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Friday, November 29, 2019

बुद्धं शरणं गच्छामि




कल का पन्ना कोरा ही रह गया है, स्वास्थ्य ठीक न हो तो उत्पादक क्षमता कितनी घट जाती है. डायरी में आज भी कल की तरह नासिका में विचित्र सी गंध आ रही है . कल दिन भर मन में अनुत्तरित प्रश्न चलते रहे, आज सुबह तक सन्देह का सा वातावरण था. कोई स्वास्थ्य संबन्धी समस्या है या कोई रहस्य है सृष्टि का. आज दोपहर कोर्स का अंतिम दिन था, सेंटर गयी, वहाँ का सकारात्मक वातावरण तथा टीचर के प्रेरणादायक वचन सुनकर मन पुनः आह्लाद से भर गया है. जो भी  है परमात्मा का प्रसाद है, आज से पूर्व किसी भी स्वास्थ्य संबंधित समस्या ने उसे परेशान नहीं किया, पर गंध आने पर भविष्य में कोई समस्या हो सकती है, इसी भय का असर था कि मन घबरा गया था. कल किसने देखा है, जो ‘है’ उसी पर ध्यान देना है. जो नहीं है उसे महत्व नहीं देना है. गुरु का ज्ञान भी उसी वक्त काम आता है जब वे शरणागत हो जाते हैं उनके हाथ में कुछ नहीं है, जो भी जब भी होगा उसका सामना वे करेंगे, यह भरोसा गुरु उन्हें देता है. गुरूजी कहते हैं, परमात्मा, आत्मा और गुरु में कोई भेद नहीं है. उसका जीवन किसी के काम आये तभी सार्थक होगा. जो काम वह भली प्रकार कर सकती है, उसी के द्वारा संसार के किसी काम आ सकती है. उसने सोचा कल स्कूल जाना है, एक नए सन्देश के साथ, फिर कैलेंडर पर नजर गयी, कल बुद्ध पूर्णिमा है. वह लिख रही थी कि ड्राइवर का फोन आया, उसे दस किलो अख़बार की रद्दी चाहिए, शाम को ले जायेगा. छोटे भाई ने आज छोटी बुआ से वीडियो कॉल पर बात करायी, उनका सुंदर घर भी देखा. कुछ वर्ष अस्वस्थ रहने के बाद अब वह पुनः ठीक हो रही हैं. 

नौ बजने वाले हैं आज बुद्ध पूर्णिमा है. भगवान बुद्ध  के जीवन पर आधारित एक धारावाहिक  भी है यू-ट्यूब पर, दो एपिसोड देखे. सभी भाग देखेगी एक एक कर ! ब्लॉग पर उनके बारे में दो पोस्ट्स लिखीं, उनका जीवन आज भी एक मिसाल है, अनोखी थी उनकी तपस्या और अद्धभुत था उनका ज्ञान.  आनन्द ने उनके उनकर वचनों को संग्रहित किया. काश्यप उनके प्रिय शिष्य थे. रात वे समय पर सोये सो सुबह भी सहजता से उठे. माली से कुछ काम करवाना था, बुलवाया पर उसके सर में पीड़ा थी, शायद ज्यादा नशा करने के कारण. योग कक्षा में आज बच्चों को आनंद पूर्वक बड़ा करने के कुछ उपाय बताये, जो उस किताब में पढ़े थे. नैनी को भी बताना है, वह अपने बेटे को बहुत डांटती है. विचित्र गन्ध विदा हो गयी, इस समय नासिका से भीनी-भीनी मधुर गन्ध आ रही है. परमात्मा की सृष्टि में सब कुछ कितना रहस्यमय है. आज दोपहर डॉक्टर के पास भी गयी थी, उसने एक फ्री एयर स्प्रे दिया है, दिन में एक ही बार डालना है. एक्स रे  भी किया. आज क्लब में ‘अक्टूबर’ फिल्म थी. जून गए थे. 

परसों वे शिवसागर गए थे, कल तीन कविताएं लिखीं, एक परसों के पन्ने पर है, आशा और विश्वास से भरे शब्द.. यदि पीड़ा न हो जीवन में तो सुख का सम्मान भला कौन करेगा. इन कविताओं को एक-एक कर ब्लॉग पर प्रकाशित करेगी, हो सकता है उसके शब्द किसी आकुल उर को शांति की एक छांव दे जाएँ. इस समय रात्रि के आठ बजे हैं अभी-अभी छोटे भाई का फोन आया. आज सुबह छह बजे उसे कोई उठाने आया था, किन्हीं हाथों ने उसे स्पर्श किया और थपकी देकर कहा भोई, उठो, उठो ! उसने आवाज भी स्पष्ट सुनी और वह सुबह से ही आश्चर्य विमुग्ध है. परमात्मा उनके आस-पास है, वह कभी उनसे दूर नहीं होता, वे ही अपनी व्यर्थ की उलझनों में उसे भुला बैठते हैं. टीवी पर तेनालीराम की चतुराई की कहानी आ रही है. 

Saturday, July 13, 2019

सेमल के फूल



पिछले पांच दिन कुछ नहीं लिखा, कारण क्या हो सकता है सिवाय प्रमाद के. इस समय रात्रि के आठ बजे हैं. जून बंगलूरू में हैं, परसों वापस आ रहे हैं. आज दिन भर कुछ नहीं सुना, अब और कुछ सुनने की आवश्यकता नहीं है, भीतर के मौन को ही सुनना है. निरंतर भीतर एक स्मृति बनी रहती है. एक अचल मौन का भान होता है. कानों में कोई रुनझुन बजती है और विचार दूर प्रतीत होते हैं. उनके पास परमात्मा का दिया बहुत कुछ है. उसके लिए कृतज्ञ होना है. जीवन में चुनौतियाँ तो आने ही वाली हैं, उनका सामना करना है, बचना या भागना नहीं है उनसे. हर दिन कोई न कोई सृजनात्मक कार्य करना है और अन्यों का सहयोग भी. यदि किसी का हाथ नहीं बंटा पाए तो सोचना है किसी को कोई दुःख तो नहीं दिया. यदि स्वस्थ हुए तो भी परमात्मा का धन्यवाद करना है और अगर अस्वस्थ भी हो गये तो भी यही सोचना है कि हमारी मृत्यु तो नहीं हो गयी, अभी श्वासें शेष हैं तो मुक्ति की सम्भावना है !  

