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Monday, June 26, 2023

जे कृष्णामूर्ति की बातें

रात्रि के दस बजने वाले हैं। आज सोनू का जन्मदिन है, नन्हा और वह  शाम को आ गये थे। सोनू बटर स्कॉच केक, सेवईं और चाकलेट्स लायी थी। उसने कोफ़्ते और शाही पनीर बनाया। कुछ देर के लिए वे सब टहलने गये, हवा शीतल थी और वातावरण शांत था। आज वे यहीं रहेंगे, अभी तक किसी कार्य में लगे हैं। नूना ने दोपहर को एक छोटे से सुडौल, अंडाकार पत्थर पर रंगों से चित्रांकन किया, अन्य उपहारों के साथ सोनू को दिया। नन्हे ने अपनी एक पुरानी मोटर साइकिल यात्रा के बारे में रोचक और रोमांचकारी संस्मरण सुनाया। जब वह एक मित्र के साथ उसकी पुरानी बाइक पर चेन्नई से बैंगलुरु आ रहा था,  जिसकी हेडलाइट ने काम करना बंद कर दिया था । किस तरह एक ऑटो की लाइट के सहारे वे लोग अपनी यात्रा पूरी कर पाये थे। जून ने आज एक सलाहकार से बात की, उसने कुछ सुझाव दिये हैं। पिछले कुछ दिनों से वह कुछ परेशान रहने लगे हैं। वर्षों तक इतना व्यस्त रहने के बाद आराम का यह जीवन उन्हें रास न आये, यह स्वाभाविक भी है। रात को नींद नहीं आती। उन्हें अधिक व्यस्त रहना होगा। संभवत: उन्हें अपनी पसंद का कोई काम मिल जाये तो ही उनकी समस्या  का हल हो सकता है। 


आज सुबह उठे तो वर्षा हो रही थी, टीवी के सामने कार्पेट पर बाबा रामदेव को देखकर योग-प्राणायाम का नियमित अभ्यास किया, बाद में वर्षा थमी तो टहलने गये। पेड़ों और पौधों पर पानी की बूँदें अति मनहर लग रही थीं, मोबाइल से कुछ चित्र उतारे। दिन में ‘डाक्टर डूलिटिल’ फ़िल्म देखी, जो नन्हे ने दो दिनों के लिए किराए पर ली थी। बड़ी मज़ेदार फ़िल्म है, जिसमें एक दिन डाक्टर को जानवरों की भाषा समझ में आने लगती है। चूहा, उल्लू, कुत्ता, गिलहरी और न जाने कौन-कौन से प्राणी उससे बात करने  लगते हैं। शाम को वर्षों बाद एक बार फिर टाल्सटाय की ‘पुनरूत्थान; पढ़नी आरंभ की, कितना दुख व कितनी निर्धनता थी उस काल में, आज भी है पर आज लोगों को हर तरह की सूचना मिल रही है, जिससे वे अपने जीवन में बदलाव ला सकते हैं। जून ने सलाहकार की बात मानी तो रात को उन्हें अच्छी नींद आयी, दिन भर वे काफ़ी ऊर्जावान बने रहे। उन्होंने पिता जी को डॉ ऑर्थो तेल भेजा है, जोड़ों के दर्द के लिए लाभकारी है। नन्हे ने दो कैनवास बुक भिजवायीं हैं, कल से वे चित्रकला का अभ्यास करना भी आरंभ करेंगे। उसने फोटोग्राफी के लिए कुछ टिप्स वाले वीडियोज़ भी भेजे हैं। 


वे रात्रि भ्रमण से लौटे तो संध्या काल से आसमान में छितराये बादल अचानक बरसने लगे। शरद ऋतु आरम्भ हो चुकी है, पर  सावन अभी भी टिकने के मूड में है। मनमौजी मन की तरह मौसम कब क्या रुख़ लेगा, कहना मुश्किल है। शाम को नवरात्र के अवसर आश्रम से प्रसारित होने वाला  कार्यक्रम सुना, देखा, ‘त्रिपुरा रहस्य’ पर चर्चा सुनी और फिर गुरु जी का प्रभावशाली उद्बोधन। बाद में भजन भी हुए और शास्त्रीय कलाओं का प्रदर्शन भी। आर्ट ऑफ़ लिविंग कितने क्षेत्रों में कितनी तरह से अपना योगदान दे रहा है। जून के एक मित्र के पुत्र का विवाह अगले वर्ष अप्रैल में होना तय हुआ है, आज ही फ़ोन पर निमंत्रण मिला, ताकि समय रहते वे टिकट करवा लें। आज उसने नीले फूलों की एक पेंटिंग बनायी। दोपहर को जे कृष्णामूर्ति को सुना, वह कहते हैं, देखने वाला ही देखा जाता है। यानी मन ही मन को देखता है और मन ही मन के ख़िलाफ़ हो जाता है। मन ही जगत को देखता है, जो मन का ही हिस्सा है और जगत के ख़िलाफ़ हो जाता है, यानि अपने ही ख़िलाफ़ ! उनका हर विरोध अंततः अपने ही विरुद्ध होता है। इस जगत की दुर्दशा वास्तव में उनकी ही दुर्दशा है यानि उस मन की जो वास्तव में वे नहीं हैं। वे जो वास्तव में हैं उसे यह जगत छू भी नहीं सकता। वह सदा निर्विकार है। वे उसी में टिके रहें तो आनंदित हैं। उनकी सारी तुलना व्यर्थ है, उनकी सारी पीड़ा व्यर्थ है, क्योंकि उनके सिवा वहाँ कोई दूसरा है ही नहीं, एक खेल चल रहा है और अज्ञान वश उन्हें इसका भान ही नहीं होता ! 



Friday, November 11, 2022

कुंगफू पांडा

 
पिछले कई दिनों से आकाश में तारे नहीं दिखे, सदा बादल ही बने रहते हैं, पर बरसते नहीं  पर आज शाम को वे टहलने निकले थे कि रास्ते में तेज हवा के साथ वर्षा होने लगी. छाता भी उड़ने लगा, एक बार तो वह उल्टा ही हो गया. वे जल्दी ही घर लौट आये. कुछ देर ‘कुंगफू पांडा’ फिल्म देखी, मार्शल आर्ट पर बनी अच्छी एनिमेशन  फिल्म है. एओएल के एक साधक ने गुरु जी की गाय के बछड़ों को सहलाते हुए दो तस्वीरें भेजी हैं. वह कई दिनों से आश्रम में रह रहा है, वहाँ कई कोरोना संक्रमित लोग भी हैं. छोटा भाई नैनीताल में घूम रहा है, पहाड़ों पर गाड़ी चलाना भी उसने सीख लिया है. कोरोना काल में भी उसका टूर जारी है. अख़बार में पढ़ा, अमिताभ बच्चन कोरोना से स्वस्थ होकर आ गए हैं, पर घर पर भी कुछ दिन अकेले रहना होगा, जो उन्हें खल रहा है. महामारी का कहर लंबे समय तक रहने वाला है. भारत में बीस लाख लोग संक्रमित हैं. कई देशों में मृत्यु दर दिल दहला देने वाली है. किन्तु अब इसका भय काम हो गया है, वे सुबह-शाम  भ्रमण के लिए जाते समय मास्क पहन कर नहीं जाते. लोग भी सामान्य दिनों की तरह ही सड़क पर दिखाई देते हैं. जबकि एक दिन में पचास हजार से अधिक संक्रमित लोग मिलते हैं. अब तक सैंतालीस हजार लोग अपनी जान भी गँवा चुके हैं. आज ब्लॉग पर एक पोस्ट लिखी, मुख्य पृष्ठ का लुक बदल गया है, पहले ज्यादा अच्छा था, खैर, हर बदलाव शुरू में अखरता है, फिर उसी का अभ्यास हो जाता है. 

जून का जन्मदिन आने वाला है, उन्हें दक्षिण भारतीय भोजन पसंद है इसलिए नन्हा और सोनू उनके लिए ढेर सारे गिफ्ट्स लाये हैं. बड़ा दोसा तवा, उत्तपम पैन, पुत्तू बनाने का बर्तन और पनियप्पम बनाने की छोटी सी कड़ाही, मिठाई, कुछ एग्जॉटिक फल  और कॉफी की एक बोतल भी. पिछले हफ्ते वे एक टेलीस्कोप भी लाये थे. यह बात अलग है तब से चाँद के दर्शन ही नहीं हुए. जून ने इस अवसर पर शांति धाम में कुछ सामान भिजवाया है और स्वतंत्रता दिवस पर सोसाइटी के कर्मचारियों के लिए मिठाई मंगवाई है. 


आज जन्माष्टमी के अवसर पर गुरूजी का सुंदर उद्बोधन सुना. शाम को उन्होंने ‘सत्यं शिवं सुंदरं’ ध्यान कराया. बंगलूरू में एक एमएलए के घर पर भीड़ ने हमला कर दिया, हिंसा को फैलने में देर नहीं लगती. फेसबुक की एक पोस्ट के खिलाफ यह प्रतिक्रिया हुई थी. एक भारतीय होने के नाते उन्हें समाज में हिंसा के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए. जाति के नाम पर हिन्दू समाज में काफी भेदभाव रहा है, ऐसे समाज में जहाँ एकता न हो बाहरी आक्रमण का सामना करना कठिन हो जाता है. वैसे भी हिन्दू स्वभाव से शांति प्रिय है, वह झगड़ा न हो इस भय के कारण अत्याचार सह लेता है. 


आज स्वतंत्रता दिवस है. एक नयी फिल्म देखी, ‘गुंजन सक्सेना- द कारगिल गर्ल’, जाह्नवी कपूर ने अच्छा अभिनय किया है. आज से नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन आरम्भ हो रहा है. सभी भारतियों को एक हेल्थ आईडी दी जाएगी, जिसके कारण उनकी स्वास्थ्य संबन्धी सभी समस्याओं को निपटारा समय से हो पायेगा. सुबह  झंडा आरोहण के लिए गए. लन्च में पनिअप्पम बनाए. नन्हे ने चेट्टीनाड आलू बनाये, जो वे अपने मित्र के लिए भी ले गए. सोनू ने केक बनाया. आज दोपहर को माली ने सूरजमुखी के बीज गमले और जमीन में बोये, एक हफ्ते में अंकुर निकल आएंगे. 


