Wednesday, April 17, 2019

पीले फूलों की माला



साढ़े तीन बजने को हैं, दोपहर बारह बजे से ही लगातार वर्षा हो रही है. हर तरफ पानी ही पानी हो गया है लॉन में. बाढ़ से असम के कई जिले पहले ही कितने पीड़ित हैं, ऊपर से वर्षा रुकने का नाम ही नहीं ले रही है. प्रकृति की यह विनाश लीला इस सृष्टि चक्र का ही एक भाग है, मानव विवश है इसके आगे. आज एक वीडियो खोला तो एक वायरस का शिकार हो गयी. उसकी तरफ से कई मित्रों को अपने आप संदेश जाने लगे हैं. नन्हे को कहा है, वही कुछ सहायता कर सकता है. मैसेंजर से हट जाना ही ठीक रहेगा भविष्य में अथवा तो फेसबुक से ही. कल लाइब्रेरी से दो किताबें लायी. प्रणव मुखर्जी की एक ‘द ड्रामेटिक डिकेड’ और दूसरी अमेजन के बारे में हैं.

नन्हे ने सहायता की और उसकी तरफ से संदेश जाने बंद हो गये हैं. आज तरणताल में दोनों हाथों का प्रयोग करके तैरना सीखा. धीरे-धीरे ही सही कुछ बात बन रही है. सुबह उठी तो मन टिका था. आज तिनसुकिया जाना है, पूजा के उपहार खरीदने हैं. नैनी व माली के परिवारों के लिए. शिक्षक दिवस के उपहार भी खरीदने हैं. शाम को एक सखी के यहाँ चाय पर जाना है. क्लब की एक सदस्या ने फोन किया, उसे प्रेस जाने के लिए गाड़ी चाहिए. कल शाम वह बहुत परेशान थी. प्रेसिडेंट ने उसे फोन पर कुछ ऐसा कह दिया था जो उसे रास नहीं आया. कुछ देर बात करने के बाद वह खुश हो गयी, सारे दुःख उनके मन की कल्पना से ही बनते हैं और बढ़ते हैं. आज वैदिक टीवी देखा, सुना, कितना उपयोगी है यह साधकों के लिए. सुबह गुरूजी के साथ ‘सत्यं परम धीमही’ ध्यान किया. बड़ी भांजी से बात की, वह आजकल फेसबुक पर उदासी भरी पोस्टस् डालती है.

आज गणेश पूजा है, उन्होंने सुबह घर में गणपति की मूर्तियाँ सजायीं. लड्डू का प्रसाद बनाया. जून और उसने आरती की. नैनी ने पीले फूलों की माला बनाई. गणपति के प्रतीक की व्याख्या सुनी. उनके बड़े सिर, विशाल उदर और कानों, लंबी सूंड और उनकी सवारी, सभी के बारे में गुरूजी ने कितने सरल शब्दों में समझाया. पूजा का अर्थ है पूर्णता से उत्पन्न भाव, शुभता के प्रतीक गणपति उनके मनों को शुद्धता से भरें यही प्रार्थना उन्हें करनी है.

ग्यारह बजने को हैं. टीवी पर प्रधानमन्त्री के ‘मन की बात’ आने वाली है. आज धूप बहुत तेज है. प्रातः भ्रमण के समय ही सूरज की चमक आँखों को चुंधिया रही थीं. पीएम का सम्बोधन आरम्भ हुआ तो वे सुनने बैठ गये, अच्छा लगता है उनकी प्रेरणादायक बातें सुनना. राष्ट्रीय खेल दिवस के बारे में उन्होंने बताया और खेलों के महत्व के बारे में भी. नेवी में काम करने वाली छह महिलाओं का जिक्र किया जो तरिणी पर एक वर्ष के लिए विश्व भ्रमण पर जाने वाली हैं. शिक्षक दिवस पर भी वह एक अभियान चलाना चाहते हैं, जिसमें शिक्षा बदलाव के लिए हो और सीखना जीने के लिए हो. ‘जन धन योजना’ के कारण बैंकों में हुई बचत का जिक्र भी किया. जैन समाज के पर्व ‘पर्यूषण’ का महत्व बताया, जो क्षमा, मैत्री और अहिंसा का प्रतीक है. गणेश चतुर्थी का पर्व एकता, समता और शुचिता का पर्व है. ओणम प्रेम, सौहार्द, उमंग और आशा का संदेश देता है. सामाजिक समरसता का भी उल्लेख किया, जमैतुला हिन्द के कार्य कर्ताओं ने गुजरात के मन्दिरों और मस्जिदों की सफाई की. जाने कितने लोगों को कुछ करने की प्रेरणा देता है उनके संदेश.




Tuesday, April 16, 2019

लालकिले पर तिरंगा



आज नेट नहीं चल रहा है. लगातार वर्षा हो रही है. पिछले तीन दिनों से वे सुबह निकल नहीं पाते. जून के दफ्तर जाने के बाद जब वर्षा कुछ कम हुई, वह छाता लेकर भ्रमण पथ पर घूमने गयी. पांच-छह मजदूर वर्षा में भीगकर काम कर रहे थे, दो-तीन औरतें भी थीं. एक महिला अत्यंत बूढ़ी है पर उसे भीगने से सर्दी होने का जरा भी भय नहीं है. वह अक्सर कई बोरियां भरकर घास काटती है, अपने लिए या बेचने के लिए, पता नहीं. वर्षा में भीग रहे हैं मजदूर सो अलग पर उनके पास उचित उपकरण भी नहीं होते. सरकार की मदद इनके पास पहुँचे इसकी जिम्मेदारी कम्पनी को लेनी चाहिए. उसने सोचा चाय पिलाकर उनकी थोड़ी सी मदद कर सकती है, पर वे काम में व्यस्त थे और अब तक तो शायद वे चले ही गये हों. आज भी गुरूजी का प्रवचन सुना, हर बार सुनने पर कोई नई बात सुनने को मिलती है. वे पूरी बात सुनने का श्रम नहीं उठाते या तो उनकी क्षमता ही नहीं है. जब तक पिछले वाक्य को समझते हैं, एक वाक्य और बोला जा चुका होता है. कल जून का जन्मदिन है.

आज लालकिले से प्रधानमन्त्री का भाषण सुना, मन जोशीले भावों से भर गया है. उन्होंने कहा, हर भारतीय को शुभ संकल्प लेने हैं और उन्हें सिद्द होते हुए देखना है. आज देश में सकारात्मक माहौल बन रहा है. भारत की आजादी को सत्तर साल हो गये हैं और अब समय आ गया है कि हर भारतवासी अपने कर्त्तव्यों के प्रति सजग हो और अपने तौर पर कुछ न कुछ काम करे. वे स्वतंत्र भारत के नागरिक होने का हर लाभ उठाते हैं. देश को आगे बढ़ाने का जज्बा लेकर उन्हें साथ-साथ काम करना है. वे स्वच्छता के काम में अपना योगदान दे सकते हैं. देश की सुरक्षा के लिए काम करने वाले सैनिकों के लिए उनके दिलों में गर्व की भावना हो. देश के अंदर की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी हर किसी की है. सुबह वे लोग नेहरू मैदान भी गये. लोगों की भीड़ और तिरंगे के प्रति उनके प्रेम को देखकर सभी उल्लसित थे. उनकी सोच यदि सकारात्मक होगी तो शरीर भी स्वस्थ रहेगा. पुराने कर्म अपना फल देंगे, पर वर्तमान में यदि वे सजग रहें और समभाव से उन्हें सहन करते जाएँ तो नये कर्म नहीं बंधेंगे. जून के जन्मदिन का भोज आज दोपहर को कुछ मित्रों के साथ किया.

कल ही जन्माष्टमी का उत्सव भी था, शाम को पूजा कक्ष की सफाई की. कृष्ण के चित्र पर माला चढ़ाई, कितने सुंदर लग रहे हैं कृष्ण फूलों के मध्य ! गुरूजी का जन्माष्टमी पर दिया विशेष वक्तव्य पढ़ा. देवकी देह का प्रतीक है और वसुदेव मन का. कृष्ण उनके ही भीतर जन्म लेते हैं, जब अहंकार नष्ट हो जाता है. अहंकार ही उन्हें आनंद से दूर रखता है. अभी-अभी क्लब की एक सदस्या का फोन आया. प्रेस जाने के लिए कह रही थी. इससे अच्छा है लेख ड्राइवर के हाथ ही भेज दिया जाये. उनका समय और श्रम बचेगा. जीवन कितना अनमोल है, यहाँ एक क्षण भी गंवाने जैसा नहीं है. कल दोपहर का भोजन गरिष्ठ था, रात को सिर में दर्द हो गया. सुबह नींद देर से खुली, वर्षा हो रही थी, सो आज भी टहलने नहीं जा सके. इस समय धूप निकली है.

आज पूरे एक सप्ताह के बाद तैरने गयी. अच्छा लगा, अब पानी में स्वयं को नियंत्रित करना आसान लग रहा है. धीरे-धीरे ही सही कुछ बात बन रही है. पानी में ठंड जरा भी नहीं लग रही थी, न ही गर्मी. आज सुबह उठी उसके पूर्व नींद खुल गयी थी पर तमोगुण की प्रधानता के कारण कुछ देर लेटी रही. सतोगुण में टिकना कभी-कभी सहज ही होता है पर कभी-कभी नहीं. यह असजगता की ही निशानी है. कल छोटी बहन से बात हुई, उसे दाहिनी आँख में कुछ चमकदार रंग दिखाई दिए, आँख की जाँच कराने को कहा है.


