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Tuesday, October 29, 2024

आलू भुजिया और परांठा

आलू भुजिया और परांठा 


अभी कुछ देर पहले वे दोनों मास्क पहने कर रात्रि भ्रमण के लिए गये थे। देश और दुनिया में कोरोना ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है। केवल बैंगलुरु में आठ हज़ार केस मिले हैं।शाम को दीदी से बात हुई, कह रही थीं, जीजा जी रोज़ शाम को कुछ देर के लिए एक दुकान पर जाकर बैठते हैं, आस-पास की खबरें मिल जाती हैं, कुछ और लोग भी आते हैं, उन्हें भी सतर्क रहना होगा।भांजा आज वापस जा रहा है, घर से काम करेगा, किराए का घर बंद रहेगा, बाइक नन्हे के यहाँ छोड़ जाएगा। पापाजी से बात हुई, कल उन्हें अचानक हृदय के पास दर्द हुआ, आज ठीक हैं। कोरोना का टेस्ट दुबारा करवाया, छोटे भाई का भी। अगले हफ़्ते प्रमोशन के लिए उसका इंटरव्यू है, पर जा पाएगा या नहीं, अभी तक तय नहीं है। 


आज छत पर सोलर पैनल में लाइटिंग अरेस्टर लग गया तथा तीन इन्वर्टर बदल दिये गये जो इलेक्ट्रिकल सर्ज के कारण पिछले दो महीने से ख़राब थे। उस समय बिजली से चलने वाले कितने और उपकरण भी ख़राब हो गये थे। कुछ देर पहले नन्हे और सोनू से बात की। सुबह यहाँ आने से पूर्व उनका गला ख़राब लग रहा था। कल ही दोनों डेंटिस्ट के पास से आये थे, डर गये, कहीं संक्रमण न हो गया हो। आने से ही मना कर रहे थे।उन्हें कहा, आ जाओ, अपने कमरे में ही रहना, वहीं नाश्ता, खाना पहुँचा देंगे। पर पाँच मिनट भी नहीं रहे कमरे में, नीचे सबने साथ में नाश्ता किया। अभी बात की तो पता चला, नन्हे को सिर में दर्द हुआ था, पर अब कम हो गया है। दोनों कल टेस्ट करा रहे हैं। आज दो पुराने मित्र परिवारों से वीडियो कांफ्रेस पर बात हुई। दिन में एक चित्र बनाया, और सुबह ब्रह्म मुहूर्त में जब मन ख़ाली होता है, एक कविता लिखी। 


सुबह बच्चों से बात की, दोनों ठीक थे व अपने जॉब पर लग चुके थे। कल जो उनके मन में संदेह हो गया था, निराधार था। भय मन पर कैसे असर कर लेता है। कल रात को उसे भी एक दो बार ऐसा लगा कि कुछ ठीक नहीं है। मन में विचार करते ही शरीर पर असर दिखने लगता है। आज दिन में भी गर्मी के कारण एक बार बेचैनी सी हुई, पर अब सब ठीक है। रात्रि भ्रमण के समय हल्की ठंडक लिए हवा चल रही थी।शाम को पड़ोसिन से बात हुई, अब उनकी बहू भी ठीक है। भाई व पापाजी की रिपोर्ट भी आ गई है, भाई की नेगेटिव पर पापाजी की अभी भी पॉज़िटिव है।भाभी ने वैक्सीन लगवा ली है। उसे लगता है, जब कोरोना पूरी तरह ख़त्म हो जाएगा, तब भी शायद इन दिनों को याद करके लोग उदास हो जाया करेंगे।


आज बैसाखी है, गुडी पड़वा, युगादि और वासंतिक नवरात्र का पहला दिन भी।  न जाने कितने काल से पूरे भारत में अलग-अलग नामों से फसल का यह त्योहार मनाया जाता है। उसने नवरात्र पर एक छोटी सी कविता लिखी।टहलते समय देखा, आम के बगीचे से कच्चे आम ही काफ़ी मात्रा में तोड़ लिए गये हैं।आज से लगभग सभी हिंदू घरों में नौ दिनों तक जैन भोजन ही खाया जाता है, अर्थात बिना लहसुन-प्याज़ का शाकाहारी भीजन।आज नन्हे का एक चित्र उसकी कंपनी की एक खबर में देखा, अच्छा लगा। पड़ोसी के यहाँ से आज बैरियर हटा लिया गया है, यानि अब वे कोरोना से मुक्त हैं। अलग-अलग स्थान पर रहते हुए परिवार में लगभग सभी ने कोरोना की दूसरी डोज लगवा ली है। एक-दो को बुख़ार भी हुआ। पता चला, दसवीं की परीक्षा रद्द कर दी गई है। बारहवीं की परीक्षाएँ स्थगित कर दी गई हैं। पूरी दुनिया में कोविड के कारण काफ़ी उथल-पुथल मची है। उनका जीवन सुरक्षित है, जब तक वे घर से बाहर नहीं निकलते,यह वायर्स सभी को एकांत सेवी बना रहा है। वैसे किसी को घर बैठे-बैठे भी हुआ है। बाहर से तो संपर्क बना रहता है न। आज शाम को कुछ देर बूँदाबाँदी हुई, पर मौसम अभी भी गर्म है।    


