Showing posts with label वर्ष. Show all posts
Showing posts with label वर्ष. Show all posts

Tuesday, May 14, 2013

राज भाषा हिंदी



जून के दफ्तर में आज पार्टी है, उन्हीं अधिकारी का विदाई समारोह, वह लंच पर घर नहीं आएंगे, अभी फोन पर बताया, आज सुबह उनकी पत्नी, जो उनके क्लब की सेक्रेटरी भी रह चुकी हैं, के बारे में सोचते-सोचते उसकी आँखें भर आयीं, वह एक बार उन्हें घर बुलाना चाहती है, पर जून नहीं चाहते, उसके जोर देने से शायद मान भी जाएँ. कल शाम वे कितने व्यस्त थे. नन्हा स्कूल से आया तो गृहकार्य करवाने के बाद उसके एक मित्र के घर ले गये उसका जन्मदिन था, जून छोड़कर आये तो साढ़े पांच हो चुके थे, पुनः एक घंटे बाद लेने गये, बाद में आठ बजे उन्हें फिर डिनर पार्टी के लिए जाना था, उन्हीं अधिकारी के यहाँ. उनका बनाया खाना तो उसे पसंद नहीं आया, सूप कुछ ठीक था, और उनका किचन देखा तो बेहद आश्चर्य हुआ, इतना टिपटॉप रहने वाली महिला का किचन इतना बेतरतीब व बिखरा हुआ था कि...सही है किसी का बाहरी रूप देखकर उसको सही रूप में नहीं जाना जा सकता. रात लौटने में देर हो गये हो गयी, नन्हे को नींद नहीं रही थी वापस आकर, उसकी आँखों में भी दर्द हो रहा था, सुबह सभी कुछ देर से उठे. कल अंततः सोफा बैक पूरा हो गया. अब नन्हे का हाई नेक बनाना है, उसके बाद वीसीआर का कवर पूरा करना है जो गर्मियों की एक दोपहर को एसी रूम में बैठकर शुरू किया था सम्भवतः जुलाई या अगस्त में. आज शाम को उसने भी एक परिवार को खाने पर बुलाया है. कुछ देर पूर्व उसकी बंगाली सखी का फोन आया कि उसका या नूना का सेंट्रल स्कूल का इन्टरव्यू लेटर अभी तक क्यों नहीं आया, जबकि वह इस बात को लगभग भूल ही चुकी थी, जब वह याद दिलाती है तभी याद आता है वरना...

  फिर तीन दिनों की चुप्पी लेकिन आज कहने को बहुत कुछ है, नन्हे की पहली छमाही परीक्षा हिंदी की है, सुबह उठा तो समय पर किन्तु वही हर बार की तरह एक नामालूम सी घबराहट व बेचैनी ने घेरा हुआ था, उसने उसे सामान्य रखने का भरसक प्रयस किया पर वह  ठीक से नाश्ता करके नहीं गया. शायद वे भी बचपन में परीक्षा के पहले दिन थोड़ा नर्वस हो जाते होंगे, और कुछ खाने की इच्छा नहीं होती होगी. आज क्लब की पत्रिका के लिए कविता देने की आखिरी तारीख है, और वह सोच रही है, इस बार कोई नई कविता लिखे, अपने उहापोह, संशयों से उबरने का इससे अच्छा साधन भला और क्या हो सकता है. कल शाम उसकी असमिया सखी अपने बगीचे के सेम देने आई, उनके बगीचे में इस वर्ष ऐसा कुछ नहीं हुआ जो बांटा जा सके. कल क्लब में सोविनियर की मीटिंग भी हो गयी, जून और वह गये थे, पन्द्रह मिनट में ही लौट आये, अभी तक उसकी कविता के अतिरिक्त हिंदी में लेख एक भी नहीं आया था, हिंदी राज भाषा हो या राष्ट्र भाषा लोग अंग्रेजी को ही प्राथमिकता देंगे.  
  ईश्वर के हीटर यानि सूर्य की ऊष्मा को ग्रहण करते धूप में बैठकर लिखने का इस वर्ष का पहला सुयोग है, इस वर्ष की जगह इन सर्दियों का कहना ही ठीक होगा. कमरे में सिहरन सी होने लगी थी, इस वर्ष गर्मी की तरह सर्दी भी ज्यादा पड़ रही है. फोन की घंटी बजी उसने सोचा पड़ोसिन का होगा, दोनों का नम्बर एक ही है, अपना फोन नहीं होने पर दुबारा फोन करने के लिए कहना होता है. पर जून का ही था, हाफजान जायेंगे.   

