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Wednesday, May 13, 2026

कूनो के चीते

कूनो के चीते


आज शाम वे ‘गणेश पूजा’ देखने गये, पूजा पंडाल बहुत सुंदर बना है,  उस समय गायन चल रहा था। बंद पंडाल में गर्मी के कारण वे अधिक देर नहीं बैठ सके।आज उसने सफ़ेद पेठे की स्वादिष्ट सब्ज़ी बनायी, बचपन से आज तक केवल उसकी मिठाई ही खायी थी। यू ट्यूब पर सुना पाकिस्तान ने भारत से मदद लेने से इंकार कर दिया है। जब तक कश्मीर का मसला हल नहीं हो जाता, वह भारत से व्यापार नहीं करेगा। कितना अजीब मुल्क है पाकिस्तान। शाम को दीदी-जीजाजी से बात हुई। आज काफ़ी समय बाद जीजा जी ख़ुद गाड़ी चलाकर पापाजी से मिलने गये थे, बहुत खुश लग रहे थे। उन्होंने रात को सपने में देखा, दीदी को घुमा रहे हैं, सुबह उठे तो स्वयं को तरोताज़ा पाया, सो आ गये। छोटी बहन उनके आने से बेहद खुश थी।दिल को दिल से राह होती है। कल बच्चे जल्दी आ जाएँगे।भांजे के रोके की ख़ुशी में घर में पार्टी है।लड़की वाले भी आयेंगे।    


आज का आयोजन अच्छा रहा। नन्हा और सोनू ने लंच बनाने में बहुत मदद की, परोसा भी सलीक़े से। कुल एक दर्जन लोग हो गये थे। शांत स्वभाव की भावी वधू की दादीजी सबसे मिलकर बहुत प्रसन्न हुईं। पिछले वर्ष कोविड में लड़की के पिताजी नहीं रहे।विवाह अगले वर्ष होगा।दोपहर बाद सभी को पूजा पंडाल में गणेश भगवान की मूर्ति का दर्शन कराया। 


शिक्षक दिवस पर नूना ने दो रचनाएँ पोस्ट कीं। काव्यालय पर प्रकाशित हुई कविता पर कई प्रतिक्रियाएँ आयी हैं। आज ‘वृहदराण्यक उपनिषद’ पर आगे सुना, वक्ता बहुत ही दिल से शंकर भाष्य प्रस्तुत कर रहे हैं।यह शुक्ल यजुर्वेद के शतपथ ब्राह्मण का अंतिम कांड है। इसके मुख्य संकलन कर्ता ऋषि याज्ञवल्क्य है। कल रात फिर तेज वर्षा के कारण बैंगलुरु में कई स्थानों पर पानी भर गया। भांजे को नन्हे के घर आना पड़ा है। उसकी बिल्डिंग में पानी भर गया है। वहाँ बिजली भी नहीं है। सुबह टहलते समय एक किंगफ़िशर पंछी की तस्वीर उतारी, उसके नीले पंख धूप में चमक रहे थे। 


आज कक्षा सात की एक नयी छात्रा हिंदी पढ़ने आयी। छोटी बहन पिछले दिनों ऑन लाइन योग साधना करवा रही थी। कल वह वापस चली गई। आज से आर्ट ऑफ़ लिविंग का ऑन लाइन हैप्पीनेस कोर्स शुरू हो गया है, जिसमें नन्हा और सोनू भी भाग ले रहे हैं। ऑफिस के साथ-साथ उनके लिए समय निकालना कठिन तो है, पर यदि मन में इच्छा हो तो हर काम किया जा सकता है। सुबह वे टहलने गये तो हल्की झींसी पड़ रही थी, हवा शीतल थी। उन लोगों का ख़्याल आता रहा जिनके घरों में पानी घुस गया है और जिन्हें होटलों में जाना पड़ा है। मृणाल ज्योति का एक वीडियो देखा, काफ़ी कुछ बदल गया है वहाँ, देखकर अच्छा लगा। शाम को पापाजी से हुई बातचीत को रिकॉर्ड किया, उन्होंने बहुत अच्छी बातें बतायीं। 


आज सुबह से वर्षा रुकी हुई थी, पर शाम से पहले ही शुरू हो गई। इस बार वर्षा ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिये हैं। बैंगलुरु में स्थित दो सौ से अधिक झीलों में से आधी से ज़्यादा में पानी ऊपर आ  गया है, सड़कों पर और घरों में भर गया है। भतीजी के लिए एक कविता लिखी, अभी इस महीने पड़ने वाले चार जन्मदिन पर और लिखनी हैं। आज समाचारों में सुना, इंग्लैंड की महारानी के निधन के बाद आकाश में बादलों ने उन्हीं का आकर ले लिया और इंद्रधनुष भी बन गया। प्रकृति रहस्यमयी है। 

आज बच्चे आये थे, दिन भर वे साथ रहे, वही बोर्ड गेम खेला। उनके जाने के बाद एक कविता लिखी उन्हीं के लिए। शाम को टहलते हुए वे सोसाइटी में कुत्तों के लिए बने नये पार्क को देखने गये। 


आज सुबह उठते ही छोटी बुआ के देहांत का समाचार मिला। वह काफ़ी अरसे से बीमार थीं। फुफेरे बहन-भाई से बात हुई। पड़ोसी और उनके दफ़्तर के लोगों के सहयोग से सब कार्य हो गया।छोटा भाई महीने के अंत में जायगा। आज डिस्कॉर्ड पर एक-दो चित्र बनाये। जून ने अपनी कार सर्विसिंग के लिए दी है, नन्हा अपनी कार छोड़ गया है।शाम को टहलने गये तो बूँदाबाँदी शुरू हो ज्गई, इस वर्षा में पहली बार वे भीग गये। पिछले वर्ष एक से अधिक बार भीगे थे। आज हिन्दी दिवस है, सुबह कुछ पंक्तियाँ लिखीं, जो ब्लॉग पर प्रकाशित कीं। पापाजी ने किताबों के महत्व पर प्रकाश डाला, पढ़ना उनका भी प्रिय कार्य है। आज सुबह भ्रमण करते समय उसने जून को गौतम बैद की पुस्तक ‘द जॉयस ऑफ़ कंपाउडिंग’ के बारे में बताया। यह किताब शेयर मार्केट में इन्वेस्ट करने तरीक़ों के साथ-साथ जीवन के सामान्य सिद्धांतों की चर्चा भी करती है। सुबह जून के पोर्टफोलियो में से दो में और इन्वेस्ट भी किया। जीजाजी ने बताया, ‘यस बैंक’ के शेयर्स में उन्हें काफ़ी लाभ हुआ। छोटी बहज का फ़ोन आया, उसने सपने में देखा, जून आस्ट्रेलिया में नौकरी कर रहे हैं। वह रोज़ सुबह ऑनलाइन योग सिखा रही है।दीदी को अंग्रेज़ी में वार्तालाप करने का शौक़ अब नहीं रहा। आज सुबह समधिन का फ़ोन आया, उन्होंने कहा, आज से संकल्प लिया है, हिंदी में बात करेंगी। 


कुछ देर पहले वर्षों पुरानी एक परिचिता का फ़ोन आया, उनकी बहू व पोता तीन साल के बाद घर आ रहे हैं।वह बेहद खुश थीं। पर परेशान भी हैं, क्योंकि घर में चार भाइयों में बँटवारा हो रहा है। जीवन ऐसा ही है, कभी ख़ुशी-कभी ग़म ! जो सुख-दुख के पार निकल गया वही इसे लीला की तरह देख कर समता में बना रहता है। आज शाम को बहुत दिनों के बाद पौधों में पानी दिया, पिछले दिनों रोज़ ही वर्षा हो रही थी, अब रुक गई है। आज दोपहर को टीवी पर ‘निराला’ के बारे में एक अच्छा कार्यक्रम देखा; जिसमें महादेवी वर्मा को उनके बारे में बात करते हुए सुना। उनके ऊपर एक आलेख लिखना है। उनकी रचनाएँ भी पढ़नी हैं। कल नन्हे ने कई फलों के रस के पैकेट्स भेजे और कहा इन्हें आप ड्राइव पर ले जायें, उसका उत्साह देखकर नूना को भी उत्साह जगा और उसका उत्साह देखकर जून ने गाड़ी निकाली, फिर वे एक झील पर गये, सूर्यास्त के दृश्य अनोखे थे, वहाँ से वीडियो पर पापाजी को भी झील के दर्शन कराये। उन्हें तस्वीरें भी भेजी हैं। आज मोदीजी उज़बेकिस्तान गये हैं, वहाँ शंघाई सहयोग संगठन (एसीएसईओ) की मीटिंग हो रही है। भारत ने इसमें ‘एक पृथ्वी-एक परिवार-एक भविष्य’ का नारा देकर ‘वसुधैव कुटुंबकम्’की भावना को आगे बढ़ाया है। आज भारत में नामीबिया से आठ चीते आ रहे हैं, भारत में १९५२ से ही चीते लुप्त हो गये हैं। जिन्हें मध्यप्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ा जाएगा। यह दुनिया का पहला ऐसा चीता स्थानांतरण है। चीतों को विशेष विमान से ग्वालियर लाया जा रहा है।  


Friday, April 17, 2026

इसरो का पीएसएलवी-सी ५२

इसरो का पीएसएलवी-सी ५२


आज नूना को एक मज़ेदार स्वप्न ने उठाया।एक महाशय अपने डॉग(शी) से बातें करते हैं। वह उन्हें कुछ परेशान कर रही थी तो उसे कुछ सबक़ सिखाना चाहते हैं। उसके मुख के पास जाकर कहते हैं, हेलो मिस, वह भी दाँत निपोरती हुई कहती है, हेलो मिस्टर, अगली बार उनके हाथ में कोईं कठोर वस्तु है और नूना जानती है कि वह इसे कहाँ रखने वाले हैं, जैसे कि यह घटना पहले भी हो चुकी हो। वह फिर बड़े ही अच्छे अन्दाज़ से कहते हैं, हेलो मिस, और जैसे ही वह हेलो कहने के लिए मुँह खोलती है, जबड़ों के मध्य वह वस्तु रख देते हैं। वह मुँह बंद करती है तो ज़ोर की आवाज़ होती है। सब हँसने लगते हैं और नींद खुल जाती है। यह स्वप्न जगाने के लिए आया था, क्योंकि अलार्म बंद किए काफ़ी वक्त बीत गया था। परमात्मा को मज़ाक़ बहुत पसंद है, गुरुजी की यह बात एक बार फिर सत्य सिद्ध हो गई।परमात्मा के द्वार जाना हो तो हँसते-हँसते ही जाया जा सकता है। एक अन्य स्वप्न में उनकी सोसाइटी नापा की एक परिचित महिला को वह सनातन धर्म  के बारे में बता रही है। सपने में वह ईसाई धर्म को मानती हैं।नूना उन्हें गहन श्रद्धा तथा ईश्वर के विभिन्न रूपों के बारे में बता रही है। सुंदर स्वप्न था यह !!   


