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Sunday, April 12, 2015

कल्याण का अंक


पिछले दो दिन फिर कुछ नहीं लिखा, शनिवार को जून का अवकाश था, कल जन्माष्टमी थी, शाम को वे झांकी देखने गये. इस समय रिमझिम वर्षा हो रही है और यहाँ खिड़की के पास बैठकर ठंडी हवा के झोंकों के साथ –साथ फुहार भी तन को सिहरा रही है, पर जल्दी ही खिड़कियाँ बंद करनी पड़ेंगी, पानी से सब कुछ भीग रहा है. आज से नन्हे के छमाही इम्तहान शुरू है, पहला पेपर ही गणित का है. आज उसे हिंदी पुस्तकालय जाना है, बहुत दिनों से कविताएँ नहीं पढ़ीं, जून ने इंटरनेट से ‘काव्यालय’ से कुछ कविताएँ लाकर भी दी हैं, सभी नहीं पढ़ीं. अभी-अभी मंझले भाई से बात की, कल सुबह दीदी का फोन आया था, शाम को बड़े भाई-भाभी से, पिताजी आजकल वहाँ गये हुए हैं. अगले हफ्ते ससुराल से माँ-पापा आ रहे हैं, घर में चहल-पहल हो जाएगी. शनिवार को दिल्ली में शक्ति मन्दिर में आग लगने से पांच बच्चों की मृत्यु हो गयी. ईश्वर की लीला भी विचित्र है. मानव अपनी करतूतों को कितनी आसानी से ईश्वर के नाम मढ़ देता है. वह स्वयं ही अपनी हालत का जिम्मेदार होता है न. पर वे बच्चे क्या यह बात जानते थे ? दिल्ली के एक अस्पताल की हालत पढ़कर भी अच्छा नहीं लगा. देश में एक तरफ तो ऐसे अस्पताल हैं जो पांच सितारा होटलों को भी मात करें और दूसरी ओर ऐसे , जहाँ सफाई भी नहीं है. यह जीवन कितने विरोधाभासों से घिरा है. ऐसे द्वन्द्वों में उलझा मन कैसे ध्यानस्थ हो सकता है, पर यही संसार है. कृष्ण का उपदेश उन्हें सदा याद रखना है कि ऐसे वातावरण में भी जो स्वयं को स्थिर रख सके अर्थात आँखें मूंद सके, नहीं, कृष्ण ऐसा नहीं कहते, वे तो जूझने को कहते हैं. लोगों का दुःख दूर करने की क्षमता अपने भीतर जगाने को कहते हैं. अन्याय का मुकाबला करने को कहते हैं. कर्म क्षेत्र में डटे रहने को कहते हैं. जितनी अपनी क्षमता हो उतना ही वे इस जग का भला करके जाएँ !

कल इस समय वर्षा हो रही थी, आज धूप खिली है, ऐसे ही जीवन भी हर पल रंग बदलता है. परेशानियाँ भी आ जाती हैं फिर साक्षी भाव से देखते रहें तो चुपचाप चली भी जाती हैं. ऐसे ही सुख भी आता है तो टिकता थोड़े न है, चला जाता है, वे वहीं के वहीं रह जाते हैं, अपने आप में पूर्ण, न तकलीफ आने से उनका कुछ घटता है न सुख आने से कुछ बढ़ता है. मान हो, वह भी कुछ नहीं बढ़ाता, अपमान हो वह भी कुछ नहीं घटाता. वे पूरे हैं पूरे ही रहते हैं. हर क्षण उस पूर्ण परमात्मा की तरह ! कल शाम उसके सिर में दर्द था पर उसका मन एक अनोखी शांति से ओतप्रोत था. वह हँस रही थी, बातें क्र रही थी. दर्द से स्वयं को अलग देखने का प्रयास सफल हुआ था, फिर सोने से पूर्व ध्यान में भी आत्मा ने अद्भुत रंग दिखाए अपनी तुलिका से. वे जब ज्ञान में स्थित रहते हैं तो वह उनकी रक्षा करता है. आज बाबाजी ने टीवी पर कृष्ण कथा सुनाई. साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी कुछ बातें भी..जीरा और गुड़ वायु का शमन करते हैं, आंवले और तिल का उबटन लगाने से ताप दूर होते हैं. कल वह एक परिचिता से तीन और कल्याण लायी है. पिछले दोनों पढ़कर बहुत लाभ हुआ. ज्ञान कहीं से भी मिलता है, अमूल्य है. जीवन में सभी भौतिक वस्तुएं साथ निभाने वाली नहीं हैं, किसी न किसी मोड़ पर सभी छूटने वाली हैं, सिर्फ ज्ञान ही अंत तक साथ रहेगा और सम्भवत उसके बाद भी. नन्हे का आज फिजिक्स का इम्तहान है, यह उसका प्रिय विषय है. कल गणित का बहुत अच्छा नहीं हुआ पर उसे इस बात का अहसास था. छोटे भाई को आज पत्र लिखा है. पिताजी को लिखना है. मंझले ने अभी तक पत्र का उत्तर नहीं दिया है.

 


Thursday, September 18, 2014

सद्भावना यात्रा


आज की सुबह बहुत व्यस्त रही, सुबह वे रोज की तरह उठे, नन्हा और जून स्कूल और ऑफिस गये, इसी बीच उसने कुछ देर बगीचे में काम किया. सूखे फूलों को काटा फिर बड़े भाई से फोन पर बात की. उन्हें दिल्ली में किसी प्रकाशक का पता मालूम करने को कहा जो हिंदी कविताओं की पुस्तक छापता हो. उसकी पुस्तक आकार लेती प्रतीत हो रही है. जून ने कल रिपोर्ट लिखवाई थी, प्लम्बर आया उसके पहले गैरेज में स्थित जंक्शन बॉक्स देखने व सीमेंट से उसे ठीक करने दो अलग-अलग समूह आये. उनमें से एक व्यक्ति ने आंवले मांगे, उसने अपने लिए भी आंवले तुड़वाये. सुबह दो सखियों से बात की, तीन कवितायें टाइप कीं, यही सब करते कराते जून के आने का वक्त हो रहा है. प्रवचन में मन नहीं लगा न पाठ में, जब आस-पास इतना कुछ चल रहा हो तो मन जिसे एक मौका चाहिए, फुर्र से उड़ जाता है. कल दोपहर को भी भाई का फोन आया था, माँ के जाने के बाद उनमें थोड़ा बदलाव तो आया लगता है, शायद उन सभी पर किसी न किसी रूप में असर डाला है इस होनी ने, वह जो इतने दिनों से पुस्तक छपवाने का स्वप्न भर देखा करती थी, रोज इस पर काम कर रही है. समय बहुत कम है, कौन जाने कोई कब इस जहां से चला जाये वक्त रहते यदि नहीं चेते तो सिवा पछतावे के और कुछ हाथ नहीं आएगा.