Friday, April 12, 2019

झीनी सी फुहार



अगस्त का आरम्भ वर्षा से हुआ है. सुबह वे हल्की फुहार में ही टहलने गये. बाद में वर्षा लगभग रुक गयी थी. आज उसने मोबाइल से खींची एक तस्वीर पर ‘सुप्रभात’ लिखकर व्हाट्सएप पर भेजा, अब कोई सूक्ति लिखना भी सीखना होगा. कल छोटी ननद की भेजी राखी मिली, सुंदर है. दोपहर को उसने भी कुछ राखियाँ बनायीं. आज बाजार जाकर डोरी लानी है, कल भी बनाएगी. इस वर्ष नैनी का पुत्र अस्वस्थ है. अपने हाथ से बनाने में भी अलग आनन्द है. सुबह उठी तो मुंह का स्वाद कटु था, पित्त बढ़ गया लगता है. परमात्मा क्लेशों से अछूता है, वे क्लेशों से ग्रस्त होते हैं. कल माली के पैर में तलवार से चोट लग गयी, टांके लगे हैं, उसका काम भी छूट गया है. जीवन एक संघर्ष है इन लोगों के लिए. आज एक पुराने परिचित का जन्मदिन है, उसने कल एक कविता लिखी उनके लिए जैसे पिछले कई वर्ष में लिखती आई है. बंगाली सखी ने बुलाया नहीं है, वह तो उसे जून के जन्मदिन पर बुलाने वाली है. सुबह ध्यान नहीं हुआ. मन में एक मौन तो निरंतर बना हुआ है. प्रत्यक चेतना का अनुभव होता है, परमात्मा उनके साथ है. उन्हें जो कर्म करने हैं, उसका संयोग तो वही बिठाता है. वे कर्म में अकर्म महसूस करें तो..कर्म की पकड़ छूटने लगती है.

बड़े भाई का फोन आया, उन्हें राखी मिल गयी है, फुफेरे भाई को भी. जून को पिछले दो तीन दिन से सर्दी लगी हुई है. कल सुबह पूल में उतरते समय उसे भी पानी ठंडा लग रहा था, शावर में भी पानी ठंडा लगा और तभी यह विचार आया कहीं ठंड न लग जाये और यही हुआ, कल रात से गले में दर्द था. आँख से पानी आ रहा है. तुलसी व अदरक ग्रीन टी को ओपरेटिव से लायी.

योग दर्शन में सुना, इस जन्म में वे जो कर्म करते हैं, उनके अनुसार ही अगला जन्म मिलता है. उनके संचित कर्मों में से ही कुछ कर्म नये जन्म का कारण होते हैं. जीवन में कुछ चीजें नियत हैं, कुछ अनिश्चित. उनका वर्तमान का पुरुषार्थ ही उसमें फेरबदल कर सकता है. यह भी सत्य है कि कर्म के मूल में यदि क्लेश होगा तभी कर्म का फल मिलता है. कर्मों के आधार पर ही के भोग मिलते हैं, आयु भी कर्मों के अनुसार कम या अधिक होती है..

सुबह से वर्षा हो रही है, सर्दी ठीक नहीं हुई, हीलिंग ध्यान किया कल की तरह. सुबह गुरूजी को सुना, शुद्ध चेतना में स्थित होकर वे अपने शरीर व मन को स्वस्थ रख सकते हैं. वे चाहें तो आत्मा में स्थित रहकर शांति, आनंद, प्रेम, सुख, शक्ति, ज्ञान तथा पवित्रता का अनुभव कर सकते हैं. और क्रमशः श्वसन तन्त्र, हृदय, रक्त वाहिनियाँ, पाचन तन्त्र, पेशी तन्त्र, नर्वस सिस्टम, तथा इन्द्रियों को स्वस्थ रख सकते हैं. रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा सकते हैं.

आज भी सुबह वर्षा के कारण प्रातः भ्रमण के लिए नहीं गये. जून के जाने के बाद वह घर के सामने सड़क पार भ्रमण पथ पर टहलने गयी. श्री श्री का प्रवचन सुना. चेतना द्वारा शरीर का निर्माण, भरण पोषण तथा इलाज होता है. यदि मन चेतना से जुड़ा है, तो स्वस्थ है. मन जिस क्षण स्वयं में ठहर जाता है, ध्यान में स्थित होता है. मन के विकारों का प्रभाव ही देह पर पड़ता है. आत्मा से यदि देह सीधी जुड़ जाती है तो स्वस्थ होने लगती है. वापस आकर गुरूजी का गाइडेड मेडिटेशन किया. आज सर्दी काफी ठीक है. जून कल मुलेठी, काली मिर्च व मिश्री भी लाये. नैनी ने सरसों के तेल का नुस्खा बताया था, वह भी काम में लिया.


Wednesday, April 10, 2019

स्वच्छ भारत



सवा ग्यारह बजने को हैं. आज जून की मनपसन्द पकौड़ों वाली कढ़ी बनायी है. दो सप्ताह तक गाय के दूध की एकत्र की हुई मलाई से ‘घी’ बनाया और बचे हुए अंश में आता भूनकर गेहूँ का चूर्ण भी. सारी सुबह रसोईघर में ही बीत गयी जैसे. अभी-अभी एक परिचिता का फोन आया, स्व्च्छता पर कम्पनी की तरफ से आयोजित ‘स्लोगन प्रतियोगिता’ के बारे में बताया, उसने हिंदी में कुछ पंक्तियाँ लिखी थीं, भाषा शुद्ध है या नहीं, पूछ रही थी. परसों यहाँ कम्पनी की तरफ से स्वच्छता पखवाड़ा मनाने के कार्यक्रम में ‘वाकाथन’ है यानि कुछ दूर तक बैनर लिए पैदल चलना है. रास्ते में गंदगी भी दिखेगी, उसे साफ नहीं करना है बस लोग साफ करें इसका प्रचार करना है. पता नहीं मनुष्य अपने आप को कब तक धोखा देता रहेगा. अचानक तेज वर्षा होने लगी है. घर के बाहर नाले में पानी भर जाता है जो वर्षा समाप्त होने के घंटों बाद तक भी बना रहता है, बड़े नाले से उसका सम्पर्क शायद टूट गया है. आज सिविल विभाग से कोई कर्मचारी देखने के लिए आया है. सुबह तरणताल गयी पर बहुत भीड़ थी, ठीक से अभ्यास नहीं हो पाया. कल से वह समय चुनेगी जब कम से कम लोग हों. कल मृणाल ज्योति की वार्षिक सभा है.

आज जुलाई का अंतिम दिन है. टीवी पर प्रधानमन्त्री का ‘मन की बात’ कार्यक्रम आ रहा है. वह कह रहे हैं, वर्षा मनोहारी है पर बाढ़ की विभीषिका भयंकर होती है. बरसात में हर वर्ष देश के कितने ही भागों में बाढ़ आती है. वह जीएसटी की बात भी कर रहे हैं. उन्होंने भारत छोड़ो आन्दोलन तथा अगस्त क्रांति की बात भी कही. साथ ही कहा, इस वर्ष को संकल्प वर्ष के रूप में मनाएं तो पांच वर्ष में भारत का चित्र बदल जायेगा. संकल्प को सिद्धि में बदलना है. गणेश पूजा का जिक्र करते हुए कहा कि इस पूजा को मनाते हुए इस वर्ष सवा सौ वर्ष हो जायेंगे. प्रधान मंत्री कुछ ही देर में इतने सारे विषयों को लेते हुए इतना सार गर्भित भाषण देते हैं. महिलाओं के सशक्तिकरण की बात की तो साथ ही राखी बनाने वाले कारीगरों की भी.

अगले हफ्ते रक्षाबन्धन का त्यौहार है. अभी अभी मृणाल ज्योति से फोन आया, पूछ रही थी, क्या वह और कुछ अन्य महिलाएं उस दिन स्कूल आएँगी. राखियाँ अभी तक बन नहीं पाई हैं, पर तब तक बन जाएँगी, अन्यथा वे बाजार से भी खरीद सकते हैं. आज तैराकी में हाथ चलाना सिखाया, दांया हाथ उठाकर श्वास लेना है. अब लगता है कुछ आगे बढ़ रही है. आजकल योग दर्शन पर नियमित व्याख्यान सुन रही है, काफी कुछ स्पष्ट हो रहा है. आज शाम को योग कक्षा में ‘क्रिया’ के बारे में ठीक से बताना है. सुना कि अन्तरायों का अभाव होने लगता है जब आत्मदर्शन होता है. कोई कहता है अंतराय खत्म होने पर आत्मदर्शन होता है ! ‘व्याधि’ और ‘उपाधि’ आदि अंतराय ही उन्हें समाधि से दूर रखते हैं. योग के प्रभाव से ही वे स्वस्थ रहते हैं, यानि ‘स्व’ में स्थित रहते हैं. ‘स्व’ में प्रतिष्ठित होने पर ही वे जगत में अभय को प्राप्त होते हैं. चित्त की शुद्धि होने पर ही ‘स्व’ का दर्शन होता है. इन्द्रियों पर जय होने पर ही चित्त शुद्ध होता है. एकाग्रता में ही इन्द्रियों पर जय होती है और चित्त में आत्मा की झलक मिलती है.