कल रात स्वप्न में बूढ़े माली को देखा, कह रहा था, साहब ने उसका अपमान किया था, उससे नाराज नहीं था. इसलिए बगीचे से सब्जी तोड़कर नहीं देगा. स्वप्नों की दुनिया जागृत से कितनी भिन्न होती है. हर बार स्वप्न देखने वाला अलग ही होता है, कोई दो रात लगातार धारावाहिक सपने नहीं आते. कल शाम दायीं तरफ की पड़ोसिन के यहाँ भजन है, वे जायेंगे. बाद में रात्रि भोजन भी वहीं होगा. दोपहर को अगले हफ्ते डिब्रूगढ़ में होने वाली मृणाल ज्योति की मीट के लिए कुछ पढ़ा, अभी दो-तीन दिन और पढ़ना होगा. उसे एक भाषण में सहायता करनी है. दीदी का फोन आया सुबह, जीजाजी का स्वास्थ्य अब ठीक है. उससे पूर्व एक मराठी सखी का नया घर देखने गयी, उसके माता-पिता से मिली. गणेश की मूर्ति ले गयी थी, उन्हें अच्छी लगी. एक अन्य सखी के यहाँ गयी, और बड़े आराम से उससे बातें कीं. उसके प्रति जो भी दुविधा मन में थी, अब नष्ट हो गयी है. अब इस पूरे संसार में कोई नहीं है जो उससे उद्ग्विन हो और जिससे वह उद्ग्विन हो. सारा संसार अपना घर बन गया है, गुरूजी का ज्ञान सफल हो रहा है. सुबह सेमल के वृक्ष की फोटो भी उतारी. कितने सुंदर फूल होते हैं सेमल के. इतने वर्षों में पहली बार इस बड़े वृक्ष के फूल देखे, पहले कई बार सेमल के फाहे देखे थे हवा में उड़ते हुए. जून का फोन आया अभी-अभी, उन्होंने अकेले ही भोजन किया. नन्हा फ्लाइट में है, रात को साढ़े बारह बजे तक आएगा. सोनू भी ग्यारह बजे तक आएगी. आज पिताजी से बात नहीं हुई. वह बंगलूरू जाने के लिए तैयार हैं. उनका नया घर जब तैयार हो जायेगा, वह वहाँ जायेंगे.

कल दिन में फिर कुछ नहीं लिखा, रात नींद नहीं आ रही थी. सुमिरन करने लगी फिर पता ही नहीं चला, कब नींद आ गयी. स्वप्न देखा जिसमें मन परेशान हुआ तो झट स्मृति आ गयी, यह स्वप्न है. किसी ने कहा, 'अब वह नहीं भटकेगी'. स्वप्न में भी संदेश सुन सकी. जो जागृत, स्वप्न, सुषुप्ति तथा समाधि का आधार है, उसे वे भुला देते हैं. जो उनको राह दिखाने वाला है, पथ प्रदर्शक है. जून कल वापस आ रहे हैं. उन्होंने ढेर सारे काम निपटाए आज. नये घर के लिए कितने ही जॉब शेष थे. वह आज आँख के अस्पताल भी गये थे, उनकी दूसरी आँख के आपरेशन के लिए भी डाक्टर ने कह दिया है. आज उनके दफ्तर का ड्राइवर घर आकर गाड़ी धोने के लिए कहने लगा, फिर धोयी, खुली जगह और खुला पानी देखकर उसे अच्छा लगता होगा. शाम को नैनी ने कहा उसका राशिफल पढ़कर सुनाये. उसकी राशि मीन है. वह उदास थी. उसके माता-पिता भी नहीं हैं, इस बात को लेकर आँसूं भी बहाये. मानव का मन कितना नाजुक होता है, एक फूल से भी कोमल. उसे समझाया पर इस दुःख का इलाज तो खुद ही ढूँढना होता है. थोड़ी ही देर में वह सामान्य भी हो गयी. बगीचे से फूल गोभी, शलजम, पत्ता गोभी, लाइ साग आदि लाकर दिए. काफ़ी दिनों से सब्जी नहीं लाये हैं वे बाजार से, काम चल ही रहा है. उसकी सास ने सहजन के फूल भी लाकर दिए, उसके दायें हाथ का अगूँठा कितना सूजा हुआ था. अपने छोटे-मोटे दर्द को ये लोग सहते ही रहते हैं. पिताजी से बात हुई आज. छोटी भाभी ने पकौड़े बनाये थे शाम को, आलू के पकौड़े. पिछले दिनों से अक्सर उसे भिन्न-भिन्न तरह की गंधों का अनुभव होता रहा है. हलवा बनने की गंध, मीठी सी गंध, कभी घी की गंध, कभी विचित्र सी गंध. कल-परसों से मुख का स्वाद भी कुछ अलग सा है. जीवन एक रहस्य है और वह रहस्य गहराता ही जा रहा है. आज सुबह भी प्रातः भ्रमण से वापस आकर कुछ शब्द लिखे, जिन्हें दोपहर को ब्लॉग में लिखा. परमात्मा कितना सृजन शील है, इसलिए ही उसे कवि कहते हैं. आज योग कक्षा में उपस्थिति ज्यादा थी. शिव के नाम का जप किया और उनके 'चन्द्रशेखर' नाम पर चिन्तन भी.

