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Tuesday, June 27, 2023

रंग और ब्रश




रात्रि के नौ बजने वाले हैं। आज मौसम अपेक्षाकृत गर्म है। कहीं से एक बच्चे के रोने की आवाज़ आ रही है, जो सदा ही उसे विचलित कर देती है। शायद वह गिर गया हो, या उसे किसी बात पर डांट पड़ी हो। असम में कितनी बार बाहर जाकर रोते हुए बच्चों को हंसाने की कोशिश करती थी, वहाँ आसपास कई बच्चे थे। यहाँ तो घरों में बहुत ध्यान रखा जाता है पर बच्चे तो आख़िर बच्चे हैं ! अचानक इस समय कैसी हवा चलने लगी है, वातावरण का कितना अधिक प्रभाव मानव के मन पर पड़ता है। सुबह उठे तो बारिश के कारण देर से टहलने जा पाये, ऐसे में सारी दिनचर्या उलट-पलट जाती है। परसों उन्हें रक्त की सामान्य जाँच कराने जाना है। जून को बढ़ती हुई उम्र में होने वाली परेशानियों का भय सताने लगा है, जबकि नूना के मन में तो उम्र का ख़्याल भी नहीं आता।समय भी तो एक भ्रम ही है, जब सब कुछ माया ही है तो फिर डर किस बात का ! शाम को वह छत पर थी, नीचे कामवाली  जा रही थी, उसने बुलाकर कल सुबह जल्दी आने के लिए कहा, पर वह हिन्दी नहीं जानती, पता नहीं क्या समझा होगा। उसी समय सब्ज़ी वाला ट्रक आया था, जून लेने गये, पर कोई भी सब्ज़ी ताज़ी नहीं थी। सुबह वह वर्षों बाद बालों में लगाने वाले दो क्लिप लायी, कोरोना की मेहरबानी से बाल लंबे हो गये हैं। शाम को पिताजी से बात हुई, मंझला भाई मिलने आया था, नया सोफा और नया मैट्रेस मँगवाया है। उनका स्वास्थ्य पूरी तरह ठीक नहीं है फिर भी वह बहुत खुश थे। जून ने पेंटिंग के लिए नये फ़्लैट ब्रश माँगा कर दिये हैं। वह उसका बहुत ध्यान रखते हैं। दोपहर को एक चित्र बनाया, रंगों को कागज पर उड़ेलने में कितना आनंद आता है, इसका पता ही नहीं था। कला कोई भी हो ह्रदय को आनंदित करती है। देवों के देव में लेखा दूसरी पार्वती बनाकर आयी है। कथा अति रोचक हो गई है।  


आज शाम वे नन्हे के घर आ गये हैं, कल  सुबह यहाँ से जाँच के लिए रक्त का नमूना ले जाने के लिए लैब से कोई व्यक्ति आएगा। रात्रि भोजन जल्दी कर लिया ताकि बारह घंटों से कुछ अधिक का उपवास हो जाये। सोनू अपनी एक सखी के लिए केक बना रही है। शाम को छोटी बहन से बात हुई, वे लोग नवरात्रि की पूजा की तैयारी के लिए बाज़ार जाने वाले थे। विदेश में रहकर भी वे सभी उत्सव बहुत विधि से मनाते हैं। सुबह उठे तो आज भी वर्षा हो रही थी, समाचारों में सुना हैदराबाद में अति भीषण वर्षा हुई है, सामान्य जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। 