Monday, April 8, 2019

महिला विश्वकप




सुबह तैरने गयी, पर आगे नया कुछ नहीं सीखा, अभ्यास किया, कल अवश्य ही पूरी चौड़ाई अपने आप तय करनी है, चाहे कुछ भी हो जाये. सुरक्षित बने रहने से उन्नति नहीं होगी. रविवार था सो जून  घर पर थे, नाश्ते में उन्होंने रवा डोसा बनाया. आज शायद महीनों बाद या वर्षों बाद साधना नहीं की. परसों बेसिक कोर्स का फालोअप है, देर तक अभ्यास हो जायेगा. नाश्ते के बाद हर सप्ताह की तरह पिताजी व दोनों ननदों से फोन पर बात की. छोटी ननद मुंडेश्वरी देवी के मंदिर जाने वाली थी, अब तक लौट आई होगी. दोपहर को योगदर्शन पर आचार्य सत्यजित की व्याख्या सुनी. प्रत्यक्ष और अनुमान से जब उन्हें आत्मा का अनुभव होता है, फिर उसे शब्दों से कहा जाता है, और सुनने वालों में उसे सुनकर जो वृत्ति उठती है, वह उसका ‘आगम’ है. ‘आगम प्रमाण वृत्ति’ भी इसी को कहते हैं. ब्लॉगस पर दो पोस्ट्स लिखीं. दोपहर की योग कक्षा में बच्चों को अंग्रेजी लिखने को कहा, उन्होंने काफी रूचि दिखाई. उसके बाद बाजार से नई इस्त्री खरीदी. एक सखी तथा नैनी के बेटे के लिए जन्मदिन के उपहार खरीदे. इस समय टीवी चल रहा है, आज महिला विश्वकप का फाइनल है. इंग्लैण्ड ने २२८ रन बनाये हैं भारत के दो विकेट गिर गये हैं. खिलाडियों का जोश देखते ही बनता है. दांत में अब दर्द नहीं है, पर सही निदान के लिए परसों डेंटिस्ट के पास तिनसुकिया जाना है.

आज सुबह कितने सुंदर वचन सुने थे, हर क्षण का उपयोग करना जो जान जाता है, वह जीवन का उपयोग करना सीख लेता है. जीवन व्यथा मुक्त हो यह ऐसी कथा इसकी बने ! उन्हें जो भी करना है, बेहतर करना है व्यर्थ कुछ भी नहीं करना है. उनकी चाल शाहों की हो और नींद अति गहरी और प्यारी हो. जो कुछ भी उनके पास शेष बचा है उसे बीज बनाकर बो दें. उनकी सारी ऊर्जा खिलने-खिलाने में लगे. धरती और गगन पर जब देव शक्तियाँ जागृत हों, परम से जुड़कर उस ऊर्जा को वे भीतर भर लें. उनकी नजर समाधान पर हो समस्या पर नहीं. उनकी दृष्टि शुभ हो, दृष्टिकोण शुभ हो, परमात्मा से मन जुड़ जाए. जब परमात्मा उनके भीतर उतर आते हैं तब वह उन्हें वह बुद्धि प्रदान करते हैं कि उनके विचार शुभ हों, भावनाएं शुभ हों, कल्पनाएँ शुभ हों, आचार व व्यवहार भी शुभ हों ! इन शब्दों में उतर कर उन्हें शुभता को धारण करना है. जो कर्म शक्ति दें, प्रेम दें वही कर्म उनके लिए हों, बल्कि कर्म उनके लिए कला बन जाएँ ! उनका जीवन भगवान के प्रसाद जैसा हो ! हर दिन त्यौहार बन जाये और हर कर्म पूजा !   

जून कल गोहाटी गये हैं. दिन भर व्यस्तता बनी रही. सुबह क्लब फिर एक सखी के यहाँ गयी, उसके पिताजी का आज सुबह देहांत हो गया. बंगाली सखी ने वहीं से फोन करके बताया, दुःख में इंसान दूरियां मिटा देते हैं. दस बजे मृणाल ज्योति जाना था. वहाँ एक समाज सेवी से मुलाकात हुई, वह स्कूल के पानी की जांच जून के विभाग की प्रयोगशाला में कराना चाहते हैं. वापस आकर भोजन किया फिर डेंटिस्ट के पास. परसों फिर बुलाया है. शाम को क्लब के प्रोजेक्ट स्कूल की पत्रिका के लिए मीटिंग थी. पूरे समय अध्यक्षा ही बोलती रहीं, उसे एकाध बार ही बोलने का मौका मिला. उनका काम करने का तरीका अलग है, उन्हें उनके स्वभाव को समझ कर ही व्यवहार करना होगा. लौटी तो तीन महिलाएं भजन गा रही थीं, उनके साथ कुछ देर बातें कीं. देर शाम को मूसलाधार वर्षा हुई. जून का फोन आया अभी कुछ देर पहले. वह ट्रेन में बैठ चुके थे. सुबह पहुंच जायेंगे. उसे क्लब जल्दी जाना होगा ताकि समय पर वापस आ सके.

Friday, April 5, 2019

बाड़ी में कुम्हड़ा



रात्रि के साढ़े नौ हुए हैं. शाम को योग कक्षा में आठ महिलाएं आईं थीं. उन्होंने गुरूजी की किताब ‘नित्यदिन के ज्ञानसूत्र’ भी पढ़ी. कल शाम को मीटिंग है सो चार बजे ही उन्हें बुलाया है. दोपहर को भी सर्वेंट लाइन से बच्चे व महिलाएं आये, गर्मी के बावजूद उन्होंने पूरे सेशन में भाग लिया. दोपहर को लंच में खीरा खाने के बाद दांत में दर्द शुरू हो गया, लौंग का तेल लगाया निरापद समझ कर, दर्द तो कम हो गया पर स्वाद की कणिकाएं ही जैसे नष्ट हो गयीं. किसी भी वस्तु का स्वाद नहीं आ रहा है, न मीठा, न खट्टा, न ठंडा..अर्थात स्वाद वस्तुओं में नहीं है, उनकी ग्रहण करने की क्षमता में है. सुबह बाजार भी गयी, राखियाँ बनाने का ढेर सारा सामान खरीदा है.   

परसों लाइब्रेरी से दो पुस्तकें लायी, काश्मीर पर आर.एस.दौलत की लिखी किताब पढ़कर वापस की. बरखा दत्त की किताब This Unique Land लायी है. जून के लिए OIL, पिछली किताब भी आयल वेल्स में हुए ब्लो आउट पर थी. BP के साथ यह दुर्घटना घटी थी, जिस पर बनी फिल्म भी जून ने देखी बाद में. आज महिला क्लब की मीटिंग है, हिंदी के लिए उसे ‘भाग लेने का’ पुरस्कार मिलेगा. पिछले तीन वर्ष तो प्रतियोगिता में भाग ही नहीं लिया, क्योंकि कमेटी में थी. आज मुरारीबापू के ओशो पर विचार सुने. ओशो ने तुलसी के बारे में कई बार कुछ कहा है, पर संत लोग किसी को एक बात से जज नहीं करते. वे बीस वर्ष के थे जब पहली बार मुम्बई में ओशो को सुनने गये थे. दूसरी बार पूना में सुना, देखा. लाओत्से के बारे में उन्होंने ओशो से ही जाना. दांत में हल्का सा दर्द अभी भी है. जून कल आ रहे हैं, शायद कल ही वे डेंटिस्ट के पास जा सकें. आज सुबह स्विमिंग के लिए गयी. कल रात तेज वर्षा हुई, पूल में पानी का स्तर बढ़ गया था.

जून सुबह आ गये, दो टॉप लाये हैं. एक तैरने की पोशाक पर पहनने के लिए दूसरा योग अभ्यास के समय पहनने के लिए. आज से योग दर्शन सुनना आरम्भ किया है. योग के तीन अर्थ हैं, एक जोड़ना, दूसरा समाधि, तीसरा संयमन ! योग दर्शन में योग का अर्थ है समाधि ! समाधि का अनुभव ही तो साधक का लक्ष्य है. ‘मोक्ष’ का अर्थ है छोड़ना, ‘अपवर्ग’ का अर्थ भी अलग होने में है, ‘केवल’ का अर्थ भी हटने का तात्पर्य देता है. समाधि का अर्थ है समाधान, समता रहे मन में और बढ़ती रहे. सम्यक रूप से और अधिक से अधिक समता को चित्त में धारण करना ही समाधि है. जो अच्छा हो और पूरा भी हो, ऐसा चित्त समाधि को प्राप्त होता है.

पौने ग्यारह बजे हैं. धोबी अभी-अभी आकर गया है, अपनी मेडिकल रिपोर्ट दिखा रहा था. उसे सुनाई कम देता है, इसलिए बात ज्यादातर एकतरफा ही होती है. पर हर बार कोई न कोई बात उसके पास होती है. नन्हा जब छोटा सा था तब से वह उनके घर आ रहा है. कान की शक्ति कम होने का न उसे अहसास है न ही कोई चिंता, बड़े आराम से जीवन चल रहा है उसका. आज उसने बाड़ी से मिला कुम्हड़ा बनाया है, एक और मिला है हरा और कोमल. कल शाम को पका हुआ कटहल काटा, बेहद मीठा है और स्वादिष्ट भी. जून को इसकी गंध पसंद नहीं है. उसने नैनी के घर रखवा दिया है. परसों संडे क्लास में बच्चों को देगी. आज को ओपरेटिव गयी, जीएसटी का जिक्र हो रहा था, सभी व्यस्त थे, उनका काम बढ़ गया है, कुछ दिनों में सामान्य हो जायेगा. सुबह तरणताल से लौट कर पोहा बनाया, ध्यान कहीं और था, सब्जी जल गयी. सुबह ड्राइवर भी कुछ देर से आया. कल शाम डेंटिस्ट ने कहा, अभी कुछ करना नहीं है, सुबह-शाम ठीक से देखभाल करनी है. कोई कर्म उदय हुआ है ऐसा लगा. राखी की कविता जून प्रिंट करके ले आये हैं, दोपहर को लिफाफे तैयार करेगी. शाम को क्लब में टेक्निकल फोरम में कोई वक्ता आयेंगे.

