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Sunday, August 3, 2014

मीठे अमरूदों वाला पेड़


It is raining since last night so everything is looking fresh and washed. She went to their back yard and then outside through back door to fetch two java flowers(gurhal) for putting in front of God’s image, she burned a essence stick and prayed for two minutes. She always asks him to be with her, because then only she is at ease. Yesterday she went to monthly meeting of ladies club with neighbor, opening chorus was not so good but other progarmmes were very good, inspiring and enjoyable. Food was horrible she could not sleep properly after eating such oily and spicy food though she ate only small portion of it. In the morning news they again heard about one more railway  bomb blast in Assam. Terrorist have no brain, they can not  understand the futility of such cruel acts, they destroy their own property and kill their own people. They do not understand that this is their own state and others are not paying for trains, buses and bridges, which they intend to destroy. Life is full of worries but they should not focus only on the circle of their concern, those things which they  can not change but on those which they can change ie on circle of their influence. With their honest effort they can make this world more beautiful.

आज भी वर्षा जारी है, किचन में ट्यूब लाइट लगाने का कार्य चल रहा है. बंगाली सखी ने रात को खाने पर बुलाया है. आज उसके ‘उनका’ जन्मदिन है. नैनी को उसने उसके नवजात नाती के लिए एक ड्रेस दी जो कल जून लाये थे, उसने विशेष प्रतिक्रिया नहीं दिखाई. वह मौन रहकर अपना काम करती रहती है, मेहनती है, जिन्दगी के कई पाठ उसने स्वयं ही सीख लिए हैं, अच्छा है हमेशा समभाव में रहती है. आज उसके सुबह के काम में थोड़ा खलल पड़ा है, न अभी खाना बना सकती है क्यों कि किचन में काम चल रहा है न ही व्यायाम या संगीत का अभ्यास, बेहतर होगा दोपहर के कार्य अभी कर लिए जाएँ और अभी के दोपहर को. आज सुबह पहलगाम में उग्रवादियों द्वारा तीर्थ यात्रियों की हत्या का समाचार सुना, हिजबुल मुजाहिदीन के द्वारा युद्ध बंदी की घोषणा के बाद अन्य गुट ज्यादा सक्रिय हो गये हैं.

जितनी देर कोई इच्छा के अधीन रहता है अपनी शक्ति का अपव्यय करता रहता है, चाहे इच्छा छोटी हो अथवा बड़ी, बंधन का कारण तो होती ही है. इसका अनुभव उसे आज कुछ क्षण पूर्व ही हुआ. एक कामना मन में जगी और फिर उसे पूर्ण करने की खटपट, मन जैसे अस्थिर हो उठा और मन की झलक बाहरी कार्यकलापों पर साफ दिखाई देने लगी. सारे काम जैसे मशीनी रूप से हो रहे थे क्योंकि मन तो उस इच्छा और उसकी पूर्ति के बारे में सोच रहा था. फिर समाचार सुनने लगी कश्मीर में निर्दोष लोगों की हत्या और उसके विरोध के समाचार सुनते-सुनते मन जैसे चौंक कर जगा, लोग मर रहे हैं, पीड़ित हैं, तकलीफ में हैं और वे अपनी ही दुनिया में व्यस्त हैं. जिन्दगी बहुत कुछ झेलती है और झेलते-झेलते उसकी संवेदनशीलता घटती चली जाती है. लेकिन साधक इस बात को ऐसे नहीं लेता वह तो मात्र अपने ईश्वर पर भरोसा रखता है, वह उसी से बल पाता है. आज उसे उसे बैंक जाना है, स्कूल में जो काम किया था अंतिम महीने की पे सभी को मिलनी है, उसे हस्ताक्षर करने हैं. आज सुबह नन्हे ने फिर उठने में नखरे किये पर समय से तैयार हो गया. कल सखी के यहाँ डिनर अच्छा रहा, कम मिर्च मसाले का भोजन और तवा रोटी. उनके अमरूद के वृक्ष ने इस वर्ष भी मीठे फलों का उपहार दिया है. तीन सखियों को दे चुकी है, अभी कुछ लोगों को और देने हैं.  


