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Sunday, August 3, 2014

मीठे अमरूदों वाला पेड़


It is raining since last night so everything is looking fresh and washed. She went to their back yard and then outside through back door to fetch two java flowers(gurhal) for putting in front of God’s image, she burned a essence stick and prayed for two minutes. She always asks him to be with her, because then only she is at ease. Yesterday she went to monthly meeting of ladies club with neighbor, opening chorus was not so good but other progarmmes were very good, inspiring and enjoyable. Food was horrible she could not sleep properly after eating such oily and spicy food though she ate only small portion of it. In the morning news they again heard about one more railway  bomb blast in Assam. Terrorist have no brain, they can not  understand the futility of such cruel acts, they destroy their own property and kill their own people. They do not understand that this is their own state and others are not paying for trains, buses and bridges, which they intend to destroy. Life is full of worries but they should not focus only on the circle of their concern, those things which they  can not change but on those which they can change ie on circle of their influence. With their honest effort they can make this world more beautiful.

आज भी वर्षा जारी है, किचन में ट्यूब लाइट लगाने का कार्य चल रहा है. बंगाली सखी ने रात को खाने पर बुलाया है. आज उसके ‘उनका’ जन्मदिन है. नैनी को उसने उसके नवजात नाती के लिए एक ड्रेस दी जो कल जून लाये थे, उसने विशेष प्रतिक्रिया नहीं दिखाई. वह मौन रहकर अपना काम करती रहती है, मेहनती है, जिन्दगी के कई पाठ उसने स्वयं ही सीख लिए हैं, अच्छा है हमेशा समभाव में रहती है. आज उसके सुबह के काम में थोड़ा खलल पड़ा है, न अभी खाना बना सकती है क्यों कि किचन में काम चल रहा है न ही व्यायाम या संगीत का अभ्यास, बेहतर होगा दोपहर के कार्य अभी कर लिए जाएँ और अभी के दोपहर को. आज सुबह पहलगाम में उग्रवादियों द्वारा तीर्थ यात्रियों की हत्या का समाचार सुना, हिजबुल मुजाहिदीन के द्वारा युद्ध बंदी की घोषणा के बाद अन्य गुट ज्यादा सक्रिय हो गये हैं.

जितनी देर कोई इच्छा के अधीन रहता है अपनी शक्ति का अपव्यय करता रहता है, चाहे इच्छा छोटी हो अथवा बड़ी, बंधन का कारण तो होती ही है. इसका अनुभव उसे आज कुछ क्षण पूर्व ही हुआ. एक कामना मन में जगी और फिर उसे पूर्ण करने की खटपट, मन जैसे अस्थिर हो उठा और मन की झलक बाहरी कार्यकलापों पर साफ दिखाई देने लगी. सारे काम जैसे मशीनी रूप से हो रहे थे क्योंकि मन तो उस इच्छा और उसकी पूर्ति के बारे में सोच रहा था. फिर समाचार सुनने लगी कश्मीर में निर्दोष लोगों की हत्या और उसके विरोध के समाचार सुनते-सुनते मन जैसे चौंक कर जगा, लोग मर रहे हैं, पीड़ित हैं, तकलीफ में हैं और वे अपनी ही दुनिया में व्यस्त हैं. जिन्दगी बहुत कुछ झेलती है और झेलते-झेलते उसकी संवेदनशीलता घटती चली जाती है. लेकिन साधक इस बात को ऐसे नहीं लेता वह तो मात्र अपने ईश्वर पर भरोसा रखता है, वह उसी से बल पाता है. आज उसे उसे बैंक जाना है, स्कूल में जो काम किया था अंतिम महीने की पे सभी को मिलनी है, उसे हस्ताक्षर करने हैं. आज सुबह नन्हे ने फिर उठने में नखरे किये पर समय से तैयार हो गया. कल सखी के यहाँ डिनर अच्छा रहा, कम मिर्च मसाले का भोजन और तवा रोटी. उनके अमरूद के वृक्ष ने इस वर्ष भी मीठे फलों का उपहार दिया है. तीन सखियों को दे चुकी है, अभी कुछ लोगों को और देने हैं.  


  

Wednesday, November 20, 2013

द लॉन मोअर मैन


आज सात तारीख है, उसने सोचा,  जून के आने पर उसे ‘विश’ करना है. सात तारीख आने पर कुछ याद दिला देती है. चाहे किसी भी माह की हो. आज यूँ भी बड़े दिनों बाद धूप निकली है, पर ठंडी हवा भी बह रही है. कल शाम तापमान १० डिग्री था, ढेर सारे वस्त्र पहन कर वे टहलने गये, उसका काम आज जल्दी हो गया है, सोचा वह किताब पढ़ेगी जो कल लाइब्रेरी के चिल्ड्रेन सेक्शन से लायी है, “Little Woman”, नन्हे को सुनाने के लिए अच्छी रहेगी. कल फिर उसने सोने में सवा दस बजा दिए, वह दीर्घ सूत्री है, किसी काम को जल्दी से समाप्त नहीं करता, आराम-आराम से करता है, शायद अपने चाचा पर गया है, जिसे वह ठीक से पहचानता भी नहीं. कल मंझले भाई का पत्र बहुत दिनों बाद आया, लिखता है ‘’ग्रह दशा कुछ ठीक नहीं चल रही है, इन्सान को अपने अच्छे-बुरे कर्मों का फल यहीं भोगना पड़ता है’’.