आज इतवार को नन्हे और सोनू के लिए नाश्ते में बेदमी पूरी बनायी, जून ने यू ट्यूब पर उसकी विधि देखी थी।नाश्ते के बाद वे सब बेंगलुरु के चर्च स्ट्रीट में स्थित किताबों की एक दुकान पर गये।ब्लॉज़म बुक हाउस नाम है उसका, २००१ में मयि गौड़ा नाम के व्यक्ति ने उसे खोला था। यहाँ पुरानी, नयी हर तरह की किताबें मिलती हैं। वीडियो कॉल करके पापाजी को भी दिखायी वह दुकान। सबने मिलाकर कुल बीस किताबें खरीदीं। उसके बाद ‘गो नेटिव’ गये। जहाँ परंपरागत शाकाहारी भोजन मिलता है।वापस आते-आते सवा पाँच हो गये थे, उसे अनुवाद कार्य करना था। शाम को बच्चे वापस चले गये। जून सोने चले गये हैं, वह कुछ देर नयी लायी पुस्तक ‘माइंड ऑफ़ गॉड’ पढ़ने वाली है। 


आज सुबह योग साधना करते समय अचानक आकाश पर नज़र पड़ी तो एक सुंदर दृश्य दिखा। एक प्रकाश का स्रोत, जिसके पीछे प्रकाश की तिकोनी छाया थी, लगा कोई धूमकेतु होगा। दूसरी तरफ़ भी बादलों को चीरती हुई सी प्रकाश की एक तरंग थी। कुछ समझ नहीं आया, यह क्या था।बाद में ज्ञात हुआ इसरो ने पीएसएलवी-सी ५२ लांच किया था।दोपहर की वही गॉड वाली पुस्तक पढ़ती रही। मस्तिष्क अरबों, खरबों न्यूरॉन से बना है। कितनी जटिल है इसकी रचना, जिसके द्वारा शरीर के सब कार्य होते हैं। शाम को वे लोग एक परिचित के विशाल और सुंदर घर की गृह प्रवेश की पूजा में गये।वापसी में एक मित्र दंपत्ति घर आये। पापाजी से बात हुई, आज वह वोट देने गये थे, इस उम्र में भी उनका इतना उत्साह देखकर एक पत्रकार ने उनसे बातचीत की। 


आज सुबह योग-प्राणायाम के बाद, सुखबोधानन्द जी की ताई चि क्रिया की।उन्होंने बहुत अच्छी बातें बतायीं तथा नृत्य भी कराया। कह रहे थे, वह योग निद्रा नहीं प्रेम निद्रा कराते हैं, आनंद लहरी के साथ-साथ प्रेम लहरी जगाते हैं। जून ने वर्षों बाद नृत्य किया होगा। वह चाहें तो कर सकते हैं। भजन व नृत्य उनके मन को तनाव से मुक्त रखने में सहायक होगा। नाश्ते में जून नापा के प्रसिद्ध शेफ़ शेट्टी जी से दोसा लाए, चटनी तथा सब्ज़ी में मिर्च बहुत थी।नूना ने एक व्हाट्सेप समूह बनाया है, जिसमें पंचायत की अध्यक्षा तथा नापा की कुछ महिलाएँ हैं, मंगलवार को पहली मीटिंग है। गाँव से जुड़कर महिलाएँ बहुत कुछ कर सकती हैं, ऑर्गेनिक खेती, पेपर बैग्स बनाना , सफ़ाई अभियान, योग-ध्यान सिखा सकती हैं। सेवा के अतिरिक्त अब करने को कुछ है भी कहाँ। शाम को जून कमेटी की मीटिंग में व्यस्त थे और उसने ज्ञानेशावरी गीता का पाँचवाँ व अंतिम भाग सुना।नन्हे ने एक किताब भेजी है, ‘लोकतंत्र के टूटे स्तंभ’, वह यू ट्यूब पर इसे सुनता है।शाम को पापाजी से बात हुई, वह टीवी पर प्राइम वीडियो नहीं देख पा रहे थे।जून ने उन्हें उपाय बताया, शायद बाद में देख पाये हों।  


जून आज सुबह जल्दी चले गये।शनि व रविवार को उन्हें असोसिएशन के काम में और अधिक समय देना होगा।वह अपने कार्य में बहुत रुचि ले रहे हैं, और उन्हें अपने काम में बहुत आनंद आ रहा है। उसने काव्यालय में एक कविता प्रकाशित की। छोटी ननद ने बताया छोटे पुत्र का कॉलेज दो वर्ष के बाद खुल रहा है। 


आज एक परिचित दंपत्ति की शादी की सालगिरह है।उनकी जीवन यात्रा में एक मात्र ऐसा परिवार, जो उनसे ऐसा नाराज़ हुआ कि माना ही नहीं। ख़ैर ! आज सुबह शिव सूत्र पर चर्चा सुनी।वक्ता के अनुसार शिव रात्रि का अर्थ है, अज्ञान की रात्रि में प्रकाश का अवतरण और ज्ञान में जागरण ! उन्होंने पाणिनि तथा पतंजलि व्याकरण के बारे में बताया, जो शिव के डमरू से निकली ध्वनियों के आधार पर बनाया गया था। दोपहर एओएल के अनुवाद कार्य में बीती ।पापाजी ने कहा, आत्मा में रहने से मन में शांति बनी रहती है, शरीर में तो कुछ न कुछ लगा ही रहता है।आज एक महिला ब्लॉगर से बात हुई, उनके तीन पुत्र हैं, एक सिडनी में दो बैंगलोर में हैं। वह मध्य प्रदेश आती-जाती रहती हैं, पर अब ज़्यादातर यहीं रहेंगी। वह बहुत अच्छी लेखिका हैं। कभी न कभी उनसे मुलाक़ात भी हो ही जाएगी। 


आज सुबह पहली मीटिंग में कुल छह महिलाएँ आयी थीं। पंचायत की अध्य्क्षा कुछ देर से आयीं, पर उन्होंने काफ़ी ध्यान से चर्चा में भाग लिया। काफ़ी विषयों पर बात हुई। नये लोगों से परिचय हुआ। जून ने मीटिंग का सार लिखने में मदद की। कल वह एक नयी सोसाइटी देखने जा रहे हैं। आज सुबह नन्हा आया था, कंप्यूटर का एक पार्ट खोल कर ले गया। बिटकॉइन माइनिंग का उसका स्वप्न बीच में ही बिखर गया है।  


Tuesday, April 7, 2026

अनंत से टक्कर - माइकल फ़िशमैन की किताब

  अनंत से टक्कर - माइकल फ़िशमैन की किताब 


आज मृणालज्योति में शिक्षक दिवस मनाया गया। एक शिक्षिका ने उनकी तरफ़ से उपहार ख़रीद कर बाँटे, तस्वीरें भेजी और शाम को एक अन्य शिक्षिका ने फ़ोन पर बात की।नूना के मन में  कितनी ही स्मृतियाँ सजीव हो उठीं। सुबह रामचंद शुक्ल का “कविता क्या है” निबंध सुना, कविता के बारे में कल रात को भी यू ट्यूब पर सुना था। सारे विचार और भाव गुनते-गुनते मन काव्यमय हो चुका था। दोपहर को एक लेख लिखा, काव्यालय में भेजा है, आगे हरि इच्छा! शाम को पापा जी से बात की, आत्मज्ञान पाने का ख़्याल वह संतों, महात्माओं के लिए छोड़ देना चाहते हैं, पर नूना को लगता है, ध्यान और समाधि का अभ्यास करना उनका काम है, शेष परमात्मा की कृपा! 


सुबह वे टहलने गये तो भीतर एक स्थिर तत्व की धारणा की। शरीर चल रहा था, पर भीतर कोई स्थिर था। बाद में प्राणायाम के बाद बाहर शोर था, भीतर मौन था। शाम को ध्यान के लिए बैठी तो मंत्रजाप के साथ अर्थ भी भासित हो रहा था। शाम को पापाजी को बताया, चेतना चारों ओर है, मन को उसकी ओर ट्यून करना है, अर्थात मन का सुर उसके साथ मिलाना है। दो दिन बाद यहाँ गणेश उत्सव आरम्भ हो रहा है, सुंदर पंडाल पहले ही लग गया है। एक दिन नैनी ने एक फ़ार्म हाउस में स्थापित गणपति को देखने को भी बुलाया है।


आज का दिन गणपति के नाम था, सुबह फार्म हाउस, दोपहर को पड़ोसी के यहाँ और शाम को सोसाइटी की सार्वजनिक पूजा में वे सम्मिलित हुए।ललिता सहस्रनाम का पाठ भी हुआ, कल दोपहर विष्णु सहस्रनाम का जाप है, पीत रंग के वस्त्र पहनकर जाना है, परसों हरे। 


आज ग्यारह सितम्बर की घटना को हुए बीस वर्ष हो गये, नूना को आर्ट ऑफ़ लिविंग कोर्स किए भी। गुरुजी ने आज मुरुगन मंजुल वाटिका का उद्घाटन किया।


आज गणेश पूजा का विसर्जन हो गया। उन्होंने शयन कक्ष के बाहर बने बड़े से छज्जे पर बैठकर एक ट्रैक्टर पर गणपति की सजी-धजी विशाल प्रतिमा को ले जाते हुए देखा।कुछ लोग नाच रहे थे, कुछ एक-दूसरे पर रंग लगा रहे थे, ढोल आदि बज रहे थे। 