  आज पूरे एक सप्ताह बाद लिखने बैठी है, पिछले दिनों काफी कुछ घटा, नन्हे के इम्तहान हो गये. फिर क्लब की पत्रिका के लिए सामग्री का चयन आदि किया, टाइप होकर आ जाने के बाद एक बार फिर गलतियों का निरक्षण यानि प्रूफ रीडिंग करनी होगी. जीजीएम के भाषण का हिंदी अनुवाद जून और उसने किया उस दिन, पूरे ढाई घंटे वे बैठे रहे. शायद उन्हें पसंद आया हो. कल शाम वे एक उड़िया मित्र के यहाँ गये, शुरु में तो अच्छा लगा पर उसके बाद   उन मित्र ने अपने सभी सहकर्मियों की जिनके साथ पिछले दस-ग्यारह वर्ष से काम किया निंदा करनी शुरू की, मन बेहद उदास हो गया घर आकर काफी देर तक यही सोचती रही, कल शाम जून की मदद से उसने रजाई का खोल सिला, शनिवार तक रजाई भर जाएगी और कम्बल से जून को छुटकारा मिल जायेगा, उन्हें उसमें जरुर ठंड लगती होगी.

  वर्ष का अंतिम  दिन, मौसम बेहद ठंडा, जैसा कि होना भी चाहिए. यह साल विदा ले रहा है, मौसम भी उदास है. यह साल उनके लिए बेहद हसीन साबित हुआ. उसका मन ईश्वर के प्रति कृतज्ञता से भर जाता है..आने वाला वर्ष भी ऐसा ही होगा इसका विश्वास भी वही दिलाता है, हर अंत एक नये की..शुरुआत है. आने वाले वर्ष के लिए न कोई वादा किया है न कोई उद्देश्य रखा है..जिन्दगी जिस राह लिए जाएगी चले जायेंगे...अहिस्ता अहिस्ता, सचमुच अब वह उम्र नहीं रही, अब हालात से समझौता करके जिए जाने में ही सुख मिलने लगा है. ईश्वर जिस तरह रखे, उसी में संतोष है. यह पलायन नहीं समझदारी है उसकी नजर में.

  


Friday, November 9, 2012

पहाडों के पास



चार जुलाई, अमेरिका का स्वतंत्रता दिवस ! अर्जेंटीना फुटबाल विश्व कप के फाइनल में पहुंच गया है. सुबह हल्की वर्षा हुई, मौसम खुशनुमा है. जून तिनसुकिया गए हैं, कार की सर्विसिंग कराने. आज इदुल्जुहा है, जून का दफ्तर व सोनू का स्कूल भी बंद है, वह अपने मित्र के यहाँ गया है, अभी वह उसे लेकर आएगी, सुबह दूध पीकर चला गया था, अभी नाश्ता नहीं किया है, उसे कुछ भी खिलाने के लिए मनाना टेढ़ी खीर है. कल स्कूल से लौटा तो बहुत खुश था, कहने लगा बहुत मजा आया, अभी लिखाना शुरू नहीं किया है, केवल राइम्स ही सिखायीं. बनारस से पत्र आया है, माँ की तीन साड़ियां गायब हैं, आश्चर्य है. उसे भी पत्र लिखना है. छोटी बहन दीदी के पास गयी थी, उसने सोचा वह तो शायद अब अगले वर्ष ही मिल सकेगी उन सबसे.

