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Wednesday, April 6, 2022

उपनिषद गंगा


लॉक डाउन का तीसरा दौर  प्रारम्भ हो गया है। अब संक्रमण की दर बढ़ गयी है, भारत में अड़तालीस हज़ार व्यक्ति संक्रमित हो चुके हैं। अमेरिका में यह संख्या भारत से कहीं ज़्यादा है। रात्रि के सवा नौ बजे हैं, नन्हे से बात हुई, खाना बनाने की आज उसकी बारी थी, कह रहा था अभी वे लोग मेड व कुक को नहीं बुलाएँगे। खुद काम करने की आदत हो गयी है। घर भी साफ़ रहता है। अच्छा है, अपन हाथ, जगन्नाथ ! सुबह टहलते समय कुछ सुंदर जंगली गुलाबी पुष्प देखे थे, शाम को देखने गए तो वे सो गए थे, फूलों में इतना संज्ञान होता है, प्रकाश का स्पर्श उन्हें जगाता और सुलाता है। आज महाभारत में देखा भीष्म पितामह तीरों की शैया पर हैं, द्रोणाचार्य उनके पास आकर कहते हैं, वह उनसे पहले जाएँगे, कैसे महावीर थे वे लोग, मृत्यु का ज़रा भी भय नहीं था उन्हें ! जून को आर्ट ऑफ़ लिविंग के अनुसंधान विभाग में सेवा का कुछ काम मिल गया है। 


आज बुद्ध पूर्णिमा है, उनके वचन पढ़े, उनके उपदेशों पर आधारित दो आलेख भी लिखे। कल भागवद में कपिल मुनि द्वारा अपनी माँ देवहूति को दिये गये सांख्य शास्त्र के ज्ञान के बारे में पढ़ा था। सुबह गहरे ध्यान का अनुभव हुआ। दोपहर को वाणी का दोष हुआ तो कितनी शीघ्रता से जगाया किसी ने भीतर से। सुबह उठने से पूर्व कोई वाणी भीतर से कह रही थी, तुम वही हो ! ज्ञान उन्हें मुक्त करता है और गुरू भी ज्ञान स्वरूप है। आज नैनी काम पर नहीं आयी, उसने पूर्णिमा का उपवास रखा है ! कल असम से उसकी पुरानी नैनी का फ़ोन आया था। उनके योग ग्रुप की एक महिला का फ़ोन भी आया, जिन्हें कोर्स करने के लिए उसने बहुत बार कहा था आख़िर उन्होंने ऑर्ट ऑफ़ लिविंग  का बेसिक कोर्स ऑन लाइन किया, बहुत खुश थीं। 


आज सुबह टहलने गए तो रात की वर्षा के बाद सड़कें भीगीं थीं। मधु मालती की एक बेल और कंचन का एक वृक्ष पूरे खिले थे, उनकी तस्वीरें उतारीं। टीवी कार्यक्रम ‘उपनिषद गंगा’ में आज का अंक दारा शिकोह पर था, जिसने उपनिषदों का अध्ययन किया था। उसकी मृत्यु का दृश्य देखा, वह आत्मा का ज्ञान पाकर भीतर से मुक्त हो गया था। ‘महाभारत’ में कर्ण ने अर्जुन को मारने का अवसर गँवा दिया क्योंकि सूर्यास्त हो गया था, वह नियमों के अनुसार युद्ध करना चाहता है, संभवतः वह अर्जुन को मारना नहीं चाहता, वह जान चुका है कि अर्जुन उसका सगा भाई है। उसका जीवन कितने विरोधाभासों से घिरा है।


आज का एक दिन एक तरह से उसके लिए बहुत ख़ास है। पूरे पचपन दिनों के बाद वह जून के साथ कार से सोसाइटी के मुख्य गेट से बाहर गयी। उन्होंने एक नर्सरी से गमलों के लिए पौधे ख़रीदे। वहाँ एक भोली-भाली सी लड़की मिली, भुवनशोम की नायिका जैसी। सुबह  छोटी भांजी के स्नातक होने पर पूरे परिवार की एक ज़ूम मीटिंग हुई, अच्छा लगा। शाम को दो पुराने मित्र परिवारों को भी ज़ूम पर देखा। गुरूजी की संजय दत्त से बातचीत का वीडियो देखा। मोबाइल और कम्प्यूटर सबके जीवन का अभिन्न अंग बनते जा रहे हैं। 


आज नैनी एक फार्म हाउस से, जहाँ उसका पति काम करता है, ताज़ा हरा कुम्हड़ा, आँवला और कच्चे आम लायी। कुम्हड़े की सब्ज़ी, आम की मीठी चटनी और आँवले का अचार उसने बना लिया है। शाम को निकट स्थित खेत से कच्चा कटहल लाए, पहले तो माली तोड़ने को तैयार नहीं था, कहने लगा पकने पर यही दो सौ में बिकेगा, यहाँ सभी इसे पका हुआ खाते हैं। गाँव के निकट रहने के कितने लाभ हैं। 


Thursday, December 21, 2017

नया कम्प्यूटर


आज भी मौसम भीगा-भीगा है. लगातार फुहार पड़ रही है. फेसबुक पर आज पिताजी के साथ अंतिम पिकनिक की तस्वीरें पोस्ट कीं, दो वर्ष पहले जनवरी माह की होंगी शायद. शाम को एक पुराने मित्र भोजन के लिए आ रहे हैं. उसके पहले बाजार जाना है, जून उसके लिए साड़ी लाये हैं, उसे पीको आदि के लिए देने. एक नई कविता लिखी, आज वह अनाम बहुत करीब लग रहा है, नयन बंद करते ही अंतर प्रकाशित हो उठता है ! अगले महीने जीजाजी का जन्मदिन है, उनके लिए भी कुछ पंक्तियाँ लिखीं. कम्पनी की तरफ से नया कम्प्यूटर इंस्टाल हुआ है आज. अभी मकैनिक स्कैनर व प्रिंटर को इंस्टाल कर रहे हैं. अब वह कार्ड्स आदि घर पर ही प्रिंट कर सकती है. इसी माह एक सखी का जन्मदिन है पर उससे बहुत दिनों से कोई बात नहीं हुई है. अगले महीने नन्हे का भी जन्मदिन है, उसके अगले जून का और बड़े भांजे का भी. सभी के लिए कुछ न कुछ लिखेगी. दीदी का जवाब भी आया है, उन्हें कविता अच्छी  लगी !