Wednesday, April 3, 2019

रुद्र पूजा



आज सुबह पहली बार तरणताल में उतरी, अच्छा लगा पानी में. तैरना आते-आते तो शायद वक्त लगेगा पर पानी साफ था और मौसम भी खुशगवार. वापस आकर सारे कार्य करते-करते आठ बज गये, जबकि नाश्ता जून ने बना दिया था. सोनू से बात की, उसने कहा नन्हे से एक वर्ष में एक आदत छोड़ने को कहा है. वह जैसे शिकायत कर रही थी, कोई भी पत्नी यही करती है. वह पति को सुधारना चाहती है. वैसे ही पति भी शायद यही करता है, दोनों के अपने-अपने तरीके होते हैं. हर आत्मा अपने जीवन को विकसित ही देखना चाहती है. उसे नन्हे पर पूरा विश्वास है क्योंकि वह उसका ही अंश है, जैसे परमात्मा को हर आत्मा पर विश्वास होता है. आज समधिन से भी बात हुई. वह ठीक हैं और तैयारी में व्यस्त हैं. जून और वह कल ही इसके बारे में बात कर रहे थे. कल रात्रि भोजन जून के एक सहकर्मी के यहाँ हुआ और उनकी माँ के हाथ की बनी सुस्वादु खीर भी ग्रहण की. बेहद खुशदिल हैं उनकी माँ. जून ने हरसिंगार की एक कटिंग उनके बगीचे के लिए भिजवाई. आज सुबह भी पेड़ के नीचे से जामुन उठाये, ज्यादातर तो गिरते ही पिचक जाते हैं और वहाँ की जमीन जामुनी हो गयी है.

परमात्मा गुरू बनकर भीतर से चेताता है. आज सुबह उठने से पूर्व देखा, उसके जूते पूजा की वेदी पर हैं. कितना शर्मनाक है यह, तैरना जाने से पूर्व उसने अनजाने में जूते उस खाने में रख दिए थे जिसमें लोग थैले रखते हैं, हो सकता है इसी कारण यह स्वप्न देखा हो. कई बार जल्दी के कारण या असावधानी वश वे स्टोर में किसी सामान को लेने वे चप्पल लेकर प्रवेश कर जाते हैं, जहाँ पूजा का कोना भी है, पवित्रता का ध्यान नहीं रखते. कल से सचेत रहना है, अथवा तो ध्यान आदि के वक्त मन में परमात्मा के सिवा जो व्यर्थ का चिन्तन चलता है उसके प्रति संकेत हो सकता है. उनका जीवन जितना पवित्र बनेगा उतना ही परमात्मा की कृपा का अनुभव वे कर सकेंगे. आज तीसरा दिन था तैरना सीखते हुए, अब कुछ-कुछ समझ में आने लगा है. आज दो-तीन बार पानी भीतर गया पर यह तो होना ही था. कल काव्यालय से एक अन्य कविता के लिए पूछा है शायद अगले माह तक आये.

पिछले तीन दिन सात्विक व्यस्तताओं में बीते. शुक्रवार की सुबह ‘आर्ट ऑफ़ लिविंग’ आश्रम से एक स्वामीजी आये, उनके घर पर ही ठहरे. कल शाम को सिलचर के लिए रवाना हुए. उन्होंने विभिन्न स्थलों पर चार रुद्र पूजाएँ करवायीं, एक एओल सेंटर में और तीन घरों पर. कल शाम जब वे जा रहे थे, कृतज्ञता और आदर से गला भर आया था, गुरूजी का कार्य करते हुए वह जगह-जगह जाते हैं और ज्ञान की बात सुनाते हैं. केरल के निवासी हैं, आरएसएस से जुड़े हैं, गीतांजलि पढ़ना उन्हें अच्छा लगता है, किताबों का भी शौक है, उनके पिता खेती करते हैं तथा भाई व्यापार. इडली खाकर और काफी पीकर उन्हें अपने घर की याद आ गयी. जून ने उन्हें बहुत प्रेम से नाश्ता खिलाया. उनके लिए वह एक कविता लिखेगी. शुक्र की शाम को सेंटर पर रूद्र पूजा थी. उसने सोचा, एक बार वे भी करवाएंगे अपने घर रूद्र पूजा, अगले वर्ष या उसके अगले वर्ष ! शनिवार को क्लब में अनोखी फिल्म ‘जग्गा जासूस’ देखी, अच्छी लगी. कल दोपहर बच्चे आये थे. जून आज तीन दिनों के लिए गोहाटी जा रहे हैं.

Monday, April 1, 2019

सफेद बैंगन



एक लंबा अन्तराल ! इतने दिनों में याद भी नहीं आया कि डायरी लेखन भी करने की वस्तु है. पौने ग्यारह बजे हैं. आज हवा बंद है. एक अजीब सी गंध भी है चारों तरफ, कटहल पक रहे हैं, जामुन पक चुके हैं, पिछले कई दिनों से वर्षा हो रही है, पत्ते सड़ गये हैं, सभी की मिली-जुली गंध है. कुछ देर पहले एक व्यक्ति आया, पूछ रहा था, क्या कटहल बेचने हैं ? उसके पूर्व तीन किशोर बालक आये थे, जामुन तोड़ने. कह रहे थे, बाजार में बेचेंगे. सौ रूपये प्रति किलो बिक रहे हैं. उसे याद आया पिछले वर्ष मृणाल ज्योति के एक अध्यापिका ने कहा था, वहाँ के बच्चों को पका कटहल खिलाने के लिए. उसे फोन करके कहा, वे लोग ले जा सकते हैं. आज भी सर्वेंट लाइन की महिलाओं को योग सिखाना है, पिछले मंगलवार को भी वे आयीं थीं. आज सुबह दांत के डाक्टर के पास गयी, फिलिंग कराने. अभी तक दांया गाल पूरी तरह से होश में नहीं आया है. अभी भी दांत में हल्का दर्द महसूस हो रहा है, शायद आरसीटी करनी पड़े भविष्य में. पित्त बढ़ गया है ऐसा लग रहा है. सबसे पहला लक्षण है आँख में जलन, शरीर में इरीटेशन जैसा कुछ. सिर में भारीपन और भी एकाध लक्षण. कल शाम को जामुन खाए, फिर मूंगफली. रात्रि भोजन में सरसों वाली अरबी. भोजन ही रोग का मुख्य कारण है. कल जून को भी जाना है डेंटिस्ट के पास.

नन्हे का जन्मदिन आने वाला है. जून ने उपहार तो पहले ही भेज दिया है उसे, उसके लिए कुछ लिखना है. दोपहर के भोजन के बाद जून को जल्दी जाना था, वह भी विश्राम करना टाल गयी, कम्प्यूटर पर लिखने के बाद सुस्ती भगाने के लिए एक कप चाय बनाकर पी है. आज ही जून ने कहा दफ्तर में अब वह ग्रीन टी ही लेते हैं. उसने उन्हें समर्थन दिया. कल शाम योग कक्षा में आने वाली महिलाओं ने कहा, उन्हें भी कटहल व जामुन चाहिए. माली से कह तुड़वाकर रखे हैं उसने. सुबह-सुबह नैनी बगीचे से ढेर सारी सब्जियाँ लायी, सफेद बैंगन भी और एक बड़ा सा कद्दू भी, सिंड्रेला की कहानी के लिए सारा सामान !

कल फिर कुछ नहीं लिखा. अब से सुबह ही लिखेगी. दिन भर के कार्यों की सूची भी बन जाएगी. आज घी बनाना है. मृणाल ज्योति के स्टाफ की लिस्ट बनानी है. तीन बजे वहाँ मीटिंग में जाना है, उनके वार्षिक अधिवेशन के लिए भी कविता लिखनी है. शिक्षक दिवस पर दिए जाने वाले उपहारों की सूची बनानी है. टीचर्स वर्कशॉप के लिए रूपरेखा बनानी है. आकाश पर बादल बने हैं, लग रहा है वर्षा कभी भी हो सकती है. कल गुरु पूर्णिमा है, वे सभी आर्ट ऑफ़ लिविंग केंद्र जायेंगे.

गुरू पूर्णिमा की स्मृतियाँ सुखद हैं. कल दोपहर भर गुरूजी के लिए लिखी गयी कविताएँ पढ़ीं और गीत गतिरूप की सहायता से उन्हें ठीक किया. शाम को सेंटर में गुरूपुजा में भाग लिया. ज्ञान के वचन सुने, ऐश्वर्य, बल, सुन्दरता, ज्ञान, कला तथा यश बढ़ाने की इच्छा जिनमें होती है, वे मन की क्षिप्त अवस्था वाले होते हैं. सत्व के साथ रज तथा तम भी उनमें समान मात्र में होते हैं, वे पुरुषार्थी होते हैं, पर उनका मन चंचल होता है. तमोगुण की अधिकता होने पर मन की मूढ़ अवस्था होती है. अधर्म, अज्ञान तथा अवैराग्य की तरफ व्यक्ति प्रवृत्त होगा. सत्व गुण की अधिकता होने पर मन एकाग्र अवस्था में होता है. जब साधक सत्व गुण के भी पार चला जाता है, तब समाधि अवस्था को प्राप्त होता है. उनके संचित कर्म बहुत ज्यादा हैं. उनमें से कुछ कर्मों का फल ही उन्हें इस जन्म में मिलता है. प्रारब्ध कर्म जब तक चलते हैं, तब तक जीवन है, जो नये कर्म वे करते हैं उन्हें क्रियमाण कर्म कहते हैं. उनके प्रति ही साधक को सदा सजग रहना है.

