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Saturday, June 15, 2019

ग्लैडियोली के बल्ब



पिछले महीने के दूसरे सप्ताह में उसने इस डायरी में लिखा था, फिर महीना समाप्त होने तक बंगलौर में किसी और कापी में लिखा, पर वे पन्ने कहीं खो गये. इस माह के प्रथम सप्ताह में अस्वस्थता के कारण कुछ नहीं लिखा. जिस दिन बुखार हुआ, उन्हें अगले दिन बंगलूरू से वाराणसी की यात्रा पर निकलना था, वहाँ एक दिन रुके और अगले दिन इलाहाबाद, छोटे भाई की बिटिया का विवाह संस्कार था. छह दिन बाद लौटे, तब भी स्वास्थ्य पूरी तरह ठीक नहीं था. इस समय भी सिर भारी है और खांसी भी पूरी तरह से ठीक नहीं हुई है. उसके ही कृत्यों का फल है यह रोग. मन यदि तनाव से ग्रस्त रहेगा, शंका से ग्रस्त रहेगा तो...साधना और सत्संग से दूर विवाह की गहमा गहमी और चकाचौंध..ऊपर से रोज ही गरिष्ठ भोजन, तीन हफ्तों से बाहर का खाना...आधी-अधूरी नींद..ऊपर-ऊपर से कुछ भी कारण रहा हो, असली कारण तो कर्म फल ही है, यह उसे ज्ञात है. मन में उठा हर नकारात्मक भाव देह पर किसी न किसी रूप में तो प्रकट होगा ही. आज शाम को यहाँ नन्हे के विवाह का स्वागत समारोह है, जिसके लिए कार्ड्स देने में उन्होंने इतने दिन लगाये थे.

आज छोटे भांजे का जन्मदिन है. भोपाल में रहकर वह लॉ कालेज में दाखिले के लिए तैयारी कर रहा है. छोटी ननद ससुराल गयी है, उसके ससुर जी का स्वर्गवास हो गया है. कल उन्हें गोहाटी जाना है, परसों शाम को विवाह का स्वागत समारोह वहाँ भी है.

समारोह अच्छी तरह सम्पन्न हो गया, नन्हा वापस वहीं से वापस बंगलौर चला गया, अब घर पहुंचने वाला होगा. सोनू वहीं रह गयी है, घर में एक और शादी है, उसमें सम्मिलित होगी. आज हफ्तों बाद वे घर पर बैठकर टीवी पर एक धारावाहिक देख रहे हैं. क्लब से गाने की आवाजें आ रही हैं. कल महिला क्लब का वार्षिक उत्सव है, वे शायद ही जाएँ. उसका स्वास्थ्य पूरी तरह ठीक नहीं हुआ है. जून को किसी कांफ्रेंस में भी भाग लेना है. आज पिताजी से बात हुई, उन्हें चार दिन पूर्व हृदय के पास दर्द हुआ, उसके बाद उन्हें डाक्टर के पास ले गये. आज भी सुबह चक्कर आया तो डाक्टर ने दस दिनों की दवा दी है. दीदी व बड़े भाई से बात हुई, डाक्टर ने उन्हें ठंड से बचकर रहने  को कहा है.

पौने छह बजने वाले हैं शाम के, जून अभी तक नहीं आये हैं. वर्ष का अंतिम माह आ गया है, ठंड अभी तक नहीं बढ़ी है. यह पूरा वर्ष नन्हे और सोनू के विवाह की तैयारी में तथा विवाह समारोह मनाने में ही बीत गया. कल यहाँ के क्लब तथा दिगबोई क्लब की वार्षिक पत्रिका के लिए लेख व कविताएँ भेजी हैं. आज तीन पोस्ट्स भी प्रकाशित कीं. गुलदाउदी की तस्वीर फेसबुक पर डाली. सुबह पिताजी से बात हुई. अपने स्वास्थ्य को लेकर वह काफ़ी सकारात्मक लगे.

शाम के सात बजे हैं. सुबह तारों की छाँव में भ्रमण के लिए गये. नाश्ते में बनारसी चिवड़ा-मटर बनाया. साप्ताहिक सफाई का भी दिन होता है शनिवार. दोपहर को तिनसुकिया गये, शेष बची क्यारियों के लिए फूलों की पौध खरीदी, ग्लैडियोली के बल्ब भी. आज बड़े भाई ने पिता जी के लिए व्हाट्स एप पर एक अकाउंट बनाया है, जिसमें सभी परिवार जनों को शामिल किया है, ताकि उनका हालाल सभी को नियमित मिलता रहे. नन्हे से बात की पता चला वे अपने दफ्तर में हैकाथन करवा रहे हैं, वह आज रात भर दफ्तर में ही रुकने वाला है. उसने बताया, सोनू के घर पर मेहमान आने शुरू हो गये हैं, बहुत बड़ा परिवार है उनका.   
 

Friday, March 8, 2019

बनारसी साड़ियाँ




ग्यारह बजने को हैं. आज सुबह छह बजे वे उठे. स्वास्थ्य ठीक लग रहा था. कल दोपहर बाद से तबियत कुछ नासाज थी. सम्भवतः चुनार घूमते समय लू लग गयी थी. शाम को बाजार जाना था. विवाह के लिए तीन बनारसी साड़ियाँ व एक सूट खरीदा. दूकानदार ननद की सहेली की जान-पहचान का था और बनारसी साड़ियों का थोक विक्रेता था, बहुत धैर्य के साथ उसने वस्त्र दिखाये. वापसी में वे विश्वनाथ गली गये. कंगन, हार, चूड़ियाँ आदि कुछ सामान खरीदा. भीड़ भरी सड़कों से गुजरना यहाँ एक बड़े साहस का काम है. धूल, धुआं, भीड़ आदि की इंतिहा होती है. घर से वे कुछ दूरी पर ही थे कि उसकी तबियत बिगड़ने लगी. घर पहुंचने तक ठंड लगने लगी थी. चार-पांच कम्बल ओढ़ने के बावजूद भी ठंड लग रही थी. काफी देर बाद ठंड कम हुई और नींद आ गयी. सुबह उठी तो सब कुछ ठीक लग रहा था. शाम को जून के एक मित्र के यहाँ निमन्त्रण है.

संध्या के पांच बजे हैं. आज उन्हें वापस जाना है, यानि कुल पांच घंटे यहाँ और शेष हैं. दोपहर को भोजन के बाद विश्राम के लिए भीतर के कमरे में जा ही रहे थे कि एक बहुत पुराने परिचित वृद्ध मिलने आ गये, जिनकी बातें करने की आदत है. जून पहले उनसे मिलने गये थे पर जितनी देर बैठे रहे, वह पहुंच ही नहीं पाए. इसी बात पर अपने एक डाक्टर मित्र की समय की पाबन्दी के कितने किस्से उन्होंने सुना दिए. मकान की खरीद-फरोख्त का काम करते हैं, कई दुकानें आदि भी हैं, जहाँ भारतीय व विदेशी पर्यटक आते हैं. उनके तीन सुपुत्र हैं, अपने एक पोते के विवाह के चक्कर में जेल भी हो आये हैं. दहेज उत्पीड़न के केस में उनकी पतोहू व उसके पिता ने परिवार के पांच लोगों को बीस दिन तक जेल की हवा खिलवा दी थी. उनकी बातें किसी कहानी के पात्र के मुख से निकली हुई लग रही थीं. मौसम यहाँ गर्म है, तापमान इकतालीस डिग्री होगा. अज फेसबुक पर आश्रम के फोटो प्रकाशित किये, जो सक्तेश गढ़ में स्थित है, और तहसील चुनार व जिला मिर्जापुर में आता है.

