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Monday, July 20, 2026

पंचकर्म का अभ्यास

पंचकर्म का अभ्यास

शाम को हुई वर्षा के कारण मौसम अति सुहावना हो गया है।आज नूना ‘आर्ट ऑफ़ लिविंग’ की एक पाकिस्तानी शिक्षिका का इंटरव्यू मोबाइल पर सुन रही है, जो पहले बांग्लादेश में एक चाय बाग़ान में भी रह चुकी हैं। वह कह रही हैं, किन्हीं हज़रत रहमतकार की परंपरा में वह सातवीं पीढ़ी की हैं। जब गुरुजी २००४ में पाकिस्तान गये थे, उन्हीं के यहाँ ठहरे थे। वह बहुत उत्साह से बेसिक कोर्स के बारे में बता रही हैं। सुदर्शन क्रिया से उन्हें जो लाभ हुआ, वह उसे लोगों में बाँटना चाहती हैं। क्रिया से मन की उलझनें समाप्त हो जाती है, अंतर्ज्ञान बढ़ जाता है। कोई चीज़ कठिन नहीं लगती। उनके अनुसार, हरेक को जीवन में कोई न कोई मक़सद चाहिए। जिसका मक़सद जितना बड़ा होगा, रुकावटें भी उतनी आयेंगी, पर कायनात ऐसे लोगों की मदद करती है।वह कहती हैं, दिन में एक समय ऐसा होना चाहिए जब आपकी ऊर्जा चरम पर हो। वह स्वयं दोपहर एक बजे तक बहुत काम करती हैं। उसके बाद साधना में लग जाती हैं। उन्होंने लाहौर में कोर्स भी कराये हैं, जिनमें अनेक लोग शामिल होते हैं। वह बहुत शिद्दत से यह काम कर रही हैं।उनका आत्मविश्वास देखते ही बनता है।उनके अनुसार, गुरुजी जीवन के शिक्षक हैं, वह पहले इंसान हैं, जिन्होंने स्वास्थ्य और तनाव में कोई संबंध बताया है। तनाव से ही सारी बीमारियाँ होती हैं। गुरुजी के प्रति उनके मन में गहरी श्रद्धा है। यह सब सुनकर नूना को आश्चर्य मिश्रित हर्ष हुआ, संभवत: समाज में आज योग के प्रति पहले का सा विरोध नहीं रह गया है। कई मुस्लिम देशों के प्रतिभागी आश्रम में भी आते हैं। वैसे देखा जाये तो योग एक चिकित्सा प्रणाली है, जो देह और मन दोनों की चिकित्सा करती है। 

आज सुबह उन्होंने निर्धारित समय तक प्रातः भ्रमण किया, योग अभ्यास का भी शुभारंभ हो चुका है। लेखन कार्य भी आरंभ हुआ है, पर अभी भी आँखों को प्रकाश थोड़ा सा प्रभावित करता है। एक सप्ताह और शेष है, जब दवा पूरी तरह से बंद हो जाएगी। आज एक फ़िल्म देखी, ‘एक ही बंदा काफ़ी है’। जिसमें अंततः सत्य की जीत होती है।पापाजी से भी बात हुई, उन्होंने फ़ेसबुक पर पढ़ी उसकी कविता से आनंद मिलने का ज़िक्र किया। शब्दों के माध्यम से ही यदि किसी के ह्रदय में आनंद या उत्साह का लेशमात्र भी पहुँचता है तो लेखन कार्य सार्थक है और इस अर्थ में जीवन भी अर्थवान है। 

आज उसने ‘वैष्णो देवी’ की कथा आगे सुनी। त्रिकूट पर्वत वासिनी माँ की कथा बहुत ही मनोरम है। वह अपना नाम त्रिकुटा बताकर गाँव में जाती हैं। भारती नामकी कन्या को उनमें देवी के दर्शन होते हैं। दैवीय गुणों से युक्त बालक हो या बालिका, युवा हो या वृद्ध सभी के भीतर एक ही तरह के गुण होते हैं। वे प्रसन्नचित्त, धैर्यवान और सबका मंगल चाहने वाले होते हैं। वे साहसी होते हैं और सत्यवान भी। इस कथा में देवताओं का राजा असुरों का अंत भी चाहता है और उनके साथ भी मिला हुआ है। वह उनके द्वारा वैष्णवी देवी को हराना चाहता है ताकि शिव प्रलयंकारी हों और अंततः असुरों का नाश हो। वह मात्र अपना सर्वस्व बचाना चाहता है। वे सब भी तो केवल अपने ही बारे में सोचते हैं। 

आज शाम को वे आश्रम गये थे। कल आने वाले मेहमानों के लिए उपहार ख़रीदे।इस वर्ष ओबीए की मीटिंग सितंबर महीने में कोयम्बटूर में होगी। उसकी तैयारी के संबंध में कमेटी की मीटिंग कल उनके घर पर होने वाली है। आज असमिया पड़ोसी के पोते का जन्मदिन है। वे शाम को गये थे। गैराज में चाट का स्टाल लगा था। केक और चाट खिलाकर उन्होंने स्वागत किया।  

आज दिन भर मौसम अच्छा रहा।दोपहर के विशेष भोज की पूरी ज़िम्मेदारी नन्हे ने ली, उसने स्वादिष्ट पराँठे बनाये। उसने चावल रखने का एक सुंदर डिब्बा भी मँगवाया है। शाम को वे मेहमानों को लेकर आश्रम गये, उन्हें पंचकर्मा केंद्र भी दिखाया। कल नूना का जन्मदिन है। बच्चों ने कहा है, वे सुबह ही आ जाएँगे। कुछ देर देवदत्त पटनायक की ‘मेरी गीता’ सुनी। वह बहुत गहराई से चीजों का विश्लेषण करते हैं। ब्लॉग पर नयी कविता पोस्ट की।  

आज पूरा दिन अच्छी तरह बीता। सुबह बच्चों व जून के साथ केक व नाश्ते का आनंद लिया। मिठाई-फल आदि कुछ सामान लेकर वे शांति धाम गये, जहाँ वृद्धजनों के साथ कुछ समय बिताया।दोपहर को वैष्णवी के साथ ध्यान साधना का। कथा में लक्ष्मी नारायण से विलग हो जाती हैं, जब छह रिपुओं में से एक ‘लोभ’ का प्रकोप हो जाता है। सरल शब्दों में ध्यान की व्याख्या भी की गई थी। माँ काली ने कर्म के महत्व के बारे में भी बताया, धर्मयुद्ध के लिए हरेक को सदा तत्पर रहना चाहिए। षट् रिपुओं का नाश करना है न कि उस आत्मा से कोई द्वेष रखना है, जिसके भीतर ये अवगुण हैं। शाम को वे आश्रम गये थे,  सत्संग में भाग लिया, गुरुजी का सुंदर प्रवचन सुना।असम में जिन महिलाओं व बच्चों को वह योग सिखाती थी। उनमें से एक ने उसके लिए बच्चों द्वारा गाया गया बधाई संदेश भेजा है। उसने भी एक संदेश उन्हें लिखकर भेजा जिसमें गुरुजी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गयी थी, और उस सखी के लिए भी, जो सदा उसके साथ इस काम में सहयोग करती रही थी।  

मौसम आजकल अधिक गर्म नहीं है। दोपहर बाद लॉन में नीचे घास पर बैठकर नवनीत पत्रिका पढ़ी।पौधों को पानी दिया, बेगोनिया का दूसरा गमला भी शिकायत कर रहा है कि उसे धूप की कमी महसूस हो रही है। कल उसे ऊपर छत पर ले आयेंगे। कल से उनका पंचकर्म का विरेचन अभ्यास आरम्भ हो रहा है। जो दस-ग्यारह दिन चलेगा। उम्मीद है, वे इसे भली-प्रकार पूर्ण कर पायेंगे। जन्मदिन पर बच्चों ने उसे नई स्मार्ट घड़ी दी है, जो कई तरह से फिट रहने को प्रेरित करती है। आज भी कई पुरानी परिचितों के बधाई संदेश मिले, जन्मदिन का सर्वोत्तम लाभ यह है कि सबका हाल मिल जाता है। एक पुरानी सखी का फ़ोन भी आया, बहुत दिनों बाद दिल से दिल की  कुछ बातें हुईं। 


Wednesday, May 13, 2026

कूनो के चीते

कूनो के चीते


आज शाम वे ‘गणेश पूजा’ देखने गये, पूजा पंडाल बहुत सुंदर बना है,  उस समय गायन चल रहा था। बंद पंडाल में गर्मी के कारण वे अधिक देर नहीं बैठ सके।आज उसने सफ़ेद पेठे की स्वादिष्ट सब्ज़ी बनायी, बचपन से आज तक केवल उसकी मिठाई ही खायी थी। यू ट्यूब पर सुना पाकिस्तान ने भारत से मदद लेने से इंकार कर दिया है। जब तक कश्मीर का मसला हल नहीं हो जाता, वह भारत से व्यापार नहीं करेगा। कितना अजीब मुल्क है पाकिस्तान। शाम को दीदी-जीजाजी से बात हुई। आज काफ़ी समय बाद जीजा जी ख़ुद गाड़ी चलाकर पापाजी से मिलने गये थे, बहुत खुश लग रहे थे। उन्होंने रात को सपने में देखा, दीदी को घुमा रहे हैं, सुबह उठे तो स्वयं को तरोताज़ा पाया, सो आ गये। छोटी बहन उनके आने से बेहद खुश थी।दिल को दिल से राह होती है। कल बच्चे जल्दी आ जाएँगे।भांजे के रोके की ख़ुशी में घर में पार्टी है।लड़की वाले भी आयेंगे।    


आज का आयोजन अच्छा रहा। नन्हा और सोनू ने लंच बनाने में बहुत मदद की, परोसा भी सलीक़े से। कुल एक दर्जन लोग हो गये थे। शांत स्वभाव की भावी वधू की दादीजी सबसे मिलकर बहुत प्रसन्न हुईं। पिछले वर्ष कोविड में लड़की के पिताजी नहीं रहे।विवाह अगले वर्ष होगा।दोपहर बाद सभी को पूजा पंडाल में गणेश भगवान की मूर्ति का दर्शन कराया। 


शिक्षक दिवस पर नूना ने दो रचनाएँ पोस्ट कीं। काव्यालय पर प्रकाशित हुई कविता पर कई प्रतिक्रियाएँ आयी हैं। आज ‘वृहदराण्यक उपनिषद’ पर आगे सुना, वक्ता बहुत ही दिल से शंकर भाष्य प्रस्तुत कर रहे हैं।यह शुक्ल यजुर्वेद के शतपथ ब्राह्मण का अंतिम कांड है। इसके मुख्य संकलन कर्ता ऋषि याज्ञवल्क्य है। कल रात फिर तेज वर्षा के कारण बैंगलुरु में कई स्थानों पर पानी भर गया। भांजे को नन्हे के घर आना पड़ा है। उसकी बिल्डिंग में पानी भर गया है। वहाँ बिजली भी नहीं है। सुबह टहलते समय एक किंगफ़िशर पंछी की तस्वीर उतारी, उसके नीले पंख धूप में चमक रहे थे। 


आज कक्षा सात की एक नयी छात्रा हिंदी पढ़ने आयी। छोटी बहन पिछले दिनों ऑन लाइन योग साधना करवा रही थी। कल वह वापस चली गई। आज से आर्ट ऑफ़ लिविंग का ऑन लाइन हैप्पीनेस कोर्स शुरू हो गया है, जिसमें नन्हा और सोनू भी भाग ले रहे हैं। ऑफिस के साथ-साथ उनके लिए समय निकालना कठिन तो है, पर यदि मन में इच्छा हो तो हर काम किया जा सकता है। सुबह वे टहलने गये तो हल्की झींसी पड़ रही थी, हवा शीतल थी। उन लोगों का ख़्याल आता रहा जिनके घरों में पानी घुस गया है और जिन्हें होटलों में जाना पड़ा है। मृणाल ज्योति का एक वीडियो देखा, काफ़ी कुछ बदल गया है वहाँ, देखकर अच्छा लगा। शाम को पापाजी से हुई बातचीत को रिकॉर्ड किया, उन्होंने बहुत अच्छी बातें बतायीं। 


