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Saturday, August 30, 2014

टेलीविजन - इडियट बॉक्स


पवित्र संग की आध्यात्मिक तरंगे हृदय को प्रभावित करती हैं और साधक को लोकातीत परमसुख का आकर्षण होता है”. आज बाबाजी ने संग की महत्ता को बताया. संग का बड़ा रंग लगता है. उसने चिन्तन किया यदि कामनाएं सीमित हों तो मन सुखी रहता है. ईश्वर का वरदान स्वरूप यह जीवन उन्हें समय की धारा के साथ-साथ बढ़ने के लिए मिला है. मन पर नियन्त्रण एक मर्यादा को जन्म देता है. सामान्य सुखों के पीछे अपने हृदय के अलौकिक सुख को जो तज दे, वह दुखों को आमन्त्रण दे रहा है. अंतर्दृष्टि रखते हुए इस जीवन रूपी चादर को स्वच्छ रखा जा सकता है, बुद्धि स्थिर होने से ही सही निर्णय की शक्ति प्राप्त होती है.

आज बाबाजी ने बड़ी मजेदार बात कही, कुल डेढ़ पाप होता है और कुल डेढ़ ही पुण्य होता है. एक पाप देह को ‘मैं’ मानकर उसमें आसक्त रहना और आधा सारे अन्य पापों को मिलाकर होगा. इसी तरह एक पुण्य आत्मा को ‘मैं’ मानने से व शेष आधा अन्य सभी अच्छे कर्मों को मिलाकर होगा. उस दिन मीटिंग अच्छी रही. उसका कविता पाठ सबसे पहले हुआ, कुछ लोगों ने तारीफ भी की. एक सखी का pearl set पहन कर अच्छा लगा, ड्रेस कोड के हिसाब से उसे वह पहनना था.  वक्त पड़ने पर उसने सहायता की, इसी का नाम तो मित्रता है. आज धूप तेज है, सूरज की तरफ पीठ करके बैठने पर भी चेहरे पर तपन महसूस हो रही है. सो अंदर जाना ही ठीक है. बगीचे में फूल ही फूल दिखाई दे रहे हैं, क्रिसेंथमम व गुलाब के फूल तथा जीनिय के, जो बड़े शोख रंगों में हैं.

आज बाबाजी का प्रवचन सुनकर मन भावविभोर हो उठा. कितनी गूढ़ बातें वह कितनी सहजता से कह जाते हैं. ईश्वर के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं. न जाने कितने उदाहरण, कितने उपाय बताते हैं. हर कोई अपने स्वभाव व रूचि के अनुसार तरीका पसंद करे और चल दे उस सच्चे मार्ग पर, जिससे अपना भी कल्याण है और लोक कल्याण भी . वह कहते हैं किसी भी बाहरी आकृति या रूप की नकल कोई न करे. अच्छा बनने का प्रयास भी नहीं बल्कि वह जो है, उसे सहज होकर जाने. यह जानना ही उसे सच्चा ज्ञान देगा. किसी को कुछ बनने की, किसी के जैसे होने की लालसा को प्रश्रय नहीं देना है, बल्कि अपने भीतर छुपी उस अनंत शक्ति का बोध पाना है, अपने अंतर के ईश्वर को भजना है. मन्दिरों और तीर्थों के भगवान किसी का कुछ भी भला नहीं करेंगे यदि मन में उसके दर्शन नहीं किये. कबीरदास ने ठीक ही कहा है – माला तो कर में फिरै, जीभ फिरै मुख मांहि, मनवा तो चहूँ दिसी फिरै....इस चहूँ दिसी फिरने वाले मानस को राह दिखानी है. राह जो उस परम सत्य तक ले जाती है. मनसा, वाचा, कर्मणा उसे ही समर्पित होना है. मन व्यर्थ का चिन्तन न करे, वाणी का दुरूपयोग न हो, कर्म ईश्वर को अर्पण हों तो जीवन स्वयंमेव तीर्थ बन जायेगा !

TV viewing is harmful for children, in fact it should be excess TV viewing is harmful for children. Nanha has to speak on this topic tomorrow. So she thought to brush up her mind also to get some points.Violence is increasing in  today’s youngsters even toddlers these days. Mothers are complaining the aggressiveness and restlessness among kids who are exposed to all kinds of programmes on TV.Children are more demanding these days, they get attracted to all the beautiful things, dresses and other products on TV and they want same things, they do not understand the difference between reality and virtual.They are exposed to harmful radiations, in cities houses are small so they watch TV from a short distance which affects their eyes also.They are distracted, while preparing for test and exams, if their favourite programme is being telecast ed they rush to watch it. They waste their valuable time, which can make or mar their future.They disobey their parents, who want to limit their TV hours. Children do not play outdoor games, they are less social than their parents when they were young. They live in fantasy which keeps them away from real life realities. They are exposed to all kind of adult program which can leave harmful impression on their young mind.  They mostly watch film based programmes or cartoon shows, both give only light entertainment but no education. She thought if Nanha asks her help she can give now.



