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Friday, April 17, 2026

इसरो का पीएसएलवी-सी ५२

इसरो का पीएसएलवी-सी ५२


आज नूना को एक मज़ेदार स्वप्न ने उठाया।एक महाशय अपने डॉग(शी) से बातें करते हैं। वह उन्हें कुछ परेशान कर रही थी तो उसे कुछ सबक़ सिखाना चाहते हैं। उसके मुख के पास जाकर कहते हैं, हेलो मिस, वह भी दाँत निपोरती हुई कहती है, हेलो मिस्टर, अगली बार उनके हाथ में कोईं कठोर वस्तु है और नूना जानती है कि वह इसे कहाँ रखने वाले हैं, जैसे कि यह घटना पहले भी हो चुकी हो। वह फिर बड़े ही अच्छे अन्दाज़ से कहते हैं, हेलो मिस, और जैसे ही वह हेलो कहने के लिए मुँह खोलती है, जबड़ों के मध्य वह वस्तु रख देते हैं। वह मुँह बंद करती है तो ज़ोर की आवाज़ होती है। सब हँसने लगते हैं और नींद खुल जाती है। यह स्वप्न जगाने के लिए आया था, क्योंकि अलार्म बंद किए काफ़ी वक्त बीत गया था। परमात्मा को मज़ाक़ बहुत पसंद है, गुरुजी की यह बात एक बार फिर सत्य सिद्ध हो गई।परमात्मा के द्वार जाना हो तो हँसते-हँसते ही जाया जा सकता है। एक अन्य स्वप्न में उनकी सोसाइटी नापा की एक परिचित महिला को वह सनातन धर्म  के बारे में बता रही है। सपने में वह ईसाई धर्म को मानती हैं।नूना उन्हें गहन श्रद्धा तथा ईश्वर के विभिन्न रूपों के बारे में बता रही है। सुंदर स्वप्न था यह !!   


आज इतवार को नन्हे और सोनू के लिए नाश्ते में बेदमी पूरी बनायी, जून ने यू ट्यूब पर उसकी विधि देखी थी।नाश्ते के बाद वे सब बेंगलुरु के चर्च स्ट्रीट में स्थित किताबों की एक दुकान पर गये।ब्लॉज़म बुक हाउस नाम है उसका, २००१ में मयि गौड़ा नाम के व्यक्ति ने उसे खोला था। यहाँ पुरानी, नयी हर तरह की किताबें मिलती हैं। वीडियो कॉल करके पापाजी को भी दिखायी वह दुकान। सबने मिलाकर कुल बीस किताबें खरीदीं। उसके बाद ‘गो नेटिव’ गये। जहाँ परंपरागत शाकाहारी भोजन मिलता है।वापस आते-आते सवा पाँच हो गये थे, उसे अनुवाद कार्य करना था। शाम को बच्चे वापस चले गये। जून सोने चले गये हैं, वह कुछ देर नयी लायी पुस्तक ‘माइंड ऑफ़ गॉड’ पढ़ने वाली है। 


आज सुबह योग साधना करते समय अचानक आकाश पर नज़र पड़ी तो एक सुंदर दृश्य दिखा। एक प्रकाश का स्रोत, जिसके पीछे प्रकाश की तिकोनी छाया थी, लगा कोई धूमकेतु होगा। दूसरी तरफ़ भी बादलों को चीरती हुई सी प्रकाश की एक तरंग थी। कुछ समझ नहीं आया, यह क्या था।बाद में ज्ञात हुआ इसरो ने पीएसएलवी-सी ५२ लांच किया था।दोपहर की वही गॉड वाली पुस्तक पढ़ती रही। मस्तिष्क अरबों, खरबों न्यूरॉन से बना है। कितनी जटिल है इसकी रचना, जिसके द्वारा शरीर के सब कार्य होते हैं। शाम को वे लोग एक परिचित के विशाल और सुंदर घर की गृह प्रवेश की पूजा में गये।वापसी में एक मित्र दंपत्ति घर आये। पापाजी से बात हुई, आज वह वोट देने गये थे, इस उम्र में भी उनका इतना उत्साह देखकर एक पत्रकार ने उनसे बातचीत की। 


आज सुबह योग-प्राणायाम के बाद, सुखबोधानन्द जी की ताई चि क्रिया की।उन्होंने बहुत अच्छी बातें बतायीं तथा नृत्य भी कराया। कह रहे थे, वह योग निद्रा नहीं प्रेम निद्रा कराते हैं, आनंद लहरी के साथ-साथ प्रेम लहरी जगाते हैं। जून ने वर्षों बाद नृत्य किया होगा। वह चाहें तो कर सकते हैं। भजन व नृत्य उनके मन को तनाव से मुक्त रखने में सहायक होगा। नाश्ते में जून नापा के प्रसिद्ध शेफ़ शेट्टी जी से दोसा लाए, चटनी तथा सब्ज़ी में मिर्च बहुत थी।नूना ने एक व्हाट्सेप समूह बनाया है, जिसमें पंचायत की अध्यक्षा तथा नापा की कुछ महिलाएँ हैं, मंगलवार को पहली मीटिंग है। गाँव से जुड़कर महिलाएँ बहुत कुछ कर सकती हैं, ऑर्गेनिक खेती, पेपर बैग्स बनाना , सफ़ाई अभियान, योग-ध्यान सिखा सकती हैं। सेवा के अतिरिक्त अब करने को कुछ है भी कहाँ। शाम को जून कमेटी की मीटिंग में व्यस्त थे और उसने ज्ञानेशावरी गीता का पाँचवाँ व अंतिम भाग सुना।नन्हे ने एक किताब भेजी है, ‘लोकतंत्र के टूटे स्तंभ’, वह यू ट्यूब पर इसे सुनता है।शाम को पापाजी से बात हुई, वह टीवी पर प्राइम वीडियो नहीं देख पा रहे थे।जून ने उन्हें उपाय बताया, शायद बाद में देख पाये हों।  


जून आज सुबह जल्दी चले गये।शनि व रविवार को उन्हें असोसिएशन के काम में और अधिक समय देना होगा।वह अपने कार्य में बहुत रुचि ले रहे हैं, और उन्हें अपने काम में बहुत आनंद आ रहा है। उसने काव्यालय में एक कविता प्रकाशित की। छोटी ननद ने बताया छोटे पुत्र का कॉलेज दो वर्ष के बाद खुल रहा है। 


आज एक परिचित दंपत्ति की शादी की सालगिरह है।उनकी जीवन यात्रा में एक मात्र ऐसा परिवार, जो उनसे ऐसा नाराज़ हुआ कि माना ही नहीं। ख़ैर ! आज सुबह शिव सूत्र पर चर्चा सुनी।वक्ता के अनुसार शिव रात्रि का अर्थ है, अज्ञान की रात्रि में प्रकाश का अवतरण और ज्ञान में जागरण ! उन्होंने पाणिनि तथा पतंजलि व्याकरण के बारे में बताया, जो शिव के डमरू से निकली ध्वनियों के आधार पर बनाया गया था। दोपहर एओएल के अनुवाद कार्य में बीती ।पापाजी ने कहा, आत्मा में रहने से मन में शांति बनी रहती है, शरीर में तो कुछ न कुछ लगा ही रहता है।आज एक महिला ब्लॉगर से बात हुई, उनके तीन पुत्र हैं, एक सिडनी में दो बैंगलोर में हैं। वह मध्य प्रदेश आती-जाती रहती हैं, पर अब ज़्यादातर यहीं रहेंगी। वह बहुत अच्छी लेखिका हैं। कभी न कभी उनसे मुलाक़ात भी हो ही जाएगी। 


आज सुबह पहली मीटिंग में कुल छह महिलाएँ आयी थीं। पंचायत की अध्य्क्षा कुछ देर से आयीं, पर उन्होंने काफ़ी ध्यान से चर्चा में भाग लिया। काफ़ी विषयों पर बात हुई। नये लोगों से परिचय हुआ। जून ने मीटिंग का सार लिखने में मदद की। कल वह एक नयी सोसाइटी देखने जा रहे हैं। आज सुबह नन्हा आया था, कंप्यूटर का एक पार्ट खोल कर ले गया। बिटकॉइन माइनिंग का उसका स्वप्न बीच में ही बिखर गया है।  


Sunday, August 10, 2025

अंतर आकाश


अंतर आकाश



कभी-कभी अतीत में झांकना जैसे एक खिड़की से झांकना है। जीवन को सुंदर बनाने की दिशा में उठाये गये वे छोटे-छोटे कदम थे, जो यहाँ तक ले आये हैं। जब हर घड़ी परमात्मा का स्मरण सहज ही बना रहता है। हर श्वास उसी की देन है। हर शै में वही है। उसके सिवा कोई और हो ही कैसे सकता है? भीतर एक अपूर्व शांति का साम्राज्य है, जिसे न कोई ले सकता है, न ही दे सकता है: वह ‘है’ ! शाम को मंझले भाई-भाभी से बहुत दिनों के बाद बात हुई। भाभी का जन्मदिन आने वाला है, उसके लिए कविता लिखनी है। शाम को पापाजी से बात हुई, उन्हें चिंता है कि भक्तिभाव में ज़्यादा नहीं डूबना चाहिए, नहीं तो संसार से विरक्ति हो जाएगी। मनुष्य का मन भी कितना जकड़ा हुआ है, उम्र के आख़िरी पड़ाव पर आकर भी विरक्ति की बात से उसे भय लगता है। 


आज सुबह टहलने गये तो आसमान में पूर्णिमा का चाँद बादलों के पीछे छिपा हुआ था।नीले बादलों से झांकता हुआ पीला चाँद बहुत सुंदर लग रहा था। रोज़ की तरह नीम की टहनी से कुछ कोमल पत्तियाँ जून ने तोड़ कर दी, पित्त कम होता है नीम की पत्ती चबाने से। वापस आकर धौति क्रिया भी की और आसान आदि। गुरुजी का एक पुराना वीडियो देखा, बहुत ही अच्छा लगा। एडवांस कोर्स में सुना था इसे।जून आज बगीचे के लिए मिट्टी व खाद लाए हैं। दोपहर को छोटी बहन से बात हुई, बहनोई की दूसरी आँख का ऑपरेशन अगले महीने होगा। शाम को आर्ट ऑफ़ लिविंग के संयम कोर्स की सूचना मिली। उसने सोचा है, मंगल से शुक्र चार दिनों तक स्वयं ही प्रतिदिन मौन रहकर आठ घंटे की साधना करेगी। जून भी मान गये हैं। बहुत अच्छा लगेगा। 