आज सुबह से वर्षा रुकी हुई थी, पर शाम से पहले ही शुरू हो गई। इस बार वर्षा ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिये हैं। बैंगलुरु में स्थित दो सौ से अधिक झीलों में से आधी से ज़्यादा में पानी ऊपर आ  गया है, सड़कों पर और घरों में भर गया है। भतीजी के लिए एक कविता लिखी, अभी इस महीने पड़ने वाले चार जन्मदिन पर और लिखनी हैं। आज समाचारों में सुना, इंग्लैंड की महारानी के निधन के बाद आकाश में बादलों ने उन्हीं का आकर ले लिया और इंद्रधनुष भी बन गया। प्रकृति रहस्यमयी है। 

आज बच्चे आये थे, दिन भर वे साथ रहे, वही बोर्ड गेम खेला। उनके जाने के बाद एक कविता लिखी उन्हीं के लिए। शाम को टहलते हुए वे सोसाइटी में कुत्तों के लिए बने नये पार्क को देखने गये। 


आज सुबह उठते ही छोटी बुआ के देहांत का समाचार मिला। वह काफ़ी अरसे से बीमार थीं। फुफेरे बहन-भाई से बात हुई। पड़ोसी और उनके दफ़्तर के लोगों के सहयोग से सब कार्य हो गया।छोटा भाई महीने के अंत में जायगा। आज डिस्कॉर्ड पर एक-दो चित्र बनाये। जून ने अपनी कार सर्विसिंग के लिए दी है, नन्हा अपनी कार छोड़ गया है।शाम को टहलने गये तो बूँदाबाँदी शुरू हो ज्गई, इस वर्षा में पहली बार वे भीग गये। पिछले वर्ष एक से अधिक बार भीगे थे। आज हिन्दी दिवस है, सुबह कुछ पंक्तियाँ लिखीं, जो ब्लॉग पर प्रकाशित कीं। पापाजी ने किताबों के महत्व पर प्रकाश डाला, पढ़ना उनका भी प्रिय कार्य है। आज सुबह भ्रमण करते समय उसने जून को गौतम बैद की पुस्तक ‘द जॉयस ऑफ़ कंपाउडिंग’ के बारे में बताया। यह किताब शेयर मार्केट में इन्वेस्ट करने तरीक़ों के साथ-साथ जीवन के सामान्य सिद्धांतों की चर्चा भी करती है। सुबह जून के पोर्टफोलियो में से दो में और इन्वेस्ट भी किया। जीजाजी ने बताया, ‘यस बैंक’ के शेयर्स में उन्हें काफ़ी लाभ हुआ। छोटी बहज का फ़ोन आया, उसने सपने में देखा, जून आस्ट्रेलिया में नौकरी कर रहे हैं। वह रोज़ सुबह ऑनलाइन योग सिखा रही है।दीदी को अंग्रेज़ी में वार्तालाप करने का शौक़ अब नहीं रहा। आज सुबह समधिन का फ़ोन आया, उन्होंने कहा, आज से संकल्प लिया है, हिंदी में बात करेंगी। 


कुछ देर पहले वर्षों पुरानी एक परिचिता का फ़ोन आया, उनकी बहू व पोता तीन साल के बाद घर आ रहे हैं।वह बेहद खुश थीं। पर परेशान भी हैं, क्योंकि घर में चार भाइयों में बँटवारा हो रहा है। जीवन ऐसा ही है, कभी ख़ुशी-कभी ग़म ! जो सुख-दुख के पार निकल गया वही इसे लीला की तरह देख कर समता में बना रहता है। आज शाम को बहुत दिनों के बाद पौधों में पानी दिया, पिछले दिनों रोज़ ही वर्षा हो रही थी, अब रुक गई है। आज दोपहर को टीवी पर ‘निराला’ के बारे में एक अच्छा कार्यक्रम देखा; जिसमें महादेवी वर्मा को उनके बारे में बात करते हुए सुना। उनके ऊपर एक आलेख लिखना है। उनकी रचनाएँ भी पढ़नी हैं। कल नन्हे ने कई फलों के रस के पैकेट्स भेजे और कहा इन्हें आप ड्राइव पर ले जायें, उसका उत्साह देखकर नूना को भी उत्साह जगा और उसका उत्साह देखकर जून ने गाड़ी निकाली, फिर वे एक झील पर गये, सूर्यास्त के दृश्य अनोखे थे, वहाँ से वीडियो पर पापाजी को भी झील के दर्शन कराये। उन्हें तस्वीरें भी भेजी हैं। आज मोदीजी उज़बेकिस्तान गये हैं, वहाँ शंघाई सहयोग संगठन (एसीएसईओ) की मीटिंग हो रही है। भारत ने इसमें ‘एक पृथ्वी-एक परिवार-एक भविष्य’ का नारा देकर ‘वसुधैव कुटुंबकम्’की भावना को आगे बढ़ाया है। आज भारत में नामीबिया से आठ चीते आ रहे हैं, भारत में १९५२ से ही चीते लुप्त हो गये हैं। जिन्हें मध्यप्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ा जाएगा। यह दुनिया का पहला ऐसा चीता स्थानांतरण है। चीतों को विशेष विमान से ग्वालियर लाया जा रहा है।  


Tuesday, May 12, 2026

रस मलाई केक

रस मलाई केक


आज रक्षा बंधन का त्योहार है; जो तिथि के अनुसार कल सुबह तक मनाया जाएगा।भौतिक रूप से वे भी कल ही मनाने वाले हैं।मानसिक और शाब्दिक रूप से तो मना ही लिया, सभी भाई-बहनों से बात हुई। आज शाम भी गुरुजी को सुना। वह कह रहे थे, लेने में जो ख़ुशी है, वह तो बच्चों को भी होती है पर देने की ख़ुशी प्रौढ़ होती है। लोग स्वयं ही प्रसन्नता हैं, यदि वे किसी कारण से खुश होते हैं तो वह ख़ुशी स्थायी नहीं है। किसी ने भयमुक्त होने का उपाय पूछा तो उन्होंने कहा, यदि अभय प्राप्त करना है तो  किसी बड़े कार्य के प्रति समर्पित हों या ह्रदय में प्रेम और भक्ति जग जाये। मन में स्पष्टता हो, बुद्धि में शुद्धता हो, कर्म में सच्चाई हो तो जीवन शांत धारा की तरह प्रवाहमान रहता है। जो अकाल को याद करता है, हर काल उसके लिए सुकाल होता है। ध्यान में वे उसी अकाल पुरुष में स्थित होते हैं। भक्तिभाव से भरी एक बंगाली महिला का बाउल नृत्य भी देखा। वह गा रही थी व बजा भी रही थी।ओस्टियोपैथी के बारे में भी बताया गया, जो एक चिकित्सा विहीन इलाज है। 


आज भी आश्रम से सत्संग प्रसारित हो रहा है, कोई मीका सिंह आये हैं। कुमार शानू का पुत्र भी आया है। गुरुजी ने सदा की तरह प्रश्नों के सटीक उत्तर दिये। आर्ट ऑफ़ लिविंग सेवा के कई प्रकल्प चलाता है, अब विद्या मंदिर के पुरस्कार दिये जा रहे हैं। कुछ पुस्तकों का विमोचन भी हुआ।शाम को वे दूर तक टहलने गये। नूना ने छोटे भाई के जन्मदिन पर कविता लिखी। एओएल की तरफ़ से ‘रुद्रम जप का महत्व’’ पर एक आलेख का अनुवाद कार्य किया। पापाजी ने ओशो की एक पुस्तक की बात बतायी। उन्होंने कहा, सबके भीतर एक ही आत्मा है।मन यदि प्रसन्न हो तो सारी प्रकृति अच्छी लगती है। 


आज जून का जन्मदिन उन्होंने अच्छी तरह मनाया, नन्हा व सोनू ‘रस मलाई केक’ लेकर आये थे। सोनू के मौसेरे भाई-बहन भी।दोपहर के लंच में आलू टुक, सिंधी कढ़ी व पनीर बनाया। शाम को सबने मिलकर एक नया बोर्ड गेम ‘आईपीओ’खेला।मौसेरी बहन ने साइकिल चलायी, नन्हे ने स्केट बोर्ड पर अभ्यास किया। छोटी बहन ने यूएई से फ़ोन पर  बताया, बहनोई ने बाइक रैली में भाग लिया, भारत-पाकिस्तान की संयुक्त रैली।इधर देश का माहौल उत्सव मय है, आज़ादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है ! 


आज सोसाइटी के मैदान में स्वतंत्रता दिवस का अमृत महोत्सव बहुत उत्साह से मनाया गया। उसके बाद वे पंचायत के दफ़्तर जाकर बच्चों का स्लाइड दे आये। गाँव की सड़क पर तिरंगा रैली भी चल रही थी। माली ने असम से लाया एक पौधा लगाया। मोदी जी का भाषण भी लाजवाब था, उन्होंने नागरिक के कर्त्तव्यों की तरफ़ ध्यान दिलाया। देश आगे बढ़ रहा है। नूना ने झंडे के साथ एक तस्वीर खिंचवाई।  


पिछले दो-तीन दिनों से हो रही वर्षा के कारण मौसम अधिक गर्म नहीं है। आज राजधानी में रहने वाली एक सखी से बात की, उसके पुत्र को डेंगू हो गया है, हर साल इस मौसम में डेंगू का प्रकोप होता है। असमिया सखी कुछ महीनों के लिए गोहाटी जा रही है।वे जीवन के अंतिम वर्ष बिताने के लिए अपने पुश्तैनी स्थान पर एक घर बनवाने जा रहे हैं।पता नहीं उन्होंने अपनी वृद्धावस्था की कैसी कल्पना की है। पुत्र विदेश में है, बिटिया विवाह के बाद उनका कितना ध्यान रख पाएगी, यह सोचकर वे अपने भाई-बहनों के पास जा रहे हैं। जून का मन फिर थोड़ा सा नासाज़ है, उनके स्वभाव में ही आ गया है यह। उन्हें भय है कि उन दिनों अकेले कैसे रहेंगे, जब नूना आश्रम में कोर्स करने के लिए जाएगी। शाम को नन्हे से भी बात हुई, वह उन्हें शनिवार को अपने घर आने के लिए कह रहा है।

 

आज पहली बार वे अपनी लेन के एक परिचित आर्ट ऑफ़ लिविंग शिक्षक के यहाँ रुद्र पूजा के आयोजन में शामिल होने गये।बहुत अच्छा अनुभव रहा। आश्रम में बिताये चार दिन एक याद बनकर रह गये हैं। 


आज शाम से ही वर्षा हो रही है। मध्य प्रदेश व राजस्थान में बाढ़ आ गई है। ईश्वर उनकी रक्षा करे जो पानी में फँस गये हैं।अति वृष्टि या सूखा दोनों ही स्थितियाँ भयावह हैं। आज जून का मन ठीक है। वे व्यर्थ ही इतने सुंदर जीवन को दुखों का घर बना लेते हैं।सुबह टहलने गये तो मौसम सुहावना था। आश्रम में बिताये दिनों की स्मृति बीच-बीच में आती रहती है। डीएसएन कोर्स का इतना बड़ा लाभ उसे मिला है कि भीतर सब ख़ाली हो गया है। जैसे अब कोई संस्कार नहीं बचा। मन नीले गगन की तरह मुक्ति का अनुभव कर रहा है। आज सुबह मुक्ति का गीत भी लिखा। दोपहर को वे बाज़ार गये। नूना कुछ बच्चों से मिली, संकेत, अभिषेक और सात्विक, जिनकी माँओं ने बताया बाक़ी स्कूल गये हैं। उन्हें कुछ समान दिया। देने में कितना सुख मिलता है, गुरुजी सारी दुनिया में घूमकर ख़ुशियाँ बाँटते हैं। उनके जीवन का एक ही लक्ष्य है हर चेहरे पर मुस्कान लाना ! वह यदि एक भी व्यक्ति के मुखड़े पर मुस्कान लाने में सफल रही तो उसका सौभाग्य होगा!   