लंच तैयार है, समय हो चुका है, पर जून अभी तक आये नहीं हैं. आज ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ है. उनके दफ्तर में पौधे लगाने का कार्यक्रम है. कल शाम भी एक मीटिंग के कारण सात बजे घर लौटे. थोड़ी देर में ही मेहमान भी आ गये. ढेर सारी बातें कहीं, अपनी पत्नी और बिटिया से नोक-झोंक की बातें. उनकी पत्नी को एक स्वास्थ्य समस्या भी हो गयी है. उसे हाथों व पैरों में कॉर्न हो जाते हैं, जो पेनफुल हैं. उससे बात की तो पता चला शरीर में प्रोटीन की प्रतिक्रिया से ऐसा हो रहा है. नूना के भी बाएं हाथ के दो नाखूनों में सफेदी आ गयी है, शायद किसी तत्व की कमी है. पौने दस बजे वे गये. रात को सोने में देर हो गयी तो जून को देर तक नींद नहीं आई. सुबह उन्होंने जब यह बात कही तो उसके भीतर से किसी ने जवाब देना आरम्भ कर दिया. पता नहीं कहाँ से इतने शब्द निकलते हैं.  


आज असमिया सखी के पुत्र का जन्मदिन है, उससे बात करनी चाही, पर शायद उसका नम्बर बदल गया है, किसी और ने उठाया. आज सुबह उठी तो एक विचित्र अनुभव हुआ, भीतर शब्द लिखे हुए दिखाई दिए, यानि पश्यन्ति वाणी का एक रूप. फिर एक स्वप्न आया, जिसमें छोटी ननद भी थी. जून भी थे. तब जून और उसका संबंध अलग था. कितने सवालों का जवाब मिल जाता है जब पिछले जन्मों की स्मृति आती है. कल सुबह भी एक अनोखा स्वप्न देखा. सद्गुरू को देखा, वह जो उनके सद्वचन सुनती है, शायद उसी का परिणाम था यह स्वप्न. अंततः श्रवण एक मानसिक प्रसन्नता ही तो है यानि सुख की तलाश. ज्ञान सुनने से जो सुख पाना चाहती है उससे और इन्द्रियों से मिलने वाले सुख में क्या अंतर है ? अभी बहुत कुछ है जो ध्यान की गहराई में जाकर मिल सकता है और एक वह है कि संतोष कर बैठी है, शायद यह स्वप्न यही जताने आया था. दोपहर को बहुत गहरी नींद आयी, जैसे बहुत वर्षों पहले आया करती थी. इस समय शाम के सात बजे हैं, जून नये कम्प्यूटर पर काम कर रहे हैं, एक कनिष्ठ अधिकारी उनकी सहायता कर रहे हैं. शाम को उन्होंने स्वयं पेड़ से कटहल तोडा, जिसकी सब्जी उसने आज बनाई है. अब वह ‘भारत एक खोज’ का तीसवां अंक देख रही है. विजयनगर के पतन की कहानी है उसमें. नन्हे को सर्दी लग गयी थी. दोपहर को उससे बात हुई. अब पहले से बेहतर है. दफ्तर आया था, अपना ख्याल रखना जानता है. हरेक को स्वालम्बी होना ही है.      

Thursday, October 30, 2014

मॉडेम जरूरी है



हर क्षण यदि ईश्वर का स्मरण बना रहे तो मन अपने आप शांत रहेगा, जब उसके प्रेम में हृदय डूब जाये तो संसार मन में प्रवेश नहीं कर सकता क्योंकि जब ईश्वरीय प्रेम की वीणा की झंकार गूँजती हैतो सारा ध्यान वहीं लग जाता है. आज भी उन्हें उठने में देर हुई, जून ने ही उसे उठाया. कल शाम जून और नन्हा एक मित्र के साथ कम्प्यूटर में नई हार्ड डिस्क लगाने में व्यस्त थे, वह अकेले टहलने गयी, शाम का धुंधलका छा चुका था और हवा शीतल थी. बातूनी सखी का फोन आया वह अपने पुत्र की हिंदी को लेकर परेशान है, वह खुद इतनी अच्छी हिंदी बोलती है फिर भी अहिन्दीभाषियों को कुछ दिक्कत तो आती ही है. कल रात मूसलाधार वर्षा हुई, इस समय धूप निकल आई है. कल उन्हें इंटरनेट की सर्विस भी मिल गयी पर मॉडेम ठीक न होने के कारण सर्फिंग नहीं कर सके. नन्हे का आज केमिस्ट्री का टेस्ट है. आज लिखने की शुरुआत ईश्वर स्मरण से की थी पर उसे भूलकर कलम संसार में विचरण करने लगी है. नाव पानी में रहे तो ठीक है पर पानी नाव में आ जाये तो विनाश ही होगा न, मन यह जो खिंचा-खिंचा सा उड़ा-उड़ा सा रहता है, इसी कारण !

