Showing posts with label स्वस्थ. Show all posts
Showing posts with label स्वस्थ. Show all posts

Thursday, May 8, 2014

नार्मन विंसेट पील - एक प्रेरक व्यक्तित्व


पिछले दस दिनों से उसने डायरी नहीं खोली, भई, ऐसी भी क्या बेरुखी अपने आप से, दिल परेशान तो होगा ही न, दुःख भी मनायेगा जब उसे पता चलेगा कि उसकी बात सुनने वाला कोई नहीं था पिछले दिनों. क्यों नहीं लिख सकी, इसका कारण व्यस्तता ही है या कुछ और भी, स्वेटर बनाना इतना बोझिल काम बन जायेगा सोचा नहीं था, हर काम अपनी कीमत वसूलता है, हर वक्त अपनी कद्र करवाना जानता है. उसने पिछले दिनों बहुत सी किताबें पढ़ी हों ऐसा भी नहीं हुआ. दो-तीन फ़िल्में जरूर देखीं, जून के दो दाँतों का RCT भी हुआ. उन्हें पांच दिनों तक इंजेक्शन भी लेने होंगे. पत्र लिखे, कार्ड भेजे, और आज सुबह घर से फोन आया, ननद के पति ने पास वाले शहर में ज्वाइन कर लिया है, अब जाकर उनका परिवार एक साथ हुआ है. आज भी कल की तरह बादल तो हैं पर बरस नहीं रहे हैं, पिछले दो-तीन दिन तो वह घर से बाहर ही नहीं निकल पायी, हर वक्त आसमान टपकता रहा.

उसने जून को एक पत्र लिखा, उसका दिल प्रेम से भरा था, प्रेम नन्हे के लिए, जून के लिए और सारे ब्रह्मांड के लिए, हर इन्सान की जरूरत है प्रेम और हर एक के दिल की गहराइयों में असीम प्रेम है. उसके भीतर का यह प्रेम जगाने का काम किया था एक किताब ने, उसे लगा, किताबें इन्सान के लिए कितनी जरूरी हैं भोजन से भी ज्यादा जरूरी. कितने तरीकों से वे मानव को प्रेरित करती हैं, वे हृदय के भीतर छिपी नरमी, गर्मी और करुणा को जगा देती हैं. The book written by “Norman Vincent Peale” has got filled her heart with a tender feeling. Yesterday she decided to go Ladies club meeting after reading a line in it and enjoyed there very much. To talk and to listen is very encouraging and self stimulating. Today is sunny day, she has to finish mother’s sweater.
सुबह का काम खत्म होते ही वह बाहर गयी, मौसम सुहाना है, बगीचे में खिले ढेर सारे फूल धूप में मुस्करा रहे था, सर्दियों में धूप कितनी भली लगती है, यही धूप गर्मियों में सताती है तो चिढ़ होती है. उसने कुछ पालक और फ्रेंच बीन्स तोड़ीं, शाम को सूप बनाएगी. और एक सखी से फोन पर बात की. कल शाम वे दूर तक टहलने गये, दुनिया में कितनी सुंदर और कितनी आश्चर्यजनक वस्तुएं हैं, जिन्हें देखकर इन्सान खुद को ही भूल जाता है. कल समाचारों में एक रेल दुर्घटना की दुखद खबर सुनी, अगले माह उन्हें भी तो रेल यात्रा पर जाना है, यही जीवन है. ईश्वर ही उन्हें सुरक्षित रखेगा और वापस घर सुरक्षित पहुंचाएगा.