आज शाम को कुछ देर के लिए वर्षा रुकी तो वे टहलने गये, आकाश पर बादलों से बनी एक सुंदर आकृति देखी। एक जंगली कौआ भी देखा। एक परिचित दंपत्ति अपने नाती को प्रैम में घुमाने ले जा रहे थे। दो मिनट रुककर उनसे बात की।बड़ी बहन से दस मिनट अंग्रेज़ी में बात की, छोटी बहन ने दोहा व कतर के बेसिक कोर्स प्रतिभागियों की बात बतायी, जिन्होंने उसका नाम देखकर स्वयं आगे आकर कोर्स में नाम लिखवाया। अफ़्रीका में दी गुरुजी की वार्ता सुनी, आज भी वह उतने ही उत्साह से लोगों को आर्ट ऑफ़ लिविंग सिखाते हैं, उनका जोश देखने लायक़ था। टीचर्स में इतना जोश उन्होंने ही तो भरा है। डीएसएन का एक नया ग्रुप बन गया है, जिसमें आसपास रहने वाले लोग हैं।जून आजकल खुश हैं, उन्होंने एक पुरानी फ़िल्म देखी साथ-साथ, नूना ने सुबह ज़ूम पर साधना की, शाम को गणेश पर गुरुजी की व्याख्यान माला सुनी। गणेश पूजा आने वाली है। 


आज वे महीनों तक सड़क पर मिलकर एकदूसरे का हालचाल लेने वाले एक परिचित परिवार के घर गये। उन्होंने स्वागत किया, अपना बगीचा दिखाया। उन्हें अवसाद है, यह बात घर की महिला ऐसे कह रही थीं, जैसे कोई कहे घुटने में दर्द है। पिछले बीस साल से दवा ले रही हैं पर कभी योग नहीं किया। लोग कितना अज्ञान में जिये चले जाते हैं।उनके पिता पचानवे वर्ष के हैं पर अभी भी स्वस्थ हैं। नैनी के लाए पैशन फ्रूट्स का जूस बनाया।   


Tuesday, April 28, 2026

झुंड - एक अलग सा सिनेमा

झुंड - एक अलग सा सिनेमा


मई का महीना शुरू हो गया, यानी मौसम का सबसे गर्म महीना ! लेकिन सुबह शीतल थी, उन्होंने सूर्योदय के चित्र उतारे, कुछ देर साइकिल चलायी।गुरुजी का जन्मदिन और बुद्ध पूर्णिमा इसी महीने में आती है।कल ईद है, जून ने नूना की ईद की कविता का एक कार्ड बना दिया है कैनवा पर। शब्दों का एक तोहफ़ा, उसे उम्मीद है बहुतों को अच्छा लगेगा, विशेष तौर पर पापाजी को, वह उसकी कविताएँ अवश्य पढ़ते हैं।कल सोसाइटी के चुनाव हो गये, पुरानी कमेटी लौट आयी है, यही वे चाहते थे।जून ने उनके ख़ाली पड़े फ़्लैट में कबूतरों को आने से रोकने के लिए जाल लगवा दिया है। शाम को पापाजी से प्रतिदिन की तरह अध्यात्म पर चर्चा हुई, पिछले दिनों उनका स्वास्थ्य इतना अच्छा नहीं रहा, पर आज ठीक हैं। दिसंबर में उन्हें दो पारिवारिक विवाहों में सम्मिलित होने की खबर मिल गई है। आख़िर विवाह की तैयारी महीनों पहले से ही करनी पड़ती है।  


आज शाम को वर्षा हुई, बल्कि दोपहर बाद से बूँदे झरने लगी थीं।मौसम सुहावना हो गया है।लेकिन वे संध्या और रात्रि दोनों बार भ्रमण के लिए नहीं जा पाये। जून को छाता लेकर टहलना नहीं भाता, सो नूना गैरेज में ही कुछ देर टहलते हुए पंचदशी सुनती रही।एक नयी कविता आज फ़ेसबुक पर प्रकाशित की।दीदी ने बताया, वह बहुत पहले से मोबाइल पर सुडोकू हल करती हैं, जून को भी करने को कहा।आज दो-तीन लोगों ने कल की कविता की तारीफ़ की। दिल से कही बात दिल को छू जाती है। कल शाम वे घर के सामने वाली लेन में रहने वाली एक महिला से छह किताबें लाए, उन्होंने अपने घर में सेल लगायी थी। नूना ने ऐन रैंड की एक किताब पढ़नी शुरू की है, वर्षों पहले ‘फ़ाउंटेन हेड’ पढ़ी थी तो उसे बहुत भायी थी। जून भी चि वॉकिंग पर एक किताब पढ़ रहे हैं।आज महात्मा बुद्ध पर एक फ़िल्म भी देखी, उन्हें निर्वाण का मार्ग मिल गया, संसार को दुखों से छुटकारा दिलाने का मार्ग। तृष्णा ही जन्म का कारण है और उससे छूटने का मार्ग बुद्ध का अष्टांगिक मार्ग है। कितने महान थे वह, और कितना महान है उनका ज्ञान ! मानव जीवन में ही यह ज्ञान पाना संभव है। आज सुबह उठने से पूर्व भी कोई उड़ीसा शब्द कहा रहा था, उसकी उड़िया सखी की बेटी का विवाह कल संपन्न हो गया, उसी की याद दिला रहा था। दिन में उसे बधाई दी।  


आज शाम वे बोटेनिका गये तो आकाश पर बादल थे, पापाजी को वहीं से वीडियो कॉल किया, उन्हें हरियाली के सुंदर दृश्य बहुत अच्छे लगे।एक चिड़िया की तस्वीर उतारी। आज उसने ‘सिंहासन बत्तीसी’ का पहला अंक देखा, मूलत: संस्कृत में लिखी गई यह पुस्तक विक्रमादित्य के बारे में है। शाम को इस्लाम के बारे में एक पुस्तक पढ़नी शुरू की है। अगले हफ़्ते से गुरु जी की छोटी बहन भानु दीदी के साथ ऑन लाइन गुरु गीता कार्यक्रम आरंभ हो रहा है। आज उसी के अन्तर्गत आश्रम से दो किताबें मिली, ‘गुरुदेव’ तथा ‘इंटीमेट नोट्स फॉर ए सिंसियर सीकर’।  


आज शाम वर्षा के कारण पाँच मिनट में ही घर लौटना पड़ा, रात्रि भ्रमण में वह पहले से ही छाता लेकर गये। हल्की बूँदाबाँदी हुई। सावन के आने से पहले ही यहाँ वर्षा का मौसम शुरू हो गया है। छोटी भांजी व गुरुजी के जन्मदिन पर आज कविताएँ लिखीं।आज सुबह जून पहली बार इलेक्ट्रिक साइकिल से दूर गाँव तक गये, चालीस मिनट लगे आने-जाने में। 


आज सुबह नन्हा, सोनू और बड़ा भांजा आये, साथ ही उनकी एक मित्र भी थी।देखने में सीधी-सादी है, पर लगता है, बहुत लाड़-प्यार से पली है, भोजन के मामले में बहुत नख़रे हैं। अन्न का सम्मान करना नहीं जानती, या स्वाद का बहुत ज़्यादा ध्यान है उसे, पर शेष बातों में अच्छी लगी, आजकल बच्चे ऐसे ही होते हैं। शायद उसमें बचपना अभी तक गया नहीं है।वक्त बदल रहा है, अब बच्चों में पहले की तरह बड़ों का लिहाज़ नहीं है।  बाद में नन्हा सभी को लंच के लिए ताज ले गया। नूना को महँगे होटल में बाहर खाने का कोई आकर्षण नहीं है , उसे तो तरह-तरह की गंध आती है वहाँ, सो… ख़ैर कभी-कभी ऐसा हो तो कोई बात नहीं। शाम को छोटे भाई का फ़ोन आया, जीजाजी को हल्की चोट आयी है, पर वह ख़ुद गाड़ी चलाकर अस्पताल गये। उनमें हिम्मत और ख़ुद्दारी का जज़्बा कूट-कूट कर भरा है। 


सुबह उठी तो भीतर से कोई कह रहा था, ‘सेवा करो, एस सी शब्द सम्मुख आया। नींद में ही कोई लेख भी पढ़ा। उठते ही ध्यान में मन टिक गया। आज मातृ दिवस है। सुबह से ही संदेश, कवितायें आलेख पढ़े और भेजे। छोटी बहन कनाडा में बड़ी बिटिया के पास है। दोनों नन्दों से बात हुई, खुश थीं, बड़ी घर में हवन करवा रही थी। छोटी बेटे के विवाह की तैयारियों में लगी है। 


आज से ‘ज्ञानवापी मस्जिद’ में जाँच आरम्भ हो गई है। सुबह जून ने आम उठाने को मना किया, पर कल रात की आँधी-तूफ़ान के बाद ढेर सारे आम गिरे हुए थे, उसने चार उठाये, कल चटनी बनाएगी। जून इस बात पर थोड़ा नाराज़ हो गये से लगे, पर उनकी उदासी का कारण कुछ और भी हो सकता है। आज पड़ोस की एक नन्ही बालिका हिन्दी पढ़ने आयी। उसकी लिखाई में कुछ सुधार करना होगा। दिन में एओएल का अनुवाद कार्य किया। 

    

आज उन्होंने एक अच्छी फ़िल्म देखी, ‘झुंड’ झोपड़-पट्टी के बच्चों व युवाओं में फुटबॉल के माध्यम से परिवर्तन लाया जा सकता है, इस पर एक वास्तविक प्रयोग हुआ था। विजय बारसे ने एक क्लब बनाया था, ‘स्लम सॉकर’ । अच्छी लगी फ़िल्म, पर इसे देखने के चक्कर में वे शाम को घर पर ही बैठे रहे। आज सुबह वे टहलने गये तो उसने जून को कुछ प्रेरणात्मक वाक्य कहे, शायद सुनकर या ऐसे ही उन्होंने कहा, चलो, ड्राइव पर चलते हैं। उसे उस गाँव तक ले गये, जहाँ वह कुछ दिन पहले साइकिल से गये थे। आज शाम को ‘गुरु गीता’ पर पहला सत्र है। जिसमें ध्यान के साथ मंत्रों का उच्चारण सिखाया जाएगा और उनका अर्थ भी बताया जाएगा। 


