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Thursday, July 13, 2023

दिवाली के दीपक

दिवाली के दीपक 

रात्रि के पौने नौ बजे हैं। आज मौसम ठंडा है। सुबह वे टहलने गये तो तापमान सत्रह डिग्री था, जैकेट पहनकर नहीं गये थे, शुरू में ठंड लगी फिर तेज चलने से गर्माहट आ गई; साइकिल चलाने से तो ठंड भाग ही गई।आज विज्ञानमय कोष के बारे में सुना। अथाह ज्ञान है शास्त्रों में। मानव शरीर में कितना बल, ज्ञान और शक्ति का भंडार छुपा  है। इसी देह में जन्म लेकर कोई मानव देवता बन जाता है। अवतारी पुरुष, संत, साध्वी स्त्रियाँ सभी के पास तो वही मानव देह तथा मन, बुद्धि है, जिसे साधकर कोई भी चाहे तो अपने जीवन को उन्नत कर सकता है। दोपहर को कपूर तथा सिट्रेनेला की सुवास डालकर पहली बार मोमबत्तियाँ बनायीं। दिवाली पर जलकर वे प्रकाश तथा सुगंध  फैलायेंगी। उत्सव को तीन-चार दिन ही रह गये हैं। उनके पड़ोसी हुसूर जाकर ढेर सारे पटाखे लाए हैं, उन्हें लाने की ज़रूरत ही नहीं है, देख-सुन कर ही काम चल जाएगा। कुछ पिछले वर्ष के बचे हुए हैं। बहुत दिनों बाद छोटी बहन से बात हुई, कुछ उदास थी, पर हर दुख उन्हें आगे ले जाता है। गुरू माँ से ‘गुरु गीता; का पहला भाग सुना। कह रही थीं, यदि रात को स्वप्न आते हैं तो मन अभी भी विचारों से मुक्त नहीं है। उसे स्वप्न तो आते हैं पर कुछ न कुछ सिखाने के लिए, किसी न किसी समाधान के लिए। छोटी भांजी के जन्मदिन पर एक कविता लिखी।


आज धन तेरस है। सुनील इलेक्ट्रीशियन ने छत पर व गैराज में बिजली की झालरें लगा दी हैं। दिवाली के विशेष भोज सूची भी बनाकर वे दिवाली की ख़रीदारी करने गये और इसी एरिया में स्थित वृद्धाश्रम में मिठाई देने भी। फ़ेसबुक पर उसकी कविता की पापा जी ने सुंदर शब्दों में तारीफ़ की है। महादेव में गणेश को गज का सिर लगा दिया गया है, कितनी विचित्र गाथा है गणपति के जन्म की और शिव से उनके प्रथम मिलन की।वैसे शिव से मिलने के लिए सभी को अपना सिर कटवाना ही पड़ता है। 


आज नरक चतुर्दशी है यानि छोटी दिवाली, कल के लिए बैठक में विशेष सजावट की है। विशेष भोज की भी थोड़ी बहुत तैयारी कर ली है।बच्चे सुबह-सुबह आ जाएँगे। अभी फ़ोन किया तो पता चला वे घर से बाहर दिये जला रहे थे। छोटी बहन से बात की, वे लोग भी घर में लाइट लगवा रहे थे। आज वह प्रसन्न थी, इंसान का मन कितना नाज़ुक होता है। आत्मा दृढ़ होती है, जिसे कुछ भी छू नहीं पाता।