आज शाम को तेज वर्षा हुई, मौसम सुहावना होई गया है। शाम को भाई से बात हुई, उसने बताया, एक बार कोरोना होने के कम से कम दो महीने बाद वैक्सीन लगवा सकते हैं। उसने अपने तीन परिचित परिवारों का ज़िक्र किया, जिसमें किसी न किसी को संक्रमण हो गया है। आज सुबह आकाश गहरा नीला था, भोर का तारा चाँदी की तरह चमक रहा था। क्रिया के बाद मन इतना हल्का हो गया था जैसे अंतरिक्ष के अंतिम छोर को पल भर में छू कर आ सकता है। नाश्ते में जून को आलू की भुजिया बनाने का मन हुआ, उसे बचपन की याद ताजा हो आयी, जब माँ टिफ़िन में पराँठा और आलू भुजिया देती थीं। उल्हास नगर की यात्रा का विवरण लिखा आज। शाम को योग वशिष्ठ में कितना अद्भुत वर्णन पढ़ा माया का, मन जब अनंत के साथ एक हो जाता है तो मुक्त हो जाता है, या अनंत जब सांत होना छोड़ देता है तो मुक्ति का अनुभव करता है।   


Tuesday, May 6, 2014

नया सोफ़ा और लैम्प शेड


...और दीवाली का उत्सव सोल्लास सम्पन्न हो गया, आज सब ओर कैसी शांति है, जून दफ्तर गये हैं और नन्हा स्कूल, उसका दिन भी अपने पुराने क्रम में गुजर रहा है. पहले उसकी छात्रा आई फिर कपड़े धोने थे. संगीत, लंच और दोपहर को हिंदी क्लास. रात्रि स्वप्नों में रिश्तेदारों से मिलती रही, अभी अपने लोग, दीदी भी थीं, उनका गला खराब था, उस दिन फोन पर बात की तो थोड़ा खांस रही थीं. आज उसने आलू व कसूरी मेथी की सब्जी बनाई है, गुलाब जामुन अभी भी बचे हैं. बगीचे में जाकर देखा तो बीज अंकुरित हो गये हैं पर साथ ही खर-पतवार भी निकल आये हैं, जिन्हें साफ करना जरूरी है. उसने plumber को बुलाकर कहा जो उनके बेडरूम का फ्लश ठीक करके गया था और लौट रहा था कि पानी नहीं चढ़ रहा है, पर उसने आते ही चलाकर दिखाया and she felt like a fool and last evening when one family came late when they were least expecting them she could not talk properly, she thought she can not adjust in odd situations, she even does not try, finds easy always known things and situations, but life is full of new events, her music teacher gave syllabus, may be next year she should appear in exam.

अज टीवी पर एक शायर का इंटरव्यू सुना तो कुछ अधूरी कविताएँ पूरी कीं, लिखने वालों को शायरों, कवियों से काफी प्रेरणा मिलती है, लगता है कोई जाना-पहचाना मिल गया, दिल की कैफियत तो हर जगह एक सी होती है. शायर का दिल, चाहे वह कहीं का भी हो, एक सा धडकता है, उसे हर उस शै से प्यार होता है, जिसमें खलूस हो, जो दुनिया को बेहतर बनाने में मददगार हो. प्यार तो दुनिया को जोड़े रखने का बहुत बड़ा साधन है, कुदरत से भी और इंसानों से भी, जानवरों, पेड़ों से भी. कल लाइब्रेरी से नई किताबें लायी है, स्वामी योगानन्द जी की भी एक किताब है, ध्यान में मदद मिलेगी. उनके लम्बे बाल देखकर उसने भी बाल न कटवाना तय किया है, और धोने के लिए शैम्पू की जगह बेसन व दही से धोएगी. अभी जून का फोन आया, उन्हें दफ्तर में रहकर भी घर का ख्याल बना रहता है, उसने सोचा, वह यदि काम करे तो पूरा ध्यान बाहर ही रहेगा, उतने वक्त तक घर को भूली रहेगी, वह दो तरफ ध्यान नहीं बंटा सकती सिवाय उस वक्त के जब ध्यान कर रही हो, तब तो मन हजार दिशाओं  में जाता है.