Tuesday, November 18, 2025

जिंदल नेचर क्योर


जिंदल नेचर क्योर


आज सुबह भी वर्षा हो रही थी। छत पर अंधेरा था, बल्ब जलाकर प्राणायाम किया। हवा शीतल थी और ब्रह्म मुहूर्त का प्रभाव भी मन को शांति प्रदान कर रहा था। उजाला होने पर वे बाहर निकले। मन अब शून्य में टिकने लगा है। उसे शांति ही रूचती है। ज़्यादा बोलना भी अच्छा नहीं लगता। आत्मा, गुरु और परमात्मा तीनों एक चैतन्य सत्ता हैं, यह बात अनुभव में आती है । एक कविता भी प्रकाशित की शब्दों की सीमा पर, मौन जितना प्रभावशाली होता है, शब्द उतने नहीं हैं। कल पड़ोस वाले घर के दुमंज़िले की छत पड़ेगी। पड़ोसन अपने माता-पिता के साथ आकर उनकी छत से इसे देखना चाहती है। आज शाम से लगातार वर्षा हो रही है। नन्हा और सोनू माँ-पापा को लाने एयरपोर्ट गये हैं। पड़ोसी परिवार आया था, पूरण पोली, पेड़े, और मैसूर पाक भी लाए थे वे। पापा जी से बात की, आज उन्होंने जुग सुरैया का एक लेख टाइम्स ऑफ़ इंडिया में पढ़ा, कविता क्या है ? उसी के बारे में बताया।मौन पर लिखी उसकी कविता पर कमेंट्स आये हैं। जिसने भीतर के मौन को महसूस नहीं किया है, उसके लिए इसे पाना असंभव ही जान पड़ेगा। नन्हे ने एक नया बोर्ड गेम भेजा है, पिन-बॉल नाम है उसका। बचपन में वे खेला करते थे। आज सुबह तीन दिनों के बाद वर्षा नहीं हो रही थी। पूरे चालीस मिनट वह तेज गति से चली और दस मिनट दौड़ लगायी।जून को दौड़ना पसंद नहीं है, पर वजन कम करने के लिए इतना तो करना ही पड़ेगा। वापस आकर योग-साधना।आज नाश्ता नहीं बनाना था। कल समधिन जी के लाए दही-बड़े और हलवा ही पर्याप्त था। दोपहर को नैनी नहीं आयी, शायद उसने भी वैक्सीन लगवायी है। पापा जी से बात हुई, भक्ति और ज्ञान की बात। उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं है।उन्हें समधी जी द्वारा भेजी चाय के बारे में बताया, तो वह खुश हुए। छोटा भाई ड्यूटी पर वापस गुजरात चला गया, अब डेढ़ महीने बाद आयेगा। वह बड़ी ननद के घर भी जाएगा। शाम को वे पहली बार सोसाइटी में स्थित एक आवास में गये, जिनके अमरूद के बगीचे से ढेर सारे अमरूद ख़रीदे और पपीते भी।हरसिंगार पर एक नयी कविता लिखी, वर्षों पहले एक लिखी थी। जून ने नन्हे के लिए पैडिक्योर मशीन भेजी है। कल उसका ‘फूटरेस्ट’ भी बनकर आ गया।जून ने आज गर्म पानी का टैंक साफ़ करवाया। आज गुरु पूर्णिमा है। सुबह गुरुजी का एओएल शिक्षकों के साथ वार्तालाप सुना। बहुत अच्छे सवाल-जवाब थे।शाम को भी एक कार्यक्रम था। पहले गुरुजी ने गुरुपूर्णिमा का महत्व बताया। दक्षिणामूर्ति का वर्णन किया। संगीत व नृत्य के एक कार्यक्रम की प्रस्तुति हुई, जिसमें ३५० बच्चे तथा बड़े शामिल थे। नृत्य भिन्न-भिन्न स्थानों पर किया गया था, फिर उसे एक जगह प्रस्तुत किया गया। अंत में सुरीले भजन गाये गये। दूर से आश्रम स्थित विशालाक्षी मंडप का शिखर देखा, जब वे रात्रि भ्रमण के लिए गये। शाम को मृणाल ज्योति की एक शिक्षिका से शिक्षक दिवस पर उन्हें उपहार भेजने के सिलसिले में बात हुई। ‘इस दिन तृप्ति की एक अज्ञात राशि का अनुभव होगा’। आज सुबह उठते ही सबसे पहले यह विचार नूना से किसी ने कहा। रात को एक स्वप्न देखा, किसी उपकरण को बनाने की प्रक्रिया में जून सहायता करते हैं, पर उनका शुक्रिया अदा करने की बजाय वह कहती है कि यह काम वह पहले भी कर चुकी है। यह सत्य भी था, पर जब वह इसका अनुमोदन नहीं करते तो वह ज़ोर देकर पुन: कहती है। स्वयं को महत्व देने के इस संस्कार से छुटकारा पाना होगा। यही तो अहंकार है। उनके कर्म स्वयं उनकी कहानी कहें, तब तो ठीक है पर अपने शब्दों में अपना महत्व रखना ही अहंकार है। कर्ताभाव से मुक्त हुए बिना सहज कर्म नहीं होते, ऐसे कर्म जो अस्तित्त्व उनसे करवाना चाहता है। आदमी स्वयं जो भी करता है, वह सीमित होता है। अज्ञात असीम है। उसे लगा, उसके संस्कार अवश्य ही मिट रहे हैं। परमात्मा और गुरु उसके साथ हैं, यह कहना भी ठीक नहीं है, वही करेंगे अब जो भी इस देह और मन से होना है। आज का इतवार कुछ अलग था। सुबह टहल कर आते समय रॉक गार्डन में ही चट्टान पर बैठकर प्राणायाम किया। खुली हवा, शांत और शीतल वातावरण में केवल मोर व पंछियों की आवाज़ें आ रही थीं। वापस आकर जून साइकिल चलाने गये और उसने माली से काम करवाया। नाश्ते के बाद जून ने कहा, असम से एक परिचित डाक्टर आये हैं, दोपहर को भोजन पर बुलाया है। वह जिंदल नेचर केयर में स्वास्थ्य कारणों से तीसरी बार आये हैं। लंच के बाद उन्होंने बताया, यहाँ आकर उनका वजन घटता है, पर कुछ समय बाद भोजन व जीवन शैली के कारण फिर बढ़ जाता है। मज़ाक़ में यह भी कहा, यहाँ आकर वे इस बात का पैसा देते हैं कि उन्हें कम खिलाया जाये। वह असमिया पड़ोसी से मिलने भी गये। शाम को वे उन्हें आश्रम ले गये।


Thursday, November 13, 2025

अमेरिका का रेगिस्तान

अमेरिका का रेगिस्तान 


कल रात से वर्षा हो रही थी, सुबह उठने में आलस्य किया। रुकने पर वे दोनों टहलने गये और छत पर किया योग-अभ्यास।जून ने नन्हे के जन्मदिन के लिए हलवा अभी से बना दिया है। इमली वाली मीठी चटनी और हरी चटनी भी बन गई है। शेष तैयारी कल हो जाएगी। नाश्ते में नूना ने बगीचे के पपीते से पराँठे बनाये, मीठे-मीठे से थे। पेड़ पर दो पपीते पक रहे हैं। बाद में वे नर्सरी से उनतीस पौधे लाये, इतवार को माली वर्टिकल गार्डन बनाना शुरू करेगा। सोसाइटी में बाटा की सेल लगी है, जून ने चप्पल ली और नूना ने वॉकिंग शू। नन्हे को जन्मदिन की कविता भेज दी है।


आज नन्हे का जन्मदिन है।सुबह उससे बात की, दोपहर व शाम को भी। सोनू ने ‘स्टारवार’ थीम पर बहुत सुंदर केक बनाया है। कल ‘स्कल’ के आकार का केक भी बनाया था, नन्हे की फ़रमाइश पर। आज सुबह घर की साप्ताहिक सफाई आदि में व्हाट्सेप पर सबको सुप्रभात करने का समय ही नहीं मिला, दीदी को चिंता हो गई, दोपहर को उन्होंने फ़ोन कर लिया। पापाजी का फ़ोन भी दो बार आया, उनकी ज्ञान भरी बातें मन को सुकून देती हैं।आज दोपहर जून की एक बात पर मन ने प्रतिक्रिया की, यानि अहंकार अभी भी शेष है। गुरुजी कहते हैं, अहंकार को जेब में रखे रहना चाहिए, बस उसका प्रदर्शन नहीं करना करना चाहिए।शाम को छोटे भाई का फ़ोन आया, उसे बाहर की हरियाली दिखायी। सुबह नूना को गले में ख़राश और पैरों में दर्द महसूस हुआ, भीतर एक विचार आया, कहीं कोरोना तो नहीं ? जून ने एक टैबलेट दी है तथा गरारे भी करवाए। उनका स्वभाव बहुत केयरिंग/ दयालु है। 


आज का इतवार अच्छा रहा। सुबह मौसम ठंडा था। माली सुबह आ गया था, उसने पौधे लगा दिये हैं। साढ़े नौ बजे बच्चे आ गये। पहले चाय पी फिर ग्यारह बजे नाश्ता। तब तक उनका एक मित्र परिवार भी आ गया था। वे मंगलोर के रहने वाले हैं। सब मिलकर निकट के गाँव-जंगल तक टहलने गये। वापस आकर भोजन बनाया, लगभग तीन बजे खाया। पाँच बजे वे सब वापस चले गये। अभी नन्हे का फ़ोन आया, सोनू के माँ-पापा अगले हफ़्ते आ रहे हैं। उसके पापा का गॉल ब्लैडर का ऑपरेशन होना है। 


अभी-अभी वे रात्रि भ्रमण से लौटे हैं।आज अख़बार में पढ़ा, अमेरिका में रेगिस्तान का तापमान चौवन डिग्री पहुँच गया है। पापाजी से बात की, वहाँ भी काफ़ी गर्मी पड़ रही है। जबकि यहाँ मौसम सुहावना है, शाम को हुई बूँदा-बाँदी में वे भीग भी गये। उसने हरसिंगार के झरते हुए फूलों का एक वीडियो बनाया आज। छोटे भाई की नातिन का मुंडन हो गया आज, भाभी ने तस्वीरें भेजी हैं। 


आज सुबह समय पर उठे। रात को नींद गहरी थी। फ़िटबिट में स्कोर देखा, छियासी था। जब पहली बार स्कोर देखा था, तब उम्मीद की थी कि एक दिन ऐसा होगा। इक्यासी से अधिक कभी नहीं आया था। मन जब शांत हो तभी ऐसा हो सकता है। शाम को टहलने गये तो जून ने बैलगाड़ी का वीडियो बनाया, उन्हें भी फ़ोटोग्राफ़ी में रुचि हो गई है।कल ननदोई जी का जन्मदिन है, उनके लिए छोटी सी कविता लिखी है। जून ने उसे बधाई कार्ड में बदल दिया था। गुरु पूर्णिमा के लिए भी एक कविता लिखी है। आज सुबह सहज ही ध्यान घटित हो रहा था, परमात्मा को अनुभव करने का अवसर ध्यान में ही मिलता है, जब सीमित मन खो जाता है।   


आज दिन भर वर्षा होती रही। मौसम ठंडा है सो आज हफ़्तों बाद एसी को विश्राम मिला है। बालकनी में खुलने वाले दरवाज़े से बाहर रखे पौधे और सोलर लाइट दिखायी पड़ रही है।शाम को हल्की फुहार पड़ रही थी। वे टोपी पहनकर साइकिल से उस अंतिम सड़क पर गये, जहाँ सुबह अंधेरा रहते टहलने जाते हैं। वापस आकर मुख्य सड़क पर फूलों से लदे वृक्षों की तस्वीरें खींचीं। नाश्ते के बाद सिलाई मशीन बनने के लिए देकर आये, कई वर्षों से उसे इस्तेमाल नहीं किया है। शाम को पापाजी से बात हुई, उन्हें पहला वैक्सीन लग गया है। उन्होंने ओशो की एक किताब में जो पढ़ा था, उसके बारे में बताया।उनके अनुसार अपने जीवन में सद्गुणों को अपनाना चाहिए।  


आज टहलने गये तो पार्क नंबर दस में फलों का बगीचा देखा। करौंदे, शरीफ़े, चीकू, अंजीर, बेर सभी फल लगे हुए थे।बाद में बैंक भी गये, नूना का अकाउंट खुल गया है, अभी एटीएम कार्ड आना बाक़ी है। एक वरिष्ठ महिला ब्लॉगर ने नूना से कहा, वह वर्षा की फ़ोटो या वीडियो भेजे, वहीं बैंक में बैठे-बैठे ही खोज कर भेज दीं।सिलाई मशीन भी ठीक हो गई, वापस आकर सिलाई की। सोनू दो गाउन लायी थी, उन्हें छोटा किया।