  

Wednesday, April 23, 2014

हार्डी बॉयज के कारनामे


आज आसू ने ‘असम बंद’ का आह्वान किया है सो जून का दफ्तर बंद है और नन्हे का स्कूल भी. सुबह वे पौने छह बजे उठे, उसने खिड़की से झाँका, मौसम आज भी अच्छा है, न तेज धूप न गर्मी और न ही लगातार वर्षा से कीचड़, बादल बने हुए हैं हल्के-हल्के. कल उसने छोटी बहन को एक पत्र लिखा, एक ससुराल में. वह यह लिख ही रही थी कि बाहर वर्षा की झड़ी लग ही गयी. नन्हा अभी-अभी शिकायत लेकर आया कि पापा ने लाइब्रेरियन सर से कह दिया, उसे एजुकेशनल बुक्स भी दिया करे तो उन्होंने story books देना बंद ही कर दिया है. उसे hardy boys पढ़ने का मन है पर वह यह नहीं जानता कि किसी के मन की इच्छा हमेशा पूरी नहीं सकती और जो सच्चाई है उसे स्वीकार लेना चाहिए. आज नैनी बहुत गुस्से में थी, उसे अपनी बेटी के पैर में चोट लगने से इतना दुःख पहुंचा है कि अपनी सोचने-समझने की ताकत ही भूल गयी, आये दिन छुट्टी मांगने पर जब उसको डांट दिया तो काम छोड़ने पर ही उतारू हो गयी, ये लोग भले पैसे-पैसे को मुहताज रहें पर किसी की बात नहीं सुन सकते, इसे स्वाभिमान नहीं मूर्खता ही कहेंगे. कल उसने सिन्धी कढ़ाई का एक और नमूना सीखा, पड़ोसिन की वजह से उसका ज्ञान भी बढ़ रहा है. कल मेहमानों के लिए उसने बड़े मन से भोजन बनाया था. जून ने बहुत दिनों बाद उसके बनाये भोजन की तारीफ़ की.

उसने पढ़ा, “We all want a state of permanency. We want certain desires to last for ever, we want pleasure to have no end. Which means that we are seeking a lasting, continuous life in the stagnant pool. We refuse to accept life as it is in fact.”

जिंदगी हसीन तोहफों से भरी हुई है, अब कल की बात लें, दोपहर को तेज बिजली कडकी, इतनी तेज की वे सभी काँप गये पर उसने गिरकर भी  किसी का विशेष नुकसान नहीं किया, बस उनके रिसीवर व स्पाइक बस्टर का फ्यूज उड़ गया, पास में एक पेड़ के दो टुकड़े हो गये, गैस पाइप से रिसती गैस में आग लगी जो बड़ी आसानी से बुझा दी गयी. वर्षा अभी भी थमी नहीं है. टीवी पर खबरें आ रही हैं, काश्मीर में तरक्की का काम जोर-शोर से चल रहा है. प्रधान मंत्री ने फिर कहा है, Kashmir भारत का अटूट अंग है. उसने सोचा, एक न एक दिन थक हार कर पाकिस्तान आतंकवाद का रास्ता छोड़ ही देगा, तब तक मुश्किलें सहनी होंगी, अपने देश की अखंडता बनाये रखने के लिए कितने लोगों ने अपनी जानें दी हैं और कितनों को अभी और देनी हैं !

आज तेज धूप निकली है, कई हफ्तों की लगातार वर्षा के बाद सभी ने धूप का स्वागत बाहें फैला कर किया होगा, बाढ़ में फंसे लोगों ने भी और सीलन भरे घरों के वासियों ने भी. पेड़ों, पत्तियों, लॉन की घास सभी को तो पानी के साथ साथ धूप भी चाहिए. जून भी बहुत खुश हैं. कल दोपहर लगभग तीन बजे ( तीन बजने से पांच मिनट पूर्व) उनकी नई मारुती ८०० p red यानि मैरून रंग की गाड़ी आ गयी. वह बहुत देर तक उसकी सफाई में लगे रहे. ३००किमि के लम्बे सफर से कीचड़ मिट्टी से भरे रास्तों (सड़क कहना तो नाइन्साफी होगी) से गुजरकर सही सलामत ड्राइवर इशाक आले उसे लाया था, ढेर सारी मिट्टी उसके पहियों और बॉडी पर लगी थी. शाम को वे उसमें सवार होकर मित्रों से मिलने गये, नन्हा अपने मित्र की जन्मदिन की पार्टी में गया था.