अहंकार की हवा मन रूपी गेंद को ठोकर खिलवाती रहती है. जो हम इस दुनिया को बांटते हैं, वही हमें मिलता है. सारा ब्रह्मांड एक प्रतिध्वनि है, प्रतिबिम्ब है. हम जैसा देखना चाहते हैं, दिखाना चाहते हैं वही हमें दिखायी पड़ता है. नम्रता धारण करें तो अहंकार अपने आप छूटता जायेगा, विनीत होकर इस हृदय रूपी घर को ईश्वर को अर्पित करें तो कृपा अपने आप मिलेगी. आज बाबाजी कातर स्वर में ईश्वर को पुकार रहे थे, ऐसी भावपूर्ण प्रार्थना को कौन अनसुना कर सकता है. ईश्वर उनके हृदय में आ बसे हैं, वह श्रोताओं को सिखाने के लिए ही ऐसी प्रार्थना कर रहे हैं ! उसने भी प्रार्थना की, इस जग से विदाई हो उसके पूर्व ही वे ईश्वर का अनुभव कर सकें, बुढ़ापा आये अथवा चिता की अग्नि उन्हें जलाए इसके पूर्व ईश्वर का ज्ञान उनके अज्ञान को जलाकर खाक कर दे. मोहपाश के जाल टूट जाएँ, बंधन खुल जाएँ औए वे पूर्ण मुक्त हो जाएँ. आजाद पक्षी की तरह वे निस्सीम आकश में उड़ान भरना सीख लें, यह जग उनके लिए बंधन का कारण नहीं बल्कि विकास का, उन्नति का साधन बन जाये ! आज वर्षा अभी तक आ रही है, खिड़की से शीतल हवा आकर पंखे की हवा को भी ठंडा कर रही है. नन्हे को आज पढ़ने नहीं जाना है. सोमवार को होने वाले इम्तहान की तैयारी करनी है. आज सुबह वे पहले की तरह पांच बजे उठे. ससुराल से फोन आया, मायके से कोई खबर नहीं आई है. न ही किताब के बारे में कोई खबर मिली है. अगले हफ्ते वे फोन करेंगे. कल शाम फिर जून मॉडेम लगाने में व्यस्त थे, शायद खराब है. वह टहलने गयी और पड़ोसिन से मिल आई, वह स्वस्थ नहीं है, घर जाकर पूर्ण स्वास्थय परीक्षण कराएगी. आजकल मन दुनियादारी में ही उलझा रहता हो सो उसकी कलम यही सब लिखी जा रही हैं, लेकिन ईश्वर हर क्षण उसके निकट है, इन सारी उलझनों के बीच वही तो एक सुलझन है !


कल दांत के उस एक्सरे की रिपोर्ट मिल गयी जो परसों कराया था, डाक्टर ने कहा है RCT करना पड़ेगा, पिछले साल भी जून महीने में घर से वापस आने पर करवाया था. कल रात डायरी में पढ़ा, लगभग १०-१२ दिन लगे थे फिर कुछ हफ्ते बाद परमानेंट फिलिंग हुई थी, उसी सब प्रक्रिया से अब फिर गुजरना होगा, लेकिन इस वर्ष वह ज्यादा जानती है सो तकलीफ कम होगी. आज जागरण में अद्भुत वचन सुनने को मिले, सुबह उठकर प्रभु को नमस्कार करें और दिन भर के लिए उससे आशीष की कामना भी..अपने विश्वास को त्याग पर केन्द्रित करें न कि संग्रह पर. ईश्वर से मिलने जाना हो तो गुनगुनाते हुए उमंग सहित, आह्लाद व उल्लास से भरा मन व चेहरा लिए जाना चाहिए. पूजा करना व्यर्थ होगा जब पहले से ही पूजा की समाप्ति का क्षण नियत कर लेते हैं. सांसारिक जेल से मुक्त होकर जब उस मुक्त से मिलने का क्षण आये तो क्यों न उस मुक्तावस्था को जीभर के महसूस करें. चौबीस घंटों में से कुछ समय तो उल्लसित, उमंग युक्त हृदय लिए उस परमेश्वर की निकटता में गुजारें ! मन तो प्रलोभनों की ओर हर पल दौड़ता रहता है, न चिन्तन करने योग्य विषयोंका चिन्तन करता है, ऐसे मन को समझा-बुझा कर अपने पास बैठाना आ जाये तो आराधना सच्ची होगी.   

Tuesday, May 6, 2014

एक रोमांचक फिल्म- एयर फ़ोर्स


Roof repairing work is going on since morning and creating loud noises. There telephone is still ie out of order. Weather is sunny and she has done most of the morning jobs. Got up early in the morning, first thing was jun‘s lovely good morning and then she saw a pitch black bird perhaps koel in their backyard, she was sitting on the cloth line, she flew after few moments, beautiful it was ! today she heard Mirza Galib CD but due to Nanha’s screen saver could not continue till end. Yesterday evening she again spoke harshly with jun and nanha but after that felt her mistake, today she will be aware every moment what, whom and why she is speaking. Now she has some time to solve the crossword in English magazine.

