई लाये.  लेखन कार्य अभी शुरू नहीं हुआ है, जो पुस्तक पढ़ रही है, उसके खत्म होने पर ही लिखना हो पायेगा. 

 

Wednesday, April 21, 2021

झींके का खेत

 

कल रात्रि वे वापस लौट आये. घर पहुंचे तो कुछ ही देर में नन्हा व सोनू भी आ गये, वे रात्रि भोजन बनवा कर लाये थे. सुबह नींद थोड़ा देर से खुली, नूना अकेले ही टहलने गयी. सोनू उठ गयी थी जब वह लौटी, नन्हे ने सुबह का नाश्ता ऑर्डर कर दिया था.  दोपहर को बड़े भैया अपनी बिटिया के साथ आये, जो यहीं रहकर जॉब करती है, सबने साथ में भोजन किया. नन्हा और सोनू  ग्वालियर से कुछ उपहार भी लाये हैं, साड़ी, सूट, बेड कवर, गजक और उबली हुई मूंगफली. बड़े भाई को उन्होंने शादी में मिला पर्स दिया, भाई उनके लिए गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां लाये हैं. जीवन इसी लेन-देन  का नाम है. दीदी छोटी बहन के पास विदेश जा रही हैं. वह अपने नए घर में शिफ्ट हो गयी है. उसने बताया अगले हफ्ते बड़ी बिटिया अपने पापा  के साथ भारत आ रही है, वे वैष्णव देवी की यात्रा पर भी जायेंगे.  छोटा भाई  अगले हफ्ते उनके पास आ रहा है, उसे पुट्टपर्थी में ड्यूटी मिली है, एक रात यहाँ रहकर जायेगा.  जीवन इसी तरह आने-जाने, मिलने-जुलने का भी नाम है. मौसम आज ठंडा है, पंखा चलाने की जरूरत नहीं है. दोनों नैनी समय पर आ गयीं, दूध वाला, पेपर वाला, फूलवाली भी, आज तो लॉन की सफाई व घास की कटिंग भी हुई, लॉन अच्छा लग रहा है. रात की रानी में फूल खिलने लगे हैं. शाम को वे टहलने गए तो देखा, क्रिसमस की ख़ुशी में लोगों ने यहां बिजली की झालरें लगा दी हैं. 


रात्रि के नौ बजे हैं, उसने दिन के अंतिम कार्य यानि लिखने के लिए कलम उठायी है. आज एक सप्ताह बाद योग कक्षा में बहुत अच्छा लगा. नए आसन किये शरीर को अपनी पूरी क्षमता का प्रयोग करने का अवसर मिला.  सुबह नाश्ते के वे बाद कुछ देर टहलने गए, शायद धूप के कारण सिर में थोड़ा सा दर्द हो गया. असम में स्थिति अब शांति की ओर बढ़ रही है. दिल्ली तथा देश के कुछ अन्य भागों से हिंसा की खबरें आयी हैं. यह सब कुछ अज्ञान का परिणाम है, नेता अपना लाभ देखते हैं और जनता को मोहरा बनाते हैं. हालात जिस तरह बिगड़ रहे हैं इसका परिणाम किसी के लिए भी अच्छा नहीं होगा. धर्म के नाम पर भेदभाव से कितने जीवन प्रभावित होते हैं, पर लोग जानते हुए भी यह बात समझना नहीं चाहते. तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के जीवन पर आधारित वेब सीरीज ‘क्वीन’ अच्छी  लग रही है, चार एपिसोड देख लिए हैं. आज पिता जी से बात की. उन्होंने बताया, जो किताब वे पढ़ रहे हैं, उसमें लिखा है, मनुष्य को शून्य में स्थित रहना चाहिए अर्थात पूर्ण शांति में. बाहरी शांति तो उन्हें सर्वथा उपलब्ध है पर भीतर की शांति भी चाहिए, मन की शांति, यानि विचारों से पूर्ण मुक्ति ! 


आज सुबह टहलते हुए वे गांव की तरफ गए एक खेत में झींका (तरोई) लगी थी, एक किसान फसल उतार  रहा था, बेचने को भी तैयार था, वे खरीद कर लाये. छत पर सोलर पैनल लग गए हैं. अब उनके घर इस्तेमाल होने वाली बिजली इन्हीं के द्वारा आएगी, जो बिजली बच जाएगी उसके बदले विद्युत विभाग से पैसे वापस मिल जायेंगे. आज असमिया सखी से बात हुई, वे लोग भी बंगलूरू में रहते हैं. उसने बुलाया है, पर उनका घर काफी दूर है, कार से जाने में दो घन्टे लगेंगे, असम में उनके घर जाने में दो मिनट लगते थे. उन्होंने सोचा है, शुक्रवार की सुबह  जायेंगे और एक रात रुककर शनि को नाश्ते के बाद लौट आएंगे. आज मौसम कल की अपेक्षा गर्म है, दिसम्बर में भी गर्मी हो सकती है, इसका अनुभव जीवन में पहली बार हो रहा है. दोपहर वाली नैनी आज अपने पुत्र को लेकर आयी, देखने में बुद्धिमान लग रहा था. आज कई दिनों बाद ब्लॉग पर लिखना आरम्भ किया, कुछ ब्लॉग्स पढ़े. जीवन को मुड़कर देखें तो अपनी ही बातों पर कितनी हँसी आती है, उन बातों पर भी जिनपर कभी हजार आँसू बहाये थे. शाम को नन्हे का फोन आया, ‘डिनर पर आ रहा है, उन्हें लगा, जैसे उसकी पसन्द का खाना ही बना था और उसे खबर लग गयी किसी तरह, साढ़े आठ बजे आया, दो घन्टे रहा. जीवन एक शांत धारा की तरह बहता जा रहा है, अब कोई दौड़ नहीं रही. ज्ञान, क्रिया और इच्छा शक्ति जो भीतर है, अपने आप में स्थिर हो गयी है. हजारों टन भोजन इस देह में जा चुका है, हजारों बोल यह जिव्हा बोल चुकी है, हजारों विचार यह मन सोच चुका है, हजारों गन्ध यह नासापुट ले चुके हैं. अब इस जगत में कुछ देखना, जानना, पाना शेष नहीं रह गया है. जीवन जैसा है वैसा ही श्रेष्ठ है. 


आज वे आश्रम गए थे, दोनों ननदों के लिए उपहार लिए। वैद्य से नाड़ी परीक्षण करवाया। आयुर्वैदिक दवा ली एक माह की। जून के ममेरे भाई की बिटिया का ब्याह है, उसके लिए भगवद्गीता का एक सुंदर प्रति ली और घर के लिए आटे के बिस्किट आदि। गुरुजी की उपनिषद पर टीका और आर्ट ऑफ लिविंग के हिंदी भजनों की एक किताब भी। एक घंटा वे ध्यान के लिए विशालाक्षी मंटप में बैठे। ध्यान करवाया गया पर रिकार्डिंग में गुरु जी की आवाज से अधिक लोगों के खाँसने की आवाजें आ रही थीं। भजन आरंभ हुए तो लोग नाचने और झूमने लगे। रात्रि भोजन भी वहीं कैफे में किया। रागी दोसा खाया। कल दोपहर फिर आना है, समूह में सुदर्शन क्रिया में भाग लेने के लिए। दीदी का फोन आया, दो मिनट से ज्यादा बात नहीं की। जीवन इतना सरल है जिसे लोग जटिल बना लेते हैं। 


आज मोबाइल पर गुरूजी का सत्संग देखा, सुना। वह बहुत दिनों के बाद आश्रम आए हैं। परमात्मा और उनमें जरा भी दूरी नहीं है, वह वहीं है फिर भी वे उससे विरह का अनुभव करते हैं ! कैसी अजब कहानी है यह .... । मौसम आज ठंडा है, शाम को स्वेटर पहनकर वे पड़ोसी के साथ सोसाइटी के पिछले गेट से बाहर निकल कर गाँव की तरफ गए. सँकरी सड़क से गुजरते समय सूर्यास्त के सुंदर दृश्य दिखे, खेतों से कुछ दूर आगे जाकर एक नयी कालोनी दिखी, जिसमें प्लॉट्स काट दिए गए हैं, सड़कें भी बन गयी हैं पर घर बनाने का काम अभी शुरू नहीं हुआ है.  शहर अपनी सीमाएं बढ़ा रहे हैं और खेत बिकते जा रहे हैं. कल वैद्य ने रात्रि भोजन हल्का लेने को कहा था सो आज खिचड़ी बनायी उसने.  और अब उस पुरानी डायरी के पन्नों से कुछ बात।



स्थूल जगत में सेवा कार्य का रूप धारण करती है, आंतरिक सृष्टि में सहानुभूति का स्वरूप लेती यही और मानसिक सृष्टि में बोध रूप में दर्शन देती है। 


तुम्हारा हृदय तुम्हारे सेवा कार्यों की जो कीमत आंकता है, उसके मुकाबले उन्हीं कार्यों की जगत द्वारा ठहराई कीमत कुछ नहीं के बराबर है. 


सच्चे मनन  के फलस्वरूप सेवा करने की शक्ति अधिकाधिक बढ़ती जाती है और फिर अपनी उन्नति के विचार बहुत कम सताते हैं. 


आतुरता से और स्नेह से कोई भी नन्हा सा सेवा का काम सबेरे उठकर करना उस दिन के तुम्हारे सुख के भंडार को खुला रखने का सर्वोत्तम उपाय है. 


मनुष्य जिस हद तक अपने स्वार्थ का कम चिंतन करता है, उस हद तक वह अवश्य ही अपनी आत्मोन्नति की ओर ध्यान लगा सकता है.सेवा के प्रत्येक छोटे से छोटे कार्य का बदला सेवा की बढ़ती हुई शक्ति के रूप में सेवक को मिलता है. 