सुबह समय पर उठे, वातावरण में जैसे उत्साह फैला हुआ था। नन्हा व सोनू आये तो उन्हें रवा इडली का नाश्ता करवाया। दोपहर को पंजाबी छोले-चावल व आलू-परवल की लटपटी सब्ज़ी। शाम को विधिवत दिवाली की पूजा की, बाहर दीपक जलाये। एक-दूसरे को उपहार दिये। जून के लिए लाल सिल्क का कुर्ता लाए हैं वे और उसके लिए भी सिल्क की एक ड्रेस। वर्षों से इसी तरह उत्सव मानते आ रहे हैं, पर हर बार एसबी कुछ जैसे नया-नया सा लगता है। दीपकों के प्रकाश में सबके चेहरे कैसे किसी अनजानी ख़ुशी से दमकने लगते हैं। रात के भोज में नन्हे के कुछ मित्र आये। वे अपने साथ पटाखे लाये थे, सभी मिलकर बाहर जलाते रहे। उसने पनीर मसाला, सूरन के कोफ़्ते, ग्वारफली व आलू की सब्ज़ी, रायता और पुलाव बनाया, मिठाइयों की पूरी एक क़तार थी, पर सभी की ज़्यादा रुचि आतिशबाजी में थी।कुल मिलकर यादगार दिवाली रही। 


आज गोवर्धन पूजा है, अर्थात गायों की वृद्धि के लिए कामना करने का दिन, प्राचीन  काल में पशु धन से ही किसी की सपन्नता का भान होता था। आज साइकिल के गियर आये, एक्स बॉक्स पर कार रेस का गेम खेला। दोपहर को बच्चे वापस चले गये। शाम को तेज वर्षा हुई थी पर रात होते-होते रुक गई। इस समय पड़ोसी के यहाँ से बम फूटने की आवाज़ें आ रही हैं।संभवत: दिवाली के पटाखे अभी तक समाप्त नहीं हुए हैं और न ही उनका जोश ! 


Tuesday, March 8, 2022

बदलियों के रंग

 

आज नौ बजे उन्होंने ग्यारह दीपक जलाए। आज के रामायण के अंक में राम का हनुमान से प्रथम मिलन दर्शाया गया है। रामायण और महाभारत देखने से दिन काफी भरा-भरा लगता है. मन में राम और कृष्ण का स्मरण बना रहता है. शाम को मास्क पाहन कर टहलने गयी तो शुरू में थोड़ी दिक़्क़त हुई पर बाद में अभ्यास हो गय। अभी आगे कई महीनों तक ऐसे ही चलेगी ज़िंदगी। कोरोना के ख़िलाफ़ इस युद्ध में हर भारतीय को अपना योगदान देना है। अमेरिका ने भारत से कोरोना के लिए दवा की मांग की है, जो भारत अवश्य ही भेज देगा. लगता है सरकार को लॉक डाउन की अवधि बढ़ानी पड़ेगी. आज जून ने भी एओएल को कुछ आर्थिक सहयोग दिया, वे लोग दिहाड़ी मज़दूरों को भोजन आदि बांट रहे हैं। 

 


इस समय यहाँ मूसलाधार वर्षा हो रही है, गर्जन-तर्जन के साथ, रह-रह कर बिजली चमकती है और बादलों की तेज गड़गड़ाहट सुनायी देती है। बंगलूरू में इस नए घर में यह उनकी पहली बारिश है, लगभग एक घंटा पहले आरंभ हुई। एक-एक करके सारी खिड़कियाँ बंद कीं। छत पर लकड़ी के झूले को बचाने के लिए जो शेड बनाया है, वह भी तेज बौछार से उसकी रक्षा  नहीं कर सका। दोपहर बाद ‘इंगलिश मीडियम’ देखी, सिनेमा हाल बंद हैं सो हॉट स्पॉट पर इसे रिलीज़ कर दिया गया है। शाम को पार्क में फूलों के सूखते हुए पौधों को देखा था, इंद्र देवता ने इतना पानी बरसा दिया कि धरती-पौधे सब तृप्त हो गये हैं। 


आज सुबह गैराज में एक कौए ने कबूतर पर हमला कर दिया। घर के अंदर से देखा तो उसे भगाया। कबूतर घायल था, कौए  ने उसके पंख नोच दिए थे। वह एक कोने में छिपने गया, उड़ नहीं पा रहा था, रास्ते में रक्त की बूँदें गिरती जा रही थीं, उसे पानी दिया पर पी नहीं सका। एक चौकीदार के द्वारा उसे डिस्पेंसरी भेजा। पता नहीं उसका क्या हुआ होगा. 


