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Monday, June 19, 2017

जामुनी बयार


दो दिन फिर निकल गये, आज नये सप्ताह का प्रथम दिन है. इस समय बगीचे की हल्की हवा में झूले पर बैठकर डायरी लिखना किसी स्वर्गिक सुख की याद दिला रहा है. आंवले और गुलमोहर के पेड़ों की छाया सामने पड़ रही है. पीछे से कटहल और जामुन के पेड़ों से छनकर आती हवा और धूप पीठ को सहला रही है. उसके आगे बगीचे में गेंदे के फूलों तक चमकदार धूप बिखरी हुई है. बोगेनविलिया के लाल फूलों के गुच्छे हवा में झूल रहे हैं. पीला बोगेनविलिया गुलमोहर के सिर पर ताज बना खिला हुआ है. दुनिया इतनी सुंदर है पर लोग थमकर देखते ही नहीं. कभी-कभी घूमने जाते हैं तब भी थककर लौट आते हैं. खैर...कल झाड़ू वाले जीत गये हैं, पर सरकार बना सकें इतनी सीटें नहीं जीत पाए. देखें अब कैसे बनती है सरकार. जून कुछ ही देर में आने वाले हैं. आज उसने बथुए का रायता व वेज बिरयानी बनाई है. उस दिन जो काम सोचे थे, लगभग सभी शेष हैं, पत्रिका के लिये लेख अलबत्ता भेज दिया है. कल शाम क्लब की मीटिंग है, आज शाम उनके यहाँ सत्संग. इसी तरह दिन हफ्तों में बदल जायेंगे और नया वर्ष आ जायेगा.

फिर कुछ दिनों का अन्तराल..आज लिखने के सुयोग हुआ है. जून आज दिगबोई गये हैं. अभी कुछ देर में बच्चे पढने आ जायेंगे, यह उनका अंतिम वर्ष है. उसके पास दोपहर को ज्यादा समय होगा. बाल्मीकि रामायण की पोस्ट ज्यादा नियमित होगी तब. कल बड़ी भतीजी का जन्मदिन है, उसके फोटो देखकर सहज ही एक कविता बन गयी, शाम को उसे भेजेगी. आज आखिर दरवाजे पेंट करने वाला कारीगर आ ही गया है. गर्म पानी का बर्नर भी ठीक हुआ. कम से कम इस घर में जो भी समस्या होती है, उसका इलाज हो जाता है. परसों क्लब की मीटिंग है, एक सदस्या का विदाई समारोह भी, जिनके लिए भी उसने कविता लिखी है. दिसम्बर आधा बीत गया है, नये वर्ष के लिए कार्ड भेजने का यह सही समय है. उसे एक लिस्ट बना लेनी होगी.


आज इस मौसम का सबसे ठंडा दिन है. सुबह बादल थे. दोपहर को कुछ देर धूप निकली और इस समय फिर बदली छा गयी है. सुबह सामान्य थी, लॉन में हेज के पीछे ढेर सारे सूखे पत्ते जमा हो गये हैं, उन्हें साफ करवाना है. दोपहर को लंच में सोयाबीन बनाया था, अब बढ़ती हुई उम्र के साथ भोजन हल्का हो तभी ठीक है. बाहर से किसी बच्चे के रोने की आवाज आ रही है. यहाँ दिन भर किसी न किसी की आवाज अति रहती है, नैनी का संयुक्त परिवार है. पूर्ण शांति का अनुभव इस कमरे में नहीं हो पाटा. बादलों के कारण यहाँ प्रकाश भी थोड़ा कम है, कमरा इतना बड़ा है कि तीन दीवारों पर तीन बल्ब भी आधे कमरे को पूरी तरह प्रकाशित नहीं कर पाते. शाम को एक परिचित के यहाँ जाना है, जिनके साथ वे अरुणाचल प्रदेश की छोटी सी यात्रा पर जाने वाले हैं.