उसे आश्चर्य होता है विद्यार्थी काल में उसका मन ऐसे विचारों के प्रति आकर्षित होता था, युवा मन कितना आदर्शवादी होता है. कई वर्षों बाद इन आदर्शों पर चलने का मौका भी मिला, जीवन में कोई जो चाहता है अवश्य ही पा लेता है , लेकिन अभी भी बहुत कुछ किया जा सकता है. 


Wednesday, April 14, 2021

लोनावला की पहाड़ियाँ

 

कल सुबह उन्हें एक विवाह में सम्मिलित होने के लिए यात्रा पर निकलना है. अमित शाह ने संसद में नागरिक संशोधन  सुधार बिल प्रस्तुत किया है, कई राज्यों में विशेषतः असम में इसके विरोध में प्रदर्शन हो रहे हैं. आज सुबह नैनी काम पर नहीं आयी, किसी अन्य महिला ने फोन करके बताया, उसे बुखार है. दोपहर को वह आ गयी, कहने लगी पति ने उससे झगड़ा किया, नशा करके आया था. उसे चोट लगी थी. पिछड़ा हुआ राज्य हो या विकसित, महिलाओं की स्थिति सभी जगह एक सी है. बेहोशी में आदमी वहशी हो जाता है. देश भर में महिलाओं के प्रति हिंसा बढ़ रही है. हिंसा की प्रवृत्ति मानव में दबी होती है पर आज के वातावरण में खुली छूट मिल गयी है, हाथ में मोबाइल आ गया है, जिस पर सब कुछ देखा-सुना जा रहा है, जो नहीं देखा जाना चाहिए वह भी. आज कौन सुरक्षित है, भय का वातावरण बन गया है सभी ओर. समाज पतन की ओर जा रहा है. शायद अँधियारा जितना गहरा होगा उजाला तभी प्रकट होगा. 


आज सुबह पांच बजे ही वे एयरपोर्ट के लिए निकले थे. फ्लाइट लेट थी, नाश्ता भी वहीं किया. समाचार सुने, कर्नाटक में बीजेपी ने बारह सीट जीत ली हैं, पंद्रह पर उपचुनाव हुआ था. मुंबई में छत्रपति शिवाजी हवाई अड्डे पर पहुंचे तो तापमान अधिक था. जो ड्राइवर उन्हें लेने आया था उसने कार पांचवें फ्लोर पर पार्क की हुई थी. लिफ्ट से वहां पहुँचे तो देखा अनेकों गाड़ियाँ वहां पार्क की हुई थीं. नवी मुंबई को पार करके वे ‘पूना एक्सप्रेस वे’ पर आ गए, जिसके बारे में कई बार सुना था. पहले गंतव्य  लोनावला पहुँचने से पहले खन्ड़ाला की पहाड़ियां दिखीं, पर वे वहां रुके नहीं. पहला पड़ाव था, वैक्स म्यूजियम, जहां कई और भी आकर्षण थे, सभी एक से बढ़कर एक. उनके लिए नए-नए अनुभव थे सभी. ९-डी में अनुभव भयभीत करने वाला था. 


अभी-अभी वे क्लब हाउस से रात्रि भोजन करके आये हैं, ‘देराजो’ नाम था उस रेस्तरां का. उससे पहले लाइब्रेरी में एक किताब पढ़ी, ‘द विज़डम ऑफ़ लाओत्से बाय लिन युतांग’. किताब बहुत अच्छी है, पढ़ने के लिए वह कमरे में ले आयी है. हिल्टन का यह रिजॉर्ट काफी बड़े क्षेत्र में फैला हुआ है, दूर-दूर तक छोटे-छोटे विला बने हैं. नन्हे को जब उनकी मुंबई यात्रा का पता चला था तो उसने एक दिन लोनावला में बिताने के लिए इसे बुक कर दिया था। वे रिसेप्शन से छोटी कैब में बैठकर कमरे तक आये, हाथ-मुँह धोकर ‘योग साधना’ के लिए क्लब हाउस गए. पूल के किनारे एक तरफ एक रेस्तरां है दूसरी तरफ एक बड़े चबूतरे जैसा  स्थान. तीन अतिथि और बैठे थे वहां होटल के, योग टीचर प्राणायाम करवा रहे थे. सूर्यास्त का सुंदर दृश्य निहारा, सामने पहाड़ था जिसकी परछाई पूल के पानी में पड़ रही थी. 


आज सुबह भी वे जल्दी उठ गए थे, रिज़ॉर्ट की तरफ से ट्रैकिंग पर गए. जंगल के बीच से चढ़ाई करते हुए ऊँचाई पर स्थित एक पुराने मंदिर तक जाना एक नया अनुभव था. लगभग साढ़े दस बजे वे वहाँ से रवाना हुए. रास्ते में नारायणी धाम में रुके जो अति विशाल एक नया मंदिर है, कई गुलाब के फूलों के बगीचों से सजा यह स्थान बेहद आकर्षक है, वहाँ कोई विवाह समारोह चल रहा था, इसलिए और भी सजाया गया था. उसके बाद खंडाला में कुछ मिनट रुके, जहाँ से नीचे पहाड़ों पर बना एक्सप्रेस वे दिखाई देता है. लगभग ढाई बजे विवाह स्थल पर पहुँचे। मेहँदी का कार्यक्रम चल रहा था, संगीत का शोर बहुत था और हृदय पर आघात कर रहा था. भोजन के बाद वे एक घन्टा पार्टी में रहे, फिर कमरे में आ गए. 



अभी कुछ देर पहले वे निकट स्थित राजीव गाँधी उद्यान में टहलकर आये हैं, नीचे सड़क पर कूड़े का ढेर लगा था. शादियों का सीजन है, कल ही दो विवाह हुए, उसके बाद जो भी कचरा इकठ्ठा हुआ होगा शाद वही था. पार्क की हालत भी खस्ता थी, लोग काफी थी, कहीं योग साधना चल रही थी, कहीं जिम, दो लोग पेड़ से उलटे लटके थे, शायद कोई साधना रही होगी।  कहीं महिलाएं आपस में बातें कर रही थीं. वृद्ध बेंच पर बैठ कर आराम फरमा रहे थे. घास बेतरतीब थी, जो भी सरंचना पहले सुंदर रही होगी, टूटी-फूटी थी. प्लास्टिक की बोतलें, कागज जहां-तहाँ बिखरे थे. जो पार्क बेहद आकर्षक बन सकता था, उदासीन व अपने में ही गुम लोगों के कारण उदास लग रहा था. उल्हासनगर जरा भी नहीं बदला है. बीस वर्ष पहले वे यहाँ आए थे, तब भी हालात ऐसे ही थे. जून नीचे से अख़बार लेकर आये हैं, जिसमें असम में हुई हिंसा की खबरें हैं. नागरिक संशोधन बिल संसद में पास हो गया है, उसी के खिलाफ आंदोलन हो रहे हैं. सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है, लोगों को समझना होगा, वे व्यर्थ ही इतनी तीव्र प्रतिक्रिया दे रहे हैं.  कल रात साढ़े बारह बजे होटल लौट आये थे. अंगूठी पहनाने का कार्यक्रम अभी हुआ ही नहीं था, डांस आदि हो रहे थे. उन्होंने जल्दी खाना खाया, साढ़े ग्यारह बजे जल्दी नहीं कहा जायेगा, पर यहाँ पर शादी में होने वाली पार्टियाँ रात भर चलती हैं. सुबह तीन-चार बजे  तक चली होगी यह पार्टी भी. 


राष्ट्रपति ने नागरिकता संशोधन बिल को पास कर दिया है, अब यह कानून बन गया है. गोहाटी व डिब्रूगढ़ में कर्फ्यू लगा हुआ है, हिंसा की वारदातों के बाद यह जरूरी हो गया था. महिलाओं पर हिंसा की सबसे भयानक वारदात जो कुछ वर्ष पहले हुई थी, उसका फैसला आने वाला है. इस समय साढ़े आठ बजे हैं, वे नहा-धोकर तैयार हैं। सुबह पाँच बजे अपने आप ही नींद खुल गई, उसके पूर्व स्वप्न में स्वयं को राम का एक भजन गाते सुना, फिर एक अन्य भजन और एक ज्योति दिखी। सबके भीतर एक ज्योति है जो बिन बाती और बिन तेल के जल रही है। मन कितने सुंदर रूप धर लेता है, जब क्षण होता है। साक्षी भाव में टिका मन ही मुक्त है। विवाह दिन में होना है, शाम को रिसेप्शन पार्टी है। कल उन्हें वापस घर जाना है। 


Wednesday, March 24, 2021

रागी की रोटी

 

आज का दिन भी सद्गुरू की वाणी के साथ प्रारंभ हुआ। गूढ ज्ञान को वह सरल शब्दों में समझाते हैं, बिल्कुल अपना मानकर। गुरू कितना महान होता है, यह कोई-कोई ही जान सकता है। शाम को वे आश्रम गए, सत्संग में भाग लिया। वहाँ भीड़ बहुत थी पर कई लोग इधर-उधर टहल रहे थे, कुछ खरीदारी कर रहे थे। ज्ञान के ग्राहक सब नहीं हो सकते, प्रेम के तो और भी कम ! जीवन का भेद जो जान लेता है वही गुरू की महिमा को जान सकता है। गुरू जीवन से परिचय कराता है ! परमात्मा ही जीवन है और परमात्मा ही गुरु के रूप में प्रकट होता है। उसने गुरू को कोटि-कोटि नमन किया ! रात्रि भोजन भी वहीं अन्नपूर्णा में ग्रहण किया, शुद्ध, सात्विक भोजन ! सुबह भांजा आ गया था, वह भी साथ गया। रास्ते में पौधों के लिए खाद व कुछ फल खरीदे। नन्हे ने फूलों की पौध लगाने के लिए एक किट भिजवाया, बीज डाल दिए हैं, आठ-दस दिनों में निकल आएंगे। बागवानी का काम धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है। आज पड़ोसिन ने भी एक पौधा दिया। दोपहर को एक कविता जैसा कुछ लिखा। अपने आप ही मात्रा आदि ठीक ठाक हो गई। एक अन्य लेखिका की कविता पढ़ी।  


