Monday, December 26, 2022

होप और हम

सुबह उठे आकाश में तारे चमक रहे थे। दिन में धूप भी तेज थी। शाम को माली आया , एक सवा घंटे में सारे गमलों की निराई-कुड़ाई कर दी। बालसम में फूल आ रहे हैं। बगीचे में ही थे कि पड़ोसी छड़ी लेकर टहलते हुए दिखे, कहने लगे, पीछे की लाइन में एक व्यक्ति गिर गया, अस्पताल ले जाना पड़ा है, फ़ालिज का अटैक पड़ा है, उमर भी ज़्यादा नहीं है। सभी को स्वास्थ्य का ध्यान रखना कितना आवश्यक है। कोरोना काल में जीवन कितना क्षण-भंगुर हो गया है । सुबह देखा, गेस्ट रूम में कमांड टेप से लगायी पेंटिंग गिरी हुई थी, शायद तस्वीर वजन के हिसाब से टेप की शक्ति कम थी । शीशा टूट गया, नैनी ने बिना किसी भय के सफ़ाई कर दी। दीदी का फ़ोन आया दोपहर को, बच्चों की बातें बतायीं। बड़ी बिटिया अपनी वेबसाइट खोल रही है, छोटी ने बच्चे के पालन-पोषण के लिए जॉब छोड़ दी है। बड़ा भांजा अपनी कंपनी बंद कर के जॉब लेगा। छोटे की कम्पनी ठीक चल रही है। छोटी बहन और बहनोई आर्ट ऑफ़ लिविंग के स्वयंसेवक बन गए हैं। मृणालज्योति की एक अध्यापिका से फ़ोन पर बात की, स्कूल बंद है, ऑन लाइन क्लासेज़ हो रही हैं। आज एक नया स्थानीय गेम खेला, लकड़ी का बना आधार है और कौड़ियों से खेलते हैं, बहुत रोचक लगा। लाओत्से की पुस्तक भी बहुत ज्ञानवर्धक और रोचक है, उपनिषदों से कम नहीं था उनका ज्ञान। 


रात्रि के नौ बजने को हैं। आज का इतवार काफ़ी अलग था अन्य दिनों की अपेक्षा। नसीरूद्दीन शाह की फ़िल्म ‘होप और हम’ देखी। बहुत अच्छी फ़िल्म है, एक परिवार के सपनों की कहानी, जिसमें एक पुरानी जर्मन फ़ोटो कॉपी मशीन का भी रोल है। शाम को चौलाई, जिसे यहाँ अमरनाथ का साग कहते हैं, दक्षिण भारतीय तरीक़े से बनाया। बहुत अच्छा बना है। कल इसे फ़ोटो सहित छोटी भाभी के फ़ेसबुक पेज पर प्रकाशित करेगी। नन्हे ने एक नया की बोर्ड, माउस तथा पैड लाकर दिया है, अब लिखने का काम करना सरल हो गया है। गुरुजी के श्राद्ध के बारे में लिखे लेख का अनुवाद किया। जून नियमित ध्यान करने लगे हैं तो भीतर की हलचल समझ में आने लगी है। उनके पैरों के तलवों में जलन हो रही थी, शाम को वे हरी घास पर नंगे पैर चलते रहे। सूर्यास्त के बाद आकाश का रंग ग़हरा लाल हो गया था।   


आज शिव सूत्र में घोरा, महाघोरा और अघोरा शक्ति के बारे में पढ़ा। घोरा मातृका शक्ति के कारण व्यक्ति ज़्यादा वाचाल हो जाता है, वह दूसरों को सलाह देता है, क्रोध करता है। महा घोरा के कारण जगत का चिंतन और उन्हीं के बारे में जानने की इच्छा जगती है अघोरा के कारण स्वयं के भीतर प्रवेश होता है, स्वाध्याय तथा साधना की तरफ़ मन जाता है। यदि कोई मातृका शक्ति के स्रोत की तरफ़ जाता है तो अघोरा अपना काम कर रही है। उसकी वाणी में अभी भी कितने दोष हैं। दोष दृष्टि तथा स्वयं को सही मानना, कटाक्ष करना आदि दोषों को अब तो त्याग देना चाहिए। परमात्मा की इतनी महान कृपा के बाद भी यदि कोई अपने संस्कारों को दग्ध नहीं करता तो उसको क्या कहा जाएगा। प्रधानमंत्री ने कल ‘मन की बात’ में खिलौनों की बात की तो कुछ युवकों ने शिकायत की। नीट व ज़ेईई परीक्षाओं की तिथि अभी तक तय नहीं हुई है।कोरोना के मरीज़ों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। 


कल जून की सेवनिवृत्ति को पूरा एक साल हो जाएगा। तीन दशकों से भी अधिक समय उन्होंने असम में गुज़ारा पर ईश्वर की कृपा से उन्हें यहाँ भी हरियाली और वर्षा भरा माहौल मिल गया है। सुबह उठे तो तेज वर्षा हो रही थी, जब कुछ हल्की हुई तो वे छाता लेकर टहलने गए। 

गगन में वायु, 

वायु में अगन, 

अगन में नीर, 

नीर में धरा ! 

ओत-प्रोत हैं सब आपस में 

जैसे मन रहता है उसमें ! 

जो बसा सृष्टि में वैसे ही 

ज्यों गंध धरा में 

ज्योति अगन में 

स्वाद नीर में 

छुवन वायु में 

वह उसमें है जैसे कोई 

लहर सिंधु में !


Thursday, December 22, 2022

चौथ का चाँद


आज दोपहर पूर्व योग की सप्त क्रियाओं में से एक नेति क्रिया की थी, शाम से ही छींकें आ रही हैं, जब थोड़ा सा भी पानी भीतर नासिका में रह जाता है, तब ऐसा होता है।वर्षों पहले एक बार असम में विवेकानंद योग केंद्र में इसे सीखा था, तब से सप्ताह में एक बार तो कर ही लेती है। नेति के बाद ज़्यादातर कपालभाति करने से पानी निकल जाता है पर कभी-कभी कुछ रह जाता होगा। मंझले भाई ने घर में हुई गणेश पूजा का वीडियो  भेजा  है। गुरूजी ने गणेश चतुर्थी का महत्व व गणेश के जन्म की अनोखी कथा का अर्थ समझाया। जिनका अहंकार से भरा सिर शिव ने काटा तो ज्ञान युक्त सिर लगाया गया। कहते हैं चौथ का चाँद नहीं देखना चाहिए, पर रोज़ की तरह उसकी नज़र आकाश की ओर चली गयी और दर्शन  हो गए। 


आज सुबह नन्हा व सोनू आ गये थे। दोपहर को भोजन के बाद वे सभी एक स्टोर ‘लिव स्पेस’ गये, उन्हें अपने किचन व बेडरूम की अलमारी का दरवाज़ा ठीक करवाना है। सेल्स मैनेजर ने पावर पाईंट प्रस्तुति दी, नयी तकनीक आने से हर क्षेत्र में सब कुछ कितना बदल गया है । अमेजन से कमांड टेप आया है, मेहमानों के कमरे में चित्र लगाना है, अब दीवार पर कील ठोकने की ज़रूरत नहीं है।लगभग पाँच महीने बाद वे शहर की तरफ़ गये थे।हाथों में दस्ताने तथा चेहरे पर मास्क लगाकर। ट्रैफ़िक भी अब सामान्य हो गया है।वापसी में सोसाइटी में नयी खुली दुकान पर चाय पी तथा गणेश पूजा का कलात्मक पंडाल देखने भी गये। तीन दिन उनकी पूजा करने के बाद पूरी विधि से मुहूर्त देखकर कल विसर्जन का जुलूस भी निकलेगा। 


रात्रि के नौ बजे हैं, मन में सुबह सुने एक संत के वाक्य याद आ रहे हैं। कुछ लोग स्वयं को अणु मानते हैं, यह आणवीय मल है। अपूर्ण मानते हैं, यह मायीय मल है। अपूर्ण मानते हैं और उस अपूर्णता को दूर करने की इच्छा करते हैं, यह कार्मिक मल है। अविद्या, काम, कर्म यह तीनों ही बंधन के कारण हैं। वे अनंत हैं, सांत नहीं, वे पूर्ण हैं, अपूर्ण नहीं, वे सत्य हैं, ज्ञान हैं जब तक यह स्वयं का अनुभव नहीं बन जाएगा तब तक मानव को शांति का अनुभव नहीं होगा।नन्हे ने ‘मैजिक फ़्लावर्स पॉट सॉयल’ का दस किलो का एक पैकेट भिजवाया है। बड़े शहरों में मिट्टी भी ख़रीदनी होती है, उन्हें इसका भान नहीं था।  गमलों में भरकर बीज डाल दिए हैं, एक हफ़्ते में निकल जाएँगे। प्रधानमंत्री जी ने मोर का एक वीडियो पोस्ट किया है, कुछ लोगों को उस पर भी एतराज है।  


भारत ब्राज़ील से आगे निकल जाने वाला है, कोरोना के संक्रमण से पीड़ित लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। शाम को वृद्ध पड़ोसी टहलते हुए मिले, कहने लगे, अब कोरोना से डरना छोड़ दिया है, जो पाना था पा लिया, अब क्या खोने को है ? एक पुरानी परिचिता से फ़ोन पर बात हुई। वह कोरोना के कारण अस्पताल में  हैं, शिकायत करती हुई सी कह रही थीं, मरीज़ों को देखने डाक्टर भी नहीं आता और घर के लोग भी दूर से देखकर खाना रखकर चले जाते हैं। नन्हे ने एक और गेम भेजा है। पिछले हफ़्ते वॉल एंड वॉरीअर भेजा था, जो जून रोज़ खेलते हैं। उसके बचपन में वे उसे खिलौने ख़रीदकर देते थे और अब वह उनका बचपन फिर से याद दिला रहा है। आज सुबह दुलियाजान की कम्पनी के हिंदी अनुभाग से भेजा गया पुरस्कार का ड्राफ़्ट मिला, वहाँ से आने से पूर्व कुछ रचनाएँ दी थीं पत्रिका के लिए। जून ने उसे बैंक में जमा कर दिया है। 


Monday, December 19, 2022

प्रकृति के सुकुमार कवि

मौसम आज भी बादलों भरा है. सुबह उठने पर पता चला बिजली ग़ायब है, तब से डीज़ल जेनरेटर से ही बिजली आ रही है। जून ने फ़ोन किया तो पता चला, कल शाम पाँच बजे तक विद्युत विभाग से बिजली बहाल होगी। मेट्रो का काम चल रहा है, शायद इस कारण कुछ समस्या हुई है। सुबह उठने से पूर्व एक स्वपन में कई परिजनों के साथ स्वादिष्ट व्यंजन का स्वाद लिया, आत्मा में सभी इंद्रियों की शक्ति समाहित है। स्वपन में तभी बिना आँखों के सुंदर दृश्यों का अवकोलन कर लेते हैं, बिना कानों के संगीत सुन  लेते हैं । काव्यालय में भाषा उत्सव होने वाला है, उसने सोचा है प्रकृति के सुकुमार कवि सुमित्रानंदन पंत के जीवन व काव्य के बारे में लिखेगी। नन्हे ने फ़ोटो भेजा है, अपनी बिल्लियों को हुड पहनाए हैं। उनके खेलने, पानी पीने, ऊपर चढ़ने, सोने आदि के लिए ढेर सारे उपकरण व खिलौने वह मँगवाता रहता है। बड़े भाग्यवान हैं दोनों। नन्हे ने उन दोनों के लिए एक नया गेम भी भेजा है, कल सीखेगी। बगीचे के लिए सोलर लाइट भी भिजवायी है। 


