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Sunday, July 16, 2017

फुटबाल का विश्वकप


कल से उसके बाँए कान में सुनाई देना कम हो गया है और एक आवाज भी आती है. शायद इन्फेक्शन है या पानी चला गया है, अथवा तो वैक्स है और या तो ज्यादा सुनने से कान की श्रवण शक्ति कम हो गयी है. उम्र के साथ-साथ भी शरीर में कई परिवर्तन होते हैं. आज इतवार है और जून ने लंच में विशेष पुलाव तो बनाया ही था, शाम को ब्लू बेरी, रोस्टेड आलमंड, डेट्स तथा बगीचे से तोड़ा ताजा भुना हुआ भुट्टा. कल सिनेमा हॉल में HSKD देखी, फिल्म उसे ज्यादा पसंद नहीं आयी. अमेरिकन कॉर्न खाए और चालीस रूपये कप वाली चाय पी, यानि कल दिन भर मस्ती की. शाम को सत्संग में गये. गुरू पूर्णिमा  उत्सव के कारण गुरू पूजा थी. आज ट्विटर पर गुरूजी का संदेश देखा, यू ट्यूब पर उनका कल का संदेश भी कुछ देर के लिए सुना था. अभी वे कुछ देर बैडमिंटन खेलेंगे फिर शेष भाग सुनेंगे. फुटबाल के विश्व कप के खेल समाप्त हो चुके हैं. जर्मनी जीत गया है, ब्राजील चौथे स्थान पर है. जून भी डायरी लिख रहे हैं. लिखने से बहुत कुछ स्पष्ट हो जाता है. जीवन को एक दिशा मिलती है. वे वही हो जाते हैं जैसा सोचते हैं. चेतना जब परम के साथ जुड़ी होती है तब कोई दुःख कोई परेशानी उन्हें छू भी नहीं सकती.

आज भी वर्षा के कारण प्रातः भ्रमण स्थगित करना पड़ा, शाम को यदि मौसम खुल गया तो जा सकते हैं. उनके बगीचे में अन्नानास लगा है पर जून ने बाजार से लाये अनानास की तस्वीर व्हाट्स ऐप के एक ग्रुप में डाल दी, सब लोग खुश हैं और अगले वर्ष यहाँ आने का प्रोग्राम बना रहे हैं. अभी कुछ देर पहले ही आँख-कान-गला विशेषज्ञ से मिलकर आ रही है. उनके केबिन के बाहर काफी लोग बैठे थे. जून ने फोन कर दिया था सो सबसे पहले उसे ही बुलाया. कान साफ किया और अब खुला-खुला लग रह है, कान में डालने की दवा भी दी है. उसका गला भी थोड़ा सा खराब है पर डाक्टर ने देखकर कुछ कहा नहीं है. दवा के काउंटर पर भी काफी भीड़ थी. जनसंख्या इतनी बढ़ रही है सो हर जगह भीड़ तो बढ़ेगी ही, धैर्य सिखाती है भीड़ भी. वहाँ बातूनी सखी मिली, उसे भी इन्फेक्शन था, एक कोर्स कर चुकी है पर ठीक नहीं हुआ. नैनी ने तुलसी लाकर दी, फिर गर्म पानी भी थर्मस में भर दिया है, वह बहुत ख्याल रखती है हर बात का. सलाद सजाने में उसका जवाब नहीं. आज भी वर्षा हो रही है, जून अभी आने वाले हैं. उन्हें भी उसका ब्लॉग पढ़कर अच्छा लगता होगा जैसे उसे लिखकर लगता है. आज सुबह उन्हें कुछ अच्छी बातें परमात्मा ने कहलवायीं इस मुख से, वे अवश्य ही उन्हें याद रख पाएंगे. उसका जीवन भी सद्मार्ग से विचलित न हो, ऐसी प्रार्थना उसने अपने लिए की.

