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Monday, September 19, 2016

घर की सफाई


आज सुबह वह उठी तो सीधे आँख बंद करके बैठ गयी, अनोखा था वह अनुभव ! भीतर एक शांति भर गया है, फोन की घंटी बज गयी और बीच में ही छोड़ना पड़ा. भीतर कितनी अटूट संपदा है. परम पिता परमेश्वर स्वयं ही विराजमान है, एक दिव्य चेतना, एक प्रकाश और एक मुखर मौन...शब्द कहाँ कह पाएंगे उस अनुभव को..इसलिए कहते हैं कि जो जानता है वह कहता नहीं, कह सकता नहीं..उसकी बुद्धि तब बचती ही नहीं, मन खो जाता है. भीतर कोई है जो हर क्षण देख रहा है. उस देखने वाले को सारे कृत्यों को देखते हुए वह देख रही है. वह सदा जगा है और उसकी जागृति उसे भी जगा रही है. क्योंकि उसे देखने के लिए उसे भी सजग रहना पड़ रहा है. एक पल को ध्यान हटा तो भी भीतर यह बोध रहता है कि वह देख रहा है ! जागरण का यह अनुभव अनोखा है. कल देवी पर कुछ पंक्तियाँ लिखीं. मौसम आज भी बदली भरा है. एक सखी आज घर जा रही है, एक पहले ही जा चुकी है. इस बार पूजा पर वे दोनों नहीं रहेंगी. वे एक दिन तिनसुकिया जायेंगे, पत्रिकाएँ देनी हैं लाइब्रेरी में. पिछले कुछ दिनों से वे घर की सफाई कर रहे हैं. कितनी पत्रिकाएँ तथा किताबें जो वर्षों से इकट्ठी हो गयी हैं, वे लाइब्रेरी में भिजवा रहे हैं. वह खाली होना चाहती है, सारे पेपर्स भी धीरे-धीरे करके निकालने हैं. सारी डायरी भी धीरे-धीरे हटानी हैं, एक दिन केवल आत्मा ही रह जाने वाली है, नितांत अकेली, उस अकेलेपन का अनुभव इसी जीवन में कर लेना कितना अनूठा होगा. वे अपने मन में भी अतीत का बोझ तथा भविष्य की चिंताएं ढोये रहते हैं और वर्तमान को बोझिल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ते, उन्हें जीवन का मोह इतना सताता है कि वर्षों पुराना भी कुछ त्यागते उन्हें पीड़ा होती है, जिसका उपयोग भी उन्होंने न किया ही, न करना हो..जून का फोन आया अभी-अभी, वह भावांजलि को प्रिंट करके ला रहे हैं. अभी तक किसी ने उसे पढ़ा नहीं है, लेकिन एक दिन लोग उसे पढ़ेंगे. मानव के भीतर यह कामना कितनी बलवती होती है कि वे जो भी करें लोग उसे सराहें, यह इतनी भीतरी है कि...

आज षष्ठी है. उन वृद्धा आंटी ने अपने पुत्र व पुत्रवधू के लिए भोजन बनवाया, खीर बनवाई, लेकिन उनकी फ्लाईट छूट जाने के कारण आज वे वापस नहीं आ पाए हैं. दोपहर को वह उनके घर गयी थी. मौसम में थोडा बदलाव आ गया है. शाम को जल्दी अँधेरा हो जाता है और सुबह जल्दी दिन नहीं निकलता. कल शाम दीदी से बात की, उन्होंने कहा वे उसकी सभी कविताएँ पढ़ती हैं, उन्हें भी अपने लिखे पर उसकी टिप्पणी की प्रतीक्षा रहती है. उस क्षण उसका हृदय भीग गया था.