Friday, March 29, 2019

सदिया पुल



रात्रि के सवा दस बजे हैं, जून अभी तक नहीं आये हैं, किसी ऑफिशियल मीटिंग में भाग लेने गये हैं. आज ‘विश्व योग दिवस’ है. सुबह समय पर उठे, योगा प्रोटोकाल के अनुसार प्रैक्टिस की. जून कम्पनी की तरफ से आयोजित सामूहिक योग सम्मेलन में भाग लेने बीहुताली गये. वह ‘पूर्वांचल कारिकारी स्कूल’ गयी जहाँ बच्चों को योग कराया. वापस आकर मृणाल ज्योति में भी योग सेशन का आयोजन किया. शाम को पौने चार बजे संगिनी गयी, जहाँ गायत्री समूह की महिलाओं के साथ चार घंटे तक आर्ट ऑफ़ लिविंग के ‘बेसिक कोर्स’ में भाग लिया. इस तरह आज का पूरा दिन ही योग के नाम था. सुबह से ही आज मौसम अच्छा था. शाम को कोर्स में बहुत दिनों बाद ‘सुदर्शन क्रिया’ की, वर्तमान का क्षण ही वास्तव में जीवन का अवसर देता है, वरना वे अतीत की स्मृतियों को ही ढोते रहते हैं, कभी भविष्य की आशंकाओं को. अब नींद आ रही है. उसने सोचा, जून को संदेश कर देती है, दरवाजा खुला है, आ जायेंगे !

आज कोर्स में कुछ महिलाओं को देखकर लगा, वे सभी कुछ शीघ्र चाहते हैं और जल्दी से बिना कुछ किये चाहते हैं. संसार में कुछ भी पाना हो तो प्रयास करना होता है प्रतीक्षा करनी पड़ती है. अध्यात्म में कुछ पाना है तो कुछ करना नहीं, केवल प्रतीक्षा करनी होती है. जाने अनजाने जो भूलें वे कर बैठते हैं, उनका खामियाजा एक न एक दिन भुगतना ही पड़ता है.

आज कोर्स का चौथा दिन है. अभी तक तो सब ठीक चल रहा है. सभी महिलाएं कोर्स में पूरे उत्साह से भाग ले रही हैं. एक महिला के सिर में कल से दर्द था, आज सुबह फोन आया. अब तक ठीक हो गया होगा. अभी-अभी एक सखी से बात की, सोमवार को ‘सदिया पुल’ देखने जाने का कार्यक्रम है. ब्रह्मपुत्र की उपनदी लोहित नदी पर बना भूपेन हजारिका सेतु या ढोला-सदिया सेतु भारत का सबसे लम्बा पुल, जिसका उद्घाटन मोदी जी ने पिछले महीने ही किया है. रविवार को डिब्रूगढ़ में जगन्ननाथ पुरी की यात्रा है. सम्भवतः कोर्स के बाद वे भी जाएँ, जहाँ पुरी की तरह एक नया विशाल मन्दिर वहाँ बना है. कल शाम को सोनू से बात हुई, उसके दफ्तर में एक लड़की की मानसिक अवस्था ठीक नहीं है, वह काफी परेशान लग रही थी. दीदी ने लिखा है भीतर की शांति का अनुभव योग से हुआ है उन्हें, समय निकालकर अपने साथ बैठना, फिर स्वयं को भीतर तक पहचानना कितना जरूरी है स्वस्थ रहने के लिए.

कोर्स की समाप्ति पर उसने कुछ पंक्तियाँ कहीं

अभय की चट्टान पर घर बनाना है
प्रीत का दिल में सदा दिया जलाना है
दिल के आइने को सदा सच से चमकना है
ज्ञान का दीपक सदा आगे दिखाना है
बाँट देना है जगत में पास जो कुछ भी है निखारें  
यम-नियम को साध कर वे पूर्ण जीवन को संवारें !     


रागी का पेय



कल दोपहर जून आ गये थे, बड़ी ननद ने आम व बर्फी भेजी है. सोनू ने सुंदर सी पोशाक तथा जून स्वयं ‘आर्ट ऑफ़ लिविंग’ आश्रम से नीली योगा कुर्ती लाये हैं. आज बहुत दिनों के बाद चार पोस्ट्स लिखीं. काव्यालय पर उसकी एक कविता कल प्रकाशित होने जा रही है. वर्षों पूर्व उसने ऐसा चाहा था, वह स्वप्न अब पूर्ण होने को है. कल बातूनी सखी का फोन आया, वह एक नया ब्लॉग या या पेज शुरू करने जा रही है अपने विचार लिखने के लिए, जो अन्य महिलाओं को प्रेरित करें. उसने कोई नाम पूछा था अपने पेज के लिए. जून का गला खराब है, यात्रा में काफी थकान हुई, नींद भी पूरी नहीं हुई होगी, इस उम्र में अनियमितता होने पर सेहत तो बिगड़ेगी ही. आज उसने चाय के स्थान पर रागी का पेय बनाकर पीया. बहुत दिनों बाद गुरूजी को एक पत्र भी लिखा.

जानने की शक्ति ही ज्ञान है. परमात्मा ज्ञेय नहीं है, वह ज्ञान है. जब कोई कहे, उसने जान लिया, उसकी जानने की शक्ति समाप्त हो जाती है, इसलिए ब्रह्म अनंत है. उसे जान लिया है, ऐसा कहना ही मिथ्या है. ज्ञान ही व्यक्ति को जड़ सा बना देता है. आज नेट पर अचानक ही ‘शिव सूत्र’ पर गुरूजी के प्रवचन सुनने को मिल गये. एक ही चेतना विभिन्न योनियों में प्रकट हो रही है. हर योनि के प्रति आदर रखना भीतर चैतन्य की निशानी है. वे जब इस संसार के साथ एकत्व का अनुभव करते हैं तो अपने चैतन्य को अनुभव करना सम्भव होता है. देह के साथ जब एकत्व का अनुभव करते हैं तो उसी क्षण पार्थक्य का अनुभव होने लगता है. एक कोशिका से यह देह बनी है, इससे अधिक कलात्मक क्या हो सकता है. कला का सभी आदर करते हैं, यह संसार ईश्वर की एक कला है. जीवंत व्यक्ति ही दूसरों का सम्मान कर सकता है. फिर ज्ञान का बंधन छूट जाता है !

आज सुबह देर तक परमात्मा से भीतर वार्तालाप हुआ. वर्षों पहले का एक वाक्य उभर कर आया और फिर उसे एक गहरे कुँए में धकेल दिया गया, जिसका कोई अंत नहीं था, जिसकी कोई तली नहीं थी, वह कुआं अँधेरा था पर उसकी दीवारें और गोलाई अभी भी स्पष्ट है. अहंकार के प्रतीक वे शब्द वर्षों पूर्व जून के लिए कहे गये थे. कल जब वे फिल्म देखकर आये और दीदी ने फोन पर कहा, आप लोग तो सदा समय का पालन करते हैं. जो शब्द उसने कहे, कि जून को फिल्म अच्छी लगी, वही कारण हैं इस देरी का, तो इसमें भी कहीं अहंकार छिपा हुआ था. स्वयं को विशेष मानकर अन्य को वे स्वयं से कम आंकते हैं, यही तो अहंकार है. फिर भीतर से आवाज उठी, काम समाप्त हो गया ? जिस कार्य की पूर्ति के लिए वह साधना के क्षेत्र में आई थी, वह पूर्ण हो गया. अब समझ में आ रहा है, परमात्मा की राह पर जब वे चलते हैं तो उनका एक हिडन एजेंडा भी होता है. वे स्वास्थ्य, सुन्दरता, यश की कामना से अध्यात्म के क्षेत्र में आते हैं. परमात्मा ही जिसका लक्ष्य हो ऐसे बिरले ही होते हैं. कल से ‘आर्ट ऑफ़ लिविंग’ का बेसिक कोर्स आरम्भ हो रहा है. कम से कम पन्द्रह और अधिक से अधिक बीस महिलाएं प्रतिभागिनी हो जायेंगी.

Thursday, March 28, 2019

ओस की बूँदें



तीन दिनों का अन्तराल ! डायरी लेखन की कला अब जैसे छूटती जा रही है. रात्रि के पौने नौ बजे हैं. जून बंगलूरु हवाई अड्डे से नन्हे के घर जा रहे हैं. पांच-छह दिन बाद आयेंगे. उसे इस समय का उपयोग अपनी साधना में करना होगा. सुबह कितने सुंदर वचन सुने थे, जिनकी सुगंध से मन का कण-कण अभी तक भीगा हुआ है पर क्या कहा था, कुछ भी याद नहीं है. कल से साथ-साथ नोट कर लेना उचित होगा, पर शब्दों का उद्देश्य तो पूर्ण हो ही गया. गुरूजी कहते हैं जो शब्द मौन में ले जाते हैं, वे ही सार्थक हैं. शाम को एक पुरानी परिचिता का फोन आया, दोपहर को भी एक सखी का फोन आया था, कल से इन दोनों को व्हाट्सएप ग्रुप में शामिल कर लेगी. दोपहर वाली सखी नन्हे की तारीफ कर रही थी. उसने इन्हें न केवल अपने घर आने का निमन्त्रण दिया, बल्कि कहा, नाश्ता भी यहीं करें और यहीं से उनकी बिटिया कालेज जाये. उसका कालेज यहाँ से निकट है. वह नन्हे के बचपन की बातें भी बता रही थी, उसका पुत्र और नन्हा साथ ही बड़े हुए हैं. कल ही एक अन्य पुरानी सखी ने फेसबुक पर वर्षों पहले की एक समूह तस्वीर पोस्ट की, उसमें की एक महिला ने कल से ही योग कक्षा में आना आरंभ किया है. वक्त कैसे बिछुड़े हुओं को बार-बार मिलाता है. आज दोपहर मृणाल ज्योति गयी थी. नेट पर दिव्यांगों के लिए सरकार की तरफ से चलाई जाने वाली योजनाओं के बार में पढ़ा. उसे उनके लिए एच आर पालिसी बनाने के लिए कुछ सुझाव देने को कहा गया है. नन्हे और सोनू से बात की, सोनू ड्राफ्ट बनाकर कल तक भेजेगी.  

