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Thursday, October 29, 2020

नीला आकाश



आज मौसम काफी गरम है, पसीना सूखने का नाम ही नहीं ले रहा था दोपहर को, पर एसी चलाकर बैठे, एक बार भी ऐसा नहीं लगा, शायद इसे ही साक्षी भावमें टिकना कहते हैं। शाम को योग कक्षा में एसी में से काली चीटियाँ बरसने लगीं, गर्मी से बचने के लिए संभवत: वे वहाँ आयी होंगी। बाहर बरामदे में कार्पेट बिछाकर सबने साधना की. पश्चिम बंगाल में हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। एक आतंकवादी हमले में कश्मीर में सीआर पी एफ के जवान मारे गए हैं। ‘’जीन  पर लिखी किताब अब कठिन होती जा रही है,  सोचा है फिर भी पूरा पढ़ेगी।  कितने वैज्ञानिकों की मेहनत का फल होती है एक खोज। जून ने रिटायरमेंट से पहले होने वाली तैयारी आरंभ कर दी है। 

 

आज भी गर्मी बहुत थी, शाम को अचानक वर्षा होने लगी, पर बूँदाबाँदी तक ही सीमित रही। आजकल लगभग रोज ही ऐसा होता है। योग कक्षा में एक साधिका पुदीने की शिकंजी बनाकर लाई, जो वे योग दिवस पर सबको पिलाने वाले हैं। आज उनकी कार बंगलूरू के लिए रवाना हो गई। उनसे पहले वही पहुँच जाएगी। एक मित्र परिवार को भोजन पर बुलाया था, वह  सेवा निवृत्त हो चुके हैं। उनके दातों का इलाज चल रहा है, खिचड़ी बनाने को कहा था उन्होंने स्वयं ही। हींग वाले आलू, बेक की हुई सब्जियां और घी के साथ खिचड़ी जब उन्होंने खाई तो बार-बार कह रहे थे, उनके लायक भोजन बना है, खाने में जरा भी दिक्कत नहीं हुई। इस माह के अंत तक वे लोग चले जाएंगे। शाम को क्लब में रिहर्सल थी, अभी दो दिन और होगी, तीन दिन बाद कार्यक्रम है। फैशन परेड के लिए रैम्प पर चलना इतना भी कठिन नहीं होना चाहिए। 


आज सुबह जून टूर पर गए हैं, परसों आ जाएंगे। सुबह दक्षिण भारतीय नाश्ता बनाया था। योग कक्षा  में बच्चों को योग प्रोटोकाल के अनुसार योग कराया, बाद में योग पर एक प्रश्नोत्तरी और योग दिवस पर उन्हें एक चित्र बनाने को भी दिया। शाम को बगीचे में बैठकर ध्यान कर रही थी कि  पूनम का चाँद दिखा, तस्वीरें लीं, चाँद को देखकर सदा ही मन में उमंग की एक लहर दौड़ जाती है, ग्रहों का कितना प्रभाव पड़ता है जीवन पर। बचपन में आकाश के नीचे लेटकर वे बादलों को देखा करते थे, मन भी जैसे आकाश जितना फैल  जाता था। आज पहली बार यू जी कृष्णामूर्ति को सुना। गुरुजी को भी सुना, नींद और भोजन ऊर्जा को बढ़ाने वाले हों न कि सुस्त बनाने वाले, ऐसा उन्होंने कहा। 


आज का दिन कैसे बीत गया पता ही नहीं चला। सुबह उठने में थोड़ी देर हुई। प्रात: भ्रमण से लौटी तो रोज गार्डन के सामने फूलों की चादर बिछी थी। पीले फूलों से गेट  से सड़क तक जैसे कालीन बिछ गया था। वापस लौटकर तस्वीरें उतारीं, एक वीडियो भी बनाया। स्कूल जाना था, बच्चों को संगीत के साथ योग कराया, प्रिंसिपल ने कहा, योग दिवस टीचर्स के साथ ही मनाएंगे। वापस आकर कुछ देर कंप्यूटर पर बैठी। दोपहर बाद मृणाल ज्योति, लौटकर, शाम की योग कक्षा फिर क्लब, वापस आकर कुछ देर ध्यान किया फिर रात्रि भोजन।  


और सुदूर अतीत में .. उस दिन के पन्ने पर विनोबा भावे की सूक्ति थी, “दूसरों को प्रेम करने से प्रेम मिलता है।” उसने लिखा.. और वह दुनिया से प्रेम करती है, सारी दुनिया से और ईश्वर से.. और उसके प्रिय जनों से भी। उस दिन एक और पेपर हो गया, कैसा हुआ यदि कोई पूछे तो कहना पड़ता, बुरा, फिर उसने स्वयं को सुधारा, इस दुनिया में ‘बुरा’ शब्द के अलावा कुछ भी बुरा नहीं है, उसे इस शब्द का प्रयोग कभी नहीं भाया। यदि कुछ पसंद न आए तो वह ‘अच्छा नहीं है’ ही  कहती थी। उसने सोचा पचास प्रतिशत अंक तो मिल ही जाएंगे, कुछ न से तो कुछ होना ही अच्छा है। अब चार दिन के बाद केवल एक ही पेपर शेष था। कालेज से लौटते समय जिस व्यक्ति ने उसे सीट दी, बुजुर्ग था,पढ़ा-लिखा था । शहर में आप किस मोहल्ले को बिलॉंग करती हैं ? यही प्रश्न था जो शायद वह पूछ रहा था, बस के शोर में उसे कुछ सुनाई नहीं दिया बाद में जोड़ने पर यह समझ में आया पर वह चुप बैठी रही। 


Tuesday, July 24, 2018

फूलों की माला



रात्रि के साढ़े आठ बजे हैं, समाचारों में देश के कई राज्यों में बढती हुई गर्मी के समाचार आ रहे हैं, जबकि यहाँ असम में तेज वर्षा हो रही है. इसके पूर्व ‘सिया के राम’ देखा. शिवानी को सुनते हुए रात्रि भोजन किया. शाम को वर्षा रुकी तो कुछ देर ड्राइव वे पर ही टहलते रहे. आज से उज्जैन में ‘सिंहस्थ कुम्भ’ आरम्भ हो रहा है, आज दस लाख लोगों ने स्नान किया शिप्रा नदी में. नर्मदा और शिप्रा का संगम है उज्जैन में. समाचारों में सुना, प्याज की फसल इतनी हो गयी है कि दाम बहुत घट गये हैं.
आज एक बार फिर अनुभव हुआ कि स्वयं के संस्कारों को स्वीकारना जिसने सीख लिया, वही अन्यों के संस्कारों को भी स्वीकार कर सकता है. जो भी और जैसे भी संस्कार उन्हें मिले हैं, कर्मों को दोहराते रहने से बने हैं. यदि उनको बदलने में उन्हें इतना वक्त लगता है तो वे दूसरों से कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि उनके एक या दो बार कहने से वे बदल जायेंगे. सबकी गहराई में जो बेशर्त प्रेम का झरना बह रहा है उसे बहने देने का एकमात्र यही उपाय है कि हरेक को वह जैसा है वैसा ही स्वीकार लिया जाये और फिर उसके वास्तविक रूप से उसका परिचय कराया जाये ! जब वे स्वयं का निरीक्षण करते हैं और उस पर निर्णय सुनाते हैं तो भीतर एक संघर्ष चलता है, जिसका परिणाम कभी सुखद नहीं हो सकता. वे इस दुनिया में अपने मूल स्वरूप को अनुभव करने तथा उसे व्यक्त करने के लिए आए हैं. उसकी झलक उन्हें कई बार मिलती रही है, स्वयं को अन्यों से ऊंचा बनाने के चक्कर में वे अपनी ही नजरों में छोटे बनते जाते हैं ! वे अपनी शक्ति को उन बातोँ में खर्च करते हैं जो उनके ही विरुद्ध हैं, ख़ुशी भी एक ऊर्जा है और जितना वे इसका निर्माण करते हैं, उतना यह उन्हें स्वस्थ करती है. प्रेम, विश्वास ये सभी सकारात्मक ऊर्जाएं हैं, जिनका निर्माण उन्हें करना है और बाहर व्यक्त करना है. भीतर की वृत्ति यदि श्रेष्ठ हो तो दृष्टि भी पावन हो जाती है.