आज सुबह भीतर स्पष्ट आवाज सुनाई दी, आजतक जो भी कहीं से पढ़ा या सुना हुआ बिना कृतज्ञता जताए लिख दिया, वह धोखा है. आज से पूर्व उसे इस बात का जरा भी अहसास नहीं था, पर आज कितना स्पष्ट है कि वह गलत था. इसी तरह जो व्यक्ति गलती कर रहा होता है, उसे पता नहीं होता..वरना वह ऐसा कभी करे ही न. उन्हें किसी को दोषी देखने का अधिकार नहीं है, उनके हाथ भी तो खून से रंगे हुए हैं. कितने जन्मों में कितने अपराध उनके हाथों हुए हैं. वे धीरे-धीरे परमात्मा के मार्ग पर आये हैं किन्हीं  पुण्यकर्मों के कारण सद्गुरू मिले हैं और अब उनका जीवन सही अर्थों में जीवन कहलाने के योग्य हुआ है. साक्षी की तरह कोई सदा साथ रहता है. हरेक के साथ रहता है, भय का कोई कारण ही नहीं, वे सुरक्षित हाथों में हैं.    


Thursday, June 26, 2014

स्कूल की पत्रिका



आज स्कूल में बहुत काम था, एक दो शिक्षिकाओं की अनुपस्थिति के कारण उसे पूरे आठों पीरियड लेने पड़े, इस समय थकान महसूस कर रही है. एक अध्यापिका ने उससे विज्ञान के प्रश्नोत्तर के बारे में पूछा तो वह टाल गयी, बाद में लगा बता देना चाहिए था, कल स्कूल जाकर सबसे पहला काम यही करेगी. आज भी कक्षा में बच्चे बहुत शोर कर रहे थे, एक सीनियर  अध्यापिका की कक्षा के सामने से गुजरी तो देखा बच्चे शांत बैठे थे, उसका भी यह स्वप्न है शायद कल ही ऐसा हो.

आज स्कूल गयी तो मन में शुभेच्छा थी और ढेर सारा कम्पैशन, एक अध्यापिका अनुपस्थित थी उसकी कक्षा में जाकर स्वयं ही उसने कविता प्रतियोगिता के बारे में बच्चों को बताया. स्टाफ रूम में सभी अभी से आने वाले वर्ष की बातें कर रहे थे. नई शताब्दी दस्तक दे रही है. उसके कदमों की आहट दिलों की धड़कन बढ़ा रही है. कैसी होगी नई शताब्दी की प्रथम सुबह, क्या उस दिन गगन ज्यादा नीला होगा, हवा कुछ अधिक शीतल, पक्षी का स्वर मधुरतर, लोगों के दिल मिले हुए. पर इतना तो तय है पवन में आशाओं की खुशबू मिली होगी, करोड़ों लोगों के दिलों की आशाओं की खुशबू ! 

आज दो किताबें वह असावधानी वश स्कूल में ही छोड़ आई है, ध्यान उधर जाता है. संस्कृत में एक अध्यापिका ने कुछ पूछा तो व्यस्ततता के कारण ठीक से बता नहीं पायी, खैर यह जरूरी तो नहीं कि सदा वह सही ही रहे. स्कूल में रोज नई-नई बातें पता चलती हैं, पहले पता चला प्रोबेशन पीरियड लम्बा चलेगा, दूसरी बात यह कि छुट्टियों की पे नहीं मिलेगी. इन सब बातों का असर उस पर तो पड़ता नहीं क्यों कि पैसे के लिए न उसने काम किया है न कभी करेगी. उसे ध्यान आया, आज जून ने जब कहा वे यात्रा में खरीदारी नहीं करंगे तो आग्रह क्यों कर बैठी, नहीं जी, वे कुछ न कुछ तो लेंगे ही. यह आग्रह करने की मनः स्थिति जब तक रहेगी तब तक चैन नहीं है. जो कुछ उसके पास अब है वही सारी उम्र के लिए काफी है फिर और की आशा क्यों ? आशा करनी ही हो तो मन को विशाल बनाने की करनी चाहिए. जिससे सारे बच्चों को इतने स्नेह दे सके कि उन्हें उस पर भरोसा हो. बुद्धि में सामर्थ्य हो और अपने आप से शर्मिंदा न होना पड़े. आदमी क्या है यह उसके कपड़ों से नहीं उसकी आत्मा से पता चलता है, आत्मा बेदाग हो कबीर की चदरिया की तरह, अपने कर्तव्यों के प्रति सजग और अपनी उन्नति के लिए प्रयत्नशील !

