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Tuesday, November 5, 2024

गुलाबी सूरज

गुलाबी सूरज 


शाम को भोजन बनाने के लिए रसोईघर में गयी तो नन्हे का वीडियो कॉल आया।उनके कुक की रिपोर्ट पॉज़िटिव आयी है। उसको संदेह है कि उसे ख़ुद भी कोविड हो गया है। सोनू को भी दिन में ठंड लग रही थी। कल टेस्ट होगा, सोमवार को रिपोर्ट आएगी। उन्हें सोसाइटी द्वारा क्वारंटाइन में रहने को कह दिया गया है, यानि अब उनकी मेड भी नहीं आ सकती। उसके एक मित्र को भी, जो दिल्ली से आया था, पिछले पाँच दिन से ज्वर है। उसके कुछ परिचित आईसीयू में भी हैं। नन्हे ने सोप डिस्पेंसर भिजवाया है, ताकि बिना कहीं भी हाथ लगाये साबुन हाथ में आ जाये।अभी कुछ देर पहले वे टहल कर आये तो चौथ का चंद्रमा झांक रहा था, ठंडी हवा सहला रही थी। टीवी पर कोरोना के समाचार भयावह स्थिति को बताने वाले हैं, दुनिया भर में इसकी दूसरी लहर आ चुकी है। भारत में अब आयी है। तीसरी लहर भी कहीं-कहीं आ रही है। आज एक दिन में ढाई लाख कोरोना केस मिलने का आँकड़ा पार हो गया। बैंगलुरु में १३,००० हो गया है एक दिन का आँकड़ा।


आज सुबह बादल थे, बाल सूर्य का गोला एक गुलाबी गेंद की तरह  लग रहा था।सूर्योदय देखते हुए सूर्य नमस्कार किया। बादलों के कारण सूरज तेजहीन लगता है पर देर तक उसे देखा जा सकता है अर्थात त्राटक किया जा सकता है। आज छोटे भाई से बात हुई, बातों-बातों में उसने बताया, दुनिया के सौ बैंकों में संभवत: भारत का कोई बैंक नहीं आता, चीन जो १९८० में भारत से पीछे था अब पहले स्थान पर है। पहले पंद्रह बैंक उसी के हैं। पापाजी से बात हुई, आज पहली बार उन्होंने दुनिया से जाने की बात अपने मुख से कही।’नरेंद्र कोहली’ की मृत्यु की खबर सुनकर उन्हें यह लगा कि अब बहुत जी लिया है, जबकि आज भी उन्होंने लिखने-पढ़ने का काम किया। 


नन्हे की रिपोर्ट नेगेटिव आयी है, पर उसने कहा नये स्ट्रेन के संक्रमण की रिपोर्ट निगेटिव ही आती है। आज सुबह उठते ही उसके सिर में दर्द भी था।ऑक्सीजन लेवल भी ९४-९५ रहता है।बस एक लाभ हुआ है, उनके ऊपर जो एक ठप्पा लगा गया था, वह हट गया इस रिपोर्ट के बाद, पहले वह किसी से मिलजुल नहीं सकते थे। अब उनके यहाँ कोई आ-जा सकता है। शाम को दीदी का फ़ोन आया, उन्होंने काफ़ी अभ्यास करके ब्रेनविटा में अंत में एक मार्बल प्राप्त कर लिया। आज सरकार की तरफ़ से सूचना आयी है कि पहली मई से अठारह वर्ष से ऊपर सभी को वैक्सीन लगायी जाएगी।अब प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संबोधन प्रसारित किया जा रहा है।कोरोना की दूसरी लहर तूफ़ान बनकर आयी है, कितने लोगों ने अपनों को खोया है, कितने प्रभावित हो रहे हैं कई राज्यों में लॉक डाउन फिर से लगा दिया गया है।वह स्वास्थ्य कर्मियों व पुलिस की सराहना कर रहे हैं, जो लोग अपनी चिंता छोड़कर दूसरों के जीवन बचाने में लगे हैं। कठिन से कठिन समय में भी धैर्य नहीं खोना चाहिए तभी कोई विजय हासिल कर सकता है।ऑक्सीजन की उपलब्धता बढ़ाने का प्रयास युद्धस्तर पर हो रहा है, दवाओं का उत्पादन भी बढ़ाया जा रहा है। दुनिया में सबसे तेज़ी से भारत में वैक्सीन लगायी गई है। भारत में जो वैक्सीन बनेगी उसका आधा हिस्सा राज्यों व अस्पतालों को दिया जाएगा। सरकारी अस्पतालों में मुफ़्त वैक्सीन लगायी जा रही है। वह  कह रहे हैं, श्रमिकों को जहाँ वे हैं, वहीं रहकर काम शुरू होने की प्रतीक्षा करनी चाहिए। कल रामनवमी है, सभी को कोरोना मर्यादा का पालन करना है।अनुशासन, साहस और धैर्य के द्वारा ही देशवासी देश को कोरोना से बचा सकते हैं। 