आज रविवार है, दिन में वर्षा कम हुई थी, रुकी थी पर इस समय रात्रि के साढ़े आठ बजे पुनः मूसलाधार वर्षा आरम्भ हो गयी है. ‘सिया के राम’ देखना शुरू ही किया था, जिसमें जटायु की कथा दिखाई जा रही थी, कि टीवी पर सिगनल आना बंद हो गया. सब्जी बाड़ी से तोड़ी सब्जियाँ आज भोजन का अंग बनीं, सुबह हरे प्याज की रोटी, शाम को सहजन की सब्जी. दोपहर को नन्हे से बात हुई, वह नया बेड खरीद रहा है. दीदी ने बताया, उनके  छोटे पुत्र ने अपनी नयी कम्पनी शुरू की है. बड़ी नन्द की जेठानी को फोन किया, उनके पुत्र के विवाह में उन्होंने बुलाया था, पर वे जा नहीं पाए.
कल शाम की योग कक्षा में एक नयी साधिका आई, उसे वर्षों से पीठ में दर्द है, कोई आसन नहीं कर सकती. शाम को बंगाली सखी के यहाँ गयी, उसने विदेश से लाया एक छोटा सा उपहार दिया और आलू परांठा खिलाया. टीवी पर सुंदर संदेश सुना, ‘रहमदिल, देह अभिमान से मुक्त, एक रस, सभी के प्रति जिसमें सद्भावना हो, चाहे वे विरोधी ही क्यों न हो, ऐसे सद्गुणों से सजी आत्मा, परमात्मा के गुणों की याद दिलाती है. देवताओं के गले में जो फूलों की माला पहनाई जाती है, वह वास्तव में उनकी गुण माला होती है. देने की भावना सदा बनी रहे. स्वयं को देवता रूप में तैयार करना है. जब मूर्ति तैयार हो जाती है तो उसको दर्शन देने के लिए खोल दिया जाता है. साधक भी जब तैयार हो जाता है तो पर्दा खुल जाता है. परमात्मा की कृपा सहज ही बरसने लगती है, जब कोई इस पथ पर चलता है और पूर्णता प्राप्त होने पर संसार भी कृपा करने लगता है’. आज सुबह स्कूल जाते समय सड़क के दोनों ओर पानी ही पानी दिखाई दिया, हजारों लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं. बंगलूरू में सूखा पड़ रहा है, वहाँ वर्षा नहीं हुई है पिछले कई दिनों से.

Wednesday, August 19, 2015

नोकिया का फोन


मई महीने का आरम्भ कितनी तेज धूप और गर्मी से हुआ है. दोपहर के एक बजने वाले हैं, आज जून ने उसे नोकिया का सेल फोन लाकर दिया, जो दिल्ली से एक मित्र द्वारा मंगवाया है. उसका गला अब काफी ठीक है.  पिछले दिनों जून ने उसका उसका बहुत ध्यान रखा, वह उसका हितैषी है. उनके प्रेम में कामना है वह स्वयं को जानते नहीं और अभी जो वे जानते हैं उसी को सत्य मानते हैं. कामना वैराग्य को दृढ़ होने नहीं देती. उसे गर्मी ने सताया तो एसी की आवश्यकता महसूस हुई. इसी तरह हर क्षण इस शरीर, मन को संतुष्ट करने के लिए कितने ही साधनों की आवश्यकता होती है. अपनी क्षमता के अनुसार हर कोई उसकी पूर्ति भी करता है. बस इसी में सारा जीवन चला जाता है. परमात्मा की ओर बढ़ते कदम वहीं थम जाते हैं और जगत की चकाचौंध में खो जाते हैं. सुख की तलाश में वे सुख के स्रोत को ही भूल जाते हैं. उसका जीवन एक शांत धारा की तरह अनवरत बह रहा है, इसकी मंजिल प्रभु है, इसका जल आत्मज्ञान है. उसके भीतर की शांति अखंड है, सभी कामनाओं से परे !  

उसका मोबाइल फोन काम करने लगा है, अभी उसे बहुत कुछ सीखना है, sms करना, game खेलना उसमें प्रमुख है. जून आज दिल्ली चले गये, उन्हें मलेशिया जाना है अगले हफ्ते. नन्हे के आने तक उसे अकेले रहना है. उसके जीवन के सबसे महत्वपूर्ण दो व्यक्ति. यह सही है कि माँ-पिता के बिना तो भौतिक अस्त्तित्व इस देह में होना कठिन है, माँ जाने कहाँ होंगी, जहाँ भी होंगी, अवश्य ही प्रसन्न होंगी. पिताजी से परसों ही बात हुई, उन्हें ख़ुशी है कि वे शीघ्र ही उनसे मिलने जायेंगे. जून को उसने जानबूझ कर कभी भी दुखी करना नहीं चाहा, पर अनजाने में वह उसके कारण बहुत दुखी हुए हैं. वह दिल से पश्चाताप करती है और उनके प्रेम का आदर भी. जून के मन में उसके लिए बहुत प्रेम है, वह शरीर, मन, बुद्धि से परे जा नहीं पाये हैं सो नूना की बातें उनकी समझ में नहीं आतीं, पर वह उनके प्रति कृतज्ञता अनुभव करती है. उनके कारण ही उसकी साधना तीव्रतर हुई है. जो भी अनुभव उसे हुए हैं, उसमें उनका बहुत योगदान है. उसने प्रार्थना की कि उसके अंतर की शुभकामना उस तक पहुंचे. नन्हे को भी उसने मूर्खतावश दंडित किया होगा, पर उसके पीछे ममता रही होगी. उसे भी उसके जीवन में आकर मातृत्व प्रदान करने के लिए बहुत-बहुत प्रेम.. और कोटि-कोटि प्रणाम उसके सद्गुरु को जिन्होंने उसे दूसरा जन्म दिलवाया !


आज से नन्हे की परीक्षाएं आरम्भ हो रही हैं, आज गणित की परीक्षा है जो उसे कठिन लगने लगा है. जून ने वीसा के लिए अप्लाई कर दिया है. योग वसिष्ठ में सत्य ही कहा गया है कि इस जगत में कुछ भी बिना पुरुषार्थ के नहीं मिलता और ऐसा कुछ नहीं जो पुरुषार्थ से न मिले. प्रमोद महाजन यह मानते थे कि जगत में कुछ भी पहले से तय नहीं किया गया है अर्थात वे स्वयं ही अपने भाग्य के निर्माता हैं. उनकी मृत्यु आज बाहरवें दिन हो गयी, एक भाई के हाथों अपने भाई की नृशंस हत्या का यह मामला कितने सवाल उठाता है. ऊंचाई पर जाकर भी अपने परिवार को उपेक्षित नहीं करना चाहिए, पहले अपने इर्द-गिर्द के लोगों के चेहरे पर मुस्कान आए फिर दुनिया और समाज की चिंता कोई करे. लेकिन जो भी आगे बढ़ता है वह अपने पीछे कितनों को रुलाता ही है. हर वस्तु की कीमत चुकानी पड़ती है. यदि व्यक्ति हर समय सजग रहे तो वह सभी को साथ लेकर चल सकता है. आज क्लब में दो टॉक सुनने को मिलीं. प्लास्टिक का बढ़ता हुआ प्रकोप तथा अपनी सेहत के प्रति लापरवाही. एक डांस  का प्रोग्राम बेहद आकर्षक था तथा गीत भी. कल की तरह आज भी सोते समय कमरे के दरवाजों को अंदर से बंद करना उसके मन के भय को दर्शाता है. जहाँ भय है वहाँ प्रेम हो ही नहीं सकता और जहाँ प्रेम नहीं है वहाँ परमात्मा कैसे आ सकते हैं ! परमात्मा तो प्रेम से ही प्रकट होते हैं, तभी उसका मन सूना-सूना सा रहता है, आँखें मुस्कुराती नहीं, होंठ गाते नहीं, कदम थिरकते नहीं ! जैसे कुछ खो गया है, आज पता चला कि जो खो गया है वह और कहीं नहीं उसके ही मन में छुपा है, उस डर के पीछे, उस डर को निकाल दे तो वह उजागर हो जायेगा ! 

Monday, November 10, 2014

अनुपम खेर और बच्चे


गुरू एक डाकिया है जो ईश्वर और मानव के बीच एक माध्यम है जो ईश्वर की सत्यता का परिचय मानव से कराता है, ऐसा उसे लगता है, रोज सुबह टीवी के माध्यम से गुरु आते हैं और प्रेरणादायक संदेश देते हैं. आज सुबह दीदी का इमेल आया, छोटी बुआ की तबियत ठीक नहीं है, पिता वहाँ गये हैं. बुआ का जीवन बचपन से बेहद संघर्षमय रहा है, माता-पिता ने बड़ी उम्र में बेटी को जन्म दिया, शिक्षा पर कोई ध्यान नहीं दिया, वही उनकी सेवा में लगी रही. विवाह भी हुआ तो बड़े संयुक्त परिवार में. कुछ वर्ष बाद पति के साथ अलग रहीं पर उन्हें फालिज का अटैक हुआ और पति उन्ही पर निर्भर हो गये. अंततः वे विधवा हो गयीं. नौकरी करके बच्चों को पढ़ा रही हैं पर बेटा दो बार फेल हो गया. इसी गम में शायद अस्वस्थ हो गयी हैं. मनोवैज्ञानिक को दिखाना पड़ा है. उनके बेटे से अभी  फोन पर बात की काफी ठीक-ठाक संयत भाषा में जवाब दिए, बच्चों की अपनी एक दुनिया होती है इस उम्र में, वह माँ-बाप को उसमें एक सीमा तक ही प्रवेश करने देते हैं. कल उसने आम का आचार बनाया, जून और नन्हे ने भी पूरा योगदान दिया.

