Sunday, May 31, 2026

नंदी मंदिर के दर्शन

नंदी मंदिर के दर्शन


आज माँ की बाईसवीं पुण्यतिथि है, बड़े भाई ने कई तस्वीरें व्हाट्सएप ग्रुप में पोस्ट की हैं।     सुबह सामान्य थी, ध्यान, भ्रमण, प्राणायाम। प्रातः राश में शकरकंदी की खीर और अजवाइन का पराँठा खाकर वे आधा घंटा ड्राइव करके जून के पूर्व अधिकारी के घर राजराजेश्वरी पहुँचे। गृह स्वामिनी ने अदरक वाली चाय पिलायी, इसके बाद वे सब ‘शृंगगिरी श्री शनमुख स्वामी  मन्दिर’ जाने के लिए निकले।एक पहाड़ी पर स्थित यह विशाल मंदिर उन लोगों के घर से अधिक दूर नहीं है। इसके छह मुखों वाला गोपुरम न जाने कितनी बार वे चलती हुई कार से देखा करते थे। गोपुरम के ऊपर एक क्रिस्टल गुंबद है जो दिन में सूर्य के प्रकाश से तथा रात्रि में बिजली के प्रकाश से चमकता है।ऊपर जाने के लिए सीढ़ियाँ नहीं चढ़नी पड़ीं, एक वैन वाला ऊपर ले गया। एक सौ तेइस फ़ीट ऊँचे मंदिर का प्रांगण ख़ाली था, अभी मुख्य कक्ष भी पर्दे से ढका था, आधे घंटे बाद खुलने वाला था। एक पुजारी ने बताया, कार्तिकेय भगवान का अलंकार हो रहा है, अर्थात शृंगार ! प्रतीक्षा करते हुए उन्होंने नीचे एक बड़े कक्ष में गणेश भगवान की मूर्तियों के विशाल संग्रह के दर्शन किए। पट खुलने के बाद आरती आरंभ हो गयी, भगवान मुरूगन के बहुत ही भव्य दर्शन हुए। तब तक और कई लोग आ चुके थे, वे पंक्ति में लगे थे।सबने स्वादिष्ट पोंगल या खिचड़ी का प्रसाद भी ग्रहण किया।वहाँ से वे सोलहवीं शताब्दी में निर्मित ‘बुल टेम्पल’ देखने गये, यह मंदिर भी बहुत  विशाल है। इसे बासवगुड़ी या नंदी मंदिर भी कहते हैं। यहाँ स्थापित नंदी की मूर्ति लगभग पंद्रह फीट ऊँची और बीस फीट लंबी है। गणेश मन्दिर भी इसी से सटा हुआ एक प्रसिद्ध मंदिर है। यहाँ गणेश की अठारह फीट ऊँची और सोलह फीट चौड़ी विशाल मूर्ति है, जिसे डोड्डा गणेश कहते हैं।यहाँ का बेन्ने अलंकार, मक्खन से शृंगार बहुत प्रसिद्ध है। तीन मंदिरों में दर्शन के बाद वे घर वापस आये। दोपहर के भोजन में ज्वार की स्वादिष्ट रोटी, बैंगन की सब्ज़ी, दाल व सलाद परोसा गया। दोपहर बाद वे अपने घर लौटे। मेजबान दीदी ने दही में डालकर सुखाई गयी मिर्चें, लहसुन की चटनी, अंकुरित सलाद और मीठी रोटी घर ले जाकर बाद में खाने के लिए दी।अपने बड़े पुत्र के परिवार के चित्र दिखाये। 


आज दोपहर बहुत दिनों के बाद उसे बहुत गहरी नींद आयी, घोड़े बेचकर सोने जैसी नींद। जब मन में कोई चाह न हो, कुछ जानने की इच्छा भी न हो, तब इच्छा शक्ति, क्रिया और ज्ञान शक्ति में मिलकर तीनों एक हो जाती हैं। वे अपने क्रेंद्र में आ जाते हैं। सत, रज, तम का ही तो खेल है सारा, सत अर्थात ज्ञान, रज अर्थात क्रिया और तम अर्थात इच्छा ! ज्ञान का अर्थ है, वे स्वयं को जान लें, तब आनंद वहीं बरस रहा है, कुछ पाना नहीं नहीं है, कुछ करना भी नहीं है, ऐसा करना जो किसी चाह से प्रेरित होकर किया जाये। ऐसे में सभी के भीतर वही एक परमात्मा दिखाई देता है तो किसी से कोई शिकायत भी नहीं रहती।अपने भीतर भी चैतन्य के दर्शन होते हैं तो अपनी कमियाँ भी सतह पर ही नज़र आती हैं, जो एक हवा के झोंके से उड़ जायें, बस इतनी ही। प्रकृति में निरंतर परिवर्तन हो रहा है, पर उसे देखने वाला अबदल है, अच्युत है, वही वे हैं और वही सामने वाला भी है। जैसे उनसे भूलें होती हैं, वैसे ही औरों से भी होती हैं, वे करते नहीं हैं। आज दोपहर बाद एओएल का अनुवाद कार्य किया। शाम को पापाजी से बात हुई, उन्हें अब सुनने में थोड़ी तकलीफ़ होने लगी है। सुबहें अब भी ठंडी होती हैं, पर दोपहर को तेज धूप निकली थी। 


आज का इतवार मज़े-मज़े से बीता। सुबह की शांत शीतल फ़िज़ाँ में टहलना, खिड़की खोलकर ठंडी पर सुवासित हवा में धीमे-धीमे किसी अदृश्य लय पर श्वासों का अभ्यास और विज्ञान भैरव का श्रवण ! जून के हाथ की बनी अदरक वाली चाय, फिर बगिया से फूल चुनना, फूलों की तस्वीरें फ़ेसबुक पर पोस्ट करना और इत्मीनान से मानव कौल की किताब की पढ़ना। दोपहर बाद ओशो  की किताब पढ़ते-पढ़ते नींद की ऐसी झपकी लेना, जिसमें पूरा होश बना हुआ था।ऑडिबल पर देवदत्त पटनायक की आवाज़ में शिव-पुराण सुनना। महावीरी, हनुमान चालीसा की व्याख्या पढ़ना। टीवी पर एक लघु फ़िल्म देखना। नाश्ते में आलू पराँठा और लंच में ब्रोकोली राइस, दोनों जून के सौजन्य से, और सबसे अच्छी बात बीटिंग रीट्रिट देखना, वर्षा के बावजूद कार्यक्रम चलता रहा। 


आज नींद तीन बजे से पहले ही खुल गई थी। ऑडिबल पर शिव परिवार के बारे में सुना। मन कैसा ठहर गया है। उठकर ध्यान में बैठी तो पता ही नहीं चला चालीस मिनट से ज़्यादा पलक झपकते बीत गये। उनकी चेतना कितनी भव्य है, दिव्य और शांत, सुंदर भी, उस भाव का असर देर तक बना रहा। बाद में वे आश्रम गये, वहाँ के शिव मंदिर में पहली बार जल चढ़ाया, ध्यान के लिए बैठे, सब कुछ दैवीय प्रतीत हो रहा था। गुरुजी की आवाज़ में ॐ नम: शिवाय मंत्र ऐसे लग रहा था जैसे चेतना स्वयं ही स्वयं का नाम ले रही हो। गुरुजी इस धरा पर जीते जी ईश्वर स्वरूप हैं, उन्होंने अपने भीतर मन के पार जाकर उस अनंत के साथ एकत्व स्थापित कर लिया है। वह पूर्ण ज्ञान, पूर्ण क्रिया तथा पूर्ण भक्ति के साथ संयुक्त हैं। पूर्णता की अनुभूति करने की चाह भी भीतर पूर्ण ही जगाता है, इसलिए वह भिन्न-भिन्न अनुभवों से गुजरकर उसे अपने और निकट ला रहा है। नवनीत का नया अंक आज आ गया है। कुछ लेख पढ़े। डाइनिंग टेबल की कुर्सियों का कपड़ा आज बदल दिया गया, तथा गैराज में ग्राउटिंग का काम भी हुआ।एसी की सर्विसिंग भी हो गयी, तीनों एसी अब गर्मियों का सामना करने के लिए तैयार हैं।जून के रहते घर में कुछ भी काम पेंडिंग नहीं रह सकता। महीनों बाद आज उसने साइकिल चलायी। नन्हा और सोनू वापस आ गये हैं, वे कोलकाता में घूम घूमे। सोनू ने पोर्टर से उसके लिए सूट, एक बहुत सुंदर भगवदगीता, नेलोर गुड़ और संदेश भिजवाए हैं। पापाजी से बात हुई, कह रहे थे, अच्छी किताबें पढ़ते रहना चाहिए।  



Tuesday, May 26, 2026

‘शक्कर के पाँच दाने’

‘शक्कर के पाँच दाने’



आज सुबह मन शिकायती हुआ, इसका अर्थ है नीचे के केंद्रों में आ गया कुछ पलों के लिए, या कहें देह भाव में, आत्मा में रहे तो एकत्व भाव की अनुभूति सहज ही होती है। आज सुबह रजिस्ट्रार के दफ़्तर से घर के कागज मिल गये, नन्हा भी वहीं आ गया था। एओएल का अनुवाद कार्य किया, अगले आश्रम में कला-फ़ोरम ‘भाव’ का आयोजन होने वाला है। गुरुजी वापस आ रहे हैं। वे दोनों आश्रम जाएँगे। 


आज सुबह नूना उठी तो मन ध्यानस्थ था, उठकर भी काफ़ी देर बिस्तर पर बैठी रही। सुबह-सुबह मन कितना शांत होता है, सब कुछ स्पष्ट नज़र आता है। वे टहलने निकले तो एकादशी का चंद्रमा और तारे गगन को सजा रहे थे। वापस आकर प्राणायाम किया, पता नहीं कौन भीतर से करवा रहा था, प्राणमय कोष को सबल करने के लिए किस तरह गहरी श्वास लेनी है। उनके भीतर कितनी शक्तियाँ छिपी हैं, पर वे उनके प्रति आँखें मूँदे रहते हैं। उनकी सारी ऊर्जा केवल शरीर को बनाये रखने में ही खर्च हो जाती है। दोपहर को ‘ऑडिबल’ पर ‘एक योगी की आत्मकथा’ का कुछ अंश सुना। ओशो की किताब पढ़ी। गुरुजी की भगवद्गीता की व्याख्या का एक-एक पन्ना सुबह-शाम रोज़ पढ़ती है।नवनीत में कुछ कहानियाँ पढ़ीं, बहुत अच्छी हैं। वह भी कहानी लिख सकती है, यदि थोड़ा सा प्रयास करे। गीत चतुर्वेदी का एक साक्षात्कार सुना। आज नन्हे ने गुलेल भेजी है, जैसे उस दिन लट्टू लाया था, जो उन्होंने उस दिन के बाद चलाया ही नहीं। नन्हे के भीतर एक बच्चा अभी भी रहता है। वह कल शाम को वापस आएगा, कंपनी की ‘ऑफ साइट मीटिंग’ में गया है। आज फिर उसे डेंटिस्ट के पास जाना था, अब तीन हफ़्ते बाद जाना है, अगले महीने के अंत तक नया दाँत लग जायेगा।


आज वे बैंगलुरु में पहली बार ‘लाहे-लाहे’ नामक संस्था की ओर से प्रस्तुत किया एक नाटक देखने गये।मानव कौल द्वारा लिखित ‘शक्कर के पाँच दाने’ सोलो नाटक का मुख्य पात्र जे झा ने निभाया। नाटक में जिसका नाम राजकुमार था, रघु उसका ट्रक वाला दोस्त था, पुंडलीक व माँ के अलावा चार अन्य पात्र थे। नाटक अच्छा लगा। जिसमें मध्यवर्गीय जीवन के अंतर्द्वंद्व, अर्थहीनता और अस्तित्त्व की तलाश को दिखाया गया है। नायक अपने जीवन को शक्कर के पाँच दानों की तरह देखता है। सुबह वैक्यूम क्लीनर से सफ़ाई की तो नैनी ने कहा, नन्हा, माँ का बहुत ध्यान रखता है। आज से एक छात्र हिन्दी पढ़ने आने लगा है, उसे वर्णमाला से शुरुआत करनी होगी। 


इतवार की सुबह सुहानी थी। नन्हे और सोनू ने ‘थाई’ भोजन बनाया। शाम को वे सब एक झील पर गये, थर्मस में चाय बनाकर ले गये थे। पंछियों, हवा, धूप और पानी के सान्निध्य में कुछ समय बिताया।पापाजी को भी मोबाइल पर जंगल व झील दिखाए। वापस आकर बच्चों ने ‘सूशी’ बनायी। टेलीस्कोप से ज्यूपिटर देखा। उसके बाद वे अपने घर चले गये।नन्हे ने उसके लिए मानव कौल की कुछ किताबें दी हैं।