अभी-अभी घर वापस आई है, कल music class नहीं जा पाई थी सो आज गयी थी, टीचर ने गाउन पहना हुआ था जैसे वह क्लास लेने के मूड में न हों, हमेशा वह साड़ी या सूट पहने होती हैं, उसने सोचा शायद वह आराम कर रही थीं, सुबह उन्होंने कहा था अपनी एक मित्र को खाना देने अस्पताल जाना है, शायद देर से आई हों, उसे दो बुलेटिन भी दिए जो उसके घर के पास ही भिजवाने थे. मौसम अच्छा था और वह जल्दी आ गयी थी सो खुद ही देने चली गयी. सभी के दरवाजे बंद थे, अपने-अपने घरों में बंद लोग आराम कर रहे थे, एक के लॉन में गुलाबों के इर्द-गिर्द गड्ढे खुदे हुए थे, सब्जी की क्यारी में पौधे काफी बड़े-बड़े थे और दूसरे का बगीचा बहुत सुंदर था, फूलों से लदे मुसन्डा के पेड़ और गुलदाउदी के ढेर सारे गमले और क्यारियां, उनका घर भी बहुत सुंदर हैं नूना को कुछ वैसी ही कैफियत हुई - भला उसकी साड़ी मेरी साड़ी से सफेद कैसे ? पर एक पल के लिए. आज हल्की बूंदा-बांदी हो रही है इसलिए छत पर काम करने वाले मजदूर नहीं आए, जिन्होंने कल से काम करना शुरू किया है. कल नये सोफे, कारपेट, लैम्पशेड तथा डोर मैट बिछाने के बाद उनकी बैठक भी बहुत सुंदर लग रही है, उनके मन भी सुंदर बनें !





Wednesday, November 27, 2013

सेंस एंड सेंसिबिलिटी- जेन ऑस्टेन का नावेल


एक पल में ही मन चंचल हिरणों का सा छलांग लगता कहाँ से कहाँ पहुंच जाता है और आचार्य गोयनका जी का कहना है ‘’मन पर नजर रखो, एक विचार भी यदि शुद्ध नहीं है तो बीज पड़ गया जिसका फल तो मिलेगा ही, हर क्षण केवल शुद्ध और सद् विचारों का को ही बोओ तो कर्म भी ऐसे ही होंगे. कर्म की जड़ विचार ही तो है सो फल भी कड़वा ही मिलेगा अगर बीज कड़वे विचार का बोया है’’. विपश्यना हजारों साल पहले भारत में फली-फूली फिर लुप्त हो गयी और उसकी वजह से आज धर्म के नाम पर अधर्म का बोलबाला है. उस दिन अख़बार में भी इसके बारे में उसने पढ़ा-

Vipasana means insight. It is a simple practical process of mental purification through introspection and self conducted psychoanalysis. By observing oneself one becomes aware of the conditioned reactions and the prejudices that cover one’s mental vision, hiding reality and producing suffering. As the layers of inner tensions begin to peel off through vipassana, one learns to dissolve the negativeness of anger, fear, hatred, greed, jealousy and selfishness and manifest instead truly human qualities of compassion, tolerance, sympathy and humility and at the same time gain insight into the true nature and purpose of human existence.

लो फिर आ गया मधुर वसंत !
वायु में फैली मृदु सुवास पुष्पों ने बिखेरा स्मित हास
हृदयों में बौराया उजास
नयनों में छाया है विलास
पत्तों का रम्य नृत्य निरख
अमराई की मद गंध परख
भ्रमरों ने दीं कलियाँ चटख

बसंत की आहट सुनकर  कल रात को उन्होंने चिप्स बनाने के लिए आलू काट कर रखे थे पर सुबह धूप नदारद थी, इस समय बैठक में पंखे के नीचे सूख रहे हैं आलू चिप्स.