नवम्बर का अंतिम दिन, आज जाकर वे स्वेटर पूरे हुए जो उसने दीवाली के बाद से शुरू किये थे. आज वह पार्सल बनाकर जून को देगी. लिखना–पढ़ना कितना कम हुआ इन दिनों. कल वे तिनसुकिया गये थे, सभी के लिए उपहार खरीदे इस उम्मीद पर कि उन्हें पसंद आयेंगे, नहीं भी आये तो कोई चारा नहीं. नन्हे के स्कूल में आज Elocution था, उसने भाग लिया. आज सुबह  एक परिचित टीचर ने स्कूल से फोन किया कुछ हिंदी शब्दों के अर्थ जानने के लिए, और कल ही क्लब की पत्रिका में लिखने के लिए बुलेटिन आया है, पर अभी उसमें कुछ लिखने का उत्साह नहीं है, वापस आकर यात्रा विवरण लिख सकती है. इसी हफ्ते जून के विभाग की पिकनिक भी होने वाली है, वे तीनों  यदि पूरी तरह स्वस्थ रहे तो जायेंगे, वे अस्वस्थ क्यों होते हैं, that is a big question ?






Friday, August 16, 2013

बुद्ध पूर्णिमा


आज उनके यहाँ फोन लग गया, पीएंडटी फोन. अब जब चाहें जिससे चाहे बातें कर सकते हैं. कल शाम उसकी एक परिचिता ने फोन करके पूछा, क्या वह उनके स्कूल में एक महीने के लिए हिंदी पढ़ाने के लिए तैयार है, वह खुद एक महीने के लिए घर जा रही हैं और कोई टीचर नहीं है उनकी कक्षा लेने के लिए. पर उसे सम्भव नहीं लगता, सुबह सात बजे से दोपहर एक बजे तक उसे घर से बाहर रहना होगा, जून के लिए खाना सुबह से बना कर रख जाना होगा, फिर घर की सफाई और सारे काम... वह कभी राजी नहीं होंगे.

कल दोपहर बाद वह कुछ परेशान थी, उसकी एक सखी ने शाम को आने के लिए कहा था, उसने सारी तैयारी कर ली थी पर अचानक उसका फोन आया वे नहीं आ पायेंगे, तो उसके सब्र का बांध टूट गया और वह जानती है यह सिर्फ उसी घटना के कारण नहीं था बल्कि पिछले दिनों का मन में एकत्र गुबार था. उसे यह अहसास हो रहा था कि वह कुछ भी ऐसा नहीं कर पा रही है जो उसकी दृष्टि में सार्थक हो. एक अजीब से खालीपन का अहसास और एक ऐसी भावना जो तब उत्पन्न होती है जब अपने कुछ भी न होने का अहसास होता है. उस दिन उसकी इतनी इच्छा होते हुए भी जून उसके साथ वोट डालने नहीं गये, उनका नाम थो था ही, पर कहने पर नाराज हो गये. उसे लगता है उनके बीच एक रिश्ता भय का है जो और सारे रिश्तों पर हावी हो जाता है. वह उसे कभी उदास या कमजोर नहीं देख पाते, उनके सामने उसे सदा ही खुश और बहादुर नजर आना है. उन्हें किसी को परेशान देखकर सांत्वना देना या समझाना नहीं आता, बल्कि खुद भी परेशान हो जाते हैं, शायद यही फर्क है स्त्री और पुरुष में, लेकिन वह उसे और नन्हे को बहुत चाहते हैं, जैसे वे दोनों उन्हें.