आज शाम से ही तेज वर्षा हो रही थी, जब से वे बोटेनिका से लौटे। वापस आकर कुछ किताबों में से एक-एक पन्ना पढ़ा, परमात्मा को अपने क़रीब महसूस किया। नन्हे से बात हुई, कल सुबह वह सोनू के साथ आएगा। आज पहली बार बगीचे से पपीता तोड़ा, कल पराँठे बनायेंगे। 


आज नाश्ते के बाद सब लोग अगारा झील देखने गये, अत्यंत सुंदर दृश्य थे। थोड़ी सी चढ़ाई चढ़कर झील के किनारे बने ऊँचे बंद पर टहलते रहे। दोपहर को बच्चे वापस चले गये। शाम को बोटेनिका से आगे सोमनहल्ली की तरफ़ कच्चे रास्ते पर आगे बढ़ते गये। वापसी में एक परिचित दंपत्ति कृष्णा व उनकी डाक्टर  पत्नी मिल गयीं ।उनके साथ थोड़ा और आगे जंगल में चले गये, लौटते समय वर्षा होने लगी, पहले बूँदाबाँदी फिर तेज वर्षा, घर आते-आते तक सभी पूरी तरह भीग गये थे। जून ने ग्रीन टी बनायी।आज झील और जंगल की कई तस्वीरें भी उतारीं। 


आज बहुत दिनों बाद आसमान में टिमटिमाते चमचमाते तारे देखे, कल भी तापमान ३२ डिग्री रहेगा। नूना कल से अगले चार दिनों तक ध्यान व मौन की साधना शुरू कर रही है। यह इस तरह का पहला प्रयास है, पर आगे भी जारी रहेगा। सुबह ६-८।३० तक योग आसन, प्राणायाम, क्रिया तथा ध्यान । ८।३० से १०  तक नाश्ता व बगीचे में काम। १०-१२/३० तक जप साधना, स्वाध्याय व लेखन। १२/३० - ३ बजे तक भोजन, विश्राम व लेखन, ३-६ तक ध्यान, भजन, गायन, श्लोक पाठ।६-९तक सांध्य भ्रमण, रात्रि भोजन, डायरी लेखन, रात्रि भ्रमण। इन चार दिनों में मोबाइल तथा टीवी से दूरी रहेगी। स्वयं को जानने के लिए स्वयं के साथ समय बिताना बहुत ज़रूरी है।  


आज चार दिनों के मौन का प्रथम दिन है। दिन भर में कुल मिलकर पाँच-छह शब्द बोले होंगे। बिना बोले भी काम चल जाता है। शब्दों के पीछे जो भाव हैं, वे इशारे से भी बखूबी समझाए जा सकते हैं। आज अपेक्षाकृत मौसम गर्म है। बहुत दिनों बाद सूर्यास्त के भी दर्शन भी हुए, बादलों के पीछे ही सही। गुरुजी की दो पुस्तकें निकालीं, सोर्स ऑफ़ लाइफ तथा द स्पेस विदिन, दोनों में अमूल्य ज्ञान है। सत्य, अहिंसा, अस्तेय, अपरिग्रह तथा ब्रह्मचर्य का अर्थ बहुत सरलता से समझाया गया है। शौच, संतोष, तप, स्वाध्याय तथा ईश्वर प्रणिधान आदि नियमों का भी। ध्यान की बारीकियाँ पढ़कर ध्यान भी गहरा हुआ। आज रात की निद्रा भी अवश्य विश्राम पूर्ण होगी। कुछ पुरानी कविताएँ भी पढ़ीं। सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक का समय अति सरलता से बीत गया। सुबह कुछ देर बाग़वानी की कुछ देर सफ़ाई। अभी सोने में आधा घंटा शेष है, कुछ लिखा जा सकता है।                                                                                                    


Tuesday, March 26, 2024

गुलाबी आकाश

गुलाबी आकाश 

आज ब्लॉग पर एक भी पोस्ट प्रकाशित नहीं की। पिछले कई वर्षों से ब्लॉगिंग जैसे जीवन का अंग बन गई है। कोई पढ़ता है या नहीं, इसकी परवाह किए बिना अपने दिल की बात कहने का यह एक मंच जो विज्ञान ने साधारण से साधारण व्यक्ति को प्रदान किया है, अतुलनीय है। इसके माध्यम से वह कितने ही लेखक-लेखिकाओं की रचनाओं का आस्वादन घर बैठे कर पाती है। डायरी में बंद शब्दों को एक नया आकाश मिल गया है जैसे। कुछ लोग पढ़ते भी हैं और टिप्पणी भी करते हैं, ऊर्जा का एक आदान-प्रदान जो इंटरनेट पर आजकल होता है, उसकी तुलना इतिहास की किसी भी घटना से नहीं की जा सकती। आज सुबह बड़े भाई ने नेट पर भाभीजी की पीली साड़ी वाली फ़ोटो ढूँढ कर देने को  कहा। कुछ समय उसमें गया। फिर छोटी बहन ने अध्यात्म से जुड़ा एक वीडियो भेजा और देखने का आग्रह किया, देखा, कुछ समझ में आया, कुछ नहीं। एक पहले की लिखी कविता टाइप की। परसों बहनोई जी का जन्मदिन है, उनके लिए कविता लिखनी है। आज सुबह टहलते समय पाँच तत्वों और शरीर के चक्रों के आपसी संबंध पर कितने विचार आ रहे थे। लिखने का समय नहीं निकाला, सो अब कुछ भी स्मरण नहीं है। परमात्मा स्वयं ही भीतर से पढ़ाते हैं, संत ऐसा कहते हैं, कितना सही है यह !


एक दिन और बीत गया। सुबह नींद समय पर खुली, कल रात नींद भी ठीक आयी। सुबह भ्रमण ध्यान किया। कितने सुंदर विचार आते हैं ब्रह्म मुहूर्त में। आकाश भी गुलाबी था। तस्वीरें उतारीं। आर्ट ऑफ़ लिविंग के ऐप के सहयोग से योग साधना की।नन्हे के भेजे तवे पर बने आलू पराँठों का नाश्ता ! एओएल के प्रकाशन विभाग के कोऑर्डिनेटर का फ़ोन आया, एक लेख में कुछ और जोड़ा गया है, अनुवाद पुन: लिखना है। शाम को पापा जी से बात हुई। पोती घर आयी हुई है नन्ही बिटिया के साथ, उसके रोने की आवाज़ उन्हें कभी-कभी आती है। पुत्र घर के काम में हाथ बँटाता है, जब बहू नातिन की देखभाल में लगी होती है, जिसकी पहली लोहड़ी मनाने की तैयारियाँ चल रही हैं। 


आज लोहड़ी है। वे शकरकंदी व कच्ची मूँगफली लाये निकट के बाज़ार से, जहाँ सड़क किनारे मकर संक्रांति पर बिकने वाले सामानों की ढेर सारी दुकानें लगी हुई थीं। सुबह नापा में भी यह पर्व मनाया गया। यहाँ इस दिन तिल और गुड़ से बनी मीठी वस्तुएँ खाने और खिलाने का रिवाज है। पूरे कर्नाटक में संक्रांति का उत्सव बड़े उत्साह से मनाते हैं। कल खिचड़ी का पर्व है। छिलके वाली उड़द दाल जून ने बिग बास्केट से मंगायी है।उनका  पतंग उड़ाने का ख़्वाब अभी पूरा नहीं हुआ है। पतंग नन्हे ने मंगाकर रखी है पर उसकी डोर नहीं मिली निकट के बाज़ार में। अलबत्ता मंदिर की भव्य सजावट देखने का अवसर मिल गया । आज सुबह भ्रमण के समय ‘स्पंद कारिका’ पर व्याख्या सुनी।जिसे आत्म-अनुभव न हुआ हो उसे अध्यात्म में रुचि कैसे सकती है ? वह इसे जाग्रत करे भी तो कैसे ? इसके लिए तो कृपा ही एकमात्र कारण कहा जा सकता है। परमात्मा की कृपा से ही उसके प्रति आस्था का जन्म होता है। 


आर्ट ऑफ़ लिविंग की तरफ़ से कुछ दिनों के लिए ऑन लाइन स्टे फिट कार्यक्रम चलाया जा रहा है। सुबह-सुबह उनके साथ व्यायाम और योगासन करने से शरीर हल्का लग रहा है। अब दो दिन ही शेष हैं। एक सखी ने दुलियाजान में बीहू उत्सव की तस्वीरें फ़ेसबुक पर पोस्ट की हैं। कितनी यादें मन में कौंध गयीं। वहाँ क्लब में बीहू बहुत उत्साह से मनाया जाता है। साज-सज्जा नृत्य-संगीत और पारंपरिक पकवान, सभी की तैयारी पहले से शुरू हो जाती है। पड़ोस वाले घर में दीवार उठनी शुरू हो गई है। आज पड़ोसिन अपनी कक्षा एक में पढ़ने वाली बिटिया को लेकर आयी थी, मकर संक्रांति का प्रसाद देने। तिल के लड्डू, छोटे वाले दो केले, पान, सुपारी, सिंदूर का छोटा सा पैकेट और दस रुपये का नोट। ऐसे ही एक तमिल सखी असम में दिया करती थी। नूतन पांडेय की लिखी हिन्दी किताब में असम की पृष्ठभूमि पर लिखी एक कहानी पढ़ी, यह पुस्तक असम से आते समय मृणाल ज्योति की प्रिंसिपल ने दी थी।टीवी पर वेदान्त की पाँच बोध कथाएँ सुनीं, पहली गधे की, दूसरी दसवाँ कौन, तीसरी शेर के बच्चे की, चौथी राजकुमार की और पाँचवीं राजा जनक की। सभी कहानियाँ बताती हैं कि सत्य क्या है, और लोगों द्वारा उसे क्या समझा जाता है।