पूरे ग्यारह दिनों के बाद डायरी उठायी है. कितना कुछ घटा पिछले दिनों. तेरह की रात वे ट्रेन में बैठे, पन्द्रह की सुबह घर पहुँचे. सोलह को इतवार था, बच्चों को योग भी सिखाया. अगले दिन जून को दिल्ली जाना था. वह बुध को लौटे, तब तक भी उसका स्वास्थ्य पूरी तरह ठीक नहीं हुआ था. अगले दिन वे अस्पताल ले गये, दवा शरू हुई. इस इतवार तक स्वास्थ्य पुनः प्राप्त हुआ. कल सोमवार को  जून के एक सहकर्मी ने अपने घर बुलाया था. उन्होंने योग का एक नया सीडी दिया है, आज उसमें से देखकर कुछ आसन किये. कल पहली बार ॐ ध्यान’ कराया, आज ‘राम ध्यान’ करना है, अवश्य ही साधिकाओं को अच्छा लगेगा. बंगाली सखी ने व्हाट्सएप पर प्रश्न का कोई जवाब नहीं दिया. वे आज वे लोग वापस आ रहे हैं. लोग वफा उतनी शिद्धत से नहीं निभाते जितनी शिद्धत से बेवफाई निभाते हैं. शनिवार को एक नयी यात्रा पर निकलना है. नन्हे ने अगले इतवार के लिए वह होटल बुक कर दिया है, जहाँ पर वे विवाह समारोह करने वाले हैं. कल स्कूल से लौटते समय क्लब की एक सदस्या के यहाँ गयी, जिसका विदाई समारोह होने वाला है. उसके लिए एक कविता लिखनी है.

Monday, January 21, 2019

महाप्राज्ञ की सीख


वे घर लौट आये हैं, दो दिन सफाई व घर को व्यवस्थित करने में लग गये. आज भी ठंड ज्यादा है. मौसम बदली भरा है, सुबह कुछ देर के लिए धूप निकली थी पर इस समय शाम के चार बजे हैं, आकाश सलेटी-श्वेत बादलों से भर गया है. कल क्रिसमस था, घर पर ही बच्चों के साथ मनाया. कल मृणाल ज्योति जाना है. लिखने का कार्य अभी आरम्भ नहीं हो पाया है.

यह वर्ष समाप्त होने में तीन दिन ही शेष हैं. अभी-अभी बंगाली सखी से बात की. नये वर्ष की पूर्व संध्या पर या पहली जनवरी को नये वर्ष के लिए आमंत्रित किया. वह बहुत उत्साहित तो नहीं दिखी. भविष्य ही बतायेगा, क्या होता है. आज यहाँ कोहरा, शीत लहर और ठंड सभी अधिकता में हैं. बहुत दिनों बाद आचार्य महाप्राज्ञ को सुना, प्रेक्षा ध्यान व कायोत्सर्ग के बारे में भी सुना. किसी एक समय उसने कई दिनों तक यह ध्यान किया था. मंजिल तक पहुँची नहीं, पड़ाव को ही मंजिल मानकर जो वह बैठ गयी है उसका असर स्पष्ट दिखने लगा है, सचेत हो जाना होगा. संत ने कहा, ‘वाणी का प्रयोग भी सम्यक हो, मित भाषिता, मिष्ट भाषिता, सत्य भाषिता यदि वाणी में न हों तो दोष ही कहा जायेगा. बात को लंबा खींचना भी दोष है तथा वाणी में सार का न होना भी दोष है. मित भाषी व सार युक्त बोलने वाला सुखी रहता है’. उसने सोचा, ध्यान को पुनः नियमित करना होगा तथा शास्त्रों का पठन–पाठन भी, मन पर जरा भी विश्वास नहीं किया जा सकता, यदि साधक ऊपर नहीं जायेगा तो मन नीचे जाने के लिए तैयार ही बैठा है. कल सभी को नये वर्ष के कार्ड्स भेजे हैं, अभी भी कुछ कार्ड्स शेष हैं जो भेजे जा सकते हैं.

कुछ देर पूर्व बाहर धूप में विश्राम किया, लॉन में धूप बिखरी हुई है जो वे बंगलूरू के फ़्लैट में खोजते थे. आज शाम को एक मित्र परिवार चाय पर आएगा, दो बड़े, दो बच्चे. अभी शाम की तैयारी करनी है. जून के दफ्तर में वीडियो कान्फ्रेंस थी, लंच के लिए देर से आये दस-पन्द्रह मिनट के लिए, उसने डेढ़ घंटा प्रतीक्षा की पर भोजन अकेले ही करना पड़ा. जून ने कल गेहूँ की घास का चूर्ण मंगवाया और चिया सीड्स यानि तुलसी के बीज भी, वह अपने स्वास्थ्य का बहुत ध्यान रख रहे हैं. उनका एक चित्र जो ऑफिस में एक फोटोग्राफ़र ने खींचा है, उनकी स्वास्थ्य के प्रति निष्ठा को दर्शाता है. सुबह एक योग साधिका का फोन आया, उसकी सास का कल रात देहांत हो गया. चार महीने की लंबी बीमारी के बाद पिछले शुक्रवार को उन्होंने भोजन त्याग दिया था. कल ही परिवार ने उनकी आत्मा की मुक्ति के लिए प्रार्थना करवाई थी. वह दो-तीन बार उन्हें देखने अस्पताल गयी थी. उनका चेहरा शांत लगता था, पर कभी-कभी वह अनर्गल वार्तालाप करने लगती थीं. शायद उन्हें भी डेमेंशिया का रोग था.    

Wednesday, May 24, 2017

बड़ा सा घर


नये घर में उनका तीसरा दिन है. परसों दोपहर बाद वे सभी सामान लेकर यहाँ आ गये थे. पिछले दस दिनों से यानि बुद्ध पूर्णिमा के दिन से उन्होंने शिफ्टिंग का काम शुरू किया. उसी दिन से डायरी के पन्ने कोरे हैं. पहले दिन पूजा का कमरा यानि योग का कमरा ठीक किया. दूसरे दिन किताबें लाये, तीसरे दिन पिताजी के कमरे का सामान. एक दिन छुट्टी की, फिर पांचवें, छठे, सातवें दिन अन्य सामान और अंत में आठवें दिन शेष सारा सामान. अभी तक घर में कुछ न कुछ काम निकल ही आ रहा है, कोई बाथरूम लीक हो रहा था, कोई ट्यूब लाइट काम नहीं कर रही थी. धीरे-धीरे सब ठीक हो जायेगा. आश्चर्य है कि उन्हें एक बार भी वह घर याद नहीं आया, ऐसा लग रहा है जैसे वे इसी घर की प्रतीक्षा कर रहे थे. यह उनके स्वप्नों का घर था, बाहर का लॉन इतना बड़ा है कि आराम से एक विवाह की पार्टी हो सकती है. उनके गमले जो वहाँ सिमटे सकुचाये से थे, यहाँ खिल के अपना वैभव दिखा पा रहे हैं, उनके साज-सज्जा के सामान यहाँ कितनी मुखरता से अपना सौन्दर्य प्रदर्शित कर रहे हैं. इतना बड़ा और इतना सुंदर घर उसे ईश्वर की कृपा का अनुभव करा रहा है. इस घर में यह बाहर का बरामदा बैठने के लिए अच्छी जगह है, ऊपर पंखा भी है, सामने ‘नाइन ओ क्लॉक’ के फूल खिले हैं. कुछ ही दिनों में सामने की लंबी क्यारी में लगे जीनिया के फूल खिल जायेंगे. पिताजी अभी तक अस्पताल में ही हैं, उनका स्वास्थ्य सुधर नहीं रहा है, अब दोनों ननदों के आने की प्रतीक्षा है. लगभग दो हफ्तों बाद वे दोनों आ रही हैं, सम्भवतः उन्हें देखकर उनकी तबियत में कुछ सुधार आये.
कल शाम एक मित्र परिवार आया पहली बार इस घर में. नयी नैनी ने पहले दो गिलास शरबत बनाया फिर दो कप लाल चाय. रोज सुबह भी वह नींबू वाली ग्रीन चाय का एक कप लाती है उसके लिए. आज मौसम अच्छा है भीगा-भीगा सा, महादेव का अंतिम भाग आने वाला है. आज बहुत दिनों बाद वह विद्यार्थी आया अपनी नई साईकिल पर, आखिर वह समर्थ हुआ अपने आप कहीं जाने में. सुबह कितनी ठंडी थी, रात भर वर्षा होती रही. सुबह हरी घास पर टहलते हुए कई सारे स्नेल जीव बाहर किये, नन्हे पौधों को खा लेते हैं ये, आज बगीचे में मिट्टी डाली जा रही है. हेज के किनारे जमीन काफी नीची हो गयी थी. सद्गुरू कहते है, जीवन के अंत में यही पूछा जायेगा कितना ज्ञान प्राप्त किया और कितना प्रेम बांटा...उसके भीतर प्रेम का जो सहज स्रोत था वह आजकल शांत पड़ा है. प्रेम का स्वरूप बदल गया है, वह मौन में ही प्रवाहित होता है. दो महीने हो गये हैं उसे मृणाल ज्योति गये हुए, पिछले दिनों सेवा की भावना जैसे भीतर सिकुड़ गयी थी. पिताजी को इस हालत में देखकर भी कुछ न कर सकने का भाव अजीब सा है. विचित्र है मानव मन, अहंकार भी कितने-कितने रूपों में सम्मुख आता है. उसे कार की आवाज आयी, लगता है जून आ गये.
कल रात तेज वर्षा हुई, बगीचे में हेज के किनारे पानी भर गया है. इस समय धूप निकली है. जून अस्पताल गये हैं पिताजी के लिए दही और दाल के पानी का भोजन लेकर. आजकल उनका यही आहार है. मानव अपने अंतिम काल में कितना बेबस व निरीह हो जाता है, वे पूरी तरह से सोच और समझ तो रहे हैं पर बोल नहीं पाते. डाक्टरों की सहायता से उनके अंतिम समय को कुछ आरामदेह बनाया जा  सकता है, पर कष्ट से उन्हें मुक्ति नहीं दिला सकते. कल शाम जून ने नन्हे से होने वाली दुल्हन के लिए चेन खरीदने के लिए कहा, उसे थोड़ा नहीं काफी अजीब लगा. उसे अपने मन पर कभी-कभी बड़ा आश्चर्य होता है, कब कैसे प्रतिक्रिया व्यक्त करेगा, उसे खुद भी पता नहीं चलता. यह मन नामकी वस्तु दुनिया में सबसे अजूबी है. आज सुबह की साधना में काफी देर मन टिक गया, कितना कुछ दिख रहा था, मन ही रूप धरकर आ रहा था, पर वह साक्षी बनकर देख रही थी. पता नहीं भविष्य में क्या लिखा है, भविष्य नामकी कोई वस्तु होती भी है या सिर्फ कल्पना ही है, हर क्षण जो उनसे मिलता है, वह तो वर्तमान ही बनकर मिलता है. कल जो बीत गया वह भी और कल जो आएगा वह भी.   


