Monday, February 3, 2014

शेफाली का दरख्त


कल-परसों वह कुछ लिख नहीं पायी, आज जून देर से आने वाले हैं, सो समय का सदुपयोग करते हुए डायरी उठा ली है. पर मन में कार्यों की एक सूची बनने लगी है, घर जाने से पहले गाउन ठीक करना है, भाई दूज पर टीका भेजना है. वह तो अपना कर्तव्य पूरा करेगी ही, मन में कई विचार आये और ऊपरी तौर पर हलचल मचाकर चले गये, क्या स्नेह की कोई परीक्षा हो सकती है, या कीमत या बदला, नहीं स्नेह तो बस स्नेह ही है. उसके गले में खराश अभी तक शेष है, पाचन भी पूरी तरह ठीक नहीं है, नन्हे को भी सर्दी लग गयी है, फिर ईश्वर के सिवाय कोई सहाय नजर नहीं आता, वही मदद करेगा जैसे अब तक करता आया है. सुबह दो-तीन फोन करने थे सो व्यायाम भी नहीं कर पायी.

कल दोपहर जून से वह कुछ बात करना चाहती थी, पर वह इसके लिए तैयार नहीं थे. उसने कहीं पढ़ा था, कुछ लोग किसी कीमत पर भी बहस में पड़ना नहीं चाहते सो ऐसी बात कह देते हैं जिन्हें सुनकर सामने वाला घबरा ही जाये. उनका स्वभाव ही ऐसा होता है, खुलकर बात करने से झिझकते हैं, पता नहीं क्यों, सब ठीक-ठाक रहे, दबा छिपा सा, ऊपर से सब सही लगे बस ऐसा ही वे चाहते हैं. सम्बन्धों में खुलापन सहन नहीं कर पाते. किसी विषय पर बात को गहराई तक ले जाना उन्हें नहीं भाता. उथला-उथला ही रहता है सब, ताकि कुछ बिगड़े भी तो ऊपर से संवार दें. यह उनकी परवरिश का हिस्सा है और इसमें यदि वे कुछ चाहें तभी कुछ हो सकता है अन्यथा नहीं, वह उनके अनुरूप स्वयं को ढाल सके कोशिश तो यही रहती है पर जब कभी अपनी विवशता का अहसास होता है तो..उसके ख्याल से हर स्त्री को अपनी मर्जी से आर्थिक निर्णय लेने का अधिकार होना चाहिए जहां उसकी रूचि-अरुचि की परवाह वह स्वयं करे, अपने लिए अपने परिवार के लिए और..यह स्वप्न कभी पूरा होगा...या ?

पिछले दिनों मन कुछ खिंचा-खिंचा सा था, वह कहते हैं न sound body has sound mind सो गले की खराश का असर मन पर हुआ और मन का दायीं कोहनी के ऊपर तथा कान पर. पर अब हालात सुधर रहे हैं और साथ ही मन भी. नन्हा भी कल से बेहतर है.

नन्हे के यूनिट टेस्ट खत्म हो गये, परसों उन्हें जाना है. जून उन दोनों को लेकर होमियोपैथी डॉ के पास गये थे, यात्रा के लिए कुछ दवाएं दी हैं. कल दोपहर उसने तीनों आल्मरियाँ साफ कीं, सलीके से लगे हुए कपड़े अच्छे लग रहे हैं. शाम को वे टहलने भी गये, शेफाली का पेड़ श्वेत फूलों से भर गया है और सुगंध बरबस अपनी ओर खींच लेती है. उसने सोचा उसकी उस बातूनी सखी को यह सुगंध और पेड़ अच्छा लगेगा. माँ का पत्र आया है, उन लोगों ने अभी तक नये घर में शिफ्ट नहीं किया है, वह घर जो उनके घर के सामने है, भविष्य में कई वर्षों के वाद जब वे उस घर में रहने जायेंगे तो पड़ोसी अपने ही लोग होंगे. आज सुबह साढ़े चार बजे उठी, अलार्म सुनने के बाद और सायरन बजने के बीच मन सपनों की दुनिया में उठा, गेट खोला, बाहर फूल थे और धुंधली सी सुबह !