आज पुन: आश्रम गए। वहाँ प्रवेश करते ही मन हल्का हो जाता है। गुरूजी नहीं थे आज, संभवत: अगली बार मिलें। सत्संग चल रहा था। एक स्वामी जी भजन गा रहे थे, सभी तन्मय होकर साथ दे रहे थे। कुछ विदेशी महिलाओं ने नृत्य करना भी आरंभ कर दिया। उसने दो भजनों का वीडियो बनाया, कल व्हाट्सएप पर योग साधिकाओं के ग्रुप में भेजेगी। आज लौटते समय इडली बनाने के लिए बड़ा कुकर खरीदा। आश्रम जाने से पूर्व योग कक्षा में कुछ नए आसन किए। एक घंटा कैसा बीत जाता है पता ही नहीं चलता। कल योग कक्षा में त्राटक ध्यान  किया, अच्छा लगा। उनके साथ एक और महिला आती हैं, वह भी पूरे मनोयोग से आसन करती हैं। आज घर बैठे ही साइकिल की सर्विसिंग करने वाला मकैनिक आ गया। जीवन की धारा मंथर गति से बह रही है। 


पिछले दो दिन रात को सोने में देर हुई, सो लिखने का समय नहीं मिला। आजकल सोने से पूर्व ही डायरी खोलती है वह। दिन भर का लेखा-जोखा लेकर मन जैसे खुल जाता है, खाली हो जाता है और रात्रि की नींद पहले की सी गहरी और विश्राम पूर्ण होती है। यह तमस की अधिकता है या मन का विश्राम में टिकने की कला सीख लेना, जो हो, सभी कुछ स्वीकार करना है। कल नन्हे व सोनू  के लिए साई-भाजी, ढोकला और खीर बनाकर ले गए थे, गुलदाउदी व गुलाब के दो पौधे भी। उनके विवाह की दूसरी सालगिरह थी। अपने काम में दोनों इतने व्यस्त हैं कि उन्हें भविष्य के बारे में या अपने बारे में सोचने का समय ही नहीं मिलता, परिवार बढ़ाने की बात का कोई जवाब नहीं दिया। वक्त को जो मंजूर होगा, वही होगा। अगले हफ्ते वह अपने एक मित्र की बैचलर पार्टी में जा रहा है, उसके बाद उसके विवाह में मध्य प्रदेश। 


पिछले दो दिन भी डायरी नहीं खोली। आजकल दिन, तिथि, महीने, समय आदि सब पहले की तरह याद नहीं रहते, शायद ध्यान हर समय उसी ‘एक’ की तरफ रहता है इसलिए ! आज का दिन कितने नए-नए अनुभवों से भरा हुआ है। सुबह वे टहलने गए, जून अक्सर यहाँ की तीन मुख्य समांतर सड़कों की बात करते हैं, उसने कहा, एक बार एक-एक करके वे उनपर जाएंगे ताकि ठीक से उसे रास्तों का ज्ञान हो जाए, जवाब में उन्होंने कहा, उसे दिशा बोध ही नहीं है। यह आलोचना वह पहले भी कर चुके हैं पर आज मन ने विद्रोह कर दिया, क्रोध किया, बाद में कुछ ही देर में सब शांत हो गया। क्रोध करते समय भीतर कोई देख रहा था कि अब क्या हो रहा है। जून शांत रहे, उनके धैर्य की परीक्षा हो गई। नाश्ते में यहाँ आकर पहली  बार ओट्स उपमा बनायी। अखबार पढ़ते समय जून ने कहा, दीदी-जीजा जी से बात नहीं हुई यात्रा से  वापस आकर, उसने फोन मिलाया तो वे कुछ नाराज लगे। उनका ही एक वाक्य याद आया, ‘जब जब जो-जो होता है, तब तब तब वह वह होना है, फिर किस बात का रोना है ? रात्रि भोजन के लिए वे यहीं की एक निवासी के यहाँ से ‘रागी’ की रोटी लाए, बहुत स्वादिष्ट थी, साथ में टमाटर वाली नारियल की चटनी भी उतनी ही स्वादु थी। महाराष्ट्र में तिकड़ी सरकार बन गई, कब तक चलेगी, कोई नहीं जानता। जीवन विविधरंगी है, शाम को आकाश के नीले रंग कैमरे में कैद किये। 


उस पुरानी डायरी में कुछ सुंदर वाक्य पढ़े -


थोड़ी सी  दर्शनिकता मनुष्य को नास्तिकता की ओर ले जाती है, गंभीर दर्शनिकता धर्म की ओर ले जाती है। 


सार्थक होती हैं वे जिंदगियाँ , जो दरिद्रता, कठिनाइयों और संघर्षों के बीच पलती हैं। ठोकरें और थपेड़े खाते हुए जो लोग मुसीबतों के पहाड़ों को तोड़कर अंतत: एक ऊंचाई पर पहुँच जाते हैं, दूसरों के लिए वे एक मशाल का काम देते हैं। 


हमें कोई देखता हो तो हम बुरा व्यवहार नहीं कर सकते। जब हम मन को अलग होकर देखते हैं तो मन कभी बुरा व्यवहार नहीं करता। 


मन से लड़ना नहीं, किन्तु मन को शुभ भावना से देखना चाहिए। 


Thursday, October 29, 2020

नीला आकाश



आज मौसम काफी गरम है, पसीना सूखने का नाम ही नहीं ले रहा था दोपहर को, पर एसी चलाकर बैठे, एक बार भी ऐसा नहीं लगा, शायद इसे ही साक्षी भावमें टिकना कहते हैं। शाम को योग कक्षा में एसी में से काली चीटियाँ बरसने लगीं, गर्मी से बचने के लिए संभवत: वे वहाँ आयी होंगी। बाहर बरामदे में कार्पेट बिछाकर सबने साधना की. पश्चिम बंगाल में हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। एक आतंकवादी हमले में कश्मीर में सीआर पी एफ के जवान मारे गए हैं। ‘’जीन  पर लिखी किताब अब कठिन होती जा रही है,  सोचा है फिर भी पूरा पढ़ेगी।  कितने वैज्ञानिकों की मेहनत का फल होती है एक खोज। जून ने रिटायरमेंट से पहले होने वाली तैयारी आरंभ कर दी है। 

 

आज भी गर्मी बहुत थी, शाम को अचानक वर्षा होने लगी, पर बूँदाबाँदी तक ही सीमित रही। आजकल लगभग रोज ही ऐसा होता है। योग कक्षा में एक साधिका पुदीने की शिकंजी बनाकर लाई, जो वे योग दिवस पर सबको पिलाने वाले हैं। आज उनकी कार बंगलूरू के लिए रवाना हो गई। उनसे पहले वही पहुँच जाएगी। एक मित्र परिवार को भोजन पर बुलाया था, वह  सेवा निवृत्त हो चुके हैं। उनके दातों का इलाज चल रहा है, खिचड़ी बनाने को कहा था उन्होंने स्वयं ही। हींग वाले आलू, बेक की हुई सब्जियां और घी के साथ खिचड़ी जब उन्होंने खाई तो बार-बार कह रहे थे, उनके लायक भोजन बना है, खाने में जरा भी दिक्कत नहीं हुई। इस माह के अंत तक वे लोग चले जाएंगे। शाम को क्लब में रिहर्सल थी, अभी दो दिन और होगी, तीन दिन बाद कार्यक्रम है। फैशन परेड के लिए रैम्प पर चलना इतना भी कठिन नहीं होना चाहिए। 


आज सुबह जून टूर पर गए हैं, परसों आ जाएंगे। सुबह दक्षिण भारतीय नाश्ता बनाया था। योग कक्षा  में बच्चों को योग प्रोटोकाल के अनुसार योग कराया, बाद में योग पर एक प्रश्नोत्तरी और योग दिवस पर उन्हें एक चित्र बनाने को भी दिया। शाम को बगीचे में बैठकर ध्यान कर रही थी कि  पूनम का चाँद दिखा, तस्वीरें लीं, चाँद को देखकर सदा ही मन में उमंग की एक लहर दौड़ जाती है, ग्रहों का कितना प्रभाव पड़ता है जीवन पर। बचपन में आकाश के नीचे लेटकर वे बादलों को देखा करते थे, मन भी जैसे आकाश जितना फैल  जाता था। आज पहली बार यू जी कृष्णामूर्ति को सुना। गुरुजी को भी सुना, नींद और भोजन ऊर्जा को बढ़ाने वाले हों न कि सुस्त बनाने वाले, ऐसा उन्होंने कहा। 


आज का दिन कैसे बीत गया पता ही नहीं चला। सुबह उठने में थोड़ी देर हुई। प्रात: भ्रमण से लौटी तो रोज गार्डन के सामने फूलों की चादर बिछी थी। पीले फूलों से गेट  से सड़क तक जैसे कालीन बिछ गया था। वापस लौटकर तस्वीरें उतारीं, एक वीडियो भी बनाया। स्कूल जाना था, बच्चों को संगीत के साथ योग कराया, प्रिंसिपल ने कहा, योग दिवस टीचर्स के साथ ही मनाएंगे। वापस आकर कुछ देर कंप्यूटर पर बैठी। दोपहर बाद मृणाल ज्योति, लौटकर, शाम की योग कक्षा फिर क्लब, वापस आकर कुछ देर ध्यान किया फिर रात्रि भोजन।  