आज छोटी ननद से एक परिचिता के बारे में बात हुई। इसी महीने कोर्ट में केस की अंतिम तारीख़ है, शायद तलाक़ का फ़ैसला हो जाये। परसों नूना से उसके पति ने बात की थी, कह रहा था, रिश्ते निभाना इतना सरल भी नहीं होता।पत्नी के ख़िलाफ़ तलाक़ का केस उसी ने दाखिल किया है और अब चाह रहा है, समझौता हो जाये, पर इसके लिए पहल भी ख़ुद नहीं करना चाहता। कोई और उसकी बात पत्नी को जाकर बताये और वह सब कुछ भुलाकर उसे माफ़ कर दे।कितना विचित्र है मानव का मन ! अपनी गलती देखना ही नहीं चाहता। अक्सर पति-पत्नी एक दूसरे से सदा परेशान रहते हैं। अब हर समय कोई किसी की जी-हजूरी तो नहीं कर सकता, हर आत्मा स्वतंत्र है। जीवन सभी को एक सा मिला है, ताली दोनों हाथ से बजती है। 

 

आज हिन्दी दिवस पर हिंदी भाषा पर पापाजी से चर्चा हुई, ध्यान के बारे में भी।सजगता ही ध्यान है, सजगता ही ज्ञान है, वही शांति है और वही प्रेम है। जब वह सजग होती है, भीतर एक शक्ति का अनुभव होता है। कल रात साढ़े ग्यारह बजे घर की सारी बत्तियाँ अपने आप जल गयीं, नींद खुल गई, फिर देर तक नहीं आयी। ऑटोमेशन में ही शायद कुछ गड़बड़ी हुई।


आज दोपहर वे कब्बन पार्क घूमने गये। यह पार्क १८७० में बनाया गया था, ३०० एकड़ में फैला है। वहाँ के राज्य पुस्तकालय के हिन्दी विभाग में कई किताबें देखीं। तेलगू कवि सी एन रेड्डी की किताब ‘कविता मेरी सांस’ की एक सुंदर कविता पढ़ी। डिजिटल फॉर्म में उसे यह पूरी किताब मिल गई है। 

आज मोदी जी का जन्मदिन है।नूना ने उनके लिए एक कविता लिखी। उन्होंने शंघाई में अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के सत्ता ग्रहण करने को मान्यता नहीं दी, बल्कि इसे ग़लत बताया है।उनके अनुसार यह समावेशी सरकार नहीं है। इंसानियत के नाते भारत फिर भी उनकी सहायता करना चाहता है। भांजी और भतीजी का जन्मदिन भी एक दिन पड़ता है, उनके लिए भी उसने कविताएँ लिखीं। आज सुबह नींद खुली तो एक स्वप्न में ड्राइवर एक गाड़ी को गोल-गोल घुमा रहा था, जैसे मन कल्पना के घोड़े दौड़ाता है, पर कहीं नहीं पहुँचता। वास्तव में आत्मा को कहीं पहुँचना ही नहीं है, थमकर ख़ुद को देखना भर है!  


कल सुबह वे एक पुराने मित्र के यहाँ गये थे, एक दिन व एक रात बिताकर आज लौट आये। कितनी ही पुरानी बातें की, उनका नया घर देखा और सोसाइटी में टहलते रहे। बातों-बातों में सखी ने कहा, वे लोग एक कमरे में सामान रखकर, घर किराए पर देकर असम चले जाएँगे, ऐसा विचार कर रहे हैं। 


सलारपुरिया सिलेस्टा का 

फ़्लैट नंबर चार सौ चार 

रहता है जहाँ दशकों पुराना 

एक मित्र परिवार 

घर जैसा मिला वहाँ आदर सत्कार 

अपनापन और सहज प्रेम प्यार 

झील किनारे बैठ कर 

गुजारी शाम 

लौटते पक्षियों को निहार 


आज नूना ने अमेजन से मँगवायी माइकल फ़िशमैन की पुस्तक ‘स्टमबलिंग इनटू इनफिनिटी’ पढ़नी आरम्भ की है। लेखक वर्षों से आर्ट ऑफ़ लिविंग से जुड़े रहे हैं ।उनकी आध्यात्मिक यात्रा व जीवन के संघर्ष के बारे में यह पुस्तक है। अवश्य ही उसे अच्छी लगेगी। पापा जी ने आज “एक ओंकार सतनाम…” का अर्थ बताया। शाम को आश्रम में स्वामी अलेक्ज़ेंडर मिले, वह “श्री श्री योग भाग-२”  सिखा रहे हैं। वर्षों पूर्व असम में वह उन्हें मिले थे और उनके साथ बेसिक कोर्स भी किया था।जून आज असोसिएशन की पहली मीटिंग में भी गये थे।


गुरुजी ने कुछ दिन पूर्व ‘मृत्यु’ पर कुछ प्रश्नों के उत्तर दिये थे, नूना को उन्हीं को आधार बनाकर एक लेख लिखना है। उसने सोचा, कल जून गाड़ी की सर्विसिंग के लिए जाएँगे, उस समय लिखेगी।रात को एक विचित्र स्वप्न देखा, कोई सामान ठीक कर रही है कि अचानक हाथ के ऊपर से छोटे-छोटे हाथी गुजरने लगते हैं, हल्के बैंगनी रंग के हाथी हैं, इतने स्पष्ट और सुंदर दिख रहे थे, उनके पैर व सूंड, सभी कुछ सुडौल थे, पर शीघ्र ही आँख खुल गई और जाना कि यह स्वप्न ही था। माइकल फ़िशमैन की किताब में कितने ही चमत्कारों का ज़िक्र है, गुरुजी के साथ जो भी जुड़ा है, उसके जीवन में चमत्कार होते ही रहते हैं। आज असोसिएशन की सभा उनके घर पर थी। 


आज पूरा दिन बहुत ही अलग बीता। कल रात स्वप्न में गुरुजी को देखा था, सुबह तो उसका असर था ही, शाम तक मन इतना हल्का हो गया, जैसे कोई पुराना बोझ उतर गया हो। यह बोझ भीतर था, इसका भी बोध नहीं था, यह जैसे अस्तित्त्व का भाग ही बन गया था, ह्रदय पर जैसे कोई चट्टान पड़ी थी, जो पहले हटी तो थी पर थोड़ा सा भाग वहीं रह गया था, उसे संभाल कर रखा हुआ था। भय, सहानुभूति पाने की आकांक्षा, स्वयं को पीड़ित समझने की भावना, और स्वयं के प्रति हुए अन्याय को सहेज कर रखने का प्रयास, अपने रोष को उचित ठहराने के तर्क ! इतना क्रोध तो स्वाभाविक है, आख़िर अपना भी तो कोई स्वाभिमान है, अपने को श्रेष्ठ मानने की भावना, ये सारे पत्थर ही थे, जो उस चट्टान को वहाँ रखे हुए थे। अच्छा है कि घर जाने से पहले यह बोध घटा है। मन हल्का है भीतर तक। स्वयं को पूरी तरह स्वीकार करने के बाद ही कोई इस जगत को पूरा स्वीकार कर पाता है। यह जगत परमात्मा की लीला है। हर पल यहाँ कितना कुछ घट रहा है। वह अनंत चैतन्य सब जानता है, क्योंकि जानने वाला वही है। मन सीमित है, बुद्धि एक पोखर के समान है, पर सागर विशाल है। उस विशाल के प्रति पूर्ण समर्पण ही मुक्त करता है। उसे अपने लिए कुछ नहीं करना है, उसी ने जन्म दिया है, वही कुशलक्षेम की रक्षा करेगा। आज की रात कितनी भिन्न होगी और स्वप्न कितने अनोखे ! आज वह भी असोसिएशन की मीटिंग में गई थी, जून को अध्यक्ष चुना गया है।     


  


Tuesday, December 3, 2019

पंचदशी का ज्ञान



सुबह मौसम अच्छा था. स्कूल में एक छात्रा को योग कक्षा लेने को कहा, जब वह यहाँ नहीं रहेगी तो वह आराम से सिखा सकेगी. अभी-अभी छोटी बहन से बात की, पिछले एक महीने से वह बहुत व्यस्त थी. पहले उसकी बड़ी बिटिया आयी, जो विदेश में रहती है, वह व्यायाम करती है, फिट रहती है. एओल का एडवांस कोर्स भी उसने किया और डीएसएन भी करने वाली है. उसकी जीवन चर्या देखकर माँ खुश है, फिर उसकी ननद परिवार सहित आयी, उसके बाद छोटी बिटिया, जो कल लगभग तीन महीनों  के लिए इंटर्न बनकर दक्षिण अफ्रीका गयी है. कनाडा से केन्या के स्कूलों को पढ़ाया जाने वाला गणित उनके लिए कितना उपयोगी है, इस पर रिसर्च करेगी. आज सुबह पिताजी से बात की और छोटे भाई से भी, वह उन्हें एक बार फिर कम्प्यूटर पर वीडियो देखना सिखा रहा था. यू-ट्यूब पर अनुभवानन्द जी को डिब्रूगढ़ मेडिकल कालेज में बोलते सुना, रिकार्डिंग अच्छी नहीं हुई है, पर उनका वही अंदाज है. उन्होंने नब्बे किताबें लिखी हैं. बड़ी-बड़ी किताबें भी. उनकी बातें सुनकर मन झट प्रेरित हो जाता है, जैसे गुरूजी के वचन सुनकर मन शांत हो जाता है. सदगुरू जीवन को पंख देते हैं, वे सीमित दायरों से निकाल क्र एक बड़े फलक का दर्शन कराते हैं. उनका संकीर्ण मन पहले-पहल विरोध करता है, पर आकाश में उड़ना कौन नहीं चाहता. जून ने मुल्तानी मिट्टी मंगाई है, देह पर उसका लेप करने से पित्ती ठीक होती है.