चलो उठ खड़े हों, झाड़ें सिलवटों को
मन के कैनवास को फैला लें क्षितिज तक
प्यार के रंगों से फिर कोई खूबसूरत सोच रंग डालें
बांटे आपस में हर शै जो अपनी हो
चलो आँखें बंद करें, गहरे उतर जाएँ
जानें पर्त दर पर्त अंतर्मन को
आत्मशक्तियाँ जागृत होकर एक हो जाएँ
अपना छोटे से छोटा सुख भी साझा हो जाये
चलो कह दें, सुना दें मन की हर उलझन
समझ लें, गिन लें दिल की हर धडकन
अपना सब कुछ सौंप कर निश्चिंत हो जाएँ
विश्वास का अमृत पियें
चलो करीब आयें, जश्न मनाएं
मैं और तुम से ‘हम’ होने की याद में
कोई गीत गुनगुनाएं
खुली आँखों से सपने देखें
मौसम की मस्ती में डूबे उतरायें !

परसों सुबह नन्हा घर पर था, दुसरे शनिवार को उसका स्कूल बंद रहता है. शाम को उसने चाट बनाई महीनों अथवा वर्षों बाद. वर्षा हो रही थी, सो टहलने भी नहीं जा सके, घर पर ही कैसेट लगाकर थिरकन कम व्यायाम किया. अच्छा लगता है गाने की या सिर्फ संगीत की लय पर शरीर को ढीला छोड़ देना. कल सुबह कड़कती ठंड में इतवार के सारे कार्य किये, शाम को क्लब में फ्लावर शो था, वे देखने गये. फिर एक मित्र के यहाँ, उसकी सखी ने बहुत स्वादिष्ट समोसे खिलाये, घर पर  ही बनाये थे, उनके बेटे का रोना भी बदस्तूर हुआ, वह अपने हाथ से सिले सूट के बारे में बताने का लोभ संवरण नहीं कर पाई, कभी-कभी ऐसी बचकानी हरकतें कर ही बैठती है. पर कल एक और अच्छी बात हुई भारत का जिम्बाब्वे को हरा कर फाइनल में पहुंच जाना. हफ्तों बाद कल ‘मालाबार हिल’ भी देखा. सबा ने शिवम को कैसे अपने दिल की बात कही होगी और अब उसके भाई का क्रोध, सुमन लेकिन अच्छी लग रही थी. आज सुबह धूप निकली है, वह यहीं गुलाब के पौधों के पास बैठी है, पड़ोसिन से बात हुई, वह तिनसुकिया से सिल्क की दो साड़ियाँ लायी है, खुश है, लेकिन साड़ियों से मिलने वाली ख़ुशी कितनी क्षणिक होती है न. सुबह गोयनका जी ने बताया, हमारे मन की ऊपरी पर्त भले ही स्वच्छ, साफ दिखाई दे भीतर राग-द्वेष , लोभ, क्रोध का विशाल साम्राज्य है, परत दर परत उसे उघाड़ते जाना है और साफ करते जाना है.

‘The Lawnmower man’ यही नाम था, कल शाम क्लब में दिखाई गयी फिल्म का, जो रोमांचक थी, अद्भुत थी और कुछ कुछ डरावनी भी. एक सीधा-सादा आदमी अपने दिमाग की छुपी ताकत को पाकर कैसे शक्तिशाली बन जाता है. कम्प्यूटर की शक्ति का कमाल, विभिन्न रंगों से अनोखे आकार बनते हैं पर्दे पर, एक के बाद एक सुंदर चित्र बनते हैं. इंसानी कल्पना की उड़ान की कोई सीमा नहीं, हर बार ऐसा कुछ देखने पर बेहोशी की अवस्था में हुआ उसका अनुभव याद आ जाता है. नीले रंग, अजीब सी आवाजें और कोई लक्ष्य पूरा करने की चाह...मानव मस्तिष्क में क्या-क्या रहस्य हैं, अभी भी मानव जान नहीं पाए हैं. नन्हे को कल स्कूल में कबड्डी खेलते वक्त चोट लग गयी, कहता है अब कभी जूते उतार कर कबड्डी नहीं खेलेगा. अभी-अभी उसने खिड़की से झांक कर देखा, बादलों को परे कर सूरज निकल आया है जिसमें फ्लाक्स और गुलाब के फूलों पर गिरी बूंदें चमक रही हैं.





Thursday, September 5, 2013

अटलांटा ओलम्पिक


कल वे क्लब में English फिल्म  Rising sun देखने गये, उसे ज्यादा अच्छी नहीं लगी, जबकि जून को रोचक लगी, पसंद अपनी-अपनी. शनिवार है आज, परसों से नन्हे के इम्तहान हैं. अभी जून के आने में एक घंटे का समय है, उसने सोचा इसका सदुपयोग करना चाहिए कोई कविता लिखकर या ध्यान लगाकर, कोई पत्रिका या पुस्तक पढ़ना तो बहुत आसान कार्य होगा जो बाद में भी किया जा सकता है.

कल उनके मित्र ट्रेन से आने वाले थे, पर कामरूप जिला बंद है, ट्रेन लेट है सो वे कल आयेंगे. इन आए दिन के ‘बंद’ का और कुछ असर होता है या नहीं, लोगों को परेशानी अवश्य होती है. कल दोनों घरों को पत्र भेज दिए और वे दोनों कविताएँ भी जो जून को बहुत अच्छी लगी थीं. उनके बाएं तरफ वाली पड़ोसिन किसी से फोन पर बात कर रही अहै उसके हंसने और बातों की आवाज यहाँ तक आ रही है, वह तेज तो बोलती ही है पर सन्नाटा भी तो है.