उसकी संगीत अध्यापिका के ससुर की मृत्यु हो गयी कल रात आठ बजे यहीं अस्पताल में. अभी अभी पता चला, पिछले कई दिनों से वह अस्वस्थ थे. पिछले कई दिनों से वह उनके घर जा रही थी पर एक दिन भी बात नहीं की. उन्हें उसके जाने से असुविधा भी होती होगी पर अब वह यह कभी जान नहीं पायेगी. मानव जीवन नश्वर है और जितना समय हमें मिला है शांति और सद्भाव के साथ गुजर सकें तो ही उचित है. पर ऐसा हो हो नहीं पाता है. कभी किसी और कभी किसी कारण लोग संतुष्ट नहीं रह पाते. ईश्वर भी तब अपरिचित लगता है. शायद यह असंतोष उसी का नतीजा है. पूर्णतया स्वयं पर निर्भर रहना इतना आसान नहीं है, अपने हर एक क्षण की, हर मूड की जिम्मेदारी स्वयं लेनी पडती है, तो कभी अपराध भाव, कभी उदासी, कभी असंतोष, कभी आत्मविश्वास की कमी यानि सभी के सभी नकारात्मक भावों का सामना करना पड़ता है. जीवन एक कड़वी दवा लगने लगता है और आसपास की शांति भी असहनीय लगने लगती है.

अभी तक गला ठीक नहीं हुआ है न उसका और न ही नन्हे का. शायद आने वाले सफर और आने वाले दिनों के बारे में सोचकर ही मन परेशान है, या फिर शरीर की अस्वस्थता के कारण सदा उत्साहित रहने वाला मन मुरझा सा गया है, हो सकता है इसका कोई और कारण भी हो, जिसके बारे में वह सोचना नहीं चाहती, जिसने जिन्दगी की गाड़ी में पिछली सीट ले ली है. सुबह उसकी असमिया सखी का फोन आया था, उसने एक ऐसी बात बताई जो उसके परिवार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, उसके परिवार में एक नया मेहमान आने वाला है और उसने यह बात किसी और को बताने से मना किया है.




Thursday, January 30, 2014

पूजा का अवकाश


आज मंगलवार है और कल बुधवार, यानि वह दिन जब उन्हें अपने घर में सांस्कृतिक संध्या और रात्रि भोज का आयोजन करना है, लेकिन कोई भी कार्य बिना किसी बाधा के सम्पन्न हो जाये ऐसा कहीं हो सकता है ? जिन्हें निमन्त्रण दिया है वे यदि व्यस्त हों, उपस्थित न हो सकते हों तो सारा आयोजन ही व्यर्थ हो जाता है. पहले केवल एक परिवार के देर से आने की बात थी पर अभी जब दूसरी सखी ने भी कहा तो मन...बेचारा नाजुक सा मन मुरझा ही गया. एक दुःख, पीड़ा का अहसास हो रहा है, यह पीड़ा रिजेक्शन के कारण उत्पन्न हुई है. जिन्दगी में ऐसा कई बार हुआ है और होगा पर हर बार कचोट उतनी ही नई लगती है. शायद उसका मन कुछ ज्यादा ही sensitive है पर जिस बात पर वश नहीं उसे लेकर क्यों परेशान हुआ जाये जैसे कोई हाथ पर रखा कीड़ा झटक दे या जुल्फों से पानी झटक दे उसी तरह दिमाग से इस बात को झटक कर उत्सव की तयारी में जुट जाना चाहिए. वे यह उत्सव अपनी ख़ुशी को सबके साथ मिल कर  बाँटने के लिए मना रहे हैं, यदि कोई नहीं शामिल हो सकता तो कोई बात नहीं, वे तब भी प्रसन्न  रहेंगे. अभी मात्र साढ़े नौ हुए हैं, सारा दिन उसके सामने हैं अगर सुबह-सवेरे ही मन कुम्हला गया तो दिन ढलते-ढलते तो...

आज वे दिगबोई गये थे, कुल चार परिवार मिलकर पूजा देखने, दशहरे की दो छुट्टियाँ अभी शेष हैं. पिछले तीन दिन पूजा के उल्लास में कैसे बीत गये पता ही नहीं चला. बुधवार को उन्होंने रात्रि भोज का आयोजन किया था, जो खासा ठीक रहा बस ‘कोफ्ते’ कुछ ज्यादा मुलायम नहीं बने थे. उसके अगले दिन यानि कल वे तिनसुकिया गये उसने छोटी बहन की दूसरी बेटी के लिए ऊन खरीदी लाल रंग की बेबी वूल...एक सखी के बेटे के लिए एक ड्रेस और जून और स्वयं के लिए जूते. नन्हे ने पहली बार Gents beauty parlor में hair cut करवाए. जून का स्वास्थ्य थोड़ा सा नासाज है, वैसे भी छुट्टियों में आलस्य घेर लेता है, वह भी पिछले दिनों गरिष्ठ भोजन के कारण भारीपन का अनुभव कर रही थी.