सुबह एक विचित्र स्वप्न देखा, जो बहुत कुछ सिखा रहा है। घर का पिछवाड़ा देखा, वहाँ एक माली भी काम कर रहा है। दीदी को देखा, उन्हें सचेत किया, पीछे गंदगी है। जिसमें सड़ी और कटी हुई सब्ज़ियाँ हैं, जिन्हें पानी से भरे एक टब में डाल दिया, पता नहीं क्या अर्थ था इस स्वप्न का, फिर गूगल पर स्वप्न फल में पढ़ा तो पता चला कि अपने किसी कृत्य को स्वीकारा, जिस पर पछतावा था। मन कुछ हल्का हुआ, उसके पूर्व मन आत्मग्लानि से भर गया था। सपने तो सपने ही हैं पर वे प्रतीकों के रूप में कितना  कुछ कह देते हैं। सुबह उठी तो नन्हे ने पूछा, आप योग अभ्यास करेंगी, उसके टीचर ने बहुत अच्छी तरह आसन कराये, एक घंटा कैसे बीत गया, पता ही नहीं चला। उसके बाद पैथोलॉजिकल लैब के एक कर्मचारी ने आकर रक्त लिया। उसके बाद नाश्ता किया, नन्हे ने लंच भी पैक करवा दिया था। वापस घर आकर सफ़ाई करवायी, स्नान, पूजा, ध्यान  के बाद भोजन किया, अच्छा बना था। 


उनकी जाँच की रिपोर्ट आ गई है, सब कुछ सामान्य है। आज अष्टमी तिथि है, सुबह सरस्वती देवी को समर्पित कुछ पंक्तियाँ लिखीं। भीतर भाव उमड़ रहे थे सो दो कविताएँ और लिखीं। यदि अतीत मार्ग में न आये और भविष्य की कोई कल्पना मन न कर रहा हो  तो वर्तमान के गर्भ से ही कर्म का जन्म स्वतः होता है। जब मन पूरी तरह से जगा हो, तभी कला का जन्म हो सकता है। जे कृष्णामूर्ति को कहते हुए सुना था, मृत्यु के क्षण में सारे अतीत की मृत्यु हो जाती है, और ध्यान भी वही है। हर पल यदि ध्यान में रहना है तो अतीत की स्मृति नहीं रहनी चाहिए, जो वर्तमान में बाधा बने। वर्तमान से आँख मिलानी हो तो अतीत का पर्दा आँख पर नहीं रहना चाहिए।  मँझली भांजी ने दिवाली के लिए तोरण और कलात्मक  दिये भेजे हैं, वह ऐसी कई वस्तुएँ बनाती है।  


Monday, July 9, 2018

फूलों के रंग



पिछले दिनों काफी घूमना हुआ, कई परिजनों से भेंट हुई. बड़े भाई के साथ कुछ दिन बिताये. परसों दिल्ली से वह लौटी तो घर में एक मेहमान मिला, छोटी ननद का छोटा पुत्र यानि उसका भांजा, जो वार्षिक परीक्षाओं के बाद कुछ दिनों के लिए यहाँ घूमने आया है. जून उसी दिन गोहाटी चले गये. आज वह वापस आ रहे हैं, पर कल उन्हें पुनः जाना है. यह किशोर सभी कार्य धीरे-धीरे करता है, और इसका बड़ा भाई उतनी ही शीघ्रता से. सुबह चार बजे उठाने को उसने कहा था, पर साढ़े पांच बजे उठा, वे ट्रैक पर टहलने गये, जिसके निकट स्थित गुलाब का बगीचा फूलों से भर गया है. कल शाम वे मृणाल ज्योति गये, स्कूल आगे बढ़ रहा है. भांजा भी गया था, चुपचाप बैठकर किताब पढ़ता रहा. बिस्किट ले गया था, पर बांटे नहीं उसने, उसके कहने पर शायद बाँट भी देता, वे देकर आ गये. आज नैनी की जगह मालिन काम कर रही है. नैनी अस्पताल में है, उसका तीसरा बच्चा जन्म लेने को है, सब कुछ ठीक से हो जायेगा, उसने मन ही मन प्रार्थना की. शनिवार को साप्ताहिक सफाई का दिन है, सफाई कर्मचारी दीवारों और छत के जाले साफ कर रहा है.