साधक को पग-पग पर अपने व्यवहार को आचरण की कसौटी पर कसना चाहिए. अपने मन के वस्त्र को धोते-धोते कहीं यह और गंदा न हो जाये, अभिमान की धूल न उस पर लग जाये. पानी पीते हुए भी यदि प्यास नहीं बुझती, तो इसका अर्थ है पानी नहीं पीया होगा. इसी तरह मन में ईश्वर को धारण करते हुए भी यदि आनंद नहीं है तो अर्थ है कि...कल सुबह उसकी संगीत अध्यापिका के पतिदेव का फोन आया आठ दिन बाद होने वाले एक हिंदी नाटक में उसे अभिनय के लिए कहा है. जून भी मान गये हैं. कल शाम उसे जाना था पर उसी समय एक मित्र परिवार मिलने आ गया.

आज बाबाजी ने मंत्रों की महत्ता पर प्रकाश डाला. गायत्री मंत्र का महत्व सबसे अधिक है. ‘ओं नमो नारायण’, ‘ओं नमो भगवते वासुदेवाय’ तथा ‘ॐ नमो शांति शन्ति शांति’ का जाप भी फलदायक है. उन्होंने नींद लाने के लिए, पाचन शक्ति के लिए भी मंत्र बताये जो उसे याद नहीं हुए. कल शाम को रिहर्सल ठीक-ठाक ही रही, अभी नाटक प्रारम्भिक स्टेज पर है, सिर्फ एक हफ्ते का समय है. आज पड़ोसी और उनके बेटे को लंच पर बुलाया है, पड़ोसिन नहीं है कुछ दिनों के लिए. कल जून को चेक मिल गया जिसे जमा करके उन्हें मकान के पेपर्स मिल जायेंगे.


आज ग्रीष्मावकाश के बाद नन्हे का स्कूल पुनः खुला है. गर्मी पूर्ववत है, उसने सफाई के कार्य को टाल दिया है, दोपहर को नैनी की साड़ी में पीको करना है. नाटक की रिहर्सल कल भी ठीक रही, उसे डायलाग याद हो गये हैं लेकिन उनमें जान डालनी होगी. ‘जागरण’ में गोयनका जी का प्रवचन सुना, विपासना समझ में तो खूब आती है और जब भी अभ्यास किया है लाभ भी हुआ है लेकिन नियमित नहीं, बाबा जी मंत्रोच्चार पर आज भी जोर दे रहे थे. आज ध्यान से पहले इसे भी करना है लेकिन उसे एक रास्ता पकड़ना चाहिए एक साथ दो नावों में पैर रखने से डूबने का खतरा ही ज्यादा है. धूप धीरे-धीरे कम हो रही है, शायद वर्षा होगी. कल शाम वे एक मित्र की बेटी को देखने गये, जो अस्वस्थ है. वहाँ अनुपम खेर के साथ बच्चों का एक कार्यक्रम देखा, बहुत अच्छा लगा. दीदी को इमेल भेजना था पर सर्वर काम नहीं कर रहा है. 

Monday, August 4, 2014

सपने में शार्क


जून ने एक अधिकारी के साथ घटी दुर्घटना के बारे में बताया. डिब्रूगढ़ से ही एक चोर उनके साथ लग गया. नशीली फ्रूटी पिला कर बेहोश किया, सब कुछ ले लिया और रास्ते में खुद उतर गया. शिवसागर में बस का कन्डक्टर उन्हें पुलिस स्टेशन ले गया, जहाँ दो दिन बाद उन्हें होश आया पर उस समय वह भूल चुके थे कि उनके साथ क्या हुआ था. यह दुनिया चोरों को भी जन्म देती है और लुटेरों को भी पर साथ ही पुलिस व रक्षकों को भी.

कल रात उसने अपनी मृत्यु की भविष्यवाणी दो पंडितों द्वारा पढ़ी गयी देखी, स्वप्न में ही मृत्यु पूर्व की अवस्था का अनुभव किया, पहले पहल तो घुटन थी पर बाद में विवेक जाग्रत हुआ और मृत्यु पूर्व जितना समय मिला था सदुपयोग करने की प्रेरणा हुई, अन्य किसी पर कोई असर नहीं पड़ रहा था. कई बार यह स्वप्न भी देखा कि सुबह हो गयी है अब जगना चाहिए. प्रतीक रूप से ये स्वप्न उसे अज्ञान की नींद से जगाने के लिए थे. एक महिला पत्रकार को भी देखा जिसने नूना के बारे में सुना था, उसे उसने सुबह के नाश्ते के लिए बुलाया है कि पता चलता है मात्र अट्ठाईस वर्ष की उम्र में उसकी मृत्यु तय है.

कल रात फिर उसने अजीब स्वप्न देखा, सुबह उठी तो याद था पर लिखने का समय नहीं मिला अब शाम के पांच बजे जरा भी याद नहीं आ रहा है. आज गर्मी काफी है, पिछले कई दिनों के बाद मौसम में बदलाव आया है. कल शाम भाई का फोन आया, वे सांध्य भ्रमण के लिए गये थे, नन्हे ने बात की. राखियाँ उन्हें मिल गयी हैं. बाद में वे एक मित्र के यहाँ गये पर वहाँ की बातचीत में किसी अन्य की चर्चा हुई जो वहाँ उपस्थित नहीं थे, उसे अच्छा नहीं लगा. साधना का प्रथम सोपान है आत्म निरीक्षण.

तीसरी रात फिर एक स्वप्न जिसमें उनके सामने एक ट्रक का एक्सीडेंट होता है, वह उनके ऊपर से गुजर गया वे बच गये पर सामने की दीवार से टकरा गया. ड्राइवर व कन्डक्टर घायल हो गये, खून व चीखें...यह शायद कल शाम क्लब में देखी फिल्म का नतीजा था. फिल्म शार्क मछलियों के मस्तिष्क से निकाले गये द्रव से बनने वाली एक दवाई की रिसर्च पर आधारित थी, जिसमें शार्क प्रयोग के दौरान खुद पर हुए अत्याचार का बदला लेती है और एक-एक करके कई व्यक्तियों की जान लेती है. आज सुबह उठे तो उमस बहुत थी, इस वक्त भी गर्मी से ज्यादा घुटन है, बादल बने हैं पर हवा स्थिर है. जैसे स्थिर पानी गन्दला हो जाता है गतिशील पानी स्वयं को साफ बनाये रहता है वैसे ही हवा के साथ भी है, चलती हुई हवा शीतलता प्रदान करती है. आज उसके पास सिलाई का कुछ काम है सो बाकी कार्यों में से थोड़ा-थोड़ा वक्त बचाया है. सुबह टीवी पर सुना मन में आसक्ति की जड़ें जितनी गहरी होती हैं, ‘मैं’, ‘मेरा’ का भाव उतना प्रबल और यही बांधता है, बुद्धि के स्तर पर तो ये बातें बहुत समझ में आती हैं. कल दोपहर प्रमाद वश देर तक सोयी सो कल की कविता का खाली पन्ना चिढ़ा रहा है. आज नन्हे का science टेस्ट है, कल दिन भर वह तैयारी करता रहा है. कल ‘रिश्ते’ में मरते हुए प्राणी का अजीब चित्रण देखा, मृत्यु के समय कैसी अद्भुत शांति....!  

 



Thursday, April 24, 2014

सरसों का तेल - कितना असली


आज भी मौसम गर्म है. अभी सुबह के साढ़े आठ ही हुए हैं और चेहरा पसीने से भीग रहा है, पर यह धूप कितनों के लिए राहत का साधन भी तो बनी होगी. जून ने आज सुबह पूसी को याद किया, उसे भी वह कई बार याद आती है. आज ही के दिन एक हफ्ता पहले उनका ड्राइवर उसे छोड़ आया था पर यह उनका सीक्रेट है और उन तीनों ने इसे किसी को भी न बताने का फैसला किया है. एक सखी ने उस दिन पूछा था, कल दूसरी ने पूछा फिर भी वे चुप रहे. इसका अर्थ हुआ वे बात को छुपाने में कामयाब हो ही जायेंगे. धीरे-धीरे उनकी तरह लोगों को भी उसकी याद नहीं आयेगी. जहां भी होगी वह ठीक होगी, ईश्वर सबका मालिक है. उसे भी सहारा देगा ही, यूँ भी वह हफ्ता-हफ्ता भर उनके यहाँ से गायब रही थी, अपना गुजरा स्वयं करती रही होगी, इसी तरह आगे भी कर लेगी. कल गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाया, आज फिर जाना होगा जून को, उसने अपने लिए कपड़ा लाने को कहा था, पर समझ नहीं पा रही, उसे कैसा कपड़ा चाहिए, जून को कंफ्यूज्ड कर दिया. जब वे मशीन लेने जायेंगे तब स्वयं ही खरीदेगी. घर जाकर भी कटपीस की दुकान से कुछ और, जो धीरे-धीरे सिले जायेंगे. भविष्य की कल्पनाएँ मोहक हैं, वर्तमान भी शांत व सुखद है. आज मंगल है पर खत लिखने का मंगल अगले हफ्ते होगा. आज BAB का दिन है, रिया का दुःख कब कम होगा ? होगा भी या नहीं ?