आज सुबह दादा वासवानी ने बहुत विनम्रता पूर्वक बहुत सुंदर ज्ञान दिया. उनकी मुस्कान अप्रतिम है और शब्द उनके मुख से ऐसे झरते हैं जैसे बहुमूल्य मोती. उन्होंने कहा, अगर कोई स्वस्थ और प्रसन्न रहना चाहता है तो उसे अपना दृष्टिकोण सकारात्मक रखना होगा, नकारात्मक भावनाएं जीवन को अभिशाप बना देती हैं. उस दिन जून ने भले ही उसे नाराज होकर समझाया पर उसे उस भाव दशा से बाहर निकल लाये, उसने मन ही मन उन्हें धन्यवाद दिया. इस बार की यात्रा से वापस आते समय पिता ने उसे कुछ कापियां तथा नोटबुक्स दी थीं, उनमें से एक उसने आज पढ़ी, उसमें विचारों और सुझावों का एक खजाना है. विभिन्न विषयों पर छोटे-छोटे अनुच्छेद लिखे हैं. मनुष्य विचारों का एक पुतला ही तो है, जैसा कोई सोचता है वैसा ही वह हो जाता है. स्वस्थ रहने के लिये स्वस्थ विचार होने चाहिए. यह शत-प्रतिशत सही है क जिस दिन उसके मन में द्वेष के विचार पनपते हैं तो मन उखड़ा-उखड़ा सा रहता है और जब कभी प्रकृति की सुन्दरता को देखकर कोई अच्छा सा विचार, चाहे एक क्षण के लिए ही क्यों न हो, आता है, तो मन कैसे खिल जाता है

आज बुद्ध पूर्णिमा है, नन्हा अभी तक सो रहा है, जून टीवी पर गुड मोर्निंग इंडिया दख रहे हैं, विनोद दुआ ने यह कार्यक्रम शुरू किया है कुछ दिनों से. सुबह जागरण में ‘गिरी महाराज’ से सुना, जीवन में संयम होना चाहिए. पूरे वक्त उसे अपनी वाचालता का स्मरण होता रहा, पता नहीं क्यों उसे लगता है जब वे किसी के यहाँ गये हों या कोई उनके यहाँ आया हो तो चुप बैठना अच्छा नहीं है, और वह माहौल को खुशनुमा बनाने के लिए अपनी तरफ से किसी विषय या व्यक्ति  पर बातचीत शुरू कर देती है. पर हर बार पछतावा होता है, किसी व्यक्ति के पीछे उसके बारे में बात नहीं करनी चाहिए या फिर अपनी निजी बातें भी हरेक को बताने की क्या आवश्यकता है. सिर्फ बोलने के लिए बोलना तो असंयमित होना ही कहा जायेगा. वह वादे क्योंकि निभाती नहीं इसलिए वादा नहीं करेगी पर यह प्रयास अवश्य करेगी कि भविष्य में सोच-समझ कर ही बोले.



Saturday, July 13, 2013

नॉर्थ ईस्ट एक्सप्रेस


And she is back ! she had thought that…anyway this experience of anesthesia was more painful. She was lost… and then gained consciousness. It was full of confusion. Yesterday till 3 pm she was feeling some traces of it and then a feeling of weakness but today morning was good except this moment when some fatigue had gripped her, since last one hour she was writing maths paper for Nanha, it may be the cause of it. Today they went for dressing, doctor has said for it alternate day. Her wound is fresh but her spirit is high.

दुर्गम पहाड़ों और ऊबड़-खाबड़ रास्तों से गुजरकर
कंटीले, पथरीले रास्तों की चुभन अपने में जज्ब किये
लौट आई है वापस उसकी आत्मा अपने गाँव में...
उस मुश्किल वक्त में भी उसकी पुकार सिर्फ खुद तक महफूज थी
सारे बंधन, वादे और वफायें
इस दुनिया की रीतें छूट गयीं थीं कहीं पीछे
साथ होकर भी जहाँ कोई साथ नहीं होता
ऐसे अनजाने ग्रहों की यात्रा से वापस लौट आई है उसकी आत्मा

आज वह बहुत खुश है, स्वस्थ है न दर्द न कमजोरी. उसने मन ही मन ईश्वर से प्रार्थना की, वह जहाँ कहीं भी है, उसके अंतर्मन का शुक्रिया स्वीकार करे. जून ने फोन पर बताया उसकी छोटी बहन अपने पति व बेटी के साथ १ अक्तूबर को नॉर्थ इस्ट एक्सप्रेस से गोहाटी आ रही है. २ की शाम को वे लोग डे सुपर बस से यहाँ पहुंचेंगे. आज असम बंद है फिर भी नन्हे की बस आ गयी, हालंकि थोड़ा देर से आई. कल उसका अंतिम इम्तहान है और उसके बाद वे मेहमानों के स्वागत की तैयारी करेंगे. जून ने कहा है कम्पनी के हिंदी अनुभाग में हिंदी अध्यापक की जगह खाली है, सप्ताह में तीन दिन और केवल एक घंटे के लिए जाना होगा. यह उसके लिए अच्छा होगा बल्कि बहुत अच्छा.