कल हफ्तों बाद ब्लॉग पर लिखा. परमात्मा इस अस्तित्त्व की समग्र ऊर्जा का नाम है. जिसके पूर्व न कोई कारण है न कोई आशय. वह बस है जो इस विराट आयोजन के रूप में प्रकट हो रहा है. वह पूर्ण है और शून्य भी, वह अनंत है और अति सूक्ष्म भी, वह दूर भी है और निकट भी, वही सब कुछ हुआ  है पर वह कुछ भी नहीं है. जन्म से पूर्व और मृत्यु के बाद वे उसी असीम के साथ एकाकार हो जाते हैं. यह सृष्टि वर्तुलाकार है, सारा ब्रह्मांड किसी केंद्र का अनुगमन कर रहा है. इस जगत में विरोध नहीं है, सारे विपरीत एक दूसरे के पूरक हैं. जो भी विरोध नजर आता है वह अज्ञान के कारण ही है. कितना रहस्यमय है यह ज्ञान, जो समझकर भी समझाया नहीं जा सकता, योग वसिष्ठ में जब मुनि राम को कहते हैं, कुछ हुआ ही नहीं, ब्रह्म अपने आप में स्थित है, तो उनका मन अचरज से भर गया था. किशोर मेहमान को ध्यान के बारे में जानना अच्छा लग रहा है, वह कितने ही प्रश्न पूछता है. सुबह योगासन भी करता है. परसों उसके माँ-पापा आ रहे हैं, जिनके साथ वे होली का त्योहार मनाएंगे और कहीं घूमने भी जायेंगे, लिखने का समय तब नहीं मिलेगा.

मेहमान कुछ दिन रहे और चले भी गये. इस बार होली का त्योहार उन्होंने फूलों के रंगों से मनाया. पलाश और गुड़हल के फूलों से बनाया गीला रंग, हल्दी व आटे से सूखा रंग, हर्बल गुलाल तो मंगाया ही था. आज एक सप्ताह बाद डायरी खोली है. मौसम बादलों भरा है. सुबह छाता लेकर प्रातः भ्रमण किया, फिर भी हल्की सी फुहार पीठ और चेहरे को भिगो रही थी, जो ठंडक से भरने के बावजूद भली लग रही थी. सुबह स्कूल गयी, प्रिंसिपल के कहने पर बच्चों को ध्यान कराया, पता नहीं उन्हें कितना भाता है, आसन तो यकीनन उन्हें भाते थे. क्लब की सेक्रेटरी बाहर गयी हैं, इस महीने उसे ही मासिक बुलेटिन बाँटना है, जून ने बारह क्षेत्रों के लिए सदस्याओं की संख्या के अनुसार बंडल बनाने में उसकी सहायता की, सुबह अपने ड्राइवर से ही ही वे उन्हें भिजवा भी देंगे. इसी हफ्ते क्लब का एक कार्यक्रम भी है, इस वर्ष का अंतिम व सबसे बड़ा आयोजन.

आज भी सुबह से घनघोर घटा छायी है, दिन में रात होने का आभास करा रही है. मौसम इतना ठंडा हो गया है कि स्वेटर जो धोकर रख दिए थे, पुनः निकालने पड़े हैं. सुबह नयी पड़ोसिन को फोन किया, वह सदा अपने घर आने का निमन्त्रण देती थीं. उन्होंने कहा दोपहर को तीन बजे वह उसका स्वागत कर सकती हैं, अर्थात वह खाली हैं. कल शाम को योग कक्षा में एक साधिका ने ध्यान की जगह ज्यादा आसन कराने को कहा. कुछ न करने से कुछ करना ज्यादा अच्छा लगता है सभी को, कुछ न करना ज्यादा कठिन भी है और ध्यान है कुछ भी न करना. अगले महीने मंझले भाई की बिटिया की सगाई होनी है और सम्भवतः इसी वर्ष विवाह भी हो जायेगा. छोटी बहन आज भारत आने वाली है. कल भाई के यहाँ पूजा है, वे तैयारी में लगे होंगे, उसने फोन किया तो उन्होंने नहीं उठाया.