आज पापा जी से बात की, वह ठीक हैं, उत्साह से भरे हुए। नब्बे से एक वर्ष कम की उम्र  में भी वह उसकी कविताओं को फ़ेसबुक पर पढ़ते हैं। आज दोपहर बाद पंत का एक साक्षात्कार सुना। वह १९०० में जन्मे और १९७७ में उनकी मृत्यु हुई। २५ किताबें उन्होंने लिखीं। उनका व्यक्तित्तव अनोखा था, कोमलता का भाव भरे,  उनके केश लम्बे व घुंघराले थे।  आज दोपहर बाद वर्षा थम गयी, शाम को सूर्यास्त के चित्र उतारे। हर शाम अपने आप में बिलकुल नयी लगती है। विष्णु पुराण में दशरथ के मित्र जटायु की कथा सुनी, कितनी अद्भुत कथाएँ हैं ये, जिनमें मानव, देवता और प्राणी सबमें एक मैत्री का भाव है। अनेक वृक्षों व पौधों को भी पुराणों में कितना सम्मान मिला है। भारत की इसी संस्कृति से आकर्षित होकर तो युगों से अनेक लोग यहाँ आते रहे हैं। जून दोपहर को ‘लखनऊ सेंट्रल’ देख रहे थे।  जेल में कुछ संगीत प्रेमियों द्वारा एक बैंड बनाने पर आधारित है यह फ़िल्म। 


आज राजीव गांधी का जन्मदिन है, वह ज़िंदा होते तो ७६ वर्षों के होते। गणेश पूजा के उपलक्ष में उनकी सोसाईटी नापा में ‘पेंटालून’ का एक स्टाल लगा है, एक दिन बाद पूजा का पंडाल भी लग जाएगा। मोदक प्रतियोगिता भी होगी। असम में दुलियाजान में भी कोरोना के केस बढ़ गए हैं।पूरे भारत में ७०,००० केस मिले आज, जो एक दिन में दुनिया में सबसे ज़्यादा हैं; पर रिकवरी रेट यहाँ काफ़ी अच्छा है।


Friday, November 11, 2022

कुंगफू पांडा

 
पिछले कई दिनों से आकाश में तारे नहीं दिखे, सदा बादल ही बने रहते हैं, पर बरसते नहीं  पर आज शाम को वे टहलने निकले थे कि रास्ते में तेज हवा के साथ वर्षा होने लगी. छाता भी उड़ने लगा, एक बार तो वह उल्टा ही हो गया. वे जल्दी ही घर लौट आये. कुछ देर ‘कुंगफू पांडा’ फिल्म देखी, मार्शल आर्ट पर बनी अच्छी एनिमेशन  फिल्म है. एओएल के एक साधक ने गुरु जी की गाय के बछड़ों को सहलाते हुए दो तस्वीरें भेजी हैं. वह कई दिनों से आश्रम में रह रहा है, वहाँ कई कोरोना संक्रमित लोग भी हैं. छोटा भाई नैनीताल में घूम रहा है, पहाड़ों पर गाड़ी चलाना भी उसने सीख लिया है. कोरोना काल में भी उसका टूर जारी है. अख़बार में पढ़ा, अमिताभ बच्चन कोरोना से स्वस्थ होकर आ गए हैं, पर घर पर भी कुछ दिन अकेले रहना होगा, जो उन्हें खल रहा है. महामारी का कहर लंबे समय तक रहने वाला है. भारत में बीस लाख लोग संक्रमित हैं. कई देशों में मृत्यु दर दिल दहला देने वाली है. किन्तु अब इसका भय काम हो गया है, वे सुबह-शाम  भ्रमण के लिए जाते समय मास्क पहन कर नहीं जाते. लोग भी सामान्य दिनों की तरह ही सड़क पर दिखाई देते हैं. जबकि एक दिन में पचास हजार से अधिक संक्रमित लोग मिलते हैं. अब तक सैंतालीस हजार लोग अपनी जान भी गँवा चुके हैं. आज ब्लॉग पर एक पोस्ट लिखी, मुख्य पृष्ठ का लुक बदल गया है, पहले ज्यादा अच्छा था, खैर, हर बदलाव शुरू में अखरता है, फिर उसी का अभ्यास हो जाता है. 

जून का जन्मदिन आने वाला है, उन्हें दक्षिण भारतीय भोजन पसंद है इसलिए नन्हा और सोनू उनके लिए ढेर सारे गिफ्ट्स लाये हैं. बड़ा दोसा तवा, उत्तपम पैन, पुत्तू बनाने का बर्तन और पनियप्पम बनाने की छोटी सी कड़ाही, मिठाई, कुछ एग्जॉटिक फल  और कॉफी की एक बोतल भी. पिछले हफ्ते वे एक टेलीस्कोप भी लाये थे. यह बात अलग है तब से चाँद के दर्शन ही नहीं हुए. जून ने इस अवसर पर शांति धाम में कुछ सामान भिजवाया है और स्वतंत्रता दिवस पर सोसाइटी के कर्मचारियों के लिए मिठाई मंगवाई है. 


आज जन्माष्टमी के अवसर पर गुरूजी का सुंदर उद्बोधन सुना. शाम को उन्होंने ‘सत्यं शिवं सुंदरं’ ध्यान कराया. बंगलूरू में एक एमएलए के घर पर भीड़ ने हमला कर दिया, हिंसा को फैलने में देर नहीं लगती. फेसबुक की एक पोस्ट के खिलाफ यह प्रतिक्रिया हुई थी. एक भारतीय होने के नाते उन्हें समाज में हिंसा के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए. जाति के नाम पर हिन्दू समाज में काफी भेदभाव रहा है, ऐसे समाज में जहाँ एकता न हो बाहरी आक्रमण का सामना करना कठिन हो जाता है. वैसे भी हिन्दू स्वभाव से शांति प्रिय है, वह झगड़ा न हो इस भय के कारण अत्याचार सह लेता है. 


आज स्वतंत्रता दिवस है. एक नयी फिल्म देखी, ‘गुंजन सक्सेना- द कारगिल गर्ल’, जाह्नवी कपूर ने अच्छा अभिनय किया है. आज से नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन आरम्भ हो रहा है. सभी भारतियों को एक हेल्थ आईडी दी जाएगी, जिसके कारण उनकी स्वास्थ्य संबन्धी सभी समस्याओं को निपटारा समय से हो पायेगा. सुबह  झंडा आरोहण के लिए गए. लन्च में पनिअप्पम बनाए. नन्हे ने चेट्टीनाड आलू बनाये, जो वे अपने मित्र के लिए भी ले गए. सोनू ने केक बनाया. आज दोपहर को माली ने सूरजमुखी के बीज गमले और जमीन में बोये, एक हफ्ते में अंकुर निकल आएंगे. 


Thursday, November 3, 2022

भूमि पूजन

 


आज अगस्त का पहला दिन है.  सुबह अगस्त का स्वागत करते हुए एक कविता लिखी. एओएल के उस स्वयंसेवक से,  जिसके माध्यम से वह हिंदी में अनुवाद का सेवा कार्य कर रही है, कहा, गुरूजी तक भिजवा दे. उसने हामी भर दी है पिताजी ने फोन पर कहा, उन्हें उसकी कवितायेँ और अनुच्छेद अच्छे लगते हैं, वह नियमित फेसबुक पर पढ़ते हैं. राखी मिल गयी है, यह भी बताया. उन्होंने मोटरोला का नया स्मार्ट फोन मंगवाया है, छोटी भाभी सामने वाले पड़ोसी अंकल के साथ जाकर ले आयी और उसने सेट भी कर दिया. 
आज सुबह ‘शकुंतला’ फिल्म देखी. जो भारत की प्रसिद्ध गणितज्ञ के जीवन पर बनी है, जिन्हें मानव कम्प्यूटर भी कहा जाता था. वह कठिन सवालों के हल कम्प्यूटर से पहले हल कर लेती थीं, कैसे करती थीं, कोई कभी जान नहीं पाया. नन्हा जून के जन्मदिन पर एक बड़ा सा टेलिस्कोप लाया है, उसे इंस्टॉल किया. आज आकाश में न चाँद है न तारे, मौसम साफ होगा तब वे आकाश निहारेंगे. 
आज रक्षा बंधन का पर्व है, सभी भाइयों से फोन पर बात हुई. परसों रामजन्मभूमि मंदिर के लिए भूमि पूजन होगा, तैयारियां चल रही हैं, प्रधानमंत्री भी जायेंगे. शाम को सरयू के तट पर हजारों दीप जलाये जायेंगे. कोरोना का भय भी लोगों के उत्साह को कम नहीं कर पा रहा है. गृहमंत्री को भी कोरोना हो गया है. छोटी ननद से बात हुई, नंदोई जी को भी बुखार व गले में खराश है. उनके बैंक में सबका टेस्ट करवाया गया, एक तिहाई लोगों का पॉजिटिव मिला है. पूरे विश्व में पौने दो करोड़ लोग कोरोना से पीड़ित हैं और सात लाख लोगों की मौत हो चुकी है.
आज शाम को गुरूजी का नया ध्यान किया, ‘संकल्प शक्ति के लिए ध्यान’, बहुत ही प्रभावशाली था. उनकी कृपा का कोई अंत ही नहीं है. वह मार्च के महीने से ही रोज ध्यान करा  रहे हैं. भगवान बुद्ध पर लिखी पुस्तक में पढ़ा, उन्हें कोई कामना नहीं थी, पर उनका हृदय अपार करुणा से भरा था, जहाँ कोई स्वार्थ सिद्धि शेष न हो, वहीँ करुणा और सजगता का वास होता है. वास्तविक समझदारी और जगत के प्रति आदर भी कह सकते हैं इसे ! 
आज अयोध्या में राम मन्दिर भूमि पूजन सम्पन्न हो गया. प्रधानमंत्री की उपस्थिति में कार्यक्रम बहुत ही गरिमापूर्ण बन गया. एक स्थान पर उन्होंने साष्टांग प्रणाम किया. वह सम्पूर्ण पूजा विधि में सम्मिलित हुए और प्रभावशाली वक्तव्य दिया. मोहन भागवत, योगी जी व नृत्य गोपालदास जी ने भी इस अवसर पर अपने विचार रखे. भारत भर से एक सौ पैंतीस विभिन्न धाराओं के सन्त आये थे. सजावट बहुत शानदार थी और दिन भर राम की महिमा गायी जाती रही. मर्यादा पुरुषोत्तम राम भारत की आत्मा हैं, उनका नाम हर बच्चे के मुख पर कभी न कभी आ ही जाता है. अगले तीन वर्षों में भव्य व दिव्य मंदिर का निर्माण हो जायेगा. 