Thursday, January 5, 2017

हाथ में माउस


दोपहर के दो बजने को हैं. किचन में सफेदी हो रही है. बाहर लॉन में नया माली घास काट रहा है. उसके दाहिने हाथ में हल्का सा दर्द कभी-कभी महसूस होता है, माउस पकड़ने का प्रभाव लगता है. आज ब्लॉग पर नई कविता पोस्ट की है. कुछ दिन से वह दिखाई नहीं दे रही थीं, पता चला ब्लौगर रश्मिप्रभा जी का किडनी का आपरेशन था वापस घर आ गयी हैं. उसने प्राणायाम पर बी के एस आयंगर जी की पुस्तक पढ़नी शुरू की है.

पिछले दो दिन डायरी नहीं खोली, उन सबके भीतर एक मार्गदर्शक है जो पग-पग पर उन्हें रास्ता दिखता है पर वे दिमाग पर ज्यादा भरोसा करते हैं और उसकी आवाज को अनसुना कर देते हैं. भय होने पर वही उन्हें सचेत करता है और कोई आवश्यक कार्य यदि वे भूल गये हों तो वही याद दिलाता है. वह उनका सद्गुरू भीतर ही रहता है. वही परमात्मा का दूत है. उस दिन अपने भीतर से आती एक आवाज सुनी थी कि वह अस्वस्थ होने वाली है और आज सुबह कंघी करते समय दाहिने हाथ में पीड़ा का अनुभव हुआ, शायद कम्प्यूटर पर गलत तरीके से माउस पकड़ने के कारण ऐसा हुआ हो या केवल हाथ की मांसपेशियों के ज्यादा उपयोग करने के कारण ही. एक्सरे भी कराया है. माली गमले धो रहा है, जिसमें वे गुलदाउदी के पौधे लगायेंगे. नैनी की बेटी पिताजी के साथ खेल रही है. सवा साल की बच्ची और बयासी साल के वृद्ध की मित्रता देखते ही बनती है. नार्वे में हुआ हत्याकांड तथा बमविस्फोट कितना भयानक था. उस दिन दीदी से बात हुई, कुछ लिखा भी था, जिसे टाइप करना शेष है.

शाम को सेंटर में क्रिया है. अगले महीने रूद्र पूजा है, इस बार वे पूरे परिवार की ओर से पूजा में भाग लेंगे. सभी को आशीष मिलेगा, मिल ही रहा है, वे उसे पहचानने में सफल होंगे. जून को मनाना होगा, लेकिन वह अपनी बुद्धि पर ज्यादा भरोसा करते हैं. कल सेंटर में एन ई एपेक्स बॉडी का सेमिनार है, वहाँ भी वह जाएगी एक सखी के साथ, सम्भव हुआ तो. भगवद गीता में पढ़ा, अहंकृत भाव ही बंधन का कारण है. कुछ होने की जगह यदि कुछ भी न होने का भाव रहे तो कोई बंधन नहीं है. आत्मा न कर्ता है न भोक्ता है. मन ही कर्मों का जाल रचता है और दुःख पाता है. परमात्मा उसे अपनी ओर खींच रहे हैं. एक-एक करके भीतर से सब वासनाओं को निकालने के लिए प्रेरित कर रहे हैं.


जून आज नुमालीगढ़ गये हैं. पिताजी ने कहा, उन्हें केश कटवाने हैं. गाड़ी मिल सकती हो तो वे जायेंगे. उसका संकोच देखकर वह पैदल ही बाजार जाकर कटवा आए हैं. मन में जो विचार एक बार आ गया उसे पूरा करना ही है. यही स्वभाव जून का भी है. एक बार जो संकल्प आ गया उसे पूर्ण किये बिना चैन नहीं आता. नूना के संकल्पों में इतना बल नहीं है. मौसम आज भी सावन का है. कल शाम को जून ने मालपुए बनाये, तीज की प्रतीक्षा उनसे नहीं हो सकी. कल शाम नन्हे से बात हुई अब उनकी कम्पनी में इक्कीस लोग हो गये हैं. 