Monday, April 28, 2014

विश्वकर्मा पूजा का भोज


Today again she is alone at home at this hour, Nanha and Jun both went to their respective destinations at 6.30 am. Weather is hot and she is feeling it. It is hot and stuffy so is her mind and so are her clothes. Mind is not as fresh and spirit is not as calm, something is troubling her either it is heat or something concerned with mind. But just she read, mind is not everything, also read some useful ways to avoid worries and start living meaning fully. But all the kings horses and all the king’s men can not join her broken heart… Last night she saw a dream, mother is going and she gave her pink sari, and one more thing in the dream was about the women of the house, they all used to show their gratitude by wailing when their men brought them new clothes, men were so puzzeled they stopped bringing any new garments. It was a strange dream.

उम्र के इतने पतझड़ देखने के बाद (वसंत भी तो) भी आज तक वह यह नहीं समझ पायी कि उसे क्या करना चाहिए या उसे क्या पसंद है या वह क्या अच्छी तरह कर सकती है, एक उहापोह की स्थिति हर वक्त मन में बनी रहती है, लगता है जैसे जो कुछ वह कर रही है अर्थयुक्त नहीं है बल्कि कुछ और है जिसे करने पर उसे पूर्ण संतुष्टि का अहसास होगा. यह अहसास भी सताता है कि अपने समय का सदुपयोग नहीं कर रही है, कर पा रही है. पढ़ाना उसे पसंद है और नन्हे को पढ़ाने का समय भी तय किया है लेकिन वह उन लोगों को पढ़ाना चाहती है जिनके पास साधन नहीं हैं. पर कहते हैं न कि इच्छा यदि दृढ़ हो, इरादे मजबूत हों तो राह खुदबखुद निकल आती है, उसके इरादे पानी के बुलबुलों की तरह होते हैं. उस दिन अपने आप से वादा किया कि रोज कुछ न कुछ लिखेग पर कल तो सारी दोपहर ‘करीब’ देखने में लगा दी. अच्छी फिल्म है शुरू में कुछ खास जम नहीं रही थी पर बाद में सभी का अभिनय अच्छा था. सही है कि टीवी और फिल्में वास्तविकता से दूर सपनों की दुनिया में ले जाती हैं, कल्पना की दुनिया में.. जहाँ सिर्फ ख्याल ही ख्याल होते हैं, हकीकत में होने वाले काम नहीं होते. पर वे ख्याल कभी-कभी असली जिन्दगी में काम भी तो आते हैं, प्रेम करना सिखाते हैं, जीने का नया अंदाज भी !


आज सुबह वे उठे तो वर्षा हो रही थी, बिजली चमक रही थी और बादल गरज रहे थे, मौसम मोहल हो गया है. कल शाम वे एक मित्र के यहाँ गये, जन्मदिन का उपहार बच्चों को दिया और कुछ देर बैठे, सखी ने पूछा क्या लिख रही हो, वह इतना ही बता पायी डायरी नियमित लिखती है. कल जून के दफ्तर में पूजा का भोज-प्रसाद ग्रहण करके वे दो बजे घर लौटे. वहाँ कई महिलाओं से कई दिन बाद मुलाकात हुई, इस तरह के get-together में बातचीत बड़ी formal सी ही रहती है फिर भी अच्छा लगता है लोगों के हाव-भाव देखना उन्हें सुनना. नन्हा देर से आया, उसकी वैन का ड्राइवर ज्यादा पी लेने के कारण अपनी चाबी खो बैठा था. इस पूरे इलाके में विश्वकर्मा पूजा पर पीने का रिवाज है, ड्राइवर अपनी गाड़ी की पूजा करते हैं और खुद ‘पानी’ पी लेते हैं. नन्हे का गणित का टेस्ट कल बेहतर हुआ, आज फिर उसका टेस्ट है, इस स्कूल में जाने के बाद से गणित में उसकी रूचि बढ़ी है. अपने इर्द-गिर्द नजर डाले तो ऐसा लगता है कि चीजों को सतही तौर पर जानना और उनमें गहरे उतरना दोनों बिलकुल अलग-अलग बातें हैं, गहरे उतरने में खतरा है पर असली स्वाद वहीं है, जीवन की तल्खियाँ हों या उम्मीदें, दोनों को आखिरी घूँट तक महसूस करना ही सच्चा जीवन है, उसने सोचा, यदि मन की बात माननी ही है तो इस कदर माने कि खुद को भूल जाए.