Nothing seems important to write. Ladies club secretary rang her to tell that club is going to publish a souvenir this year in Nov and she is supposed to do the editing of hindi articles and poems etc. jun said that he has given her name and bio data for hindi classes.These two things might be enough to give her joy but not. It  means there is nothing in the world which can stimulate her mind when it is sad or God knows what. Those inspiring books and those good thoughts and things which sometimes she likes most, seem meaningless. It means when someone is good only then good things appeal to him/her,otherwise when mind is blank, hard and closed nothing can change its state. It means only inner things can help one not outer. It is truly said  that man is the best friend and as well as the worst enemy of himself.


Wednesday, February 27, 2013

तकिये पर खरगोश



आज से वह कोशिश कर रही है कि ज्यादा कार्य बाएं हाथ से करे, दोपहर को अस्पताल जाना है, रिपोर्ट भी मिलेगी, दायें कंधें में भी हल्का खिंचाव है, दर्द भी है मीठा-मीठा सा, अब इस हफ्ते खत लिखने काम जून को ही करना पडेगा. वैसे भी कहते हैं कि स्वस्थ तन में ही स्वस्थ मन का वास होता है. अस्वस्थ मन से लिखे खत अच्छे नहीं होंगे. नन्हा इस वक्त पड़ोस के मित्र के साथ खेल रहा है. कल शाम वे तीनों पुस्तकालय गए, नन्हा चुपचाप कोई किताब लेकर बैठ जाता है, उसे ऐसा देखना अच्छा लगता है, जबकि और बच्चे शोर मचाने से नहीं चूकते. गिरिबाला और रेवती की दो कहानियाँ पढ़ीं उसने और दो किताबें भी लायी है, दोनों कहानियों की किताबें हैं.

आज हफ्ते का चौथा दिन है, जून को आजकल ज्यादा काम रहता है दफ्तर में, फिर शाम को अक्सर वे सब कहीं न कहीं घूमने चले जाते हैं, नन्हे की छुट्टियाँ जो हैं, सो खत उसे ही लिखने होंगे, इस समय वह कला प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए ड्राइंग सीखने गया है, कल दीदी का भी पत्र आया. उन्हें जन्मदिन का कार्ड भी भेजेगी. अभी कुछ देर पहले उसकी बंगाली सखी ने ‘पिजा’ की रेसिपी पूछी थी, वह गलती से टी स्पून की जगह टेबल स्पून कह गयी, ऐसी गलतियाँ अक्सर होती है उससे, इसलिये न कि पूरा ध्यान नहीं रख पाती. शाम को कुछ मित्र आएंगे, वे सब कैरम भी खेलेंगे, उसने दोसा बनाने की तैयारी की है. कल शाम को उसने मेडिकल गाइड में हाथ की अनुभूति के बारे में पढ़ा, इन इंजेक्शन से ठीक हो जाये वर्ना तो ईश्वर ही जानता है..ईश्वर की याद उसे अक्सर ऐसे ही वक्तों पर आती है, वह भी अच्छी तरह समझ गया होगा, लेकिन हर बार ऐसे वक्तों से उसने ही निकाला है.