आज सुबह साढ़े नौ बजे वे लालबाग गये थे। जहाँ फूलों की प्रदर्शनी लगी है। अद्भुत नज़ारे थे, फूलों का रूप कितना सुंदर होता है और रंग कितने शोख़ ! गुलाब, जीनिया, पिटुनिया, डहेलिया, गुलदाउदी, गेंदा, जरबेरा, ऑर्किड्स और सैकड़ों तरह के रंगों वाले फूल ! कितने लोगों ने कितने दिनों, महीनों श्रम करके इन्हें उगाया होगा। उन्होंने फूलों की कई तस्वीरें उतारीं और कुछेक ख़रीदीं भी। वापस लौटे तो डेढ़ बजे थे।


आज वे बहुत दिनों बाद गुरुजी के सत्संग में शामिल होने आश्रम गये। काफ़ी भीड़ थी। वह हिन्दी, अंग्रेज़ी और कन्नड़ तीनों भाषाओं में बोल रहे थे।कुचिपुड़ी नृत्य की एक प्रस्तुति भी हुई।जून ने अगले महीने होने वाली उनकी यात्रा की टिकट्स बुक कर दी हैं। दीदी ने बताया, दोनों भांजियों ने फिर से जॉब शुरू कर दी है। बच्चों के जन्म के बाद कुछ वर्षों तक वे पूर्णकालिक माँ की भूमिका में थीं। 


आज वे एक वृद्ध महिला से मिलने गये, जिनके स्वर्गवासी पति जून की कंपनी में वर्षों पहले एक उच्च पद पर थे। उन्होंने कई किताबें भी लिखी हैं। वृद्धा मैम इस उम्र में भी बहुत ऊर्जावान हैं, मिलनसार भी। उनको वर्तमान सोसाइटी में आये अधिक दिन नहीं हुए हैं, पर सबसे जान-पहचान कर ली है। जून के पूर्व अधिकारी भी अपनी पत्नी के साथ आये थे। वापसी में उन्हें उनके घर छोड़ते हुए वे वापस आये। रास्ते में  धीरेंद्र शास्त्री के बारे में एक वीडियो देखा, आजकल उनकी बहुत चर्चा है। कल सुबह नन्हा और सोनू एक मित्र के विवाह में सम्मिलित होने कोलकाता जा रहे हैं। 


आज गणतंत्र दिवस होने के कारण सुबह आठ बजे वे झंडा आरोहण के लिए मल्टी पर्पस कोर्ट गये। अधिक लोग नहीं आये थे, जून को ध्वज फहराने का अवसर मिला। वापस आकर टीवी पर शानदार परेड देखी, जिसमें संस्कृति मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत किए गये विशेष नृत्य ‘वंदे भारतम:नारी शक्ति’ में पाँच तत्वों के माध्यम से महिलाओं की असीम ऊर्जा को दर्शाया गया था। देश भर से आये लगभग पाँच सौ शास्त्रीय और लोक कलाकारों ने इसमें भाग लिया। विभिन्न राज्यों और मंत्रालयों की झांकियाँ भी मनमोहक थीं, नूना के अनुसार गुजरात की झांकी  प्रथम और लोक निर्माण विभाग की झांकी दूसरे स्थान पर आने योग्य है। शाम को सवा पाँच बजे वे आश्रम गये। गायन, वादन तथा नृत्य के कार्यक्रम देखने के साथ हेमामालिनी और गुरुजी के उद्बोधन सुने।  


Monday, May 25, 2026

बरगद का प्राचीन पेड़


बरगद का प्राचीन पेड़


आज स्वामी विवेकानंद जी के जन्मदिन पर हुबली-धारवाड़, कर्नाटक में छब्बीसवाँ ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ मनाया गया, प्रधान मंत्री भी वहाँ पहुँचे हैं। इस बार का विषय था, ‘विकसित युवा, विकसित भारत’। सुबह  वे घर से सवा नौ बजे निकले। एसबीआई में लॉकर का काम हो गया। कुछ देर नन्हे की सोसाइटी की लाइब्रेरी से लेकर धूप में बैठकर ओशो की एक किताब पढ़ी, अच्छी किताब है।आज डेंटिस्ट ने उसके दातों में लगाये इंप्लांट्स में स्क्रू भी लगा दिये हैं। अब एक हफ़्ते बाद जाना है।आज उनका मंगाया हिन्दी की एक अत्यंत प्रतिष्ठित, सांस्कृतिक, संग्रह पत्रिका ‘नवनीत’ का पहला अंक आ गया। भारतीय विद्या भवन से प्रकाशित होने वाली इस पत्रिका को इतने दिनों बाद फिर से पढ़ना एक सुंदर अनुभव होगा।उसे याद है, बचपन में पापाजी अपने दफ़्तर की लाइब्रेरी से हर महीने इसके अंक लाया करते थे। शाम को छोटी बहन का फ़ोन आया, बहनोई के जन्मदिन पर कविता की फ़रमाइश थी, उसने लिखकर भेज दी है। उनका रेस्तराँ अच्छा चल रहा है, पर हिस्सेदार भारत आ गये हैं। इस बार बैंगलुरु में भी ठंड पड़ रही है, कल सुबह तापमान चौदह डिग्री होने की संभावना है। पापा जी ने कहा, आज वह धूप में बैठे, सर्दियों की धूप कितनी कीमती होती है।जून लोहड़ी के लिए कुछ सामान लाए हैं, कल वे आग जलायेंगे।  


आज बहुत दिनों बाद उसके सिर में हल्का दर्द है। कारण दो हो सकते हैं, पहला सुबह-सुबह दूध पीना और दूसरा नाश्ते में हरे चने और बेसन का चीला, ऊपर से जून ने लंच में भी हरे चने का पुलाव बनाया, उनके अनुसार उन्हें अधिक समय तक रखा नहीं जा सकता था। किसी का भोजन ही उसके लिए रोग का कारण बन जाता है, औषधि भी वही है। गरिष्ठ भोजन का असर उसे तुरंत महसूस होने लगता है, दोपहर के ध्यान में नेत्र कैसे उनींदे हो रहे थे और शाम को टहलते समय शुरू में पैर कितने भारी लग रहे थे। सुबह ‘काव्यालय’ में एक पोस्ट प्रकाशित की, एक कवि/पाठक ने कहा है, उसकी कविता में अध्यात्म के लक्षण हैं, प्रणाम भेजा है। स्वयं को जानना यदि अध्यात्म है तो सचमुच ‘मन’ अब स्वयं की हक़ीक़त जान गया है। यह एक साधन है, विचार, भाव तथा स्मृति को संजोने का साधन, यह प्राण ऊर्जा से चलता है, प्राण अपनी ऊर्जा आत्मा से ग्रहण करते हैं, भोजन तथा नींद से से भी। भोजन सात्विक और हल्का हो तो शरीर, मन, प्राण,तीनों हल्के रहते हैं। आत्मा अर्थात ‘मैं’ इनकी साक्षी हूँ तथा इनका आश्रय भी। आत्मा की उपस्थिति में ही ये काम करते हैं।आत्मा के लिए ही ये कार्य करते हैं। आत्मा आनंद स्वरूप है। आत्मा स्वयं को सीमित तन, मन तथा प्राण भी मान सकती है तथा स्वयं को जानकर अनंत परमात्मा का अंश भी, अथवा ब्रह्म स्वरूप भी। आज लोहरी का उत्सव मनाया, शाम को बाज़ार गये, शकरकंदी, मूँगफली तथा पेड़े आदि लाये। छत पर आग जलायी, लकड़ियाँ घर पर ही पड़ी थीं, नैनी ने काट दीं।ऐसा माना जाता है कि आज से ठंड घटने लगती है।पौष समाप्त होकर माघ शुरू हो जाता है। परसों मकर संक्रांति है, वे नन्हे और सोनू के साथ मनायेंगे।दीदी के यहाँ भी अग्नि पूजन हुआ, उनके समधी लोग आ गये थे।उन्होंने छोटे भांजे से बात करवायी, उसने बताया दो महीने बाद उसकी विदेशी पत्नी भी भारत आयेगी।छोटी बहन के यहाँ लोहड़ी के साथ बहनोई के जन्मदिन का उत्सव चल रहा है। नवनीत की अनेक कहानियों में से पहली कहानी पढ़नी शुरू की है।


आज दृश्यम-२ देखी, अच्छी फ़िल्म है, सुना है दृश्यम-३ भी आएगी। मकर संक्रांति पर एक रचना का सृजन किया। धूप में बैठकर थोड़ी देर ‘इंटिमेसी’ पढ़ी, ओशो की बातें सीधे दिल पर असर करती हैं। आज एक माली उनका बगीचा देखने आया था, उसने गिनकर बताया, कुल तिरसठ पौधे लगाएगा।छोटे भाई ने आज पोरबंदर से समुद्र का दृश्य दिखाया, अब वह ओशोधाम में है।कल असमिया पड़ोसी के यहाँ बीहू का जलपान करने जाना है। 


सुबह तापमान १७ डिग्री था। माली समय पर आ गया था।उसके जाने के बाद मकर संक्रांति के भोज के लिए एक विशेष सब्ज़ी बनायी। नन्हा और सोनू नौ बजे आ गये थे, उन्होंने चाय पी और वे सब पड़ोसी के यहाँ गये। जिन्होंने बड़े प्रेम से नाश्ता कराया, दही, चिवड़ा, गुड़, क्रीम,  नारियल व तिल के लड्डू व पीठा, नमकीन आदि। वहाँ से वे बैंगलुरु का प्रसिद्ध ‘बैनयान ट्री’ अर्थात अति प्राचीन व विशाल बरगद का वृक्ष देखने गये। जिसे कन्नड़ भाषा में ‘डोड्डा अलाडा मारा’ कहते हैं। यह वृक्ष चार सौ साल पुराना है और तीन एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है। इसका मुख्य तना नष्ट हो गया है, यह हज़ारों जटाओं कि सहारे टिका है। परिसर में पर्यटकों के लिए बेंचें हैं, अनेक बंदर वहाँ विचर रहे थे, जो किसी को नुक़सान नहीं पहुँचा रहे थे।  


वे घर लौटे तो सबने हरे चने का ‘बचका’, संक्रांति की विशेष आलू-गोभी की सब्ज़ी, जैसी जून बचपन से अपने घर में बनते देखा करते थे, और दही-चावल लंच में ग्रहण किए।उसके बाद मनायी पतंग उड़ाने की रस्म, नन्हे ने ड्रोन भी उड़ाया, रिमोट से चलने वाली कार चलायी, वापस आकर टेलिस्कोप से दूर के नज़ारे देखे। हल्का सा धुँधलका होने पर अग्नि देवता का आवाहन किया, उसके बाद जिग्सा पजल की शुरुआत की। इस तरह पूरा दिन ही कई गतिविधियों से भरा रहा। इसी बीच शाम को पापाजी से फ़ोन पर चर्चा भी की। 


आज सुबह नींद कुछ देर से खुली, शायद कल का असर था। प्रातः भ्रमण भी कम हुआ और आसन भी, शायद उम्र का तक़ाज़ा है या प्रमाद। ख़ैर, अब करके कुछ पाने का जज़्बा तो रहा नहीं, इसलिए जब जो होता है, उसे स्वीकार करके मन अपने आप में स्थित रहता है। उनका विरोध और उनकी चाह दोनों ही ऊर्जा को खोने का कारण हैं। अब न कुछ पाना है, न कुछ छोड़ना है ! इस अनंत जगत में कोई क्या तो पा सकता है और क्या छोड़ सकता है ?आत्मा को न कुछ चाहिए और न कुछ करना है, वह अपने आप में तृप्त है। जो भी चाहिए वह शरीर के लिए और जगत के लिए। आज एक नयी झील देखी, वदेराहल्ली नाम है उसका, सूर्यास्त के समय वे वहाँ गये थे, झील विशाल और सुंदर है, पर आसपास सफाई नहीं है, उसे देखभाल की ज़रूरत है। आज मिट्टी के दूसरे पात्र को भी रंग दिया, ‘नेटिव विलेज’ की एक स्मृति के रूप में ये उनके पास रहेंगे। 


जहाँ शांति है, वहाँ शब्द नहीं हैं। जहाँ शब्द हैं, वहाँ शांति हो सकती है और नहीं भी, यह उनके ऊपर है, पर अब उसे शांति के लिए बस एक हल्का सा स्मरण दिलाना पड़ता है मन को, इतना हल्का कि पलक झपकने से भी कम समय लगता है उसमें! आज भी दिन भर मौसम ठंडा रहा। आज सफ़ाई का काम पूरा हो गया, छत, गैराज, सिटआउट सभी जगह। जून ने आज घर बैठे ही बिगबास्केट से सब्ज़ियाँ व राशन मँगवा लिया। नन्हे का फ़ोन आया, कल उन्हें रजिस्ट्रार के दफ़्तर जाना है, मकान का लोन ख़त्म होने के बाद कुछ कार्यवाही होनी शेष है। 