कल रात जून के सिर में दर्द था, कल सुबह उन्हें फिर तिनसुकिया जाना पड़ा, धूप बहुत तेज थी और घर के कुछ सामान खरीदने के लिए तेज गर्मी में उन्हें एक घंटा घूमना पड़ा. शाम को काफी थके हुए थे फिर भी उसे बाजार ले गये और नन्हे को कम्प्यूटर क्लास में छोड़ने गये फिर लेने भी. सुबह जब उठे थे तो हल्के बादल थे पर अब फिर धूप उतनी ही तेज हो गयी है. नन्हा सुबह  समय से उठकर स्कूल गया, उसके टेस्ट भी ठीक हो रहे हैं. नूना की तबियत भी ठीक है, सिवाय कुछ दिनों की असुविधा के, यूँ आजकल पहले का सा दर्द नहीं होता, कुछ वर्षों बाद शायद अगले छह-सात वर्षों में उसमें कई परिवर्तन आयेंगे पर उसके लिए अभी से परेशान होने या सोचने की आवश्यकता वह नहीं समझती. समय के साथ-साथ सब कुछ अपने आप बदलेगा जैसे सितम्बर आते ही शेफाली के पेड़ों से खुशबू आने लगती है. पेड़ों को भी बदलते मौसम का अहसास हो जाता है. पूसी की याद आज फिर आई एक बार तो जून को फोन भी किया पर वह मिले नहीं, मन को कठोर कर उसे भूल जाना ही बेहतर है. शामों को जून से होने वाली बहसें, हर समय दरवाजा बंद रखने की फ़िक्र और भी कई छोटी-छोटी बातें !

आज नन्हे का स्कूल बंद था, ‘माधव देव’ की जयंती के उपलक्ष में. शंकर देव के बारे में वह थोड़ा  बहुत जानती है पर ‘माधव देव’ का बस नाम ही सुना है. नाश्ते में ‘दूध-चिवड़ा’ बनाया, खाने में साम्भर, आजकल सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं. आलू-प्याज तो बाजार से गायब ही हो गये हैं. ऐसा लगता है, BJP सरकार इस विषय में कुछ भी नहीं कर रही है. सरसों के तेल में मिलावट के केस बढ़ते ही जा रहे हैं. जून ने आज उनके दफ्तर में होने वाली विश्वकर्मा पूजा के लिए स्वीकृति रूप में पैसे दे दिए पर वे शायद ही जाएँ. सुबह-सुबह एक और ऐसी घटना हुई जिसका उल्लेख करना उचित होगा, उनकी नैनी का बेटा घर में स्वयं को बंद करके तोड़-फोड़ करने लगा, घर के शीशे के गिलास और कप तोड़ दिए उसे पूजा के लिए जींस पैंट चाहिए और उसका टीवी ठीक होना चाहिए यह दो मांगें थीं जिनके कारण उसे डांट पड़ी और उसने इस तरह उसका बदला लिया. उसे वर्षों पहले अपनी चूडियाँ तोड़ना और भाई का ट्रांजिस्टर तोडना याद आ गया, नासमझी में लोग अपना ही नुकसान कर जाते हैं और साथ ही गुस्सा करके अपने शरीर और मन को तो यन्त्रणा दे ही रहे होते हैं. नन्हा आज सुबह से ही व्यस्त है, पढ़ाई, टीवी, कम्प्यूटर और थोड़ी देर व्यायाम, अपने समय को बाँट लिया है उसने. उसके सामने भी अख़बार, पत्रिकाएँ और हारमोनियम हैं.
 


Wednesday, March 26, 2014

आणविक परीक्षण


एक और नये सप्ताह का शुभारम्भ ! मई महीने का अंतिम सप्ताह, आज मौसम फिर साफ है, धूप निकल आयी है, जो एक सखी के अनुसार दो दिनों की वर्षा की बाद भली लग रही है, पर उसे तो वही काले-कजरारे बादलों से घिरा आकाश और ठंडी हवा पसंद है. आज उसे क्लब जाना है शाम की मीटिंग की तैयारी करने. दफ्तर से लौटते समय जून के साथ वापस आएगी.

आज आकाश पर बादल चहलकदमी कर रहे हैं. कल दूसरा पेपर हल करने का प्रयास किया, एक कहानी लिखनी थी, वह तीन सौ शब्दों से ज्यादा नहीं लिख सकी, उन्हें एक हजार शब्दों  की कहानी चाहिए, उसे और श्रम करना होगा और समय देना होगा. सितम्बर से पहले उसे जवाब भेजना है. पिछले दिनों स्वास्थ्य ठीक न होने के कारण विशेष काम नहीं हो सका, अब से दोपहर को दो घंटे नियमित उसे बैठना होगा. अख़बार और पत्रिकाएँ शाम तक इंतजार कर सकती हैं. घर की सफाई का काम भी एकत्र हो गया है, शनिवार को घर में मेहमान आयेंगे, इसलिए घर बिलकुल साफ-सुथरा होना चाहिए. नन्हे की परीक्षाएं भी अगले महीने शुरू हो रही हैं, शाम को उसे भी वक्त देना जरूरी है. फिर कम्प्यूटर.. और सभी के जन्मदिन भी आ रहे हैं, कार्ड्स भेजने हैं. जीवन कितना व्यस्त रखता है.

कल छोटी बहन का पत्र आया, वह वहाँ खुश है, आर्मी की ड्रेस पहन कर जरुर स्मार्ट दिखती होगी उसे जल्दी ही पत्र लिखेगी. आज हिंदी पढ़ाते समय ‘सर्वेश्वर दयाल सक्सेना’ का एक लेख और ‘बच्चन’ की कविता पढ़ाई, बच्चन मधुशाला का प्रयोग करना नहीं चूकते प्रतीक रूप में. कल शाम मीटिंग में एक सदस्या को विदाई दी गयी, उनका भाषण अच्छा था और उनके गीत भी, उनकी तारीफ़ में कही गयी बातें सुनकर कभी-कभी थोड़ी उलझन हुई, पर तारीफ़ को भी खुले मन से स्वीकार करना सीखना पड़ता है हर इन्सान को. आज नन्हे का संगीत का इम्तहान है, वह गाने ठीक से गा पा रहा है, सिखाया जाये तो बच्चे बड़ों की अपेक्षा जल्दी धुन पकड़ लेते हैं. कल जून आशिकी का vcd लाये थे, पड़ोसी की मदद से कम्प्यूटर पर चल सका, पहले भी एक दो बार वह  मदद कर चुके हैं. कल क्लब में वह भी पड़ोसिन के साथ बैठी थी, वह शांत है और मृदुभाषी भी, उसने सोचा उन्हें चाय पर बुलाना चाहिए.

आज फिर एक चमकदार दिन है, पर अभी तक गर्मी असहनीय नहीं है, देश के कुछ भागों में तापमान ४० डिग्री से ऊपर हो गया है, समाचारों में सुना २४८ लोग गर्मी से मर गये हैं. कल शाम वे एक मित्र के वृद्ध माता-पिता से मिलने गये, वृद्ध दंपति बहुत हंसमुख था, खासतौर पर आंटी बहुत बातें कर रही थीं, वह उनसे पहले भी मिल चुकी है और हर बार उनसे मिलना उसे अच्छा लगता है. टीवी पर ‘जी साहेब’ आ रहा है बहुत रोचक कार्यक्रम है, All four character are very cute, smart, witty and humorous!  कल शाम जून देर से आये, कारण पूछा तो बोले, उसके ही काम से देर हुई. उसका फोटो कम्प्यूटर के स्क्रीन पर लाना चाहते थे, जिसे पहले छोटा करके स्कैन किया फिर फ्लॉपी में सेव किया और घर आकर कम्प्यूटर की हार्ड डिस्क में कॉपी किया. स्क्रीन पर जब नई ड्रेस में उसका फोटो आया तो वाकई अच्छा लगा और खुद पर गरूर भी हो आया कि जून उसे इतना चाहते हैं.

काश्मीर मे हालात बदल रहे हैं, कुछ दिन पहले वहाँ एक फिल्म की शूटिंग भी हुई और टूरिस्ट भी जाने लगे हैं. कल पाकिस्तान में भी पांच एटमी तजुर्बात किये गये और बाद में वहाँ आपात स्थिति लागू कर दी गयी. भारत के आणविक परीक्षणों के जवाब में किये गये इन परीक्षणों का क्या असर होगा यह तो समय ही बतायेगा, लेकिन बीजेपी की सरकार ने लोगों के मन में एक चेतना का विकास तो किया है चाहे उनका साधन या माध्यम हिंसा पर ही क्यों न आधारित हो, गाँधी के देश में लोग जब एटम बम बनाने से खुश हो सकते हैं तो यह मानकर भी चलना चाहिए कि वे कभी भी इसके उपयोग का खतरा मोल नहीं लेंगे, क्योंकि उसका परिणाम उन्हें स्वयं ही भुगतना पड़ेगा. आज उसे बाजार जाना है, कल के जन्मदिन के लिए.. जन्मदिन के दिन एक विशेष उत्साह रहता ही है, उसका लाभ उठाते हुए.. घर की विशेष सफाई कल होगी. कल उसने दोनों बहनों को पत्र भेज दिए, ऐसा क्यों होता है कि लडकियाँ या बहनें विवाह के बाद भी अपने पुराने संबंधों को कायम रख पाती हैं, माता-पिता से भाई-बहनों से जुड़ाव को महसूस करती हैं पर भाई ऐसा नहीं कर पाते, शायद बचपन से ही उन्हें अपनी भावनाओं को व्यक्त करना नहीं सिखाया जाता या वे इतने भावुक नहीं होते, कुछ भी हो वे तीनों आज भी एक-दूसरे की बात समझ पाती हैं, कुछ ऐसा है जो तीनों के दिलों में एक सा धड़कता है, साझा है वह तीनों का. काश ! भाइयों में भी ऐसा होता, हो सकता है वे तीनों भी अपने अंदर ऐसा ही महसूस करते हों !