Monday, May 22, 2017

कविता और नृत्य


नन्हा आज चला गया, अभी तो रास्ते में ही होगा, रात तक घर पहुंचेगा. पिताजी को उसके आने से काफी अच्छा लगा, उनके स्वास्थ्य में सुधार हुआ है. उन्हें भी उसके रहने से अस्पताल की ड्यूटी में कुछ राहत मिली. सहायक की अनुपस्थिति में भी जून को रात को वहाँ नहीं सोना पड़ा. इस बार वह काफी शांत लगा. आज से सहायक सोयेगा जब तक उसका कोई अन्य काम नहीं निकल आता.
आज मौसम अच्छा है, मन भी सुवासित है, ऊर्जा का प्रस्फुरण हो रहा है. ऊर्जा का ही खेल है यह जगत. हर पल उनके भीतर से ऊर्जा का संचरण हो रहा है, सकारात्मक भी और नकारात्मक भी...जैसी ऊर्जा वे भीतर निर्मित करते हैं, वैसी ही बाहर भेजते हैं और वही उन्हें पुनः मिलती है. एक चक्र का निर्माण होता है. वे सद्भावनाएँ भेजते हैं तो वही उन्हें मिलती हैं. भीतर कठोर हो जाते हैं तो वही कठोरता कई गुनी होकर उन्हें मिलती है..ऊर्जा का अनंत भंडार उनके चारों और फैला हुआ है, वे चाहे जितनी ऊर्जा उसमें से ले लें. वह कभी समाप्त होने वाली नहीं है..प्रेम अनंत है..आनन्द अनंत है..शांति अनंत है..सुख अनंत है...और ज्ञान अनंत है...लुटा रहा है वह खुले दिल से..जितना भर ले कोई अपनी झोली में..जीवन एक अनमोल उपहार है जो परमात्मा ने स्वयं को व्यक्त करने के लिए उन्हें दिया है. वह प्रकट हो रहा है नृत्य की किसी मुद्रा में..चित्र में..कविता में और प्रकृति के हजार-हजार रूपों में..वह..
आज फिर ‘वर्षा’ रानी अपना जौहर दिखाने आयी है. कल दिन भर पिताजी लगभग सोये ही रहे, आज सुबह-सुबह जगे थे, नाश्ता भी किया, उनका नया घर तैयार हो रहा है. अगले महीने उन्हें वहाँ जाना है, जून का कनाडा का कार्यक्रम स्थगित होने जा रहा है, सम्भवतः उन्हीं दिनों वे शिफ्ट करेंगे. कल रात कोई स्वप्न देखा हो, याद नहीं आता पर वे तो दिन भर में ही न जाने कितने स्वप्न देखते रहते हैं. ‘समाधि’ के अतिरिक्त शेष स्वप्न ही तो है. एक ही सत्ता है जो प्रतिबिम्बित हो रही है भिन्न-भिन्न रूपों में. ‘महादेव’ में पार्वती को समाधि का अनुभव होने वाला है. सद्गुरू की कृपा से उसे भी इसी जन्म में समाधि का अनुभव अवश्य होगा. नैनी की बिटिया यहीं पास में खेल रही है, पूछ रही है कि आप क्या कर रही है !
पिछले दो दिन कुछ नहीं लिखा, आज अभी अस्पताल जाना है, पिताजी पहले से काफी ठीक हैं, उठकर बैठे भी, कहा, पोते की शादी देखनी है, इन्सान की जिजीविषा कितनी प्रबल है, वह हर कठिनाई को पार कर जीना चाहती है, कल नन्हे को कहा तो है कि वह तैयार हो तो जल्दी ही मंगनी की रस्म हो सके. कौन जानता है, भविष्य में क्या लिखा है ? परमात्मा हर वक्त उनके साथ है, बल्कि वही तो है..
पौने तीन बजे हैं, मौसम अच्छा है, ठंडी हवा बह रही है, अभी कुछ देर पहले उसका एक विद्यार्थी पढ़कर गया है. कह रहा था, बहुत दिनों से पापा से मार नहीं खायी, मार खाकर ऊर्जा आती है, अजीब बच्चा है, उसकी लिखाई खराब है, थोडा आलसी है, उसकी माँ ने ज्यादा लाड़-प्यार से उसे ऐसा बना दिया है, और इधर उसका मन भी ज्यादा लाड़-प्यार से उसे ही दिक् कर रहा है. पुराने संस्कार ढीठ बच्चे की तरह होते हैं, कहना ही नहीं मानते, उसे व्यस्त रहकर उनकी उपेक्षा रखनी है और कुछ नहीं हटाने से वे और भी जिद्दी हो सकते हैं. साक्षी भाव से उन्हें देखना भर है, अच्छा ! ऐसा भी होता है, कहकर आश्चर्य व्यक्त करना है..आज पुस्तकालय भी जाना है, बंगाली सखी को अपनी बेटी की किताबें पुस्तकालय में देनी हैं. आज फिर बिजली नहीं है. कल से वे अपने नये घर में कुछ सामान शिफ्ट कर रहे हैं.   


Friday, March 24, 2017

पंछी और कलियाँ


नन्हे की मित्र के लिए उसने कविता लिखी थी, उसका जवाब आया है, उसने दिल को छूने वाला जवाब लिखा है. कल दिन भर वह ठीक रही पर रात बेचैनी से भरी थी. आश्चर्य होता है खुद पर, कहाँ सोचा था कभी कि डायरी के पन्नों पर अपनी हेल्थ रिपोर्ट लिखेगी एक दिन, लेकिन इसकी नींव रख दी गयी थी वर्षों पहले, जन्मते ही सम्भवतः..उनके सारे रोग नए नहीं होते, उनका आयोजन पहले ही शुरू हो चुका होता है.