Thursday, September 8, 2022

‘मुरुग़न रहस्य’


आज सुबह-सुबह रसोईघर में एक चूहा दिखा। काला, मोटा चूहा, सो सारी सुबह उसी को भगाने के उपायों को खोजते-खोजते बीती। इसी सिलसिले में फ़ेसबुक पर एक मज़ाक़िया पोस्ट भी  लिख डाली। शाम के भ्रमण के समय मंद पवन बह रही थी और घास के सफ़ेद, गुलाबी फूल झूमते हुए बहुत अच्छे लग रहे थे। छोटा सा वीडियो बनाया। आज सुना कि रात्रि भोजन में यदि केवल सूप व सलाद लिया जाए और अनाज दिन में केवल एक बार लें तो स्वास्थ्य के लिए उत्तम है। बढ़ते हुए वजन को नियंत्रित रखने के लिए उन्होंने भी इसे प्रयोग के तौर पर आरम्भ करने का मन बनाया है। कल से शाम छह बजे से तीन दिनों का आर्ट ऑफ़ लिविंग का ‘मुरुग़न रहस्य’ पर दिया गुरू जी का प्रवचन आरम्भ हो रहा है। दक्षिण भारत में भगवान कार्तिकेय को मुरुग़न कहते हैं। आज लाओत्से के वचनों पर लिखी एक पुस्तक का एक पन्ना पढ़ा। उनकी बातें विरोधाभास से भरी लगती हैं, पर संभवतः सत्य इतना विशाल है कि उसमें दोनों पक्षों के लिए जगह होती है। 


आज ऑनलाइन प्रवचन का पहला दिन था। गुरूजी ने अद्भुत ज्ञान दिया और ध्यान भी कराया । उसने एक नोटबुक में मुख्य बिंदु लिख लिए, इन्हें टाइप करना है। सुबह टहलते समय उसने कार्तिकेय के बारे में सुना हुआ ज्ञान जून को बताया। मुरुग़न, वेल्ली और देवसेना से परिचय हुआ। जो इच्छा शक्ति, क्रिया शक्ति व ज्ञान शक्ति के प्रतीक हैं। अंतत: आज सुबह वह चूहा पकड़ा गया।नन्हा व सोनू आए थे कल रात डिनर पर, यहीं रुक गए, आज शाम वापस चले गए। घर में कितनी चहल-पहल हो गयी थी। छोटे भाई ने बताया, उसने सुना है; एक व्यक्ति ने, जो पिछले दस वर्षों से आत्माओं से बात करता रहा है, सुशांत राजपूत की आत्मा से सम्पर्क किया, जिसने कहा, अपनी इच्छा से बदलाव के लिए उसने यह कदम उठाया है। इसका अर्थ हुआ पुलिस की सारी तहक़ीक़ात व्यर्थ जाने वाली है।  


वे रात्रि भ्रमण के लिए गए तो हवा ठंडी थी। आकाश में आधा चाँद सुशोभित हो रहा था। लगभग एक महीने बाद वालीबाल कोर्ट फिर से खुल गया है। दोपहर को कंचन के वृक्ष की छँटाई करवायी। नैनी की लगायी कुम्हड़े की बेल हटानी पड़ी है, पीछे काफ़ी फैल गयी थी, जिससे दूसरे विला से शिकायत आ गयी थी। शाम को यहाँ आने के बाद पहली बार इंद्रधनुष दिखाई दिया। गुरूजी ने आज पीठ के दर्द के लिए ध्यान कराया, जून ने भी किया, उनके पीठ दर्द में लाभ भी हुआ।कोरोना के इस अनिश्चित वातावरण में उनका दिन में दो बार ध्यान कराना लाखों लोगों के लिये वरदान बन गया है। संत ज्ञानेश्वर पर आधारित एक फ़िल्म का कुछ भाग देखा, कितनी अनोखी कहानी है उनके जीवन की। उनकी लिखी ज्ञानेश्वरी गीता भी अवश्य पढ़ेगी ऐसा निश्चय किया है। ‘ द हिंदू’ पुस्तक में अकबर के बारे में पढ़ा, उसने  भी कम अत्याचार नहीं किए थे। 


आज सुबह अख़बार के पहले पन्ने पर नयी शिक्षा नीति के बारे में समाचार देखे। कई सार्थक बदलाव किया हैं मोदी सरकार ने, पर स्कूल खुलें तब तो यह लागू  हो। कोरोना के भय से स्कूल बंद हैं और अगस्त के अंत तक बंद रहेंगे अथवा तो उसके भी बाद तक। कई दिनों बाद रात को गेहूँ की रोटी खायी, आलू-गोभी के सब्ज़ी के साथ। शाम को गुरूजी का कराया ध्यान, ‘क्रीएटिविटी’किया, उससे पूर्व प्रकृति के सौंदर्य को कैमरे में क़ैद किया। कल रात सुंदर स्वप्न देखे। एक में भगवान कृष्ण की सुंदर तस्वीरें देखीं, बड़ी, माध्यम और छोटी। एक तस्वीर को कोई प्राणी ले गया, बंदर या कुत्ता, याद नहीं है, और वह तस्वीर के सामने कृष्ण का नाम लेने लगा पूरे भक्तिभाव से।संत ज्ञानेश्वर ने भैंसे से मंत्र पाठ करवा दिया था, शायद उसी तरह का चमत्कार दिखाने के लिए यह स्वप्न आया।  सुबह तक मन कितना शांत था। परमात्मा की इस सुंदर सृष्टि में वही सब कुछ होकर बैठा है। 


Friday, July 29, 2022

पैशन फ़्रूट के पौधे


रात्रि भ्रमण के वक्त हवा के साथ हल्की फुहार बरस रही थी, चेहरे को उसका शीतल स्पर्श भला लग रहा था। आज एक बाल फ़िल्म देखी, “मैं कलाम हूँ" राजस्थान के एक गाँव में फ़िल्मायी गयी है। एक बालक के संघर्ष की कहानी, अब्दुल कलाम आज़ाद से प्रेरित होकर अपना नाम जिसने कलाम रख लिया था। आज उन्होंने शयन कक्ष के बाहर जो बरामदा है, उसमें दो बड़े गमलों में पैशन फ़्रूट के दो पौधे लगाए। उसकी बेल रेलिंग से होती हुई वर्टिकल गार्डेन के फ़्रेम में चढ़ जाएगी।एक पौधा नीचे भूमि में लगाना है। इसी सोसाइटी में रहने वाले दो व्यक्तियों ने ये पौधे उन्हें दिए हैं। आज आम के बगीचे में ‘एटूबी’ ने फ़ूड स्टाल लगाया था, पर कोरोना के कारण कम लोग गए होंगे। कल पूरी दुनिया में ढाई लाख से अधिक कोरोना के केस मिले। बड़ा भांजा व उसके चचेरा भाई कल अपने-अपने घर जा रहे हैं। चार महीनों से वे अनेक युवाओं की तरह घर से ही काम कर रहे थे, आगे भी लगभग चार महीने तो और घर पर रहना होगा। इस आपदा ने यह तो अच्छा किया है कि बिछुड़े हुए परिवारों को मिला दिया है। आज सुबह अच्छी नींद लाने के उपायों पर चर्चा सुनी। कुछ उपाय उन्होंने अपनाए भी हैं। कमरे में पूर्ण अंधकार होना चाहिए। सोने से दो घंटे पूर्व ही  पानी पी लें व भोजन कर लें। टीवी या मोबाइल एक घंटा पहले से न देखें। सोने से पूर्व स्नान करें या पैरों को धो लें। तलवों की मालिश करें। कोई पुस्तक पढ़ें या भ्रामरी प्राणायाम कर लें। योग निद्रा भी कर सकते हैं। जून ने अगले हफ़्ते तीन दिनों के आर्त ऑफ़ लिविंग के एक कोर्स के लिए ऑन लाइन फ़ॉर्म भर दिया है। गुरूजी कार्तिकेय भगवान पर बोलेंगे व ध्यान भी कराएँगे। वह कहते हैं मानव जीवन का सबसे बड़ा उपहार है ध्यान ! सुबह छोटे भाई से बात हुई, वह बहुत खुश है, परमात्मा से जिसकी लगन लग जाए वह सदा ही प्रसन्न है। 


कल की तरह आज वर्षा नहीं हुई, बादल बने और बिखर गए।  आज सूर्योदय व सूर्यास्त दोनों बादलों के अनूठे रंगों के कारण अति सुंदर थे। नींद के लिए कल जो उपाय किए थे, काम आए।कल से कर्नाटक में लॉक डाउन खुल रहा है। आज विष्णु पुराण में दिखाया गया कि रावण ने सत्ता के लिए अपनी बहन के पति को भी मार दिया था। कैसी मनोवृत्ति है रावण की, पता नहीं लोग उसे क्यों विद्वान कहते हैं; कभी रहा भी होगा तो उसने अपने ज्ञान का उपयोग तो नहीं किया। एक जापानी एनिमेशन फ़िल्म ‘इन दिस पार्ट ऑफ़ द वर्ल्ड’ का कुछ भाग देखा, द्वितीय विश्वयुद्ध की कहानी है। नायिका चित्रकला में निपुण है और विवाह के बाद ससुराल में घुलमिल जाती है। असम में जिस तेल कुँए में आग लगी थी, अभी तक बुझ नहीं पायी है। तीन विदेशी विशेषज्ञ बुझाते हुए थोड़ा सा जल भी गये। 


आज शाम को टहलते समय उन्हीं वृद्ध व्यक्ति से पुनः मुलाक़ात हुई, बगीचे में बैठे थे, कह रहे थे, उन्हें कोई चिंता नहीं है। उनका ड्राइवर चिंतित लग रहा था।उसका परिवार बिहार में है, यहाँ अकेला रहता है। वृद्ध ने बताया, दिल्ली में उनके यहाँ गुरू जी आए थे, मोहल्ले के पाँच सौ लोग पंक्ति बनकर खड़े हो गए थे, उनके दर्शन के लिए। रात के ग्यारह बज गये, खाना कब खाते। उनके पुत्र आर्ट ऑफ़ लिविंग के पूर्ण कालिक शिक्षक हैं। 


Tuesday, July 19, 2022

जापानी फिल्म -‘माई नेबर टोटोरो’,

 
आज शाम सोसइटी के अड्डा एप पर नोटिस आया कि पास वाले गाँव में  में भी कोरोना का एक मरीज़ मिला, जिसकी मृत्यु के बाद पता चला उसे यह रोग था। पंचायत ने वह इलाक़ा बंद कर दिया है, पिछला गेट भी बंद हो गया है, कल से नैनी का आना भी बंद हो जाएगा, सुबह का टहलना भी सीमित दायरे में होगा। बड़े ननदोई कल कोविड टेस्ट कराएँगे, उन्हें कई दिन से बुख़ार था। आइसोलेशन में ठीक हो जाने का इंतज़ार कर रहे थे। नन्हे से बात हुई, उसने कहा किसी भी वैक्सीन को आने में कई वर्षों का समय लगता है। कोविड की वैक्सीन जल्दी भी आयी तो एक-डेढ़ वर्ष का समय तो लगेगा। आज सुबह टहलने गये तो चाँद बादलों के पीछे से झांक रहा था। रात को हुई बारिश से सड़कें धुली-धुली थीं, पेड़-पौधे और वृक्ष भीगे हुए, हवा ठंडी थी. दूर पहाड़ियों पर रुकी हुई बदलियां एक मोहक दृश्य उत्पन्न कर रही थीं. सूर्योदय कई दिनों से नहीं दिखा। छोटी बहन के सुझाव पर दोपहर को एक अच्छी सी जापानी फ़िल्म देखी, ‘माई नेबर टोटोरो’, बहुत सुंदर है।जापानी लोग आत्माओं के अस्तित्त्व में बहुत यक़ीन रखते हैं। जादू-टोना, भूत-प्रेत और नदी, जंगल की आत्मा में भी। शाम को वर्षा हो रही थी सो टहलने नहीं  जा पाए।नन्हे  के लिए जन्मदिन की कविता लिखी। अभी कुछ देर पूर्व रात्रि भ्रमण से घर लौटे ही थे कि बूँदें बरसने लगीं। शाम को अनुपम खेर के साथ गुरूजी की बातचीत सुनी। बादलों की तस्वीरें उतारीं। 