Wednesday, May 4, 2022

रैटटौइल




आज ईद है, कल ब्लॉग में ईद पर एक कविता प्रकाशित की थी। जून आज एओएल सेंटर गये, सेंटर सामान्य जनता के लिए अक्तूबर से पहले नहीं खुलेगा। उन्होंने उसके जन्मदिन पर सफ़ाई कर्मचारियों को बाँटने के लिए फ़ूड पैकेट्स का ऑर्डर दे दिया है। कल शाम के आँधी-तूफ़ान के बाद आज भी यहाँ वर्षा हो रही है। असम की तरह यहाँ भी देखते-देखते बादल छा जाते हैं, और बूंदा बांदी शुरू हो जाती है। तापमान तीस डिग्री से कम ही रहता है, हवा बहती रहती है. दिल्ली व उत्तर भारत में गर्मी बहुत अधिक है। चुरूँ में तापमान पचास डिग्री पहुँच गया, कोरोना वायरस को इतनी गर्मी में समाप्त हो जाना चाहिए, पर वह अपने पैर पसारता ही जा रहा है। श्रमिकों की समस्या भी विकराल रूप ले रही है, वे सभी अपने गाँव-घर जाना चाहते हैं। आज अख़बार में पढ़ा कोरोना की वैक्सीन आने से भी ज्यादा लाभ होने वाला नहीं है, इसका खतरा किसी न किसी रूप में बना ही रहेगा. वैसे अब सुबह शाम पार्कों में लोग मास्क लगाकर टहलते हुए मिलने लगे हैं. सुबह आम के बगीचे से ढेर सारे गिरे हुए आम मिले। जून ने आम की मीठी चटनी बनायी है। अगले हफ़्ते वे गोंद के लड्डू भी बनाने वाले हैं। अगले महीने की पहली तारीख़ से गुरूजी का ‘नारद भक्ति सूत्र’ पर व्याख्यान आरंभ हो रहा है। जीवन की नींव कितने वर्षों पहले रख दी जाती है और बाद में उस पर इमारत बनती है। वर्षों पूर्व उसने डायरी में लिखा था, मन की गहराई में अथाह, असीम प्रेम है ! भक्ति सूत्रों में गुरूजी उसी का वर्णन करने वाले हैं। आज का दिन बहुत ख़ास रहा, सुबह वे टहलने गए तो मोबाइल हाथ में था, सूर्योदय से पूर्व आकाश गुलाबी हो गया था, आकाश पर बादलों में अनोखे रंग बिखर रहे थे, सुंदर तस्वीरें उतारीं। यहाँ स्थिर छोटे से मंदिर गये, प्रसाद के लिए लड्डू थे, मंदिर से बाहर निकलते ही एक वृद्ध महिला दिखीं, जो प्रसाद पाकर अति प्रसन्न हुईं। परमात्मा ही मानो उन्हें उस क्षण उन्हें वहाँ ले आया था। नौ बजे तक नन्हा व सोनू भी आ गये। ज़ूम पर सभी परिवार जनों से बात हुई, दीदी व अन्य सभी ने जन्मदिन पर शुभकामनाएँ दीं। दोपहर को ‘रैटटौइल’ फ़िल्म देखी, जिसमें एक चूहा अपने शेफ़ बनने के सपने को पूरा करता है, बहुत ही अनोखी और मज़ेदार फ़िल्म है यह। शाम को सोनू ने केक को सजाकर प्रस्तुत किया। आज एओएल के दिनेश गोखले द्वारा बनाया गया ‘नारद भक्ति सूत्र’ का परिचयात्मक वीडियो देखा। अगले पंद्रह दिन अवश्य ही काफ़ी भरे-पूरे होंगे, परमात्मा की भक्ति से भरपूर ! आज दोपहर वाली नैनी काम पर नहीं आयी, हर हफ़्ते वह किसी न किसी बहाने से छुट्टी ले लेती है। सुबह वाली ऐसा नहीं करती, आज उसके बेटे का फ़ोन आ गया, दोनों बहुत खुश थे। रात्रि के साढ़े आठ बजे हैं, अभी-अभी फ़ेसबुक पर देखा, दीदी अपने जन्मदिन का केक काट रही हैं, जिसके मध्य से एक रोशनी निकल रही है। उन्होंने गुलाबी साड़ी पहनी है और चेहरे पर सदा की तरह ख़ुशी झलक रही है। सुबह ज़ूम पर सबके साथ उनसे बात हुई थी। दोपहर को भक्ति सूत्रों पर गुरूजी की सुंदर व्याख्या सुनी. विष्णु पुराण में विष्णु को महादेवी को समझाते हुए सुनना बहुत अच्छा लगता है। वह किसी भी बात से प्रभावित नहीं होते। हिरण्यकश्यपु उन्हें अपना शत्रु मानता है पर वह जानते हैं कि वह उनका द्वारपाल है. श्रीकृष्णा में अक्रूर जी को कृष्ण के भगवान होने का प्रमाण मिलने वाला प्रसंग दर्शनीय होगा. अमेरिका में एक अश्वेत के प्रति पुलिस की बर्बरता के खिलाफ हिंसा बढ़ती जा रही है. श्वेत भी इसका विरोध कर रहे हैं, पर इसके लिए वे गाड़ियों में आग क्यों लगते हैं, यह समझ से बाहर है. केरल में एक हथिनी की दर्दनाक मृत्यु की खबर सुनी, लोग कितने हृदयहीन हो सकते हैं. कल एक और तूफान निसर्ग महाराष्ट्र में आया पर ज्यादा नुकसान नहीं हुआ इसके कारण. यहाँ का मौसम अवश्य बादलों भरा हो गया है.

Thursday, November 26, 2020

जामुनी फल

 

वही कल का समय है. आज अफ़ग़ानिस्तान-वेस्टइंडीज के मध्य मैच चल रहा है. कल पाकिस्तान का मैच है जिसे विश्व कप फाइनल में पहुंचने के लिए बांग्लादेश को 350 रन से हराना होगा, जो एक असम्भव कार्य है. चीन का सस्ता सामान भारत में बिक रहा है जिससे यहां के व्यापारियों को नुकसान हो रहा है, इस मुद्दे को आज के तेनालीरामा में दिखाया जा रहा है, शायद यह समस्या उन दिनों भी रही हो. आज योग साधिकाओं ने शिव तांडव पर नृत्य किया. दिन भर की गर्मी के बाद उसी समय तेज बौछार भी पड़ने लगी, जैसे प्रकृति भी उनके आनंद में सम्मिलित होने आ गयी हो. एक साधिका का जन्मदिन था, वह मिष्ठान लेकर आयी थी, उसे वह लाल कोटा की साड़ी उपहार में दी, जो स्कूल से विदाई के समय उसे मिली थी. सभी को जामुन भी दिए, मीठे और जामुनी रंग के रसीले फल, जो इस वर्ष दोनों पेड़ों में बहुतायत से हुए हैं. जून को नैनी के घर से मछली की गंध ने कल रात्रि परेशान किया, नूना की सूंघने की क्षमता शायद घट गयी है या किसी दिव्य गंध की अनवरत उपस्थिति से उसे जरा भी असुविधा नहीं हुई. जीवन कितना रहस्यों से भरा है न ! सुबह परिवार के एक सदस्य के अवसाद के बारे में व्हाट्सएप पर एक सन्देश देखा, अवसाद से शरीर भी अस्वस्थ हो गया है. उससे फोन से बात की. अन्य सभी को बताने के लिए पारिवारिक ग्रुप पर भी लिख दिया, सभी ने उसके स्वास्थ्य की कामना की, फोन किया, जो मिलकर आ सकते थे, वे गए भी. ऐसे वक्त में ही परिवार के महत्व का पता चलता है, हृदय से निकले हुए सहानुभूति और अपनत्व के शब्द मन को हल्का कर देते हैं. जीवन में बहुत कुछ सहना पड़ा है उसे, किसी को भी सहना पड़ सकता है, फिर भी परमात्मा पर अटूट विश्वास सारे दुखों से पार ले जा सकता है. छोटे भाई के गॉल ब्लैडर के ऑपरेशन का भी पता चला. एक दिन दफ्तर में उसे तेज दर्द हुआ, स्टोन काफी दिनों से था.  


आज नई सरकार का पहला बजट पहली बार महिला वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रस्तुत किया. विपक्ष उसका विरोध कर रहा है, उन्हें सदा की तरह सरकार से कई मुद्दों पर शिकायत है. सुबह एक परिचिता के यहाँ गयी, जहां गुरु ग्रन्थ साहिब का अखंड पाठ  चल रहा था, पूरे अड़तालीस घण्टे चलने वाला था. बताया गया, पाँच पाठी होते हैं और हर कोई दो घण्टे तक पाठ करता है. यदि मध्य में किसी को कोई परेशानी होती है तो अन्य पाठी उसकी जगह दस मिनट के लिए पाठ करता है. 