एक खुशनुमा इतवार की सुबह ! हल्के बादल सुबह से ही थे, अभी-अभी रिमझिम वर्षा होने लगी, पर चंद घड़ियों की मेहमान थी, अब धूप निकल आई है. कल दोपहर उन्होंने ‘साहेब’ देखी, अनिल कपूर का अभिनय अच्छा है. कल रात्रि नन्हे ने ‘स्पीड’ देखी. जून और उसे नींद आ गयी पर वह  अकेले ही जग कर देखता रहा. उसका गृहकार्य अभी भी शेष है.

आज दस दिनों के बाद नन्हा स्कूल गया है, कल शाम से तैयारी कर रहा था, थोड़ा सा परेशान हुआ पर सुबह ठीक था. प्रोजेक्ट वर्क सभी पूरे कर लिए थे. कई दिनों बाद एकांत मिला है, सिर्फ चिड़ियों की चहचहाहट सुनाई दे रही है. आज सुबह उसकी छात्रा आई थी, वह अभी और पढ़ना चाहती है, नूना को भी पढ़ना होगा, हिंदी कविता इतनी आसान नहीं कि बिना पढ़े ही पढाई जा सके, फिर उसके जाने के बाद जून ने, जो उसका बेहद ख्याल रखते हैं, तुलसी की चाय बनाकर दी, सुबह पहनने के लिए स्वेटर भी निकाल कर दिया था रात को. पड़ोसिन से उसके बेटे के प्रोजेक्ट के बारे में बात हुई, उनके विचार टकराए, पर इससे घबराना क्या ?  पीटीवी पर किन्हीं अदीब से गुफ्तगू सुनकर जहन में कई सवाल आ खड़े हुए, मसलन लोग किस बात पर यकीन करें, ईश्वर की सत्ता को किस सीमा तक स्वीकारें या नकारें या इस बात को बिलकुल ही नजर अंदाज कर दें. जीवन को सही रूप से जीने के लिए आधारभूत मूल्य क्या हैं ? कौन से आदर्श अपनाएं और किन नैतिक गुणों को अपनाएं. इस संसार में स्वयं को किस तरह योग्य बनाएं और अपनी योग्यता सिद्ध करें, जीवन किन बातों से सार युक्त बनता है और किन से सार हीन ! विश्वास और श्रद्धा का केंद्र क्या हो, बिना पतवार की नाव की तरह जीवन भर इधर-उधर न भटकते रहें. जीवन का उद्देश्य क्या हो? क्या जीवन के मार्ग में जो भी आए जो सहज प्राप्त हो उसे साधते चलना और स्वयं को उसके अनुकूल ढालना ही जीने की सच्ची कला नहीं ?  अपने आस-पास के लोगों, वातावरण और प्रकृति को खुशनुमा बनाना, उनके विकास में सहायक होना ही कर्त्तव्य नहीं, अपने समय का सदुपयोग कर विभिन्न कलाओं का सृजन कर मन को व्यर्थ के विचारों से मुक्त रखना ही क्या जीवन का साधन नहीं, नैतिक गुण और आध्यत्मिकता क्या स्वयंमेव ही नहीं समा जायेंगे ऐसे जीवन में जो स्वार्थ के दायरे से मुक्त हो. जहां द्वेष व परायेपन का अहसास न हो, जहां आलस्य व प्रमाद का स्थान न हो, जहाँ मन में सुख व शांति हो, जहां प्रियजनों के प्रति वास्तविक प्रेम हो, जहाँ मानसिक स्वतन्त्रता हो, सहज प्राप्य सम्पत्ति से पूर्णतया संतोष हो, लोभ, क्रोध और राग-द्वेष आदि दुर्गुणों से परे हो. वह लिख ही रही थी कि फोन की घंटी बजी, मुम्बई से जून के लिए कोई फोन था, उसने उन्हें दफ्तर का नम्बर दिया पर सम्भवतः जून वहाँ भी नहीं मिले.