Today is Assam bandh for 24 hours called by All Assam Student Union, it means they have to sit at home whole time, of course they can go for a walk in the evening. Jun said, he will make sindhi curry today. Nanha is bit upset because he could not see “Disney Hour”

उनकी वापसी की टिकट भी रिजर्व हो गयी है. कल जून ने घर फोन करके पता किया. उसने सोचा, अब वहाँ सभी को उनके आने का इंतजार होगा. एक महीना दस दिन बाद उनकी उड़ीसा यात्रा का शुभारम्भ होगा. कल शाम एक मित्र परिवार डिनर के लिए आया, उन्होंने नये सोफे की तारीफ बहुत संयत तरीके से की. अगले बुधवार को उसकी एक सखी का जन्मदिन है, जिसे अब स्कूल में परेशानी नहीं होती, उसका आत्मविश्वास देखकर उसे भी काम करने का मन होता है, एक थोड़ी सी झिझक ही तो उसे रोक रही है. उसे नये साल में निर्णय ले लेना चाहिए नई जिन्दगी का. अभी भी बहुत से काम करने शेष हैं. हिंदी का कार्य अधूरा रह गया है, उसे भी पूरा करना है. नई कविताएँ लिखनी हैं और एक सतत प्रयास भी स्वयं को एक सार्थक जिन्दगी देने का !

सुबह किसी छोटी सी लडकी ने फोन पर उसे happy birth day कहा और फोन कट गया, आज न तो उसका जन्मदिन है और न ही पहले किसी नन्ही लडकी ने उसे विश ही किया है, जरूर वह फोन किसी और के लिए होगा पर उस वक्त तो उसके होठों पर मुस्कराहट दे ही गया. नन्हे को सुबह जब देर हो रही थी तो स्वयं ही कहने लगा कल से जल्दी उठेगा. कल उसको कुछ बातें जिन्दगी के बारे में समझायीं, जो उसके बचपन में किसी ने कहीं हों उसे याद नहीं पड़ता. कहकर गया है उसके स्कूल में फिजिक्स प्रोजेक्ट वर्क कराया जा सकता है शायद वह देर से आये. बरामदे में रखी रॉकिंग चेयर पर बैठकर लिखना अच्छा अनुभव है, हवा ताजी मिलती है और हरियाली आँखों को सुकूं देती है, कानों में न जाने कितने पंछियों की आवाजें सुनाई देती हैं, फूलों की सुगंध भी नासापुटों को..उसे याद आया पॉट प्लांट्स को वार्षिक खुराक देने के लिए माली से कहना है. कल वह गुलाबी स्वेटर पूरा हो गया जो वह ननद के होने वाले बच्चे के लिए बना रही थी.

पिछले दो दिन कुछ नहीं लिखा, शनिवार को जून के एक मित्र दोपहर के भोजन पर आने वाले थे, सारी सुबह उसी की तैयारी में बीती, दोपहर को टीवी पर क्रिकेट मैच और शाम को क्लब में ‘असमिया’ फिल्म Adajaya, आजकल क्लब में साल में एक बार होने वाला ‘फिल्म समारोह’ चल रहा है. इतवार की शाम भी मेहमान आये, सुबह तो साप्ताहिक सफाई में निकल जाती है. गोभी के पौधों के लिए कागज की टोपियाँ भी बनायीं.

कल शाम क्लब में AIR FORCE देखी, it was a fantastic फिल्म. आज वहाँ ‘चाची चार सौ बीस’ दिखाई जाएगी. आज सुबह भी जून के ‘शुभ प्रभात’ ने उसे उठाया, नन्हे को भी वही उठाते हैं और आजकल दोनों कमरों की नेट उतारना, रजाई रखना भी उन्होंने अपने जिम्मे ले लिया है. उसे नन्हे के लिए टिफिन और सबके लिए नाश्ता बनाने के अलावा कोई काम नहीं होता, यहाँ तक कि सुबह की चाय भी अक्सर वही बना लेते हैं.

कल गुरुनानक जयंती के उपलक्ष में अवकाश था, जून के दफ्तर में भी और नन्हे के स्कूल में भी. दोपहर को वे दोनों कम्प्यूटर की reformatting करवाने में व्यस्त थे, उसने वह टोपी व मोजा पूरा किया, आज नया set शुरू करना है, उस दिन पिता ने फोन पर बताया  कि सासुमा के लिए भी हाफ स्वेटर बनाना है, जिसके लिए ऊन उन्हें तिनसुकिया से मंगवानी होगी. शाम को एक जन्मदिन में गये, एक सखी की बातों से उसका एक नया ही पक्ष देखने को मिला, she is rather bold but..इस तरह की बातें अपने तक ही रखना ठीक है. खैर, आज नैनी के हाथ में चोट के कारण डस्टिंग व सब्जी काटने के काम भी उसके जिम्मे आ गये, काम निपटाकर उसे कुछ भूख का अहसास हुआ तो ख्याल आया, ओवन में मूंगफली भूननी है, नहीं तो जैसा यहाँ का मौसम है कुछ ही दिनों में खराब हो जाएगी. सुबह वे उठे तो काफी ठंड थी, जून ने सभी के लिए स्वेटर निकाल दिए, लगता है सर्दियों के कपड़े निकालने का वक्त आ ही गया है. पिछले हफ्ते कोई पत्र नहीं आया, उसे ख्याल आया,  उनके घर जाने की बात सुनकर किसी ने पत्र द्वारा कुछ नहीं कहा, फिर सोचा, कि दुनिया में सब, सब कुछ अपने ही लिए तो करते हैं न, याज्ञवल्क्य ने मैत्रेयी को हजारों साल पूर्व ही यह बता दिया था, वे भी तो अपनी ख़ुशी से जा रहे हैं न !