Wednesday, February 27, 2019

हवा में गंध



आज आकाश में बादल हैं, शायद शाम तक वर्षा हो, हवा में एक अजीब तरह की गंध है, यहाँ के अस्सी प्रतिशत लोग खेती से जुड़े कार्यों में रत हैं. साधन न होने के कारण खेती के लिए उपलब्ध जमीन के मात्र छह प्रतिशत पर ही खेती की जा रही है. कल रात को किसी पशु के रोने की आवाज आ रही थी, जिसे सुनकर बचपन में मेहतरों के मोहल्ले से आती करूण पुकार स्मरण हो आयी. काश इन्हें भी शाकाहारी भोजन व्यवस्था के बारे में जानकारी देने वाला कोई संत मिले. चर्च में इनकी आस्था है पर वहाँ न नशे के खिलाफ कुछ कहा जाता है न मांसाहार के ही. डेढ़ वर्ष पहले तक यह शुष्क राज्य था, पर अब सरकारी दुकानें हैं तथा हर व्यक्ति को कार्ड के आधार पर नियत मात्रा में मादक पेय दिया जाता है.

गेस्टहाउस के कर्मचारियों ने जो वहाँ पिछले कुछ वर्षों से रह रहे हैं कुछ रोचक बातें बतायीं. मिजोरम में संयुक्त परिवार होते हैं. परिवार के बड़े पुत्र को जायदाद नहीं मिलती, बल्कि सबसे छोटे पुत्र को परिवार का उत्तराधिकारी बनाया जाता है. विवाह और तलाक के मामलों में भी चर्च का कानून ही चलता है. माता-पिता के न रहने पर अथवा असमर्थ होने पर बच्चों की देखभाल का जिम्मा भी चर्च का होता है. क्रिसमस के अलावा छरपार कुट मनाया जाता है, उत्सव के लिए मिजो शब्द कुट है. यहाँ कोई पिक्चर हॉल नहीं है. हिंदी फ़िल्में यहाँ नहीं दिखाई जातीं. टीवी पर आने वाले धारावाहिक वे मिजो भाषा में डब करके देखते हैं. यहाँ की साक्षरता दर केरल के बाद दूसरे नम्बर पर है. मिजो भाषा की कोई लिपि नहीं है, रोमन भाषा को ही इन्होंने अपनाया है. यहाँ की यात्रा के लिए इनर लाइन परमिट की आवश्यकता होती है. यह छात्रों का एक संगठन YMA बहुत शक्तिशाली है. यह समाज हित के कार्य भी करता है तथा दुर्घटना आदि होने पर आपसी सुलह भी कराता है. यहाँ किसी के घर में प्रवेश करने पर सबसे पहले रसोईघर में प्रवेश होता है, यहीं मेहमानों को बैठाया जाता है. पीने का पानी यहाँ खरीदना पड़ता है. अन्य कामों के लिए ये लोग वर्षा ऋतु में पानी का संग्रह कर लेते हैं, हर घर के नीचे पानी का टैंक होता है. इसी तरह सोलर पावर का भी लगभग सभी लोग इस्तेमाल करते हैं.

सुबह ग्यारह बजे ही उन्होंने वापसी की यात्रा आरम्भ की, एक दिन कोलकाता में रुकना पड़ा क्योंकि डिब्रूगढ़ में अभी तक रात के समय फ्लाईट उतरने की सुविधा नहीं है. अगले दिन सुबह की उड़ान से वे मिजोरम की मधुर स्मृतियों को मन में संजोये हुए वापस घर आ गये.  

Friday, November 16, 2018

फूलों की पौध



शाम के साढ़े पांच बजे हैं. वह ध्यान कक्ष में बैठी है. हल्की सी गंध आ रही है. अब पता नहीं यह गंध कहाँ से आती है, क्यों आती है ? यह कोई रोग है या अस्तित्त्व का प्रसाद...जैसे जो धुन सुनाई देती है वह कोई..सब कुछ एक रहस्य में डूबा हुआ है. आज गैराज से लेकर पीछे के गेट तक का रास्ता बन गया है, काफी टूट-फूट गया था. शायद कल माली कमल कुंड को ठीक करेगा, जिसमें आजकल पानी ठहरता नहीं है, शायद किनारे की दीवार में कोई दरार आ गयी है. नन्हे का फोन जो माह के प्रथम दिन खो गया था, आज मिल गया है. कल उसकी मित्र से बात की. उसने अपने घर में बता दिया है पर वहाँ से कोई जवाब नहीं आया है. आजकल वह नया जॉब भी खोज रही है. जून आज स्टार्टअप इंडिया की मीटिंग में भाग लेने गये हैं, वह कितने सरे कार्यों से जुड़े हुए हैं. उनको इस तरह काम करते देखकर बहुत अच्छा लगता है. आज बहुत दिनों बाद ‘श्रद्धा-सुमन’ ब्लॉग में पोस्ट प्रकाशित की. ‘सिया के राम’ में राम का महाप्रस्थान आज होने वाला है.! सुबह टहलने गयी, ज्ञान, भक्ति तथा कर्मयोग पर चिन्तन करते हुए प्रातः भ्रमण किया. परमात्मा उन्हें कितना प्रेम करता है. उसकी कृपा का अनुभव हर पल होता है ! एक सखी से बात की, छोले-भटूरे बना रही है, दही-बड़े भी जन्मदिन पर !

आज मृणाल ज्योति गयी. महीनों पहले जो स्वप्न देखा था, उसे साकार करने अर्थात टीचर्स के लिए एक वर्कशॉप करने का स्वप्न अंततः सम्पन्न हो गया. जिसका बीज उस दिन पड़ा था जब एक अध्यापक अपनी समस्या लेकर आया था. सभी ने उत्साह से भाग लिया. सुबह पौने नौ बजे वह गयी थी और दोपहर बाद चार बजे लौटी. वापसी में नर्सरी से फूलों की पौध भी ली. कैलेंडुला, कॉसमॉस, डहेलिया, स्टॉक और वरबीना के फूलों से उनका बगीचा अवश्य सुंदर लगेगा. माली कल सुबह लगाएगा. नन्हे से बात हुई, वह अगले हफ्ते जोधपुर व जयपुर जा रहा है, एक मित्र के विवाह में. अगले वर्ष वह भी विवाह बंधन में बंध जायेगा अगर अल्लाह ने चाहा तो..जो भी होगा अच्छा ही होगा. बाल दिवस पर दिगबोई जाना है, विश्व विकलांग दिवस के लिए कुछ स्कूलों में बैज बांटने है. जब वे समाज के लिए कुछ काम करते हैं तो भीतर जिस शांति का अनुभव होता है, वह अनोखी है.

