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Monday, August 4, 2014

सपने में शार्क


जून ने एक अधिकारी के साथ घटी दुर्घटना के बारे में बताया. डिब्रूगढ़ से ही एक चोर उनके साथ लग गया. नशीली फ्रूटी पिला कर बेहोश किया, सब कुछ ले लिया और रास्ते में खुद उतर गया. शिवसागर में बस का कन्डक्टर उन्हें पुलिस स्टेशन ले गया, जहाँ दो दिन बाद उन्हें होश आया पर उस समय वह भूल चुके थे कि उनके साथ क्या हुआ था. यह दुनिया चोरों को भी जन्म देती है और लुटेरों को भी पर साथ ही पुलिस व रक्षकों को भी.

कल रात उसने अपनी मृत्यु की भविष्यवाणी दो पंडितों द्वारा पढ़ी गयी देखी, स्वप्न में ही मृत्यु पूर्व की अवस्था का अनुभव किया, पहले पहल तो घुटन थी पर बाद में विवेक जाग्रत हुआ और मृत्यु पूर्व जितना समय मिला था सदुपयोग करने की प्रेरणा हुई, अन्य किसी पर कोई असर नहीं पड़ रहा था. कई बार यह स्वप्न भी देखा कि सुबह हो गयी है अब जगना चाहिए. प्रतीक रूप से ये स्वप्न उसे अज्ञान की नींद से जगाने के लिए थे. एक महिला पत्रकार को भी देखा जिसने नूना के बारे में सुना था, उसे उसने सुबह के नाश्ते के लिए बुलाया है कि पता चलता है मात्र अट्ठाईस वर्ष की उम्र में उसकी मृत्यु तय है.

कल रात फिर उसने अजीब स्वप्न देखा, सुबह उठी तो याद था पर लिखने का समय नहीं मिला अब शाम के पांच बजे जरा भी याद नहीं आ रहा है. आज गर्मी काफी है, पिछले कई दिनों के बाद मौसम में बदलाव आया है. कल शाम भाई का फोन आया, वे सांध्य भ्रमण के लिए गये थे, नन्हे ने बात की. राखियाँ उन्हें मिल गयी हैं. बाद में वे एक मित्र के यहाँ गये पर वहाँ की बातचीत में किसी अन्य की चर्चा हुई जो वहाँ उपस्थित नहीं थे, उसे अच्छा नहीं लगा. साधना का प्रथम सोपान है आत्म निरीक्षण.

तीसरी रात फिर एक स्वप्न जिसमें उनके सामने एक ट्रक का एक्सीडेंट होता है, वह उनके ऊपर से गुजर गया वे बच गये पर सामने की दीवार से टकरा गया. ड्राइवर व कन्डक्टर घायल हो गये, खून व चीखें...यह शायद कल शाम क्लब में देखी फिल्म का नतीजा था. फिल्म शार्क मछलियों के मस्तिष्क से निकाले गये द्रव से बनने वाली एक दवाई की रिसर्च पर आधारित थी, जिसमें शार्क प्रयोग के दौरान खुद पर हुए अत्याचार का बदला लेती है और एक-एक करके कई व्यक्तियों की जान लेती है. आज सुबह उठे तो उमस बहुत थी, इस वक्त भी गर्मी से ज्यादा घुटन है, बादल बने हैं पर हवा स्थिर है. जैसे स्थिर पानी गन्दला हो जाता है गतिशील पानी स्वयं को साफ बनाये रहता है वैसे ही हवा के साथ भी है, चलती हुई हवा शीतलता प्रदान करती है. आज उसके पास सिलाई का कुछ काम है सो बाकी कार्यों में से थोड़ा-थोड़ा वक्त बचाया है. सुबह टीवी पर सुना मन में आसक्ति की जड़ें जितनी गहरी होती हैं, ‘मैं’, ‘मेरा’ का भाव उतना प्रबल और यही बांधता है, बुद्धि के स्तर पर तो ये बातें बहुत समझ में आती हैं. कल दोपहर प्रमाद वश देर तक सोयी सो कल की कविता का खाली पन्ना चिढ़ा रहा है. आज नन्हे का science टेस्ट है, कल दिन भर वह तैयारी करता रहा है. कल ‘रिश्ते’ में मरते हुए प्राणी का अजीब चित्रण देखा, मृत्यु के समय कैसी अद्भुत शांति....!  