Tuesday, March 25, 2014

बुद्ध पूर्णिमा का अवकाश


तीन दिन बाद नन्हे को कविता पाठ प्रतियोगिता में भाग लेना है, अभी तक उसने याद नहीं की है, लेकिन वह जानती है आधे घंटे में ही याद कर लेगा, उसकी स्मरण शक्ति अच्छी है. उसका एक मित्र कविता पाठ की तैयारी में नूना से सहयोग लेने आया है, हिंदी जानने वाली महिला के रूप में उसका नाम थोड़ा बहुत लोग जानने लगे हैं. आज वह कम्प्यूटर से सीखी रेसिपी के अनुसार कढ़ी बनाएगी, उन्हें एक सीडी निशुल्क मिला है, ‘कम्प्यूटर एट होम’ जिसमें कई भारतीय व्यंजन है. कल से जून ने उसे कम्प्यूटर पर काम करना सिखाना शुरू किया है. आज दोपहर लंच पर एक मित्र परिवार आ रहा है, वे लोग ट्रेन से दोपहर एक बजे तक पहुंचेंगे. आज सुबह वे छह बजे उठे, पहले ट्रांजिस्टर पर समाचार सुने फिर star पर निनाद  सुना और फिर ‘जी इंडिया’ पर सन्त वाणी सुनी. भारत के कण-कण में, जन-जन के मन में उपनिषदों की वाणी का प्रचार, प्रसार है. यह कोई रहस्य नहीं रह गया है, न ही कभी था, कि मानव का शरीर प्रतिक्षण बदलता रहता है, किन्तु भीतर कुछ है जो कभी नहीं बदलता, वही आत्मा है, और वही परमात्मा का अंश है.

नौ बजने को हैं, पिछले दो दिनों की हलचल के बाद आज घर शांत है, कल ‘बुद्ध पूर्णिमा’ के कारण नन्हा और जून दोनों की छुट्टी थी. शाम को वे क्लब गये extempore speech में नन्हे ने भाग लिया पर कविता पाठ में नहीं ले पाया. बहुत देर हो चुकी थी, और उन दोनों को नींद आने लगी थी. सुबह स्कूल भी जाना है यह कहकर जून थोड़ा नाराज होकर उन सबको घर ले आये, वह भी ठीक से सो नहीं पायी, नन्हे ने तैयारी की थी पर भाग नहीं ले पाया इसी बात का दुःख अलग-अलग तरीके से तीनों ही महसूस कर रहे थे. पर सुबह वे सामान्य थे. उस दिन क्लब से ‘अनिता देसाई’ की एक किताब लायी थी, आधी पढ़ ली है, अच्छी है पर कड़वी सच्चाईयों से भरी हुई, इस दुनिया में हरेक को अपना बोझ स्वयं उठाना पड़ता है. सभी को सहारा नहीं मिलता.

कल बहुत दिनों बाद चचेरे भाई-बहन का पत्र मिला, अच्छा लगा, आजकल पत्र आना एक दुर्लभ घटना हो गयी है. अभी कुछ देर पहले फिर से पढ़ा कि मानव अपने शुद्ध रूप में आत्मा है और सर्वशक्तिमान परमात्मा से अलग नहीं है किन्तु अहम् का पर्दा होने से वह इस संबंध को पहचान नहीं पाता, ध्यान का अभ्यास भी किया पर गहराई तक नहीं पहुंच सकी. अच्छी बातें जो सुनने और पढ़ने में अच्छी लगती है उनका चित्रण साहित्य में किस तरह कर सकती है. जीवन के शाश्वत मूल्यों का चित्रण बिना किसी आडम्बर और शब्दजाल के, स्वाभाविक रूप से. देसाई की किताब के दो पात्रों तारा और विमला में से वह स्वयं को तारा के निकट क्यों पाती है, जबकि वह  किसी भी तरह से आगे नहीं है, कमजोर, डरी-डरी, लाचार, किसी न किसी पर आश्रित अपनी इस छवि से उसे बाहर निकलना ही होगा.


कल से उसे जुकाम ने जकड़ा हुआ है, बदन में हरारत सी महसूस हो रही है, नाक लाल हो गयी है, आँखें भारी सी हैं पर इन सबके बावजूद उसकी जीवनी शक्ति ज्यों की त्यों बरकरार है, यानि अपने रोजमर्रा के कार्यों को करने का उत्साह भी है और इच्छा भी. यह बात अलग है कि थोड़ा धीरे-धीरे ही कर पा रही है. अपनी छात्रा को कम्प्यूटर पर science encyclopedia दिखाया, नये स्वीपर से बाहर का नाला साफ करवाया, वह काम करना ही नहीं चाहता, दीनदास नाम है और शरीर भी मजबूत है पर थोड़ा आलसी है, सभी उतना ही काम करना चाहते हैं जितना करने भर से काम चल जाये. आज सुबह समाचार नहीं सुन पायी. परमाणु विस्फोटों के खिलाफ किस देश ने क्या कहा और कितने प्रतिबन्ध लगाये, आजकल यही तो होता है. कल शाम वे एक मित्र के यहाँ गये वहाँ उनकी अमीर दीदी के किस्से सुनकर (हजारों रूपये के गहने-कपड़े) कैसा तो लगा, वह  कल यूँ ही जुकाम से परेशान थी, फिर बाल भी धुले नहीं थे, साड़ी भी पुरानी पहनी थी. खैर कपड़ों से ही कोई अमीर नहीं बन जाता है, उसे अपनी अच्छी साड़ियाँ संभाल कर रखने के बजाय  पहननी चाहियें इतनी सीख तो मिली. आज मौसम यूँ तो गर्म है पर उसे पंखे की आवश्यकता महसूस नहीं हो रही है शायद हरारत की वजह से. उनके पेड़ में छोटी छोटी अम्बियाँ लगी हैं, एक दो तोड़कर शाम को चटनी बनाएगी, पुदीना भी अभी हरा है और हरी मिर्च के पौधे भी भरे हुए हैं. यानि सभी कुछ ताजा और शुद्ध...

