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Monday, August 4, 2014

सपने में शार्क


जून ने एक अधिकारी के साथ घटी दुर्घटना के बारे में बताया. डिब्रूगढ़ से ही एक चोर उनके साथ लग गया. नशीली फ्रूटी पिला कर बेहोश किया, सब कुछ ले लिया और रास्ते में खुद उतर गया. शिवसागर में बस का कन्डक्टर उन्हें पुलिस स्टेशन ले गया, जहाँ दो दिन बाद उन्हें होश आया पर उस समय वह भूल चुके थे कि उनके साथ क्या हुआ था. यह दुनिया चोरों को भी जन्म देती है और लुटेरों को भी पर साथ ही पुलिस व रक्षकों को भी.

कल रात उसने अपनी मृत्यु की भविष्यवाणी दो पंडितों द्वारा पढ़ी गयी देखी, स्वप्न में ही मृत्यु पूर्व की अवस्था का अनुभव किया, पहले पहल तो घुटन थी पर बाद में विवेक जाग्रत हुआ और मृत्यु पूर्व जितना समय मिला था सदुपयोग करने की प्रेरणा हुई, अन्य किसी पर कोई असर नहीं पड़ रहा था. कई बार यह स्वप्न भी देखा कि सुबह हो गयी है अब जगना चाहिए. प्रतीक रूप से ये स्वप्न उसे अज्ञान की नींद से जगाने के लिए थे. एक महिला पत्रकार को भी देखा जिसने नूना के बारे में सुना था, उसे उसने सुबह के नाश्ते के लिए बुलाया है कि पता चलता है मात्र अट्ठाईस वर्ष की उम्र में उसकी मृत्यु तय है.

कल रात फिर उसने अजीब स्वप्न देखा, सुबह उठी तो याद था पर लिखने का समय नहीं मिला अब शाम के पांच बजे जरा भी याद नहीं आ रहा है. आज गर्मी काफी है, पिछले कई दिनों के बाद मौसम में बदलाव आया है. कल शाम भाई का फोन आया, वे सांध्य भ्रमण के लिए गये थे, नन्हे ने बात की. राखियाँ उन्हें मिल गयी हैं. बाद में वे एक मित्र के यहाँ गये पर वहाँ की बातचीत में किसी अन्य की चर्चा हुई जो वहाँ उपस्थित नहीं थे, उसे अच्छा नहीं लगा. साधना का प्रथम सोपान है आत्म निरीक्षण.

तीसरी रात फिर एक स्वप्न जिसमें उनके सामने एक ट्रक का एक्सीडेंट होता है, वह उनके ऊपर से गुजर गया वे बच गये पर सामने की दीवार से टकरा गया. ड्राइवर व कन्डक्टर घायल हो गये, खून व चीखें...यह शायद कल शाम क्लब में देखी फिल्म का नतीजा था. फिल्म शार्क मछलियों के मस्तिष्क से निकाले गये द्रव से बनने वाली एक दवाई की रिसर्च पर आधारित थी, जिसमें शार्क प्रयोग के दौरान खुद पर हुए अत्याचार का बदला लेती है और एक-एक करके कई व्यक्तियों की जान लेती है. आज सुबह उठे तो उमस बहुत थी, इस वक्त भी गर्मी से ज्यादा घुटन है, बादल बने हैं पर हवा स्थिर है. जैसे स्थिर पानी गन्दला हो जाता है गतिशील पानी स्वयं को साफ बनाये रहता है वैसे ही हवा के साथ भी है, चलती हुई हवा शीतलता प्रदान करती है. आज उसके पास सिलाई का कुछ काम है सो बाकी कार्यों में से थोड़ा-थोड़ा वक्त बचाया है. सुबह टीवी पर सुना मन में आसक्ति की जड़ें जितनी गहरी होती हैं, ‘मैं’, ‘मेरा’ का भाव उतना प्रबल और यही बांधता है, बुद्धि के स्तर पर तो ये बातें बहुत समझ में आती हैं. कल दोपहर प्रमाद वश देर तक सोयी सो कल की कविता का खाली पन्ना चिढ़ा रहा है. आज नन्हे का science टेस्ट है, कल दिन भर वह तैयारी करता रहा है. कल ‘रिश्ते’ में मरते हुए प्राणी का अजीब चित्रण देखा, मृत्यु के समय कैसी अद्भुत शांति....!  