कल दिन भर व्यस्तता बनी रही. सुबह रविवार के विशेष कार्य, दोपहर को बच्चों के साथ गुरूजी का जन्मदिन मनाया. शाम को एओल सेंटर गए वे. कार्यक्रम अच्छा रहा. साढ़े आठ तक वापस लौटे. नैनी ने सुंदर बड़ी सी माला बनाकर दी थी. पहले भी वह बड़ी और छोटी माला बनाकर दे चुकी है. गुरूजी का जन्मदिन सारे विश्व में मनाया गया. बंगलूरू आश्रम में भी कई धर्मों के पुरोहित आए थे. सभी ने उन्हें बधाई दी. युगों-युगों में कोई ऐसी महान आत्मा धरती पर जन्म लेती है. इस समय रात्रि के आठ बजने को हैं. बाहर वर्षा हो रही है. आज सुबह इस मौसम में पहली बार वे टहलकर आते समय भीग गए. पहले हल्की सी बूंदा-बूंदी थी, फिर तेज वर्षा होने लगी. जून ने दौड़ना शुरू किया, वह भी भागने लगी, फिर बच्चों के स्कूल के शेड में आकर रुके वे. कुछ देर बाद वर्षा की गति कम हुई तो घर लौटे. नाश्ते में मकई का दलिया बनाया जी बैंगलोर से लाये थे, सोनू ने दिया था. दोपहर को सहजन की सब्जी बनायी, मोटे वालर सहजन, जो उस दिन बगीचे से तोड़े थे. इससे पहले वह बिलकुल कोमल लगभग गुलाबी सहजन ही खाते थे, मोटे बाँट देते थे, पर इनका अलग स्वाद है. इंसान को अपनी सीमाएं बढ़ाते रहना चाहिए, वे ऐसा कुछ हर दिन करें जो पहले कभी न किया हो. वे देह को ठीक करने के लिए हजार उपाय करते हैं पर आत्मा या मन को अपने सहारे या भगवान के सहारे छोड़ देते हैं. कल से शाम की योग कक्षा में  श्री श्री की पुस्तक का एक पृष्ठ पढ़ना आरम्भ किया है. उन्हें हर दिन एक नोटबुक में कुछ न कुछ लिखने को भी कहा है. एक साधिका ने अपना लिखा भजन गया, धुन भी  मनहर थी.

आज सुबह निकले तो आकाश नीला था, वर्षा काफी पहले होकर रुक चुकी थी. आज सफाई कर्मचारी फिर नहीं आया. नैनी ने घर की सफाई की, उसे कुछ मेहनताना देना ठीक रहेगा. दुबली-पतली है और तीन बच्चों को संभालने व घर का काम करने में दिन भर लगी रहती है. बारह बजने वाले हैं, जून अभी तक नहीं आये हैं. आज उसने गोभी वाले चावल बनाये हैं, जो कल शाम वे लाये थे. शिलांग की गोभी, मई के महीने में. दस दिनों बाद उन्हें भूटान की यात्रा पर निकलना है. आज प्रतियोगिता के लिए कहानी लिखना आरंभ किया है. यू ट्यूब पर ‘पंचदशी’ सुना, अच्छा लगा. इस ग्रन्थ का नाम पहली बार सुन रही है. भारत का प्राचीन साहित्य इतना विशाल है कि कोई सामान्य जन एक जन्म में इसे पढ़ ही नहीं सकता. दोपहर को मृणाल ज्योति जाना है. चाइल्ड प्रोटेक्शन कमेटी की मीटिंग है. विशेष बच्चों को होस्टल में रखकर स्कूल चलाना कोई आसान काम नहीं है. उन्हें साफ-सुथरा रहना सिखाना पड़ता है. उन्हें अपना काम खुद करना भी सिखाना पड़ता है. जो सहायक व अध्यापक वहाँ काम करते हैं, उनका वेतन भी अधिक नहीं है. कई समस्याओं पर चर्चा हो सकती है.

आज आडवाणी जी की लिखी किताब पढ़ी. बहुत रोचक है. उनके जीवन के साथ-साथ देश के इतिहास का भी ज्ञान हो रहा है. गुरूजी की पुस्तकें निकालकर योग साधिकाओं के सामने रखीं, पर किसी ने कोई पुस्तक नहीं ली, शायद उन्हें पढ़ने का शौक नहीं है. आजकल रमजान का महीना चल रहा है. पिताजी का फोन आया दोपहर को. जून ने व्हाट्सऐप का फैमिली ग्रुप कुछ दिनों के लिए छोड़ दिया है. वह यह बात समझ गए कि बड़े-बड़े वीडियो और पोस्ट देखने का समय नहीं है किसी के पास, साथ ही मोबाइल में स्पेस भी नहीं बचता। समाचारों में सुना कर्नाटक में बीजेपी सरकार बना रही है, उन्हें ग्यारह विधायक मिल गए हैं अर्थात उन्होंने खरीदे हैं ! 

Thursday, November 28, 2019

सिंधी कोकी




रात्रि  के आठ बजने वाले हैं, आज सुबह उठने में देर हुई. उठते ही पहले की तरह मन उत्साह व शक्ति से भरा नहीं था. नींद जैसे पूरी न हुई हो, या फिर नींद पूरी नहीं है यह भाव अथवा विचार.. उसने स्वयं ही नींद को मृत्यु की निशानी मानकर सम्मान देना बन्द कर दिया था. सोने से पूर्व ध्यान करके मन को इतना होश से भर लेती थी की नींद के लिए जरूरी तमस कहीं दूर चला जाता था, निद्रा भी आवश्यक है पूर्ण स्वस्थ रहने के लिए, ध्यान के समय ध्यान करना है और नींद के समय नींद लेनी है. पिछले दिनों ध्यान के बाद कुछ सुनकर सोने का क्रम बना लिया था तो मन उस पर भी चिंतन करता ही रहता होगा. खैर .. अब भी कुछ देर नहीं हुई है, जब जागो तभी सवेरा ! दिन सामान्य रहा. मौसम आजकल बहुत सुहावना है. पंछियों का कलरव दिनभर गूँजता रहता है. गंधराज की सुगन्ध भी आती होगी पर उसकी सूंघने की क्षमता कुछ घट गयी है. कोई अन्य गन्ध ही उसे घेरे रहती है, कभी लगता है यह कोई रोग है  फिर लगता है नहीं इसका अध्यात्म से ही कोई संबंध है. परमात्मा उसके साथ है, उसे सब ज्ञात है. आजकल उसे अपनी अल्पज्ञता का बहुत भान होता है, लगता है उसे कुछ भी ज्ञात नहीं है, बिलकुल अज्ञानी जान पड़ती है स्वयं को. वैसे भी जब इतना विराट आयोजन चल रहा है, पंछी बिना पढ़ाये  ही अपने गीत बना लेते हैं, ऋतुएँ बदल जाती हैं तो उसमें उसका होना भी तो शामिल है. अस्तित्त्व को जो बनाना हुआ बनाएगा, करना हुआ कराएगा. शरीर प्रकृति का अंश है और आत्मा परमात्मा का, मन समाज का दिया हुआ है. ‘मैं’ एक  भ्रम ही है. इसी देह को तुष्ट करने के सारे प्रयास होते हैं . पर देह तो जड़ है, सूक्ष्म इन्द्रियां चेतन होती हुई प्रतीत होती हैं जो मन को नचाती हैं, जैसे मन बुद्धि को नचाता है और जैसे बुद्धि स्वयं को नचाती है . स्वयं जो आत्मा के सान्निध्य में समीपता का अनुभव कर सकता था, इतर सुखों के लिए लोभ से भरा नजर आता है, गिरने की भी कोई गरिमा होनी चाहिए न, आसक्ति उसी को तो कहते हैं जो आ तो सकती है पर जा नहीं सकती. सत्य में स्थित होना है तो हर आसक्ति को जाना होगा.



आज ‘आर्ट ऑफ़ लिविंग’ कोर्स का तीसरा दिन था, सोचा था कि जायेगी पर शाम को प्रेजिडेंट का संदेश फोन पर पढ़ा, गवर्निंग बॉडी की मीटिंग बुलायी है. स्कूल में एक बच्चे को चोट लग गयी है. जब वहां गयी तो  पता चला आँख के ऊपर माथे पर दरवाजे से चोट लगी है, हाथ में हल्का फ्रैक्चर भी है, डिब्रूगढ़ ले जाना पड़ा है बच्चे को. प्रिंसिपल भी आयी थीं, दो शिकायतें भी आयी थीं दो बच्चों के माता-पिता की और से, दो अध्यापिकाओं के खिलाफ. शायद उन्होंने बच्चों पर ज्यादा कठोरता दिखाई थी. मीटिंग में और किसी विषय पर कोई बात नहीं हुई. क्लब के स्थापना दिवस पर सफाई का सेवा कार्य करने के लिए जो सुझाव व तस्वीर उसने भेजी थी, उस पर भी कोई टिप्पणी नहीं की किसी ने. जून आज गेस्टहाउस गए हैं, आजकल वह सेफ्टी विभाग भी देख रहे हैं कोई ऑडिटिंग टीम आयी है, जिसको पार्टी दी गयी है. जाने से पूर्व उन्होंने पिताजी से बात की, उन्हें जून का भेजा वेट वाइप्स का पैकेट मिल गया है.



ग्यारह बजने वाले हैं. अभी-अभी बिजली चली गयी. मौसम आज गर्म है. बाहर से एक कोयल के कूकने की आवाज आ रही है. नैनी ने बगीचे से ढेर सारी गाजरें लाकर दीं। आजकल फूलों से भी बगीचा भर हुआ है. पिटूनिया, गंधराज, श्वेत लिली, जरबेरा अपने पूरे शबाब पर हैं. माली भी इस हफ्ते रोज ही आ रहा है. उस समय जून आ गए, फिर दोपहर का भोजन, कुछ देर विश्राम, ब्लॉग लेखन, सांध्य योग कक्षा, रात्रि भोजन तथा बाद का भ्रमण, सब कुछ करने के बाद अब पुनः डायरी उठायी है, भोजन करते समय जून ने ‘कोकी’ बनाने  का वीडियो  दिखाया. किन्हीं पूनम जी ने इस सिंधी नाश्ते की अच्छी सी विधि सिखाई है. उनका कहना है पहली तारीख को मई दिवस पर दफ्तर बन्द है उसी दिन यह नाश्ता बनाएंगे. उसके बाद उन्हें शिवसागर जाना है. आज दो वर्ष पूर्व की डायरी में चेट्टीनाड की साड़ियों का जिक्र पढ़ा, जून अगले महीने फिर वहीं जाने वाले हैं. कल पुस्तकालय से दो नई किताबें लायी, एक ‘न्यू एज पेरेंटिंग’ पर है और दूसरी ‘जे पी वासवानी’ की लिखी है, जो परमात्मा के प्रति प्रेम से भरी हुई है. भक्ति और श्रद्धा जीवन में न हों तो जीवन कितने सूना-सूना रहता है. परमात्मा जो सदा ही मानव के साथ है, वह उससे दूर ही रह जाता है. वे पूरी तरह उसके प्रति समर्पित नहीं होते तो वह भी उन्हें पूरा नहीं मिलता. आज दोपहर को कितनी गहरी नींद आयी, पिछले दिनों रात की नींद गहरी नहीं थी, नींद में वे अहंकार से मुक्त हो जाते हैं और उस परम् के साथ एक हो जाते हैं. आज योग कक्षा में गुरूजी का ज्ञान सुनकर एक साधिका ने कहा, यह ज्ञान पहले मिला होता तो इतना दुःख नहीं सहना पड़ा होता. 