Monday, March 24, 2014

कम्प्यूटर पर रेसिपीज



कल दोपहर हिंदी में सृजनात्मक लेखन के लिए दूसरी कविता लिखी, कविता यदि गढ़ी जाये तो उल्लास के बजाय मन को तनाव से भर देती है. कुछ देर ‘सत्यजित रे’ की पुस्तक पढ़ी. फिर नन्हा स्कूल से आ गया और दोपहर बाद की दिनचर्या में व्यस्त हो गयी. शाम को लाइब्रेरी से ‘अनिता देसाई’ की किताब लायी है. कल घर से पत्र आया है, पर उसके निर्णय के अनुसार जवाब अगले हफ्ते देगी तब तक दूसरा कोई खत भी आ जायेगा. कल शाम जून ने कहा उसे कम्प्यूटर में एक लैटर पैड बना लेना चाहिए पर ऐसा कौन है जिसे वह नियमित पत्र लिखे वह भी अंग्रेजी भाषा में. आज भी गर्मी बहुत है अभी तक उन्होंने टेबल फैन नहीं निकाला है, निकालने पर नैनी का मांगना लाजमी है, उसने कहा है अगले महीने वह पंखा खरीदना चाहती है पर हिसाब लगाकर देखा तो पैसे कम पड़े, उसी में पूरे महीने का खर्च भी चलाना होगा, यूँ उसकी बेटी भी काम करती है. और जून के अनुसार जिसकी जितनी आय होती है उसी में वे गुजारा करना सीख जाते हैं. पर जो समर्थ हैं उन्हें भी तो उनके लिए कुछ सोचना चाहिए. उन्होंने इतना धन लगाकर कम्प्यूटर खरीदा और कुछ सहायता करके पंखा खरीदने में उसकी मदद नहीं कर सकते, जबकि वह काम करके धीरे-धीरे पैसे चुका ही देगी. दीपक चोपड़ा के अनुसार जब इच्छा मन में उत्पन्न हुई है तो उसे ब्रह्मांड की गोद में डाल दो, खुदबखुद पूर्ण हो जाएगी. जैसे आजतक उसके सारे काम होते आए हैं.

कल दिन भर पूसी उसके पीछे-पीछे थी आज सुबह से गायब है, कल जब संगीत कक्षा में गयी तो उसके पीछे वह भी गयी और पूरे समय बाहर बैठी रही. शाम को जून और वह टहलने गये तो पीछे चल दी, जानवरों की भाषा यदि वे समझ पाते तो.. सुबह दो-तीन बार घर में आ गयी और जबरदस्ती उसे बाहर निकाला, मन इतना कठोर हो जाता है जब उसकी इच्छा के विरुद्ध कोई काम हो रहा हो. दीपक चोपड़ा कहते हैं जब लोग किसी व्यक्ति या परिस्थिति से परेशान होकर कुछ व्यक्त करते हैं या महसूस करते हैं तो यह प्रतिक्रिया उनकी भावनाओं के प्रति होती है और भावनाएं किसी अन्य की गलती से उत्पन्न नहीं हो सकती, उनकी जिम्मेदारी सिर्फ उनकी है, कोई कैसा सोचे यह उसी पर निर्भर करता है. there is always a choice and choice is ours. अपने मूड या अपनी मानसिक स्थिति के लिए किसी अन्य को दोषी या ज्जिम्मेदार ठहरने का किसी को कोई हक नहीं है, क्यों कि यह सत्य नहीं है. आज नन्हे की छुट्टी है, उसे कम्प्यूटर पर ढेर सारे काम करने हैं, सुबह से ही योजनायें बना रहा है.
कल शाम दो सखियाँ आयीं उनका नया टीवी देखने, एक को कम्प्यूटर भी देखना था, उसने अपना रेखाचित्र भी पढ़ने को दिया पर उसके छोटे-छोटे अक्षर वह ठीक से पढ़ नहीं पायी, वैसे भी इतने शोर में कोई गम्भीर बात पढ़ना आसान नहीं था. पर उसकी इच्छा पूर्ण हुई अपने आप ही. आज भी बादलों के कारण गर्मी कम है. आज टीवी पर एक कार्यक्रम देखा, जो दीपक चोपड़ा की उसी किताब पर आधारित था जिसमें आज पढ़ा कि उन्हें अपने आस-पास के लोगों व स्थितियों को वे जैसे हों वैसे ही स्वीकार कर लेना चाहिए न कि अपना दृष्टिकोण उनपर थोपना चाहिए. जैसे कि उसने सुबह चाय बनाने के तरीके पर जून को टोका. कल नन्हे ने उसका टाइम टेबल कम्प्यूटर पर बनाया, और उन्होंने एक cd देखा जिसमें ढेरों रेसिपीज थीं. computer is real fun !







Friday, March 21, 2014

नये का आगमन


सुबह के सवा आठ बजे हैं, कुछ देर पहले उसने ध्यान करने का प्रयास किया, पर इस सत्य से सामना हुआ कि जब मन में कोई बात हो तो ध्यान बंट जाता है और सफलता नहीं मिलती. उसके मन में दो विचार चल रहे हैं, पड़ोसिन आज शाम को क्लब में होने वाली क्विज प्रतियोगिता में भाग लेने जा रही है उसे फोन करना है और कल हुई बच्चों की क्विज प्रतियोगिता का परिणाम पूछना है. दूसरी बात यह की उसके मुंह का स्वाद कुछ ठीक नहीं लग रहा कुछ चिपचिपा सा..सम्भवतः पाचन क्रिया ठीक न होने के कारण.

आज इतवार है, जून और नन्हा दोनों कम्प्यूटर के साथ व्यस्त हैं, जून के एक केरेलियन मित्र आये हैं, he is computer wizard ! कल वे क्लब गये, पड़ोसिन की टीम चौथे स्थान पर रही, उसने फोन किया, उसकी आवाज में ख़ुशी थी कुछ पाने का उल्लास ! जून प्रिंटर भी ले आये हैं, और दीपक चोपड़ा की किताब से बनाया उसका कैलेंडर दीवार पर लगाने के लिए तैयार है. she knows, laws are too good to apply ! but she will try.