आज नन्हे का जन्मदिन है, उसे फोन किया तो नहीं उठाया, शायद रात को जगता रहा हो, सुबह ही सोया हो. उसके लिए बधाई के फोन आये. मोरारीबापू साऊथ अफ्रीका पहुंचा गये हैं, उनकी कथा आ रही है टीवी पर. जून आज कोलकाता गये हैं. दिसम्बर में वे बंगलूरू आश्रम जायेंगे, इस बात को सोचने से ही कैसी पुलक उठती है. आज तन और मन दोनों हल्के हैं. सारे रोगों का कारण प्रज्ञापराध है. उनका तन कितना बहुमूल्य है, इसे स्वच्छ व स्वस्थ रखना कितना आवश्यक है. यह ज्यादा कुछ मांग भी नहीं करता, लगातार काम करता रहता है. ‘कम खाओ और गम खाओ’, यह नियम अपनाना होगा यदि भविष्य में भी स्वस्थ रहना है. आज ध्यान में अच्छा अनुभव हुआ, जून जब घर पर रहते हैं उसका ध्यान गहरा नहीं हो पाता. अब उनके आने पर भी सजग रहना होगा ! परसों वे आ जायेंगे.

कुछ देर में उसे एक परिचिता के साथ मृणाल ज्योति जाना है. जब कहीं जाना हो तो प्रतीक्षाकाल में कार के हॉर्न की आवाजें ज्यादा ही सुनाई देने लगती हैं, वैसे जिनकी ओर ध्यान भी नहीं जाता. ‘लॉ ऑफ़ अट्रैक्शन’ कितना जबर्दस्त है. आज ही उसने चाहा कि माली ग्यारह बजे से पहले आये, सो आ गया है. इस तरह तो उनका भाग्य उनके ही हाथों में है. वे जो चाहते हैं, वैसा ही सोचना आरम्भ कर दें तो प्रकृति उसका इंतजाम करने लगती है. आज सद्गुरू ने अपने जीवन के कुछ प्रसंग बताये. इक्कीस वर्ष की अवस्था तक वे दुनिया के सारे सुख-आराम देख चुके थे, विदेशों में घूम चुके थे. एक विश्व प्रसिद्ध संस्था के उत्तराधिकारी बन सकते थे, पर वे लौट आये और सेवा का मार्ग चुना. ‘आर्ट ऑफ़ लिविंग’ की स्थापना की. अद्भुत है उनकी कहानी. ऐसे लोग दुनिया में विरले होते हैं, जो करोड़ों लोगों तक पहुंच पाते हैं, सभी उनसे प्रेम करते हैं.


जून आज आ रहे हैं. उनकी पसंद की ड्रेस पहनी है. प्रेम क्या होता है, इसका पता ईश्वर से प्रेम करने के बाद ही चलता है. इसीलिए संत-महात्मा युगों-युगों से उन्हें प्रभु की ओर चलने का मार्ग बताते आये हैं. परमात्मा उनके प्रेम का प्रतिदान अनंत गुणा देता है. एक बूंद जो सागर से बिछुड़ी थी, कितनी छोटी  थी और जब पुनः सागर में जा मिली तो अनंत गुणा जल उसे मिल गया. उनकी चेतना इस देह में कितनी नन्ही सी लगती है, एक चिंगारी हो जैसे या सूर्य की एक किरण और जब वह चिंगारी किसी तरह पुनः आग में गिर जाये तो...या सूर्य की किरण पुनः सूर्य में पहुंच जाये तो..कितना प्रकाश न भर जायेगा उसके भीतर; लेकिन एक बात यह भी है कि सूर्य स्वयं जाकर कलियों को खिला नहीं सकता, वह अपने हाथ बना लेता है किरणों को, जो आहिस्ता से सहलाती हैं और किरणें खिल जाती हैं; ऐसे ही अनंत परमात्मा स्वयं आकर सोए हुओं को कैसे जगायेगा, मानव उसका तेज सह ही नहीं पायेगा, वह संतों को अपना हाथ बना लेता है जो आहिस्ता से आकर जगाते हैं. कलियों के लिए किरणें संत से कम नहीं..पंछियों के लिए भी...ऊपर से तुर्रा यह कि फूल के भीतर जो भोजन बनता है वह भी सूर्य के बिना सम्भव नहीं. सूर्य उसके भीतर सदा ही है, पर वह जानता नहीं, मानव के भीतर भी परमात्मा के कारण ही चेतना है, पर वह जानता नहीं, वास्तव में स्वयं को ही जगाने आता है वह क्योंकि उसे स्वयं का अनुभव करना हो तो मन का आश्रय लेना होगा, उसके पास तो मन है नहीं..तो भक्त का मन भगवान ले लेता है और बदले में स्वयं को दे देता है, अदला-बदली हो जाती है और प्रेम का यह खेल गुपचुप चलता ही रहता है !      

Wednesday, June 24, 2015

दा-विंसी-कोड-एक रोचक उपन्यास


उन्होंने शब्दों की होली खेली, कुछ शब्दों की बौछार इधर से हुई और कुछ शब्दों की बौछार उधर से और लग गई आग दिलों में. इस होली से तो भगवान ही बचाए. न जाने क्यों वे अपनी भावनाओं को नियंत्रित नहीं कर पाते फिर वही वाणी के रूप में बाहर आ जाती हैं. जानती है वह कि बाद में पश्चाताप के सिवा कुछ हाथ आने वाला नहीं है. समाज में परिवार में सभी को साथ लेकर चलना है, साधना के लिए स्वार्थी तो नहीं हुआ जा सकता, उसकी आवश्यकता को कोई अन्य कैसे समझ सकते हैं, उसे ही धीरे-धीरे इस पथ पर लाना होगा. संसार का पथ तो अनेक जन्मों में चल कर देख चुकी है, यह बेपेंदी के लोटे जैसा है कितना भी जल डालो यह खाली ही रहेगा. परमात्मा के पथ पर आनंद ही आनंद है, लेकिन इस आनंद का भी यदि लोभ वह करने लगी तो...सहज रहना सीखना होगा, समभाव में रहना. परीक्षा की घड़ियाँ आएँगी पर स्वयं पर नियन्त्रण रखना है.
आज होली है, उसने ज्ञान की पिचकारी का रंग लगाया है, अब कोई और रंग उस पर चढ़ता ही नहीं. होली का अर्थ है सारी पुरानी सड़ी-गली मान्यताओं को ज्ञान की आग में जलाकर मन को खाली कर देना. फिर से नव जीवन का आरम्भ हो, भुला देना सारे शिकवे-शिकायत, तब जो भीतर उमड़ेगा उसमें सारे रंग मिले होंगे.
कल रात को नन्हे ने जब फोन पर कहा कि उसकी तबियत ठीक नहीं लग रही है तो जून और उसका चिंतित होना स्वाभाविक था. उन्होंने उसे आवश्यक निर्देश दिए और अपने रोज के कार्य सामान्य रूप से करते रहे. सुबह वह उठी तो जून ने कहा उन्हें देर तक नींद नहीं आयी, वह नन्हे की अस्वस्थता की बात से परेशान हो गये थे. वह भी जब अपने मन की अवस्था पर नजर डालती है तो उनसे बहुत अच्छी नहीं कही जा सकती. यह बात और है जब मन को परेशान देखा उसने तो भगवन्नाम का ही आश्रय लिया, परमात्मा को सब कुछ सौंपना चाहा. उससे प्रार्थना भी की. भक्ति के लिए भक्ति अर्थात उससे कुछ भी न मांगे, यह दृढ़ता तो दूर हो ही गयी. उसने उन सबके लिए सुख व स्वास्थ्य माँगा. वह दाता है, सबकी सुनता है, किसी को निराश नहीं करता, उसकी मर्जी से ही वे सब इस दुनिया में आए हैं. वही चैतन्य है, उसका अंश आत्मा रूप से उनमें स्थित है. अभी यह उनका अनुभव नहीं है तभी वे मन की समता खो बैठते हैं. जैसे चित्रकार चित्र बनाता है वे दुःख बना लेते हैं.
कल की रात्रि स्वप्नों भरी थी, नन्हे को कई बार देखा, वह छोटा सा है और खाली फर्श पर सोया है. मन भी कितना पागल है, खुद ही सपने बनाता है और खुद ही परेशान होता है. नन्हे का रिजल्ट आ गया है उसने पहली बाधा पार कर ली है. जून भी निश्चिन्त हुए हैं. उसने da-vinci-code पढ़ ली है, बहुत रोचक किताब है. अज गुरूजी ने ‘योग वशिष्ठ’ पर चर्चा शुरू की. जीवन में दुःख है इसे पहचानना जरूरी है. तभी तो मन के पार जाया जा सकता है.