परसों कैरम खेलने में ज्यादा परेशानी नहीं हुई उसे, दोसे भी अच्छे बने थे. कल शाम क्लब में फिल्म देखते समय उसे गर्दन में हल्की अकड़न महसूस हुई, घर आकर जून ने मूव जैसी कोई क्रीम लगा दी, वह उनका ख्याल नहीं रख पाती है आजकल, पर वह हैं कि..  जबकि वे खुद भी अपने स्वास्थ्य के प्रति चिंतित हैं, उनका वजन भी कम हुआ है, कल उन्होंने बनारस फोन किया, उन्हें घर की चिंता भी रहती होगी. नूना को तो बस आराम ही आराम करना है घर बैठकर, फिर भी न जाने कहाँ-कहाँ से परेशानियाँ आकर उसके पीछे पड़ जाती हैं. कल दीदी को जन्मदिन की बधाई भेज दी, छोटी बहन के लिए भी कार्ड लाकर रख दिया है, इसी माह उसका खुद का भी तो जन्मदिन है, आधे से ज्यादा जिंदगी गुजर चुकी है.

कल वे दो परिचित परिवारों से मिलने गए. उसकी गर्दन का दर्द सर झुकाने पर महसूस होता है, इस कारण ही सुबह ठीक से नाश्ता नहीं बना सकी, जून भी उसके आए दिन के इन मर्जों से परेशान हो गए होंगे पर वे जाहिर नहीं करते. हर रात वह सोचती है कि इस अस्वस्थता को स्वयं पर हावी होने नहीं देगी, पर हर सुबह भूल जाती है. आज फिर मौसम बादलों भरा है, परसों वे तिनसुकिया गए थे, उसने हेयरकट करवाए, और फैब्रिक पेंट भी लिया, वह कल तकिये पर पेंटिंग करेगी. आज दोपहर को उसे एक फिल्म देखनी है.

इस समय वह काफी ठीक महसूस कर रही है, कल शाम दायीं तरफ वाले पास के घर में गयी, पड़ोसिन ने बताया कि कठोर बिस्तर पर सोने से निश्चित ही लाभ होगा, उन्हीं की तरह कारपेट बिछाकर उन्होंने भी बेड को कठोर बना लिया है, सुबह उठी तो गर्दन में अकड़न जा चुकी थी. नन्हा देर से उठा और इस समय बहुत धीरे-धीरे मजे से नाश्ता खा रहा है. उसे जल्दी खाने को कहती है पर कोई फायदा नहीं होता, वह तय करती है कि अब उसे टोकना बंद कर देगी, क्योंकि इससे दोनों में से किसी का भी लाभ नहीं है. कल दोनों छोटे भाइयों के पत्र मिले. बहुत दिनों से उसने सिवाय डायरी की चंद पंक्तियों के उसने कुछ नहीं लिखा है. ईश्वर से सहारा, आश्रय, आश्वासन चाहती है पर अपने आप को छोटा नहीं कर सकती उसके सामने, बराबरी के दर्जे पर ऐसे मांगना कि मुँह से शब्द भी न निकलें और वह समझ जाये और उसे यह भी न लगे कि उसने कुछ दिया है उसे.

कल शाम उसने ढोकला बनाया था, दो लोग आने वाले थे. आज उसने बेसन की भुजिया बनाई, फीकी भुजिया बिना मिर्च की. सुबह मूँग की दाल का हलवा बनाया था, पर जून को लगा कि घी कम डाला था, जैसे कि वह यह नहीं जानते कि उससे लाभ तो नहीं हानि ही होगी. कल दोपहर तकिये के गिलाफ पर फूलों के डिजाइन की छपाई की, नन्हे ने भी कुशलता से एक खरगोश छापा.














Tuesday, November 6, 2012

नॉर्थ ईस्ट की हरियाली



जून का खत आया है, वह भी उसे लिखेगी, दो पेपर हो जाने के बाद. आज पूरे आठ दिन हो गए, अभी कितने दिन और लगेंगे उसकी आँखों को सफेद होने में. परसों पहला पेपर है, तैयारी हुई है या नहीं यही समझ नहीं आ रहा है, पढ़ती है तो सब याद आता है पर किताब बंद करते ही दिमाग में जैसे कुछ रहता ही नहीं. बिजली गायब है पिछले इतवार की तरह. कैसे बीत गए अस्वस्थता के ये आठ दिन, कैसे?