आज का इतवार भी बीत गया, अब गिने-चुने इतवार रह गए हैं उनके पास असम में. शाम को छोटी ननद से बात हुई, ननदोई का तबादला भदोही हो गया है, ट्रेन से अप डाउन करेंगे. नन्हे का जन्मदिन आने वाला है, उसके लिए लड्डू बनाये और चिवड़ा-मूंगफली जो उसे बहुत पसन्द है, उसी दिन जून बंगलूरू जा रहे हैं.  शाम को उन्हें एक विवाह के रिसेप्शन में जाना है. लौटने में दस भी बज सकते हैं. कल वह कुछ सखियों को घर पर बुला रही है, जिनके साथ इतने वर्षों तक कितने ही आयोजनों में भाग लिया. आज दोपहर को कल की लन्च पार्टी के लिए कोफ्ते बनाये और बड़े भी. शाम को जून ने सांगरी की सब्जी बनाई. कल वे कुछ गेम्स भी खेलने वाले हैं. भारत सेमी फाइनल हार गया. अब विश्वकप के लिए चार वर्षों का इंतजार करना होगा. आज बहुत दिनों के बाद कश्मीर पर एक कार्यक्रम देखा, गाँवों की तरक्की के लिए सरकार पंचायतों को सीधी मदद दे रही है. वहां के युवा भी सेना और पुलिस में भर्ती होने के लिये आगे आ रहे हैं. धरती का स्वर्ग कहा खजाने वाला यह भूभाग पुनः शांति और समृद्धि का समय देखे हर भारतीय की यही कामना है. पाकिस्तान को एक न एक दिन इस सत्य को स्वीकारना होगा कि भारत से मित्रता करके ही उसका लाभ है. नन्हे के जन्मदिन पर लिखी कविता की पिताजी ने तारीफ की और बहुत सुंदर शब्दों में प्रतिक्रिया लिखी. उनकी भाषा बहुत अच्छी है और भावनाओं की गहरी समझ भी है, आत्मा की झलक जिसे मिली हो वह गहराई तक महसूस भी कर सकता है और व्यक्त भी कर सकता है. 


कालेज के उन दिनों में जब महादेवी वर्मा की ‘प्रतीक्षा’ पढ़ी थी, उसकी कुछ पंक्तियाँ भा गयीं- 


जब इन फूलों पर मधु की 

पहली बूँदें बिखरी थीं 

आँखें पंकज की देखीं 

रवि ने मनुहार भरी सीं

.....


वे कहते हैं उनको मैं

अपनी पुतली में देखूं 

यह कौन बता जाएगा 

किसमें पुतली को देखूँ ?


Thursday, June 13, 2019

जुकिनी की पौध





पौने तीन बजने वाले हैं, माली की प्रतीक्षा है. आज सुबह नर्सरी गयी थी, फूल गोभी, पत्ता गोभी, व ब्रोकोली की पौध लायी, शिमला मिर्च, बैंगन व जुकुनी की भी. उसे फोन किया, कहने लगा, आ रहा है. तीन बजे से योग कक्षा आरम्भ हो जाएगी. आज सुबह मृणाल ज्योति में भी बच्चों को योग कराया. नैनी ने बताया उसका पति गलत संगत में पड़ गया है. लोग अपना जीवन स्वयं ही बर्बाद करते हैं. एक बार कुसंगति में पड़ जाने पर उससे निकलना कितना कठिन होता है. आज नन्हे व सोनू के लिये लिखी कविता टाइप की है. अभी कुछ शेष है, उसे सुंदर फॉण्ट में प्रिंट करके ले जाना है. कल शाम को दो अध्यापिकाएं आयीं, टाइनी टॉट्स के स्वर्ण जयंती कार्यक्रम में निमंत्रित करने के लिए, एक डिनर तथा एक लंच भी है.

रात्रि के आठ बजे हैं आज 'टुबड़ी' है, गुरु नानक देव का जन्मदिन. सुबह पिताजी को उनके जन्मदिन की बधाई दी. छोटी भाभी ने बहुत अच्छी तरह से उनका जन्मदिन मनाया. केक बनाया, फूल और स्वेटर उपहार में दिए. व्हाट्स एप पर उनकी आवाज में बधाई का उत्तर दिलवाया. जून को एक सहकर्मी के यहाँ जाकर एक प्रेजेंटेशन तैयार करने का अवसर मिला. सभी पब्लिक सेक्टर्स की कम्पनी के अनुसन्धान विभागों को जोड़ने के लिए भूमिका बनाने का कार्य करने एक उच्च स्तरीय कमेटी कमेटी आ रही है. उसे ही देना है. आज वह कविता पूरी हो गयी, कुछ ज्यादा ही लम्बी हो गयी है, जून इसे प्रिंट करके ला देंगे. आज भी योग वसिष्ठ पर स्वामी अनुभवानंद जी का प्रवचन सुना. मन जब अपने स्वरूप में देर तक टिकने लगता है. एक सहज प्रकाश की नदी में डूबता-उतराता है और नील अम्बर में निर्बाध उड़ता है. जीवन मुक्त इसी को कहते हैं. आत्मा और परमात्मा का भेद भी है और अभेद भी, ज्ञान और भक्ति का अनोखा का संगम ! जीवन कितना सुखद हो सकता है, इसे आत्मज्ञानी ही जान सकता है !

शाम के सवा चार बजे हैं. नवम्बर की हल्की ठंडी शाम है. अभी से पश्चिम के आकाश में लालिमा छा गयी है, यहाँ दिसम्बर आते-आते तो चार बजे अँधेरा ही हो जाता है. महीनों बाद झूले पर बैठकर लिख रही है. जून अभी आये नहीं हैं, दोपहर को भी देर से आये, एक सरकारी कमेटी के कुछ लोग आने वाले हैं, उसी की तैयारी चल रही है उनके विभाग में. आज सुबह टहलने गये तो हल्का अँधेरा था, वापस आते-आते सुरमई उजाला हो गया, हवा में फूलों की गंध घुली थी. पहले गाँव के स्कूल गयी, बच्चों को संगीत की धुन पर व्यायाम करना अच्छा लगा, फिर मृणाल ज्योति. विवाह के कार्ड्स भी दिए. उसके बाद एक अध्यापिका के साथ 'विश्व विकलांग दिवस' के सिलसिले में चार स्कूलों में गयी, उन्हें तीन दिसम्बर पर लगाने के लिए बैज व बुक मार्क दिए. इससे मिलने वाले धन का उपयोग विशेष बच्चों के लिए किया जायेगा.   


Saturday, February 9, 2019

गार्डन अम्ब्रेला



आज नेता जी का जन्मदिन है. बंगाली सखी की बिटिया का जन्मदिन भी है, सुबह उससे बात हुई. कल शाम को एक भोज में गयी थी. कुछ परिचित महिलाओं से बात हुई, यूँ ही इधर-उधर की बातें. एक पुरानी परिचिता जो अब यहाँ नहीं रहतीं, उनका फोन नम्बर भी लिया. सामने बगीचे में तरह-तरह के फूल खिले हैं व पंछियों की आवाजें आ रही हैं. अगले महीने पिताजी से मिलने घर जाना है दिल्ली होते हुए.

शाम हो गयी है, यानि एक और दिन बीतने में कुछ ही घंटे शेष हैं. आज सुबह कितनी देर से उठे वे, कारण, रात को देर तक नींद का न आना.. उसका कारण कल शाम को तीन-साढ़े तीन घंटे व्यर्थ ही बातों में बिता देना. जीवन को इतना भी हल्के में नहीं लेना चाहिए कि जीवन से रस ही चला जाए. मन को भी विश्राम चाहिए और जैसे कोई गायक रोज रियाज करता है, वैसे ही साधक को रोज ही साधना करनी होती है. थोड़ी सी भी लापरवाही मन को मूल से दूर ले जाती है और वह बिन जल की मछली की तरह तड़पता है. परमात्मा से एक क्षण की भी विलगता अब सहन नहीं होती. जब दरिया भीतर बहता ही है तो क्यों कोई प्यासा रहे. कल शाम को मंझली भाभी ने भतीजी के रिश्ते की बात बतायी. पंजाब का परिवार है, लड़का विदेश में रहकर नौकरी करता है. ईश्वर चाहेगा तो इसी वर्ष उसका भी विवाह हो जायेगा. नैनी की सास ने चार संतरे लाकर दिए हैं जो उसका बड़ा बेटा अरुणाचल प्रदेश के संतरे के बगीचे से लाया है. आज बड़े भाई से बात की, वह खुश लग रहे थे.

रात्रि के साढ़े आठ बजे हैं. शाम को लेडीज क्लब की मीटिंग में गयी, एक सदस्या के लिए कविता पढ़ी. एक सखी की माँ अस्वस्थ है, अस्पताल में है, वह उससे मिलने गयी है. जून अभी तक आये नहीं है. ऑडिट चल रहा है उनके दफ्तर में. शाम को योग कक्षा हुई, अगले हफ्ते दो दिनों के लिए एक साधिका को कहा है, अपने घर में करवा लें. कल शाम से पहले ही नन्हा अपने मित्रों के साथ आ जायेगा. घर में चहल-पहल हो जाएगी. शाम को बगीचे की सफाई करवाई. दोपहर को कुर्सियां और बगीचे के छाते भी आ गये हैं. जून घर का सामान भी ले आये हैं, यानि तैयारी पूरी है और उसने नन्हे और उसकी भावी पत्नी के लिए कविता भी लिख दी है जिसे जून ने प्रिंट कर दिया है. आज चारों ब्लॉग्स पर पोस्ट प्रकाशित भी कीं. दोपहर को दूध गैस पर रखकर सो गयी, उबल कर गिर गया, विश्राम की कीमत !

साढ़े दस बजने को हैं, मौसम आज बादलों भरा है. नन्हा और उसके मित्र कोलकाता पहुँच चुके हैं. दो घंटे बाद अगली फ्लाईट है. भोजन बन चुका है, जून आज देर से आने वाले हैं, उनका मन लेकिन इधर ही लगा हुआ है. वर्षा होने से पूर्व ही फोन करके कहा, सूखी लकड़ियाँ गैराज में रखवा दे, जो मेहमानों के आने पर एक रात्रि उन्हें जलानी हैं. सुबह-सुबह एक सखी आई थी, खुश थी, चाहती है नन्हे को स्वयं जाकर बंगाली सखी को बुलाना चाहिए, पर उसे लगता है इसकी कोई जरूरत नहीं है. उसने जो ठान लिया वह करके ही रहेगी, इसलिए जो होता है सब ठीक है. वर्षा होकर रुक गयी है, पूरे लॉन में पत्ते बिखर गए हैं. उन्होंने कल ही अच्छी तरह सफाई करवाई थी. Really God Loves Fun!