Wednesday, July 19, 2023

ध्वनि की ऊर्जा

आज शाम से ही वर्षा हो रही है। कुछ देर पहले नन्हे से बात हुई, उसने बताया दिवाली का उत्सव वे अभी तक मना रहे हैं। आज सुबह एक मित्र परिवार ने उन्हें नाश्ते पर बुलाया था, दोपहर को उन्होंने पड़ोसियों को लंच पर आमंत्रित किया, शाम को पुन: उन दोनों को एक सहकर्मी के यहाँ दिवाली की चाय पर जाना था। रात को नौ बजे से उनका नृत्य अभ्यास है, जो एक मित्र के विवाह के अवसर पर उन्हें करना है। आज दीदी ने वर्ष भर पूर्व  उनके साथ की गई हिमाचल की यात्रा का विवरण भेजा, पढ़कर वे सारे दृश्य आँखों के सम्मुख आ गये। उसने सोचा, वह भी डायरी में लिखे यात्रा विवरण को टाइप करके उन्हें भेजेगी । बड़ी ननद के विवाह की वर्षगाँठ पर उसने एक कविता लिखी ।कल एक सखी के माँ-पापा के लिए श्रद्धांजलि स्वरूप एक छोटा सा आलेख लिखा था, उसने अपने परिवार जनों की प्रतिक्रियाएँ भेजी हैं, अब तक बीस आ चुकी हैं। उनका परिवार बहुत बड़ा है। उसे महसूस हुआ, शब्दों में कितनी ताक़त होती है। 


सुबह वे टहलने निकले तो भोर का तारा गाढ़े नीले आकाश पर दमक रहा था। हवा शीतल थी। रात की रानी की सुगंध दूर से ही आ रही थी। मुख्य सड़क के मध्य में एक लंबी क़तार में इनके पौधे लगे हैं। योगासन के अभ्यास के दौरान छत से दिखा सूर्योदय का दृश्य अनुपम था। उसी दौरान पुन: गायत्री परिवार के लाल बिहारी जी का मनोमय कोष की साधना पर दिया व्याख्यान सुना। उनकी वाणी में कितनी प्रखरता है, बहुत गहरी साधनाएँ उन्होंने की हैं। बाद में एक परिचित, जो इसी सोसाइटी के  निवासी हैं, मिलने आये थे, तमिलनाडु के हैं। हर सुबह दौड़ लगाते हुए मिलते हैं। वे सात बार विपासना का कोर्स कर चुके हैं। उनसे बात करते हुए उसे अपने विपासना अनुभव याद आ रहे थे, उसके लिए एक बार ही यह अनुभव करना पर्याप्त है।  


बाहर से कुछ आवाज़ें आ रही हैं। उनकी बैठक की दीवारों में पानी के रिसाव के निशान दिख रहे थे, इस समस्या से छुटकारे के लिए बाहर दीवारों के पास खुदाई का काम चल रहा है, एक बार फिर से जलनिरोधी प्लासतर करना होगा। आज दिन में दो बार ‘सावधानी हटी और दुर्घटना घटी’ । एक प्याला टूटा और खाने की मेज़ पर पानी से भरा गिलास उलट गया। दोनों बार दाहिने हाथ से, अर्थात हाथ पर मन का नियंत्रण नहीं था और मन पर ख़ुद का। नन्हा और सोनू विवाह में पहुँच गये हैं, उसके मित्र ने लिंक भेजा है, चाहे तो वे भी यहाँ से सम्मिलित हो सकते हैं।’देवों के देव’ में कार्तिकेय और गणेश के मध्य प्रतिस्पर्धा होने वाली है। गणेश ही विजयी होंगे, कार्तिकेय के मन में एक गहरा घाव है जो इंद्र ने उसे दिया है अथवा उसके जन्म की घटनाओं के कारण उसे मिला है। वह कई बार कैलाश छोड़कर जा चुके हैं, कोई न कोई उन्हें मनाकर वापस लाता है। 


सुबह वे जल्दी उठे। उठने से पूर्व उसे लगा जैसे किसी ने कहा हो, ध्वनि एक ऊर्जा है। प्रात: भ्रमण के दौरान इसी बात पर मनन करते हुए मंत्र जाप किया। हर शब्द  की तरंगों का शरीर पर असर होता है।ओम के उच्चारण का अति प्रभाव होता है, इसीलिए इस पर इतने शोध हो रहे हैं। हज़ारों वर्षों से ऋषि यह कहते आये हैं। शरीर तरंगों से बना है, तो ध्वनि की तरंगें उसे प्रभावित करें इसमें आश्चर्य भी क्या है ? भीतर निरंतर एक गुंजन चल रही है, उसे सुनें या ना सुनें, वह हो ही रही है। वह ध्वनि कहाँ से आ रही है, क्या वह प्राण ऊर्जा की गति के कारण है, जैसे बिजली की तारों से एक ध्वनि आती है। इस देह में न जाने कितने रहस्य छिपे हैं। गुरुजी के भगवद्गीता पर दिये प्रवचन का एक अंश सुना। वे गूढ़ विषयों को भी सरल भाषा में समझा देते हैं। शाम को एक निर्देशित ध्यान किया था, मन कितना हल्का हो गया था उसके बाद। जून को भी अच्छा लगा। अब वह पुन: कर रहे हैं। उन्हें अपने आप ध्यान के लिए बैठे देखकर अच्छा लगा। उन्हें ध्यान के महत्व का ज्ञान हो रहा है।  


आज साप्ताहिक सफ़ाई का दिन था। सुबह सर्दियों की ठंड के साथ शुरू हुई। तापमान चौदह डिग्री था, वे जैकेट आदि से मुस्तैद होकर निकले। दोपहर को धूप निकल आयी थी। फूलों के चित्र उतारे, जो धूप में और भी शोख़ लग रहे थे। शाम को सूर्यास्त के चित्र  फ़ेसबुक पर प्रकाशित किए। आर्ट ऑफ़ लिविंग के अनुवाद कार्य के बाद  दोपहर को ब्लॉग पर लेखन  व पठन कार्य, लिखा कम, पढ़ा अधिक। हिमाचल की यात्रा का वृतांत पिताजी व दीदी दोनों को अच्छा लगा। नन्हे के मित्र ने विवाह के बाद एक उपहार भेजा है, बहुत बड़ा सा पैकेट है। उन्होंने अनुमान लगाया, उसमें क्या हो सकता है। 

   


Thursday, December 22, 2022

चौथ का चाँद


आज दोपहर पूर्व योग की सप्त क्रियाओं में से एक नेति क्रिया की थी, शाम से ही छींकें आ रही हैं, जब थोड़ा सा भी पानी भीतर नासिका में रह जाता है, तब ऐसा होता है।वर्षों पहले एक बार असम में विवेकानंद योग केंद्र में इसे सीखा था, तब से सप्ताह में एक बार तो कर ही लेती है। नेति के बाद ज़्यादातर कपालभाति करने से पानी निकल जाता है पर कभी-कभी कुछ रह जाता होगा। मंझले भाई ने घर में हुई गणेश पूजा का वीडियो  भेजा  है। गुरूजी ने गणेश चतुर्थी का महत्व व गणेश के जन्म की अनोखी कथा का अर्थ समझाया। जिनका अहंकार से भरा सिर शिव ने काटा तो ज्ञान युक्त सिर लगाया गया। कहते हैं चौथ का चाँद नहीं देखना चाहिए, पर रोज़ की तरह उसकी नज़र आकाश की ओर चली गयी और दर्शन  हो गए। 


आज सुबह नन्हा व सोनू आ गये थे। दोपहर को भोजन के बाद वे सभी एक स्टोर ‘लिव स्पेस’ गये, उन्हें अपने किचन व बेडरूम की अलमारी का दरवाज़ा ठीक करवाना है। सेल्स मैनेजर ने पावर पाईंट प्रस्तुति दी, नयी तकनीक आने से हर क्षेत्र में सब कुछ कितना बदल गया है । अमेजन से कमांड टेप आया है, मेहमानों के कमरे में चित्र लगाना है, अब दीवार पर कील ठोकने की ज़रूरत नहीं है।लगभग पाँच महीने बाद वे शहर की तरफ़ गये थे।हाथों में दस्ताने तथा चेहरे पर मास्क लगाकर। ट्रैफ़िक भी अब सामान्य हो गया है।वापसी में सोसाइटी में नयी खुली दुकान पर चाय पी तथा गणेश पूजा का कलात्मक पंडाल देखने भी गये। तीन दिन उनकी पूजा करने के बाद पूरी विधि से मुहूर्त देखकर कल विसर्जन का जुलूस भी निकलेगा। 


रात्रि के नौ बजे हैं, मन में सुबह सुने एक संत के वाक्य याद आ रहे हैं। कुछ लोग स्वयं को अणु मानते हैं, यह आणवीय मल है। अपूर्ण मानते हैं, यह मायीय मल है। अपूर्ण मानते हैं और उस अपूर्णता को दूर करने की इच्छा करते हैं, यह कार्मिक मल है। अविद्या, काम, कर्म यह तीनों ही बंधन के कारण हैं। वे अनंत हैं, सांत नहीं, वे पूर्ण हैं, अपूर्ण नहीं, वे सत्य हैं, ज्ञान हैं जब तक यह स्वयं का अनुभव नहीं बन जाएगा तब तक मानव को शांति का अनुभव नहीं होगा।नन्हे ने ‘मैजिक फ़्लावर्स पॉट सॉयल’ का दस किलो का एक पैकेट भिजवाया है। बड़े शहरों में मिट्टी भी ख़रीदनी होती है, उन्हें इसका भान नहीं था।  गमलों में भरकर बीज डाल दिए हैं, एक हफ़्ते में निकल जाएँगे। प्रधानमंत्री जी ने मोर का एक वीडियो पोस्ट किया है, कुछ लोगों को उस पर भी एतराज है।  


भारत ब्राज़ील से आगे निकल जाने वाला है, कोरोना के संक्रमण से पीड़ित लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। शाम को वृद्ध पड़ोसी टहलते हुए मिले, कहने लगे, अब कोरोना से डरना छोड़ दिया है, जो पाना था पा लिया, अब क्या खोने को है ? एक पुरानी परिचिता से फ़ोन पर बात हुई। वह कोरोना के कारण अस्पताल में  हैं, शिकायत करती हुई सी कह रही थीं, मरीज़ों को देखने डाक्टर भी नहीं आता और घर के लोग भी दूर से देखकर खाना रखकर चले जाते हैं। नन्हे ने एक और गेम भेजा है। पिछले हफ़्ते वॉल एंड वॉरीअर भेजा था, जो जून रोज़ खेलते हैं। उसके बचपन में वे उसे खिलौने ख़रीदकर देते थे और अब वह उनका बचपन फिर से याद दिला रहा है। आज सुबह दुलियाजान की कम्पनी के हिंदी अनुभाग से भेजा गया पुरस्कार का ड्राफ़्ट मिला, वहाँ से आने से पूर्व कुछ रचनाएँ दी थीं पत्रिका के लिए। जून ने उसे बैंक में जमा कर दिया है। 


Tuesday, March 8, 2022

बदलियों के रंग

 