और सुदूर अतीत में .. उस दिन के पन्ने पर विनोबा भावे की सूक्ति थी, “दूसरों को प्रेम करने से प्रेम मिलता है।” उसने लिखा.. और वह दुनिया से प्रेम करती है, सारी दुनिया से और ईश्वर से.. और उसके प्रिय जनों से भी। उस दिन एक और पेपर हो गया, कैसा हुआ यदि कोई पूछे तो कहना पड़ता, बुरा, फिर उसने स्वयं को सुधारा, इस दुनिया में ‘बुरा’ शब्द के अलावा कुछ भी बुरा नहीं है, उसे इस शब्द का प्रयोग कभी नहीं भाया। यदि कुछ पसंद न आए तो वह ‘अच्छा नहीं है’ ही  कहती थी। उसने सोचा पचास प्रतिशत अंक तो मिल ही जाएंगे, कुछ न से तो कुछ होना ही अच्छा है। अब चार दिन के बाद केवल एक ही पेपर शेष था। कालेज से लौटते समय जिस व्यक्ति ने उसे सीट दी, बुजुर्ग था,पढ़ा-लिखा था । शहर में आप किस मोहल्ले को बिलॉंग करती हैं ? यही प्रश्न था जो शायद वह पूछ रहा था, बस के शोर में उसे कुछ सुनाई नहीं दिया बाद में जोड़ने पर यह समझ में आया पर वह चुप बैठी रही। 


Monday, September 28, 2020

सरोजिनी नायडू की स्मृति

सुबह नींद खुली तो सबसे पहले जून ने जन्मदिन की बधाई दी, फिर दिन भर शुभकामनायें मिलती रहीं. फेसबुक, व्हाट्सएप और फोन पर, नैनी और उसके परिवार के बच्चों ने कार्ड्स बनाकर दिए, उसकी सास ने पीले फूलों का एक गुलदस्ता दिया जिसमें चम्पा के भी दो फूल थे तथा . उसकी देवरानी ने एक दिन पहले ही लाल गुलाब का फूल देकर शुभकामना दी थी, कहने लगी सबसे पहले मेरी बधाई मिले इसलिए एक दिन पहले ही दे रही है. छोटी ननद ने एओल का गीत गाकर बधाई दी. अकेले ही टहलने गयी, जून को तीन दिनों के लिए पोर्ट ब्लेयर जाना है, तैयारी में लगे थे. वापस आकर प्राणायाम करने बैठी. जून ने माली को बुलवाया था पर वह नहीं आया सो थोड़ा सा क्रोधित थे, उनके क्रोध का आभास स्पष्ट हो रहा था योग कक्ष में बैठे हुए भी,  तरंगों का प्रसारण कितनी शीघ्रता से होता है. उनके दफ्तर जाने के बाद ध्यान किया. शाम की पार्टी की तैयारी की. दो मित्र परिवार आने वाले हैं. वह बंगाली सखी फोन करेगी ऐसी तो उम्मीद नहीं थी पर उसने व्हाट्सएप पर शुभकामनायें दीं, अच्छा लगा. शाम की योग कक्षा में सभी कुछ न कुछ बनाकर लाये थे, उन्होंने भजन गाये और ढेर सारे व्यंजन खाये. एकादशी थी पर उसने प्याज का प्रयोग कर लिया अनजाने में, किसी ने कुछ कहा नहीं पर उन्हें ज्ञात तो अवश्य हो गया होगा, प्रेम सारे नियमों से ऊपर होता है. इस जगत में प्रेम से बढ़कर कोई पावन वस्तु नहीं और प्रेम में होना ही आनन्द में होना है ! अर्थात परमात्मा में होना है ! इन साधिकाओं के प्रेम का कोई हिसाब नहीं, सभी एक से बढ़कर एक हैं. एक की तबियत ठीक नहीं थी फिर भी आयी थी, एक ने माँ शारदा के वचनों की छोटी सी पुस्तक तथा फूल दिए. इन सबका प्रेम देखकर लगता है, गुरु कृपा का पार पाना मुश्किल है. 


आज सुबह छह बजे जून अंडमान की यात्रा के लिए रवाना हो गए. उधर नन्हा और सोनू भी बीजिंग पहुँच चुके हैं. कई दिनों बाद मृणाल ज्योति गयी. वाइस प्रिंसिपल अस्वस्थ होने के कारण छुट्टी पर थी, प्रिंसिपल भी घर के कामों में व्यस्त थीं, उनकी आया लम्बी छुट्टी पर गयी हुई है. बाकी कई जन मिले, बच्चों को योग कराया. घर से लाये शकरपारे खिलाये. टीचर्स को मिठाई दी. जन्मदिन पर मिला फूलों का गुलदस्ता एक बच्चे को दिया, वह बहुत खुश हुआ. वापसी में आज़ार के बैंगनी फूलों से लदे वृक्षों के चित्र लिए. कल सुबह भी कैमरा लेकर जाना है, पूरे कैम्पस में बीसियों पेड़ों पर ये पुष्प खिले हैं. गुलमोहर पर भी बहार आयी है. पीछे वाली पड़ोसिन के यहां भी जाएगी, चम्पा का वृक्ष देखने. उसे मानसून पर कुछ बातें नेट पर मिलीं, उन्हें रोचक ढंग से लिखना है. छोटी भांजी का फोन आया, उसके जन्मदिन की कविता लिखनी है और गायत्री योग साधिकाओं के लिए भी यहां से जाने से पूर्व कुछ लिखना है. बिजली चली गयी है, सुबह से ही आ जा रही थी. आज मंत्रीमण्डल का गठन भी हो गया, मोदी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल के लिए पुरे जोश के साथ काम करने के लिए तैयार है. 


अतीत के पृष्ठ - उस दिन उसने एक पत्र लिखा तो उसमें उस अनुभव के बारे में भी लिख दिया जो हुआ था कुछ देर पूर्व ! अद्भुत ! अनोखा ! शांत और प्रिय ! ईश्वर ने उसके प्रेम का प्रतिदान उपहार देकर दिया. शायद वह बिना किये ही ‘ध्यान’ का पहला अनुभव था, उस समय ‘ध्यान’ से वह अपरिचित थी. उसके बाद भी एक कविता सहज ही लिखे जाने का जो अनुभव हुआ वह भी कम रोचक नहीं, सरोजिनी नायडू की स्मृति उसे सदा आ जाती है ऐसे वक्त पर, और चौड़ा मस्तक भी. कुछ अरसा पहले वह छोटी बहन के साथ एक वृद्ध अध्यापक के पास अंग्रेजी पढ़ने जाती थी, वह उसकी दुविधा और चिंता कितनी अच्छी तरह समझते थे, तभी उन्होंने कहा था, तुम्हारा मस्तक चौड़ा है.  स्नेह का एक बोल मन को फूल सा हल्का मगर शक्ति में चट्टान सा दृढ बना देता है. उस दिन वह बेहद प्रसन्न थी, उत्साह से लबरेज उसका प्याला छलका जा रहा था, जैसे सारा जहाँ उसके लिए पूजा की वस्तु बन गया हो. अगला पेपर फ्लूइड डायनामिक्स का है, उसने सोचा मानसून कब आएगा. 


Tuesday, August 4, 2020

हनुमान जयंती


आज ये सुंदर वचन सुने, अच्छे लगे तो लिख लिए. “मित्रता और शत्रुता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं, जब तक वे दूसरे के प्रति बह रहे हैं, स्वयं से दूर ही जा रहे हैं. चित्त की शुद्धि के लिए आवश्यक है कि वे देह के श्रृंगार और स्वादिष्ट भोजन में अत्यधिक रस न लें. अन्य की मौजूदगी में यदि वे स्वयं को अनुभव करते हैं तो स्वयं की अभी खबर नहीं है. भीतर की ऊर्जा को अनुभव करने के लिए उन्हें मात्र स्वयं को जानना है.” इस समय रात्रि के साढ़े सात बजे हैं. बाहर से टहलकर आये तो गंधराज का एक फूल लाये. आजकल फूलों की बहार है यहाँ, टेसू, रूद्र पलाश और भी न जाने कितने सुंदर फूल ! आज एक योग साधिका अस्वस्थ थी, उसे अस्पताल जाने को कहा है, ईश्वर करे वह जल्दी स्वस्थ हो जाये. सुबह उठने से पूर्व स्वप्न में नैनी के पुत्र का पूर्वजन्म देखा, उसका बचपन का चेहरा, फिर किशोरावस्था का, नीले रंग की कमीज पहने था, वह बहुत बहादुर था उस जन्म में. इसीलिए वह जरा भी नहीं डरता, बारिश में भीगता है. मिट्टी पर लोटता है और मन को दिन भर तक देता है. आज ही सुना कि साधना गहरी होती है तो अपने ही पूर्वजन्म का पता नहीं चलता अपने आस-पास के लोगों के पूर्वजन्म का भी ज्ञान होने लगता है. 

रामदेव जी जयपुर में राज्यवर्धन राठौर के नामांकन कार्यक्रम में लोगों का आवाहन कर रहे हैं कि वे एक बार फिर मोदी जी को जिताएं और देश को ऊँचाइयों तक ले जाने में अपना भी योगदान दें. आज चुनाव का दूसरा चरण है, मोदी जी अपने कामों के द्वारा एक बार पुनः भारी बहुमत से जीतकर आ जायेंगे, ऐसा उसे ही नहीं हर देशभक्त भारतीय को पूर्ण विश्वास है. लगभग एक महीने बाद परिणाम आ जायेंगे. आज एओल के एक शिक्षक का संदेश आया, गुरूजी के जन्मदिन पर कवि सम्मेलन होगा, उसके लिए दो कविताएं भेजनी हैं. वे इस वर्ष बंगलूरू में रहेंगे उस दिन. उसने कवि सम्मेलन के लिए रजिस्ट्रेशन किया. व्हाट्सएप पर एओल कवियों के ग्रुप में शामिल हुई. कविता बाहर-भीतर सब ओर मुखरित हो रही है. आत्मा की छिपी और गूढ़ सौंदर्य राशि का भावना के आलोक में प्रकाशित हो उठना ही कविता है ! 