परमात्मा स्वयं की उपस्थिति जताता है. वह अनंत ज्ञान का सागर है. वही आत्मा रूप से इस देह में व अनंत देहों में विद्यमान है. इस सृष्टि का चक्र कितनी कुशलता से चला रहा है. वास्तव में प्रकृति में सारी क्रियाएं हो रही हैं. यह हाथ कलम के माध्यम से लिख रहा है, चेतन इसका साक्षी मात्र है. बुद्धि में चिन्तन चलता है, मन में भाव उठते हैं, इन्हें भी कोई देखता है. रात्रि के नौ बजने को हैं, जून अपने गन्तव्य पर पहुँच गये हैं. सुबह नन्हे के आसन करते हुए फोटो उन्होंने भेजे, अच्छा लगा. मौसम आज काफी गर्म है. तापमान चौंतीस डिग्री है. दीदी घर आ गयी हैं, और छोटी बहन अपने घर. मंझला भाई अपनी नई पोस्टिंग पर चला गया है. जीवन अपनी गति से आगे बढ़ता ही रहता है.

आज सुबह सवा चार बजे नींद खुली. सुबह होने के बाद भी वातावरण में उमस थी, हवा बंद थी, हरी घास पर नंगे पैर चलने से गर्मी का असर कुछ कम हुआ. प्राणायाम करने बैठी तो एक सखी का फोन आया. उसकी तबियत कल रात से ही खराब है, पतिदेव टूर पर हैं. बुखार, पेट दर्द और सिर दर्द भी. नहाकर हार्लिक्स पीया, फिर सात बजे से कुछ पहले ही उसके घर गयी फिर अस्पताल. नौ बजे घर लौटी, उसके लिए नाश्ता बनाकर आई. उसकी बिटिया को दोपहर के भोजन के लिए निमन्त्रण देकर. उसे चिल्ड्रेन मीट के लिए डांस प्रेक्टिस में भी जाना है. सबसे बड़ा बल है आत्मा का बल और वह जन्मता है श्रद्धा और प्रेम से. स्वयं तथा परम के प्रति आस्था से. किताब जो लाइब्रेरी से लायी थी काश्मीर पर, काफी रोचक है, कुछ देर बाद पढ़ेगी.

शाम के पांच बजे हैं. बाहर धूप है, शायद शाम तक बदली छा जाये. जून मदुराई से वापस बंगलूरू पहुँच गये हैं. आज वे उनका नया घर विला देखने जाने वाले हैं. परमात्मा ने उन्हें कितना कुछ दिया है. इस सुंदर सृष्टि में मानव जन्म दिया, सद्गुरू का सान्निध्य दिया. यह सृष्टि कितनी रहस्यपूर्ण है. यहाँ वे कुछ भी तो नहीं जानते. गुरूजी के सुंदर वचन सुने. कितना अद्भुत ज्ञान उन्होंने सरल शब्दों में दे दिया. आज की सुबह सुंदर थी. हरी घास पर ओस की बूंदे थीं, उन पर टहलना व ज्ञान के मोतियों को भीतर समेटना एक साथ हो रहा था. दोपहर को नैनी बगीचे से ढेर सारी सब्जियां लेकर आई. पड़ोसी के यहाँ भिजवाई, पर उनके यहाँ भी इतनी ही सब्जी हो रही है. इसी बहाने उससे बात हो गयी. कल क्लब की प्रेसिडेंट से ‘योग दिवस’ पर ‘आर्ट ऑफ़ लिविंग’ का ‘बेसिक कोर्स’ कराने के सिलसिले में बात की. अब वह सखी स्वस्थ है पर उसकी बिटिया के हाथ में चोट लग गयी है, एक्सरे कराया है, परसों रिपोर्ट मिलेगी. मिलने गयी तो उसने औरा देखना सिखाया और एक ध्यान के बारे में बताया जिसमें सभी चक्रों पर विभिन्न रंगों का ध्यान करना होता है.

Wednesday, March 27, 2019

नीरज की कविता




सुबह चार बजे वे उठे. वर्षा होकर थम चुकी थी सो प्रातः भ्रमण में कोई बाधा नहीं पड़ी. सड़कें धुलकर स्वच्छ हो गयी थीं और वृक्ष नींद से जैसे जग रहे थे. लौटकर प्राणायाम करते समय आयुर्वेद पर कुछ विचार सुने. मानव की हितायु होनी चाहिए, मात्र सुखायु नहीं, अहितायु तथा दुखायु तो कदापि नहीं. परमात्मा के प्रति पूर्ण समर्पण हो तभी यह घटित होती है. जब वे अपनी अल्प बुद्धि से अपने जीवन को चलाते हैं तो दुःख के भागी होते हैं. जब प्रकृति के नियमों के अनुसार चलाते हैं तो जीवन धारा सहज रूप से बहती है. अस्तित्त्व के साथ एक होकर जीने का अनुभव कितना अलग होता है हर दिन. आज पहली बार किसी ने भीतर से कहा, वह विदेह है, आज से पूर्व न जाने कितनी बार ये शब्द दोहराएंगे होंगे, पर इनका वास्तविक अर्थ आज घटा लगता है. असम्प्रज्ञात समाधि भी एक दिन तो घटेगी ही ! आज नरेंद्र मोदी एप पर आज की सरकार को रेटिंग दी, अच्छा लगा, इस तरह सरकार और जनता के मध्य एक संवाद चलता है. सरकार के इरादे नेक हैं, यह तो उसकी चाल-ढाल से प्रतीत होता है. दो दिन पहले किसी उल्फा उग्रवादी ने तेल की पाइप में बम लगाया, खुद भी मारा गया, हजारों लीटर तेल व्यर्थ बह गया, आदमी की मूर्खता की कोई सीमा नहीं है.

आज क्लब में कविता पाठ प्रतियोगिता है. ‘गोपाल दास नीरज’ की कविता, ‘जब याद किसी की आती है’, उसने ही चुनकर दी थी. उसने भी याद कर ली है, प्रतियोगिता में भाग नहीं लेगी पर अवसर मिला तो सुना सकती है. मौसम अच्छा है. बांग्लादेश में आये ‘मोरा’ तूफान का असर उत्तर-पूर्व पर पड़ना ही था, वैसे उतना ज्यादा भी नहीं पड़ा है. परसों सुबह मंझले भाई से बात हुई, फिर भाभी से भी. भतीजी के साथ जो भी घटा, वह उन्होंने बताया, अब अलग होने के सिवा कोई रास्ता नहीं है. वह दो हफ्ते पूर्व घर वापस आ गयी है. परसों व कल भी दिन भर मस्तिष्क में वही बात याद आती रही. कल शाम को छोटी बहन से बात हुई. जीवन को उनके ही कर्म सुंदर या असुन्दर बनाते हैं. वे ही अनजाने में अपने दुर्भाग्य के निर्माता होते हैं, पर जानते नहीं कि इस दुश्चक्र से बाहर कैसे निकलें. कल जन्मदिन अच्छा रहा, फेसबुक तथा व्हाट्सएप पर ढेरों शुभकामनायें मिलीं. काव्यालय की संचालिका का मेल आया, वह उसकी एक कविता प्रकाशित करना चाहती हैं. दीदी अगले हफ्ते विदेश से वापस आ रही हैं, वहाँ ठंड बढ़ गयी है. परसों उनका जन्मदिन है, केक की जगह वह तरबूज काटती हैं जन्मदिन पर. छोटे भाई ने जून से कहा है, चाची जी के मकान के लिए कुछ मदद आजकल में भेज दें.

जून का प्रथम दिन ! रिमझिम झड़ी लगी है. आज पहली बार उसने रसगुल्ले की सब्जी बनायी. मृणाल ज्योति की पानी की समस्या के बारे में जानने के लिए जून भी आज उसके साथ जाने वाले हैं. उनसे जितना बन सके, समाज की सहायता करनी है. सद्गुरू सेवा पर इतना जोर क्यों देते हैं, अब समझ में आने लगा है. भीतर की शुद्धि तभी हो सकती है जब उनका मन सेवाभाव से युक्त हो. आज दिन भर पढ़ने का समय नहीं निकल पायी. ढेर सारी किताबें हैं आजकल पढ़ने के लिए, लाइब्रेरी की किताबें, उसके जन्मदिन पर नन्हे की भेजी किताबें. उसे नई पुस्तकों को सही प्रकार से रखने के लिए एक उचित स्थान की भी आवश्यकता है. जून आजकल ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ देखते हैं.