आज इतवार की सुबह उठते ही जून फिर नई कार को सजाने में जुट गये, कारपेट, रबर मैट्स आदि लगाये फिर गैराज में जाकर मड गार्ड भी, उन्होंने कहा, कल तिनसुकिया जाकर नई गाड़ी का रजिस्ट्रेशन कराना होगा, वे उसके लिए सूट का प्लेन कपड़ा भी लायेंगे जिस पर उसका सिन्धी कढ़ाई करने व शीशे लगाने का विचार है.  उनका फोन अभी तक ठीक नहीं हुआ है, सो घर पर खबर नहीं दे पाए हैं. बहुत दिनों बाद खाने में आज दाल-चावल खाए, बचपन की याद ताजा हो आई, 

Tuesday, March 11, 2014

कागजी अखरोट


टीवी पर काश्मीर से सम्बन्धित एक धारावाहिक ने बाँध लिया है, काश्मीर में जब यूरोपियन और अमेरिकी पर्यटकों को बंधक बनाया गया था, उसी घटना का कथात्मक चित्रण किया गया है, लोगों की परेशानी, आर्मी व पुलिस की कार्यवाही, पत्रकारों और टीवी चैनल की नई कहानी पाने की इच्छा, सभी का वर्णन अच्छा है. अपह्रत व्यापारी की पत्नी का दुःख, ड्यूटी पर जाते हुए पुलिस अधिकारी की पत्नी का उससे कागजी अखरोट और केसर लाने की फरमाइश करना. असमिया समाचारों ने बचा लिया वरना उसका सारा कार्य वहीं का वहीं रह जाता और टीवी के सामने से हटने का मन नहीं करता. कल शाम वे टहल कर लौटे तो दो मित्र परिवार मिलने आये, तब महसूस हुआ, आजकल घर की साज-सज्जा पर उसका ध्यान थोड़ा कम है, अब जून के बाहर जाने के बाद पूरी सफाई करेगी. सुबह-सुबह बड़े भाई से बात हुई, माँ-पापा अभी तक डॉक्टर के पास नहीं गये हैं, ईश्वर की मर्जी मानकर वे अपनी अपनी समस्या को ख़ुशी ख़ुशी सह रहे हैं. इन्सान का मन कितने भुलावों की रचना कर लेता है. स्वयं को सुरक्षित रखने के लिए आसपास कितनी ही दीवारों की रचना कर लेता है. शायद वृद्धावस्था में वह भी ऐसी ही हठी हो जाये. आज सुबह Frankenstein दुबारा पढ़नी शुरू की, बहुत रोचक पुस्तक है.
कल शाम नन्हा थका हुआ लग रहा था, आज सुबह उठा तो उसे उसका बदन गर्म लगा पर शायद यह उसका वहम हो क्योंकि वह ठीक महसूस कर रहा था. आज से उसे एक घंटा खेलने के लिए जाने को कहा है, पिछले चार-पांच दिनों से मित्रों से बिलकुल दूर हो गया है. आज  मौसम गर्म है, पंखा सुहावना लग रहा है. उसने भरवां आलू-बैगन बनाये हैं, जो माँ ने बचपन की एक गर्मी की शुरुआती शाम को बनाये थे. जब गर्मियां शुरू होती थीं तो उनकी रसोई बाहर आ जाती थी. वे भी क्या दिन थे ! कल शाम जून और वह दूर तक घूमने गये, अगले आठ दिन उसे अकेले ही टहलना होगा शाम को अपने ही घर में.  सुबह उसने सोचा जून के तैयार होने तक घर पर फोन कर लेगी, पर पता नहीं ध्यान कहाँ था, शायद अपने को गर्व के पर्दे के पीछे छिपा लिया था, लोकल फोन पर एसटीडी नम्बर मिला रही थी. सारा घमंड पानी-पानी हो गया जब जून ने उसे ऐसा करने से रोका. हर पल स्वयं पर नजर रखनी बेहद जरूरी है नहीं तो उसे भटकने में देर नहीं लगती. कल रात उनके बेडरूम के रोशनदान में एक साथ सैकड़ों काले चींटे आ गये, जून ने पहले एक चींटे को मारा  तो नूना ने उसे मना किया पर कुछ ही देर में उन्हें उन सभी को मारना या बेहोश करना पड़ा. अभी भी इक्का-दुक्का कमरे में घूम रहे हैं, उनके लिये तो कयामत का दिन कल ही था.
अभी आठ ही बजे हैं पर सूरज आकाश में ऊंचा चढ़ आया है. आज सुबह जून ने उसे कालिमा में उगता हुआ लाल सूरज दिखाया, अनुपम था वह दृश्य ! उसे लगा जैसे नेहरू की काली अचकन पर  लाल गुलाब सा उषा का सूर्य और गाँधी के मौनव्रत सी शांत सुबह ! वे दोनों चले गये, उसने घर संभाला और भगवद् गीता का एक अध्याय पढ़ा, कुछ देर ध्यान किया और अब लिखने बैठी है. ध्यान करने बैठी थी तो मन में उपन्यास के पात्र घूमने लगे, कभी भोजन में क्या बनाना है आदि पर इस समय मन एकदम खाली है. जून शाम को दिल्ली पहुंचकर फोन करेंगे. नन्हा खेलने गया है, उसे गणित पढ़ाते समय बहुत अच्छा लगा, जल्दी समझ जाता है, उसने मन ही मन अपने अध्यापकों को धन्यवाद किया जिन्होंने उसे पढ़ाया था. अरुंधती राय की वह किताब आज समाप्त हो गयी, उसकी भाषा कितनी अलग है, आज वह उसे लाइब्रेरी में जाकर वापस कर देगी ताकि कोई और पढ़ सके. जून जाते-जाते भी उनके लिए सब्जियां और काजू देकर गये, कितना ध्यान है उन्हें परिवार का और कितना स्नेह !  