इस वक्त भी वर्षा हो रही है, पिछले कई दिनों लगातार वर्षा की टिप-टिप कानों में सुनते-सुनते अब तो इसका अभ्यास हो गया है, जैसे ईश्वर नल खुला छोड़कर भूल गये हों. नन्हा शुक्रवार को स्कूल नहीं गया, कल उसके दो पेपर थे, शाम को उसके दोस्तों को बुलाकर छोटी सी पार्टी की उसके जन्मदिन की. सभी बच्चों को बहुत अच्छा लगा. कितने भोले और कितना साफ़ दिल होते हैं बच्चे, निष्पाप, निर्द्वन्द्व, बड़े उनकी तुलना में कभी-कभी छोटे लगने लगते हैं, सारी उम्र बच्चे ही क्यों नहीं बने रह पाते. अगर बड़े भी उनकी तरह बातों के पीछे छिपे अर्थ न निकालें, जो जैसा है उसे वैसा ही लें, तो कितने ही उहापोहों से बच जाएँ, चीजों को सही परिप्रेक्ष्य में देखने की आदत मात्र से. कल एक जापानी उपन्यास पढ़ा, अच्छा था, इतना रोचक की एक बार कोई हाथ में ले तो छोड़ने का मन ही न हो. जून नन्हे के लिए एक पत्रिका लाये हैं wisdom काफी ज्ञान है उसमें शुद्ध खालिस जानकारी.

आज से एटलांटा में ओलम्पिक खेलों का शुभारम्भ हो रहा है, यूँ वहाँ के समय के अनुसार १९ जुलाई यानि कल से खेल आरम्भ हुए अर्थात इस समय वहाँ कल शाम के साढ़े चार बज रहे होंगे. उसने उद्घाटन समारोह देखकर अच्छा लगा.

सिमट आया है सारा विश्व
मानो एक प्रांगण में आज
निहारते स्वप्न नगरी करोड़ों उत्सुक नयन
थिरकते एक लय में बद्ध नर्तक
लहराते इन्द्रधनुष रंगों के वस्त्र
धरा से गगन तक गून्जतीं ध्वनियाँ
सजतीं रौशनी की लड़ियाँ
और दमकते चक्र
अनुपम ! अद्भुत !
जैसे परीलोक उतर आया हो
एकता के सूत्र में पिरोता है पांच महाद्वीपों को
यह ओलम्पिक का महाकुम्भ !


इन्सान का दिल यानि मन दुनिया की सबसे अनोखी वस्तु है. मन में इतने तरह के विचार आते हैं, छोटे, बड़े, सुंदर, असुन्दर और कोई-कोई तो इतने बेतुके कि..मन खुद भी शर्मा जाये और यही वह मन है जिसने अपने विचारों की नवीनता से संसार को कई खोजें प्रदान कीं, कितनी पुस्तकें, कितने सुंदर चित्र और कलाकृतियाँ, कोमल भावनाएं भी इसी मन में अंकुरित होती हैं और कठोर निर्णय भी, कटु भाषा भी इसी मन के धरातल पर उत्पन्न होती है, और वह जो अक्सर छोटी-छोटी बातों पर झुंझला उठती है उसके मन की कमजोरी की निशानी है. आज सुबह सुना, कार्य विचार की निरन्तरता का परिणाम है, जैसे हमारे विचार होंगे हम वैसा ही कार्य करेंगे और वैसा ही स्वयं को पाएंगे. कल शाम उसने अपनी एक सखी के साथ क्लब में स्विमिंग पूल के किनारे ठंडे शांत वातावरण में हल्का-फुलका व्यायाम किया, शाम का वक्त, पानी बहुत स्वच्छ था और वर्षा होकर थमी ही थी.    



Wednesday, July 24, 2013

बैड नहीं गुड मिन्टन

अभी-अभी बैडमिन्टन का एक थकाने वाला गेम खेलकर प्रसन्नचित वह घर वापस आई है, जून सवा छह तक आएंगे, घर कितना शांत है, केवल घड़ी की टिक-टिक सुनाई दे रही है. नन्हा पढ़ाई में व्यस्त है सो लिखने का यह सर्वोत्तम समय है कम से कम उसके लिए, वरना लिखने वाले तो ट्रेन में भी लिख लेते हैं. दरवाजा खोलते समय नन्हे ने कहा, नैनी की बेटी आयी थी, जरुर कोई छोटी-मोटी वस्तु मांगने आई होगी, वह कुछ देर बाद पूछेगी, अभी तो साँस तेज चल रही है, आते वक्त सड़क खाली थी तो कुछ दूर तक दौड़ कर आयी, उसे अच्छा लगता है ठंडी हवा को चेहरे पर महसूस करते हुए हल्के धुंधलके में अकेले चल कर आना, पीपल की पत्तियों से झांकता चाँद (पूर्णिमा का लगता है) देखकर मन में एक कविता जग उठी. अभी पौने छह बजे हैं, बाद में वे सब एक मित्र परिवार से मिलने जायेंगे. यहाँ बैठक के इस कोने में मच्छर मोजों के ऊपर से पैरों में काट रहे हैं, उसे आश्चर्य हुआ, इतनी ठंड में भी मच्छर सही-सलामत हैं.
अभी-अभी वह घर लौटी है. सुबह के व्यायाम के बाद उसे जैसा अच्छा महसूस होता है, वैसा ही खेल कर भी. जून ने आज उसे एक गाइड दी है ‘अक्षर’, जो कम्प्यूटर पर हिंदी में काम करने में सहायक है, आज से वह इसे पढ़ेगी और शनि व रविवार को अभ्यास करेगी. जहाँ चाह वहाँ राह..कितनी बार और कितने तरीकों से ईश्वर उसकी सहायता करते हैं, वह उनकी आभारी है.
आज शनिवार है, सुबह नींद अपने आप ही जल्दी खुल गयी, नन्हे का अवकाश है. आंवले का मुरब्बा बनाने का दूसरा चरण शुरू हुआ. शाम को जून के दफ्तर गये, कम्प्यूटर पर हिंदी में कुछ पंक्तियाँ लिखीं और एक गेम खेला. बाजार से गाजर-पालक के बीज और फ्लौस्क के बीज लिए, जो कल सुबह लगा देंगे. कल शाम पंजाबी दीदी के पति उनका एक खत और कुछ पकवान लेकर आये, उन्होंने रिटायर्मेंट के बाद एक कम्पनी ज्वाइन कर ली है, उसी के सिलसिले में आए थे.