आज सुबह फिर एक अनोखे स्वप्न ने जगाया. एक नई ब्याहता को उसके पति का नवजात शिशु थमाया जाता है, जिसकी माँ मर चुकी है. वह उसे स्तनपान कराती है और लो..उसके स्तनों में दुग्ध उतर आता है. वात्सल्य की गहरी भावना उसके मन में जगती है और यह चमत्कार घटता है. ऐसे ही परमात्मा की गोद में जब वे अबोध शिशु की तरह वे जाते हैं तो उसका असीम आनंद उन्हें सहज ही मिलने लगता है. वह वहाँ था ही, उसे प्रकट भर होना था. तभी संतजन परमात्मा को माँ के रूप में भजते हैं. माँ कहने का भाव तभी सिद्ध होगा जब वे अबोध शिशु बन जाएँ, जो वास्तविक भी है. क्या जानते हैं वे इस संसार के बारे में, उनकी जानकारी अल्प है और अज्ञान अनंत है. उससे पूर्व भी कुछ स्वप्न देखे. एक में लोभ की प्रवृत्ति स्पष्ट दिख रही थी. स्वप्नों की दुनिया भी कितनी विचित्र है. कल रात बिजली चली गयी थी. वे पहले पूजा रूम में गये, जहाँ पांच खिड़कियाँ हैं, फिर बिजली आने पर अपने कमरे में, पुनः वहाँ जाना पड़ा और फिर लौटे, नींद लेकिन आ ही गयी. परमात्मा की कृपा ही है गहरी निद्रा, लेकिन अभी भी उसे स्वप्न बहुत आते हैं. जागृत, स्वप्न, सुषुप्ति में भी तूरीया यानि चौथी अवस्था बनी रहे, ऐसी ही कामना साधक की होती है, पर वह अवस्था कामना से नहीं मिलती.

सुबह किस स्वप्न ने जगाया याद नहीं, वर्षा नहीं थी सो टहलने गये, आकाश गुलाबी था और हवा में हल्की सी ठंडक. दोपहर को वह बाजार गयी, राखी बनाने का सामान खरीदा. अगले महीने की दस तारीख को राखी है, उसे बच्चों के लिए ढेर सारी राखियाँ बनानी हैं. उन्हें भेजने की तैयारी भी करनी चाहिए. सुबह कविता लिखी ब्लॉग पर और दोपहर को व्हाट्सएप पर पढ़ी. छोटी बहन ने सुंदर भजन गाया. शाम को पुरानी पड़ोसिन का फोन आया, उसके पुत्र की मंगनी की खबर देने के लिए, दिसम्बर में विवाह है. नन्हे ने बताया अगले तीन महीनों में उसकी कम्पनी में काम करने वालों की संख्या दुगनी हो जाएगी.  



Wednesday, April 24, 2013

बृहस्पति ग्रह का धूमकेतु


  

 एक माह का अंतराल, कारण एकाध नहीं कई गिनाये जा सकते हैं, लेकिन आज इसकी सुध ली है तो एक सखी के फोन के कारण. सुबह-सुबह उसने पूछा, दादा साहब फाल्के अवार्ड इस वर्ष किसे मिला है, वह नहीं बता सकी. पिछले कई दिनों, घर से आने से पहले व बाद में भी लिखना-पढ़ना छूट ही गया था. डायरी लिखने से कुछ विशेष समाचार भी नोट हो जाते हैं,   अब जैसे कि विश्वकप फुटबाल में ब्राजील, इटली, बुल्गारिया और स्वीडन की टीमें सेमी फाइनल में पहुंची हैं. पिछले दिनों कई अच्छी बातें हुईं. नन्हे का जन्मदिन उन्होंने अच्छी तरह से मनाया, पिताजी की चिट्ठी आई थी, उनके मकान में किरायेदार रहने आ गए हैं., यानि वह मकान अब घर बन गया है. आज दोनों घरों पर पत्र भी लिखने हैं. मौसम आजकल बेहद गर्म है, काफी दिनों से वर्षा नहीं हुई है.

 आज सुबह जून को विदा करने जब बाहर गयी तो प्रकृति की सुंदरता को देखकर मन विभोर हो उठा. ग़ालिब के शेर को गुनगुनाते हुए, बेला के फूलों की खुशबु समोते हुए...