Wednesday, January 29, 2014

हावड़ा ब्रिज - कोलकाता की शान


आज उनका टीवी खराब हो गया, टीवी के बिना दिन जैसा भी गुजरे रोज से काफी अलग होगा. टीवी उनके जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बन गया है. जून के अनुसार शाम तक ठीक हो जायेगा. कल शाम मीटिंग थी, क्लब में कुछ खा लिया, आठ बजे जब जून और नन्हा भोजन कर रहे थे, उसे जरा भी भूख नहीं थी, दस बजे उसे भूख लगी, उस समय कुछ खाना ठीक नहीं है यह सोचकर नहीं खाया, पर खाली पेट नींद काफी देर तक नहीं आ रही थी.

अब धूप में पहले की सी तेजी नहीं है. सुबह नाश्ता करने के बाद उसने नन्हे के लिए पेपर की छोटी-छोटी कारें बनायीं जो हावड़ा ब्रिज पर खड़ी की जाएँगी. उसका प्रोजेक्ट लगभग पूरा हो गया है, जिसे पिछले कई दिनों से वह और उसके मित्र मिलकर बना रहे थे. आज दो अक्तूबर है, बापू की १२८वी जयंती ! दोपहर को दूरदर्शन पर ‘गाँधी से महात्मा’, श्याम बेनेगल की फिल्म ‘Making of Mahatma’ का हिंदी रूपांतरण देखा. गाँधी दिल के और करीब हो गये. आज क्लब में कार्यक्रम है पर इतने बड़े महापुरुष के जीवन पर फिल्म देखने के बाद कुछ और देखना शेष नहीं रह जाता. बापू के पुत्रों को विशेषकर हरिदास को उनसे शिकायत रही, वैसे कुछ न कुछ शिकायत हर बेटे को अपने पिता से रहती ही है.

कुछ देर पहले छोटी बहन से फोन पर बात की, उसने अभी तक नवजात शिशु का नाम नहीं सोचा है, ३.४ केजी की गोरी सी बच्ची का नाम जो बड़ी बहन से कुछ मिलता-जुलता भी होना चाहिए. जून आज तिनसुकिया गये हैं, वापसी की टिकट के लिए, नहीं मिलने पर जाने की टिकट भी कैंसिल कर देंगे, सुनने पर यह वाक्य उसे कठोर लगा किन्तु यथार्थ यही है. आजकल बिना रिजर्वेशन के सफर करना उनके लिए असम्भव है, अपनी सुविधा की कीमत पर परिवार के साथ त्योहार में शामिल नहीं हुआ जा सकता. यह आधुनिक समाज की देन ही है जिसने एक ओर प्रगति की है दूसरी ओर कठिनाइयां भी बढ़ा दी हैं. घर से इतनी दूर रहने का खामियाजा ही समझ लें. पर यहाँ रहना उसे सदा से ही भाता रहा है और भाता रहेगा जब तक भी यहाँ रहना पड़े.

उसकी एक सखी बीएड करना चाह रही है, और उससे नोट्स मांग रही है. उसे आश्चर्य हुआ ऐसा कहते हुए वह बहुत निरीह लग रही थी, पहले कुछ ज्यादा ही उत्साहित थी. यही तो जिन्दगी है, जो कभी सिखाती है कभी झकझोरती है. हर दिन एक नया संदेश लेकर आता है. अगर कोई ध्यान से देखे और समझे तो !

कल सुबह जून को तिनसुकिया में कम्प्यूटर लिंक न होने के कारण वापस लौटना पड़ा पर उनके मित्र के छोटे भाई( जो एक ट्रेवल एजेंट बन गया है) ने टिकट ले ली है, उन्हें ख़ुशी तो हुई पर छोटी ननद उसी समय ससुराल जा रही है, उससे शायद मिलना न हो. शाम को वे टहलने गये मौसम में एक ठंडक सी आ गयी है और हरसिंगार के फूलों की महक भी. उनके हरसिंगार में अभी कलियाँ ही आई हैं. जून ने उस दिन गुलाबों की कटिंग भी कर दी है, अगले हफ्ते वे गोबर भी डलवा देंगे. कल शाम बल्कि रात को ही पड़ोसिन ने कागज की कारें बनाने के लिए कहा, पर उसके पास समय नहीं था, मना करने में अच्छा नहीं लग रहा था, पर किया, it means she is learning to be assertive, अपने वश से बाहर के काम को भी पहले वह ले लेती थी फिर चाहे कितना परेशान होना पड़े. जून अभी आने वाले हैं, उन्हें आज अस्पताल भी जाना है, उसके कान में हवा की कुछ खुसुर-पुसुर सी लग रही थी, आज सुबह से ठीक है, फिर भी कहा है न कि छोटे रोग की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए.  




