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Thursday, November 3, 2022

भूमि पूजन

 


आज अगस्त का पहला दिन है.  सुबह अगस्त का स्वागत करते हुए एक कविता लिखी. एओएल के उस स्वयंसेवक से,  जिसके माध्यम से वह हिंदी में अनुवाद का सेवा कार्य कर रही है, कहा, गुरूजी तक भिजवा दे. उसने हामी भर दी है पिताजी ने फोन पर कहा, उन्हें उसकी कवितायेँ और अनुच्छेद अच्छे लगते हैं, वह नियमित फेसबुक पर पढ़ते हैं. राखी मिल गयी है, यह भी बताया. उन्होंने मोटरोला का नया स्मार्ट फोन मंगवाया है, छोटी भाभी सामने वाले पड़ोसी अंकल के साथ जाकर ले आयी और उसने सेट भी कर दिया. 
आज सुबह ‘शकुंतला’ फिल्म देखी. जो भारत की प्रसिद्ध गणितज्ञ के जीवन पर बनी है, जिन्हें मानव कम्प्यूटर भी कहा जाता था. वह कठिन सवालों के हल कम्प्यूटर से पहले हल कर लेती थीं, कैसे करती थीं, कोई कभी जान नहीं पाया. नन्हा जून के जन्मदिन पर एक बड़ा सा टेलिस्कोप लाया है, उसे इंस्टॉल किया. आज आकाश में न चाँद है न तारे, मौसम साफ होगा तब वे आकाश निहारेंगे. 
आज रक्षा बंधन का पर्व है, सभी भाइयों से फोन पर बात हुई. परसों रामजन्मभूमि मंदिर के लिए भूमि पूजन होगा, तैयारियां चल रही हैं, प्रधानमंत्री भी जायेंगे. शाम को सरयू के तट पर हजारों दीप जलाये जायेंगे. कोरोना का भय भी लोगों के उत्साह को कम नहीं कर पा रहा है. गृहमंत्री को भी कोरोना हो गया है. छोटी ननद से बात हुई, नंदोई जी को भी बुखार व गले में खराश है. उनके बैंक में सबका टेस्ट करवाया गया, एक तिहाई लोगों का पॉजिटिव मिला है. पूरे विश्व में पौने दो करोड़ लोग कोरोना से पीड़ित हैं और सात लाख लोगों की मौत हो चुकी है.
आज शाम को गुरूजी का नया ध्यान किया, ‘संकल्प शक्ति के लिए ध्यान’, बहुत ही प्रभावशाली था. उनकी कृपा का कोई अंत ही नहीं है. वह मार्च के महीने से ही रोज ध्यान करा  रहे हैं. भगवान बुद्ध पर लिखी पुस्तक में पढ़ा, उन्हें कोई कामना नहीं थी, पर उनका हृदय अपार करुणा से भरा था, जहाँ कोई स्वार्थ सिद्धि शेष न हो, वहीँ करुणा और सजगता का वास होता है. वास्तविक समझदारी और जगत के प्रति आदर भी कह सकते हैं इसे ! 
आज अयोध्या में राम मन्दिर भूमि पूजन सम्पन्न हो गया. प्रधानमंत्री की उपस्थिति में कार्यक्रम बहुत ही गरिमापूर्ण बन गया. एक स्थान पर उन्होंने साष्टांग प्रणाम किया. वह सम्पूर्ण पूजा विधि में सम्मिलित हुए और प्रभावशाली वक्तव्य दिया. मोहन भागवत, योगी जी व नृत्य गोपालदास जी ने भी इस अवसर पर अपने विचार रखे. भारत भर से एक सौ पैंतीस विभिन्न धाराओं के सन्त आये थे. सजावट बहुत शानदार थी और दिन भर राम की महिमा गायी जाती रही. मर्यादा पुरुषोत्तम राम भारत की आत्मा हैं, उनका नाम हर बच्चे के मुख पर कभी न कभी आ ही जाता है. अगले तीन वर्षों में भव्य व दिव्य मंदिर का निर्माण हो जायेगा. 