कल क्लब से फोन आया, वार्षिक पत्रिका के लिए उसे लिखना भी है और हिंदी के अन्य लेखों की एडिटिंग भी करनी है. स्कूल की पत्रिका के लिए भी एक अधपिका के साथ उसे प्रेस जाना है. यदि सबकुछ ठीक रहा तो अगले बीस-पचीस दिन उसे साहित्यिक गतिविधियों में सलंग्न रखेंगे. आज उन्हें नौ बजे स्कूल जाना है, पहले गुरुद्वारा समिति की ओर से चित्रकला प्रतियोगिता है फिर पेरेंट-टीचर मीटिंग.




Tuesday, May 6, 2014

नया सोफ़ा और लैम्प शेड


...और दीवाली का उत्सव सोल्लास सम्पन्न हो गया, आज सब ओर कैसी शांति है, जून दफ्तर गये हैं और नन्हा स्कूल, उसका दिन भी अपने पुराने क्रम में गुजर रहा है. पहले उसकी छात्रा आई फिर कपड़े धोने थे. संगीत, लंच और दोपहर को हिंदी क्लास. रात्रि स्वप्नों में रिश्तेदारों से मिलती रही, अभी अपने लोग, दीदी भी थीं, उनका गला खराब था, उस दिन फोन पर बात की तो थोड़ा खांस रही थीं. आज उसने आलू व कसूरी मेथी की सब्जी बनाई है, गुलाब जामुन अभी भी बचे हैं. बगीचे में जाकर देखा तो बीज अंकुरित हो गये हैं पर साथ ही खर-पतवार भी निकल आये हैं, जिन्हें साफ करना जरूरी है. उसने plumber को बुलाकर कहा जो उनके बेडरूम का फ्लश ठीक करके गया था और लौट रहा था कि पानी नहीं चढ़ रहा है, पर उसने आते ही चलाकर दिखाया and she felt like a fool and last evening when one family came late when they were least expecting them she could not talk properly, she thought she can not adjust in odd situations, she even does not try, finds easy always known things and situations, but life is full of new events, her music teacher gave syllabus, may be next year she should appear in exam.

अज टीवी पर एक शायर का इंटरव्यू सुना तो कुछ अधूरी कविताएँ पूरी कीं, लिखने वालों को शायरों, कवियों से काफी प्रेरणा मिलती है, लगता है कोई जाना-पहचाना मिल गया, दिल की कैफियत तो हर जगह एक सी होती है. शायर का दिल, चाहे वह कहीं का भी हो, एक सा धडकता है, उसे हर उस शै से प्यार होता है, जिसमें खलूस हो, जो दुनिया को बेहतर बनाने में मददगार हो. प्यार तो दुनिया को जोड़े रखने का बहुत बड़ा साधन है, कुदरत से भी और इंसानों से भी, जानवरों, पेड़ों से भी. कल लाइब्रेरी से नई किताबें लायी है, स्वामी योगानन्द जी की भी एक किताब है, ध्यान में मदद मिलेगी. उनके लम्बे बाल देखकर उसने भी बाल न कटवाना तय किया है, और धोने के लिए शैम्पू की जगह बेसन व दही से धोएगी. अभी जून का फोन आया, उन्हें दफ्तर में रहकर भी घर का ख्याल बना रहता है, उसने सोचा, वह यदि काम करे तो पूरा ध्यान बाहर ही रहेगा, उतने वक्त तक घर को भूली रहेगी, वह दो तरफ ध्यान नहीं बंटा सकती सिवाय उस वक्त के जब ध्यान कर रही हो, तब तो मन हजार दिशाओं  में जाता है.