Jane Austen's “Sense and Sensibility”  is a very interesting novel. She was reading it since last 4-5 days and was fully engrossed in it. Marianne and Elinor both sisters are so loving but Elinor is more mature sometimes. She found Marianne nearer to her heart. Yesterday she could not open the diary because in the morning as soon as she finished her work, opened the book and at  afternoon book was with her and in the evening also… when she got some time, they were with her, Mrs Dash wood,Mrs Jennings all of those interesting people… Today at 8 o'clock the book is finished, it has a happy ending and so she is. After so many years she read a book with so eagerness. Tomorrow or on Monday perhaps will return the book and will get another book of Jane Austen. Today there is budget  in parliament, June is happy to here some reduction in tax rate.


Thursday, August 22, 2013

नाटक की रिहर्सल



दस बजे हैं, वर्षा है कि रुकने का नाम ही नहीं ले रही. आज सुबह समाचारों में सुना, आन्ध्र प्रदेश में लू से कुछ लोग मर गये, यहाँ उन्हें स्वेटर निकलने पड़ रहे हैं. दिल्ली में ओले पड़ते रहे पूरे बीस मिनट तक, सडक पर snow fall जैसा  दृश्य बन गया था प्रकृति के विभिन्न रूप एक साथ देखने को मिलते हैं भारत में. आज वह  लिखने में ध्यान केन्द्रित नहीं कर पा रही है, नन्हा भी यहीं है और एक के बाद एक सवाल पूछे जा रहा है, आलू इतने छोटे क्यों हैं ? इससे भी छोटे मिलते हैं ? कल शाम उसी परिचिता से बात हुई, वह दोपहर को तीन-चार बच्चों को लेकर आयेगी skit की प्रैक्टिस के लिए. केंद्र में बीजेपी के नेता अटल बिहारी वाजपेयी को राष्ट्रपति ने सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया है, सारे देश के लोगों की जो एक इच्छा थी कि एक बार बीजेपी को मौका मिलना ही चाहिए, पूरी हो गयी. असम विधान सभा में एजीपी की सरकार बनेगी, कहीं फिर से वह आतंक तारी न हो जाये जो ४-५ वर्ष पहले यहाँ छाया हुआ था.

आज सुबह वर्षा बहुत तेज हो रही थी जब बच्चे पढ़ने आये, children meet के कारण सुबह आते हैं आजकल, कल रात देर तक वह एक सवाल हल करती रही थी उनके लिये, पर उन्होंने वह स्वयं ही हल कर लिया था. नन्हा कम्प्यूटर क्लास से आकर खुश था, he is really enjoying this class. इस समय दोनों पिता-पुत्र क्लब गये हैं, वह बगीचे में काम कर रही थी. नैनी और उसके दो बच्चे भी उसके साथ बगीचे की सफाई कर रहे थे. बच्चे अपने घर की, घर में लगे आम, बेर के पेड़ों की, पिता की, नानी की बातें कर रहे थे, उन्हें सुनकर यही लगता है, उनका पहले का जीवन अच्छा बीता है, अब भी खुश रहते हैं ये लोग, कभी-कभी माँ परेशान रहती है जो स्वाभाविक है, पति ने दूसरी शादी कर ली है और वह तीन बच्चों को लेकर घर छोड़ आयी है. रोज सुबह ‘जागरण’ सुनने-देखने के बाद भी कभी-कभी वह भी अपने मन पर नियन्त्रण नहीं कर पाती है और न जाने क्या–क्या सोचने लगती है. गोयनका जी ठीक ही कहते हैं, यह मन अंदर से बड़ा बेचैन है, बड़ा अशांत है, कैसी-कैसी गांठें पड़ी हैं, कभी राग कभी द्वेष, कभी कामना के बंधन में जकड़ा न स्वयं सुखी होता है न दूसरों को सुखी करता है. यदि कोई प्रतिक्षण इस पर नजर न रखे तो मौका मिलते ही यह कहीं से कहीं भाग जाता है, मरकट राज की तरह इस डाल से उस डाल उछलता रहता है, कभी चोट खाता है तो कभी कोई मीठा फल मिल गया तो उछल पड़ता है. यह मन बड़ा ही चंचल है पर इसे बस में तो रखना ही होगा. अध्यात्म मार्ग पर चलने वाले को तो इसे साधना ही होगा.