 



Tuesday, February 11, 2014

स्वामी योगानन्द का अनुभव


आज कई  हफ्तों बाद बुधवार को कपड़े धोने की मशीन लगाई, सर्दियों में नैनी को ठंड में जितने कम कपड़े धोने पड़ें उतना ही अच्छा है न, मशीन को तो ठंड लगती नहीं, आज ये बेसिर-पैर की बातें क्यों कर रही है. कुछ देर पहले एक सखी से बात की उसने किन्हीं परिचिता के स्कूल जाने की कही बात कही, सो मन का एक कोना फिर पंख फड़फड़ा रहा है, कितना हल्का है उसका मन, हवा के एक झोंके के साथ इधर-उधर चला जाता है. मान लेना चाहिए कि जून को किसी का भी तकलीफ उठाना पसंद नहीं है, पर उस ख्वाहिश का क्या करे जो लाख गहरा दबाने पर भी अंकुर सी उठ खड़ी होती है, तभी तो उनके पूर्वजों ने कहा है कि इच्छा ही सारे दुखों की जड़ है, न ख्वाहिश होगी न उसके अधूरा रहने की पीड़ा होगी. किसी को जो नहीं मिलता उसी की ख्वाहिश रहती है और जो मिल जाये उस की कद्र नहीं रहती, उसके पास ढेर सारा वक्त है और उसमें भरने के लिए कल्पना के रंग हैं, इस वक्त का सम्मान करना चाहिए और जून के प्रेम का भी. नन्हा आज सुबह साढ़े पांच बजे उठकर टेनिस कोचिंग में गया था और वापस आकर समय पर तैयार भी हो गया, स्कूल से आकर फिर कोचिंग और शाम को स्कूल से मिला गृहकार्य, उसकी दिनचर्या व्यस्त हो गयी है पर वह खुश है बेहद खुश ! 

आज सुबह नाश्ता करते समय याद आया, आज उसकी बंगाली सखी के विवाह की वर्षगाँठ है, उन्हें फोन करके शुभकामना दी, उन्हें भी यकीनन उतनी ही ख़ुशी हुई होगी जितनी उन्हें. आज धूप खिली है और वह पिछले बरामदे में बठी है, बरसों बाद जब वे यहाँ से चले जायेंगे तो यह घर और धूप याद आएंगे. आज जून भी सुबह जल्दी उठ गये थे, उन्होंने चाय पी और समाचार सुने साथ-साथ, वक्त गुजरने के साथ साथ उनके दिल एक-दूसरे के ज्यादा करीब होते जा रहे हैं. कल दोपहर को उन्होंने सउदी अरबिया के सपने देखे साथ-साथ, जहाँ के लिए जून ने apply किया है. कल उनका बायोडाटा देखा, पिछले पन्द्रह वर्षों में कई पेपर लिखे हैं, सब देखकर उसे गर्व हुआ. कल शाम एक मित्र परिवार आया अपने साथ बगीचे के ‘बनाना’ लेकर बहुत मीठे और पके हुए केले ! वह पूसी तो अब उनके परिवार की सदस्य ही बन गयी है, दोपहर भर दरवाजे के बाहर रहती है. कल रात तो बरामदे में उसके साथ एक और बिल्ली भी थी.

आज छोटे भाई की शादी की सालगिरह है, आज से नौ वर्ष पहले वह सिर्फ एक-दो दिन के लिए ही जा पाई थी उसकी शादी में. कुछ समय पूर्व ही ससुराल में दुखद घटना घटी थी. सुबह नन्हे को उठाने में दिक्कत हुई पर समय पर जा पाया. कल उस अंग्रेजी में सौ में से ९१ अंक मिले, पर उन्हें अभी भी कम लग रहे हैं, जो गलतियाँ उसने की हैं, वे नहीं करनी चाहिए थीं. उसके English teacher के कारण लिखाई जरूर सुधर गयी है, संस्कृत में भी उसने सफाई से काम किया है. उन्हें उस पर गर्व है. आज पीटीवी पर एक फनकार अफसाना निगार का इंटरव्यू सुना / देखा. वह नौकरी करते रहे और साथ-साथ लिखते भी रहे. उसे भी गौहाटी से आने वाले पत्र की प्रतीक्षा है जिससे रचनात्मक लेखन में डिप्लोमा कोर्स की शुरुआत हो सके. कल दोपहर डाइनिंग टेबल पर बिल्ली के एक बच्चे को बैठा देखकर बहुत आश्चर्य हुआ, उस पर बरबस ही स्नेह उमड़ आया पर आज वह दिखाई नहीं दे रहा, कहीं रात्रि की ठंड में उसे कुछ हो न गया हो? दोपहर उसे  हिंदी कक्षा के लिए भी जाना है, सो संगीताभ्यास अभी करना है. वैसे भी कविता लिखने के लिए सिवाय शीर्षक के अभी कुछ नहीं है, “आदमी और दरख्त”, अच्छा शीर्षक है न !