आज सुबह उठने से पूर्व किसी ने चेताया वह उसकी बात सुनेगी या नहीं ? ये शब्द एक बार नहीं अनेक बार सुने. इतनी तीव्रता से कि जैसे कोई धमका रहा हो. परमात्मा उन्हें प्यार से अनेक इशारों से और फिर दृढ़ता से समझाता है. वह उन्हें अपने जैसा देखना चाहता है, वह उनका सुहृद है, उनका सखा और उनका अपना ! आज हनुमान जयंती है, नैनी ने हनुमान जी की तस्वीर के आगे सुंदर फूल सजाये. पूरी हनुमान चालीसा पढ़ी वर्षों बाद. सत्य के मार्ग पर उन्हें अपार आनंद मिलता है फिर भी वे राग-द्वेष के शिकार हो जाते हैं. शाम को मीटिंग थी, नई अध्यक्ष को क्लब का चार्ज दे दिया. 

अब अतीत की बात.. बरसों पुरानी, कालेज के अंतिम वर्ष की. सुबह नींद नहीं खुली और आज वह स्वतन्त्र है, कल से जल्दी उठ सकती है. बाजार गयी थी, सूट सिल गया, बेहद सुंदर लग रहा है पर पहनने वाला सुंदर हो तब तो बात भी है.  होली का दिन, महीना फागुन का नहीं सावन का लग रहा है, या आषाढ़ का एक दिन !  पानी तेजी से बरस रहा है. ईश्वर भी होली खेलना पसन्द करते हैं. वह इस समय किताबें लेकर बैठी है. तीन बजने वाले हैं, किसी को होली खेलना पसन्द नहीं, पिछले वर्ष भी होली इसी तरह मनायी गयी थी. दरबारा सिंह जी, पंजाब के मुख्य मंत्री का भाषण सुना, उसने इससे पूर्व प्रधान मंत्री या जगजीवन राम के अतिरिक्त किसी का भाषण नहीं सुना. दरबारा सिंह जी बोले और खूब बोले लेकिन अधिकतर बातें ऐसी थीं जो कई बार सुनी हुई थीं. इसके अलावा पंजाब में सिखों के अलग प्रदेश बनाये जाने के बार में, उस विवाद के बारे में उन्होंने कोई बात नहीं की, जिसकी कि कुछ लोग उनसे आशा रखते होंगे जो कि आज के भाषण से सम्बन्धित भी थी. कौमी एकता कमेटी के प्रेसीडेंट की आवाज में जो जोश था, उससे उनके दिल की गहराई में जो बात है, वह वाकई में है, यह जाहिर हुई. वे जहनी तौर पर इस कदर सहमे हुए हैं मुसलमानों से, उन्हें उनसे एक दूरी का अहसास बराबर होता रहता है. जब तक ये आंतरिक जड़ें जो मन में दूर तक धंस गयी हैं समाप्त नहीं होतीं, जब तक सिर्फ यह भाव पैदा नहीं होता कि कोई व्यक्ति इस वजह से कि वह बंगला भाषी है या मुसलमान है या किसी अन्य प्रदेश का है, इस तरह का या उस तरह का है, कौमी एकता दूर की चीज है. प्रश्न सिर्फ भाषा का नहीं है. भाषा का प्रश्न उछाला जाता है नारे बाजी में, दरअसल वे अपने-अपने खानों में इस तरह फिट बैठ गए हैं कि बाहर निकल कर देखना ही नहीं चाहते. कूप मंडूक की तरह अपने इर्दगिर्द नजर डालकर चुप हो जाते हैं, इस पीढ़ी को अपनी पुरानी पीढ़ी से क्या मिला ! कुशिक्षा, असभ्य भाषा, आधुनिकता के नाम पर भोंडापन, फ़िल्में और नारेबाजी. वे अपनी पीढ़ी को क्या देकर जायेंगे इससे भी नीचे की चीजें. आदर्शवाद का जिस तरह मखौल आज उड़ाया जा रहा है, आगे चलकर तो वह सिर्फ कल्पना की वस्तु रह जाएगी. 

Monday, July 20, 2020

समंदर की लहरें



कल शाम वे गेस्टहाउस गए, उस सखी की बिटिया का जन्मदिन था, जो अपना घर देखने आयी थी . उसके पूर्व दो माह बाद एओल टीचर द्वारा करायी सुदर्शन क्रिया में भाग लिया. क्रिया के बाद कुछ ज्ञान चर्चा भी हुई. सार निकला, वे अपना समय तथा ऊर्जा उन लोगों के सामने स्वयं को कुछ सिद्ध करने में लगा देते हैं जिन्हें उनकी जरा भी परवाह नहीं होती. वे अपना प्रेम उन पर लुटाते हैं जिन्हें प्रेम के बारे में केवल अपने हानि-लाभ ही ज्ञात होते हैं.  सरल और सहज रहकर यदि वे अपने काम से काम रखें तो जीवन कितना सुंदर होगा. परमात्मा अपनी कृपा दोनों हाथों से नहीं बल्कि हजार हाथों से लुटा रहा है, उनकी झोली इतनी छोटी है और मोह, कामना के इतने छिद्र हैं उसमें कि वे उसको पहचानें इसके पहले ही वह झर जाती है. वे जो वास्तव में हैं वही जगत के सम्मुख आये, कोई भी दम्भ या दिखावा उन्हें छू न जाये. जून आयकर के सिलसिले मेंआज डिब्रूगढ़ गए हैं. आज सुबह उसे पीठ में जकड़न सी  हुई,  दवा लगाकर हीटिंग पैड से सेंक किया. सो आज सुबह की साधना नहीं हुई, बाद में ध्यान किया कोई जैसे भीतर से पढ़ा रहा था. जगत से लिया हर सुख दुःख के साथ मिला हुआ होता है, जैसे कड़वी दवा पर मीठी परत होती है कुछ ऐसे ही. उन्हें आत्मानुभव बढ़ाते जाना है. जीवन में जो भी परिस्थिति आए उससे कुछ सीखकर आगे बढ़ जाना है यदि असजग रहे तो पत्थर की तरह वह पैरों में बंध जाती है और जितनी गति से वे पहले चल रहे थे उससे भी कम गति रह जाती है. दिन में दो बार और पीठ पर सेंक किया, दोपहर को हल्का भोजन सो अब सब ठीक है. कल उन्हें मतदान करने जाना है, हायर सेकेंडरी स्कूल में सेंटर है. आज सुबह सुना स्वामी अनुभवानंद जी कह रहे थे, परमात्मा से मांगने योग्य वस्तु क्या है ? उन्हें ऐसा दिल मिले जिसमें किसी भी प्राणी के लिए स्वप्न में भी कोई द्वेष या कटुता न हो, ऐसे दिल में ही परमात्मा बसते हैं. 

शाम के चार बजने वाले हैं. टीवी पर चुनाव समाचार आ रहे हैं. पश्चिम बंगाल में हुई हिंसा की खबरें आ रही हैं. आज सुबह वे वोट डालने गए. पिताजी से बात हुई, वे छोटी भाभी के साथ अठ्ठासी वर्ष की उम्र में भी पैदल चलकर मतदान करने गए.  उन्हें बहुत अच्छा लगी यह बात. आज बड़ी भाभी की चौथी पुण्यतिथि है, भाई ने बहुत सुंदर वीडियो उनकी स्मृति में बनाया है. उनकी बिटिया अगले हफ्ते आ रही है, अब वहीं रहकर जॉब करेगी. छोटे भाई से बात हुई, वह साधना में  अपने समय का सदुपयोग करता है. अब सिओल में पुरस्कार समारोह में मोदी जी का भाषण आ रहा है. इतने प्रभावशाली ढंग से वह भारत की बात कर रहे हैं. वह एक विश्व नेता हैं, सरे विश्व में उनकी बात सुनी जाती है. आज माली की पत्नी ने बताया उसकी बेटी को स्कूल में नृत्य में भाग लेना है, ड्रेस माला आदि खरीदने के लिए  पति ने पैसे नहीं दिये. उसे आवश्यक पैसे दिए और अपना अकाउंट खोलने को कहा, ताकि अपने लिए कुछ बचत कर सके.

पता नहीं वर्षों पूर्व उस दिन उस पन्ने पर क्यों लिखा होगा, 
‘समुन्दर ! तुम कितना बड़ा दर्द हो ! अपनी बाँहों, टांगों से सारा दर्द फेंकते किनारे को, लेकिन किनारा एक ही ठोकर से लौटा देता तुम्हारा दर्द तुम्हीं को !’ 
परीक्षाओं के कारण एक लाभ उसे अवश्य हुआ है कि पढ़ने के लिए एकांत मिल जाता है. न किसी के साथ किसी संबन्धी के घर जाना और न बाजार न फिल्म देखने. पर यह खुशफहमी जल्दी ही दूर हो गयी, भाभी की भाभी आयी और अगले ही दिन उनके साथ गयी ‘सत्ते पे सत्ता’ देखने, केवल उन्नीस दिन रह गए हैं परीक्षाओं को. कम से कम अब तो उसे पढ़ाई के प्रति गम्भीर हो जाना चाहिए. कुछ दिनों की पीड़ा जीवन भर के सुख का आधार बन जाएगी,  इसलिये सहो, जितना सम्भव हो सहो गणित के सवालों की तीखी धारों को अपने मस्तिष्क के तन्तुओं पर... उसे अब अचरज होता है क्या पढ़ाई पीड़ा लगती थी उसे. 