Wednesday, July 3, 2013

क्लोज़अप अन्ताक्षरी



ऐसा लगता है अब से उसे लिखने का वक्त दोपहर को ही मिलेगा, सुबहें स्टार टीवी, जी टीवी और पी टीवी के कारण कितनी व्यस्त हो गयी हैं. समय का पता ही नहीं चलता कहाँ उड़ जाता है. इस समय उसका दिल टीवी में है पर वह जानती है, यह ठीक नहीं है, कोई अपने काम काज ही भुला बैठे किसी टीवी कार्यक्रम के कारण, यहाँ तक कि  नन्हा भी इस छोटी सी मगर बेहद जरूरी बात को समझता है, जून भी कुछ ज्यादा उत्सुक नहीं दीखते, बस वही है जिसके पास कुछ ज्यादा समय है.

आज शनिवार है, ग्यारह बज गये हैं, जून अभी तक नहीं आए हैं. उसने घर की साप्ताहिक सफाई करवाई, अभी कुछ देर पहले स्नान किया, कुछ देर प्रार्थना की और अब कल का अख़बार व डायरी लेकर बैठी है. कल शाम टीवी के साथ थी सो वे अख़बार नहीं पढ़ सके, शाम को एक मित्र परिवार आया और उन्होंने क्लोजअप अन्ताक्षरी देखी, अच्छा लगा यह कार्यक्रम. पर आज सुबह से उसने टीवी नहीं चलाया है, क्योंकि शनिवार है और शाम को वे देर तक देखने ही वाले हैं इसीलिए.

अगस्त का पहला दिन बेहद गर्म है, बिना पंखे के दो मिनट भी रहने से शरीर पसीने से भीग जाता है. इस वर्ष गर्मी की शुरुआत काफी देर से हुई है. ग्यारह बजने बजने को हैं, उसने लंच बना लिया है, जून आज थर्मस में चाय ले गये हैं, उनके ऑफिस में टी बॉय को लेकर कुछ झमेला चल रहा है, परसों शाम को जब वे मित्र की प्रतीक्षा कर रहे थे उन्होंने वे सब बातें उसे बतायीं.

और आज ग्यारह अगस्त आ गया, मौसम आज भीगा-भीगा सा है. कल रात से वर्षा हो रही है, पिछले दिनों लगभग रोज ही लिखने का ख्याल मन में आया पर शुरू के तीन-चार दिन सफाई में निकल गये, फिर उसका स्वास्थ्य ठीक नहीं था, एक दिन सुबह दो पड़ोसिनें मिलने आ गयीं. कल वे तिनसुकिया गये, वह कुछ कपड़े खरीदने की सोच रह थी, एक नीली टी शर्ट जून के लिए, नाईट सूट नन्हे के लिए और गाउन, सलवार कमीज अपने लिए. पर जून की पसंद की टी शर्ट नहीं मिली, न ही गुसी की नाईट ड्रेस नन्हे के लिए. कल उसने इतने वर्षों में पहली बार फोन से घर बात की. आज सुबह से ही मन शांत है, उठते ही ‘जागरण’ सुना, जागरण के नाम से ही दीदी की याद आ जाती है. उन्हें खत भी लिखना है. इन्सान को आईने की तरह होना चाहिए, आईना सब देखता है और दिखाता है पर कुछ पकड़ता नहीं, संसार में रहकर भी संसार से अलग. आज शाम को एक मित्र परिवार भी आ रहा है, उनसे मिलने के लिए भी शांत होना जरूरी है, पता नहीं वे किस मूड में होंगे, उसने प्रार्थना की, ईश्वर उन्हें खुशियाँ दे. नन्हे का आज चौथा यूनिट टेस्ट है, परसों शाम वे किन्ही मित्र के यहाँ थे तो वह ठीक महसूस नहीं कर रहा था, शायद बच्चे घर की महक को ज्यादा महसूस कर पाते हों. कल सुबह उठा तो ठीक था.


Friday, June 7, 2013

बाल कृष्ण का नृत्य


कल सुबह वह व्यस्त थी, ढेर सारे कपड़े इकट्ठे हो गये थे, वाशिंग मशीन न हो तो समय और श्रम कई गुना बढ़ जाते. आज भी ग्यारह बजने वाले हैं, नन्हा रिहर्सल में गया है, वह  क्लब में होने वाली ‘चिल्ड्रेन मीट’ में समूह नृत्य में भी भाग ले रहा है, मौसम आज भी ठंडा है, बल्कि समाचारों में सुना, उत्तर भारत में भयंकर गर्मी पड़ रही है और  ज्यादा वर्षा से गुवाहाटी में जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. कहीं बाढ़ तो कहीं भीषण गर्मी, भारत देश अद्भुत है. उसकी बंगाली सखी को उसका पत्र पढकर कैसा लगा होगा, वह जोर से हंस भी सकती है और उदास भी हो सकती है. अब उसे लिखना छोडकर उन सबके लिए फुल्के सेंकने चाहिए, उसने सोचा. आजकल ऐसा ही होता है, डायरी में दिल की बात लिखने के करीब आते-आते  ही इसे बंद कर देना पड़ता है.

दोपहर के दो बजने को हैं. नन्हा आज भी रिहर्सल में गया है और वहीं से खेलने चला जायेगा. जून रोज की तरह ऑफिस में हैं, वह पिछले आधे घंटे से कल का अख़बार पढ़ रही थी और फिर एक बिजनेस पत्रिका के पन्ने पलटती रही, उसकी रूचि का इसमें कुछ नहीं मिला. एक नॉवेल The Humbler Creation पड़ा है पर समय नहीं है अभी, दो बजे से वह इम्ब्रायडरी करते हुए कुछ देर टीवी देखती है, वैसे देखती कम, सुनती ज्यादा है. अपने जन्मदिन तक उसे यह कुरता पूरा करना था पर अब शायद इसकी जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि उसी दिन उन्हें सिलचर जाना है, TGT centrl school की पोस्ट के इन्टरव्यू के लिए आज सुबह ही जून ने फोन करके बताया. अब उसे अपनी किताबें भी निकालनी होंगी, गणित, केमिस्ट्री और फिजिक्स की किताबें. आज सुबह उसने तल्ख भाषा का प्रयोग किया और जून को  नाराज किया, पर बाद में बहुत पछताती रही, लेकिन वह कोशिश करेगी कि अपनी भाषा को जून के लिए और सबके साथ भी मधुर रखे. आज असमिया टीचर का फोन आया वह भी नाराज थीं, उन्हें किसी ने बताया क्यों नहीं, कुछ दिन क्लास नहीं होगी, शाम को वे पहले उनके घर जायेंगे और फिर क्लब, नन्हे को कविता पाठ में भी भाग लेना है, उसके लिए वहाँ से कविता लिखकर लानी है.

आज नैनी नहीं आई सो साढ़े दस बजे उसके काम खत्म हुए हैं, कुछ देर के लिए पड़ोसिन भी आ गयी, उसकी चाबी पतिदेव के पास रह गयी थी, फोन करके उसने चाबी मंगाई, कल नन्हे का अंतिम कार्यक्रम है ‘ग्रुप डांस’, आज सुबह एक सखी ने बताया, सिलचर में इन्टरव्यू कैसा हो सकता है, उसकी एक मित्र हाल ही में देकर आयी है. कल से ही स्वयं को हल्का अस्वस्थ महसूस कर रही है, शायद यह मौसम का असर है या फिर आने वाले इन्टरव्यू का जिसके लिए वह स्वयं को थोड़ा भी तैयार नहीं पा रही है, उन महिला से बात करने के बाद तो और भी कम. भगवान ही जानता है, क्या होगा. कल वे बच्चों के नृत्य देखने क्लब गये थे, नन्हा कृष्णसखा के रूप में बहुत सुंदर लग रहा था, पर उसके ग्रुप को कोई इनाम नहीं मिला, हाँ, ‘स्किट’ में उनके ग्रुप को एक पुरस्कार मिला है.  