आज उन्हें तिनसुकिया जाना है, नया टीवी खरीदने, कल पुराना ओनिडा सात हजार में बिक गया. कई वर्ष वह उनके साथ रहा, अब किसी और का घर आबाद करेगा. उसे याद है वे पुराने घर में थे, वह उन दिनों घर गयी हुई थी, जून ने पास ही रहने वाले एक दक्षिण भारतीय मित्र से खरीदा था, वे लोग तब कम्पनी छोड़कर जा रहे थे. कल पत्रों के जवाब का दिन है पर पिछले पन्द्रह दिनों से कोई पत्र नहीं आया है, उसने सोचा, अबसे महीने में एक बार ही करेगी पत्र लिखने का काम. आजकल न किसी के पास पत्र का जवाब देने का समय है और न ही पत्र पढने का. माँ-पापा भी उम्र के साथ-साथ सांसारिक मोह-माया से मुक्त हो रहे हैं. कल शाम वे क्लब नहीं गये, नन्हे को कम्प्यूटर का आकर्षण था और उसे इतवार की शाम का भारीपन लग रहा था. सुबह उठी तो फिर उससे पहले एक स्वप्न चल रहा था, मन एक मिनट के लिए भी शांत नहीं बैठता, नींद में भी नहीं, शायद यही जीवन है. मन का यही काम है कुछ न कुछ बुनते रहना. ध्यान करने बैठी तो वॉयल के कपड़े पर कढ़ाई दिखने लगी. creative mind की यही तो पहचान है. अज नन्हे का तीसरा टेस्ट है, उसे उनसे ज्यादा नये टीवी का इंतजार है.

फिलिप्स का नया टीवी बहुत अच्छा है, देखने में भी और चलाने में भी, आवाज काफी जोरदार है और तस्वीर को कई तरह से एडजस्ट कर सकते हैं, सारा काम रिमोट से होता है. कल वे नन्हे के आने से पहले घर पहुंच गये थे पर टीवी कार से घर में नहीं लाये थे, पर उससे रहा नहीं गया और उसके खाना खाने से पहले ही उन्होंने टीवी चलाया, शाम भर घर में ही रहे, वैसे भी गर्मी बहुत थी. नन्हा पढ़ाई करता रहा वह सुनती रही जून विश्राम करते रहे.कड़कती धूप में टूटी फूटी सडक पर गाड़ी चलाना इतना आसान नहीं था, वापसी में कह रहे थे कि गाड़ी बदलने का वक्त भी आ गया है, शायद इसी वर्ष वे नई कार भी ले लें. आज भी धूप तेज है, माली लॉन में घास काट रहा है, कल कहा था उसने कि सुबह पांच बजे आयेगा ताकि ठंडे वातावरण में ही काम खत्म कर  दे पर शायद उसकी नींद नहीं खुली होगी. कल उसने अपने जन्मदिन के लिए स्वयं ही एक उपहार लिया, नील रंग की तांत की साड़ी ! नन्हे के लिए नाईट ड्रेस और टीवी जो जून ने काफी देखभाल के बाद और मोलभाव के बाद ही लिया. एक दिन एक मित्र के यहाँ बैठे-बैठे ही उनके मन में विचार आया कि पुराना अब निकाल देना चाहिए, हर कार्य पहले एक विचार ही तो होता है.



Wednesday, January 29, 2014

हावड़ा ब्रिज - कोलकाता की शान


आज उनका टीवी खराब हो गया, टीवी के बिना दिन जैसा भी गुजरे रोज से काफी अलग होगा. टीवी उनके जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बन गया है. जून के अनुसार शाम तक ठीक हो जायेगा. कल शाम मीटिंग थी, क्लब में कुछ खा लिया, आठ बजे जब जून और नन्हा भोजन कर रहे थे, उसे जरा भी भूख नहीं थी, दस बजे उसे भूख लगी, उस समय कुछ खाना ठीक नहीं है यह सोचकर नहीं खाया, पर खाली पेट नींद काफी देर तक नहीं आ रही थी.

अब धूप में पहले की सी तेजी नहीं है. सुबह नाश्ता करने के बाद उसने नन्हे के लिए पेपर की छोटी-छोटी कारें बनायीं जो हावड़ा ब्रिज पर खड़ी की जाएँगी. उसका प्रोजेक्ट लगभग पूरा हो गया है, जिसे पिछले कई दिनों से वह और उसके मित्र मिलकर बना रहे थे. आज दो अक्तूबर है, बापू की १२८वी जयंती ! दोपहर को दूरदर्शन पर ‘गाँधी से महात्मा’, श्याम बेनेगल की फिल्म ‘Making of Mahatma’ का हिंदी रूपांतरण देखा. गाँधी दिल के और करीब हो गये. आज क्लब में कार्यक्रम है पर इतने बड़े महापुरुष के जीवन पर फिल्म देखने के बाद कुछ और देखना शेष नहीं रह जाता. बापू के पुत्रों को विशेषकर हरिदास को उनसे शिकायत रही, वैसे कुछ न कुछ शिकायत हर बेटे को अपने पिता से रहती ही है.