अभी कुछ देर पूर्व ही वे सांध्य भ्रमण से वापस आए हैं और उसे रास्ते भर यह अहसास होता रहा, रोज वह वास्तव में अकेली होती थी आज साथ होते हुए भी अकेली है, जून चुपचाप रहे सारे रास्ते, शायद किसी चिंतन में व्यस्त, और संवाद हीनता की यह स्थिति भी शायद वही महसूस कर रही है, अन्यथा वह इसे दूर करने का प्रयास तो करते ही. किसी ने सच कहा है डायरी भी एक मित्र के समान है यदि किसी के पास कोई ऐसा नहीं जिससे वह दिल की बात कह सके तो इसके पन्नों को ही हाले-दिल सुना दे, सब कुछ सुनकर वे दिल का भार तो हल्का कर ही देगें. 

Tuesday, March 19, 2013

लटपटे नूडल्स



हैप्पी सेवेंथ...अभी कुछ देर पूर्व जून ने कहा, ठीक एक माह बाद आज के ही दिन उनके विवाह की वर्षगाँठ है. आज सुबह नन्हे के लिए ऊन की टोपी बनाने में लगी रही. कल शाम वह काफी देर तक पढ़ता रहा, घर जाने से उसका काफी कोर्स छूट गया था. आज जून धनिया व मूली के बीज लाए हैं, हरी मिर्च की पौध भी. शाम को सभी लगाने हैं. कल तीन खत लिखे, जो मन में आया, सभी  लिखती गयी, दीदी को भी, माँ-पिता को भी...कब तक कोई चेहरे पर मुखौटा लगाये रह सकता है? सितम्बर का न्यूज़ ट्रैक देखा, कुछ खास नहीं लगा, जुही चावला का इंटरव्यू है, पता नहीं ये सारी अभिनेत्रियाँ एक जैसी भाषा क्यों बोलती हैं, क्या बोल रही हैं शायद इंटरव्यूअर भी नहीं समझ पाती होंगी, लेकिन ‘केएसकेटी’ देखने का मन हो गया है इंटरव्यू सुनकर. नए साल के कार्ड भेजने हैं सभी को फुफेरी बहन को भी और मामी जी को भी.

  अभी-अभी उसने दैनिक व्यायाम किया, तन के साथ मन भी हल्का हो गया, कुछ देर बगीचे में भी काम किया था उसके पहले, गाजर के बीज डलवाए और फ्रेंच बीन्स तोड़े. गुलदाउदी पूरे शबाब में खिल रहा है और गेंदा भी. उन्होंने नया माली रखा है, पता नहीं यह भी कब तक टिकेगा. सुबह नन्हे के लिए नाश्ते में नूडल्स बनाने का प्रयास किया, पर ज्यादा गीले हो गए, मेसी टाइप, पर नन्हा इतना समझदार और प्यारा है कि उसने जरा भी मुंह नहीं बनाया और उसे ही खुशी से खा लिया. दोपहर को उसका स्कूल का चार्ट बनाकर रखेगी, रंग वह आकर भरेगा.

  कल दोपहर जून को जो पहले से ही उखड़े-उखड़े थे, उसने यूँ ही उदास कर दिया, उसने मन ही मन उनसे क्षमा मांगी. कल शाम को उसकी छात्रा ने उसे खुशी का अनुपम उपहार दिया, उसके कारण उसे हमेशा अनजानी, अनसोची खुशियाँ मिलती रही हैं, वह सचमुच प्रिया है. उसने सोचा उसे नए साल का कार्ड अवश्य भेजेगी. कल जब उसने बताया तो सन अठासी की पत्रिका निकल कर अपनी कविता पढ़ी-  
खोल दो मन के सब के दरवाजे, खुली हवाएं आने दो !
बहुत सुकून मिला पढ़कर, प्रिंसिपल साहब ने तारीफ की इसके भावों की.. उसने मन ही मन उसे धन्यवाद दिया. अभी कुछ देर पूर्व उसने एक-एक कर दो सखियों को फोन किया, सम्बन्ध अपनी सुविधानुसार निभाना चाहते हैं आजकल सभी लोग, दूसरों के लिए किसी स्नेह या आत्मीयता के कारण नहीं. रिश्ते अपनी जरूरत के अनुसार बनाये या बिगाड़े जाते हैं. लेकिन इस पर अफ़सोस करने की कोई बात नहीं क्योंकि यह कोई नई बात तो नहीं...अब तो मन इतना कठोर हो चुका है कि सब कुछ आसानी से सह लेता है. इससे तो अच्छा है दोस्त बनाएँ हम अपने विचारों को..किताबों को और फूलों को जो बदले में अनादर तो नहीं करते हमारे स्नेह का. उसने देखा, सवा दस हो चुके हैं, अभी कई कार्य शेष हैं, सो मन की पीड़ा इन्हीं पन्नों में छोड़कर अब शेष कार्यों में लगने चली गयी.