Saturday, May 23, 2026

ऑडिबल-श्रवण योग्य

ऑडिबल-श्रवण योग्य



शाम को वे दोनों नन्हे व सोनू को लेने उनके घर गये थे। वापस आकर पहले सबने सूप पिया, फिर केक काटा, वे लोग फूल भी लाए थे, गुलाब के ढेर सारे सुंदर फूल ! उनके घर के लिए एक वैक्यूम क्लीनर भी लाए हैं और रिजार्ट में नूना के लट्टू चलाने के शौक़ को देखकर दो लट्टू भी लाए। रात्रि भोजन के बाद नन्हे ने छत पर टेलीस्कोप लगाया, एक-एक कर सबने चाँद-तारों को देखा।पूर्णिमा के एक दिन बाद का घटता हुआ चाँद बहुत मनमोहक था।चमकता हुआ वीनस, ज्यूपिटर और मंगल के साथ आकाश में शनि भी दिखायी दिया।  


आज सुबह नाश्ते के बाद बच्चे वापस चले गये। उन्हें एक मित्र के गृहप्रवेश में शामिल होने मदागी जाना था। नन्हे ने उसके मोबाइल में एक ऐप डाउनलोड कर दिया है, ‘ऑडिबल’ जिसमें वह मनपसंद किताबें अंग्रेज़ी या हिंदी में सुन सकती है।मेंबरशिप लेने से हर महीने एक किताब क्रेडिट पर ख़रीद सकती है।दोपहर बाद एक अच्छी साहसिक फ़िल्म ‘ऊँचाई’ देखी, जिसमें चार बूढ़े दोस्तों की कहानी है, जो अपने एक मित्र की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप तक चढ़ाई करते हैं।हिमालय और एवरेस्ट के बहुत सुंदर दृश्य हैं फ़िल्म में।शायद इसी कारण शाम को वे निकट के गाँव में स्थित झील तक पैदल चलते गये, कुछ देर वहाँ रुके, दूसरे रास्ते से घूमकर वापस आये तो उमंग और उत्साह से भरा पूरा डेढ़ घंटा बीत चुका था। 


आज सुबह गुरुजी को सुना, उनके सीधे-सरल उपदेश मन को हल्का कर देते हैं। कल वाणी का जो दोष हुआ था, उसका मन पर थोड़ा सा प्रभाव शेष था, जो गुरुजी की प्रेम भारी वाणी सुनकर दूर हो गया। स्वतः ही कुछ पंक्तियाँ भी काग़ज़ पर उतर आयीं, हर संघर्ष सृजन को संभव होने का अवसर देता है। घिसकर ही पत्थर में चमक आती है। दुख मन को माँजता है। परमात्मा की स्मृति हर दुख को वैसे ही हर लेती है, जैसे सूर्य की किरण ओस की बूँद को हर लेती है। जून ने आज दो श्रमिकों को बुलवाया था, सिटआउट की शीशे की छत को धुलवाना था और बेंत के फ़र्नीचर पर पेंट करवाना था।नैनी साप्ताहिक सफ़ाई में लगी थी, थोड़ी देर बाद उसने आकर मज़दूरों की शिकायत की, उसके हावभाव से ऐसा लगा, तेज-तेज कन्नड़ा में कुछ बोली। फ़ेसबुक पर सुबह लिखा उसका छोटा सा आलेख पढ़कर पापाजी ने कहा, मन को ज़्यादा परेशान नहीं करना चाहिए। उनकी चिंता उसे समझ में आती है, नन्हे की हल्की सी उदासी भी उसे भीतर तक छू जाती है। माता-पिता बच्चों से ऐसे ही जुड़े रहते हैं। आज शाम को भी वे सोसाइटी के पीछे वाली झील पर गये, पिछले गेट से निकल कर, नये बन रहे ले आउट में से सीमेंट की नई सड़क से होते हुए सीधे वहाँ पहुँच गये।शाम के समय दूर तक टहलने  के दो फ़ायदे हैं, एक तो वजन नियंत्रण में रहता है, दूसरा नये-नये स्थान देखने को मिलते हैं। दोपहर बाद समाचारों में सुना, ब्राज़ील में चुनी गयी सरकार के विरुद्ध विपक्ष आंदोलन पर उतर आया है। यूक्रेन में युद्ध जारी है, चीन ताइवान के पास युद्ध अभ्यास कर रहा है। जोशीमठ में ज़मीन धंस रही है, मकानों में दरारें पड़ रही हैं। इंदौर में प्रवासी भारतीय सम्मेलन हो रहा है, जहाँ कुछ लोगों को प्रवेश नहीं मिल पाया, शायद लोग अधिक संख्या में आ गये हैं। 


आज सुबह स्वामी श्री परमानंद जी का आत्मा पर सुंदर प्रवचन सुना।मुक्ति की कामना करने वाला मन है, आत्मा सदा मुक्त है, सुख स्वरूप आत्मा स्वयं को न पहचानकर सुख की कामना करती हुई सी लगती है। उन्होंने कहा, वास्तव में चिदाभास अर्थात बुद्धि में पड़ा चेतन का प्रतिबिंब ही स्वयं को बद्ध जानकर मुक्ति की कामना करता है।अज्ञान दशा में ही भीतर सुख-दुख, इच्छा-द्वेष आदि प्रकट होते हैं। अज्ञान के कारण ही चिदाभास स्वयं को कर्ता मानता है। चिदाभास के कारण ही निर्गुण आत्मा व्यवहार में ‘मैं’ (अहंकार) का अनुभव करती है। साधक को अमनी भाव में रहने का अभ्यास करना है, केवल आत्मसुख में ही टिकना है और अपने अनंत स्वरूप का स्मरण करना है।


आज वे साढ़े दस बजे घर से निकले थे और शाम सवा छह बजे वापस लौटे। एसबीआई की दो शाखाओं में जाना था, एक जगह काम हो गया, एक जगह परसों होगा। नन्हा दफ़्तर से एक बैंक में हस्ताक्षर करने आया था, फिर चला गया। सोनू को लेकर डेंटिस्ट के पास गये। आज उसने बहुत ख़्याल रखा।दोपहर का भोजन उसके साथ खाया। आजकल वह भी अपने स्वास्थ्य और वजन का भी ध्यान रख रही है। जून ने आज लगभग १०० किमी गाड़ी चलायी, वह शहर की भीड़भाड़ में कार चलाने में दक्ष हो गये हैं। 


आज सिटआउट की सफ़ाई का काम पूरा हो गया। जून ने यहाँ के पते के पर उनके नये पैनकार्ड के लिए ऑनलाइन आवेदन भर दिया है।सुबह 'अष्टावक्र गीता' सुनी, पूरा रास्ता कैसे कट गया, पता ही नहीं चला। मकान के लोन के चुकता होने के बाद सब रजिस्ट्रार के दफ़्तर में जाकर कुछ कार्यवाही करनी होती है, उसके लिए अगले गुरुवार को जाना है। कल डेंटिस्ट के पास जाना है। बैंक भी जाना है, लॉकर को रिन्यू करना है, आरबीआई गाइडलाइंस के अनुसार नया एग्रीमेंट साइन करना है। एओएल के दो अनुवाद कार्य किये, दोपहर को कुछ देर के लिए धूप में सिटआउट पर सोयी, गाड़ियों का शोर आ रहा था। आज भानु दीदी (गुरुजी की बहन) के जन्मदिन का कार्यक्रम देखा, आश्रम के बच्चों ने गीत गाये और श्लोक सुनाये। मिट्टी के जो बर्तन रिज़ौर्ट में बनाये थे, उन पर रंग करना शुरू किया है। पहले बेस कलर लगाया है। गमलों में मेथी, पालक व सरसों के बीज बोए थे, उनमें पानी दिया। 


Friday, May 22, 2026

कुम्हार का चाक


कुम्हार का चाक 

वर्ष का अंतिम दिन एक सुनहरी याद बनाकर उनके मनों में अंकित हो गया है। सुबह-सुबह नन्हा उन दोनों को लेकर एयरपोर्ट के लिए रवाना हुआ। सोनू की फ़्लाइट आने में समय था, पहले उसने कुछ देर गोकार्टिंग में समय बिताया। उसके बाद वे सभी रिज़ौर्ट गये। जहां का हरियाली से भरा वातावरण, बड़ा सा तरणताल, पारंपरिक आकृतियों से सजे झोपड़ी नुमा कमरे। एक जगह कुम्हार मिट्टी के बर्तन बना रहा था।सामान आदि रखकर वे उसी स्थान पर आ गये।जीवन में पहली बार मिट्टी के दो छोटे पात्र अपने हाथों से बनाये, लकड़ी से चाक घुमाता हुआ कुम्हार पूरी दक्षता से गिलास, कुल्हड़ बना रहा था। कुछ अन्य लोग भी उन्हें बर्तन बनाते देखकर वहाँ आ गये। इसके बाद कई पुराने बचपन के खेल खेले, जैसे लट्टू चलाना, गुलेल से निशाना लगाना। कुछ बच्चे बैडमिंटन आदि अन्य आधुनिक खेल खेल रहे थे। एक बड़ी सी मीनार थी, जिस पर चढ़कर सूर्यास्त का दृश्य देखा। रात को नये वर्ष स्वागत करने के लिए विशेष संगीत और भोज तो था ही। भोजन के बाद वे कुछ देर आकाश में चाँद-तारों को निहारते रहे। शहर से दूर अप्राकृतिक रोशनियों के न होने से तारे कुछ अधिक चमकदार प्रतीत हो रहे थे। लगभग साढ़े दस बजे वे अपने कमरों में आ गये। अवश्य ही कुछ लोग बारह बजे तक रुके रहे होंगे, जाने वाले को विदा और आने वाले का स्वागत करने की रस्म निभायी होगी।  


नये साल की पहली सुबह भी सुहानी थी।कच्चे रास्तों पर और बगीचों में चारों ओर घना कोहरा छाया हुआ था, पर ज़्यादा ठंड नहीं थी, सो वे दोनों रिज़ौर्ट से बाहर आकर सड़क पर टहलते हुए सूर्योदय की प्रतीक्षा करते रहे। कोहरे को भेदता हुआ सूरज पहले मद्धिम फिर शोख़ नारंगी रंग का हो गया।नन्हा व सोनू उठे तो वे सब इनडोर गेम्स वाले कमरे में आ गये, जहाँ कैरम का बोर्ड और शतरंज की बिसात बिछी थी।दिन में उन्हें अवतार-२ फ़िल्म देखनी थी। जो अपने आप में एक सुंदर अनुभव था।इस बार कहानी जैक और नियतिरी के बच्चों के इर्दगिर्द घूमती है।मानव सेना के आक्रमण से बचने के लिए वे लोग जंगलों को छोड़कर समुद्र तट पर स्थित एक कबीले मेटकायिना में शरण लेते हैं। पानी के अंदर के दृश्यों और आपसी रिश्तों को बहुत ही ख़ूबसूरती से फ़िल्माया गया है।शाम हो गई थी जब नन्हे ने उन्हें घर छोड़ा।


सुबह उठी तो मन में विचार आया, सुख=सु+ख, सु का अर्थ है शुभ, ख अर्थात आकाश, अपने आसपास का वातावरण जब सकारात्मक तरंगें लिए हो, उसमें कोई विकार न हो, तब जो अनुभव होता है, उसे सुख कहते हैं। लेकिन जहां शुभ है वहाँ अशुभ है, चाहे उस समय प्रकट न हो रहा हो।जहाँ सकारात्मकता है नकारात्मकता भी है। इसलिए सुख की कामना का त्याग ही ‘मुक्ति’ है। इस वर्ष उनका मूल मन्त्र सुख की जगह ‘मुक्ति’ होना चाहिए। मुक्ति का अर्थ है पूर्ण स्वतंत्रता, दो के द्वन्द्व से पूर्ण आज़ादी ! अब न सुख की तलाश है, न सुख-दुख का भय ! मुक्ति का अर्थ है, मन के पूर्वाग्रहों, धारणाओं, कल्पनाओं, आशंकाओं से मुक्ति ! एक ऐसे स्थान में रहने की कला, जहाँ पूर्ण रिक्तता है, जो इस जगत का स्रोत है। 


आज नूना को यह नई डायरी मिली है। एसबीआई की कगलीपुरा शाखा के अधिकारी घर आकर कैलंडर व डायरी दे गये। पिछले वर्ष भी वह आये थे। आज ही आर्ट ऑफ़ लिविंग की डायरी भी मिली कैलेंडर के साथ। शाम को बायीं तरफ़ की पड़ोसन से बात हुई, पीछे हफ़्ते उनकी सर्जरी हुई थी, स्वास्थ्य लाभ कर रही हैं। निराश लग रही थीं, उन्हें आशा भरे शब्द कहे, गुरुजी से सुने हुए, ऐसे ही शब्द दोपहर को जून के बचपन के मित्र की धर्मपत्नी से कहे, जब वह पति की बीमारी की बात से परेशान हो रही थीं। ईश्वर ही सद्प्रेरणा देता है। ईश्वर की कृपा ही तो थी टैगोर और गांधी पर, जो देश के लिए इतना काम कर पाये। आज भवन जर्नल में ‘चरखे’ के बारे में  उनके विचार पढ़कर आनंद आया। जहाँ गांधी जी के लिए चरखा आत्मनिर्भरता और स्वतंत्रता का प्रतीक था, वही टैगोर का कहना था कि यांत्रिक और अनिवार्य श्रम से रचनात्मकता और बौद्धिक विकास बाधित होता है। गांधी जी के लिए चरखा करोड़ों लोगों को जोड़ने के लिए एक साधन और अहिंसक विरोध का प्रतीक था। टैगोर की दृष्टि में मनुष्य के लिए राजनीतिक स्वतंत्रता से बढ़कर मानसिक व आध्यात्मिक स्वतंत्रता का महत्व है। इस मतभेद के बावजूद दोनों में आपसी प्रेम और सम्मान आजीवन बना रहा। 


