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Monday, October 29, 2012

अदरक वाली चाय



परसों उसकी परीक्षा है, आठवीं कक्षा को विज्ञान में ‘चुम्बकत्व’ पढाना है, उसने सोचा, सिलसिलेवार प्रश्नों को याद करेगी तथा बोध प्रश्न भी. दूसरा पीरियड है सो ज्यादा इंतजार नहीं करना पडेगा, बारह बजे तक मुक्त हो जायेगी. अगले दिन वसंत पंचमी का अवकाश है. जून का पत्र आया है, उसे कई दिन कोई पत्र नहीं मिला यह सोच कर नूना को भी अच्छा नहीं लगा. पूरे पांच महीने हो गए उसे यहाँ आए हुए, अब दो ढाई महीने ही शेष हैं.

कल उसका बीएड का पहला प्रेक्टिकल हो गया, उसके हिसाब से तो ठीकठाक ही हुआ, अब देखें कैसे नम्बर आते हैं. कल गणित का है, जो परीक्षक आए हैं उनमें से एक गणित के हैं, आज वह थोड़ा ज्यादा सजग रहकर पढ़ाएगी, और समय का ध्यान रखते हुए जल्दी-जल्दी भी ताकि एक अन्विति तो पूरी हो जाये. परीक्षा तो जल्दी हो गयी थी, पर मैडम के आदेशानुसार दो बजे तक बैठा रहना पड़ा, कल की परीक्षा का समय जानने के लिए. टिफिन तो ले नहीं गयी थी, पहली बार कालेज कैंटीन में खाया पकौड़ा, स्वप्ना, कविता और उसने. सिर में दर्द कॉलेज में ही शुरू हो गया था, घर आयी तो बढ़ गया था, दवा ली, अब ठीक है. नन्हा आजकल खूब बातें करता है और गाना गाता है, टीवी पर जो भी सुनता है. पढ़ाई-लिखाई तो आजकल उसकी बिलकुल नहीं हो रही है, कल से उसे रोज एक घंटा पढ़ाएगी उसने मन ही मन सोचा. ननद अदरक वाली चाय दे गयी है, सिर में दर्द है यह पता चलने पर माँ-पिता व ननद सभी उसका बहुत ख्याल रख रहे हैं, वे सभी अन्ततः बहुत अच्छे हैं, वे जून के माता-पिता हैं, उसे भी ऐसे ही संस्कार मिले हैं, प्यार और स्नेह की शीतलता भी.
आज दूसरा प्रेक्टिकल भी हो गया, परीक्षक संतुष्ट नहीं थे, अब टीचर ने उन्हें जैसे बताया वैसे ही तो पढायेंगे न.. दो दिन छुट्टी है, परीक्षा के बाद कितना सुकून, लेकिन एक खालीपन सा लग रहा है, उसने सोचा कोई पत्रिका लाएगी. सभी को खतों के जवाब भी देने हैं.

आज धर्मयुग लायी, और नन्हे के लिए एक चित्र कथा खरीदी. नन्दन, पराग सभी उसे खरीदने को कहा पर वह कृष्ण का नाम सुनकर उसी को खरीदने की जिद कर रहा था. वसंत पंचमी का दिन अच्छा बीता, अब परसों से फिर कालेज और किताबें.

जून ने नवोदय स्कूल का फार्म भेजा है, शायद वह जानता नहीं है इन स्कूलों में अध्यापकों को वहीं रहना होता है. उसका एक पत्र तो पूरे एक महीने इधर-उधर घूमने के बाद मिला है, छब्बीस नम्बर का खत. आज कालेज की भूतपूर्व प्राचार्य श्रीमती सुन्दरी बाई के निधन पर शोक सभा थी, लड़कियों ने खूब शोर मचाया. एफिडेविट के लिए क्लर्क ने किस अजीब तरह का जवाब दिया पर नागर मैडम ने बहुत अच्छी तरह समझाया, वह अच्छी अध्यापिका ही नहीं अच्छी इंसान भी हैं. माँ का स्वास्थ्य ठीक नहीं है, वह बहुत जल्दी घबरा जाती हैं, कराह कर बोलती हैं, जिससे सभी लोग समझें कि बहुत बीमार हैं, या बीमार होकर हर व्यक्ति सबका ध्यान आकर्षित करना चाहता है.

Friday, July 20, 2012

गोलगप्पों का कार्यक्रम


देखते-देखते पूरा एक माह बीत गया. नन्हे का जन्मदिन आया और उससे एक दिन पहले माँ-पापा व छोटा भाई आये थे. उनका आना उन्हें बहुत आनंदित कर गया व उन्हें भी उनका घर देखकर अच्छा लगा. जन्मदिन की पार्टी भी अच्छी रही और उसके बाद वे जगह-जगह घूमने गए, तिनसुकिया, ज्योति होटल, ड्रिलिंग साईट. पापा दिगबोई भी देख आये. एल.पी.जी. प्लांट, ओ.सी.एस. सभी दिखाए उन्होंने. पापा ने कितनी अच्छी बातें बतायीं और माँ ने भी सुनाई अपनी कहानी. छोटा भाई भी कहता रहा बीच-बीच में आपने बैंक के अनुभव, खट्टे-मीठे. और अब वे लोग चले गए हैं, पीछे रह गयी हैं स्मृतियाँ ! जो उनके मनों में सदा सजीव रहेंगी. कल सभी को पत्र भी लिखे. लगता है नन्हे का इरादा आज देर तक सोने का है, वर्षा दो दिन लगातार होकर अभी-अभी रुकी है. सो जून बाइक से ऑफिस चले गए हैं, अभी सात भी नहीं बजे हैं, उसे ढेरों काम करने हैं.

ग्यारह बज चुके हैं, आज जून बस से गए हैं सो आने में देर होगी. उसके सुबह के सभी आवश्यक कार्य हो चुके हैं, आज भी सुबह से बादल बने हैं पर लगता है दिन में मौसम स्वच्छ रहेगा. कल शाम भी तेज वर्षा के कारण वे न घूमने जा सके न ही बाजार. आज सुबह जून से वह बेबात ही गुस्सा हो बैठी, और पता नहीं क्यों दाल में अदरक भी डाल दी जबकि उसे अदरक नापसंद है.

आज भी सुबह-सुबह उसने डायरी खोली है. दिन भर तो किस तरह बीत जाता है पता ही नहीं चलता. कल उसने अपना वजन देखा कितनी तेजी से बढ़ रहा है, नियमित व्यायाम की आदत नहीं रही थी, फिर से डालनी होगी.

उस समय नन्हा उठ गया आजकल बहुत बातें करता है, हर वक्त चाहता है उसी को खिलाते रहें, देखते रहें, सुनते रहें, शाम के समय कुछ ज्यादा ध्यान चाहता है. अभी जून के आने में एक घंटा है. सुबह हुई वर्षा के कारण गोलगप्पों का कार्यक्रम तो स्थगित कर दिया था उन्होंने पर अब अच्छी खासी धूप निकल आयी है. पिछले कई दिनों से वे किसी परिचित के घर नहीं गए हैं सामाजिक शिष्टाचार के अंतर्गत. आजकल वह एक किताब पढ़ रही है- The President’s child अच्छी है, Fay Weldom की लिखी  हुई.