जून का आज शाम को लगभग चार बजे गोहाटी में छोटा सा एक्सीडेंट हो गया. जहाँ पुल समाप्त होता है, वह सड़क पार करने वाले थे, सामने आ रही बस काफी दूर थी, तभी पीछे से एक मोटरसाईकिल आ गयी और वह टकरा कर गिर गये. उनका चश्मा व फोन दोनों टूट गये. कान के पास चोट लगी, एक टांका लगा है तथा पैर में भी चोट आई है घुटने के नीचे. फ्रैक्चर नहीं है, वह किन्हीं अज्ञात लोगों की सहायता से एक क्लीनिक में पहुंचे, जहाँ प्राथमिक चिकित्सा दी गयी, फिर अस्पताल आये. याद नहीं पड़ता पहले कभी उन्हें इस तरह अस्पताल में रहना पड़ा हो. नन्हे से उनकी बात हुई है, वह कल गोहाटी आ रहा है. मना करने कर भी उसका मन नहीं मान रहा. अभी-अभी जून से बात हुई. डाक्टर साहब देखने आये हैं. उनके दो मित्र वहीं बैठे हैं जो रात को वहीं रहने वाले हैं. जीवन में जो भी परेशानी आती है वह कुछ न कुछ सिखाने के लिए ही आती है. उस दिन ग्रे रंग से बात शुरू हुई और उन्होंने ने गोहाटी में उसी रंग की पेंट सिलने दे दी. उसी को लेने गये थे जब यह दुर्घटना हुई. वैसे वह आवाज से ठीक लग रहे हैं. परसों घर आ जायेंगे. कुछ दिन आराम करेंगे तो ठीक हो जायेंगे, चश्मा नया बनवाना पड़ेगा.

Thursday, December 28, 2017

पृथ्वी की गंध


रात्रि के सवा आठ बजे हैं. अभी-अभी वे बाहर से टहल कर आये हैं, रात की रानी की ख़ुशबू से बगीचा महक रहा है, सड़क पर आने-जाने वाले भी पल भर के लिए थम जाते होंगे, एक छोटी सी टहनी कमरे में लाकर रख दी है. पता नहीं धरती के गर्भ में कितनी गंध छुपी है, अनगिनत प्रकार की गंध लिए है पृथ्वी, जिन्हें युगों से वह लुटा रही है. शाम को मूसलाधार पानी बरसा, उन्होंने बरामदे में कुछ देर चहलकदमी की, टहलते हुए वह जून से दिनभर का हाल-चाल ले लेती है, कमरे में आकर बैठकर बातें करने में एक औपचारिकता सी लगती है. अकबर की मृत्यु हो गयी आज के अंक में. उसका पुत्र सलीम ही जहांगीर के नाम से मशहूर हुआ. कल दोपहर को नींद खोलने के लिए अस्तित्त्व ने कितना अच्छा उपाय किया, सचमुच ‘गॉड लव्स फन’ वह एक कार में है, दो सखियाँ भी हैं, ड्राइवर उतर गया है पर कार अपने आप ही चलती जा रही है. आगे जाकर टकराती नहीं है, पीछे लौटती है और तभी नींद खुल जाती है. ईश्वर हर क्षण उसके साथ है, उसका साथ इतना हसीन होगा, कभी नहीं सोचा था. आज से दो हफ्तों के बाद उन्हें लेह जाना है, कल से उसके बारे में कुछ पढ़ेगी. मंझला भाई अस्वस्थ है, अभी देहली में है, उनके जाने तक वह अवश्य ठीक हो जायेगा. बड़े भाई अपनी बिटिया के साथ छोटी बहन के पास विदेश गये हैं.

दोपहर को संडे क्लास में जाने के लिए जैसे ही तैयार होकर बाहर निकली, अचानक तेज वर्षा आरम्भ हो गयी, पूरे चालीस मिनट होती रही, रुकने पर वहाँ पहुँची तो कोई बच्चा नहीं था, या तो वे आकर चले गये अथवा आये ही नहीं. नन्हे से बात की, उसका एक मित्र मोटरसाईकिल से ‘भारत यात्रा’ पर निकला है, शायद उन्हें भी लेह में मिले, वह उन्हीं तिथियों में वहाँ जाने वाला है. कल उसके सहकर्मियों ने उस घर में एक भोज समारोह किया जहाँ से छह वर्ष पूर्व कम्पनी की शुरुआत हुई थी. सुबह अजीब सा स्वप्न देखा, उसका अर्थ था, साधना करके यदि कुछ पाने की, कुछ बनने की चाह है तो साधना व्यर्थ है. परमात्मा को पाकर यदि अपना कद ही ऊंचा करना है तो उससे कभी मिलन होगा ही नहीं. स्वयं को पवित्र करना ही साधना का उद्देश्य है. भीतर यदि कोई भी चाह शेष है तो चित्त शुद्ध हुआ ही नहीं. परमात्मा कितनी अच्छी तरह से उसे पढ़ा रहा है. वह कभी स्वप्नों के माध्यम से, कभी सीधे शब्दों के माध्यम से उसे मार्ग पर ले जा रहा है. वह कितना कृपालु है. उसकी महिमा को कौन जान सकता है. आज से औरंगजेब की कहानी शुरू हुई है. देश में मोदी जी नये-नये कदम उठा रहे हैं ताकि भारत की समृद्धि बढ़े, विश्व में उसका नाम हो !  