Monday, December 15, 2014

गीता का गीत


नन्हा विज्ञान पढ़ने गया है. उसने ‘इंडिया टुडे’ में दिली के एक चूड़ीवाले के बारे में रोचक लेख पढ़ा .पढ़ते-पढ़ते ही पता नहीं कब आँख लग गयी और स्वप्न में एक नन्हे बच्चे की गार्गलिंग जैसी ध्वनि सुनी, आवाज इतनी वास्तविक थी कि वह झट उठ गयी. चाय पीकर तरोताजा हुई और स्वामी विवेकानन्द की पुस्तक का अध्ययन शुरू किया, जो उसे बहुत भाती है. संगीता अध्यापिका फिर चली गयी हैं, सो अभ्यास नहीं हो रहा. हर क्षेत्र में गुरू की आवश्यकता है. आज शाम को क्लब में मीटिंग है, वह कुछ देर ध्यान करने के बाद ही जाएगी. पहली तारीख से एक और कोर्स आरम्भ हो रहा है, पुराने प्रतिभागी भी जा सकते हैं. वे जायेंगे. पिछले महीने के अंतिम दिन ही उसे वह अनुभव हुआ था जिसने उसके जीवन को बदल दिया है.

आज ध्यान में अद्भुत शांति का अनुभव हुआ. मन की आँखों से कई अद्भुत रंग देखे. भीतर से एक ध्वनि भी आती प्रकट हुई पहले तो थोड़ा सा डर लगा पर बाद में सुनने में भली लग रही थी. अब ध्यान के लिए बैठने पर मन शीघ्र एकाग्र हो जाता है. सुबह वे उठे तो तेज हवा चल रही थी, देखते-देखते तेज वर्षा होने लगी. नन्हे को स्कूल जाना था पर नहीं गया. आज से उसके स्कूल में ‘स्पोर्ट्स मीट’ शुरू हुई है. उसे बहनों को पत्र लिखने हैं पर उस क्षण की प्रतीक्षा है जब सहज स्फुरणा होगी और कलम खुदबखुद चलने लगेगी.

कल रात जब उन्होंने गेट पर ताला लगा दिया था तो केन्द्रीय विद्यालय की अध्यापिकाएं आयी थीं फिर वे पड़ोसिन के यहाँ गयीं और वहाँ से फोन किया, पर उन्होंने फोन भी स्टैंड पर रख दिया था जो इस कमरे से दूर होने के कारण सुनाई नहीं दिया, कुल मिलाकर उनसे मुलाकत होनी नहीं बदी थी सो नहीं हुई. यूँ भी बिना इत्तला किया किसी के यहाँ इतनी देर से जाना ठीक तो नहीं है. खैर, सुबह पड़ोसिन ने ये सारी बातें फोन पर बतायीं तो नन्हे के हाथ से वह पत्र मंगवाया जो वे देने आयी थीं. कल दोपहर को कार्यक्रम है.

आज सुबह प्रवृत्ति तामसिक थी, बिस्तर छोड़ने में थोडा विलम्ब किया फिर ध्यान भी कहाँ गहन होने वाला था. कल शाम को जून के मजाक पर झुंझलाई और उससे पूर्व बातचीत में परचर्चा की. नये संगीत अध्यापक मिले हैं, अगले हफ्ते फिर जाना है. संगीत की शिक्षा मानव को ऊपर उठाती है और उसे तो उस पथ पर ही अब आगे बढ़ना है.