आज नौ बजे उन्होंने ग्यारह दीपक जलाए। आज के रामायण के अंक में राम का हनुमान से प्रथम मिलन दर्शाया गया है। रामायण और महाभारत देखने से दिन काफी भरा-भरा लगता है. मन में राम और कृष्ण का स्मरण बना रहता है. शाम को मास्क पाहन कर टहलने गयी तो शुरू में थोड़ी दिक़्क़त हुई पर बाद में अभ्यास हो गय। अभी आगे कई महीनों तक ऐसे ही चलेगी ज़िंदगी। कोरोना के ख़िलाफ़ इस युद्ध में हर भारतीय को अपना योगदान देना है। अमेरिका ने भारत से कोरोना के लिए दवा की मांग की है, जो भारत अवश्य ही भेज देगा. लगता है सरकार को लॉक डाउन की अवधि बढ़ानी पड़ेगी. आज जून ने भी एओएल को कुछ आर्थिक सहयोग दिया, वे लोग दिहाड़ी मज़दूरों को भोजन आदि बांट रहे हैं। 

 


इस समय यहाँ मूसलाधार वर्षा हो रही है, गर्जन-तर्जन के साथ, रह-रह कर बिजली चमकती है और बादलों की तेज गड़गड़ाहट सुनायी देती है। बंगलूरू में इस नए घर में यह उनकी पहली बारिश है, लगभग एक घंटा पहले आरंभ हुई। एक-एक करके सारी खिड़कियाँ बंद कीं। छत पर लकड़ी के झूले को बचाने के लिए जो शेड बनाया है, वह भी तेज बौछार से उसकी रक्षा  नहीं कर सका। दोपहर बाद ‘इंगलिश मीडियम’ देखी, सिनेमा हाल बंद हैं सो हॉट स्पॉट पर इसे रिलीज़ कर दिया गया है। शाम को पार्क में फूलों के सूखते हुए पौधों को देखा था, इंद्र देवता ने इतना पानी बरसा दिया कि धरती-पौधे सब तृप्त हो गये हैं। 


आज सुबह गैराज में एक कौए ने कबूतर पर हमला कर दिया। घर के अंदर से देखा तो उसे भगाया। कबूतर घायल था, कौए  ने उसके पंख नोच दिए थे। वह एक कोने में छिपने गया, उड़ नहीं पा रहा था, रास्ते में रक्त की बूँदें गिरती जा रही थीं, उसे पानी दिया पर पी नहीं सका। एक चौकीदार के द्वारा उसे डिस्पेंसरी भेजा। पता नहीं उसका क्या हुआ होगा. 


वर्षा के कारण बालकनी पर बनी शीशे की छत और सोलर पैनल अपने आप धुल गए हैं.  मौसम भी ठंडा हो गया है.आज शाम टहलने गए तो आकाश पर गुलाबी बादल थे, बिलकुल मसूर की दाल के रंग के बादल, जो नीले पृष्ठभूमि में बहुत आकर्षक लग रहे थे. रंगों का यह खेल प्रकृति के हर क्षेत्र में खेला जा रहा है. अनगिनत रंगों की तितलियाँ, मछलियां, पंछी, फूल और कीट, सर्प यहाँ तक कि जड़ पत्थरों को भी अनोखे रंगों से सजाया है प्रकृति ने, मानव इनकी ओर देखे तो सारा कष्ट भूल जाये पर उसके पास चाँद -तारों को निहारने का समय नहीं है, कुछ लोग बन्द कमरों में टीवी पर हिंसा और नफरत के खेल देखने में ही व्यस्त हैं. आज सुबह हरसिंगार के ढेर सारे फूल उठाये.  


रात्रि के नौ बजे हैं. हनुमान जी को जाम्बवान उनकी भूली हुई शक्तियों को याद दिला रहे हैं, बचपन में एक ऋषि ने उन्हें शाप दे दिया था, जिससे वे उन्हें भूल ही गए हैं. बाल्यावस्था में उन्हीं ने एक बार सूर्य का भक्षण किया था, यह भी उन्हें याद नहीं है. वे भी पूर्वकाल में कितनी ही बाधाओं को पार करके आएये हैं पर कोई नयी विपत्ति आने पर यह भूल जाते हैं. आज भी छिटपुट वर्षा हुई, शाम को आकाश सलेटी-काले बादलों से भरा था. हनुमान जी को अपना बल याद आ गया है और वे सागर पर जाने के लिए तैयार हो गए हैं. उन्हें राह में मैनाक पर्वत मिलता है, जिसे समुद्र देव ने कुछ देर विश्राम के लिए भेजा है. सागर भी राम के कुल का ऋणी है और मैनाक की रक्षा हनुमान के पिता ने  की थी. पहले लोग अपने प्रति की गयी भलाई को कितना याद रखते थे. 



Wednesday, April 7, 2021

वृक्ष और हवा

 

आज से दो वर्ष पूर्व बड़ी भतीजी का ब्याह हुआ था, पर उसने उसे ‘प्रथम वर्षगांठ पर बधाई’ का संदेश लिख दिया। मन अपने आप में नहीं रहता है जब, तब ऐसी गलतियाँ होती हैं। जिस मन में कोई उलझन न हो, लोभ न हो, चाह न हो, वह मन  ही स्थिर रह सकता है। आज सुबह वे बारी-बारी से घूमने गए क्योंकि उठने में देर हुई. नैनी समय पर  आ गयी, कल उसने छुट्टी ली है, विधान सभा का उपचुनाव है, कह  रही थी बीजेपी को वोट देगी। देश आर्थिक संकट से जूझ रहा है, सरकार प्रयास कर रही है पर हालात सुधर नहीं रहे हैं। आजकल समाचार सुनने का ज्यादा समय नहीं मिलता। वे टीवी कम ही खोलते हैं। दोपहर को थोड़ी देर एक फिल्म देखी ‘जोया फैक्टर’ अच्छी लगी। जून ज्यादातर समय मोबाइल पर कुछ देखते हैं। शाम को योग सत्र में टीचर ने हास्य आसन कराया, गरुड़ व वृक्ष आसन भी। एक घंटे के अभ्यास के बाद शरीर काफी हल्का हो जाता  है, और लचीला भी हो रहा है. कभी कभी वे बेल्ट, लकड़ी की ईंट और बड़ी सी गेंद का उपयोग करके कठिन आसन भी करते हैं। आज एक पूर्व परिचिता से बात की, उसने बहुत कोशिश करके अपना तबादला अपने गृह शहर में करवाया है। कह रही थी जिम जाने लगी है, वर्तमान पीढ़ी को योग की बजाय जिम अधिक रास आता है। आज भी छत पर सोलर पैनल लगाने का काम आगे बढ़ा. पूरा होने में लगभग दो महीने लगेंगे। 

जगत से सुख और प्रेम की आशा करना पानी को मथकर मक्खन निकालने जैसा ही है। यहाँ हृदय की बात सुनने का किसी के पास न ही धैर्य है न ही समय। स्वकेंद्रित मानव अपनी इच्छाओं की पूर्ति चाहता है और यदि कोई उसमें बाधक बनता है तो वह उस पर क्रोधित होता है। क्रोध का प्रभाव खुद पर ही होने वाला है वह यह भूल ही जाता है। आज सुबह टहलते समय भीतर कविता फूट रही थी। सारा अस्तित्व जैसे उसके भीतर सिमट आया हो। फेफड़ों के भीतर ताजी हवा वही तो थी जो चारों ओर बह रही थी।  सिर के ऊपर विस्तीर्ण आकाश था, अभी आकाश में चाँद था और तारे भी, भीतर का आकाश उसके साथ एक हो गया था। सुबह का समय कितना पावन होता है, मन भी खाली स्लेट की तरह, जिस पर जो चाहे लिखा जा सकता है। उसका प्रिय द्वादश मंत्र सुबह-सुबह हर श्वास-प्रश्वास में  स्वत: ही चलता है।  छत पर चल रहे काम के कारण काफी शोर था दोपहर को, गुरुनानक की कथा सुनते-सुनते सोयी। एक विचित्र स्वप्न देखा, एक बड़ा सा आदमी छोटा हो जाता है, कीट जितना छोटा। छोटे भाई के विवाह की वर्षगांठ है आज, बधाई दी। ननद से बात हुई, बिटिया के विवाह की बात चल रही है, पर वे लोग शाकाहारी नहीं हैं, और चाहते हैं, विवाह से पूर्व लड़की सब कुछ खाना व बनाना सीख जाए। भांजी ‘हाँ’ कहने से डर रही है। एक ब्लॉगर  की पुस्तक आयी है, उसने जून से कहा है अमेजन से खरीदने के लिए। कई दिनों से दीदी से बात नहीं हुई है, उसने व्हाट्सएप पर संदेश भेजा और  भगवान से दुआ मांगी, एक न एक दिन सब पूर्ववत हो ही जाएगा। 


रात्रि के नौ बजने वाले हैं। सोने से पूर्व का उसका डायरी लेखन का कार्य अब नियमित होता जा रहा है। कुछ देर पहले वे टहल कर आए, रात की रानी के पौधों की खुशबू अभी नासिका में भरी ही हुई थी कि मोड़ पर एक मीठी सी जानी-पहचानी खुशबू आयी, चम्पा की सुवास, और वाकई वहाँ तीन-चार पेड़ थे। चम्पा के फूल अभी ज्यादा नहीं थे, पर एक खिला फूल तोड़ा जो शायद कल  झरने ही वाला था, उसके सामने पड़ा है, श्वेत पंखुड़ियों वाला सुंदर पुष्प ! शाम को मृणाल ज्योति के डायरेक्टर का फोन आया, जो स्कूल की तरक्की की बातें बता रहे थे, अच्छा लगा सुनकर। अगले हफ्ते वे महाराष्ट्र की एक छोटी सी यात्रा के लिए जाने वाले हैं, दोपहर को पैकिंग की. आज सुबह गांव की तरफ टहलने गए थे वे, मन्दिर के पास वाला इमली का पेड़ फलों से भरा हुआ है, पर उन्हें तोड़ना नहीं आता. एलोवेरा का एक स्वस्थ पौधा रास्ते के किनारे पड़ा था, शायद किसी ने गमले से निकाल कर उसी समय वहां रखा था, वे उसे उठाकर लाये और घर के पीछे वाली क्यारी में लगा दिया है. आज छोटे भाई ने बताया शायद वह क्रिसमस पर यहाँ आये. 