“हम ईश्वर को पा सकते हैं, उसे अनुभूति में उतार सकते हैं, वह हमारे सवालों का जवाब दे सकता है, ध्यान और मनन द्वारा हम उसके निकट जा सकते हैं.” कितने दृढ निश्चय के साथ ये सारे शब्द स्वामी योगानन्द ने कहे हैं, उन्होंने ईश्वर को पाया था, उससे साक्षात्कार किया था, वे भी यानि वह भी ऐसा अवसर पा सकती है, लेकिन उसके लिए दुनिया के सारे सुखों को भुलाकर ईश्वर में ही अपना सुख खोजना होगा, अपना सारा समय उसी में लगाना होगा, उसे दिल से प्यार करना होगा, उसे पुकारना होगा और यकीनन वह सुनेगा, वैसे भी उसने सदा विपत्ति में उसकी सहायता की है. आज सुबह नन्हा कोचिंग के लिए गया, कल शाम को वह नहीं जा पाया. वह उस पर क्रोधित हुई, थकान के कारण सम्भवतः वे दोनों झुंझलाए हुए थे, स्कूल से आते ही उसका स्वागत नहीं किया था क्यों कि वह भी उसी वक्त आई थी. अपने बाल सुलभ स्वभाव के कारण वह जल्दी ही भूल गया और पढ़ाई करने लगा.





Tuesday, November 5, 2013

.कैक्ट्स के फूल


नये वर्ष का प्रथम सोमवार ! नन्हे ने इस साल अलग सोना शुरू किया है, उसी कमरे में उसका अलग पलंग बिछता है. उसके लिए यह एक बड़ा अनोखा काम है, पर इसकी वजह से वे नेट नहीं लगा पा रहे हैं, गुड नाइट से मच्छर भगाने होते हैं

आज दिन की शुरुआत बेहद अटपटे ढंग से हुई है, अभी वह नींद में ही थी कि फोन की घंटी बजी, सुबह-सुबह किसका फोन होगा अभी सोच ही रही थी कि घंटी बंद हो गयी. जून उसके लिए चाय बनाकर लाये और अपनी मीठी-मीठी समझदार बातों से उसके उखड़े हुए मूड को सीधा करके ही दफ्तर गये. आज उनके विवाह की साल गिरह है सो मन तो खुश है ही, और इस साल एक खास बात और है कि उन्हें एक दसरे को जानते हुए दो दशक हो गये हैं. उसने खुद को विश किया कि आज का दिन और यह पूरा साल खुश रहे ताकि जून भी खुश रहें और उनका बेटा भी. इस वक्त सुबह के दस भी नहीं बजे हैं, किचन का काम अधूरा है पर लॉन में पसरी धूप देखकर वह यहाँ हाले दिल सुनाने आ गयी है. कल शाम क्लब में Independence Day देखी, बहुत अच्छी फिल्म है, रोमांचक, विस्मयकारी, amazing फिल्म. देखते-देखते लग रहा था वे किसी दूसरी ही दुनिया में पहुंच गये हैं. उसको भी हल्की सर्दी का अहसास हो रहा है, अक्सर एक हल्की सी कमजोरी का अहसास घेर लेता है, शायद उसी का असर मन पर हो रहा हो जो चीजों को उनके सही परिप्रेक्ष्य में नहीं ले पा रहा है.