Monday, November 10, 2025

दिवोदास की कथा

दिवोदास की कथा 


आज दिन भर सुखद व्यस्तता बनी रही।सुबह टहलने के बाद उन दोनों ने कुछ देर साइकिल चलायी। हरसिंगार के पेड़ इन दिनों पूरे शबाब पर हैं। कई पेड़ों के नीचे बिछी फूलों की चादर आकर्षित कर रही थी, पुन: फ़ोटोग्राफ़ी करने गये। शनिवार साप्ताहिक सफ़ाई का दिन भी है। जून ने नूना के बालों में रंग भी लगा दिया। थोड़ा बच गया तो लगभग साल भर बाद अपने बालों में भी लगा लिया। शाम को पुन: साइकिल से जाकर एक नया पौधा और एक गमला ख़रीद कर लाये, सीढ़ी के मोड़ पर रखना है। गमलों के नीचे रखने वाली प्लेट्स भी ख़रीदीं।नाश्ते में दोसा और फ़िल्टर काफ़ी, लंच में ब्रोकोली की खिचड़ी। किचन का भार जून ने ही सँभाल लिया है जैसे। कल बच्चों के आने का दिन है, वह इडली के साथ कश्मीरी हलवा बनाने वाले हैं।दोपहर को छोटी बहन का फ़ोन आया, थोड़ी परेशान लग रही थी, काम का दबाव है और स्वास्थ्य भी पूरा ठीक नहीं है। बहनोई की आँख का कल कैट्रैक का ऑपरेशन है। उसे एक अच्छा सा संदेश लिखने का तय किया नूना ने।एक अच्छी नींद बहुत से रोगों का इलाज है।पापाजी से उसकी  चार दिन बाद बात हुई, उन्हें आज की कविता अच्छी लगी।जून के भेजे कुकीमैन बिस्किट उन्हें मिल गये हैं। ‘काव्यालय’ पर एक पुरानी कविता पोस्ट की है। 


आज का इतवार अच्छा रहा। सुबह लॉन में नई लगी घास पर नये पाइप से पानी डाला, पर शाम से मूसलाधार वर्षा हो रही है।नौ बजे नन्हा और सोनू आ गये थे। भरवाँ इडली व लोभिया भी बनाया था। कश्मीरी हलवा विशेष था। पहली बार मैक पर सभी को व्हाट्सेप कॉल की। दीदी आज बहुत खुश लग रही थीं, वह इंगलिश ग्रामर सीख रही हैं।उन्होंने साइलेंस कोर्स के बारे में भी पूछा। कल मंझले भाई-भाभी से बात हुई। उनकी बिटिया बहन की बिटिया से टोरंटो में मिली। शाम को बादलों से झाँकता सूर्यास्त पल भर को देखा। नन्हा आज ईवी ले गया है, सर्विसिंग करानी है। अगले हफ़्ते उसके जन्मदिन पर पार्टी होगी, मेनू आज ही बन गया। 


आज दोपहर कुछ फ़ोटो प्रिंट करके फ़्रेम में लगाये, फिर छत तक जाने वाली सीढ़ी की दीवार पर लगाये। बैंक में अकाउंट खोलने के लिए फार्म भरा। नन्हे ने क्रैब मोबाइल स्टैंड खिड़की पर लगा दिया था, सुबह योगा सेशन की रिकार्डिंग की। आज पहली बार ज्वार का दलिया खाया, अच्छा लगा। एसी का स्विच बदला। बाथरूम का लीकेज अभी ठीक नहीं हुआ। रात के भोजन में मोरिंगा  का थेपला बनाया। 

   

सुबह वे उठे तो वर्षा हो रही थी।शायद रात भी होती रही थी। बाद में कुछ देर को थमी तो टहलने गये।बोटेनिका का गेट खुला था, सो उधर ही चले गये। सड़कों पर कई जगह पानी भरा हुआ था। सोमनहल्ली के रास्ते में  सुवर्णमुखी नदी में तेज गति से जल  बह रहा था। रास्ते में कीचड़ भी था। एक जगह लाल मुसंडा की एक डाल टूट कर गिर गई थी, घर आकर उसकी कटिंग्स लगा दी हैं। दस बजे बैंक जाना था। जून ने कार में पेट्रोल भरवाया, सौ रुपये से अधिक है एक लीटर का दाम। नन्हे से बात हुई, उसने बताया, सुबह सवा आठ बजे वह सीट पर बैठा था और अभी नौ बजे आख़िरी कॉल ख़त्म हुई है। उसने अमेजन और मिन्तरा के बिज़नेस की कुछ बातें बतायीं। सोनू अभी भी फ़ोन पर थी, वह अपने नये काम को रोज़ एक घंटा सीखती है।आज वर्टिकल गार्डन बनाने की ओर पहला कदम बढ़ाया। 


आज रात्रि भोजन के बाद वे टहलने निकले तो औरेंज जास्मिन के फूलों की सुवास ने मन मोह लिया पर लौटे तो पड़ोस के निर्माणाधीन मकान से धुँए की गंध आयी जो एसी के द्वारा खींच लिए जाने पर कमरे में भी भर गई है। ‘देवों के देव में’ काशी के राजा रिपुंजय द्वारा वरदान प्राप्त करने के बाद शिव की विदाई का अद्भुत दृश्य दिखाया गया। दिवोदास या रिपुंजय की कथा शिव पुराण में आती है। इनके चरित्र पर एक पुस्तक भी लिखी है राहुल साँस्कृतायन ने। आज कुछ देर गुरुवार के मंत्र का जाप किया। मृत्यु के बारे में एक प्रवचन सुना। शरीर में जीवन प्राणों के द्वारा ही टिका हुआ है। समान, प्राण, अपान, उदान और व्यान पाँच प्राण हैं, जिनके जाने से शरीर में मृत्यु के बाद भी कुछ देर तक जीवन के लक्षण दिखायी देते हैं। हर कोशिका में जीवन है तथा उसमें ज्ञान भी है। जून ने आज सुबह झूले पर टचवुड लगाया, बहुत सुंदर लग रहा है। आजकल वह उत्साह से भरे रहते हैं और नए-नए काम ढूँढा करते हैं। सब्ज़ी का ट्रक आया था और फलवाला घर आकर इमाम पसंद आम दे गया। नन्हे ने दो तरह के सौंफ भेजे हैं, जो पूरा वर्ष चलेंगे।नूना को लगता है, जीवन ऐसे ही छोटे-छोटे पलों से मिलकर बनता है, जिन्हें गौर से देखने पर उस अनाम की छाप हर कहीं दिखायी देती है।    


Tuesday, January 3, 2023

देवों की भूमि

बाहर वर्षा हो रही है। रात्रि के नौ बजने को हैं। शाम के ध्यान के बाद जब वे नीचे उतरे तभी से वर्षा आरंभ हो गयी, सो भोजन के बाद रात्रि भ्रमण के लिए नहीं जा सके। शाम का ध्यान गहरा था, गुरूजी के शब्द सीधे दिल की गहराई तक जा रहे थे, उसका असर था या दोपहर को देखी फ़िल्म का, मन कैसा पिघला जा रहा था। जून की ज़रा सी बात भी उसे प्रभावित कर गयी। मन होता ही ऐसा है, पल में तोला, पल में माशा ! जहाँ से मन ऊर्जा पाता है, वह पराशक्ति है। मन शब्दों का ही आश्रय लेता है यदि मौन का ले तो बचा रह सकता है। चेतना पहले श्वास में बदलती है फिर शब्दों में, यदि श्वास रुक जाए तो मन भी ठहर जाता है। आज पंत पर लिखा लेख काव्यालय में प्रकाशित कर दिया। शाम को सब्ज़ी वाला ट्रक आया था, ‘फ़्रेश वर्ल्ड’, पुदीना लिया, जून ने चटनी पीस दी। सुबह बड़ी भांजी से बात हुई, उसने बताया, कैसे उसने अपने अंग्रेज़ी लघु उपन्यास ऑन लाइन प्रकाशित किए, पर मार्केटिंग नहीं कर पायी है।  एओएल की एक शोध कर्त्री द्वारा ‘अवसाद’ पर लिखे एक लेख का अनुवाद किया। कल श्राद्ध पर एक ज्योतिषाचार्य का वीडियो देखकर आलेख लिखना है। लेखन के ये कार्य उसके अनुभव क्षेत्र को बढ़ा रहे हैं, उसने मन ही मन गुरु जी का इस सेवा कार्य में सम्मिलित करने के लिए आभार व्यक्त किया।   


सुबह टहलने गए तो बादलों के पीछे से चाँद की ज्योति झलक रही थी। इस समय कितना सन्नाटा है, बाँयी ओर से जैसे झींगुर  बोलता है, एक ध्वनि आ रही है। सजग होते ही दाँयी तरफ़ से भी आने लगी है। सन्नाटा सधने लगा है कुछ-कुछ। गुरूजी दिन में दो बार ध्यान करवाते हैं। अक्सर वे व्यर्थ ही अपनी ऊर्जा वाणी के रूप में खर्च करते हैं। बाहर के मौन के साथ-साथ भीतर का मौन भी आवश्यक है, बल्कि ज़्यादा ही आवश्यक है। विचार ही कृत्य बनते हैं। वे जो पहले सोचते हैं वही तो बाद में कर्म रूप में फलित करते हैं। सोसाइटी के जिम में वस्त्रों की सेल लगी है, पर उनके पास इतने वस्त्र हैं कि शायद अगले दस वर्षों तक खरीदने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।  


संध्या भ्रमण के समय कोने वाले घर में एक छोटा बच्चा रोज़ मिलता है, हाथ हिलाता है। इतना ही बड़ा नन्हा था, उसे प्रैम में लेकर वे जाते थे तो एक पंजाबी महिला उसे देखकर बहुत खुश होती थीं, बाद में उस परिवार से अच्छी जान-पहचान हो गयी थी। जून के पैरों की जलन सौंफ, धनिया और मिश्री का मिश्रण खाने से काफ़ी ठीक है। असम में कोरोना फैल रहा है। सभी जगह यही हाल है। यह महामारी रुकने का नाम ही नहीं ले रही है , कितनों की जानें भी जा चुकी हैं। भारत में संक्रमितों की संख्या चार लाख हो गयी है। 


आज शिक्षक दिवस पर अनेक शिक्षिकाओं को कविता भेजकर शुभकामना दी। शाम को वर्षा के कारण छत पर टहलने गए तो देखा पास वाले गोदाम की छत हटायी जा रही थी। हो सकता है यहाँ कोई दुकान बने। वे इधर उधर की बातें करते हुए टहल रहे थे कि बात बचपन के दिनों तक पहुँच गयी। उसने जून को बताया, वे लोग कौन सी पत्रिकाएँ पढ़ते थे, रेडियो पर नाटक सुनना भी उन दिनों विशेष आकर्षण होता था, आँगन में या छत पर सभी लोग अपने बिस्तर पर लेटे होते थे तब रेडियो पर रात्रि नाटक का समय होता था।कल नन्हा और सोनू आएँगे, वे लोग टेस्ट ड्राइव के लिए जाएँगे। नन्हे को अब कार की आवश्यकता महसूस होने लगी है, अब ओला, ऊबर सब बंद हैं। संयोग की बात है कि आज के ही दिन एक वर्ष पहले वे असम में विक्टर बनर्जी से मिले थे और आज ही उनकी पहली फ़िल्म ‘देवभूमि’ देखी, जो केदारनाथ में फ़िल्मायी गयी है।    