उस कालेज की डायरी में एक कविता उसे दिखी, शायद हवा के बारे में किसी अंग्रेजी कविता को पढ़कर लिखी थीं ये पंक्तियाँ -


क्यों चाहे वह मुझ संग होना 

मेरे संग मेरे कमरे में 

उसके लिये संसार उपस्थित 

कितनी गलियां कितने गाँव 

लेकिन वह फिर-फिर आ जाये 

खोल के मेरी खिड़की के पट 

संग ले आये कुछ बौछारें 

मेरा दरवाजा खटकाये

बंद देख एक पल चुप हो 

क्षण बीते न फिर आ जाये 

पट खड़काये

नंगे पैर फर्श है ठंडा 

मैं घबरा कर द्वार खोलती 

वह तेजी से अंदर आये 

इक पल ठहरे फिर मुड़ जाये 

खुश हो जब दीपक बुझ जाये !


‘एक वृक्ष -एक गवाही नाम से’ अगले पन्ने पर लिखा था 


मैं गवाह हूँ 

मैं गवाह…

उस क्षण से लेकर आज तक 

जब प्रथम बार मेरे पत्तों ने आँखें खोली थीं 

और फिर जब मेरी डालियाँ भर गयी थीं फूलों से 

हर वर्ष, वर्षा, तूफान, भीषण शीत को सहते 

मेरे तन पर कुल्हाड़ी की धार सहते क्षण का भी 

परन्तु हर बार बसन्त की प्रतीक्षा में 

मेरे अंदर का साहस मृत नहीं हुआ.. 


Thursday, January 14, 2021

चंदा और सूरज

 

आज सुबह अपने आप ही नींद खुल गयी पौने चार बजे. हल्की सी वर्षा हो रही थी. जब छाता लेकर वे टहलने निकले, सड़कों पर पानी जमा था पर कुछ ही देर में बारिश थम गयी. उससे पहले एक स्वप्न देखा था. वे सब कहीं बाहर गए हैं, किसी सराय या धर्मशाला में हैं. माँ व भाई एक कार में बैठ जाते हैं, वह सामान लेकर जाती है पर वे उसे वहीं छोड़कर चले जाते हैं. एक अन्य व्यक्ति भी कार में है  पर कौन है पता नहीं . बचपन में झगड़े का कारण किसी जन्म में हुई इस घटना में छिपा लगता है. इस दुनिया में अकारण कुछ भी नहीं होता, उनके जीवन में जो कुछ भी घटता है उसके पीछे कोई न कोई कारण अवश्य होता है. आज छोटे भाई से बात हुई वह माह के अंत में एक सप्ताह के लिए यहाँ आएगा, उसे एक बैंक में ऑडिटिंग करनी है. दोपहर साढ़े बारह बजे उन्हें मृणाल ज्योति जाना था, विदाई भोज के लिए. कार्यक्रम बहुत अच्छा था. हॉस्टल में रहने वाले विद्यार्थी और सभी शिक्षक स्वागत के लिए खड़े थे. उन्हें सुंदर सा पीतल का होराई उपहार में दिया और कृतज्ञता पत्र भी पढ़कर सुनाया. इस संस्था से उनका जो संबंध है वह तो दिल में सदा ही रहेगा, जैसा कि जून ने अपने भाषण में कहा था. शाम को छोटे बच्चों के स्कूल में योग कक्षा की शुरुआत की. उनके जाने के बाद वहीं पर महिलाओं का नियमित योग का सत्र होगा।  कम्पनी की तरफ से विदाई समारोह के लिए जून को अगले हफ्ते की एक डेट देने को कहा गया था, पर दो दिन बाद वह बनारस जा रहे हैं. कल शाम छोटी बहन से बात की, रात अपने एक डॉ मित्र से उन्होंने बात की. आज सुबह ननदोई से, सभी ने कहा उनके एक बचपन के मित्र का स्वास्थ्य ठीक नहीं है. जून ने तय किया कि वह उनसे मिलने जायेंगे.  


आज हफ्तों बाद ब्लॉग्स पर लिखा. अभी भी काफी सामान समेटना शेष है, आज कुछ पेपर्स जला  दिए, और भी निकलेंगे. जून अभी फ्लाइट में होंगे, देर रात वह घर पहुंचेंगे. आज सुबह  व्यर्थ ही उनसे विवाद किया, उनका स्वभाव जानते हुए भी. खुद की बात ही सही है ऐसा सबका विश्वास है. इसलिए हर बात को सिर झुकाकर क़ुबूल कर लेना चाहिए. आर्ट ऑफ़ लिविंग का पहला सूत्र भी यही है, लोगों और परिस्थितियों को जैसे वे हैं वैसे ही स्वीकार करें.  दिल बहुत कोमल भी है और उतना ही कठोर भी. आर्ट ऑफ़ लिविंग का एक और सूत्र है, विपरीत मूल्य एक दूसरे के पूरक हैं. आज मंझली भाभी से बात हुई, उनकी बिटिया मलेशिया गयी है, वहाँ से उसे स्पेन जाना है, उसका होने वाला पति भी उसी के दफ्तर में काम करता है. दो महीने बाद उनके विवाह में उन्हें जाना है. दीदी ने कहा है, वे लोग भी उनके साथ उस यात्रा के दौरान पंजाब व हिमाचल जायेंगे. जून ने उनकी भी टिकट बुक कर दी हैं. आज एक पुरानी साधिका का फोन आया, वह दो-तीन महीने के लिए अपनी बिटिया के पास विदेश जा रही है. कहने लगी, उसके जाने से यहाँ कमी खलेगी, पर इस दुनिया में किसी के आने-जाने से कोई फर्क नहीं पड़ता. दुनिया को उनकी नहीं उन्हें दुनिया की जरूरत होती है ! 


आज शाम से ही पुरानी नोटबुक्स को छाँटने का काम कर रही थी. चार-पांच घण्टे लग गए. जो डायरी साथ रखनी हैं और जो नष्ट कर देनी हैं, उन्हें अलग-अलग किया. किताबों में भी इसी तरह तीन समूह बनाये, एक जो ले जानी हैं, दूसरी जो स्कूल की लाइब्रेरी में देनी हैं , तीसरी जो  महिलाओं को देनी हैं. कुछ देर पहले जून से बात हुई, उनके मित्र अस्पताल में हैं पिछले तीन दिनों से, कल दोपहर तक शायद वापस घर आ जायेंगे. आज वह उन्हें एक अन्य डॉक्टर को दिखाने ले गए. उनके दोनों पुत्र भी आ गए हैं. कल दोपहर गायत्री योग साधिकाओं के समूह ने विदाई भोज रखा है. वे सभी उसके यहाँ आएंगी और अपने साथ भोजन बनाकर लाएंगी. वे भी उनके लिए शिलांग से उपहार लाये हैं. आज दोपहर स्वप्न में कोई सुस्वादु पदार्थ खाया, कैसा जीवन्त अनुभव था. सोने से पूर्व समाधि के बारे में सुना था. पुरानी डायरी में कृष्ण को लिखे पत्र पढ़े ! परमात्मा के लिए प्रेम जैसे उन दिनों पूरे ज्वर पर था, अब भीतर कैसी स्थिरता छा गयी है. दो दिन पूर्व कैसा अनोखा स्वप्न देखा, गुरूजी को देखा, वह सम्भवतः शिष्यों को परख कर रहे हैं, वह उन्हें देखती है और सुध खोकर गिर पड़ती है, फिर देह से निकल कर आकाश में उड़ने लगती है, कितना सजीव था सब कुछ ! जीवन के रहस्य को कोई कैसे समझ सकता है ! 


वर्षों पूर्व ...कालेज खत्म होने बाद उस दिन के पन्ने पर लिखा था - अभी-अभी वह सूरज और चाँद से मिलकर आ रही है. कितना सुख था यह कहना कि वह उनके लिए है ! एक तरफ सूर्य की हल्की लालिमा तथा दूसरी तरफ पूरा गोल चाँद और इतना बड़ा आकाश, कितना सुंदर मैदान, वह पागल थी उस एक क्षण... हँसी उसके होठों से फूट रही थी और शी वाज फुल विद दैट फेमिनिन फीलिंग ... जिस स्कुल में उसने पढाना शुरू किया था, कल वह उसकी प्रिंसिपल से मिलकर अपने ओरिजनल सर्टिफिकेट लेने वाली थी, जो जॉब देने से पहले उन्होंने रख लिए थे. उसे आगे पढ़ाई के लिए अप्लाई करना था. 


Thursday, October 29, 2020

नीला आकाश



आज मौसम काफी गरम है, पसीना सूखने का नाम ही नहीं ले रहा था दोपहर को, पर एसी चलाकर बैठे, एक बार भी ऐसा नहीं लगा, शायद इसे ही साक्षी भावमें टिकना कहते हैं। शाम को योग कक्षा में एसी में से काली चीटियाँ बरसने लगीं, गर्मी से बचने के लिए संभवत: वे वहाँ आयी होंगी। बाहर बरामदे में कार्पेट बिछाकर सबने साधना की. पश्चिम बंगाल में हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। एक आतंकवादी हमले में कश्मीर में सीआर पी एफ के जवान मारे गए हैं। ‘’जीन  पर लिखी किताब अब कठिन होती जा रही है,  सोचा है फिर भी पूरा पढ़ेगी।  कितने वैज्ञानिकों की मेहनत का फल होती है एक खोज। जून ने रिटायरमेंट से पहले होने वाली तैयारी आरंभ कर दी है। 

 

आज भी गर्मी बहुत थी, शाम को अचानक वर्षा होने लगी, पर बूँदाबाँदी तक ही सीमित रही। आजकल लगभग रोज ही ऐसा होता है। योग कक्षा में एक साधिका पुदीने की शिकंजी बनाकर लाई, जो वे योग दिवस पर सबको पिलाने वाले हैं। आज उनकी कार बंगलूरू के लिए रवाना हो गई। उनसे पहले वही पहुँच जाएगी। एक मित्र परिवार को भोजन पर बुलाया था, वह  सेवा निवृत्त हो चुके हैं। उनके दातों का इलाज चल रहा है, खिचड़ी बनाने को कहा था उन्होंने स्वयं ही। हींग वाले आलू, बेक की हुई सब्जियां और घी के साथ खिचड़ी जब उन्होंने खाई तो बार-बार कह रहे थे, उनके लायक भोजन बना है, खाने में जरा भी दिक्कत नहीं हुई। इस माह के अंत तक वे लोग चले जाएंगे। शाम को क्लब में रिहर्सल थी, अभी दो दिन और होगी, तीन दिन बाद कार्यक्रम है। फैशन परेड के लिए रैम्प पर चलना इतना भी कठिन नहीं होना चाहिए। 