कल शाम उन्होंने मित्रों के साथ ‘दिलजले’ फिल्म देखकर व गाजर का हलुआ खाकर विवाह की वर्षगाँठ मनायी, एक अच्छा भला परिवार कैसे एक नेता के कहने पर आतंकवादी होने का आरोप लगाकर बर्बाद कर दिया जाता है. वाकई नेता ऐसा कर सकते है पहले वह यकीन नहीं करती थी पर अब लगता है इस दुनिया में सब सम्भव है. कल उन्होंने कुछ पुराने खत भी पढ़े, प्रेम में लिखे खत.. कभी तो बचकाने लगते हैं पर उनमें उस तीव्रता का अहसास हर शब्द पर होता है, जो उन दोनों ने एक सा महसूस किया था और उस वक्त की सच्चाई थी. कभी कभी उसके मन में जो संशय उठता है कि कहीं... शायद वह बौद्धिकता की उपज हो, आधुनिकता का आवरण ओढ़ने की कोई दबी हुई आकांक्षा का.. मन यह क्यों न माने कि छलावा यह नहीं बल्कि वह था.

सुबह एक परिचिता का फोन आया कि शनिवार को लेडीज क्लब की ओर से होने वाले बैडमिंटन गेम में भाग ले, न कहना तो उसने सीखा नहीं है और कहा भी तो स्वयं को अनाड़ी बता के, खैर..अब उस दिन तीन बजे जाना है. आज बैंगन का भरता बनने में काफी समय लग गया. सुबह उठते ही जब ‘जागरण’ के लिए टीवी खोला तो DD I पर योगाभ्यास पर एक कार्यक्रम आ रहा था, साढ़े छह बजे वह खत्म हुआ तो फूल खिलाने वाली एक अनोखी कैक्टस प्रजाति ‘मेजाम्बिस’ पर एक फिल्म देखी, छोटे-छोटे पत्थरों के आकार के पौधे और उनमें खिले बड़े आकार के सुंदर रंगीन फूल बहुत अच्छे लग रहे थे, इस दुनिया में इतनी अनोखी और सुंदर वस्तुएं हैं कि कोई चाहे तो सारी जिन्दगी इसी में बिता दे. कल उन पुराने तेलगु मित्र का कार्ड आया, जून ने भी फौरन उन्हें भेजने के लिए कार्ड पर  लिखा we remember you all ! जून चाहे उनसे (यहाँ जब वह थे) विरोध करते रहे हों किसी बात पर दिल ही दिल में, सबके लिए स्नेह है उनके मन में. कल उसे समझा रहे थे..इन्सान को अच्छे बनने का प्रयत्न करना चाहिए.. और क्षमा बड़न को चाहिए.. आज उन्हें फील्ड जाना था पर नहीं गये किसी प्रॉब्लम की वजह से जो वेल साईट पर उठ खड़ी हुई है.





Monday, August 19, 2013

आचार्य गोयनका जी


“दुनिया को एक बच्चे की निगाह से देखने की कोशिश यानि एक नजर जो कौतूहल से भरी हो और उन छोटी-छोटी बातों और चीजों के लिए तारीफ से भरी हो जिन्हें बड़े नजरंदाज कर जाते हैं”. पीटीवी पर उसने यह टिप ऑफ़ the week सुना, अच्छा है. कल से चुनावों के परिणाम आने का सिलसिला जारी है, कांग्रेस पिछड़ रही है बीजेपी उभर रही है लेकिन यही लग रहा है कोई पार्टी स्पष्ट बहुमत प्राप्त नहीं कर पायेगी. कल दोपहर दो बच्चे पढ़ने आये और एक घंटा कैसे बीत गया पता ही नहीं चला, अपने समय और शक्ति का सही उपयोग ! शाम को वापस आकर नन्हे के साथ बैडमिन्टन खेला, फिर वहीं लॉन में ही जून के साथ ठंडी हवा में टहलते हुए दिन भर की बातों का जायजा और अगले दिन की प्लानिंग...