अभी-अभी घर वापस आई है, कल music class नहीं जा पाई थी सो आज गयी थी, टीचर ने गाउन पहना हुआ था जैसे वह क्लास लेने के मूड में न हों, हमेशा वह साड़ी या सूट पहने होती हैं, उसने सोचा शायद वह आराम कर रही थीं, सुबह उन्होंने कहा था अपनी एक मित्र को खाना देने अस्पताल जाना है, शायद देर से आई हों, उसे दो बुलेटिन भी दिए जो उसके घर के पास ही भिजवाने थे. मौसम अच्छा था और वह जल्दी आ गयी थी सो खुद ही देने चली गयी. सभी के दरवाजे बंद थे, अपने-अपने घरों में बंद लोग आराम कर रहे थे, एक के लॉन में गुलाबों के इर्द-गिर्द गड्ढे खुदे हुए थे, सब्जी की क्यारी में पौधे काफी बड़े-बड़े थे और दूसरे का बगीचा बहुत सुंदर था, फूलों से लदे मुसन्डा के पेड़ और गुलदाउदी के ढेर सारे गमले और क्यारियां, उनका घर भी बहुत सुंदर हैं नूना को कुछ वैसी ही कैफियत हुई - भला उसकी साड़ी मेरी साड़ी से सफेद कैसे ? पर एक पल के लिए. आज हल्की बूंदा-बांदी हो रही है इसलिए छत पर काम करने वाले मजदूर नहीं आए, जिन्होंने कल से काम करना शुरू किया है. कल नये सोफे, कारपेट, लैम्पशेड तथा डोर मैट बिछाने के बाद उनकी बैठक भी बहुत सुंदर लग रही है, उनके मन भी सुंदर बनें !





Wednesday, April 23, 2014

हार्डी बॉयज के कारनामे


आज आसू ने ‘असम बंद’ का आह्वान किया है सो जून का दफ्तर बंद है और नन्हे का स्कूल भी. सुबह वे पौने छह बजे उठे, उसने खिड़की से झाँका, मौसम आज भी अच्छा है, न तेज धूप न गर्मी और न ही लगातार वर्षा से कीचड़, बादल बने हुए हैं हल्के-हल्के. कल उसने छोटी बहन को एक पत्र लिखा, एक ससुराल में. वह यह लिख ही रही थी कि बाहर वर्षा की झड़ी लग ही गयी. नन्हा अभी-अभी शिकायत लेकर आया कि पापा ने लाइब्रेरियन सर से कह दिया, उसे एजुकेशनल बुक्स भी दिया करे तो उन्होंने story books देना बंद ही कर दिया है. उसे hardy boys पढ़ने का मन है पर वह यह नहीं जानता कि किसी के मन की इच्छा हमेशा पूरी नहीं सकती और जो सच्चाई है उसे स्वीकार लेना चाहिए. आज नैनी बहुत गुस्से में थी, उसे अपनी बेटी के पैर में चोट लगने से इतना दुःख पहुंचा है कि अपनी सोचने-समझने की ताकत ही भूल गयी, आये दिन छुट्टी मांगने पर जब उसको डांट दिया तो काम छोड़ने पर ही उतारू हो गयी, ये लोग भले पैसे-पैसे को मुहताज रहें पर किसी की बात नहीं सुन सकते, इसे स्वाभिमान नहीं मूर्खता ही कहेंगे. कल उसने सिन्धी कढ़ाई का एक और नमूना सीखा, पड़ोसिन की वजह से उसका ज्ञान भी बढ़ रहा है. कल मेहमानों के लिए उसने बड़े मन से भोजन बनाया था. जून ने बहुत दिनों बाद उसके बनाये भोजन की तारीफ़ की.

उसने पढ़ा, “We all want a state of permanency. We want certain desires to last for ever, we want pleasure to have no end. Which means that we are seeking a lasting, continuous life in the stagnant pool. We refuse to accept life as it is in fact.”

जिंदगी हसीन तोहफों से भरी हुई है, अब कल की बात लें, दोपहर को तेज बिजली कडकी, इतनी तेज की वे सभी काँप गये पर उसने गिरकर भी  किसी का विशेष नुकसान नहीं किया, बस उनके रिसीवर व स्पाइक बस्टर का फ्यूज उड़ गया, पास में एक पेड़ के दो टुकड़े हो गये, गैस पाइप से रिसती गैस में आग लगी जो बड़ी आसानी से बुझा दी गयी. वर्षा अभी भी थमी नहीं है. टीवी पर खबरें आ रही हैं, काश्मीर में तरक्की का काम जोर-शोर से चल रहा है. प्रधान मंत्री ने फिर कहा है, Kashmir भारत का अटूट अंग है. उसने सोचा, एक न एक दिन थक हार कर पाकिस्तान आतंकवाद का रास्ता छोड़ ही देगा, तब तक मुश्किलें सहनी होंगी, अपने देश की अखंडता बनाये रखने के लिए कितने लोगों ने अपनी जानें दी हैं और कितनों को अभी और देनी हैं !