Tuesday, January 28, 2014

PSLV-C1 भारत का पहला उपग्रह


दस बजने में कुछ ही मिनट शेष हैं, सोचा था उसने, कुछ देर संगीत का अभ्यास करेगी पर पीटीवी चल रहा है और कोई वजह नहीं कि वह इसे पसंद न करे, उर्दू जबान भी अच्छी लगती है और दिल को छू लेने वाली उनकी कहानियाँ भी. क्यों भाती हैं, यह पता नहीं, लेकिन एक अपनापन सा महसूस करती है. लगता है अपने बचपन के दिनों में लौट गयी है. Mind Trap पढ़कर भी बचपन याद आया था पर वे यादें उदास कर देने वाली हैं जैसे कि उस नन्ही उम्र में हुए अनुभव और सुने कटु वाक्य, ड्रेस के कारण सुने तीखे वाक्य, इन सबके साथ स्वयं ही जूझती बड़ी हुई अपनी उलझनें किसी के साथ बांटी हों ऐसा याद तो नहीं पड़ता, खैर...जो बीत गया सो बीत गया पर यह सही है कि उसका खामियाजा अभी तक भुगतना पड़ रहा है. वैसे MIND TRAP अच्छी किताब है, अपने आपको और आसपास के लोगों को समझने का तरीका सिखाती है, कहती है, nothing is good or bad, thinking makes it that. according to book well being has at least five requirements.
१.      fulfillment in our endeavors
२.      intimacy in relationship
३.      personal growth
४.      rest
५.      recreation
उसे लगता है किताब यह सिखा रही है कि किसी भी इन्सान को पूरी तरह खुश व स्वस्थ रहने के लिए अपनी भावनाओं और अपने आदर्शों को ध्यान में रखकर सजग होकर कृत्य करने चाहिए.
अभी कुछ देर पहले एक फोन आया उसे फोटोग्राफर को सूचित करना है अगली मीटिंग में आने के लिए. कई दिनों बाद माली ने आज लॉन की घास काटी है. कल शाम को एक सखी आई थी वे साथ साथ टहलने गये, वह मनोविज्ञान पढ़ चुकी है, घटनाओं का विश्लेषण कर सकती है, उससे बातें करना अच्छा लगता है. नन्हा स्कूल प्रोजेक्ट में हावड़ा ब्रिज बना रहा है. उसने आज एक मित्र के बस स्टैंड पर न आने पर उसे फोन किया, वह उसका ख्याल रखता है, दोस्ती निभाना सीख रहा है. आजकल हेयर स्टाइल भी बदल दी है उसने.

दीवाली पर घर जाने के लिए ठीक एक महीने बाद की उनकी रिजर्वेशन हो गयी है राजधानी में. कल दो पत्र लिखे, दीदी को कार्ड भेजा, बड़ी भांजी के लिए कार्ड लाना है अगले महीने उसका जन्मदिन है. आज सुबह इण्डोनेशिया में हुई विमान दुर्घटना के चित्र देखे, लोग जन्मते हैं, मरते हैं, किसी के चले जाने पर भी यह दुनिया ज्यों की त्यों रहती है. जब तक साँस तब तक आस, यह कितना सही है.

कल इतवार था, दोपहर को संजीव कुमार और जाहिदा की एक पुरानी फिल्म देखी, ‘अनोखी रात’ जिसके गीत अति मधुर थे. शाम को नन्हे का प्रोजेक्ट कार्य उसके मित्रों के सहयोग से अभी चल ही रहा था, कि एक मित्र का फोन आया, क्लब में डिनर के लिए निमंत्रित किया था, पर वहाँ कुछ भी पसंद का नहीं था सो वे पहली बार बाजार में एक होटल में भोजन के लिए गये, माहौल, बैठने का स्थान सभी कुछ ठीक था पर खाना संतोषजनक नहीं था, तेल और मसालों से भरपूर. आज सुबह टीवी पर PSLV_C1 के द्वारा भारत के प्रथम उपग्रह का अपने ही रॉकेट से छोड़े जाने का आँखों देखा हाल सुना, देखा.