आज नन्हे का हिंदी का इम्तहान है, उसने कल शाम को आधे दोहे के अर्थ के अलावा कुछ नहीं पूछा, अब वह आत्मनिर्भर हो गया है. कल जून ने भी पिता से बात की. सभी अपनी तरह से उसे समझाना चाहते हैं. पिता के अनुसार जिस तरह कोई गिरे हुए दूध का अफ़सोस नहीं करता वैसे ही किसी के जाने का भी दुःख नहीं करना चाहिए. भाभी के अनुसार उसे अपना दुःख सभी के साथ बांटना चाहिए. भाई ने कहा, वक्त लगेगा पर धीरे-धीरे सब ठीक हो जायेगा. इस क्षण उसके मन में लेशमात्र भी दुःख नहीं है, लेकिन वे कारण धीरे-धीरे स्पष्ट हो रहे हैं जिनके कारण इतने दिनों तक वे परेशान थे. सर्वप्रथम तो अपराध भावना कि तेहरवीं पर वे जा नहीं पाए, दूसरे घरवालों को अपनी बात ठीक से समझा न पाना और तीसरा और सबसे बड़ा कारण तो उस स्रोत का न रहना जिससे वह जुड़ी थी और वे सारे दृश्य तथा वेदना, जो अंदर तक महसूस की.

आज नन्हे का आखिरी इम्तहान है. धूप निकली है, परसों रात की आँधी-वर्षा के बाद मौसम कुछ ठंडा अवश्य हो गया है. कल दोपहर भर वह कवितायें टाइप करती रही अब पूरी सौ हो चुकी हैं. शाम को जून ने कुछेक को प्रिंट भी कर दिया है. इसी हफ्ते उन्हें जाना भी है. उसका मन सभी के प्रति स्नेह से भरा हुआ है, माँ के प्रति जो उसका प्रेम था वह कई धाराओं में बंट गया लगता है. एकाएक ही सभी भाभियाँ बहुत प्रिय लगने लगी हैं और उनके परिवारों के प्रति सदा शुभकामनायें प्रस्फुटित होती रहती हैं, इस बार की अपनी यात्रा को ‘सद्भावना यात्रा’ का नाम देना उचित रहेगा. कल रात भी उसने सपने में सभी को देखा. माँ को भी देखा, पर सुखद अनुभूति थी. वे सभी यहाँ आए हुए हैं और वे उन्हें क्लब ले गये हैं. कल नन्हे का गणित का पेपर बहुत अच्छा नहीं हुआ लेकिन वह जल्दी ही सामान्य हो गया, उसका देर तक परेशान रहना उन्हें भी अच्छा नहीं लगता.  


कल सुबह व्यस्तता के कारण डायरी नहीं खोल पाई, लेकिन पिछले एक महीने की व्यस्तता रंग लायी है और आज सुबह ही उसकी किताब की दो पांडुलिपियाँ पूरी तरह से तैयार हो गयी हैं, और जब इतना कार्य जून और नन्हे की मदद से व ईश्वरीय प्रेरणा से सम्पन्न हो गया है तो भविष्य भी उज्ज्वल होगा. परसों उन्हें जाना है, अभी पैकिंग नहीं हुई है. इस बार का जाना हर बार से थोड़ा अलग है, कल छोटे भाई का भावपूर्ण पत्र आया जिसे पढ़कर आँखें बरस पड़ीं, जून ने उसे संभाला, यह ऐसा दुःख है जिसको दूर होने में शायद सारी उम्र लग जाएगी. उस दिन जब वह माँ कविता पर काम कर रही थी, कैसे गैस पर रखे चावलों को जलने से एक आवाज ने बचा लिया था. उसे यह एक चमत्कार ही लगा था, वह किचन में चावल रखकर भूल गयी थी, अचानक बर्तन गिरने की आवाज हुई, दौड़ कर गयी तो वहाँ कोई नहीं था, खिड़की भी बंद थी, किसी पक्षी या बिल्ली के आने की कोई जगह नहीं थी, यहाँ तक कि कोई बर्तन भी गिरा हुआ नहीं था, फिर वह आवाज...उस क्षण उसने माँ को अपने पास ही महसूस किया था. इसी तरह वे सब किसी न किसी रूप में उनकी स्मृति को उनकी उपस्थिति को हमेशा अपने आस-पास पाते हैं, पाते रहेंगे. पिछली रात तेज गर्जन-तर्जन के साथ वर्षा हुई, इस वक्त थमी है. नन्हा अपने मित्र के यहाँ गया है. आज सुबह ‘जागरण’ में प्रेरणादायक वचन सुने, कुछ देर ध्यान भी किया. संगीत का अभ्यास पिछले कई हफ्तों से छूट गया है. उसने सोचा है, वापस आने पर पुनः शुरू करेगी, 

Monday, March 31, 2014

मोती और सीपियाँ


नन्हे के छमाही इम्तहान समाप्त हो गये, कल से फिर पढ़ाई शुरू हो गयी है. कल उसके स्कूल में Founder”s Day मनाया जाएगा. जून सदा की तरह खुशदिल हैं, स्नेह से भरे हुए, नन्हे और उसके लिए हमेशा तत्पर. वर्षा बदस्तूर जारी है, जिससे  मौसम  ठंडा रहता है. इतवार को उन्हने एक मित्र परिवार को बुलाया था, उनके आने की प्रतीक्षा थी, पर किसी कारण से वे नहीं आ पाए, उसे बुरा लगा पर उनसे कह नहीं सकती, शिष्टता का यही तकाजा है. धीरे-धीरे मन खुद ही भूल जायेगा. समाचारों में सुना, तमिलनाडु की तरह पश्चिम बंगाल और बिहार में भी राज्य सरकार को बर्खास्त करने की मांग उठने लगी है. गुजरात में तूफान से तबाही मची है.