आज बहुत दिनों बाद कम्प्यूटर पर कुछ लिखने का मन नहीं हुआ, किताब पढ़ती रही. पानी लगातार बरस रहा है. कल रात स्वप्न में देखा, वह एक छत पर जाती है. लाल और हरे फूलों वाली ड्रेस पहनी है. एक सखी मिलती है, कहती है, वही सुबह वाले वस्त्र पहने हैं, तो वह कहती है, नहीं, सुबह तो श्वेत कुरते पर गुलाबी फूल थे, फिर वह और ऊपर जाती है. बड़ा सा प्लेटफार्म है. उस पर ध्यान करने बैठती है, पर वह चारों तरफ टकराता है बरी-बारी से, फिर नींद खुल जाती है. पिछले दिनों नियमित ध्यान में नहीं बैठी शायद इसीलिए यह स्वप्न आया हो. इस समय मन शांत है, भीतर एक तृप्ति का अहसास भी है. कुछ पाने की लालसा ही मन को अशांत करती है. आज मंझले भाई-भाभी पिताजी से मिलने घर गये हैं, ईश्वर उन्हें भी सद्बुद्धि व शांति प्रदान करे.

Friday, March 22, 2019

उपनिषद का श्रवण




आज से ईशोपनिषद सुनना आरम्भ किया है. उपनिषद उन्हें परमात्मा के निकट ले जाते हैं. भारतीय संस्कृति की आत्मा अध्यात्म ही है. आचार्य सत्यजित सरल ढंग से व्याख्या करते हैं. वह कहते हैं, मुख्य ग्यारह उपनिषदों का अध्ययन वह धीरे-धीरे करायेंगे. ईशोपनिषद सर्वश्रेष्ठ माना जाता है. यह यजुर्वेद के एक भाग से लिया गया है. दस उपनिषद ब्राह्मण ग्रन्थों से लिए गये हैं कुछ आरण्यक ग्रन्थों से भी. विद्या, अविद्या, आनंद और तुरीय में अविद्या को छोड़कर तीन अमृत स्वरूप हैं. आत्मा का स्वरूप आनंद है, उसका गुण ज्ञान अथवा विद्या है, वह अविनाशी है. जो सदा एक रूप में न रहे वह अविद्या है. देह निरंतर बदल रही है. जब कोई पदार्थ किसी विशेष गुण में प्रकट हो जाये तो वह विवर्त कहलाता है. माया, कला अथवा अविद्या परमात्मा का विवर्त है. ब्रह्म का एक चरण विश्व के रूप में प्रकट हुआ है, उसके तीन चरण अमृतमय हैं.  

आज मौसम सुहाना है, वर्षा रात भर होती रही. सुबह वे छाता लेकर टहलने गये. जून को डाक्टर ने एक घंटा टहलने के लिए कहा है, इससे उनका स्वास्थ्य भी सुधर रहा है. उन्होंने विटामिन डी व थायराइड का परीक्षण भी कराया है, रिपोर्ट अगले हफ्ते मिलेगी. सभी प्राणी स्वयं को केवल अन्नमय कोश के रूप में जानते हैं. इस तरह तो वे भोजन पचाने का एक उद्योग मात्र ही तो हैं. वे अन्न पर निर्भर हैं पर केवल अन्नमयकोश ही नहीं हैं, वे देह से परे एक ऊर्जा भी हैं, जो स्वयं में पूर्ण है. कल रात स्वप्न में अपने पीले कुरते में उसने एक सैनिक का अवशेष ले जाते हुए देखा, सूखा हुआ. एक दुर्घटना भी देखी, लोगों को घायल अवस्था में देखकर भी वे निर्लिप्त भाव से आगे बढ़ जाते हैं. पर स्वप्न में भी यह ख्याल आया, देखो, वे उनकी मदद नहीं कर रहे हैं. पिछले दो दिन फिर पूर्ण शुद्धि नहीं हुई. देह भारी हो तो मन भ्रमित हो जाता है.

कल मृणाल ज्योति की मीटिंग थी, दस में से केवल चार ही जन थे. इसका कारण वहाँ के दो नये कर्मचारियों की अपेक्षाएं थीं, उनकी मांग थी. कितना सही है, अपेक्षाएं आनंद को घटा देती हैं. उसे भी कुछ कार्य करने हैं. शिक्षक दिवस पर एक प्रेरणात्मक वर्कशॉप करनी है. स्कूल में हर हफ्ते जाना है. आज ध्यान के बाद हाथों में एक अनोखी ऊर्जा का अहसास हो रहा है. उस एक ने उसके हृदय पर अपना अधिकार कर लिया है. धी, धृति, स्मृति में वही समा गया है. जून ने कहा है वह कंपनी में कार्यरत दिव्यांग जनों की सूची दिला सकते हैं तथा स्कूल के पानी का परीक्षण भी करवा सकते हैं. ये दोनो बातें कल मीटिंग में उठी थीं. जून भी मृणाल ज्योति के आजीवन सदस्य बने हैं. इस माह उसका जन्मदिन है उसने सोचा क्यों न इस बार सर्वेंट लाइन के बच्चों व उनकी माओं को भी पार्टी दे.


Friday, March 15, 2019

नींद और जागरण



आज से नन्हे और सोनू ने योग सीखना आरम्भ किया है, ईश्वर से प्रार्थना है कि वे इसे जारी रखें और अपने जीवन को शुद्धतम बनाएं. आज स्कूल गयी थी, रास्ते में एक सहकर्मी अध्यापिका ने बताया, अभी तक उसके माँ-पिता जी उसका ध्यान रखते हैं और अकेले यात्रा करने पर चिंता व्यक्त करते हैं. उसकी खुद की बिटिया इतनी बड़ी हो गयी है कि जॉब कर रही है पर माता-पिता के लिए बच्चे कभी बड़े नहीं होते. कल कई कविताओं की मात्राएँ ठीक कीं, अतुकांत कविताओं के विषय में पढना होगा.
उसने एक बार पुनः सुना, विवेक का अर्थ है देह से स्वयं को पृथक जान लेना. देह में स्थूल शरीर, सूक्ष्म शरीर तथ कारण शरीर तीनों ही आ जाते हैं. ज्ञानी विदेह अवस्था में रहता है. जगत में रहते हुए भी मुक्त अवस्था में ! साधना के बिना ऐसा होना सम्भव नहीं है. विवेक की प्राप्ति में यह संसार सहायक है पर एक बार विवेक हो जाने के बाद संसार होते हुए भी विलीन हो जाता है. भक्ति, ज्ञान अथवा कर्म के मार्ग पर चलकर मन को शुद्ध करना प्रथम साधना है, जो साधक को करनी है. मन जितना-जितना शुद्ध होता जाता है, पुराने संस्कार नष्ट होते जाते हैं, अथवा तो ध्यान का संस्कार दृढ़ हटा जाता है और अंत में समाधि का अनुभव होता है. समाधि के समय क्या बोध होता है, इसको सुनना ही कितनी शांति से भर जाता है. चित्त समाधि का अनुभव करता है तो उस पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. समाधि के लिए ज्ञान और वैराग्य जीवन में साधना है. मैत्री, करुणा, मुदिता व उपेक्षा यदि जीवन में होगी तभी साधना दृढ़ होगी.

ग्यारह बजने को हैं. ‘आर्ट ऑफ़ लिविंग’ के ‘अभ्यास’ व ‘सत्व’ एप ने उसकी सुबहें ज्यादा प्राणवान बना दी हैं. सुबह क्रिया की फिर सूर्य नमस्कार व पद्म साधना भी. बाद में दो ध्यान किये, रुचिकर थे. कल बड़े भाई व छोटी बहन को भी इस एप के बारे में बताया. मौसम आज बेहद सुहावना है, कल रात वर्षा हुई. कल रात स्वप्न भी थे, जागरण भी था, नींद गहरी नहीं थी, पर वर्षा का पता भी नहीं चला, अर्थात भीतर का होश था बाहर का नहीं. कल दो हफ्ते के लिए नैनी की सास गाँव गयी है, उसके बिना सारे बच्चे व दोनों बहुएँ असहाय महसूस कर रहे हैं, एक-दो दिन में अभ्यास हो जायेगा उन्हें. जून आज जल्दी आने वाले हैं. सुबह अस्पताल गये थे रक्त की जाँच कराने, भोजन के बाद भी एक टेस्ट होगा. महीनों बाद आज कढ़ी बनाई है. काव्यालय से उपहार की सूचना आई है, एक पुस्तक ‘कनुप्रिया’ तथा एक चित्र अथवा तो गीति काव्य का एक सॉफ्टवेयर !

कल शाम नैनी को चावल चोरी करने के लिए मना किया. उसने स्वीकारा तो नहीं पर वह जानती है कि उसके सिवा कोई स्टोर में जाता ही नहीं. आज सुबह आई तो रोज की तरह ही व्यवहार कर रही थी, अर्थात उसका संस्कार गहरा है. परमात्मा ने उसे इस घटना का साक्षी बनाया है तो इसके पीछे कोई गहरा कारण है. उसके भीतर भी संदेह था. रोज सुनती पढ़ती है, ‘विचार ही वास्तविकता बन जाते हैं, अच्छे विचार चुनें’, तो जो विचार भीतर था वही सम्मुख आकर प्रकट हो गया है. न जाने कितनी बार भीतर संदेह का विचार पनपा होगा. यह सही है कि भरोसा किया था पर भीतर गहराई में संदेह भी था. जैसे वह संस्कार बदल नहीं पाती, नैनी भी अपने इस संस्कार को बदलने में अशक्य है. जीवन में उन्हें जो भी अनुभव होते हैं वह उनके ही पूर्व कर्मों के कारण होते हैं. बाहर माली द्वारा भेजा गया एक बूढ़ा व्यक्ति घास काट रहा है, उसे भी थोड़ा सा भोजन आज देना होगा.