  आज से नन्हे की छमाही परीक्षाएं आरम्भ हो रही हैं. आज हिंदी का पेपर है. उसके लिए अंग्रेजी का पेपर बना कर रखेगी जो वह आकर हल करेगा. परसों उसकी नैनी लक्ष्मी चली जायेगी, फिर कितनी मुश्किल होगी..एक लाभ होगा उसकी कमर जो फैलती जा रही है थोड़ी तो कम होगी कुछ काम करने से. कल एक बच्ची के जन्मदिन की पार्टी में गए थे वे, इतने लोग थे कि बैठने की जगह नहीं मिल पा रही थी कुछ लोगों को. आज खतों का दिन भी है पर पिछले हफ्ते एक भी खत नहीं आया, सो अगले हफ्ते ही लिखेगी नए साल की शुभकामनाओं के साथ.

  अभी कुछ देर पूर्व पुरानी पड़ोसिन से बात की और अब इस बात पर पछता रही है कि व्यर्थ ही लेडीज क्लब के ‘मेहँदी’ कार्यक्रम की आलोचना की, सचमुच कितनी आसान होती है आलोचना लेकिन प्रशंसा करना भी उतना ही आसान है उसके लिए यदि बात उसके मन की हो, चलो, इस बात को यहीं छोड़ते हैं, उसने सोचा. शाम को क्लब जाना है, क्रिसमस ईव है, बचपन में कितने गीत गाते थे वे ईसामसीह के बारे में. आज भी कई दिन बाद लिख रही है, नन्हा पास ही बैठा है उसे काम दिया है, पर वह हर एक मिनट में कुछ पूछ लेता है. उसने सोचा इन छुट्टियों में उसे कोर्स की पुस्तकों के अलावा कुछ पढ़ाएगी, पर इधर-उधर के कामों में ही मन इतना थक जाता है कि...फिर भी कुछ समय तो निकालना ही चाहिए. कल जून वह कार्ड भी ले आए जो उस छात्रा को भेजना है. पिछले हफ्ते सिर्फ मंझले भाई का एक पत्र आया था. कभी वे दिन भी थे जब लिखने से सुकून मिलता था पर आज इस वक्त कुछ जम नहीं रहा है यूँ कलम चलाना, और ऐसा पहले भी हुआ है, हो सकता है पहले यही बेचैनी उसे भाती हो.






Monday, November 19, 2012

आइसक्रीम वाला सपना



पड़ोसियों के यहाँ कल पार्टी में ज्यादा खाना नहीं लगा, थोड़ा बच गया है और वे चाहते हैं कि हम उन्हें कहें, कोई बात नहीं हम खा लेंगे..कैसी अनुचित अपेक्षा..बासी खाना..कल शाम को जून ने ऐसा ही कुछ कहा था, ऐसे ही पड़ोसियों के सम्बन्ध खराब होते हैं, अगर उन्होंने रात को ही हमें बुलाया होता.. छोडो इन बातों को, उसने खुद से कहा. जून आज दोपहर को घर नहीं आ रहे हैं, फील्ड गए हैं. आज सफाई कर्मचारी देर से आया सो वह व्यायाम नहीं कर सकी, अक्सर उसका व्यायाम किसी न किसी कारण से छूट ही जाता है..कल वे एक सिंधी परिवार के यहाँ गए. आज जून यदि समय पर आए तो शाम को वे कहीं जा सकते हैं.

पहली दिसम्बर..यानि बड़े भाई का जन्मदिन..आने के बाद उसने खत लिखा था..छोटे भाई को छोडकर किसी ने भी तो जवाब नहीं दिया,,,,खुश रहें सभी.  कुछ ही दिन में वह सभी को नए वर्ष के कार्ड भेजेगी. उसने एक सूची बनायी. आज मौसम कितना ठंडा है, कल शाम से ही वर्षा हो रही है. जून का दफ्तर कल बंद हो गया आसाम बंद के कारण. नन्हे का स्कूल तो कल बंद था ही, परीक्षायें आने वाली हैं, उसने उसे पढ़ने के लिए कहा.