कल शाम वे Face off का cd लाये, फिल्म की कहानी कुछ अलग सी है, हीरो का चेहरा बदल कर विलेन का चेहरा लगा देते हैं और विलेन हीरो का चेहरा पा लेता है. आजकल वैसे भी तो यही हो रहा है, असली-नकली का भेद पाना बहुत मुश्किल है. उसे लगता है जीवन का एक-एक क्षण कीमती है जैसे माला का हर मोती, पूरे जोशोखरोश के साथ हर नये दिन का स्वागत करेगी जो उसके लिए कितने ही ख़ुशी के पल समेटे हो सकता है.

अभी-अभी आचार्य गोयनका जी का विपश्यना पर प्रवचन सुना, ‘विपश्यना’ साधना की पद्धति है जिसमें मानव अपने चित्त को गहराइयों तक शुद्ध व निर्मल बनता है, मानस में राग और द्वेष के संस्कार पत्थर पर पड़ी लकीरों की तरह गहरे हैं और मानव हर दिन उन्हें और गहरा बनाते जाते हैं. आचार्य कहते हैं साक्षी भाव से उन्हें देखना आ जाये तो जीने की कला आ गयी. लेकिन बुद्धि के स्तर पर इसे समझना एक बात है और अनुभति के स्तर पर उतारना बिलकुल दूसरी बात है. जिसमें ध्यान बहुत सहायक हो सकता है. किसी भी बात का असर मानस पर इतना गहरा न हो कि नींद ही उड़ जाये, कायस्थ होकर कोई इस बात को जितनी जल्दी समझ ले उतना ही अच्छा है.
कल शाम उन्होंने उस फिल्म का बाकी भाग देखा जो परसों शाम को लाये थे, साथ ही क्रीम, चॉकलेट और कोको पाउडर भी लाये थे, बिना सोचेसमझे खर्चा करने पर और यूँ ही दिशाहीन जीये चले जाने पर उस रात वह बहुत परेशान हो गयी थी, जून उसकी बात समझ गये थे और कल का दिन उन्होंने बहुत अच्छी तरह बिताया, शांति और समझदारी के साथ. नन्हे के अंक बहुत अच्छे नहीं आ रहे हैं, और उसे इस बात की फ़िक्र भी है यह अच्छी बात है. कल रात नूना ने वह स्पीच भी लिख ली जो कल की मीटिंग में उसे बोलनी है, कल उनके सत्र की अंतिम मीटिंग है. यकीनन वह सबको पसंद आनी चाहिए. कल भांजे-भांजी के लिए कम्प्यूटर पर बनाये कार्ड्स भेजे, भविष्य में वे कार्ड्स इसी पर बनाया करेंगे.

आज उसने टीवी पर उर्दू कवि कृष्ण अदीम का साक्षात्कार सुना, पहले उनका परिचय, फिर उस परिचय की पुष्टि स्वयं कवि के शब्दों में, फिर उनके संघर्ष का जिक्र किया गया, और आगे की बात कवि के शब्दों में. इसी तरह उनकी शायरी पर चर्चा हुई फिर उनके वर्तमान जीवन का विवरण भी दिया.
तू जो चाहे तो दर्द का मेरे दल्मा ? हो जाये
वरना मुश्किल है की मेरी मुश्किल आसां हो जाये
और
इक जरा सी दस्तक को खिड़कियाँ तरसती हैं
अब तुम्हारे कदमों को सीढ़ियाँ तरसती हैं

सल्तनत बहारों की इनको सौंप दीजे
महके-महके फूलों को तितलियाँ तरसती हैं

क्यों न हम दुआ माँगे दारें निसां ? से
कब से पहली बारिश को सीपियाँ तरसती हैं 

Friday, March 28, 2014

भूपेन हजारिका का जादू


आज विश्व पर्यावरण दिवस है, अमलतास के पीले फूल, गुलमोहर के लाल पुष्प और एक अनजान वृक्ष के गुलाबी कुसुमों ने सारे नगर को एक कैनवास में बदल दिया है. सडकों पर भी फूल बिछे हैं जैसे किस ने रंग छिडक दिये हों. आज नये स्कूल में पहली बार नन्हे को अस्वस्थता के कारण छुट्टी लेनी पड़ी है, जून उसे अस्पताल ले गये और दवा दिलाई. इस वक्त ठीक लग रहा है. ईश्वर उसे सेहत व शक्ति दे जिससे अगले हफ्ते होने वाले इम्तहान अच्छी तरह से दे सके. कल शाम एक परिवार मिलने आया, वृद्ध माता-पिता भी थे, सारी शाम उनके साथ जो बातें कीं रात को सोते वक्त भी मन को खटखटाती रहीं. कल क्लब में भूपेन हजारिका आ रहे हैं. उसने एक सखी को साथ चलने का निमन्त्रण दिया.

आज दिगबोई जाने वाले सभी बच्चों ने व उनके माता-पिता ने सोमवार से होने वाली परीक्षाओं की तैयारी के लिए उनका घर पर रहना ही तय किया सो नन्हा जो आज जाने के लिए तैयार था, उसे घर पर ही रहकर पढ़ने का अवसर मिल गया. इस समय आठ बजे हैं, वह पिछले एक घंटे से आँखों को जबरदस्ती खोलकर geography की work book हल कर रहा है. कल छोटे भाई ने जन्मदिन की बधाई दी, इतने दिनों बाद उसे अपने आप शायद ही प्रेरणा हुई होगी, जरूर किसी ने याद दिलाया होगा. उसका कार्ड तो पहले ही मिल गया था.

कल शाम वे भूपेन हजारिका का कार्यक्रम देखने क्लब गये तो सारी सीटें भर चुकी थीं. कुछ देर जून और उसने खड़े होकर ही देखा फिर जून के एक मित्र ने अपनी सीट उसके लिए छोड़ दी, कल्पना लाजमी भी आई थीं. उसकी परिचिता एक महिला के भजन गायन से शुरुआत हुई, एक अन्य स्थानीय गायक की दो गजलें भी अच्छी थीं- 

अंदर अंदर क्या टूटा है, चेहरा क्यों कुम्हलाया है
तन्हा तन्हा रोने वालों,  कौन तुम्हें याद आया है
और
तू ख्याल है किसी और का, तुझे सोचता कोई और है

डाक्टर भूपेन हजारिका काला कुर्ता, चूड़ीदार पायजामा व टोपी पहने थे. ‘दिल हूम हूम करे’ गाना सुनकर सभी मंत्र मुग्ध हो गये. उनकी कई बातों ने भी लोगों को हंसाया, लोगों की भीड़ देखने लायक थी. पूरा हाल खचाखच भरा था. वे पूरा कार्यक्रम तो नहीं देख पाए, नन्हा घर पर अकेला था, उसे अकेले छोड़कर जाना अच्छा भी नहीं लगा था पर भूपेन हजारिका को देखने का लोभ संवरण नहीं कर पायी.