Thursday, August 30, 2018

आठ शक्तियाँ




नन्हा कल वापस चला गया. एक हफ्ता उसके रहने से घर का माहौल ही बदल गया था. पता ही नहीं चला एक हफ्ता कैसे बीत गया. मित्र के विवाह में वह आया तो अपने साथ एक मित्र को भी ले आया, दोनों ने ड्रोन उड़ाया और वह खो गया. उसे यकीन है कि एक न एक दिन वह मिल जायेगा. उसकी मित्र भी पहली बार घर आई, पता नहीं भविष्य में क्या लिखा है. नन्हे ने पूसी के लिए जो घर बनाया उसमें रेशमी वस्त्र बिछाया, काफी आरामदेह है, वह रात को उसमें सो भी सकती है. अगले हफ्ते मृणाल ज्योति में वार्षिक सभा है. जिसके लिए उसे एक कविता लिखनी है. जून कल चार दिनों के लिए शिलांग व गोहाटी जा रहे हैं. इस दौरान उसे एक जन्मदिन की पार्टी में जाना है और उसी दिन महिला क्लब की थैंक्स गिविंग पार्टी भी होने वाली है. अगले दो दिन घर की सफाई में लगने वाले हैं, पिछले हफ्ते इसकी तरफ ज्यादा ध्यान नहीं दिया.

सुबह टीवी पर एक ब्रह्मकुमारी बहन आठ शक्तियों के विषय में बता रही थीं. हर आत्मा में ये आठ शक्तियाँ हैं. पहली है सिकोड़ने और फ़ैलाने की शक्ति, कछुए की तरह विपत्ति आने पर स्वयं को सिकोड़ लेना और सामान्य काल में विस्तार कर लेना यदि वे सीख जाते हैं तो हर परिस्थिति का सामना कर सकते हैं. दूसरी है समेटने की शक्ति, जो भी विस्तार उन्होंने जगत में किया है, अंत में एक क्षण में उसे छोड़ कर जाना होगा. यदि जीवन काल में भी समय-समय पर सब प्रवृत्ति त्याग कर गहन ध्यान में जाने की क्षमता है तो मोह से मुक्ति सहज ही मिल जाती है. मन की समता बनाये रखने के लिए सहन शक्ति या तितिक्षा का भी सबको अभ्यास करना है. यदि मन में सबके प्रति शुभभावना होगी तो किसी की बात बुरी नहीं लगेगी और सबके साथ निभाना सरल हो जायेगा. किसी भी बात को अपने भीतर समाने की शक्ति को भी पोषित करना है, जो विशाल बुद्धि से आती है, जीवन जितना मर्यादित होगा, अनुशासन का पालन सहज होगा उतना ही विपरीत को समाना आसान होगा. सार-असार, नित्य-अनित्य को परखने की शक्ति भी हर आत्मा में छुपी है. ज्ञान को अपने भीतर धारण करने से ही यह पोषित होती है. किसी भी विषय में शीघ्र निर्णय लेने की क्षमता भी हरेक के भीतर है पर वे कई बार गलत निर्णय ले लेते हैं या निर्णय को टालते रहते हैं और समय निकल जाता है. सांतवी शक्ति है सामना करने की, जीवन में किसी भी परिस्थिति का बहादुरी से सामना करने की शक्ति भी जगानी होगी. अंतिम लेकिन एक महत्वपूर्ण शक्ति है सहयोग करने की शक्ति, जगत म,एन सभी को किसी न किसी का सहयोग चाहिए, जो सबके साथ मिलकर काम करना जानता है, वह कभी अकेला नहीं होता.

जून इतवार दोपहर को गये, शाम तक शिलांग पहुंच चुके थे, अगले दिन गोहाटी आ गये. सम्भवतः परसों वह लौट आयेंगे. रविवार को उसने बच्चों के साथ गुरूपूर्णिमा का उत्सव मनाया, सोमवार को संध्या के योग सत्र में फिर से महिलाओं के साथ. अगले सप्ताह उन्हें महिला क्लब की मीटिंग में योग पर एक कार्यक्रम प्रस्तुत करना है. इस समय रात्रि के ग्यारह बजने को हैं. शाम को लिखना आरम्भ किया था कि योग कक्षा का समय हो गया. उसके बाद तैयार होकर वह एक नन्ही बच्ची के जन्मदिन की पार्टी स्थल पर गयी, वहाँ होटल के स्टाफ के अतिरिक्त कोई नहीं था. लौट कर उनके घर गयी फिर बच्ची की नानी के संग वहाँ पहुँची. काफी अच्छा इंतजाम था. केक काटा गया और बिना अंडे का केक खाकर वह महिला क्लब की आभार प्रकटीकरण के भोज में आ गयी. जहाँ सभी महिलाएं आ चुकी थीं. मेहमान पौने नौ बजे आने शुरू हुए. दस बजे तक औपचारिक भाषण आदि होते रहे, उसके बाद जूस पव अन्य पेय आदि दिए गये, मेहमानों में कुछ उच्च अधिकारी भी थे. दस बजे वह वापस आ गयी, एक सखी ने रोटी व रायता पैक करके दे दिए, दिन की भिंडी की सब्जी पड़ी थी, सो डिनर घर पर ही खाया. सुखबोधानन्द जी को बहुत दिनों बाद सुना और अब ‘पीस ऑफ़ माइंड’ पर गूढ़ चर्चा चल रही है. वे आत्मायें हैं, हर अपने शुद्ध रूप में आत्मा पवित्र हंस है, देवदूत है, कमल वत है ! कर्मों के द्वारा ही वे आत्मा के शुद्ध स्वरूप से नीचे गिरते हैं और ज्ञान, कर्म व धारणा के द्वारा ही वे पुन शुद्ध स्वरूप को पा सकते हैं. स्वयं को दाता से जोड़कर उन्हें भी कर्मों तथा वाणी के द्वारा जगत को देते ही जाना है. वे जब स्वयं के असली स्वरूप को भूल जाते हैं तो ही द्वंद्व में पड़ते हैं. यदि हर क्षण यह याद रहे कि वे कौन हैं, तो सदा आत्मा में ही रमण करेंगे.  

Thursday, August 17, 2017

मलाला की किताब


आज छोटे भांजे का जन्मदिन है, अभी तक उससे बात नहीं हो पायी. तीन द्वारों से उसे खटखटाया अवश्य, फोन, sms तथा फेसबुक. आजकल संवाद के जितने ज्यादा साधन हैं, बात करना भी उतना ही कठिन, सभी व्यस्त हैं सो अपनी ओर से बधाई दे दी, इस पर ही संतोष करना होगा ! आज नुमालीगढ़ की तस्वीरें लगाई हैं फेसबुक पर. वह तितलियों का पार्क और नदी, सभी जीवंत हो गये जैसे. इस समय भी बगीचे में धूप है, बोगेनविलिया, गुलाब, जरबेरा और गुलदाउदी के फूल खिले हैं, पीठ पर मध्यम आंच देती सूर्य रश्मियाँ भली लग रही हैं. आज अक्षर अपने आप ही छोटे-छोटे बन रहे हैं डायरी पर, शायद कुछ है भीतर जो छोटा कर रहा है. कल जो कविता लिखी थी शायद इसी कारण..पर यह आवश्यक तो नहीं कि हर बार कविता अच्छी ही बन पड़े, हाँ, यह तो देखना चाहिए, पोस्ट करने लायक है या नहीं. खैर, आज बहुत दिनों बाद पुनः ‘पतंजलि योग सूत्र’ उठाई है, वही जो नन्हे ने खरीदी थी उसके लिए बंगलूरू में.

परसों मलाला को टीवी पर नोबल पुरस्कार प्राप्त करते देखा व सुना और कल लाइब्रेरी में उसकी पुस्तक भी मिल गयी. एक दिन पाकिस्तान की प्रधानमन्त्री बनेगी यह लडकी. कल पत्रकारों को जवाब देते हुए उसने स्वयं ही यह बात कही थी. मलाला ने इतनी छोटी उम्र में इतना साहस दिखाया है, लोग मरते दम तक भयभीत रहते हैं. परमात्मा ऐसे ही लोगों के रूप में धरा पर आता है. सुबह आज उठने में देर हुई, कल रात नींद देर से आई. कल शाम वे जिम गये, पहली बार अभ्यास किया, शरीर में हल्का खिंचाव महसूस हो रहा था, शायद न सो पाने में यही कारण रहा हो; अथवा उससे भी बड़ा कारण था मन का पूरे होश में आ जाना, सोने के लिए थोड़ी सी बेहोशी तो चाहिए. ध्यान के अभ्यासी को नींद पहले से कम होना स्वाभाविक ही है. कल से यात्रा की तैयारी भी आरम्भ करनी है. कुछ उपहार खरीदने हैं. नन्हा भी आज रात यात्रा पर निकल रहा है, दिल्ली, मुम्बई, हैदराबाद आदि जगहों पर जायेगा, उन्हें अपनी कम्पनी के लिए कैम्पस इंटरव्यू करने हैं. कल बड़ी भतीजी का जन्मदिन है, उसे शुभकामना के रूप में कविता लिखी है, शाम को जून उसकी तस्वीर लगायेंगे. आज सुबह नैनी कुछ उदास थी, उसका दुःख देखकर आँख भर आयीं. दिल बहुत नाजुक शै होती है आखिर..और वह भी साधक का दिल..वह साधक है यह भी कैसे कहे, हाँ, उसके दिल में खुदा जरूर है, पर खुदा तो हरेक के दिल में है, हर जगह है, वही जानता है खुद को और वही जनाता है खुद को, उसका इसमें कुछ भी तो नहीं.