वर्षा के कारण बालकनी पर बनी शीशे की छत और सोलर पैनल अपने आप धुल गए हैं.  मौसम भी ठंडा हो गया है.आज शाम टहलने गए तो आकाश पर गुलाबी बादल थे, बिलकुल मसूर की दाल के रंग के बादल, जो नीले पृष्ठभूमि में बहुत आकर्षक लग रहे थे. रंगों का यह खेल प्रकृति के हर क्षेत्र में खेला जा रहा है. अनगिनत रंगों की तितलियाँ, मछलियां, पंछी, फूल और कीट, सर्प यहाँ तक कि जड़ पत्थरों को भी अनोखे रंगों से सजाया है प्रकृति ने, मानव इनकी ओर देखे तो सारा कष्ट भूल जाये पर उसके पास चाँद -तारों को निहारने का समय नहीं है, कुछ लोग बन्द कमरों में टीवी पर हिंसा और नफरत के खेल देखने में ही व्यस्त हैं. आज सुबह हरसिंगार के ढेर सारे फूल उठाये.  


रात्रि के नौ बजे हैं. हनुमान जी को जाम्बवान उनकी भूली हुई शक्तियों को याद दिला रहे हैं, बचपन में एक ऋषि ने उन्हें शाप दे दिया था, जिससे वे उन्हें भूल ही गए हैं. बाल्यावस्था में उन्हीं ने एक बार सूर्य का भक्षण किया था, यह भी उन्हें याद नहीं है. वे भी पूर्वकाल में कितनी ही बाधाओं को पार करके आएये हैं पर कोई नयी विपत्ति आने पर यह भूल जाते हैं. आज भी छिटपुट वर्षा हुई, शाम को आकाश सलेटी-काले बादलों से भरा था. हनुमान जी को अपना बल याद आ गया है और वे सागर पर जाने के लिए तैयार हो गए हैं. उन्हें राह में मैनाक पर्वत मिलता है, जिसे समुद्र देव ने कुछ देर विश्राम के लिए भेजा है. सागर भी राम के कुल का ऋणी है और मैनाक की रक्षा हनुमान के पिता ने  की थी. पहले लोग अपने प्रति की गयी भलाई को कितना याद रखते थे. 



Wednesday, November 5, 2014

मिनी मैराथन


परसों ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ था, पर एक बार भी याद नहीं आया न ही टीवी या अख़बार में सुना या पढ़ा, इसका सीधा सादा अर्थ उसने यही लगाया कि आजकल वह आँखें, कान, दिल, दिमाग सभी बंद करके जी रही है. अपने इर्दगिर्द के हालात की, लोगों की, उनके विचारों, भावनाओं तक की कोई खबर नहीं रखती, संवेदना शून्य हो जाना इसीको कहते हैं. आज उन्हीं परिचिता से मिलने जाना है, जिनकी विदाई में वह नहीं जा सकी थी. दो दिन बाद वे लोग यहाँ से जा रहे हैं, नन्हे ने एक कार्ड बनाया उन्हें देने के लिए. बाबाजी टीवी पर आ चुके हैं, उन्होंने बताया, नींद नित्य प्रलय है, इसके अतिरिक्त नैमित्तिक प्रलय, आत्यन्तिक प्रलय तथा महाप्रलय भी होती है. फिर कर्म की महत्ता पर प्रकाश डाला, कर्म चिन्तन पूर्वक होना चाहिए, और चिन्तन शाश्वत हो...पर जिसके मूल में रस नहीं वह फूल खिलेगा कैसे ? जिसके हृदय में स्नेह नहीं, व्यवहार चलेगा कैसे ? जिस दीपक में तेल नहीं वह दीपक जलेगा कैसे ? बाबाजी तो चले गये और उसने उन महिला को फोन किया वह तो मिली नहीं, उनके पतिदेव ने फोन उठाया. आज सुबह इंटरनेट का कनेक्शन नहीं मिला. कल तीन इमेल भेजनी थीं पर सम्भवतः कुछ गड़बड़ है, जून को डर है नहीं पहुँची होंगी. नेपाल में हालात सुधर रहे हैं ऐसा कहना ही पड़ेगा. वाजपेयीजी का आज आपरेशन है, पाकिस्तान के शासक ने शुभकामनायें भजी हैं, इस बार काश्मीर समस्या का स्थायी हल निकल ही जाना चाहिए. रात भर की वर्षा के बाद आज मौसम ठंडा है. उसके अस्थिर मन की तरह लिखाई भी अस्थिर हो रही है ! ईश्वर ही उसकी रक्षा करेंगे !