कल नन्हे का जन्मदिन था, शाम को छह बजे के बाद वे लोग आ गए। दोपहर को बना मलाई कोफ्ता व मिठाई लाए थे, शाही टुकड़ा व हलवा भी जो उनकी मित्र ने भेजा था। आज यहीं से काम किया। अगले हफ़्ते फिर से लॉक डाउन लगने वाला है। यहाँ नापा में भी एक मरीज़ मिला है। सुबह टहलने गये तो आसमान में तारे थे तथा अष्टमी का चाँद चमक रहा था। ‘विष्णु पुराण’ में देखा, राजा दशरथ, कैकय के राजा की सहायता करने जाते हैं, जब रावण उन पर आक्रमण कर देता है। कैकेयी इस युद्ध में राजा की सारथी बनती है। कहते हैं रावण सीता के स्वयंवर में भी आया था। राजस्थान में सचिन पायलट ने विद्रोह कर दिया है, उन्हें मुख्यमंत्री बनाना चाहिए था पर एक वरिष्ठ नेता को बना दिया गया था। 


आज बहुत दिनों बाद दिन भर में एक बार भी वर्षा नहीं हुई। दोपहर को गुरूजी ने ‘ऊर्जा स्तम्भ’ का ध्यान कराया, अंत में अग्नि जलती हुई दिखाई दी। बहुत दिनों बाद ब्रह्म सूत्र पर एक प्रवचन सुना, कितना स्पष्ट और सरल तरीक़ा है वक्ता का वेदांत समझाने का। ‘श्री कृष्णा’ में एक अद्भुत कथा सुनी, बलराम का विवाह रेवती से होना है, जिसका जन्म सतयुग में हुआ था, उसके पिता ब्रह्मलोक में गए तो ब्रह्मा जी ने कहा, पृथ्वी पर अब द्वापर युग का अंत है, बलराम से अपनी पुत्री का विवाह कर दीजिए। जब वे दोनों धरती पर आते हैं तो उनके शरीर अति विशाल हैं, सतयुग में आदमी बड़े क़द के होते थे। बलराम उन्हें अपने हल के सिरे से दबाते हैं और वह छोटी हो जाती हैं। संग्रहालय में  राणा प्रताप आदि के वस्त्र भी देखते हैं तो कितने विशाल नज़र आते हैं, लोगों के क़द अब घट गये हैं। 


आज लॉक डाउन का पहला दिन है। नन्हे ने बताया, मेड व कुक दोनों नहीं आए, योग कक्षा भी ऑन लाइन होगी । शाम को एक मलयालम फ़िल्म देखनी शुरू की, ‘सुजातयम सूफ़ियम’ ऐसा ही कुछ नाम है। केरल के सुंदर दृश्य हैं उसमें। सूफ़ी कल्चर का भी पता चला। फिल्म की भाषा नहीं समझ पाए पर अभिनय इतना सशक्त था कि सब समझ में आ गया. नायिका मूक है पर उसके पैरों में नृत्य समाया है, उसके हाथों में भी मुद्राएं सहज ही बनती हैं. 


Wednesday, May 18, 2022

एलिमेंट्स


 इस सोसाइटी से सटे गाँव में कोरोना के एक दो केस मिले हैं, सो उधर का रास्ता बंद कर दिया गया है. यहाँ भी कोरोना का पहला केस मिला है आज. देश में कोरोना संक्रमित की संख्या पचास हजार हो गयी है और विश्व में एक करोड़. आज का रविवार विशेष है ! आज योग दिवस, पितृ दिवस, संगीत दिवस, सेल्फी दिवस के साथ-साथ सूर्य ग्रहण भी लगा और वर्ष का बड़ा दिवस भी है आज.  सुबह जब टहलने गए तो आकाश में बादलों के पीछे से तारागण झाँक रहे थे. वापस आकर ‘सूर्य नमस्कार’ किया, जून ने वीडियो बनाया. दक्षिण भारतीय नाश्ता जब तक तैयार हुआ, बच्चे भी आ गये.  टीवी पर सूर्य ग्रहण के सुंदर चित्र देखे फिर  भारत व चीन की हाल की टकराहट पर एक वीडियो देखा. विशेष तौर पर जून के लिए नन्हे ने पालक की सब्जी बनायीं, कॉर्न व फूलगोभी के साथ, सोनू ओट्स व क्रेनबेरी की कुकीज़ बनाकर लायी थी.  शाम को वे चले गए. नैनी आयी तो उसके हाथ में चोट लगी थी, कहने लगी, सब्जी काटने में लग गयी, पर चोट देखकर ऐसा लगता नहीं था. हाथ सूज गया था, पता नहीं उसने इंजेक्शन भी लगवाया था या नहीं. उससे बिना पानी वाले काम ही करवाये. 

आज सुबह पतंजलि योग सूत्र पर गुरूजी का व्याख्यान सुना, बाद में ओशो का भी. इन सूत्रों में मन को कितनी अच्छी तरह समझाया गया है. रात तेज वर्षा हुई, एक बार नींद खुल गयी.याद आया. उस दिन स्वप्न में शालिग्राम पत्थर को हवा में उठते देखा था. उसी क्षण मन में विचार आया था, वे जीवित हैं ! परमात्मा हजार-हजार रूपों में अपने को प्रकट करता है, देखने वाली नजर चाहिए. कल बहुत दिनों बाद सहभोज होगा, कोरोना काल में यह विशेष घटना ही कही जाएगी, लन्च पर नंन्हे के कुछ मित्र भी आ रहे हैं, उसने कहा है वह अपने साथ कुक को भी ले आएगा. 


मौसम विभाग ने कल किसी तूफान की चेतावनी दी है. बाहर तेज हवा बह रही है. सुबह टहलने गए तो हल्की झींसी पड़ रही थी. कल एक पेड़ के नीचे गुड़हल की कलियाँ टूट कर गिरीं हुईं मिली थीं, उन्हें पानी में डाला कर रखा तो आज खिल गयीं. मंझली भाभी का जन्मदिन है आज, उनकी फरमाइश पर तुरन्त ताज़ी कविता लिखकर भेजी। आज एक हास्य फिल्म देखी, कोरोना के भय से बचने के लिए यह अच्छा उपाय है. परसों गुरू पूर्णिमा है, गुरूजी उसके बारे में एक कहानी सुना रहे हैं. गुरू जब जीवन में आते हैं तो सारे प्रश्न खो जाते हैं. कुछ चाहना या त्यागना मन से होता है, आंकना या निर्णय लेना बुद्धि से व ग्रहण करना या पकड़ना अहंकार से ! जब मन, बुद्धि और अहंकार के पीछे जा जाकर जब कोई थक जाता है तब स्वयं का ज्ञान होता है. जीवन में कृतज्ञता के क्षण भी आते हैं और शिकायत के भी, पर गुरू के पास आते ही ये सब गिर जाते हैं. गुरु एक अन्य ही आयाम से  परिचय करवाते हैं. 


Thursday, May 12, 2022

द लॉयन किंग

 

आज शाम को वे सोसाइटी के मुख्य द्वार की तरफ़ टहलने गए, जून जब तक बाहर से सब्ज़ी ख़रीद कर लाते, उसने फूलों की तस्वीरें उतारीं। घर पहुँचने के पाँच मिनट बाद ही मूसलाधार वर्षा आरंभ हो गयी, जाने कैसे कुदरत उन्हें हर बार सुरक्षित रखती आयी है। बालकनी में शीशे की छत के नीचे बैठ कर बारिश का एक वीडियो बनाया। आज स्वामी योगानंद जी पर एक डाक्यूमेंट्री फ़िल्म देखी। वर्षों पूर्व जब पहली बार उनकी पुस्तक पढ़ी थी तो मन प्राण एक अनोखे आनंद से भर गये थे। हफ़्तों तक उस पुस्तक का असर बना रहा था। आजकल सुबह-सुबह अनोखे स्वप्न आते हैं, एक दिन पहले एक साथ अनेक सुंदर चौपाये दिखे, फिर कीट और फिर विष्णु की सुंदर मूर्ति. एक दिन एक सुंदर महिला का चेहरा दिखा था, बिलुकल सजीव ! एक अन्य स्वप्न में वह किसी को बाबा कहकर संबोधित कर रही है. छोटे भाई से बात हुई, जो ओशो का साहित्य पढ़ता है. उसे नए-नए आनंददायक अनुभव होते हैं, वह बहुत खुश लग रहा था; उसका मन पूरी तरह परमात्मा के रंग में रंग गया है. 


कल सुबह नौ बजे नन्हा व सोनू आ गये और दिन भर उनके साथ रहे।  एक अच्छी फ़िल्म देखी, एक एनिमेशन फिल्म ‘द लायन किंग’, जिसमें शाहरुख़ खान ने भी आवाज दी है, सिम्बा की यह कहानी दिल को छू जाती है. कुछ बोर्ड गेम भी खेले और शाम को दूर तक टहलने गये। आज बड़ी भांजी की बिटिया के जन्मदिन पर ज़ूम मीटिंग थी। परिवार के छोटे-बड़े सभी सदस्यों ने अपनी शुभकामनायें दीं, उसने जन्मदिन पर एक कविता भेजी थी जो बालिका के नाना जी ने पढ़ी. आश्रम से सत्संग भी आजकल जूम पर ही होता है, तकनीक का कितना अच्छा उपयोग हो रहा है इस विपद काल में. आजकल हरसिंगार के फूल अपनी अनुपम छवि बिखेर रहे हैं, सुबह-सुबह सलेटी सड़क पर बिछे हुए सफेद पुष्पों की उसने कई तस्वीरें खींचीं। समाचारों में सुना असम में एक तेल कुएं में आग लग गयी है, स्थानीय स्तर पर उसे बुझा नहीं पाए तो सिंगापुर से एक विशेष टीम आयी है. नन्हे ने बताया, उनकी सोसाइटी को कन्टेनमेंट जोन बनाया जा सकता है. भारत में कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है. एक अनुमान के अनुसार भविष्य में चालीस-पचास लाख लोग संक्रमित हो सकते हैं. भारत-चीन के मध्य सीमा पर हालात बिगड़ रहे हैं, देखा जाये तो इस समय सारी दुनिया में हालात काबू से बाहर होते जा रहे हैं. आज कुछ घर छोड़कर रहने वाले एक नब्बे वर्षीय बुजुर्ग से बात हुई, वह कॉमर्स मंत्रालय में एडिशनल सेक्रेटरी रह चुके हैं. उनकी स्मरण शक्ति बहुत अच्छी है. उनके पास यादों का जैसे एक खजाना है. 