आज उसने अपना विवाह में मिला सफेद गाउन पहना है, पहले ढीला-ढाला था पर अब कुछ ठीक है. इसका अर्थ है कि जून की मेहनत कुछ सफल हो रही है. वह उसे थोड़ा सा भारी देखना चाहते हैं, हमेशा कुछ न कुछ खिलने के चक्कर में रहते हैं. इस समय दोपहर के तीन बजे हैं, अभी सोयी थी कि बांह पर चींटी काटने जैसे लगा, उठी तो पसीने से भीगी हुई थी, ठीक पंखे के नीचे सोकर यह हाल है, चींटी तो कहीं दिखी नहीं. आज उसे विद्यार्थियों का टेस्ट लेना है, कल शाम जब वे बाजार गए थे एक और छात्रा आयी थी. वह शाम के लिए पेपर सेट करने लगी.

आज उनके विवाह को पूरे साढ़े पाँच साल हो गए, सुबह-सुबह जून ने कहा, “हैप्पी सेवेंथ जुलाई”, वह पहले समझी कि वह कुछ और कहना चाहता है, जैसे, वह सुबह-सुबह नहायेगा नहीं, वह इतना अच्छा है पर ..कभी कभी. आज शनिवार होने के कारण नन्हे का स्कूल बंद है, उसका मित्र आया है, दोनों खेल रहे हैं. मौसम आज बहुत अच्छा है, ठंड-ठंडा सा और उसका मन भी शांत है... कल सुबह दो नई छात्राएं आयेंगी पढ़ने.

कल का संडे बहुत अच्छा रहा, रिमझिम वर्षा में वे लोग नामरूप गए, हरे-भरे वृक्षों औए चाय बागानों को पार करते पहाड़ों के बिलकुल निकट पहुंच गए थे. नन्हा और उसका मित्र बहुत खुश थे. कल नन्हे का जन्मदिन है, पर परसों उसका टेस्ट है के.जी.वन में दाखिले के लिए, इसलिए वे कल नहीं बल्कि परसों शाम को मनाएंगे. कुछ लोगों को ही बुलाना है, जून का कहना है कि इस बार ज्यादा लोगों को नहीं बुलाएँगे. कल रात उसने कहा कि फुटबाल मैच देखेंगे पर दोनों को नींद आ गयी. पश्चिम जर्मनी आखिर जीत गया और विंबलडन में स्टीफन..भारत का भी एक खिलाडी जूनियर वर्ग में विनर है उसका नाम इतना मुश्किल है कि.. जून को रात को नींद आने लगती है जब उसे बहुत सी बातें करनी होती हैं.


Tuesday, November 6, 2012

खिलौनेवाला कमरा



कल शाम को उनकी ही लेन के एक बंगाली महोदय एक विद्यार्थी को लाए, बारहवीं का है, गणित पढ़ना चाहता है. आज से वह यहाँ घर पर पढ़ाने का कार्य आरम्भ कर रही है, अच्छा लग रहा है सोचकर कि वह भी कुछ ऐसा करने जा रही है जो किसी की सहायता के लिए है. उसने सोचा वह पूरे मन से पढ़ाएगी, आज मैट्रिक्स पढ़ाना है. नन्हा अपने मित्र के साथ गेस्ट रूम में खेल रहा है, वह कमरा उसके खिलौनों से भर गया है, चाहे जैसे खेले, रखे, सजाये उसे उस कमरे में पूरी छूट है. कल ननद का पत्र आया है, वे लोग नन्हे को बहुत याद करते हैं, यह तो ठीक है, लेकिन शाम को पांच बजे दोपहर का भोजन तो कुछ ठीक नहीं लगता न. आज लगतार चौथा दिन है गर्मी का, बादलों का नाम भी नहीं है. अभी सवा दस हुए हैं, उसने सोचा आधा घंटा वह पढ़ेगी फिर फुल्के बनाएगी.