जून आज मोरान गये हैं, सुबह से वर्षा हो रही है. एकबार उसके मन में आया फोन करके पुरानी पड़ोसिन को घर आने को कहे, पर कल शाम ही उससे हिन्दू-मुस्लिम पर बहस हो गयी. कल शाम को जाने क्यों उसे पाक पत्तन, मिंटगुमरी की याद हो आयी, अपने उस सपने की भी जिसमें वह पाकिस्तान गयी है. रात को सपने भी इसी से सम्बन्धित आते रहे, वे एक बड़े हॉल में हैं, आधे में हिन्दू और आधे में मुस्लिम, दोनों एक बड़े तनाव से गुजर रहे हैं. फिर नींद खुल जाती है और दहशत से मुक्ति मिलती है. पता नहीं वह दिन कब आयेगा जब लोगों के दिलों की नफरत दूर होगी. शताब्दियों पूर्व मुस्लिम इस मुल्क में आये और शासक बन कर रहे, यही कारण था कि हिन्दू-मुस्लिम कभी एक नहीं हो पाए. हालाँकि कितने कवियों, शायरों व विद्वानों ने एकता की बात की और किसी हद तक दोनों ने एकदूसरे को अपना लिया पर मनों की मलिनता गयी नहीं है. लेकिन वह शुरू से उस मुल्क से जुड़ी है, एक सपना है कि कभी न कभी वह  वहाँ जाएगी. आज शुक्रवार है यानि बदलते मौसम का दिन. पिता की डायरी में कुछ प्रेरणास्पद बातों को पढ़ा, पूरा खजाना है उसमें ऐसी बातों का जो दिल को गहरे तक छू जाती हैं. उन्हें लिखेगी इसके बारे में. कल जून से क्रोशिये का धागा भी मंगवाया है, टीवी देखते समय हाथ खाली रहें तो कुछ अजीब सा लगता है.

आज महीनों बाद ‘आधा चाँद’ देखा, इतना छोटा सा देश है पर वहाँ इतनी शायराएँ हैं और उन्हें टीवी के जरिये लोगों तक पहुंचाया भी जाता है, डीडी पर ऐसा कार्यक्रम कभी नहीं देखा. आज धूप निकली है, वर्षा में लगातार भीगते पेड़-पौधे धूप का स्पर्श पाकर सूखने का प्रयास कर रहे हैं, उनके भुट्टे भी लगभग तैयार हैं. आज का tip of the day है, दिन भर में कम से कम एक बात को बर्दाश्त करें, यानि आपको वह बात बुरी भी लग रही तो अपना क्रोध जाहिर न करें. कल शाम एक परिचित ने फोन किया children meet के लिए एक skit लिखने को कह रही है, उसने ‘हाँ’ कह दी है, उसे यकीन है, खोजकर या स्वयं लिखकर वह दे देगी. उसे कुछ काम चाहिए.

कल रात जून और नन्हा star trek देख रहे थे और वह पढ़ रही थी, thought verses action, अच्छा लगा. ‘आपकी सरकार’ में कई राजनेताओं के विचार सुने, अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है कि केंद्र में किसकी सरकार बनेगी.

आज सुबह नींद जल्दी खुली थी पर आलस्य वश (जो चित्त की दुर्बलता है)  नहीं उठी, फिर जून ने उठाया. ‘जागरण’ में आचार्य गोयनका जी ने श्वास को देखते हुए मन को विकारों से मुक्त करने का उपाय विस्तार से बताया, अंत में धर्म की परिभाषा दी-

धर्म न हिन्दू बुद्ध है, धर्म न मुस्लिम जैन
धर्म हृदय की शुद्धता, धर्म हृदय का चैन

जो इतनी सरल है कि कोई भी उसे समझ सकता है, और इतनी कठिन है की उसका सार अंतर में उतारने में किसी को वर्षों लग जाएँ. कल शाम से वर्षा हो रही है, बगीचे में कोई काम नहीं हो पा रहा है. कल जून उन्हें दफ्तर ले गये, कम्प्यूटर पर गेम खेला व पेंटिंग का अनोखा अनुभव लिया, कम्प्यूटर पर काम करते समय लगता है, किसी दूसरी दुनिया में पहुंच गये हैं, जून पिछले कई दिनों से कम्प्यूटर लेने के विषय में जानकारी इक्कट्ठी कर रहे हैं. कल वह वैक्यूम क्लीनर के लिए तिनसुकिया फोन भी करते रहे पर नहीं मिला. दोनों घरों पर फोन करने का प्रयास भी किया पर निराशा ही मिली. उसका ध्यान इन सब बातों की ओर नहीं जाता, उसके भीतर विचारों की एक अनोखी दुनिया है.