कुछ देर पहले छोटी बहन से फोन पर बात की, उसने अभी तक नवजात शिशु का नाम नहीं सोचा है, ३.४ केजी की गोरी सी बच्ची का नाम जो बड़ी बहन से कुछ मिलता-जुलता भी होना चाहिए. जून आज तिनसुकिया गये हैं, वापसी की टिकट के लिए, नहीं मिलने पर जाने की टिकट भी कैंसिल कर देंगे, सुनने पर यह वाक्य उसे कठोर लगा किन्तु यथार्थ यही है. आजकल बिना रिजर्वेशन के सफर करना उनके लिए असम्भव है, अपनी सुविधा की कीमत पर परिवार के साथ त्योहार में शामिल नहीं हुआ जा सकता. यह आधुनिक समाज की देन ही है जिसने एक ओर प्रगति की है दूसरी ओर कठिनाइयां भी बढ़ा दी हैं. घर से इतनी दूर रहने का खामियाजा ही समझ लें. पर यहाँ रहना उसे सदा से ही भाता रहा है और भाता रहेगा जब तक भी यहाँ रहना पड़े.

उसकी एक सखी बीएड करना चाह रही है, और उससे नोट्स मांग रही है. उसे आश्चर्य हुआ ऐसा कहते हुए वह बहुत निरीह लग रही थी, पहले कुछ ज्यादा ही उत्साहित थी. यही तो जिन्दगी है, जो कभी सिखाती है कभी झकझोरती है. हर दिन एक नया संदेश लेकर आता है. अगर कोई ध्यान से देखे और समझे तो !

कल सुबह जून को तिनसुकिया में कम्प्यूटर लिंक न होने के कारण वापस लौटना पड़ा पर उनके मित्र के छोटे भाई( जो एक ट्रेवल एजेंट बन गया है) ने टिकट ले ली है, उन्हें ख़ुशी तो हुई पर छोटी ननद उसी समय ससुराल जा रही है, उससे शायद मिलना न हो. शाम को वे टहलने गये मौसम में एक ठंडक सी आ गयी है और हरसिंगार के फूलों की महक भी. उनके हरसिंगार में अभी कलियाँ ही आई हैं. जून ने उस दिन गुलाबों की कटिंग भी कर दी है, अगले हफ्ते वे गोबर भी डलवा देंगे. कल शाम बल्कि रात को ही पड़ोसिन ने कागज की कारें बनाने के लिए कहा, पर उसके पास समय नहीं था, मना करने में अच्छा नहीं लग रहा था, पर किया, it means she is learning to be assertive, अपने वश से बाहर के काम को भी पहले वह ले लेती थी फिर चाहे कितना परेशान होना पड़े. जून अभी आने वाले हैं, उन्हें आज अस्पताल भी जाना है, उसके कान में हवा की कुछ खुसुर-पुसुर सी लग रही थी, आज सुबह से ठीक है, फिर भी कहा है न कि छोटे रोग की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए.  




Thursday, December 19, 2013

लिखे जो खत तुझे


आज भी मौसम मेहरबान है, उनके उस महान स्वीपर ने आज कुछ ढंग से सफाई की है, नैनी ने किचन में रैक्स साफ की, उसका काम सुपरविजन का है. आज शाम को एक मित्र परिवार यात्रा पर जा रहा है, जाने से पहले यहाँ आएंगे, भोजन के लिए और फिर जून उन्हें विदा करने बस स्टैंड भी जायेंगे, ऐसी परम्परा सी बन गयी है, जो वे सदा निभाते हैं अन्यों की तरह सुविधा का ख्याल रखकर नहीं. खैर, उसे अपने मन में किसी प्रकार का क्षोभ, झुंझलाहट देखकर आश्चर्य क्यों नहीं होता, इस बात का दुःख है. बेचैन है यह देखकर बेचैनी भी तो होनी चाहिये न, अपनी आदत ही बना ली है परेशान होने की और...फिर इन बातों पर बजाय नाराज होने के मुस्कुराने की, यानि मर्ज हद से आगे बढ़ चुका है.