कल व परसों उसने गणित पढाया, अनुभव ठीक ही रहा. आज शनिवार है, डिब्रूगढ़ से समाचार समीक्षा का कार्यक्रम आ रहा है. आज भी दिन गर्म है, परसों रात को भयानक गर्जन-तर्जन के साथ वर्षा हुई थी उसका कुछ असर बाकी है सो धूप तेज नहीं है. नन्हा लिख रहा है, एक से बीस तक लिखने में उसे आधा घंटा लगता है, कभी-कभी जानबूझ कर देर लगाता है. उसका मित्र खेलने आ गया है, अब वह जल्दी से लिख लेगा. आज पत्र भी लिखने हैं, दीदी का पत्र भी आया था, पता नहीं वह अभी यहीं हैं या आबूधाबी चली गयी हैं. आज वह अपनी अध्यापिका को भी पत्र लिखेगी. जून ने कहा था, घर में रंग-रोगन करवाने के लिए अर्जी देंगे.

साढ़े दस हो चुके हैं. आज फिर कुछ दिनों बाद डायरी खोली है, पर दायीं हथेली में बुरी तरह जलन हो रही है, आज एक हरी मिर्च काटी थोड़ा महीन, बस उसी का असर है, बाएं हाथ पर भी थोडा असर है मगर दायीं हथेली तो.. फिर ऐसे में क्या लिखा जायेगा. जून आकर कुछ तो उपाय करेंगे, पर अभी उनके आने में बहुत देर है. कल उन्हें गोहाटी जाना है उनकी पहली, नई, मारुति कार लाने,

आज शुक्रवार है, जून संभवतः कल आएंगे, कल रात या परसों सुबह. कल रात वह देर तक नहीं सो सकी फिर नींद भी आयी तो सपनों भरी. उसकी असमिया सखी ने खाने पर बुलाया है आज शाम को, कल तिनसुकिया जाने को भी कहा है. नन्हे के लिए सैंडिल लेना है, दलिया, चाय, फल, साड़ी पिन और एक कॉटन साड़ी. जून को कैसा लगेगा- शायद बहुत अच्छा या कुछ कम अच्छा. वैसे उसे साड़ी की जरूरत तो नहीं है फ़िलहाल- हाँ कॉटन सूट की है.

आज उन्हें जाना था था पर मौसम ऐसा बिगड़ा है कि... सुबह से मूसलाधार वर्षा हो रही है, घटाटोप बादल छाये हैं, ऐसे में उन्हें जून की याद ज्यादा आने लगी, नन्हा बार-बार पापा के बारे में पूछने लगा. घर में बंद रहो तो कितना खाली-खाली लगता है, वैसे चाहे दिन भर घर में रहें, पर जब मजबूरी हो तो खलता है. उसने सोचा, एक तरह से ठीक ही हुआ, जून के बिना तिनसुकिया में वे करते भी क्या..?

नन्हा आज एक वर्ष बाद फिर से स्कूल गया है. पता नहीं वह क्या कर रहा होगा, आज जब उसे छोड़कर आयी तो वह थोड़ा उदास था, जून उसे लेकर आएंगे. उनके आने से पहले वह  भोजन पूरी तरह तैयार रखेगी, उसे लगा कि अब उन्हें भोजन डाइनिंग टेबिल पर बैठकर खाना चाहिए. नन्हे को सीखना भी तो है अपने आप खाना. उसने बड़े जतन से टेबिल सजाई.




Friday, October 19, 2012

बड़ा दिन ठंडा सा



आज उसने तीन फाइलों का काम खत्म किया, अभी फाइनल का लेसन प्लान बनाना है. बैठे-बैठे उसकी कमर अकड़ गयी है, काफी देर से कुर्सी पर बैठी है और कपड़े सिलने में भी सीधा बैठना पड़ा, कितने ही सलवार-कमीज की सिलाई खुल गयी थी वही ठीक करती रही. लिखने का काम अभी भी बहुत है. शेष पढ़ाई तो बिलकुल नहीं हो रही है. लाइब्रेरी से कुछ किताबें ली थीं, उनसे भी नोट्स बनाने हैं.