मौसम आज भी वही है बादलों भरा. नन्हा कम्प्यूटर क्लास गया है, जून फील्ड गये हैं. उनके नाटक की रिहर्सल ठीक चल रही है पर अभी समूह गान के बारे में कुछ भी निश्चित नहीं है. बच्चों में भी उत्साह की कमी नहीं है. सुबह-सवेरे ‘जागरण’ में इतनी अच्छी बातें सुनीं कि उसका मन अभी तक उनमें डूबा हुआ है. बाहरी कर्मकांड को त्याग कर आन्तरिक प्रवृत्तियों की तरफ ध्यान देने की आवश्यकता है. मन जो सदा किसी न किसी जोड़-तोड़ में लगा रहता है उसको  स्थिर करने की, शांत चित्त होने की प्रक्रिया ही धर्म है. धर्म को आचरण में लाने का सबसे अच्छा उपाय है कि अपने मन पर नजर रखी जाये, सद्विचार हों, धार्मिकता स्वयंमेव आ जाएगी.

कल बंद था, उल्फा ने बंद कॉल किया था और इसीलिए बंद पूरी तरह सफल था. वे लोग अलबत्ता साइकिलों से घर से निकले, पर जिस कार्य के लिए गये वह  सफल नहीं हो पाया, अभी तक तो ऐसा लग रहा है जिस गाने का अभ्यास बच्चे कर रहे थे, वह शायद नहीं हो पायेगा. सुबह से शायद इसी कारण या मौसम के कारण वह कुछ झुंझला रही है पर उसी क्षण गोयनका जी के शब्द याद आ जाते हैं और मन को समझा लेती है. जून की फरमाइश पर साम्भर व नारियल चटनी बनाई है, इडली अभी बनानी है. दोपहर को एक जगह फिर रिहर्सल के लिए जाना है, कल की तरह सारी शाम भी उसी में जाएगी. उसने सोचा, अगले वर्ष से कम से कम वह तो इस रिहर्सल आदि से दूर ही रहेगी. इस हफ्ते खतों के जवाब भी नहीं दे सकी, और भी कई  काम इन पिछले दिनों नहीं हो पाए, और तो और इस वक्त भी मन में उन्हीं बातों की पुनरावृत्ति हो रही है, जो सुबह  से इस कार्यक्रम के सिलसिले में फोन पर की हैं. मन के आगे चारा है और जुगाली किये जा रहा है. परसों से कार्यक्रम शुरू हैं यह एक अच्छी बात है. इतवार को अंतिम दिन होगा, उस रात वे किसी नये सफर की कहानी सोचकर सोयेंगे. नन्हे का गृहकार्य जो बीच में ही रुक गया है शुरू हो जायेगा और शामों को उनका टीटी खेलना भी, लाइब्रेरी से किताबें बदलना और घर आकर एक साथ बैठकर कोई बोर्ड गेम खेलना भी. कितनी जल्दी इन्सान एक चीज से बोर हो जाता है. 










Thursday, July 4, 2013

आलू-प्याज की सब्जी


अभी कुछ देर पूर्व बिजली चली गयी, मौसम भी आज अपेक्षाकृत गर्म है, नन्हे का स्कूल २० तक बंद है, आज सोलह तारीख है. जून के जाते ही हमारा नया माली काम करने आ गया, चुपचाप सारे काम कर देता है. वह सोच रही थी कि कुछ देर नन्हे को पढ़ाने का वक्त मिल जायेगा पर उन्होंने अभी फोन करके एक मित्र को भोजन पर साथ लाने की बात कही, एक सब्जी और बनानी थी, पर घर में आलू-प्याज के आलावा कुछ भी नहीं, देखें जून को यह आलू-प्याज की सब्जी पसंद आती है अथवा नहीं. पिछले हफ्ते उसकी पुरानी पड़ोसिन लौट आई, इतवार तक उनके साथ ही वे व्यस्त रहे, सोमवार को जून का जन्मदिन था, नन्हे का स्कूल बाढ़ के कारण बंद चल रहा था, कल उन्होंने पन्द्रह अगस्त मनाया सुबह अपने घर में छोटी सी पार्टी, शाम को एक मित्र के यहाँ गये. अचानक उसे किचन याद आ गया और लिखना छोड़कर वह बाकी काम निपटाने चली गयी.

समाचारों में सुना फिरोजाबाद के पास कालिंदी व पुरुषोत्तम एक्सप्रेस में टक्कर से भयंकर दुर्घटना. उसे ट्रेनों के नाम पर आश्चर्य हुआ, कालिंदी यमुना का नाम है और पुरुषोत्तम कृष्ण का, जैसे यमुना का जल उमड़ आया था कृष्ण के चरण छूने, वैसे ही कहीं..दोनों की टक्कर..