आज एक सखी ने फोन किया, वह दूधवाले को कह दे कि दोदिन बाद उसे एक लीटर दूध ज्यादा दे, उसकी समझ में यह नहीं आता कि वह उसका भी दूधवाला है फिर वह उसके द्वारा क्यों कहलवाना चाहती है. खैर, वह और उसकी बातें वही जाने. आज भी वर्षा बदस्तूर जारी है पिछले दो-तीन दिनों की तरह. कल नन्हे का पहला पेपर था, परसों रात को उसे नींद नहीं आ रही थी, बच्चों को भी घबराहट का सामना करना पड़ता है पर कल वह ठीक था. कल उसने ड्राइविंग न जानने पर अफ़सोस जाहिर किया तो जून ने मजाक में एक ऐसी बात कही जो उसे अच्छी नहीं लगी. जिस तरह का सवाल उसने पूछा था शायद उसका वही उत्तर वह दे सकते थे. दुनिया में हर कोई सभी कुछ तो नहीं सीख सकता है. फिर भी वह थोड़ा उदास हो गयी.




Sunday, March 2, 2014

कपास के पुष्प



कल रीडर्स डाइजेस्ट में एक ऐसी किताब के बारे में पढ़ा जो आँख की पलक के इशारे से लिखवाई गयी है, वह लेखक कितना बेबस था पर अपनी विवशता को उसने अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया. उसके पास सारे अंग सही-सलामत हैं फिर भी कविताएँ नहीं लिखीं, इस नये वर्ष में तो अभी तक एक भी नहीं ! आसमान में आज बादल है और उसके मन में भी, पिछले कई दिनों से ऐसा महसूस हो रहा है कि..किसी स्तर पर भीतर प्रेम सुप्त हो गया है, आज सुबह उठी तो पहला ख्याल यही आया, रात को सोई थी तो अंतिम भी यही था, हो सकता है यह उसका भ्रम हो पर...? सुबह चुनाव की खबरें सुनी, वही डेढ़ साल पहले की स्थिति है थोड़ी सी रद्दोबदल के साथ, बीजेपी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला है, फिर खिचड़ी सरकार बनेगी और टूटेगी..पता नहीं यह सिलसिला कब खत्म होगा. कल दोपहर नन्हे को पढ़ाने में बीती, पहला इम्तहान अंग्रेजी का है. उसकी तैयारी हो चुकी है, इसीलिए निश्चिंत है. जब वह पेपर हल कर रहा था, उसने भी अपनी किताबें पढ़ीं, प्रश्न पत्र भी आये हैं, जिन्हें सितम्बर से पहले कभी भी भेज सकते हैं. शाम को गेस्ट हाउस गयी, क्लब की एक सदस्या आज जा रही हैं, किसी को भी विदाई देना मन को भारी बना जाता है, विदा लेने वाले का दिल भी जरूर भर आता होगा. वह महिला भी अपनी मिसाल आप थी. कल रात उसे दो स्वप्न दिखे, एक में उसकी असमिया सखी के  पुत्र को देखा, जो गोरा, बेहद सुंदर और कोमल लगा, वह सखी स्वयं साइकिल चलाकर उनके लिए कुछ लेने जा रही है. उनके बगीचे में कपास के वृक्ष पर सुंदर श्वेत पुष्प लगे हैं. दूसरे स्वप्न में नन्हा और वह एक लम्बी पैदल यात्रा पर जा रहे हैं, एक बूढ़ी औरत उन्हें रास्ता बता रही थी फिर वह अचानक गायब हो जाती है आगे निकल जाती है और वे अरुणाचल प्रदेश के किसी गाँव का पता पूछते-पूछते आगे बढ़ते हैं, रास्ते का नाम ‘चींटी पथ’ है.

अभी नन्हे को बस तक छोड़ कर आई, हर बार की तरह थोड़ा परेशान था, पडोस के बच्चे का भी यही हाल था. मौसम आज भीगा-भीगा है, रात भर शायद पानी बरसा है. आज सुबह जून ने नींद न आने की शिकायत की तो उसने अपने मन की बात उन्हें बता दी, पर सुनकर वे सामान्य थे, पर उनका यही सामान्य होना तो उसे असामान्य लग रहा है. आज दोपहर उसे हिंदी क्लास के लिए जाना है, जून को उसने कहा है कि नन्हे के साथ रहने के लिए वह आधे दिन की छुट्टी ले लें, पिछले हफ्ते भी उनके न रहने के कारण वह नहीं जा पायी थी. कल जून वे दोनों पुरस्कार लाये, जो उसे ऊर्जा संरक्षण प्रतियोगिताओं में मिले थे. एक छोटा कुकर और दूसरा दीवार घड़ी. उसकी थोड़ी सी मेहनत का इतना अच्छा फल, मेहनत का फल मीठा होता ही है.

अभी-अभी दो बार फोन की घंटी बजी, वह उठाती उसके पूर्व ही बंद हो गयी, सुबह उसे भी अपने फोन का जवाब नहीं मिला था, शायद वहीं से आया हो. कल जून को उसने दो बार सही बात नहीं बतायी, एक बार बताना तो इसीलिए नहीं चाहा कि वह उसे नन्हे को अकेले घर में छोड़कर जाने के लिए टोकते और दूसरी बार यूँ ही, क्या यह अधःपतन की निशानी है ? कितने आराम से वह झूठ बोल सकती है, इसका पता उसे भी नहीं था, क्या इसलिए कि वह आसानी चाहती है, कोई असुविधा या प्रतिकूल शब्द सहन नहीं कर सकती और वह इतनी कमजोर है कि सच के वेग को सह नहीं पायेगी, अपनी आत्मा पर बेवजह दाग लगा रही है, अपने आप को तो कोई धोखा नहीं दे सकता न, चाहे कितना भी सामान्य क्यों न हो, झूठ तो झूठ ही है न !