इतवार के कारण कल टीवी पर महाभारत आया, सभी के साथ नन्हा भी बहुत शौक से देख रहा था. उन्हें एक परिचित परिवार के यहाँ जाना था, दो घंटे तो लग ही गये. आज कालेज शायद बंद है, अब न भी हो तो क्या, वह तो नहीं गयी है, लिखने का काम आज तो पूरा कर ही लेना चाहिए. आज सुबह उसने जून को पत्र लिखा, पोस्टमैन भी एक घंटे में आ जायेगा. आज उन्होंने दोपहर का भोजन जल्दी बना लिया है, अब कोई चिंता नहीं. सिर्फ लिखना और आराम करना दिन भर..पढ़ना-लिखना बस...एक बजे नन्हे को सुलाएगी, अभी बारह बजे हैं.
आज जून के पत्र और ग्रीटिंग कार्ड्स मिले, हमेशा की तरह मधुर से पत्र..ऐसा लगता नहीं कि उससे दूर है...या उससे दूर रहने की आदत पड़ गयी है. धीरे धीरे सम्बन्धों में स्थिरता आती है, फिर यह भौतिक दूरी मायने नहीं रखती. इतनी दूर रहकर भी वे एक-दूसरे को उसी तरह समझ सकते हैं जैसे पास रहकर. छोटी बहन का पत्र आया है, वह खुश है. माँ-पिताजी का पत्र भी आया है, छोटा भाई भी गुड़िया का पापा बन गया है. उसने सोचा आज ही जवाब दे दे तो ठीक रहेगा, फिर बाद में उपहार भेजेगी, एक स्वेटर या फ्रॉक !

अब रात को ठंड बढ़ गयी है, आज से रजाई लेनी होगी. अभी तक कम्बल से ही काम चल रहा था. परसों कालेज खुल रहे है. मेजर का काफी कार्य हो गया है, अब चार्ट बनने का काम शेष है, कल बाजार जाकर चार्ट पेपर खरीदेगी. आज क्रिसमस है, बड़ा दिन, पर उनके लिए आज का दिन बड़ा किसी भी तरह से तो नहीं है. मन बेचैन है, एक घुटन सी महसूस कर रहा है, और माहौल भी वही है कल का सा बेचैनी भरा. कल उसने जून को अधूरा पत्र लिखा अब उसका पत्र आने पर ही पूरा करेगी.

साल का अंतिम दिन और साल का अंतिम रविवार भी. कल से नववर्ष का शुभारम्भ हो रहा है और उसका मन हर वर्ष की तरह कई मधुर कल्पनाओं से ओत-प्रोत है...जून की स्मृति भी है तो..स्नेह की मधुर यादों के साथ उन्हें एक अच्छा खत लिखेगी और पुराने वर्ष के सभी पत्रों के जवाब भी देने हैं न...नए वर्ष में नए खत नए जवाब..!

Wednesday, October 10, 2012

पड़ोस का सैलून



अगस्त का पहला दिन..मन अजीब दुविधा में पड़ा है, बनारस से उस फोन के अलावा और कोई सूचना भी तो नहीं मिली है. उसका एडमिशन यदि नहीं हो पाया तो..बनारस जाना तो था पर इतनी जल्दी जाना पडेगा यह नहीं सोचा था. गर्म पानी के सिस्टम की पाइप की वेल्डिंग करने के लिए कर्मचारी आए हैं, कितना शोर करती है वेल्डिंग मशीन. नन्हा होता तो शौक से देखता, स्कूल गया है उसे लेने भी जाना होगा स्कूल से, जून को फील्ड से आने में देर हो जायेगी. मौसम आज स्वच्छ है यानि खूब गर्मी पड़ेगी. लगातार वर्षा से रेलें भी तो नहीं चल रही हैं. कल बहुत दिनों बाद मंझले भाई का पत्र आया है. इसी महीने रक्षा बंधन भी है. जून को समय मिले तो बाजार जाकर राखी लायें. उसे दो रेसिपीज और मिली हैं, वह अच्छा खेल था, जब कुछ महिलाओं ने मिलकर आपस में रेसिपीज साझा करने का तरीका निकाला था.