एक नए सप्ताह की शुरुआत..मौसम तो अच्छा है खिला-खिला और उसका मन भी. दस बजे थे. घंटी बजी, उसे लगा शायद धोबी आया है, पर इलेक्ट्रीशियन था टेबल लैम्प का स्विच ठीक करने आए थे. कल उसकी असमिया सखी आयी थी परिवार सहित, उन्होंने खाने पर बुलाया था, वे लोग नए मकान में जा रहे हैं, बड़ा है, लॉन भी है. अच्छा घर है. कल वे बाजार से लौटते समय देखकर आए. किसी का पत्र नहीं आया, उसने सोचा वह बीस दिसम्बर तक प्रतीक्षा करेगी, फिर अपने हाथ से बनाये कार्ड्स भेजेगी. जून न्यूजट्रैक के दो कैसेट लाए हैं, जम्मूकश्मीर के शरणार्थियों पर कार्यक्रम देखकर बहुत खराब लगा. सरकार कुछ करती क्यों नहीं, असम में राष्ट्रपति शासन है तो क्या कश्मीर में..वहाँ पर इतना जुल्म क्यों..और बेनजीर भुट्टो पहले मित्रता की बातें करती थीं, पर उनके ये भड़काने वाले भाषण..

छह दिसम्बर यानि अयोध्या में विश्व हिन्दूपरिषद तथा बीजेपी द्वारा कार सेवा. जून आजकल तलप में हैं, एक हफ्ते बाद वापस आएंगे, शाम को फिर से फोन करेंगे. वह लिख रही थी कि द्वार पर एक गरीब औरत आयी कुछ मांगने, उसे पैसे देकर आयी ही थी कि फिर घंटी बजी, इस बार धोबी था और वह गया भी नहीं था कि पडोसिन आ गयी सरसों का साग लेकर जिसमें पालक भी मिलायी गयी थी और थोड़ासा खट्टा दही. अच्छा बना था. कल दोपहर वह  नन्हे को लेकर अपनी दूर की रिश्तेदार उसी पंजाबी परिचिता के यहाँ गयी थी. वहाँ पहली बार महाजोंग का खेल सीखा, बहुत रोचक खेल है. उन्होंने एक बात कही कि नन्हे को किसी भाई या बहन की जरूरत है..और उसे भी लगता है कि उनकी बात ठीक है, जून के आने पर वह  उनसे कहेगी जरूर.

आज अभी तक जून का फोन नहीं आया, उसने मन ही मन उसे शुभकामना भेजी. उसके न रहने पर रात को देर से नींद आयी सो सुबह देर से उठी, जल्दी जल्दी नन्हे को तैयार करके भेजा, अब कल-परसों उसका स्कूल बंद है, सोमवार को इंग्लिश का पेपर है. उसे फिर से कल की बात याद आ गयी नन्हे का साथी.. कल शाम उसकी दो परिचित महिलाएं आयीं, एक बच्चा भी साथ था, नन्हा बहुत खुश था. बच्चे एकदूसरे की बात कैसे समझ लेते हैं बिन कहे ही..
आज सुबह उसकी नींद खुल गयी सोनू की हँसी की आवाज से, वह सपने में हँस रहा था. उठा तो कहने लगा मेरा सपना नोट कर लीजिए...जिससे पापा पढ़ सकें-

“ मैं और एक बच्चा जा रहे थे, एक आइसक्रीमवाला और एक किताब वाला मिला. तब तक आइसक्रीम वाले ने अपनी दुकान खोल ली तो मैं उसके पास चला गया. फिर मैंने उसे एक लकड़ी दी कि वह आइसक्रीम उस पर लगाकर दे तो उसने कहा कि नहीं दूँगा. फिर मैंने कहा कि बना कर दो, फिर उसने नहीं बनाया तो उसी ने एक आइसक्रीम को मेरे चेहरे पर लगा दिया फिर मैं खूब हँसने लगा.”  

Monday, August 13, 2012

राजकपूर की तीसरी कसम



कल व परसों दोनों दिन नन्हा जल्दी उठ गया सुबह उनके साथ ही, आज अभी तक सोया है सो उसने डायरी उठाई है, स्नान-ध्यान तो हो गया पर लगता है कल की तरह आज भी नैनी नहीं आयेगी, कल दोपहर वह जब कपड़े व बर्तन धोकर लेटी तो कैसा अजीब सा सुख महसूस हो रहा था, मेहनत करने का सुख. कल सुबह उस उड़िया लड़की की दोनों बहनें व उसकी माँ उनके घर आयीं थीं काफ़ी देर बैठी रहीं, सो सुबह वह ज्यादा कार्य नहीं कर पायी. उन्हें मकई पिसवानी थी व उसकी असमिया मित्र को जीरा व चटनी. शाम को उसकी एक पंजाबी परिचिता मिलने आयी वह तीन-चार महीनों के लए घर जा रही है. उसका बीएड का फार्म अभी तक आया नहीं है. पिछले तीन दिनों से मौसम बेहद गर्म है.
नैनी आज भी नहीं आयी और अब उसके आने की आशा भी नहीं है, वह स्वयं काम कर तो लेती है फिर क्या जरूरत है नौकरानी रखने की. साथ ही व्यायाम भी हो जाता है. इस समय सवा नौ बजे हैं, नन्हा पड़ोस में खेलने गया है. ट्रांजिस्टर पर गाना आ रहा है - भीगा भीगा है समां...कभी वक्त था जब कि इस तरह के गीत सुनकर ख्यालों में जून घूम जाता था पर अब ऐसा नहीं होता. उसने सोचा वह आज से उसका ज्यादा ध्यान रखेगी, प्यार तो मन में होता ही है पर उसका प्रदर्शन नहीं होता, जो उतना ही जरूरी है. कल महान अभिनेता राजकपूर का देहांत हो गया एक महीना कष्ट झेलने के बाद. रात को उनकी फिल्म दिखायी गयी थी, तीसरी कसम, पर यहाँ बिजली ही नहीं थी, पता नहीं कब आयी वे तो सो गए थे.
कल नन्हे के मित्र का जन्मदिन था, बड़ी पार्टी थी, उनके यहाँ एक छोटी लड़की है जो छोटे-मोटे काम कर देती है व बच्चे पर नजर रखती है, वह शायद उसे असमिया सिखा देगी, उसने सोचा. कल जाकर उसे छोटी बहन व देवर के भेजे जन्मदिन के बधाई कार्ड मिले डाक विभाग की मेहरबानी से. बहुत खुशी हुई. इसी तरह उसका फार्म भी कहीं अटका होगा, भर कर भेजने की अंतिम तिथि भी नजदीक आती जा रही है. पता नहीं क्या होगा, इंसान जो कुछ सोचता है वह पूरा तो नहीं हो जाता.फिर बात वहीं आकर अटक जाती है कि जो ईश्वर को मंजूर होगा वही होगा. नन्हा अभी तक सो रहा है उसने सोचा उसके उठने से पहले ही भोजन बना लेगी.