आज यात्रा की तैयारी के लिए कुछ और काम किये. जून भी बहुत उत्साहित हैं इस यात्रा को लेकर. सुबह उन्होंने कुछ धनराशि भी दी, कल कहा, झोली भर कर उपहार ले जाओगी तो झोली भरकर लाओगी. सचमुच एक बैग पूरा भर गया है, अभी भी शेष हैं. बुआ, चाची, मामी सभी को फोन किये पर किसी से बात नहीं हुई, अब घर जाकर ही सबसे बात होगी. कल पाकिस्तान में तालिबान ने पेशावर के एक आर्मी स्कूल के बच्चों पर बर्बरता पूर्वक गोलियां चलायीं. कितनी दहशत फैलाती हैं ऐसी घटनाएँ. निर्दोष बच्चों पर ऐसा अत्याचार हो रहा है और पाकिस्तान की सरकार बेबस है, अपने ही खोदे हुए गड्ढे में गिरने के लिए.  

Friday, July 21, 2017

गणपति बप्पा मोरया


कल जून का जन्मदिन है. उनके लिए एक कविता लिखनी है. आजकल वह बहुत खुश रहते हैं. दफ्तर में काम भी ज्यादा है फिर भी नियमित भ्रमण, व्यायाम आदि तो है ही. अपने जूनियर्स के साथ उनका संबंध बहुत स्नेहजनक है. आवश्यकता पड़ने पर अनुशासित भी करते हैं, सभी की भावनाओं का ध्यान भी रखते हैं. शॉपिंग करने में भी उन्हें बड़ा आनंद आता है. आजकल पैसों के मामले में बहुत उदार हो गये हैं. टीवी पर हास्य के कार्यक्रम भी देखते हैं. सबको लड्डू खिलाकर पन्द्रह अगस्त मनाने और झंडा लगाने का उनका जज्बा भी देखने लायक है. सबसे बड़ी बात अब उन्हें क्रोध नहीं आता उन बातों पर जिन पर पहले आता था. एक उन्नत भविष्य की ओर वह बढ़ रहे हैं.

झमाझम वर्षा हो रही है. एक बार ऐसा हुआ सुबह जब काले बादलों ने आकाश को पूरा ढक लिया, कितना अँधेरा हो गया था जैसे मन कभी-कभी किसी बात में पूरा आसक्त हो जाता है और आत्मा का सूर्य खिन भी दिखाई नहीं देता. अभी जब जून दफ्तर से लौटे तो मोटी-मोटी बूँदें पड़ने लगीं. गेट से बरामदे तक आते-आते वह भीग गये थोड़ा सा. छम-छम बरसती बूंदों का संगीत कितना मधुर है. हरियाली ऐसे गहरे हरे रंग में रंग गयी है. शाम यूँ भी होने को है.पंछी अपने घर लौटने को थे पर अब दुबक कर शाखाओं में बैठ गये हैं. आज सुबह स्कूल गयी, एक अध्यापिका ने कहा, वह कक्षा नवीं व दसवीं के बच्चों को गणित पढ़ाये, पर गणित से नाता टूटे तो वर्षों हो गये हैं, कोर्स भी बदल गया होगा. योग सिखाना ही सबसे सरल है, शांति की राह पर ले जाना ही सबसे प्रिय कार्य है. शेष कार्य तो हो ही रहे हैं. कल बड़े भांजे का जन्मदिन है, उसके लिए छोटी सी कविता लिखी है, जून अभी आकर उसे सजा देगें, फोटो आदि डालकर.

आज असम बंद है. गोलाघाट में असम व नागालैंड के लोगों के मध्य हुए दंगों के बाद पुलिस के अत्याचार के खिलाफ एजीपी ने बंद का आवाहन किया है. सुबह जून दफ्तर गये पर लौट आना पड़ा. वर्षा अभी होकर रुकी है, सब कुछ धुला-धुला सा लग रहा है. आज ब्लॉगस पर तीन पोस्ट डालीं, किसी-किसी दिन लिखने की गति अपने आप बढ़ जाती है और किसी दिन एक ही पोस्ट मुश्किल से लिखी जाती है. शाम को मृणाल ज्योति की मीटिंग है, बंद के कारण स्कूल तक जाना सम्भव नहीं होगा, इसलिए सारी कमेटी उनके घर पर ही आ रही है. छोटे भाई का जन्मदिन भी आने वाला है, उसके लिए भी एक कविता लिखी.

फिर एक अन्तराल ! कई दिनों से कोई नई कविता भी नहीं उतरी है. कागज-कलम लेकर बैठना ही नहीं हुआ. घर में रंग-रोगन व सफाई का काम चल रहा था, सब कुछ फैला हुआ सा था, अब जाकर कुछ ठीक हुआ है. अब भी काफी कम शेष है. छोटे भाई के आने में दस दिन शेष हैं, तब तक तो सब निपट ही जायेगा. गणेश पूजा का उत्सव चल रहा है इन दिनों. आज गुरूजी ने और कल शिवानी ने गणपति का असली अर्थ बताया. मिट्टी से बनी देह या शरीर के मैल से बनी देह अहंकार से ग्रसित होती है, फिर ज्ञान उस अहंकार को मिटा देता है और ज्ञान स्वरूप ही बना देता है. गणपति का सिर बड़ा है अर्थात ज्ञान भरपूर है. सूंड से भारी काम भी करते हैं और एक सुई भी उठा सकते हैं, अर्थात कोमल व कठोर दोनों हैं. चूहे पर सवारी करते हैं अर्थात तर्क (काटने की शक्ति) पर शासन करते हैं.



Tuesday, July 11, 2017

हरियाली का गीत


वर्षा आज भी लगतार हो रही है. पिछले तीन दिनों से वर्षा के कारण प्रातः या सांय भ्रमण नहीं हुआ, आज वर्षा थमने पर जाना ही होगा.  पेड़-पौधे और घास गहरी तृप्ति का अनुभव कर रहे हैं. हरियाली एकाएक बढ़ गयी है. आकाश बादलों से घिरा है. वायुदेव मंदगति से पेड़ों को झुला रहे हैं. बूंदों की टिपटिप और पंछियों के स्वर दोपहर को संगीतमय कर रहे हैं. अभी कुछ देर पूर्व ही उसने चाय पी और आकाश को निहारते हुए कुछ प्रकाश बिन्दुओं को हवा में तैरते देखा. सम्भवतः ये जीवात्माएं हैं जो उनके चारों ओर एक और आयाम में रहती हैं. कभी-कभी प्रकृति अपने रहस्य खोल देती है. एक धुआं सा कभी-कभी धरा से उठता दिखाई देता है, कभी गगन से बरसता हुआ..परमात्मा अपनी उपस्थिति से उन्हें भर देना चाहता है. उसका अंतर उसके लिए खाली है, वहाँ और कोई नहीं है, वही है, वैसे भी वहाँ क्या था, सिवाय अहंकार से उपजी पीड़ा के. वे व्यर्थ ही स्वयं को ढोए चले जाते हैं. शायद नहीं निश्चय हो गया है अब, मन जिसे वे कहते हैं केवल उनकी मूर्खता का दूसरा नाम है, अज्ञानवश वे देख ही नहीं पाते. सतोगुण को तमस व रजस ढक लेता है और उनकी दृष्टि ही दूषित हो जाती है. अपना भला-बुरा भी सोचने की क्षमता नहीं रहती. प्रारब्धवश जो भी सुख-दुःख मिलते हैं, उनमें उनका क्या योगदान है, अहंकार करने जैसा तो यहाँ कुछ भी नहीं है. 

दोपहर को उस छात्र को फोन किया जो बैठे-बैठे सो जाता था, वे लोग तीन दिन बाद जा रहे हैं, उसके पिताजी रिटायर हो गये हैं. कल सामान चला जायेगा. उसके लिए कविता लिखी, जून प्रिंट करके लाये, वह कोओपरेटिव गयी, एक मग और एक चाकलेट ली, उसकी माँ बहुत खुश हुईं, वर्षों पहले उन्होंने उसे संगीत सिखाया था. आज भी लगातार वर्षा हो रही है. शाम को किशोरियों के लिए महिला क्लब का एक कार्यक्रम था, उनकी शारीरिक व अन्य समस्याओं के बारे में कुछ जानकारी दी गयी. लेडीज क्लब ने अच्छी पहल की है. यहाँ की लडकियों को एक मंच दिया है जहाँ वे अपनी समस्यायें कह सकती हैं. कल ही खबर सुनी थी कि एक लड़की ने आत्महत्या कर ली. महिलाओं के प्रति अत्याचार बढ़ते ही जा रहे हैं. डिब्रूगढ़ में एक लेडी डाक्टर की हत्या वार्डबॉय ने कर दी. टीवी पर मोदी जी का इंटरव्यू आ रहा है. नन्हा कल अपने एक मित्र की शादी में जा रहा है. एक दिन उसकी शादी में भी सभी मित्र आयेंगे.

पांच दिनों का अन्तराल. आज चुनाव के परिमाण आ गये हैं. बीजेपी ने ऐतिहासिक विजय हासिल की है. टीवी पर सुबह से एक ही चर्चा है. मौसम अब अपेक्षाकृत गर्म है. पिछले दिनों छोटी ननद, बहन के पास गयी, फोन किया तो पता चला मंझली भांजी घर आ गयी है ससुराल छोड़कर. वे सभी बहुत परेशान हैं. उन्होंने छोटी व मंझली दोनों भांजियों को यहाँ आने को कहा है. एक महीना वे उनके साथ रहेंगी. परसों नन्हा भी आ रहा है. अगला एक महीना व्यस्त रहने वाला है. जीवन में कुछ परिवर्तन हो तो अच्छा लगता है.

आज दोनों बहनें आ गयी हैं, वह उन्हें लेने एयरपोर्ट गयी थी, दोनों खुश लग रही हैं. नन्हा भी आ गया है, उसने ‘श्रद्धा सुमन’ ब्लॉग में लेबल ठीक करने में उसकी सहायता की.  उसके एक मित्र के विवाह में उन्हें जोरहाट जाना था, वापस आकर भी दो-तीन दिन हो गये हैं.