Saturday, February 9, 2013

अयोध्याकाण्ड


  
 दिसम्बर शुरू हो गया है, उसके पास फुर्सत नहीं कि आते-जाते दिनों, महीनों का हिसाब रख सके. पता नहीं कहाँ से एकाएक इतनी व्यस्तता आ गयी है. लाइब्रेरी से लायी किताबें व घर से लायी दो किताबें भी अनपढ़ी रह गयी हैं, पत्रिकाएँ भी बिन पढ़े लौटा दी जाती हैं, कुछ मित्रों ने मिलकर एक पत्रिका क्लब बनाया है, हर हफ्ते ही नई आ जाती हैं. पिछ्ले दिनों वीसीपी पर तीन फ़िल्में जरूर देखीं, पर्दे सिले, चादर पूरी की, मिक्सी का कवर भी बनाना आरम्भ किया है उसने. नन्हे के लिए एक टोपी भी बनानी है उसे. चिट्ठियाँ लिखीं. अभी नए साल के कार्ड सहित कुछ पत्र और लिखने हैं.  कल बड़े भाई का जन्मदिन था, उन्हें कार्ड मिला होगा, उसने मन ही मन पुनः शुभकामनायें दीं. कल पंजाबी दीदी का भी एक बड़ा लम्बा सा पत्र आया है. सुबह से सूरज महाशय छिपे हुए थे बादलों के पीछे, अभी-अभी दर्शन दिए हैं. परसों जो बड़ियां बनाई थीं, वह तो रसोईघर में सूख रही हैं, यहाँ गैस का चूल्हा चौबीसों घंटे जलता रहता है कभी मद्धिम कभी तेज, सो गीले कपड़े हों या चिप्स और वड़ियाँ, सभी किचन में सुखाये जा सकते हैं. लेकिन उसे आश्चर्य होता है, हर बार जब भी मुन्गौड़ी आदि बनाये, धूप गायब..मौसम का मिजाज समझना बहुत मुश्किल है यहाँ..

आज फिर वही कल का वक्त है, लेकिन धूप नहीं है, कल थोड़ी बहुत निकली भी थी, आज तो बदल छंटे भी नहीं, ठंड काफी बढ़ गयी है. सुबह किसी का भी बिस्तर छोड़ने का मन नहीं था, नन्हा सुबह स्कूल जाने में एक बार तो डरा. पर फिर समझ गया कि स्कूल एक दिन छोड़ सकता है पर ठंड तो रोज रहेगी ही. महीने के अंतिम सप्ताह में छोटा भाई परिवार सहित आने वाला है, वे बहुत उत्साहित हैं. कल शाम जून का एक मित्र परिवार विदा लेने आया, वे अपना मकान बनवाने का शुभारम्भ करने जा रहे हैं, उनका भी मकान बनवाने का स्वप्न है, जमीन खरीदने की बात वे करके आये थे.

अयोध्या में हुए टकराव की वजह से देश के कई शहरों में, उतर प्रदेश के अठारह जिलों में कर्फ्यू लगना पड़ा है. हालात कब तक सुधरेंगे कहा नहीं जा सकता. पता नहीं यात्राएँ भी सुरक्षित होंगी या..उसे भाई का स्मरण हो आया. कहीं उसे कार्यक्रम स्थगित न करना पड़े, क्या इतना निराश होना सही है, पर इस अनिश्चित वातावरण में कुछ भी नहीं कहा जा सकता. नन्हे की परीक्षाएं चल रही हैं, आज उसका तीसरा पेपर है, गणित का. कल शाम से ही उसका मन अस्थिर है, बात यूँ तो कुछ भी नहीं, पर मन का कोई क्या करे जो ‘आ बैल मुझे मार’ की तर्ज पर चलता है.


 


Saturday, January 19, 2013

कभी खुशी कभी गम



अयोध्या में निर्माण तोड़ने पर लोकसभा में हंगामा, यूपी सरकार को चेतावनी..वही राममंदिर बाबरी मस्जिद विवाद. कल बहुत दिनों के बाद उन्होंने घर के कोर्ट में बैडमिंटन खेला और सांध्य भ्रमण को भी गए. मौसम सुधरा था पर रात इतनी तेज वर्षा हुई कि लॉन की हालत देखी नहीं जाती, माली भी नहीं आया है, सुबह तीन बजे के करीब जोरों का तूफान आया था और शायद ओले भी गिरे थे, आवाज से ऐसा लग रहा था और इस समय भी सूर्य देव आंखमिचौली खेल रहे हैं. सुबह उठते ही उसे गले में हल्की चुभन महसूस हुई, लिपटन का टी बैग शायद कुछ राहत दे.