कल बेहद गर्मी थी, दोपहर भर बेचैनी थी. आज सुबह के सवा नौ बजे धूप थोड़ी कम है बादल के एक टुकड़े ने सूरज को ढक लिया है मगर कब तक ? नन्हे को कल सुबह ठंडे पानी से नहला दिया, उसे हल्का सी ठंड लग गयी है, जानबूझ कर हम मुसीबतों को निमंत्रण देते हैं नब्बे प्रतिशत मामलों में. उसे स्कूल लेने आज भी जाना है. जून व्यस्त हैं, कल रात आठ बजे आये. आज उन्होंने किन्हीं परिचित को चाय पर बुलाया है, दोपहर को ही नाश्ता बनाना है और बैठक ठीक-ठाक करनी है.

अभी-अभी जून डिब्रूगढ़ गए हैं अपने एक सहकर्मी के साथ. उनके कान का संक्रमण जो ठीक हो गया सा लगता था अब फिर से हो गया है. बांया कान कभी बंद हो जाता है कभी खुल जाता है. सभी रिपोर्ट लेकर गए हैं. दोपहर बाद तीन-चार बजे तक आयंगे. नन्हे की तबियत आज सुबह भी पूरी तरह ठीक नहीं थी, पता नहीं कैसा होगा, हिम्मती लड़का है मैनेज कर  ही लेगा. आज ट्रांजिस्टर पर कितने मधुर-मधुर गीत आ रहे हैं, प्रेम की चाशनी में पगे हुए, कल रात वे भी ऐसे ही भावों में भर रहे थे. शाम को नाश्ते का आयोजन ठीक रहा, हमारा रात्रि भोजन भी वही नाश्ता ही हो गया. नन्हे को लेने आज भी उसे ही जाना होगा, किसी से लिफ्ट मिल गयी तो ठीक नहीं तो रिक्शा ले लेंगे. बनारस से खत की प्रतीक्षा है पर ट्रेन न चलने की वजह से डाक भी तो समय पर नहीं आ रही है. पूरे देश में बाढ़ ने तबाही मचाई है. हर वर्ष यही होता है, करोड़ों रुपयों का नुकसान, कब हमारा देश सक्षम होगा, इन आपदाओं से निपटने में.

सोनू की खांसी बढ़ गयी है और हल्का बुखार भी है. कल शाम को वह बहुत खुश था, खूब बातें कर रहा था. पर रात वह बेचैन था, साँस तेज चल रही थी. वह उसे गुमसुम देखकर व्यग्र हो गयी, उसका उदास चेहरा देखकर वह भी उदास हो गयी, सुबह वे उसे अस्पताल ले गए थे. छह-सात बोतलें दी हैं डा. ने. बेनाड्रिल दी उसने, पीते ही सो गया, अभी तक उठा नहीं है कि कुछ खाने को दे. उन्हीं की लापरवाही का नतीजा भुगत रहा है यह नन्हा बच्चा. जून कल पांच बजे लौटे, उनका कान ठीक हो गया है, वैक्स जम गया था और कुछ नहीं.

नन्हा आज ठीक है, सुबह स्कूल नहीं गया. कल से भेजेगी. तीन दिन पढ़ाई-लिखाई बंद रही अब उसका गृहकार्य करने में मन ही नहीं लग रहा था. इस समय पापा के साथ अपने मित्र के यहाँ गया है, वही उनके घर के पीछे रहने वाले पड़ोसी. उसे यहाँ आये एक महीना होने को है वे लोग उनके यहाँ नहीं आये, न ही वह गयी. सुबह वह सोनू को यहीं पास में एक पार्लर में ले गयी थी बाल कटवाने के लिए, एक सरदारनी ने खोला है, जो बाल तो अच्छे काटती हैं पर समय बहुत लगाती हैं.