Thursday, September 19, 2019

फूलों की तस्वीर






आज कामवाली नैनी की जगह उसकी भांजी काम करने आयी है, उन्हें भी बाद में एक सहायिका को नियुक्त करना होगा, इतने बड़े घर की देखभाल व सफाई के लिए कोई तो चाहिए होगा. जून नेट फ्लिक्स पर 'तीन' देख रहे हैं, अमिताभ बच्चन की फिल्म है यह. उसे फ़िल्में देखने का जरा भी मन नहीं होता अब, जगत ही नाटक लगने लगे तो किसी और नाटक की जरूरत ही नहीं रहती. यहाँ आने के बाद एक बार भी तैरने नहीं गयी, मौसम सदा ही ठंडा रहता है, भीगा-भीगा सा. लेखन कार्य भी बंद है. अपना घर अपना ही होता है, यह बात उनके मन को कितना संकुचित कर देती है, अपना तो यह सारा जहान है !

दोपहर के बारह बजकर दस मिनट हुए हैं. मौसम हल्का गर्म है, धूप तेज है. शाम को मॉल जाना है. वाशिंग मशीन की एएमसी करके अभी-अभी कर्मचारी गया है. कल रात देर से सोये, नन्हा नये घर के लिए खरीदने वाली वस्तुओं की सूची बना रहा था. सोनू देर से लौटी, उसके बाद साढ़े ग्यारह बजे वे सोने गये. सुबह मन्दिर के बाहर बैठने वाली मालिन से फूल लेने गये, छोटी-छोटी दो मालाएं और गुलाब के ढेर सारे फूल ! वह मर्फी की किताब के साथ कार्नेगी की एक पुस्तक भी पढ़ रही है. जीवन को जब तक कोई दिशा नहीं मिलती, वे नया सीखने में उत्सुक नहीं रहते. आत्मा का स्वभाव है जानना, वह हर पल नयी है और नया सीखना चाहती है. अभी क्रोम बुक नही खोली है, आज की पोस्ट लिखनी है.

आज पूरा एक सप्ताह हो गया उन्हें यहाँ आए हुए. नन्हे व सोनू का घर बहुत सुंदर है, सारी सुख-सुविधाओं से पूर्ण, उनका आपसी व्यवहार भी बहुत अच्छा है, भरोसे और सहयोग से भरा ! शाम को नेत्रालय जाना है, परसों डेंटिस्ट के पास. इंटीरियर डेकोरेटर के पास सप्ताहांत में. आज बड़ी भाभी की तीसरी बरसी है. समय जैसे पंख लगाकर उड़ता है. आज सुबह पांच बजे नींद खुली. सुंदर स्वप्न चल रहा था, मुस्कान थी चेहरे पर जब आँख खुली. फूलों की तस्वीरें उतारीं. कल शाम को एक जगह सुंदर फूल देखे थे, पर आज सुबह नहीं थे, माली ने कटिंग कर दी, पता नहीं कहाँ फेंके होंगे श्वेत व रक्तिम वे पुष्प ! जून ने कल रात ढेर सारा पुलाव बना दिया, नन्हा सुबह टिफिन में वही ले गया है. जाने से पूर्व घर भी ठीक-ठाक कर के जाता है, उसे जरा भी काम नहीं करने देता. उसे अँधेरे से डर लगता है, बचपन में ही यह डर उसके मन में बैठा होगा. उसके खुद के मन में भी कितने भय के संस्कार थे, जिनका सामना करने से वे समाप्त प्रायः हो गये हैं. जून आज सुबह भविष्य के लिए चिंतित थे जब वे वृद्ध हो जायेंगे. यह घड़ी पर्याप्त है जीने के लिए, न कोई भूत सताये न भविष्य  सताये..वर्तमान का यह पल ही पर्याप्त है ! नेट पर एक लेख पढ़ा मछली खाने को लेकर, लेखिका को एक रोग है जो व्यक्ति को कमजोर कर देता है. गेहूँ, चावल, दूध के बने पदार्थ उन्हें नहीं पचते. उसे इतने बड़े विश्व में इस पल अथवा तो ज्यादातर समय किसी से कुछ लेना-देना नहीं होता, वह अपने आप में ही प्रसन्न है ! कोई जवाबदेही न हो किसी के भी प्रति, यही तो सच्ची आजादी है ! यह आजादी जिसने एक बार अनुभव कर ली वह भला क्यों बंधना चाहेगा ! सेवा का बंधन भी नहीं, कर्त्तव्य का बंधन भी नहीं..सदा-सर्वदा मुक्त और अपनी आजादी में जो हो उसे होने देना..जो अस्तित्त्व कराए हो जाने देना !

दस बजे हैं सुबह के, आज असमिया सखी आने वाली है, कई बार पहले भी उसने कहा, अंततः वे लोग यहाँ आ रहे हैं. हो सकता है एक और मित्र परिवार भी आये. आज बहुत दिनों बाद दीदी का ब्लॉग पढ़ा. शाम को बड़े भाई से बात की, कल दोपहर वह परेशान हो गये थे, अकेलेपन का दंश और भाभी की उपस्थिति का अभाव उन्हें चुभ रहा था, पर स्वयं को स्वयं ही समझाकर वह उस स्थिति से बाहर आ पाए. मन का काँटा मन से निकलता है फिर उस कांटे को भी फेंक देना है. मौसम आज अच्छा है, बाहर का भी और मन का भी !

Wednesday, August 28, 2019

जोसेफ मर्फी की किताब



रात्रि के आठ बजे हैं. यात्रा की तैयारी लगभग हो गयी है. अभी थोड़ी बहुत पैकिंग शेष है, जैसे तैरने का सामान, डायरी, किताबें आदि. शाम को लाइब्रेरी गयी दो नई किताबें इश्यू करायीं, एक सुधा मूर्ति की दूसरी डाक्टर जोसेफ मर्फी की 'पॉवर ऑफ़ सबकॉनशियस माइंड' शाम को योग कक्षा में कोर्स में सीखे चक्र-ध्यान के बारे में बताया, उन्हें डिवाइन शॉप से खरीदीं किताबें पढने को दीं और सकारात्मक चिन्तन करने को भी कहा. उससे पूर्व एक सहप्रतिभागी आया था, उसे हरिओम ध्यान के बारे में बताया. कोर्स के बाद जब सुबह स्कूल गयी तो तन बिलकुल हल्का था. योग सिखाते समय फिर एक पतंगा आकर सम्मुख बैठ गया था, परमात्मा का संदेश वाहक..आज बहुत दिनों बाद ब्लॉग पर लिखा. काव्यालय की संस्थापिका के ब्लॉग को सब्सक्राइब किया, हर मंगलवार को उस पर पोस्ट आती है. नैनी ने अपनी बेटी के स्कूल प्रोजेक्ट के लिए कमल का एक सुंदर फूल बनाया, उसके लिए नयी ट्यूटर भी खोज ली है. उसके माता-पिता नहीं रहे जब वह छोटी थी, नानी के यहाँ रहकर पली, ज्यादा पढ़ाई नहीं कर पायी पर अपने बच्चों को वह बहुत पढ़ाना चाहती है.

कल उन्हें यात्रा पर निकलना है. बड़ा सा सूटकेस जो वे ले जाने वाले हैं, काफी भारी हो गया है. कभी-कभी खुद भी उठाना पड़ सकता है, न भी पड़े तो जो भी उठाएगा उसकी कमर पर असर पड़ सकता है. आज विश्व ऑटिज्म डे है, शायद मृणाल ज्योति में कुछ आयोजन हुआ हो इस उपलक्ष में. बाहर बच्चों के झूला झूलने की आवाजें आ रही हैं, कल से उन्हें पूरा बगीचा मिल जायेगा. दीदी का फोन आया, दोपहर को वे दोनों सिडनी जा रहे हैं, एक डेढ़ महीना वहाँ रहेंगे. बेटी ने टिकट भेज दी है, पिछली बार तीन साल का वीजा मिल गया था, जिसमें हर वर्ष तीन महीने वे लोग सिडनी में बिता सकते हैं. बंगलूरू में उनके नये घर की चाबी मिल गयी है, वर्ष के अंत तक उसमें साज-सज्जा का कार्य हो जाना चाहिए. दोपहर की योग कक्षा में आज पहली बार छह महिलाएं आयीं, साथ में दस बच्चे.

आज सुबह चार से थोड़ा पहले उठे, और साढ़े पांच बजे तक तैयार थे. डिब्रूगढ़ से कोलकाता की उड़ान समय पर थी, जहाँ अगली फ्लाईट के लिए साढ़े पांच घंटे बिताने थे. डाक्टर जोसेफ मर्फी की पुस्तक पढ़ते हुए समय कैसे बीत गया पता ही नहीं चला. एक सखी बंगलूरू से वापस जा रही थी, कुछ देर उससे बात की. उसका पुत्र हैदराबाद में कानून पढ़ रहा है, जिसने आधुनिक कार्लमार्क्स कहे जाने वाले एक समाजविज्ञानी का इंटरव्यू लिया, बेटी बंगलूरू में जॉब करती है. रात्रि साढ़े आठ बजे घर पहुँचे तो नन्हा और सोनू घर आ गये थे. कुक खाना बना कर चला गया था. बड़े भाई की बिटिया और उसकी एक सखी भी आये थे, नन्हे का एक मित्र भी, सबने मिलकर रात्रि भोजन किया. मौसम गर्म था.