इस बार भी इतवार के कारण बच्चे दिन भर साथ रहे. नन्हे ने ‘स्टार वार’ सीरीज  की एक फिल्म दिखाई. शंकर जी की बारात में जैसे भूत-पिचाश आते हैं, ऐसे अजीबोगरीब शक्लों वाले पात्र हैं इस फिल्म में. दोपहर को सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु का समाचार मिला था. आज भी दिन भर वही खबरें आती रहीं. अवसाद और तनाव के शिकार लोग कितने दुखी हैं भीतर. अभिनेताओं का जीवन कितना अकेलेपन से भरा होता है. मौसम आज बहुत अच्छा है, शीतल पवन बह रही है, न बादलों का शोर न ज्यादा गर्मी ही. विष्णु पुराण में प्रह्लाद की कहानी देखी, उसने कहा, स्वर्ग में देवता, धरती पर मानव व पाताल में असुर रहें और कोई किसी की सीमा में प्रवेश न करे और सब आनंद से रहें. एक और सुंदर बात सुनी, सुबह जब सत गुण बढ़ा हो, मानव देवता बनकर साधना करें, दोपहर को रजो गुण बढ़ने पर मानव बनकर काम करें और रात को तमस में असुर बनकर नींद में सो जाएँ. असुरों का सोना ही लाभकारी है. कल जून को श्री श्री की रिसर्च लैब में जाना है. स्लीप लैब पर वर्क शॉप है. जहाँ ईईजी का इंस्टालेशन भी होना है. 


कल जून ने बाबा की सातवीं बरसी पर निकट स्थित एक वृद्धाश्रम में कुछ सामान भिजवाया. शाम को नर्सरी से बारह पौधे भी लाये. उनकी स्मृति में लगाए इन पौधों को देखकर उनके स्मरण होता रहेगा. नैनी ने एक माली को बुलवाया है, जिसने बहुत ही कुशलता से पौधों को लगा दिया, वह बेला का एक पौधा भी लाया है, जिसे छोटे से लॉन में एक किनारे पर लगा दिया है. माली अच्छा है पर उसे पीने की आदत है, पता नहीं कितने दिन टिकेगा. टीवी पर आज विरोचन और सुंधवा की कहानी देखी जिसमें दोनों एक ही कन्या दीपावली के प्रति आकर्षित हैं. भगवान विष्णु और महादेवी को भी उनकी कथा में रस आ रहा है. प्रेम की नींव पर ही तो यह संसार खड़ा है. परसों इस वर्ष का पहला पूर्ण सूर्यग्रहण है, पिछले हफ्ते एओएल के एक स्वामी की एक वार्ता सुनकर सूर्य ग्रहण पर एक  लेख लिखा था, जो अमर उजाला में छपा है. सूर्य ग्रहण के कारण होने वाले प्रभावों का विस्तार से वर्णन है उसमें.                




Wednesday, May 4, 2022

रैटटौइल




आज ईद है, कल ब्लॉग में ईद पर एक कविता प्रकाशित की थी। जून आज एओएल सेंटर गये, सेंटर सामान्य जनता के लिए अक्तूबर से पहले नहीं खुलेगा। उन्होंने उसके जन्मदिन पर सफ़ाई कर्मचारियों को बाँटने के लिए फ़ूड पैकेट्स का ऑर्डर दे दिया है। कल शाम के आँधी-तूफ़ान के बाद आज भी यहाँ वर्षा हो रही है। असम की तरह यहाँ भी देखते-देखते बादल छा जाते हैं, और बूंदा बांदी शुरू हो जाती है। तापमान तीस डिग्री से कम ही रहता है, हवा बहती रहती है. दिल्ली व उत्तर भारत में गर्मी बहुत अधिक है। चुरूँ में तापमान पचास डिग्री पहुँच गया, कोरोना वायरस को इतनी गर्मी में समाप्त हो जाना चाहिए, पर वह अपने पैर पसारता ही जा रहा है। श्रमिकों की समस्या भी विकराल रूप ले रही है, वे सभी अपने गाँव-घर जाना चाहते हैं। आज अख़बार में पढ़ा कोरोना की वैक्सीन आने से भी ज्यादा लाभ होने वाला नहीं है, इसका खतरा किसी न किसी रूप में बना ही रहेगा. वैसे अब सुबह शाम पार्कों में लोग मास्क लगाकर टहलते हुए मिलने लगे हैं. सुबह आम के बगीचे से ढेर सारे गिरे हुए आम मिले। जून ने आम की मीठी चटनी बनायी है। अगले हफ़्ते वे गोंद के लड्डू भी बनाने वाले हैं। अगले महीने की पहली तारीख़ से गुरूजी का ‘नारद भक्ति सूत्र’ पर व्याख्यान आरंभ हो रहा है। जीवन की नींव कितने वर्षों पहले रख दी जाती है और बाद में उस पर इमारत बनती है। वर्षों पूर्व उसने डायरी में लिखा था, मन की गहराई में अथाह, असीम प्रेम है ! भक्ति सूत्रों में गुरूजी उसी का वर्णन करने वाले हैं। आज का दिन बहुत ख़ास रहा, सुबह वे टहलने गए तो मोबाइल हाथ में था, सूर्योदय से पूर्व आकाश गुलाबी हो गया था, आकाश पर बादलों में अनोखे रंग बिखर रहे थे, सुंदर तस्वीरें उतारीं। यहाँ स्थिर छोटे से मंदिर गये, प्रसाद के लिए लड्डू थे, मंदिर से बाहर निकलते ही एक वृद्ध महिला दिखीं, जो प्रसाद पाकर अति प्रसन्न हुईं। परमात्मा ही मानो उन्हें उस क्षण उन्हें वहाँ ले आया था। नौ बजे तक नन्हा व सोनू भी आ गये। ज़ूम पर सभी परिवार जनों से बात हुई, दीदी व अन्य सभी ने जन्मदिन पर शुभकामनाएँ दीं। दोपहर को ‘रैटटौइल’ फ़िल्म देखी, जिसमें एक चूहा अपने शेफ़ बनने के सपने को पूरा करता है, बहुत ही अनोखी और मज़ेदार फ़िल्म है यह। शाम को सोनू ने केक को सजाकर प्रस्तुत किया। आज एओएल के दिनेश गोखले द्वारा बनाया गया ‘नारद भक्ति सूत्र’ का परिचयात्मक वीडियो देखा। अगले पंद्रह दिन अवश्य ही काफ़ी भरे-पूरे होंगे, परमात्मा की भक्ति से भरपूर ! आज दोपहर वाली नैनी काम पर नहीं आयी, हर हफ़्ते वह किसी न किसी बहाने से छुट्टी ले लेती है। सुबह वाली ऐसा नहीं करती, आज उसके बेटे का फ़ोन आ गया, दोनों बहुत खुश थे। रात्रि के साढ़े आठ बजे हैं, अभी-अभी फ़ेसबुक पर देखा, दीदी अपने जन्मदिन का केक काट रही हैं, जिसके मध्य से एक रोशनी निकल रही है। उन्होंने गुलाबी साड़ी पहनी है और चेहरे पर सदा की तरह ख़ुशी झलक रही है। सुबह ज़ूम पर सबके साथ उनसे बात हुई थी। दोपहर को भक्ति सूत्रों पर गुरूजी की सुंदर व्याख्या सुनी. विष्णु पुराण में विष्णु को महादेवी को समझाते हुए सुनना बहुत अच्छा लगता है। वह किसी भी बात से प्रभावित नहीं होते। हिरण्यकश्यपु उन्हें अपना शत्रु मानता है पर वह जानते हैं कि वह उनका द्वारपाल है. श्रीकृष्णा में अक्रूर जी को कृष्ण के भगवान होने का प्रमाण मिलने वाला प्रसंग दर्शनीय होगा. अमेरिका में एक अश्वेत के प्रति पुलिस की बर्बरता के खिलाफ हिंसा बढ़ती जा रही है. श्वेत भी इसका विरोध कर रहे हैं, पर इसके लिए वे गाड़ियों में आग क्यों लगते हैं, यह समझ से बाहर है. केरल में एक हथिनी की दर्दनाक मृत्यु की खबर सुनी, लोग कितने हृदयहीन हो सकते हैं. कल एक और तूफान निसर्ग महाराष्ट्र में आया पर ज्यादा नुकसान नहीं हुआ इसके कारण. यहाँ का मौसम अवश्य बादलों भरा हो गया है.

Tuesday, April 26, 2022

मत्स्यावतार की कथा



वही कल का समय है, रातों को बादल बरसते हैं कुछ देर के लिए और सुबह से दोपहर तक बदली बनी रहती है। उड़ीसा, पश्चिम बंगाल और बांग्ला देश में तूफ़ान ‘अंफन’ प्रवेश कर चुका है, कितनी हानि या तबाही हुई इसका पता तो कल ही चलेगा। ट्रंप ने चीन को कोरोना के लिए फिर ज़िम्मेदार ठहराया है, विश्व स्वास्थ्य संगठन को भी उनके क्रोध का शिकार होना पड़ रहा है।  सारी दुनिया में करोड़ों लोग इस वायरस से प्रभावित हुए हैं, उनके रोज़गार छूटे हैं, घर छूटे हैं, प्रियजन भी छूटे हैं। इस महामारी का असर आने वाले कई वर्षों तक मानव को भोगना पड़ेगा।छोटी बहन से बात हुई, उसे यूएइ में कोरोना मरीज़ों की देखभाल करनी पड़ रही है, मरीज़ों की संख्या वहाँ भी बढ़ रही है। कहने लगी, यदि आइसीयू,में मरीज़ बढ़ गए तो उनके पास साधन नहीं हैं। आज ‘हिंदू’ पुस्तक को आगे पढ़ा, लेखिका विदेशी हैं पर संस्कृत का गहन अध्ययन उन्होंने किया है।उसमें सिंधु घाटी की सभ्यता की कहानी आरम्भ हो गयी है। पुस्तक के अनुसार बहुत महान थी वह सभ्यता जिसमें अन्य सभ्यताओं के साथ व्यापार होता था। इस सभ्यता का अंत कैसे हुआ और आर्य भारत में कहाँ से आए, यह रहस्य अभी तक सुलझा नहीं है । वेदों की रचना कब हुई, किसने की, यह भी ज्ञात नहीं है। सृष्टि रहस्यों से भरी है, वे थोड़े  वक्तों के लिए ही यहाँ आते हैं फिर कहाँ चले जाते हैं, कोई नहीं जानता। उस लोक और इस लोक में कोई एक साथ रह सके तभी वह बता सकता है पर यह राज है कि राज ही बना रहता है। कुछ लोग अपने समय व ऊर्जा का कितना अच्छा उपयोग कर लेते हैं। भगवान ने सभी को बुद्धि नामक यंत्र दिया है पर वे उसका उपयोग करना ही नहीं जानते। गुरूजी को कितनी सिद्धियाँ प्राप्त हैं पर वे कितने सरल और भोले बने रहते हैं, वह दुनिया में करोड़ों लोगों के दिलों में ज्ञान का प्रकाश फैला चुके हैं। आज एक पुरानी सखी से बीस मिनट बात की फ़ोन पर, पूरे अठारह मिनट वह बोलती रही, वह आर्ट ऑफ़ लिविंग के ऑन लाइन कोर्सेस भी कर रही है। जून ने शनिवार से एच आर के लिए होने वाले कोर्स के लिए एक घंटे के ऑन लाइन वर्कशॉप में भाग लिया। दोपहर को उन्होंने ‘पिंजर’ फ़िल्म देखी, अमृता प्रीतम की कहानी पर बनी यह फ़िल्म बहुत मार्मिक है। आज मंझली भाभी ने वहाट्सेप पर एक गीत गाया। कोरोना से लोगों की छिपी हुई प्रतिभाएँ बाहर निकल रही हैं। 