Monday, March 24, 2014

कम्प्यूटर पर रेसिपीज



कल दोपहर हिंदी में सृजनात्मक लेखन के लिए दूसरी कविता लिखी, कविता यदि गढ़ी जाये तो उल्लास के बजाय मन को तनाव से भर देती है. कुछ देर ‘सत्यजित रे’ की पुस्तक पढ़ी. फिर नन्हा स्कूल से आ गया और दोपहर बाद की दिनचर्या में व्यस्त हो गयी. शाम को लाइब्रेरी से ‘अनिता देसाई’ की किताब लायी है. कल घर से पत्र आया है, पर उसके निर्णय के अनुसार जवाब अगले हफ्ते देगी तब तक दूसरा कोई खत भी आ जायेगा. कल शाम जून ने कहा उसे कम्प्यूटर में एक लैटर पैड बना लेना चाहिए पर ऐसा कौन है जिसे वह नियमित पत्र लिखे वह भी अंग्रेजी भाषा में. आज भी गर्मी बहुत है अभी तक उन्होंने टेबल फैन नहीं निकाला है, निकालने पर नैनी का मांगना लाजमी है, उसने कहा है अगले महीने वह पंखा खरीदना चाहती है पर हिसाब लगाकर देखा तो पैसे कम पड़े, उसी में पूरे महीने का खर्च भी चलाना होगा, यूँ उसकी बेटी भी काम करती है. और जून के अनुसार जिसकी जितनी आय होती है उसी में वे गुजारा करना सीख जाते हैं. पर जो समर्थ हैं उन्हें भी तो उनके लिए कुछ सोचना चाहिए. उन्होंने इतना धन लगाकर कम्प्यूटर खरीदा और कुछ सहायता करके पंखा खरीदने में उसकी मदद नहीं कर सकते, जबकि वह काम करके धीरे-धीरे पैसे चुका ही देगी. दीपक चोपड़ा के अनुसार जब इच्छा मन में उत्पन्न हुई है तो उसे ब्रह्मांड की गोद में डाल दो, खुदबखुद पूर्ण हो जाएगी. जैसे आजतक उसके सारे काम होते आए हैं.

कल दिन भर पूसी उसके पीछे-पीछे थी आज सुबह से गायब है, कल जब संगीत कक्षा में गयी तो उसके पीछे वह भी गयी और पूरे समय बाहर बैठी रही. शाम को जून और वह टहलने गये तो पीछे चल दी, जानवरों की भाषा यदि वे समझ पाते तो.. सुबह दो-तीन बार घर में आ गयी और जबरदस्ती उसे बाहर निकाला, मन इतना कठोर हो जाता है जब उसकी इच्छा के विरुद्ध कोई काम हो रहा हो. दीपक चोपड़ा कहते हैं जब लोग किसी व्यक्ति या परिस्थिति से परेशान होकर कुछ व्यक्त करते हैं या महसूस करते हैं तो यह प्रतिक्रिया उनकी भावनाओं के प्रति होती है और भावनाएं किसी अन्य की गलती से उत्पन्न नहीं हो सकती, उनकी जिम्मेदारी सिर्फ उनकी है, कोई कैसा सोचे यह उसी पर निर्भर करता है. there is always a choice and choice is ours. अपने मूड या अपनी मानसिक स्थिति के लिए किसी अन्य को दोषी या ज्जिम्मेदार ठहरने का किसी को कोई हक नहीं है, क्यों कि यह सत्य नहीं है. आज नन्हे की छुट्टी है, उसे कम्प्यूटर पर ढेर सारे काम करने हैं, सुबह से ही योजनायें बना रहा है.
कल शाम दो सखियाँ आयीं उनका नया टीवी देखने, एक को कम्प्यूटर भी देखना था, उसने अपना रेखाचित्र भी पढ़ने को दिया पर उसके छोटे-छोटे अक्षर वह ठीक से पढ़ नहीं पायी, वैसे भी इतने शोर में कोई गम्भीर बात पढ़ना आसान नहीं था. पर उसकी इच्छा पूर्ण हुई अपने आप ही. आज भी बादलों के कारण गर्मी कम है. आज टीवी पर एक कार्यक्रम देखा, जो दीपक चोपड़ा की उसी किताब पर आधारित था जिसमें आज पढ़ा कि उन्हें अपने आस-पास के लोगों व स्थितियों को वे जैसे हों वैसे ही स्वीकार कर लेना चाहिए न कि अपना दृष्टिकोण उनपर थोपना चाहिए. जैसे कि उसने सुबह चाय बनाने के तरीके पर जून को टोका. कल नन्हे ने उसका टाइम टेबल कम्प्यूटर पर बनाया, और उन्होंने एक cd देखा जिसमें ढेरों रेसिपीज थीं. computer is real fun !







Wednesday, March 19, 2014

नर्मदा की पावनता - RIVER SUTRA


आज सुबह से उसे असमिया सखी का ख्याल आ रहा है, एक बार फिर वे उसके घर गये और लगा कि वह अपने आप में इस कदर व्यस्त थी कि उन्हें महसूस होने लगा, उनका स्वागत मन से नहीं किया जा रहा है. जीवन में ऐसे क्षण तो आते ही रहते हैं. कभी न कभी अमैत्री का दुःख सभी को उठाना पड़ता है जिसने भी मित्रता का सुख लिया है. उसने कुछ देर पूर्व DCH के पेपर पढ़े, सितम्बर से पूर्व उसे प्रश्नपत्र हल करके भेजना है तथा परियोजना कार्य की रिपोर्ट भी भेजनी है. कल शाम को फोन आया कि सुबह कम्प्यूटर लेने बस स्टैंड जाना है पर जब जून और नन्हा तैयार होकर गये तो पता चला ‘डॉलफिन कोरियर सर्विस’ के दफ्तर में सिर्फ दो ही बॉक्स आये थे, तीसरा बॉक्स जिसमें मुख्य हिस्सा था कम्प्यूटर का, वह लोड करना ही भूल गये थे या किसी और कारण से वह नहीं पहुंचा. यानी एक दिन का और इंतजार.