Tuesday, April 26, 2022

मत्स्यावतार की कथा



वही कल का समय है, रातों को बादल बरसते हैं कुछ देर के लिए और सुबह से दोपहर तक बदली बनी रहती है। उड़ीसा, पश्चिम बंगाल और बांग्ला देश में तूफ़ान ‘अंफन’ प्रवेश कर चुका है, कितनी हानि या तबाही हुई इसका पता तो कल ही चलेगा। ट्रंप ने चीन को कोरोना के लिए फिर ज़िम्मेदार ठहराया है, विश्व स्वास्थ्य संगठन को भी उनके क्रोध का शिकार होना पड़ रहा है।  सारी दुनिया में करोड़ों लोग इस वायरस से प्रभावित हुए हैं, उनके रोज़गार छूटे हैं, घर छूटे हैं, प्रियजन भी छूटे हैं। इस महामारी का असर आने वाले कई वर्षों तक मानव को भोगना पड़ेगा।छोटी बहन से बात हुई, उसे यूएइ में कोरोना मरीज़ों की देखभाल करनी पड़ रही है, मरीज़ों की संख्या वहाँ भी बढ़ रही है। कहने लगी, यदि आइसीयू,में मरीज़ बढ़ गए तो उनके पास साधन नहीं हैं। आज ‘हिंदू’ पुस्तक को आगे पढ़ा, लेखिका विदेशी हैं पर संस्कृत का गहन अध्ययन उन्होंने किया है।उसमें सिंधु घाटी की सभ्यता की कहानी आरम्भ हो गयी है। पुस्तक के अनुसार बहुत महान थी वह सभ्यता जिसमें अन्य सभ्यताओं के साथ व्यापार होता था। इस सभ्यता का अंत कैसे हुआ और आर्य भारत में कहाँ से आए, यह रहस्य अभी तक सुलझा नहीं है । वेदों की रचना कब हुई, किसने की, यह भी ज्ञात नहीं है। सृष्टि रहस्यों से भरी है, वे थोड़े  वक्तों के लिए ही यहाँ आते हैं फिर कहाँ चले जाते हैं, कोई नहीं जानता। उस लोक और इस लोक में कोई एक साथ रह सके तभी वह बता सकता है पर यह राज है कि राज ही बना रहता है। कुछ लोग अपने समय व ऊर्जा का कितना अच्छा उपयोग कर लेते हैं। भगवान ने सभी को बुद्धि नामक यंत्र दिया है पर वे उसका उपयोग करना ही नहीं जानते। गुरूजी को कितनी सिद्धियाँ प्राप्त हैं पर वे कितने सरल और भोले बने रहते हैं, वह दुनिया में करोड़ों लोगों के दिलों में ज्ञान का प्रकाश फैला चुके हैं। आज एक पुरानी सखी से बीस मिनट बात की फ़ोन पर, पूरे अठारह मिनट वह बोलती रही, वह आर्ट ऑफ़ लिविंग के ऑन लाइन कोर्सेस भी कर रही है। जून ने शनिवार से एच आर के लिए होने वाले कोर्स के लिए एक घंटे के ऑन लाइन वर्कशॉप में भाग लिया। दोपहर को उन्होंने ‘पिंजर’ फ़िल्म देखी, अमृता प्रीतम की कहानी पर बनी यह फ़िल्म बहुत मार्मिक है। आज मंझली भाभी ने वहाट्सेप पर एक गीत गाया। कोरोना से लोगों की छिपी हुई प्रतिभाएँ बाहर निकल रही हैं। 


आज नापा की तरफ़ से सब घरों में बगीचे से तोड़े गए आम वितरित किए गए, अभी कच्चे हैं, कुछ दिनों में पक जाएँगे। कितनी ही  बार सुबह टहल कर लौटते समय चटनी आदि के लिए अमराई से आम मिलते रहे हैं, एक रात तेज हवा चली थी तो सुबह ढेर सारे आम गिरे हुए मिले। विष्णु पुराण में आज मत्स्यावतार की कथा आरंभ हुई है, कितनी अद्भुत कथा है यह भी। प्रलय का दृश्य देखा, जिसमें मनु सप्तर्षियों को लेकर नौका में बैठते हैं। ‘श्री कृष्णा’ में कृष्ण के माटी खाने के प्रसंग आया, यशोदा का आश्चर्य देखने लायक़ था पर कुछ ही देर में वह सब भूल गयीं। परमात्मा के द्वारा सबके जीवन में न जाने कितनी बार चमत्कार हुए हैं, होते रहते हैं, पर मानव की स्मरण शक्ति बहुत कम है, बड़ी से बड़ी कृपा भी वह कुछ दिनों में भुला देता है और फिर से ईश्वर के द्वार पर ख़ाली झोली लेकर खड़ा हो जाता है। उपनिषद गंगा में आश्रम व वर्ण व्यवस्था पर चाणक्य की सुंदर व्याख्या सुनी। नैनी ने आज कहा, उसके बेटे को ओप्पो का फ़ोन चाहिए, ताकि वह दफ़्तर का काम कर सके।उसने सोचा, कल नन्हा आ रहा है वही ऑन लाइन मँगा  देगा। वैसे कल इतवार को कर्नाटक सरकार ने पूर्ण  लॉक डाउन घोषित कर दिया है, उनका आना शायद संभव नहीं होगा। 


Friday, March 18, 2022

पीली मूँग



आज शाम साढ़े  पाँच बजे ही वर्षा आरंभ हो गयी। घर के दायीं तरफ़ बने गोदाम की टिन की छत पर बूँदों की बहुत तेज आवाज़ होती है, जैसे ओले गिर रहे हों। वर्षा रुकी तो वे जैकेट पहनकर टहलने गए, तेज हवा बह रही थी, हवा में ठंडक भी थी। बायीं तरफ़ की पड़ोसिन वर्षा में ही छाता लेकर टहलने निकल पड़ी थीं, उनका कहना है कि शाम को एक तय समय ही उन्हें मिलता है, यदि वह बीत गया तो बाद में व्यस्तता के कारण टहलना छूट जाता है। कल उसने ब्लॉग पर व फ़ेसबुक पर नींद पर एक कविता लिखी थी, कइयों को भायी है, शायद नींद ना आना सबकी समस्या है।संभवतः अवचेतन मन में कोरोना का भय परेशान कर रहा हो। आज जून ने सिंधी दाल बनायी पीली मूँग की, बनाते समय कितनी बार माँ को याद किया, बचपन सदा किसी न किसी रूप में हरेक के साथ चलता है। शायद सरकार लॉक डाउन की अवधि को बढ़ाने वाली है, कई राज्यों ने पहले ही ऐसा कर दिया है। सरकारें काफ़ी सहायता भी प्रदान कर रही हैं, ताकि काम न होने पर भी निर्धन, मज़दूर आदि अपना जीवन ठीक से चला सकें। कितने लोगों का व्यापार ठप्प हो गया है । टैक्सी ड्राइवर, होटल सभी जगह किसी की कमाई नहीं हो रही। सभी स्कूल शायद सितम्बर तक बंद रहेंगे। अमेरिका को भारत क्लोरोकविन भेज रहा है, इस समय सभी को सभी की मदद करनी है। 


आज हफ़्तों बाद वे रात्रि के भोजन के बाद बाहर टहलने निकले। चौकीदार के अलावा कोई नहीं था, जबकि शाम को इक्का-दुक्का लोग थे। यदि यह महामारी न हुई होती तो आजकल वे गुजरात में होते।इंडिगो ने कहा है कि अगले वर्ष तक वे कभी भी टिकट का इस्तेमाल कर सकते हैं। सुबह घर की साप्ताहिक सफ़ाई की, तीनों बरामदे, सभी कमरे, किचन, गैराज, सभी स्नानघर, पूरे तीन घंटे लग गए। बर्तन और कपड़े तो मशीन से धुल जाते हैं। महामारी ने एक काम तो अच्छा किया है, सभी को घर का काम करना सिखा दिया है। खाना बनाने से कपड़े धोना, झाड़ू-पोछा तक सब कुछ।सभी आत्मनिर्भर बनें यह तो अच्छा ही है। नाश्ते में कुछ देर हो गयी पर अब जून भी जल्दी नहीं मचाते, आराम से अख़बार पढ़ते रहते हैं। सभी जगह तालाबंदी है, सभी एक सी समस्या का सामना कर रहे हैं, इसलिए जैसे दुनिया एक अदृश्य सूत्र में बंधकर  कुछ निकट आ गयी है। मोदी जी ने अपने सम्बोधन में कहा, तीन मई तक तालाबंदी बढ़ा दी गयी है। ज़्यादातर राज्यों ने इसका स्वागत किया है। अभी भारत में कोरोना के ग्यारह हज़ार मरीज़ हैं। छोटी बहन से बात हुई, उनके अस्पताल को विशेष कोरोना अस्पताल में बदल दिया गया है, कल उसका कोरोना टेस्ट भी हुआ। 


शाम को एक दुखद घटना सुनने को मिली, इसी सोसाइटी में एक युवक की मृत्यु हो गयी, कहा गया कि उसने  आत्महत्या कर ली, पिता दुबई में रहते हैं, माँ से उसका किसी बात पर झगड़ा हुआ था, वह ऊपर के फ़्लोर पर रहता था और माँ नीचे।  कितना अजीब लगता है सुनकर कि इस आपद काल में भी लोग इतने नादान हो सकते हैं। शायद वह बीमार रहा हो, पता नहीं उसे दवा भी मिली हो या नहीं। नन्हे और सोनू से नियमित फ़ोन पर बात होती है, एक ही शहर में रहने के बावजूद पिछले एक महीने से मिलना नहीं हुआ है। आज सुबह नींद खुलने से पहले एक मधुर घंटी की ध्वनि सुनायी दी, कौन था जो इतने प्रेम से जगा रहा था। दो तीन दिन पहले भी एक आवाज़ सुनकर नींद खुली थी जिसका स्रोत नज़र नहीं आया। परमात्मा के पास हज़ार साधन हैं, वह कुछ भी कर सकता है ! रामायण में राम-रावण युद्ध आरम्भ हो गया है। आज दीदी ने फ़ोन किया उनके यहाँ महरी ने आना शुरू कर दिया है, अख़बार भी आने लगा है। 


Wednesday, February 10, 2021

नया घर

 

दोपहर  के सवा बारह बजे हैं. मौसम आज गर्म है, बाहर तेज धूप निकली है. गेस्टहाउस के इस वीआईपी सूट में एसी चलने से गर्मी का अहसास नहीं हो रहा है. आज यहाँ अंतिम दिन है, शाम को एक बार घर जाना है, माली से कुछ पौधों की कटिंग्स लेनी है. आर्ट ऑफ़ लिविंग टीचर से मिलना है और आठ बजे विदाई पार्टी के लिए क्लब जाना है. जून के सारे काम हो गये हैं, आज सुबह वे एडमिन डिपार्टमेंट गए थे. उसके पहले मागुरी बील से लौटकर नाश्ता किया. सुबह चार बजे से पहले ही उठ गए थे, पौने पांच बजे ही ड्राइवर आ गया था. आकाश पूर्व दिशा में लाल था, पर थोड़ी ही दूर जाने पर कोहरा छा गया और सूरज छिप गया. काफी देर बाद जब तिनसुकिया आने ही वाला था, कोहरा छंटा, सूरज तब तक ऊपर चढ़ आया था. टूरिस्ट कैम्प में पहुंचने पर गाइड मिला जो लकड़ी की नाव में एक नाविक को लेकर चला. दो प्लास्टिक की कुर्सियां उसने रखवा दी थीं. पिछले वर्ष फरवरी के महीने में में वे वहां गए थे, तो अनेक पक्षियों को देखा था.  आज ज्यादातर स्थानीय पक्षी ही दिखे, दिसम्बर से प्रवासी पक्षी आना आरम्भ कर देते हैं. कमल के अनेकों फूल वहां खिले थे, श्वेत व लाल कमल दोनों ही थे. छोटे और बड़े कई पक्षियों जैसे किंगफिशर, वैगटेल बर्ड, ओपन बीक बर्ड आदि की तस्वीरें उतारीं. कितनी तरह की छोटी बड़ी मछलियां और बत्तखें भी यहाँ हैं. एक सुखद अनुभव था यह. 