Friday, January 24, 2014

इंदिरा गाँधी मुक्त विश्व विद्यालय


वर्षा की झड़ी जो कल दिन भर और शायद रात भर भी जारी थी, अभी भी जारी है, मौसम भीगा-भीगा सा ठंडा हो रहा है जैसे कोई पहाड़ी प्रदेश हो ऐसा उनका शहर लग रहा है. आज सुबह उसकी छात्रा संस्कृत टेस्ट के कारण नहीं आई, नन्हे का टेस्ट भी इस बार अस्वस्थता के कारण नहीं हो सका, अब वह ठीक है, कल रात देर तक पढ़ाई करता रहा, अपने आप पर निर्भर रहना उसने सीख लिया है. जून कल शाम नन्हे के लिए नाश्ता बनाते वक्त ऊँगली जला बैठे, परेशान हो गये थे, जब बाहर टहलते समय उन्होंने मन को भाएँ ऐसी बातें कीं तो उनका मूड बदल गया, हर इन्सान के भीतर एक बच्चा छिपा रहता है जो प्यार, दुलार और पुचकार तथा सुरक्षा चाहता है. आज सुबह तैयार होते वक्त उसे लगा कि जिन्दगी में कोई आकर्षण ही नहीं रह गया है, पर वह क्षणिक अनुभूति थी, जून और नन्हे के कारण जीना बहुत मोहक है.

‘We know and We know and We know but  world needs the clarity of our thoughts’. Each and every moment of life she needs some…noble thought, cute idea or virtue, a nice word or any good feeling or any new and special idea of any of the wonderful writers, poets and thinkers of this world. She lives in their ideas and drink the nectar of their words ! words always attract her and they do a wonderful job on her. She thinks no one else can do it for her. Sometimes others flatter her that makes  her happy bur at this moment she is ecstatic, means happy beyond the general sense of well being. She wants to help all those in need and want to sing with all the sweetness and depth of the heart.
….And then she forgot for sometime that freedom is not to misuse, one should follow some doe’s ant don'ts ! and she felt guilty about feeling guilty.

She read-
Surely the only thing that makes us healthy within is authenticity, living with truth. In the equanity of mind, the silent lake of consciousness reflects the majesty of our amazing intelligent universe.

आज भी मौसम खुशगवार है, पीटीवी पर टालस्टाय का लिखा एक ड्रामा देखा, किसी के जुर्म की सजा किसी को भुगतनी पडती है, एक परिवार की और खासतौर से उस व्यक्ति की दुःख भरी कहानी ! कल शाम उसने जून की मदद से हिंदी में सृजनात्मक लेखन के लिए इग्नू में एक कोर्स के लिए एक फार्म भरा. कल दोपहर से ही जून का मूड बहुत अच्छा था, शायद उस खबर का असर हो जो उन्होंने उसे नहीं बताई थी की उनके वे मित्र अब यहाँ से नहीं जा रहे हैं. वह वाकई बहुत खुश थे, उनके हाव-भाव और शब्दों से उसे लग रहा था. इस बार के बुलेटिन में उसका नाम फोन नम्बर के साथ आया है, दो फोन आ चुके हैं. कल लाइब्रेरी से एक नई किताब लायी, mind trap, जरूर अच्छी होगी. इस हफ्ते खतों के जवाब नहीं दे पायी है, एक खास तरह का आलस्य घेरता जा रहा है, जो कुछ कामों को टालता है और कुछ को करने की प्रेरणा देता है. और अब ग्यारह बजने वाले हैं, उसे फुल्के सेंकने हैं, दाल छौंकनी है, चावल बनाने हैं, सलाद काटना है, सब कुछ जून के आने से पहले पहले !

Thursday, January 23, 2014

हिंदी सप्ताह


यह कर देंगे, वह कर लेंगे, संकल्प नित नये बुनता है मन
सम्मुख है जो पल अपने जीना उसको सीख न पाए