आज भी ब्लॉग पर एक पोस्ट प्रकाशित की, अब ब्लॉग पढ़ने वाले पाठक बहुत घट गये हैं, फिर भी उसे लिखने का काम जारी रखना है, स्वांत: सुखाय ही सही ! राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में कई लोग जुड़ रहे हैं, कांग्रेस के दिन पलट रहे हैं, ऐसा लगता है। रुस-यूक्रेन युद्ध अभी भी चल रहा है, एक वर्ष होने को आया। झारखंड के गिरिडीह ज़िले में पार्श्वनाथ सम्मेद तीर्थस्थल को पर्यटन स्थल बनाने की योजना को वापस ले लिया गया है, जैन समाज ने इसके ख़िलाफ़ आंदोलन किया था। उसे लगता है, यही भावना अन्य तीर्थ स्थानों के लिए भी होनी  चाहिए, वरना ऐसे स्थानों की पवित्रता बनी हुई नहीं रह सकती। 


सुबह से ही ठंडी हवा बह रही है, पर उतनी ठंडी नहीं जिसे शीत लहर कहा जाता है और जो उत्तर भारत में क़हर बरपा रही है।पापाजी ने बताया, कल दिल्ली का तापमान तीन डिग्री तक पहुँच गया था। सुबह भी चंद्रमा के दर्शन हुए थे और रात्रि भ्रमणके समय भी, कल पौष पूर्णिमा है।परसों से माघ का महीना शुरू हो रहा है। इतनी ठंड में भी लोग पूरे महीने संगम तट पर रहते हैं।आस्था के आगे कोई बाधा टिक नहीं सकती। आज समाचारों में सुना पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू यदि चाहें तो अस्थियाँ बहाने भारत आ सकते हैं, उन्हें दस दिनों के लिए वीज़ा दिया जाएगा। नाश्ते के बाद वे घड़ी साज के पास गये, दो हाथ घड़ियाँ बंद पड़ी थीं, स्मार्ट वॉच आ जाने के बाद वे घड़ियाँ कभी-कभी पहनी जाती हैं, पर कुछ महीनों बाद बैटरी बदलवानी पड़ती है। इसके बाद बंद पड़े फ़्लैट को देखने गये, एक कमरे में कुछ सीलन की समस्या दिखी, शायद पानी ऊपर से आ रहा था।ऊपर वाले घर में जाकर पता किया, प्रांजल व सेवंती किराए पर रहते हैं वहाँ, दोनों घर से ही काम करते हैं, बहुत अच्छी से तरह रखा था घर, उन्होंने कहा, मकान मालिक से सीपेज की बात कहकर ठीक करवायेंगे। कल उनके विवाह की सालगिरह है, नन्हा व सोनू आयेंगे, शायद रात को रुक जायें। आज स्वामी विवकानंद जी का राजयोग पर दिया गया प्रवचन सुना, उनकी शैली अद्भुत है और उनका ज्ञान अपरिमित ! भारत के इतिहास में वह हज़ारों साल तक जीवित रहेंगे।  


Thursday, May 21, 2026

हर घर ध्यान

हर घर ध्यान


आज सुबह-सुबह वे एक परिचित दंपत्ति के साथ उनके घर से लगभग तीन किलोमीटर दूर स्थित एक झील देखने गये, रास्ते में ढेर सारी बातें हुईं, इधर-उधर की।मौसम सुहाना था, सूर्योदय हो रहा था, अनेक तरह के पक्षी जल में क्रीड़ा कर रहे थे। निकट ही एक गाँव है, उसकी गलियों से गुजरते हुए, उनकी सरल जीवनशैली के कितने ही दृश्य दिखे। एक दो व्यक्तियों से उनके मित्रों की बातचीत भी हुई। वापसी में कुछ दूरी पर स्थित एक नयी झील भी देखी, जिसके बार में उन्हें जरा भी जानकारी नहीं थी, उसने झील के पानी में वृक्षों की छाया के सुंदर चित्र उतारे। आश्रम के सामने नये खुले रेस्तराँ ‘उडुपी’ में सुबह का नाश्ता किया।सबकी पसंद भिन्न थी, नूना ने इडली मंगायी, जून ने मसाला दोसा, उसकी सखी ने नीर दोसा और उनके पतिदेव ने पूरी सब्ज़ी। इस वर्ष की इस आख़िरी मुलाक़ात को वे यादगार बना लेना चाहते थे। वास्तव में उनकी दिनचर्या घर लौटकर शुरू हुई, जब नैनी आयी। घर की सफ़ाई, स्नान आदि। शाम को पापाजी से बात हुई, वहाँ ठंड काफ़ी बढ़ गई है, रात्रि का तापमान पाँच डिग्री तक चला जाता है। वह यह बताते हुए बहुत खुश हो रहे थे कि नार्वे से आये हुए दीदी के बच्चे उनसे मिलने गये थे। नूना के स्वास्थ्य के बारे में जानकर नन्हे ने कहा है, अगले हफ़्ते उन्हें सालाना मेडिकल टेस्ट करा कर उसकी रिपोर्ट डॉक्टर को दिखानी चाहिए। 


बैंगलुरु की एक प्रसिद्ध लैब में उन्होंने सभी आवश्यक टेस्ट कराये।रिपोर्ट दिखाने गये तो डाक्टर ने आश्वासन दिया, सब कुछ सामान्य है। बस ज़रूरत है, वे हल्का आहार लें, वजन कुछ कम करें और तेल-घी व चीनी का सेवन कम करें। नियम से व्यायाम करें।पानी अधिक पीना है और उसे नमक की मात्रा अधिक व जून को कम लेनी है। नये वर्ष में प्रवेश करने से पूर्व यह अच्छा ही है कि वे अपने स्वास्थ्य के प्रति एक बार फिर जागरूक हो जायें। आज “रामसेतु” फ़िल्म देखनी शुरू की है। फ़िल्म की कहानी रोचक है। एक नास्तिक पुरातत्वविद् ‘सेतुसमुद्रम प्रोजेक्ट’ के लिए अपनी रिपोर्ट देता है, जिसमें रामसेतु को तोड़ा जाना है, पर अनेक लोग नाराज़ हो जाते हैं। वह असलियत का पता लगाने के लिए समुद्र के भीतर जाकर खोज करता है, तब उसे ज्ञात होता है, यह पुल प्राकृतिक नहीं आदमी द्वारा बनाया गया है। इसके बाद वह इसे बचाने के लिए लग जाता है। श्रीलंका में फ़िल्माये दृश्य बहुत सुंदर हैं। रामायण से जुड़े कितने ही स्थान श्रीलंका में भी हैं। राम के अस्तित्त्व को नकारना असंभव है। राम उसी तरह शाश्वत हैं जैसे भारत भूमि ! आज भी एओएल का अनुवाद कार्य किया। आज़ादी के अमृत महोत्सव के अन्तर्गत भारत सरकार का संस्कृति मंत्रालय, आर्ट ऑफ़ लिविंग के साथ एक राष्ट्रव्यापी जान-जागरूकता अभियान चला रहा है, “हर घर ध्यान”। गुरुजी हर व्यक्ति को, विशेषकर युवाओं को ध्यान से जोड़ना चाहते हैं।कल सुबह उनके नये वर्ष के संदेश का अनुवाद करना है।


सुबह शीतल थी, वे दूर तक पैदल चले। कल की यात्रा के लिए तैयारी की। कल वे सब एक ‘ईको रिजार्ट’ जा रहे हैं। नये वर्ष का आरंभ वहीं से करेंगे। वजन कम करने के लिए जो परहेज़ आवश्यक हैं, वे करने आरम्भ कर दिये हैं। नये वर्ष को वे जब तक नया रहने देंगे, उत्साह बना रहेगा। आने वाले वर्ष के अन्तिम दिन तक इसे नया जानना है, उसके बाद ही तो यह पुराना होगा। किंतु होता क्या है कि फ़रवरी आते-आते ही यह पुराना हो जाता है, और जीवन उसी पुराने क्रम में लौट जाता है। उसके मन में कितने ही भाव उमड़ रहे हैं, नया उत्साह, नये इरादे, नये ढंग से जीने की आस, नये रास्ते, नये को अपनाने में कोई भय न हो, पुराने को त्यागना नहीं है पर उसमें कुछ नयापन भी जोड़ना है। भूलें भी करें तो नये ढंग की, गुरुजी कहते हैं, वही भूलें एक चक्र में घुमाती हैं। 


परसों वे सब आई मैक्स में अवतार सीरीज़ की दूसरी फ़िल्म ‘अवतार- द वे ऑफ़ वाटर’ देखने जा रहे हैं, नये वर्ष की उनकी पहली फ़िल्म। नन्हे ने कहा पहले की कहानी पढ़ लें, तो यह समझ में अच्छी तरह आएगी।उसने कहानी पढ़ी और पापाजी को ‘अवतार’ की पहली फ़िल्म का लिंक भेजा है, शायद वह देखें।वर्षों पहले उन्होंने यह अनोखी फ़िल्म देखी थी। जेम्स कैमरून की थ्री डी फ़िल्म। सुदूर भविष्य की कहानी है, धरती पर काफ़ी कुछ ख़त्म हो चुका है, पैंडोरा नाम के एक ग्रह पर मानवों का प्रवेश होता है, जो वहाँ से एक बहुमूल्य खनिज लाना चाहते हैं। वहाँ के मूल निवास नावी, जो दस फ़ीट लंबे और नीले रंग के हैं, गहराई से प्रकृति से जुड़े हैं। नावी लोगों से संपर्क के लिए वैज्ञानिक,एक इंसानी दिमाग़ को प्रयोगशाला में तैयार किए गये नावी अवतार में लगा देते हैं।जेक सुली वह अवतार है, जो पैंडोरा पर जाता है, और एक नावी महिला नेयतिरी से मिलता है। बाद में वह मानवों के ख़िलाफ़ वहाँ के निवासियों की तरफ़ से लड़ता है।  

 

Wednesday, May 20, 2026

‘त्रिपुरा रहस्य’

‘त्रिपुरा रहस्य’


कल से संसद का सत्र शुरू हो रहा है।परसों गुजरात व हिमाचल प्रदेश में हुए चुनावों का परिणाम भी आ जाएगा। फुटबॉल का विश्व कप चल रहा है। आज वे जून के पूर्व उच्च अधिकारी के घर गये, जहां एक अन्य सहकर्मी भी मिले।मेज़बान महिला ने घर का बना ‘मुरक्कु’ खिलाया, जो दक्षिण भारत का एक कुरकुरा स्वादिष्ट पारंपरिक नाश्ता है, ‘मुरुक्कु’ का अर्थ है मुड़ा हुआ। उन्होंने साथ में ताजा निकाला संतरे का रस पीने को दिया। कुछ देर सब पुरानी यादें ताजा करते रहे,  इसके बाद सब लंच के लिए ‘पाकशाला’ गये। जहाँ सबकी पसंद थी, ‘उत्तर भारतीय भोजन’ दोपहर बाद वे घर लौटे। शाम को पुन: गले में दर्द महसूस हुआ। 


आज स्वास्थ्य कल से बेहतर है। कई बार नमक मिले गुनगुने पानी से गरारे किए और भाप भी ली।कल रात को देखे अनोखे स्वप्न के कारण आज जीरा-धनिया का पानी पिया और उसकी सुगंध भी ग्रहण की। आज एक अच्छी हास्य फ़िल्म देखी, ‘नज़र अन्दाज़’, जिसमें एक उदार अंधे व्यक्ति की कहानी है। उनकी नौकरानी और एक चोर के बीच हुई रोचक प्रतिस्पर्धा की कहानी ! गुजरात में बीजेपी और हिमाचल में कांग्रेस को विजय हासिल हुई है।आज दोपहर छोटे भाई का फ़ोन आया, बिहार के मुज्ज़फ़रनगर के उस आश्रम से, जहाँ असम में रहने वाली  नूना की एक परिचिता रहने गयी थी, पर लौट आयी।आश्रम के संचालक ने उससे विवाह तो किया पर निर्वाह नहीं कर पाये, वैसे यह बेमेल विवाह था। आज उसने पहली बार आई पैड पर लिखा, आश्चर्य है, इतने दिनों से अभ्यास क्यों नहीं किया।बहुत आसान है उस पर लिखना और इसे यात्रा में साथ भी रखा जा सकता है। शाम को छोटी बहन का फ़ोन आया, पंजाब में उनके मकान को बेचने में आने वाली अड़चनें घटने का नाम ही नहीं ले रही हैं। उन्हें अदेयता प्रमाणपत्र नहीं मिला है। घर के लिए अठारह साल पहले ऋण लिया गया था, जिसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। 