आज तेज धूप निकली है, कई हफ्तों की लगातार वर्षा के बाद सभी ने धूप का स्वागत बाहें फैला कर किया होगा, बाढ़ में फंसे लोगों ने भी और सीलन भरे घरों के वासियों ने भी. पेड़ों, पत्तियों, लॉन की घास सभी को तो पानी के साथ साथ धूप भी चाहिए. जून भी बहुत खुश हैं. कल दोपहर लगभग तीन बजे ( तीन बजने से पांच मिनट पूर्व) उनकी नई मारुती ८०० p red यानि मैरून रंग की गाड़ी आ गयी. वह बहुत देर तक उसकी सफाई में लगे रहे. ३००किमि के लम्बे सफर से कीचड़ मिट्टी से भरे रास्तों (सड़क कहना तो नाइन्साफी होगी) से गुजरकर सही सलामत ड्राइवर इशाक आले उसे लाया था, ढेर सारी मिट्टी उसके पहियों और बॉडी पर लगी थी. शाम को वे उसमें सवार होकर मित्रों से मिलने गये, नन्हा अपने मित्र की जन्मदिन की पार्टी में गया था.


आज इतवार की सुबह उठते ही जून फिर नई कार को सजाने में जुट गये, कारपेट, रबर मैट्स आदि लगाये फिर गैराज में जाकर मड गार्ड भी, उन्होंने कहा, कल तिनसुकिया जाकर नई गाड़ी का रजिस्ट्रेशन कराना होगा, वे उसके लिए सूट का प्लेन कपड़ा भी लायेंगे जिस पर उसका सिन्धी कढ़ाई करने व शीशे लगाने का विचार है.  उनका फोन अभी तक ठीक नहीं हुआ है, सो घर पर खबर नहीं दे पाए हैं. बहुत दिनों बाद खाने में आज दाल-चावल खाए, बचपन की याद ताजा हो आई, 

Tuesday, April 8, 2014

कौसानी के पर्वत


आज कृष्ण जन्माष्टमी भी है और जून का जन्मदिन भी, सुबह से वर्षा हो रही है, वे सुबह साथ-साथ उठे पर वह उसे तत्क्ष्ण शुभकामना देना भूल गयी. ब्रश करने के बाद कम्प्यूटर में कल बनाये कार्ड को दिखाकर उन्हें बधाई दी. तभी पिता का फोन भी आया, वे दशहरे पर ही यहाँ आना चाहते हैं, और जून के अनुसार इतने कम दिनों के दिनों के लिए उनका आना उचित नहीं है पर नूना को लगता है उन्हें अपनी इच्छा के अनुसार निर्णय लेने की आजादी होनी चाहिए. कुछ देर पहले उस सखी का फोन आया जिसने स्कूल जाना शुरू किया है, आज स्कूल बंद है. अभी-अभी वह बातूनी सखी आई थी, आत्मविश्वास से भरी हुई, नीले रंग का सूट पहने लम्बे बालों को एक रबर बैंड से बांधे, लाल बिंदी माथे पर, उसे देखकर अच्छा लगा. कामकाजी महिलाओं के व्यक्त्तित्व में एक खास बात( जो सबमें नहीं भी आती) होती है, उसमें है. तीन दिन बाद  नन्हे का स्कूल खुल रहा है, उसका कुछ project कार्य अभी भी शेष है. आज उसने music India CD का रिव्यु पढ़ा, जिसमें सभी रागों का विवरण है साथ ही प्रख्यात शास्त्रीय गायकों की आवाज भी, उसने सोचा, भविष्य में कभी वे खरीदेंगे. कल पन्द्रह अगस्त है, जिसे कल शाम छोटी सी पार्टी रखकर वे मनाना चाहते हैं. जून का जन्मदिन अपने तौर पर, किन्तु  देश की आजादी की वर्षगाँठ वे सबके साथ मिलजुल कर मनाएंगे. आजकल यहाँ अल्फ़ा की गतिविधियाँ बढ़ गयी हैं, कुछ आत्मसमर्पण भी कर रहे हैं. कल ‘पूर्ण असम बंद’ है, कैसा विरोधाभास है.