मन एक गाय है जो ‘मैं’ के खूंटे से बंधी
एक संकुचित दायरे में अनवरत घूम रही है
दूर.. जहाँ तक दृष्टि जाती है
नीले पहाड़ों के नीचे
घाटियों में है चाँदी सी चमकती जल धारा
वह उस मीठे पानी की ठंडक महसूस करना चाहता है  
लेकिन अपने अहम् के दायरे में ‘मैं’ के दायरे में बंधे होना उसकी नियति है
उसके इर्दगिर्द की हरियाली सूख गयी है
ऊपर तपता हुआ सूरज है
और सुदूर.. मैदानों में ठंडी छाँव
पर उस छाँव तक पहुंच पाना कितना दुर्लभ है
और ‘मैं’ के खूंटे से बंधे रहना कितना सुलभ....

Yesterday night she was feeling so helpless. She could not sleep much and then she thought above poem. It shows the true state of her mind. Jun has more stable mind. He is so calm and she does,nt know why did she behave so badly. She must be above the mere myness . There are others also beyond me and true happiness one can get only when he/she forgets him/herself. She shall always remember this and she knew this yesterday also when she was furious for nothing.


सुबह की शुरुआत ‘जागरण’ के साथ हुई. अन्तर्मुखी होकर ही अपने अंदर परमात्मा से साक्षात्कार किया जा सकता है. प्रतिदिन आधा घंटा ध्यान का अभ्यास करना होगा. नन्हा आज बहुत दिनों के बाद स्कूल गया है, सो सुबह तैयार होने में नखरे कर रहा था, कहा, ‘अच्छा नहीं लग रहा है’, शायद उसने नूना को ऐसा कहते सुना होगा, बच्चे नकल करने में होशियार होते ही हैं. जून तभी कहते हैं वह उस पर गया है. आजकल वे नियमित खेलने क्लब जाते हैं, अच्छा लगता है, तन-मन दोनों शक्ति से भर जाते हैं.

Friday, March 22, 2013

अखरोट और मूंगफली




आज तो जून देहली में होंगे, कल वापस आना है, अब बहुत इंतजार हो गया, उसने सोचा, जल्दी से वे आ जाएँ, आज शाम से ही मन कैसा हो रहा है, इतने दिन गुजर गए पर अब कुछ घंटे गुजारना इतना मुश्किल लग रहा है. सुबह देर से उठे, नन्हे की छुट्टी थी, आज मूली के परांठे बनाये, जाने से पहले ढेर सारी सब्जियों के साथ एक किलो मूली भी रख गए थे वह, पर दो अभी भी शेष हैं. दोपहर को चने की दाल और सेम-आलू की सब्जी, नन्हे को पसंद है चने की दाल, इतने दिनों में तीन बार बनाई है और अब मन करता है तीन महीने तक नाम न ले. आलू खाते खाते भी...दरअसल बात यह है कि अब उसके बिना कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा, वैसे भी वह किस कदर ध्यान रखते थे उसका. दोपहर भर “डॉक्टरस्” पढ़ती रही, फिर गुजराती फिल्म देखी, शाम को भ्रमण और फिर स्क्रैम्बल, और अब जून के पास है या कहें वह उसके पास है. नन्हे ने उत्साह दिला-दिला कर आलू फ्राई तथा तीन परांठे बनवाये दोनों के लिए. अब वह ब्रश करने गया है, दोपहर से बल्कि सुबह से ही उसका मन कुछ क्रिएटिव वर्क करने का है, दोपहर को दफ्ती की एक मेज बनाई, कुछ उड़ाना चाहता है वह, लिफाफे में आग लगाकर उसे उड़ाना हो या गुब्बारा या पतंग, पर कुछ भी तो नहीं दे सकी वह उसे, अब जून ही आकर देखेंगे और उसके कई सवाल भी इकट्ठे हो गए हैं.