आज सुबह-सुबह ही शीशे का एक जग टूट गया, लापरवाही से या कहें मोबाइल के चक्कर में। कमरे में अँधेरा था और मोबाइल चार्जर में लगा था, निकालने लगी तो कोहनी जग को लगी। ध्यान पूरा मोबाइल पर था, आसपास की वस्तु पर ध्यान ही नहीं दिया, दुख जग टूटने का जरा भी नहीं हुआ पर अपनी इस असजगता का अवश्य हुआ।आज राम की जीवनी को लेकर एक रचना लिखी सीधी कंप्यूटर स्क्रीन पर और पोस्ट की।आज दोपहर को वे लोग भोजन कर रहे थे, बिना घंटी बजाए नये पड़ोसी सीधे अंदर आये और होमऑटोमेशन के बारे में पूछने लगे।शाम को इलेक्ट्रीशियन को लेकर आयेंगे। 


आज एक दिन में भारत में तीन लाख पंद्रह हज़ार से अधिक व्यक्ति भारत में कोरोना से संक्रमित हुए, जो विश्व में किसी भी देश में आज तक नहीं हुए। बैंगलुरु में भी केस बढ़ रहे हैं। उनकी ही लेन के एक परिचित व्यक्ति भी अस्पताल पहुँच गये हैं, उन्हें ऑक्सीजन की आवश्यकता हुई। आज एक और दुखद समाचार सुना, सोसाइटी के एक विला में एक दंपति ने व्यापार में घाटा होने पर आत्महत्या का प्रयास किया, पति की मृत्यु हो गई पर पत्नी अभी अस्पताल में है, पता नहीं किस विवशता में लोग ऐसा कदम उठाते हैं। जीवन की सुंदरता से वे परिचित ही नहीं हो पाते। परमात्मा की बनायी यह सुंदर सृष्टि जो उसने आनंद को फैलाने के लिए ही बनायी है, किसी के लिए दुख का कारण बन जाती है। गुरु का जीवन में न होना ही इसका सबसे बड़ा कारण है। परमात्मा स्वयं ही गुरु के रूप में धरती पर आता है, उसकी एक नज़र ही निहाल कर देने के लिए पर्याप्त है। आज शाम को गुरु जी ने ध्यान करवाया। शाम को पापाजी से बात की, अब वह स्वस्थ हैं। उनके लिए लिखी कविताओं का एक संग्रह बनाना है, जिसका शीर्षक ‘जनक’ हो सकता है। काव्यालय के लिए एक हास्य कविता लिखनी है।     

 