आज वर्षा रुकी हुई थी सो स्कूल में बच्चों को बाहर मैदान में योग कराया. उन्हें योग दिवस के बार में भी बताया. दोपहर को लद्दाख की तस्वीरें देखीं, जानकारी हासिल की जो वहाँ जाने वाले यात्रियों के लिए आवश्यक है. वहाँ ठंड भी होगी और वर्षा भी. जलरोधी वस्त्र और जूते ले जाने होंगे. आज पुनः मन में एक खालीपन है, आश्चर्य भी होता है ऐसी अनुभूति पर, लेकिन ईश्वर के मार्ग पर तृप्ति का अर्थ है पूर्ण विश्राम. यानि रुक जाना, पर यहाँ तो चलते ही जाना है, इसका कोई अंत नहीं ! कल जून को गोहाटी जाना है दो दिनों के लिए. उसे अधिक समय मिलेगा साधना के लिए, पर साधना का लक्ष्य तो सभी के साथ एक्य की भावना का अनुभव करना ही है, जो वे इसी क्षण कर सकते हैं. वे विशिष्ट हैं, यही भाव तो उन्हें अलग करता है. इस सृष्टि में सभी एक-दूसरे से जुड़े हैं, सभी की अपनी-अपनी भूमिका है, सभी महत्वपूर्ण हैं समान रूप से. यही भावना तो उन्हें परमात्मा के साथ भी जोड़ती है. परमात्मा साक्षी है, सभी पर समान कृपा करता है पर जो उससे प्रेम करता है अर्थात स्वयं को विशिष्ट नहीं मानता, उससे वह प्रेम से मिलता है. अस्तित्त्व उसका हो जाता है उतना ही, जितना वह अस्तित्त्व का !

Saturday, July 15, 2017

भात करेले की सब्जी


कल रात्रि एक अद्भुत स्वप्न देखा, एक तालाब में स्वयं को पौधों के रूप में या फूलों के रूप में उगे हुए ! ढेर सारे चेहरे पानी की सतह पर तैर रहे थे. किसी जन्म में शायद वह कमल रही हो. आज तक कितने ही स्वप्नों में पिछले कितने ही जन्मों की कहानी देखी है. कितना अद्भुत है यह जीवन, कितने राज छुपाये हुए. ध्यान में जो शांति महसूस होती है पता नहीं किस लोक से आती है. कभी-कभी जो आकृतियाँ दिखती हैं जाने वे कौन हैं ! कुछ भी नहीं जानते वे..सामने रखे मोगरा के फूलों से जो गंध आया रही है, वह माटी से उपजी है, इतनी कठोर भूमि और इतनी कोमल पंखुरी, फिर उससे भी सूक्ष्म गंध, और उससे भी सूक्ष्म उस गंध को स्पर्श को महसूस करने वाली नासिका पर आश्चर्यों का महा आश्चर्य, इस गंध को पहचानने वाला सूक्ष्म मन तथा इसका आनंद लेने वाली आत्मा..तो कृष्ण भोक्ता हैं, यह तो स्पष्ट हो गया. वही एक तत्व जो भोक्ता है वही तो प्रकृति के माध्यम से गंध बनकर बिखरा है. जीवन ऊर्जा जो अनगिनत रूपों में प्रकट हो रही है, स्वयं ही आनंदित भी हो रही है ! पर कैसे यह खेल चल रहा है, कौन जानता है !

कल फिर एक अनोखा स्वप्न देखा, मस्तिष्क को अपने सम्मुख देखा और उसमें जगह-जगह निशान बने थे गोल, छोटे-छोटे टुकड़े, जिन पर लिखा था अज्ञान और वह उसे वहाँ से काट कर निकाल रही थी ! उनके मस्तिष्क में ज्ञान व अज्ञान दोनों हैं. अज्ञान को दूर करना है यही बात स्वप्न बन कर आई. वास्तव में उन्हें ज्ञान को बढ़ाना है, अज्ञान अपने-आप चला जायेगा.


कल नन्हे का जन्मदिन है, जून कल आ रहे हैं. इस समय साढ़े पांच बजने को हैं. बाहर अभी धूप है. कुछ देर पहले बगीचे में काम करवाया. अभी एक कविता लिखनी है, नये-नये शब्दों से सजी सुंदर कविता. आजकल वह कुछ सुंदर शब्दों को देखती है और फिर उन्हीं के इर्द-गिर्द अन्य शब्द जैसे अपने आप चले आते हैं, सामान्यतया भीतर अब मौन ही रहता है, एक सन्नाटा ! मधुरिम नीरवता ! हवा बह रही है, बाहर झूमते हुए वृक्ष अच्छे लग रहे हैं. कुछ देर में क्लब की एक सदस्या आने वाली है, इसी महीने क्लब की वार्षिक बैठक है, कुछ देर उसका काम करना है. एक अन्य सखी का फोन आया, अगले महीने किशोरियों के लिए होने वाला कार्यक्रम एक स्कूल में होगा. उसने अपनी सब्जी बाड़ी में उगे करेले और लोभिया की फलियाँ भी भिजवायीं. नूना ने भी भात करेले भिजवाये, जो जरा भी कड़वे नहीं होते, जो उसने असम में आकर ही देखे हैं. जामुन आज नहीं मिले, पिछले महीने भर से सुबह-सुबह वह रोज मीठे जामुन उठाकर लाती रही है, शाम को जिसका शरबत जून को बहुत भाता है. जून ने कल दोपहर की टिकट बुक करवायी हैं, कोई नई फिल्म आई है. वह उसके लिए वस्त्र भी लाये हैं. वे जीवन के रस को भरपूर निचोड़ लेना चाहते हैं. ढेर-सारी खाने-पीने की वस्तुएं भी लाये हैं, उसे बिना मांगे ही सब कुछ मिल जाता है, परमात्मा की कैसे कृपा है ! उस परमात्मा के लिए वह क्या कर सकती है सिवाय चंद शब्दों में उसकी महिमा बखान करने के !