Friday, February 17, 2012

काश्मीर समस्या


राखी का त्यौहार आने वाला है. भैया का पत्र आया है आज उन्होंने अपना पता भी लिखा है, उनके मन में भी रक्षाबन्धन की बात रही होगी. धर्मयुग में काश्मीर पर एक लेख पढ़ा, मन क्षोभ से भर गया, हमारे देश का एक सुंदर प्रदेश आतंक का शिकार हो गया है. मानवता के हजार दुश्मन आज के  युग में पनप रहे हैं, हर जगह उन्हीं का तो राज है. भारत सरकार को शीघ्र ही कड़ा कदम उठाना होगा.
कल सुबह वे साढ़े पांच बजे ही उठ गए. उन्हें मोरान जाना था, कार में आगे वे बैठे थे पीछे और लोग भी थे, एक सीनियर भी, सो वे रास्ते भर ज्यादा बात नहीं कर सके. एक परिचित के यहाँ रुके. गृहणी के साथ उसकी गाँव में रहने वाली नन्द भी थी. अच्छे खुशमिजाज, मिलनसार लोग थे. दोपहर को नूना सो गयी और जून फील्ड चला गया. शाम को गर्मी बहुत थी सो पुनः स्नान किया. बाजार गए. बिजली नहीं थी पर कुछ देर में आ गयी. एक और दम्पति से मुलाकात हुई, श्रीमती को देखकर नूना को कक्षा ३ में पढ़ने वाली उसकी ट्यूशन की छात्रा की याद हो आयी वही लहजा है बोलने का आठ साल की बच्ची का और वही आवाज भी. नूना कुछ थक गयी थी पर जून के साथ ने उसे विश्वास दिला दिया कि अच्छा किया जो वह अकेले पीछे घर में नहीं रुक गयी.