Today is world women’s day ie her day ! she realized her importance ie importance of being a woman. Nanha and jun are with her in the celebration, cause today is Sunday…jun made tea and now making “lunch”, special lunch for special day. She rang to her friends and wished them, all said they had forgotten that today was women’s day. Nanha is preparing for maths paper and asking who invented this subject ? he is doing well in exams.




Thursday, December 5, 2013

यंग आर्किटेक्ट - बिल्डिंग ब्लॉक्स


सुबह के सवा दस हुए हैं. आज आकाश पर सूरज की बादशाहत है कल की तरह बादलों की नहीं. कल नन्हे की गर्दन में हल्का खिंचाव था आज वह ठीक है, वही है कि छोटी-छोटी बातों पर झुंझला रही थी. वह उठ तो जल्दी गया था पर आदत के अनुसार धीरे-धीरे सब काम कर रहा था. जून ने  फोन पर नन्हे के बारे पूछा, जैसा वह लगभग रोज ही करते हैं. आज उसे एक अनपेक्षित फोन आया, एक परिचित अपने बेटे के लिए हिंदी में एक पत्र लिखवाना चाहते थे, उसकी एक सखी का फोन भी आया, उसे मेडिकल गाइड से बच्चों की कान की समस्या के बारे में जानकारी चाहिए थी. कल रात उन्होंने रजाई को विदा दे दी, अब कम्बल से ही काम चल जायेगा. कल जून और वह दोनों ही उत्साह में कुछ कमी महसूस कर रहे थे, आज वह ठीक है, इसका अर्थ हुआ मौसम का असर मिजाज पर पड़ता ही है.

अचानक बिजली चली गयी है, वह करी पत्ता लेने बगीचे में गयी तो देखा बिजली विभाग के कर्मचारी घर के सामने वाली स्ट्रीट लाइट ठीक कर रहे हैं, उसे याद आया कल ही जून ने शिकायत दर्ज करवाई थी. आज फिर बादल हैं, रात को आंधी-तूफान भी आया, जिसका अंदाजा हर तरफ बिखरे पत्तों से लगाया जा सकता है. आज नन्हे का विज्ञान का इम्तहान है और कल अंतिम संस्कृत का, उसके बाद वे यात्रा की तयारी में लग जायेंगे. कल दोपहर अख़बार पढ़ने में व्यतीत हुई, टूथ ब्रश और हेयर डाई के साइड इफ़ेक्ट पर दो लेख पढ़े, दोनों ही सीमा में इस्तेमाल करने चाहिए. आजकल बंधी बंधाई दिनचर्या है, बीच-बीच में कुछ समय seven summers के लिए भी निकाल लेती है. बिजली की गाड़ी चली गयी है पर लाइट आयी नहीं है.

दस बजने वाले हैं, मन कुछ उखड़ा सा है, सुबह नन्हे पर फिर झुंझलाई, ज्यादा तो नहीं पर थोड़ा सा भी क्रोध करना नन्हे पर या किसी पर भी उसे स्वयं अपनी हार लगता है, अपनी तौहीन भी, मन देर तक परेशान रहता है. शैतान हर रूप में उन्हें लुभाता है और इसके चंगुल में वे फंस ही जाते हैं. आज नन्हे का आखिरी इम्तहान है और उसे ख़ुशी है कि आज से उसे डांटने की कोई जरूरत नहीं रहेगी. आज धूप निकली है पर पिछली वर्षा के कारण सारे फूल कुम्हला गये हैं, धूप पाकर वे फिर खिल उठेंगे. काश ऐसी कोई धूप उसके लिए भी हो जिसे पाकर...अच्छी सी एक गजल या seven summers के कुछ पेज ! आज वह टोमेटो सॉस बना रही है, बगीचे के लाल रस भरे टमाटरों से !

बारिश लगतार हो रही है, सर्दियां जाते-जाते फिर लौट आई हैं. पता नहीं बादलों में इतना पानी कहाँ से आया है. कल भी दिन भर बदली बनी रही और आज तो दिन में भी रात का अहसास हो रहा है. नन्हा young architect से नये घर का मॉडल बना रहा है. दो दिन बाद उन्हें जाना है, मौसम तब तक ठीक हो जायेगा ऐसी प्रार्थना भगवान से करनी चाहिए. आज उसे खत भी लिखने हैं और दोपहर को हिंदी कक्षा लेने भी जाना है. शाम को क्लब जाना है एक सखी से किया हुआ वादा निभाने के लिए. कल शाम थोड़ी पैकिंग की, खर्चे का हिसाब भी लगाया लगभग तीस हजार का बजट है. इतनी महंगाई के जमाने में एक महीना घूमने में इतना खर्च तो होगा ही, लेकिन राजस्थान के सुंदर किलों और रेतीले मैदानों की कल्पना करता हुआ मन रूपये-पैसे के बारे में सोचना ही नहीं चाहता.  



Monday, August 12, 2013

सफर का सफर


आज नन्हे का पहला इम्तहान है सोशल स्टडी, जिसे वे इतिहास और भूगोल के नाम से पढ़ा करते थे. कल शाम को वह थोड़ा सा घबरा गया था, और रात को सो नहीं पा रहा था. उसे परीक्षा की महत्ता का अहसास हो रहा था, पर आज सुबह सामान्य था, उसने इतना तो पढ़ा ही है कि सभी प्रश्नों के उत्तर दे सके और कोई कमी रह भी गयी तो उसमें उतना ही दोष उनका भी है, उसे पूर्ण विश्वास है कि ईश्वर उसकी सहायता करेगा. वह इतना मासूम और प्यारा है और उनके जीवन को खुशियों से भर दिया है उसने, ईश्वर का सर्वोत्तम उपहार उनके लिए. उसके मन की सारी दुआएं उसके साथ हैं और सिर्फ उसी के साथ नहीं हर उस बच्चे के साथ जो परीक्षा में बैठ रहा है, उन्हें उनकी मेहनत का सुपरिणाम मिले, आमीन ! अभी जून ने भी फोन करके पूछा, उनका दिल भी नन्हे के आस-पास ही है आज, मौसम आज ठंडा है, रात से ही वर्षा हो रही है.