Wednesday, August 3, 2016

अनजानी सी गंध


आज क्लब की एक पुरानी पत्रिका के कुछ लेख पढ़े. बहुत आनंद मिला. मन में कुछ भाव जगे. पिछले पांच दिनों से डायरी नहीं खोली, न जाने कहाँ गुम थी. आज पुनः सत्संग है घर पर, देखें आज कौन-कौन आता है. जून देहली गये हैं, इतवार को लौटेंगे यानि तीन दिन बाद. उसने उन्हें याद करके लिखा-

क्यों शंकित है, क्यों पीड़ित है, हृदय तुम्हारा क्यों कम्पित है
साथी हैं हम जनम-जनम के, सुख के दुःख के हर इक पल के
किसे ढूँढ़ते नयन तुम्हारे, कैसे दर्द छिपाए दिल में
कदम-कदम संग चलना हमको, हर मोड़ पे मिलना हमको
चलो भुला दें बीती बातें, चलो मिटा दें दुःख, फरियादें
हाथ लिए हाथों में अपने, पूर्ण करेंगे सारे सपने
साथ निभाने का था वादा, तुमने न माँगा कुछ ज्यादा
जो चाहो वह सदा तुम्हारा, साँझा है यह जीवन प्यारा
तुमसे ही अपना जीवन है, तुमसे ही यह तन मन धन है
तुम ही हो सर्वस्व हमारे, तुमसे न कोई भी प्यारे
तुमने ही जीना सिखलाया, तुमसे कितना सम्बल पाया
हर उलझन को तुम सुलझाते, अपना कर्त्तव्य निभाते
तुमसे ही यह घर चलता है, तुमसे ही जीवन सजता है
परिवार को तुमने चाहा, सुंदर सा इक नीड़ बनाया
तुमने कितने उपहारों से, सोने चाँदी के हारों से
भर दी है मेरी अलमारी, जीवन सुंदर त्योहारों से..
साथी तुम संग जीवन प्यारा, तुम न हो सूना जग सारा
कैसे तुमको भूल गये हम, खुद से ही हो दूर गये हम
तुम आओगे तकती आँखें, भर दोगे सपनों से पांखें !


उसने कुछ देर नेट पर समय बिताया. गुरूजी को सुना. सुबह ध्यान में कुछ देर तो निर्विचार हो पायी थी पर अभी तक ऐसा अनुभव नहीं हुआ कि सब कुछ खो जाये, स्वयं का पता तो रहता ही है, लेकिन भीतर गहरी शांति है. कल शाम एक सखी के यहाँ गयी, वह कितना परेशान रहती है, उसका स्वभाव ही ऐसा हो गया है. रात को एसी चलाया था तो कैसी महक भर गयी थी कमरे में, अजीब सी गंध से ढाई बजे आँख खुल गयी थी, फिर काफी देर बाद नींद आयी. उसी समय जून भी गेस्ट हाउस में उठे थे. दीदी से बात करनी है पर फोन कहीं भी नहीं मिल रहा है, लिखा है ‘लिमिटेड सर्विस’ जाने क्या मतलब है इसका. 

Friday, December 18, 2015

शरद का उत्सव


कैसी अजीब सी गंध कमरे में भर गयी है. जिसका स्रोत पता नहीं चल रहा है. भीतर भी कभी-कभी धुंध छा जाती है, कोहरा छा जाता है जिसका स्रोत अज्ञान के सिवा और क्या हो सकता है. ऐसे लगता है जैसे कुछ खो गया है, पर क्या है उनके पास जो खो सके और यदि खो भी जाये तो उस पर दुखी हुआ जाये इसकी क्या आवश्यकता है. क्योंकि अब खुद के सिवाय सभी कुछ एक दिन खो ही जाने वाला है. खुद तो वे ही हैं, वह खो नहीं सकता, बल्कि वह खो जाये तो बात बन जाये जो जन्मों से बिगड़ी हुई है ! कैसी जड़ता छा गयी है, कुछ ऐसा हो भीतर चेतना खिल जाये !

पिछले कई दिनों से डायरी नहीं खोली. सुबह बीतती है ध्यान व पढ़ने में, दोपहर को पढ़ना-पढ़ाना. शाम को टीवी, टहलना और बस सारा दिन बीत जाता है. जून पिछले हफ्ते बृहस्पति वार को लौटे तब से व्यस्तता थोड़ी सी बढ़ी है, पर इससे पहले बुधवार को भी नहीं लिख पाई थी. आज वर्षा हो रही है, कल तेज धूप निकली थी, जैसे प्रकृति में परिवर्तन होता रहता है, वैसे ही मन का मौसम है, पर वह आकाश जिसमें परिवर्तन होता दीखता है, एक सा है ऐसे ही वह आत्मा जिसमें मन टिका है, सदा एक सा है, वे वही चिदानन्द आत्मा हैं, सो उन्हें मन के बदलते मौसम से परेशान होने की क्या जरूरत है. मनसा-वाचा-कर्मणा वे जो भी क्रिया करते हैं, उनके लिए व सभी के लिए हितकर हो !

आज सुबह साढ़े चार पर उठी, सभी आवश्यक कार्य किये. जून सुबह छह यूरोपियन देशों के बारे में आवश्यक सूचनाएं लाये हैं, जिन्हें पढकर उन देशों के बारे में जानकारी तो प्राप्त करनी ही है एक लेख भी लिखना होगा, जो जालोनी क्लब की पत्रिका में छपेगा जिसके हिंदी भाग की जिम्मेदारी उसे दी गयी है. टीवी पर मुरारी बापू की कथा आ रही है. वह कह रहे हैं, मानव जहाँ है परमात्मा वही  हैं, साधक अपने से दूर होता है परमात्मा से दूर नहीं हो सकता. आज सुबह सद्गुरू को भी शरद उत्सव में भाग लेते देखा, समाधि में लीन हो गये थे, उनके अंग विशिष्ट मुद्रा में स्थिर हो गये थे. अद्भुत रस का प्राकट्य हो रहा था. कोई कितना मौलिक है, प्रमाणिक है, इसका पता चले तो यह भी ज्ञान होता है कि परमात्मा कितना अन्तर में प्रकट है !