Monday, July 6, 2020

ठंड से सिकुड़े फूल


शाम के सवा चार बजे हैं, बगीचे में झूले पर बैठकर मन्द हवा के झोंको और चिड़ियों की चहकार के मध्य लिखने का अवसर कभी-कभी ही मिलता है. जून अभी तक आये नहीं हैं, उनका रात्रि भोजन भी बाहर ही होने वाला है सो किचन में भी कोई काम नहीं है. दोपहर को मोदी जी को सुना जब वह मजदूरों के लिए पेंशन स्कीम की योजना का वर्णन दे रहे थे. उनके दिल में वंचितों के लिए बहुत दर्द है. देश के हर व्यक्ति को वह अपने परिवार का एक अंग ही मानते हैं. वह उस राजा की तरह हैं जो अपनी प्रजा से बहुत प्रेम करता है. अगले चुनावों में बीजेपी ही जीतने वाली है. इसमें किसी को कोई शक नहीं रहना चाहिए. जन औषधि के कारण देश में सस्ती दवाएं मिलने लगी हैं. नए एम्स भी बन रहे हैं. प्रधानमंत्री रोज ही नई-नई योजनाएं आरंभ कर रहे हैं. सस्ती स्वास्थ्य सुविधाएँ देश में मिल रही हैं. पुलवामा में हुए आतंकी हमले पर भी विपक्ष संदेह करने से बाज नहीं आ रहा है. पाकिस्तान में हुई एयर स्ट्राइक पर तो सवाल उठ ही रहे थे. पिछले दिनों काफी विचारकों को सुना. भारत-पाकिस्तान के बिगड़ते हुए संबंधों का कारण इस्लामिक कट्टरवाद ही है. यह किसी भी मुल्क को आगे बढ़ने से रोकता है. महीने के तीसरे सप्ताह में प्रेसिडेंट का फेयरवेल है, जिसमें  योग साधिकाओं को श्लोक पाठ प्रस्तुत करना है आज से वे रिहर्सल करेंगी. 

संध्या पूर्व का समय है, अभी अभी वे लॉन में टहलकर आये हैं. मौसम आज खुला है, लाल डूबता सूरज पेड़ों के पीछे से झाँक रहा था कुछ समय पूर्व. घास भीगी थी. एजेलिया का पौधा मेजेंटा फूलों से भर गया है जो अपनी ओर खींचता है. आज सुबह नैनी का पति अपने पिता को स्थानीय अस्पताल ले गया. पता चला, गले में कैंसर के कारण डिब्रूगढ़ मेडिकल कालेज ले जाना होगा. उसने ईश्वर से उनके लिए प्रार्थना की. दोपहर को मृणाल ज्योति गयी, एक अध्यापिका का विदाई भोज था, वह बहुत रो रही थी. इंसान का दिल बहुत कोमल होता है वह नफरत को सह लेगा पर प्रेम में पिघल जाता है. क्लब के एक सिलाई-कढ़ाई प्रोजेक्ट में एक सदस्या से मिली, वह बहुत ऊर्जावान है. उसने एक लकड़ी के शोकेस में प्रोजेक्ट का मोटिफ व अन्य नमूने लगाए हैं. आज सुबह उठने से पूर्व मन में एक मंथन चल रहा था, आत्मिक शक्ति को बढ़ाने के लिए क्या करना चाहिए. अपने सुख को किसी वस्तु, व्यक्ति या परिस्थिति पर आश्रित नहीं रखना चाहिए, सबसे पहले तो यही संदेश मिला. साधक को हर पल सजग रहने की आवश्यकता है. परमात्मा सदा उसके साथ है, वह उसे स्वयं से दूर जाने नहीं देता. वह अकारण दयालु है, सखा है, सुहृद है. राजनीति के चक्करों से भी साधक को दूर ही रहना चाहिए. देश में चुनाव होने वाले हैं, बहुत तरह के संदेश दिए जा रहे हैं. जो भी होगा, भला होगा, इस विश्वास के साथ अपने सहज कर्मों को करते जाना है. परसों महिला दिवस है. महिलाएं आज किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं. सेना हो या सिविल दोनों में ही महिलाएं आगे बढ़ रही हैं. नए घर में पेटिंग का काम आरंभ हो गया है. 

उस पुरानी डायरी में पढ़ा, दादाजी ने अपनी बहन के बारे में बताया, अभी तक वह उनसे नाराज हैं. किस तरह उन्होंने अपने पति के मरने पर उन्होंने दूसरा विवाह किया तो लोगों ने इन्हें कहा, गोली चला दो; पर उनके पिता जी ने कहा कि नहीं, जान लेने से कोई फायदा नहीं, ऐसी घटनाएं और भी हो रही हैं. पिता समझदार निकले. सात भाइयों में से एक को फाँसी भी हो जाती तो भाइयों को दुःख न होता. दादाजी ने एक और मजेदार बात बताई, दादी जी को देखने के लिए नाइन को एक रुपया दिया था उस जमाने में. 

आगे लिखा था, तुम्हें जिसके प्रति आस्था हो उसके प्रति ईमानदार रहो, पर अपनी भूलों पर... उनके लिए दुखी होने की आवश्यकता नहीं है, वे अतीत की वस्तुएं हैं, मृत हैं, वर्तमान में तुम क्या हो, महत्व इस बात का है और इस बात का भी कि भविष्य में तुम क्या होगी ! यदि कोई तुम्हें उन बातों का स्मरण भी दिलाये तो चुपचाप सुन लो... न प्रतिवाद न पश्चाताप, वे उन दिनों के फूल थे और ये आज के फूल हैं, फिर इससे क्या अंतर पड़ता है कि फूल किस रंग के हैं. सर्दी के कारण सारे गेंदे के फूल अपनी आकृति खो बैठे हैं तो क्या वे फूल नहीं हैं ? सो यह बिलकुल व्यर्थ की बात है कि पिछले वर्ष तुमने खिचड़ी खायी थी या पुलाव ! 

अवश्य कुछ हुआ होगा पर उसके बारे में कुछ नहीं लिखा है. 

Tuesday, June 30, 2020

बसन्त में बौर

आज स्कूल में योग अभ्यास के बाद कक्षा तीन की एक छात्रा ने कहा, उसे योग करना अच्छा लगता है. उसने सामने आकर आसन भी किये. बाकी बच्चों को भी अवश्य ही इससे प्रेरणा मिलेगी. बच्चे ही नहीं बड़ों को भी आज के वक्त में योग सीखना ही पड़ेगा. उस दिन एक परिचिता आयी थी, जो बहुत परेशान थी. आज लड़कियाँ पढ़ लिख गयी हैं, अच्छा कमा रही हैं पर जीवन के सामान्य सुखों से वंचित हैं. वह यहाँ अकेली रहती है, ससुराल दूर है, तबादले की कोशिश कर रही है. आज दोपहर अस्पताल गयी जहाँ क्लब की वाइस प्रेसीडेंट इलाज करा रही हैं, वह कुछ दिन पहले गिर गयी थीं और घुटने में चोट लगी. वह उनके लिए फूल ले गयी और एक कविता भी, जो पढ़कर सुनाई. वापसी में क्लब में खिले फूलों की तस्वीरें उतारने कुछ देर के लिए रुकी. घर के सामने बने हैलीपैड कम वॉकिंग ट्रैक में  कोई टीम गिटार बजाकर शूटिंग कर रही है.

कल रात से ममता बनर्जी अपने ही राज्य में धरने पर बैठी हैं. कोलकाता के पुलिस कमिश्नर भी उनके साथ थे, जिनसे पूछताछ करने कल सीबीआई की टीम आयी थी और उन्होंने उसे ही गिरफ्तार कर लिया था. देश में चुनाव से इतनी हलचल होनी शायद स्वाभाविक ही है. मोदी जी की बढ़ती लोकप्रियता से विरोधी पक्ष घबराने लगा है. जनता समझ रही है कि ममता जी अब बौखलाहट में ऐसे कदम उठा रही हैं. रात्रि के आठ बजे हैं, जून अभी तक नहीं आये हैं, उनके दफ्तर में ऑडिटिंग चल रही है, अभी दो दिन और चलेगी. बसन्त पर एक कविता लिखी, उस दिन सुबह एक मधुर सुवास का अनुभव हुआ तो जून ने कहा था यह आम के बौर की सुगन्ध है, तभी  लिखने का विचार मन में आया था. उनके विचार बदल रहे हैं, यात्रा पर जाने के लिए अब वह पहले जैसे उत्सुक नहीं दीखते. सादा भोजन पसन्द करने लगे हैं. यूट्यूब पर  गुरूजी को सुना, सरल शब्दों में गूढ़ प्रश्नों के उत्तर दे रहे थे, कितने महान हैं वह, अपने आप में एक पूर्ण सत्ता ! कल रात्रि दो-तीन बार आँख खोलकर घड़ी देखी, सुबह की प्रतीक्षा थी. सुबह जगने से ठीक एक क्षण पूर्व आज्ञा चक्र पर सुंदर कलात्मक ॐ की आकृति दिखी. श्वेत प्रकाश पर काले रंग से बनी, कितना अद्भुत था वह दर्शन ! उसके बाद नीले प्रकाश में कोई चेहरा सा दिखा, सुबह से कई बार दिखा है, पहले भी दीखता है पर वह कौन है, कुछ ज्ञात नहीं. परमात्मा के सिवा जब यहाँ कुछ है ही नहीं तो वह उसकी का भेज देवदूत होगा. 

 नूना ने पुरानी डायरी पढ़ी - एक कविता, जो कालेज की लड़कियों के लिए लिखी थी. 