आज नापा की तरफ़ से सब घरों में बगीचे से तोड़े गए आम वितरित किए गए, अभी कच्चे हैं, कुछ दिनों में पक जाएँगे। कितनी ही  बार सुबह टहल कर लौटते समय चटनी आदि के लिए अमराई से आम मिलते रहे हैं, एक रात तेज हवा चली थी तो सुबह ढेर सारे आम गिरे हुए मिले। विष्णु पुराण में आज मत्स्यावतार की कथा आरंभ हुई है, कितनी अद्भुत कथा है यह भी। प्रलय का दृश्य देखा, जिसमें मनु सप्तर्षियों को लेकर नौका में बैठते हैं। ‘श्री कृष्णा’ में कृष्ण के माटी खाने के प्रसंग आया, यशोदा का आश्चर्य देखने लायक़ था पर कुछ ही देर में वह सब भूल गयीं। परमात्मा के द्वारा सबके जीवन में न जाने कितनी बार चमत्कार हुए हैं, होते रहते हैं, पर मानव की स्मरण शक्ति बहुत कम है, बड़ी से बड़ी कृपा भी वह कुछ दिनों में भुला देता है और फिर से ईश्वर के द्वार पर ख़ाली झोली लेकर खड़ा हो जाता है। उपनिषद गंगा में आश्रम व वर्ण व्यवस्था पर चाणक्य की सुंदर व्याख्या सुनी। नैनी ने आज कहा, उसके बेटे को ओप्पो का फ़ोन चाहिए, ताकि वह दफ़्तर का काम कर सके।उसने सोचा, कल नन्हा आ रहा है वही ऑन लाइन मँगा  देगा। वैसे कल इतवार को कर्नाटक सरकार ने पूर्ण  लॉक डाउन घोषित कर दिया है, उनका आना शायद संभव नहीं होगा। 


Thursday, April 21, 2022

ध्रुव के प्रश्न


आज दोपहर पूरे दो महीने और तीन दिनों के बाद नन्हा और सोनू घर आए, अभी कुछ देर पहले  वापस गए हैं। शाम को वे उन्हें पार्क में ले गये पर वर्षा होने लगी, जल्दी ही लौटना पड़ा। नन्हे  ने एक बात कही कि उन्हें किसी के साथ घटी किसी भी घटना के लिए किसी के प्रति निर्णायक नहीं बनना चाहिए। उसे लगा, बच्चे उनसे कितने आगे होते हैं बौद्धिक रूप से, कार्य-कारण सिद्धांत के ऊपर उन्हें जाना है, चीजें अपने आप होती हैं, जब होनी होती हैं, हर घटना के पीछे क्यों ?ढूँढने जाने की ज़रूरत नहीं है। जीवन में जो भी घटता है उसके पीछे कोई न कोई कारण होता है, पर कौन सा कारण किस घटना कि पीछे है, कौन बता सकता है ? वैसे भी उन्हें व्यक्तियों के बारे में कोई राय बनाने का क्या अधिकार है, जो जैसा है वैसा है ! आर्ट  ऑफ़ लिविंग का पहला ज्ञान सूत्र भी तो यही है, ‘लोगों को जैसे वे हैं वैसे ही स्वीकारें’ उन्हें किसी व्यक्ति के बारे में कुछ भी कहने से पूर्व दस बार सोचना चाहिए। किसी की निंदा करना तो ग़लत है ही किसी के निर्णायक बनना और भी ग़लत है। अनजाने में ही वे अपने संस्कार वश ऐसा करते हैं और अपनी ऊर्जा भी गँवाते हैं। बाहर तेज हवा के साथ वर्षा हो रही है, बच्चे अब तक घर पहुँच गए होंगे। 


एक विशिष्ट महिला ब्लॉगर ने अपने स्पष्ट और सरल शब्दों में कोरोना वायरस के ख़तरे को लेकर भारतवासियों द्वारा लापरवाही भरा रवैया अपनाने पर एक ध्वनि संदेश में खेद व्यक्त किया है। उनकी वाणी में शिकायत भी है और सलाह भी, ख़तरा बढ़ गया है पर लोग बड़े आराम से सड़कों पर निकल रहे हैं जैसे लॉक डाउन हटते ही सब सामान्य हो गया  हो। आज सुबह बाहर वर्षा का भ्रम  हुआ पर आवाज़ बिजली की तारों से आ रही थी। हवा ठंडी थी, कहीं कहीं सड़कें भीगी थीं। सूर्योदय या सूर्यास्त आज दोनों नहीं दिखे, भ्रमण के दोनों समय उन्हें देखना व चित्र लेना उसका प्रिय काम होता है। आज चक्रों के बार में व्याख्यान सुना। विशुद्धि चक्र से ऊपर अद्वैत की यात्रा आरम्भ हो जाती है। आज्ञा चक्र पर असीम स्वरूप का अनुभव होता है पर अंतिम चक्र पर जब ‘स्वयं’ भी मिट जाता है तब परमात्मा की प्राप्ति होती है। अहंकार मिट गया पर अस्मिता अभी शेष है, उसे भी जाना होगा। समाचारों में सुना उड़ीसा में एक तूफ़ान आने वाला है। 


रात्रि के साढ़े आठ बजे हैं। सोने से पूर्व का अंतिम कार्य है दिन भर का लेखा-जोखा लिखना, बरसों पुरानी आदत है सो डायरी और कलम जैसे अपने आप ही हाथ में आ जाते हैं। कर्नाटक में लॉक डाउन हटा लिया गया है पर शाम सात बजे से सुबह सात बजे तक आवागमन रुका रहेगा। एक ही दिन में आज डेढ़ सौ संक्रमित व्यक्ति मिले हैं। आज विष्णु पुराण में दिखाया गया कि ध्रुव को भगवान के दर्शन हो गए। छह वर्ष की आयु में इतना बड़ा संकल्प ! वह विष्णु भगवान से पूछता है, जीवन क्या है ? संसार क्या है ? परिवार क्या है ? आदि आदि। भगवान कहते हैं, जीवन एक वरदान है, एक उपहार, एक सौभाग्य भी ! संसार परमात्मा का साकार रूप है ! परिवार में वे लोग आते हैं जिनके प्रति हमारा मन आत्मीयता महसूस करे।  इस तरह तो सारा संसार  ही  उनका परिवार है।कम से कम एक भक्त के लिए तो ऐसा ही होना चाहिए।  जून को एओएल से नया काम मिला है, कल उनकी मीटिंग है।    


Tuesday, April 12, 2022

सपनों की दुनिया

आज देश के नाम प्रधानमंत्री का सम्बोधन था, कहा, चौथा लॉक डाउन होगा पर नए नियमों के साथ। उन्होंने देश को आत्म निर्भर बनाने की बात भी कही। सुबह उठी तो भीतर मौन था, एक शांति भरा मौन ! गुरूजी के लिए दोपहर को एक कविता लिखी, कल उनका जन्मदिन है, एओएल के हिंदी विभाग में काम करने वाले एक साधक ने उसे सजा दिया है। उसे भविष्य में अन्य कविताएँ भी भेजेगी। चाहे तो फ़ेसबुक पर एक पेज बना सकती है, जहाँ उनके लिए लिखी कविताएँ पोस्ट कर सके। जून छोटी भांजी के लिए लिखी कविता को सुंदर बना रहे हैं, जो अपना जन्मदिन गुरूजी के जन्मदिन के साथ साझा करती है। आज महाभारत में दुर्योधन भी मारा गया। अश्वत्थामा की मणि छिन गयी और उसे उसी पीड़ा के साथ अमर रहने का शाप मिल गया, इतना कठोर दंड ! 


शाम को टहलने गए तो मास्क लगाया था, जून को कठिनाई होती है; पर अभी कोरोना का डर गया नहीं है, न ही कोई दवा आयी है इसके इलाज के लिए। आज काव्यालय के संस्थापक कवि का मेल आया, उनकी एक पुस्तक आयी है, उनकी कविताओं को पढ़कर वह कुछ पंक्तियाँ उन्हें नियमित भेज रही है, उन्हें अच्छा लगा। वाक़ई उनकी हर कविता में एक नया अन्दाज़ है। आज शाम से पूर्व उन्होंने आधा घंटा योग व पुस्तकालय कक्ष में बैठकर पढ़ने के लिए और रात्रि में सोने से पूर्व कुछ समय बालकनी में  बैठने के लिए निकाला है , ताकि उनके घर का हर कोना आबाद रहे। कहीं सुना था कि घर के वे कोने जहाँ कोई नहीं जाता, नकारात्मक ऊर्जा से भर जाते हैं। आज सुबह नींद खुली उससे पूर्व एक स्वप्न में मृणाल ज्योति में खुद को पाया, उसका फ़ोन कहीं छूट गया है, जून से कहा फ़ोन करें, तब विचार आया यह स्वप्न है और नींद खुल गयी। दो दिन पहले एक विचित्र स्वप्न देखा था, जिसमें बहुत सारे हाथी हैं, जीवित भी और चारों तरफ़ आलमारी में उनके छोटे-बड़े चित्र भी। एक हाथी उसे कुचलने के लिए बढ़ता है पर ज़रा भी भय नहीं लग रहा, वह उसके पैरों के नीचे है पर कोई दर्द नहीं हो रहा फिर एक बच्चे के साथ उड़ जाती है, उड़ते समय देह में नहीं है पर साथ में जो बच्चा है उसका गोरा चेहरा और काले बाल स्पष्ट दिखे।


सुबह उपनिषद गंगा में ‘सत्यकाम’ की कहानी देखी, शाम को विष्णु पुराण में ‘ध्रुव’ की। दोपहर को जून ने ‘रजनीगंधा; लगायी यू ट्यूब पर, अमोल पालेकर की फ़िल्म। शिव सूत्र सुना, पढ़ा भी। शाम से मन की समता हटी नहीं है, पहले जून की थोड़ी सी नाराज़गी से मन कैसा व्याकुल हो जाता था, अब वह पुरानी बात हो गयी है। हर कोई अपने सुख-दुःख का निर्माता है, यदि वे नहीं चाहते कि दुखी हों तो संसार की कोई भी बात उन्हें दुखी नहीं कर सकती और यदि उन्होंने तय ही कर लिया है कि उन्हें दुखी रहना है तो छोटी से बात को भी कारण बना सकते हैं। मई आधा बीत गया है, कोरोना संकट कम नहीं हो रहा है। 