शाम के पौने सात बजे हैं, वे नए घर में हैं. उनकी जरूरत का हर सामान यहाँ है और जरूरत से ज्यादा भी ! कल सुबह साढ़े पांच बजे गेस्टहाउस से वे रवाना हुए थे और शाम को साढ़े आठ बजे के बाद ही नन्हे के घर पहुंचे. वे दोनों उन्हें लेने जब तक पहुँचते, वे पांचवी मंजिल तक आ गए थे. भोजन के बाद नीचे टहलने गए, हवा ठंडी थी पर भली लग रही थी. सुबह भी नीचे स्पोर्ट्स कोर्ट में बैठकर प्राणायाम किया. भीतर का गुरू या परमात्मा स्वयं पढ़ाने आता है. जिन श्वासों में उसे स्मरण नहीं  करते, चंदन की लकड़ी का हम कोयला बना लेते हैं और गंगाजल को नाले में  बहा देते हैं. जो सुगन्ध बनकर भीतर विद्यमान है उसे दुर्गंध बनाने की कला भी जगत सिखा देता है. सुख का सागर भीतर लहरा रहा है पर उन्हें तपती रेत पर चलना भाता है. जीवन जो प्रतिपल दिए जा रहा है, उसे न देख उन्हें मांगने से ही फुर्सत नहीं है. हर इच्छा उन्हें अपने स्वरूप से नीचे गिरा देती है. जीवन का यह मर्म सद्गुरु के सिवा कौन बता सकता है. अभी तो ट्रक आना शेष है, जिसमें मुख्यतः किताबें हैं और कुछ क्राकरी, शेष कपड़ों के कार्टन्स हैं. अभी तक तो ऐसा लग रहा है जैसे वे यहां  घूमने आये हैं. वैसे भी आज वापस जाना है, परसों से यहाँ रहना आरम्भ करेंगे. 


पिछले दो दिन नए घर को व्यवस्थित करने में कैसे निकल गए पता ही नहीं चला. कल दोपहर ट्रक आ गया था, शाम तक काफी सामान खोल लिया था. नन्हे का एक मित्र व उसकी पत्नी भी आये थे. पुलाव बनाया, सफेद डाइनिंग टेबल पर, नए डिनर नए सेट में, नए कुकर में बने पुलाव का स्वाद विशेष लग रहा था. इस समय  रात्रि के सवा नौ होने को हैं. बाहर वर्षा होकर थम चुकी है. वे कुछ देर टहल कर लौटे हैं. कितने नए वृक्ष देखे और अन्य घर भी. कुछ लोगों ने बगीचे के चारों ओर बाड़ लगायी है, वे भी लॉन को दो तरफ से घेरने की सोच रहे हैं. खिड़कियों पर छज्जे भी लगवाने होंगे. आज बेडरूम की खिड़की खुली रह गयी थी, पानी भीतर आ गया. खिड़की के आगे एक बैठने का स्थान है, जिस पर कुशन लगा है, यहां बैठकर पढ़ने-लिखने का अपना ही आनंद है. बाहर कंचन का पेड़ है और हरसिंगार का भी, जो अभी खिड़की तक नहीं पहुँचा है. आज सुबह उसके ढेर सारे फूल उठाये और सुगन्धित श्वेत फूलों की एक माला भी मालिन दे गयी, जून ने उससे कहा है रोज दे जाये. अभी किताबों के बॉक्स खोलने शेष हैं. अगले एक हफ्ते में सभी कुछ व्यवस्थित हो जायेगा. 


Thursday, January 14, 2021

चंदा और सूरज

 

आज सुबह अपने आप ही नींद खुल गयी पौने चार बजे. हल्की सी वर्षा हो रही थी. जब छाता लेकर वे टहलने निकले, सड़कों पर पानी जमा था पर कुछ ही देर में बारिश थम गयी. उससे पहले एक स्वप्न देखा था. वे सब कहीं बाहर गए हैं, किसी सराय या धर्मशाला में हैं. माँ व भाई एक कार में बैठ जाते हैं, वह सामान लेकर जाती है पर वे उसे वहीं छोड़कर चले जाते हैं. एक अन्य व्यक्ति भी कार में है  पर कौन है पता नहीं . बचपन में झगड़े का कारण किसी जन्म में हुई इस घटना में छिपा लगता है. इस दुनिया में अकारण कुछ भी नहीं होता, उनके जीवन में जो कुछ भी घटता है उसके पीछे कोई न कोई कारण अवश्य होता है. आज छोटे भाई से बात हुई वह माह के अंत में एक सप्ताह के लिए यहाँ आएगा, उसे एक बैंक में ऑडिटिंग करनी है. दोपहर साढ़े बारह बजे उन्हें मृणाल ज्योति जाना था, विदाई भोज के लिए. कार्यक्रम बहुत अच्छा था. हॉस्टल में रहने वाले विद्यार्थी और सभी शिक्षक स्वागत के लिए खड़े थे. उन्हें सुंदर सा पीतल का होराई उपहार में दिया और कृतज्ञता पत्र भी पढ़कर सुनाया. इस संस्था से उनका जो संबंध है वह तो दिल में सदा ही रहेगा, जैसा कि जून ने अपने भाषण में कहा था. शाम को छोटे बच्चों के स्कूल में योग कक्षा की शुरुआत की. उनके जाने के बाद वहीं पर महिलाओं का नियमित योग का सत्र होगा।  कम्पनी की तरफ से विदाई समारोह के लिए जून को अगले हफ्ते की एक डेट देने को कहा गया था, पर दो दिन बाद वह बनारस जा रहे हैं. कल शाम छोटी बहन से बात की, रात अपने एक डॉ मित्र से उन्होंने बात की. आज सुबह ननदोई से, सभी ने कहा उनके एक बचपन के मित्र का स्वास्थ्य ठीक नहीं है. जून ने तय किया कि वह उनसे मिलने जायेंगे.  


आज हफ्तों बाद ब्लॉग्स पर लिखा. अभी भी काफी सामान समेटना शेष है, आज कुछ पेपर्स जला  दिए, और भी निकलेंगे. जून अभी फ्लाइट में होंगे, देर रात वह घर पहुंचेंगे. आज सुबह  व्यर्थ ही उनसे विवाद किया, उनका स्वभाव जानते हुए भी. खुद की बात ही सही है ऐसा सबका विश्वास है. इसलिए हर बात को सिर झुकाकर क़ुबूल कर लेना चाहिए. आर्ट ऑफ़ लिविंग का पहला सूत्र भी यही है, लोगों और परिस्थितियों को जैसे वे हैं वैसे ही स्वीकार करें.  दिल बहुत कोमल भी है और उतना ही कठोर भी. आर्ट ऑफ़ लिविंग का एक और सूत्र है, विपरीत मूल्य एक दूसरे के पूरक हैं. आज मंझली भाभी से बात हुई, उनकी बिटिया मलेशिया गयी है, वहाँ से उसे स्पेन जाना है, उसका होने वाला पति भी उसी के दफ्तर में काम करता है. दो महीने बाद उनके विवाह में उन्हें जाना है. दीदी ने कहा है, वे लोग भी उनके साथ उस यात्रा के दौरान पंजाब व हिमाचल जायेंगे. जून ने उनकी भी टिकट बुक कर दी हैं. आज एक पुरानी साधिका का फोन आया, वह दो-तीन महीने के लिए अपनी बिटिया के पास विदेश जा रही है. कहने लगी, उसके जाने से यहाँ कमी खलेगी, पर इस दुनिया में किसी के आने-जाने से कोई फर्क नहीं पड़ता. दुनिया को उनकी नहीं उन्हें दुनिया की जरूरत होती है ! 


आज शाम से ही पुरानी नोटबुक्स को छाँटने का काम कर रही थी. चार-पांच घण्टे लग गए. जो डायरी साथ रखनी हैं और जो नष्ट कर देनी हैं, उन्हें अलग-अलग किया. किताबों में भी इसी तरह तीन समूह बनाये, एक जो ले जानी हैं, दूसरी जो स्कूल की लाइब्रेरी में देनी हैं , तीसरी जो  महिलाओं को देनी हैं. कुछ देर पहले जून से बात हुई, उनके मित्र अस्पताल में हैं पिछले तीन दिनों से, कल दोपहर तक शायद वापस घर आ जायेंगे. आज वह उन्हें एक अन्य डॉक्टर को दिखाने ले गए. उनके दोनों पुत्र भी आ गए हैं. कल दोपहर गायत्री योग साधिकाओं के समूह ने विदाई भोज रखा है. वे सभी उसके यहाँ आएंगी और अपने साथ भोजन बनाकर लाएंगी. वे भी उनके लिए शिलांग से उपहार लाये हैं. आज दोपहर स्वप्न में कोई सुस्वादु पदार्थ खाया, कैसा जीवन्त अनुभव था. सोने से पूर्व समाधि के बारे में सुना था. पुरानी डायरी में कृष्ण को लिखे पत्र पढ़े ! परमात्मा के लिए प्रेम जैसे उन दिनों पूरे ज्वर पर था, अब भीतर कैसी स्थिरता छा गयी है. दो दिन पूर्व कैसा अनोखा स्वप्न देखा, गुरूजी को देखा, वह सम्भवतः शिष्यों को परख कर रहे हैं, वह उन्हें देखती है और सुध खोकर गिर पड़ती है, फिर देह से निकल कर आकाश में उड़ने लगती है, कितना सजीव था सब कुछ ! जीवन के रहस्य को कोई कैसे समझ सकता है ! 


वर्षों पूर्व ...कालेज खत्म होने बाद उस दिन के पन्ने पर लिखा था - अभी-अभी वह सूरज और चाँद से मिलकर आ रही है. कितना सुख था यह कहना कि वह उनके लिए है ! एक तरफ सूर्य की हल्की लालिमा तथा दूसरी तरफ पूरा गोल चाँद और इतना बड़ा आकाश, कितना सुंदर मैदान, वह पागल थी उस एक क्षण... हँसी उसके होठों से फूट रही थी और शी वाज फुल विद दैट फेमिनिन फीलिंग ... जिस स्कुल में उसने पढाना शुरू किया था, कल वह उसकी प्रिंसिपल से मिलकर अपने ओरिजनल सर्टिफिकेट लेने वाली थी, जो जॉब देने से पहले उन्होंने रख लिए थे. उसे आगे पढ़ाई के लिए अप्लाई करना था. 


Saturday, January 2, 2021

राष्ट्रीय खेल दिवस



सवा ग्यारह बजे हैं, जून आज देर से घर आने वाले हैं. क्लब में एजीएम चल रही है, शायद एक बजे के बाद आएंगे. नन्हा बाहर बगीचे में झूले पर बैठकर पढ़ रहा है. उसे नहाने के लिए कहा तो वह बाहर चला गया. मौसम इतना गर्म है और वह कल भी दोपहर तक नहीं नहाया था. उसे तन की साज-सज्जा का शौक नहीं है. अब इतनी उम्र होने को आयी है, विवाह भी हो गया है, यदि अब  भी रोज सुबह उठकर नहाने का मन नहीं होता तो आगे  खुदा ही मालिक है. सवा ग्यारह बजे हैं, जून आज देर से घर आने वाले हैं. क्लब में एजीएम चल रही है, शायद एक बजे के बाद आएंगे. नन्हा बाहर बगीचे में झूले पर बैठकर पढ़ रहा है. उसे नहाने के लिए कहा तो वह बाहर चला गया. मौसम इतना गर्म है और वह कल भी दोपहर तक नहीं नहाया था. उसे तन की साज-सज्जा का शौक नहीं है. अब इतनी उम्र होने को आयी है, विवाह भी हो गया है, यदि अब  भी रोज सुबह उठकर नहाने का मन नहीं होता तो आगे  खुदा ही मालिक है. 


रात्रि के साढ़े आठ बजे हैं. पिछले चार-पांच दिनों से नन्हे के आने तथा एजीएम के कारण जो व्यस्तता बनी हुई थी, वह समाप्त हो गयी है. उस दिन अचानक आकर उसने चौंका ही दिया था, कहने लगा, असम में अंतिम वर्ष है जब वे स्वतन्त्रता दिवस और जून के जन्मदिन की पार्टी दे रहे होंगे, बंगलौर से ढेर सारी मिठाई और अन्य व्यंजन भी लाया था. आज वापस चला गया, दोपहर को सन्डे क्लास में बच्चों को उसके लाये रसगुल्ले और नमकीन खिलाई, रक्षाबंधन का त्यौहार मनाया. अभी उसका संदेश आया, पहुँच गया है. आज कई राज्यों में बहुत तेज वर्षा हुई, बाढ़, भू स्खलन आदि के कारण लाखों लोगों को कितने कठिन हालात में रहना पड़ रहा है. जून आजकल जरा जल्दी झुंझला जाते हैं, शायद सेवानिवृत्ति निकट आने की वजह से, वैसे यह उसका वहम भी हो सकता है. 