बड़ी समझदार, थोड़ी नादान
खुद से अनजान, करतीं पहचान 
वर्तमान और भविष्य की कड़ी लड़कियाँ
हवा सी तेज, पानी सा बहाव
आँखों को चुनौती देती 
घड़ी-घड़ी लड़कियाँ 
हँसती-खिलखिलाती 
सदा नए मोड़ पर खड़ी लड़कियाँ
जग की शान, परिवार का मान 
धरती की अंगूठी में जड़ी लड़कियाँ !

भगवद्गीता में कृष्ण कहते हैं, जो उन्हें हर जगह देखता है वह उसका नाश नहीं करते. उसे पूरा यकीन है कि एक दिन ऐसा आएगा जब सब यह तय कर लेंगे कि उन्हें एक साथ मिलकर अपनी अक्ल से आगे बढ़ना है. 
तुलसी यह जग आई के, सबसे मिलिए धाई
न जाने किस रूप में नारायण मिल जाई !

सुबह से वह मृत थी, स्पंदन का अनुभव हुआ अभी कुछ क्षण पूर्ण गेंदे के फूलों के मध्य; अब वह प्रसन्न है. उसके प्रिय वृक्ष के नीचे कितनी ही सूखी फलियाँ पड़ी थीं. उस जगह बैठते ही उसे विचित्र अहसास होता है जैसे वह धरती से दूर कहीं और पहुँच गयी है. उसे यकीन है कि चाहे किसी भी मूड में वहाँ जाये, जाते ही पोर-पोर अनजाने भय से, अनजाने सुख से सिहर उठेगा. अब वह स्वतन्त्र है, हर तरह के दुःख, परेशानियों से स्वतन्त्र, पढ़ने और लिखने के लिए स्वतन्त्र ! 

Sunday, May 3, 2020

ओस की बूँदें



आज दिन भर व्यस्तता बनी रही, इस समय टीवी पर कोई हास्य धारावाहिक चल रहा है पर आवाज बन्द है, जून की फोन पर बात चलती रहती है. कल उन्हें एक हफ्ते के लिए अहमदाबाद व जयपुर जाना है. पैकिंग कल शाम को ही कर ली थी. आज शाम हेयर कट के लिये रखी थी, उनके छोटे या बड़े सभी काम योजना बद्ध होते हैं. उसके भी जाने की बात थी पहले पर इन दिनों उसके पास भी कई काम हैं. शाम को स्कूल में मीटिंग थी. उससे पूर्व क्लब की सेक्रेटरी के साथ गिफ्ट बांटने के लिए सूची बनाने का काम था. दोपहर को मृणाल ज्योति में हिंदी कक्षा लेने गयी.  पांच विद्यार्थी हैं दो छात्रायें और तीन छात्र, वे बोल नहीं सकते पर आपस में सब कुछ कह-सुन लेते हैं. उनके चेहरों की मुस्कान कुछ अलग ही होती है, वह जितना हो सके इशारों व चित्रों के माध्यम से से उन्हें हिंदी लिखना-पढ़ना सिखा रही है. सुबह ड्राइविंग का अभ्यास किया एक योग साधिका को देखने गयी जो कुछ दिन से अस्वस्थ है, वह बहुत कमजोर लग रही थी. इसी तरह दिन कुछ न कुछ करते बीत गया. जून लन्च पर नहीं आये, उनके दफ्तर में एक लैब अटेंडेंट का विदाई समारोह था. बड़े भाई का बुखार आखिर उतर गया, मंझले भाई का फोन आया, वह बहुत खुश था, भाभी ने बहुत सहायता की. छोटी बहन ने कहा वह डेंगू पर एक कविता लिखे. दोपहर को पुराना माली आया. कहने लगा, उसके पास फोन आया, आपका इनाम निकला है, अपना अकॉउंट नम्बर भेज दीजिये. वह पूछ रहा था, भेजे कि नहीं. वे लोग आधार नम्बर भी मांग रहे थे, उसे मना किया. कल ही उसके पास केबीसी की तरफ से एक फोन आया, कि उसका चुनाव हुआ है, यकीन नहीं हुआ उसे, क्योंकि कभी कोशिश ही नहीं की थी. सोनू ने बताया, वह फोन असली नहीं था. 

आज सुबह बेहद सुहानी थी, सितम्बर समाप्त होने को है, मौसम में हल्की ठंडक बढ़ गयी है. उसे पंछियों की आवाजों ने जगाया, लगा जैसे वे भोर होने का एलान कर रहे थे और कह रहे थे, मानव कुदरत की इस नेमत से खुद को वंचित क्यों रखता है, जब पेड़, पंछी, हवाएं और आसमान सभी सूरज का स्वागत कर रहे हैं तब वह घर में मुंह ढक के सोया रहता है. वह झट बगीचे में गयी, लॉन की ह्री शीतल घास का स्पर्श अनोखा था और हल्की धुंध ने जैसे वातावरण को तिलस्मी बना दिया था. देखते-ही देखते सूरज ऊपर आ गया और ओस की बूंदें विलीन होने लगीं. दोपहर पूर्व  लेखन कार्य को आगे बढ़ाया, फिर योग कक्षा में पेट की चर्बी कम करने के व्यायाम कराए, आजकल कमर जैसे कमरा होती जा रही है. शाम को भजन संध्या थी. आज उसे मिलाकर पूरी एक दर्जन साधिकाएं थीं. उसने खजूर का प्रसाद दिया, एक महिला मीठी इडली बनाकर लायी थी, चावल, दूध, नारियल, चीनी व इलाइची पाउडर से बनी, बहुत स्वादिष्ट थी. जून अहमदाबाद पहुँच गए हैं. 

आज का दिन भी व्यस्तता से भरा था. सुबह के सारे कार्य, भृमण, साधना, नाश्ता आदि करते करते नौ बज गए. उसके बाद कार का अभ्यास. दोपहर को स्कूल व लेखन कार्य कर ही रही थी कि एक सखी का फोन आया, बंगाली सखी की माँ का देहांत हो गया, कई दिनों से बीमार थीं, अस्पताल में थीं. उससे मिलने गयी, कई लोग थे वहाँ, सखी बहुत उदास थी, जो स्वाभाविक ही था. कहने लगी, भाई ने अभी फौरन आने को मना किया है वह चौथ तक घर पहुँच जाएगी.  कुछ देर बैठकर वह वापस आ गयी. शाम को क्लब में मासिक कार्यक्रम था, पूजा का माहौल बन गया था. नृत्य, भजन, गीत सभी कुछ देवी को समर्पित थे फिर स्किट भी हुआ. पड़ोसिन के साथ पैदल चलकर घर आ गयी. हील की चप्पल  और साड़ी पहनकर आना थोड़ा कठिन तो है पर दूरी ज्यादा नहीं है, दस-बारह मिनट ही लगते हैं. वापस आकर पड़ोसिन ने अपने मन की बात कही, उन्हें दुःख था कि पिछले महीने क्लब का एक कार्यक्रम आयोजित करने के लिए प्रेसीडेंट ने उन्हें धन्यवाद नहीं दिया, वह बहुत उदास थीं. उसने कहा, सम्भवतः ज्यादा व्यस्त रहने के कारण वह भूल गयी हों, जानबूझ कर वह कभी ऐसा नहीं करेंगी . ‘सम्मान पाने की आशा ही दुःख का कारण है’, उसने यह सूक्ति लिखी व्हाट्सएप सन्देश में. शायद वह समझ जाएँगी, उन्हें ज्यादा दुःख भी हो सकता है, पर यदि वह इस पर विचार करेंगी तो इस बात का सत्य समझ में आएगा. 

Tuesday, April 28, 2020

एक कप चाय



आज कम्पनी के शेयर होल्डर्स की वार्षिक सभा है, ड्राइवर सुबह ही वह गिफ्ट बॉक्स दे गया जी सभी शेयर धारकों को मिलता है, जिसमें मिठाई, नमकीन, भुजिया, जूस, चॉकलेट सभी कुछ है. सुबह नींद खुलते ही जैसे भीतर किसी ने कहा, चाय में नशा होता है, उस नशे से ही मुक्त होना है. कल या परसों नींद से जगते समय  दूध से आधा भर एक कप दिखाई दिया था. रात को किसी वक्त स्वप्न देखा, वह बाजार गयी है, कैमिस्ट की दुकान पर है, कोई दवा खरीद रही है, कम से कम डोज मांगी है, फिर दुकानदार से पूछा, यह नुकसानदायक है न, वह हामी भरता है. चाय में नशा होता है यह बात इस स्वप्न से जुड़ी है और जुड़े हैं वे चाय के कप, जो नींद में दिखे थे. परमात्मा कितने-कितने उपाय करके उसे इस आदत से, आसक्ति से छुड़ाना चाहता है. उसकी कृपाओं का अंत नहीं. आज पूरे दो हफ्तों बाद कार चलाई, अभ्यास छूट गया है और भीतर एक भय भी समा गया है इसलिये धीरे-धीरे ही चला ही पायी. ब्लॉग पर लिखा, कुछ पढ़ा भी और टिप्पणी की. जून अभी एक घण्टे बाद आने वाले हैं, सर में दर्द हो रहा है शायद निकोटिन के लिए, नौ बजे आधा कप बोर्नविटा लिया था. कल शाम क्लब में वरिष्ठ महिलाओं की मीटिंग थी, लौटते हुए सवा आठ बज गए थे, जून को भी डिनर पर  जाना था, पर वह सबसे मिलकर  जल्दी ही लौट आये. उन्हें भी आधी रात तक जगना पसन्द नहीं है. जीवन जब एक लक्ष्य को सम्मुख रखकर आगे बढ़ता है तो मार्ग में आने वाली बाधा स्वयं ही दूर होने लगती है. वे सत्य के पथ के राही हैं. नन्हे से बात हुई, वह नए घर में था, काम शुरू हो गया है, तीन महीने में उम्मीद है पूरा हो जायेगा. सोनू अपनी सखी से मिलने गयी है, हल ही में जिसके पिता की मृत्यु हो गयी है. सर्वेंट लाइन में झगड़ा हो गया था आज सुबह, कारण पूछा तो पता चला, किसी पियक्कड़ ने नशे में अपनी तीन-चार वर्ष की बेटी को भी दो-चार घूंट पिलाने का प्रयत्न किया. विरोध होने पर झगड़ा बढ़ गया. नरक क्या इससे कुछ अलग होगा. 