Wednesday, June 19, 2024

इलेक्ट्रिकल फ़ॉल्ट

रात्रि के नौ बजने वाले हैं, कमरे में शीतल सुगंधित पवन बहकर आ रहा है।प्रातः सूर्योदय के सुंदर दृश्य भी देखे थे, कुदरत मानव को लुभाने के कितने अवसर जुटाती है पर वह है कि अधिकतर समय कमरों में बंद ही रहता है; न हो तो कुदरत के सौंदर्य को बिगाड़ने के फेर में लगा रहता है। सड़क चौड़ी करने के नाम पर कितने पुराने पेड़ काट दिये गये, जिन्हें बड़ा होने में वर्षों लगे थे, उन्हें एक दिन में ही धूल धुसरित कर दिया गया। नाश्ते में सहजन के पत्तों के पराँठे बनाये, जो घर आते सड़क किनारे के एक पेड़ से उसे आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने तोड़े थे। सहजन का वृक्ष भी प्रकृति का एक और वरदान है, इसके पत्ते, फूल और फल सभी गुणों से भरे हैं । दोपहर को एओएल का अनुवाद कार्य भेजा, समन्वयक ने कहा उसकी एक तस्वीर भी चाहिए, टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने माँगी है। नन्हे की दी ‘माइकल ए सिंगर’ की पुस्तक ‘सरेंडर एक्सपेरिमेंट’ आगे पढ़ी, बहुत अच्छी है। नन्हे को इस तरह की पुस्तकों में रुचि है, पिछली बार उसने ‘कुंडलिनी’ नाम की एक पुस्तक दी थी; वर्षों पहले उसने इस्कॉन की पुस्तकें पढ़ना शुरू किया था, पर बाद में कॉलेज की पढ़ाई और मित्रों के साथ से सब छूट गया; पर उसे यक़ीन है एक दिन वह भी आत्मा की खोज में अवश्य जाएगा, हरेक को जाना ही पड़ता है। 


सोनू ने नये कुशन कवर भेजे हैं, जिस पर सुंदर गुलाबी फूल बने हैं। उनका फ्रिज भी आज ठीक हो गया। पहली बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया में उसके फ़ोटो के साथ आयुर्वेद पर लेख छपा है। कल से उन्होंने रात्रि भोजन का समय बदल दिया है, रात्रि भोजन और सोने के मध्य कम से कम दो घंटे का अंतर होना चाहिए, ऐसा कितनी ही बार स्वास्थ्य विशेषज्ञों से सुना है। गहरी नींद लाने के लिए सोने से पहले योग निद्रा करना भी अच्छा है। शाम को गुरु जी का सत्संग सुना। उन्होंने कहा, व्यक्ति को चिंता नहीं चिन्तन करना चाहिए, अपने मन की गहराई में बसे ईश्वरीय प्रेम पर सदा भरोसा करना चाहिए। छोटे भांजे के लिये एक कविता लिखी, परसों उसका जन्मदिन है। आज एक पुरानी डायरी को विदा दे दी, इसी तरह एक-एक करके पुरानी वस्तुओं को विदा देनी है, ताकि अंतिम यात्रा तक बिलकुल ख़ाली हो जाये मन ! 


आज का दिन विचित्र अफ़रातफ़री में बीता। जिसकी शुरुआत कल रात साढ़े ग्यारह बजे से ही हो गई थी; जब अचानक उनकी नींद कुछ आवाज़ें सुनकर खुली। पहले लगा जैसे कुछ समान कहीं गिरा हो, पर जब रुक-रुक कर आवाज़ें आने लगीं तो समझ में आया कहीं इलेक्ट्रिकल फ़ॉल्ट है, एक-एक करके फ्यूज उड़ रहे हैं। जून नीचे गये तो पता चला, सॉकेट बॉक्स में चिंगारी निकल रही है, उन्होंने मेन स्विच बंद कर दिया। नीचे से आवाज़ें आनी बंद हुईं तो ऊपर भी आवाज़ें आयीं, फिर कुछ देर में सब शांत हो गया। कुछ भी समझ नहीं आया तो वे सो गये। पर सुबह साढ़े तीन बजे पुन: आवाज़ें आने लगीं, इस बार ऊपर का बोर्ड भी जलने लगा था। उन्हें पहले ही सारे घर का मेन  स्विच बंद कर देना चाहिए था। पर कहते हैं न ‘विनाश काले विपरीत बुद्धि’ ! ख़ैर, सुबह वे अपने निर्धारित समय पर उठे, छह बजे इलेक्ट्रीशियन आया। दो-तीन घंटे लग गये पुन: बिजली बहाल होने में। इस बीच काफ़ी कुछ ख़राब हो गया। किचन की चिमनी, गूगल होम, होम ऑटोमेशन, मॉडेम, मेश आदि ख़राब हुए हैं। इसका कारण मेन न्यूट्रल में कुछ ख़राबी थी, जिसका ख़ामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा। दिन भर कई लोग आते रहे, अभी चिमनी वाला कल आएगा। आज एक और समस्या हुई, लैप टॉप का चार्जर भी ख़राब हो गया है, अब डेस्क टॉप पर काम करना है।