आज सुबह जून टूर पर गए हैं, परसों आ जाएंगे। सुबह दक्षिण भारतीय नाश्ता बनाया था। योग कक्षा  में बच्चों को योग प्रोटोकाल के अनुसार योग कराया, बाद में योग पर एक प्रश्नोत्तरी और योग दिवस पर उन्हें एक चित्र बनाने को भी दिया। शाम को बगीचे में बैठकर ध्यान कर रही थी कि  पूनम का चाँद दिखा, तस्वीरें लीं, चाँद को देखकर सदा ही मन में उमंग की एक लहर दौड़ जाती है, ग्रहों का कितना प्रभाव पड़ता है जीवन पर। बचपन में आकाश के नीचे लेटकर वे बादलों को देखा करते थे, मन भी जैसे आकाश जितना फैल  जाता था। आज पहली बार यू जी कृष्णामूर्ति को सुना। गुरुजी को भी सुना, नींद और भोजन ऊर्जा को बढ़ाने वाले हों न कि सुस्त बनाने वाले, ऐसा उन्होंने कहा। 


आज का दिन कैसे बीत गया पता ही नहीं चला। सुबह उठने में थोड़ी देर हुई। प्रात: भ्रमण से लौटी तो रोज गार्डन के सामने फूलों की चादर बिछी थी। पीले फूलों से गेट  से सड़क तक जैसे कालीन बिछ गया था। वापस लौटकर तस्वीरें उतारीं, एक वीडियो भी बनाया। स्कूल जाना था, बच्चों को संगीत के साथ योग कराया, प्रिंसिपल ने कहा, योग दिवस टीचर्स के साथ ही मनाएंगे। वापस आकर कुछ देर कंप्यूटर पर बैठी। दोपहर बाद मृणाल ज्योति, लौटकर, शाम की योग कक्षा फिर क्लब, वापस आकर कुछ देर ध्यान किया फिर रात्रि भोजन।  


और सुदूर अतीत में .. उस दिन के पन्ने पर विनोबा भावे की सूक्ति थी, “दूसरों को प्रेम करने से प्रेम मिलता है।” उसने लिखा.. और वह दुनिया से प्रेम करती है, सारी दुनिया से और ईश्वर से.. और उसके प्रिय जनों से भी। उस दिन एक और पेपर हो गया, कैसा हुआ यदि कोई पूछे तो कहना पड़ता, बुरा, फिर उसने स्वयं को सुधारा, इस दुनिया में ‘बुरा’ शब्द के अलावा कुछ भी बुरा नहीं है, उसे इस शब्द का प्रयोग कभी नहीं भाया। यदि कुछ पसंद न आए तो वह ‘अच्छा नहीं है’ ही  कहती थी। उसने सोचा पचास प्रतिशत अंक तो मिल ही जाएंगे, कुछ न से तो कुछ होना ही अच्छा है। अब चार दिन के बाद केवल एक ही पेपर शेष था। कालेज से लौटते समय जिस व्यक्ति ने उसे सीट दी, बुजुर्ग था,पढ़ा-लिखा था । शहर में आप किस मोहल्ले को बिलॉंग करती हैं ? यही प्रश्न था जो शायद वह पूछ रहा था, बस के शोर में उसे कुछ सुनाई नहीं दिया बाद में जोड़ने पर यह समझ में आया पर वह चुप बैठी रही। 


Thursday, July 9, 2020

भोर का आकाश


कल शाम बच्चों के स्कूल में अध्यापिकाओं का साक्षात्कार था। उसे भी बुलाया गया था, इंटरव्यू लेने का पहला और एक बिलकुल नया अनुभव था और स्वयं को परखने का एक स्थल भी. मेज के इस तरफ बैठी है, यह भाव आया तो भीतर के सूक्ष्म अहंकार का बोध हुआ. प्रश्न पूछते समय खुद को ही लगा, वाणी में अभी भी मधुरता नहीं आयी है. एक क्षण के लिए भीतर हलचल भी हुई, जो बाद में व्यर्थ ही प्रतीत हुई. परमात्मा उन्हें उनसे बेहतर जानते हैं. वह उन-उन परिस्थितियों में भेजते हैं जहाँ से वे चाहें तो सीखकर आगे बढ़ सकते हैं. यह सृष्टि उसी परमात्मा का विस्तार है, वह सर्वज्ञ है और यदि कोई आत्मा उसकी ओर कदम बढ़ाती है तो वह उसे स्वीकार करता है. जैसे धूल से सन हुआ शिशु माँ की तरफ हाथ बढ़ाता है तो माँ उसे झट गोद में उठा लेती है, वह अपने वस्त्रों की परवाह नहीं करती. शिशु को साफ-सुथरा करती है, वैसे ही परमात्मा उन्हें निखारता है. वह प्रेरणाएं भेजता है  जिन्हें वे सुनी-अनसुनी कर देते हैं, पर वह असीम धैर्यशील है. वह बार-बार अपनी ओर खींचता है, क्योंकि उनकी अभीप्सा उसने भांप ली है. संस्कारों के कारण या पूर्व कर्मफल के कारण वे उस पथ से विमुख हो जाते हैं ,पर उसका हाथ उन्हें कभी नहीं छोड़ता. कल एक स्वप्न में स्वयं को कहते सुना कि  जून के जीवन में सच्चाई बढ़ रही है. वह भोजन के प्रति भी पहले के जैसे आग्रही नहीं रहे. परमात्मा उनके हृदय पर भी अपना अधिकार कर रहा है. आज दोपहर मृणाल ज्योति जाना है, सेवाभाव से बच्चों को पढ़ाना है. संध्या को श्लोक उच्चारण का अभ्यास करना है. शेष समय में लिखना-पढ़ना. व्यर्थ अपने आप छूट जाता है जब वे सार्थक  को पकड़ लेते हैं. 

घर के बायीं तरफ वाले मैदान में बीहू नृत्य की शूटिंग चल रही है. कभी संगीत की आवाज आती है कभी ‘कट’ की और सब थम जाता है. छोटी लड़कियाँ भी हैं और बड़ी भी. अप्रैल में तो यहाँ चारों ओर ढोल की थापें सुनाई देती हैं, इस बार मार्च से ही बीहू आरंभ हो गया है. जून दो दिन के लिए आज टूर पर गए हैं. दोपहर को क्लब गयी थी,  शाम के आयोजन की तैयारी चल रही थी, एक अन्य सदस्या भी आयी थी, जो पहले बहुत बीमार रहा करती थी, एक वर्ष पूर्व योग करना आरंभ किया और अब पूर्ण स्वस्थ है. उसने ज्ञान के पथ पर कदम रख दिया है और तेजी से आगे बढ़ रही है.  नैनी भी ढेर सारे फूल लेकर वहाँ आयी और चार गुलदान सजा दिए, वह इस कार्य में दक्ष हो गयी है. घर पर भी शाम के लिए उसने कुछ व्यंजन बनाये हैं.अगले हफ्ते महिला क्लब की तरफ से कम्पनी की एक महिला उच्च अधिकारी का विदाई समारोह है. वह उनसे वर्षों पहले एक बार विदेश में मिली थी. उसके बाद दो-तीन बार क्लब की मीटिंग में. नई प्रेसीडेंट ने कहा, उनके लिए कुछ लिखना है. 

और अब उस पुरानी डायरी का एक पन्ना - रात्रि के ग्यारह बजने वाले हैं. सुचना और प्रसारण मंत्रालय के ‘नाटक व गीत विभाग’ के ‘दुर्गे कला केंद्र’ के कलाकारों का नृत्य-गीत देखकर बहुत अच्छा लगा. सचमुच नृत्य और संगीत में जादू है, लोक नृत्य का तो कहना ही क्या, उसके पाँव थिरकने लगते हैं धुन सुनते ही, अफ़सोस कि उसने कक्षा सात के बाद कभी नृत्य नहीं किया. कल उसे दादाजी के घर जाना है. किताबें और एक ड्रेस लेकर जाएगी. फिर उसके कमरे में छोटी बहन रहेगी. परीक्षाएं इतनी नजदीक हैं और उसकी पढ़ाई अभी तक गति नहीं पकड़ पायी है. खैर ! अब वह क्या कर सकती है, ऐन वक्त पर उसका पागल मन धोखा दे जाता है. उसे तो केवल नीला आसमान, फूल, नदी, छोटे बच्चों की मुस्कान... देखकर ही ख़ुशी मिलती है. 

बिलकुल वही अनुभूति, बल्कि उससे भी अच्छी ! इस समय वह दादी जी के घर पर है. आस पड़ोस की छोटी-छोटी बच्चियाँ मिलने आयीं, ये सब बहुत अच्छी हैं, भोली.. मगर दुनिया इन्हें ऐसा रहने कहाँ देगी. वह सबसे छोटी रेणु उसने कैसा चुटकुला सुनाया.. एक ने कहा, आप क्यों आजकल हर वक्त सपने बुनती हैं ! ...और दादाजी ने भी एक चुटुकुला सुनाया, कहा, वे वैष्णव हैं सो एक अंडा खाएंगे और फूफा जी यदि आएं तो उन्हें दो खिला देना. कल सम्भवतः बुआ जी आएं. शाम को उसकी घड़ी खो गयी, सारा कमरा ढूंढ लिया तो मिली बड़े सन्दूक के पीछे. चचेरे भाई ने कहा, एक दिन पता चल जाये कि सुबह पांच बजे आकाश में तारों की स्थिति या प्रकाश कितना है तो रोज समय पर उठने में आसानी होगी. उसने सोचा, वह भी कल जल्दी उठेगी और आकाश दर्शन करेगी. 

Tuesday, July 30, 2019

बरसाती मौसम



पिछले तीन दिनों से लगातार वर्षा हो रही है. दिन और रात दोनों समय. कल सुबह टहलने निकले थे पर बारिश तेज हो गयी, छाता भी काम नहीं आया, सो घर लौट आये. आज सुबह कुछ समय के लिए थमी थी, पर इस समय मूसलाधार पानी बरस रहा है. असम में सर्दियों के बाद सीधे ही बरसात का मौसम आ जाता है, बसंत और गर्मियों को आने ही नहीं देता. वे बीच-बीच में अपना काम करते हैं जब वर्षा कुछ समय के लिए विश्राम लेती है. शाम को वे घर में ड्राइव वे पर कुछ देर टहलते रहे, आकाश घने बादलों से ढका था. पेड़-पौधे फूल सभी पानी में तृप्त नजर आ रहे थे, पूरी तरह से तर ! सुबह जून ने नाश्ते में अप्पम बनाये, फिर फोन पर उसकी रेसिपी भी बताई, उन्हें दक्षिण भारतीय व्यंजन बहुत पसंद हैं.