Friday, July 12, 2013

घर की सफाई


आज मन शांत है, स्थिर और उदासी का नामनिशान भी नहीं, दर्द है, बेचैनी है मगर उसे सहने की ताकत भी है, परेशानी तभी बढ़ती है जब कोई पीड़ा से भागना चाहता है. ईश्वर की बनाई हुई इस दुनिया में, प्रकृति में जो जैसा है उसे वैसे ही स्वीकारना होगा. अंत में सब ठीक हो ही जाने वाला है, दोपहर को फिर से डाक्टर के पास जाना है, वह एक बजे तक आ जायेंगे, वह अर्थात जून. सोमवार को भी जाना है, यानि दो दिन बाद, सो खतों का जवाब इन दो दिनों में ही दे देना होगा. कौन जाने, भविष्य में क्या छिपा है ? पिछले दो-तीन दिन से जो ख्याल मन में छाया हुआ था, एक दूसरी दुनिया का ख्याल, अपने आप पीछे छूट गया है. अपने आप को खोल कर रख देने से ही शायद यह सम्भव हुआ है. अन्तर्मुखी होना हर वक्त अच्छा नहीं होता...स्वास्थ्य के लिए, कल यही कहा था उसकी सखी ने, वह आत्मविश्वास से भरी थी, प्रसन्न और बातूनी.. आज उन्होंने छोटी बहन से बात की वे लोग अक्तूबर में आ रहे हैं. उसके पहले घर की सफाई करनी होगी, उसने सोचा, तबियत ठीक होते ही लगना होगा. कितना सारा काम है, अलमारी की सफाई, सारी क्राकरी भी धो-पोंछ कर रखनी होगी. और सारी दराजें भी साफ करनी हैं, पूरा एक हफ्ता लगेगा.
मौसम आज भी अच्छा है, बादल हैं, सो धूप तेज नहीं है, हवा चल रही है सो अमलतास की डालियाँ रह-रह कर हिल उठती हैं. दर्द कम है कभी बिलकुल भी नहीं सो वह अपने सभी कार्य व्यायाम को छोडकर कर पा रही है. अभी अभी पी टीवी पर एक मजाहिया खेल देखा, सीधीसादी सी भाषा और पात्र भी भोले भाले, महमूद साहब हमारे जहीर साहब से कितने मिलते-जुलते हैं और जहाँआरा की भाषा पश्चिमी उत्तर प्रदेश की भाषा जैसी ही है. उसका गला अभी भी ठीक नहीं हुआ है, कुछ देर पहले तुलसी की चाय पी. उसकी सखी ने आज सुबह-सुबह फोन किया, वह उसके प्रति कृतज्ञता से भर गयी. वह लिख रही थी, तभी घंटी बजी, गोबर वाला था, उसने एक ठेला लिया, गुलदाउदी के पौधे लगाने के लिए. बाद में माली गोबर, मिटटी व बालू को मिलाकर गमलों में भरेगा. उसने सोचा बहन के आने के पूर्व उसे गमले तैयार कर लेने हैं.

Today she is restless. Mind is wondering and she is not able to concentrate it at one place. Tomorrow is the D day, they were waiting for it since last 20 days.

She wrote her favorite lines-
The woods are lovely dark and deep
But I have promises to keep
And miles to go before I sleep
And miles to go before I sleep

She read in a book-

In every thing that happens there is a hidden meaning of mercy ie there is a hidden blessing.

So whatever comes greet that experience? Everything happens at right time. Rejoice at everything that happens to you. It has come to you as gift of God.

Everyday we should practice some silence.

Have child like trust in Him. The day on which you have not helped other is a useless day.

It is your birth right to live in the divine presence of God.