पानी में भीगा ऐसे मन
अंतर में एक नदी उग आई
हरी दूब के कोनों को छूकर पोरों में
हरियाली, नदी किनारे छायी

 बृहस्पति ग्रह के शूमेकर धूमकेतु के टुकड़ों के टकराने की घटना सदियों बाद हुई है, अगर धरती से भी कोई धूमकेतु टकराए तो प्रलय ही आयेगी न.

 कल लिखना शुरू ही किया था कि जून आ गए और वे हास्पिटल गए. उसकी दायीं आँख में कभी-कभी पानी आता है, सुबह से गले में चुभन है. यह सब उसकी गलत सोचों का नतीजा  है, आलस्य और मद का परिणाम. हर समय श्रम करने की अपनी आदत को छोडकर विश्राम करने की आदत का परिणाम. नन्हे को छोड़ने गयी तो तो एक अस्थमा का बूढा मरीज कुछ सहायता मांगने आया, उसने मना कर दिया, अगर कुछ दे ही देती तो क्या फर्क पड़ जाता, बल्कि मन को बेचैनी न होती. पर जून को शायद अच्छा नहीं लगता, लेकिन उसके समझाने पर वह भी सहमत हो जाते संभवतः. डेक पर यह गजल आ रही है-

हर तरफ हर जगह बेशुमार आदमी
फिर भी तन्हाइयों का शिकार आदमी

उस अकेले व्यक्ति के लिए कितनी सही हैं ये लाइनें. कई दिनों से पुरानी पड़ोसिन से नहीं मिली, शायद आज ही वे लोग आयें. दीदी का पत्र भी कई दिनों से नहीं आया है, यूँ तो किसी का भी नहीं आया है, सारे रिश्ते मुंह देखे के ही होते हैं, लेकिन यह कोई अफ़सोस करने की बात नहीं है, रिश्ते हैं, रिश्ते होते हैं, यह भी क्या कम है? नन्हा बड़ा होगा तो उसके बच्चों को बुआ, चाचा इन रिश्तों का अर्थ भी नहीं मालूम हो पायेगा शायद...दुनिया सिमटती जा रही है और फैलती भी जा रही है एक साथ ही.

 अभी-अभी जून के लाए एक उपन्यास पर नजर पड़ी, कुछ पल पूर्व पढ़ी ‘स्वामी योगानंद’ की आत्मकथा के अंश का असर हवा हो गया. मन इतना अस्थिर क्यों है, सांसारिक विषयों में कितनी आसानी से रमता है, भगवद विषयों में उतनी ही कठिनाई से. उसने स्वयं ही उसे छूट दी हुई है, कई बहाने हैं इसके लिए कि वे सब बातें भी जीवन में आवश्यक हैं जिन्हें हम सांसारिक कहते हैं. कल धर्मयुग में ‘साधु वासवानी’ के शिष्य ‘जे पी वासवानी’ का प्रवचन दुबारा पढ़ा था, उन्होंने भी कहा, ईश्वर सिर्फ कल्पना जगत की वस्तु नहीं है, उसे हर क्षण अपने कार्य कलाप में शामिल करना होगा. उन सभी बातों से दूर रहना होगा जो हमें ईश्वर से दूर ले जाती हैं. कल शाम उसकी असमिया सखी आई, वे काफी देर तक बातें करते रहे, समय का भान ही नहीं रहा. सुबह एक सखी ने फोन करके पूछा, रक्षा बंधन कब है, मंझले भाई ने खत का जवाब नहीं दिया, न ही बड़े व छोटे भाई का ही खत आया है, जवाब आने पर ही राखी भेजेगी ऐसा दिमाग कहता है, पर दिमाग दिल के आगे हार ही जायेगा... डायरी लिखते समय सभी की यादें घेर लेती हैं, अपने करीब न जा पाए क्या इसलिए ? छोटी बहन का पत्र अच्छा सा पत्र आया है, एक महीने पूर्व का लिखा, शायद लिखकर पोस्ट करना भूल गयी होगी.
जगजीत सिंह की यह गजल कितनी अच्छी है-
धूप में निकलो, घटाओं में नहा कर देखो
जिंदगी क्या है किताबों को हटकर देखो