आज उन्हें यात्रा पर जाना है, इस यात्रा का उद्देश्य है नन्हे को सालभर की कड़ी मेहनत के बाद परीक्षा दिलाकर घर वापस लाना, परीक्षा से पहले उसे उत्साह दिलाना तथा उसका स्वास्थ्य ठीक रहे उसका ध्यान रखना. ईश्वर से प्रार्थना है कि वह उनकी यात्रा को सफल करे.

Saturday, May 3, 2014

पका हुआ फल


It is a hot, humid afternoon and her mind is full of that book, book of laughter, forgetfulness, letters, passion, love and so many things. Writer opens the hearts of people and looks the nakedness. He is very right when says that life is a battle of capturing other’s ear, no one wants to listen, everybody wants to say, and when someone says something, response will be, that is right…in fact  I mean …and then other begins his own story. Then there are laughter of two types one is innocent, full of joy and other is over a joke. But most important is love, love among all human beings and love between two souls, two minds, which share so many thoughts, ideas, smiles and tears also, Joy of knowing other person and having complete faith in him ! But now she doesn't know why her heart is empty with a sudden void and feeling of remorse perhaps it is filled… her limbs are listless and she is feeling lightness. Is it guilt, may be because since morning she has not done something meaningful except reading that book.

वे ऐसी कौन सी जंजीरें हैं जिन्होंने उस रोका हुआ है, वह क्यों हर वक्त अपराध भावना से ग्रस्त रहती है, क्यों नहीं खुल के जी पाती, क्यों हर पल उसे एक ऐसे दिन का इंतजार रहता है जब सब कुछ ठीक हो जायेगा, जब दिन बेहतर होंगे, आखिर आज में ऐसी कौन सी कमी है, उसके जीवन में ऐसा कौन सा अभाव है जो उसे सालता रहता है. उसके मन में बचपन की कई कटु यादें हैं जिन्हें वह भुलाना चाहती है, फिर युवावस्था की कुछ बातें जिन्हें वह याद करना नहीं चाहती, पर उन बातों का आज से क्या लेना-देना, जो बीत गया है वह मृत है और जो आज है वह  जीवित है. आज उसके सामने कौन-कौन से ऐसे उद्देश्य हैं, लक्ष्य हैं जिनके प्रति उसे समर्पित होना है, जो उसे पूरे करने हैं. घर को संवारना, सम्भालना तथा जून और नन्हे की देखभाल करना स्वयं के स्वास्थ्य का न केवल शारीरिक, मानसिक बल्कि आध्यात्मिक भी, इसके अतिरिक्त संगीत जो उसे शांति प्रदान करता है, उनका बगीचा और लेखन, किताबें भी जो प्रेरित तो करती हैं नये-नये आयाम भी दिखाती हैं. जीवन मात्र उतना ही नहीं है जितना दिखाई देता है, बल्कि उससे कहीं आगे है, और यह उसका सौभाग्य है कि उसके पास इसे अनुभव करने का, उसे जानने का समय और क्षमता है. वह इस ब्रह्मांड में अकेली नहीं है सो घबराने की कोई बात नहीं है, वह भी इस विशाल ब्रह्मांड का एक भाग है, सबके साथ है, उस शक्ति की निगाह में है और जिन्दगी के जितने बरस शेष हैं बिना किसी पूर्वाग्रह के बिना किसी अपराध भावना के बिताएगी. सचमुच जीवन मात्र उतना नहीं है जितना दिखाई देता है..लगता है कि संशय के बादल छंट रहे हैं और विश्वास और आशा का सूर्योदय हो रहा है.


Last evening they went to club to join the technical forum, the topic was ‘The holistic approach to healing with awareness’, speaker was MR Subhash Gogte a Maharashtrian,  who is preaching Yoga since last 30 years. Jun already have attended the workshop organized by his institution “Atnha Pragya” . He told so many informative and knowledgeable things  but she liked the most was the explanation of death as a natural and essential phenomenon, when a fruit ripens it detaches itself from the main stem and drops, it spreads fragrance, not disease, similarly we human beings as we grow older should be more mature, more perfect and then when time comes should drop from the tree of life as a ripe fruit effortlessly and easily. Death and old age are as natural as our childhood and youth, and we the observer is same then what is the cause of fear, the same Atma, remains with us throughout our journey and will remain  there after death also. 

Wednesday, March 26, 2014

आणविक परीक्षण


एक और नये सप्ताह का शुभारम्भ ! मई महीने का अंतिम सप्ताह, आज मौसम फिर साफ है, धूप निकल आयी है, जो एक सखी के अनुसार दो दिनों की वर्षा की बाद भली लग रही है, पर उसे तो वही काले-कजरारे बादलों से घिरा आकाश और ठंडी हवा पसंद है. आज उसे क्लब जाना है शाम की मीटिंग की तैयारी करने. दफ्तर से लौटते समय जून के साथ वापस आएगी.

आज आकाश पर बादल चहलकदमी कर रहे हैं. कल दूसरा पेपर हल करने का प्रयास किया, एक कहानी लिखनी थी, वह तीन सौ शब्दों से ज्यादा नहीं लिख सकी, उन्हें एक हजार शब्दों  की कहानी चाहिए, उसे और श्रम करना होगा और समय देना होगा. सितम्बर से पहले उसे जवाब भेजना है. पिछले दिनों स्वास्थ्य ठीक न होने के कारण विशेष काम नहीं हो सका, अब से दोपहर को दो घंटे नियमित उसे बैठना होगा. अख़बार और पत्रिकाएँ शाम तक इंतजार कर सकती हैं. घर की सफाई का काम भी एकत्र हो गया है, शनिवार को घर में मेहमान आयेंगे, इसलिए घर बिलकुल साफ-सुथरा होना चाहिए. नन्हे की परीक्षाएं भी अगले महीने शुरू हो रही हैं, शाम को उसे भी वक्त देना जरूरी है. फिर कम्प्यूटर.. और सभी के जन्मदिन भी आ रहे हैं, कार्ड्स भेजने हैं. जीवन कितना व्यस्त रखता है.

कल छोटी बहन का पत्र आया, वह वहाँ खुश है, आर्मी की ड्रेस पहन कर जरुर स्मार्ट दिखती होगी उसे जल्दी ही पत्र लिखेगी. आज हिंदी पढ़ाते समय ‘सर्वेश्वर दयाल सक्सेना’ का एक लेख और ‘बच्चन’ की कविता पढ़ाई, बच्चन मधुशाला का प्रयोग करना नहीं चूकते प्रतीक रूप में. कल शाम मीटिंग में एक सदस्या को विदाई दी गयी, उनका भाषण अच्छा था और उनके गीत भी, उनकी तारीफ़ में कही गयी बातें सुनकर कभी-कभी थोड़ी उलझन हुई, पर तारीफ़ को भी खुले मन से स्वीकार करना सीखना पड़ता है हर इन्सान को. आज नन्हे का संगीत का इम्तहान है, वह गाने ठीक से गा पा रहा है, सिखाया जाये तो बच्चे बड़ों की अपेक्षा जल्दी धुन पकड़ लेते हैं. कल जून आशिकी का vcd लाये थे, पड़ोसी की मदद से कम्प्यूटर पर चल सका, पहले भी एक दो बार वह  मदद कर चुके हैं. कल क्लब में वह भी पड़ोसिन के साथ बैठी थी, वह शांत है और मृदुभाषी भी, उसने सोचा उन्हें चाय पर बुलाना चाहिए.