Monday, September 10, 2012

स्ट्राबेरी आइसक्रीम+पाइन एपल केक



Staying ok अच्छी किताब है, अभी तो आधा ही पढ़ा है और अभी पूरी तरह लगकर जिसे पढ़ना कहते हैं, उस तरह नहीं पढ़ पाती है, फिर भी मन में कहीं अंदर तक छू जाती हैं उसमें लिखी बातें, व उदाहरण. Family medical guide भी जून ने लाकर दी थी जब वह अस्वस्थ थी, अभी उसे भी पढ़ा नहीं है. कल जून फिर गया, जन्मदिन वाले घर में, बुलाया सभी को था, पर उसने कहा कि बासी भोजन सोनू व उसके लिए ठीक नहीं है, नूना को याद आया, वह कहना भूल गयी कि उसके लिए भी तो ठीक नहीं है, पेट के भारीपन की शिकायत वह भी तो कर रहा था. उन्हें आधा मीटर कपड़ा भी और देना है, उसकी बेटी की फ्रॉक के लिए जो उपहार में उन्होंने दिया, वैसा ही. उसकी सखी उनके घर नहीं आती, यह बात उसे अच्छी नहीं लगती, उसे अच्छी लगती होगी तभी वह ऐसा करती है, और अब कहीं दूसरी मित्र भी आना बंद न कर दे, उस दिन वह जबरदस्ती उसके यहाँ से गुलाब की कटिंग जो ले आयी थी. खैर...यही दुनिया है, यहाँ रूठना-मनाना तो चलता ही रहता है.

असम बंद के कारण आज दफ्तर बंद है, जून घर पर ही हैं. कल से ही बोडो का १९९ घंट का बंद भी शुरू हो गया है, देश में सबसे अधिक बंद असम में ही होते हैं. कल शाम वे उनके घर गए, पर वहाँ बैठना उसे अच्छा नहीं लग रहा था, उसकी सखी का ठंडा व्यवहार...शायद यह उसके मन का भ्रम हो.

आज देश के ५०० शहरों में नेहरु जन्मशती दौड़ हो रही है, दस लाख लोग दौड़ रहे होंगे इस वक्त. वह एक मित्र के लिए स्वेटर बना रही है. नन्हे के रोने की आवाज आयी तो वह बाहर गयी, देखा पडोस की उड़िया आंटी का हाथ पकड़े रोते-रोते वह आ रहा है, दूध वाले ने उससे कहा कि वह अपने साथ लेकर जायेगा तो वह डर कर रोने लगा. कुछ देर पूर्व ही गया था उनके घर. आज शाम को उन्हें एक और पार्टी में जाना है.

स्वप्न झरे फूल से
गीत चुभे शूल से
और हम खड़े-खड़े बहार देखते रहे
कारवां गुजर गया गुबार देखते रहे
अपनी जिंदगी पर नजर दौड़ाए तो यही दीखता है उसे. टीवी पर कुछ देर पहले स्ट्राबेरी आइसक्रीम और पाइन एपल केक बनाने का तरीका देखा, अच्छी तरह बताया है और तरीका भी आसान है. प्रेशर कुकर में भी केक बनाया जा सकता है, उन्होंने कभी प्रयास ही नहीं किया था.

आज उनके विवाह को पूरे चार वर्ष दो महीने हो गए. कल दोपहर बाहर लॉन में बैठकर Staying ok एक घंटा तक  पढ़ी. बेहद अच्छा लगा. सम्भव हुआ तो आज भी पढ़ेगी और हो सका तो भविष्य में भी. आज उसने बालों में शैम्पू किया है, शायद आज हेयर ड्रेसर के पास जाये, कभी सोचती है उसे बाल बढ़ाने चाहिए, पर ज्यादा लम्बे बाल तो उसके होते नहीं, अभी तक कुछ निश्चय नहीं कर पाई है कि...खैर देखा जायेगा. नन्हा उठकर बाहर आ गया है जहां वह बैठी है, नाश्ता करके वह बायीं ओर के साथ वाले घर में उससे एक साल छोटे बच्चे के साथ खेलने चला गया है, और वह यहाँ बैठी है कुछ सोचती हुई, दस-ग्यारह दिनों के बाद उन्हें जाना है, कल जून का मूड ऑफ था, बेहद उदास दिख रहे थे, उसके सिर में दर्द भी था शायद यही कारण रहा हो, या फिर घर की याद आ रही हो. पापा-माँ के बारे में वह उससे बात तो नहीं करते हैं, लेकिन मन में सोचते जरूर रहते हैं. इस हफ्ते के पत्र अभी लिखने शेष हैं, अभी लिखेगी. महरी अभी आई नहीं, सो बर्तन साफ होने के बाद ही खाना बनेगा. दीदी ने उसके पत्र का जवाब इस बार बहुत जल्दी दे दिया है. उसने सोचा, वह बनारस जायेगी तो अपनी किताबें भी ले जायेगी और वहाँ भी एक निश्चित दिनचर्या बना लेगी उसके अनुसार कार्य करने से परेशानी कम होगी और कार्य भी ज्यादा हो सकेगा.