Friday, April 19, 2013

बेल का शर्बत



आज बिजली ने फिर बहुत परेशान किया, पूरी दोपहर.. फिर शाम को भी गायब रही, नौ बजे के बाद आई. गर्मी भी बेहद थी, पसीना बहा देने वाली गर्मी. दोपहर को पाकिस्तानी लेखक ‘इब्ने इंशा’ की आखिरी किताब के कुछ पन्ने पढ़े. तंज बड़ा चुभता हुआ है इस किताब में. उसने जून को तीन कवितायें भेजने का वायदा किया है, कभी ऐसा होगा कि एक ही पल में पंक्तियाँ फूटतीं जाएँगी....मन उभर कर पन्ने पर अंकित हो जायेगा. शाम को वे भाई-भाभी के यहाँ गए, भाई के स्वभाव में गम्भीरता अभी तक नहीं आई है, बिलकुल बच्चों का सा स्वभाव है उसका. उन्होंने बर्फ वाला बेल का शर्बत पिलाया, जो उसे पसंद नहीं आ रहा था,पर वे दोनों इतनी तारीफ कर रहे थे कि उसने भी हाँ में हाँ मिला दी. आने के बाद से ही उसका गला शिकायत करने लगा था. साढ़े दस हो गए हैं, नन्हा सो गया है, दोपहर को सो नहीं पाया ठीक से, उसके दांत में छोटा सा काला पदार्थ फंस गया  था, उसका पूरा ध्यान नहीं रख पाती, वह कभी-कभी. छोटी-छोटी बात पर टोक देती है, कल से इस बात का ध्यान रखेगी. पापा के प्यार से दूर वह उसके पास ही तो रह रहा है, दोनों का प्रेम देना चाहिए न. उसके लिए उससे बढ़कर कुछ है ?

  आज जून का फोन आया, पर दो-तीन बार कट जाने के बाद, बात पूरी न हो सकने के कारण मन कुछ उखड़ा-उखड़ा सा रहा सुबह. फोन पर वह कुछ उदास भी लगे, शायद उसके खत में मकान की परेशानियों की बात पढ़कर, लेकिन अपने और उनके प्रति ईमानदार तो रहना ही चाहिए. उसने सोचा, वे दोनों कितने भी चिंतित हो लें, बातों को दिल से लगा लें. होना तो वही है जो होना है, जहां तक हो सके अपने आपको इन सारी दुनियावी बातों से ऊपर ही रखना चाहिए. उसने सोचा, वैसे भी जून का दिल बहुत बड़ा है, वह सदा की तरह उसकी भूल को भुला देंगे. दोपहर को भाभी, भतीजी आ गए सो घर में हलचल रही. उसने तुलसी-अदरक की चाय पीकर गले को ठीक किया.

 कल से घर के बाहर की पुताई शुरू हो जायेगी. कल शाम को वे अपने घर की छत पर गए, छत पर पड़ी मार्बल चिप्स को बोरी में भरकर रखा, पिता भी वहीं थे. नन्हा भी, शायद उसी धूल से उसकी आँखें फिर हल्की लाल हो गयी हैं. माँ-पिता उनके मकान के लिए कितना श्रम कर रहे हैं. वे सदा उनका भला चाहते हैं, किसी का बुरा न चाहने वाले सीधे-सादे स्वभाव के... सब्जी वाले ने थोड़ी सब्जी ज्यादा दे दी तो परेशान हो जाते हैं कि कल जाकर उसे पैसे  दे देंगे. सुबह पॉलिश लाए तो सोच रहे थे कि गलती से कहीं दुकानदार ने कम पैसे तो नहीं ले लिए. उस दिन अखबार वाले को चालीस पैसे देकर ही माने. मनोरमा में सर्वेश्वरदयाल सक्सेना की कवितायें पढीं.







Tuesday, April 16, 2013

क्रोशिये की लेस



आज जून का दूसरा पत्र मिला, उसके पत्र कितने संयत हैं मगर कितने नेह भरे. उसकी इसी गंभीरता पर तो वह फ़िदा है. वह अपनी बात अच्छे शब्दों में कितनी आसानी से कह जाते हैं. नन्हा अब ठीक है पर कमजोरी का थोड़ा असर अभी बाकी है, ईश्वर ने चाहा तो कल वह बिलकुल स्वस्थ होगा. वह उसके लिए कैल्शियम टैबलेट्स लायी है और कल से दिन में तीन बार बायोकेमिक दवा भी देनी है. आज उसने भी पापा को एक पत्र लिखा है. आज मकान में मीटर भी लग गया व बिजली भी आ गयी है. दो बल्ब वहाँ लगवा दिए हैं, अब काम शुरू हो गया है तो मई के मध्य तक खत्म भी हो जायेगा फिर बाकी की तैयारी रह जायेगी. माँ ने उसे व नन्हे को उपहार में वस्त्र दिए हैं. 

  आज जून का फोन भाई के यहाँ आया पर उससे बात नहीं हो सकी, उसका समाचार मिल गया, मन को राहत हुई. यहाँ का फोन सुबह से डेड है, पता नहीं कल तक ठीक भी होगा या नहीं. अगर जल्दी ही ठीक हो जाये और तब वे उससे बात कर  सकेंगे. उसको आने में पूरा एक महीना रह गया है. उसने सोचा ..पूरा एक महीना...कैसे बीतेगा गर्मी का यह एक महीना. पिताजी ममेरे भाई की पत्नी की क्रिया में शामिल होने एक-दो दिन के लिए दूसरे शहर गए हैं, एक दिन उनके न रहने से कितनी मुश्किलों का सामना उन्हें करना पड़ा. दो बार माँ को नूना और नन्हे को छोड़कर जाना पड़ा, इतने बड़े घर में अकेले रहना अच्छा नहीं लग रहा था. माँ कड़कती धूप में बिजली वाले को बुलाकर लायीं, यह काम ठेकेदार का था पर वह हमेशा की तरह गायब था. शाम को भाई-भाभी आए, उसने क्रोशिये का गोल रुमाल भाभी को दिया, उन्हें पसंद आया, उसे अच्छा लगा. यू पिन तथा क्रोशिये से रेशमी धागे द्वारा लेस बनाना, ये दोनों काम उसे माँ से सीखने हैं. घिसाई करने से थोड़ा सा साफ फर्श निकल आया है, अच्छा लग रहा है.

   फोन अभी तक ठीक नहीं हुआ, उसने सोचा, शायद आज भी जून ने उससे बात करने प्रयत्न किया हो, जरूर ही किया होगा. आज बिजली ने बहुत परेशान किया, पूरी शाम अँधेरे में बीती, नन्हा शाम को दौड़ते समय गिर गया उसके बाएं घुटने में मामूली खरोंच आ गयी है. शाम को भाई के मकान मालिक उनका निर्माणाधीन मकान देखने आये, बढाई के काम की आलोचना कर रहे थे. शाम को उसे जून की बहुत कमी महसूस हो रही थी, उसे उनके साथ ही आना चाहिए थे, वह उससे कहे तो क्या आ पायेंगे, या जब दिल्ली आएं तो कुछ दिन के लिए ही यहाँ आ जायें. काम करवाने का भी एक ढंग होता है, वैसे तो देर-सवेर सभी काम हो ही जायेगा, पर वक्त पर पूरा हो जाये यह तो जून भी चाहेंगे. हजार तरह की मुश्किलें पेश आती हैं मकान बनवाने में, जो वे वहाँ बैठे-बैठे महसूस ही नहीं कर सकते थे. सबसे बड़ी समस्या अब जो आ रही है वह है बिजली, मीटर शायद ठीक से नहीं लगा है, और सिर्फ एक फेज में होने के कारण सुबह दिक्कत पेश आई. अब देखें कल का सूरज अपने साथ क्या लेकर आता है.  



Sunday, April 14, 2013

फर्श की घिसाई



रात को नन्हे को हल्का ज्वर था, भाई क्लीनिक ले गया, उसने भोजन नहीं खाया सिर्फ तुलसी, अदरक की ज्यादा दूध वाली चाय पीकर सो गया, सुबह उठा तो ठीक था.  शायद उस दिन के गरिष्ठ भोजन की वजह से ऐसा हुआ, अब उसका ध्यान रखेगी. उसे घर पर छोड़कर जाने से शायद वह धूप में चला गया हो, उसने सोचा, सचमुच उसे ज्यादा ख्याल रखना चाहिए. जून का एक खत मिला है पर वह उसी दिन का है जब उन्हें ट्रेन में बिठाकर वह वापस घर गए थे, शायद उन्हें भी उसका पत्र मिला हो. बढाई को आज आना था, अगर नहीं आया तो कल पिताजी को उसे बुलाने जाना होगा.  शाम को छोटा भाई-पेंटर भाभी के साथ आया था, वह अपने रंगों से उसकी पेंटिग पूरी कर के लायी थी, उसने जो रंग लाकर दिए थे, उन्हें वैसे का वैसा वापस ले आयी. भाभी ने अपने पेपर क्लीपिंग्स के शौक के बारे में बताया, उसके पास ढेरों कटिंग्स हैं. वे कुछ देर खानों में बारे में बातें करते रहे, उसने आइसक्रीम बनाने के विभिन्न तरीके भी बताए. पिताजी ने पूछा, संगीत क्या है ? नूना कुछ जवाब नहीं दे पायी. दरअसल उसे हारमोनियम बजाना अच्छा नहीं लगता क्योकि उसके साथ गाना पड़ता है, गाना उसके वश का नहीं है, वह भी किसी के सामने.
  कल रात को उसे नींद नही आ रही थी, बेचैनी सी महसूस हो रही थी. गरमी के कारण या भोजन के कारण, मगर उसने किसी को कुछ नहीं कहा, बरसों पहले एक बार ऐसा होने पर पिता की प्रतिक्रिया याद आ गयी सो वह चुप ही रही. सुबह उठी तो जैसे शक्ति कम हो गयी थी, धीरे-धीरे शाम तक सम्भल पायी, सुबह भाभी के साथ बाजार जाने का कार्यक्रम था, उसे कैंसल करना पड़ा, अब वे कल शाम को जायेंगे. जून का फोन आया था, घर के बारे में पूछा, पर उनका जवाब वही पुराना था, काम मजदूरों के न आने के कारण अटका हुआ है. दो दिन पहले ननद का फोन भी आया था, उसने ससुराल आने के लिए कहा, वह ठीक से जवाब नहीं दे पाई, फोन पर सोचने के लिए वक्त कहाँ होता है.