Monday, February 18, 2013

पिकनिक का भोज



जून का फोन आया है, वह नाहरकटिया जा रहे हैं, लंच पर देर से आएंगे. उसने बहुत दिनों बाद वह नीली साड़ी पहनी है, जो छोटी चाची ने खरीदी थी, सुंदर है, लेकिन चाचीजी अब पहले जैसी नहीं रहीं, परेशानियों ने उन्हें तोडकर रख दिया है, वक्त से पहले बूढी हो चली हैं. कल लगभग एक वर्ष बाद वे अपनी पुराने घर के पड़ोस में गए, उड़िया पडोसिन के यहाँ, वहाँ एक और परिचिता मिलीं, दुबली-पतली सी, पूरी तरह से अपने छोटे छोटे दो बच्चों में व्यस्त..कल पिता का पत्र आया है, जमीन की रजिस्ट्री जून के नाम हो गयी है. और शायद इसी वर्ष के अंत तक उनका मकान बन भी जाये. थर्मोकोल पर पेंटिंग करने में उसे बहुत आनंद आ रहा है, इसके बाद कागज पर करेगी. लेकिन वह एक घंटे से ज्यादा नहीं कर पाती क्रोशिये का मेजपोश भी बनने वाला है फिर टैटिंग करेगी. कल रात स्वप्न में देखा, गणित पढ़ा रही है, वह भी उसका एक प्रिय काम है.

वह लॉन में झूले पर बैठ कर धूप में बाल सुखाते हुए लिख रही है, पीठ पर धूप का तेज ताप भीतर तक छू रहा है. डहेलिया का दूसरा फूल भी आधा खिल गया है. परसों इतवार को उन्हें पिकनिक पर जाना है, डेरॉक है जगह का नाम, पूरे ग्रुप के लिए “मटर-पनीर” उसे शाम को बना कर रखना है, क्योकि सुबह जल्दी निकलना है, शाम को उन्हें एक शादी में भी जाना है, पड़ोस के खाली घर में, लगता है वह विवाह घर बनता जा रहा है. The day of the feast पढ़ ली है, अब एक और अंग्रेजी उपन्यास पढ़ना शुरू किया है, सारे काम करते हुए बीच-बीच में थोड़ी देर के लिए कोई किताब पढ़ने का समय निकाल लेना, चाहे तीन-चार पेज ही क्यों न हों, अच्छा लगता है, जैसे धूप में चलते-चलते कुछ पल के लिए कोई छांह में रुक जाये. कल रात नन्हा नींद में नीचे गिर गया और उसे पता भी नहीं चला, नीचे भी आराम से सो रह था, उसकी नींद बहुत पक्की है. उसके स्कूल में आजकल ज्यादा पढ़ाई नहीं हो रही, नहीं जायेगा कहकर फिर चला गया है, उसे अनुपस्थित होना पसंद नहीं है.

कल इतवार था और पिकनिक के कारण एक यादगार इतवार बन गया, वे सुबह साढ़े छ बजे निकले और शाम साढ़े पांच बजे लौटे. मौसम अच्छा है, अब चिप्स बनाने का समय आ गया है, अगले महीने आज ही के दिन होली है. कल रात स्वप्न में छोटी बहन को देखा, बहुत कमजोर और अस्वस्थ लग रही थी, उसकी फ्रेंड्स भी थीं, वह माँ को बुला रही रही थी. आज जून को दिल्ली फोन करके पता करने को कहा है, इसी महीने उसकी डिलीवरी डेट है, ईश्वर सब कुशल करेगा.

होली पर वे क्या-क्या बनाएंगे, इस बात पर उसने जून के साथ बात की, मतभेद स्वाभाविक ही था, कभी कभी इस तरह नोक-झोंक होनी ही चाहिए, एक-दूसरे के विचार पता चल जाते हैं. आज उसने आलू चिप्स बनाये हैं. छोटे भाई का पत्र आया है फोटोग्राफ्स भी, बहुत अच्छे आए हैं फोटोग्राफ. आजकल उसने अपने दिन को कई टुकड़ों में बाँट लिया है और हर एक टुकड़े का एक खास काम है, व्यस्तता के कारण कुछ और सोचने का समय ही नहीं मिलता, समय मिलते ही कोई किताब सामने आ जाती है. कविताओं से इतनी दूर चली गयी है कि..लगता है कविता खाली समय की उपज होती है. बहुत दिनों से टीवी पर कोई कवि सम्मेलन भी नहीं आया जिससे प्रेरणा मिले.  