आज वेलेंटाइन डे है, पुरानी लिखी एक कविता पोस्ट की, सोचा, अगले साल अवश्य ही नयी लिखेगी। सुबह कुछ पंक्तियाँ लिखीं थीं, पर टाइप नहीं कर सकी। दो दिन से नेट काम नहीं कर रहा। आज नन्हे ने नया राउटर लगा कर दिया है, पर डेस्क टॉप में नहीं आ रहा है।हॉट स्पॉट से लेना होगा। रात का देखा एक स्वप्न याद रह गया, जिसमें एक पुराने परिचित परिवार के एक सदस्य काफ़ी अस्वस्थ हैं, उन्हें बुलाया है।बच्चों के लिए सुबह नाश्ते में अप्पम बनाये। लंच में घर में उगायी पालक की सिंधी सब्ज़ी, यानी साई भाजी । शाम को वे चले गये, आज उन्हें एक महीने के लिए एक मित्र के घर में शिफ्ट होना है, उनके अपने घर में सिविल का काम होना है। मित्र अपने काम के सिलसिले में बाहर गया हुआ है। प्रकृति हर समस्या का हल पहले से ही निकाल देती है।     




Friday, September 14, 2012

इतवार की सुबह



ग्यारह बजने में बीस मिनट, सुबह छह बजे उठने के बाद अब एक मिनट हुआ, बैठी है, डायरी लिखने का बहाना है, पैर कुछ विश्राम चाहते हैं और मन भी एक जगह रुक कर कुछ सोचना चाहता है. आज शायद जून का पत्र आये. कल दोपहर और फिर शाम को कितने घंटे व्यर्थ किये, स्वेटर का गला बनाने में, पर अभी तक नहीं बना है, उसे तो पूरा करना ही है, उसके बाद जो गणित की किताबें ली हैं, उन्हें देखना है. सोनू दादाजी के साथ आटा लेने गया है.

सुबह के साढ़े सात बजे हैं, नन्हा सोया है. सो उसे वक्त है कि दिन की शुरुआत करते हुए कुछ सोच सके. नीचे कमरे में एक तो गर्मी थी, दूसरे पडोस में टीवी की आवाज व्यवधान उत्पन्न कर रही थी, सो यहाँ उपर आ गयी है. यहाँ ठंडी हवा (धूल भरी ) आती है, यहाँ उनका बालकनी कम बाथरूम है, इस घर में इतनी समस्याएं हैं पर माँ-पिता ने कभी सोचा ही नहीं कि इसे बदला जाये. जिंदगी के चालीस साल इसी घर में गुजार दिए. माँ की तबियत ठीक नहीं है, उसे तो लगता है उनके तन की अस्वस्थता मन की ही छाया है, पर कौन समझा सकता है उन्हें. जब तक वे खुद न चाहें, वः कुछ करना ही नहीं चाहतीं, उदासीन हो गयी हैं सबसे, पर ऐसे कब तक जिया जा सकता है. वास्तविकता की दुनिया में जितनी जल्दी लौट आयें उतना ही अच्छा है. कल जून का पत्र आया वह उदास है कि उसे उनके पत्र नहीं मिल रहे हैं, पता नहीं क्यों. सुबह का एक कप दूध अभी पिया उसने, उसे समझ नहीं आता कि सुबह से बिना कुछ लिए यहाँ लोग दस-ग्यारह बजे तक कैसे रह लेते हैं. वह पुस्तक पढ़ने बैठ गयी जो प्रवेश परीक्षा के लिए लायी थी.

फिर वही कल का सा समय है, लेकिन वह नीचे कमरे में है, कपड़े प्रेस करने के लिए चादर बिछा रही थी की ननद ने बताया, पिताजी ने ऊपर कपड़े प्रेस करने को कहा है, नीचे जो बिजली खर्च होती है, उसका बिल आता है जबकि ऊपर की बिजली फ्री है, उसे समझ नहीं आता. रात अजीब-अजीब स्वप्न देखती रही, पता नहीं इनमें कोई सार भी है या उसके मन का पागलपन है. कल सभी भाई-बहनों को पत्र लिखे.