अजीबोगरीब उलझनों में स्वयं को उलझा लेता है मन का पागल हिरण फिर उस जाल में से निकलने का प्रयास करता छटपटाता रहता है, मन की कैसी अजीब दुनिया है यह, इसी से निस्तार पाने के लिए ध्यान, योग साधना की खोज हुई होगी, मन में विचारों के बवंडर उठते ही रहते हैं, चारों ओर धूल ही धूल, कुछ भी स्पष्ट दिखाई नहीं देता, धूल जब स्थिर होकर बैठ जाती है तब भी नहीं, इस उहापोह से निकलने के लिए j Krishnamurti इंटेलिजेंस को जगाने की बात करते हैं. इन्सान का मन असंतुष्ट सा क्यों रहता है, खोया-खोया सा, बिखरा-बिखरा सा, लुटा-पिटा सा. क्यों नहीं सदा एक सा रहता, शांत...स्वयं में डूबा हुआ, पर क्या वह भी पलायन नहीं होगा. किताबों से दूर जाना भी तो वह इसीलिए चाहती थी कि उनमें लिखी बातें भी दिमाग को एक दूसरी ही दुनिया में ले जाती हैं. वह भी तो एक मानसिक नशा हुआ या नहीं, वास्तविकता से दूर भागना ही तो नशा सिखाता है. जून कहीं ज्यादा स्थिर मना दिखाई देते हैं. वह सबल भी मालूम पड़ते हैं और वह कई बार न चाहते हुए भी उनकी हर बात मान लेती है.

आज नन्हा घर पर है, परसों शाम से ही उसे जुकाम ने परेशान किया है, सम्भवतः पिछले दिनों शाम को डेढ़-दो घंटे तैरने का परिणाम है. मौसम आज सोमवार को भी ठंडा है, उस दिन यानि शुक्रवार को उनके बगीचे के लिए आधा ट्रक गोबर आया था पर तब से लगातार वर्षा से बुरी तरह भीग गया है, अब धूप निकलने पर ही उसका उपयोग किया जा सकता है. कल सुबह जून उसे ‘हिंदी सप्ताह’ में कविता पाठ प्रतियोगिता में ले गये और दोपहर बाद अपना काम (रिपोर्ट आदि लिखना) करके उसे जीके पढ़ाते रहे. शाम को वे टहलने गये, चारों ओर शांति थी और नन्हा भी चुपचाप था, एक अनोखी निस्तब्धता का अहसास हो रहा था. कल आखिर उसकी क्रोशिये की जैकेट भी पूरी हो गयी. कल ‘विश्वकर्मा पूजा’ है, उन्हें जून के दफ्तर जाना है लंच के लिए, हर साल इस दिन वे डिपार्टमेंट जाते हैं, कुछ देर उनके रूम में बैठते हैं और फिर सामूहिक भोज होता है, पूजा सुबह ही हो जाती है.

उसने पढ़ा-
Meditation is total release of energy. When there is complete understanding of oneself, then there is the ending of conflict and that is meditation. It means awareness, both of the world and of the whole movement of oneself, to see exactly what is, without any choice, without any distortion. We can know ourselves in relationship, the observation of myself takes place only when there is response and reaction in relationship. To have a relationship with another without friction causes no wastage of energy. That is possible only when we understand what love is, and that is the denial of what love is not ie jealousy, ambition, greed, self centered activity.

All our life is based on thought which is measurable. It measures God, it measures its relationship with another through the image. It tries to improve itself according to what it should be. Meditation is the seeing of what is and going beyond it. When the body, mind and heart are completely one then one lives a different kind of life.

आज सुबह बहुत दिनों के बाद पीटीवी पर धारावाहिक देखा, ‘यह आजाद लोग’, दोनों देशों के हालात एक से हैं, समस्याएं एक सी हैं और लोगों के सोचने का ढंग एक सा है. एक अजीब सी कशमकश में ले जाकर ड्रामा वापस सतह पर ले आता है, जैसे कोई डूबते डूबते तैर कर वापस आ जाये. नन्हा आज स्कूल गया है, जून ने कुछ देर पहले पूछा, कुछ मंगवाना तो नहीं है बाजार से, उन्हें घर का ध्यान सदा रहता है. कल शाम जून दीपावली पर घर जाने के लिये बहुत उत्सुक हो रहे थे, बड़ी ननद के घर आने के कारण माँ-पिता इस बार नहीं आ पाएंगे. यात्रा की बातें करते-करते ही उनके मन पुलकित हो उठे, यात्रा सचमुच मन को जीवंत कर देती है.