Monday, September 10, 2012

स्ट्राबेरी आइसक्रीम+पाइन एपल केक



Staying ok अच्छी किताब है, अभी तो आधा ही पढ़ा है और अभी पूरी तरह लगकर जिसे पढ़ना कहते हैं, उस तरह नहीं पढ़ पाती है, फिर भी मन में कहीं अंदर तक छू जाती हैं उसमें लिखी बातें, व उदाहरण. Family medical guide भी जून ने लाकर दी थी जब वह अस्वस्थ थी, अभी उसे भी पढ़ा नहीं है. कल जून फिर गया, जन्मदिन वाले घर में, बुलाया सभी को था, पर उसने कहा कि बासी भोजन सोनू व उसके लिए ठीक नहीं है, नूना को याद आया, वह कहना भूल गयी कि उसके लिए भी तो ठीक नहीं है, पेट के भारीपन की शिकायत वह भी तो कर रहा था. उन्हें आधा मीटर कपड़ा भी और देना है, उसकी बेटी की फ्रॉक के लिए जो उपहार में उन्होंने दिया, वैसा ही. उसकी सखी उनके घर नहीं आती, यह बात उसे अच्छी नहीं लगती, उसे अच्छी लगती होगी तभी वह ऐसा करती है, और अब कहीं दूसरी मित्र भी आना बंद न कर दे, उस दिन वह जबरदस्ती उसके यहाँ से गुलाब की कटिंग जो ले आयी थी. खैर...यही दुनिया है, यहाँ रूठना-मनाना तो चलता ही रहता है.

असम बंद के कारण आज दफ्तर बंद है, जून घर पर ही हैं. कल से ही बोडो का १९९ घंट का बंद भी शुरू हो गया है, देश में सबसे अधिक बंद असम में ही होते हैं. कल शाम वे उनके घर गए, पर वहाँ बैठना उसे अच्छा नहीं लग रहा था, उसकी सखी का ठंडा व्यवहार...शायद यह उसके मन का भ्रम हो.

आज देश के ५०० शहरों में नेहरु जन्मशती दौड़ हो रही है, दस लाख लोग दौड़ रहे होंगे इस वक्त. वह एक मित्र के लिए स्वेटर बना रही है. नन्हे के रोने की आवाज आयी तो वह बाहर गयी, देखा पडोस की उड़िया आंटी का हाथ पकड़े रोते-रोते वह आ रहा है, दूध वाले ने उससे कहा कि वह अपने साथ लेकर जायेगा तो वह डर कर रोने लगा. कुछ देर पूर्व ही गया था उनके घर. आज शाम को उन्हें एक और पार्टी में जाना है.

स्वप्न झरे फूल से
गीत चुभे शूल से
और हम खड़े-खड़े बहार देखते रहे
कारवां गुजर गया गुबार देखते रहे
अपनी जिंदगी पर नजर दौड़ाए तो यही दीखता है उसे. टीवी पर कुछ देर पहले स्ट्राबेरी आइसक्रीम और पाइन एपल केक बनाने का तरीका देखा, अच्छी तरह बताया है और तरीका भी आसान है. प्रेशर कुकर में भी केक बनाया जा सकता है, उन्होंने कभी प्रयास ही नहीं किया था.