Tuesday, October 9, 2012

किताबों का सेट



उन्हें घर आए तीसरा दिन है, जब से वे आए हैं बादल बने हुए हैं. कल दिन में उमस थी पर आज मौसम ठंडा है. यात्रा सुखद रही. अभी तक घर पूर्णरूप से व्यवस्थित नहीं हो पाया है. आज नन्हे का स्कूल में पहला दिन था, अच्छा रहा. उसने जरा भी परेशान नहीं किया अर्थात वह एक बार भी परेशान नहीं हुआ. बल्कि पूरी तरह आनंद उठाया उसने. कल बकरीद की छुट्टी है. दोनों घर पर पत्र लिखेगी तो सब बातें लिखेगी, उसने सोचा. आज उन्हें एक जगह रात्रि भोज में जाना है. अब तैयार होना है.
आज भी वर्षा हो रही है, कल रात भर होती रही. सुबह के पौने छह हुए हैं, यही वक्त सही है डायरी लिखने का, जून को उठाकर आयी है, दस-पन्द्रह मिनट बाद ही वह उठेंगे. नन्हे का स्कूल बंद है. बहुत दिनों बाद उसने आज व्यायाम किया, कितना हल्का लग रहा है, उसने तय किया है जब तक यहाँ है नियमित करेगी. वहाँ नहीं कर पाती थी, छोटी सी जगह और इतने सरे लोग. यहाँ कितना खुला-खुला है, जहां जब चाहे बैठो, जब चाहे लेट सको. वहाँ हर बात का समय देखना होता था. कल वे क्लब में फिल्म देखने गए, कहानी तो वही पुरानी थी, पर पर कुछ दृश्य सचमुच अछे थे, हँसाने वाले, पर कहीं-कहीं समझ नहीं आ रहा था हँसें या रोयें. सोनू पूरे वक्त बैठा रहा, आखिर में उठ गया लेकिन फिर आके बैठ गया.

कल उनके कुछ पैसे खो गए, आज सुबह जब दफ्तर जाते समय जून ने पर्स देखा तो नदारद, लगता है कल कमीज की जेब में रह गए, और कपड़े धोते समय..महरी से पूछा तो उसने साफ मना कर दिया. परसों वे तिनसुकिया गए थे, अनुभव अच्छा नहीं रहा, कार से उतरते ही वर्षा होने लगी जिसने घूमने का सारा मजा किरकिरा कर दिया. जून के कभी-कभी अजीब व्यवहार के कारण वे नन्हे की बरसाती भी नहीं खरीद सके. समझ नहीं आता कि वह किस दुकान में कैसा व्यवहार करेंगे. फिर इतनी सारी मिठाई, आधा किलो काजू वाली नमकीन और काजू खरीद लिए, इतने रुपयों का सिर्फ खाने का सामान, उसे सबल देखना चाहते हैं वह, अभियान शुरू किया है इन दिनों. पिछले दिनों उसका वजन कुछ तो कम हुआ ही है, जो विवाह के बाद नन्हे के होने के बाद बढ़ा था. उसे कम से कम पचास का तो होना चाहिए पर उससे ज्यादा नहीं. जब से वे यहाँ आए हैं उसका वजन एक केजी तो बढ़ गया होगा. नन्हे का स्कूल में चौथा दिन था, खूब बातें बनाता है, स्कूल के बारे में उसकी राय अच्छी है, दोस्त बनाना चाहता है पर शायद उसके साथ बैठने वाला बच्चा हिंदी भाषी नहीं है. जून आज उसके लिए मंगाई किताबों का सेट लेकर आएंगे पोस्ट ऑफिस से.