पूजा और विजयादशमी का उत्सव समाप्त हो गया. आज सुबह समय पर उठी, कोई ऐसा स्वप्न जो याद रहे कल रात नहीं देखा. पिछले दिनों एक स्वप्न देखा था जिसमें एक रास्ते पर चलते-चलते एक मधुमक्खियों का छत्ता तथा हजारों मधुमक्खियाँ दिखीं, जिनसे घिरने की बाद भी शरीर पर कुछ भी नहीं हुआ क्योंकि शरीर आत्मा का था. हवा की तरह हल्का और पारदर्शी. उड़ता था वह तन हवा में छत तक पहुंच कर नीचे उतर आता था. कितना अद्भुत स्वप्न था. वह आत्मा है यह भाव दृढ़तर होता जा रहा है. भीतर कितनी शांति छाई रहती है जैसे सारी दौड़ समाप्त हो गयी है. क्योंकि वह परमात्मा हर क्षण हर स्थान पर सदा ही साथ रहता है. वे उसे महसूस नहीं कर पाए क्योंकि वे सदा उसे बाहर खोजते थे, जबकि वह भीतर था और सदा रहेगा.


जून दिल्ली गये हैं, परसों लौटेंगे. कल क्लब में मीटिंग है. आज शाम को रिहर्सल के लिए जाना है, इस बार उनके एरिया का कार्यक्रम है. उससे पहले एक सखी आएगी सासु माँ से मिलने. दिन ऐसे बीत रहे हैं जैसे किसी की प्रतीक्षा हो, हर वक्त उस एक की प्रतीक्षा तो रहती ही है. उस ब्रह्म की, उस तत्व की, उस परम सत्य की, उस ज्ञान की, उस परम शांति की.. जिसकी झलकें तो जाने कितनी बार मिली हैं पर अब भी मन तो बना ही हुआ है, वह विकारों से मुक्त भी कहाँ हुआ है ! गुरु का ज्ञान ही उस सत्य की पहचान कराएगा. गुरु पहले परम अज्ञानी बनाता है तभी परमात्मा का ज्ञान फूटता है.   

Wednesday, September 9, 2015

भीनी-भीनी गंध



उस दिन स्वप्न में ( एक-दो दिन पूर्व ) देखा कि एक मृत देह के साथ वे एक ही बिस्तर पर सो रहे हैं. वे जानते हैं कि यह मृत देह है शायद उसकी बहन का, पर वे नींद में इतने मग्न हैं कि उठकर उससे अलग होना ही नहीं चाहते, कैसा स्वप्न था वह ? उसे बचपन से ही एक मृत्यु की याद बेचैन करती रही है, उसकी आठ वर्षीय बहन की मृत्यु जो रात में हुई और घर में सभी सो रहे थे. माँ अकेली उस मरती हुई बच्ची के पास थी, रात को एकाएक वह चिल्लाई...गयी! सारे घर में रोना-धोना मच गया. वह छोटी थी शायद पांच या छह वर्ष की. मृत्यु को नहीं जानती थी पर इतने वर्षों तक वह दुखद स्मृति उसे बेचैन कर देती थी. उस स्वप्न के बाद से जैसे मन से उस घटना का विलोप हो गया है, ऐसे ही एक बार बहुत बचपन में घटी घटना पुनः स्वप्न में देखी और उसका असर जाता रहा. उसकी आत्मा उसके मन पर मरहम लगा रही है, वह चेतना उसके मन का इलाज कर रही है. वह सद्गुरु से जुड़ी है, सद्गुरु परमात्मा से जुड़े हैं तो परमात्मा ही है जो उसके भीतर से सारे कांटे चुन-चुन कर निकाल रहे हैं. वह किसी महान उद्देश्य के लिए तैयार की जा रही है. उसकी निजी कोई चाह शेष नहीं रही, चाह तो मन में होती है जो मन से पार चला गया हो, जो अमृत का स्वाद चख चुका हो उसे इस नश्वर जगत से क्या मिल सकता है ! शाश्वत जीवन के द्वार पर खड़ी वह स्वयं को नवीन अनुभव कर रही है. उसे बहुत कार्य करना है. प्रेम तथा सेवा के कार्य. जिन्हें करने वाली वह नहीं, अर्थात उन सीमित अर्थों में नहीं जिसमें जगत उसे देखता है. जगत अपनी राह चलेगा, वह उससे दूर निकल गयी है.


आज ध्यान करते हुए एक भीनी-भीनी मधुर( चम्पा के फूलों की सी ) गंध का आभास हुआ, कैसा विचित्र अनुभव. परमात्मा की तरफ कोई कदम तो रखे, कैसे-कैसे अनुभव होने लगते हैं. वे जितना-  जितना भीतर से खाली होते जाते हैं, चैतन्य उतना-उतना उसमें भरता जाता है. जब कोई इच्छा नहीं रहेगी तो पुनः जन्म नहीं होगा, अभी तो न जाने कितनी इच्छाएं अवचेतन में दबी पड़ी हैं. चेतन मन में इच्छाएं अब कम ही उठती हैं सिवाय उस परमात्मा की इच्छा के. इस जगत में इच्छा करने योग्य एक वही तो है ! पर वह भी तभी मिलता है जब उसकी भी इच्छा न रहे... कल उसने स्वप्न में एक संत महात्मा को देखा, जिन्हें देखते ही किसी पूर्वजन्म की स्मृति हो आयी और भाव विह्वल होकर उनके चरणों पर गिर पड़ी. सम्भवतः सद्गुरु उसे जगाने आए थे पर वह उसके बाद भी सोती रही. साधना के पथ पर जब उसने कदम रखा है तो सबसे पहले यह लक्ष्य दृढ़ होना चाहिए कि उसे भाव शुद्धि, वाक् शुद्धि तथा कर्म शुद्धि प्राप्त करनी है. आज सुबह सद्गुरु ने बताया कि जिसकी वाणी, भाव तथा कृत्य तीनों शुद्ध होते हैं वही परमात्मा का साक्षात्कार कर सकता है. उसका लक्ष्य यही है, ध्यान में गहराई आने से यह सहज ही होने लगता है. उसका एक कृत्य आज शुद्ध नहीं रहा. अभी तक भी वह स्वयं को सहज रखना नहीं सीख पायी, सहयोग की भावना जरा भी नहीं है अर्थात भाव भी शुद्ध नहीं हुए. नीरू माँ कहती हैं जिसके प्रति अपराध बनता है वह शुद्धात्मा है यह ज्ञान न रहे तो प्रतिक्रमण ही एक मात्र उपाय है.  