इस समय वर्षा हो रही है, वह बाहर के बरामदे में बैठी है. दोनों लड़कियाँ अपने कमरे में हैं. बड़ी किताब पढ़ रही है, छोटी फोन पर व्यस्त है, मौसम की कारगुजारी देखने का उनके पास वक्त नहीं है. बड़ी की समस्या सुलझती नजर नहीं आ रही है. वह अपने आप को जरा भी बदलना नहीं चाहती पर वह नहीं जानती ऐसा करके वह अपना ही नुकसान कर रही है. वे सभी किस तरह माया के पाश में जकड़े हुए हैं. उसने आर्ट ऑफ़ लिविंग टीचर से बात की शायद वह कुछ सुझाव दें, अगले हफ्ते वह आएँगी. गुरूजी के ज्ञान से बड़ी के जीवन में कुछ परिवर्तन तो आएगा ही. नन्हा वापस चला गया है.

आज उसका जन्मदिन है, सुबह से ही बधाई संदेश आ रहे हैं. सुबह वे मृणाल ज्योति गये, भाजिंयों ने बच्चों को नृत्य के कुछ स्टेप्स सिखाये, उन्हें अच्छा लगा. सभी को मिठाई व नमकीन वितरित किया. अभी कुछ देर में शाम के मेहमान आयेंगे, उसने जून का लाया फूलों वाला टॉप और लंबा स्कर्ट पहना है. मौसम आज अच्छा है.  

Friday, June 16, 2017

सुबह की बेला


पिछले दो दिन व्यस्तता में बीते. कल विकलांग दिवस का कार्यक्रम ठीक से हो गया. शाम चार बजे से ही क्लब में थी, घर आते–आते नौ बज गये. देर से भोजन किया फिर सो गयी पर नींद देर तक नहीं आई. अभी लेडीज क्लब के कार्यक्रम में समय है. उसे जालोनी क्लब की पत्रिका के लिए आलेख भेजना है. क्रिसमस और नये वर्ष के लिए भी कविता लिखनी है इस वर्ष की, नई और मौलिक सी कोई बात. बड़ी भतीजी व छोटी भांजी का जन्मदिन है, छोटे भाई-भाभी व एक सखी के विवाह की वर्षगांठ है. सभी को इ-कार्ड भेजने हैं. कुछ कार्ड नये वर्ष के लिए भी भेजने हैं. आज बहुत दिनों बाद साहित्य अमृत का दिसम्बर अंक मिला है. बुजुर्ग आंटी अस्पताल में हैं, उनका बांया पैर अकड़ गया है, घुटने से उठाना कठिन है, शरीर अब जवाब दे रहा है, शाम को वे उन्हें देखने जायेंगे.

आज क्लब द्वारा रात को बच्चों को दिए गये भोजन के बिल के भुगतान का दिन था, उसने कहकर थोडा कम करवाया. सुबह एक महिला को फोन करके रंगोली के लिए धन्यवाद दिया. उन्होंने अपने ग्रुप के साथ मिलकर स्टेज से नीचे सुंदर रंगोली बनाई थी. सुबह जैसे किसी ने स्वयं जगाया, वे टहलने गये, पूरे वक्त वह मधुर स्मृति बनी रही. सुबह की बेला कितनी पावन होती है. सुंदर विचार झरते हैं. अब कुछ याद नहीं है. कल शाम वे एक मित्र परिवार से मिलने गये, वे इसकी-उसकी बात करने में बहुत उत्सुक लग रहे थे. लोग अपने भीतर देखना ही नहीं चाहते. एक-दूसरे पर अविश्वास और अपनेपन का अभाव ही नजर आता है, खैर उसे तो मस्त रहना है और कोई जानना चाहे चाहे तो उसे मार्ग बताना है.


आज मौसम बहुत अच्छा है, हवा में हल्की सी ठंडक है और धूप भी बहुत तेज नहीं है. एक बगुला अभी उड़ता हुआ गया और हवा का एक झोंका सहलाता हुआ..कल वह उन बुजुर्ग आंटी को देखने गयी तो वह सो रही थीं, दोपहर को भी और शाम को भी. आज सुबह जब वे टहलने गये तो एक दृष्टांत नूना के मन में उभर आया. मानो कोई घर हो उसमें बिजली के कई उपकरण लगे हों. एक बार घर के लोग कहीं जाएँ और सारे उपकरण बंद हो जाएँ तो जो बिजली पहले खर्च होती थी, बच जाएगी. कुछ करने को न पाकर हो सकता है वह वापस स्रोत्त में चली जाये और यदि वह चेतन हो तो अपने को जान ले. ऐसे ही उनका मन देह में रहता हुआ कितना कुछ करता है. रात्रि को जब वे नींद में चले जाते हैं तब मन भी अपने स्रोत में चला जाता है पर उस समय वह सचेत नहीं है सो स्वयं को जान नहीं पाता; यदि जागते हुए मन शांत हो जाये, अपनी हर जिम्मेदारी से मुक्त हो जाये तो उसे अपना पता चल जायेगा. वैसे भी मन करता क्या है, किसी न किसी वस्तु, व्यक्ति या परिस्थिति से कुछ चाह रहा होता है. उसकी मांग कभी खत्म नहीं होती. एक बार वह पूर्ण विश्राम की स्थिति में आ जाये तो खुद को जानना सम्भव है. उनकी ऊर्जा हजार छिद्रों से बाहर बह रही है. उसे भीतर ही सुरक्षित रखना होगा, तभी वह स्वयं को जान पायेगी. 

Thursday, June 15, 2017

गोर्की की पुस्तक- 'मदर'



फिर एक दिन का अन्तराल ! समय कैसे बीत जाता है पता ही नहीं चलता. सुबह वे जल्दी उठते हैं, प्रातः भ्रमण करके आते हैं तो न चलने का पता चलता है न कोई प्रयास करना पड़ता है, सब कुछ जैसे अपने-आप ही होता रहता है. वापस घर आकर एक घंटा प्राणायाम-योग आदि में पलक झपकते बीत जाता है. फिर नाश्ता, स्नान आदि करके आज कुछ देर लिखने बैठी तो आलमारी में रैक लगाने बढ़ई व उसके सहायक आ गये, उनके जाते-जाते ग्यारह बज गये, जून लंच पर आए, जाने के बाद लिखने बैठी तो वेल्डिंग वाले लोग आ गये. वे गये तो स्काइप पर दीदी मिल गयीं. सुबह एक सखी से भी बात हुई थी फोन पर. उन बुजुर्ग आंटी से भी अभी बात की. वह उस दिन उन्हें देखकर बहुत खुश हो गयी थीं. आज क्लब में मीटिंग है, वह साढ़े पांच बजे रात का भोजन बनाकर जाएगी. दो दिन से गोर्की की पुस्तक Mother पढ़नी शुरू की है. कितना अच्छा लिखते हैं गोर्की, ऐसे साहित्य को कितनी बार भी पढ़ो, अच्छा लगता है.

एक बदली भरा दिन है आज, आंध्र प्रदेश में तूफान के आसार हैं; सम्भवतः उसका असर यहाँ भी दिखाई दे रहा है. आज भी सुबह की दिनचर्या रोज की तरह रही. जून ने कहा, जो लंच आजकल वे लोग खा रहे हैं, वह घर पर रहकर ही बना सकती है, अभी तो उसकी कहीं जाने की बात भी नहीं है, पर उन्हें जो संस्कार पड़े हैं मन पर कि गृहणी को भोजन के समय घर पर होना चाहिए, वह अपने आप लेकर भोजन नहीं खा सकते, उसी ने उनसे यह बात कहलवाई होगी.

वर्ष के अंतिम माह का पहला दिन, बड़े भाई का जन्मदिन ! मंझले भाई-भाभी आज घर आये हैं, पिताजी ने बताया. छोटी ननद को सर्दी लगी है. बड़ी ननद की दूसरी बेटी को ससुराल में एडजस्ट करने में कुछ परेशानी हो रही है. नन्हा और उसकी मित्र आज मिनी मैराथन में भाग लेने गये थे. बुजुर्ग आंटी की तबियत ठीक नहीं है, उन्हें अस्पताल में दाखिल करना पड़ा है, जून उन्हीं के साथ हैं.इतवार को सभी से बात करो तो सब खबर मिल जाती है. कुछ ही देर में मृणाल ज्योति के संस्थापक दम्पत्ति आने वाले हैं, उसने नाश्ता बना दिया है. विकलांग दिवस के लिए निकट ही क्लब में बच्चे अन्य शिक्षकगण के साथ रिहर्सल कर रहे हैं. शाम होने को है, पश्चिम में लालिमा सुंदर लग रही है. कुछ देर पूर्व झूले पर लेटकर आकाश निहारा तो.. उसी का अनुभव हुआ. क्या यह मन का ही प्रक्षेपण मात्र है, हुआ करे, मन यदि परमात्मा का ही स्मरण करे तभी अच्छा है. उसके सिवाय और कुछ है भी कहाँ, सारी कल्पना भी उसी की है, सारी स्मृति भी उसी की है..जीवन का आधार वही है तो जीवन का सार भी वही है. अंतर का प्यार भी वही है तो चमन की बहार भी वही है. निराकार भी वही है तो सगुण साकार भी वही है. मानव पर सबसे बड़ा उपकार भी वही है और रिश्तों में दुलार भी वही है.



Monday, May 29, 2017

टेबलेट पर कहानी


कल नन्हे की मित्र की माँ से बात की, ये लोग चाहते हैं, अभी कोई भी रस्म कुछ महीने बाद की जाये, वे भी यही चाहते हैं, पिताजी के रहते जो काम नहीं हो सका अब उनके जाने के बाद इतना शीघ्र करना उचित भी नहीं है. वैसे इस महीने वे लोग आ रहे हैं. नन्हे का जन्मदिन वे साथ मनाएंगे, सुबह हवन होगा शाम को चाय-पार्टी. अभी-अभी उसने अपने पिताजी से बात की, छोटी भतीजी का चुनाव AIMS व KGMC में भी हो गया है. उसने मेडिकल के लिए जितने भी इम्तहान दिए थे, लगभग सभी जगह उत्तीर्ण हो जाएगी.  