पिछले दो दिन व्यस्तता में बीते, परसों वे सुबह से ही शाम के डिनर की तयारी में जुटे थे. नन्हे ने डाइनिंग टेबल सजाई, घर विशेषतौर पर ड्राइंग रूम अच्छा लग रहा था. दोपहर से ही खाने की तैयारी शुरू कर दी थी क्योंकि दोपहर बाद ‘विवेकानन्द’ फिल्म देखनी थी, फिल्म अच्छी थी, गीत भी सुमधुर थे, भक्तिरस में डूबे हुए भजन. नन्हा अब बड़ा हो रहा है उसे भी फिल्म अच्छी लगी. कल शाम उसने एक कार्यक्रम भी देखा self management पर, उसे समझ में आया कि स्वयं को कैसे मेंटली और इमोशनली  संयत करना है. गर्मी की छुट्टियों के बाद आज उसका स्कूल खुला है, नूना बहुत दिनों के बाद घर में अकेली है, उसका साथ बहुत अच्छा लगता था, उन दिनों जब जून भी नहीं थे, वह उससे घंटों बातें करता था. जून और नन्हा इन दोनों के साथ उसका मन इस कदर जुड़ा हुआ है कि...
आज सुबह नैनी की बेटी को लेकर वे अस्पताल गये, उसे टिटनेस का टीका लगवाना था, पिछले चार-पांच  दिनों से उसके पैर में चोट लगी थी, पर घाव सूखने के बजाय पैर ही सूज गया है. जून के आने का वक्त हो रहा है, उन्हें बाजार होते हुए आना है पर बरसात है कि रुकने का नाम ही नहीं ले रही है. परसों शाम उनकी पार्टी अच्छी रही पर कल सुबह सोकर उठी तो गले में खराश थी, कई बार गरारे किये काफी राहत मिली, आज संगीत कक्षा में भी जाना है.

असमिया सखी ने कुछ देर पूर्व बड़े अधिकार से अपनी बिटिया के लिए मोज़े बुनने को कहा, सुबह जून के जाने के बाद IGNOU के प्रसारण में शिशु गृह के नन्हे-मुन्नों को देखकर पहले ही उसका मन वात्सल्य भाव से परिपूर्ण था. छोटे-छोटे कदम उठते मासूम बच्चे अपनी गतिविधियों से सभी को मोहित कर लेते हैं. उसने सोचा आज ही वह बुनना शुरू कर देगी. कई दिनों के बाद उसकी दिनचर्या पहले की भांति नियमित हुई है. कल दिन भर वर्षा होती रही, इस वक्त भी आकाश में बदली तो है. नन्हा कल स्कूल से आकर खुश था, बहुत दिनों बाद उसके साथ कल ‘वाटर पेंट’ किया, बच्चों के साथ कितना कुछ दोहरा लेते हैं माता-पिता, जो बरसों पहले सीखा तो होता है पर मन के किसी कोने में जंग खा रहा होता है. कल वह लाइब्रेरी से तीन किताबें लायी है, उसने ध्यान दिया, किचन को छोड़कर उनके घर के हर कमरे में किताबें हैं.

आज सुबह से कामों का जो सिलसिला शुरू हुआ था वह दोपहर जून के जाने के बाद फिर से जारी किया जो अब जाकर खत्म हुआ है, यानि दोपहर के काम शाम पर टल गये और दोपहर सुबह को समर्पित हो गयी. सुबह उसकी छात्रा आयी थी, सार-लेखन व संवाद लेखन के बारे में जानने, एक पुस्तक भी ले गयी है इसका अर्थ है बाद में भी कभी आएगी ही. उसे अच्छा लगा, सम्बन्ध एकदम से टूट जाएँ तो ज्यादा खलता है धीरे-धीरे रेखाएं धूमिल पड़ें तो सहना सरल होता है.