सुबह साढ़े पांच बजे उठे, साधना की फिर कुक के हाथ की बनी चाय पी. पोहा बनाया था उसने नाश्ते में, सोनू ने फल काट दिए. उसके बाद इंटीरियर डेकोरेटर से मिलने गये, जिसने ३डी डिज़ाइन दिखाए घर के, काफ़ी प्रभावित करने वाले थे. उसके बाद एक संबंधी के यहाँ लंच खाया, अगले महीने होने वाले उनकी बेटी के विवाह में आ नहीं पायेंगे, सो उसे उपहार दिया. एक सखी से बात की, उसकी देवरानी की बेटी जो बंगलूरू में रह कर पढ़ाई करती है, बुखार से पीड़ित है, वह उनके घर रहने आई है. जून ने बताया, उनके दफ्तर की वह महिला अधिकारी फिर अस्पताल पहुँच गयी है. जीवन कितना नाजुक है और क्षण भंगुर भी, बड़े जतन से इसकी देखभाल करनी पडती है. उसे स्मरण हो आया, घर पर महिलाएं योग करके वापस जा रही होंगी, वह चाबी देकर आई थी. यहाँ उसकी दिनचर्या बिलकुल बदल गयी है. नीचे पूल में बच्चों की आवाजें आ रही हैं.

Monday, August 21, 2017

चेत्तना की ज्योति


शाम के साथ बजने वाले हैं. आज दिन भर धूप के दर्शन नहीं हुए. इस समय तापमान छह डिग्री है. सुबह उठकर कुछ देर प्राणायाम किया फिर बाहर टहलने भी गयी, चारों और श्वेत कोहरा था जो चेहरे पर शीतलता की छाप छोड़ जाता था. उसके बाद किचन में पहले नाश्ता फिर भोजन बनाने-खाने-खिलाने में व्यस्त. महरी दो दिन से नहीं आ रही है. छोटी भाभी बहुत मिलनसार है और सारा काम आराम से निपटा लेती है. दीदी परिवार सहित कल आयीं थीं, सबसे मिलकर अच्छा लगा. बड़ी भांजी से फोन पर बात हुई, चचेरा भाई मिलने आया था, वह कुछ ज्यादा बोलने लगा है, अकेले रहने के कारण उसका मन अब शायद पहले सा मजबूत नहीं रह गया है, फिर भी शारीरिक रूप से पहले से स्वस्थ लगा. पिताजी आज सुबह कह रहे थे, यात्रा पर जाने से पूर्व उनका दिल घबराता है, दो दिन बाद उन्हें जाना है.

कल चचेरी बहन अपने दो बच्चों के साथ आयी थी, बच्चों ने नन्हे के साथ अच्छा समय बिताया. आज सुबह नौ बजे घर से चले और ढाई बजे दिल्ली पहुंच गये. बड़ी गाड़ी थी, स्विफ्ट डिजायर, यात्रा आरामदेह थी सिवाय दिल्ली में भारी ट्रैफिक का सामना करने के. मंझले भाई-भाभी का नया घर बहुत सुंदर है. शाम को भाभी की माँ से मिलने गये, जो अस्थमा की मरीज हैं. उसके बाद आर्मी रेस्टोरेंट में रात्रि भोजन के लिए. सूप, सिजलर, पनीर टिक्का, तंदूरी रोटी दाल और एक सब्जी. पिछले दिनों छोटी भाभी ने भी काफी व्यंजन बनाये थे. कश्मीरी चटनी, अप्पा, मलाई मेथी मटर तथा खजूर के लड्डू, हल्दी वाला दूध. कल शाम शायद बड़ी भतीजी मिलने आये. दोपहर को बड़ी भाभी के यहाँ जाना है. जून टनोर में हैं, जो जैसलमेर से भी आगे हैं.

आज ठंड कल से भी ज्यादा है. खिड़की से बाहर सिवाय कोहरे की सफेद चादर के कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा. सुबह छह बजे ही उठ गयी, साढ़े आठ बजे तक तैयार थी. पिताजी भी नहा-धोकर नाश्ता करके बांसुरी बजा रहे हैं, चैन की बांसुरी ! नन्हा कल अपने मित्र के यहाँ रहा, अपने मित्रों के साथ कल रात आग जलाकर उसने उत्सव मनाया. आज उसे वापस जाना है. रात्रि के दस बजने को हैं. ठंड बदस्तूर है. दोपहर को बड़ी भाभी ने सरसों का साग व मक्की की रोटी खिलाई. शाम का भोजन भी वहीं किया और आधा घन्टा पहले ही वे लौटे हैं. परसों इस वक्त वे अपने घर में होंगे, समय कैसे बीत रहा है, पता ही नहीं चल रहा.

वे घर लौट आये हैं. सुबह साढ़े पांच बजे उठे और गोभी के पराठों का नाश्ता करके, निकल पड़े, भाई ने चाय बनाई, जैसे मंझला भाई अपने घर पर बनाता है, जैसे जून यहाँ हार्लिक्स बनाते हैं. बड़े भाई को आटा गूंथते हुए भी देखा, अच्छा लगा, वे पहले से ज्यादा शांत और स्थिर लगे. मंझला भाई भी पहले से ज्यादा स्वस्थ लग रहा था. भाभी लेकिन कुछ ज्यादा ही मोटी हो रही हैं. दोनों की बेटियां बहुत लाड़-प्यार में पली हैं. एअरपोर्ट पर दो किताबें खरीदीं, दो दीदी ने दी हैं, एक पिताजी से पढ़ने के लिए ली है, ‘शिवोहम’, वहाँ पढ़ रही थी, पूरी नहीं पढ़ पायी. बहुत अच्छी किताब है. चेतना का दीपक जलता है देह की उपस्थिति में ही, प्राणवायु ही उस दीपक को प्रज्ज्वलित करती है, देह दीपक है, चेतना ज्योति है, चेतना स्वयं को ज्योति स्वरूप जान ले तो सारा भय नष्ट हो जाता है. पिताजी का गला दिल्ली की ठंड में खराब हो गया है, पर उन्हें वहाँ अच्छा लग रहा है. ठंड से बचने के लिए भाभी ने उन्हें गर्म शाल दी, भाई ने ट्रैक सूट और हर समय वे उनके ध्यान रखते हैं. भाभी की माँ का स्वास्थ्य ठीक नहीं है, वह अस्पताल में हैं, उनसे भी बात हुई. घर आकर अच्छा लग रहा है. परमात्मा उसे किसी उद्देश्य के लिए वहाँ ले गया था. नन्हे ने अपने दिल की बात बताकर स्वयं को हल्का किया, उसका दिल टूटा है पर वह हिम्मती है. भीतर की पीड़ा को व्यक्त नहीं होने देता, स्वयं पर हावी भी नहीं होने देता. परमात्मा ही उसके जीवन का मार्ग तय करने में उसे मदद करेंगे. कल शाम को क्लब में मीटिंग है. अगले हफ्ते प्रेस जाना है. पहली तारीख को एक सखी को भोजन पर बुलाना है. जून ने हरे चने के चावलों बनाये हैं रात्रि भोजन में.


Wednesday, July 12, 2017

किताबों वाला घर


जून का महीना भी कल आरम्भ हो गया. मौसम काफी गर्म है. आज स्कूल गयी थी, करेंट नहीं था, बच्चों को पसीना बहाते हुए व्यायाम/आसन कराए. छोटे बच्चे बहुत आनंद लेते हैं. एओल की टीचर का फोन आया, वह कल से आने वाली थीं, पर अब लडकियों को वहीं बुलाया है. कल से वे जाएँगी. शाम के सवा चार बजे हैं, बाहर धूप इतनी तेज है जैसे भरी दोपहर हो. ब्लॉग पर उसकी कहानी अब अध्यात्म की ओर बढ़ रही है. एक वर्ष पहले से ही भूमिका बननी शुरू हो गयी थी, तभी क्रिया के दौरान वह अनुभव हुआ. सद्गुरू तक उसकी प्रार्थना पहुंच ही गयी थी. कितना विचित्र है परमात्मा का यह चक्र, यह व्यवस्था कितनी अबूझ है. वह परम कितना दूर है पर कितना निकट...जीवन कितना अद्भुत है, यदि वे जाग जाएँ तो हर पल उसकी उपस्थिति का अनुभव कर सकते हैं. स्वप्न की धारा जो भीतर चलती रहती है, जिसने उनकी नींद को भी निर्दोष नहीं रहने दिया और उनके जागरण को भी, उसे रोकना ही साधना का लक्ष्य है. वह धारा उनके नियन्त्रण से बाहर हो गयी है क्योंकि वे इतने कमजोर हो गये हैं. पहले उन्हें जानना होगा किस तरह वे मन से पृथक हैं, जैसे आकाश बादलों के पार है, वैसे ही वे भी मन के पार हैं. स्वयं के मुक्त स्थान में स्थित होते ही वे मन के पार चले जाते हैं. जब वे उस स्रोत से जुड़ जाते हैं, उत्साह से भर जाते हैं, ऊर्जा से भर जाते हैं. उन्हें परमात्मा से जुड़कर पहले शक्तिशाली बनना है फिर इस धारा पर उनका नियन्त्रण होगा !

वही दोपहर की बेला है, पंछियों की आवाज के अतिरिक्त मौन की गूंज ही है जो सुनाई दे रही है. दोनों बहनें सो रही हैं, वे आज सुबह योग की कक्षा में गयी थीं, पहला दिन था, उन्हें आनंद नहीं आया. बच्चे तो बच्चे ही हैं, अब कल वे जाएँगी या नहीं, यह उन पर निर्भर करता है. आज सुबह भीतर जो भय जगा लेडीज क्लब के दफ्तर में चल रहे खिडकियों पर जाली लगाने वाले काम को लेकर, क्रोध के रूप में प्रकट हुआ नैनी की एक भूल के कारण उसके ऊपर, जो आज अचानक ही जल्दी आ गयी थी. एक ही ऊर्जा तो विभिन्न रूपों में प्रकट होती है. सुबह ध्यान किया, केवल शुद्ध चेतना में रहने का अभ्यास, स्वप्न की जो श्रृंखला जो भीतर चलती रहती थी अब खंडित होने लगी है, विचार वे स्वयं ही बनाते हैं और स्वयं ही उनसे पीड़ित होते हैं, सुबह इसका कितना स्पष्ट अनुभव हुआ. परमात्मा कितनी कृपा करता है जो पहले उन्हें प्रेम से भर देता है, वे तो उसे बाद में प्रेम कर पाते हैं. सद्गुरू को आज टीवी पर देखा, fb पर रोज ही देखती है. आज शाम उन्हें क्लब ले जाना है, आज क्लब का स्थापना दिवस है.