  आज वह वे दो सूट ले ही आई जिनके बारे में वहाँ घर में सोचा करती थी, जून को अवश्य पसंद आएंगे. अभी दुपट्टे लेने बाकी हैं. नन्हे के लिए एक ड्रेस, घर के लिए चम्मच, संडसी और एक चाकू  खरीदा. पिछले दो-तीन दिन से न तो उसका सुबह का व्यायाम हो रहा है न ही शाम का टहलना. कमर का घेरा बढ़ता ही जा रहा है. दोपहर बाद उसने सिंधी कढ़ाई से चादर काढ़नी शुरू की, माँ से हरे रंग से बेल बनाना सीखा, बहुत सिस्टमेटिक है यह कढ़ाई, बहुत धैर्य है माँ के भीतर, नूना बार-बार भूल जाती थी पर वह एक बार भी झुंझलाए बिना दुबारा-दुबारा उसे बताती रहीं, जैसे पहली बार बताया था. आज सुबह उसने जून को पत्र पोस्ट कर दिया, कल उसे सपने में देखा था, उनके साथ बैठना भला लग रहा था. मंझले भाई का खत आया है वह अगले महीने आयेगा उसके वापस जाने से पहले. आज सुबह घिसाई वाला भी आ गया और दोपहर में मीटर भी लग गया.





Tuesday, March 12, 2013

ला ओपेला का सेट



गुलदाउदी के पौधे एक-दो दिनों में मिल जायेंगे, फोन उसकी सखी ने ही किया था, सो उसका यह आक्षेप कि सदा उसे ही फोन करना पड़ता है, गलत सिद्ध हो गया जिसकी उसे खुशी है. शाम को असमिया सखी के घर जाना है, उससे भी बात हुई है, वह उसके नए लाल सूट में इंटर लॉकिंग कर के देगी अपनी नई फ्लोरा पर, और आज सुबह से दो बार प्रेम की अधिकता या भावों की अधिकता के कारण उसकी आँखों में अश्रु झलक आये, कल भी ऐसा हुआ था, कहीं यह उस स्वप्न का असर तो नहीं, या सम्भव है सात्विक भाव प्रगट हुए हों. लेकिन मन ने कल एक-दो बार ऐसा सोचा कि उनकी परवाह किसी को नहीं, उन्हें ही सबकी परवाह है - लेकिन यह सत्य नहीं है, और अगर ऐसा हो भी तो इसमें उदास होने की कोई बात नहीं, बल्कि उन्हें किसी से अपेक्षा करने का कोई अधिकार नहीं. जून के दांत का दर्द कम है, कल उन्हें फिर जाना है. नन्हा आज जल्दी उठ गया था, पर तैयार होते-होते उसे पौने नौ बज गए, शायद उसे खांसी फिर से परेशान कर रही है, वैसे वह गंध के प्रति बहुत संवेदन शील है, हल्की सी गंध से खांसने लगता है.

मौसम भीगा-भीगा है, बादल बरस कर अभी-अभी थमे हैं. खिडकी से नजर बाहर डालो तो बस हरियाली ही हरियाली है. जून इस वक्त तिनसुकिया में होंगे. नन्हा कह रहा था आज से उसकी छुट्टी देर से होगी, उसका टाइम टेबिल आज से बदल रहा है. उसकी पुरानी पड़ोसिन का फोन आया तो उसे अच्छा लगा. कल रात को एक बार गर्मी के कारण नींद खुली फिर सुबह ठंड के कारण- एक जमाना था कि नींद आती थी तो सर्दी-गर्मी और मच्छर किसी का पता नहीं चलता था. बेसुध और बेखुद हो जाती थी. रात बचपन को याद करके सोयी थी, बचपन के माँ-पिता को भी. कल उनका पत्र आया था, लिखा है, अगले महीने उनका घर बनना आरम्भ हो जायेगा, जनवरी तक पूरा भी हो जायेगा. कल जून एक महिलाओं की एक अंग्रेजी पत्रिका लाए, इंग्लैण्ड में प्रकाशित, वहाँ कि संस्कृति यहाँ से कितनी अलग है, उसने गार्डनिंग पर एक लेख पढ़ा, फिर पड़ोसिन से हेज के पास खड़े होकर बात करने लगी पता ही नहीं चला सवा घंटा कैसे बीत गया. उसके बेटे को चिकन पॉक्स हो गया है, वह सो रहा था.

  कल उसके जीवन का एक बहुत अच्छा दिन था, शाम को उसकी एक छात्रा अपने माँ-पिता व छोटी बहन के साथ आयी. वे लोग उसके लिए एक उपहार भी लाए. उन्हें उन सबके आने की उम्मीद नहीं थी, उसके पहले एक मित्र परिवार आया था, घर काफी अस्त-व्यस्त सा हो गया था, खैर.. वे लोग अचछे लगे सरल और सहज..और इतना सुंदर ला ओपेला ला का dessert set.

  उसके पैरों में आज वही दर्द है, डायरी उठाई है, दस बजने को हैं अभी..बस..कुछ..भी..ये चारों शब्द उसके मन की अस्थिरता के परिचायक हैं. कल फेमिना में एक बहुत अच्छा लेख पढ़ा. रात को देर तक सोचती रही कि उसे अपने वक्त का सदुपयोग करना चाहिए, कोई न कोई काम करते रहने की वैसे उसकी आदत तो है ही, बस काम थोड़ा उद्देश्यपूर्ण हो इसका ध्यान रखना होगा. लेकिन अब इस दर्द में तो सिर्फ आराम से बैठकर पढ़ा जा सकता है, नहीं जी, अब इतना भी नाजुक नहीं होना चाहिए इंसान को कि जरा सा मौका मिला नहीं कि लम्बी तान ली...मगर वह तो पढ़ने की बात कर रही थी और वह भी विवेकानंद की किताब का तृतीय अध्याय.  

  दोपहर के पौने दो बजे हैं. किसी परिचिता ने बताया कि नन्हे को कल बस में किसी बच्चे ने मारा था, उसने उन्हें बताया नहीं, शायद इसका कारण यह तो नहीं कि वे उसे कमजोर कहते हैं, मार खाकर आने पर, इस तरह तो वह अपनी समस्या बताएगा नहीं, उसने मन ही मन तय किया, अब से वह ऐसा नहीं करेगी. वह आजकल सुबह सब काम समय पर कर लेता है, पहले की तरह बार-बार नहीं कहना पड़ता. नन्हे से पूछने पर उसने इंकार कर दिया कि बस में किसी से झगड़ा हुआ था, इसका अर्थ हुआ कि सूचना सही नहीं थी. उसका गणित का टेस्ट कल फिर नहीं हुआ. कल ड्राइंग प्रतियोगिता है, पिछले दो-तीन दिनों से उसके मित्र शाम को खेलने आ जाते हैं. वे सब अँधेरा होने तक खेलते रहते हैं, उसे अपने बचपन के दिन याद आ जाते हैं, जब माँ भीतर से आवाज देती थीं और वह अपनी सहेलियों के साथ रस्सी कूदने, गेंद गिट्टी खेलन में व्यस्त रहती थी.

Monday, January 28, 2013

रूह अफजा की आइसक्रीम



टीवी पर समाचारों में सुना, हर्षद मेहता व कई अन्य गिरफ्तार हुए. इसकी भूमिका तो बहुत दिनों से बन ही रही थी. अभी-अभी उसने स्टोरी टाइम में एक कहानी पढ़ी, how much does a horse know? बहुत अच्छी लगी. नन्हे का स्कूल ग्रीष्मावकाश के कारण अगले डेढ़ माह के लिए बंद है, उसे नियमित रूप से कम से कम एक घंटा तो पढ़ाना ही है. रात को उसने स्वप्न में देखा, भूकम्प आ गया है, वे सभी बाहर चले गए है, परसों भी एक बड़ा सा. अजीब सा स्वप्न देखा था, सोचा था लिखेगी पर अब कुछ याद नहीं है. पहले की तुलना में अब उसे स्वप्न कम आते हैं, शायद इसलिए कि दिन में सोना बंद हो गया है, रात को नींद अच्छी आती है.
कल दोपहर वे तिनसुकिया गए थे, बहुत तेज वर्षा हो रही थी, सड़क पर पानी भर गया था, उन्हें सड़क पार करने के लिए रिक्शा करनी पड़ी, जब घर से निकले तब आकाश पर थोड़े से बादल भर थे. टीवी पर आजकल “हेलो जिंदगी” देख रहे हैं वे, अच्छा धारावाहिक है. कल देखी “वेलकम टू १८” फिल्म भी, फोटोग्राफी अच्छी थी, समुद्र के दृश्य, रंगों का संयोजन बहुत अच्छा था. आज गर्मी बहुत है, साँस लेना मुश्किल है, पसीना सूखता ही नहीं है, ए.सी नहीं होता तो...पर हर वक्त तो उस कमरे में बैठा नहीं जा सकता. शायद इसी कारण या किसी अन्य वजह से वह  दुर्बलता अनुभव कर रही है, मन होता है लेट कर कोई किताब पढ़ती रहे. कल जून सुबह चार बजे ही चले गए थे, गैस कलेक्टिंग स्टेशन में ड्यूटी थी, लौटे शाम को सवा छह बज, बेहद थके हुए और गर्मी से परेशान.