आज जून का दफ्तर बंद है, अल्फ़ा ने बंद कॉल किया है बारह घंटों का. सुबह न ही कोई पैदल न साइकिल पर जाता दिखाई दिया. आज यहाँ प्रधानमन्त्री आ रहे हैं, उनके स्वागत का यह तरीका अजीब है. डिब्रूगढ़ तक रेलवे लाइन ब्रॉड गेज हो गयी है, उसी का उद्घाटन करेंगे, तथा उत्तर भारत के अन्य प्रदेशों में भी जायेंगे. देवेगौडा जी भी आये थे, ६००० करोड़ रुपयों की योजनायें शुरू करने का आश्वासन देकर गये थे, पता नहीं कितनों में काम शुरू हुआ भी है या नहीं..इन राजनीतिज्ञों पर भरोसा करना बेहद मुश्किल है. कल शाम उसने वर्षों पूर्व मंगनी के बाद दोनों के लिखे कुछ पत्र पढ़े, आनन्द आया, मन फूल सा हल्का हो गया, जिन्दगी के तनाव भरे क्षणों में ऐसे पत्र रहबर का काम करते हैं. प्रेम में सराबोर ऐसे मधुर पत्र...कि पढ़ने के बाद घंटों मन एक खुमारी में डूबा रहा, तब मन कितना विश्वासपूर्ण था भविष्य के प्रति और वे सारी बातें जो उन्होंने तब सोची थीं सच हुई हैं. कल इतवार था, इतवार की तरह ही बिताया, सुबह से दोपहर तक स्नान, सफाई, लंच नन्हे की पसंद का था, जून कस्टर्ड के लिए tinned फ्रूट्स भी लाये थे. नन्हे को रोज पांच नये शब्द सिखाना भी शुरू किया है कल से.

वर्षा का एक दिन ! कल रात्रि आये तूफान से बंगलादेश में जान-माल का काफी नुकसान हुआ, उसी का असर है कि यहाँ भी कल से लगातार वर्षा हो रही है. सुबह पौने छह बजे नींद खुली एक स्वप्न से.. जिसमें देर शाम तक वह घर से बाहर है एक ऐसी गली में जहां मार-पिटाई रोज का मंजर है. एक बाबा जी भी कुछ दूर पर रहते हैं, पर लगता है उन्हें अपने शिष्यों से ही फुर्सत नहीं मिलती. नाश्ते में उसने आज परांठे बनाये पर उसका असर अभी तक है, जून को भी शायद ऐसा लग रहा हो. नैनी की शक्ल देखकर लग रहा था, जैसे उसके पेट में दर्द है, और स्वीपर का काम तो वैसे ही माशा अल्लाह ही, न बाहर ड्राइववे पर झाड़ू लगाया है न भीतर कारपेट पर, बाहर तो खैर अब हवा और पानी ही सफाई करेंगे, भीतर वह खुद कर सकती है. नन्हा एक घंटा टीवी देख चुका है, आधा घंटा और देखेगा, जब वे छोटे थे तो ज्यादा वक्त घर के बाहर खेलने में गुजरता था आजकल के बच्चे टीवी के सामने बैठ-बैठे ही बड़े हो जाते हैं. एक परिचिता का फोन आया, उनका बेटा आज दोपहर फिर पढ़ने आएगा, सो ले देकर बात यहाँ पर अटकी है कि इतनी सारी  बातों के बाद बेचारा...दिल जाये तो जाये कहां ?


Wednesday, July 3, 2013

क्लोज़अप अन्ताक्षरी



ऐसा लगता है अब से उसे लिखने का वक्त दोपहर को ही मिलेगा, सुबहें स्टार टीवी, जी टीवी और पी टीवी के कारण कितनी व्यस्त हो गयी हैं. समय का पता ही नहीं चलता कहाँ उड़ जाता है. इस समय उसका दिल टीवी में है पर वह जानती है, यह ठीक नहीं है, कोई अपने काम काज ही भुला बैठे किसी टीवी कार्यक्रम के कारण, यहाँ तक कि  नन्हा भी इस छोटी सी मगर बेहद जरूरी बात को समझता है, जून भी कुछ ज्यादा उत्सुक नहीं दीखते, बस वही है जिसके पास कुछ ज्यादा समय है.

आज शनिवार है, ग्यारह बज गये हैं, जून अभी तक नहीं आए हैं. उसने घर की साप्ताहिक सफाई करवाई, अभी कुछ देर पहले स्नान किया, कुछ देर प्रार्थना की और अब कल का अख़बार व डायरी लेकर बैठी है. कल शाम टीवी के साथ थी सो वे अख़बार नहीं पढ़ सके, शाम को एक मित्र परिवार आया और उन्होंने क्लोजअप अन्ताक्षरी देखी, अच्छा लगा यह कार्यक्रम. पर आज सुबह से उसने टीवी नहीं चलाया है, क्योंकि शनिवार है और शाम को वे देर तक देखने ही वाले हैं इसीलिए.

अगस्त का पहला दिन बेहद गर्म है, बिना पंखे के दो मिनट भी रहने से शरीर पसीने से भीग जाता है. इस वर्ष गर्मी की शुरुआत काफी देर से हुई है. ग्यारह बजने बजने को हैं, उसने लंच बना लिया है, जून आज थर्मस में चाय ले गये हैं, उनके ऑफिस में टी बॉय को लेकर कुछ झमेला चल रहा है, परसों शाम को जब वे मित्र की प्रतीक्षा कर रहे थे उन्होंने वे सब बातें उसे बतायीं.