आज नन्हा आया था, सोनू असम में है। परसों सुबह उन्हें एक और यात्रा पर निकलना है। सुबह साढ़े छह बजे नन्हा उन्हें एयरपोर्ट ले जाएगा।आज वे पहली बार आर्ट ऑफ़ लिविंग के श्रीश्री आयुर्वेदिक अस्पताल गये, आना-जाना मिलाकर तीन घंटे लग गये। वैद्य ने सर्दी के लिए एक हफ़्ते की दवा दी है और बाद में सामान्य आरोग्य के लिए एक महीने की। ‘मृणाल ज्योति’ की रजत जयंती का उत्सव संपन्न हो गया। अगले हफ़्ते उन सभी से नूना की भेंट होगी। 


आज पूरे एक हफ़्ते बाद इस डायरी में लिख रही है। दोनों यात्रायें अच्छी रहीं। पूरे विश्वास और धैर्य के साथ सफ़र का आनंद लिया, घर वापस आकर भी अच्छा लग रहा है। कल से घर की बायीं दीवार पर रंगरोगन होगा, जो दो साल से साथ वाले मकान के निर्माण के दौरान स्वच्छ नहीं रह पायी है। 


आज महीनों बाद उसने ब्लॉग्स पर पोस्ट प्रकाशित कीं, पूरी पाँच पोस्ट ! अच्छा लग रहा है।असम में जब थी तो कभी-कभी ही होता था कि कुछ न लिखे। जब कोई रचनात्मक होता है तो ईश्वर उसके साथ होते हैं। हर कर्म में देव का योगदान तो होता ही है। चेतना ही मन-देह के द्वारा अभिव्यक्त हो रही होती है। दीदी से बात हुई, उन्हें डाक्टर ने घुटने बदलवाने की बात कही है, यह भी कहा है, अभी कोई जल्दी नहीं है।कुछ दिन की दवा भी दी है। पापाजी ने कहा, मोबाइल पर जो गेम वह खेलते हैं, उसके पैसे भी देने चाहिये, आख़िर किसी ने इतनी मेहनत से बनाया है।वह अति आदर्शवादी हैं।


आज शाम उसने ‘त्रिपुरा रहस्य’ का कुछ अंश सुना, ‘ललितासहस्रनाम’ में  देवी त्रिपुर सुंदरी के स्वरूप, महत्व और रहस्य को बताया गया है। कितने सरल शब्दों में आत्मा का ज्ञान दिया है, और यह भी कहा है कि आत्मा का ज्ञान देना ऐसा ही है जैसे कोई कहे कि उसे उसकी आँखें दिखला दो।आज उसने गुरुजी के नये वर्ष के दो संदेशों का अनुवाद किया। गूगल की सहायता से काम बहुत सरल हो गया है। समाचारों में सुना, चीन में कोरोना के केस बढ़ रहे हैं, अन्य कई देशों में भी कोरोना अभी समाप्त नहीं हुआ है। दोपहर को वे नन्हे के यहाँ गये थे, उसे लेकर एसबीआई होम लोन की दो शाखाओं में गये, अब उनके घर का कोई लोन बकाया नहीं है। अगले महीने मकान के कागज मिल जाएँगे। 


आज आँख है कि भर-भर आती है, प्रेम की इस तरह की तड़प का अनुभव बहुत दिनों बाद हुआ। यह भी परमात्मा की कृपा है, वह भावपूर्ण हृदय से ही ज़्यादा संतुष्ट होते हैं, उन्हें ज्ञानी भक्त ही प्रिय हैं, रूखा-सूखा ज्ञानी नहीं ! प्रीत के आँसुओं से भरकर जब कोई गोपी कृष्ण को याद करती होगी, तो वह रह ही नहीं पाते होंगे, आत्मिक रूप से उसके भीतर आकर उसे सांत्वना देते होंगे, प्रेम का अनुभव केवल प्रेम के लिए कैसा होता है, भक्ति यही सिखाती है, उसमें कोई चाह नहीं है, अपनी माँग नहीं है, बस यही भावना है कि सामने वाले को कोई दुख न हो, वह प्रसन्न रहे। जब अन्य का दुख देखा न जाये और उसे मिटाने का भाव भीतर प्रबल हो जाये तब समझना चाहिए कि प्रेम अपने शुद्ध स्वरूप में है। ईश्वर प्रतिपाल उसके साथ है, बल्कि वही है ! आज शाम को वे एक घंटा टहलते रहे, फिर ‘योग निद्रा’ की, पहले श्रम फिर विश्राम, बहुत अच्छा अनुभव था। आज भी अनुवाद कार्य किया, गुरुजी ने कितने ही विवादों का हल करने में विश्व की मदद की है। बहुत दिनों बाद उसने ‘चिदाकाश गीता’ पढ़ी। जो महान अवधूत संत भगवान नित्यानन्द के मुख से निकले आध्यात्मिक वचन हैं। जिनमें वह अहंकार का नाश करके, वैराग्य को साधकर, साक्षी भाव का अभ्यास करने की बात कहते हैं । गुरुजी की तरह वह भी कहते हैं एक ही सत्ता से, एक ही ब्रह्म चेतना से सब कुछ निर्मित हुआ है। यह अद्वैत बोध पहले समाधि में घटित होता है, फिर सहज हो जाता है ।   


आज क्रिसमस है, संदेश भेजे और संदेश आये। नन्हा सुबह आ गया था, शाम को गया, पहले गो- कार्टिंग फिर घर।कह रहा था, अगले हफ़्ते वे सब नये वर्ष का स्वागत करने कहीं बाहर जाएँगे, सोनू भी वर्ष के अंतिम दिन आ जाएगी। वे लोग अगले वर्ष मार्च में घर जा सकते हैं, पापाजी को आश्चर्य होगा, दीदी-जीजाजी को भी।


Tuesday, May 19, 2026

चैत्य भूमि मुंबई


चैत्य भूमि मुंबई 



आज सुबह कोहरा बेहद घना था, पचास मीटर से आगे कुछ दिखायी नहीं दे रहा था। दिन भर ठंड बनी रही। पापाजी को ‘वर्ड्स ऑफ़ वंडर’ गेम का लिंक भेजा है, शायद उन्हें पसंद आये। आज स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर की एक पुस्तक ‘हिंदुत्व’ के कुछ पृष्ठ पड़े, बहुत प्रभावशाली लेखन कला है उनकी।उनके अनुसार जो व्यक्ति सिंधु नदी से लेकर समुद्र तक फैली इस विशाल भूमि को अपनी पुण्यभूमि मानता है, वही हिंदू है।हिंदुत्व केवल एक धार्मिक आस्था नहीं है, यह व्यक्ति की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और राष्ट्रीय पहचान है। नूना ने सोचा, वे अपने छोटे-छोटे कार्यों में ही लगे हुए हैं कि समाज और देश के प्रति भी उनका कुछ कर्त्तव्य है, इसका चिंतन नहीं करते। 


आज रविवार है, बच्चे नहीं आये।शनिवार की सुबह वे आ गये थे, मिलकर व नाश्ता करके चले गये। आज अपने किसी मित्र के साथ ‘कॉमिक कॉन’ गये हैं। इस आयोजन में कॉमिक्स की नयी व पुरानी किताबें ख़रीदने, पढ़ने और भारतीय व विदेशी कलाकारों व कॉमिक रचनाकारों से  मिलने का मौक़ा मिलता है। यहाँ कुछ लोग कॉमिक  किरदारों की वेशभूषा भी पहन कर आते हैं।  नन्हे ने वहाँ से फ़ोटो भेजे हैं।आज पापाजी को फ़ेसबुक पर लिखते देखकर अच्छा लगा, वह वहाँ शेरों-शायरी लिख सकते हैं। उन्होंने शब्दों का खेल भी खेला, कह रहे थे, बहुत रोचक है।


आज सुबह वे टहलने गये तो आकाश पर हल्के बादल थे पर नूना ने जरा आँख गड़ाकर देखा तो तारे भी दिखाई दिये। वह तारामंडल भौतिक जगत का था या किसी दूसरे आयाम का, यह एक रहस्य है। भीतर भी एक आकाश है, चित्ताकाश तथा चिदाकाश, जिसमें चाँद-तारे भी होते हैं; वैसे ही जैसे सूक्ष्म शरीर की भी सूक्ष्म इंद्रियाँ होती हैं। दिव्य गंध, ध्वनि, दृश्य तथा स्पर्श उन्हीं के द्वारा अनुभव में आते हैं।मन से कई परतें खुल रही हैं, परमात्मा ही जैसे निर्देशित करता है या गुरुजी स्वयं ! आज सुबह वे असमिया पड़ोसियों से मिलने गये, उन्होंने न्यूजर्सी में अपनी पुत्री के यहाँ किए अपने प्रवास की बहुत सी बातें बतायीं। वे व्हाइट हाउस देखने भी गये और ग्रेट कैनियन भी, न्यूयार्क भी गये। उन्होंने एक फ्रिज मैगनेट और एक कैंडल स्टैंड उपहार में दिये। 


आज सुबह उठे तो वर्षा हो रही थी, शाम को कुछ देर थमी, वे छाता लेकर टहलने गये। सड़क पर बहुत कम लोग थे। इस समय भी बारिश हो रही है। मौसम काफ़ी ठंडा हो गया है।आज पहली बार ‘ब्रिज’ खेल का पहला पाठ सीखा। असमिया पड़ोसी, जो कभी ब्रिज के चैंपियन रह चुके हैं, एक मित्र को अपने साथ लाए थे, जो आर्ट ऑफ़ लिविंग में काम करते हैं। यह रणनीतिक और मस्तिष्क का खेल है। इसमें दो काम करने होते हैं, पहला, बोली लगाना, दूसरा खेलना। जो सबसे बड़ी बोली लगाता है, उसका साथी कार्ड खोल देता है।उसे खेल कुछ-कुछ ही समझ में आया। आज भी पापाजी ने फ़ेसबुक पर उसकी कविताओं पर कमेंट किया, वह नियमित रूप से पढ़ते हैं। 


आज भी दिन भर वर्षा होती रही। सुबह देर तक योग अभ्यास किया, क्योंकि बाहर जा ही नहीं सकते थे।आपदा को अवसर में बदलना चाहिए न। मन में तीव्र भाव था कि अब जो कुछ भी होगा, ईश्वर के लिए होगा, ईश्वर के द्वारा होगा।परमात्मा के सिवा जब कोई दूसरा है ही नहीं तो उनके होने में भी तो वही झलकता है। शाम को गुरुजी द्वारा ‘नारद भक्ति सूत्रों’ की व्याख्या सुनी। बहुत संक्षिप्त तथा सरल शब्दों में उन्होंने बताया, भक्ति के मर्म को बताते ये सूत्र अनमोल हैं। सुबह उन्हीं के मुख से ‘रुद्रम’ सुना था। परमात्मा के सिवा इस जग में जानने योग्य कुछ भी तो नहीं है, उसे जानकर सब जान लिया जाता है।वह तो ऊर्जा के रूप में हर जगह मौजूद है, उन्हें ही स्वयं को उसकी ओर उन्मुख करना है।शेष काम उनके ऊपर छोड़ देना है।   

सुबह वे चार बजे से भी पहले उठ गये थे। नहा-धोकर तैयार होकर सात बजे नन्हे के यहाँ पहुँच गये। उनके विवाह की वर्षगाँठ मनाने। केक, मिठाई व फूल लेकर गये थे, उनके कुक ने दक्षिण भारतीय नाश्ता बनाया था। दस बजे नन्हा ऑफिस गया और वे घर लौट आये। सोनू को दिन में भाई के साथ आइकिया जाना था। 

सुबह ऑन लाइन योग अभ्यास किया, गुरुजी की आवाज़ सुनकर सुदर्शन क्रिया भी। एक घंटा पलक झपकते बीत गया। आज बड़ा भांजा आया था, वह अपने विवाह की तैयारियों की बातें बता रहा था।पापा जी से बात हुई, नन्हे की भेजी रज़ाई और गर्म कपड़ों के बारे में बता रहे थे। 


आज दिन भर बादल बने रहे पर बरसे नहीं। नन्हे-सोनू का फ़ोन आया, वे इंदौर से पाँच बजे निकले थे, उज्जैन में साढ़े आठ बजे उनकी उड़ान थी। दो घंटे का रास्ता है, पर राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के कारण यातायात में फँस गये। किसी तरह एक अन्य रास्ते को तलाश कर अंततः फ्लाइट पकड़ ली। छोटी भांजी के विवाह में शामिल होने के लिए परसों उन्हें भी यात्रा पर निकलना है।