“धूप किनारे” सचमुच एक बहुत अच्छा पाकिस्तानी धारावाहिक था. पिछले तीन-चार दिनों से डॉ अहमद, डॉ शीना, डॉ जोया और डॉ इरफ़ान इस कदर दिलोदिमाग पर छाये हुए थे कि और क्या हुआ कुछ खबर नहीं. डॉ जोया का चरित्र काफी सशक्त था, अंजी और इरफ़ान ने भी बहुत प्रभावित किया. उसने सोचा छोटी बहन को लिखेगी इस धारावाहिक के बारे में जो खुद भी डॉ है, ज्यादा समझ पायेगी. उसकी एक परिचिता की सासु माँ ने भी कहा था, यह सीरियल देखने के लिए, पर अब तक तो शायद वह घर चली गयी होंगी. जून कल जोरहाट चले गए थे, आज शाम को लौटेंगे. घर से पत्र आया है, ट्रेन टिकट बुकिंग करने केलिए वह परेशान हैं, हर कम जल्दी से जल्दी करना उनका स्वभाव है. इस समय नन्हा भी डायरी लिख रहा है. उसकी फरमाइश है कि आज वह रूह-अफजा वाली आइसक्रीम बनाये. कभी-कभी वह मैंगो आइसक्रीम के लिए कहता है, कस्टर्ड में उसकी पसंद की वस्तु डाल कर कुछ देर के लिए वह  फ्रीजर में रख देती है और ऐसी आइसक्रीम पाकर वह कितना खुश हो जाता है  कल रात भी जोरों की वर्षा हुई, रात एक बजे उसकी नींद खुली, फिर एसी बंद करके वे दूसरे कमरे में सोने गए.. आज मन में एक सुकून सा है, जैसे सब कुछ ठीक हो एक शांत धारा की तरह.. कुछ देर पहले जीनिया के फूल देखने गयी थी, कुछ फूल बहुत सुंदर हैं, शोख रंगों के..एक छोटा स नया फूल भी खिला है उस छोटे पॉट में जिसमें कुछ ही दिन पूर्व ही उसने अपनी मित्र से एक पौधा लाकर लगाया था.

पिछले दो तीन दिन घर की सफाई में लगी रही, पहले स्टोर फिर किचन और अभी भी काफी काम बाकी है. दराज वगैरह साफ करनी हैं और कपड़ों की आलमारी भी. अगले हफ्ते नन्हे का स्कूल खुल रहा है. आज भी मौसम अच्छा है. कल शाम वे पड़ोसी के यहाँ गए, मिसेज अ की तबियत ठीक नहीं है, डॉ ने अल्सर बताया है. पिछले कई दिनों से. आज दोपहर उसे भी अस्पताल जाना है पर अपने लिए नहीं, उसकी नैनी लक्ष्मी के लिए, उसे भी कभी कभी कमजोरी का अहसास होता है, फिर लगता है वहम ही होगा, अच्छी भली तो है. कल जून के एक परिचित का उसके जन्मदिन का कार्ड आया पूरे एक महीने बाद, अजीब-अजीब लोग होते हैं.



Wednesday, January 2, 2013

सोवियत संघ - स्वप्न सरीखा


कल जून का जन्मदिन है, वह कार्ड तो पहले ही ले आयी थी, केक कल बनाएगी और उपहार ? उसके पिताजी ने अपने हाथों से बनाकर जन्मदिन का कार्ड भेजा है दामाद के लिए, एक गुलाब का फूल...बिलकुल वास्तविक लगता है. कल बेहद गर्मी थी वे खेलने गए पर टीटी हॉल में खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था, पसीना टपक रहा था, सो वे जल्दी लौट आए. गर्मी के कारण नन्हे का स्वास्थ्य भी ठीक नहीं है, उसे कोई भी अप्रिय गंध उबकाई ला देती है. उसके भी घुटने पर घमौरी से दाना निकल आया है. यहाँ जुलाई-अगस्त में गर्मी पडती है, जब सारे देश में सावन की फुहार बरसती है.
आज वे सभी बहुत प्रसन्न हैं, एक तो जन्मदिन, और दूसरे सुबह उठते ही रिमझिम वर्षा...कल स्वतंत्रता दिवस है. जून ने उनकी आगामी यात्रा के लिए कोलकाता मैसेज भेज दिया है, उनकी हवाई यात्रा के बाद वहाँ ट्रांजिट फ़्लैट में रुकना है, घर जाने का उत्साह तो है पर सफर में होने वाली दिक्कतों को देखते हुए डर भी लगता है. एसी में जाएँ या द्वितीय श्रेणी में, यह भी सोचने की बात है. आजकल वह मन्मथनाथ गुप्त की एक किताब पढ़ रही है, ‘आधी रात के अतिथि’, अच्छी है,

नन्हे ने छोटा सा झंडा बनाया है, उसे लेकर सुबह उत्साहित था, वह प्रधानमंत्री का भाषण सुनने में, अच्छा लगा पर पहले की उनकी स्पीच से कुछ कम...दोपहर बाद उन्होंने कैरम खेला. शाम को दो परिवार आए थे आजादी की सालगिरह की चाय पार्टी के लिए, कुल मिलाकर पन्द्रह अगस्त अच्छा गुजरा.

पिछले तीन दिन वह लिख नहीं पायी, वे घर पर ही रहे, कल खेलने गए, काफी रश था. उसके गले में हल्की खराश लगी तो एक अदरक का टुकड़ा मुँह में रख लिया, उसे इस तरह अदरक खाते देखकर जून को बहुत आश्चर्य होता है, उसे सब्जी में भी अदरक पसंद नहीं है. आज सुबह उठी तो धूप तेज थी पर अब बदली छा गयी है, कितनी जल्दी यहाँ का मौसम रंग बदलता है. आजकल वह सिवाय किताबें पढ़ने के खाली समय में और कुछ नहीं करती है जैसे हाथ का कोई काम..यहाँ तक कि खत लिखने का भी मूड नहीं था. फोन पर बात अब कुछ आसान हो गयी है.
सोवियत संघ में सत्ता परिवर्तन का प्रयास असफल हो गया है. गोर्बाचोव पुनः मास्को लौट आए हैं, और इसी के साथ ही जनशक्ति की महत्ता एक बार फिर स्थापित हो गयी है. आज की जनता जागरूक है उसे बहलाया नहीं जा सकता पहले की बात और थी.. गर्मी पिछले तीन दिनों से जारी है, चेहरे से पसीना सूखता ही नहीं. बेहद गर्मी...एसी होने के कारण ही वे इतने आराम से हैं नहीं तो उन दिनों की तरह बदहवास हो गए होते जिन दिनों एसी नहीं था. मगर एसी कितने लोगों के पास है, दूधवाला कह रहा था कि गांव में पंखा भी नहीं है.

कल शाम ...जून ने उसे सरप्राइज देने के लिए जो बात छुपाई थी उसे सुखद नहीं दुखद सरप्राइज अवश्य दे गयी, पहले उसने कहा था कि एसी के लिए पीएफ से लोन लेना पड़ा है, पर कल कहा नहीं, उतने पैसे पासबुक में ही थे. उसे खुद पर झुंझलाहट हुई, पैसे के मामले में उसे बहुत कम जानकारी है, घर के खर्च से लेकर कोई सामान खरीदना हो तो सारे निर्णय वही करता आया है, सो उसने कभी जानने की भी जरूरत महसूस नहीं की. एक तो यहाँ बाजार जाने का कोई साधन नहीं है, दूसरे सब सामान जब घर बैठे मिल जाता है तो ..
नन्हे की तबियत आज ठीक नहीं थी पर उसके मना करने पर भी वह स्कूल जाने की जिद कर रहा था कि उसका टेस्ट है, अभी इतना छोटा है और टेस्ट की कितनी चिंता है, सचमुच यह नई पीढ़ी उनसे बहुत आगे होगी, पता नहीं स्कूल में कैसे पढाई कर रहा होगा, जून की बायीं कलाई में दर्द है जैसे कुछ माह पहले उसे हुआ था, शायद टीटी खेलने के कारण.. उसने सोचा फोन करके पूछे...
छोटे-छोटे मसलों को वे कितना बड़ा बना लेते हैं...रात भर कैसे सपने आते रहे, क्या हो जाता है ऐसा कि स्नेह की उज्ज्वल धारा कहीं लुप्त हो जाती है. कल बाजार से आते वक्त जून बहुत तेज कार चला रहे थे, नन्हा और वह डर ही गए थे. नन्हा कितना परेशान था घर आकर...उसके कोमल दिमाग पर कितना बुरा असर पहुंचता होगा.