आज वह टूटा हुआ दांत निकलवाया, तोड़कर निकालना पड़ा, दो इंजेक्शन दे दिए थे डेंटिस्ट ने सो दर्द नहीं हुआ. इस समय एक अनोखी ध्वनि सिर के ऊपरी भाग में उसे सुनाई दे रही है. दर्दनाशक दवा डाक्टर ने दे दी है, जो दर्द न होने के बावजूद वह ले चुकी है, यह सोचकर कि उस दवा का अवश्य ही कुछ और लाभ भी होता होगा. परमात्मा की कृपा अपार है.

आज सुबह उठे तो तेज वर्षा और आंधी से सामना हुआ. बिजली भी चली गयी, पर बारिश फिर रुक गयी. अँधेरे में तैयार होकर वे टहलने निकले, वापस आये तो बिजली आ गयी थी. कल शाम फ्रिज को डीफ्रॉस्टिंग के लिए बंद किया था, सारा सामान बाहर निकाल दिया था, सहेजा. तब तक जून के एक सहकर्मी व उनकी पत्नी आ गये, उनके साथ आधार कार्ड के लिए बैंक जाना था. बैंक मैनेजर छोटे भाई के परिचित हैं, उनकी ही मदद से आधार कार्ड बनने में कुछ आसानी हो रही है. लौटते-लौटते लंच का समय हो गया, जल्दी-जल्दी भोजन बनाया. दोपहर को मृणाल ज्योति गयी. वहाँ से लौटी तो एक सखी का फोन आया, उसकी बिटिया को पिछले चार-पांच दिन से बुखार है, उसे अस्पताल ले जाना है, एक घंटा लग गया. लौट कर आयी तो योगाभ्यास के लिए महिलाएं आ चुकी थीं. दिन कैसे बीत गया पता ही नहीं चला.

तीन बजे हैं दोपहर के, आज मौसम अच्छा है, धूप खिली है. कल 'विश्व महिला दिवस' है, कुछ पंक्तियाँ लिखी हैं, अभी कुछ सुधार करना शेष है. महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक अधिकारों के प्रति सजग कराने के लिए मनाया जाता है यह दिवस, उनके प्रति सम्मान दिखाने के भी एक अवसर है यह दिन ! आज सुबह उठे तो आकाश में बादल थे, पर चाँद भी झलक रहा था. सुबह नाश्ते करने के बाद अस्पताल गयी. वापस आई तो दस बजे थे, बिटिया अब ठीक है. सखी को उसके परीक्षा न दे पाने की कोई फ़िक्र नहीं है, पता नहीं यह ठीक है या नहीं, पर इतना ज्यादा लाड़-प्यार बच्चे को कमजोर ही बनाता है. आज शाम क्लब में मीटिंग है. सेक्रेटरी आज ही बाहर से लौट रही है. नैनी ने बताया उसका बेटा स्कूल जाने लगा है, समय कितनी तेजी से बीत रहा है. पिताजी का फोन आया, उन्हें भी सबकी याद आती है, आज वह अकेले हैं, शाम को जून उनसे पुनः बात करेंगे.

Tuesday, April 18, 2017

सुबह की सैर


आज सुबह टहलने गयी तो पैरों में अचानक ताकत भर गयी थी. कुछ देर दौड़ कर बाकी वक्त तेज चाल से भ्रमण पूर्ण किया. घर आकर विश्राम किया, मन खाली था. जहाँ कुछ भी नहीं रहता, सारे अनुभव चुक जाते हैं, वहीं कैवल्य है, वहीं निर्वाण है. सारे अनुभव मन को ही होते हैं. मन एक मदारी है, वह ढेर से खेल दिखाए चले जाता है, लुभाए चले जाता है. लेकिन जहाँ कुछ भी नहीं रहता, दूसरा कोई रहता ही नहीं, मुक्ति है. गुरूजी कहते हैं, अच्छे से अच्छा अनुभव भी बाहर ही है. वहाँ द्वैत है, अब कुछ देखना नहीं, कुछ पाना नहीं, कुछ जानना नहीं, बस होना है..सहज अपने आप में पूर्ण..मौन ! इस मौन के बाद जो शब्द उठेंगे वह जीवन को उत्सव बना देगें..अर्थात जीवन को उत्सव बना देखने की कामना तो भीतर है ही..कैसा चतुर है मन..एक ही कामना में सब कुछ मांग लेता है और फिर अलग हो जाता है..

आज का भ्रमणकाल कल से अलग था. हरियाली, फूलों की लाली, मनहर मनभावन सुख वाली. नवम्बर की सुबह कितनी सुहानी होती है. आकाश पर रंगों की अनोखी चित्रकारी, वातावरण में हल्की सी ठंडक..पंछियों का कलरव और हवा इतनी हल्की सी..भीतर कोई प्रेरणादायक वचन बोलने लगा. बहुत सारे संशय दूर हो गये. उन्हें साक्षी भाव रहना है, पूर्व संस्कार वश यदि कोई विकार जगता है तो साक्षी भाव में रहने के कारण उसका कोई असर नहीं होता. कैसी अनोखी शांति है इस ज्ञान में. शाम को मीटिंग है, कल एक सखी का जन्मदिन है. सभी कुछ कितना सरल है. वे अपनी पूर्व धारणाओं और पूर्वाग्रहों के कारण जटिल बना लेते हैं. जीवन एक गुलाब की तरह जीना चाहिए या एक संत की तरह..निर्लिप्त..सदा मुक्त !

आज बदली है, ठंडी हवा भी बह रही है. कल आखिर कसाब को फांसी हो गयी. उसकी कहानी इस जन्म की तो खत्म हो गयी, लेकिन अगले जन्म में उसे जाना ही होगा. सुबह साढ़े तीन बजे ही नींद खुल गयी, उठी नहीं, एक स्वप्न चलने लगा. नन्हे को देखा, कल रात माँ, पुत्र के मिलन के जो डायलाग सुने थे, वे भी कहे, सुने, तभी भीतर विचार आया God loves fun वह परमात्मा उन्हें नाटक करते देखकर कितना हँसता न होगा ! सुबह वे साथ ही घूमने गये, बातचीत हुई ज्यादा, घूमना हुआ कम, वापस आये तो माली आ गया था.





Wednesday, April 5, 2017

नन्ही चिड़िया


परसों नवरात्र का अंतिम दिन था. वह अस्पताल में थी. टीवी पर माँ दुर्गा की सुंदर मूर्तियों के दर्शन किये थे. कमरे के बाहर लगातार पानी गिर रहा था, उसी का शोर नींद आने में बाधा डाल रहा था. लेकिन भीतर रंगों व ध्वनियों का एक अनोखा संसार है, वहाँ जड़-चेतन का कोई भेद नहीं है, परमात्मा वहीँ है, वहाँ सौन्दर्य है. रात को देखा, वह गहन गुफाओं से गुजरती है, टेढ़े-मेढ़े रास्तों पर सहजता से बढ़ती जाती है. सुंदर दृश्य भी थे और अँधेरे भी, दिव्य लोक भी थे और सामान्य जन भी. कभी सामान्य जीवन के कितने ही दृश्य दिखे, बड़ी फैक्ट्रियां और लोग, अब ठीक से याद नहीं आता. जब तक यह हुआ, शरीर का सुख-दुःख कुछ भी याद नहीं रहा. याद रहा तो पानी का स्पर्श, पानी में सहज तैरकर या उड़कर एक स्थान से दूसरे स्थान पहुंचना.

कल रात्रि अस्पताल के कमरा नम्बर पांच व बेड नम्बर एक सौ अट्ठारह पर पड़े हुए भीतर कविताएँ फूटतीं देखीं. रंगों का सुंदर मुजस्मा था. शब्द नहीं हैं जिसे कहने को, हीरों, मोतियों, माणिकों के अद्भुत सुंदर रंगीन नजारे, फूलों की नदियाँ, खिलते हुए सहस्रदल कमल और चमकता प्रकाश, तारे, सुंदर ध्वनियाँ, रुनझुन सी आवाजें..ऐसा अद्भुत फूलों का उपवन, खिलते हुए बैंगनी, गुलाबी, लाल, नारंगी, पीले रंगों वाले फूल, जाने कौन खिला रहा था. परमात्मा उनके भीतर है, वह इतना सुंदर है सुना था, पढ़ा था, संतों की वाणी सुनी थी, वह जैसे सच बन कर प्रकट हो रही थी. एक तरफ इतना अपार आत्मिक आनंद, दूसरी तरफ दैहिक कष्ट. इस जीवन का एक-एक पल रहस्यों से भरा हुआ है. चार दिन अस्पताल में रहने की बाद आज घर लौटी है. अभी तबियत पूरी तरह ठीक नहीं है. इतनी सारी दवाएं भीतर गयी हैं, देह को सामान्य होने में वक्त तो लगेगा. जब तक देह साथ दे तभी तक जीवन है. पिताजी की आवाज दूसरे कमरे से आ रही है, वह उठ गये हैं. जून दफ्तर गये हैं. उसके कारण सभी परेशान हैं. इन्सान की जीवन यात्रा सुख-दुःख के दो तटों के मध्य बहती है, द्वन्द्वों से युक्त है यह जीवन. जहाँ से सुख मिला है, दुःख मिलेगा ही. कई दिनों बाद लिख रही है, अपने ही हाथों को अजीब लग रहा है. पेन से लिखना वैसे भी कम हो गया है. टाइप ही करती है. शाम तक या कल तक वह भी शुरू कर देगी.