तीन पेपर हो गए हैं, डायरी लिखे हफ्तों हो गए हैं जैसे, आज सर में दर्द सा क्यों है, लिखते समय भी हो रहा था परीक्षा भवन में. पेपर फिफ्टी-फिफ्टी हो रहे हैं, साठ प्रतिशत के लायक तो नहीं हो पा रहे हैं. देखें क्या होता है. अब गणित का पेपर है, और फिर विज्ञान का, उसमें समय कम है, खैर अब पढ़ाई शुरू करनी चाहिए.

लगभग तीन सप्ताह बाद वह लिख रही है, उसकी परीक्षाएं खत्म हो गयीं, जून बनारस आए, वे सब यहाँ आ गए असम, यहाँ आये भी एक हफ्ता हो गया है, सब ठीक चल रहा है, जून का बेहिसाब ध्यान रखना, वह उन्हें स्वस्थ देखना चाहते हैं और थोड़े मोटे भी. घर से पत्र आए हैं. उसने सोचा कल जवाब देगी.

प्रथम जून, यानि ज्येष्ठ का महीना, पर यहाँ तो यह सावन का महीना ही लगता है. साढ़े दस हुए हैं, उसका सुबह का सब काम हो गया है, अभी कोई नैनी नहीं मिली है, पर उसे बनारस में रहकर काम करने की आदत से लाभ हुआ है, उसे यहाँ का काम इतना आसान लग रहा है, नन्हा अपने मित्र के साथ खेल रहा है. जून को शायद आज दिगबोई जाना है, उन्हें वहाँ से आए कल दो हफ्ते हो जायेंगे.

छोटे भाई व बहन को उसने जवाब दिया, उसके जन्मदिन पर दोनों के कार्ड आए थे. आज उनका एक परिचित परिवार सदा के लिए यहाँ से जा रहा है, अब पता नहीं कभी मिलेंगे या नहीं, वैसे वे दिल्ली जा रहे हैं, हो सकता है कभी मिलें. नन्हा आज अभी तक सोया है. उसके हाथों में निशान पड़ गए हैं, छोटे-छोटे दाने से, बाएं हाथ में साबुन पानी से, उन्हें महरी रखनी ही पडेगी.

कल जून की सातवीं तारीख थी, यानि उनके विवाह को कल पांच वर्ष पांच महीने हो गए. जून ने परसों पूछा, क्या वह नियमित डायरी लिखती है, उसने कहा, “नहीं”, अगर लिखती होती तो ‘हाँ’ कहती, अच्छा लगता उन दोनों को ही. जून यहाँ उनके आने के बाद खाने-पीने का बहुत ध्यान रख रहे हैं, कमर का घेरा बढ़ता जा रहा है और तो कहीं कुछ खास असर नहीं दीखता. नन्हा भी काफी कमजोर हो गया था, अब ठीक है, उसका दाखिला भी कराना है, देखें कहाँ होता है. मौसम यहाँ बहुत अच्छा है, आज सुबह बारिश हुई, इस समय दस बजे हैं, नन्हा गिनती लिख रहा है. मंझले भाई व माँ-पिता के पत्र आए हैं, कल वह उन्हें जवाब देगी. आज सुबह अचानक एक कार्यक्रम देखा, टीवी पर- “गीत के ढंग, संगीत के संग” कितना अच्छा गीत था और आवाज भी उतनी ही अच्छी- “फूलों से बातें करता था, खुशबुओं में रहता था... और दूसरा गीत व उसका संगीत तो अच्छा था आवाज ठीक नहीं थी. टीवी पर कल की फिल्म भी अच्छी थी, “हाफ टिकट” किशोर कुमार का अभिनय लाजवाब था अब कहाँ मिलते हैं ऐसे हीरो.
जून ने कहा है कि आज वे डिब्रूगढ़ जायेंगे. वे घर से सैंडविचेज़ बना कर ले जायेंगे. आज शनिवार है खत लिखने का दिन, तीन-चार खत लिखने हैं. कल रात जून ने एक अजीब कहना चाहिए खराब इंग्लिश फिल्म दिखाई, वह भी कहाँ जानते थे कि यह फिल्म ऐसी होगी. उन्हें साफ-सुथरी कलात्मक हिंदी फ़िल्में ही भाती हैं, ऊटपटांग इंग्लिश फिल्मों से दूर रहना ही बेहतर है. टीवी का रिसेप्शन फिर खराब हो गया है.