 



Saturday, September 21, 2013

ब्रोकेन एरो


कल शाम को ‘स्वामी रामतीर्थ’ के भाषण पढ़े और अभी कुछ देर पूर्व भी वही पढ़ रही थी. उनके शब्दों में ओज है और आत्मा को जगाने की शक्ति, कल से कई बार इन्हीं शब्दों के प्रभाव के कारण मन को व्यर्थ के जोड़-तोड़ से बचा पायी है. उसे लगा, वे अपना कितना सारा वक्त यूँही व्यर्थ की बातों में बिता देते हैं और मन की ऊर्जा जिसे किसी अच्छे काम में लगाना चाहिए, इधर-उधर की बातों को सोचने में खर्च कर देते हैं.

आज उनके बगीचे में लगे झूले पर पेंट हो रहा है, हरी-हरी घास में हरा झूला बहुत भला लग रहा है, इस पर बैठ कर नन्हे ने कितनी तस्वीरें खिंचवाई हैं. अचानक उसने आँखें बंद करके भीतर देखा, मन की आवाज के पीछे बुद्धि तक ही जा सकी, यह आत्मा की आवाज कैसी होती होगी, उसे रोमांच हो आया. हरेक में ईश्वर का अंश है, यह बात तो समझ में आती है और इसका जीता-जागता उदाहरण हैं सन्त-महात्मा जो इस अंश को पाकर अपने कार्यों और विचारों से चरितार्थ कर  देते हैं, जो साधारण मानवों की श्रेणी से ऊपर उठ जाते हैं. अभी तो वह यह जान लेने मात्र से ही शांत है कि वह मात्र देह या मन नहीं है, कि वह जिन सुखों-दुखों को शरीर या मन के स्तर पर महसूस करेगी वही उसे व्यापेंगे बाकी नहीं.

ईश्वर उसके साथ है. तभी मन शांत है और इस वक्त कोई ऐसी वस्तु नहीं जिसकी उसे लालसा हो अपने लिए. देश तरक्की करे, राजनीतिज्ञों के मन पलटें, भ्रष्टाचार का राज खत्म हो, यही प्रार्थना करेगी आज से. आज नन्हे का स्कूल बंद है, सारी सुबह उसके सवालों का जवाब देते-देते गुजरी, उसके बाद से वह अपने मनपसन्द कामों में लगा है. आजादी सभी को प्रिय है, चाहे वह छोटा बच्चा हो या अस्सी वर्ष का बूढ़ा. इस समय वह  हल्की भुनी हुई मूंगफली खा रही है, मीठी-मीठी बहुत स्वादिष्ट लग रही है, यूँ उसे जून की बात भी याद आ रही है, कि भूख लगी हो तो प्याज भी मीठा लगता है. वह आज लंच पर नहीं आयेंगे, उसने भिंडी बनाई है, एक डिश तो नन्हे की फरमाइश पर बनाएगी ही बाद में. आज बहुत दिनों बाद turning point देखा, तिब्बती इलाज की पद्धति में शरीर, मन व् विचार सभी का ध्यान रखा जाता है. गेंदे के फूल का उपयोग मधुमेह के इलाज में कर सकते हैं, यह भी आज सुना.