कल रात एक अद्भुत स्वप्न देखा. वह कहीं जा रही है, लेकिन चलना उसका नहीं हो रहा. मार्ग स्वयं ही चल रहा है, एक व्यक्ति उसे परेशान करना चाहता है तो एक नजर से ही वह दूर चला जाता है. सामने विशाल आकाश पर सुंदर बेल-बूटे बने हैं, बचपन में एक स्वप्न में आकाश में बड़े राजमहल व हाथी देखे थे, वैसा ही स्वप्न था लगभग. आगे जाते ही एक वाहन में सवार चार व्यक्ति उसे सुनसान सड़क पर अकेले देखकर चिढ़ाने के मूड में आ जाते हैं, वह उन पर चिल्लाती है फिर गर्दन हिलाती है, एक लड़की वैसा ही करने लगती है तो वे सभी वैसा ही करते हैं और सम्मोहित होकर वहीं गिर जाते हैं. आगे जाती है तो दूर से कोई पुकार लगाता हुआ आता है. उसके हाथ जुड़े हैं, मानो वह उसका इंतजार ही कर रहा था. देखती है वह एक चिड़िया थी, नन्ही सी, जिसके तन पर घाव थे, वह एक हाथ में लेकर उस पर दूसरा हाथ फेरती है और कहती है वह ठीक हो जाएगी, चिड़िया मानवी भाषा में उससे बात करती है. यह स्वप्न बताता है अहंकार पहला व्यक्ति था, चार विकार चारों व्यक्ति थे और घायल चिड़िया उसका मन, जिसे उसे स्वस्थ करना था. लगता है अब उसके जीवन में बड़ा परिवर्तन होने वाला है. कुछ बदलाव पहले ही शुरू हो गये हैं. जून उसका बहुत ध्यान रख रहे हैं, शारीरिक दुर्बलता का अहसास कभी-कभी होता है पर मानसिक शक्ति अनंत गुणा बढ़ गयी है. परमात्मा उसके पोर-पोर में समा गया है, वही तो है, उसके सिवा कुछ है भी कहाँ ? वह परमात्मा ही ‘वह’ बनकर बैठा है, अब जब वही है तो वही रहे..अब उसके सिवा यहाँ कोई नहीं है. जो उससे मिलने आएगा वह खाली ही जायेगा, क्योंकि यहाँ ‘अहम्’ नहीं है अब ‘त्वम्’ ही है.  



Tuesday, January 3, 2017

आकाश का गीत


आज ध्यान कम टीवी पर सद्गुरू को श्रवण ज्यादा किया. आश्रम में उनसे जो प्रश्नोत्तर हो रहा था, बहुत अच्छा लगा. उन्हें नींद आ रही थी, लेकिन लोग थे कि प्रश्न पूछे ही जा रहे थे.
श्रवण दुःख पाप का नाशक, श्रवण करे जो बनता श्रावक
सुनने की महिमा है अनुपम, मिल जाता है जिससे प्रियतम
निज भाषा में सुनने का फल, मन की धारा बनती निर्मल !
पढ़ना वृत्ति, सुनना भक्ति, होगी इससे कुशल प्रवृत्ति
कल-कल नदिया की भी सुनना, पंछी की बोली को गुनना
बादल का तुम सुनना गर्जन, सागर की लहरों का तर्जन
पिऊ पपीहा केकी मोर की, गूंज मौन की सुने सही
सुनना भी एक विज्ञान, बढ़ता है जिससे प्रज्ञान
राग सुनो, आलाप सुनो, कोकिल की तुम तान सुनो
यहाँ हवाएं भी गा रही हैं, आकाश गा रहा है. संगीत से भरा है जगत !

आज सात परिचित महिलाओं को फोन किये, मृणाल ज्योति के कार्य में सहयोग के लिए, एक ने उठाया ही नहीं. लोगों से बातचीत चलती रहे तो अच्छा है. गुरूजी ने कहा, अपने में जो दोष हैं, उन्हें निकालने का प्रयास करने जायेंगे तो कोई लाभ नहीं होगा. अपना दायरा बढ़ाकर, स्वयं को व्यस्त रखकर अपनी ऊर्जा का सही उपयोग करके वे स्वयं को शुद्ध कर सकते हैं. सेवा से बढ़कर शुद्धि का कोई साधन नहीं और स्वार्थ से बढ़कर अशुद्धि का कोई साधन नहीं. सेवा में कितना आनंद भी है. परमात्मा भी तो यही कर रहा है, ‘स: इव’ जो वह कर रहा है वे उसकी नकल करते हैं, वही तो उनके द्वारा प्रतिबिम्बित हो रहा है !

आज का ध्यान और भी अनोखा था. सद्गुरू होते ही हैं अनोखे, सारी दुनिया से निराले, प्रभु के घर वाले..दिल में रहने का ध्यान था, दिल के भीतर, दिल के ऊपर और दिल के नीचे..रहना था ध्यान से, अहंकार को भूलकर, विचारों को छोड़ते जाना था और केवल महसूस करना था. बच्चे महसूस करते  हैं, वे सोचते नहीं..तभी एकदम ताजे रहते हैं, फूल की तरह कोमल और सुबह की ओस की तरह निर्मल...

कल मृणाल ज्योति गयी थी. सो कुछ नहीं लिखा. वह परमात्मा कितने-कितने उपाय करके कितने खेल रचके उन्हें अपनी ओर खींचता है. वे अनजान से बने उसकी कृपा को अनुभव कर ही नहीं पाते, बार-बार अहंकार का शिकार होते हैं और दुःख पाते हैं, पर अपने सच्चे स्वरूप को देखते ही नहीं जहाँ केवल प्रेम है, जहाँ दो हैं ही नहीं, जो उनका अपमान(तथाकथित) कर रहा है, वह भी वे ही हैं. सम्मान करने वाले भी वही हैं. जब वे किसी का सम्मान करते हैं तो पुण्य बढ़ता है क्योंकि वे अपना ही सम्मान कर रहे हैं और जब किसी का अपमान कर रहे हैं, तो उनका पुण्य घटता है क्योंकि वे स्वयं का ही अपमान कर रहे हैं. इसका अर्थ हुआ कोई जब उनका सम्मान करता है तो अपना पुण्य बढ़ाता है उनका घटाता है, और अपमान करता है तो अपना पुण्य घटाता है, उनका बढ़ाता है. अद्वैत का अनुभव किये बिना कोई इस जगत में सुख से रह ही नहीं सकता. आज का ध्यान भी अनोखा था. अपने पोर-पोर को परमात्मा से ओत-प्रोत मानना था, एक-एक कण को..आज सुबह प्राणायाम करते समय भी उसे अपने घर में टिकने का अनुभव हुआ. वे व्यर्थ ही बाहर भटकते हैं. कभी धूल फांकते हैं तो कभी दामन फड़वाते हैं. उनका अपना मन ही मूर्खता भरे विचार उन्हें सिखाता है और वे उसकी बातों में आ जाते हैं. यहाँ करने को कुछ भी नहीं है सिवाय मस्ती में झूमने के..पर वे वही छोड़कर सारे काम करते हैं !        



Tuesday, September 13, 2016

दर्पण में प्रतिबिम्ब


पिछले पांच दिनों से डायरी नहीं खोली. आजकल कितनी ही पंक्तियाँ सहज ही मन में आती हैं पर उस वक्त लिखने की सुविधा नहीं होती, बाद में भूल जाती हैं..पर उस क्षण तो वह स्वान्तः सुखाय कुछ रच ही लेती है ! परसों कुछ पंक्तियाँ मन में आ रही थीं-

जीवन एक मौका है
बीज से वृक्ष बनने का
बूंद से सागर और कली से पुष्प
होने का..
मिटना होगा बीज को इस प्रयास में
खोना ही होगा अपना आप बूंद और कली को भी
चूक जाते हैं हम इसी मोड़ पर
‘हमीं’ बनकर पाना चाहते हैं
आकाश की ऊँचाइया
बने रहकर पूर्ववत्
पा सकेंगे क्योंकर
वृक्ष सी विशालता, गहराई सागर सी
सौन्दर्य फूल का..स्वयं बने रहकर
छोड़ दें ‘हम’ होने का लोभ
हो जाएँ रिक्त अपने आप से
तो भीतर जो अनछुआ बीज है
वह पनपेगा..
बूंद बह चलेगी सरिता बनकर 
सागर की तलाश में
और सुप्त कलिका स्वप्न देखेगी प्रस्फुटन का..

पिछले तीन दिन फिर यूँ ही निकल गये और डायरी नहीं खोली. अभी दीदी का ब्लॉग देखा, उनका ब्लॉग पहली बार इतने लोगों ने पढ़ा, जीजाजी भी प्रसन्न होंगे, दीदी इतना अच्छा लिख रही हैं. पंजाबी दीदी का भी जवाब आया है, वह सदा ही तारीफ करती हैं उसकी कविता की. जून आज फिर पिताजी को अस्पताल ले गये, कुछ दिनों से उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं है, उन्हें कुछ दिन दवा लेनी होगी. माँ का हाल वही है, उन्हें आजकल दिन में लेटना जरा नहीं भाता, बैठे-बैठे थक जाती होंगी पर कहने पर भी लेटना नहीं चाहतीं. आज उनके पड़ोसी जो ‘आर्ट ऑफ़ लिविंग’ के टीचर भी हैं, मृणाल ज्योति गये हैं, वह अध्यापिकाओं को ध्यान, प्राणायाम आदि के बारे में कुछ बतायेंगे. सद्गुरु भी यही चाहते हैं. आज सुबह ध्यान में उनकी आवाज सुनी, जो उसकी स्मृति में सुरक्षित है, अर्थात यह मन का ही खेल है. लेकिन प्रकाश के वे स्तम्भ तो मन का खेल नहीं हो सकते, उनकी उपस्थिति को वह बिलकुल स्पष्ट अनुभव करती रही है. परमात्मा और गुरू में कोई भेद नहीं है, वह सर्वव्यापी चेतना एक ही है, वह सदा उनके साथ है. इस अनुभव के बाद अब लौटना नहीं होगा. कल शाम को कुछ पलों के लिए मन विचलित हुआ पर वह ऊर्जा का अपव्यय ही था जैसे दर्पण में कोई प्रतिबिम्ब ठहरता नहीं है वैसे ही आत्मा में कोई भाव टिकता नहीं है. वह जैसे पहले थी वैसे ही हो जाती है, केवल मन स्वयं को उसमें देख लेता है. मन ने देखा कि उसे निंदा नहीं भाती, स्तुति भाती है. उन्हें दोनों के पार जाना होगा, एक चाहिए तो दूसरा मिलेगा ही. उनका फोन खराब हो गया है, एक तरह से तो शांति है पर साथ ही अशांति भी है क्योंकि वे भी फोन नहीं कर पा रहे हैं, यहाँ सब कुछ जोड़े में मिलता है, मन का नाम ही द्वंद्व है. शुद्ध, निर्विकार, अचिन्त्य आत्मा सदा एकरस, आनंद से पूर्ण है, शक्तिसंपन्नदृष्टि आता है  दीदी को अवश्य उसकी बात समझ में आई होगी. कल नन्हे से बात नहीं हुई, वह व्यस्त है आजकल.