अक्तूबर का आरम्भ हो गया है. ‘जागरण’ में कृष्ण की गीता से आये अमृत वचन सुने तो अंतर में आह्लाद हुआ. ईश्वर महान है विभु है पर भक्त के छोटे से उर में समा सकता है. उसके दिव्य प्रेम का अनुभव ही साधक को बदल देता है. वही ज्योति बनकर चैतन्य रूप में मानव के भीतर है. वह मित्र भी है और किसी की पुकार को अनसुना कर ही नहीं सकता. ध्यान में तुष्टि बनकर वही तो साधक को प्रेरित करता है. कल शाम जून की लायी एक पुस्तक पढ़ती रही. शाम को एक सखी के यहाँ से भी श्री श्री की भी दो पुस्तकें लायी. उनकी कृपा है जो आनंद के स्रोत का पता बताया है. खबरों में सुना था, विमान दुर्घटना में श्री माधवराव सिंधिया की मृत्यु हो गयी. जीवन कितना क्षणिक है. अगले पल का भी भरोसा नहीं है. कल श्रीनगर में आतंकवादी हमले में इक्कतीस लोग मारे गये, कौन कब किस वक्त इस धरती से उठ जायेगा कौन कह सकता है सो जितना उनका जीवन है, वे पल-पल उल्लास पूर्वक जीयें, उस की याद में जीयें जो उनका पालक है, उन्हें चाहता है. आज उसने योग शिक्षक को अपने अनुभव बताये तो उन्होंने कहा, अच्छा है, पर इसे बहुत महत्व नहीं देना है. अहंकार को पोषने वाली हर शै से दूर रहना है. जिनमें उस की स्मृति बनी रहे वही क्षण मुक्ति के होते हैं शेष तो बंधन में डालने वाले ही हैं !





Thursday, May 8, 2014

पेपर मैशे- एक सुंदर कला


Today when they got up in the morning at 5 am, it was quite cold, put sweaters first time in this winter but now weather is sunny and warm. Nanha, was not well so did not go to school, is doing his remaining home work. Last evening he started writing a ‘story’. Jun asked about his health on phone and told her that he had 99  fever  he had checked it in the morning but did not tell them to avoid unnecessary tension. Nanha is feeling normal at this moment, she took breakfast with him, thought they  should be very careful in this changing weather. She did not write letters this week, in fact not felt close enough to write from dil se… one day pen will automatically write, mind will be responsive and then she will feel like saying something to someone.

पिछले तीन दिन यूँ ही बीते गये, घर में पेंटिंग का काम चल रहा था, शनिवार को काम पूरा नहीं हुआ, वे कारीगर का इंतजार करते रहे. शाम को एक मित्र परिवार आया. इतवार को गमलों की सफाई व रंग रोगन करवाया. आज सुबह पड़ोसिन से मिलने गयी, उसके पैर में मोच आ गयी थी, जहाँ वे लोग गये थे, संगमरमर की सीढ़ियों से पैर फिसल गया, अब वह काफी ठीक है. कल उसने आंवले का मुरब्बा बनाया, जो प्रक्रिया पिछले पांच दिन पहले शुरू की थी, कल पूर्ण हुई. दो दिन के लिए चने के पानी में रखना, फिर अच्छी तरह धो कर उन्हें कांटे से गोदकर चौबीस घंटों के लिए फिटकरी के पानी में, फिर उसी पानी में उबालकर चाशनी में डालना. उन पंजाबी दीदी ने एक किताब दी थी जिसमें पढ़कर उसने यह विधि सीखी थी. उनके लॉन में लगे दो पेड़ों पर अभी सैकड़ों आंवले लगे हैं. पिछले तीन-चार दिनों से वह स्वयं में थोड़ा बदलाव महसूस कर रही है,  अपने आप के प्रति जैसे ज्यादा सजग हो गयी है.

पिछले कुछ दिनों से वह अपने-आप में नहीं है, हर वक्त एक उल्लास सा छाया रहता है, जैसे आँखों के सामने कोई रेशमी पर्दा झिलमिला रहा हो. अपना अस्त्तित्व अर्थपूर्ण लगने लगा है. ध्यान में मन नहीं लगता पर हर वक्त गुनगुनाने का सा मूड रहता है, उसने दो गीत अपने आप सीखे, टीवी पर जब छोटे-छोटे बच्चों को इतने विश्वास से गाते हुए देखती है तो बहुत अच्छा लगता है. संगीत किसी दूसरी ही दुनिया में ले जाता है. आज भी मौसम खिला-खिला है, धूप अच्छी लगने लगी है, अब कमरे में ठंड लगती है, यानि सर्दियां आ गयीं. कल जून मोरान गये थे वापसी में ऊन और कई फल लाये, पैंजी के फूलों के पौधों के लिए खर्च करना उन्हें थोड़ा ज्यादा लगा जबकि फलों पर खर्च करना नहीं, एक उनके तन को पुष्ट करेंगे और दूसरे मन को ख़ुशी देंगे. नन्हा कल स्कूल से पेपर रिसाईकलिंग का तरीका सीख कर आया था, उसके पास शाम को बनाने का समय नहीं था सो सुबह वही बनाती रही, नैनी के बेटे ने भी सहायता की, पर पेपर बहुत स्टिफ बन गया है, पापड़ जैसा, पता नहीं उसकी टीचर क्या कहें, शायद हँसे, revive शायद कुछ ज्यादा पड़ गया, नन्हा स्कूल से आकर प्रतिक्रिया व्यक्त करेगा. उसने स्कूल में होने वाले skit में भाग लिया है, एक कहानी भी लिख के दी है. इस स्कूल में उसे अच्छा मंच मिला है.