दस बजने वाले हैं, अभी-अभी उसने उनके मैगजीन क्लब की Sunday पत्रिका का एक अंक देख-पढकर रखा है, अच्छी पत्रिका है, काफी कुछ पढने को है पर आभी उसके पास समय नहीं है, और लंच के बाद जून वापस ले जायेंगे. अभी भोजन भी पूरा नहीं बना है और उनकी पसंद के अनुसार चटनी भी बनानी है, माली ने जो पुदीना लगाया था काफी फ़ैल गया है और करी पत्ते के पेड़ में भी कोमल, हरे, नये पत्ते आ रहे हैं, हरी मिर्च भी लगनी शुरू हो गयी है. मौसम आज भी कल जैसा ही है, वर्षा कुछ देर पहले ही थमी है. कल नन्हे का पहला पेपर अच्छा हुआ और आज वह बिलकुल सामान्य था, कल रात भी आराम से सोया.

Today’s discourse of Dada Vasvani was very very useful after the India’s defeat in yesterday’s match and incidents during last one hour. He says that 92% of our worries are only due to trivial matters that matters which are of no concerns to us. SO she is not unhappy at all. Victory and defeat are woven in a cycle and come after one another. Today again weather is cloudy; it has too cold after three days of continuous raining. Nanha is preparing for tomorrow’s  exam, she finished that book ”The Dangerous Fortune” today morning.

सुबह-सुबह पानी फिर ठंडा लगने लगा है, दिसम्बर-जनवरी की तरह. बादलों के कारण दिन भर घर में बिजली जलानी पडती है. कल सुबह नन्हा सोकर उठा तो कहने लगा अभी शाम है या सुबह कुछ पता ही नहीं चल रहा. आज उसका अंग्रेजी का पेपर है. कल दोपहर तक ही पढ़ाई हो चुकी थी. शाम को जून के खेलने जाने पर कुछ देर पढने-पढ़ाने के बाद वे एक खेल खेलने लगे, स्पेलिंग का खेल, नन्हे को बहुत मजा आ रहा था. ट्रेन में भी वे ये खेल खेल सकते हैं. घर जाने में एक हफ्ते से भी कम समय रह गया है. पिछले दिनी माँ-पापा और छोटी बहन के पति के पत्र आये, जून फोन से ही बात कर लेंगे अब जवाब देने का समय नहीं रह गया है. अब और क्या लिखे... उसका ध्यान घड़ी की ओर था, एक हफ्ता या उससे भी अधिक समय हो गया शुक्रवार को ९.३० का कोई प्रोग्राम देखे. कल रात एकाएक नींद खुली उससे पहले सपने में हसीना मुइन को देख रही थी.
जून ने दफ्तर से लौट कर बताया, दीदी भी परिवार सहित उसी दिन दिल्ली पहुंच रही हैं.

बात यह है कि आदमी या तो शायर होता है या नहीं होता है.

उसे जाते हुए तकना है और खामोश रहना है
और उसके बाद अपने आप से तकरार करना है

आज ‘आधा चाँद’ में दो शायराओं से मुलाकात की. एक का नाम शाइस्ता था और दूसरी का नाम थोड़ा मुश्किल सा था. बेहद अच्छा और उसकी रूचि का है यह कार्यक्रम. मन को प्रेरणा देता है और आत्मा को सुकून. शायरी जीवन का फूल है और जो इसकी खुशबू को अपने दिल में समो लेता है वह कभी तन्हा नहीं रहता, वह खुशबू उसके साथ रहती है, इर्दगिर्द लिपटी हुई सी. जैसे किसी खुदा के बंदे को उसकी लौ घेरे रहती है.

मैं नर हूँ तुम नारायण हो
मैं हूँ संसार के हाथों में संसार तुम्हारे हाथों में

आज सुबह किन्हीं सन्त के मधुर वचनों को सुनकर नर में नारायण को देखने की शिक्षा प्राप्त हुई है. बचपन में कभी यह भजन सुना था. आज क्रिकेट का फाइनल है, श्रीलंका और आस्ट्रेलिया के मध्य, श्रीलंका के जीतने के आसार अधिक है.

आज नन्हे की अंतिम परीक्षा है, शाम को उन्हें एक सहभोज में जाना है, जून ने कहा है वह उसकी सहायता करेंगे उनके हिस्से का भोजन बनाने में.

 कल का सहभोज अच्छा रहा, आज एक और मित्र के यहाँ जाना है.

आज नन्हे को बुखार हो गया है ओर कल उन्हें सफर पर निकलना है.

सफर का दिन यानि suffer के दिन शुरू हो गये हैं.



Friday, April 26, 2013

टॉम एंड जेरी



नन्हा आज गेट खोलकर ही भागता हुआ बस में चढ़ गया, वह गेट बंद करने गयी तो वही अपनी आदत के अनुसार कल्पनाओं में गुम झटके से बिना यह देखे कि उसका हाथ चींटा युगल पड़ रहा है, बंद कर दिया पर दर्द का एक तीखा अहसास हुआ तो मालूम हुआ कि डंक खा चुकी है. इतना दर्द तो जोंक के काटने पर भी नहीं हुआ था. झट प्याज और नमक लगाया पर दर्द अभी भी है एक घंटे बाद भी. आज व्यायाम भी नही कर पायी अब तक, दलिया भूनना था. सुबह महरी भी देर से आई, दूधवाला भी और फिर स्वीपर भी, कभी-कभी ऐसा होता ही है और इसी चक्कर में उसकी दिनचर्या उल्ट-पलट हो जाती है. आज स्वामी योगानंद की पुस्तक का अध्ययन भी नहीं कर पायी. नन्हे का कल अंतिम इम्तहान है, आज सुबह थोड़ा धीरे-धीरे काम कर रहा था, फुर्तीला जरा कम ही है, तभी बस के लिए दौड़ना पड़ा, वह तो अच्छा है घर के सामने से ही बस गुजरती है. कल शाम को वर्षा के बाद रौशनी में चमकती गीली-भीगी सड़क पर साइकिल चलाना अच्छा लग रहा था. कल रात को फिर पहले देर तक ढेर सारे विचार और फिर स्वप्न...इसका कारण कल रात का गरिष्ठ भोजन भी  हो सकता है, आज से ध्यान रखेगी और गर्म स्नान भी. कल शाम ही ऑस्ट्रेलियन मेडिकल गाइड में गहरी नींद के दस उपाय पढ़े और पहले ही दिन नींद गायब. शायद जगह बदलने के कारण  भी ऐसा हो, कल बहुत दिनों बाद वे गेस्ट रूम में सोये. हाथ का दर्द लिखने में बाधक बन रहा है. भगवद् गीता का कैसेट बज रहा है उसने सोचा उसी में ध्यान लगाना चाहिए.  