टीवी पर आज गुरूजी अपने कार्य के आरम्भिक दिनों के बारे में बता रहे हैं. हर इन्सान को अपना मार्ग स्वयं चुनना होता है और यदि वह सच्चे हृदय से प्रार्थना करे तो ईश्वर स्वयं उसका मार्ग प्रशस्त करते हैं. उन्हें अपने सीमित दायरे से बाहर निकल कर ही कुछ करना होता है. आज उसे क्लब की कुछ सदस्याओं के साथ मोरान ब्लाइंड स्कूल जाना है. सेक्रेटरी का फोन आया, उनके साथ इस वर्ष उसकी कई यात्रायें हो रही हैं, कितना कुछ सीखने को भी मिला है.

आज नन्हे के बचपन के मित्र, असमिया सखी के पुत्र का जन्मदिन था, उसने फोन किया. एक अन्य सखी से बात हुई, उन्होंने पोहा बनाने का अच्छा तरीका बताया, भांजियों ने वैसा ही बनाया. दोनों निकट ही बंगाली की दुकान पर भी गयीं, फल खरीदे और अपने लिए मैगी भी. दोनों बहुत शांत व समझदार हैं, अपने काम से काम रखने वालीं. क्लब की एक सदस्या सदा के लिए जा रही हैं, उनके पति रिटायर हो गये हैं, किताबों से भरा था उनका घर, ड्राइंग रूम में बड़ी सी आलमारी तो भरी ही थी, छोटी-छोटी शेल्फ पर भी ढेरों किताबें सजी थीं. उनके पति लेखक हैं, वे स्वयं भी लिखती हैं. वर्षों से बच्चों के लिए एक सांस्कृतिक विद्यालय चला रही हैं. उसने सोचा उनके लिए भी एक कविता लिखेगी. आज फेसबुक पर अस्सी वर्षीय एक महिला को सालसा नृत्य करते देखा, कमाल का नृत्य था, बच्चों की तरह वे घूम रही थीं.  देह, मन के अधीन रहे तो वे उसे अपनी इच्छा से प्रयोग कर सकते हैं. तमस और जड़ता से भरी देह मन पर हावी हो जाती है. जून आजकल बहुत व्यस्त रहते हैं, कल उन्हें दिल्ली जाना है. नन्हे के दफ्तर में एक प्रतियोगिता होनी थी, अच्छी ही होगी. वह अपनी टीम का हेड हो गया है अब. जे कृष्णमूर्ति की जो किताब वह वर्षों पहले बोस्टन से लायी थी, मिल नहीं रही थी, उस दिन मिल गयी, पढ़ना शुरू किया है.  


Monday, May 29, 2017

टेबलेट पर कहानी


कल नन्हे की मित्र की माँ से बात की, ये लोग चाहते हैं, अभी कोई भी रस्म कुछ महीने बाद की जाये, वे भी यही चाहते हैं, पिताजी के रहते जो काम नहीं हो सका अब उनके जाने के बाद इतना शीघ्र करना उचित भी नहीं है. वैसे इस महीने वे लोग आ रहे हैं. नन्हे का जन्मदिन वे साथ मनाएंगे, सुबह हवन होगा शाम को चाय-पार्टी. अभी-अभी उसने अपने पिताजी से बात की, छोटी भतीजी का चुनाव AIMS व KGMC में भी हो गया है. उसने मेडिकल के लिए जितने भी इम्तहान दिए थे, लगभग सभी जगह उत्तीर्ण हो जाएगी.  

कल शाम वे एक मित्र परिवार से मिलने गये, वृद्धा आंटी को नन्हे के विवाह की बात सुनकर बहुत ख़ुशी हुई. दो दिन बाद वह आ रहा है, दिन तब व्यस्त हो जायेंगे. आज सुबह सुधांशु जी ने कितनी सुंदर बात कही, उन्हें अपनी कीमत बढ़ानी है न कि घटानी है. उम्र के साथ उनकी समझ भी परिपक्व होनी चाहिए. कल रात वर्षा शुरू हुई जो आज सुबह तक लगातार होती रही. बगीचे में पानी भर गया है, शायद शाम तक सूखेगा, बाहर का नाला भी लबालब भर गया है. इस समय थमी है, बगीचा हरियाली का एक पुंज नजर आ रहा है.

पांच दिनों का अन्तराल ! उस दिन नन्हे के आने की तैयारी, अगले दिन वह आया, उसके दो दिन  बाद बाकी मेहमान आये, पता ही नहीं चला समय कैसे बीत गया. आज सब चले गये हैं, घर में वे दोनों ही रह गये हैं. अब कुछ अन्य कार्य करने का समय आ गया है. पहले घर को पुनः व्यवस्थित करना है, फिर सेवा कार्य शुरू करना है. फ़िलहाल तो दो छात्राएं आ रही हैं, उन्हें पढ़ाना है. नैनी व उसके पति ने, जो एक कुक है, कल खाना बनाया, सबको पसंद आया, उन्हें इनाम देना है. जून ने कितनी अच्छी तरह मेहमानों की देखभाल की, कुल मिलाकर अच्छा रहा यह मिलन समारोह ! परमात्मा की कृपा ही तो है यह ! नन्हे ने भी बहुत सहजता से सभी कार्यों में हिस्सा लिया, सब कुछ ठीक-ठाक हो गया, नन्हा खुश रहेगा क्योंकि खुश रहना उसे आता है. मौसम भी बहुत सुहावना रहा पिछले दिनों..

नन्हा उसके लिए टेबलेट  लाया है. उस पर काम करना सीखना है. किताबें पढनी हैं. उसने सभी के लिए कविताएँ लिखीं, जून ने सभी के फोटो चुनकर लगाये और उन्हें भेज दिया. सुबह धूप निकली थी, पर साढ़े नौ बजते न बजते बदली छा गयी और बरस भी गयी. उन्होंने सारे कारपेट बाहर निकले थे, आज साप्ताहिक सफाई का दिन था. जल्दी-जल्दी सब अन्दर किये, नैनी पूरे मन से काम करती है, सफाई कर्मचारी भी ठीक से काम कर रहा है आजकल. फिर नैनी के पति ने बाहर चारों ओर का जाला साफ किया, गैराज का भी. इतने बड़े घर को साफ-सुथरा रखना अकेले का काम नहीं है. सुबह माली आया था, गुलदाउदी के लिए गमलों की तैयारी शुरू हो गयी है.

नन्हे के लाये टेबलेट पर कहानी पढ़ रही है, शिवा की कहानी, अच्छी लग रही है. परसों स्वप्न में सद्गुरू को देखा था, वह उनसे बात कर रही थी, उनके साथ वही रिश्ता है, जो उसका खुद के साथ है, तभी इतना अपनापन है, कैसा आश्चर्य है वह असीम परमात्मा ससीम देह में प्रकट हो जाता है, वह तो सभी के भीतर है पर किसी-किसी में नजर भी आने लगता है. मन का दर्पण यदि स्वच्छ होगा तो उसमें वह झलक ही जायेगा, उस पर तेल लगा हो या धूल जमी हो तो प्रतिबिम्ब स्वच्छ नजर नहीं आता.  


Monday, September 26, 2016

ओबामा की किताब


नवम्बर का आरम्भ हो चुका है. दो दिन बाद दीवाली है. आज सुबह एक सखी के साथ मृणाल ज्योति गयी, बच्चों के लिए मिठाई और नमकीन लेकर. प्रिंसिपल ने बताया उन्हें व्यावसायिक शिक्षा की योजना के अंतर्गत लड़कियों के लिए सिलाई स्कूल खोलना है, यदि मिल सकें तो पुरानी मशीनें चाहिए. वे लोग लेडीज क्लब में सूचित कर देगीं. इसी माह के अंत में नेशनल ट्रस्ट का एक कार्यक्रम भी है, जिसमें किसी हुनर को सिखाने की ट्रेनिंग भी दी जाएगी, इन बच्चों को भी तो बड़े होकर अपने पैरों पर खड़ा होना है. दीवाली के लिए सुंदर दीये भी बनाये हैं वहाँ के बच्चों और अध्यापिकाओं ने, जिन्हें को-ओपरेटिव स्टोर में बिक्री के लिए रखने कल वे आयेंगे. आज लेडीज क्लब की पत्रिका के लिए कोई नाम का सुझाव देने के लिए फोन आया. एकता में अनेकता, मेल, मित्रता, मिलन, सहयोग, भागेदारी, अपनापा, समन्वय, मिलाप, सहभागिता को व्यक्त करता हुआ कोई एक शब्द. वार्षिक उत्सव आने वाला है.

जून और पिताजी कोलकाता गये हैं, परसों आयेंगे. घर में माँ और वह है. उनका होना और न होना बराबर है, चुपचाप बैठी रहती हैं. वह एक सखी के आने की प्रतीक्षा कर रही है, उसने आने की बात कही थी. कल उसकी एक कविता पर काफी लम्बी टिप्पणी पढ़ने को मिली, ज्ञान बढ़ा और लगा कि दुनिया में ऐसे लोग भी हैं जो परमात्मा से उसी तरह मिले हुए हैं जैसे कभी-कभी वह मिलती है, जब केवल वही रहता है, तब दो नहीं होते, वैसे तो दो कभी भी नहीं होते, दो परिधि पर होते हैं, लहरें सतह पर ही तो हैं, वह सदा ही है, एक ही है, वह उनका मूल है, कितना आश्वस्त करती है यह बात...