यात्रा की तैयारी हो गई है। आज रास्तृपति मूर्मू का भाषण सुना, उनके मन में जेल में बंद व्यक्तियों के प्रति बहुत सहानुभूति है, वह चाहती हैं कि जेलों की संख्या न बढ़ायी जाये बल्कि जो क़ैदी वर्षों से  बिना मुक़दमा चले बंद हैं, उन्हें निकाला जाये।जितना समय कोई इस दुनिया में है, यदि किसी के काम आ रहा है तो अच्छा है। उसका होना किसी के दुख का कारण न बने, परमात्मा के सान्निध्य को महसूस करके वह उसकी शक्तियों का वाहक बने, उसकी प्रकृति के साथ एकत्व का अनुभव करके भीतरी आनंद को जगत में बिखराये।  

  

कल रात तीन दिन बाद वे घर वापस आ गये थे।विवाह अच्छी प्रकार से संपन्न हो गया। आज सुबह चार दिनों बाद प्रात: भ्रमण के लिए गये। शाम को पापाजी से बात हुई। कहने लगे, सुबह-सुबह ठंड के कारण वह अपने काम ठीक से नहीं कर पाते हैं, समय लगता है।यात्रा से आने के बाद उसे भी ठंड लग गई है।इतने सारे लोगों से मिलना, बाहर का खाना, नींद पूरी न होना, कितने ही कारण हो सकते हैं। आज की तरह अगले कुछ दिन भी मौसम बदली भरा रहेगा। आज अंबेडकर का महापरिनिर्वाण दिवस है। उनका देहांत ६ दिसंबर १९५६ को दिल्ली में हुआ था, पर मुख्य कार्यक्रम चैत्य भूमि मुंबई में होता है। उसनकी अस्थियाँ इसी स्थान पर विसर्जित की गई थीं। यह दिन सामाजिक न्याय, समानता और मानवाधिकारों के लिए उनके अतुलनीय योगदान को याद करने का प्रतीक है।  


Monday, May 18, 2026

रात की रानी


रात की रानी

आज का इतवार बच्चों के साथ बिताया। सोनू का भाई आया था, उसकी मॉम भी, नन्हे का मित्र आया, सभी मिलकर पहले ‘उडुपी’ गये, फिर एक कैंपिग साईट ‘कैंप मोंक’ देखने, लंच के लिए एमटीआर। शाम को वे लोग मैच देखकर वापस चले गये। भारत विश्वकप के सेमी फ़ाइनल में पहुँच गया है, उधर पाकिस्तान भी। शायद फ़ाइनल में दोनों के मध्य मुकाबला हो। पापाजी से बात हुई, उन्हें तीनों उपहार मिल गये हैं। 

आज शाम टहलने गये तो स्वच्छ नीले आकाश पर चाँदी सा चमकता चंद्रमा शोभित हो रहा था। कल पूर्णिमा है, देव दिवाली और गुरुपर्व भी। पापाजी का जन्मदिन भी, उनके लिए कविता लिखी है। कल चन्द्र ग्रहण भी है। सुबह नाश्ते में उसने साबूदाने की उपमा बनायी थी। नयी खुली सब्ज़ी की दुकान से पपीता ख़रीदा। शाम को हिंदी की कक्षा में साहिर-लुधियानवी का लिखा गीत “साथी, हाथ बढ़ाना” पढ़ाया। साहिर का नाम आते ही अमृता प्रीतम का ख़्याल भी आ जाता है अपने आप।   


आज सांध्य भ्रमण के समय चन्द्र ग्रहण देखा। सुबह उगते हुए सूरज का एक सुंदर चित्र उतारा था। जून आज दो बार साइकिल से बाज़ार गये। तीन तरह के साग लाए। वह आजकल पुन: जीवन में गहरी रुचि लेने लगे हैं, प्रेम का रंग चढ़ा है शायद। किसी कोरियन धारावाहिक का अंतिम एपिसोड देख रहे हैं वे, उसमें सच्चे प्रेम को बहुत श्रेष्ठता से दर्शाया गया है।वह आजकल घर के काम में बहुत मदद करने लगे हैं, उसे पढ़ने-लिखने का समय ज़्यादा मिल जाता है, यह भी ईश्वर की कृपा है ! उस दिन महर्षि अरविंद के एक अनुयायी से सुना था, जो लोग नियमित ध्यान करते हैं, उनकी शारीरिक उम्र भले ही बढ़ जाये पर उनकी कोशिकाएँ देर तक युवा रहती हैं। मन जिस बात को स्वीकार कर लेता है, वैसा ही प्रभाव शरीर पर पड़ता है। नन्हा शनिवार को गोवा जा रहा है, अपने मित्र की बैचलर पार्टी में। 


अभी कुछ देर पहले ही वे रात्रि भ्रमण से आये हैं, मौसम सुहावना था, हवा शीतल और सुवास भरी , जो गुलाबी ठंड पड़ने की खबर दे रही थी। दूर आकाश में धुएँ के बादल  थे, जो वहाँ रहने वालों के लिए मुश्किल पैदा कर रहे होंगे, और हो सकता है थोड़ी देर में हवा उन्हें यहाँ तक ले आये,  वहाँ कोई सीमा तो है नहीं। जो लोग यह धुआँ पैदा कर रहे हैं, खुद वे भी भुगत ही रहे होंगे, पर वे इस बात को समझते नहीं, महसूस नहीं करते। आज भी महर्षि अरविंद व श्रीमाँ के बारे में सुना, उनका विजन कितना विशाल था, गुरुजी की तरह वे भी सारे विश्व के लिए सोचते थे। गुरुजी आजकल अमेरिका में हैं, करोड़ों लोगों के जीवन को उन्होंने छुआ है। उसे भी अपनी शक्ति व सामर्थ्य के अनुसार सेवा कार्य में लगना चाहिए। पापाजी ने भी देश और दुनिया के लिए बहुत मंगलकामनाएँ ज़ाहिर किन। छोटे भाई का भुज से फ़ोन आया, कह रहा था, यहाँ  चालीस लाख में ज़मीन सहित डुप्लेक्स घर मिल जाता है, कितना खुला-खुला है वह इलाक़ा! उसने ‘भारत’ के बारे में एक पोस्ट प्रकाशित की; भारत, जो दुनिया को जोड़ने का प्रयास कर रहा है। 


आज महाकवि दिनकर की पुस्तक में महर्षि अरविंद के कविता के बारे में कहे गये विचार पढ़े। वह अपने जैसे एक ही हुए हैं, उनके पूर्व किसी ने पूरी मानव जाति के आध्यात्मिक होने की बात नहीं कही है। उनका ज्ञान अथाह है, कोई एक व्यक्ति उसे पूरा समझ नहीं सकता। छोटी भांजी का जन्मदिन था, कल उसे बहुत आश्चर्य हुआ जब शाम को उसके दफ़्तर के लोग घर पर मिले, माँ ने बिना उसे बताये, एक पार्टी का आयोजन किया था, अगले महीने उसका विवाह होने वाला है। ईश्वर उसे सारी ख़ुशियाँ दे। कुछ देर पहले बायें तरफ़ के पड़ोसी का पुत्र आया था जन्मदिन का केक लेकर, उसका व उसकी माँ का जन्मदिन भी आज है। उन्हें भी फ़ोन करके बधाई दी। परमात्मा ही यह सारे काम करवा रहा है, उसकी कुछ मीठा खाने की इच्छा भर हुई और केक हाज़िर था। सुबह ठीक छह बजे किसी ने कहा, छह बज गये।सुबह उठने से पहले अक्सर ठीक तीन बजकर अट्ठाईस मिनट पर वही नींद खोल देता है। वह उनके इतने क़रीब है पर वे उससे मुँह मोड रहते हैं। उस मन से काम लेते रहते हैं, जो अस्थायी है, जो सदा बदलता रहता है। भक्ति, प्रेम, ज्ञान, शांति, समरसता, आनंद जो भी उन्हें चाहिए, वह सब परमात्मा से ही मिलता है। उसे पहचानना और उसके प्रति स्वयं को खोल देना यही असली योग है ! सुबह एक नयी कविता लिखी। पापाजी से बात हुई उन्होंने ‘इस्मत चुगताई’ का एक नाटक विविधभारती पर सुना, उसकी कहानी बता रहे थे।वह उसका लेख पढ़कर भी आश्वस्त हुए कि मानव सब कुछ नहीं जान सकता। नन्हा गोवा में है, आज वे लोग क्रूज़ में हैं, कल वह वापस आयेगा। 


आज नेहरू जी का जन्मदिन है, भारत के पहले प्रधानमंत्री, जो हिंदू होते हुए भी स्वयं को हिदुओं की तरफ़ से बोलने वाले नहीं कहलाना चाहते थे। वह धर्म निरपेक्ष थे पर अन्य पंथों के लिए अति उदार।भारत को इतने वर्ष और तपस्या करनी थी और फिर अपने मूल स्वभाव की ओर लौटना था। शायद वक्त का यही तक़ाज़ा था। बचपन में चाचा नेहरू के लिए उन्होंने कितने नग़मे गाये थे, उनके भीतर अनेक अच्छाइयाँ थी, विज्ञान के बल पर वह देश को आगे ले जाना चाहते थे।बाल्मीकि रामायण पर लिखी उसकी पोस्ट पर कुछ लोगों ने प्रतिक्रिया की है, रामायण के प्रति लोगों में कितनी श्रद्धा है ! 


आज शाम मृणाल ज्योति की रजत जयंती पर निकलने वाली पत्रिका के लिए एक ऑन लाइन मीटिंग में भाग लिया। मीटिंग अच्छी रही, जैसे कि सब कुछ अच्छा है, यह दुनिया अच्छी है और वह इसलिए कि इस दुनिया को बनाने वाला अच्छा है ! आज रात की रानी पूरे शबाब पर है, मदहोश कर देने वाली ख़ुशबू है उसकी ! राहगीरों को अपनी सुवास से आकर्षित करती हुई सी।सुगंधित पौधे कितने जीवंत होते हैं, ऊर्जावान और परहित कारक । दोपहर को इंडोनेशिया के बार में एक वीडियो देखा, मोदी जी ने वहाँ रहने वाले भारतीयों को शानदार भाषण दिया। इस्लामिक देश होने के बावजूद वे रामायण और महाभारत को अब तक अपनाए हुए हैं। आज एक अफ़ग़ानी व्यक्ति का वीडियो देखा जो अपने ही मज़हब का सताया हुआ है। पूरे विश्व में धर्म के नाम हज़ारों लोग प्रताड़ित किये गये हैं, किए जा रहे हैं। आज सुबह जून गन्ने का रस पिलाने ले गये, दुकानदार ने पुदीना और नींबू का रस डालकर ताजा और स्वादिष्ट रस दिया। रुस और यूक्रेन का युद्ध अभी भी चल रहा है, शायद इसी वर्ष इसका अंत हो जाये और नया वर्ष नयी उम्मीदें लेकर आये। लाखों लोग पहले ही मारे जा चुके हैं इसमें !


Saturday, May 16, 2026

महर्षि अरविंद की ‘लाइफ डिवाइन’


महर्षि अरविंद की ‘लाइफ डिवाइन’

आज धनतेरस है, शाम को दिये जलाये। जून ने फूलों का ऑर्डर कर दिया और पूजा का नारियल ले आये। कल सुबह नन्हा-सोनू वे उनके मित्र आ जाएँगे। सुबह ही छत पर टेंट लगेगा। दोपहर को दिवाली भोज का आयोजन है। सुबह बड़ी ननद से बात की, जो क्लाउड किचन चलाती है। उसने बताया सत्तर प्लेट्स पाव-भाजी का ऑर्डर था।आज सुबह ध्यान में उसने अस्तित्त्व से कहा, अपनी उपस्थिति का कोई चिह्न दिखाये तो गुरुजी की आवाज़ भीतर से आयी। कुछ जान के चलो, कुछ मान के चलो, सबको प्रेम से गले लगा के चलो! जगत में सबको अपना ही अंश मानकर अपनी ओर से किसी से भी कोई दूरी नहीं माननी है। गुरुजी उनके कितने निकट हैं, हर बात का उत्तर देते हैं। 


आज छोटी दिवाली का उत्सव बहुत अच्छी तरह मनाया। सुबह आठ बजे बच्चे आ गये थे।वे भी ढेर सारे फूल लाए थे। घर को फूलों से सजाया। सोनू ने कंडीलें लाने को कहा। नूना की इच्छा थी कि इस बार एक कंडील लगायें, और नन्हा दसियों कंडीलें ले आया।वे सब छत पर टेंट में ही लगायीं। बहुत से लोग आये। भोज दोपहर बाद तक चला। शाम को बच्चे वापस चले गये। 


आज दिवाली का मुख्य उत्सव भी सोल्लास मनाया। नन्हा और सोनू शाम को आ गये थे।सबने एक साथ बैठकर पूजा की, दिये जलाये फिर पड़ोस में गये, सामने वाले घर से दो बच्चे आये। नन्हे ने फ़्राइड राइस बनाये।सोसाइटी में एक चक्कर लगाया, तस्वीरें उतारीं। 