पिछले दो दिन कुछ नहीं लिखा, शाम को लाइब्रेरी से लायी एक पुस्तक पढ़ी, पर जब जीवन ही माया है तो उसमें कल्पना का और समावेश करने की क्या आवश्यकता है, कविता ज्यादा करीब लगती है सत्य के... पिछले दिनों नियमित नहीं लिखा, असजगता का परिणाम था, आश्चर्य भी होता है कि अब भी उहापोह शेष है, पर शायद कोई कर्म उदित हुआ था जिसका भुगतान इसी तरह होना था. बहुत दिनों बाद आज चार पोस्ट प्रकाशित कीं, लेखन और पाठन ही उसके प्रिय कार्य हैं, जिन्हें करते समय समय का भी भान नहीं रहता. नन्हे ने मोबाइल में कई नए ऐप्स इनस्टॉल कर दिए हैं, उसके आने से टेक्नोलॉजी का ज्यादा उपयोग करने लगते हैं वे. समाचारों में सुना कांग्रेस के नेता व पूर्व गृहमंत्री पी चिदम्बरम को तलाश किया जा रहा है, उन्हें सीबीआई की कस्टडी में रखा जायेगा. कुछ दिन पूर्व पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री की हिरासत की बात सुनकर उसे लगा था , भारत में बदले की राजनीति नहीं होती. पर राजनीति में यह उठापटक सामान्य बात है. दुनिया के कई देश कश्मीर पर भारत का साथ दे रहे हैं. कल छोटी बहन से बात हुई, उसने अपनी ड्यूटी के दौरान पैंसठ फोन कॉल्स अटैंड कीं, कितनी श्रमसाध्य होती है एक डाक्टर  की जिंदगी. उसने बताया, मुस्लिम देशों में महिलाओं की स्थिति दयनीय होती है. उसके अस्पताल में कई महिलाएं आती हैं जो काफी दिनों से कितनी दवाएं खा रही हैं, वह भाषा की बाध्यता के कारण उन्हें ज्यादा सलाह नहीं दे पाती. लोग कितना दुःख उठाते हैं गलत दिनचर्या के कारण.  दीदी से बात हुई, उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं है, डॉक्टर ने टीआईए बताया है, एक महीना दवा लेनी है, ज्यादा चलना-फिरना है, कोलस्ट्रॉल बढ़ गया है. छोटे भाई के लिए जन्मदिन की कविता लिखी, उसने अपने टूर के दौरान नए बैंक में अपना जन्मदिन मनाया, सभी कर्मचारी शामिल हुए. नई जगह जाकर भी वह सबको अपना मान लेता है. पिताजी को जून की भेजी चाय मिल गयी है, जो सोनू के पिता जी ने दी थी जब वे गोहाटी गए थे, वह चाय बागानों के लिए सलाहकार हैं. 


आज शाम को भजन संध्या थी, नैनी ने लाल फूलों से मन्दिर सजाया था. रात्रि के सवा आठ बजे हैं. टीवी पर पूर्व वित्तमंत्री अरुण जेटली के निधन पर शोक संदेश प्रसारित हो रहे हैं. प्रधानमंत्री विदेश यात्रा पर हैं, उनकी तरफ से राजनाथ सिंह जी ने श्रद्धांजलि दी. अमित शाह बहुत गमगीन नजर आ रहे हैं. हाल ही में बीजेपी के कई दिग्गज नेताओं ने अपनी देह त्याग दी. आज शाम वे जून के एक पूर्व सहकर्मी के यहां गए , उनका पुत्र एक संगीत अकादमी चलाता है. उनका घर संगीत के वाद्यों से भरा हुआ था, कई विद्यार्थी भी वहाँ थे. कल सुबह उन्होंने एक परिवार को नाश्ते पर बुलाया है, शाम को वे स्वयं आमन्त्रित हैं. अब उनके शेष दिन इसी तरह लोगों से मिलते विदाई लेते गुजरने वाले हैं. मात्र पाँच दिन शेष हैं जून के कार्यकाल के. शाम को उनके एक पूर्व कर्मचारी की बेटी आयी, वह एलआईसी एजेंट है, पॉलिसी लेने को कह रही थी. उससे पूर्व मृणाल ज्योति से दो लोग आये, उन्हें बगीचे से ढेर सारे पके कटहल तोड़कर ले जाने को कहा था.  


आज खेल दिवस है, हाकी खिलाडी ध्यान चन्द के जन्मदिन को खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है. देश व समाज को स्वस्थ रखने के लिए प्रधानमंत्री ने आज ‘फिट इंडिया’ का अभियान भी आरंभ किया.  


उस पुरानी डायरी में पढ़ा, ... “परीक्षाएं समाप्त हो गईं, अभी परिणाम नहीं आया, कुछ  बच्चों को घर पर पढ़ाना शुरू कर दिया है। एक स्कूल में नौकरी के लिए प्रार्थना पत्र लिखा है। सुबह उठी तो मूसलाधार बारिश हो रही थी। फिर मौसम स्वच्छ हो गया. लगभग नौ बजे तक उसने एक झोंपड़ी बनायी। हरा कागज चाहिए और मिट्टी भी, साथ ही हाथी, गाय, कुआँ  और पानी भरती हुई औरत की कटिंग, पेड़  और फूल। फिर रह जाएंगे बल्ब, चाँद और सितारे, उन्हें एक गत्ते पर बनाना होगा कटिंग करके। कल्पना साकार होगी अवश्य। रील मंगवानी है और हरा, सफेद, चमकीला और नारंगी कागज भी।” आज सोचती है तो कुछ भी याद नहीं आता कैसी बनी थी वह झोपड़ी और क्यों बनायी थी ! यहाँ एक ही जन्म की बातें याद नहीं रहतीं और मानव जन्मों की बात करता है !

 

Friday, December 4, 2020

गोल्डन पगोडा

 

अभी-अभी छोटी ननद से बात की. वे लोग गोहाटी पहुंच गए हैं कल सुबह यहाँ पहुंच जायेंगे. अगले नौ दिन काफी व्यस्त होंगे और अलग भी. नैनी ने बरामदे में एक सुंदर रंगोली बना दी है उनके स्वागत में. उसके हाथों में हुनर है और दिल में जोश भी. उसने अपने पति को काम दिलवाने के बारे में कहा है पर वे चाह कर भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं. उसे कहा, वह जो काम कर रहा है उसे ही ठीक से करे. क्लब में होने वाली कविता प्रतियोगिता के लिए उसने गुलजार की एक कविता ‘किताबें’ चुनी है, अवश्य ही सबको पसन्द आएगी. 

सुबह समय पर मेहमान आ गए, स्वागत के लिए आरती की थाली सजाई थी, फूलों से उनका स्वागत किया. नाश्ते में अनानास खिलाये, जामुन का जूस दिया और दोपहर को बगीचे से तोड़े नारियल का पानी. वे लोग अपने साथ ढेर सारे बनारसी आम लाये हैं. दोपहर बाद उन्हें ब्रह्मपुत्र नदी पर बना बोगी बील पुल दिखाने ले गए, एक सखी और उसकी बेटी भी साथ गए थे. आज शाम को स्थानीय पाइप से बना पुल देखने जाना है. 


रात्रि के आठ बजने वाले हैं. वे नामसाई वापस लौट आये हैं. कल सुबह नाश्ते के बाद रोइंग होते हुए गोल्डन पगोड़ा पहुंचे थे. भगवान बुद्ध की बहुत विशाल मूर्ति के दर्शन किये और रात्रि में निकट स्थित गेस्ट हाउस में रहे. उनके साथ एक परिवार और गया था. सभी महिलाएं एक गाड़ी में और सभी पुरुष दूसरी गाड़ी में. उन्होंने खूब गाने गए, अंताक्षरी खेली और पहेलियाँ पूछीं, कहानियाँ सुनायीं, सुनीं, गढ़ीं. एक साथ भोजन किया और प्रकृति के नजारों का आनंद लिया. ढेर सारे फोटो खींचे. घर लौटे तो पता चला कि किचन का दरवाजा लॉक हो गया है. कुछ देर तक अपनेआप प्रयत्न करने के बाद मदद के लिए फोन किया, आधे घण्टे बाद खुल गया और फिर रात्रि का भोजन बनाया. 


सुबह अलार्म बजा उसके पूर्व भीतर एक गीत सुनाई दिया, जिसकी एक पंक्ति थी, “आ गयी शुभ घड़ी” कोई है भीतर जो जानता है कि उठने का वक्त हो गया. आज धूप निकली है. पिछले दिनों दिन भर वर्षा होती रही. कल शाम मेहमानों को वापस जाना है. सुबह जामुन के बीजों का पाउडर बनाया जो ननद ले जाएगी. उनके लिए अनानास भी मंगाए हैं. कल शाम उस सखी ने जो उनके साथ घूमने गयी थी, डिनर पर बुलाया था, बहुत सारी डिशेज बनायी थीं. उसके पिताजी से मिलने गयी तो बोले, वह उसे पहचानते ही नहीं, उन्हें अल्जाइमर है. आज सुबह एक सखी के पतिदेव को माइल्ड हार्ट अटैक आया, वह उन्हें लेकर डिब्रूगढ़ गयी है. जबकि सुबह अपना बगीचा दिखाने के लिए उन सभी को बुलाया था. अकेले ही सुंदर बगीचा देखा, उसके बाद सब मृणाल ज्योति गए.  दोपहर को महीनों बाद कैरम खेला. नैनी की देवरानी अपनी मेडिकल रिपोर्ट दिखाने आई, उसका हीमोग्लोबिन बेहद कम था, ईएसआर बहुत ज्यादा, उसे खून चढ़ाना होगा. अगले महीने जून को दो दिनों के लिए गोहाटी जाना पड़ सकता है, असम छोड़ने से पूर्व वह भी एक बार वहां जाना चाहती है.  एक दिन वे कामाख्या जायेंगे और दूसरे दिन कुछ परिचितों के घर मिलने.  


आज सुबह उठे तो वर्षा हो रही थी, छाता लेकर टहलने गए, वापस आकर योग साधना. जून होर्लिक्स पीकर दफ्तर चले गए फिर सवा आठ बजे लौटकर नाश्ता किया.  पिछले एक हफ्ते से यही कार्यक्रम था उनका. घर के सामने वाले हैलीपैड पर आज एक हैलीकॉप्टर उतरा और कुछ देर बाद उड़ गया. गेट पर से ही एक वीडियो बनाया. ननद बाजार गयी है, कुछ सामान खरीदने जो उसे यहां से साथ ले जाना है. पिछले आठ दिन कैसे पंख लगाकर उड़ गए, पता ही नहीं चला. आज उसका मन जैसे पिघल गया है, बात-बात पर बहने को तैयार बैठा है. 


बरसों पुरानी डायरी में लिखी महादेवी वर्मा की ये पंक्तियाँ भी कुछ इसी भाव को दर्शाती हैं - 


प्रथम जब भर आतीं चुपचाप

मोतियों से आँखें नादान 

आंकती तब आंसू का मोल 

तभी तो आ जाता यह ध्यान !


घुमड़ घिर क्यों रोते नव मेघ 

रात बरसा जाती क्यों ओस

पिघल क्यों हिम का उर  अवदात 

भरा  करता सरिता के कोष !

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जिसका रोदन जिसकी किलकन

मुखरित कर देते सूनापन 

इन मिलन-विरह शिशुओं के बिन 

विस्तृत जग का आंगन सूना 


तेरी सुधि बिन क्षण-क्षण सूना !