Friday, November 9, 2012

पहाडों के पास



चार जुलाई, अमेरिका का स्वतंत्रता दिवस ! अर्जेंटीना फुटबाल विश्व कप के फाइनल में पहुंच गया है. सुबह हल्की वर्षा हुई, मौसम खुशनुमा है. जून तिनसुकिया गए हैं, कार की सर्विसिंग कराने. आज इदुल्जुहा है, जून का दफ्तर व सोनू का स्कूल भी बंद है, वह अपने मित्र के यहाँ गया है, अभी वह उसे लेकर आएगी, सुबह दूध पीकर चला गया था, अभी नाश्ता नहीं किया है, उसे कुछ भी खिलाने के लिए मनाना टेढ़ी खीर है. कल स्कूल से लौटा तो बहुत खुश था, कहने लगा बहुत मजा आया, अभी लिखाना शुरू नहीं किया है, केवल राइम्स ही सिखायीं. बनारस से पत्र आया है, माँ की तीन साड़ियां गायब हैं, आश्चर्य है. उसे भी पत्र लिखना है. छोटी बहन दीदी के पास गयी थी, उसने सोचा वह तो शायद अब अगले वर्ष ही मिल सकेगी उन सबसे.

आज उसने अपना विवाह में मिला सफेद गाउन पहना है, पहले ढीला-ढाला था पर अब कुछ ठीक है. इसका अर्थ है कि जून की मेहनत कुछ सफल हो रही है. वह उसे थोड़ा सा भारी देखना चाहते हैं, हमेशा कुछ न कुछ खिलने के चक्कर में रहते हैं. इस समय दोपहर के तीन बजे हैं, अभी सोयी थी कि बांह पर चींटी काटने जैसे लगा, उठी तो पसीने से भीगी हुई थी, ठीक पंखे के नीचे सोकर यह हाल है, चींटी तो कहीं दिखी नहीं. आज उसे विद्यार्थियों का टेस्ट लेना है, कल शाम जब वे बाजार गए थे एक और छात्रा आयी थी. वह शाम के लिए पेपर सेट करने लगी.

आज उनके विवाह को पूरे साढ़े पाँच साल हो गए, सुबह-सुबह जून ने कहा, “हैप्पी सेवेंथ जुलाई”, वह पहले समझी कि वह कुछ और कहना चाहता है, जैसे, वह सुबह-सुबह नहायेगा नहीं, वह इतना अच्छा है पर ..कभी कभी. आज शनिवार होने के कारण नन्हे का स्कूल बंद है, उसका मित्र आया है, दोनों खेल रहे हैं. मौसम आज बहुत अच्छा है, ठंड-ठंडा सा और उसका मन भी शांत है... कल सुबह दो नई छात्राएं आयेंगी पढ़ने.

कल का संडे बहुत अच्छा रहा, रिमझिम वर्षा में वे लोग नामरूप गए, हरे-भरे वृक्षों औए चाय बागानों को पार करते पहाड़ों के बिलकुल निकट पहुंच गए थे. नन्हा और उसका मित्र बहुत खुश थे. कल नन्हे का जन्मदिन है, पर परसों उसका टेस्ट है के.जी.वन में दाखिले के लिए, इसलिए वे कल नहीं बल्कि परसों शाम को मनाएंगे. कुछ लोगों को ही बुलाना है, जून का कहना है कि इस बार ज्यादा लोगों को नहीं बुलाएँगे. कल रात उसने कहा कि फुटबाल मैच देखेंगे पर दोनों को नींद आ गयी. पश्चिम जर्मनी आखिर जीत गया और विंबलडन में स्टीफन..भारत का भी एक खिलाडी जूनियर वर्ग में विनर है उसका नाम इतना मुश्किल है कि.. जून को रात को नींद आने लगती है जब उसे बहुत सी बातें करनी होती हैं.