  ओह !...और आज जून ने उसे कितना रुलाया, सुबह जब उसके बॉस की पत्नी ने फोन किया तो वह एकदम से इतनी पजल्ड हो गयी कि...जैसे कोई फूले हुए गुब्बारे में से पिन चुभाकर यकायक सारी हवा निकाल दे या ऐसा कि मंजिल पर पहुँच कर पता चले, मंजिल तो अभी और दूर है. नतीजा आँसू.. नन्हा उसे समझा रहा था, उसने जब कहा, पापा भी बस तुम्हारे....तो बोला क्या किया है पापा ने ? पर उसे तो जून जानते ही हैं, क्या-क्या सोचने लगी कि उसे उनकी फ़िक्र नहीं है, कि वह अपना वायदा भूल गए हैं, याद नहीं रहा कि जाते  समय उसने कहा था, पन्द्रह को पक्का आ जाना. वह सोचने लगी कि जानबूझकर दिल्ली में रुक गए होंगे...दोपहर भर सिर में दर्द रहा, आँखों पर जून का रुमाल रखा, दवा ली. शाम को फिर फोन आया कि वह कोलकाता पहुँच चुके हैं, यानि उसे वह सब नहीं सोचना चाहिए था...सुबह उसकी असमिया सखी अपने बेटे को छोड़ने आई थी, पति के साथ तिनसुकिया जा रही थी, उन्होंने भी कहा, फ्लाईट मिस हो गयी होगी या टिकट कन्फर्म नहीं होगी. तो जून जानबूझकर नहीं रुके बल्कि रुकना पड़ा, उसे बहुत अफ़सोस हुआ अपनी सोच पर. लेकिन सुबह फोन पर पूरी बात बता दी होती तो...पर अब वह उसे करीब ही लग रहे हैं पहले की तुलना में...कोलकाता तो यहाँ से नजदीक है न ? नन्हे को शाम से जुकाम हो गया है, इतने दिनों तक उसे एक छींक भी नहीं आई पर आज दोनों..शाम को उसने “सूरज का सातवाँ घोड़ा” देखी, अच्छी है, शायद जून ने भी देखी हो, एक रात उन्हें और सपनों में मिलना होगा.

  सोमवार सुबह, इस समय उसका हृदय स्नेह से लबालब भर गया है जैसे बादलों में से झाँकते हुए सूर्य ने धरती को रोशनी से भर दिया हो. कल शाम जब वह आया तो उनका मिलना कितना शांत था, कल्पना में उसका स्वागत जिस तरह किया था उसे बिलकुल अलग...और नन्हा कितना खुश था, उत्साह से भरा-भरा..जून ने उन दोनों को हमेशा ही इतनी खुशी दी है ! अभी-अभी वह दफ्तर गए हैं, कार में बैठकर सिर हिलाकर विदा कहना, उसे अंदर तक छू गया और अंदर आकर वह यह डायरी खोलकर बैठ गयी है, उसकी अलमारी खुली है..दूसरे कमरों में भी उसके कल लाए सामान इधर-उधर बिखरे हैं..उसके कारण घर कितना भरा-भरा लग रहा है..एक-एक सामान सहेजते हुए वह याद आते रहेंगे...आते ही रहेंगे. कल रात को उसने पिछले कई दिनों की तरह पन्नों पर अपने दिल का हाल नहीं लिखा बल्कि जून के मन पर..प्रेम में यह कैसा जादू है जो उन दोनों को इतने करीब ले आया है..वे बारह-तेरह दिन बाद मिले पर भीतर कैसी सिहरन पैदा हो रही थी जैसे वे पहली बार मिले हों. कल सुबह और रविवारों की तरह ही थी, दोपहर को टीवी पर फिल्म देखी, उन की प्रतीक्षा में समय बिताना आसान हो गया था..शाम अभी हुई भी नहीं थी शायद साढ़े तीन बजे होंगे कि आ गए. इतने सारे उपहारों की साथ- अंगूर, अनार, रसभरी, दो तरह की गजक, खजूर, तिल की मीठा, मूंगफली, अखरोट, चिरौंजी, चने, उसके लिए गाउन का कपड़ा, नन्हे के लिए दस्ताने, चप्पल और न जाने क्या-क्या...पर अपने लिए तो उसने कुछ नहीं लिया न, और अभी नाश्ता करते समय उनका पीछे हुए खर्चे का हिसाब जानना भी कितना संयत था, डिप्लोमैटिक, वह हैं ही ऐसे. वह उसे सदा प्रेम करेगी..सदा...