उल्फा नेता परेश बरुआ हथियार समर्पण को तैयार नहीं. कल शाम लगभग साढ़े पांच बजे  फोन आया और साढ़े सात बजे जब वे क्लब से वापस आए, उनकी कार वे लोग ले गए. एक ही लड़का था, उम्र भी कुछ खास नहीं थी, उसने गुस्से में या आवेश में कुछ बातें कह दीं, जो उसे नागवार गुजरीं, और उसे लगता है कि जल्दी वह कार वापस नहीं करेगा. कल उस समय से कितनी ही बार मन में वे सारी बातें स्पष्ट हो आयी हैं, कितना दूसरी बातों में मन लगाये पर ध्यान उसी ओर चला जाता है, अब जब तक कार वापस नहीं आ जाती, ऐसा ही होगा.

आज तीसरा दिन हो गया. कल दिन भर आँखें दरवाजे पर लगी रहीं और कान आहटों को पहचानने में, पर कार वापस नहीं आयी. अब तो इंतजार करना छोड़ दिया है, आ जायेगी अपने आप. जून के चेहरे से हँसी ही गायब हो गयी है, आँखों में एक अजीब सा सन्नाटा. कुछ दिन पहले बल्कि पिछले हफ्ते आज ही के दिन तो वे कितने खुश थे, होली थी उस दिन. ठीक ही कहा है किसी ने-
मुरझा जाती हैं कुछ कलियाँ, सारी कलियाँ कब खिलती हैं?
इस दुनिया में सारी की सारी खुशियाँ किसको मिलती हैं ?

एक पल खुशी का तो दूसरा उदासी भरा, उसकी आँखें किसी भी पल बरसने को तैयार हैं, अंदर ही अंदर कोई घुटन सी खाए जा रही है जैसे, पर जानती है रोने से कुछ होने वाला नहीं है, इसी घुटन को अपनी हिम्मत बनानी है. ऐसे में जिन्हें वे अपना हित चिंतक समझते हैं तथाकथित मित्र गण भी कैसे चुपचाप बैठ जाते हैं..जैसे उनसे कोई परिचय ही न हो. वह ही मूर्ख है जो...पर यह सब लिखकर वह कोई अच्छा कार्य तो नहीं कर रही. इस दुनिया की यही रीत है हरेक को रोना अकेले ही पड़ता है, जबकि साथ हँसने के लिए कई साथी मिल जाते हैं.

कल रात आठ बजे कार मिल गयी. आज मन हल्का है और स्वास्थ्य भी ठीक है. कल कितनी कमजोरी महसूस कर रही थी, जून का भी यही हाल था कल शाम तक. अब सब पूर्ववत् हो गया है, हाँ वे कुछ और करीब आ गए हैं, दुःख व्यक्तियों को जोड़ता है और असली-नकली दोस्तों की पहचान भी कराता है. वे थोड़े गम्भीर भी हो गए हैं इस घटना के बाद..पता नहीं कितने दिनों तक.



Monday, November 19, 2012

आइसक्रीम वाला सपना



पड़ोसियों के यहाँ कल पार्टी में ज्यादा खाना नहीं लगा, थोड़ा बच गया है और वे चाहते हैं कि हम उन्हें कहें, कोई बात नहीं हम खा लेंगे..कैसी अनुचित अपेक्षा..बासी खाना..कल शाम को जून ने ऐसा ही कुछ कहा था, ऐसे ही पड़ोसियों के सम्बन्ध खराब होते हैं, अगर उन्होंने रात को ही हमें बुलाया होता.. छोडो इन बातों को, उसने खुद से कहा. जून आज दोपहर को घर नहीं आ रहे हैं, फील्ड गए हैं. आज सफाई कर्मचारी देर से आया सो वह व्यायाम नहीं कर सकी, अक्सर उसका व्यायाम किसी न किसी कारण से छूट ही जाता है..कल वे एक सिंधी परिवार के यहाँ गए. आज जून यदि समय पर आए तो शाम को वे कहीं जा सकते हैं.