रात्रि के साढ़े आठ बजे हैं, वह सिट आउट में बैठकर लिख रही है। हवा बंद है, कुछ देर पूर्व हल्की बूँदा-बाँदी हुई पर गर्मी कम नहीं हुई। कुछ देर पूर्व रात्रि भोजन के बाद वह टहलने गये तो एक घर से गुरूजी की आवाज़ में निर्देशित ध्यान की आवाज़ आ रही थी; कदम वहीं थम गए। एक घर से बाँसुरी की आवाज़ रोज़ आती है, कोई रात को अभ्यास करता है । सभी लोग घर में हैं तो ध्यान, संगीत आदि में समय बिता रहे हैं; इतना तो शुभ हुआ है लॉक डाउन के कारण। कल रात उसने जून से कहा, उसकी बातों को गंभीरता से न लें, आगे आने वाले सोलह वर्षों में ( उसे लगता है इतना ही जीवन शेष है) उसकी किसी भी बात को उन्हें सत्य मानने की ज़रूरत नहीं है, क्यंकि सत्य क्या है यह जिसको पता चल जाता है उसके लिए शेष सब असत्य हो जाता है। ‘ब्रह्म सत्यं जगत मिथ्या’ उक्ति तब हक़ीक़त नज़र आती है।  


Wednesday, April 6, 2022

उपनिषद गंगा


लॉक डाउन का तीसरा दौर  प्रारम्भ हो गया है। अब संक्रमण की दर बढ़ गयी है, भारत में अड़तालीस हज़ार व्यक्ति संक्रमित हो चुके हैं। अमेरिका में यह संख्या भारत से कहीं ज़्यादा है। रात्रि के सवा नौ बजे हैं, नन्हे से बात हुई, खाना बनाने की आज उसकी बारी थी, कह रहा था अभी वे लोग मेड व कुक को नहीं बुलाएँगे। खुद काम करने की आदत हो गयी है। घर भी साफ़ रहता है। अच्छा है, अपन हाथ, जगन्नाथ ! सुबह टहलते समय कुछ सुंदर जंगली गुलाबी पुष्प देखे थे, शाम को देखने गए तो वे सो गए थे, फूलों में इतना संज्ञान होता है, प्रकाश का स्पर्श उन्हें जगाता और सुलाता है। आज महाभारत में देखा भीष्म पितामह तीरों की शैया पर हैं, द्रोणाचार्य उनके पास आकर कहते हैं, वह उनसे पहले जाएँगे, कैसे महावीर थे वे लोग, मृत्यु का ज़रा भी भय नहीं था उन्हें ! जून को आर्ट ऑफ़ लिविंग के अनुसंधान विभाग में सेवा का कुछ काम मिल गया है। 


आज बुद्ध पूर्णिमा है, उनके वचन पढ़े, उनके उपदेशों पर आधारित दो आलेख भी लिखे। कल भागवद में कपिल मुनि द्वारा अपनी माँ देवहूति को दिये गये सांख्य शास्त्र के ज्ञान के बारे में पढ़ा था। सुबह गहरे ध्यान का अनुभव हुआ। दोपहर को वाणी का दोष हुआ तो कितनी शीघ्रता से जगाया किसी ने भीतर से। सुबह उठने से पूर्व कोई वाणी भीतर से कह रही थी, तुम वही हो ! ज्ञान उन्हें मुक्त करता है और गुरू भी ज्ञान स्वरूप है। आज नैनी काम पर नहीं आयी, उसने पूर्णिमा का उपवास रखा है ! कल असम से उसकी पुरानी नैनी का फ़ोन आया था। उनके योग ग्रुप की एक महिला का फ़ोन भी आया, जिन्हें कोर्स करने के लिए उसने बहुत बार कहा था आख़िर उन्होंने ऑर्ट ऑफ़ लिविंग  का बेसिक कोर्स ऑन लाइन किया, बहुत खुश थीं। 


आज सुबह टहलने गए तो रात की वर्षा के बाद सड़कें भीगीं थीं। मधु मालती की एक बेल और कंचन का एक वृक्ष पूरे खिले थे, उनकी तस्वीरें उतारीं। टीवी कार्यक्रम ‘उपनिषद गंगा’ में आज का अंक दारा शिकोह पर था, जिसने उपनिषदों का अध्ययन किया था। उसकी मृत्यु का दृश्य देखा, वह आत्मा का ज्ञान पाकर भीतर से मुक्त हो गया था। ‘महाभारत’ में कर्ण ने अर्जुन को मारने का अवसर गँवा दिया क्योंकि सूर्यास्त हो गया था, वह नियमों के अनुसार युद्ध करना चाहता है, संभवतः वह अर्जुन को मारना नहीं चाहता, वह जान चुका है कि अर्जुन उसका सगा भाई है। उसका जीवन कितने विरोधाभासों से घिरा है।


आज का एक दिन एक तरह से उसके लिए बहुत ख़ास है। पूरे पचपन दिनों के बाद वह जून के साथ कार से सोसाइटी के मुख्य गेट से बाहर गयी। उन्होंने एक नर्सरी से गमलों के लिए पौधे ख़रीदे। वहाँ एक भोली-भाली सी लड़की मिली, भुवनशोम की नायिका जैसी। सुबह  छोटी भांजी के स्नातक होने पर पूरे परिवार की एक ज़ूम मीटिंग हुई, अच्छा लगा। शाम को दो पुराने मित्र परिवारों को भी ज़ूम पर देखा। गुरूजी की संजय दत्त से बातचीत का वीडियो देखा। मोबाइल और कम्प्यूटर सबके जीवन का अभिन्न अंग बनते जा रहे हैं। 


आज नैनी एक फार्म हाउस से, जहाँ उसका पति काम करता है, ताज़ा हरा कुम्हड़ा, आँवला और कच्चे आम लायी। कुम्हड़े की सब्ज़ी, आम की मीठी चटनी और आँवले का अचार उसने बना लिया है। शाम को निकट स्थित खेत से कच्चा कटहल लाए, पहले तो माली तोड़ने को तैयार नहीं था, कहने लगा पकने पर यही दो सौ में बिकेगा, यहाँ सभी इसे पका हुआ खाते हैं। गाँव के निकट रहने के कितने लाभ हैं। 


Tuesday, March 29, 2022

उलूक शावक



आज सुबह तेज वर्षा हुई। दोपहर को मॉडेम बदलने मकैनिक आया, लगभग एक महीने बाद इंटर्नेट काम करने लगा है। जून ने नन्हे से घर के वाई फ़ाई सिस्टम के बारे में बात की, मॉडेम ख़राब होने के कारण घर की बत्तियाँ और फ़ैन आदि गूगल होम से नहीं चल रहे थे।इस  गूगल होम ने भी कितना आरम्पसंद बना दिया है लोगों को। आज दोपहर को नीतू सिंह के बचपन की ‘दो कलियाँ’ फ़िल्म देखी, वर्षों पूर्व  इसके बारे में सुना था, पर कभी देखने का मौक़ा नहीं मिला। उत्तर रामायण में दिखाया गया कि लव-कुश का जन्म हो चुका है और राम भी राज-काज में रुचि दिखा रहे हैं। शाम को वर्षा थमी तो टहलने गये, सड़कें  धुलीं हुई थीं और पेड़ कुछ ज़्यादा हरे लग रहे थे। प्रकृति का कुछ पलों का संग-साथ मन को सुकून से भर देता है, परमात्मा की पहली झलक साधक को कुदरत में ही मिलती है। 


आज सुबह समाचार मिला कि ऋषिकपूर का  देहांत हो गया है। उनके लिए श्रद्धांजलि  स्वरूप कुछ लिखा। दो वर्ष पूर्व हुए मस्तिष्क के एक असामान्य रोग के कारण प्रसिद्ध फ़िल्म अभिनेता इरफ़ान का भी कल ही देहांत हुआ था। दोनों कलाकारों को चाहने वाले लाखों  की संख्या में होंगे, सभी उदास हैं।जीवन के साथ मरण भी जुड़ा है और हर किसी को एक न दिन विदा होना है, हर मृत्यु उसे इस बात को और गहराई से याद दिला जाती है।  विश्व भर में कोरोना के मरीज़ भी बत्तीस लाख हो गए हैं। दो लाख से अधिक लोग अपनी जान गँवा बैठे हैं। मरने वालों में अधिकतर या तो वृद्ध हैं या रोगी। पूरे विश्व में करोड़ों लोग ऐसे हैं जो अनेक कष्टों का सामना करते हुए जीवन को किसी तरह बचा भर पा रहे हैं; जिनकी रोज़ी-रोटी छिन गयी है। यह प्रलय से कम विषम स्थिति नहीं है। आधुनिक काल की प्रलयंकारी स्थिति शायद वायरस ही ला सकते हैं। आज दो पुराने मित्र परिवारों से वीडियो कॉल पर देर तक बात हुई। ज़ाहिर है कोरोना की भी बातें हुईं, एक ने कहा बाहर से आने वाले किसी भी सामान के साथ वायरस घर में आ सकता है।अभी तक तो उनकी सोसाइटी में कोई केस नहीं आया है। 


आज मज़दूर दिवस पर एक रचना ब्लॉग पर प्रकाशित की। टीवी पर ‘सारा आकाश’ देखी, इसके बारे में भी काफ़ी सुना था दशकों पूर्व।सरकार ने लॉक डाउन की अवधि बढ़ा दी है। अमेरिका में मरने वालों की संख्या बढ़ रही है। भारत में कुल अड़तीस हज़ार मरीज़ हैं। अब मरीज़ों की संख्या में वृद्धि शीघ्रता से हो रही है। जून ने नन्हे से कहा कि शाम को वह उसके यहाँ जाने वाले थे, तो वह चुप ही रहा। कोरोना का भय इतना ज़्यादा है कि वह नहीं चाहता वे कहीं बाहर निकलें, सभी लोग न कहीं आना चाहते हैं न किसी को बुलाना ही चाहते हैं। आज प्रातः काल भ्रमण के समय छोटा सा उलूक शावक दिखा, कल उसकी माँ या पिता  यानि  एक बड़ा उलूक देखा था। ढेर सारे बगुले भी देखे, आदमी सड़कों पर नहीं निकल रहे हैं तो पक्षी निर्भीक होकर घूम रहे हैं। आज महाभारत में कृष्ण का अर्जुन को गीता उपदेश आरम्भ हो गया है और रामायण में लव-कुश राम को अपना परिचय दे देते हैं। कल रामायण का अंतिम एपिसोड आएगा। उसके बाद श्रीकृष्ण धारावाहिक प्रसारित किया जाएगा। राम और कृष्ण जैसे भारत के कण-कण  में बसे हैं, उन्हें याद किए बिना कोई दिन पूरा नहीं होता।  


जून को भी आर्ट ऑफ़  लिविंग में एक सेवा का काम मिल गया है। वह कम्प्यूटर पर ज़ूम इंस्टाल कर रहे हैं। विभिन्न परियोजनाओं के लिए फ़ंडिंग करने वाले संयोजकों को ढूँढना है। उसके पहले प्रोजेक्ट योजना बनानी हैं, उन्होंने काम शुरू कर दिया है। उसका अनुवाद कार्य भी चल रहा है, सेवा का छोटा सा कार्य भी संतुष्टि की भावना को दृढ़ करता है। आज सुबह गाँव से नैनी ढेर सारे आँवले लेकर आयी, हरे, ताजे, बड़े आकार के, कुछ का अचार बनाया है। कल भुट्टे व कुम्हड़ा लायी थी, गाँव के निकट रहने से ताजी सब्ज़ियाँ मिल जाती हैं। आज इसी सोसाइटी में उगे तीन नारियल भी ख़रीदे।   