सुबह साढ़े पांच बजे ही उठ गयी थी, छत पर टहलने गयी, सूर्योदय के समय बहुत अच्छा लग रहा था. हर जगह की अपनी कुछ विशेषताएं होती हैं, और कुछ खामियां जैसे हर व्यक्ति की. आज इतवार है, सुबह का मीठा दूध पीते समय उसे याद आया, जून इतवार सुबह की चाय पी रहे होंगे. कैसे बीतते होंगे उनके दिन-रात, उसकी याद तो आती होगी. नन्हे ने नीचे से आवाज दी और वह उसे लेकर ऊपर आ गयी है, कह रहा है और सोयेगा और लेट गया है, देखें कितनी देर लेटता है.

Friday, August 31, 2012

साहब बीबी और गुलाम



रात के ग्यारह बजने वाले हैं, माँ अभी तक रसोईघर में हैं, पिता पानी भर रहे हैं, ननद पास के घर में है. शाम को बिजली का वोल्टेज बहुत कम था, बल्ब भी मद्धिम जल रहा था. अब जाकर वोल्टेज बढ़ा है. दिन में वे लोग बाहर गए थे, नन्हा दिन भर नहीं सोया, सो नौ बजे ही सो गया, पिछले तीन-चार दिन से वह ठीक से खाना नहीं खा रहा है. उसकी आँखें भी हल्की लाल है, फैमिली डॉक्टर को दिखाया है. जून देहरादून गए हैं, दीदी के यहाँ उसे उसके पत्र भी मिले होंगे.

आज यहाँ आने के बाद पहली बार उसे वक्त मिला है कि वह सुबह-सुबह डायरी लिख सके. जल्दी उठी थी सो.. बाकी सब सो रहे हैं. सूर्योदय के कुछ देर बाद उसने छत पर कुछ चक्कर भी लगाये. मकानमालिक की बेटी भी ऊपर थीं. यहाँ का मौसम बहुत अच्छा है, ज्यादा सर्दी नहीं पड़ती, ठिठुरन वाली सर्दी का तो यहाँ अहसास ही नहीं हुआ. उसे आये डेढ़ महीना हो गया है. मई में वे लोग दुबारा आएंगे. वह यहीं रहकर आगे पढ़ाई करना चाहती है. बीएड या कम्पयूटर डिप्लोमा. उसकी बड़ी ननद की सहेली से इस बारे में जानकारी लेनी है.

कल रात टीवी पर थोड़ी देर साहब-बीबी-गुलाम देखी, अच्छी थी पर सबको नींद भी आ रही थी. जून क्रिसमस के दिन आ रहे हैं, उसके बाद चार-पांच दिन तो पलक झपकते गुजर जायेंगे. छोटी बहन भी आ रही है दो दिन के लिये. उसने सोचा उसे भी नन्हें के साथ हेयर ड्रेसर के पास ले जायेगी, वह चुस्त नहीं दिखती है. समय अपनी रफ्तार से चलता ही रहता है, हम ही हैं जो सुस्त पड़ जाते हैं. कल शाम दो सम्बन्धियों के शोक पत्र आये और परसों उसके भी किसी मित्र का एक पत्र आया था.

आज वह आ रहे हैं, उसमें कुछ अतिरिक्त उत्साह है, और इसी उत्साह की रौ में बहकर वह डायरी और पेन लेकर एकांत की आशा में छत पर चली गयी, हवा थी, पर सुहा रही थी, ठंड पैदा नहीं कर रही थी, पर वहाँ और लोग थे, इस बड़े घर में कई परिवार रहते हैं. सो नीचे कमरे में आ गयी है. कल एक छात्र ने उससे कुछेक प्रश्नों के उत्तर जानने चाहे, वह बता तो पायी पर उतने असरदार तरीके  से नहीं. अब यहाँ चार-पांच दिन ही रह गए हैं, यह उलझाव कैसा अब.