कल शाम when they came back after evening walk. Nanha told about the phone call, jun confirmed the arrival of computer. They went to fetch it and till 9.30 in the evening installation was not completed. Today again enginer will come  and do the remaining job. She told her friends they said that they will come come to see it. It’s 8 am her student came and they read a poem“प्रेम”  written by  माखन लाल चतुर्वेदी. टीवी पर अटल जी का १६ अप्रैल को असम में ‘नर  नारायण सेतु’ के उद्घाटन के समय दिया गया भाषण आ रहा है. प्राकृतिक सौन्दर्य में तो असम अद्वितीय है ही यहाँ के बीहू नृत्य की बात भी निराली है. अल्फ़ा के कारण फैले आतंकवाद का जिक्र भी उन्होंने किया. कल गीता मेहता की पुस्तक  A River Sutra में संगीत के शास्त्रीय रूप का वर्णन पढकर सारेगामापाधानीसा का वास्तविक अर्थ समझ में आया. सा से नी तक की ध्वनियाँ प्राकृतिक स्वरों से ली गयी हैं. हरेक के लिए एक रंग भी निर्धारित किया गया है. संगीत की साधना और रागों को उनके सही रूप में पकड़ना एक तपस्या ही तो है, एक भी राग यदि सही अर्थों में समझ में आ जाये और उसके रूप का भाव हो तभी संगीत का ज्ञान हो सकता है. Peacock sa - black
calf calling its mother re – twang
Bleating of goat ga – gold
Cry of the Heron ma – white
Song of Nightingale pa – yellow
The neighing of a horse dha – indigo
Elephant's trumpet ni – green

कल कम्प्यूटर इंजीनियर उनका कम्प्यूटर अपने घर ले गये, इन्स्टालेशन में कुछ दिक्कतें आ रही थीं, जिन्हें वह दूर नहीं कर पा रहे थे, अब ३-४ दिन और लगेंगे. उसके बाद ही सही मायनों में उसका आना माना जायेगा. कल स्कूल से आकर नन्हे ने सभी पीरियड्स के बारे में बताया तो उसकी बातों से लग रहा था वह वहाँ की पढ़ाई से संतुष्ट है. अध्यापक कोर्स के अलावा बहुत कुछ बताते हैं. कल हेयर कट के बारे में कहा था, पर क्लब में बारबर नहीं था. सुबह माँ-पापा से बात हुई, उन्हें लगा जून दिल्ली से वहाँ भी जायेंगे, मामी जी भी आई हुई थीं. कल उसने  A river sutra पूरी पढ़ ली, अच्छी किताब है. नर्मदा नदी को इतना पवित्र मानते हैं, उसे मालूम ही नहीं था, गंगा-यमुना के अलावा अन्य नदियों के बारे में वे बहुत कम ही जानते हैं. उसने ध्यान दिया कि जब वह कोई पुस्तक पढ़ती है तो उसे सतही तौर पर ही याद रख पाती है, पुस्तक खत्म करने की जल्दी होती है, आगे क्या हुआ उसे जानने की उत्सुकता. इसलिए बहुत गहरे नहीं उतर पाती. पुस्तक की सुन्दरता को, भावों को तो पकड़ पाती है पर शिल्प पर उतना ध्यान नहीं जाता.  

उनकी कल की शाम हर रोज से अलग थी. जून ऑफिस से आए तो नन्हे ने टीचर का आर्डर बताया You need a hair cut उसे भी होमियो पैथिक डाक्टर के यहाँ जाना था, सो सभी निकल पड़े, एक तो डॉ के यहाँ काफी भीड़ थी दूसरे मंगलवार होने के कारण नाई की एक भी दुकान नहीं खुली थी. नन्हा निराश होकर बैठा था जब वे डॉ के यहाँ से आये, पर अब गाड़ी स्टार्ट ही नहीं हो रही थी. उसका एक फ्यूज उड़ गया था, फोन करके एक मित्र को बुलवाया, वे मकैनिक लेकर आए और गाड़ी ठीक हुई, लौटने में काफी देर हो गयी. आज सुबह ससुराल से फोन आया, पिता अपने किसी परिचित के लिए MBA के बाद होने वाली summer training के बारे में पूछ रहे थे. उनकी आवाज हमेशा उत्साह से भरी रहती है सुनकर अपने में भी ख़ुशी स्वयमेव पैदा हो जाती है. जबकि कभी किसी से बात करने के बाद एक उदासी की लहर छा जाती है.





Thursday, August 22, 2013

नाटक की रिहर्सल



दस बजे हैं, वर्षा है कि रुकने का नाम ही नहीं ले रही. आज सुबह समाचारों में सुना, आन्ध्र प्रदेश में लू से कुछ लोग मर गये, यहाँ उन्हें स्वेटर निकलने पड़ रहे हैं. दिल्ली में ओले पड़ते रहे पूरे बीस मिनट तक, सडक पर snow fall जैसा  दृश्य बन गया था प्रकृति के विभिन्न रूप एक साथ देखने को मिलते हैं भारत में. आज वह  लिखने में ध्यान केन्द्रित नहीं कर पा रही है, नन्हा भी यहीं है और एक के बाद एक सवाल पूछे जा रहा है, आलू इतने छोटे क्यों हैं ? इससे भी छोटे मिलते हैं ? कल शाम उसी परिचिता से बात हुई, वह दोपहर को तीन-चार बच्चों को लेकर आयेगी skit की प्रैक्टिस के लिए. केंद्र में बीजेपी के नेता अटल बिहारी वाजपेयी को राष्ट्रपति ने सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया है, सारे देश के लोगों की जो एक इच्छा थी कि एक बार बीजेपी को मौका मिलना ही चाहिए, पूरी हो गयी. असम विधान सभा में एजीपी की सरकार बनेगी, कहीं फिर से वह आतंक तारी न हो जाये जो ४-५ वर्ष पहले यहाँ छाया हुआ था.

