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Wednesday, May 15, 2024

फूलों का तालाब

आज नेता जी की जयंती है। बंगाली सखी की बिटिया का जन्मदिन भी, उसे एक पुरानी तस्वीर भेजी, जिसमें सभी लोग हैं, पर उसने कुछ नहीं कहा तस्वीर देखकर, अवश्य उसे कुछ तो याद आया होगा। नन्हा व सोनू यहाँ आ गये हैं। कल सुबह छह बजे सभी को कार रैली में जाना है। आज दोपहर को लिखने के स्थान पर कल वाला चित्र पूरा किया, कोई चित्रकार भी रंगों के माध्यम से शायद अपने दिल की बात लिख रहा होता है। सुबह छोटे भाई का फ़ोन आया, वह अजीब सी कैफ़ियत में डूबा रहता है। प्रकृति का सान्निधय उसे अच्छा लगता है। अपने को देह द्वारा व्यक्त होते देखकर उसे अचरज भी होता है। हल्का-हल्का सा लगता है तन-मन दोनों ही। वह जहाँ भी जाता है अपने मधुर स्वभाव से मित्र बना लेता है तथा सबकी सहायता के लिए तत्पर रहता है। उसका जीवन गुरु के आशीर्वाद से एक वरदान बन गया है।जीवन कितना सिंपल है, ऐसा वह कह रहा था, और दूसरी तरफ़ उसका मन है जो अब भी कोई न कोई व्यर्थ बात सोच लेता है क्षण भर के लिए ही सही, तन भी भारी हो रहा है, क्यूँकि भोजन गरिष्ठ भी है और अधिक भी। परमात्मा का अनुभव कितना अनुपम है यह सब जानते-बूझते हुए भी मोह-माया कहाँ छूटती है ! आश्चर्य भी हो रहा है और हँसी भी आ रही है, यह लिखते हुए, जीवन तो उसका भी सिंपल है और सुन्दर भी !


आज सुबह वे चार बजे उठे और पाँच बजे तक नहा-धो कर तैयार थे। बच्चे पाँच बजे उठे और छह बजे के कुछ पल बाद टाटा नेक्सन के शोरूम के लिए निकल पड़े। आठ बजे रैली आरंभ हुई। एक कार यू ट्यूब का वीडियो बनाने के लिए और एक आयोजकों की अपनी कार भी साथ चल रही थी। दो घंटे बाद सभी कारें रामनगर स्थित एक कैफ़े में जाकर रुकीं। जहां स्वादिष्ट नाश्ता कराया गया। बाद में विजेता और उप विजेता के नामों की घोषणा हुई। वहाँ आये एक वृद्ध दंपति से परिचय हुआ। नन्हे ने और भी कई लोगों से बातचीत की। कुल मिलकर ईवी कार रैली का अनुभव अच्छा रहा। वापसी में वे एक गाँव के रास्ते से होकर लौटे तो फूलों की खेती देखने को मिली और कमल के फूलों से भरा एक तालाब भी। पिछले कुछ दिनों से पल्स रेट बढ़ा हुआ लग रहा था, उसने सोचा है,  सुबह अलार्म की आवाज़ से नहीं उठेगी। नींद जब पूरी हो जाएगी तो अपने आप ही खुल जाएगी। स्वस्थ रहने के लिए अच्छी नींद उतनी ही ज़रूरी है जितना भोजन और व्यायाम। स्वस्थ तन में ही स्वस्थ मन का वास होता है। कल इस बात को एक बार फिर अनुभव किया। रात को देखे स्वप्न इसकी गवाही देते हैं। एक सपने में कपड़ों का एक ढेर है जो सँभाले नहीं संभल रहा है।एक में एक विचित्र से बालक को देखा। 