Live in today ! Because past is but a dream and future is just a vision, who learns to live moment to moment is free of worries ! they started their day at 5 in the morning. Yesterday she did an experiment, tried to make curd with the help of a silver coin but pusi the cat drank milk kept for setting curd. She might have come through a window which had remained opened by mistake.

नन्हे और जून के जाने के बाद उसने प्रतिदिन की तरह टीवी चलाया तो ignou के प्रसारण में ‘कौसानी-एक यात्रा वृतांत’ आ रहा था. अल्मोड़ा के आस-पास ही है कौसानी, बेरहमी से काटे जा रहे जंगलों के कारण ही भूस्खलन की घटनाएँ गढवाल में बढ़ गयी हैं. कल ही दो सौ लोगों के दबकर मरने की खबर पिथौरागढ़ से आई थी और आज रुद्रप्रयाग में भी ३७ लोग चट्टानों के नीचे दब गये, जो पहाड़ इतने सुंदर लगते हैं वे इतने निर्मम भी हो सकते हैं. 

Wednesday, January 22, 2014

किताबों की दुनिया


आज मौसम अच्छा है, ठंडी हवा, बादल और हरियाली ! गुलदाउदी के पौधों के लिए सहारे की जरूरत है, ज्यादा पानी पड़ने से पौधे तिरछे हो गये हैं. नैनी का लड़का बांस के खप्पचे तैयार कर  रहा है, फिर उन्हें बांधेगे और अब नीम की खली भिगोने का भी समय हो गया है. अभी-अभी उसी सखी से बात की, मन भर आया, अभी तो जाने की बात भर है, जब वास्तव में जा रहे होंगे तब... वे भी तो उन्हें उतना ही याद करेंगे. कुछ देर पूर्व पड़ोसिन से बात हुई उस दिन सैंडविच काटने के कारण एक सखी को बांह में दर्द हो गया था, उसे अस्पताल तक जाना पड़ा पर उसके साथ बात करने पर उस सखी ने यह बात नहीं बताई, शायद उसकी प्रतिक्रिया (कि वह बहुत नाजुक है) याद करके या उसकी तरह वह अपनी कमजोरी जाहिर न करना चाहती हो. शाम को वह घर पर ही रही स्वेटर बनाते हुए. अचानक उसे ध्यान आया यूँ अपने आप से बातें करते चले जाना कितना आसान है पर चिन्तन करना, सोचना-समझना कितना मुश्किल, हर पल मन पर नजर रखना यानि कि सब कुछ निरपेक्ष भाव से देखना शुरू करना, बिना किसी तुलना या भेद भाव के, और वह देखना ही सही सम्बन्धों का आरम्भ होगा. सुबह जून ने कहा, आलस्य के कारण शाम को उनके लिए उसने oats नहीं बनाये थे, बात कुछ हद तक सच भी थी पर चुभ गयी और अहम् का गुब्बारा पिचक गया, लोगों से कैसे पेश आयें कि न ही उन्हें दुःख हो, न ही स्वयं को, बातचीत करना दुनिया की सबसे बड़ी कला है जो स्वयं ही सीखनी पडती है, किसी भी स्कूल में नहीं सिखाई जाती.

क्लब में आज डिबेट है, कपड़े धोते समय मन में विचार आया क्या उसे सुनना सफल होगा, या फिर क्यों जाएँ वे सुनने ? उसकी दोनों सखियाँ नहीं जाना चाहतीं. उसके पास जाने का सबसे बड़ा कारण है लोगों को बोलते हुए सुनना, ऐसे तो टीवी पर हर दिन कितने ही लोगों को सुनते हैं पर अपने आस-पास के लोगों में से कुछ को अपने विचार रखते देखना सचमुच एक सुखद अनुभव होगा. मात्र सुनना और उन पलों की सुन्दरता को महसूस करना.