आज सुबह वर्षा बहुत तेज हो रही थी जब बच्चे पढ़ने आये, children meet के कारण सुबह आते हैं आजकल, कल रात देर तक वह एक सवाल हल करती रही थी उनके लिये, पर उन्होंने वह स्वयं ही हल कर लिया था. नन्हा कम्प्यूटर क्लास से आकर खुश था, he is really enjoying this class. इस समय दोनों पिता-पुत्र क्लब गये हैं, वह बगीचे में काम कर रही थी. नैनी और उसके दो बच्चे भी उसके साथ बगीचे की सफाई कर रहे थे. बच्चे अपने घर की, घर में लगे आम, बेर के पेड़ों की, पिता की, नानी की बातें कर रहे थे, उन्हें सुनकर यही लगता है, उनका पहले का जीवन अच्छा बीता है, अब भी खुश रहते हैं ये लोग, कभी-कभी माँ परेशान रहती है जो स्वाभाविक है, पति ने दूसरी शादी कर ली है और वह तीन बच्चों को लेकर घर छोड़ आयी है. रोज सुबह ‘जागरण’ सुनने-देखने के बाद भी कभी-कभी वह भी अपने मन पर नियन्त्रण नहीं कर पाती है और न जाने क्या–क्या सोचने लगती है. गोयनका जी ठीक ही कहते हैं, यह मन अंदर से बड़ा बेचैन है, बड़ा अशांत है, कैसी-कैसी गांठें पड़ी हैं, कभी राग कभी द्वेष, कभी कामना के बंधन में जकड़ा न स्वयं सुखी होता है न दूसरों को सुखी करता है. यदि कोई प्रतिक्षण इस पर नजर न रखे तो मौका मिलते ही यह कहीं से कहीं भाग जाता है, मरकट राज की तरह इस डाल से उस डाल उछलता रहता है, कभी चोट खाता है तो कभी कोई मीठा फल मिल गया तो उछल पड़ता है. यह मन बड़ा ही चंचल है पर इसे बस में तो रखना ही होगा. अध्यात्म मार्ग पर चलने वाले को तो इसे साधना ही होगा.

मौसम आज भी वही है बादलों भरा. नन्हा कम्प्यूटर क्लास गया है, जून फील्ड गये हैं. उनके नाटक की रिहर्सल ठीक चल रही है पर अभी समूह गान के बारे में कुछ भी निश्चित नहीं है. बच्चों में भी उत्साह की कमी नहीं है. सुबह-सवेरे ‘जागरण’ में इतनी अच्छी बातें सुनीं कि उसका मन अभी तक उनमें डूबा हुआ है. बाहरी कर्मकांड को त्याग कर आन्तरिक प्रवृत्तियों की तरफ ध्यान देने की आवश्यकता है. मन जो सदा किसी न किसी जोड़-तोड़ में लगा रहता है उसको  स्थिर करने की, शांत चित्त होने की प्रक्रिया ही धर्म है. धर्म को आचरण में लाने का सबसे अच्छा उपाय है कि अपने मन पर नजर रखी जाये, सद्विचार हों, धार्मिकता स्वयंमेव आ जाएगी.

कल बंद था, उल्फा ने बंद कॉल किया था और इसीलिए बंद पूरी तरह सफल था. वे लोग अलबत्ता साइकिलों से घर से निकले, पर जिस कार्य के लिए गये वह  सफल नहीं हो पाया, अभी तक तो ऐसा लग रहा है जिस गाने का अभ्यास बच्चे कर रहे थे, वह शायद नहीं हो पायेगा. सुबह से शायद इसी कारण या मौसम के कारण वह कुछ झुंझला रही है पर उसी क्षण गोयनका जी के शब्द याद आ जाते हैं और मन को समझा लेती है. जून की फरमाइश पर साम्भर व नारियल चटनी बनाई है, इडली अभी बनानी है. दोपहर को एक जगह फिर रिहर्सल के लिए जाना है, कल की तरह सारी शाम भी उसी में जाएगी. उसने सोचा, अगले वर्ष से कम से कम वह तो इस रिहर्सल आदि से दूर ही रहेगी. इस हफ्ते खतों के जवाब भी नहीं दे सकी, और भी कई  काम इन पिछले दिनों नहीं हो पाए, और तो और इस वक्त भी मन में उन्हीं बातों की पुनरावृत्ति हो रही है, जो सुबह  से इस कार्यक्रम के सिलसिले में फोन पर की हैं. मन के आगे चारा है और जुगाली किये जा रहा है. परसों से कार्यक्रम शुरू हैं यह एक अच्छी बात है. इतवार को अंतिम दिन होगा, उस रात वे किसी नये सफर की कहानी सोचकर सोयेंगे. नन्हे का गृहकार्य जो बीच में ही रुक गया है शुरू हो जायेगा और शामों को उनका टीटी खेलना भी, लाइब्रेरी से किताबें बदलना और घर आकर एक साथ बैठकर कोई बोर्ड गेम खेलना भी. कितनी जल्दी इन्सान एक चीज से बोर हो जाता है.