आज की सुबह भी बादलों से घिरी है, रात को वे जैसे ही सोने के लिए लेटे, नींद से आँखें मुंद गयीं. तिनसुकिया में ‘नन्दन कानन’ में व बाद में बाजार में घूमने से काफी थकान हो गयी थी. खाना भी बाहर ही खाया. साल में दो-एक बार ऐसे घूमना और बाहर खाना अच्छा है पर ज्यादा नहीं. कल सुबह वह उन परिचिता से मिलने गयी, दो दिन बाद ट्रक में उनका सामान लोड होगा. बातचीत में दोनों ने कहा, भविष्य में आज से अठारह-उन्नीस वर्षों बाद वे उनसे मिल सकते हैं रिटायर्मेंट के बाद जब वे भी दिल्ली रहने जायेंगे. दोपहर में नन्हे का एक मित्र आ गया और इधर-उधर की बातें करता रहा, बाद में वे तिनसुकिया गये. नैनी के लिए एक पंखा लाकर दिया है, अगले कुछ महीनों में पैसे चुकाएगी, ऐसा उसने कहा है, ज्यादा काम भी करेगी. आज भी बाबाजी ने सुंदर वचन कहे, ईश्वर तो सदा सर्वदा है, उसे खोजना नहीं है बस पर्दा उठाकर उसे देखना भर है. वह सच्चाई है, अंतरात्मा है, जिसे मानव नकारते रहते हैं. कल उसने उस सखी के लिए एक उपहार भी लिया जिसका जन्मदिन अगले हफ्ते है. दो दिन बाद मैराथन दौड़ भी है पर शायद वह नहीं जा पाए, वे जो चाहते हैं हमेशा वही उनके लिए सही नहीं होता. घर से फोन नहीं आया है न ही मकान के पैसों का चेक, जिसे जमा करके जून नई जमीन के कागजात लेंगे, शायद उन्हें जाना भी पड़े. सिवाय प्रतीक्षा के वे फ़िलहाल कुछ नहीं कर सकते. नन्हा कुछ देर बाद पढने जायेगा, उसका सुबह का काम भी तभी शुरू होगा.

ज्ञान को अपने हृदय कलश में भरने के लिए आवश्यक है कि वे अपने मन को खुला रखें, विचारों को संकीर्ण न बनाएं. बल, बुद्धि, विद्या, धैर्य को यदि अपना मित्र बनाना है तो हृदय को विशाल बनाना होगा. आज बाबाजी बच्चों को सिखा रहे हैं. इस समय आठ बजे हैं, उसका स्नान-ध्यान हो चुका है, नन्हा अभी नाश्ता खा रहा है. सुबह उठकर एक घंटा कम्प्यूटर पर बिताया, न्यूज़ पढ़ीं, एक इमेल भी आया था. दीदी और बंगाली सखी ने उसके मेल का जवाब अभी नहीं दिया है. कल मिनी मैराथन है, सम्भवतः वह जा सकेगी, आज शाम को ही वाकिंग करते समय पता चल जायेगा. पुरस्कार न भी मिले तो भी भाग लेना अपने आप में एक अनुभव होगा and she loves walking and jogging आज धूप तेज है, white snow ball का एक पौधा ज्यादा पानी से मरने की कगार पर है कल उन्होंने उसे ट्रांसप्लांट किया था.