आज सुबह स्कूल जाने से पहले नन्हा थोड़ा सुस्त लग रहा था, उसे अपना आप भी स्फूर्ति से भरा हुआ नहीं लग रहा, शायद मौसम की बेरहमी के कारण, कितनी उमस है आज, साँस लेने में भी सुकून नहीं मिल रहा है, शायद उसे भी ऐसा ही लगा होगा. यूँ अपने सुरसा के मुंह की तरह बढ़ती हुई परेशानियों की सूची बनाने के लिए उसने लिखना शुरू नहीं किया था बल्कि अपने करीब आने की परसों से मन में पनप रही ख्वाहिश के लिए. कल शाम और कल सुबह भी वह अपने कार्य-कलापों पर नियन्त्रण नहीं कर पा रही थी, धारा के वेग में बिना पतवार की नाव सी बहती जा रही थी. कभी इसी में अच्छा लगता था पर अब नहीं लगता और तब आवश्यकता होती है आत्म निरीक्षण की. आज सुबह-सुबह एक परिचिता का फोन आया, वह एक दिन, दिन में आएगी और लाटरी के बारे में कुछ बात करना चाहती है ऐसा उसने कहा. पता नहीं कौन सी लाटरी के बारे में, अजीब लडकी है, ख्वाहमखाहमन suspense में डाल दिया है, खैर जो भी. कल माँ-पिता का पत्र आया, दीदी के घर के बारे में बहुत सी बाते लिखी हैं, वे यहाँ नहीं आ रहे हैं, उनकी तरह वे भी सफर से घबरा गये हैं, खास तौर पर बस के सफर से. कल फेमिना में पढ़े एक लेख का असर था कि रात को सपने में एक कमजोर व मासूम सी दिखने वाली लड़की उसे एक गिरोह में फंसा देती है, वह पुलिस-पुलिस पुकारती है और तब नींद खुल जाती है. सपने मन का आईना होते हैं. लिखना शुरू करने से पूर्व जो सुस्ती थी थोड़ी और बढ़ गयी है, चुपचाप सो जाने का मन होता है.

कल शाम वे क्लब गये Broken Arrow देखी, उसे बहुत अच्छी लगी. इस समय पीटीवी पर नुसरत अली शाह का एक गीत बज रहा है. सुगम संगीत के कई कार्यक्रम टीवी पर आते हैं, जिनका उन्हें नाम भी पता नहीं है, ‘सानीधापा’ नाम का एक प्रग्राम देखा. आज उसने त्रिदाली बनाई है, जून को बहुत पसंद है.





Tuesday, May 22, 2012

स्वप्न में पुलिस स्टेशन


सुबह के आठ बजे हैं, अभी तक वे सब सो रहे हैं. उसने भगवद्गीता का सातवाँ अध्याय पढ़ा. सत्य है हर बार पढ़ने पर उसे यही लगता है जैसे पहली बार पढ़ रही हो. कितने ही वाक्य उसकी समझ से बाहर हैं पर लोकप्रिय गीता में चुने हुए आसान श्लोकों का अर्थ दिया है जिससे बहुत सहायता मिलती है. कल छोटे भाई का पत्र आया जन्मदिन की शुभकामनाओं सहित. कल रात जून और उसने बहुत देर तक बातें कीं. जून ने कहा कि उसका सब कुछ नूना का है, सपने भी, यह संभव है न अपना सब कुछ किसी को सौंप देना, पर यहाँ किसी को देने का प्रश्न ही नहीं है, खुद को ही देना है. कल जन्म दिन पर वह उसे एक प्रेम का दस्तावेज देने वाला है. कल वे स्टूडियो भी जायेंगे तस्वीर उतरवाने  पूरे एक वर्ष बाद
रात को एक स्वप्न देखा, अच्छा सा था. वे बस में सफर कर रहे हैं. दो-तीन लडकियाँ भी हैं उसी बस में, शायद उनके पास कोई स्मगलिंग का सामान है या वे कोई अवैध काम करती हैं. बस में एक पुलिस वाला भी है सादे वेश में, वह उन्हें बातों में लगाकर कई सवाल पूछता है और सीधे पुलिस स्टेशन ले जाता है, सभी यात्रियों को भी साथ में जाना पड़ता है, फिर स्वप्न टूट गया.