Thursday, March 14, 2019

युधिष्ठिर का कुत्ता



दो दिन पहले वे घर लौट आये हैं. आज शाम क्लब जाना है, दो सदस्याओं की विदाई पार्टी है. उसने दोनों के लिए कविताएँ लिखी हैं, कल कुछ मेम्बर्स के साथ निकट के एक गाँव में किसी बालिका विद्यालय में गयी. किशोरी छात्राओं को योग सिखाया, एक महिला डाक्टर ने किशोरावस्था में आने वाले परिवर्तनों पर प्रकाश डाला, उनसे बातें कीं, समस्याएं पूछीं. हर वर्ष किसी न किसी स्कूल में क्लब की तरफ से यह कार्यक्रम होता है. जून एक पुराने मित्र से मिलने आज फ़ील्ड गये हैं. कल विभाग के एक पुराने अधिकारी को उन्होंने बुलवाया, गाडी भेजी, जो निकट ही किसी काम से आये हुए थे. उनका मन विशाल हो गया है, उसमें ऊर्जा भर गयी है. परमात्मा की ऊर्जा !  

आज सुबह स्वप्न में एक कुत्ते को बगीचे से दौड़ लगाते हुए अपनी ओर आते देखा, कल सचमुच में एक कुत्ता देखा था बगीचे में. दो दिन पूर्व सड़क पर चलते समय चार-पांच कुत्तों का एक समूह देखा, एक-दो दिन पहले ध्यान में भी दिखा था. शायद आजकल कुत्तों से जुड़ा कोई कर्म उदय हुआ है. उनके प्रति अचाह का भाव न रहे, वे भी परमात्मा की सृष्टि का अंग हैं. युधिष्ठिर के साथ तो स्वर्ग तक चला गया था कुत्ता. संस्कार परिवर्तन के लिए ही प्रकृति यह सब दिखा रही है. संस्कार परिवर्तन के लिए चाय का कप भी दिखाया है कई बार. अस्वस्थ होने पर त्याग भी दी थी, अब गर्मी के कारण शायद मन ही न हो. मन का मालिक बनना है न कि उसका गुलाम. कल की मीटिंग अच्छी रही. उसने देखा, प्रेसिडेंट कुछ लोगों पर अधिक ध्यान देती हैं, उस दिन एक सदस्या ने सही कहा था. अज बंगाली सखी को संदेश भेजा है, दोपहर को बात करेगी. रूठे सुजन मनाइये...

आज एक सखी से बात हुई, उसका जन्मदिन जब था वे ट्रेन में थे, बधाई देना ही भूल गयी. उसने बताया, उसके पिताजी की मानसिक अवस्था ठीक नहीं है. वह क्रोध करते हैं तथा कुछ सामान घर से बाहर जाकर रख आते हैं. वृद्धावस्था तो परिपक्वता की निशानी होनी चाहिए किन्तु आजकल अनेक लोगों को बुढ़ापे में डिमेंशिया हो रहा है, पता नहीं इसका कारण क्या है. कल दोपहर मूसलाधार वर्षा हुई, आज मौसम गर्म है. प्रकृति के रंगढंग अनोखे हैं. जून बता रहे थे कि आज फिर एक सहकर्मी के जवाब को लेकर परेशान हुए. जब तक वह भीतर शांति का अनुभव न कर लें, इस उहापोह से छुटकारा नहीं. उसने प्रार्थना की, उन दोनों की बुद्धि उन्हें सत्य का खोजी बनाये. वे स्वतंत्र हैं कि ईश्वर की आज्ञा का पालन करें या न करें. यदि वे सभी को ईश्वर में और ईश्वर को सबमें देखते हैं तो किसी की निंदा नहीं करेंगे. जब तक भीतर निंदा दोष है तब तक ईश्वर पर उनका विश्वास संशय रहित नहीं है. परमात्मा पर अटल विश्वास ही उन्हें उसकी सृष्टि को निर्दोष देखने के योग्य बनाता है. ऐसा व्यक्ति किसी से भी द्वेष नहीं करता.

Wednesday, March 13, 2019

गुलमोहर के वृक्ष



मौसम आज भी वर्षा का है, सुबह छाता लेकर टहलने गये, वापसी में वर्षा आरम्भ हो गयी थी. पौने ग्यारह बजने को हैं. भोजन तैयार है, जून के आने में पन्द्रह मिनट का समय है, उसने डायरी उठा ली है. केजरीवाल ने फिर ईवीएम की गड़बड़ी का राग अलापना शुरू कर दिया है. मोदी जी द्वारा किये काम उन्हें नजर ही नहीं आते. बंगाली सखी को संदेश भेजा है, अभी उसने देखा नहीं है, उसके लिए शुभकामनायें ! छोटी बहन ने एक परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है, अभी दो शेष हैं, उसे जो नया जॉब लेना है उसके लिए, विदेश में नौकरी करना इतना भी सहज नहीं है. दीदी भी अपनी बिटिया के पास सुदूर महाद्वीप की यात्रा पर जा रही हैं. कल रात्रि जून ने अपने बचपन के बारे में पहली बार सहजता से बताया. प्राइमरी स्कूल की अपनी अध्यापिका सरोज मैम के बारे में तथा अन्य स्कूलों के बारे में भी. इंटर में उनका दाखिला काफी लेट हुआ था. उन्हें अपने उन स्कूलों में जाने का मन है. अगली यात्रा में वे उस कालेज में जा सकते हैं, जहाँ साथ पढ़ते थे.

परमात्मा की धुन, उसका भजन और उसकी शरण में जब मन को आनंद आने लगता है तो उसे दीन दुनिया की कोई खबर ही नहीं रह जाती ! वह ही पाने योग्य है और भजने योग्य है ! आत्मा कर्म फल को भोगने वाला है, पिछले दिनों जो स्वास्थ्य की समस्या से उसे दोचार होना पड़ा उसका कारण पूर्व में उसके द्वारा किये कौन से कर्म थे, उनका भी स्पष्ट अनुभव हुआ, इतनी तीव्रता से वह अनुभव उसे प्रकृति द्वारा कराया गया. वे वस्तुओं को वैसा नहीं देख पाते जैसी वे हैं, इसे ही निंदा कहते हैं. वे अपने दृष्टिकोण से ही वस्तुओं को परखते हैं, जबकि वास्तव में वे वैसी नहीं होतीं. उनके हर कर्म का फल परमात्मा से मिलने ही वाला है, उनकी जरा भी हानि नहीं होती. यदि वे प्रशंसा के रूप में अपने कर्म का फल पहले ही ले लेते हैं तो ईश्वर की व्यवस्था में इसका भी विधान है. उनके किसी कर्म से यदि अन्य का हित या अहित होता है तो यह उसके कर्मों का हिसाब है. अपेक्षा ही उन्हें आत्मा से नीचे ले आती है. कल पुस्तकालय से एक किताब लायी है, First thing First everyday  अच्छी है. कल उन्हें बंगलूरू की यात्रा पर निकलना है.

इस समय वे बंगलूरु शहर से दूर हवाई अड्डे के पास एक रिजोर्ट में हैं. कल सुबह दस बजे वे यहाँ आये थे. यहाँ का वातावरण सुंदर है. हरियाली है, पंछी हैं, फलों और फूलों के वृक्ष हैं, सुंदर रास्ते हैं. सुबह–सुबह बाहर तक टहल कर आये. गुलमोहर तथा ताड़ के वृक्ष सडक के दोनों ओर लगे थे और रिजॉर्ट के अंदर भी विभिन्न तरह के इंडोर व आउटडोर खेल का इंतजाम है. कमरे वातानुकूलित हैं, जिसमें आरामदेह फर्नीचर है. इसी वर्ष नवम्बर माह में यहीं पर नन्हे और सोनू  का सामाजिक रीति से विवाह तथा रिसेप्शन होने वाला है. कल उन्होंने मैनेजर और शेफ के साथ बैठकर भोजन की सूची के बारे में वार्तालाप किया. पंडित जी भी आकर मिल गये और विवाह नियोजक भी. टीवी पर सुरेश ओबेराय व शिवानी बहन संस्कारों पर बात कर रहे हैं. नन्हा अपने मित्र को हवाईअड्डे छोड़ने गया है. अभी-अभी सोनू ने एक दुखद समाचार सुनाया. कल उसका भतीजा मुंबई में जिस मित्र के यहाँ रुकने वाला था, उसे बचपन से जानता था, वह उनके पारिवारिक मित्र का पुत्र था. वह कल घर शिफ्ट कर रहा था. तीन मित्र और भी थे, सभी ने सहायता की. रात को जब भतीजा सो रहा था तो बाहर शोर सुनकर उठा, पता चला, उसके मित्र ने अठाहरवीं मंजिल से गिरकर जान दे दी है. दो मित्र चले गये, एक लड़का और वह खुद रह गये. सोनू की चचेरी बहन भी मुम्बई में रहती है, उसे फोन किया तो वह रात को दो बजे उसे अपने घर ले आई. मृतक के पिता तंजानिया में हैं तथा माँ कोलकाता में. आज की पीढ़ी की सहनशक्ति कितनी घटती जा रही है. उस आत्मा की शक्ति तो वास्तव में बहुत कम थी. अभी कुछ दिन पूर्व ही उनके एक संबंधी की पुत्री ने ऐसा कदम उठाया था पर वह बच गयी. वर्षों पूर्व कालेज में जल जाने पर एक बार उसने भी ऐसा ही सोचा था. मन की दुर्बलता ही इसके पीछे एकमात्र कारण है और अपने मन की बात किसी से न कह पाने की दुर्बलता भी. नाश्ते का समय हो रहा है, जून के आते ही वे नाश्ते के लिए जायेंगे.