Friday, February 15, 2013

साइकिल की सवारी



कल सुबह से लग रहा था कि कहीं कुछ गड़बड़ है, दोपहर को उपवास किया, फिर शाम को टिफिन में उबले आलू खा लिए कि कुछ तो खा लेना चाहिए और खेलने चली गयी, खाली पेट में आलू वात बढ़ाते हैं, यह पता ही नहीं था, गैस सिर पर चढ़ गयी और दर्द से फटने लगा अच्छा भला सिर. घर आकर वमन किया फिर एक घंटा आराम और तब जाकर सब ठीक हुआ. पूरे वक्त जून के साथ नन्हा उसका बहुत ख्याल रख रहा था. उसको हिंदी में पूरे नम्बर मिले हैं, अगले हफ्ते उसे हिंदी में समाचार बोलने हैं स्कूल की असेम्बली में. उन्हें साथ वाले घर में हो रही शादी में जाना था, जल्दी ही लौट आए वे. वहाँ का प्रबंध बहुत अच्छा था, न ज्यादा शोर न भीड़भाड़, दुल्हन बहुत छोटी लग रही थी बहुत सुंदर. कल उसका फैब्रिक पेंटिंग का काम पूर्ण हो गया, आज दोपहर को पहले पत्रिका पढ़ेगी, फिर न्यूजट्रैक का कैसेट देखेगी फिर थर्मोकोल पर काम शुरू करेगी वह. कल शाम जून ने बहुत दिनों के बाद कहा कि वह हरी साड़ी में अच्छी लग रही थी, उन्हें शिकायत थी कि वह सिर्फ कहीं जाने के लिए ही क्यों तैयार होती है, इसका अर्थ हुआ कि वह उसकी पोशाक आदि पर नजर रखते हैं.

“आदमी अगर जिन्दा रहे तो उसे सौ साल बाद भी खुशी मिल सकती है”, अभी-अभी बाल्मीकि रामायण में हनुमान के मिलने पर सीता के मुख से यह वाक्य पढा. यह बिलकुल ठीक है, हम थोड़ी सी परेशानी होने पर जीवन को व्यर्थ मानने लगते हैं लेकिन कहीं न कहीं खुशी होती है, जो हमें मिलने वाली है. जैसे आज वे खुश हैं, कल उसने गाजर का हलवा बनाया, लाल गाजरें यहाँ नहीं मिलती, नारंगी रंग का हलवा कुछ अलग सा लगता है. उन्होंने किचन में पेंट करवाया था, नई नैनी ने सूखने की प्रतीक्षा लिए बिना पानी डाल दिया, सारा पेंट उतर गया पर..अब इसे कुछ कहने से क्या लाभ. नन्हे के स्कूल जाना है, जून ने फोन पर कहा था, उसको क्लास कैप्टन ने कल मारा था, शाम को वह थोड़ा उदास था, पर सुबह बिलकुल ठीक था. फरवरी का आरम्भ हो गया है, आदर्श महीना है, न सर्दी न गर्मी..यानि वसंत का महीना. कल उसकी पड़ोसिन ने गुलाब की एक कटिंग दी, पीला, लाल व नारंगी रंग का मिलाजुला रंग है उसका, माली ने शाम को लगा दी थी, इस मौसम में तो शायद ही खिले लेकिन अगले मौसम में जरूर फूल आयेगा. कल की तरह आज भी उसने साड़ी पहनी है, अच्छा लगता है हल्का-हल्का, खुला-खुला सा. जून को पसंद भी है, और उन्हें क्या पसंद है क्या नहीं इसका तो ख्याल उसे रखना है न...और इससे उसे खुशी मिलती है, और खुशी इंसान की पहली जरूरत है.

आज नैनी जल्दी आ गयी है, खाना भी बन गया है, इसका अर्थ गाड़ी पटरी पर आ रही है, पिछले दिनों ग्यारह बज जाते थे और काम बिखरा रह जाता था. कल वे स्कूल गए थे, नन्हे की क्लास टीचर और साइंस टीचर से मिले. आज सुबह नन्हा बहुत अच्छे मूड में था, खिला- खिला और ताजा सा. टेप रिकार्डर पर ‘मिली’ फिल्म का गाना आ रहा है, छोटे भाई का उपहार उनकी शादी की सालगिरह पर. कल भी परसों की तरह उसने साइकिल चलाई, बहुत अच्छा लगता है हवा को काटते हुए गति से आगे बढ़ना. लगभग दस सालों के बाद वह साइकिल चला रही है. कितना अजीब लगता है सोचकर कि बचपन कितना पीछे छूट गया है. याद करो तो लगता है कल की ही तो बात है. नन्हा कल पिछले या उससे पिछले साल की गर्मियों को याद कर रहा था कि कैसे एक आम के लिए वह गुस्सा कर रही थी, फिर जून और भी नाराज हो गए थे, उसकी याददाश्त बहुत तेज है. उसे कहानी सुनाने की प्रतियोगिता में द्वितीय पुरस्कार मिला, उदास था कि प्रथम क्यों नहीं मिला.