परसों वे पहली बार डिब्रूगढ़ विश्व विद्यालय गए, वहाँ का पुस्तकालय देखा, कुछ विभाग भी देखे, अच्छा लगा. चार पत्र लिखे, उसे मैडम को भी एक पत्र लिखना है और एक अपनी सहपाठिनी को. सुबह कितनी तेज धूप थी पर अब बादल छाये हैं. ठंडी हवा बह रही है, कितनी अच्छी जगह है भारत का यह उत्तर-पूर्वी राज्य.




Tuesday, January 24, 2012

अगस्त की गर्मी


रात के नौ बजे हैं, आज सुबह से ही वह बिस्तर पर है. कल रात भर नींद नहीं आयी सो जून भी जगता रहा. हर तरह से वह उसका ख्याल रखता है. सुबह कफ सिरप लाकर दिया उसे कुछ आराम मिला. अब बुखार नहीं है, उसने सोचा यदि कल भी नहीं हुआ तो कल शाम तक वह बिल्कुल ठीक हो जायेगी. इस समय जून पड़ोसी के बुलाने पर उनके यहाँ भोजन करने गया है. नूना रेडियो पर पौने नौ बजे के समाचार सुन रही थी कि डायरी पर नजर गयी और वह लिखने लगी....कितनी कमजोरी आ जाती है बुखार के बाद और मुँह से लगातार पानी आता रहता है जो सबसे ज्यादा परेशान करता है उसे. दिगबोई जाने का यह परिणाम होगा जानती नहीं थी.

आज सोमवार है, कितने दिनों के बाद उसने डायरी उठाई है. बुखार शनिवार को उतर गया था, पर अभी पूर्ण रूप से स्वस्थ होने में तीन-चार दिन और लगेंगे. इस समय वह दोपहर के समाचार सुन रही है. राजस्थान की सरकार के प्रति अविश्वास प्रस्ताव, मुख्य मंत्री की नौका डगमगाने लगी है. पिछले हफ्ते जून ने बहुत ध्यान रखा, ऐसा बस वही कर सकता था, और कोई नहीं, नूना ने सोचा. आज भी जल्दी आ गया था सहायता करने. जब कि उसे कुछ करने को था ही नहीं. टालस्टाय की लिखी पुस्तक पूरी पढ़ ली है और उससे पूर्व पढ़ी स्वेतलाना की लिखी पुस्तक भी बहुत रोचक थी.
अगस्त मासे प्रथम दिवस ! गर्मी की शुरुआत, पिछले दो दिनों से वर्षा नहीं हुई, वातावरण गर्म हो उठा है और रात रेडियो पर सुनी वह खबर, संसद ललित माखन तथा उनकी पत्नी की हत्या, कितना बेबस है इंसान क्रूरता के आगे. आज वह पूरी तरह स्वस्थ अनुभव कर रही है. पिछले माह की तरह खुद से वादा किया कि अब से नियमित लिखेगी. आजकल सुबह का नाश्ता वह बनाती है. जून की बातें, उसके स्नेह पर बरबस मुस्कान खिल जाती है. उसकी अस्वस्थता में दिन-रात एक कर दिये थे उसने. आज उसके कहने पर मटर पुलाव बनाया, उसे अच्छा लगा और नूना को यह जानकर अच्छा लगा.