पहली दिसम्बर..यानि बड़े भाई का जन्मदिन..आने के बाद उसने खत लिखा था..छोटे भाई को छोडकर किसी ने भी तो जवाब नहीं दिया,,,,खुश रहें सभी.  कुछ ही दिन में वह सभी को नए वर्ष के कार्ड भेजेगी. उसने एक सूची बनायी. आज मौसम कितना ठंडा है, कल शाम से ही वर्षा हो रही है. जून का दफ्तर कल बंद हो गया आसाम बंद के कारण. नन्हे का स्कूल तो कल बंद था ही, परीक्षायें आने वाली हैं, उसने उसे पढ़ने के लिए कहा.

एक नए सप्ताह की शुरुआत..मौसम तो अच्छा है खिला-खिला और उसका मन भी. दस बजे थे. घंटी बजी, उसे लगा शायद धोबी आया है, पर इलेक्ट्रीशियन था टेबल लैम्प का स्विच ठीक करने आए थे. कल उसकी असमिया सखी आयी थी परिवार सहित, उन्होंने खाने पर बुलाया था, वे लोग नए मकान में जा रहे हैं, बड़ा है, लॉन भी है. अच्छा घर है. कल वे बाजार से लौटते समय देखकर आए. किसी का पत्र नहीं आया, उसने सोचा वह बीस दिसम्बर तक प्रतीक्षा करेगी, फिर अपने हाथ से बनाये कार्ड्स भेजेगी. जून न्यूजट्रैक के दो कैसेट लाए हैं, जम्मूकश्मीर के शरणार्थियों पर कार्यक्रम देखकर बहुत खराब लगा. सरकार कुछ करती क्यों नहीं, असम में राष्ट्रपति शासन है तो क्या कश्मीर में..वहाँ पर इतना जुल्म क्यों..और बेनजीर भुट्टो पहले मित्रता की बातें करती थीं, पर उनके ये भड़काने वाले भाषण..

छह दिसम्बर यानि अयोध्या में विश्व हिन्दूपरिषद तथा बीजेपी द्वारा कार सेवा. जून आजकल तलप में हैं, एक हफ्ते बाद वापस आएंगे, शाम को फिर से फोन करेंगे. वह लिख रही थी कि द्वार पर एक गरीब औरत आयी कुछ मांगने, उसे पैसे देकर आयी ही थी कि फिर घंटी बजी, इस बार धोबी था और वह गया भी नहीं था कि पडोसिन आ गयी सरसों का साग लेकर जिसमें पालक भी मिलायी गयी थी और थोड़ासा खट्टा दही. अच्छा बना था. कल दोपहर वह  नन्हे को लेकर अपनी दूर की रिश्तेदार उसी पंजाबी परिचिता के यहाँ गयी थी. वहाँ पहली बार महाजोंग का खेल सीखा, बहुत रोचक खेल है. उन्होंने एक बात कही कि नन्हे को किसी भाई या बहन की जरूरत है..और उसे भी लगता है कि उनकी बात ठीक है, जून के आने पर वह  उनसे कहेगी जरूर.

आज अभी तक जून का फोन नहीं आया, उसने मन ही मन उसे शुभकामना भेजी. उसके न रहने पर रात को देर से नींद आयी सो सुबह देर से उठी, जल्दी जल्दी नन्हे को तैयार करके भेजा, अब कल-परसों उसका स्कूल बंद है, सोमवार को इंग्लिश का पेपर है. उसे फिर से कल की बात याद आ गयी नन्हे का साथी.. कल शाम उसकी दो परिचित महिलाएं आयीं, एक बच्चा भी साथ था, नन्हा बहुत खुश था. बच्चे एकदूसरे की बात कैसे समझ लेते हैं बिन कहे ही..
आज सुबह उसकी नींद खुल गयी सोनू की हँसी की आवाज से, वह सपने में हँस रहा था. उठा तो कहने लगा मेरा सपना नोट कर लीजिए...जिससे पापा पढ़ सकें-

“ मैं और एक बच्चा जा रहे थे, एक आइसक्रीमवाला और एक किताब वाला मिला. तब तक आइसक्रीम वाले ने अपनी दुकान खोल ली तो मैं उसके पास चला गया. फिर मैंने उसे एक लकड़ी दी कि वह आइसक्रीम उस पर लगाकर दे तो उसने कहा कि नहीं दूँगा. फिर मैंने कहा कि बना कर दो, फिर उसने नहीं बनाया तो उसी ने एक आइसक्रीम को मेरे चेहरे पर लगा दिया फिर मैं खूब हँसने लगा.”