आज फिर एक चमकदार दिन है, पर अभी तक गर्मी असहनीय नहीं है, देश के कुछ भागों में तापमान ४० डिग्री से ऊपर हो गया है, समाचारों में सुना २४८ लोग गर्मी से मर गये हैं. कल शाम वे एक मित्र के वृद्ध माता-पिता से मिलने गये, वृद्ध दंपति बहुत हंसमुख था, खासतौर पर आंटी बहुत बातें कर रही थीं, वह उनसे पहले भी मिल चुकी है और हर बार उनसे मिलना उसे अच्छा लगता है. टीवी पर ‘जी साहेब’ आ रहा है बहुत रोचक कार्यक्रम है, All four character are very cute, smart, witty and humorous!  कल शाम जून देर से आये, कारण पूछा तो बोले, उसके ही काम से देर हुई. उसका फोटो कम्प्यूटर के स्क्रीन पर लाना चाहते थे, जिसे पहले छोटा करके स्कैन किया फिर फ्लॉपी में सेव किया और घर आकर कम्प्यूटर की हार्ड डिस्क में कॉपी किया. स्क्रीन पर जब नई ड्रेस में उसका फोटो आया तो वाकई अच्छा लगा और खुद पर गरूर भी हो आया कि जून उसे इतना चाहते हैं.

काश्मीर मे हालात बदल रहे हैं, कुछ दिन पहले वहाँ एक फिल्म की शूटिंग भी हुई और टूरिस्ट भी जाने लगे हैं. कल पाकिस्तान में भी पांच एटमी तजुर्बात किये गये और बाद में वहाँ आपात स्थिति लागू कर दी गयी. भारत के आणविक परीक्षणों के जवाब में किये गये इन परीक्षणों का क्या असर होगा यह तो समय ही बतायेगा, लेकिन बीजेपी की सरकार ने लोगों के मन में एक चेतना का विकास तो किया है चाहे उनका साधन या माध्यम हिंसा पर ही क्यों न आधारित हो, गाँधी के देश में लोग जब एटम बम बनाने से खुश हो सकते हैं तो यह मानकर भी चलना चाहिए कि वे कभी भी इसके उपयोग का खतरा मोल नहीं लेंगे, क्योंकि उसका परिणाम उन्हें स्वयं ही भुगतना पड़ेगा. आज उसे बाजार जाना है, कल के जन्मदिन के लिए.. जन्मदिन के दिन एक विशेष उत्साह रहता ही है, उसका लाभ उठाते हुए.. घर की विशेष सफाई कल होगी. कल उसने दोनों बहनों को पत्र भेज दिए, ऐसा क्यों होता है कि लडकियाँ या बहनें विवाह के बाद भी अपने पुराने संबंधों को कायम रख पाती हैं, माता-पिता से भाई-बहनों से जुड़ाव को महसूस करती हैं पर भाई ऐसा नहीं कर पाते, शायद बचपन से ही उन्हें अपनी भावनाओं को व्यक्त करना नहीं सिखाया जाता या वे इतने भावुक नहीं होते, कुछ भी हो वे तीनों आज भी एक-दूसरे की बात समझ पाती हैं, कुछ ऐसा है जो तीनों के दिलों में एक सा धड़कता है, साझा है वह तीनों का. काश ! भाइयों में भी ऐसा होता, हो सकता है वे तीनों भी अपने अंदर ऐसा ही महसूस करते हों !


Tuesday, March 25, 2014

लीची का शरबत


कल उन्हें पता चला कि एक मित्र को vertigo हो गया है, उसने पहली बार यह शब्द सुना था, शायद कान से जुड़ा कोई रोग है. वे लोग देखने गये तो पीने के लिए कोल्डड्रिंक दिया गया, जुकाम होने के बावजूद शिष्टाचार वश उससे मना नहीं किया गया, वैसे ज्यादा ठंडा नहीं था, पर उसके कारण नुकसान तो हुआ ही होगा. गले में दोनों ओर सूजन  हो गयी है और छूने से एक ग्लैंड में हल्का दर्द भी होता है, धीरे-धीरे खुद ही ठीक हो जायेगा, जून उसकी बीमारी से घबरा जाते हैं.

आज भी वह स्वस्थ नहीं है, बांया गाल फूल गया है, ब्रश करते समय व खाते समय दर्द होता है. आज डॉ को दिखा ही लेना होगा, जून ने परसों भी फोन किया था, पर उसके मना करने पर वे मान गये, उसे यकीन था कि एक-दो दिनों में ठीक हो जाएगी, पर उसके अस्वस्थ रहने से घर का माहौल ही अस्त-व्यस्त हो जाता है. कल शाम एक मित्र परिवार मिलने आया, उन्होंने पहली बार लीची का शरबत बनाया, खुद उसे पसंद नहीं आया, उसकी सखी जान ही नहीं पाई कि वह  अस्वस्थ है, शायद जैमिनी अपनी बीमारी छिपाने में माहिर होते हैं, खास-तौर से उसे तो अपने रोग के बारे में बात करना बहुत खराब लगता है, अस्वस्थ होना एक गुनाह लगता है, मानसिक उदासी हो या शारीरिक परेशानी स्वयं तक ही सीमित रखना ठीक है, जब तक कि ऐसा किया जा सकता हो. जून को लेकिन वह सब कह देती है, उनसे छिपाना मुमकिन भी नहीं है जो चेहरे के एक-एक भाव को पढ़ लेते हैं.

आज शाम लेडीज क्लब की कमेटी मीटिंग है, जो अब मात्र तीन और रह गयी हैं, इसके बाद नई कमेटी बनेगी और उसकी व्यस्तता कम हो जाएगी. जिस वक्त फोन आया, वह बहुत परेशान थी, कुछ देर पहले ही नन्हे पर झुंझलाई थी, अपनी अस्वस्थता से तंग आ चुकी थी, कल अस्पताल से ढेर सारी दवाइयाँ लेकर आई थी, चार-पांच दिन की अस्वस्थता ने ही जब इतना बेचैन कर दिया है तो उनकी मनोस्थिति कैसी होती होगी, जिन्हें मालूम होता होगा कि सारी उम्र उन्हें इसी के साथ जीना है. साढ़े नौ हो गये हैं, उसने पूरा एक घंटा फोन पर बात की होगी, एक-एक करके तीन सखियों से, इधर-उधर की बातें करना यूँ ही बिना किसी वजह के, शायद वह स्वयं को यकीन दिलाना चाहती है कि वह ठीक हो गयी है. शाम को जाना भी है, नई साड़ी में कल शाम फाल लगाई और आज पीको करवाने के लिए दी है. पिछले एक घंटे में कुछ देर पीटीवी पर एक धारावाहिक ‘सियाह सुफेद’ देखा, जिसका मुख्य चरित्र एक काला मन लिए है, उसका बेटा जिसे हीरो भी कह सकते हैं, काला है न सफेद बल्कि सलेटी है पर एक न एक दिन उसे अपना रास्ता चुनना ही पड़ेगा, आदमी या तो अच्छाई के रास्ते पर पूरी तरह चल सकता है या नहीं चल सकता. आज भी धूप उतनी ही तेज है, आज उसे पत्र भी लिखने हैं, सारी दोपहर सामने है और मन में उत्साह भी कि वह स्वस्थ हो रही है.

आज फिर उसे अपनी अस्वस्थता का अहसास हो रहा है, सुबह सेक्रेटरी आई थीं, लेडीज क्लब के बुलेटिन की कॉपी लेने जो उसने कम्प्यूटर पर टाइप किया था. मशहूर संगीतकार मदन मोहन को श्रद्धांजलि स्वरूप समर्पित किया गया एक सीडी सुना.