आज उनके विवाह को पूरे चार वर्ष दो महीने हो गए. कल दोपहर बाहर लॉन में बैठकर Staying ok एक घंटा तक  पढ़ी. बेहद अच्छा लगा. सम्भव हुआ तो आज भी पढ़ेगी और हो सका तो भविष्य में भी. आज उसने बालों में शैम्पू किया है, शायद आज हेयर ड्रेसर के पास जाये, कभी सोचती है उसे बाल बढ़ाने चाहिए, पर ज्यादा लम्बे बाल तो उसके होते नहीं, अभी तक कुछ निश्चय नहीं कर पाई है कि...खैर देखा जायेगा. नन्हा उठकर बाहर आ गया है जहां वह बैठी है, नाश्ता करके वह बायीं ओर के साथ वाले घर में उससे एक साल छोटे बच्चे के साथ खेलने चला गया है, और वह यहाँ बैठी है कुछ सोचती हुई, दस-ग्यारह दिनों के बाद उन्हें जाना है, कल जून का मूड ऑफ था, बेहद उदास दिख रहे थे, उसके सिर में दर्द भी था शायद यही कारण रहा हो, या फिर घर की याद आ रही हो. पापा-माँ के बारे में वह उससे बात तो नहीं करते हैं, लेकिन मन में सोचते जरूर रहते हैं. इस हफ्ते के पत्र अभी लिखने शेष हैं, अभी लिखेगी. महरी अभी आई नहीं, सो बर्तन साफ होने के बाद ही खाना बनेगा. दीदी ने उसके पत्र का जवाब इस बार बहुत जल्दी दे दिया है. उसने सोचा, वह बनारस जायेगी तो अपनी किताबें भी ले जायेगी और वहाँ भी एक निश्चित दिनचर्या बना लेगी उसके अनुसार कार्य करने से परेशानी कम होगी और कार्य भी ज्यादा हो सकेगा.  



   



Wednesday, June 13, 2012

ऑरेंज कैंडी


कल संध्या जब जून ऑफिस से घर आया, उसके हाथ में एक पार्सल था जो माँ ने भेजा था. वह देखते ही समझ गयी थी कि उसमें वही बेबी एल्बम होगा जो वे लोग भी लाए थे. आज ही वह उन्हें पत्र लिखेगी, उसने सोचा. जून का दफ्तर स्थानांतरित हो रहा है अगले हफ्ते से उसे भी नयी इमारत में जाना होगा.
आज इतवार है, जून सुबह से लॉन में काम में लग गया था, जीनिया के पौधों व गुलाब की क्यारी में से घास निकाली. कल वह दो क्रोटन के पौधे व हैंगिंग पॉट में लगाने के लिये  भी पौधे लाया है, लगा भी दिए हैं और बहुत सुंदर लग रहे हैं. कल धर्मयुग में मन को छूने वाली एक कहानी पढ़ी, जून उस दिन जो किताबें लाया था उसमें भागवत् पुराण भी था.
आज के दिन के साथ कितनी मधुर स्मृतियाँ संयुक्त हैं, दो वर्ष पूर्व जून जब उनके घर आया था उसे अंगूठी पहनाई थी, और वे सोच रहे थे कि आज ही उस नवांगतुक का जन्मदिन भी होगा. पर अभी तक तो कुछ भी अनुभव नहीं हो रहा है. कल से वह सभी सामान्य कार्य आराम से कर पा रही है. डॉक्टर ने तीन दिन बाद बुलाया है.  
कल बाबू जगजीवन राम जी का स्वर्गवास हो गया. पिछले कई दिनों से यह आशंका थी कई अब वे बचेंगे या नहीं, रेडियो पर तो एक बार गलती से उनकी मृत्यु का समाचार भी दे दिए था. कल चार बजे से टीवी पर कोई मनोरंजक कार्यक्रम नहीं दिखाया गया. ऑफिस भी बंद हो गया है. दोपहर को बिजली चली गयी, गर्मी बहुत थी, बाहर आइसक्रीम वाले ने आवाज दी तो वह ले आया, ऑरेंज कैंडी, पर कड़वी थी. शायद ज्यादा मीठे के कारण कड़वी हो गयी थी.

Thursday, June 7, 2012

अमलतास रोड



कल रात को फिर वही हुआ, पर सुबह उठकर वह बहुत हल्का महसूस करती है, नींद न आने के कारण कोई थकान या सुस्ती नहीं होती. उसे लगता है कि रात हो ही न, दिन ही दिन रहे उसके लिये..शायद किसी ने तभी कहा होगा तमसो मा ज्योतिर गमयो...पर सारी दुनिया के लिये तो रात जरूरी है जून के लिये भी. वह भी कुछ ही घंटे सो पाता है, शाम को कुछ देर सो गया, पर स्नान का समय निकल जाने के कारण व उनके साथ घूमने भी न जा सकने के कारण ‘डल’ सा हो गया था. चार-पांच किताबें लाया है वह डिपार्टमेंट से, उसे बहुत पढ़ना है पर वह जरा भी नहीं पढ़ पाया. घर में माँ आलू चिप्स बना रही हैं, नूना ने एक बार कहा कि दोनों ननदें उत्साह से भर गयीं. सभी उसका बहुत ख्याल रखते हैं.