कल जून ने कहा कि चार बजे जब वह आयें उसके पहले उसे व टिफिन भी तैयार रहना चाहिए. अभी तक महरी नहीं आयी है, पानी भी नहीं आ रहा है, स्नान भी लगता है, देर से ही होगा. आज सुबह छोटी बहन को पत्र लिखा, कार्ड भी भेजा. उसका जन्म दिन आ रहा है, आज शायद उसका परीक्षा परिणाम निकल गया होगा पर उन्हें तो दस दिन बाद ही पता चलेगा. कल से मौसम गर्म है. नन्हा स्कुल गया है, घर शांत रहता है आजकल ग्यारह बजे तक, कितना बोलता है आजकल वह, कितने नए शब्द सीख रहा है. कल शाम उनका एक परिचित परिवार मिलने आया था. सब कुछ सामान्य है, अपनी गति से अबाध रूप से चल रहा है, पर स्वप्नों का कोई अर्थ होता है, या कल रात देखे नाटक का परिणाम है, हाँ, यही सत्य है.  
 



Friday, July 6, 2012

दाल का पानी


नन्हा देर से सोया है सो अभी तक जगा नहीं है, नूना के मन का अश्व विचारों की धूल उड़ाता जा रहा है. उसे समझ में नही आता क्या उचित है क्या अनुचित, सब कुछ जैसे अपने आप हो रहा है, उनका कोई अधिकार ही नहीं, वे पर चले जा रहे हैं बस यूँ ही... जैसे बहे जा रहे हों नदी की धारा में. वह पल भर भी बैठ कर सोच नहीं पाती कि क्या करना चाहिए. क्या थे वे और क्या  हो गए हैं, कोई व्यवस्था नहीं रह गयी है. वर्ष समाप्त होने को आया है. अगले महीने उनके विवाह की वर्षगाँठ है, पिछले वर्ष उसने जून से कहा था कि बहुत अच्छी तरह मनाएंगे वे यह दिन पर अब उसे लगता है कि किसी को भी नहीं बुला पाएंगे. मन में बातें उठती ही चली जाती हैं बिन बुलाए मेहमान की तरह या फिर बिन बुलाई नदी की बाढ़ की तरह. उसने सोचा आज दोपहर वह सोयेगी नहीं, बस चुपचाप बैठकर सोचेगी कुछ. आज धूप तेज है मन होता है बाहर धूप में बैठे थोड़ी देर, उसने सोचा जून भी आने वाले होंगे.

कल क्रिसमस है, बचपन में सभी त्योहारों को मनाने का कितना चाव होता है. वे क्रिसमस ट्री सजाया करते थे, और दिन भर यीशू के गीत गाते थे. आज इस समय वह जो डायरी लेकर बैठी है उसका कारण वही यादें हैं. अभी सुबह ही है सोनू खेल रहा है बीच-बीच में शोर मचाता है. रेडियो सीलोन से बौद्ध संदेश सुनाया जा रहा है पर उसे कुछ भी समझ में नहीं अ रहा है. क्योंकि उनका ट्रांजिस्टर थोड़ा अस्वस्थ है. नन्हा अब करवट लेकर सोने लगा है, बड़ा हो रहा है. मैच आरम्भ हो गया है भारत और श्रीलंका के मध्य. उसने खाना तो बना लिया है पर स्नान नहीं किया महरी कपड़े धो रही है. रोज सुबह का वही क्रम है ऐसे जाने कितने दिन गुजर गए और कितने और गुजर जायेंगे. एक दिन वे सोचेंगे कि सारा जीवन बीत गया इसी उहापोह में, कुछ तो किया ही नहीं. सचमुच सिर्फ अपने तन-मन की चिंता ही व्यस्त रखती है हर पल. और कुछ कहाँ सोच पाते हैं, यह जो दुनिया में इतनी बातें होती हैं उन्हें  पता ही नहीं चलता. कितना दुःख है दुनिया में पर साथ में कितनी खुशी भी तो है कहाँ मिलती है उन्हें उसकी झलक भी ज्यादा. हाँ, अपने में व्यस्त तो वे खुश हैं बेहद खुश. जून, नूना और नन्हा बस तीन प्राणी, छोटा सा संसार है उनका. उसे ध्यान आया दाल उतारनी है कहीं कुकर में पानी खत्म ही न हो जाये. 
क्रमशः