आजकल जब वे उठते हैं, बाहर अंधकार छाया रहता है, सूर्य उनके जगने के बाद ही आकाश में ऊपर चढ़ता है पर वे भीतर अपने कामों में व्यस्त रहते हैं सो उसकी लालिमा और आकाश में उसका ऊपर उठना देख नहीं पाते. सर्दियों में काम की गति भी कुछ कम हो जाती है. जब नन्हा स्कूल चला जाता है तब जून और वह दस मिनट के लिए गाइडेड मैडिटेशन के लिए बैठते हैं और उगते हुए सूर्य को कल्पना में देखते हैं. वह हिन्दी पुस्तकालय से एक किताब लायी है, ‘हिंदी भाषा की समस्या’, हिंदी सारे देश में बोली व समझी जाती है फिर भी इसे राष्ट्र भाषा तो दूर राज भाषा का दर्जा भी नहीं मिल पाया है, लोग इसे बोलने में अपनी हेठी समझते हैं. उसने अभी किताब की भूमिका ही पढ़ी है.  






Wednesday, November 20, 2013

द लॉन मोअर मैन


आज सात तारीख है, उसने सोचा,  जून के आने पर उसे ‘विश’ करना है. सात तारीख आने पर कुछ याद दिला देती है. चाहे किसी भी माह की हो. आज यूँ भी बड़े दिनों बाद धूप निकली है, पर ठंडी हवा भी बह रही है. कल शाम तापमान १० डिग्री था, ढेर सारे वस्त्र पहन कर वे टहलने गये, उसका काम आज जल्दी हो गया है, सोचा वह किताब पढ़ेगी जो कल लाइब्रेरी के चिल्ड्रेन सेक्शन से लायी है, “Little Woman”, नन्हे को सुनाने के लिए अच्छी रहेगी. कल फिर उसने सोने में सवा दस बजा दिए, वह दीर्घ सूत्री है, किसी काम को जल्दी से समाप्त नहीं करता, आराम-आराम से करता है, शायद अपने चाचा पर गया है, जिसे वह ठीक से पहचानता भी नहीं. कल मंझले भाई का पत्र बहुत दिनों बाद आया, लिखता है ‘’ग्रह दशा कुछ ठीक नहीं चल रही है, इन्सान को अपने अच्छे-बुरे कर्मों का फल यहीं भोगना पड़ता है’’.

चलो उठ खड़े हों, झाड़ें सिलवटों को
मन के कैनवास को फैला लें क्षितिज तक
प्यार के रंगों से फिर कोई खूबसूरत सोच रंग डालें
बांटे आपस में हर शै जो अपनी हो
चलो आँखें बंद करें, गहरे उतर जाएँ
जानें पर्त दर पर्त अंतर्मन को
आत्मशक्तियाँ जागृत होकर एक हो जाएँ
अपना छोटे से छोटा सुख भी साझा हो जाये
चलो कह दें, सुना दें मन की हर उलझन
समझ लें, गिन लें दिल की हर धडकन
अपना सब कुछ सौंप कर निश्चिंत हो जाएँ
विश्वास का अमृत पियें
चलो करीब आयें, जश्न मनाएं
मैं और तुम से ‘हम’ होने की याद में
कोई गीत गुनगुनाएं
खुली आँखों से सपने देखें
मौसम की मस्ती में डूबे उतरायें !