आज अक्तूबर की पच्चीस तारीख़ है, चौंतीस वर्ष पहले आज ही के दिन जून का छोटा भाई उन्हें छोड़कर चला गया था। आज सुबह उत्सव के बाद की सफ़ाई में बीती। दस बजे कुछ कपड़े सिलने देने गई। एक कविता पोस्ट की। पापाजी से बात की। दूर तक टहलने गये,  धूप अब भली लगने लगी है। शाम को गुरुजी का सत्संग सुना, कितने धैर्य और सहजता से वह अपनी बात समझाते हैं। 

आज बहुत दिनों बाद वे आश्रम गये। सूर्यास्त के दर्शन किये। जहाँ राज्य के मुख्यमंत्री भी आये हुए थे। कर्नाटक राज्योत्सव के कारण यह कार्यक्रम हो रहा था, जो एक चुनाव रैली जैसा लग रहा था। सुदर्शन क्रिया होगी, यह सोचकर कई लोग चार बजे से ही वहाँ बैठे थे। आश्रम जाने से पूर्व वे वृद्ध आश्रम भी गये थे, दिवाली की मिठाई और कुछ नमकीन लेकर। कुछ महिलाएँ टहल रही थीं।सिंधी भाई भी मिले, कुछ देर उनसे बात की। दो घंटे आश्रम में बिताकर वापस लौटे तो दिये जलाये। कल भाईदूज के साथ दीपावली का अंतिम उत्सव मनाया जाएगा। 


आज शाम को वे टहलने गये तो हवा में ठंडक थी, लौटकर स्वेटर पहना। इस बार बैंगलुरु में ज़्यादा ठंड पड़ने वाली है। आज एक पोस्ट प्रकाशित की। तीनों भाइयों से बात हुई, उन्हें भाईदूज की कविता अच्छी लगी। ऋषि सुनक ब्रिटेन के नये प्रधान मंत्री बन गये हैं। उनके पिता गुजराँवाला, पंजाब के रहने वाले परिवार से आते हैं, जो १९३५ में अफ़्रीका जाकर बस गया था। १९८० में उनका जन्म ब्रिटेन में हुआ। एक तरह से वह वहीं के नागरिक हैं, पर उनका लालन-पालन हिंदू धर्म के अनुसार हुआ है। आज ‘कांतारा’ का ट्रेलर देखा, ज़रूर एक अच्छी फ़िल्म होगी। कश्मीर के इतिहास के बारे में एक वीडियो देखा, आज ही के दिन कश्मीर का भारत में विलय हुआ था। 


आज शाम नूना ‘ललिता सहस्त्रनाम’ पाठ में गई, भगवद्गीता में कृष्ण ‘जपयज्ञ’ संभवत: इसी को कहते हैं। आज बड़े भांजे से बात की, अगले हफ़्ते वे उसका नया घर देखने जाएँगे। मौसम ख़ुशनुमा हो गया है। गुलाबी ठंड पड़ने लगी है। 


आज यहाँ राज्योत्सव मनाया गया। शाम को ‘भूमिका’ देखी, पर्यावरण संरक्षण पर एक डरावनी फ़िल्म ! धरती का अपना जीता-जागता अस्तित्त्व है, मानव उसका दोहन कर रहा है, उसको कष्ट पहुँचा रहा है। धरती पर बढ़ रही ग्लोबल वार्मिंग एक लक्षण है कि मानव सब कुछ ठीक नहीं कर रहा है। विकास के नाम पर वह धरती को बहुत नुक़सान पहुँचा रहा है। 


सुबह उठने से पूर्व रोज़ की तरह मन में शुभ विचार प्रेषित किया गया, परमात्मा के सिवा और कौन कर सकता है यह, जिससे प्रातः काल का समय ब्रह्म मुहूर्त बन जाता है। एक कविता लिखी गई, सहज ही, न लिखने से पूर्व न ही लिखने के बाद उसका एक भी शब्द याद था, कोई है, जो लिखवा लेता है। वे टहलने गये तो श्री अरविंद की ‘लाइफ डिवाइन’ के बारे में सुना। दोपहर को भी कुछ देर सुना। शाम को उनकी एक पुस्तक पढ़ी। सावित्री व एक अन्य पुस्तक मँगवायी है जो राष्ट्र कवि रामधारी सिंह दिनकर जी ने ‘सावित्री’ के बारे में लिखी है। आजकल सुबह छह बजे के समाचार कोरोना काल के पूर्व की तरह दस मिनट की जगह पाँच मिनट के हो गये हैं। मोरबी के पुल के गिरने से मरने वालों की संख्या १३५ हो गई। ‘विनाश काले विपरीत बुद्धि’ वाली बात ही नज़र आती है। अख़बार में ऐसे भयंकर दुष्कर्मों की खबरें आती हैं कि ईश्वर सब जानता है, इसका भरोसा कोई नहीं कर पाता कभी-कभी। जीवन उसी के लिए वरदान है जो साक्षी भाव में टिकना जानता है, जहाँ भी आसक्ति है, वहीं दर्द है। 


शाम को टहलने गये तो अचानक हुई बारिश में भीग गये, वह तो अच्छा था, जैकेट पहना हुआ था, वही भीगा। नवम्बर आ गया है, पर वर्षा जाने का नाम ही नहीं ले रही। अगले महीने केरल में विंटर मानसून भी आ जाएगा। जून ने आज मीलों  दूर तक साइकिल चलायी। दस बजे वह डी-मार्ट गये, उनमें एक जोश झलक रहा था। आज सुबह वे महर्षि अरविंद का एक वीडियो सुन रहे थे, उसके कुछ प्रेरणादायी शब्द उसे भी याद हैं। जीवन में उत्साह न हो जीवन, जीवन नहीं रहता। परमात्मा उनके भीतर उत्साह, सृजनात्मकता, उदारता, प्रेम, कृतज्ञता, ज्ञान तथा आनंद के रूप में रहता है। वह जितना-जितना उनके जीवन से झलकेगा, उतना-उतना वे उसमें स्थित रहेंगे, उसके क़रीब जाएँगे। बहुत सी बातें स्पष्ट हो रही हैं। आत्मा का अस्तित्त्व उतना ही सत्य प्रतीत होता है जितना यह जगत !  


आज भी जून का उत्साह बरकरार रहा और वह जैन मंदिर तक साइकिल से चले गये। उनके आने के बाद वे टहलने गये तो एक परिचित दम्पति मिले, जिन्होंने एक नयी खुली सब्ज़ी की दुकान के बारह में बताया। आज हिंदी पढ़ने आयी छात्रा को ‘कंचा’ पाठ पढ़ाया तो असम की एक छात्रा की याद आ गई, यह पाठ उसे अच्छा लगा था। महर्षि अरविंद की ‘लाइफ डिवाइन’ के कुछ अंश सुने। उन्होंने साधना के पथ में आने वाली हर बाधा का, हर मार्ग का और हर लक्ष्य का इतना विस्तृत वर्णन किया है कि सारे संशय मिटने लगते हैं। वह जीवन को एक उच्च अर्थ प्रदान करते हैं, जब वह कहते हैं कि प्रकृति में विकास अभी भी हो रहा है।चेतना का विकास निरंतर जारी है।मन को दिव्य बनाना जिसका पहला कदम है। दिव्य मन और बुद्धि के माध्यम से ही चेतना अपनी पूरी क्षमता को व्यक्त कर सकती है। चेतना में अनंत संभावनाएँ हैं। 

 


उत्तराखण्ड का सारी गाँव

उत्तराखण्ड का सारी गाँव 


आज शाम को वे दायीं तरफ़ के पड़ोसी के यहाँ गये, उनका गोलू देखने, विभिन्न देवी-देवताओं और सामान्य जनों की भी बहुत सारी मूर्तियाँ सजायी हैं उन्होंने।अभी घर में काम चल रहा है, पूरा होने में दो-तीन महीने और लगेंगे। सुबह भांजा आ गया था, दोपहर तक नन्हा व सोनू भी मौसेरी बहन के साथ आ गये थे, जिसने प्रोक्रिएट पर सुंदर पेटिंग बनायी, वह एक कलाकारा है। आज नूना का स्वास्थ्य पहले से बेहतर है। आश्रम में नवरात्रि का उत्सव मनाया जा रहा है, वे एक बार ही जा पाये हैं। 


आज भी स्वास्थ्य कुछ विशेष अच्छा नहीं पर इस समय मन उत्साहित है, वे कई दिनों बाद दूर तक घूमने गये।परसों उन्हें यात्रा पर निकलना है; आज पैकिंग की। महर्षि अरविंद पर एक वृत्त चित्र देखा। यह केंद्र शासित प्रदेश कभी एक फ़्रेंच कालोनी हुआ करता था। इसका इतिहास बहुत पुराना है। पांडिचेरी में उनके आश्रम में जाना एक अद्भुत अनुभव होगा। उसने ‘सावित्री’ की कहानी भी सुनी तथा महर्षि अरविंद द्वारा उसका रूपक बनाकर लिखे गये महाकाव्य सावित्री के बारे में भी सुना। वहाँ जाकर कुछ किताबें भी मिलेंगी। 


आज सुबह आर्ट ऑफ़ लिविंग आश्रम से फ़ोन आया था, वे उसी समय मीडिया के एक कार्यक्रम में बुला रहे थे।पहले से कोई सूचना नहीं दी थी सो जाना नहीं हो पाया।गुरुजी की एक वार्ता के आधार पर उसे दिवाली पर एक आलेख लिखना है।शाम को पापाजी से बात हुई। पता चला, छोटा भाई छत्तीस गढ़ जाने वाला है। 


वे यात्रा से लौट आये हैं, पांडिचेरी में बिताये पाँच दिन एक सुखद याद बनकर मन के किसी कोने में सुरक्षित हो गये हैं। उन्हें एरोविल में जगह नहीं मिली, उससे कुछ दूरी पर एक नये बने होटल में रुके। दिन भर आश्रम में ही रहते थे। नन्हा व सोनू अपने कमरे में रहकर काम में व्यस्त रहते थे। एक सुबह समुद्र तट व एक शाम बाज़ार घूमने गये। फ़्रेंच कालोनी भी देखी। दाँत का टाँका काट दिया गया है। 

आज स्वास्थ्य ठीक है। सुबह का भ्रमण भी हुआ और दोपहर व संध्या का ध्यान भी जिससे ऊर्जा मिलती है। शाम को जाप में गई।अरविंद आश्रम में जाने के बाद से भीतर श्रद्धा का द्वार जैसे खुल गया है। श्रीमाँ और श्री अरविंद का जीवन कितना अनोखा था।उनके आश्रम के बारे में कुछ और सुना। श्री अरविंद के मन में भारत के लिए, उसकी संस्कृति के लिए तथा ईश्वर के लिए अगाध प्रेम था।देशभक्ति को वह परमात्मा की सेवा से जोड़ते थे।राष्ट्र के प्रति उनका प्रेम परमात्मा के प्रति प्रेम जितना ही पावन था। 


आज उज्जैन में महाकाल मंदिर का उद्घाटन हो रहा है। प्रधानमंत्री मोदीजी का भारत के सांस्कृतिक उत्थान, इतिहास और चेतना पर दिया गया ओजस्वी भाषण सुनने योग्य है।वह कह रहे हैं, ‘यहाँ की वास्तुकला उज्जैन के प्राचीन गौरव का बखान कर रही है।शिव ही ज्ञान है और शिव के दर्शन में ब्रह्मांड का दर्शन है। भारत का यह सांस्कृतिक दर्शन, शिखर पर पहुँच कर विश्व का मार्गदर्शन कर सकता है। भगवान शिव अनेक रूपों में भारत व जगत के हित में लगे हैं। उज्जैन भारत का भौगोलिक केंद्र बिंदु भी माना जाता है।नन्हे ने नया एयर फ़्रायर भेजा है, पुराना वह अपने कुक को देने वाला है।आज छोटी ननद के विवाह की तीसवीं वर्षगाँठ है, उसने कविता भेजी है।


आज सुबह एक पुरानी ‘कविता’ को सँवारा। सुबह वे उठे तो बदल बरस रहे थे, दोपहर बाद फिर से पानी बरसने लगा। कार्तिक आ गया है, पर लगता है जैसे सावन गया ही नहीं। आज नासिका के अग्र भाग पर कैसी ख़ुशबू आ रही है, जैसे कोई मिष्ठान बना रहा हो, सूजी का हलवा! पता नहीं यह कहाँ से आ रही है। अस्तित्त्व की कृपा भी हो सकती है, या श्रीमाँ, गुरुजी और ईश्वर की। दिल में एओएल का अनुवाद कार्य किया, हिंदी पढ़ायी और शाम को पापाजी से बात की। वह बहुत आशावादी और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पित हैं।उन्होंने परमात्मा के प्रति भक्ति के बारे में अपने तथा ओशी के विचार बताये। नूना ने उन्हें मोदी जी के पुतिन को दिये उस संदेश के बारे में बताया, जो अहिंसा के बारे में है।