Wednesday, January 22, 2014

किताबों की दुनिया


आज मौसम अच्छा है, ठंडी हवा, बादल और हरियाली ! गुलदाउदी के पौधों के लिए सहारे की जरूरत है, ज्यादा पानी पड़ने से पौधे तिरछे हो गये हैं. नैनी का लड़का बांस के खप्पचे तैयार कर  रहा है, फिर उन्हें बांधेगे और अब नीम की खली भिगोने का भी समय हो गया है. अभी-अभी उसी सखी से बात की, मन भर आया, अभी तो जाने की बात भर है, जब वास्तव में जा रहे होंगे तब... वे भी तो उन्हें उतना ही याद करेंगे. कुछ देर पूर्व पड़ोसिन से बात हुई उस दिन सैंडविच काटने के कारण एक सखी को बांह में दर्द हो गया था, उसे अस्पताल तक जाना पड़ा पर उसके साथ बात करने पर उस सखी ने यह बात नहीं बताई, शायद उसकी प्रतिक्रिया (कि वह बहुत नाजुक है) याद करके या उसकी तरह वह अपनी कमजोरी जाहिर न करना चाहती हो. शाम को वह घर पर ही रही स्वेटर बनाते हुए. अचानक उसे ध्यान आया यूँ अपने आप से बातें करते चले जाना कितना आसान है पर चिन्तन करना, सोचना-समझना कितना मुश्किल, हर पल मन पर नजर रखना यानि कि सब कुछ निरपेक्ष भाव से देखना शुरू करना, बिना किसी तुलना या भेद भाव के, और वह देखना ही सही सम्बन्धों का आरम्भ होगा. सुबह जून ने कहा, आलस्य के कारण शाम को उनके लिए उसने oats नहीं बनाये थे, बात कुछ हद तक सच भी थी पर चुभ गयी और अहम् का गुब्बारा पिचक गया, लोगों से कैसे पेश आयें कि न ही उन्हें दुःख हो, न ही स्वयं को, बातचीत करना दुनिया की सबसे बड़ी कला है जो स्वयं ही सीखनी पडती है, किसी भी स्कूल में नहीं सिखाई जाती.

क्लब में आज डिबेट है, कपड़े धोते समय मन में विचार आया क्या उसे सुनना सफल होगा, या फिर क्यों जाएँ वे सुनने ? उसकी दोनों सखियाँ नहीं जाना चाहतीं. उसके पास जाने का सबसे बड़ा कारण है लोगों को बोलते हुए सुनना, ऐसे तो टीवी पर हर दिन कितने ही लोगों को सुनते हैं पर अपने आस-पास के लोगों में से कुछ को अपने विचार रखते देखना सचमुच एक सुखद अनुभव होगा. मात्र सुनना और उन पलों की सुन्दरता को महसूस करना.

आज सुबह प्रमाद के कारण उठने में फिर देर हुई, जून तो जल्दी –जल्दी तैयार होकर दफ्तर चले गये पर वह सोचती रही कि दुनिया भर की किताबें पढने के बाद भी अगर उसमें इतना सा भी बदलाव नहीं आया तो व्यर्थ है पुस्तकों का पढना. स्वयं सोचना सीखना चाहिए. दूसरों के ज्ञान के सहारे अपनी नैया नहीं खे सकते. आधी से ज्यादा जिन्दगी बीत चुकी है पर सही मायनों में जीना अभी तक नहीं आया. ले दे कर कुल तीन प्राणी हैं घर में, उनमें भी आपस में कभी न कभी कोई टकराव हो ही जाता है चाहे वह कितना ही छोटा क्यों न हो, पर क्या यह अनुचित है? बात यह नहीं कि टकराव अनुचित है या नहीं, पर उसकी वजह उसकी नासमझी भी तो हो सकती है या सही संवाद का न होना भी, और ये बातें किताबों से पढकर नहीं सीखी जा सकतीं, सीख भी लें पर उसे अमल में लायें तो सही.

उसकी रोटी, जिसकी मेहनत, जिसका श्रम है ! आज घर कितना साफ लग रहा है, दर्शन पर किताबें पढने से अच्छा तो उन पर जमी धूल साफ करना है, मन हल्का है, तन शायद थका है पर यह थकान संतोष देती है, कुछ करने का संतोष. आज फोन पर किसी से कोई बात नहीं की, समय ही कहाँ था, कल शाम वे क्लब जाने के लिए तैयार हो रहे थे, एक परिवार मिलने आ गया, हंस कर अपने पतिदेव की शिकायत करना आगन्तुका की आदत है, उसकी नन्ही बेटी बातूनी हो गयी है, और पुत्र पहले की तरह है शर्मीला. कल जून ने बताया उन्हें एक पेपर प्रस्तुत करने दिल्ली जाना होगा. नन्हे की आजकल स्वीमिंग कोचिंग चल रही है, वह खुशदिल, शांत और मिलनसार बच्चा है, सुबह-सुबह उठने में उसे परेशानी होती है पर रात देर तक पढ़ सकता है.