परसों सुबह नन्हा घर पर था, दुसरे शनिवार को उसका स्कूल बंद रहता है. शाम को उसने चाट बनाई महीनों अथवा वर्षों बाद. वर्षा हो रही थी, सो टहलने भी नहीं जा सके, घर पर ही कैसेट लगाकर थिरकन कम व्यायाम किया. अच्छा लगता है गाने की या सिर्फ संगीत की लय पर शरीर को ढीला छोड़ देना. कल सुबह कड़कती ठंड में इतवार के सारे कार्य किये, शाम को क्लब में फ्लावर शो था, वे देखने गये. फिर एक मित्र के यहाँ, उसकी सखी ने बहुत स्वादिष्ट समोसे खिलाये, घर पर  ही बनाये थे, उनके बेटे का रोना भी बदस्तूर हुआ, वह अपने हाथ से सिले सूट के बारे में बताने का लोभ संवरण नहीं कर पाई, कभी-कभी ऐसी बचकानी हरकतें कर ही बैठती है. पर कल एक और अच्छी बात हुई भारत का जिम्बाब्वे को हरा कर फाइनल में पहुंच जाना. हफ्तों बाद कल ‘मालाबार हिल’ भी देखा. सबा ने शिवम को कैसे अपने दिल की बात कही होगी और अब उसके भाई का क्रोध, सुमन लेकिन अच्छी लग रही थी. आज सुबह धूप निकली है, वह यहीं गुलाब के पौधों के पास बैठी है, पड़ोसिन से बात हुई, वह तिनसुकिया से सिल्क की दो साड़ियाँ लायी है, खुश है, लेकिन साड़ियों से मिलने वाली ख़ुशी कितनी क्षणिक होती है न. सुबह गोयनका जी ने बताया, हमारे मन की ऊपरी पर्त भले ही स्वच्छ, साफ दिखाई दे भीतर राग-द्वेष , लोभ, क्रोध का विशाल साम्राज्य है, परत दर परत उसे उघाड़ते जाना है और साफ करते जाना है.

‘The Lawnmower man’ यही नाम था, कल शाम क्लब में दिखाई गयी फिल्म का, जो रोमांचक थी, अद्भुत थी और कुछ कुछ डरावनी भी. एक सीधा-सादा आदमी अपने दिमाग की छुपी ताकत को पाकर कैसे शक्तिशाली बन जाता है. कम्प्यूटर की शक्ति का कमाल, विभिन्न रंगों से अनोखे आकार बनते हैं पर्दे पर, एक के बाद एक सुंदर चित्र बनते हैं. इंसानी कल्पना की उड़ान की कोई सीमा नहीं, हर बार ऐसा कुछ देखने पर बेहोशी की अवस्था में हुआ उसका अनुभव याद आ जाता है. नीले रंग, अजीब सी आवाजें और कोई लक्ष्य पूरा करने की चाह...मानव मस्तिष्क में क्या-क्या रहस्य हैं, अभी भी मानव जान नहीं पाए हैं. नन्हे को कल स्कूल में कबड्डी खेलते वक्त चोट लग गयी, कहता है अब कभी जूते उतार कर कबड्डी नहीं खेलेगा. अभी-अभी उसने खिड़की से झांक कर देखा, बादलों को परे कर सूरज निकल आया है जिसमें फ्लाक्स और गुलाब के फूलों पर गिरी बूंदें चमक रही हैं.