आज भी दिन भर वर्षा होती रही। सुबह वे देर से टहलने गये, वातावरण धुला-धुला था, हवा बहुत हल्की और ताजी थी।जून आज जल्दी सो गये हैं, वह दिन में कुछ परेशान से ही रहे, नूना को ज्ञात है, और यह उसका ख़ुद का अनुभव है, मन और देह से ऊपर न उठने पर ऐसा ही होता है, इससे अन्यथा कुछ हो ही नहीं सकता। देह को कुछ न कुछ तो लगा ही रहता है, ऊपर से मन अपनी चलाने लगता है।नन्हा और सोनू एक मित्र के यहाँ पार्टी में गये हैं, कल आयेंगे, सोनू का जन्मदिन मनाने।  

   

आज नन्हा व सोनू आये। लंच के बाद वे सब कार लेकर निकले तो दोनों ने कहा, उसे भी कार चलानी चाहिए। असम से आने के बाद पहली बार कार चलायी, अच्छा लगा, ईवी चलाना आसान है।वापस आकर एयर फ्रायर में केक बनाया। सभी भाइयों को ऑनलाइन टीका भेजा। दीवाली की तैयारी धीरे-धीरे चल रही है। एक कविता लिखी, कैनवा पर कार्ड बनाया। नन्हा और सोनू शनिवार को आ जाएँगे, रविवार को दिवाली की पार्टी रखने का विचार है।  


आज सुबह जून दिवाली पर देने के लिए मोमबत्ती, दिये, मिठाई आदि लाये।वह घर की सफ़ाई में व्यस्त है।कल रात तेज गर्जन के साथ वर्षा हुई, सुबह उठे तब भी जारी थी।आज दोपहर उत्तराखंड के एक स्थान ‘सारी गाँव’ की एक रोमांचक यात्रा का वीडियो देखा। जहां पंद्रह हज़ार फ़ीट की ऊँचाई पर धान की खेती होती है। वहाँ कई घरों में पीढ़ियों से आते हुए कुछ प्राचीन अनोखे हथियार भी रखे हुए हैं।  


आज शाम वे टहल कर घर पहुँचे ही थे कि तेज बारिश शुरू हो गई।इस समय तारे निकल आये हैं।मौसम की यह लुकाछिपी रोज़ का ही ढंग हो गयी है। कार्तिक के महीने में अमूमन आकाश स्वच्छ होता है, पर इस वर्ष जैसे अभी तक सावन-भादों चल रहा है। अभी-अभी नन्हे से बात हुई, वे अपने पुराने पड़ोसी की बेटी के पहले जन्मदिन की पार्टी में गये हुए हैं। जून ने रंगोली के रंग मँगवाये हैं, कल फूल भी आ जाएँगे। शाम को गुरुजी का सत्संग सुना, जब असम में थे तो वह सोचती थी, रोज़ ही आश्रम जाएँगे, पर इतने ट्रैफ़िक में रोज़-रोज़ कार चलाना और पार्किंग करना इस उम्र में इतना सरल नहीं है।


Thursday, May 14, 2026

पिनोकियो

पिनोकियो 


आज असम में ‘विश्वकर्मा पूजा’ मनायी जा रही होगी, उन्होंने ऑनलाइन ही मना ली, नूना ने कविता पोस्ट की, जून ने व्हाट्सएप पर सभी को शुभकामनाएँ भेजीं।।आज पहली बार वे दोनों पिछली लेन के केरल वासी एक पड़ोसी परिवार के यहाँ गये।वे लोग हिन्दी अच्छी तरह जानते हैं। इसी वर्ष वे मेघालय जाने वाले हैं, कई बातें जानना चाहते थे, जून ने उन्हें उपयोगी जानकारी दी।आज मोदी जी का जन्मदिन है, देश भर में कई कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं। वह देश के प्रथम सेवक हैं, देश के कल्याण के लिए पूर्ण समर्पित नेता ! आज उसने आई पैड पर जर्मन विद्वान फ़्रेडेरिक मैक्स मुलर की एक अति प्राचीन पुस्तक पढ़नी शुरू की है, ‘व्हाट वी कैन लर्न फ्रॉम इंडिया’। जो कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में भारतीय सिविल सेवा के उम्मीदवारों को दिये गये उनके भाषणों का संकलन है। ब्रिटिशर्स के मनों से भारत के प्रति पूर्वाग्रहों को दूर करना और भारत की प्राचीन संस्कृति को उजागर करना ही संभवत: उनका उद्देश्य था। 


आज बच्चे साढ़े ग्यारह बजे आ गये और शाम को सात बजे गये।नूना ने ‘कैनवा’ पर कार्ड बनाना सीखा, जो बहुत ही रोचक ग्राफ़िक डिजाइनिंग प्लेटफ़ार्म है, यहाँ कोई आसानी से पोस्टर, कार्ड आदि बना सकता है। कल उसे डेंटिस्ट के पास जाना है।छोटी भांजी से बात हुई, वह बैंगलोर आ रही है, उसके तीन नन्हे दुलारों से मिलकर बहुत अच्छा लगेगा।


डेंटिस्ट ने कहा, नया दाँत इंप्लांट करना पड़ेगा, काफ़ी खर्च होगा व समय भी लगेगा।आज इंग्लैंड की महारानी का अंतिम संस्कार हो गया। 


आज सुबह वे रक्त जाँच के लिए गये, कल दोपहर को रिपोर्ट मिल जाएगी, अगले सोमवार को डेंटिस्ट के पास जाना है। उडिपी में नाश्ता किया, कुछ देर आश्रम में धूप में बैठे और ध्यान किया। वापस आकर उसने दाँतों पर एक कविता लिखी, जो सुबह से ही मन में आ रही थी। हिंदी में दाँतों पर अनेक मुहावरे हैं, एक से बढ़कर एक। बहुत दिनों बाद शाम को ‘विष्णु सहस्त्रनाम जप’ में सम्मिलित होने गई। एक नन्हा सा बच्चा पूरे समय बैठा रहा, शांति से सुनता रहा और बाद में प्रसाद भी लेकर आया। दो हिंदी भाषी महिलाएँ भी मिलीं। शुक्रवार को ‘ललिता सहस्त्रनाम’ का जप होगा।

 

आज रक्त जाँच की रिपोर्ट आ गई है।प्रिडायबिटीज़ के लक्षण हैं। विटमिन डी भी कम है। पहले तो मन कुछ विचलित हुआ, फिर पढ़ा भारत में लगभग २५-३० प्रतिशत लोगों को मधुमेह है, वह भी उनमें एक से एक हो सकती है, यदि समय पर कदम नहीं उठाये। भोजन के बाद या फ़ास्टिंग शुगर टेस्ट नहीं करवाया था, बल्कि HbA1c टेस्ट करवाया था, जो पिछले तीन महीनों के शुगर लेवल को बताता है। कल से खाने में कुछ परिवर्तन करने हैं। दोपहर को सोना भी बंद करना होगा। व्यायाम अधिक करना होगा। आज सुबह समय से उठे थे, प्रातः भ्रमण के बाद छत पर आसन भी किए, हवा शीतल थी। सूर्योदय देखते हुए सूर्य नमस्कार करना तथा धूप की चमक चेहरे पर महसूस करते हुए प्राणायाम करना बहुत ही आनंददायक था।जून को आज दस दिनों  बाद अपनी गाड़ी वापस मिल गई। सुबह वे सब्ज़ी लेने गये थे, अब अधिक महँगी हो गयीं, ऐसा उन्हें लगा।


आज शाम को पाँच बजे भांजी आयी थी अपने तीनों बेटों के साथ, उसके सास-ससुर भी साथ थे। नौ बजे से कुछ पहले वे लोग चले गये, बच्चों को नींद आ रही थी। उनका छोटा सा साथ अच्छा लगा, नाश्ते के बाद उन्हें मैंगो पार्क घुमाने ले गये, झूला पार्क भी। आम के बगीचे में बच्चे बहुत ही सहजता से पेड़ों पर चढ़ गये।झूलों पर भी बहुत मज़ा किया। घर लौटे तो नन्हा उन्हें कंप्यूटर गेम खिलाता रहा। नन्हा और सोनू, बच्चों की पसंद के बहुत से व्यंजन बनाकर लाए थे। 


आज महीनों बाद दीर्घ सुदर्शन क्रिया करने का अवसर मिला। अच्छा लगा। दोपहर को भांजी के आगमन पर एक कविता लिखी और भेजी। उन्हें यकीनन अच्छा लगा होगा पढ़कर, पापाजी को भी पसंद आयी। कल से नवरात्रि का उत्सव आरम्भ हो रहा है।


मोह व आसक्ति आदमी को बहुत दुख देते हैं। आज सुबह से इसका अनुभव हो रहा है, हुआ है। अहम् और ममता दोनों ही आत्मा को अनुभव करने में बहुत बड़ी बाधा हैं। परमात्मा की अखंड समीपता का अनुभव करने के लिए मन को राग-द्वेष से मुक्त रहना होगा। जिस वस्तु, व्यक्ति या परिस्थिति से वे जितना अधिक सुख चाहते हैं, वह उतना ही दुख का कारण भी बनता है। आज शाम को मृणाल ज्योति की  एक मीटिंग में भाग लिया। उससे पूर्व अनुवाद कार्य।


आज शाम वे आश्रम गये थे। ‘कला अर्पण’ के अन्तर्गत कुछ कार्यक्रम देखे। गायन व नृत्य दोनों ही बहुत उच्च कोटि के थे, पर सबसे अच्छा लगा सूर्यास्त का दर्शन,  झुंड में उड़ते हुए पक्षी अपने  नीड़ों की ओर जा रहे थे। हवा शीतल थी और आकाश सिंदूरी ! रुद्र पूजा अभी शुरू नहीं हुई थी, गुरुजी नहीं आये थे, पर जून को घर आने की जल्दी थी, सो वे सात बजे तक घर आ गये। शेष कार्यक्रम यू ट्यूब पर देखा। 


सुबह दस बजे वे डेंटिस्ट के पास जाने के लिए निकले, ग्यारह बजे पहुँच गये। अनुभव अच्छा रहा। ओटी में जाने से पूर्व पीने के लिये ग्लूकोज़ दिया गया। पूरी प्रक्रिया में लगभग दो घंटे लगे।पहले एक दाँत निकाला, फिर दो प्रत्यारोपण किए। अड़तालीस घंटे तक सावधानी बरतने को कहा है। अभी तक तो कोई दर्द नहीं है। डेंटिस्ट के यहाँ से वे नन्हे के घर चले गये, वही खिचड़ी व सब्ज़ी खायी।सोनू ने रात के लिए भी कुछ दे दिया है। उसने बहुत ध्यान रखा। 


आज गुजरात में पहली बार राष्ट्रीय खेलों का उद्घाटन हुआ। सात साल के बाद ये खेल हो रहे हैं, जिसमें सात हज़ार से अधिक खिलाड़ी छत्तीस अलग-अलग खेलों में भाग लेंगे।उसके दाँत में दर्द नहीं है, सूजन अभी भी है। दिन भर घर में ही रहे, विश्राम किया, कल भी ज़्यादातर आराम करना है, परसों से सामान्य दिनचर्या शुरू हो जाएगी।  


सितम्बर का अंतिम दिन ! इस समय दायें गाल में सूजन कम है। आज शाम को टहलने भी गये। पापाजी से बात हुई, बड़े भाई उनके पास आये हुए हैं, उन्होंने ‘पिनाकियो’ फ़िल्म दिखायी पापाजी को। जिसमें एक लड़का पिनाकियो, जब भी झूठ बोलता है, उसकी नाक लंबी हो जाती है। इस चरित्र को लिखा था इटली कार्लो कोल्लोडी ने।उसने आज सुबह-सुबह लिखी अपनी एक कविता प्रकाशित की। जिसका भाव था, वे जीवन का सत्य जानते हैं, पर अपना समय व ऊर्जा व्यर्थ ही नष्ट करते हैं। बहुत दिनों से उनके पांडिचेरी जाने की बात चल रही थी, आख़िर तय हो गया, चार दिन बाद वे जा रहे हैं। आज वहाँ के दो-तीन वीडियो देखे। वहाँ के दर्शनीय स्थलों में बहुत सुंदर समुद्री तट हैं, जो इसे पर्यटकों के लिए आकर्षक बनाते हैं। फ़्रेंच कालोनी, ऐरोविल आश्रम, महर्षि अरविंद आश्रम तथा कई चर्च भी हैं।  प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर एक जंगल भी है। अवश्य ही उन्हें वहाँ बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। 


इतने दिनों से नूना इतनी सारी दवाइयाँ ले रही है। उनका असर आज पता चल रहा है, पेट में हलचल है। टहलना, व्यायाम कुछ भी तो नहीं हो रहा है। दो दिन बाद या फिर परसों से ही व्यायाम शुरू किया जा सकता है। सुबह छोटे भाई का फ़ोन आया, छोटी भतीजी का आज ‘रोका’ होने वाला है। कल बापू का जन्मदिन है शास्त्री जी का भी, एक कविता लिखी है।