  कल शाम को जून उससे नाराज हो गए इस बात पर कि वह रात को भोजन में सिर्फ दो फुल्के ही क्यों खाना चाहती है, और वह उन्हें समझा-समझा कर थक चुकी है कि खाने के विषय में किसी को विवश नहीं करना चाहिए खैर....यह तो उनकी गृहस्थी में कोई नई बात नहीं है, चलता ही रहता है, पर खामख्वाह नन्हा परेशान हो जाता है. ओवर सेंसिटिव है यह लड़का. आज वह साढ़े बारह तक आ जायेगा फिर तीन छुट्टियाँ, उन्होंने कितने काम सोचे हुए हैं जो इन छुट्टियों में करने हैं. ग्यारह बजने वाले हैं पर आज अभी तक खाना नहीं बन पाया है, जून की पसंद की भरवां करेले की सब्जी बनाने में काफी वक्त लग गया है और पता नहीं खान में कैसी लगेगी.

  दो दिन कैसे गुजर गए पता ही नहीं चला, परसों उन्हें मेला देखने जाना था, पर कोलकाता से उन पंजाबी दीदी के पति आ गए, काफी देर बैठे रहे, उनसे बातें करके अच्छा लगा, अगले दिन उन्हें लंच पर बुलाया था, लगभग डेढ़ बजे आये, मन में एक ख्याल आया था कि दीदी के लिए कुछ भेजेगी, पर उस समय कुछ समझ में नहीं आया और कल वे वापस भी चले गए. कल वह अपनी बंगाली सखी के यहाँ गयी, वह आजकल काफी व्यस्त रहने लगी है, ट्यूशन भी देती है, बागवानी तो है ही. उनके यहाँ एक इंग्लिश फिल्म देखी कुछ देर. आज सोमवार है, ‘कृष्ण जन्माष्टमी’ का त्योहार भी, नन्हे का एक मित्र आया है, उसके साथ वह भी कोई कार्टून फिल्म देख रहा है. उसन सोचा अब लिखना बंद कर देना चाहिए, क्योंकि मन एकाग्र नहीं हो पा रहा है, थोड़ी देर ‘योगी कथामृत’ पढ़ेगी, अच्छा लगेगा.  





Thursday, February 21, 2013

सुपरमैन



फिर एक अंतराल, पिछले दिनों कुछ छोटी-बड़ी समस्याएं मन को घेरे रहीं, पर आज भीतर कुछ प्रकट होने को व्याकुल है, परमात्मा का अनुभव हर कोई कभी न कभी, किसी न किसी रूप में करता है, वह सदा ही साथ रहता है और दुःख में भी मार्ग दिखाता है, वही भला करने की प्रेरणा देता है. अप्रैल का महीना भी आज शुरू हो गया, बचपन में भाई-बहन एक दूसरे को कितना मूर्ख बनाते थे आज के दिन, पता नहीं कहाँ खो गए बचपन के वे दिन, अब तो उम्र के आधे पड़ाव आ चुके हैं वे, लेकिन मन तो वही है, अभी भी कितनी रोक लगानी पड़ती है, किस तरह बंधन में बांध कर वे मन को बड़ा करना चाहते हैं, पर मन है कि अंगुली छुड़ा कर फिर वहीं खड़ा हो जाता है, नहीं तो रात भर नींद क्यों नहीं आती, क्यों काँप उठता है हर आहट पर मन. पिछले कई दिनों से रात उसे दुश्मन लगने लगी है, जितना प्रयत्न करती है सोने का उतना ही नींद दूर भागती है. एक अनजाना, नहीं जाना-पहचाना सा डर समा गया  है मन में. अब इतने बड़े होकर डरना तो बचपना ही हुआ न, नन्हा सो जाता है आराम से, जून भी सो जाते हैं, हालांकि वह उन्हें जगा देती है कई बार. बस वह ही सोचती रहती है, घूमती है अनिश्चय के अँधेरे में. उसे भगवद्गीता का पाठ फिर से शुरू कर देना चाहिए. इस डर को मन से बाहर निकालना बेहद जरूरी है. आज उसने बहुत दिनों बाद चेहरे पर दही-बेसन लगाया. नन्हा स्कूल गया है, उसके इम्तहान इसी महीने की छह तारीख से शुरू हो रहे हैं. जून अभी आने वाले हैं.

पिछले दिनों या कहें कई हफ्तों वह लिखने से कतराती रही है, कारण कई हो सकते हैं, लेकिन अब उन कारणों में न जाकर वह अपने आप से वादा करती है कि नियमित लिखने का प्रयत्न करेगी. उसकी दाहिनी बाँह की कोहनी में हल्का-हल्का दर्द सा रहता है. स्वास्थ्य की दृष्टि से इतनी संवेदनशील हो गयी है कि शरीर की छोटी से छोटी समस्या पर ध्यान जाता है, हर हरकत पर. जून भी सोते समय कभी-कभी चौंक जाते हैं यह आठ सालों में अभी महसूस करने लगी है. नन्हे के खर्राटे भी अब ज्यादा साफ सुनाई देते हैं. उसके दिल के पास हल्का सा दर्द पहले भी कभी कभी होता था पर अब डॉक्टर को दिखाने की जरूरत महसूस होती है. पहले जिन बातों के बारे में कभी सोचा भी नहीं था अब वे सच न हो जाएँ ऐसा लगता है. ज्यादा ज्ञान भी खतरनाक सिद्ध हो सकता है. मेडिकल गाइड में पढकर कितनी जानकारी हुई है उनकी, लेकिन वे सब बातें मस्तिष्क में जैसे रिकार्ड हो गयी हैं. आज नन्हे का चौथा इम्तहान है, सोमवार को अंतिम होगा, फिर गर्मी की छुट्टियाँ शुरू हो जाएँगी. छुट्टियों में उसे व्यस्त रखने के लिए ड्राइंग, पेंटिग या संगीत सिखाने के बारे में वे सोच रहे हैं.