पिछले कुछ हफ्तों से डायरी नहीं लिखी, पहले मेहमान फिर सभी के लिए उनके व्यक्तित्त्व को दर्शाती हुईं कविताएँ...समय इसी में गुजर गया. आज फुर्सत है. दोपहर के डेढ़ बजे हैं. मौसम ठंडा है बादलों के कारण, नवम्बर की सर्दी के कारण नहीं. वह ध्यान कक्ष में है. माँ-पिताजी अपने कमरे में सोये हैं. माँ उठकर बिस्तर के पास वाली कुर्सी पर बैठ गयी होंगी, वह वहीँ घंटों बैठी रहती हैं. बच्चों जैसी बातें करने लगी हैं, हँसी आती है उन सबको उनकी बातों पर, लेकिन बुढ़ापे में उनका भी क्या हाल होने वाला है यह तो भविष्य ही बतायेगा. जून को इसी हफ्ते मुम्बई जाना है. बड़ी ननद के ज्येष्ठ की अचानक मृत्यु हो गयी है. जब वह उन्हीं के घर में रात को भोजन के बाद सोये थे. जीवन कितना क्षणभंगुर है. नन्हा कल हस्पेट गया था मोटरसाईकिल से. आज वापस जा रहा है. उसका फोन अभी तक नहीं आया है, वह सकुशल होगा. जून छोटी बहन की किताब को आकार दे रहे हैं. वह वापस जाने वाली है आज ही. बड़ी बहन से कई दिनों से बात नहीं हुई है. परसों बड़े भाई का जन्मदिन है और दो दिन बाद उनकी बिटिया का, वह दोनों के लिए कविता लिख सकती है. सर्दियों के फूल खिलने लगे हैं, यहाँ उनके क्लब में भी वार्षिक उत्सव की तैयारी शुरू हो गयी है, उसने बहुत दिनों से कोई पुस्तक भी नहीं पढ़ी है. आज लाइब्रेरी जाकर ओबामा की किताब वापस करनी है. कल से वे सत्संग का समय शाम पांच बजे से कर रहे हैं, आजकल अँधेरा चार बजे के थोड़ा बाद ही शुरू होने लगता है. इस समय कितनी शांति है. नैनी के बेटी के रोने की आवाज आ रही है और कौए की कांव-कांव भी सुनाई दे रही है, घड़ी की टिक-टिक कितनी स्पष्ट सुनने में आ रही है. परसों विश्व विकलांग दिवस है, वह ब्लॉग पर मृणाल ज्योति के बारे में लिखेगी.


Tuesday, June 21, 2016

टैगोर की गीतांजलि



नन्हे से बात करके हमेशा बहुत अच्छा लगता है. उसकी कम्पनी तरक्की कर रही है. nabbo solutions नाम है उसका, तथा turbodor.in उसके वेबसाइट का नाम है. अगले वर्ष तक सम्भवतः वे संख्या में बढ़ जायेंगे, अभी कुल ७-८ लोग हैं और काम बढ़ेगा तो लोग भी चाहिए. वह जनवरी में आयेगा तब विस्तार से बतायेगा, अभी तो फोन पर हर दिन कोई न कोई बात बताता है. मार्च-अप्रैल में वे उसके पास जायेंगे, जब माँ-पिताजी घर जायेंगे. माँ की सेहत पहले से ठीक है, बस मानसिक रूप से वह कुछ असुरक्षित महसूस करती हैं. पिताजी अपने को व्यस्त रखते हैं और खुश भी !

कितना कुछ पढ़ने को एकत्र हो गया है, ढेर सारी पत्रिकाएँ हैं ही. नेहरू की ‘डिस्कवरी ऑफ़ इंडिया’, चित्रा बनर्जी की ‘illusions of palace’, रवीन्द्र नाथ टैगोर की ‘गीतांजलि’ भी लाइब्रेरी से लायी है. हिंदी पुस्तकालय से लायी आठ पुस्तकों में से ‘मीरा’ पर आधारित उपन्यास पढ़ना आरम्भ किया है. दिसम्बर का आरम्भ हो गया है. अभी-अभी एक बुजुर्ग परिचिता का फोन आया, वह अपनी बहू के व्यवहार से दुखी हैं, वह भी उनके व्यवहार से दुखी होगी. कल दोपहर को नैनी आई थी, वह अपनी नई मालकिन के बर्ताव से दुखी थी, यकीनन मालकिन उसके आचरण से दुखी रही होगी. यहाँ उनके घर में काम करने वाली नैनी भी दुखी है अपने पति से, जो उससे नाराज है. इस जगत में सभी तो दुखी दिखायी देते हैं. कोई एक-दूसरे को नहीं समझता. लेकिन यही तो होना ही चाहिए. जब सभी की बुद्धि पर मोह का पर्दा पड़ा हो तो कोई खुश कैसे रह सकता है. उनका मन ही दुःख का जनक है और मन नाम है अहंकार का, अहंकार पुष्ट होता है अपनी छवि को पुष्ट करने से, छवि पुष्ट होती है अपने बारे में सत्य-असत्य धारणाएं पालने से. इच्छाओं की पूर्ति होती रहे तो भी ‘मैं’ पुष्ट होता है. अपने में कोई सद्गुण हो या न हो पर होने का वहम हो तो भी अहम पुष्ट होता है और यह अहंकार दुःख का भोजन करता है. जब वे अपने ही बनाये भ्रम को टूटते देखते हैं तो भीतर छटपटाहट होती है, यह सब सूक्ष्म स्तर पर होता है इसलिए कोई इसे समझ नहीं पाता. वही समझता है जो अपने भीतर गया हो जिसने मन का असली चेहरा भली-भांति देखा हो, जो मन को ही स्वयं मानता हो वह कैसे इसे पहचानेगा. इसलिए जगत में कोई दोषी नहीं है अथवा तो सभी दोषी हैं. संतजन यही तो कहते आए हैं, जो जगा नहीं है, वह दुःख पाने ही वाला है !


लगभग दो हफ्ते पहले जो स्वप्न देखा था आज वह सत्य हो गया. सुबह छह बजे छोटे भाई का फोन आया कि बड़े चाचाजी का कल रात को देहांत हो गया. उनके पुत्र से बात हई तो उसने कहा, रात को बारह बजे उठकर उसने देखा तो उनके हाथ-पाँव ठंडे थे तथा आँख नहीं खोल रहे थे, पता नहीं कब उनके प्राण निकल गये थे. रात को ही एक बुजुर्ग महिला को वह ले आया था जो रिश्ते में स्वर्गीया चाचीजी की मामी हैं. आस-पास की महिलाएं भी आ गयी हैं तथा छोटी बहन को सांत्वना दे रही हैं. उसके पति भी आ गये हैं. 

Thursday, April 28, 2016

इंटरनेट की दुनिया


एक शिष्य के जीवन में दो ही ऋतुएं होती हैं, एक जब वह सद्गुरू की निकटता का अनुभव करता है और दूसरी जब वह उनसे दूरी का अनुभव करता है. आजकल उसके जीवन में दूसरा मौसम चल रहा है, लेकिन उनकी ‘कृपा’ असीम है कि वह उसे इस ऋतु में नहीं देखना चाहती, वह पुनः उसी निकटता का अनुभव कराना चाहती है, जिसे पाकर उनके भीतर एक प्रेम की लहर दौड़ जाती है. आज भी सद्वचन सुने थे, खुदा का अर्थ है जो खुद आये, उन्हें केवल इंतजार करना है. काल के दायरे में रहने पर मन उन्हें इस दुनिया में खींच कर ले जाता है, पर उन्हें काल से परे उस देश में जाना है, जहाँ आनन्द का मौसम है. उस दुनिया में उड़ान भरने के लिए वे उन्हें बार-बार बुलाते हैं. उनकी पुकार को वे अनसुनी कर ही नहीं सकते, इतनी शिद्धत से वह उन्हें पुकार रहे हैं.

‘मेरो मन अनत कहाँ सुख पावे, जैसे उड़ि जहाज को पंछी पुनि पुनि ताते आवे’ उसके मन की भी ऐसी ही दशा है आजकल. पुण्य उदय होते हैं तो भीतर प्रकाश छा जाता है, गुरु की कृपा का अनुभव होता है. उसकी आध्यात्मिक यात्रा भी बीच में ही दम तोड़ देती यदि कृपा ने पुनः हाथ पकड़ कर न उठा लिया होता. साधक थोड़े से अनुभव पाकर ही स्वयं को ज्ञानी, ध्यानी समझने लगता है. उसे लगता है अब गुरू की क्या आवश्यकता, भीतर से आनंद मिलने लगता है तो वह सोचता है अब स्वनिर्भर हो गया, पर उसे पता नहीं कि उसकी सामर्थ्य ही कितनी है, तत्वज्ञान हो जाने पर भी उसमें टिके रहना सरल नहीं. पूर्वजन्मों के संस्कार कब प्रकट हो जाएँ. उसे पिछले दिनों अपनी कमियों का अहसास कई तरह से हुआ. उसका ज्ञान अल्प है, तुच्छ है, अधूरा है. उसकी भाषा भी संयत नहीं है और उसका समाज के लिए कोई योगदान भी विशेष नहीं है. ऐसे में व्यर्थ ही स्वयं को विशेष मानने की भूल करना अहंकार ही तो है. ध्यान में कई अच्छे अनुभव हुए हैं पर अभी यात्रा बहुत शेष है, अभी तो वे कुछ भी नहीं जानते, कल क्लब की अध्यक्षा ने उसे क्लब की तरफ से मृणाल ज्योति का संयोजक नियुक्त किया, उनसे मिलकर कार्यों की जानकारी लेनी होगी.


गुरु माँ गा रही हैं, ‘प्रभो जी मोरी विनती सुनो’, इंटरनेट पर उनका भजन सुन पा रही है. गीता पर उनका प्रवचन भी उपलब्ध है. नन्हे का कम्प्यूटर कल ठीक हो गया, वह मानसिक रूप से परिपक्व है पर अपने स्वास्थ्य तथा नींद का ख्याल नहीं रखता. उसे उसने कहा, child is the father of the man यह कहावत उसने सिद्ध कर दी है. कल पिता जी से बात हुई, उन्होंने उसकी किताब पूरी पढ़ ली है, उन्होंने कहा कि यह किताब उसने दिल से लिखी है, कुछ दिनों से कुछ नया नहीं लिखा. आज बहुत दिनों बाद कायोत्सर्ग ध्यान किया. सद्गुरू को भी सुना वह कह रहे थे भीतर जो अधूरापन, तलाश जारी है वह साधक को जड़ नहीं बैठने देती, वह उसे आगे बढ़ने को प्रेरित करती है, प्रभु अनंत है, उसका ज्ञान अनंत है, उसे जानने का दावा करने वाले वे उसकी शक्ति का एक कण भी तो नहीं है, प्रेम की एक बूंद भी तो नहीं हैं और ज्ञान की बस झलक भर ही तो पायी है, इसलिए साधक बार-बार उड़ान भरता है और अनंत आकाश की एक झलक पाकर उसे लगता है कि कुछ मिला तो थोड़े दिन बाद फिर कुलबुलाहट होने लगती है कि कुछ और है जो अनजाना है, कि वे तो कुछ जानते ही नहीं !