Monday, August 12, 2013

होलिका दहन


पिछले तीन दिनों से डायरी नहीं खोल सकी. कल सुबह घर की सफाई, दोपहर गुझिया बनाने, शाम नन्हे को पढ़ाने तथा देर शाम वासन्ती पूजा में बीती. कल शाम का होलिका दहन का अनुभव चिर स्मरणीय रहेगा. आग की ऊंची उठती लपटें और उसके चारों ओर घेरा बनाकर खड़े लोगों के ख़ुशी से चमकते चेहरे. और बाद में एक साथ बैठकर भोजन वह भी हाथ से खाना, उसे बहुत आनन्द आया. सोने में ग्यारह बज गये, दिन भर की थकन के कारण फौरन नींद आ गयी. और सबसे बड़ा कारण था उसके मन की अद्भुत शांति जो ईश्वर का सबसे बड़ा उपहार है उसके लिए. जून ने भी कल पूरे उत्साह के साथ भोजन परोसने के काम में भाग लिया. घर आकर वह प्लास्टिक के ग्लास भी खोजकर ले गये. परसों वे तिनसुकिया गये, सभी के लिये उपहार लेने, जून का मन बेहद उदार है, उसे एक गाउन भी दिलाया, सफेद रंग पर नीले बिदुओं वाला. सुबह टीवी पर होली के उपलक्ष में एक प्रोग्राम देखा, ‘मौसम रंगों का’, उसमें सात देवरों की भाभी ने एक अच्छी कविता सुनाई.

होली आकर चली गयी, उसने सभी के लिए हर साल की तरह टाईटिल लिखे और सुनाये. दो दिन स्वीपर नहीं आया उसने ज्यादा पी ली थी, इस उत्सव का यह सबसे बुरा अंग है. आज सुबह उसने सुना दादा अन्यों को समझने की कला पर बोल रहे थे, मन में एक तीव्र उत्कंठा होनी चाहिए तभी सम्बन्ध अच्छे होंगे, अन्यथा सतही ही रहेंगे. कल रात तेज तूफान आया, उस समय जून टीवी पर ‘फ़िल्मी चक्कर’ शौक से देख रहे थे..
Women’s day ! today again Dada vasvani talked about the art of understanding and gave practical suggestions, like – learning the art of listening, art of appreciation and then not try to get others feel low, all these things are interrelated and teaches the art of understanding. These days each one wants someone who understands him/her, and to get that someone first one has to forget himself and understand other with an ardent desire and then it will come to him automatically. Such person is humble, he lives with humility. He does not has ego. Then only without  arguing others he can develop a relationship with others.

इस घड़ी कुछ कहने की कुछ लिखने की इच्छा, जिसे प्रेरणा भी कहते हैं और मूड भी, सुगबुगा रही है, जून का फोन आया है कि वह देर से आएंगे सो अभी एक घंटे का एकांत है, नितांत निजी एकांत और मौसम भी सुहाना है, उसका प्रिय मौसम, बरसात की रिमझिम लिए ठंडा-ठंडा सा, जिसमें अपने ही गालों को अपने हाथ बर्फ से ठंडे लगते हैं, सांसों की गति थोड़ी सी तेज जरुर होगी, ऐसी ही कैफियत होती होगी जब शेर होता है, मगर वह गजल लिखने नहीं जा रही है. क्योंकि हदों में बंधकर रहने और कहने के लिए जो सलाहयित चाहिए वह शायद उसमें नहीं है, या फिर अभी मूड नहीं है. अभी तो वह एक ऐसी कविता लिखना चाहती है जिसमें उन भावों की झलक हो जो हर सुबह जागरण देखते सुनते वक्त मन में उठते हैं, इस ब्रह्मांड के रचेता उस महान जादूगर के प्रति श्रद्धा के भाव !

अल्लाह की बनाई इस कायनात में
हर तरफ हजारों रंग बिखरे पड़े हैं
मौजुआत की कमी नहीं इजहारे फन चाहिए
दिलों को थोड़ी –थोड़ी देर, ठहर कर धड़कन चाहिए
नामालूम सा कोई वाकया कब फसाना बन जाये
पत्थर को तराश कर बना दे हीरा ऐसी लगन चाहिए
अंदर एक सागर बहता है कोई मोती ढूँढ़ कर लाये तो
जाने का भीतर जज्बा हो ऐसा कोई शख्स चाहिए