Tuesday, August 7, 2012

कहीं वर्षा कहीं सूखा


उसके शरीर में लचक तो जैसे रह ही नहीं गयी है, व्यायाम या आसन करते समय पता चलता है. कमर का घेरा इतना बढ़ता जा रहा है कि डर लगता है किसी दिन माँ की तरह मोटी न हो जाये. वह नियमित व्यायाम करती भी कहाँ है, प्रातः उठते ही करना ज्यादा अच्छा है, सुबह-सुबह वातावरण इतना शांत होता है, उसने सोचा, कल से ऐसा ही करेगी पर उसके लिये सुबह जल्दी उठना होगा, आजकल तो सुबह का अलार्म भी नहीं सुनाई देता, तामसी वृत्ति का प्रभाव है. इसी तरह उन दिनों जून को भी नहीं देता होगा. कल रात सामने वाले दादा ने भी खाना खाया सो बर्तन तो सभी जूठे पड़े हैं. आठ बजे हैं, नन्हा अभी-अभी उठ गया है, सो अब लिखना बंद.

कल उसकी नव विवाहिता पड़ोसिन ने दुबारा कहा, साड़ी में आप अच्छी लगती हैं, और उस दिन उसकी कीमती और ढेर सारी साडियां देखी थीं, अमीर घर की लड़की है. कल शाम वह उन्हीं आंटी से मिलने गयी जिनकी बहू घर छोड़ कर चली गयी थी. उनसे बातें करके अच्छा लगता है पर कल उनकी बातें सुनकर बहुत दुःख हुआ, हाल ही में हुए पति वियोग के कारण एक तो वह वैसे ही दुखी थीं, होना तो यह चाहिए था कि उनके बेटा बहू इतना ख्याल रखते कि उन्हें पुरानी बातें याद न आतीं  पर हुआ यह कि बहू लड़-झगड़ कर मायके चली गयी. कल एक और दम्पति मिलने आये थे, बिहार के थे, दोनों ही धीरे-धीरे रुक-रुक कर बोलने वाले शर्मीले स्वभाव के लगे. कल शाम वे सब्जी लेने गए तो वर्षा शुरू हो गयी पर वापस आकर देखा तो यहाँ उनके घर के आसपास सब सूखा था. रात को जब वे भोजन कर रहे थे, नन्हें को ड्रेसिंग टेबल का दरवाजा खोलते बंद करते समय मसूड़े में दांत से चोट लग गयी, पल भर को तो वह रोया लेकिन थोड़ी देर में ही चुप हो गया और ऐसे बातें करने लगा जैसे कुछ हुआ ही नही हो.

रोज के कार्य के अलावा उसने आया से दो काम करवाए हैं, उसने सोचा एक रुपया देगी उसे. अच्छी लड़की है, जो कहो सिर हिलाती है. सुबह उसने फ्लॉक्स के बीज इक्कट्ठे किये, अगले वर्ष काम आएंगे. कल शाम वे तेलुगु मित्र के यहाँ गए थे, आइसक्रीम खिलाई औए आलू के भजिये, अच्छा  लगता है उनके घर जाकर, उनका दो साल का बेटा बहुत होशियार हो गया है, अपने खिलौनों को सोनू को हाथ तक नहीं लगाने दिया. आज उनकी लेन के पहले घर में रहने वाली छोटी बालिका का जन्मदिन है, वे शाम को बाजार जाकर कोई उपहार लायेंगे.





Friday, July 20, 2012

गोलगप्पों का कार्यक्रम


देखते-देखते पूरा एक माह बीत गया. नन्हे का जन्मदिन आया और उससे एक दिन पहले माँ-पापा व छोटा भाई आये थे. उनका आना उन्हें बहुत आनंदित कर गया व उन्हें भी उनका घर देखकर अच्छा लगा. जन्मदिन की पार्टी भी अच्छी रही और उसके बाद वे जगह-जगह घूमने गए, तिनसुकिया, ज्योति होटल, ड्रिलिंग साईट. पापा दिगबोई भी देख आये. एल.पी.जी. प्लांट, ओ.सी.एस. सभी दिखाए उन्होंने. पापा ने कितनी अच्छी बातें बतायीं और माँ ने भी सुनाई अपनी कहानी. छोटा भाई भी कहता रहा बीच-बीच में आपने बैंक के अनुभव, खट्टे-मीठे. और अब वे लोग चले गए हैं, पीछे रह गयी हैं स्मृतियाँ ! जो उनके मनों में सदा सजीव रहेंगी. कल सभी को पत्र भी लिखे. लगता है नन्हे का इरादा आज देर तक सोने का है, वर्षा दो दिन लगातार होकर अभी-अभी रुकी है. सो जून बाइक से ऑफिस चले गए हैं, अभी सात भी नहीं बजे हैं, उसे ढेरों काम करने हैं.