आज सुबह प्रमाद के कारण उठने में फिर देर हुई, जून तो जल्दी –जल्दी तैयार होकर दफ्तर चले गये पर वह सोचती रही कि दुनिया भर की किताबें पढने के बाद भी अगर उसमें इतना सा भी बदलाव नहीं आया तो व्यर्थ है पुस्तकों का पढना. स्वयं सोचना सीखना चाहिए. दूसरों के ज्ञान के सहारे अपनी नैया नहीं खे सकते. आधी से ज्यादा जिन्दगी बीत चुकी है पर सही मायनों में जीना अभी तक नहीं आया. ले दे कर कुल तीन प्राणी हैं घर में, उनमें भी आपस में कभी न कभी कोई टकराव हो ही जाता है चाहे वह कितना ही छोटा क्यों न हो, पर क्या यह अनुचित है? बात यह नहीं कि टकराव अनुचित है या नहीं, पर उसकी वजह उसकी नासमझी भी तो हो सकती है या सही संवाद का न होना भी, और ये बातें किताबों से पढकर नहीं सीखी जा सकतीं, सीख भी लें पर उसे अमल में लायें तो सही.

उसकी रोटी, जिसकी मेहनत, जिसका श्रम है ! आज घर कितना साफ लग रहा है, दर्शन पर किताबें पढने से अच्छा तो उन पर जमी धूल साफ करना है, मन हल्का है, तन शायद थका है पर यह थकान संतोष देती है, कुछ करने का संतोष. आज फोन पर किसी से कोई बात नहीं की, समय ही कहाँ था, कल शाम वे क्लब जाने के लिए तैयार हो रहे थे, एक परिवार मिलने आ गया, हंस कर अपने पतिदेव की शिकायत करना आगन्तुका की आदत है, उसकी नन्ही बेटी बातूनी हो गयी है, और पुत्र पहले की तरह है शर्मीला. कल जून ने बताया उन्हें एक पेपर प्रस्तुत करने दिल्ली जाना होगा. नन्हे की आजकल स्वीमिंग कोचिंग चल रही है, वह खुशदिल, शांत और मिलनसार बच्चा है, सुबह-सुबह उठने में उसे परेशानी होती है पर रात देर तक पढ़ सकता है.




Tuesday, May 15, 2012

श्र्द्दावान लभते ज्ञानं


जून उसके लिये हिंदी अनुभाग से दस किताबें लाया है, ज्यादातर उपन्यास हैं, कुछ कहानियों की किताबें हैं. इन्हें पढ़ लेने पर वह और भी लाएगा. नूना बहुत खुश है इन्हें पाकर. कल शरत चन्द्र की  एक कहानी पढ़ी, शाम को विमल मित्र की डेढ़ कहानी, दूसरी पूरी नहीं पढ़ पायी, रात को जून ने कहा, उसे नींद आ रही है, बत्ती बुझा दो. उसे पता नहीं क्यों पढ़ने के नाम पर जोरों से नींद आने लगती है, पर बत्ती बंद होने के बाद आधे से एक घंटा वह जगता रहा था. सुबह उठकर जून के जाने के बाद उसने वह कहानी पढ़नी शुरू की, काम वाली महरी तब तक आयी नहीं थी, पढ़ते-पढ़ते कब उसकी भी आँख लग गयी उसे भी नहीं पता, एक बार उठने का ख्याल आया तो मन ने कहा अभी काम वाली आकर घंटी बजाएगी, पर उसे आना ही नहीं था, फिर उठ कर भोजन बनाया जून के आने में आधा घंटा शेष था. फिर स्नान किया और रोज का गीता पाठ किया, पढ़ा, “ईश्वर को केवल श्रद्धा से जाना जा सकता है, उसके विषय में तर्क करने से कुछ हाथ नहीं आयेगा, वह है, यह मानना होगा पूरे मन से. संशय ग्रस्त मन कभी रास्ता नहीं पा सकता, संशय से ऊपर रहकर अपने आप में व ईश्वर की सत्ता में विश्वास रखकर वे कहीं अधिक सबल हो सकते हैं.