कल जून वह सब सामान ले आया है, जिसकी उन्हें आने वाले दिनों में जरूरत होगी, अभी भी पूरा सामान तो नहीं आ पाया है. कल शाम बाकी सब फिल्म देखने क्लब गए थे, वे दोनों उसी अमलतास रोड पर घूमने गए. जून ने बताया कि आज उसे असम आये पूरे तीन वर्ष हो गए. माली के न आने से उनके छोटे से लॉन व किचन गार्डन का बुरा हाल हो गया था. इतवार होने के कारण आज जून खुद ही सफाई में लगा है, एक दिन पहले नई खुरपी भी खरीद लाया. पसीने से लथपथ हो गया है वह. नई मिक्सी आयी है, पहली बार दोसे व नारियल की चटनी बनी घर में, दोपहर को वे टीवी देख रहे थे कि एक परिचित का फोन आया वे लोग तेलगु फिल्म ‘शंकरार्पण’ देखना चाहते थे, फिर सबने मिल कर देखी वह फिल्म. शाम को ‘अनंत यात्रा’ भी देखी अच्छी फिल्म थी.
  

Wednesday, January 11, 2012

लॉन में हरी घास पर


अभी कुछ देर पहले कम्पनी के दो कर्मचारी दो खिड़कियों के शीशे लगा कर गए हैं, कमरा फिर से गंदा हो गया है. शीशे के टुकड़े बिखरे हैं और धूल भी, पर उसे साफ करने का नूना का मन नहीं होता, थोड़ी थकान सी लग रही है. कल की तरह आज भी उसने लॉन में कुछ देर घास काटी, चार-पांच दिन लगातार काटने से सब कट जायेगी, जरा भी मुश्किल नहीं है यह काम. अभी तो लॉन कैसा बेतरतीब लगता है, पता नहीं वह कौन सा शुभ दिन होगा उसने सोचा, जब एक अदद माली यहाँ काम करने लगेगा. आज बहुत दिनों बाद सुबह-सुबह आसमान स्वच्छ है पर धूप भी तेज नहीं है. कल दिन भर बादल छाये रहे. वे दोनों एक किताब पढ़ रहे हैं साथ-साथ खुशवंतसिंह की Indira Gandhi returns  अच्छी है. वह पाक कला पर भी एक किताब लायी थी जिसमें से पढ़कर आलू-मटर की सब्जी बनायी जो उसे पसंद आयी.
  

Monday, June 20, 2011

उसकी याद


पिछले तीन दिनों से डायरी नहीं लिखी, एक दिन यदि क्रम छूट जाता है तो साथ में एक-दो दिन और निकल जाते हैं. शनिवार की शाम कितनी तेज बारिश हो रही थी, वे छाता लेकर घूमने भी गए, कितनी सुखद व सुंदर शाम थी. रविवार को बहुत मजा किया. सुबह-सुबह ही वे दोनों ने लॉन की सफाई करने लगे, शाम को गोल्फ-फील्ड भी गए, खेलने नहीं घूमने, और फिर देखी अच्छी सी फिल्म 'जीवनधारा', कल क्लब में बच्चों की एक फिल्म भी है. अगले रविवार वे तिनसुकिया जायेंगे ऐसा उसने कहा है. वह तीन गुलाब की कलमें लाया था जिन्हें बड़े प्यार से गमलों में रोप दिया है, कल एक में फूल खिलेगा. कल उसके सिर में दर्द था, वह खाना खाने के बाद ठीक से बोल भी नहीं पा रहा था. वह इतना अच्छा है कि उसे कुछ भी नहीं होना चाहिए. उसको देख के लगता है, जैसे उसे बरसों से नूना के साथ रहने का, उसका ख्याल रखने का अभ्यास हो. घर से छोटी व बड़ी दोनों बहनों के पत्र आये है. अभी साढ़े नौ बजे हैं वह डिपार्टमेंट में होगा इस वक्त बहुत याद आ रहा है.