कल शाम वे एक मित्र परिवार से मिलने गये, वृद्धा आंटी को नन्हे के विवाह की बात सुनकर बहुत ख़ुशी हुई. दो दिन बाद वह आ रहा है, दिन तब व्यस्त हो जायेंगे. आज सुबह सुधांशु जी ने कितनी सुंदर बात कही, उन्हें अपनी कीमत बढ़ानी है न कि घटानी है. उम्र के साथ उनकी समझ भी परिपक्व होनी चाहिए. कल रात वर्षा शुरू हुई जो आज सुबह तक लगातार होती रही. बगीचे में पानी भर गया है, शायद शाम तक सूखेगा, बाहर का नाला भी लबालब भर गया है. इस समय थमी है, बगीचा हरियाली का एक पुंज नजर आ रहा है.

पांच दिनों का अन्तराल ! उस दिन नन्हे के आने की तैयारी, अगले दिन वह आया, उसके दो दिन  बाद बाकी मेहमान आये, पता ही नहीं चला समय कैसे बीत गया. आज सब चले गये हैं, घर में वे दोनों ही रह गये हैं. अब कुछ अन्य कार्य करने का समय आ गया है. पहले घर को पुनः व्यवस्थित करना है, फिर सेवा कार्य शुरू करना है. फ़िलहाल तो दो छात्राएं आ रही हैं, उन्हें पढ़ाना है. नैनी व उसके पति ने, जो एक कुक है, कल खाना बनाया, सबको पसंद आया, उन्हें इनाम देना है. जून ने कितनी अच्छी तरह मेहमानों की देखभाल की, कुल मिलाकर अच्छा रहा यह मिलन समारोह ! परमात्मा की कृपा ही तो है यह ! नन्हे ने भी बहुत सहजता से सभी कार्यों में हिस्सा लिया, सब कुछ ठीक-ठाक हो गया, नन्हा खुश रहेगा क्योंकि खुश रहना उसे आता है. मौसम भी बहुत सुहावना रहा पिछले दिनों..

नन्हा उसके लिए टेबलेट  लाया है. उस पर काम करना सीखना है. किताबें पढनी हैं. उसने सभी के लिए कविताएँ लिखीं, जून ने सभी के फोटो चुनकर लगाये और उन्हें भेज दिया. सुबह धूप निकली थी, पर साढ़े नौ बजते न बजते बदली छा गयी और बरस भी गयी. उन्होंने सारे कारपेट बाहर निकले थे, आज साप्ताहिक सफाई का दिन था. जल्दी-जल्दी सब अन्दर किये, नैनी पूरे मन से काम करती है, सफाई कर्मचारी भी ठीक से काम कर रहा है आजकल. फिर नैनी के पति ने बाहर चारों ओर का जाला साफ किया, गैराज का भी. इतने बड़े घर को साफ-सुथरा रखना अकेले का काम नहीं है. सुबह माली आया था, गुलदाउदी के लिए गमलों की तैयारी शुरू हो गयी है.

नन्हे के लाये टेबलेट पर कहानी पढ़ रही है, शिवा की कहानी, अच्छी लग रही है. परसों स्वप्न में सद्गुरू को देखा था, वह उनसे बात कर रही थी, उनके साथ वही रिश्ता है, जो उसका खुद के साथ है, तभी इतना अपनापन है, कैसा आश्चर्य है वह असीम परमात्मा ससीम देह में प्रकट हो जाता है, वह तो सभी के भीतर है पर किसी-किसी में नजर भी आने लगता है. मन का दर्पण यदि स्वच्छ होगा तो उसमें वह झलक ही जायेगा, उस पर तेल लगा हो या धूल जमी हो तो प्रतिबिम्ब स्वच्छ नजर नहीं आता.  


Monday, December 26, 2016

चटकीले फूलों वाले पेड़

पूर्ण जगत को ब्रह्ममय देखने की विधि मुरारीबापू ‘तुलसी’ के माध्यम से बता रहे हैं. उनकी कथा अद्भुत भावों से भर देती है. अहंकार, गर्व, दर्प, अभिमान या अविश्वास जब जीवन में हों तो दुःख आने ही वाला है, रावण को उसका अहंकार ही ले डूबा. बापू कह रहे हैं, अहंकार मोह के कारण है और  मोह रूपी वृक्ष की जड़ें हैं, अज्ञान, मूढ़ता, अभाव, कमी तथा अनादर. इसका तना है जड़ता अर्थात अपनी मूढ़ता से टस से मस न होना. भ्रांतियां ही उसकी शाखाएं हैं, संशय, कुतर्क, भ्रमित चित्तवृत्ति ही डालियाँ हैं, चंचलता ही पत्ते हैं. दुःख ही इस वृक्ष का फूल है. सद्गुरू की कृपा से ही यह सम्भव है कि कोई अहंकार शून्य हो सके. भीतर जो रजोगुण है, वह संतों की चरणरज से ही मिटता है. कल रात ऐसा लगा सोई और जग गयी. जून और नन्हा कल आश्रम गये थे, गुरूजी भी वहाँ थे, भेंट भी हो गयी. उन्होंने जून से पूछा, हैप्पी ? जून का विश्वास दृढ़तर होता जा रहा है. नन्हे का विश्वास भी समय आने पर दृढ होगा, उसे परमात्मा स्वरूप सद्गुरू के दर्शन हुए, इतने पुण्य तो जगे हैं, अब सब उन्हीं पर छोड़ देना होगा. उसने नये दफ्तर में शिफ्ट कर लिया है, आजकल वह बहुत व्यस्त है. रजोगुण शेष दोनों गुणों को दकर प्रमुख हो रहा है. यही उचित है, ऊर्जा को निकास के लिए कोई तो मार्ग चाहिए..


आज ध्यान में अद्भुत अनुभव हुआ. सम्भवतः पिछले जन्मों की झलक थी, कुछ दृश्य इतने स्पष्ट दिखे. पहले एक स्त्री फिर मार्जारी तथा फिर एक राजस्थानी भाषा बोलती एक आकृति, महिला या पुरुष कुछ समझ में नहीं आया, केवल भाषा मारवाड़ी सुनाई दे रही थी. कितने रहस्य भरे हैं उनके अचेतन में. आज उसका जन्मदिन है, बिलकुल अनोखा और अलग सा..जब भीतर का सब कुछ बदल गया हो तो बाहर सब कुछ अपने आप बदलने लगता है.

जून का प्रथम दिन ! वर्षा बदस्तूर जारी है. सुबह वे टहलने गये तो फुहार पड़ने लगी. सडकों पर कई जगह पीले अमलतास, लाल गुलमोहर, गहरे पीले रस्ट वुड तथा बैंगनी रंग के फूल बिछे थे, रूद्र पलाश भी अनेक जगह बिखरे हुए थे. प्रकृति में रंगों की भरमार है, अनूठे, चटख रंगों के फूल वर्षा  पूर्व पेड़ों को मनमोहक बना देते हैं. इस तेल नगरी की ये सैरें उन्हें बाद में याद आयेंगी. लेकिन उन्होंने तो वर्तमान में रहने का अनोखा गुर अपना लिया है. परसों उसका जन्मदिन था, सुबह अनोखी थी, दोपहर को अहंकार आड़े आ गया, जिससे शाम का कार्यक्रम भी प्रभावित हुआ. मन ही सारे दुखों की जड़ है, आत्मा सारे सुखों की खान है. आत्मा में रहो तो कितने हल्के-हल्के रहते हैं तन-मन दोनों ! दीदी को जन्मदिन की कविता भेजी है. ब्लॉग पर कथा से प्रेरित होकर भक्ति भाव से लिखी कविता पोस्ट की है. आज बरामदे में व बाहर बगीचे में दो सर्प दिखे, उसने फोटो भी लिए और वीडियो भी.



Tuesday, November 8, 2016

बीहू नृत्य


कल शाम को इतने वर्षों में उनके यहाँ ‘बीहू नृत्य’ का आयोजन हुआ. ‘मृणाल ज्योति’ के ग्रुप ने मनोहारी नृत्य प्रस्तुत किया. कुछ देर के लिए उसने भी भाग लिया. जून ने पूरे मन से इसमें सहयोग दिया. पिताजी ने भी बहुत सहायता की. उनका कर्मठ स्वभाव देखकर बहुत आश्चर्य होता है. इस उम्र में भी उनमें युवाओं से बढ़कर उत्साह व ऊर्जा है. सुबह टहलने जाते हैं तो फूल उठा लाते हैं, बगीचे से आंवले ले आते हैं. जून ने कल भोजन परोसने का कार्य किया. मृणाल ज्योति की प्रिंसिपल तथा उनके पति दोनों बहुत खुश लग रहे थे. नूना और जून को भी बहुत अच्छा लगा. उसका नया फोन एकाएक चलते-चलते बंद हो गया है. नन्हे का नंबर उसे याद नहीं है, लैंड लाइन से बात कर ले. वह वापस चला गया है. अब जून के आने पर ही बात होगी. आज कई दिनों के बाद व्यायाम करने बैठी तो देह साथ नहीं दे रही थी, एकाध दिन में ठीक हो जाएगी. आज हनुमान जयंती है, चैत्र शुक्ल पूर्णिमा. कल से वैसाख का आरम्भ है. दस बजे हैं, बाहर धूप तेज है पर भीतर कितनी ठंडक है, ऐसे ही उनका मन बाहर कितना अशांत है पर भीतर कितन ठहरा हुआ है. वहाँ तक जाने का मार्ग जिसने खोज लिया वही चैन पा सकता है. पिछले दिनों कितना कुछ घटा, लेकिन भीतर कहीं यह विश्वास था कि सब ठीक है. नन्हा सूफिज्म पर पुस्तक ले गया है. इसका अर्थ है कि परमात्मा के प्रति उसके अंतर में आकर्षण तो जग ही चुका है, वह ज्यादा दिन दूर नहीं रह सकता. उसका संग यदि सुधर जाये तो यह काम और जल्दी हो सकता है, लेकिन हर कार्य अपने समय पर ही होता है. आज चर्चामंच पर उसकी कविता पोस्ट हुई है, वह भी ‘उसी’ की याद दिलाती है. कई ब्लॉग पढ़े, एकाध अच्छे भी लगे, शब्दों का जाल ही हैं ज्यादातर तो, जो मौन को उपजा दें वही शब्द सार्थक हैं. गुरूजी को भी सुना, उन्होंने कहा धर्म व राजनीति दोनों में आध्यात्मिकता को बढ़ावा दिया जाए, सभी धर्मों के लोग एक दूसरे से परिचित हों. अभी कुछ देर में बच्चे पढ़ने के लिए आने वाले हैं. माँ जो अपनी कुर्सी से उठती नहीं हैं, भय के कारण पीछे के आंगन का दरवाजा बंद आयी हैं.  