आज स्वस्थ है, बिलकुल ठीक होना कैसा होता है, वह तो भूल ही गयी है, पर अपेक्षाकृत काफी ठीक है, दस बजे संगीत कक्षा में जाना है. आज भी गर्मी पहले सी है, कल शाम बंगाल की खाड़ी में आये तूफान की वजह से ठंडी हवा बहने लगी थी पर बादल भी उसी के साथ हवा हो गये. सवा नौ हुए हैं, थोड़ी देर पहले ही स्वीपर को ढंग से काम न करने पर फटकारा है, कल भी उसने एक बाथरूम बिना धोये ही छोड़ दिया था, शायद बीमारी के कारण, अस्वस्थता हर इन्सान को एक सा दुख देती है, ठीक ही कहा है, अस्वस्थता से बढकर कोई अभिशाप नहीं, कोई गरीबी नहीं, कोई गुनाह नहीं.

And today she could do exercise also. It rained in the night, every thing is clean, cold and wet outside but inside is still stuffy. ‘Teacher’ is being shown on zee tv, one of the good serial. Yesterday could not write, went to see the doctor for pain in arm, then to hindi class and evening was with shahrukh khan and juhi chawla. Secretary  picked her up for going to give fare well bouquet to one lady, (singer and radio artist) she is leaving this place  for ever. In the morning talked to mother who is with younger sister. Sister is happy, she is now captain. Got her letter also, she is very very sensitive and sensible girl. Nuna is proud of her !








Thursday, January 2, 2014

स्विमिंग गाला में मस्ती


 आज उसे पहली बार कमेटी की मीटिंग में जाना है, कुछ देर पूर्व जून ने फोन पर जो कुछ कहा उस पसंद नहीं आया और उसे उनसे नाराज होने का पूरा हक है क्योंकि कई बार वह कह चुकी है कि अस्वस्थ होना और उसके बहाने अपने कर्त्तव्यों से पीछे हटना उसे जरा भी पसंद नहीं, न ही उसका प्रचार करना, शायद इसलिए कि उसे किसी की सहानुभूति नहीं चाहिए, शायद इसलिए कि उसका स्वाभिमान इतना बड़ा है कि अस्वस्थता में भी झुकना नहीं चाहता, या शायद इसलिए कि  बीमार होने को वह अपना दोष मानती है, फिर अपना दोष अन्यों के सामने स्वीकार कर लेना क्या इतना आसान है, जून इस बात को नहीं समझ पाते हैं, उन्हें अपनी अस्वस्थता को भी बढ़ा-चढ़ा कर बताना पसंद है तो...खैर !  नन्हे को बस में बैठाने के बाद कुछ देर पड़ोसिन से बात करती रही, उसने स्कूल के अध्यापकों के बारे में कुछ बातें कहीं, लेकिन बच्चों को अपने घरों से भी तो अच्छे संस्कार मिलना जरूरी है. आज सुबह कपड़े भी इस्तरी किये और शेष सारे कार्य भी. कल RD में Martha की कहानी पढकर इतना भी नहीं कर सकती तो कुछ नहीं कर सकती. अभी कुछ देर पूर्व सेक्रेटरी का फोन आया, उन्होंने पहला कार्य सौंपा है. जून ने फोन करके सॉरी कहा है, अब उसे कोई शिकायत नहीं है.

It was a marvelous experience. There she was among the talented ladies of town.  They were so able and dedicated to this club, and tea was also very high ! she liked every thing there. Earlier she had spent  almost one hour in calling all the winner and Runner up of all the sports, then told the details to secretary. She thinks Jun and Nanha ara also enjoying her new job. She was not  nervous and even suggested Tri colour sandwiches for the meeting. Job of arrangement of mike and all other things in monthly meeting is given to her and she thinks she should be able to do it nicely. Now her  health is fine and mind is also fresh. Jun takes good care.

Sunday afternoon, jun is sleeping, Nanha is studying and after putting Vaseline on hands and polish on  nails she picked this diary. While applying nail polish she thought of future, after say 15 years…then also she will take care of herself like these days. One should always do . yesterday they went to see the swimming gala in club,  Nanha participated in two events. In the evening Nanha went to see the children movie, “Jingles all the way” with their neighbor, they went to friend’s place,they gave them cold  coffee to drink  but it  was too heavy for her delicate stomach, jun also could not sleep nicely. On Friday they saw ‘One fine day’, it was a nice movie based on the events of a day in the life of two one parent family. The kids were charming so was the smile of young lady. Last evening she read few pages of some shrilankan writer, he is against all kind of beliefs and even meditation. Bible is the most dangerous book for children in his view.

कल दिन भर वर्षा होती रही थी, शायद रात को भी हुई हो, इस वक्त पंखे की भी जरूरत नहीं हो रही है. आज सुबह दीदी का फोन आया, वह चंडीगढ़ से बोल रही थीं, बड़ी भांजी का दाखिला हो गया है, वह पेइंग गेस्ट की तरह एक परिवार में रहेगी, उसे सी ए की कोचिंग की सुविधा भी वहाँ मिलेगी. दीदी खुश थीं और भांजी भी यकीनन होगी. भविष्य की ओर पहला कदम बढ़ाया है अपने बलबूते पर उसने. Really she is brave girl. कल रात स्वप्न में माँ-पिता को देखा, वे यहाँ आये हैं. कल दिन में ही वे उन्हें याद कर रहे थे. सुबह बगीचे से लगभग एक किलो भिन्डियाँ तोड़ी, जिस रफ्तार से वे तोड़ नहीं पाते उससे दुगनी रफ्तार से उग रही हैं, कुछ तो आकार में एक फिट से कुछ ही कम होंगी. अमरुद भी बहुत लगे हैं पर वे जून ही आकर तोड़ेंगे.




  

Sunday, December 22, 2013

कड़क चाय और भुट्टे का सूप


Today is D-Day ie her birth day ! since morning she has received so many B’day wishes that she is full of gratitude towards all of them and Almighty ! He is always with her. सुबह-सुबह वे बेड में ही थे कि पिता का फोन आया, कल उन्हें उसका पत्र मिला, पत्र से उन्हें व जून के मित्र जो कल वहीं थे, दोनों को ख़ुशी हुई, छोटे भाई ने भी फोन पर पत्र मिलने की बात कही. पत्रों की महत्ता उसे एक बार फिर महसूस हुई. दीदी का फोन आया, माँ उनके पास गयी हैं, भारत के बाहर से जीजाजी का फोन आया. छोटी भाभी के पिता ने भी फोन किया. यहाँ भी सखियों ने विश किया, उसे यह गीत भी याद आया जो पाकिस्तानी रेडियो पर बचपन में सुना था, मेरी सालगिरह है बोलो.. बोलो..बोलो न हैप्पी बर्थडे टू मी..

कुछ दिन पहले तक बल्कि कल तक ही उसे लग रहा था  कि जन्मदिन पर ख़ुशी के साथ-साथ उदासी भी होगी. एक साल और गुजर जाने की, पर ऐसा नहीं है...केवल ख़ुशी का ही अहसास है जो तन और मन के पोर-पोर में छाया है. जून और नन्हा भी इसमें शामिल हैं.

आज सुबह की खुली धूप के बाद ही अचानक बादल आ गये और लगातार बरस रहे हैं. मन भीगा-भीगा सा उनके साथ एकात्मकता महसूस कर रहा है, असम का यह भी एक अनोखा अनुभव है. आज बहुत दिनों के बाद इत्मीनान से उसने फोन पर दो सखियों से बात की, एक ने कहा, आजकल ब्लाउज में छोटी बांह रखने का फैशन है, पर उसने कहा वह फैशन के अनुसार नहीं अपनी सुविधा के अनुसार कपड़े पहनती है. पड़ोसी कुछ दिन बाहर घूमने के बाद आए हैं, उनका बेटा जो नन्हे का मित्र है, तब से इधर ही है, नन्हा उसके साथ बहुत खुश है, वह इतनी बातें कर सकता है, आमतौर पर उसे देखने पर अहसास नहीं होता.