रात्रि के नौ बजे हैं, आज शाम वे लगभग दो महीने बाद मुख्य  गेट से बाहर निकले। दायीं ओर कुछ दूरी पर सब्ज़ी की दो नयी दुकानें देखीं। लोग सामान्य दिनों की तरह आ-जा रहे थे। सड़कों पर चहल-पहल थी, पर पता नहीं इसका परिणाम पता नहीं क्या होगा। दिल्ली में भी दुकानें खुल गयी हैं , कुछ विशेष दुकानों के आगे लोगों को लम्बी-लम्बी क़तारें लगी हैं। आज सुबह गाड़ी धोने वाले के साथ एक माली आया, गमलों में निराई कराके सूखा गोबर डलवाया, बड़ी ख़ुशी-ख़ुशी कह रहा था आज से दुकानें खुल गयी हैं। शायद वह भी वहीं जाएगा, लोग पैसा देकर विष ख़रीदते हैं, आदत ही तो है। आज शाम से थोड़ा पहले भुवन शोम फ़िल्म देखी कुछ देर, बहुत अच्छी लगी, प्रिंट पुराना है पर अभिनय अनोखा। आज से दूरदर्शन पर ‘उपनिषद गंगा’ भी दिखाया जा रहा है।


Wednesday, March 23, 2022

प्लूमेरिया के फूल



आज रामायण का अंतिम अंक प्रसारित होगा, कल से उत्तर रामायण शुरू होगी। आज सुबह मोबाइल पर एक सखी के भेजे सुबह के संदेश की घंटी सुनकर नींद खुली, जो परमात्मा की याद दिला गयी। दोपहर बाद नन्हे से बात हुई, उनकी कम्पनी ने अगले छह महीनों के लिए कर्मचारियों का वेतन कम करने का निश्चय किया है। सीनियर्स का वेतन पचास प्रतिशत, उसके नीचे क्रम से तीस, बीस प्रतिशत तक कम करते जाएँगे। जिनका वेतन पहले ही  कम है उनका  नहीं कटेगा। कोरोना का असर अगले छह महीनों तक तो रहने ही वाला है, इसके भी आगे जाएगा, शायद आने वाले कई वर्षों तक। वैसे भारत में लॉक डाउन का अच्छा प्रभाव देखने को मिल रहा है। मोदी जी के प्रयास की प्रशंसा हो रही है। उनके लिए कुछ पंक्तियाँ लिखीं। कोरोना के मामले पर अमेरिका और चीन का आमना-सामना हो रहा है। अमेरिका में हालात बिगड़ते जा रहे हैं। कुछ लोग कह रहे हैं जैविक हथियार की तरह इसका इस्तेमाल किया है चीन ने उसके ख़िलाफ़। एक न एक दिन चीन को इसका जवाब तो देना ही पड़ेगा। 


रात्रि  के नौ बजने वाले हैं। भ्रमण के लिए निकले तो रात की रानी के फूलों की गंध लिए ठंडी हवा बह रही थी। आजकल ढेर सारे फूल खिल रहे हैं  वसंत का मौसम है न, गुड़हल के पाँच रंग के फूल, लिली के दो ग्लोब के आकार के फूल और पारिजात तो रोज़ सुबह पूजा के लिए  मिल जाते हैं। शाम को आकाश में नारंगी सूर्यास्त देखा, प्लूमेरिया के फूलों से वृक्ष भरे हुए थे। सुबह पीछे वाले गेट से बाहर निकल कर खेतों की तरफ़ गये, तोरई के खेत देखे। वहाँ एक नई कालोनी भी बन रही है, धीरे-धीरे खेतों की ज़मीनें मकान बनाने के लिए बिकती जा रही हैं। वापस लौटते समय प्याज़ का एक खेत देखा। अचानक एक चील पक्षी ने सिर पर तेज़ी से प्रहार किया, पर न तो चोंच से न ही पंजे से, केवल पंखों से दबाव डाला और उड़ गया, फिर जाकर सामने  पेड़ पर बैठ गया। इतना सब होने में मात्र कुछ पल ही लगे होंगे। दूर से उसकी तस्वीर भी ली। संभवतः खेत के निकट ही उसका घोंसला रहा होगा, वह अपने बच्चों के लिए भयभीत हुआ होगा। सुबह उत्तर रामायण में कौशल्या और राम का अद्भुत संवाद सुना। 


आज शाम को नापा से सटे हुए खेत से तोरई, चीकू और नारियल ख़रीद कर लाए। माली ने उसी समय तोड़ कर दिए। आम के बगीचे से कच्चे आम भी कल मिले थे, उनका अचार बनाया है। आज पृथ्वी दिवस है, धरती माता ने अनगिनत उपहार मानव को दिए हैं। छोटी ननद से बात हुई, उसने बताया, बैंक खुलते हैं पर ग्राहक नहीं आते, लोग घरों से निकल कर संक्रमण का शिकार होना नहीं चाहते। जून ने पहली बार घर पर ही केश काटे। 

आज बहुत दिनों के बाद वर्षा हो रही है,  शाम से ही  बादल छाने लगे थे। उत्तर रामायण में  राम सीता का त्याग करके बहुत दुखी हैं, जनक उनसे मिलने आए हैं। लक्ष्मण भी भाई के दुःख से दुखी हैं। महाभारत में युद्ध का आरम्भ होने ही वाला है। आज दोपहर को गुरूजी द्वारा कराया ध्यान किया, जब से तालाबंदी हुई है, वह दोपहर व शाम दोनों वक्त ध्यान कराते हैं। आज से नैनी काम पर आने लगी है, घर काफ़ी साफ़ हो गया है और उनका काम कुछ आसान हुआ है। काफ़ी समय मिला तो कई मित्रों व सम्बन्धियों से देर तक फ़ोन पर बात की।  पिताजी ने उसकी कविताओं को फ़ेसबुक पर पढ़ा।  


Friday, March 18, 2022

पीली मूँग



आज शाम साढ़े  पाँच बजे ही वर्षा आरंभ हो गयी। घर के दायीं तरफ़ बने गोदाम की टिन की छत पर बूँदों की बहुत तेज आवाज़ होती है, जैसे ओले गिर रहे हों। वर्षा रुकी तो वे जैकेट पहनकर टहलने गए, तेज हवा बह रही थी, हवा में ठंडक भी थी। बायीं तरफ़ की पड़ोसिन वर्षा में ही छाता लेकर टहलने निकल पड़ी थीं, उनका कहना है कि शाम को एक तय समय ही उन्हें मिलता है, यदि वह बीत गया तो बाद में व्यस्तता के कारण टहलना छूट जाता है। कल उसने ब्लॉग पर व फ़ेसबुक पर नींद पर एक कविता लिखी थी, कइयों को भायी है, शायद नींद ना आना सबकी समस्या है।संभवतः अवचेतन मन में कोरोना का भय परेशान कर रहा हो। आज जून ने सिंधी दाल बनायी पीली मूँग की, बनाते समय कितनी बार माँ को याद किया, बचपन सदा किसी न किसी रूप में हरेक के साथ चलता है। शायद सरकार लॉक डाउन की अवधि को बढ़ाने वाली है, कई राज्यों ने पहले ही ऐसा कर दिया है। सरकारें काफ़ी सहायता भी प्रदान कर रही हैं, ताकि काम न होने पर भी निर्धन, मज़दूर आदि अपना जीवन ठीक से चला सकें। कितने लोगों का व्यापार ठप्प हो गया है । टैक्सी ड्राइवर, होटल सभी जगह किसी की कमाई नहीं हो रही। सभी स्कूल शायद सितम्बर तक बंद रहेंगे। अमेरिका को भारत क्लोरोकविन भेज रहा है, इस समय सभी को सभी की मदद करनी है। 


आज हफ़्तों बाद वे रात्रि के भोजन के बाद बाहर टहलने निकले। चौकीदार के अलावा कोई नहीं था, जबकि शाम को इक्का-दुक्का लोग थे। यदि यह महामारी न हुई होती तो आजकल वे गुजरात में होते।इंडिगो ने कहा है कि अगले वर्ष तक वे कभी भी टिकट का इस्तेमाल कर सकते हैं। सुबह घर की साप्ताहिक सफ़ाई की, तीनों बरामदे, सभी कमरे, किचन, गैराज, सभी स्नानघर, पूरे तीन घंटे लग गए। बर्तन और कपड़े तो मशीन से धुल जाते हैं। महामारी ने एक काम तो अच्छा किया है, सभी को घर का काम करना सिखा दिया है। खाना बनाने से कपड़े धोना, झाड़ू-पोछा तक सब कुछ।सभी आत्मनिर्भर बनें यह तो अच्छा ही है। नाश्ते में कुछ देर हो गयी पर अब जून भी जल्दी नहीं मचाते, आराम से अख़बार पढ़ते रहते हैं। सभी जगह तालाबंदी है, सभी एक सी समस्या का सामना कर रहे हैं, इसलिए जैसे दुनिया एक अदृश्य सूत्र में बंधकर  कुछ निकट आ गयी है। मोदी जी ने अपने सम्बोधन में कहा, तीन मई तक तालाबंदी बढ़ा दी गयी है। ज़्यादातर राज्यों ने इसका स्वागत किया है। अभी भारत में कोरोना के ग्यारह हज़ार मरीज़ हैं। छोटी बहन से बात हुई, उनके अस्पताल को विशेष कोरोना अस्पताल में बदल दिया गया है, कल उसका कोरोना टेस्ट भी हुआ। 


शाम को एक दुखद घटना सुनने को मिली, इसी सोसाइटी में एक युवक की मृत्यु हो गयी, कहा गया कि उसने  आत्महत्या कर ली, पिता दुबई में रहते हैं, माँ से उसका किसी बात पर झगड़ा हुआ था, वह ऊपर के फ़्लोर पर रहता था और माँ नीचे।  कितना अजीब लगता है सुनकर कि इस आपद काल में भी लोग इतने नादान हो सकते हैं। शायद वह बीमार रहा हो, पता नहीं उसे दवा भी मिली हो या नहीं। नन्हे और सोनू से नियमित फ़ोन पर बात होती है, एक ही शहर में रहने के बावजूद पिछले एक महीने से मिलना नहीं हुआ है। आज सुबह नींद खुलने से पहले एक मधुर घंटी की ध्वनि सुनायी दी, कौन था जो इतने प्रेम से जगा रहा था। दो तीन दिन पहले भी एक आवाज़ सुनकर नींद खुली थी जिसका स्रोत नज़र नहीं आया। परमात्मा के पास हज़ार साधन हैं, वह कुछ भी कर सकता है ! रामायण में राम-रावण युद्ध आरम्भ हो गया है। आज दीदी ने फ़ोन किया उनके यहाँ महरी ने आना शुरू कर दिया है, अख़बार भी आने लगा है।