और आज ग्यारह अगस्त आ गया, मौसम आज भीगा-भीगा सा है. कल रात से वर्षा हो रही है, पिछले दिनों लगभग रोज ही लिखने का ख्याल मन में आया पर शुरू के तीन-चार दिन सफाई में निकल गये, फिर उसका स्वास्थ्य ठीक नहीं था, एक दिन सुबह दो पड़ोसिनें मिलने आ गयीं. कल वे तिनसुकिया गये, वह कुछ कपड़े खरीदने की सोच रह थी, एक नीली टी शर्ट जून के लिए, नाईट सूट नन्हे के लिए और गाउन, सलवार कमीज अपने लिए. पर जून की पसंद की टी शर्ट नहीं मिली, न ही गुसी की नाईट ड्रेस नन्हे के लिए. कल उसने इतने वर्षों में पहली बार फोन से घर बात की. आज सुबह से ही मन शांत है, उठते ही ‘जागरण’ सुना, जागरण के नाम से ही दीदी की याद आ जाती है. उन्हें खत भी लिखना है. इन्सान को आईने की तरह होना चाहिए, आईना सब देखता है और दिखाता है पर कुछ पकड़ता नहीं, संसार में रहकर भी संसार से अलग. आज शाम को एक मित्र परिवार भी आ रहा है, उनसे मिलने के लिए भी शांत होना जरूरी है, पता नहीं वे किस मूड में होंगे, उसने प्रार्थना की, ईश्वर उन्हें खुशियाँ दे. नन्हे का आज चौथा यूनिट टेस्ट है, परसों शाम वे किन्ही मित्र के यहाँ थे तो वह ठीक महसूस नहीं कर रहा था, शायद बच्चे घर की महक को ज्यादा महसूस कर पाते हों. कल सुबह उठा तो ठीक था.


Wednesday, August 1, 2012

कॉसमॉस के अंकुर


कल रात वह शायद गहरी नींद में थी, नन्हा एक बार कुनमुनाया, उसका बिस्तर गीला था, पर उसके कपड़े व चादर नहीं बदले और कुछ देर बाद जब वह रोया तो देखा उसकी नाक से पानी बह रहा है और खिड़की से आती ठंडी हवा व गीले कपड़ों के कारण वह थोड़ा परेशान है. विक्स लगाकर उन्होंने उसे सूखे में सुलाया, अभी तक तो सोया है, ईश्वर उसे स्वस्थ रखे. जुकाम का रोग उससे दूर ही रहे. उसने शांति से सोये नन्हे को देखकर मन ही मन दुआ की. कल वर्षा की कुछ बूंदें भी उस पर पडीं दो तीन बार, सभी बातों का मिला-जुला असर हुआ लगता है. महरी अब आयी है काम पर, कल क्यों नहीं आयी यह पूछना व्यर्थ है फिर भी पूछना तो होगा ही. और कल उनका टीवी फिर से बोलने लगा बहुत अच्छी तस्वीर भी आती है एकदम साफ, कभी कभी डिस्टर्बेन्स होती है वह संचार केन्द्र से ही होती होगी. जून और उसके मित्रों ने बहुत मेहनत से लगाया एंटीना. कॉसमॉस के अंकुर तो फूट आये हैं पर जीनिया के अभी नहीं, शायद एक दो दिन में निकल आयें.

कल उसकी अंगुली में एक कांटा चुभ गया था जो आज सुबह ऑफिस जाने से पूर्व जून ने निकाल दिया इसी तरह वह हर पल उसकी सहायता को तत्पर रहते हैं, हर छोटे-बड़े कार्य में. गेट की आवाज हुई तो उसे लगा आया आयी है या स्वीपर, पर पड़ोस का गेट खुला था. अभी तक उसने उस घर में आयी नई दुल्हन को नहीं देखा है. कल घर से एक और पत्र आया, पर जिस ट्रंक का वे इंतजार कर रहे हैं, उसके बारे में इस बार भी कुछ भी नहीं लिखा. नन्हा कल दिन भर भी जुकाम से परेशान रहा, अभी सो कर नहीं उठा है. कल शाम टीवी पर रिसेप्शन ठीक नहीं था बल्कि कुछ आ ही नहीं रहा था, सो वे नाटक तो देख ही नहीं पाए सीरियल भी आधा ही देखा. सुप्रिया पाठक पहले उसे अच्छी लगती थी, अब उतनी नहीं, उसकी आवाज भी उसे पसंद नहीं है. ज्ञानयोग से कर्मयोग श्रेष्ठ है, पाँचवा अध्याय पढ़ा आज, पढ़ते समय कभी-कभी मन पता नहीं कहाँ-कहाँ भटक जाता है, फिर से पढ़ती है वह उन लाइनों को.  