सुबह सवा चार बजे नींद खुल गई। तापमान सत्रह डिग्री था, पर दिन अभी से गर्म होने लगे हैं, जबकि अभी जनवरी समाप्त नहीं हुआ है। छोटी बहन को विवाह की वर्षगाँठ पर कविता में शुभकामनाएँ भेजीं। गणतंत्र दिवस पर  एक रचना भी पोस्ट की है। किसान आंदोलन के बारे में एक वीडियो देखा। वहाँ कुछ अराजक तत्व भी हैं, लेकिन इतने बड़े देश में कुछ न कुछ विरोध तो स्वाभाविक है। ट्रैक्टर रैली भी दिल्ली में होकर ही रहेगी, ऐसा लग रहा है। दोपहर को ‘द व्हाइट टाइगर’ फ़िल्म का कुछ अंश देखा, भाषा बहुत अभद्र है। एक गाँव का व्यक्ति कैसा अपनी इच्छा शक्ति के बल पर शहर पहुँच जाता है और आगे क्या होता है, अभी देखना शेष है। शाम को वे पड़ोसी के यहाँ गये। उनके समधी साहब  को चोट लग गयी है, वह स्कूटर चला रहे थे कि किसी ने आगे के पहिये पर अपने स्कूटर से ही टक्कर मार दी। उनकी बाईं कलाई में फ़्रैक्चर हो गया है। उनका पुत्र कनाडा में रहता है, एक हफ़्ता बेटी के पास रहने आये हैं। पड़ोसन ने एकदम कड़क असम की चाय पिलायी। लगभग साल भर बाद उनके यहाँ चाय पी, कोरोना काल में जाने का सवाल ही नहीं था। अफ़्रीका में कोरोना के वायरस का नया स्ट्रेन मिला है; जबकि भारत में कोरोना केस काफ़ी घट गये हैं।    


आज की सुबह जितनी शानदार थी, दोपहर व शाम उतनी ही उदास करने वाली। सुबह मल्टी पर्पस कोर्ट में सोसाइटी के कुछ लोगों के साथ गणतंत्र दिवस के अवसर  पर होने वाली ‘योग साधना’ में भाग लिया। आठ बजे ध्वजारोहण हुआ, मुख्य अतिथि ने प्रेरणादायक भाषण दिया। उसे कविता पाठ करने का अवसर भी मिला। घर आकर नाश्ते के बाद टीवी पर परेड देखी। झांकियाँ, नृत्य सभी कुछ अतुलनीय था। राफ़ेल का प्रदर्शन भी शानदार था। दोपहर बाद जब समाचार देखने के लिए टीवी चलाया तो परेशान करने वाली खबरें आ रही थीं। लाल क़िले पर कुछ सिख तलवारें चला रहे थे, अपना झंडा लगा रहे थे। पुलिस की प्रदर्शनकारियों के साथ झड़प हो रही थी। इतने दिनों तक शांतिपूर्वक चलने वाली ट्रैक्टर रैली अब हिंसक हो चुकी थी। शाम तक यही चलता रहा। इस समय रात्रि के साढ़े आठ बजे हैं। पता नहीं दिल्ली के हालात कैसे हैं । कितने पुलिस वाले घायल हुए, कितने किसान भी। गणतंत्र दिवस के दिन ऐसा होना देश की अस्मिता के लिए कितना अपमानजनक है।       


Tuesday, April 16, 2019

लालकिले पर तिरंगा



आज नेट नहीं चल रहा है. लगातार वर्षा हो रही है. पिछले तीन दिनों से वे सुबह निकल नहीं पाते. जून के दफ्तर जाने के बाद जब वर्षा कुछ कम हुई, वह छाता लेकर भ्रमण पथ पर घूमने गयी. पांच-छह मजदूर वर्षा में भीगकर काम कर रहे थे, दो-तीन औरतें भी थीं. एक महिला अत्यंत बूढ़ी है पर उसे भीगने से सर्दी होने का जरा भी भय नहीं है. वह अक्सर कई बोरियां भरकर घास काटती है, अपने लिए या बेचने के लिए, पता नहीं. वर्षा में भीग रहे हैं मजदूर सो अलग पर उनके पास उचित उपकरण भी नहीं होते. सरकार की मदद इनके पास पहुँचे इसकी जिम्मेदारी कम्पनी को लेनी चाहिए. उसने सोचा चाय पिलाकर उनकी थोड़ी सी मदद कर सकती है, पर वे काम में व्यस्त थे और अब तक तो शायद वे चले ही गये हों. आज भी गुरूजी का प्रवचन सुना, हर बार सुनने पर कोई नई बात सुनने को मिलती है. वे पूरी बात सुनने का श्रम नहीं उठाते या तो उनकी क्षमता ही नहीं है. जब तक पिछले वाक्य को समझते हैं, एक वाक्य और बोला जा चुका होता है. कल जून का जन्मदिन है.