टीवी पर इण्डिया-पकिस्ताम मैच हो रहा है. एशिया कप के दावेदार दो देशों के मध्य, हजारों लोग इस मैच को देख रहे हैं. कल से आश्विन माह का आरंभ हो रहा है. पहली बार पितृ पक्ष पर कुछ विशेष जानकारी ली और इसके बारे में लिखा. आज शाम फोन पर ज्ञात हुआ कि पीछे कुछ दिनों से बड़े भाई का स्वास्थ्य ठीक नहीं है, इस समय वह अस्पताल में हैं, ईश्वर उन्हें शीघ्र स्वास्थ्य प्रदान करें. छोटा भाई भाभी टूर पर हैं, पिताजी अकेले हैं घर पर पर इस उम्र में भी वह अपना सारा काम स्वयं कर लेते हैं. सुबह बंगाली सखी के यहाँ गयी, उसकी माँ को अब वार्ड में शिफ्ट कर दिया  हैं, पर उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा है. 

वही कल का समय है. टीवी चल रहा है पर आवाज बंद है. जून फोन पर बात कर रहे हैं. उसने भी पिताजी से बात की. मंझला भाई वापस आ गया है, बड़े भाई को नर्सिंग होम में दाखिल करवा दिया है. उनको डेंगू बुखार है यह बात पक्की हो गयी है. उनके कान में भी कुछ दिन से समस्या थी पर अब वह ठीक है. भतीजी आज सुबह घर आ गयी है, वह घर से ही काम करेगी, पापा की सेवा भी जितना हो सकेगा, करेगी. जीवन में कभी-कभी बड़े कष्ट का अनुभव करना पड़ता है, ऐसे में भी जो मन की समता बनाये रख सके, वह साधक है. दोपहर को उसने भाई से बात की तो हीलिंग मेडिटेशन करने को कहा, बुखार जब बढ़ जाता है तब तो वह कुछ नहीं कर पाते होंगे. एक योग साधिका को भी बुखार है, उसे भी उसने श्वासों पर ध्यान देने को कहा. शारीरिक रोग उनकी परीक्षा लेने के लिए आते हैं या उनकी ही लापरवाही के कारण, कोई नहीं जानता. कर्मों के फल के रूप में भी रोग आते हैं और बाहरी वातावरण के कारण भी. उनकी मानसिक स्थिति कितनी मजबूत है इस पर भी निर्भर करते हैं. आज शाम को भी फॉलोअप हुआ, दीर्घ सुदर्शन क्रिया के बाद मन कितना शांत हो जाता है. गुरूजी की कृपा का कोई अंत नहीं, घर बैठे ही उन्हें फॉलोअप का वरदान प्राप्त हुआ है. दोपहर को बच्चे व महिलाएं भी आये योग करने, प्रसाद में उन्हें बगीचे का नारियल खिलाया. विज्ञान भैरव पर एक-दो प्रवचन सुने, अद्भुत ग्रन्थ है यह. ध्यान की एक सौ बारह विधियाँ शिव पार्वती को सिखाते हैं. सूत्रों के रूप में नहीं हैं, प्रश्रोत्तरी के रूप में हैं. सुबह क्लब की प्रेसीडेंट से फोन पर काफी देर तक बात हुई स्कूल के बारे में, वह बोलने से थकती नहीं हैं. दोपहर को सिर में हल्का दर्द था, नशा है जानते हुए भी चाय पी. संस्कार को मिटाना परमात्मा के भी हाथ में नहीं है. 

Saturday, March 21, 2020

नीम का दातुन


जून आज फिर गोहाटी जा रहे हैं, वहीं से दिल्ली जायेंगे.  सुबह वे जल्दी उठे, नाश्ते में अप्पम बनाये. दूर रहने वाले सभी परिवार जनों से फोन पर साप्ताहिक बात भी हो गयी. उन्होंने पिछले पांच दिनों से एक नए दूध वाले से दूध लेना शुरू किया है, आज पुराने वाले को पैसे देकर विदा कर दिया. उसे अच्छा नहीं लगा इसके पीछे राग ही तो है. एक दिन तो उन्हें भी यहां से जाना ही है तब सभी छूट जायेंगे. आत्मा अपने स्वरूप में टिकी रहे तो वहाँ कोई हलचल होती ही नहीं। उनके हर भाव, विचार और हर कर्म का फल उन्हें प्राप्त होने ही वाला है.अब इस बात का ध्यान रखना है कि भीतर व्यर्थ के संकल्प न जगें, वे किसी के भी निर्णायक न बनें. उनकी वाणी कठोर न हो, आवाज ऊंची न हो, उसमें शिकायत का स्वर न हो. उसने ड्राइविंग ट्रेनर से फोन पर शिकायत की  की और उसने सिखाते समय डांटकर उसका प्रतिदान दे दिया, यहां सभी कुछ लौटकर आने ही वाला है। देते समय ही उन्हें ध्यान रखना होगा. अपने भाग्य के निर्माता वे स्वयं ही हैं. जीवन में हर कदम पर न्याय है, एक महान शक्ति इसके पीछे कार्य कर रही है, यहां भूल-चूक होने का सवाल ही नहीं है. अभी-अभी नन्हे से बात की, उसने बताया पहले जिस कंपनी को इंटीरियर का काम दिया था, उन्हें मना कर दिया है, अब उनकी पहचान की एक दूसरी डेकोरेटर को नए घर का कार्य दिया है. 

दोपहर के साढ़े बारह बजे हैं, बाहर तेज धूप है. पिछले दिनों धूप में गाड़ी चलाने के कारण पसीना निकलने से घमौरी निकल आयी थी, अब काफी आराम है. कल शाम नीम की एक टहनी तोड़कर नीम के दातुन बनाये, उसके पत्ते भी चबाये. एलोवेरा का एक पत्ता भी तोड़कर रखा है. घर में जड़ी-बूटी होते हुए भी वे उसका लाभ नहीं उठा पाते. भोजन में भी मिर्च-मसाले बंद हैं. कल शाम योग-कक्षा में तीन-चार साधिकाओं ने अपनी स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं के बारे में बात की. उसे तो पूर्ण स्वस्थ होना ही पड़ेगा ताकि वह उन्हें कुछ सलाह दे सके. शरीर स्वस्थ रहे इसके लिए नियमित दिनचर्या पहली आवश्यकता है . अभी-अभी वजन घटाने के कुछ वीडियो देखे, डाउनलोड कर लिए, ये उसके भी काम के हैं औरों के भी. आज दोपहर की कक्षा में ये आसन करवाये जा सकते हैं, कमर की चर्बी से तो सभी परेशान हैं. कल रात को एक दुःस्वप्न देखा, आग भी थी और भोजन के प्रति आसक्ति का जिक्र भी. धृति शक्ति को उपयोग में लाना होगा, धृति वह शक्ति है जो उनके भीतर समस्त धैर्य चुक जाने के बाद भी रहती है. वैसे उसने तो कभी आने धैर्य के भंडार को पूरा कभी खर्च किया ही नहीं. स्वयं को स्वतन्त्र मानने का भ्रम  ही है जब तक मन आसक्त है. जून का जन्मदिन आने वाला है, उनके लिए कविता लिखनी है, छोटे भाई का जन्मदिन भी इसी महीने है. मृणाल ज्योति का वार्षिक अधिवेशन भी आने वाला है, हर साल की तरह इस बार भी एक कविता लिखेगी. कल दोपहर मृणाल ज्योति में हिंदी कक्षा लेने जाना है. साइन लैंगुएज में हिंदी सिखाने का पहला अनुभव, नेट पर कितने लोगों ने उपयोगी वीडियो बनाकर पोस्ट किया है, जो भी जानकारी चाहिए ली जा सकती है. 

शाम के चार बज कर पचपन मिनट हुए हैं. आज सुबह उठी तो वर्षा हो रही थी. बगीचे से कटहल के बीज उठाये फिर छाता लेकर टहलने गयी. साढ़े सात बजे कर का अभ्यास, ट्रेनर ने कहा, अभी बहुत सीखना होगा, दो-तीन जगह गलतियां कीं. वर्षा के कारण भी कुछ असुविधा महसूस की. दीदी से बात करे ऐसा मन हुआ फिर याद आया जीजा जी का जन्मदिन आने वाला है, उसी दिन करेगी. आज बाबा रामदेव जी ने कहा, मन में कोई कामना उठे तो कभी भी राजसिक अथवा तामसिक आलंबन नहीं लेना चाहिए , सात्विक ही लेना चाहिए. दोपहर को देर तक कम्प्यूटर पर बैठने के बाद थकान लगी तो ध्यान का आश्रय लिया. कल शाम को योग कक्षा में कमरा पूरा भर गया था, एक साधिका अपनी बेटी व माँ को लेकर आयी, सभी ने एडजस्ट कर लिया. ज्ञान और प्रेम जहाँ हों वहां कोई कमी नहीं रह सकती. सद्गुरु कहते हैं, हर घटना के पीछे ज्ञान है, हर वस्तु के पीछे अनन्त और हर व्यक्ति के पीछे प्रेम है.  यदि कोई ऐसा अनुभव करे तो उसे कुछ भी  प्रभावित नहीं कर सकता.