Tuesday, May 8, 2012

आम की चटनी


कल वह मेडिकल चेकअप के लिये गयी थी. सभी कुछ सामान्य है, डॉक्टर ने ऐसा बताया. पर ढेर सारी दवाएं दे दी हैं. कितने महीने हो गए हैं दवाएं खाते, टॉनिक व विटामिन के कैप्सूल हैं पर उसे अच्छा नहीं लगता लाल-पीली गोलियाँ निगलना. माँ का पत्र आया था, सड़क दुर्घटना में मौसेरे भाई की अकाल मृत्यु की खबर थी. भाभी व बच्चों की सूरतें बार-बार सामने आती रहीं, कभी-कभी मृत्यु कितनी कठोर हो जाती है.
आज सुबह पानी नदारद था, गर्म पानी वाले नल में थोड़ा पानी था सो गर्मी के बावजूद उसे उसी पानी से नहाना पड़ा. सुबह ठंडक थी, वह कुछ देर घर के बाहर टहलती रही, जून सो रहा था. आजकल वह बहुत हौले-हौले बात करता है, उससे या उसके माध्यम से आने वाले मेहमान से. अब उसे बैठ कर फूल काढ़ने में दिक्कत होती है. यहाँ टीवी को चलाने के लिये बूस्टर लगाना पड़ता है, कल ही वह लाया है इतने दिनों से शांत पड़ा टीवी शायद अब बोलने लगे.
जून के आने का समय होने को है. आते ही वह उसका हाल पूछता है, कल बहुत दिनों बाद वह मोटरसाइकिल पर बैठी, जून ने बहुत धीरे-धीरे चलाई ताकि उसे कोई परेशानी न हो. कल वह अम्बियाँ लाया था जिसकी चटनी बनाने जब वह पड़ोस में गयी तो वह टीवी का एंटीना लगाने के लिये पाइप ले आया. एक-डेढ़ घंटे के प्रयास के बाद आखिर एंटीना व बूस्टर दोनों लग गए और इतने दिनों बाद टीवी देखा, परिणाम बहुत अच्छा तो नहीं था क्योंकि पाइप की लम्बाई कुछ कम थी.


Wednesday, April 18, 2012

राष्ट्रीय युवा दिवस


भारत के भूतपूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री की बीसवीं पुण्य तिथि. दोपहर को नूना ने टीवी पर एक फिल्म में उनकी आवाज सुनी. अमोल पालेकर का एक कार्यक्रम देखा “आ बैल मुझे मार”, शाम को देखा एक नाटक, ‘काठ की गाड़ी’ जो बहुत ही मार्मिक था, उदासी भरा एक गीत हो जैसे. अपने सामने किसी ऐसे रोगी को देखकर क्या वह सामान्य रह पायेगी उसने सोचा. कौन जाने ? फिर भी कई भ्रम तो टूटते हैं ऐसे नाटक देखकर. आज जून ने भी टीवी देखा होगा, वह जरूर उस वक्त उसे याद कर रहा होगा, वह कैसे दिन बिताता होगा, वह उसे एक बार देखना चाहती थी पर कैसे? उसने आज खत लिखा होगा जो अगले हफ्ते किसी दिन मिलेगा. दवा लेनी आज भी शुरू नहीं की, अब कल से अवश्य लेनी है. कल घर में दोसा बनेगा, शकुंतला से दाल-चावल पिसवाये हैं आज. पिता भी आज घर पर थे, नवनीत का दीवाली विशेषांक उन्हें अच्छा लगा.
रविवार को वे दिन भर साथ रहा करते थे, उसने सुबह उठते ही सोचा, दोसे ठीक वैसे ही बनाये जैसे वह सीखकर आयी थी दक्षिण भारतीय मित्र से. सुबह हल्की वर्षा हुई, काफ़ी ठंड थी, वह होता तो कहता शाल लेकर बैठो. आज उसे वापस जाना है. आज राष्ट्रीय युवा दिवस है विवेकानंद का जन्म दिवस...
  

Tuesday, April 17, 2012

भुनी मूंगफली व शकरकंदी


आज जून को वाराणसी के लिये रवाना होना था, इस समय वह दिल्ली रेलवे स्टेशन पर होगा या ट्रेन में,  उसने सोचा. कल शाम को वह बहुत उदास थी, एक दिन मिलकर सब कह देगी. वह भी तो ऐसा ही अनुभव करता होगा. दिन में कुछ देर वह स्वेटर बुना जो माँ बना रही हैं. कुछ देर को सोयी स्वप्न में उसे देखा, कल रात भी देखा था और अब रोज ही देखेगी. नाईट सूट सिलने दे दिया, घर पर ठीक नहीं भी सिल सकता था. आज से आयरन टेबलेट लेनी थीं, पर नहीं लीं. अब कल से शुरू करनी हैं. बड़ी बहन व छोटे भाई को पत्र लिखे. उसे भी पत्र लिखना है जो इन महीनों में, जब वे दूर हैं, उसका सबसे प्रिय कार्य होगा. दूर तो मात्र भौतिक रूप से होंगे, मन से तो पहले से भी निकट होंगे.
एक दिन और बीत गया, वह सुबह ही घर पहुँच गया होगा. इस समय वह भी टीवी पर ‘यह जो है जिंदगी’ देख रहा होगा. सुबह वह सात बजे उठ गयी थी पर उसके पूर्व तीन बजे से ही वह जाग रही थी. स्वप्न देखा, उसे भी देखा, पर वे उदास थे. आज फिर वह उसे देखेगी. आज देवर का भेजा सुंदर कार्ड मिला. माँ के साथ बाजार भी गयी, दर्जी को एक लाल सूट सिलने को दिया. भुनी हुई मूंगफली व शकरकंदी खरीदी. उसने सोचा कि जून ने उसे खत लिखा होगा, और वह भी लिखने बैठ गयी.