ग्यारह बज चुके हैं, आज जून बस से गए हैं सो आने में देर होगी. उसके सुबह के सभी आवश्यक कार्य हो चुके हैं, आज भी सुबह से बादल बने हैं पर लगता है दिन में मौसम स्वच्छ रहेगा. कल शाम भी तेज वर्षा के कारण वे न घूमने जा सके न ही बाजार. आज सुबह जून से वह बेबात ही गुस्सा हो बैठी, और पता नहीं क्यों दाल में अदरक भी डाल दी जबकि उसे अदरक नापसंद है.

आज भी सुबह-सुबह उसने डायरी खोली है. दिन भर तो किस तरह बीत जाता है पता ही नहीं चलता. कल उसने अपना वजन देखा कितनी तेजी से बढ़ रहा है, नियमित व्यायाम की आदत नहीं रही थी, फिर से डालनी होगी.

उस समय नन्हा उठ गया आजकल बहुत बातें करता है, हर वक्त चाहता है उसी को खिलाते रहें, देखते रहें, सुनते रहें, शाम के समय कुछ ज्यादा ध्यान चाहता है. अभी जून के आने में एक घंटा है. सुबह हुई वर्षा के कारण गोलगप्पों का कार्यक्रम तो स्थगित कर दिया था उन्होंने पर अब अच्छी खासी धूप निकल आयी है. पिछले कई दिनों से वे किसी परिचित के घर नहीं गए हैं सामाजिक शिष्टाचार के अंतर्गत. आजकल वह एक किताब पढ़ रही है- The President’s child अच्छी है, Fay Weldom की लिखी  हुई.


 

Tuesday, July 17, 2012

भीषण गर्मी शीतल वर्षा


आज सुबह तो नहीं पर दोपहर को समय था लेकिन उसे याद ही नहीं आया कि लिखना है. दिन बेहद गर्म था, बेडरूम में दोपहर को धूप आती है, पर्दे लगाने के बावजूद तपन आती रहती है, सो वे बैठक में सोये, जून ने नीचे कम्बल बिछा दिया था, उसके ऊपर चादर, उसे नन्हें व उसकी भूख, प्यास व नींद का बहुत ध्यान रहता है. शाम को वे किन्ही परिचित से मिलने गए फिर क्लब. दक्षिण भारतीय व्यंजन वहाँ अच्छे मिलते हैं. सोनू वहाँ भी किलोल करता रहा, अपनी अटपटी भाषा में पता नहीं क्या-क्या बोल रहा था. क्लब से आते ही सो गया.

आज दोपहर वह एक चित्र बनाएगी, ऐसा भाव मन में आ रहा है. मौसम कितना सुहाना है, मंद-मंद मधुर पवन और आकाश पर बादल. जून आज बस से दफ्तर गए हैं, सो आने में थोड़ा देर होगी. उसने भोजन बना कर रख दिया है. उसका ध्यान अपनी कमर की तरफ गया, जो आजकल गायब होती जा रही है, नन्हें के होने के बाद ठीक से व्यायाम तो किया नहीं और खुराक ज्यादा. अब नियमित व्यायाम आरम्भ किया है पता नहीं कब फर्क दिखेगा, शायद छह महीनों तक या एक वर्ष बाद, पर कुछ तो करना पड़ेगा ही.
 
आज उसका जन्मदिन है, बहुत दिनों बाद डायरी का स्मरण हुआ है, पर कोशिश रहेगी कि रोज लिखेगी चाहे एक वाक्य ही, जून नेह बरसाते हुए दफ्तर गए हैं. आज उनका हाफ़ डे है. शाम को उन्होंने कुछ जलपान का प्रबंध किया है बस कुछ  ही लोगों के लिये.

कल दिनभर और रात भर की भीषण गर्मी के बाद अब वर्षा की शीतल बौछार कितनी राहत दे रही है. वह कुछ देर पूर्व ही उठकर बाहर आयी है और लगता है जून भी उठ गए हैं, नन्हा सोया है पर दस-पन्द्रह मिनट में ही वह भी उठ जायेगा, कितना प्यारा बच्चा है जब कोई उसे देखकर कहता है तो अच्छा लगता है मन को. कितना हँसाता है वह उन्हें, और कभी-कभी परेशान भी करता है. पर उसका तरह-तरह के चेहरे बनाना और नहीं-नहीं कहते हुए सिर को हिलाना देखते ही बनता है. अभी तक अपने आप चल नहीं पाता है. वर्षा रुक गयी है और दूर से मुर्गे की आवाज सुनाई दे रही है. बंद व घेराव के कारण अब शुक्रवार से पूर्व न तो चिट्ठी मिल सकती है न जा सकती है. माँ-पापा ने खत लिखा तो होगा. नन्हें का जन्मदिन भी निकट आ रहा है. जून शायद अंदर बैठकर कुछ पढ़ रहे हैं या तैयार हो रहे हैं, वह देखने चली गयी.