कल इतवार था सो डायरी लिखने का सवाल ही नहीं था क्योंकि इस डायरी में इतवार के लिए जगह ही नहीं है, वैसे भी जून घर पर होते हैं, समय नहीं मिलता, शुरू-शरू में वे दोनों रात को एक साथ बैठकर लिखा करते थे, लेकिन वह कई वर्ष पुराणी बात है, समय कितनी तेजी से गुजर जाता है पता ही नहीं चलता. आज कई दिनों बाद उसका मन उत्साह से भरा है, कल घर पर कुछ लोगों को लंच पर बुलाया है. कितना काम करना है, कुशन कवर आदि बदलने हैं. कई बार वह सोचती है कि घर को खूबसूरत बनाने के लिए और क्या-क्या करना चाहिए. सबसे पहले तो सारे फर्नीचर पर पेंट करवाना है, फ्रिज भी पुराना लगता है. दीवारों पर लगाने के लिए कुछ अच्छी तस्वीरें चाहिए और साइड रैक्स, टीवी स्टैंड आदि के लिए अच्छे कवर. कितना अच्छा लगता है जब घर में इस तरह का कोई आयोजन हो, शाम को बाजार भी करना है. एक मित्र परिवार से मिलने भी जाना है. सोच रही थी लाइब्रेरी भी जायेगी पर इतना समय नहीं होगा. अगले दो दिन छुट्टी है, पत्र तभी लिखेगी.

सोनू ने आज फिर पेन्सिल से अपने बड़े बड़े अक्षरों में कुछ लिख दिया है- “आज मैं बहुत दिनों बाद डायरी लिख रहा हूँ, क्योंकि मेरे exam चल रहे थे, अभी-अभी मैंने दूध पीया और रोते-रोते orange creamy wafers खाए, फिर माँ को डायरी दिखाई और फिर किसी तरह weafers खाए. अब मैं सुपरमैन बनूंगा. नमस्कार. उसके बाद उसने चार आँसू बनाये हैं और लिखा है कल ऊं ऊं ऊं ...” और फिर अपना नाम

Thursday, October 25, 2012

सिविल डिफेंस- एक जरूरत



आज भी सुबह, दोपहर सब बिता कर समय के तीन बज गए हैं पर उसका पढ़ाई का क्रम  शुरू भी नहीं हो पाया है. जून का पत्र आज भी नहीं आया, अब कल आयंगे दो-तीन पत्र एक साथ..नन्हा अभी तक पूरी तरह ठीक नहीं हो पाया है, बात-बात पर रोता है और सुबह नाश्ता भी ठीक से नहीं किया उसने. अभी उठेगा तो खाना खायेगा. माँ मासी की बेटी के घर गयी हैं जिनकी डेथ हो गयी थी पर घर तो उन्हीं का कहायेगा न. उसने सोचा अब खत लिखना कुछ कम करके अपना ध्यान आने वाले इम्तहान की तरफ लगाना चाहिए. कॉलेज खुलते हैं बंद हो जाते हैं, पढ़ाई कुछ होती नहीं. पर इम्तहान में सिलेबस तो पूरा आयेगा न. पढ़ने को कितना कुछ है और लिखने को भी..आज से ही जुट जायेगी, बहुत आराम हो गया. प्रेक्टिकल का भी काम कुछ शेष है कम से कम वही पूरा कर ले सबसे पहले.

तीसरी छुट्टी भी बीतने को है, मजे-मजे से दिन बीत रहे हैं आज भी पढ़ाई निल, जून को ठीक से पढ़ने के लिए कहती है और खुद कुछ नहीं सोचती. आज उसने उसके लिए तीन रुमाल लिए, उस दिन अपने लिए पाँच लिए थे. जिनमें से चार शेष हैं. बहुत पैसे खर्च हो रहे हैं, हिसाब कभी लिखा नहीं, अब थोड़ा ध्यान रखेगी. अभी फ़ीस भी जमा करनी होगी एक बार शायद जनवरी में ही फार्म भरने से पूर्व. सोनू आज फिर ठीक से खा-पी नहीं रहा है पता नहीं उसे क्या हुआ है, उसे घाट तक घुमाने ले गयी थी, नाव पर बैठने की जिद कर रहा था, जून का खत आया है, उसने एक हाउस प्लान भी भेजा है तीन कमरों का, मकान बनवाना है यह बात उसके जहन में है, कल उनके विवाह की वर्षगाँठ है, एक अच्छा सा खत लिखने का वादा किया है नूना ने.

‘किसी विरोधी का सामना करना पड़े तो उसे प्रेम से जीतिए’
आज उसने बस यह लिखा है.

कल का दिन इसी तरह छाँव-धूप में बीत गया. कभी उदासी तो कभी खुशी...जून को, माँ-पिता को व दीदी को पत्र लिखे. आज उसे स्कूल जाना है, कहीं ऐसा न हो कि वह तीन दिन अनुपस्थित रही हो, अब जो भी हो वहीं जाकर मालूम होगा. उसकी सहपाठिनी सीमा भी नहीं ही गयी होगी वरना आती जरूर. उन्हें यात्रा पर एक वृतांत भी लिखना है, सारनाथ जाने पर ही लिखेगी. नन्हे को लिखने को कहो तो एक ही लाइन लिख कर थक जाता है.

न कल और न आज ही उसका खत आया, सो 
उदासी के बादल छंटे नहीं हैं, आज दिन भर अजीब व्यस्तता में बीते. कालेज में सिर्फ दो पीरियड हुए, शेष समय यूँ ही बिताया, ‘सिविल डिफेन्स’ का कार्यक्रम देखते हुए. कार्यक्रम अच्छा था पर मन में अभी भी एक प्रश्न है कि उसका सिविल डिफेंस का पेपर अच्छा था फिर..? शायद कल सर्टिफिकेट मिल जाये. आज चार लेसन प्लान बनाने आवश्यक थे, दो आज के व दो कल के लिए पर तीन ही बन पाए हैं, उसने सोचा कल कॉलेज देर से जायेगी, तीसरा पीरियड है और छठा. कल जून का पत्र आयेगा...उम्मीद पर दुनिया टिकी है. कल सुबह जल्दी उठकर सबसे पहले उसे पत्र लिखेगी फिर लेसन प्लान.

आज बहुत दिनों के बाद पत्र आया, पर जैसा उसने चाहा था वैसा नहीं...नहीं तो, बिलकुल वैसा ही है. अंतिम पंक्ति में उसका यह लिखना  truth is only that juun loves nuunaa  सारी बातें कह गया. इतने दिनों से मन पर जो बोझ सा रखा था वह कुछ तो हटा है पर पूरी तरह नहीं...पिताजी का पत्र आया है उन्हें पार्सल मिल गया है.