Tuesday, March 12, 2013

ला ओपेला का सेट



गुलदाउदी के पौधे एक-दो दिनों में मिल जायेंगे, फोन उसकी सखी ने ही किया था, सो उसका यह आक्षेप कि सदा उसे ही फोन करना पड़ता है, गलत सिद्ध हो गया जिसकी उसे खुशी है. शाम को असमिया सखी के घर जाना है, उससे भी बात हुई है, वह उसके नए लाल सूट में इंटर लॉकिंग कर के देगी अपनी नई फ्लोरा पर, और आज सुबह से दो बार प्रेम की अधिकता या भावों की अधिकता के कारण उसकी आँखों में अश्रु झलक आये, कल भी ऐसा हुआ था, कहीं यह उस स्वप्न का असर तो नहीं, या सम्भव है सात्विक भाव प्रगट हुए हों. लेकिन मन ने कल एक-दो बार ऐसा सोचा कि उनकी परवाह किसी को नहीं, उन्हें ही सबकी परवाह है - लेकिन यह सत्य नहीं है, और अगर ऐसा हो भी तो इसमें उदास होने की कोई बात नहीं, बल्कि उन्हें किसी से अपेक्षा करने का कोई अधिकार नहीं. जून के दांत का दर्द कम है, कल उन्हें फिर जाना है. नन्हा आज जल्दी उठ गया था, पर तैयार होते-होते उसे पौने नौ बज गए, शायद उसे खांसी फिर से परेशान कर रही है, वैसे वह गंध के प्रति बहुत संवेदन शील है, हल्की सी गंध से खांसने लगता है.

मौसम भीगा-भीगा है, बादल बरस कर अभी-अभी थमे हैं. खिडकी से नजर बाहर डालो तो बस हरियाली ही हरियाली है. जून इस वक्त तिनसुकिया में होंगे. नन्हा कह रहा था आज से उसकी छुट्टी देर से होगी, उसका टाइम टेबिल आज से बदल रहा है. उसकी पुरानी पड़ोसिन का फोन आया तो उसे अच्छा लगा. कल रात को एक बार गर्मी के कारण नींद खुली फिर सुबह ठंड के कारण- एक जमाना था कि नींद आती थी तो सर्दी-गर्मी और मच्छर किसी का पता नहीं चलता था. बेसुध और बेखुद हो जाती थी. रात बचपन को याद करके सोयी थी, बचपन के माँ-पिता को भी. कल उनका पत्र आया था, लिखा है, अगले महीने उनका घर बनना आरम्भ हो जायेगा, जनवरी तक पूरा भी हो जायेगा. कल जून एक महिलाओं की एक अंग्रेजी पत्रिका लाए, इंग्लैण्ड में प्रकाशित, वहाँ कि संस्कृति यहाँ से कितनी अलग है, उसने गार्डनिंग पर एक लेख पढ़ा, फिर पड़ोसिन से हेज के पास खड़े होकर बात करने लगी पता ही नहीं चला सवा घंटा कैसे बीत गया. उसके बेटे को चिकन पॉक्स हो गया है, वह सो रहा था.

  कल उसके जीवन का एक बहुत अच्छा दिन था, शाम को उसकी एक छात्रा अपने माँ-पिता व छोटी बहन के साथ आयी. वे लोग उसके लिए एक उपहार भी लाए. उन्हें उन सबके आने की उम्मीद नहीं थी, उसके पहले एक मित्र परिवार आया था, घर काफी अस्त-व्यस्त सा हो गया था, खैर.. वे लोग अचछे लगे सरल और सहज..और इतना सुंदर ला ओपेला ला का dessert set.

  उसके पैरों में आज वही दर्द है, डायरी उठाई है, दस बजने को हैं अभी..बस..कुछ..भी..ये चारों शब्द उसके मन की अस्थिरता के परिचायक हैं. कल फेमिना में एक बहुत अच्छा लेख पढ़ा. रात को देर तक सोचती रही कि उसे अपने वक्त का सदुपयोग करना चाहिए, कोई न कोई काम करते रहने की वैसे उसकी आदत तो है ही, बस काम थोड़ा उद्देश्यपूर्ण हो इसका ध्यान रखना होगा. लेकिन अब इस दर्द में तो सिर्फ आराम से बैठकर पढ़ा जा सकता है, नहीं जी, अब इतना भी नाजुक नहीं होना चाहिए इंसान को कि जरा सा मौका मिला नहीं कि लम्बी तान ली...मगर वह तो पढ़ने की बात कर रही थी और वह भी विवेकानंद की किताब का तृतीय अध्याय.  

  दोपहर के पौने दो बजे हैं. किसी परिचिता ने बताया कि नन्हे को कल बस में किसी बच्चे ने मारा था, उसने उन्हें बताया नहीं, शायद इसका कारण यह तो नहीं कि वे उसे कमजोर कहते हैं, मार खाकर आने पर, इस तरह तो वह अपनी समस्या बताएगा नहीं, उसने मन ही मन तय किया, अब से वह ऐसा नहीं करेगी. वह आजकल सुबह सब काम समय पर कर लेता है, पहले की तरह बार-बार नहीं कहना पड़ता. नन्हे से पूछने पर उसने इंकार कर दिया कि बस में किसी से झगड़ा हुआ था, इसका अर्थ हुआ कि सूचना सही नहीं थी. उसका गणित का टेस्ट कल फिर नहीं हुआ. कल ड्राइंग प्रतियोगिता है, पिछले दो-तीन दिनों से उसके मित्र शाम को खेलने आ जाते हैं. वे सब अँधेरा होने तक खेलते रहते हैं, उसे अपने बचपन के दिन याद आ जाते हैं, जब माँ भीतर से आवाज देती थीं और वह अपनी सहेलियों के साथ रस्सी कूदने, गेंद गिट्टी खेलन में व्यस्त रहती थी.