आज लालकिले से प्रधानमन्त्री का भाषण सुना, मन जोशीले भावों से भर गया है. उन्होंने कहा, हर भारतीय को शुभ संकल्प लेने हैं और उन्हें सिद्द होते हुए देखना है. आज देश में सकारात्मक माहौल बन रहा है. भारत की आजादी को सत्तर साल हो गये हैं और अब समय आ गया है कि हर भारतवासी अपने कर्त्तव्यों के प्रति सजग हो और अपने तौर पर कुछ न कुछ काम करे. वे स्वतंत्र भारत के नागरिक होने का हर लाभ उठाते हैं. देश को आगे बढ़ाने का जज्बा लेकर उन्हें साथ-साथ काम करना है. वे स्वच्छता के काम में अपना योगदान दे सकते हैं. देश की सुरक्षा के लिए काम करने वाले सैनिकों के लिए उनके दिलों में गर्व की भावना हो. देश के अंदर की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी हर किसी की है. सुबह वे लोग नेहरू मैदान भी गये. लोगों की भीड़ और तिरंगे के प्रति उनके प्रेम को देखकर सभी उल्लसित थे. उनकी सोच यदि सकारात्मक होगी तो शरीर भी स्वस्थ रहेगा. पुराने कर्म अपना फल देंगे, पर वर्तमान में यदि वे सजग रहें और समभाव से उन्हें सहन करते जाएँ तो नये कर्म नहीं बंधेंगे. जून के जन्मदिन का भोज आज दोपहर को कुछ मित्रों के साथ किया.

कल ही जन्माष्टमी का उत्सव भी था, शाम को पूजा कक्ष की सफाई की. कृष्ण के चित्र पर माला चढ़ाई, कितने सुंदर लग रहे हैं कृष्ण फूलों के मध्य ! गुरूजी का जन्माष्टमी पर दिया विशेष वक्तव्य पढ़ा. देवकी देह का प्रतीक है और वसुदेव मन का. कृष्ण उनके ही भीतर जन्म लेते हैं, जब अहंकार नष्ट हो जाता है. अहंकार ही उन्हें आनंद से दूर रखता है. अभी-अभी क्लब की एक सदस्या का फोन आया. प्रेस जाने के लिए कह रही थी. इससे अच्छा है लेख ड्राइवर के हाथ ही भेज दिया जाये. उनका समय और श्रम बचेगा. जीवन कितना अनमोल है, यहाँ एक क्षण भी गंवाने जैसा नहीं है. कल दोपहर का भोजन गरिष्ठ था, रात को सिर में दर्द हो गया. सुबह नींद देर से खुली, वर्षा हो रही थी, सो आज भी टहलने नहीं जा सके. इस समय धूप निकली है.

आज पूरे एक सप्ताह के बाद तैरने गयी. अच्छा लगा, अब पानी में स्वयं को नियंत्रित करना आसान लग रहा है. धीरे-धीरे ही सही कुछ बात बन रही है. पानी में ठंड जरा भी नहीं लग रही थी, न ही गर्मी. आज सुबह उठी उसके पूर्व नींद खुल गयी थी पर तमोगुण की प्रधानता के कारण कुछ देर लेटी रही. सतोगुण में टिकना कभी-कभी सहज ही होता है पर कभी-कभी नहीं. यह असजगता की ही निशानी है. कल छोटी बहन से बात हुई, उसे दाहिनी आँख में कुछ चमकदार रंग दिखाई दिए, आँख की जाँच कराने को कहा है.