रिमझिम गान सुनाती बरखा
मन-प्राण हर्षाती बरखा
हौले हौले से बादल के
उर से नेह लुटाती बरखा
स्वप्न सुन्दरी सी अम्बर से
उतर रही लहराती बरखा
मोती सी उज्ज्वल बूंदों का
झिलमिल हार बनाती बरखा

आज इस वक्त सुबह के दस बजने में दस मिनट पर जब छत पर चलता पंखा अचानक बिजली चली जाने से थम गया है, बाहर से छत से टपकती इक्का-दुक्का बूंदों की ध्वनि के सिवा कुछ पंछियों की आवाजें सुनायी दे रही हैं, कोई महीन कोई तीखी आवाज.  बाहर हॉट वाटर सिस्टम में गर्म पानी भाप के साथ उछल-उछल कर थम गया है. वह अपने आप के सम्मुख बैठी है, सुबह ध्यान में २५ मिनट कैसे बीत गये पता ही नहीं चला, गीता पढ़ने बैठी तो –पता नहीं क्यों बार-बार पढ़े शब्द जैसे टकरा कर लौट आये, मन के भीतर तक नहीं गये. एक सखी से बात की, उसका फोन खराब था अन्यथा उसी ने कर लेना था, पर वह उसके साथ हिसाब-किताब वाली मित्रता नहीं रखना चाहती. वह अलेप, निर्लेप या कोई ऐसा ही शब्द जिसका अर्थ हो मुक्त, निर्बाध...किसी भी तरह के मानसिक उहापोह से आजाद रहना चाहती है. जून का गला खराब है, कल शाम वे उसे कमजोर दिखे, शायद उनकी अस्वस्थता का अनुमान वह नहीं लगा पा रही है, उनकी देखभाल ठीक से नहीं कर पा रही है, उन्हें आराम की जरूरत है. उसे अस्वस्थता के नाम से ही चिढ़ है, सम्भवतः स्वस्थ मनुष्य यह भूल ही जाता है कि अस्वस्थ होने पर कैसा लगता है.

कल शाम उसने ‘कॉर्न सूप’ बनाया, घर में उगे ताजे मकई का सूप बहुत स्वादिष्ट बनता है. कल रात सोने से पहले वे किसी बात पर बहुत हँसे और उसने हँसने पर चार पंक्तियाँ भी गढ़ लीं पर रात को सपने में रोना पड़ा, जून को (पर स्वप्न में वह बदले से लग रहे थे) वाशिंग मशीन से करेंट लग जाता है. दादी जी की बात याद आ गयी जब वे कहती थीं, ‘हासे दा विनासा होसी’ ! आउटलुक में मंटों की कुछ दिल-दहलाने वाली कहानियाँ पढ़ीं, १९४७ की याद दिलाना आज की पीढ़ी के लिए आवश्यक है.

अपने आप से बातें करना अच्छा लगता है,
हम भी पागल हो जायेंगे ऐसा लगता है

आज कुछ ऐसी ही कैफियत हो रही है उसके मन की. कल रात को वह बहुत गुस्से में थी, जे कृष्णामूर्ति के अनुसार वह गुस्सा ही थी उस पल, उनका माली ठीक से बगीचे की देखभाल नहीं करता इस बात पर. उपाय यही है कि आज से नियमित एक घंटा वह स्वयं काम करे. आज सुबह  उठी तो लगा जैसे कल रात की बात भूल गयी है, ध्यान के समय भी ज्यादा याद नहीं आई पर बाहर जाकर देखा तो नैनी के बेटे को बुलाये बिना नहीं रह सकी, माली के साथ वह भी सहायता करेगा. कल शाम को एक मित्र परिवार आया उसने चाय कुछ कड़क बना दी, इतने वर्षों से चाय बना रही है पर सही अनुपात का ज्ञान अभी तक नहीं हुआ है. नन्हे को आज क्लास के बाद एक चित्रकला प्रतियोगिता में भी जाना है, जो Assam Science Association की तरफ से विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष में हो रही है. पेड़ों के नाम एक कविता और बगीचे में काम करना पर्यावरण के प्रति उसका उपहार होंगे.

Monday, July 8, 2013

सावन तो सावन है


इस क्षण उसके पास करने को कुछ नहीं है यही विचार मन में बार-बार आ रहा है, शाम के सवा चार हो गये हैं, जून अभी तक लौटे नहीं हैं. उसकी बायीं बांह में इंजेक्शन के कारण हल्का दर्द है और सिर भी भारी है. पिछले कई दिनों से स्वास्थ्य की एक समस्या के कारण, जो उसे कुछ सिखाने आई है. उसे लगता है यह आत्म निरीक्षण और साहसी बनने का समय है. ईश्वर चाहेगा तो अगले दो हफ्तों में वह बिलकुल ठीक हो जाएगी. अच्छा लगता है जब जून बहुत स्नेह से उसका ध्यान रखते हैं. शाम को वे क्लब जायेंगे उसे लाइब्रेरी से पुस्तकें बदलनी हैं. उसे याद आया दो हफ्ते पहले उसने स्वास्थ्य पर  विशेष ध्यान देना शुरू किया था, उसके चार-पांच दिनों बाद ही यह समस्या शुरू हुई...अर्थात..

आज सुबह जब नन्हे ने असमिया के अक्षर बनाने सीखे तो उससे वर्गीय ‘ज’ बन ही नहीं रहा था, सो आज से फिर अभ्यास शुरू किया है वरना इतने दिनों की मेहनत व्यर्थ चली जाएगी. उसने टीचर को फोन किया, वह अब लिखने की जगह बोलने का अभ्यास कराएँ पर वह नहीं मिलीं, उसे लगता है गलत बोलने पर लोग हँसेंगे सो वह बोलती ही नहीं, वैसे हिंदी यहाँ सभी समझते और बोलते हैं सो दूसरी भाषा में बोलना अपनी ख़ुशी के लिए ही है,

Feeling  not good. God has punished her. So dull headache and boredom is with her since jun left for field duty. He will be back in the evening. It is about two o’ clock, All is not well. Yesterday they got two letters and day before four, but she was not feeling to reply them. Nanha has made one beautiful greeting card for his teacher in the morning. और वह पिछले दिनों अपने अंतर में झाँकने का प्रयास कर रही थी, उस डिवाइन फ्लेम की खोज में जो  सबके भीतर है, सच पूछो तो उसी ने उसे उजाला दिया है पिछले दिनों. वरना इस दर्द को सहना इतना आसान नहीं था. She will bear it with courage and smiles and she will never ever cry for this. Because if it is superficial then it is not worth crying and if it is something serious then what is the use of crying. She will prepare herself for the long journey. Jun says he will bring six dresses for her, he loves her so much and nanha also. She will make them happy while she is with them. If she is losing interest in her surroundings then it is  not a good sign but it is not true, today in the morning she went to see her neighbor.

गमे दिल को इन आँखों से छलक जाना भी आता है...
आज सुबह के पौने दस बजे पीटीवी की इन सुरीली आवाजों ने न जाने उसके दिल के किस तार को छू दिया है कि आँखें सावन-भादों बन गयी हैं.
ऐ दिल किसी को याद करके इतना उदास क्यों है  और सबाए लाये तन्हा
इस चमन की कली तन्हा ...
ये आवाजें इतनी दर्द भरी थीं कि यादें जो भूली हुई थीं, फिर से ताजा हो गयीं.
सावन तो सावन है बरसेगा
पागल है दिल फिर भी तरसेगा
लगता है मन कहीं गहरे तक उदास था जो जरा सी हमदर्दी पाकर पिघल गया है.
चलो उस मोड़ पर हम भी चढ़ जाएँ
जहाँ से जाके फिर कोई वापस नहीं आता
सुना है एक साये अजनबी बाँहों को फैलाये
जो आए उसका इस्तकबाल करती है
जो तारीकियों में लेके आखिर डूब जाती है
यही वह रास्ता है जिस जगह साया नहीं जाता
जहाँ पे जाके...
जो सच पूछो तो हम तुम जिन्दगी भर से हारते आये
हमेशा बेयकीनी के कुफ्र से कांपते आये
हमेशा खौफ के पैराह्नों से अपने पैकर ढांपते आए
हमेशा दूसरों के साये में एक दूसरे को चाहते आये
बुलाता है अगर उस कोह के दामन में छुप जाएँ
जहाँ पे जाके..
अभी अभी जून का फोन आया वह एक घंटे में आ रहे हैं.
He will miss her so much.