दस बजे हैं सुबह के, रात से ही वर्षा की झड़ी लगी है. दिन में अंधकार छा गया है. सुबह बड़े भाई-भाभी से बात की, भतीजी ने डांस क्लास ज्वाइन की है, साथ ही नारायण कोचिंग भी. आजकल बच्चे सभी कुछ एक साथ करना चाहते हैं. उसने ब्लॉग पर बीहू की तस्वीरें डाली हैं. दीदी ने प्रतिक्रिया भेजी है, और वीडियो की फरमाइश की है. कल शाम को जून की बात नहीं मानी तो उदास हो गये. मानव अपने ही मन द्वारा छला जाता है..इस क्षण में उसके भीतर एक प्रतीक्षा है, भीतर बहुत कुछ है जो प्रकट होना चाहता है.

आज भी वही कल का सा समय है, पर अब बादल छंटने लगे हैं. आज वर्षा पर लिखी एक नई कविता ब्लॉग पर पोस्ट करनी है, यहाँ तो पावस का आरम्भ हो ही चुका है. कुछ देर पहले माँ पूछती हुई आयीं, खाना नहीं बनायी हो, आजकल वह ज्यादा बात नहीं करती हैं, पर आज उन्हें बात करते देखकर अच्छा लगा. जब उसने पूछा, आप खायेंगी, तो पहले कुछ नहीं बोलीं फिर अपना ही प्रश्न दोहराने लगीं, उसने अब थोड़ा ऊंची आवाज में जवाब दिया, पर अगले ही पल लगा पिताजी को अच्छा नहीं लगा होगा. फिर वही वाणी का दोष..या अधैर्य का संस्कार. आज सुबह का स्वप्न भी जगाने के लिए था, किसी बच्ची के जन्मदिन पर जून एक बहुत ही सामान्य सा स्कूल बैग लाये हैं. उसके सामने ही वह खोलती है और कहती है, इतना खराब गिफ्ट है, वह शरम के मारे कुछ बोल नहीं रही है फिर हाथ बढ़ाती है और नींद टूट जाती है. वर्षा हो रही थी सो टहलने नहीं गये वे, प्राणायाम किया, एक आचार्य को सुना, सत्यार्थ प्रकाश के बारे में वे बता रहे थे.        


Friday, September 30, 2016

माइक्रोवेव में बैंगन


इस समय दोपहर के सवा तीन बजे हैं. आज दो परिचितों के जन्मदिन हैं. घर पर भतीजी का और यहाँ एक मित्र का. भतीजी के लिए कल कविता लिखी थी, शायद उसने पढ़ी हो. जवाब नहीं दिया..  यही तो बंधन है, कर्म बांधता है यदि करने के बाद भी उसकी स्मृति बनी रहती है. उसे फूलों का एक गुलदस्ता भी बनाना है, शाम को मित्र परिवार से मिलने जायेंगे वे. बिना किसी अपेक्ष के किये गये कृत्य उन्हें मुक्त करते हैं, अपेक्षा ही गुलाम बनाती है. इस सत्य को जितना शीघ्र हृदय में अंकित की लें उतना ही कल्याण होगा. नये वर्ष में नई तरह से जीना होगा ! आज भी ध्यान टिका, पर उसके पूर्व मन में विचारों का प्रवाह था, गुरूजी का सूत्र अब समझ में आने लगा है – ध्यान में वह कुछ भी नहीं है, उसे कुछ भी नहीं चाहिए, उसे कुछ भी नहीं करना है. जून का फोन आया, उन्हें रात्रि भोजन ऑडिटर के साथ गेस्टहाउस में ही करना है.

अभी-अभी उन बुजुर्ग आंटी से बात की, उसके पूर्व उस सखी से जो उनकी बहू है. सब नाटक जैसा लगता है. उनका स्वयं का जीवन भी तो कैसा अलग दीखता है अब. आत्मा का अनुभव जब दृढ़ हो जाता है, ‘हस्तामलक’ तो जीवन बिलकुल बदल जाता है. बुद्धि जो पहले जगत की तरफ दौड़ती थी, अब आत्मा में विश्राम करना चाहती है, उसकी दौड़ खत्म हो गयी है. प्रशंसा व निंदा का कोई महत्व नहीं रह जाता क्योंकि ये जिस मन, बुद्धि से आये हैं वे अनात्मा हैं, यानि माया है, यानि मिथ्या है, यानि उसका क्या महत्व. जैसे हीरे के आगे कंकर व्यर्थ है वैसे ही आत्मा के आगे अनात्मा व्यर्थ है. मौन ही जिसका स्वभाव हो जो स्वयं में पूर्ण हो, जो स्वयं आनंद ही हो, ज्ञान ही हो, प्रकाश ही हो उसे कोई जाकर कहे भी कि तुम ज्ञान हो तो वह क्या हर्षित होगा, वहाँ हर्षित अथवा दुखित होने वाला कोई बचा ही नहीं, माया का साम्राज्य वहाँ नहीं है, फिर उसकी भाषा वहाँ नहीं चलती. सद्गुरु के लिए लिखी उसकी सारी कविताएँ व्यर्थ हैं, उनकी नजर में और इस वक्त उसकी दृष्टि में भी, वहाँ एक ही भाषा का काम है, वह है मौन की भाषा..बुद्धि अब टिकना चाहती है, न जाने कितने जन्मों से यह दौड़ रही थी, मंजिल के करीब आ गयी है, वृत्ति सारुप्य के अनुसार कभी ‘आत्मा’ ‘अनात्मा’ में लीन हो जाती है तो कभी ‘अनात्मा’ ‘आत्मा’ में, पहली स्थिति में संसार है तो दूसरी स्थिति में निर्वाण ! एक स्थिति ऐसी भी आती है जब पूर्व के सब संस्कार नष्ट हो जाते हैं और शेष रहता है एकछत्र आत्मा का साम्राज्य. मन, बुद्धि भी निर्मल हो जाते हैं, निमित्त मात्र बन जाते हैं, अहंकार बस व्यवहार मात्र के लिए रह जाता है, भीतर कोई एषणा नहीं बचती. न कुछ पाना है, न कुछ करना है और न कुछ जानना है, ध्यान के सूत्र सारे जीवन पर फ़ैल जाते हैं. वे प्राप्त-प्राप्तव्य, कृत-कृतव्य तथा ज्ञात-ज्ञातव्य हो जाते हैं, तब सही मायने में आत्म साक्षात्कार होता है, ऐसा दिन भी शीघ्र आएगा..परमात्मा है, सद्गुरु है और आत्मा है, तीनों मन व बुद्धि को पावन करना चाहते हैं..

अज शाम को एक सखी के यहाँ जाना है. ब्लॉग पर अनुपमा पाठक ने ‘गीताजंलि’ पर अपनी टिप्पणी भेजी है. अंततः उनके जीवन में प्रेम ही महत्वपूर्ण होता है, उनके मन में सभी के लिए प्रेम, सारी सृष्टि के लिए..पिता जी लॉन में पानी डाल रहे हैं. माँ बाहर बरामदे में बैठी हैं. जून अभी दफ्तर से आये नहीं हैं. सुबह आधा घंटा ध्यान किया, खुद का भी पता नहीं चला, लेकिन जाने कहाँ से विचार आ तरहे थे, पूर्व संस्कार उदित हो रहे थे, ध्यान में संस्कार नष्ट हो जाते हैं. सम्मान पाने की आकांक्षा, कुछ होने की आकांक्षा कितनी कूट-कूट कर भरी होती है मन में, ब्रह्म ने, परमात्मा ने अथवा तो आत्मा ने प्रकृति का संग किया और अहंकार का जन्म हुआ, बस वहीँ से आरम्भ हो गयी लालसा कुछ कर दिखाने की, कुछ पाने की, जबकि वह स्वयं में पूर्ण है, वह खुद ही पूर्ण है यह भूल जाता है, अपने पद से नीचे उतर जाता है और फिर उसे खोजता है जगत में. इस खोज में पीड़ित होता है, शंकित होता है, दुखी होता है, भीतर द्वेष पालता है, उद्व्गिन होता है पर उसकी लालसा का अंत नहीं होता. आज पहली बार माइक्रोवेव में बैंगन भून रही है, उनकी दूसरी ओवन ठीक से काम नहीं कर रही. मंझले भाई-भाभी के लिए कविता लिखी है, स्वान्तः सुखाय:, उन्हें भी ख़ुशी दे जाएगी अवश्य ही, पर इसके लिए वे कुछ कहें ऐसी कोई लालसा नहीं रखनी है. ओशो कहेंगे लालसा रखनी है या नहीं रखनी है, ये दोनों एक ही बाते हैं, नहीं रखने में रखने का भाव आ ही गया. दोनों से ही छूटना है. हर हाल में उसकी ही रजा माननी है. जो हुआ अच्छा हुआ, जो हो रहा है अच्छा हो रहा है, जो होगा अच्छा होगा !